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बकैत कुमार का प्राइम टाइम लीक: समुदाय विशेष से जबरन दीपावली मनवाने की साजिश की जा रही है

नमस्कार, मैं बकैत कुमार

नौ बजे, एक आदमी आता है, कहता है फलाने दिन नौ बजे बत्ती जलाओ, टॉर्च जलाओ, फ्लैश लाइट जलाओ, प्रकाश करो… ठीक है, जिसने चुना है वो जलाएँ, उससे दिक्कत नहीं है। जिसने वोट दिया अपना टॉर्च जलाए, माँग कर जलाए लेकिन हमारे लिबरल और सेकुलर लोगों का क्या? हमारी तो अभी से ही सुलगने लगी है, और पाँच तारीख तक तो हवा का बहाव सही रहा तो आग भी जल जाएगी।

क्या ये हमारे जैसे लोगों पर हमला नहीं है? हमारा जब मन नहीं है तो भी हमें दूसरे तरीके से मजबूर क्यों किया जा रहा है? दूसरी बात, हम तो टॉर्च नहीं जलाएँगे, हमारा तो शरीर का स्थान विशेष जल जाएगा, उसके लिए बरनॉल कहाँ से लाएँगे? ये सही है कि दो दिन पहले ही बता दिया ताकि हम लिबरलों और कामपंथियों, सॉरी वामपंथियों की सुलगनी शुरु हो जाए और नियत समय पर भक्क से आग लग जाए!

बाकी समय ये प्रधानमंत्री विज्ञान का प्रयोग नहीं करेगा, लेकिन विरोधियों की सुलगाने की पूरी प्लानिंग की जा रही है। यहाँ पूरा अग्निविज्ञान की सहायता ली गई है और लॉकडाउन में बरनॉल तो छोड़िए कच्चे आलू पीस कर लगाने के लिए भी घर में बीवी कूच देगी, ये आखिर हो क्या रहा है? क्या विरोधियों को ऐसे घाव देना चाहती है मोदी सरकार? आम आदमी को चुनना पड़ रहा है कि आलू को सब्जी में डाले या जली हुई जगह पर लगा कर राहत पाए।

दूसरी बात यह भी है कि क्या यह अल्पसंख्यकों का उपहास नहीं है? पिछली बार गरीब की थाली बजवा कर पिचका दी थी और कलावती अब टेढ़ी थाली में खाना खाती है, ग्लास फूट गया है, सेलो टेप मार कर पानी पीती है… इस बार कलावती से मन नहीं भरा तो नाजरा बानो पर निशाना साधा गया है कि बेचारी अनभिज्ञता में दिया जला लेगी और शौहर पूछेगा कि जबरन दीवाली क्यों मनाई जा रही है!

हमने ज़ोया से इस संदर्भ में बात की तो उन्होंने कहा, “कितना तेल बर्बाद होगा ये भी तो सोचिए। इतने तेल में तो बकरीद पर लाखों बकरे पक जाते। यही है मोदी जी का सबका साथ सबका विकास? मनमोहन सिंह जी आज होते तो कहते तेल पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है। सऊदी वाला क्रूड ऑयल नहीं, उस पर तो है ही पहला हक काफिरों।”

ताकि कोई ये न कहे कि हमने फर्जी बयान छापा है!

क्या जवाब देगी ज़ोया बेगम? सलमा क्या कहेगी पति से? क्या अब इस निजाम में समुदाय विशेष जबरन हिन्दुओं के पर्व मनाएगा? और अगर नहीं मनाएगा तो बगल का हिन्दू उसे देशद्रोही घोषित कर देगा! आप सोचिए कि समाज को कहाँ ले जाया जा रहा है! एकजुट होनी की यह मुहिम भले ही मोदी और उनके आईटी सेल वाले, अजीत भारती टाइप के भक्त जीत लें, लेकिन एक समाज के तौर पर हम हार रहे हैं।

हमने बेजान मुस्तफा से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि उनकी समस्या ये है कि रात में गलती से भी टॉर्च का फोकस पड़ोसन पर गया तो घर में तीसरी बार महाभारत चालू हो जानी है। आप चाहें तो हँस सकते हैं इस बात पर, लेकिन दिल में पूछिए कि पत्नी बगल में हो, और हड़बड़ी में टॉर्च की रोशनी पड़ोसन पर पड़े और उसी वक्त वो मुस्कुरा दे…

चिंटुआ के पापा की ऐसी धुलाई होगी कि मोदी जी के अगले सामूहिक कार्यक्रम के लिए वो खड़े नहीं हो पाएँगे। खैर, मैं तो लदीदा और लंकेश जैसे बच्चों के बारे में सोच रहा हूँ कि इसी कार्यक्रम के दौरान वो अपनी प्रेमिकाओं और इश्कबाज लौंडों पर बार-बार लाइट मार कर मात-पिता को एक इशारा तो कर ही दें कि देखो पापा, मेला बाबू थोली देल में उधल वाले मतान में थाना थाएगा… अरे हम भी प्रेम किए थे भाई… हें हें हें…

साथ ही, संभव हो तो लड़की से ‘कौन जात हो’ पूछ कर टॉर्च जलाएँ, एक विजातीय प्रेम क्रांति है। ऐसे समय में अगर जलानी ही है तो क्रांति की लौ जलाएँ। घर में क्रांति कर दीजिए। घरवालों का भी टाइम पास हो जाएगा। पिटाई भी हो सकती है, लेकिन क्रांतिकारी तो गोली भी खाते हैं। चलिए इसी बहाने दो-चार प्रेम की बातें भी निकल आएँगी, वरना आपातकाल में क्या प्रेम कर पाएँगे हम!

दिया जला लीजिए, उसी से सब सुधर जाएगा। भक्त और आईटी सेल वाले फैलाएँगे कि दिया जलाने से हवा में वायरस मर जाते हैं। वो व्हाट्सएप्प पर फैला रहे हैं कि चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में जा रहा है, और उस दिन अंधेरा कर देने से शरीर पर और घरों में चाँद की रोशनी जाएगी जिससे शरीर में कोरोना के लिए एंटीबॉडी बनने लगेंगे। जबकि किसी को ये पता नहीं है कि ये मैसेज मैंने साढ़े नौ बजे लिखा और रजदिप्पा को फॉरवर्ड कर दिया।

रजदिप्पा भेजलस सगरिकिया के, सगरिकिया क फोन से ई चलल आ घुस गइल कौनो भक्तन के फोन में, ओकर बाद से जे होइल, से त सबके पता होइए गईल बा… आईटी सेल वालों को उल्लू बनाना इतना आसान है। ऐसा मैंने कई बार किया है, और जब वो वायरल हो जाता है तो शाम में प्राइम टाइम में बताता हूँ कि ये आईटी सेल वालों की करतूत है।

तीसरी बात, जिस पर सघन चर्चा आवश्यक है वो यह है कि नौ बजे, नौ मिनट ही क्यों? इस पर शशि थरूर ने भी लिखा है कि सब कुछ नौ-नौ हो रहा है। क्या हमने वाकई सब-कुछ राम भरोसे छोड़ दिया है? नहीं, आप सोचिए कि शशि थरूर पढ़े-लिखे आदमी हैं, पुलिस आज तक पकड़ नहीं पाई है उन्हें। काफी किताबें उन्होंने पढ़ी हैं। उन्होंने लिखा है कि नौ की संख्या पर सब छोड़ दिया गया है। लेकिन एक चीज जो मोदी जी नौ पर नहीं ला पा रहे वो है भारत का ग्रोथ रेट। जीडीपी का पता कर लीजिए।

शशि थरूर के वैज्ञानिक अभिकलन का एक नमूना

क्या मोदी जी अल्पसंख्यकों को विश्वास में लेने के लिए नौ मिनट तक नौ आयतें पढ़ने नहीं बोल सकते थे? इससे अच्छी बात क्या होती कि हिन्दू लोग कुछ जान जाते शांतिप्रिय मजहब इस्लाम के बारे में। क्यों नहीं बोला उन्होंने कि देश के हर मस्जिद से एक साथ अजान दी जाए? ठीक है कि देश के सारे मस्जिद वैसे भी दिन में पाँच बार एक साथ ही अजान देते हैं, लेकिन तबलीगी जमात के कारण अल्पसंख्यकों को जिस तरह से निशाना बनाया जा रहा है, उस समय उनका ये कह देना काफी असर कर सकता था।

लेकिन हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान का नायक भला अल्पसंख्यकों का क्यों सोचेगा। वो तो सुप्रीम कोर्ट पर ही हमला कर देगा। आपको क्या लगता है कि थाली बजवाना और अब प्रकाश की बात करना, दिया-मोमबत्ती जलाना, ऐसे ही है? जी नहीं, ये बदला है सुप्रीम कोर्ट द्वारा दीवाली पर रोक लगवाने के कारण। दीवाली में रोशनी होती है, और आवाज होती है पटाखों से। यही दो काम मोदी दीवाली के दिन नहीं, किसी और दिन करवा रहे हैं।

आपको ये सब नहीं दिखेगा लेकिन एक सूअर को टट्टी खोजने में मशक्कत नहीं करनी होती। मुझे आसानी से दिख जाती है। हें हें हें…

आप कहेंगे देश को एकता के सूत्र में पिरोने का काम है, वो मैं जानता हूँ लेकिन मैं एक पत्रकार हूँ। मेरे लिए पत्रकार की परिभाषा है कि हमेशा सत्ता के विरोध में रहना। खास कर तब जब सत्ता मेरे वोट वाले की नहीं है तो उसकी हर अच्छाई को शब्दों के प्रयोग से राष्ट्र के लिए विनाशकारी बता देना।

सिलिंडर दे, तो बोलो कि उससे विस्फोट हो सकता है और तीन-चार खबरें ले आओ… बिजली दे तो बोलो कि करंट लग सकता है, हर साल बिजली के झटके से इतने लोग मरते हैं… सड़क बनवाए तो बोलो कि आदमी जल्दी पहुँच कर बचे समय में शैतानी योजनाएँ बनाएगा दिमाग में… पुल बनवाए तो बोलो कि नाव चलाने वालों का रोजगार चला गया… स्कूल खोले तो बोलो कि सबको संघ की बातें सिखाने की योजना है…

असली पत्रकार का कार्य यही है। हम क्यों सरकार की बड़ाई करें? वो तो सरकार कर ही रही है। हमें तो समाज में नकारात्मकता भरनी है कि पाँच साल में लोग उब जाएँ। लेकिन उसमें बात यह आड़े आ रही है कि मेरा चैनल कुछ लोग बंद करवाते हैं, लोगों के घर तक पहुँच नहीं रहा और मोदी दोबारा जीत गया। लेकिन मैंने क्या बकैती करनी छोड़ी? जी नहीं, अब तो भोजपुरी में भी कर रहा हूँ।

नोट: न्यूजलौंडी के अभिनंदन को यह बताया जाता है कि ऑपइंडिया ने इस स्क्रिप्ट को ले कर किसी भी बकैत कुमार से बातचीत नहीं की है।

लॉकडाउन के बीच कन्नौज में छत पर नमाज पढ़ रहे लोगों को पुलिस ने रोका तो कुल्हाड़ी से हमला, दो पुलिसकर्मियों की हालत नाजुक

लॉकडाउन का उल्लंघन कर सामूहिक रूप से एक मकान की छत नमाज पढ़ने की कोशिश करने और रोके जाने पर पुलिस को निशाना बनाने की एक और घटना सामने आई है। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के कन्नौज का है। यहॉं की एक मकान की छत पर जुमे की नमाज अदा करने के लिए जुटान हो रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुॅंची और उन्हें सोशल डिस्टैन्सिंग के लिए समझाने की कोशिश की। लेकिन वहाँ जुटे लोग पुलिस की एक नहीं सुनी और उल्टा पुलिस पर ही हमला कर दिया। जमकर पत्थरबाजी हुई। हमले में कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। दो पुलिसकर्मियों की हालत नाजुक बताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिसकर्मी किसी तरह जान बचाकर निकले। बाद में जब भारी फोर्स के साथ आला अधिकारी मौके पर पहुॅंचे तब तक हमलावर फरार हो चुके थे।

पुलिस के आला अधिकारियों ने कहा है कि लॉकडाउन तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त से कार्रवाई की जाएगी। हमलावरों की पहचान की जा रही है। उन्हें जल्द गिरफ्तार करने का दावा किया गया है। ड्रोन की मदद से छतों की निगरानी की जा रही है। घायल पुलिसकर्मियों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण पर काबू पाने के लिए पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। किसी तरह के आयोजनों पर पाबंदी है। धार्मिक स्थल भी बंद हैं। असल में सोशल डिस्टेंसिंग इस संक्रमण से निपटने का सबसे कारगर उपाय है। बावजूद कई शहरों से सामूहिक नमाज अदा करने की घटनाएँ सामने आ चुकी है।

यूपी के ही अलीगढ़ की एक मस्जिद में भी गुरुवार की रात मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए लोग जुटे थे। सूचना मिलने पर पुलिस पहुॅंची तो उनलोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस मामले में अलीगढ़ पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। उससे पहले बुधवार शाम को मुजफ्फरनगर में लॉकडाउन का पालन कराने पहुँची पुलिस की टीम पर भी हमला हुआ था। सहारनपुर के गाँव जमालपुर में भी नमाज पढ़ने को लेकर मस्जिद के बाहर इकट्ठा भीड़ को हटाने और छह लोगों को हिरासत में लेने पर लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया था। लाठी-डंडों का प्रयोग कर पकड़े गए लोगों को छुड़वा लिया था।

बिहार के मधुबनी की एक मस्जिद में सामूहिक नमाज रुकवाने पहुॅंची पुलिस को समुदाय विशेष की भीड़ ने एक किमी तक खदेड़ दिया था। जमकर पत्थरबाजी की थी। फायरिंग की और पुलिस की जीप को तलाब में पलट दिया था। गुजरात के अहमदाबाद स्थित गोमतीपुर में भी भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी की थी। गोमतीपुर में पुलिस उन लोगों की तलाश में गई थी, जिन्होंने तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

यूपी में चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन खोलने की बनाएँ योजना, असहयोग करने वालों के खिलाफ लें सख्त एक्शन: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गरीबों के लिए खजाना खोला है। सीएम योगी ने शुक्रवार को 87 लाख वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांगजनों के बैंक खातों में 871 करोड़ रुपए पेंशन ट्रांसफर किए। सीएम योगी ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास से लोगों के बैंक खातों में पैसे भेजे। इस दौरान सीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लाभर्थियों से संवाद किया। सीएम ने कहा कि किसी को कोई परेशानी हो तो अधिकारियों को बताएँ।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोरोना वायरस से निपटने की तैयारियों पर चर्चा करने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के डीएम-एसपी संग सरकारी आवास पर बैठक की। इस दौरान सीएम ने लॉकडाउन खुलने के बाद की तैयारियों पर मंथन की। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि 15 अप्रैल को लॉकडाउन खोलने की कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसे प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी कर लें।

सीएम ने कहा कि राज्य की तर्ज पर जिलों में भी टीम-11 गठित करें। सरकार कोरोना केयर कोष बनाने जा रही है। इसका उपयोग इलाज से जुड़ी जरूरतों में होगा। सीएम ने प्रदेश के हर चिन्हित अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों की निगरानी और इसकी जाँच की व्यवस्था को फुलप्रूफ रखने के निर्देश भी दिए हैं।

सीएम योगी ने कहा कि लॉकडाउन खुलने के साथ ही जो जहाँ फँसा होगा, वहाँ से आने की कोशिश करेगा और ऐसे में उनसे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। इसलिए इसके लिए अभी से प्लानिंग करनी शुरू करें कि स्कूल, कॉलेज, अलग-अलग तरह के बाजार और मॉल कब और कैसे खुलेंगे। इस समय के हालातों से कैसे निपटा जाएगा, इस पर विचार करें।

योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से चर्चा के दौरान यह कहा है कि बाहरी राज्यों के जो भी लोग यूपी में रह रहे हैं उनका पूरा ध्यान रखा जाए। इसके अलावा सभी नागरिकों को उनकी दैनिक जरूरतों का हर सामान मुहैया कराया जाए। हर जरूरतमंद तक समय से भोजन पहुँचाना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए स्वयंसेवी संस्थाओं की भी मदद लें। संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों से समन्वय कर आँगनबाड़ी का पौष्टिक आहार भी घर-घर तक पहुँचाएँ। हर जिले में कम्युनिटी किचन चलाएँ। इसमें स्वयंसेवी संस्थाओं सहित अन्य जो लोग भी मदद देना चाहें उनकी मदद लें। हर कोई भोजन बाँटने न निकले इसके लिए कुछ कलेक्शन सेंटर बनाएँ। वहाँ भोजन इकट्ठा किया जाए और फिर बाँटने के लिए ले जाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें दो स्तर पर तैयारी करनी होगी। मौजूदा हालात और भविष्य के मद्देनजर रणनीति तैयार करें। भविष्य की तैयारियों के मद्देनजर एनएसएस, एनसीसी, स्काउट्स और युवक मंगल दल में से वालंटियर तैयार करें। इनको कोराना के संक्रमण को रोकने और संक्रमण के दौरान क्या करना है, इस बाबत प्रशिक्षण दें। भोजन और जरूरी सामानों की आपूर्ति के अलावा ये संक्रमण बढ़ने पर भी हमारे लिए उपयोगी होंगे।

इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई आदेश दिए। जिसमें इलाज के लिए डॉक्टरों की सूची बनाने से लेकर कोरोना फंड तैयार करने, खादी के मास्क बनाने समेत असहयोग करने वालों के खिलाफ सख्ती से पेश आने का आदेश शामिल है।

निजी क्षेत्र के डॉक्टरों की लिस्ट करें तैयार

सीएम ने सभी अधिकारियों से संबंधित क्षेत्रों में एनेस्थेसिया, फीजिशियन, बच्चों और महिलाओं के डॉक्टर्स की लिस्ट बनाने के लिए और उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए कहा है। सीएम ने ऐसा करने के लिए इसलिए कहा है ताकि आगे जरूरत पड़ने पर इनकी मदद ली जा सके। इसी तरह के प्रशिक्षण की जरूरत इनके पैरामेडिकल स्टाफ और आयुष विभाग के चिकित्सकों और उनके स्टॉफ को भी ट्रेनिंग देने की बात कही गई है। 

1000 करोड़ का तैयार करेंगे कोरोना केयर फंड

सीएम ने कहा कि सरकार 1000 करोड़ रुपए का कोरोना केयर फंड तैयार करेगी। इस फंड से टेस्टिंग लैब की सुविधाएँ बढ़ाने के साथ इलाज में जरूरी और उपकरणों मसलन वेंटीलेटर, मास्क, सेनिटाइजर, पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट) आदि की व्यवस्था की जाएगी। 

तैयार कराएँ खादी के मास्क

सीएम ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग विभाग यह सुनिश्चित कराए कि जरूरी सामानों का उत्पादन प्रदेश में ही हो। इससे वे सस्ते तो होंगे ही उनकी उपलब्धता भी बढ़ेगी। खादी के कपड़े से ऐसा मास्क तैयार कराएँ, जिसका दोबारा उपयोग किया जा सके। इसके लिए महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप की मदद लें। ऐसा करने से खादी का प्रचार भी होगा, स्थानीय स्तर पर महिलाओं को रोजगार मिलेगा और मास्क सस्ता होने पर लोग इसे अपनी आदत का हिस्सा बना सकेंगे।

असहयोग करने वालों से सख्ती के आदेश

सीएम ने कहा कि लॉकडाउन में सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करने वालों को सख्त संदेश दें। इंदौर जैसी घटना यूपी में कहीं भी कतई नहीं होनी चाहिए। ऐसे लोगों पर डिजास्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करें। जो भी लोग सरकार से असहयोग करें उनको थोड़ी-थोड़ी संख्या में अलग-अलग कड़ी निगरानी में रखें।

वहीं सीएम ने ये भी कहा कि लॉकडाउन में जो लोग बेहतर काम कर रहे हैं उनकी सूची भी बनाएँ। हालात सामान्य होने पर सरकार ऐसे लोगों को सम्मानित करेगी। कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती से अंकुश लगाएँ। अगर जरूरी सामान थोक बाजार से ही ऊँचे दाम पर मिल रहे हों तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई करें।

व्यंग्य: मुसलमानों से दिवाली मनवाने की साजिश कर रहे मोदी: बकैत कुमार | Ravish Kumar Prime Time

रवीश बकैत कुमार की प्राइम टाइम स्क्रिप्ट लीक हो गई है, मोदी के 5 अप्रैल वाले प्रोग्राम पर क्या सब कहा! रवीश कुमार ने कहा कि मुसलमानों से दिवाली मनवाने की साजिश कर रहे हैं मोदी। 9 बजे टीवी पर एक आदमी आता है और बत्ती, फ्लैशलाइट, दीया, टॉर्च आदि जलाने के लिए कहता है। ये लिबरल और सेकुलर लोगों पर हमला नहीं है?

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UP: तबलीगी जमात के 34 सदस्यों पर FIR, 211 विदेशियों के पासपोर्ट किए गए जब्त

कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण के बीच नियमों और निर्देशों का उल्लंघन कर मस्जिदों में छिपे विदेशियों के ख़िलाफ़ योगी सरकार सख्त रुख अख्तियार कर रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक, यूपी के विभिन्न मस्जिदों में छिपे 287 विदेशियों में से 211 के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए हैं। साथ ही इनके ख़िलाफ़ 34 मुकदमे दर्ज हुए है। अन्य जमातियों के ख़िलाफ़ भी बड़ी संख्या में महामारी अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। केवल मेरठ और आसपास के जिलों की बात करें तो 450 लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए हैं। बता दें कि तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने वाले 2058 लोग बिजनौर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और बागपत से पकड़े गए हैं।

राज्य के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया है कि विदेश से आए लोगों के वीजा की निरंतर समीक्षा हो रही है। तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए अन्य लोगों को भी चिह्नित किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों को खुद आगे आना चाहिए। साथ ही आम लोगों से भी इनके बारे पुलिस-प्रशासन को सूचना देने की अपील की है।

प्रयागराज में थाइलैंड के 9 नागरिकों समेत 10 लोगों के खिलाफ शहर के करेली थाने में गुरुवार देर रात रिपोर्ट दर्ज की गई है। शरण देने के आरोप में मस्जिद के मौलाना के खिलाफ भी मुकदमा दायर किया गया है। एसपी सिटी बृजेश श्रीवास्तव का कहना है कि इन लोगों पासपोर्ट भी जब्त किया जाएगा।

उल्लेखनी है कि तबलीगी जमात के सदस्यों द्वारा अस्पताल में मनमानी करने के कई मामले सामने आए हैं। लेकिन, गाजियाबाद के एमएमजी हॉस्पिटल में तो इन्होंने हद ही कर दी। नर्स के सामने नंगा होने और बीड़ी-सिगरेट की डिमांड करने को लेकर जमात के 6 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इन्हें एमएमजी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड से राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में भी शिफ्ट कर दिया गया है। अब इनके खिलाफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सख्त रुख अपनाया है।

नर्सों के साथ दुर्व्यवहार पर योगी आदित्यनाथ ने कहा, “ये ना कानून को मानेंगे, ना व्यवस्था को मानेंगे। ये मानवता के दुश्मन हैं। इन्होंने महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ जो किया है वो जघन्य अपराध है। इन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया जा रहा है। हम इन्हें छोड़ेंगे नहीं।”

IIT-AIIMS के पूर्व छात्रों ने तैयार किया Covid-19 वायरस को केमिकल की जगह पानी की बूँदों को आवेशित कर निष्क्रिय करने वाला डिवाइस

कोरोना वायरस (COVID-19) से लड़ाई में पूरा देश एकजुट होकर अपने हिस्से का योगदान कर रहा है। ऐसे में स्टैन्फोर्ड यूनिवर्सिटी, आईआईटी और एम्स के कुछ पूर्व शोधकर्ताओं ने ‘एयरलेंस माइनस कोरोना’ (Airlens Minus Corona) नाम से एक डिवाइस तैयार किया है, जिसमें कोरोना वायरस के संक्रमण पर व्यापक रोक लगाने में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

स्टैन्फोर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व शोधकर्ता डॉक्टर शशि रंजन ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि, उन्होंने और आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र देबायन शाह की स्टार्टअप कंपनी PerSapien ने एक ऐसा उपकरण विकसित किया है, जो रिमोट कंट्रोल से संचालित होता है। इसमें एक कैमरा भी जुड़ा है जो चालक की सीट से दूर तक डिजिटल स्क्रीन पर चित्र देता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल जरूरत यह है कि देशभर में और भी इंजीनियर्स और शोधकर्ता ऐसे उपकरण तैयार करें जो कोरोना वायरस के संक्रमण पर रोक लगा सकें।

डॉक्टर शशि रंजन ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें सेनिटाइज़र्स के रूप में कैमिकल की जगह पानी के ही सूक्ष्म बूँदों को ही चार्ज (आवेशित) कर के वायरस को नष्ट किया जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वर्तमान में देश में केमिकल की बढ़ी हुई खपत के कारण कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए केमिकल पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी।

PerSapien ने कोरोना वायरस के खिलाफ तैयार किया गया यह डिवाइस सड़कों पर चलते हुए शहर को संक्रमण मुक्त करने के साथ ही अस्पताल, स्कूल, बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन, शॉपिंग मॉल और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर आवेशित बूंदों के जरिए सतह को संक्रमण मुक्त करता है। जिससे कि कोरोना वायरस के प्रसार पर रोक लगती है।

शशि रंजन के अनुसार, “कोरोना वायरस को मारने के लिए पानी की बूँदों को चार्ज किया जाता है, जो कि इस काम का सबसे बड़ा चैलेंज भी है।” ऐसे आयनित पानी की बूँदे प्रोटीन के ऑक्सीकरण के जरिए गैर हानिकारक अणु बनने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि ऑक्सीकरण सबसे शक्तिशाली रोगाणुरोधी उपायों में से एक है और यह तकनीक पूरे शहर को संक्रमण मुक्त कर सकती है।

वर्तमान में जिस तेजी से देशभर में इस वायरस के संक्रमण को आगे बढ़ने और फैलने से रोकने की आवश्यकता है, उसमें यह बहुत मददगार साबित हो सकता है। बहुत सूक्ष्म नम बूँदों के छिड़काव से कोरोना वायरस को आसानी से निष्‍क्र‍िय किया जा सकता है।

डॉक्टर शशि रंजन के अनुसार – “यह वाटर बेस्ड तकनीक है, जिसमें पानी और बिजली इस्तेमाल हो रही हैं। हम पानी की बूँदों को वोल्टेज के जरिए चार्ज करते हैं, हाइड्रॉक्सिल OH- जैसे जिससे इसमें आयन्स (अणु) जेनरेट हो जाते हैं। ये आयन्स (अणु) वायरस की बाह्य त्वचा, जो कि प्रोटीन और वसा से बनी होती है उसका ऑक्सीकरण कर के वायरस को निष्क्रीय करते हैं।”

“इसमें पानी की बूँदों को सूक्ष्म बूंदों में बदलने पर हमने काम किया और फिर इन बूँदों को आवेशित करना लक्ष्य था। जहाँ भी इनका छिड़काव किया जाएगा, उन जगहों पर कोरोना वायरस के प्रसार को रोका जा सकेगा। जिस तकनीक को इस्तेमाल किया जा रहा है वह केमिकल बेस्ड है, जिसकी कि अधिक इस्तेमाल होने के कारण समय के साथ आपूर्ति कम हो सकती है।”

उन्होंने बताया कि वह इस पर पहले से भी काम कर रहे थे, लेकिन कोरोना वायरस की महामारी के कारण उन्होंने इस पर तत्परता से अपना योगदान देने का निर्णय लिया। यदि इस तकनीक को पूरे भारत में इस्तेमाल करने के लिए बड़े स्तर पर तैयार करना हो तो इस आपूर्ति को वह महज एक से दो सप्ताह के भीतर पूरी करने में सक्षम हैं।

इस उपकरण के बारे में बात करते हुए डॉक्टर शशि रंजन ने कहा कि हमारा प्रमुख प्रयास इस आपातकाल में देश की मदद करना है। कोलकाता में एक मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स के साथ मिलकर इसे तैयार कर रहे हैं।

डॉक्टर शशि रंजन PerSapien स्टार्ट अप के को-फाउंडर हैं। इससे पहले वो एम्स अस्पताल में रिसर्च प्रोजेक्ट से जुड़े थे, साथ ही स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में भी कार्यरत थे। वर्तमान में इस टीम में आईआईटी से पास-आउट छात्र काम कर रहे हैं। यह उपकरण तैयार करने से पहले भी डॉक्टर शशि रंजन वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों पर कार्य कर रहे थे। उन्होंने बताया कि यह उपकरण अभी तक बिक्री के रूप से तैयार नहीं किया गया है और पहला मकसद सिर्फ कोरोना वायरस के तेजी से हो रहे संक्रमण को रोकने के लिए कुछ आधुनिक और प्रभावी यंत्र तैयार करना ही था।

कार्डिनल ने की पादरियों से अपील, कोरोना से मरने वाले ईसाइयों को दफ़नाएँ नहीं जलाएँ

देश में कोरोना के मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच ईसाई कार्डिनल ने मुंबई के सभी चर्च पादरियों से अपील की है कि वह कोरोना से मरने वाले लोगों के शवों को दफनाएँ नहीं बल्कि उनकी डेडबॉडी का अंतिम संस्कार कराएँ। इसके साथ ही पादरी ने ईसाईयों से लॉकडाउन के बीच सरकार के नियमों का पालन और कोरोना से बचने के लिए कुछ उपाय भी बताए हैं। हालाँकि, इस अपील को पिछले दिनों बीएमसी द्वारा जारी की गई गाईडलाइन से जोड़कर देखा जा रहा है।

दरअसल, कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस ने एक वीडियो जारी कर मुंबई के पादरियों से ईसाइयों के शवों को ना दफनाने की अपील करते हुए कहा कि वो सभी बीएमसी के निर्देशों का पालन करें और ईसाइयों के शवों को जलवाएँ। ओसवाल्ड ने इसके अलावा वीडियो के माध्यम से ही लोगों को घर से बाहर न निकलने, बार-बार हाथ साफ करने और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी कई चीजों के बारे में भी जागरूक किया है।

इससे पहले कोरोना वायरस से मरने वाले रोगियों के शवों को जलाने के लिए मुंबई में बीएमसी ने सोमवार को एक सर्कुलर जारी किया था। सर्कुलर में कहा गया था कि कोरोना संक्रमण से मरने वाले रोगियों के शवों का बिना धर्म की परवाह किए अंतिम संस्कार किया जाए यानी उन्हें जलाया जाए। उन्हें दफनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। शव को दफनाने से दूसरे लोगों में संक्रमण फैसले की संभावना ज्यादा होती है। संक्रमण को रोकने के लिए शव को जलाना ज्यादा बेहतर होगा।

हालाँकि, सरकार की ओर से दबाव पड़ने के बाद इस आदेश को एक घंटे के अंदर ही वापस ले लिया गया था। वहीं इसके बाद तमाम मुस्लिम उलेमाओं ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि इस्लाम में शव जलाने की इजाजत नहीं होती। ऐसे में सरकार को दूसरे विकल्पों के बारे में सोचना चाहिए और उसी के मुताबिक फिर से गाइडलाइन जारी किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि WHO की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना की बीमारी से मरे व्यक्ति का शव जलाने से कोरोना के फैलने का खतरा नहीं रहता है। एक जानकारी के मुताबिक जब चिता पर या फिर इलेक्ट्रिक मशीन में शव को जलाया जाता है तो उसका तापमान करीब 700- 1000 डिग्री सेल्सियस तक होता है। इससे वायरस मर जाता है और उसके फैलने का खतरा भी नहीं रहता।

लेकिन, अगर कोरोना की वजह से मरे शख्स की डेडबॉडी को दफनाया जाता है तो वायरस के फैलने का खतरा बना रहता है। WHO की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ऐसे शव को जमीन में दफनाया जाए तो ध्यान रखा जाए कि दफनाने की जगह के 30 मीटर के दायरे में कोई भी पानी का सोर्स ना हो।

हैदराबाद के हॉस्पिटल में पुलिस तैनात: डॉक्टर पर जमाती ने किया था हमला, सामूहिक रूप से हुई थी नमाज

समुदाय विशेष के कोरोना वायरस संक्रमितों की मनमानी और उत्पात को देखते हुए हैदराबाद के गॉंधी हॉस्पिटल में पुलिस तैनात कर दी गई है। यहॉं एक अप्रैल को डॉक्टर को निशाना बनाया गया था। उसके अगले दिन आइसोलेशन वार्ड में रखे गए लोगों की सामूहिक रूप से नमाज अदा करती तस्वीरें सामने आई थी।

गौरतलब है कि दिल्ली में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौटे दो भाइयों कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद इस अस्पताल में एडमिट किए गए। इनमें से एक की तबीयत बिगड़ने के कारण एक अप्रैल को मौत हो गई। इसके बाद दूसरे भाई ने डॉक्टर एवं स्टाफ पर न केवल हमला बोल दिया, बल्कि उन पर थूक भी दिया था। इस अपराध में घरवालों ने भी युवक का साथ दिया। बाद में घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर अस्पताल पहुँचे। उन्होंने हमलावरों को हिरासत में लेकर मामला शांत करवाया।

हालाँकि, इस घटना के बाद हमलावर को आइसोलेट कर दिया गया था। लेकिन बावजूद इसके जूनियर डॉक्टरों ने असुरक्षित परिस्थियों पर डर जताया था। इसके मद्देनजर राज्य सरकार ने इस पर संज्ञान लिया और आश्वासन दिया कि आरोपित के ख़िलाफ़ कड़ा एक्शन लिया जाएगा। इसी अस्पताल में कल सामूहिक नमाज अदा की गई थी। नमाज अदा करने वालों को संक्रमण संदिग्ध होने के कारण क्वारंटाइन किया गया था। लेकिन अस्पताल प्रशासन के निर्देशों को ताक पर रख कर इन्होंने सामूहिक रूप से इकट्ठा होकर नमाज अदा की।

बता दें कि जमात के मरकज़ से निकले लोगों द्वारा अस्पताल में मनमानी का यह पहला मामला नहीं है। दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भी मरकज से निकले लोगों द्वारा डॉक्टरों और इधर-उधर थूक कर संक्रमण फैलाने का मामला सामने आया है। ये लोग जॉंच कराने और अस्पताल में भर्ती होने से भी आनाकानी कर रहे थे। इसके बाद यहाँ भी अस्पताल में पुलिस की तैनाती करनी पड़ी थी।

नर्सों के सामने नंगा होने वाले जमाती पर CM योगी सख्त, कहा- छोड़ेंगे नहीं, लगेगा NSA

तबलीगी जमात के सदस्यों द्वारा अस्पताल में मनमानी करने के कई मामले सामने आए हैं। लेकिन, गाजियाबाद के एमएमजी हॉस्पिटल में तो इन्होंने हद ही कर दी। नर्स के सामने नंगा होने और बीड़ी-सिगरेट की डिमांड करने को लेकर जमात के 6 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इन्हें एमएमजी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड से राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में भी शिफ्ट कर दिया गया है। अब इनके खिलाफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सख्त रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इनलोगों को जेल में ही आइसोलेशन सेंटर बनाकर रखने पर भी विचार किया जा रहा है।

यूपी सरकार ने इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही यह फैसला किया गया है कि प्रदेश में जहाँ भी तबलीगी जमात के लोगों को क्वारंटाइन किया गया है या फिर आइसोलेशन में रखा गया है, वहाँ न तो महिला स्वास्थ्यकर्मी की ड्यूटी लगेगी और न ही किसी महिला पुलिसकर्मी की तैनाती होगी।

शुक्रवार (अप्रैल 4, 2020) को टीम 11 के साथ बैठक में सीएम योगी ने इनके खिलाफ सख्ती से पेश आने के निर्देश दिए। साथ ही डॉक्टरों और नर्सों से बदसलूकी के बाद अब जमातियों के लिए जेल में ही आइसोलेशन सेंटर बनाने पर भी विचार शुरू हो गया है। नर्सों के साथ दुर्व्यवहार पर योगी आदित्यनाथ ने कहा, “ये ना कानून को मानेंगे, ना व्यवस्था को मानेंगे। ये मानवता के दुश्मन हैं। इन्होंने महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ जो किया है वो जघन्य अपराध है। इन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया जा रहा है। हम इन्हें छोड़ेंगे नहीं।” 

मुख्यमंत्री ने गाजियाबाद की घटना पर संज्ञान लेते हुए कहा कि इंदौर जैसी घटना यूपी में कहीं नहीं दिखनी चाहिए। इसके लिए कानूनन जो भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी हो वो करिए। सीएम ने कहा कि गाजियाबाद में जिन लोगों ने ये हरकत की है, उस प्रवृत्ति के लोगों के साथ पूरी सख्ती की जाएगी। 

बता दें कि गुरुवार (अप्रैल 2, 2020) को एमएमजी हॉस्पिटल के सीएमओ ने जिले के डीएम से हॉस्पिटल में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर में भर्ती तबलीगी जमात के लोगों द्वारा नर्सों से बदतमीजी करने की शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुँच कर जाँच की थी। सीएमओ ने शिकायत में बताया कि क्वारंटाइन में रखे गए तबलीगी जमात के लोग बिना पैंट के घूम रहे हैं। नर्सों को देखकर भद्दे इशारे करते हैं। बीड़ी और सिगरेट की डिमांड करते हैं। 

4 शो में ही 170000000 व्यूज, 5 साल का सबसे बेस्ट: रामायण ने इस दौर में भी गढ़े नए रिकॉर्ड

कोरोना वायरस संक्रमण पर काबू पाने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। इस दौरान जनता की मॉंग पर 80-90 के दौर के कई सीरियल का दोबारा प्रसारण शुरू किया गया है। इनमें से एक रामायण भी है। रामानंद सागर द्वारा बनाए गए इस सीरियल ने अस्सी के दशक के आखिर में नया इतिहास रचा था। टीआरपी के आँकड़े बता रहे हैं कि रामायण का जादू आज भी कायम है।

हालाँकि रामायण के री टेलीकास्ट पर वामपंथियों और कट्टरपंथियों ने सोशल मीडिया में अपनी खुंदक निकाली थी। इसके प्रसारण को उन्होंने एक एजेंडा बताया था। लेकिन आँकड़े बताते हैं कि रामायण के ख़िलाफ़ जहर उगलने वाले गिने-चुने लोग हैं, बाकी इस रामकथा को अपार प्रेम देने में लगे हैं। टीआरपी के लिहाज से इसने पिछले 5 साल का हर रिकॉर्ड कायम दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक इन दिनों रामायण की टक्कर में दूसरा कोई शो नहीं है। यह शो पिछले पाँच सालों में यानी 2015 से लेकर अब तक जनरल एंटरटेनमेंट केटेगरी (जीईसी) में बेस्ट सीरियल बन गया है। इस बात की जानकारी प्रेस इन्‍फर्मेशन ब्‍यूरो ने ट्वीट कर दी है। BARC रेटिंग में रामायण के रिपीट शो ने बाजी मारी है। इसे 4 शोज में ही 170 मिलियन व्यूज यानी 17 करोड़ दर्शक मिले हैं।

पीआईबी ने ट्वीट किया, “BARC के मुताबिक, हमने 2015 से टीवी ऑडियंस को मीजर करना शुरू किया। उस वक्‍त से किसी भी हिंदी जीईसी शो को इतनी ज्‍यादा रेटिंग नहीं मिली है, जितनी रामायण के री-टेलिकास्‍ट को मिली है।”

इसके बाद प्रसार भारती के CEO ने लिखा, “मुझे यह बताते हुए काफी ख़ुशी हो रही है कि दूरदर्शन पर प्रसारित हो रहा शो ‘रामायण’ 2015 से अब तक का सबसे अधिक टीआरपी जनरेट करने वाला हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट शो बन गया है।”

यहाँ बता दें कि सोशल मीडिया यूजर्स की भारी माँग के बाद रामायण का प्रसारण इसी 28 मार्च से शुरू हुआ है। हर रोज दो बार इसका प्रसारण हो रहा है। दोनों समय दो अलग-अलग एपिसोड प्रसारित होते हैं। यानी दर्शको को एक ही दिन में दो एपिसोड देखने को मिल रहे हैं। ये दूरदर्शन पर रोज सुबह 9 बजे और रात में 9 बजे प्रसारित होता है।

उल्लेखनीय है कि रामानंद सागर के प्रयासों से पर्दे पर आई रामकथा ने 1988 में भी अनोखा इतिहास रचा था। उस दौरान लोगों से मिले अपार प्रेम का ही नतीजा है कि आज भी दर्शक का मोह इसके प्रति कम नहीं हुआ। 1988 में पहली बार प्रसारित हुआ ये धारावाहिक और इसका हर किरदार लोगों में इस तरह घर कर गया कि रामायण के प्रसारण से पहले लोग टीवी की आरती उतारते थे।

जानकारी के लिए ये भी बता दें कि लॉकडाउन के इस समय में दूरदर्शन ने रामायण के अलावा महाभारत, ब्योमकेश बक्शी, शक्तिमान, चाणक्या सहित और भी कई सीरियल्स का प्रसारण शुरू किया है।