Home Blog Page 5004

ब्राह्मणों और जाटों से दूर रहेगा कोरोना? ये तस्वीर इतनी फेक है कि ‘ऑल्ट न्यूज’ ने भी फैक्टचेक नहीं किया

सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस को लेकर तरह-तरह की अफवाहें उड़ाई जा रही हैं। इसी क्रम में फैक्ट-चेक का वायरस ‘ऑल्टन्यूज़’ जनता के लगतार अनुरोध के बाद भी उन तस्वीरों का फैक्ट-चेक नहीं कर रहा है, जो अफवाह फैला रहे हैं। ऐसी ही एक तस्वीर वायरल हुई है, जिसे आजतक न्यूज़ चैनल की ख़बर के रूप में दिखाया गया है। इसमें कहा जा रहा है कि जाटों का ख़ून इतना गर्म होता है कि उन्हें कोरोना वायरस का कोई खतरा नहीं है। इस ट्वीट के रिप्लाई में जाट की जगह ब्राह्मणों का ख़ून गर्म होने की बात कही गई और ऐसी ही तस्वीर शेयर की गई।

चूँकि ‘फॉल्ट न्यूज़’ के एक व्यक्ति ने इसके फैक्ट-चेक का बीड़ा उठाया। उसने ‘ऑल्ट न्यूज़’ से फैक्ट-चेक के लिए रिवर्स सर्च की तकनीक माँगी, ताकि ये पता लगाया जा सके ये फोटो सबसे पहले किसने शेयर किया था और इसे पहली बार कब शेयर किया गया था। हालाँकि, उक्त व्यक्ति ने ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए बताया कि जैसे ही उसने ‘ऑल्टन्यूज़’ की रिवर्स सर्च एप्लीकेशन में इस फोटो को डाला, उसके बाद जो परिणाम आया वो चौंकाने वाला था। दरअसल, उस ऐप ने फोटो के दाहिने हिस्से को बाएँ और बाएँ किस्से को दाहिने भेज दिया था। हो गया रिसर्च।

हालाँकि, ‘फॉल्ट न्यूज़’ के एक इंटर्न ने दावा किया कि उनके संस्थान में इसी ऐप के जरिए सारे फैक्ट-चेक किए जाते हैं। साथ ही उसने यह भी बताया कि कभी-कभी ये ऐप रिवर्स सर्च के नाम पर ‘सिन्हा’ को ‘भालू’ और ‘भालू’ को ‘सिन्हा’ बना देता है। फैक्ट-चेक करने का प्रयास करने वाला व्यक्ति ऑपइंडिया से अपनी बात रखने के बाद कोमा में चला गया है क्योंकि उसे गहरा शॉक लगा है। उसने बताया कि उसने ‘एक्स्ट्रा ज़ूम’ वाली तकनीक भी ‘भालू’ से उधार में ली थी, लेकिन जैसे ही उसमें एक पत्थर की इमेज डाली, वो ज़ूम होकर पर्स बन गया।

इधर फैक्ट-चेक के नाम पर लगातार बकैती कर रहे ‘फॉल्ट न्यूज़’ के बारे में ये भी पता चला है कि कोरोना वायरस का ख़तरा बढ़ने के बाद उसे फैक्ट-चेक के लिए कोई ख़बर मिल ही नहीं रही थी। इसीलिए, 2 इंटर्न को इस बात की जिम्मेदारी दी गई वो अपना पाँच-पाँच फेक ट्विटर हैंडल बना कर एक ‘फेक न्यूज़’ को ट्वीट करें, जिसे बाद में ‘वायरल’ करार देकर उसका फैक्ट-चेक कर दिया जाएगा। अंदेशा जताया गया है कि उन्हीं इंटर्न्स में से किसी ने जाट और ब्राह्मण का ख़ून गर्म होने की बात ट्वीट कर दी। इसके बाद ‘सिन्हा’ ने अपने इंटर्न को ट्रेनिंग देने के लिए बुलाया है, जहाँ उन्हें पर्स और पत्थर में फर्क न करने की हिदायत दी जा रही है।

कथित फैक्ट-चेकर को आजकल ज्यादा मशक्कत इसीलिए करनी पड़ रही है क्योंकि पीएम मोदी लगातार लोगों को कोरोना वायरस से सावधान व सचेत रहने के तौर-तरीके बता कर उन्हें जागरूक कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने एक ट्वीट कर साबुन से हाथ धोने के लाभ बताए। ये ट्वीट देखते ही ‘भालू’ ने अपने एक इंटर्न को एक कोरोना वायरस खोज कर उसका बयान लाने को कहा है। बयान ये होना चाहिए कि कोरोना साबुन से नहीं डरते। अन्य ख़बरों में दावा किया गया है कि उक्त इंटर्न मीडिया की नौकरी छोड़ कर सन्यस्थ हो गया है। जाते-जाते बता दें कि ये फोटो फर्जी है, इसे ऐसे ही किसी तथाकथित फैक्ट-चेकर ने फैलाया है।

डिस्क्लेमर: ट्यूबलाइट श्रेणी के लोगों के लिए ये साफ़ किया जाता है कि ये व्यंग्य है, कटाक्ष है, इसे उसी तरह पढ़ें

इस्लामी तीर्थयात्रा पर ईरान गए कई भारतीय नागरिक हुए कोरोना वायरस के शिकार: मीडिया रिपोर्ट्स में किया जा रहा दावा

ईरान में महजबी तीर्थयात्रा पर गए 234 भारतीय नागरिकों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की ख़बर आ रही है। अब उन्हें मेडिकल टेस्ट के बाद ईरान में ही रोका गया है और जब वो पूरी तरह ठीक हो जाएँगे, उसके बाद उन्हें वापस भारत लेकर आया जाएगा। बता दें कि ईरान में कोरोना वायरस के ख़तरे ने महामारी का रूप ले लिया है और वहाँ अब तक 724 लोग इससे संक्रमित होकर अपनी जान गँवा चुके हैं। वहाँ कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 15 हजार के पार बताई जा रही है।

मीडिया में ईरान में फँसे भारतीय नागरिकों में कोरोना वायरस से पीड़ितों की संख्या 250 के पार बताई जा रही है। ऑपइंडिया फ़िलहाल इसकी पुष्टि नहीं करता। हालाँकि, अभी तक कोई आधिकारिक आँकड़ा जारी नहीं किया गया है लेकिन शीर्ष अधिकारियों से बातचीत के आधार पर ‘आईएएनएस’ ने दावा किया है कि इस्लामिक तीर्थयात्रा पर गए भारतीय नागरिकों में अधिकतर वरिष्ठ नागरिक थे, जिन्हें इस वायरस द्वारा ज्यादा नुकसान पहुँचाए जाने की संभावना रहती है। फ़िलहाल वो सभी ईरान में ही रहेंगे, जहाँ उनका इलाज किया जाएगा। कोरोना वायरस पीड़ितों के लिए ‘इंटरनेशनल स्टैण्डर्ड प्रोटोकॉल’ के हिसाब से इन सभी को ‘क्वारंटाइन सेंटर’ में रखा जाएगा।

ईरान में अभी भी 6000 के आसपास भारतीय नागरिक फँसे हुए हैं, जो वहाँ के विभिन्न प्रांतों में रह रहे थे। इनमें से अधिकतर इस्लामी तीर्थयात्रा पर गए थे और अधिकांश लद्दाख और जम्मू कश्मीर से हैं। कई छात्र भी फँसे हुए हैं। केरल, तमिलनाडु और गुजरात के 1000 मछुआरे भी वहाँ रह रहे थे। वो वहाँ रह कर कमाई करते हैं और साथ ही इस्लामिक अध्ययन भी करते हैं। भारतीय अधिकारी लगातार उन फँसे हुए नागरिकों से मुलाक़ात कर रहे हैं। इनमें से कइयों को वापस भी लाया गया है। जिनका मेडिकल रिपोर्ट नेगेटिव आ रहे है, उन्हें तुरंत निकालने की व्यवस्था की जा रही है। भारत ने इसके लिए प्रशिक्षित मेडिकल टीम को वहाँ भेजा है।

अब तक ईरान से 389 भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा चुका है। सोमवार (मार्च 16, 2020) को 53 भारतीय नागरिकों का चौथा जत्था ईरान से भारत पहुँचा। केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर के इस सम्बन्ध में जानकारी दी।

कोरोना से बचने के लिए अत्यधिक गोमूत्र पीकर बीमार हुए बाबा रामदेव? कट्टरपंथियों के दावे का फैक्ट-चेक

इन दिनों सोशल मीडिया पर अस्पताल में भर्ती बाबा रामदेव की एक तस्वीर को इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि अधिक मात्रा में गोमूत्र का सेवन करने के बाद योग गुरु को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। हालाँकि ऐसा कुछ भी नहीं है। यह बाबा रामदेव की पुरानी तस्वीर है, जिसे गोमूत्र का मजाक उड़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ये जिहादी आतंकवादियों और इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदुओं का मजाक उड़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पसंदीदा हथियार है।

जो तस्वीर वायरल की जा रही है, उसमें बाबा रामदेव एक अस्पताल में डॉक्टरों से घिरे हुए दिख रहे हैं। वो काफी कमजोर दिख रहे हैं। एक ट्विटर यूजर (@rehman_5) ने फोटो शेयर करते हुए दावा किया कि बाबा रामदेव ने कोरोना वायरस से बचने के लिए गोमूत्र की प्रतिरोधक क्षमता को दिखाने के लिए अधिक मात्रा में गोमूत्र पी लिया।

इसी तरह के दावे कई अन्य यूजर्स द्वारा भी किए गए, जिनमें ‘अरेबा नूर वज़ीर’ और ‘ब्लीड ग्रीन’ नाम के यूजर्स भी शामिल हैं। ये ट्विटर पर खुदको पाकिस्तानी बताते हैं।

सच क्या है?

फोटोग्राफ का इस्तेमाल कर इंटरनेट पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर पता चलता है कि यह तस्वीर 2011 की है, जब बाबा रामदेव की तबीयत भूख हड़ताल के बाद बिगड़ गई थी। यह तस्वीर इंडिया टुडे द्वारा जून 2011 में प्रकाशित की गई थी, जिसमें कहा गया है कि बाबा रामदेव को हरिद्वार स्थित उनके आश्रम में हालत बिगड़ने के बाद शुक्रवार को हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया था। वह भ्रष्टाचार और काले धन के मुद्दों के खिलाफ विरोध करने के लिए 9 दिनों के उपवास पर थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

यह तस्वीर 12 जून, 2011 को ली गई थी, जब बाबा रामदेव ने अस्पताल में दो दिन रहने के बाद अनशन तोड़ा था। उन्होंने आध्यात्मिक नेताओं की अपील पर उपवास तोड़ा था।

5 मार्च को बाबा रामदेव के आधिकारिक प्रवक्ता तिजारावाला एसके ने भ्रामक दावों को खारिज करते हुए कहा, “यह मूर्खतापूर्ण और शर्मनाक है। वह (रामदेव) पूरी तरह से स्वस्थ हैं। पिछले 2 दिनों में कई समाचार चैनलों द्वारा उनका साक्षात्कार लिया गया है। आज वह बेंगलुरु जा रहे हैं।”

इसलिए यह दावा कि बाबा रामदेव को हाल ही में अत्यधिक मात्रा में गोमूत्र का सेवन करने के बाद हॉस्पीटल में भर्ती कराया गया, झूठा है।

आध्यात्मिक नेता अक्सर फेक न्यूज के निशाने पर रहे हैं। इससे पहले, हाल ही में एक एक्टिविस्ट डॉक्टर ने किसी शख्स की गोपनीय मेडिकल रिपोर्ट को पोस्ट करते झूठा दावा किया था कि बाबा रामदेव का सहयोगी गाँजा पीता है। डॉ आनंद राय, जिन्हें मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले के मुखबिर के रूप में जाना जाता है, ने ये झूठा दावा करते हुए अपने वैरिफाइड आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट की कॉपी पोस्ट की थी।

डॉ राय कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के करीबी हैं, जो 2018 में कॉन्ग्रेस के टिकट पर मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे। उन्होंने ट्विटर पर जो मेडिकल रिपोर्ट पोस्ट की, उसमें मरीज का नाम आचार्य बालगोविंद जी बताया गया है और रिपोर्ट बताती है कि व्यक्ति का मूत्र परीक्षण THC (Tetrahydrocannabinol) पॉजीटिव है, जो गांजा का एक सक्रिय अंश है।

CAA पर केंद्र ने SC को सौंपा 129 पन्नों का जवाब, कहा- नागरिकता देना सरकार का अधिकार, कोर्ट का हस्तक्षेप है सीमित

केंद्र सरकार ने CAA की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार (मार्च 17, 2020) को सर्वोच्च न्यायालय में अपना जवाब दाखिल किया। केंद्र ने कुल 129 पन्नों का हलफनामा कोर्ट को सौंपा। इस हलफनामे में केंद्र ने कहा कि यह कानून किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करता और इससे संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन होने का कोई सवाल नहीं उठता।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सीएए केंद्र को मनमानी शक्तियाँ नहीं देता, बल्कि इस कानून के तहत केवल निर्देशित तरीकों से नागरिकता दी जाएगी। केंद्र द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया कि देश की संसद ने ये कानून बनाया है। नागरिकता देना सरकार का अधिकार है और इसमें कोर्ट का हस्तक्षेप बहुत सीमित है।

सरकार ने अपने जवाब में कहा कि ये नागरिकता संशोधन कानून भारत की धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है। सरकार ने कुछ धर्म विशेष के लोगों को भारत की नागरिकता देने का फैसला किया है, जो ऐसे देश में रहते हैं जो किसी ना किसी धर्म के आधार पर चलते है।

केंद्र ने कहा कि CAA कानून धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं देता, बल्कि धार्मिक उत्पीड़न के आधार पर है। ये कानून गैरधर्मनिरपेक्ष देशों में रहने वाले लोगों को सुरक्षा प्रदान करता है। ये कानून भारत के किसी भी नागरिक का अधिकार नहीं छीनता।

केंद्र सराकर ने कई आरोपों का जवाब देते हुए कहा की सीएए के अलावा भी भारत की नागरिकता लेने के विकल्प खुले हुए हैं। ये कानून केवल ऐसे देश के लोगों को नागरिकता देता है, जहाँ पर अल्पसंख्यकों को ऐतिहासिक तौर पर सताया गया।

बता दें, सरकार के हलफनामे के बाद सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस ए बोबडे ने कहा है कि अभी संविधान पीठ सबरीमाला के मामले की सुनवाई कर रही है। ये सुनवाई पूरी होने के बाद CAA मामले पर सुनवाई शुरू की जाएगी।

गौरतलब है कि इससे पहले 5 मार्च को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे से जल्द सुनवाई की माँग की थी जिस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि वो अंतरिम राहत के लिए जल्द सुनवाई कर सकते हैं।

वहीं इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अदालत को बताया था कि वह अगले दो दिनों में इस मामले में जवाब दाखिल करेंगे। उन्होंने उस समय सूचित किया था कि जवाब तैयार है वो जल्द हलफनामा दाखिल करेंगे।

बता दें, नागरिकता संशोधन अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में 140 याचिकाएँ दायर की गई हैं। जिनपर सुनवाई करते हुए 22 जनवरी को पीठ ने केंद्र सरकार से चार सप्ताह के भीतर याचिकाओं का जवाब देने को कहा था।

कल शाम से शुरू हो जाएँगी यस बैंक की सारी सेवाएँ, कैश की कमी नहीं: विपक्षी प्रोपेगंडा फेल

केंद्र सरकार ने कई बार स्पष्ट किया है कि यस बैंक के खाताधारकों का रुपया नहीं डूबेगा। विपक्षी दलों और वामपंथियों द्वारा लगातार अफवाह फैलाई जा रही थी कि यस बैंक के डूबने में सरकार का हाथ है और इसके जितने भी खाताधारक हैं, उन सभी के रुपए कभी वापस नहीं मिलेंगे। बाद में जब पता चला कि यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर ने कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी की पेंटिंग पूरे 2 करोड़ रुपए में ख़रीदी थी, तब से कॉन्ग्रेस नेताओं ने चुप्पी साध ली। राणा कपूर की तीनों बेटियों के नाम भी इस धोखाधड़ी में सामने आए हैं।

अब ताज़ा ख़बर आई है कि बुधवार (मार्च 18, 2020) की शाम 6 बजे के बाद से यस बैंक के ग्राहक सभी प्रकार की बैंकिंग सेवाओं व सुविधाओं का पूर्ववत लाभ उठा सकेंगे। बैंक के नए प्रबंध निदेशक प्रशांत कुमार ने उक्त जानकारी दी है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के जानकारी दी कि बैंक के पास नकदी की कोई कमी नहीं है। इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने 5 मार्च को यस बैंक के सारे कामकाज पर पाबंदी लगा दी थी। बैंक के ग्राहकों को 3 अप्रैल तक खाते से 50,000 रुपए तक निकालने की अनुमति दी गई थी। यस बैंक के अधिकारियों ने कहा:

“यस बैंक की सभी ऑनलाइन सेवाएँ पूरी तरह से काम कर रही है। बैंक के एटीएम में नकदी की किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। एसबीआई अपने शेयर्स बेचने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है। लेकिन, मैं विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि अगले तीन वर्षों तक यस बैंक का एक भी शेयर नहीं बेचा जाएगा।”

यस बैंक ने अपने बैंक के निदेशक मंडल के पुनर्गठन की भी मंजूरी दे दी है। रिजर्व बैंक ने ही प्रशांत कुमार को यस बैंक का प्रशासक नियुक्त किया था। वो बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी हैं। वो एसबीआई के मुख्य वित्त अधिकारी और उप प्रबंध निदेशक के रूप में काम कर चुके हैं। वहीं पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व गैर-कार्यकारी निदेशक सुनील मेहता को यस बैंक का गैर-कार्यकारी चेयरमैन बनाया गया है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि यस बैंक विदेशी निवेशकों का विश्वास जीतने में भी कामयाब सिद्ध होगा। बैंक के अधिकारियों ने कहा है कि खाताधारकों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

कानपुर हिंसा: उपद्रवियों पर योगी सरकार का शिकंजा, नोटिस के बाद जमा कराई गई ₹80,856 जुर्माने की पहली किस्त

सीएए के नाम पर यूपी में हिसा करने और उसकी आड़ में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले उपद्रवियों को योगी सरकार किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहती और कानून के तहत उसे सबक भी सिखाना चाहती है। यही कारण है कि योगी सरकार की सख्ती के चलते कानपुर में हिंसा करने वाले उपद्रवियों ने जुर्माने की पहली किस्त को जमा करा दिया है।

यूपी पुलिस द्वारा उपद्रवियों के खिलाफ की जा रही सख्त कार्रवाई से घबराए बेकनगंज थाने के 6 उपद्रवियों ने सिटी मजिस्ट्रेट के नोटिस पर सोमवार को खुद पर लगे जुर्माने के 80,856 रुपए जमा करा दिए। नोटिस की सूची में शामिल बेकनगंज निवासी यासीन, नौबस्ता निवासी मोहम्मद अरमान, बेकनगंज निवासी गुरगुट, इरफान, लियाकत और दिलशाद ने मिलकर 80,856 रुपए का चेक सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में जमा करा दिया। दरअसल, कानपुर में हुई हिंसा के लिए सरकार द्वारा गठित की गई जाँच कमेटी ने यतीमखाना में 2 लाख 80 हजार रुपए के नुकसान का आकलन करके वसूली का नोटिस 21 लोगों को जारी किया था।

उधर बाबरपुर पुलिस ने हिंसा में शामिल एक और आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसे पुलिस ने कोर्ट में पेश किया और वहाँ से उसे जेल भेज दिया गया। दरअसल, बवाल के दौरान आरोपित को गोली लगी थी। इसके बाद अस्पताल में भर्ती कराने के बाद आरोपित अस्पताल से फरार हो गया था, जिसकी सीसीटीवी फुटेज की मदद से जमील के रूप में पहचान हुई थी। वहीं बाबूपुरवा हिंसा में अब तक 16 आरोपितों को पुलिस जेल भेज चुकी है, जबकि 19 फरार चल रहे हैं। फरार आरोपितों के खिलाफ बाबूपुरवा पुलिस कुर्की की कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।

गौरतलब है कि 21 दिसंबर को सीएए विरोध के नाम पर उपद्रवियों ने जुमे की नमाज के बाद यतीमखाना और बाबूपुरवा में जमकर उत्पात मचाया था। इस दौरान की गई हिंसा में उपद्रवियों ने पब्लिक और सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले तो किया ही साथ ही पत्थरबाजी में दर्जनों गाड़ियों को अपना निशाना बनाया था। इतना ही नहीं उपद्रवियों ने पुलिस पर गोली चलाने के साथ पेट्रोल बम भी चलाए थे। इसके बाद योगी सरकार ने सरकारी नुकसान की भरपाई उपद्रवियों से ही करने के निर्देश दिए थे।

कानपुर हिंसा में 12 लोगों को गोली लगी थी और 263 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसके बाद पहले तो यूपी पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और वीडियो की मदद से उपद्रवियों की पहचान की। इसके बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए उन पर जुर्माना लगाया। इसे वसूल करने के लिए प्रशासन ने पहले तो नोटिस जारी किया और फिर अल्टीमेटम भी दिया। इसके बाद दंगाई अपने और अपनी संपत्ति को बचाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।

इमरान खान: कोरोना के सम्मान में, कटोरा लिए मैदान में

कोरोना वायरस से लड़ने के लिए विश्व का हर देश इस समय अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इस बार भी सिर्फ़ अमीर देशों से अपने लिए आर्थिक मदद की गुहार लगाते ही दिख रहे हैं।

अभी हाल ही में जहाँ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सार्क देशों के साथ बुलाई गई विडियो कॉन्फ्रेंसिंग में गैर मौजूद होकर ऐंठ दिखाई थी और एक जूनियर मंत्री को भेज दिया था। वहीं, देश में कोरोना के बढ़ते मामले देखकर उनकी सारी हेकड़ी निकल गई।

पाकिस्तान में कोरोना वायरस के बढ़ते असर को देखते हुए उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान बड़े देशों से गुहार लगाई कि उनको पाकिस्तान को लोन देना चाहिए और आर्थिक मदद देनी चाहिए ताकि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सके। बता दें कि पाकिस्तान में मंगलवार को कोरोना वायरस की वजह से पहली मौत हो गई है और संक्रमिक लोगों का आँकड़ा 190 तक पहुँच गया है।

एक इंटरव्यू में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से गरीब देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। अगर यहाँ पर हालात बिगड़ते हैं तो मेडिकल व्यवस्था नहीं संभाल पाएगी, ऐसा सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि भारत में भी होगा। क्योंकि कोरोना से लड़ने के लिए न उनके पास न क्षमता है और न ही संसाधन। उन्होंने इस साक्षात्कार में इकोनोमिक स्लोडाउन के कारण होने वाली गरीबी और भुखमरी पर भी अपनी चिंता व्यक्त की।

इमरान खान ने कहा कि यही कारण है कि बड़े देशों को छोटे देशों की मदद करनी चाहिए और आर्थिक मदद देनी चाहिए। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ईरान का उदाहरण दिया और कहा कि ईरान पर सैंक्शन लगे हुए हैं, इस वजह से वहाँ पर मौतें हो रही हैं।

गौरतलब है कि आज समृद्ध देशों से आर्थिक मदद, लोन आदि की माँग करने वाले इमरान खान ने बीते दिनों जब सार्क देशों की प्रेस कॉन्फ्रेंसिंग में अपने एक जूनियर मंत्री को भेजा था, उस समय न केवल इमरान खान का इस मसले पर गैर जिम्मेदाराना रवैया देखने को मिला था, बल्कि उनके जूनियर मंत्री ने भी इस मसले की जगह जम्मू कश्मीर का रोना रोया था और सभी को मुद्दे से भटकाने की कोशिश की थी। डॉ. जफर मिर्जा ने कहा था कि सार्क के सभी सदस्य देशों में संक्रमण फैला हुआ है। हम दक्षिण एशिया के सभी पीड़ितों के लिए समान रूप से चिंतित हैं। जम्मू-कश्मीर में भी कोरोना के मामले सामने आए हैं। वहाँ हेल्थ इमरजेंसी को देखते हुए सभी तरह के प्रतिबंधों को हटाया जाना चाहिए।

यहाँ, बता दें कि इस विडियो कॉनफ्रेंस में नरेंद्र मोदी ने सार्क देशों से 10 मिलियन डॉलर (74 करोड़ रुपए) का इमरजेंसी फंड बनाने का प्रस्ताव रखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि सार्क देश अपनी इच्छा से अनुदान दे सकते हैं। साथ ही पीएम मोदी ने बताया था कि हमने आपदा पीड़ितों की निगरानी के लिए एक पोर्टल तैयार किया है। इसे सार्क के सभी सदस्य देशों के साथ साझा किया जाएगा।

योगी सरकार के प्रयासों से इंसेफ्लाइटिस चाइल्ड डेथ पर पाया गया कंट्रोल, 2,817 से 234 पर आया आँकड़ा

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार को सत्ता संभालते हुए 3 साल पूरे होने वाले हैं। इन तीन सालों के पूरे होने के बीच में योगी सरकार ने कई ऐसे काम किए हैं जिन्हें आने वाली सरकारें हमेशा याद रखेंगी और शायद उनसे सीख भी लें। इन्हीं कार्यों में से एक कार्य गोरखपुर इंसेफ्लाइटिस चाइल्ड डेथ पर कंट्रोल पाना भी हैं।

दरअसल, आज से 3 वर्ष पहले योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक व धार्मिक कर्मभूमि रहा गोरखपुर जापानी इंसेफेलाइटिस की चपेट में था। उस समय पूरे प्रदेश में हजारों की संख्या में बच्चों की मौतें होती थीं। मगर 2017 में जब योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाली, तब उन्होंने इस समस्या को बड़ी चुनौती के रूप में लिया।

पिछली सरकारों की निष्क्रियता के कारण सालाना मृत बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही थी। उस वर्ष भी करीब 500 से अधिक बच्चे अपनी जान गँवा चुके थे और गोरखपुर व आसपास के 14 जिले इस बीमारी की चपेट में थे। इसके बाद 2017 में गोरखपुर के अस्पताल में कई बच्चों की मौत होने से ये मामला बहुत बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन गया।

बस फिर क्या…. योगी आदित्यनाथ ने इस बीमारी से निपटने के लिए बड़े स्तर पर योजनाएँ तैयार कीं। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) और UNICEF जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ साझेदारी की और उनके साथ मिल कर एक एक्शन प्लान पर काम शुरू किया।

इस समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा और व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू किया गया। स्वास्थ्य व सफाई को लेकर जागरूकता फैलाने के तहत एक बड़ा अभियान चलाया गया। प्रभावित क्षेत्रों से सूअरों को अलग किया गया। फॉगिंग के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीम को लगाया गया।

बच्चों के माता-पिता को घर-घर जाकर यह समझाया गया कि वे अपने बच्चों को मिट्टी की पुताई वाली जमीन पर न सोने दें। पीने का पानी के लिए इंडिया मार्क-2 वाटर पाइप का और हैंड पंप का प्रयोग करने की सलाह दी गई।

इस बीमारी से जुड़े लक्षणों के बारे में हर परिवार को बताया गया और किसी भी आपात स्थिति में 108 एम्बुलेंस नंबर पर कॉल करने को कहा गया। इन सभी कार्यों के परिणाम भी अच्छे मिले। जापानी इंसेफेलाइटिस के कारण हुई मौतों में एक वर्ष के भीतर दो तिहाई की कमी आई। जहाँ 2017 में इस बीमारी से 557 जानें गई थीं, 2018 में यह आँकड़ा 187 रहा।

साल 2019 में सरकार द्वारा दिए गए आँकड़ों के अनुसार, बच्चों की मौत के कारण विवादों में रहे गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ही साल 2016 में 2,817 बच्चे भर्ती हुए, जिनमें 426 की मौत इस बीमारी के कारण हुई। इसके बाद साल 2017 में करीब 2,998 बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से मरने वाले बच्चों की संख्या 380 रही। ऐसे ही साल 2018 में ये आँकड़ा और कम हुआ। इस बार सिर्फ़ 1,289 केस अस्पताल में आए। इनमें मृत बच्चों का दर गिरके 125 रह गया और साल 2019 आते-आते सरकार के प्रयासों ने इस बुखार के प्रकोप को खत्म तो नहीं किया लेकिन काफी हद तक कम कर दिया। क्योंकि पिछले साल केवल 234 बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए जिनमें सिर्फ़ 22 बच्चों को नहीं बचाया जा सका। बाकी बच्चों को बचाने में अस्पताल सफल रहा।

आज अगर हम 2016 से 2019 तक के ये घटते आँकड़े देखें। तो मालूम पड़ेगा कि योगी सरकार से पहले तक बच्चों का इस बीमारी से ग्रस्त होना एक रूटीन प्रक्रिया हो गई थी। लेकिन प्रशासन ने अपने प्रयासों से इस पर काबू पाया और लगातार बीमार होने वाले बच्चों की संख्या में गिरावट आई। अब उम्मीद है कि आने वाले कुछ सालों में प्रदेश से इस बुखार का प्रकोप खत्म हो जाएगा और संसाधन-सुविधाएँ इतनी होंगी कि किसी नवजात को इससे पीड़ित न होना पड़े।

बता दें, योगी सरकार की इस कामयाबी के लिए पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम के दौरान उनकी खूब तारीफ की थी और कहा था कि कुछ स्वार्थी थे जिन्होंने योगी आदित्यनाथ के काम को नकार दिया और निर्दोष लोगों की मौत के लिए उन्हें दोषी ठहराया। मगर अब एक बीमारी जो दूषित वातावरण के कारण फैल रही थी वो अब खत्म होने की कगार पर है। पीएम मोदी ने इस दौरान बताया था कि संसद का एक भी सत्र ऐसा नहीं जाता था जब योगी आदित्यनाथ सबके समक्ष इस मुद्दे को नहीं उठाते थे और सबको इस बात से अवगत नहीं कराते थे कि आखिर कैसे प्रदेश में बच्चों की मृत्यु की संख्या बढ़ रही है।

’20 और MLA छोड़ना चाहते हैं कॉन्ग्रेस, लेकिन उन्हें कैद में रखा गया है’ – बागी विधायकों का दावा, परेशान कमलनाथ!

मध्य प्रदेश में जारी फ्लोर टेस्ट पर घमासान के बीच मंगलवार (मार्च 17, 2020) को कॉन्ग्रेस के बागी विधायकों ने दावा किया है कि पार्टी के 20 और विधायक उनके साथ जुड़ना चाहते हैं और आने वाले दिनों में वो भाजपा में शामिल होने की सोच रहे हैं। बेंगलुरु पहुँचने और अपने इस्तीफे भेजने के बाद पहली बार पत्रकारों से बात करते हुए 22 विधायकों ने कहा कि वे किसी भी परिणाम का सामना करने के लिए तैयार हैं।

एक महिला विधायक ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “ज्योतिरादित्य सिंधिया हमारे नेता हैं। हम उनके साथ वर्षों से राजनीति कर रहे हैं। हम में से अधिकांश उनकी वजह से राजनीति में हैं। हम अभी भी भाजपा में शामिल होने के बारे में सोच रहे हैं। अगर हमें केंद्रीय पुलिस से सुरक्षा मिलती है, तो हम मध्य प्रदेश जाएँगे और इसके बारे में सोचेंगे।”

विधायकों ने दावा किया कि 20 और विधायक उनके साथ हैं, लेकिन उन्हें कैद में रखा गया है। यदि वे भी बागी विधायकों के साथ होते, तो कॉन्ग्रेस स्पष्ट रूप से टूट जाती और इस पर कोई भी कानून लागू नहीं हो सकता था। बागी विधायकों ने कहा कि वे किसी भी परिणाम के लिए तैयार हैं और उन्हें विश्वास है कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोग उनके साथ हैं।

इससे पहले बागी कॉन्ग्रेस विधायक इमरती देवी ने कहा था, “ज्योतिरादित्य सिंधिया ही हमारे नेता हैं। उन्होंने हमें बहुत कुछ सिखाया है। चाहे कुएँ में कूदना पड़े लेकिन हम उनके साथ ही रहेंगे।” वहीं एक अन्य विधायक गोविंद सिंह राजपूत ने कमलनाथ पर वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “कमलनाथ ने हमें कभी 15 मिनट भी नहीं सुना। फिर हम अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए किससे बात करें।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन पर किसी तरह का दबाव है या उनको बंधक बनाकर रखा गया है, तो इस पर बागी विधायकों ने कहा, “हमें ना यहाँ लाया गया है और ना ही हम बंधक हैं, हम आजाद हैं। बहुत मजबूरी में पार्टी छोड़ने का फैसला लिया क्योंकि हमारी सुनी नहीं जाती है।” बागी विधायकों ने कहा कि कमलनाथ केवल छिंदवाड़ा के सीएम बनकर रह गए हैं।

राज्य विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराए जाने को लेकर पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया है। इस पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्य प्रदेश में मौजूदा सरकार निश्चित रूप से गिरेगी। आज भारतीय जनता पार्टी के पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या बल है। भाजपा की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर कल (मार्च 18, 2020) तक जवाब देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई कल सुबह 10.30 बजे फिर होगी।

राज्यपाल के पत्र के बाद हड़बड़ाए कमलनाथ फिर पहुँचे राजभवन, BJP विधायकों से भी की मुलाकात

आपकी भाषा ठीक नहीं, कल बहुमत साबित करें वरना सरकार अल्पमत में मानी जाएगी: कमलनाथ को गवर्नर से झटका

107 Vs 99: आठ वोटों से गिर जाती कमल-सरकार, आज ही खिल जाता मध्य प्रदेश में ‘कमल’

हम यहाँ से नहीं हटेंगे: शाहीन बाग़ की महिलाओं ने पुलिस के अनुरोध को नकारा, कोरोना वायरस फैलने का ख़तरा

चीन से के बुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना का कहर विश्व के करीब 120 देशों में अब तक फैल चुका है। अगर बात करें भारत की तो यहाँ कोरोना के प्रकोप को रोकने के लिए सभी एयरपोर्ट, स्कूल, मॉल, रेस्टोरेंट यहाँ तक कि मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए हैं। सरकार ने सभी बड़े आयोजनों पर रोक लगा दी गई है, लेकिन इस बीच जारी है तो सिर्फ दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ तीन महीने से चल रहा धरना।

कोरोना के लगातार बढ़ते कहर को देखते हुए मंगलवार को दिल्ली पुलिस शाहीन बाग धरने पर पहुँच गई। इस दौरान धरने पर बैठी प्रदर्शनकारी महिलाओं से दिल्ली पुलिस और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने बात की साथ ही कोरोना के बढ़ते कहर से उनको अवगत कराया साथ ही उनसे धरने को समाप्त करने का भी अनुरोध किया। हालाँकि, प्रदर्शनकारी महिलाओं ने दिल्ली पुलिस के इस अनुरोध को न तो गंभीरता से लिया और न ही इसका कोई जवाब देना उचित समझा।

इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल घोषणा कर चुके हैं कि दिल्ली में एक स्थान पर अब 50 से अधिक लोग नहीं जुट सकते। इसके बाद शाहीन बाग में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि धरने पर भीड़ को एकत्र नहीं होने दिया जाएगा। शिफ्ट के हिसाब से ही महिलाओं को बुलाया जाएगा। साथ ही प्रवेश द्वार पर एक मशीन लगाई जाएगी और सेनेटाइजर का भी प्रबंध किया जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले दिनों शाहीन बाद धरने पर पहुँची इंडिया टीवी की महिला पत्रकार ने दम तोड़ते शाहीन बाग प्रदर्शन की लाइव तस्वीरों को लोगों के सामने रखा था। इस दौरान जब गिनती की गई तो धरने पर प्रदर्शनकारियों की संख्या 19 थी। इसके बाद हूटर बजाकर न सिर्फ लोगों को एकत्र किया गया बल्कि महिला पत्रकारों से धक्का-मुक्की और उनके कैमरे को तोड़ने तक की कोशिश की गई।

खैर, आपको बता दें कि अभी तक भारत में कोरोना वायरस के चलते तीन मौत हो चुकी हैं, इनमें पहली कर्नाटक, दूसरी दिल्ली और तीसरी मौत महाराष्ट्र में हुई है। वहीं देश में कोरोना वायरस के अब तक 126 मामले सामने आ चुके हैं।