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2 कपूर, 4 बेटियाँ और यस बैंक का डूबना: 26/11 से कैसे जुड़े हैं इस सफर के तार

यस बैंक घोटाले के आरोप में इन दिनों राणा कपूर का नाम सुर्खियों में हैं। राणा कपूर के साथ उनकी तीनों बेटियाँ भी बड़े स्तर पर हुए फर्जीवाड़ा का हिस्सा बताई जा रही हैं। तीनों का नाम- राखी कपूर टंडन, राधा कपूर और रोशनी कपूर है। इनके ख़िलाफ़ ईडी ने लुकआउट नोटिस जारी किया है। इनके अलावा इस बैंक से एक और बेटी का नाम जुड़ा है। लेकिन इस बेटी को बैंक में अपनी हिस्सेदारी पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। अदालत के हस्तक्षेप से जब हक मिला तब तक शायद काफी देर हो चुकी थी। लेकिन, अब भी उनका मानना है कि यदि आज उनके पिता जिंदा होते तो बैंक इस तरह नहीं डूबता।

हम बात कर रहे हैं- शगुन कपूर गोगिया की। शगुन, यस बैंक की स्थापना करने वाले अशोक कपूर की बेटी हैं। उन्हें राणा कपूर से एक समय में बड़ा धोखा मिला। लेकिन, पिता की मौत के बाद आई इस परेशानी की घड़ी में उन्होंने हार नहीं मानी और बैंक में अपनी जगह पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। नतीजतन, बाद में जाकर वह बैंक के बोर्ड में शामिल हो ही गईं।

शगुन कपूर मीडिया को दिए साक्षात्कार में कहती हैं कि यस बैंक का मूल आइडिया उनके पिता का ही था। जिन्होंने इसे एनबीएफसी से बैंक और फिर अहम मुकाम तक पहुँचाने में योगदान दिया। उनका मानना है कि उनके पिता के रहते बैंक ऐसी परेशानियों में कभी नहीं घिरता। वे इसके संचालन में इतनी गड़बड़ियाँ कभी नहीं होने देते।

अब सवाल है कि जब अशोक कपूर मूल रूप से इस बैंक के कर्ता-धर्ता थे, तो फिर फ्रेम में राणा कपूर का नाम और उनकी बेटियों का नाम कैसे आया और आखिर क्यों अशोक कुमार की बेटी को अपने पिता के बैंक में ही जगह पाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी?

दरअसल, ये मनमुटाव की कहानी शुरू होती है 2008 के बाद से। लेकिन इससे पहले ये जानने की जरूरत है कि यस बैंक की शुरुआत में अशोक कपूर और राणा कपूर का आपस में क्या संबंध हैं? तो बता दें, साल 1999 में अशोक कपूर (ABN Amro Bank के पूर्व कंट्री हेड) हरकीरत सिंह ( पूर्व कंट्री हेड Deutche Bank) और राणा कपूर (पूर्व प्रमुख कॉर्परेट और फाइंनेस ANZ Grindlays Bank) ने रोबोबैंक के साथ मिलकर नॉन बैंकिंग फाइंनेंस कंपनी की शुरुआत की। मगर, बाद में हरकीरत सिंह इससे बाहर निकल गए। साल 2003 में अशोक और राणा कपूर को बैंक चलाने का लाइसेंस मिला और वर्ष 2004 में यस बैंक की शुरुआत हुई।

इस शुरुआत के बाद अशोक कपूर बैंक के अध्यक्ष बने, जबकि राणा को बैंक का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया। बैंक ने ग्राहकों के सेविंग अकाउंट पर 6 परसेंट का ब्याज दर देना शुरू किया। लिहाजा कुछ ही सालों में बैंक के पास लाखों ग्राहक पहुँच गए। बैंक बड़े कंपनियों को ऊँचे दर पर लोन दिया करती थी। इसी बीच अशोक कपूर और राणा कपूर की दोस्ती रिश्तेदारी में बदल गई। अशोक कपूर की पत्नी मधु कपूर की बहन से राणा कपूर ने शादी कर ली। ये वो समय था जब दोनों बिजनेस पार्टनर और दोस्त से साढू बने। यानी राणा कपूर बने शगुन के मौसा।

इस दौरान सब कुछ बढ़िया चलता रहा। बैंक भी तेजी से तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ा, लेकिन साल 2008 में मुंबई हुए 26/11 हमले ने पूरी कहानी को ही पलट दिया। अशोक कपूर आतंकी हमले का शिकार हो गए।

दिवंगत अशोक कपूर और उनकी बेटी शगुन कपूर

अशोक की मौत के बाद उनकी पत्नी ने अपने बेटी यानी शगुन को बैंक का निदेशक बनाने का प्रस्ताव रखा। लेकिन बैंक ने उस समय ये कहते हुए उनकी दावेदारी खारिज कर दी कि वो RBI के गाइडलाइंस को पूरा नहीं करती। बाद में मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँचा और साल 2015 में फैसला अशोक कपूर के हक में आया।

लंबी कानूनी के बाद 2019 में शगुन काे यस बैंक के बोर्ड में जगह मिल पाई। 26 अप्रैल 2019 को शगुन बैंक की एडिशनल डायरेक्टर बनाई गईं। इससे पहले साल 2012 में एक और वाकया हुआ जिसने शगुन के सामने उसके मौसा की हकीकत को खोलकर रख दिया।

दरअसल, राणा कपूर ने वर्ष 2012 में अपने बैंक का इतिहास छपवाया था। लेकिन उसने इस इतिहास में अशोक कपूर का कोई ज़िक्र नहीं करवाया। इसे देखने के बाद अशोक कपूर के परिवार ने इसे अपने दोस्त के साथ धोखा करार दिया।

आज बैंक की स्थिति देखकर भी शगुन का कहना है कि उनका और उनके परिवार का भरोसा बैंक पर बरकरार है। इसलिए उन्होंने अपनी 8.5% हिस्सेदारी नहीं बेची। उनका कहना है कि वे इसे उबारने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। बैंक के एस्क्रो अकाउंट में 3600 करोड़ रुपए (50 करोड़ डॉलर) हैं। इससे जमाकर्ताओं का पैसा लौटाने में मदद मिलेगी।

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16 को करेंगे कमाल, राजा-महाराजाओं के दिन लद चुके: MP में कॉन्ग्रेस की रस्सी जल गई, ऐंठन बाकी

मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत और इस्तीफे के बाद कॉन्ग्रेस की हालत पस्त है। एक तरफ कमलनाथ ने कई नेताओं को बागी विधायकों से बातचीत के काम में लगाया है, वहीं दूसरी तरफ़ भाजपा भी अब ‘विधायक बचाओ’ की नीति पर काम कर रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया कभी भी भाजपा का दामन थाम सकते हैं। मंगलवार (मार्च 10, 2020) को होली के दिन उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात भी हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की इस पूरे प्रकरण में अहम भूमिका रही है। उनका ग्वालियर-चम्बल क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है।

आज बुधवार की सुबह भोपाल में मुख्यमंत्री आवास पर कॉन्ग्रेस विधायकों का जमावड़ा लगा। वहाँ से 3 बसों में भर के उन विधायकों को रिसॉर्ट ले लाने की तैयारी की जा रही है। सभी विधायकों को जयपुर ले जाया जाएगा। 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद अब राज्य में बहुमत का आँकड़ा घट कर 104 रह गया है। कॉन्ग्रेस के विधायकों की संख्या 114 से 92 हो गई है। कमलनाथ ने अपने दो मंत्रियों सज्जन सिंह वर्मा और गोविन्द सिंह को बेंगलुरु भेजा है, ताकि वो बागी विधायकों को मना कर वापस ला सकें।

उधर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सिंधिया को विश्वासघाती करार दिया है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में सिंधिया परिवार द्वारा की गई ‘गद्दारी’ और 1967 में राजमाता विजयराजे सिंधिया द्वारा कॉन्ग्रेस विधायकों को तोड़ने वाली घटना याद करते हुए निशाना साधा। गहलोत ने कहा कि सिंधिया जैसे लोग सत्ता के बिना ज्यादा दिन तक नहीं रह सकते और इसलिए जितनी जल्दी निकल लें, सही है। वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सिंधिया ने व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के कारण पार्टी छोड़ी है।

उधर मध्य प्रदेश में भाजपा के सभी विधायकों को कैलाश विजयवर्गीय और गोपाल भार्गव गुरुग्राम लेकर पहुँचे। वो सभी आईटीसी ग्रैंड भारत में रुके हुए हैं। हालाँकि, कुछ भाजपा विधायकों का कहना था कि वे होली खेलने दिल्ली आए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 15 महीनों से सत्ता से दूर शिवराज सिंह चौहान जल्द ही चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। चिंतित कॉन्ग्रेस आलाकमान ने मुकुल वासनिक और हरीश रावत को आनन-फानन में भोपाल भेजा है।

मध्य प्रदेश में भाजपा के नेता नरोत्तम मिश्रा ने स्पीकर एनपी प्रजापति के आवास पर पहुँच कर उन्हें 19 कॉन्ग्रेस विधायकों का इस्तीफा सौंपा। हालाँकि, कॉन्ग्रेस अभी तक उम्मीद हारी नहीं है। पीसी शर्मा ने दावा किया कि अभी तो कमलनाथ का मास्टरस्ट्रोक बाकी है। हरियाणा में कॉन्ग्रेस के विधायक कुलदीप बिश्नोई ने अपनी ही पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में अभी कई नेता है जो अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस विधायक अर्जुन सिंह ने भी दावा किया है कि उनकी पार्टी विधानसभा में बहुमत साबित कर देगी। उन्होंने कहा कि 16 मार्च को सब कुछ साफ़ हो जाएगा, जब पता चलेगा कि नंबरगेम में कॉन्ग्रेस ही आगे है। उन्होंने दावा किया कि कमलनाथ सरकार अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करेगी। उन्होंने कहा- “राजा -महाराजाओं के दिन लद चुके हैं।” उन्होंने कहा कि सिंधिया के पार्टी छोड़ने का कोई असर नहीं पड़ेगा।

दिल्ली दंगे का केन्द्र बना राजधानी स्कूल का मालिक फैजल फारुख गिरफ्तार: पुलिस ने सील किया स्कूल

सीएए विरोध के नाम पर दिल्ली में हुई हिंदू विरोधी हिंसा के दौरान दंगाईयों की शरणगाह बने शिव विहार के राजधानी पब्लिक स्कूल के मालिक को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं दिल्ली पुलिस ने दंगों में स्कूल की भूमिका संदिग्ध होने पर पूरे स्कूल को सील कर दिया है। दरअसल दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में अब तक 53 लोगों की मौत सामने आ चुकी है वहीं घटना में कुल 400 लोग घायल हुए थे।

दिल्ली पुलिस ने स्कूल और स्कूल के मालिक की दिल्ली दंगों में संदिग्ध भूमिका की जाँच के चलते स्कूल मालिक फैसल फारुख को बीते शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। वहीं दिल्ली पुलिस ने आगे की कार्रवाई करते हुए बीते शुक्रवार को राजधानी स्कूल को सील कर दिया है।

इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हमने शिव विहार में राजधानी पब्लिक स्कूल के मालिक को गिरफ्तार किया है, और दंगों में उसकी भूमिका की जाँच की जा रही है। वहीं 12 से स्कूल में शुरू होने वाली बच्चों की वार्षिक परीक्षाओं के लेकर DoE के निदेशक विनय भूषण ने कहा कि वे इस मामले को देख रहे हैं। “हमें घटना के बारे में पता चला है। हमने अधिकारियों को परीक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। हम छात्रों का समय बर्बाद नहीं कर सकते। उन्होंने हिंसा के कारण पहले ही बहुत कुछ झेला है।

वहीं वाइस चेयरमैन सदफ फैसल का कहना है कि दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने उसके पति और स्कूल के मालिक फैसल फारूक को शनिवार शाम गिरफ्तार कर लिया था “हमें पता नहीं है कि हमें सजा क्यों दी जा रही है? मैंने और मेरे पति ने जीवन भर शिक्षा के क्षेत्र में काम किया है। हमें नहीं पता कि पुलिस मेरे पति का नाम हिंसा से जोड़कर हमें बदनाम करने की कोशिश क्यों कर रही है। वहीं फैसल के वकील शम्स ख्वाजा ने सोमवार को दिल्ली की एक अदालत का दरवाजा खटखटाया और सीलिंग और उसके मालिक को हिरासत में लेने की चुनौती दी।

दरअसल 24 फरवरी को दिल्ली में सीएए विरोध के नाम पर हुई हिंदू विरोधी हिंसा के दौरान दंगाइयों ने पहले तो करावल नगर खजुरी खास स्थित ताहिर हुसैन के मकान को और फिर शिव विहार स्थित राजधानी पब्लिक स्कूल को अपना केन्द्र बनाया था, क्योंकि यह दोनों ही इमारतें हिंदू इलाके में ऊँची और मुस्लिम मालिकों की थीं। यही वो राजधानी स्कूल है जिसकी सबसे ऊपरी छत को दंगाइयों ने अपना केन्द्र बनाते हुए वहाँ बड़ी गुलेल को लगाया था। इसके साथ ही बड़ी संख्या में ईंट-पत्तर और पेट्रोल बम और तेजाब की बोतलों को छत पर पहले ले ही तैयारी के साथ रखा गया था।

इतना ही नहीं चश्मदीदों के मुताबिक स्कूल से सभी मुस्लिम बच्चों को पहले ही निकाल दिया गया था और फिर इसी स्कूल में शेष हिंदुओं के बच्चों को बंधक भी बनाया गया था। इसके बाद ही स्कूल की छत का अपना केन्द्र बनाकर हजारों दंगाइयों ने हिंदुओं के घरों और संपत्तियों को अपना निशाना बनाकर उनको तबाह किया था।

आज नहीं, 12 मार्च को BJP में शामिल होंगे सिंधिया, भाजपा मुख्यालय में मंथन जारी

कॉन्ग्रेस से इस्तीफा वाले दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया अब आज नहीं बल्कि 12 मार्च को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। ऐसा मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है। सिंधिया के कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद उनके समर्थक माने जाने वाले 22 विधायकों ने राज्यपाल के पास इस्तीफा भेज दिया है।

न्यूज 18 की खबर के मुताबिक ज्योतिरादित्य सिंधिया गुरुवार सुबह यानी 12 मार्च को 9 बजे बीजेपी में शामिल होंगे। सिंधिया मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्यता लेंगे, आज शिवराज भोपाल में हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शिवराज सिंह आज रात दिल्ली आ सकते हैं। वहीं, सपा और बसपा के एक-एक विधायकों ने शिवराज सिंह चौहान के घर जाकर उनसे मुलाकात की है। खबर है कि वे दोनों भी बीजेपी का दामन थाम सकते हैं।

मध्यप्रदेश के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देते ही देश की राजनीति में भू-चाल आ गया है। एक तरफ कमलनाथ सरकार के विधायकों का इस्तीफा देने का सिलसिला जारी है, जो कि इस्तीफा देने वालों की संख्या 19 से बढ़कर 22 पहुँच गई है। वहीं एक तरफ तो कमलनाथ सरकार का गिरना तय माना जा रहा है तो दूसरी ओर बीजेपी ने अपना गणित फिट करने की जुगत शुरू कर दी है। इसी बीच दिल्ली बीजेपी मुख्यालय पर चुनाव समिति की बैठक जारी है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई बड़े नेता शामिल हैं।

वहीं पहले कहा जा रहा था कि कॉन्ग्रेस को अलविदा कहने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया आज ही बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। कयास यह भी लगाए जा रहे थे कि चुनाव समिति की बैठक में राज्यसभा के उम्मीदवारों का फैसला भी हो सकता है। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक सिंधिया को बीजेपी या तो राज्यसभा की टिकिट दे सकती है या फिर उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।

उधर बेंगलुरु में रह रहे 19 कॉग्रेसी विधायकों ने कर्नाटक के DGP को पत्र लिखकर सुरक्षा, पुलिस रक्षक दल की माँग की है। पत्र में उन्होंने लिखा-हम कुछ महत्वपूर्ण काम के लिए अपनी मर्जी से कर्नाटक आए हैं, जिसके लिए हमें बेंगलुरु के अंदर और आसपास अपनी सुरक्षित आवाजाही के लिए सुरक्षा की आवश्यकता है। वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल लाल जी टण्डन को चिट्ठी लिखकर 6 मंत्रियों को बर्खास्त करने की सिफारिश कर दी है।

Holi: कहीं लड्डू मार तो कहीं होली पर लड़की भागकर करती है शादी, लोग अंगारों पर चलकर मनाते हैं रंगोत्सव

पूरे देश में आज होली का त्यौहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है, लेकिन होली का त्यौहार देश के अलग-अलग- हिस्सों में कई तरीके से भी मनाया जाता है। कहीं भाषा के साथ परंपरा बदल जाती है तो कहीं रंग के साथ होली का त्यौहार मनाने की पद्धती बदल जाती है।

आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही स्थानों के बारे में जहाँ होली का त्यौहार विशेष और विचित्र रूप से मनाया जाता है। होली के नाम आते ही सबसे पहले ब्रज की होली ध्यान में आती है, क्यों कि यहाँ होली का त्यौहार सबसे लंबे समय तक यानि कि 40 दिनों तक मनाया जाता है। ब्रज क्षेत्र में फाल्गुन माह लगते ही होली की शुरूआत हो जाती है, लेकिन इसके सबसे खास बरसाने की लड्डू मार होली और लट्ठ मार होली मानी जाती है। वृंदावन मथुरा और खासकर बरसाना में मनाई जाने वाली लट्ठ मार होली और लड्डू मार होली को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों की भीड़ एकत्र होती है।

नेशनल मीडिया के जमावड़े के बीच नंदगाँव से बरसाना पहुँचे हुरियारों के देखते ही तैयार खड़ी बरसाने की हुरियारिन उन पर लाठी लेकर टूट पड़ती है। यहाँ की हर एक गली से लेकर विशेष तौर पर मंदिरों में मनाई जाने वाली होली लोगों के जेहन में हमेशा के लिए यादगार बनकर रहती है। इसके पीछे का आध्यात्मिक कारण यह कि मथुरा में भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया था, नंदगाँव के कुँवर थे और बरसाने की उनकी राधा प्यारी थीं।

अब बात करते हैं मध्य प्रदेश की तो यहाँ भील आदिवासी समुदाय अनोखे अंदाज में होली का त्यौहार मनाते हैं। इस त्यौहार का विशेष तौर पर लड़के-लड़कियाँ पूरे साल बेसब्री से इंतजार करते हैं। भील होली को भगोरिया भी कहते हैं। होली के अवसर पर ग्रामीण बाजार लगता है जिसे हाट कहा जाता है। यहाँ पर लोग होली की खरीदारी करने आते हैं। इस दौरान लड़के-लड़कियाँ अपने लिए जीवनसाथी भी ढूँढने आते हैं। आदिवासी लड़के एक खास तरह का वाद्ययंत्र बजाकर डांस करते हैं। इस दौरान कोई लड़की किसी लड़के को गुलाल लगा देती है और बदले में वो भी लड़का वैसा ही करता है तो दोनों की रजामंदी मान ली जाती है। इसके बाद लड़का लड़की को भगाकर ले जाता है। फिर दोनों की शादी हो जाती है।

वहीं मालवा में होली के दिन लोग एक दूसरे पर अंगारे फेंकते हैं। होली के दिन ये लोग एक दूसरे पर अंगारे फेंकते हैं। यह धार्मिक मान्यता है। ऐसा कहा जाता है कि एक दूसरे पर अंगारा फेंकने से होलिका राक्षसी मर जाती हैं।

राजस्थान बांसवाड़ा और डूंगरपुर ज‌िले में लोग अंगारों पर चलकर होली मनाते हैं। होलिका दहन के अगले सुबह होलिका दहन की राख के अंदर दबी हुआ आग पर चलते हैं। इस दौरान एक दूसरे पर पत्थरबाजी करते हुए खून की होली खेलते हैं। ऐसी मान्यता है कि अगर पत्थर लगने से खून निकल आती है तो उसका पूरा साल अच्छा जाता है।

‘हम सभी जरूरी काम से आए हैं, हमें सुरक्षा दी जाए’ – बेंगलुरु में ठहरे MP के बागी विधायकों ने DGP को लिखा पत्र

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के खेमे में ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे ने बड़ी खलबली मचा दी है। सिंधिया के इस्तीफा देते ही उनके समर्थक सभी विधायक, जो बेंगलुरू में हैं, उन्होंने सुरक्षा की माँग की है। इन सभी विधायकों ने डीजीपी को पत्र लिखकर सुरक्षा की माँग की है।

उन्होंने पत्र में लिखा है कि बेंगलुरू और आस-पास के इलाकों में सुरक्षा को बढ़ाया जाए। साथ ही नेताओं ने माँग की है कि स्थानीय पुलिस उन्हें सुरक्षा और एस्कॉर्ट उपलब्ध कराए। खबरों के अनुसार, सिंधिया ग्रुप के ये विधायक बेंगलुरु के एक रिजॉर्ट में ठहरे हुए हैं।

विधायकों द्वारा डीजीपी को लिखा गया पत्र

विधायकों ने यह पत्र कर्नाटक के डीजीपी को लिखा है। पत्र में लिखा है कि सभी मध्य प्रदेश के विधायक और सांसदों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए। विधायकों ने लिखा है कि वो वहाँ पर जरूरी काम से आए हैं, जिसकी वजह से उन्हें सुरक्षा और एस्कॉर्ट स्थानीय पुलिस द्वारा मुहैया कराई जाए, ताकि सभी लोग बेंगलुरू में सुरक्षित रह सकें और कहीं भी आ जा सकें।

गौरतलब है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया। सिंधिया ने अपना इस्तीफा कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को सौंप दिया है।

वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा कॉन्ग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देने के कुछ मिनटों बाद ही सिंधिया खेमे के 14 अन्य कॉन्ग्रेस विधायकों ने भी प्रदेश के राजभवन को विधानसभा सदस्यता से अपने इस्तीफे ई-मेल कर दिए हैं।

अमित शाह के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया ने की प्रधानमंत्री से मुलाकात, बदले सियासी समीकरण

पूरा देश होली का त्यौहार मनाने में जुटा हुआ है, कुछ इसी तरह से मध्य प्रदेश के लोग और सीएम कमलनाथ भी लोगों के साथ होली का त्यौहार मनाने में जुटे हुए थे, लेकिन ज्योतिरादित्य के एक पत्र ने मध्य प्रदेश की ही नहीं बल्कि पूरी देश की राजनीति में तूफान ला दिया। वह पत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया का कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के लिए पार्टी से अपना इस्तीफा देने के संबंध में था।

सिंधिया का कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने के बाद कमलनाथ के विधायकों में भगदड़ सी मच गई है। अभी तक कॉन्ग्रेस के 19 विधायक कमलनाथ सरकार से अपना इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं 19 विधायकों के इस्तीफे के बाद मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार का गिरना तय माना जा रहा है। दूसरी ओर गृहमंत्री अमित शाह के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की है। इसके बाद अमित शाह सिंधिया को अपने साथ अपने आवास पर ले गए। अटकलें लगाई जा रही हैं कि सिंधिया आज शाम छह बजे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं।

दूसरी ओर सपा विधायक राजेश शुक्ला और बसपा विधायक संजीव कुशवाहा ने भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान के आवास पर पहुँचकर पूर्व सीएम चौहान से मुलाकात की है। उधर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल लाल जी टण्डन को चिट्ठी लिखकर 6 मंत्रियों को बर्खास्त करने की सिफारिश भी कर दी है।

दरअसल, मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने सरकार तो बनाई लेकिन बहुत कोशिशों के बावजूद ज्योतिरादित्य सिंधिया सीएम नहीं बन सके। इसके छह महीने बाद ही लोकसभा चुनाव में हार सिंधिया के लिए दूसरा बड़ा झटका साबित हुई। सीएम ना बन पाने के बावजूद लगभग 23 विधायक ऐसे हैं, जिन्हें सिधिया के खेमे का माना जाता है। इसमें से छह को मंत्री भी बनाया गया। इन्हीं में से कुछ विधायकों ने कमलनाथ की सरकार को मुश्किल में डाल दिया है।

वहीं लोकसभा चुनाव में हार के बाद से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। बार-बार माँग करने के बावजूद उन्हें मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष का पद भी नहीं मिला, जिसने आग में घी काम का काम किया है, लेकिन इस बार सिंधिया समझौते के मूड में नहीं हैं। उधर 13 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए नॉमिनेशन का आखिरी दिन है। कहा जा रहा है कि सिंधिया खुद के लिए राज्यसभा सीट या मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष का पद चाहते थे। लेकिन अब बात बिगड़ चुकी है।

उधर मध्य प्रदेश सरकार के छह मंत्री समेत कुल 17 विधायक बेंगलुरु में हैं। आशंका जताई जा रही हैं कि सिंधिया अपने समर्थकों के साथ बीजेपी जॉइन करने वाले हैं।

गौरतलब है कि 9 मार्च को होली के दिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कॉन्ग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया था। सिंधिया ने कॉन्ग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिखते हुए कहा था कि वह 18 वर्षों से कॉन्ग्रेस के प्राथमिक सदस्य रहे हैं, लेकिन अब राह अलग करने का वक्त आ गया है। सिंधिया ने सोनिया पर सब कुछ जानते हुए कुछ नहीं करने आरोप लगाया था और लिखा था, “मैं भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूँ और जैसा कि आपको अच्छी तरह पता है कि पिछले एक साल से यह मार्ग प्रशस्त किया गया है।” आज भी मैं अपने राज्य और देश के लोगों की रक्षा करने के अपने लक्ष्य और उद्देश्य पर अडिग हूँ।

धोखेबाज, गद्दार- ज्योतिरादित्य सिंधिया के विकिपीडिया पेज पर कॉन्ग्रेस का हमला

मध्य प्रदेश की राजनीति में सोमवार शाम से शुरू हुआ सियासी उथल-पुथल का ताज़ा दौर अब अपने मुकाम पर पहुँच चुका है। राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ से नाराज़ चल रहे कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

जब सारा देश होली के उन्माद में डूबा था उसी समय उन्होंने सोनिया गाँधी को अपना इस्तीफा भेजा जिसे पार्टी ने स्वीकार कर लिया है। हालाँकि, पार्टी ने यह कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया है।

सिंधिया के इस्तीफ़े के बाद कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं के साथ ही पार्टी समर्थकों ने भी अपनी-अपनी तरह से अपना गुस्सा व्यक्त किया। पार्टी समर्थकों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को गद्दार और धोखेबाज जैसे विशेषणों से पुकारना शुरू कर दिया है।

यही नहीं, कुछ समर्थकों ने सिंधिया के विकिपीडिया पेज को अपने गुस्से का निशाना बनाया और वहाँ पर अपशब्दों के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया से जुड़ी तमाम जानकारियों को ‘अपडेट’ कर दिया। एक ट्विटर यूजर ने यह भी लिखा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया से नाराज किसी पार्टी समर्थक ने विकिपीडिया पेज अपडेट कर उनको ‘गधा’ भी लिखा।

संलग्न ट्वीट में देखा जा सकता है कि सिंधिया के लिए ‘भारतीय कॉमेडियन’ और ‘सत्ता का भूखा सिंधिया’ जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया। विकिपीडिया पेज पर ढूँढने पर पता चलता है कि कुछ और भी जानकारियों से छेड़छाड़ की गई है।

कुछ ऐसे भी वाक्य थे, जिनमें उन्हें कॉन्ग्रेस का सबसे समझदार नेता बताया गया था। इसमें लिखा गया कि यह पार्टी कि भी गलती है कि वो ऐसे पार्टी के प्रति वफादार नेता को इस्तेमाल नहीं कर पाए। एडिट करने के बाद लिखा गया है कि उन्होंने भाजपा ज्वाइन करने का फैसला इसीलिए लिया क्योंकि कॉन्ग्रेस उनके टेलेंट का सम्मान नहीं कर पाई।

साभार- विकिपीडिया

एडिट की गई एक अन्य जानकारी में सिंधिया को ‘धोखेबाज’ भी लिखा गया। हालाँकि, इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के विकिपीडिया पेज पर उपलब्ध जानकारी को दोबारा सही कर लिया गया है लेकिन यह दर्शाता है कि कॉन्ग्रेस किस स्तर तक गिर सकती है।

साभार- विकिपीडिया

HC के आदेश को SC में चुनौती देगी योगी सरकार, नहीं हटाए जाएँगे ‘दंगाइयों’ के होर्डिंग्स

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी योगी सरकार लखनऊ शहर के चौराहों पर लगे दंगाई अपराधियों के पोस्टर हटाने को तैयार नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर योगी सरकार हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती देने की तैयारी में जुट गई है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने कानून के अधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका तैयार करने को कहा है। याचिका इस सप्ताह के अंत तक दायर की जाएगी।

दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा था कि सड़क के किनारे होर्डिंग्स पर आरोपितों की तस्वीरें और उस पर छपे व्यक्तिगत विवरण गोपनीयता में सरकार का अनुचित हस्तक्षेप है। हाईकोर्ट ने सरकार को चौराहों पर लगे आरोपितों के पोस्टर हटाने के साथ ही इस पर 16 मार्च तक रजिस्ट्रार जनरल को एक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी का कहना है कि हम इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की जाँच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे कानून के जानकार यह भी जाँच कर रहे हैं कि पोस्टर हटाने के लिए किस आधार पर यह आदेश जारी किया गया है। हालाँकि, सरकार तय करेगी कि कौन सा विकल्प अपनाना होगा। त्रिपाठी ने एक बार सरकार भी मंशा फिर साफ की और कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने वाले लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

दरअसल, पिछले साल 19 दिसंबर को लखनऊ के कई स्थानों पर उपद्रवियों ने सीएए विरोध के नाम पर हिंसा की थी, जिसमें करोड़ों की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया था। हिंसा में शामिल 57 लोगों के नाम और पते के साथ लखनऊ शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर कुल 100 होर्डिंग्स लगाए गए थे। प्रशासन ने इससे पहले आरोपितों पर 1.55 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाते हुए नोटिस जारी किया है, जिसके तहत 8 अप्रैल तक जुर्माने की रकम को जमा कराना होगा।

जिसके पीछे सरकार की दलील थी कि सरकार इन उपद्रवियों के चेहरों को बेनकाब करना चाहती है, जिन्होंने सीएए विरोध के नाम पर हिंसा की और सरकार की करोड़ों रुपयों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया।

लखनऊ में 19 दिसंबर को हुई हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीजीपी ओपी सिंह ने कहा था कि वे हिंसा में किसी भी निर्दोष को हाथ नहीं लगाएँगे, लेकिन जिन्होंने हिंसा की है, उन्हें किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि प्रदेश में सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया है, उसकी भरपाई उपद्रवियों की संपत्ति से ही की जाएगी।

सोशल मीडिया पर जजों और न्यायपालिका को लोगों ने क्यों कहा Justitutes? बन गया टॉप ट्रेंड

लखनऊ हिंसा में शामिल आरोपितों की पहचान पोस्टर के जरिए सार्वजनिक स्थानों पर लगवाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार (मार्च 09, 2020) को फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में योगी सरकार को सख्त हिदायत दी और इस मामले में लखनऊ के डीएम और कमिश्नर को इन पोस्टरों को हटवाने का आदेश जारी किया है। इसके लिए प्रशासन को 16 मार्च तक का समय मिला है।

लेकिन कोर्ट के इस फैसले के आने के बाद योगी सरकार के समर्थक और विरोधी ट्विटर पर एक-दूसरे पर लगातार कमेंट्स कर रहे हैं। दरअसल, कोर्ट का यह फैसला जैसे ही आया, उसके बाद से ट्विटर पर लगातार ‘वाह रे कोर्ट’ और ‘इलाहाबाद हाईकोर्ट’ ट्रेंड कर रहा है।

यही नहीं, ट्विटर पर यूजर्स ने ‘BehaveJustitute’ जैसे हैशटेग भी इस्तेमाल किए और एक समय यह नम्बर एक पर ट्रेंड करते हुए भी देखा गया। सोमवार शाम ”वाह रे कोर्ट’ हैशटैग तो कुछ ही देर में टॉप पर पहुँच गया। सोशल मीडिया यूजर कोर्ट के इस फैसले पर अपनी नाराजगी जताते हुए प्रतिक्रिया देते हुए नजर आए।

दरअसल, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ लखनऊ में प्रदर्शन करने वालों का फोटो सहित पोस्टर व होर्डिंग लगाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। रविवार का अवकाश होने के बावजूद इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर व न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने इस प्रकरण पर सुनवाई की।

इस पर लखनऊ प्रशासन की ओर से सार्वजनिक स्थलों पर होर्डिंग व पोस्टर में प्रदर्शनकारियों के चित्र लगाने को निजता के अधिकार का हनन मानते हुए हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका कायम की थी।

जनहित याचिका में सरकार से पूछा गया था कि किस कानून के तहत आंदोलन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ करने वालों की फोटो लगाई गई है? क्या सरकार बिना कानूनी उपबंध के निजता के अधिकार का हनन कर सकती है? कोर्ट में यूपी सरकार की ओर से कहा गया था कि प्रदर्शन के दौरान लोक व निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों को हतोत्साहित करने के लिए यह कार्रवाई की गई।

हाईकोर्ट के आदेश को लेकर सोशल मीडिया स​हित विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है। सोशल एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेश को प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है।