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केजरीवाल मेरे भाई को दंगाई साबित कर देंगे, उन्हें ताहिर हुसैन ने टॉर्चर कर मार डाला: अंकित शर्मा के भाई

दिल्ली में हिन्दुओं के ख़िलाफ़ हुए दंगों में कई लोगों के मारे जाने की ख़बर है। इनमें से एक अंकित शर्मा भी हैं। उन्हें आप के पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडे घसीट कर ले गए और मार डाला। उनके पिता रवींद्र शर्मा ने बेटे की मौत के लिए आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार बताया है। अंकित आईबी में कार्यरत थे। उनके पिता भी आईबी में ही बतौर हेड कॉन्स्टेबल कार्यरत हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल के निगम पार्षद ताहिर हुसैन के घर से लगातार बमबारी और पत्थरबाजी होती रही।

ताहिर हुसैन के घर के बाहर भी पत्थरों का जमावड़ा लगा हुआ है। हुसैन के घर के बाहर कई बोतलें और पेट्रोल बम पड़े हुए हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में उनकी इमारत की छतों पर भी पत्थर और बम देखे गए हैं। विदेशी मीडिया पोर्टल ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ)’ ने अपने लेख में लिखा है कि अंकित के भाई अंकुर ने बताया कि ‘जय श्री राम’ बोलते हुए आई मजहबी भीड़ ने अंकित की हत्या कर दी। अंकुर ने प्रोपेगेंडा पोर्टल की इस ख़बर को नकार दिया है। अंकुर ने ऑपइंडिया से बात करते हुए स्पष्ट कहा कि डब्ल्यूएसजे में उनके हवाले से जो बातें लिखी है वह उन्होंने कही ही नहीं है।

अंकुर ने बताया कि गुरुवार (फरवरी 25, 2020) को उनके भाई अंकित ड्यूटी से लौट कर बाइक पार्क करने के बाद मोहल्ले के लोगों से बातचीत करने निकल गए। उन्होंने कहा था कि वे इलाक़े के लोगों को जानते हैं और दंगा रोकने में कामयाब होंगे। परिवार के लाख मना करने के बावजूद अंकित हिन्दुओं और मुस्लिमों- दोनों से ही बातचीत करने और उन्हें समझाने निकल गए। हालाँकि, हिन्दुओं ने तो अंकित की बात मान ली लेकिन दूसरे समुदाय शांति के लिए राजी नहीं हुआ। तभी ताहिर हुसैन के इमारत से पत्थरबाजी शुरू हो गई और इस्लामी भीड़ ने अंकित को पकड़ कर घसीटना शुरू कर दिया। वे उन्हें पकड़ कर हुसैन की इमारत में ले गए।

अंकुर ने रतन लाल और अपने भाई की हत्या के बारे में बात करते हुए बताया कि अब ‘वो लोग’ पुलिस वालों को चुन-चुन कर मार रहे हैं। अंकित को भी इसीलिए मारा क्योंकि उन्होंने बताया कि वे एक आईबी ऑफिसर हैं। अंकित मोहल्ले में सबके पसंददीदा व्यक्ति थे और वो सभी से घुलमिल कर रहते थे। उनका शव नाले में क्षत-विक्षत अवस्था में मिला था। अंकुर ने बताया कि पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंकुर ने कहा:

“मेरे भाई अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन ने मारा है। वो यहाँ दंगाइयों का सबसे बड़ा सरगना है। वही दंगे करवा रहा है। जब मेरे भाई को इस्लामी दंगाई घसीटते हुए ले जा रहे थे, तब वही उन्हें निर्देश दे रहा था कि क्या और कैसे करना है। अरविंद केजरीवाल मेरे भाई को दंगाई साबित कर देंगे। मेरा भाई दंगाई नहीं था। वो एक सरकारी अधिकारी था, जो लोगों को समझा रहा था कि झगड़ा मत करो। वो दोनों तरफ के लोगों को जानता था, इसलिए उन्हें समझाने गया था।”

अंकुर की माँग है कि उनके मृत भाई अंकित शर्मा को ‘शहीद’ का दर्जा मिले। अंकित के गर्दन और अन्य हिस्सों में कई जगह धारदार हथियार के वार से कटे हुए निशान मिले थे। अंकुर ने बताया कि मारने से पहले उन्हें काफ़ी टॉर्चर किया गया।

(इस लेख को अँग्रेजी में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

ऑपइंडिया एक्सक्लूसिव: हिंदू ने टोपी पहन खुद को बताया इमरान, ताहिर हुसैन के गुंडों से बचाई जान

IB के अंकित शर्मा की लाश को नाले में फेंक रहे AAP पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडे: सामने आया नया Video

ताहिर हुसैन के घर की छत पर पेट्रोल बम, पत्थरों का मिला जखीरा: पार्षद के बचाव में उतरी AAP

दंगों को लेकर 48 FIR-106 गिरफ्तार, हेट स्पीच पर अभी एक्शन नहीं: HC में अब 13 अप्रैल को सुनवाई

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा को लेकर लगातार दूसरे दिन गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। पुलिस ने अदालत को बताया कि अब तक इस मामले में 48 एफआईआर दर्ज किए जा चुके हैं। 106 गिरफ्तारियॉं हुई है। साथ ही पुलिस ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए भड़काऊ बयान को लेकर किसी पर केस नहीं दर्ज करने का फैसला लिया है।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने केवल 3
भड़काऊ भाषणों का जिक्र किया है। ऐसे कई भाषण मौजूद हो सकते हैं। उन्होंने कोर्ट से हालात सामान्य होने तक हस्तक्षेप नहीं करने और केंद्र सरकार को भी पार्टी बनाने की गुजारिश की।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायाधीश सी हरि शंकर की पीठ ने केंद्र सरकार को पक्षकार बनाते हुए जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।

इससे पहले बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भड़काऊ भाषण को लेकर सख्त टिप्पणी की थी। अदालत में कपिल मिश्रा के बयान का विडियो भी चलाया गया था। याचिकाकर्ता ने भाजपा नेता मिश्रा, पार्टी सांसद प्रवेश वर्मा और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के बयानों का अदालत के सामने हवाला दिया था।

हिंसा में अब तक 34 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है। परिजनों को शव के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। पुलिस-प्रशासन का कहना है कि पोस्टमॉर्टम के बाद ही बॉडी दी जाएगी। बोर्ड गठित नहीं होने से पोस्टमॉर्टम में देरी हो रही है। इस मामले में वकील महमूद पारचा की याचिका पर शुक्रवार को कोर्ट में सुनवाई होगी।

यहाँ बता दें, उत्तर-पूर्वी में दिल्ली हिंसा के मद्देनजर अबतक 106 स्थानीय लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ये गिरफ्तारी सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हुई है।

ऑपइंडिया एक्सक्लूसिव: हिंदू ने टोपी पहन खुद को बताया इमरान, ताहिर हुसैन के गुंडों से बचाई जान

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा के दौरान समुदाय विशेष की दंगाई भीड़ ने हिंदुओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया। इस बात का सबूत वो अनेक आपबीती हैं, जिनमें हिंदुओं को न केवल इस्लामी भीड़ से बचने के लिए अपने हाथ का कलावा उतारकर एवं अन्य हिंदू चिह्नों को खुद से दूर करके सड़कों पर घूमना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें खुद को मुस्लिम तक बताना पड़ रहा है।

हिंसाग्रस्त इलाके चाँदबाग के एक विडियो में आप पार्षद ताहिर हुसैन के क्षेत्र में रहने वाला शख्स अपनी आपबीती सुना रहा है। ये विडियो 26 फरवरी का है। व्यक्ति की मानें तो ड्यूटी से लौटते वक्त ताहिर हुसैन के घर में मौजूद भीड़ ने उस पर हमला किया। उसके पकड़कर अंदर घसीटने लगी। लेकिन, हालातों को समझते हुए उसने समझदारी दिखाई। जान बचाने के लिए जल्दी से टोपी पहनी और भीड़ को अपना नाम इमरान बता जान बचाई।

व्यक्ति के मुताबिक इमरान नाम सुनते ही भीड़ ने उसे फौरन छोड़ दिया और वो भागकर अपनी गली में चला गया। सोचिए अगर, उस समय इस शख्स ने जान बचाने के लिए अपनी पहचान इमरान के रूप में नहीं बताई होती तो उसके साथ भी वही सब होता जो आईबी के अंकित शर्मा के साथ हुआ।

हिंदू व्यक्ति के मुताबिक, इस हमले में उसे चोटें आई। विडियो में वह अपने सूजे पैर और घुटने दिखा रहा है। व्यक्ति से जब पूछा गया कि क्या उस भीड़ ने जनेऊ वगैरह चेक करने की कोशिश नहीं की, तो व्यक्ति ने बताया कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। उन्होंने शर्ट पकड़कर खींचा। लेकिन मैंने कहा, “अरे मैं तो इमरान हूँ यार, तुम्हारा भाई हूँ, मुझे क्यों खींच रहे हो” तो उन्हें तुरंत जाने दिया गया।

गौरतलब है कि इस विडियो वीडियो में हिंदू व्यक्ति के अलावा कुछ महिलाएँ भी हैं। जो अपनी पीड़ा व्यक्त कर रही हैं। महिलाओं को कहते सुना जा सकता है कि वे लोग 4-5 दिन से भूखे पड़े हुए हैं। खाने के लिए कुछ नहीं हैं।

वहीं दूसरी महिला के मुताबिक इलाके में मौजूद एक मंदिर में भीड़ ने बहुत तोड़फोड़ की है। मंदिर के पंडित और पंडिताइन उसमें फँसे हुए थे। उनकी दो बेटियॉं भी हैं जो दूसरों के घर में रह रही हैं। इसकी जानकारी मिलने के बाद कुछ हिंदू इकट्ठा हुए और उन्हें किसी तरह बचाया गया।

पोल खुली तो AAP पार्षद ताहिर हुसैन ने लॉक किया घर: यहीं से दंगाइयों ने फेंके थे पेट्रोल बम

आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन ने अपना घर बंद कर लिया है। उसने अपने घर के दरवाजे को लॉक कर दिया है। ऐसा इसीलिए, क्योंकि लगातार एक के बाद एक वायरल होते विडियो के बाद उसकी पोल खुल रही थी। वायरल हुए विडियो में उसके घर से लगातार बमबारी और पत्थरबाजी होते देखी जा सकती है। आरोप है कि हुसैन के घर से दंगाई पेट्रोल बम फ़ेंक रहे थे। पत्थरबाजी कर रहे थे। अंकित शर्मा सहित 4 लोगों की हत्या कर उनकी लाश नाली में फेंक देने का वीडियो भी वायरल हुआ। ये आरोप ताहिर हुसैन के गुंडों पर ही है।

ऑपइंडिया के रिपोर्टरों ने ताहिर हुसैन के घर के पास जाकर देखा, जहाँ पता चला कि उसने अपने घर को बंद कर रखा है। टीवी न्यूज़ से लेकर सोशल मीडिया तक लगातार चल रहा था कि ताहिर हुसैन के घर की छत पर पत्थर जमा कर के रखे गए हैं। उसके घर की छत पर पत्थरों के ढेर के कई वीडियो वायरल हुए थे। पोल खुलने के बाद मीडिया से ये सब छिपाने के लिए ही ताहिर हुसैन ने अपने घर का दरवाजा बोल्ट से लॉक कर दिया था।

पूरे मामले पर हुसैन की सफाई भी आई है। उन्होंने वीडियो के माध्यम से आरोप लगाया कि उनके घर पर उपद्रवियों ने कब्ज़ा कर लिया है और उन्हें भगा दिया है। हालाँकि, वो उन्हीं कपड़ों में स्पष्टीकरण देने आ गए, जिन कपड़ों में उन्हें अपने छत पर डंडे लेकर घूमते हुए देखा गया था। अपना बचाव करते हुए ताहिर ने कहा:

मैंने पुलिस को बताया कि उपद्रवियों ने मेरे घर पर कब्जा कर लिया है। पुलिस फोर्स देर शाम करीब आठ 8:30 बजे ही पहुँच सकी। वहाँ पर सीनियर पुलिस अफसर डॉ. ए के सिंगला मौजूद थे। उनके साथ एक और वरिष्ठ अधिकारी थे, जिनका नाम उन्होंने ज्वाइंट सीपी आलोक जी बताया। पुलिस अधिकारियों ने मुझे सुरक्षा का आश्वासन दिया और कहा कि मैं अपने परिवार को निकालकर किसी सुरक्षित स्थान पर ले जा सकता हूँ। पूरी तलाशी के बाद पुलिस ने परिसर को कब्जे में ले लिया और बिल्डिंग की छत पर पुलिस तैनात हो गई।

ताहिर हुसैन लगातार कई तरह की बातें कर अपना बचाव कर रहा है। कभी वो कह रहा है कि वो घर पर था ही नहीं तो कभी वो कह रहा है कि वह दोबारा अपने घर की स्थिति देखने आया था।

IB के अंकित शर्मा की लाश को नाले में फेंक रहे AAP पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडे: सामने आया नया Video

आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडों पर 4 लोगों को मार डालने के आरोप लगे हैं। हुसैन पर आरोप है कि उसके गुंडे आईबी के अंकित शर्मा सहित 4 युवकों को घसीट कर ले गए और उन्हें मार कर उनके शवों को नाले में फेंक दिया। पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने एक विडियो ट्वीट कर इसका खुलासा किया है। दवा किया जा रहा है कि इस विडियो में देखा जा सकता है कि ताहिर हुसैन के घर में ले जाकर मारे गए लोगों के शवों को उसके गुंडे नाली में फेंक रहे हैं।

केजरीवाल की पार्टी अपने पार्षद के बचाव में उतर आई है। हुसैन ने भी एक विडियो जारी कर अपना बचाव किया है। लेकिन, वो उसी कपड़े में अपना बचाव करने विडियो आ गया जिन कपड़ों में वह हाथ में डंडा लेकर छत पर घुमते दिखा था। नीचे संलग्न किए गए विडियो में आप देख सकते हैं कि किस तरह नाली में शवों को फेंका जा रहा है, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद किया:

कपिल मिश्रा ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर दंगों के दिनों की ताहिर हुसैन के फोन के कॉल डिटेल्स खुल गई तो अंकित शर्मा की हत्या में संजय सिंह और केजरीवाल दोनों की भूमिका सामने आ जाएगी। ये बहुत बड़ा आरोप है क्योंकि मिश्रा ने सीधा दिल्ली के मुखिया पर दंगों में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। अंकित शर्मा के परिवार ने भी बताया है ताहिर हुसैन के गुंडे अंकित को घसीट कर ले गए थे। उसकी माँ ने रोते हुए मीडिया को अपना दुःखड़ा सुनाया था। ताहिर हुसैन की बहुमंजिला इमारत से भी पेट्रोल बम और पत्थर फेंके जाने के कई विडियो सामने आए हैं।

नोट: सोशल मीडिया में कई तरह के विडियो और तस्वीरें पोस्ट हो रहे हैं। ऑपइंडिया इनकी पुष्टि नहीं करता। इस मुश्किल वक्त में धैर्य बनाएँ रखें और प्रशासन को हालात पर काबू पाने में सहयोग करें।

किसी ने काट लिया कलावा तो किसी ने फाड़ दिया ‘जय श्री राम’ का स्टीकर: पलायन करते हिन्दुओं का डर

डर का आलम ऐसा कि गोपाल काँप रहे थे। थड़थड़ाती आवाज़ में वे बोलते हैं- “हिन्दुओं को मार रहे हैं जी।” अनिश्चितता के इस दौरान में निरंकुश अत्याचार की बानगी गोपाल के चेहरे पर साफ़ देखी जा सकती थी। यही स्थिति है, दिल्ली के हिन्दुओं की। अगर आप हिन्दू हैं, तो आप हिन्दू दिखने का रिस्क नहीं ले सकते। हिन्दू दिखेंगे तो मारे जाने का डर है। रुद्राक्ष, कलावा, गाड़ी पर हिन्दू स्टीकर या तिलक- ये सब किसी अनहोनी का कारण बन सकता है या इसे बनाया जा सकता है, ‘उनके’ द्वारा। बुधवार (फरवरी 26, 2020) के सुबह की बात है, जब गोपाल अपनी बाइक साफ़ कर रहे थे।

अब तक ये काम उनके छोटे भाई शिवा करते आ रहे थे। गोपाल की पत्नी जया घर के कुछ छोटे-मोटे सामान एक जगह रखने में लगी हुई थी। एक दो तौलिए, गणेश की छोटी सी प्रतिमा और एक फैमिली फोटो- सामान के नाम पर वो यही सब रख रही थीं। मुझसे उन्होंने कहा, “मैं जफराबाद जाना चाहती हूँ। यहाँ से ज्यादा दूर भी नहीं है। लेकिन कैसे जाएँ? क्योंकि बीच में मस्जिद ही मस्जिद है।” जया ग़लत नहीं कह रही थीं क्योंकि हिन्दू बहुल मौजपुर के आसपास कई मस्जिद हैं। इलाक़े के हिन्दुओं को इसका भान है कि उन मस्जिदों से हिंसा भड़काई जा रही है। इस नक़्शे को देखिए:

मौजपुर के आसपास के मस्जिद, जिनसे डर रहे हैं स्थानीय हिन्दू

दिल्ली में इस्लामी भीड़ जिस तरह से हिन्दुओं पर कहर बरपा रही है, हिन्दुओं के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। वो एकदम बेचारे हो चुके हैं। गोपाल भी मौजपुर के निवासी हैं। उनके घर में उनकी माँ, पत्नी, छोटा भाई और एक 6 साल की बेटी। मुस्लिम बहुल जाफराबाद और ब्रह्मपुरी से उठी हिंसा की लपटों ने मौजपुर को भी अपने आगोश में ले लिया और वहाँ के हिन्दुओं की स्थिति भी दयनीय है। गोपाल के घर से कुछ ही दूरी पर विनोद कुमार को मार डाला गया था। उनके बेटे नितिन के सामने ही। क्यों? क्योंकि उनकी बाइक पर ‘जय श्री राम’ का स्टिकर लगा हुआ था।

‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ जैसे मजहबी नारों के बीच विनोद को मार डाला गया। वायरल हुए विडियो में उनके शव को सड़क पर पड़े हुए देखा जा सकता है। उससे कुछ ही दूरी पर आग से झुलसी हुई उनकी बाइक भी पड़ी थी। उनके बेटे नितिन बताते हैं कि इस्लामी टोपी पहनी भीड़ कुल 40 की संख्या में थी, जिसने लाठी-डंडों से पीट-पीट कर विनोद को मार डाला। एक लाचार हिन्दू ने वीडियो शूट करते समय कहा:

“देखिए, मुस्लिमों का ये हाल। हिन्दुओं का जीना बेहाल कर दिया है। एक लाश भेजी गई है मुस्लिम की तरफ़ से हमारे हिन्दू भाई की। ये घटना ब्रह्मपुरी गली नंबर एक की है। वो सन्देश दे रहे हैं- ले जाओ लाश, ऐसी लाशें तो रात भर उठती ही रहेंगी।”

इलाक़े में डर का माहौल है और हिन्दू पलायन की सोच रहे हैं। गोपाल का परिवार उससे अलग नहीं है। उनके पास अब भागने या घर में दुबके रहने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है। अव्वल तो ये कि ये दोनों उपाय भी रिस्की हैं। गोपाल ने भी जाने से पहले अपनी बाइक पर लगे ‘जय श्री राम’ स्टीकर को खुरच के हटाया। गोपाल कहते हैं- “छोटी सी बच्ची है मेरी। आपने देखा ना ‘जय श्री राम’ वाला स्टीकर देख कर मुस्लिमों ने विनोद का क्या किया? आज हम हिन्दुओं का ये हाल है कि हम राम का नाम भी नहीं ले सकते। जला कर मार डालते हैं।” गोपाल की काँपती हुए आवाज़ उस इलाक़े के हिन्दुओं का डर बता रही थी।

ख़ुफ़िया एजेंसियों की मानें तो ‘भीम आर्मी’ और पीएफआई ने हिन्दुओं के ख़िलाफ़ हिंसा को भड़काने की पूरी साज़िश रची है। निशाना अधिकतर हिन्दू ही बने हैं, भले ही मीडिया ये दिखाने का ग़लत प्रयास कर रहा हो कि मजहब विशेष ही पीड़ित हैं। मौजपुर से कुछ ही दूरी पर आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को मार डाला गया था। आरोप है कि आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडे अंकित सहित 4 लोगों को घसीट पर ले गए और उन्हें मार डाला। इसके बाद उनके शवों को नाले में फेंक दिया।

मोहम्मद शाहरुख़ का वायरल विडियो तो अपने देखा ही होगा, जिसने भजनपुरा में पुलिस पर 8 राउंड फायरिंग की थी। वो इलाक़ा भी शाहदरा से ज्यादा दूर नहीं है। एक और हिन्दू परिवार से हमने बात की, जो काफ़ी डरा हुआ था। हर्ष ने अपने हाथ पर बँधे हुए कलावे को काट कर हटा दिया, जो उसकी दादी उसे रोज बाँधा करती थीं। मज़बूरी है, इस्लामी भीड़ यही सब देख कर भड़क रही है। हर्ष कहते हैं अंकित की तरह उन्हें भी मारा जा सकता है, अगर उन्होंने कलावा नहीं हटाया तो। वो कहते हैं कि जो कलावा उनकी रक्षा के लिए बाँधा जाता था, वो उनकी मौत का कारण भी बन सकता है।

हर्ष ने बताया कि उनके एक दोस्त ने रुद्राक्ष हटा दिया है, क्योंकि आस्था के ऊपर अभी अपनी रक्षा को रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हर्ष चाकू के साथ सोते हैं क्योंकि आत्मरक्षा के लिए कोई न कोई उपाय तो रखना ही पड़ेगा। हर्ष ने कहा- “हमारी बहन-बेटियों को भी लाठी उठानी पड़ी है। मजहबी दंगाई आएँगे तो सबसे ज्यादा ख़तरा उन्हें ही है। हमने अपनी बहन-बेटियों को कह रखा है कि अगर हमें कुछ हो जाएँ तो वो पहले अपनी जान बचाएँ या ख़ुद मर जाएँ।” दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाक़ों में यही हाल है हिन्दुओं का।

(मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। मृतकों के अलावा अन्य पीड़ितों का नाम बदल दिए गए हैं।)

दिलबर सिंह नेगी के हाथ-पैर काट दंगाइयों ने दुकान की आग में झोंका: बचकर भागे श्याम ने बताई आपबीती

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों में अब तक 34 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इसके साथ ही हिंसा की रूह कॅंपा देने वाली कहानियॉं भी सामने आ रही है। मरने वालों में उत्तराखंड के दिलबर सिंह नेगी भी हैं। वे दिल्ली के शाहदरा में रहते थे।

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के अनुसार दिलवर सिंह नेगी को 23 फ़रवरी की शाम दंगाइयों ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। दिलबर सिंह नेगी उत्तराखंड के पौड़ी जिले स्थित थलीसैण ब्लॉक से सम्बन्ध रखते थे। उनके करीबी श्याम सिंह ने ऑपइंडिया को बताया कि 23 फ़रवरी की शाम कुछ दंगाई शाहदरा इलाके में शोर मचाते हुए घुसे। दंगाइयों ने नेगी को अपना पहला निशाना बनाया। उनके हाथ-पैर काट दिए। फिर पास की दुकान में लगी आग में झोंक दिया।

इस घटना को देख वहाँ लोगों में अफरा-तफरी मच गई। अपनों के बीच चीख-पुकार शुरू हो गई। दहशत में लोग अपनी जान बचाकर भागे। फ़ोन पर ऑपइंडिया के साथ बातचीत में भी दिलबर के परिजन बेहद डरे लग रहे थे। उन्होंने बताया कि वे अभी भी GTB अस्पताल में मौजूद हैं और दिलवर की बॉडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

उस दिन की घटना के बाद वे लोग मौके पर जाने का साहस नहीं जुटा रहे हैं। जहाँ पर यह घटना हुई वहाँ दुकानें बंद हैं। जान बचाकर भाग निकलने में कामयाब रहे लोगों में से एक उत्तराखंड के ही ग्राम ईडा का श्याम सिंह भी हैं। उन्होंने बताया कि दिलवर सिंह के सारे कागज और पहचान सम्बंधित डॉक्यूमेंट्स जलकर राख हो चुके हैं।

हिंसा की शुरुआत रविवार को हुई थी। इसके बाद कई इलाकों में दंगा भड़क गया। दंगाइयों ने 19 साल के एक हिंदू लड़के पर हमला किया और उसके सिर में ड्रिल मशीन से छेद कर दी। पीड़ित विवेक पर उस वक्त हमला किया गया जब वह अपनी दुकान में बैठा था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक विडियो में 2-3 लोग एक हिंदू के शव को भीड़ से दूर लेकर जाते नजर आए थे। लेकिन भीड़ अचानक से गली के बाहर आकर अल्लाहु अकबर और नारा-ए-तकबीर का नारा लगाने लगती है। मारे गए युवक का नाम विनोद बताया जा रहा है। घटना ब्रह्मपुरी इलाके की है। चॉंदबाग के नाले से आईबी के कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा का शव बरामद किया गया था। ड्यूटी से लौटते वक्त उनकी हत्या कर दी गई। आरोप है कि दंगाई उन्हें घसीटकर आप पार्षद ताहिर हुसैन के घर ले गए। वहॉं हत्या करने के बाद उनका शव नाले में फेंक दिया।

दिल्ली हिंसा: अपनी दुकान में बैठा था 19 साल का विवेक, दंगाइयों ने सिर में ड्रिल मशीन से कर दी छेद

चाँदबाग के नाले से मिला IB कॉन्स्टेबल का शव, ड्यूटी से घर लौटते वक्त दंगाइयों ने की पीट-पीटकर हत्या

‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारों के बीच ब्रह्मपुरी में मुस्लिम भीड़ ने की हिंदू युवक की हत्या

आप अपना धैर्य खो बैठे हैं और विपक्ष के अजेंडे में उलझ कर अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं

लुटियन के लुटेरों ने कभी इतना खतरा महसूस नहीं किया, जितना खतरा उनको अब महसूस हो रहा है। उनका यहाँ होना सिर्फ विरोध के लिए था, नकारात्मकता फैलाने के लिए था, लोगों को धोखे के जाल में उलझाने के लिए था और वो बने थे सिर्फ विश्वासघात के लिए। लेकिन, आज वही लुटेरे जो कुछ सालों पहले “एलीट” कहलाते थे, आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।

लुटियन के एलीट क्लास की मानसिकता के ऊपर और उनके अस्तित्व की लड़ाई के ऊपर ये श्रृंखला नंदिनी जी ने अप्रैल 4, 2019 को लिखी थी जब चुनाव शुरू नहीं हुए थे। उन्हीं के शब्दों को आपके सामने पेश करने की कोशिश कर रहा हूँ, जिस से बाकी लोग भी इसको पढ़ सकें और जान सकें कि जिनको हम अपना देवता बनाए बैठे थे, वो बुत ही निकले।

बात 2006 की है जब अपने खानदान के नाम को भुनाते हुए और नौकरशाही की सीढ़ियों को अपने नाम के सहारे चढ़ते हुए ये ‘साहब’ के हुजूम के सामने एक सभा में घोषणा करते हैं कि “भारत जैसा अद्भुत कोई देश नहीं है”। आप जान कर हैरान रह जाएँगे कि जिस कारण से उन साहब ने अपनी मातृभूमि की प्रशंसा की थी उसका देश की संस्कृति, विविधता, इतिहास, कला, वास्तुकला, व्यंजनों से कोई लेना-देना नहीं था।

किन्तु जो कारण उन्होंने बताए थे और उन कारणों को सुनकर सभागार में जो अट्टहास लगे थे वो सालों दर साल मेरे कानों में गूँजते रहे। उन साहब का कहना था कि “भारत जैसा अद्भुत कोई देश नहीं है” क्योंकि “सिर्फ पाक और बांग्लादेश ही ऐसे देश हैं जहाँ के राजनेताओं और सरकारी कर्मचारियों के बंगले मेरे बंगले समान हैं।“ साहब के कुछ अन्य बोल:

“मेरी घर की तरफ़ आने-जाने वाले रास्ते साफ-सुथरे हैं, फुटपाथों के आसपास पेड़ लगे हैं और बिजली निर्बाध है।”

“सिर्फ भारत में ही आपको नौकरानियों, मालियों, ड्राइवरों की कमी महसूस नहीं होती क्योंकि यहाँ पर लेबर “चीप” है। (और भगवान करे ये लेबर हमेशा ही “चीप” रहे, ऐसा उनका कहना था।)

साहब ने एक ठहाका और लगाया और अपने भाषण में इन शब्दों को जोड़ा:

“किस देश में आप सीधे पुलिस आयुक्त को फोन कर सकते हैं? किस देश में अपनी ससुराल जाने वाले रास्ते को वन वे ट्रैफिक में तब्दील करा सकते हैं क्योंकि आपके ससुर साहब को भारी ट्रैफिक से आने-जाने में तकलीफ होती थी?अद्भुत है ये देश जहाँ आप एक राज्य के सीएम से एक फ्लाईओवर की योजना को रोकने का अनुरोध कर सकते हैं जो कुछ आलीशान घरों की सुन्दरता में आड़े आ रहा था। और हाँ, किस और देश में आप एक प्राइवेट क्लब के मालिक को फोन करके धमका सकते हैं कि अगर आपकी सदस्यता तुरंत स्वीकृत नहीं हुई तो आपके घर पर एक्साइज वालों की रेड डाल दी जाएगी ?”

साहब का सवाल था कि किस देश में आप एक संरक्षित क्षेत्र में सभी पर्यावरण कानूनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए एक शानदार आलीशान घर का निर्माण कर सकते हैं? है कोई और देश जहाँ बैन किया हुआ जानवर का माँस आपको मात्र 5 मिनट में एक फोन कॉल पर हाज़िर हो जाता है?

साहब अपनी ‘Luxuries’ का बखान करते हुए पूछते हैं कि क्या है कोई ऐसा देश जहाँ आपकी नालायक औलादों को आप देश के सबसे शानदार विद्यालयों में या फिर उच्च कोटि के आईवी लीग कॉलेजों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में लायक छात्रों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थानों पर पहुँच सकते हैं? साहब ये सब बोल रहे थे, तभी वहाँ पर किसी ने उनसे पूछा था कि उस आम आदमी का क्या जिसके पास मूल सुविधाएँ तक हासिल नहीं? आम जनता का क्या?

उनका जवाब था, “मेरा ड्राइवर कहता है (ये आपको मैं बता दूँ कि मैंने उस वक़्त पहली बार ये ‘ड्राइवर का सिद्धांत’ के बारे में सुना और सीखा था, जो आगे चलकर हर किसी ने इस्तेमाल किया) छोटे शहरों और गाँवों में हमारे लोग बड़े खुश हैं, क्योंकि वो सभी जात-पात के मसलों में उलझे हुए हैं और वे अपने जीवन में जो भी छोटा-मोटा मिला है, उन चीज़ों के लिए आभारी हैं।”

साथ ही कुछेक सालों में होते रहने वाले दंगे उनको ये अहसास कराते रहते हैं कि उनके पास जो भी है वो कितना कीमती है। जब आपका स्वयं का जीवन खतरे में होता है तो आप मूर्ख ही होंगे जो टूटी-फूटी सड़कों और कूड़े के बारे में चिंतित होंगे। अभी पिछले दिनों इन साहब से फिर मुलाकात हुई और मैंने जानना चाहा था कि भावी आम चुनाव 2019 पर उनके विचार क्या थे?

उनका कहना था; “उनका गैंग और उनके मालिकान इस बार पूरी जान लगा देंगे कि सत्ता का परिवर्तन हो कर रहे। आखिर वो सोने का अंडा देने वाली मुर्गी जो 5 साल से किसी और के हाथ में है, वो उसको इस बार नहीं हाथ से नहीं जाने देंगे। बहुत दुखी होकर उनका कहना था कि पिछले 5 साल बेहद मुश्किल से भरे थे और दुबारा एक और पाँच साल का मतलब सिर्फ क़यामत ही होगा।”

मुझे समझ आ गया था कि इस बार हमला 2014 से बड़ा होगा, हताशाओं से भरा होगा, अभद्रता की सीमाओं को तोड़ दिया जायगा। याद रहे कि ये लेख 2019 के चुनाव से पहले लिखा गया था और जैसा आप देख रहे हैं कि वही हो रहा है। लेकिन, साथ ही मुझे ये भी शक नहीं कि यह एक युग का अंत है और उस अंधे युग की समाप्ति को अंधे भी देख सकते हैं।

ये तो था नंदनी जी की ट्वीट श्रुंखला के कुछ अंशों का हिंदी में रूपांतरण। और अब आता हूँ मैं अपनी बात पर।

चायवाला मोदी वापस आएगा- ऐसा उन महाशय ने कहा था! मोदी जी वापस आए और साथ ही शुरू हुआ पूर्व नियोजित हमला। अगर आपको लगता है कि सरकार आँखें मूँदे बैठी थी तो आप शायद कुछ ज्यादा सोच रहे हैं। सब कुछ वही हो रहा है, कहीं स्केल बड़ा है कहीं स्केल छोटा पर हमलों की उम्मीद थी और सरकार की तैयारी भी पूरी थी।

ये ज़रूरी नहीं कि आपको हमेशा दिखे कि रोकथाम कहाँ और कैसे हो रही है। आपको दिल्ली की ये आग दिख रही है जो शायद कई सालों बाद भड़काई गई एक आग है पर आपको वो आग नहीं दिख पाई होगी जिनको पश्चिमी उत्तरप्रदेश में, मुंबई के इलाकों में, मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में और भी कई “ख़ास इलाकों” में भड़कने से पहले ही बुझा दिया गया।

ये जिस सरकार की आपको नाकामी दिख रही है ये वही सरकार है जिसने कश्मीर में अभूतपूर्व विपरीत परिस्थितियों में अपनी मर्ज़ी के खिलाफ एक पत्ता भी नहीं हिलने दिया। वही मोदी हैं, वही अमित शाह हैं। बस आप अपना धैर्य खो बैठे हैं और विपक्ष के अजेंडे में उलझ कर अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।

वो चाहते हैं कि आप हिंसा की बात करें, वो चाहते हैं कि आप कानून को हाथ में ले जिस से उनके किए गए कामों को एक कारण मिल सके। क्यों करना है आपको राणा अयूब की ट्वीट को कोट और जवाब देना है? क्यों आपको स्वरा को गद्दार कहना है? राजदीप को क्यों गाली देना है आपको?

सोशल मीडिया पर इन की रोकथाम नहीं होगी। अगर करना है आपको रोकथाम तो करिए ब्लॉक इन सभी को और इनको जवाब देना बंद कीजिए। आप इनकी ऑडियंस हैं, और अगर ऑडियंस नहीं आएगी सिनेमा हॉल में तो पिक्चर तो फ्लॉप होगी ना ?

आखिर में एक निवेदन यहाँ उपस्थित महिलाओं से जो इस नकरात्मकता में उलझी हुई हैं। आप सुबह उठ कर सीधे यहाँ आती हैं और स्वरा एंड गैंग को गालियाँ देने और कोसने लग जाती हैं। एक घंटे बाद आप जब अपनी रिट्वीट और लाइक देख कर खुश होकर अपने बच्चे के लिए कुछ कह रही होती हैं या पति से, पिता से या किसी भी पारिवारिक सदस्य से बातचीत कर रही होती हैं तो आप के अंदर उसी एक घंटे का ज़हर घुला हुआ होता है। नफरत की आग लिए आप दिन भर घूम रहे होते हैं।

धर्म आपका कोई भी हो, नफरत आपके अंदर की सिर्फ आपको ही जलाएगी। आज तक दंगों में जितने भी लोग मारे गए वो ज़मीन पर मौजूद थे अपने अंदर नफरत लिए और नफरत भड़काने वाले टाइप कर रहे थे कहीं दूर बैठे हुए। मुझे कल से लोग डीएम (मैसेज) में आकर सेक्युलर बोल रहे हैं, कोई आपिया बोल रहा है कोई संघी।

बोलते रहिए, सेक्युलर होना गलत नहीं है अगर आप वो सेक्युलर हैं जिसके मायने वो नहीं होते जो आप मानते हैं, बल्कि वो होते हैं जो आपने असलियत में ना पढ़ा और ना होते हुए देखा। इस उम्मीद के साथ आपसे विदा कि जब यहाँ मुस्कराहट वापस आएगी तो मैं भी आ जाऊँगा।

रवीश कुमार का प्राइम टाइम प्रोपेगेंडा: गोली चलाने वाला मोहम्मद शाहरुख नहीं, अनुराग मिश्रा है

झूठे दावों और फर्जी खबरों के सहारे एक तय दर्शक भीड़ को अपनी ओर आकर्षित कर बरगलाने वाले रवीश कुमार एक फिर झूठ फैलाते नजर आए। इस बार उन्होंने मोहम्मद शाहरुख के नाम पर झूठ परोसा है। वही मोहम्मद शाहरुख जिसने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के दौरान एक पुलिसकर्मी पर बंदूक तानी थी और लगातार इधर-उधर 8 राउंड फायरिंग की थी। उस शाहरुख को कल रवीश कुमार ने अपने प्राइम टाइम में अनुराग मिश्रा बता दिया। साथ ही एक विडियो के जरिए उसकी गिरफ्तारी नहीं होने का भ्रम पैदा करने की कोशिश की।

26 फरवरी को प्रसारित अपने प्राइम टाइम में रवीश को कहते सुना जा सकता है, “पुलिस की हालत ये है कि अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ है। पुलिस साफ कहती है ये शाहरुख है, मगर आप सोशल मीडिया पर देखिए कि इसे अनुराग मिश्रा बताया जा रहा है।” जिस अनुराग मिश्रा की प्रोफाइल को लेकर ये प्रोपेगेंडा तैयार किया गया उसने खुद विडियो के जरिए ऐसा करने वालों के झूठ का पर्दाफाश किया। साथ ही कहा कि वह उस हर शख्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे जिन्होंने उनकी तस्वीर का इस्तेमाल किया।

रवीश कुमार को अपने प्राइम टाइम में बिन सच्चाई खँगाले दिल्ली पुलिस से कहते सुना जा सकता है कि वो युवक की पहचान पर दोबारा से बोलें और इसके बाद उन्हें बिन तारीख के एक विडियो चलाते देखा जा सकता है। इसमें उनका रिपोर्टर पुलिस से पूछता है कि क्या उस युवक की गिरफ्तारी हुई है। इसपर पुलिस कहती है कि वो उसकी खोज में हैं। जल्द से जल्द उसकी गिरफ्तारी हो जाएगी। इसके बाद रवीश कुमार अपने प्राइम टाइम में अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा का वीडियो चलाते हैं ताकि उनके दर्शकों को ये लगे कि उनकी भाषणों के कारण दिल्ली में हिंसा भड़की।

इस प्राइम टाइम की शुरुआत में रवीश कुमार आईबी अधिकारी की मौत के बारे में भी बात करते हैं और पहले तो ये समझाने की कोशिश करते हैं कि आखिर कैसे अंकित शर्मा के परिवार ने आम आदमी पार्टी के नेता को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया। फिर बाद में पूरी हिंसा के लिए टेलीविजन डिबेट में भड़काऊ बयानों को जिम्मेदार ठहराया। शायद इस बीच रवीश कुमार और उनकी टीम 51 वर्षीय विनोद की निर्मम हत्या की कहानी बताना भूल गए, जिन्हें उनके बच्चे के सामने मार दिया गया और उनकी बाइक को आग के हवाले कर दिया गया।

इस प्राइम टाइम में रवीश कुमार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के दौरे की विडियो दिखाते भी नजर आए। इसमें एक मुस्लिम युवक ने सीएए के ख़िलाफ़ विरोध को आरएसएस प्रायोजित बताया और अमित शाह पर आरोप लगाया कि वे इन सबके पक्ष में हैं। इसके अलावा रवीश कुमार रामभक्त गुलशन और उस कपिल गुर्जर द्वारा गोली चलाने वाले वाकए को भी दिखाते नजर आए, जिसने ये कहा था कि इस देश में हिंदुओं की मर्जी चलेगी। जाहिर है, हिंदू नामों पर जोर देकर रवीश का इन विडियो को दिखाने के पीछे क्या इरादा था, लेकिन शायद वो भूल गए कि जिस कपिल गुर्जर की विडियो दिखाकर वो अपना एजेंडा चलाना चाहते थे, वो आम आदमी पार्टी का ही कार्यकर्ता था।

26 फरवरी को रवीश कुमार ने जिस तरह से तथ्यों को प्राइम टाइम में पेश किया वह इस बात का सबूत है कि मेनस्ट्रीम मीडिया दंगाई के मुस्लिम होने पर न केवल उसका नाम छिपाता है, बल्कि उसे क्लीनचिट भी देता है।

रतनलाल और अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के ख़िलाफ दिल्ली में साइलेंट मार्च

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा में पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल और आईबी कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या के खिलाफ आज शाम साइलेंट मार्च निकाला जाएगा। ‘यूथ अगेंस्ट जिहादी हिंसा’ नाम की संस्था शाम 5 बजे मार्च निकालेगी। मार्च जंतर-मंतर के पास स्थित केरल हाउस से शुरू होकर अशोका रोड स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगी। ‘यूथ अगेंस्ट जिहादी हिंसा‘ ने AISA, PFI को बैन करने की भी माँग की है।


संस्था ‘यूथ अगेंस्ट जिहादी हिंसा’ द्वारा शांति मार्च को लेकर जारी किया गया पोस्टर

ड्यूटी से लौटते वक़्त अंकित शर्मा को दंगाइयों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। चॉंदबाग के नाले से उनका शव बरामद किया गया था। इस मामले में आप पार्षद ताहिर हुसैन की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि दंगाई अंकित शर्मा को घसीटकर उसके घर ले गए और हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया। बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने भी आरोप लगाया था कि ताहिर हुसैन के घर से लगातार पेट्रोल बम चलाए जा रहे थे और गोलीबारी भी की जा रही थी।

इससे पहले हिंसा में दिल्ली पुलिस के 42 वर्षीय हेड कान्स्टेबल रतनलाल की गोली लगने से मौत हो गई थी।
राजस्थान के सीकरी निवासी रतनलाल वर्ष 1998 में कॉन्स्टेबल के पद पर दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए थे। रतनलाल की मौत की खबर जैसे ही उनके परिजनों को हुई ऐसे ही उनके घर में मातम पसर गया। रतनलाल की दो बेटियाँ और एक बेटा है।, जिनका बुधवार को उनके पैतृक गाँव में अंतिम संस्कार कर दिया गया।

ताहिर हुसैन के घर की छत पर पेट्रोल बम, पत्थरों का मिला जखीरा, पार्षद के बचाव में उतरी AAP

4 लोगों को खींचकर AAP पार्षद ताहिर हुसैन के घर ले गए दंगाई, मार कर नाले में फेंक दिया: अंकित शर्मा का भाई

माँ से किया वादा पूरा नहीं कर पाए हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल, बुखार के बावजूद कर रहे थे ड्यूटी