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गोली नहीं खाना चाहते हो तो हमारी सीमाओं से दूर रहो: सांसद ने घुसपैठियों को चेताया

दुनिया भर में अवैध घुसपैठियों को लेकर बहस छिड़ी हुई है। सीरिया व अन्य मुस्लिम मुल्कों से लाखों की संख्या में घुसपैठियों ने यूरोप सहित कई क्षेत्रों में पाँव रखे हैं, जिनसे वहाँ के स्थानीय निवासियों में आक्रोश है। जहाँ एक तरफ़ दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन अपील करते हैं कि इन्हें शरण दी जाए, कई लोगों का ये भी कहना है कि इससे उनके देशों में अपराध बढ़ेगा। इसी क्रम में यूरोपियन संसद के सदस्य डोमिनिक टारजिंस्की का एक बयान आया है। इसमें उन्होंने घुसपैठियों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने उनसे कहा है कि अगर वो अपना हित चाहते हैं तो पोलैंड की सीमा पर न आएँ।

डोमिनिक ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी अपने इस बयान को ट्वीट किया है। उन्होंने घुसपैठियों को चेताते हुए कहा कि अगर वो अपनी सलामती चाहते हैं, अगर वो चाहते हैं कि उन्हें गोली न मारी जाए या फिर गिरफ़्तार न किया जाए- तो वो पोलैंड की सीमा से दूर ही रहें, अंदर घुसने की चेष्टा भी न करें।

उन्होंने कहा कि वो सीधे शब्दों में घुसपैठियों को चेतावनी दे रहे हैं। डोमिनिक यूरोपियन कन्जर्वेटिव्स एंड रेफोर्मिस्टर्स (ECR) के उपाध्यक्ष हैं। वो घुसपैठियों के ख़िलाफ़ लगातार आवाज़ उठाते रहते हैं। वो पोलैंड की सत्ताधारी पार्टी के नेता हैं। उन्होंने कहा:

“अवैध घुसपैठियों तक मैं एक सन्देश पहुँचाना चाहता हूँ। अगर आप चाहते हैं कि आपको पीछे न धकेला जाए, अगर आप गिरफ़्तारी से बचना चाहते हैं और अगर आप गोलियों का शिकार नहीं बनना चाहते हैं- तो हमारी सीमाओं की तरफ़ न आएँ। पोलैंड की सीमाओं से दूर रहें। हमलोग या हमारी पुलिस आपको पीटने नहीं आई थी, तुमलोगों ने हमारे देश में घुस कर यहाँ की क़ानून-व्यवस्था का मखौल उड़ाया है। सुरक्षित रहना चाहते हो तो पोलिश सीमा से दूर रहो।”

उन्होंने पिछले महीने ही ये बयान दिया था, जो कई दिनों से वायरल हो रहा है। पोलैंड पर आरोप लगते रहे हैं कि वो ईसाई घुसपैठियों को तो ले लेता है लेकिन बाकी घुसपैठियों को भगा दिया जाता है। वहाँ अभी ‘लॉ एंड जस्टिस पार्टी’ सत्ता में है, जो दक्षिणपंथी विचारधारा की अगुवाई करती है। उसका नारा ‘पोलैंड फर्स्ट’ आने वाले आम चुनावों में भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। प्रधानमंत्री मैतुसज मोरवीकी का स्पष्ट कहना है कि वो यूरोप को एक नया आकर देकर इसे ईसाइयत के रंग में ढालने के पक्षधर हैं।

मेरे साथ आतंकवादियों जैसा सलूक हो रहा है: जेल से पेशी के लिए लाए जाने पर बोले आजम खान

धोखाधड़ी के मामले में जेल में बंद सपा सांसद आजम खान, उनकी विधायक पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को शनिवार (फरवरी 29, 2020) को सीतापुर जेल से रामपुर कोर्ट पेशी पर ले जाया गया। इस दौरान उन्‍होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “मेरे साथ आतंकवादियों जैसा सलूक हो रहा है। इस सरकार में मेरे साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा है।”

आजम खान के आतंकवादी वाले बयान पर सीतापुर के जेल अधीक्षक डीसी मिश्र ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “सांसद के साथ जेल में अच्छा व्यवहार किया जाता है। हम उन्हें जेल मैनुअल के हिसाब से ही सारी सुविधाएँ उपलब्ध करा रहे हैं।” साथ ही जेल अधीक्षक ने कहा कि वो बड़े व्यक्ति हैं, वह घर जैसी सुविधा सोचते होंगे तो वह सुविधा जेलों में उपलब्ध नहीं हो सकती।

इसके साथ ही नगर विकास राज्य मंत्री महेश चंद्र गुप्ता ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आजम खान ने अपने जमाने में लोगों को बहुत परेशान किया। आजम खान अपनी फटकार से लोगों को परेशान करते थे। आज उनके साथ जो हो रहा है, सच्चाई में न्याय हो रहा है। आजम के साथ आतंकवादी जैसा कोई बर्ताव नहीं हो रहा है। मंत्री ने कहा कि आजम जैसा करेंगे, वैसा भरेंगे। सपा के राज में बहन-बेटियाँ स्कूल भी सही ढंग से नहीं जा पाती थीं।

बता दें कि स्वार से विधायक रहे बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने में आरोपी सपा सांसद आजम खान ने पत्नी एवं शहर विधायक तजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ बुधवार (फरवरी 26, 2020) को कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। जिसके बाद अदालत ने तीनों सपा नेताओं को 2 मार्च तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। उन पर आरोप है कि बार-बार कोर्ट के आदेश से लेकर मुनादी तक कराने के बाद भी वो कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। इसके मद्देनजर स्पेशल कोर्ट ने मंगलवार (फरवरी 25, 2020) को सीआरपीसी की धारा-83 के तहत संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी किया था।

पिछले साल भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने गंज कोतवाली में मोहम्मद आजम खान, अब्दुल्ला आजम और तंज़ीन फातिमा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। साथ ही आरोप लगाया था कि अनुचित लाभ लेने के लिए सपा सांसद आजम खान और उनकी पत्नी तजीन फातिमा ने बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण-पत्र बनवाए।

दिल्ली दंगों के विरोध में हिंदुओं का पीस मार्च, लगे ‘आतंकी नहीं पलने देंगे, देश नहीं जलने देंगे’ के नारे

दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में हुए हिन्दुओं के नरसंहार के खिलाफ शनिवार (29 फरवरी 2020) को जंतर-मंतर पर शांति मार्च निकाला गया। हजारों की तादाद में हिन्दुओं ने मार्च में हिस्सा लिया। यह विरोध-प्रदर्शन सभी राष्ट्रवादी हिन्दू संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से “दिल्ली पीस फोरम” के अंतर्गत किया गया था। रैली के आयोजकों ने बताया कि बड़ी संख्या में राष्ट्रवादियों ने इस रैली को समर्थन दिया।

अंकित शर्मा, विनोद कुमार, रतनलाल सहित दिल्ली दंगों में मजहबी भीड़ के शिकार हुए सभी मृतकों को श्रद्धांजलि दी गई। दंगों के दौरान हिन्दुओं के खिलाफ सुनियोजित तरीके से हिंसा को अंजाम दिया गया। उनकी निर्मम तरीके से हत्या की गई और उनके घर, स्कूल, दुकानों, वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। ट्विटर पर ‘शांति मार्च’ के समर्थन में #DelhiAgainstJehadiViolence का हैशटैग ट्रेंड किया गया।

मार्च के दौरान ‘आतंकी नहीं पलने देंगे, देश नहीं जलने देंगे’, ‘वन्दे मातरम’ जैसे नारे लगे। सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान लगे मजहबी उन्मादी नारों के उलट जिहाद के खिलाफ संदेश देते इन नारों की सोशल मीडिया पर काफी तारीफ हो रही है। मार्च के आयोजकों ने बताया कि जो भी क्षेत्र या राज्य इतिहास में इस्लामी क्रूरता के कारण बच गए हैं, उन पर फिर से साजिश के तहत हमले किए जा रहे है। शुरुआत बंगाल से हुई और अब ये मंजर दिल्ली तक पहुँच चुका है।

मार्च में शामिल लोगों ने कहा कि अलीगढ़ की तीन मंदिरों को तहस-नहस कर दिया गया। लेकिन दिल्ली में एक मस्जिद पर झंडा लगाया जाना सबसे बड़ा मुद्दा बन गया। ये पक्षपात क्यों? उन्होंने बताया कि भारत की संस्कृति पिछले कई सालों से खतरे में है। पत्रकारों का एक बड़ा गिरोह हिन्दुओं को शैतान साबित कर भारत की एकता को खंडित करने में लगा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया दिल्ली दंगों में कॉन्ग्रेस और आप द्वारा भड़काए गए गुंडों ने उत्पात मचाया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से एक आईबी अधिकारी और कॉन्स्टेबल को मारा गया है, वो सब देख कर उनका ह्रदय रो रहा है।

मार्च में शामिल लोगों ने इस बात पर चिंता जताई कि जहाँ एक तरफ़ हिन्दू अपने रोजमर्रा के कार्य में व्यस्त रहते हैं, मजहबी भीड़ सड़क जाम कर अपनी साजिशों को अंजाम देने में प्रयासरत रहती है। ‘शांति मार्च’ का पूरा जोर इस बात पर था कि इस देश में हिन्दुओं को दोयम दर्जे का नागरिक नहीं बनने दिया जाएगा। पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के 2012 में दिए गए बयान की भी निंदा की गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला अधिकार कथित अल्पसंख्यकों का है। आक्रोशित लोगों ने पूछा कि सब कुछ कथित अल्पसंख्यकों को मिल जाएगा तो 80% हिन्दुओं का क्या? रैली के आयोजकों ने बताया:

“75 दिनों तक राजधानी को शाहीन बाग से बंधक बनाने की कोशिश की गई। जब उच्चतम न्यायालय ने आपत्ति जताई तो बजाए शाहीन बाग के प्रदर्शन को बंद करने के वो उल्टा जाफराबाद में भी प्रदर्शन की तैयारी करने लगे। किस तरह संवैधानिक रूप से यह जायज है? मजहब के सामने देश को कोई मोल नहीं देते ये लोग। समझने वाली बात है कि अगर मौजूदा माहौल में हिन्दू हिंसक होते तो हिन्दू बहुल इलाके जहाँ मुस्लिमों की आबादी 15-20% है, वहाँ के मुस्लिम सुरक्षित नहीं रहते। पर दंगों का केंद्र वही इलाके हैं जो मुस्लिम बहुल हैं। स्पष्ट है कि हिंसा के जिम्मेवार कौन लोग हैं।”

मार्च का आयोजन एकदम शांतिपूर्ण रहा। सुरक्षा की भी पूरी व्यवस्था थी। किसी ने भी ऐसा कोई कार्य नहीं किया, जिससे शांति-व्यवस्था पर कोई आँच आए। लोगों ने पुलिस के साथ पूरा सहयोग किया। मार्च में शामिल आम लोगों ने इस ओर मजबूती से ध्यान दिलाया कि इस्लाम को मानने वाले चाहे किसी भी पद पर आसीन हो, विधायक हो, RJ हों, अभिनेता हो या आम आदमी हों- सब एक सुर में अपने मजहब के लोगों का समर्थन करते आए हैं और आगे भी करते रहेंगे। इसलिए, अब हिन्दुओं को भी ऐसे ही एक होने की ज़रूरत है।

दिल्ली दंगा ग्राउंड रिपोर्ट: छतों से एसिड बरसा रही थीं मुस्लिम औरतें, गुलेल से दाग रहे थे पेट्रोल बम

वे 20-25,000 के बीच थे, हम केवल 200: जख्मी ACP ने सुनाई उस दिन की आपबीती जब बलिदान हुए थे रतनलाल

शादी के 1 हफ्ते पहले मारी गोली, बिलखते भाई ने बताया- 500 मुस्लिम दंगाइयों ने बोला था धावा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों की रूह कॅंपा देने वाली घटनाएँ लगातार सामने आ रही है। पीड़ित हिन्दू विभिन्न माध्यमों से अपना दर्द बयाँ कर रहे हैं। ट्विटर वायरल हुए एक विडियो में विकास अपनी आपबीती सुना रहा है।

विकास ने बताया कि वो घोंडा विधानसभा क्षेत्र का निवासी है। 2 मार्च को उसके भाई की शादी होनी थी। ऐसे में, जाहिर है कि उनके घर में उत्सव का माहौल होगा और शादी की तैयारियाँ चल रही होंगी। विकास भी शादी का कार्ड बाँटने में लगे हुए थे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि उनके बड़े भाई को गोली मार दी गई है। वो भागे-भागे अपने घर पहुँचे। विकास ने बताया कि उन पर और उनके पड़ोसियों पर भी मुस्लिमों ने हमला किया।

‘Know The Nation’ के अनुसार विकास जैसे ही अपने घर पहुँचे, 400-500 की संख्या में मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ वहाँ पर पहुँची और हमला कर दिया। विकास और उनके पड़ोसियों ने मुस्लिम भीड़ को समझाया कि वो लोग एक ही इलाक़े के रहने वाले हैं और आगे भी उन्हें साथ रहना है, इसलिए उन्हें ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। बावजूद दंगाई फायरिंग करते रहे। उन्होंने जमकर पथराव किया। विकास ने बताया कि उन्हें, उनके भाई और उनके पड़ोसियों को इसलिए निशाना बनाया गया, क्योंकि वो हिन्दू हैं।

दरअसल, दंगाई भीड़ उसी इलाक़े में स्थित शिव मंदिर पर हमला करने आई थी। जब वो मंदिर तक नहीं पहुँच सके तो उन्होंने कुछ हिन्दुओं को देखा और उन पर ही धावा बोल दिया। उन्होंने भारी संख्या में पत्थर जुटा रखा थे, जिस कारण हिन्दुओं को भाग कर अपने घर में छिपना पड़ा। सबसे बड़ी बात कि दंगाई भीड़ पूरी तैयारी के साथ आई थी और उन्होंने हेलमेट पहन रखे थे। कइयों ने अपना चेहरा छिपा रखा था। विकास ने बताया कि जब मुस्लिम भीड़ वापस चली गई, तब घायल हिन्दुओं को अस्पताल ले जाया जा सका।

दिल्ली दंगा ग्राउंड रिपोर्ट: छतों से एसिड बरसा रही थीं मुस्लिम औरतें, गुलेल से दाग रहे थे पेट्रोल बम

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के करावल नगर का शिव विहार उन इलाक़ों में से एक है जहाँ हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान सबसे ज़्यादा तबाही बरपाई गई। हिन्दुओं के घरों को निशाना बनाया गया। एक हिन्दू का स्कूल जला दिया गया और उनकी दुकानों को तो ख़ाक ही कर दिया गया। एक कुम्हार की महीनों की मेहनत को तबाह कर दिया गया। वो बेचारा रोते-बिलखते हुए अपना कसूर पूछ रहा था। वहीं एक छोले-भठूरे वाले की दुकान में उसकी चूल्हे और बेंच सहित अन्य चीजों को जला दिया गया। ऐसे कई ग़रीबों की दुकानों को ज्यादा नुकसान पहुँचा है। ऑपइंडिया की टीम ने मौके पर पहुँच कर सारी स्थिति समझी।

सबसे पहले हम शिव विहार स्थित ‘भगवान शिव चौक’ पहुँचे। यहाँ ईंट-पत्थर इस तरह बिखरे हुए थे, जैसे वो दंगों का केंद्रबिंदु रहा हो। वहाँ अब सुरक्षा-व्यवस्था के अब तगड़े बंदोबस्त हैं। इसके बाद हम आगे शिव विहार चौक पहुँचे, जहाँ मुस्लिम की राजधानी स्कूल से चारों तरफ हमले किए गए। हिन्दू की डीआरपी स्कूल को ख़ाक में मिला दिया गया। राजधानी स्कूल में क़रीब 300 दंगाई गुंडे जमा थे। चौक पर एक व्यक्ति ने बताया कि कि रोड के उस तरफ़ मुस्लिमों के घर हैं, जो महफूज हैं। यह व्यक्ति अपनी जली हुई दुकान देखना आया था।

शिव विहार में हिन्दुओं की दुकानों की स्थिति: दंगाई भीड़ के कहर का सबूत

उसने जो कहा वह सही था। चौक के पास की सड़क के एक तरफ मुस्लिमों के घर सलामत थे, दूसरी तरह हिन्दुओं की दुकानें ख़ाक में मिली हुई थीं। हमने वहाँ सुरक्षा बलों को चाय-नाश्ता करा रहे एक व्यक्ति से इसका काऱण पूछा। उन्होंने बताया कि हमले इन्हीं मुस्लिमों के घर से हुए थे। मुस्लिम महिलाएँ भी अपनी छतों पर खड़े होकर पुलिस बलों पर एसिड से हमले कर रही थीं।

एक बुजुर्ग ने बताया कि मुस्लिम भीड़ के इस दंगे के जवाब में कई हिन्दुओं ने भी आत्मरक्षा में उन्हें खदेड़ने का प्रयास किया, लेकिन वो राजधानी स्कूल की छत पर काफ़ी ऊँचाई पर थे, जहाँ से हिन्दू ही अधिकतर निशाना बने। दिनेश मुंशी को सिर में गोली लगी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद हिन्दुओं ने कई मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षित उनके घरों तक पहुँचाया, जो दोनों पक्षों के संघर्ष में फँस गई थी। इधर हिन्दू सबकी मदद करते रहे, उधर मुस्लिम भीड़ गुलेल से पत्थर फेंकती रही और पेट्रोल बम बरसाती रही।

इलाक़े में अब भी डर का माहौल है क्योंकि कोई भी कैमरे के सामने आकर गुनहगारों के बारे में बोलने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि उन्हें इसी मोहल्ले में रहना है, इसलिए वे आज तो कैमरे के सामने आकर सच बोल देंगे। लेकिन कल को कोई अनहोनी हुई तो इस बार की तरह ही फिर कोई बचाने नहीं आएगा। उस समय पुलिस क्या कर रही थी? इस सवाल के जवाब में लोगों ने बताया कि उस वक़्त पुलिस भी वहाँ मौजूद थी लेकिन वो बार-बार यही कह रही थी कि उन्हें गोली चलाने का आदेश नहीं है।

ऑपइंडिया की टीम ने कई विडियो और फोटो जुटाए हैं, जो इस रिपोर्ट में संलग्न हैं। तबाही के इस मंजर में हिन्दुओं का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। इससे उबरने में उन्हें काफ़ी समय लग जाएगा। लोग अभी भी घरों में दुबके हुए हैं।

बहू-बेटियों की इज्जत बचाने के लिए हिन्दू खा रहे थे गोली और पत्थर: शिव विहार ग्राउंड रिपोर्ट

जो हिंदू लड़की करती थी दुआ सलाम, उसी की शादी को जला कर राख कर डाला: चाँद बाग ग्राउंड रिपोर्ट

‘हमारी बेटियों को नंगा करके भेजा दंगाइयों ने, कपड़े उतारकर अश्लील हरकतें की’ – करावल नगर ग्राउंड रिपोर्ट

वे 20-25,000 के बीच थे, हम केवल 200: जख्मी ACP ने सुनाई उस दिन की आपबीती जब बलिदान हुए थे रतनलाल

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के चाँदबाग इलाके में दंगाई भीड़ की चपेट में आये एसीपी अनुज कुमार अब सामने आए हैं। हिंसा में जख्मी हुए एसीपी (गोकुलपुरी) अनुज ने बताया कि उस दिन डीसीपी अमित शर्मा भी उन्हीं के सामने जख्मी हुए थे। हिंसा में बलिदान हुए हेड कांस्टेबल रतनलाल भी उन्हीं के साथ थे।

अनुज कुमार ने बताया, “24 फरवरी को मैं शाहदरा के डीसीपी अमित शर्मा को जख्मी होने के बाद अस्पताल ले जा रहा था। इस दौरान भी प्रदर्शनकारी पथराव कर रहे थे और मुझे भी सिर पर चोट लगी। हमें नहीं पता था कि रतनलाल को गोली लग गई थी। हम रतनलाल को जीटीबी अस्पताल ले गए, जहाँ उसे बचाया नहीं किया जा सका और फिर बाद में हम डीसीपी को मैक्स अस्पताल में ले गए।”

दो दिन पहले अस्पताल से छुट्टी पाने वाले एसीपी ने कहा, “हमें निर्देश दिया गया था कि गाजियाबाद की सीमा के साथ सिग्नेचर ब्रिज को जोड़ने वाली सड़क को बंद न किया जाए। लेकिन धीरे-धीरे और लगातार भीड़ बढ़ने लगी और इसमें महिला और पुरुष दोनों ही शामिल थे। वे लगभग 20,000 से 25,000 के बीच थे, जबकि हम केवल 200 थे।” उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि उन्होंने सड़क को बंद करने की योजना बनाई थी जैसा कि उन्होंने पहले किया था।

अनुज कुमार ने बताया कि प्रदर्शन कर रहे लोग सर्विस लेन से सड़क पर आ गए थे। फिर एक अफवाह फैली कि पुलिस की गोलियों से बच्चे मर गए हैं। इसने हिंसा को और भी ज्यादा भड़का दिया। इस अफवाह से भीड़ और जमा हो गई। 15 और 20 मीटर का फासला था। फिर पत्थरबाजी शुरू हो गई। 

एसीपी ने बताया कि जब चाँदबाग बाजार इलाके में सीएए विरोधी भीड़ सड़क को घेर रही थी, तभी भीड़ हावी हो गई और पथराव शुरू हो गया था। इसी दौरान डीसीपी शाहदरा अमित शर्मा घायल हो गए। एसीपी ने बताया, “डीसीपी अमित शर्मा के मुँह से खून निकल रहा था। आँखें ऊपर की ओर हो चुकी थी। भीड़ 5-10 मीटर पर थी। हम पर पथराव हो रहा था। फिर मैंने जब डीसीपी को देखा तो आशाहीन हो गया। जैसे-तैसे मैंने खुद को सॅंभाला और डीसीपी को डिवाइडर पर लगी ग्रिल के उस पार किया।”

अनुज कुमार ने बताया कि भीड़ और पुलिस फोर्स के बीच में बेहद कम दूरी थी, इसलिए टियर गैस का भी इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। फिर अचानक भीड़ हिंसक हो गई। फायरिंग करने पर भीड़ में महिलाओं और बच्चों को गोली लगने की आशंका थी। उपद्रवियों की पहचान मुश्किल थी। अनुज ने बताया कि उपद्रवियों ने इसी बात का फायदा उठाया था। पहले पत्थर और रॉड से हमला किया और फिर फायरिंग भी शुरू कर दी।

बता दें कि कि रविवार (फरवरी 23, 2020) से दिल्ली की सड़कों पर शुरू हुए हिंदू विरोधी दंगों में लगभग 42 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 200 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में सुरक्षा बलों के करीब 70 लोग शामिल हैं। मृतकों में दिल्ली पुलिस का हेड कांस्टेबल रतन लाल और आईबी के अंकित शर्मा भी शामिल हैं।

कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ गिरफ्तार: भड़का रही थी दंगे, माँग रही थी आज़ादी

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में एक के बाद एक कर के कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। आम आदमी पार्टी के विधायक अमनतुल्लाह ख़ान पर घृणास्पद भाषण देने का आरोप लगा है। आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन की इमारत तो दंगाइयों का अड्डा ही बनी हुई थी। मुस्तफाबाद के विधायक हाजी यूनुस पर भी उनके ही क्षेत्र के लोगों ने दंगों में संलिप्त होने के आरोप लगाए हैं। अब कॉन्ग्रेस पार्टी की पूर्व निगम पार्षद इशरत जहाँ का नाम दंगे भड़काने में सामने आया है।

इशरत जहाँ लगातार भड़काऊ भाषण देकर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के मुस्लिमों को भड़का रही थीं। दंगे भड़काने के आरोप में उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया है। 14 दिन के लिए उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के खजुरी ख़ास क्षेत्र में इशरत पिछले 2 महीने से लगातार सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही थी। उसके साथ कई समर्थक भी थे, जो लगातार लोगों को भड़काने के काम में लगे हुए थे। पुलिस ने दिल्ली में हुए दंगों में 200 से भी अधिक लोगों को प्रिवेंटिव कस्टडी में लिया है, जिनसे पूछताछ जारी है।

इशरत जहाँ ने अदालत में जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसे ख़ारिज कर दिया गया है। दिल्ली की एक अदालत में जज नवीन गुप्ता ने इशरत जहाँ उर्फ़ पिंकी की जमानत याचिका खारिज कर दी। इशरत को बुधवार (फरवरी 26, 2020) को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था। पहले उसे हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई।

‘दैनिक जागरण’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ सहित खालिद, समीर प्रधान खुरेजी, सलीम, शरीफ, विक्रम ठाकुर, आज़ाद उर्फ भूरा, इशाक, हाजी इकबाल, हाशिम, समीर, बिलाल, यामीन कूलर वाला, साबू अंसारी व अन्य लोगों को आरोपित बनाया गया है। इनमें से कुछ को पुलिस ने अपने शिकंजे में ले लिया है, वहीं कुछ की तलाश अब भी जारी है। इनके ख़िलाफ़ दंगा और हत्या का प्रयास सहित कई मामले दर्ज किए गए हैं।

बता दें कि इशरत जहाँ ख़ुद एक वकील भी हैं। उसने ख़ुद अपनी जमानत अर्जी तैयार की थी, लेकिन वो ख़ारिज हो गई। इशरत जहाँ ने भड़काऊ भाषण देते हुए कहा था- “हम मर भी जाएँ लेकिन यहाँ से नहीं हटेंगे। हम आज़ादी लेकर रहेंगे।” इशरत के समर्थक खालिद ने भीड़ से पुलिस पर जम कर पत्थरबाजी करने को कहा था। साबू अंसारी उस भीड़ का नेतृत्व कर रहा था, जिसने पुलिस को खदेड़ते हुए पत्थरबाजी की।

खुद को भारत में सुरक्षित महसूस करता हूँ, भारतीयों से CAA का कोई संबंध नहीं: अदनान सामी

हाल ही में पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए बॉलीवुड सिंगर अदनान सामी ने इंडिया आइडियाज कॉन्क्लेव 2020 में शिरकत की। यहाँ उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह भारत में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। साथ ही कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का भारत के लोगों से कोई संबंध नहीं है।

अदनान से पूछा गया कि आमिर खान कहते हैं कि वो भारत में सुरक्षित महसूस नहीं करते, क्या आप सुरक्षित महसूस करते हैं और CAA को लेकर आपकी क्या राय है? इस पर अदनान सामी ने कहा, “मुस्लिम होने के नाते मैं भारत में सुरक्षित महसूस करता हूँ। यह भारत में असुरक्षित महसूस करने वाले हर व्यक्ति के प्रश्न का उत्तर है।”

बता दें कि साल 2015 में एक्टर आमिर खान ने एक बयान देते हुए कहा था कि उनकी पत्नी को भारत में रहना सेफ नहीं लगता है। आमिर के इस बयान से सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया था। इसके जवाब में अदनान ने कहा, “मैं यहाँ इस बात का जवाब देने नहीं आया हूँ कि आमिर खान ने क्या कहा। जहाँ तक मेरी बात है, मैं एक मुस्लिम हूँ। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूँ। मैं मानवता का सम्मान करता हूँ चाहे यह किसी भी रूप में हो। मेरे पास बहुत से ऑप्शंस थे, लेकिन मुझे लगा कि मुझे भारत आना चाहिए और एक मुस्लिम के तौर पर मैं यह नहीं कह सकता हूँ कि मैं भारत में कितना सुरक्षित महसूस करता हूँ।”

इसके साथ ही अदनान ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का समर्थन करते हुए कहा कि यह कानून लोगों को भारत की नागरिकता दिलाने में मदद करेगा और इसका भारत में अभी रह रहे लोगों के साथ कोई संबंध नहीं है। अदनान से हाल में दिल्ली में हुई हिंसा बारे में इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा, “मुझे लगता है कि जल्द ही वापस शांति होगी। एक म्यूजिशन होने के नाते मैं हमेशा प्यार और शांति की बात करता हूँ। मैं सभी से निवेदन करता हूँ कि शांति बनाए रखें। मैं निवेदन करता हूँ कि लोगों की जिंदगी का सम्मान करें और ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जिसका हल बातचीत से न निकले। मैं चाहता हूँ कि देश में शांति बनी रहे।”

इससे पहले अदनान ने CAA का किया समर्थन करते हुए कहा था, “मैं ये जरूर कह सकता हूँ कि मैंने अपनी आँखों से देखा है कि वहाँ पर अल्पसंख्यकों को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मैंने इस्लामाबाद में देखा है कि किस तरह से वहाँ सोसायटी दो गुटों में बँटी हैं। मैं एक सेक्टर में था जहाँ मैंने देखा की सोसाइटी के उस पार एक स्लम था। मैंने किसी से पूछा कि सोसायटी के उस पार कौन रहता है, तो मुझे बताया गया कि उधर क्रिश्चियन कम्युनिटी के लोग रहते हैं।”

अदनान ने आगे कहा था, “मेरे लिए ये सुनना काफी दुखद था। उन्हें उचित सम्मान और आजादी नहीं मिलती जिसे बाकी लोग इंज्वॉय करते हैं। मैं खुश हूँ कि सीएए के आने से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में रह रहे लोगों को मदद मिलेगी।”

JNU छात्र संघ ने दंगा ‘पीड़ितो’ को कैंपस में बुलाया, प्रशासन ने चेताया

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने विश्वविद्यालय के छात्र संघ (JNUSU) को परिसर में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के कथित पीड़ितों को आश्रय देने के खिलाफ चेतावनी दी है। इस संबंध में जारी नोटिस में जेएनयू के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने ऐसे किसी भी प्रयास में शामिल छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। नोटिस में कहा गया है कि JNUSU को जेएनयू परिसर को आश्रय गृह बनाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

साथ ही रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने यह भी कहा है कि जेएनयू प्रशासन को कैंपस निवासियों से कई फोन आए थे, जिसमें कहा गया था कि वो JNUSU द्वारा उठाए गए इस कदम के कारण काफी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वहीं विश्वविद्यालय के वीसी जगदीश कुमार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्रों को सलाह दी है कि कृप्या ऐसी खुली छूट न दें। ऐसा करने की बजाय वे परिसर से आवश्यक वस्तुएँ लेकर लोगों की सहायता कर सकते हैं।

वहीं धुर वामपंथी संगठनों के प्रभाव वाले छात्र संघ ने दावा किया है कि JNUSU कार्यालय उनके दायरे में आता है और कहा, “जेएनयू हमेशा लोगों की जरूरत के लिए खुला रहा है। हमने 1984 के दंगा पीड़ितों को आश्रय भी दिया था।”

JNUSU ने एक पोस्ट में दावा किया कि सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के अपने अभियान के तहत स्वयंसेवकों को बुलाया था। इस पोस्टर में कहा गया था कि शहर में कई बचाव दल काम कर रहे हैं। पोस्टर में कहा गया था, “हमारा कैंपस/JNUSU ऑफिस उन सभी लोगों के लिए खुला है, जिन्हें आश्रय की जरूरत है।” पोस्टर में चार JNUSU सेंट्रल पैनल मेंबर्स के नाम और नंबर भी थे। ये नाम हैं- आइशी घोष, साकेत मून, सतीश चंद्र और दानिश।

उल्लेखनीय है कि रविवार (फरवरी 23, 2020) से दिल्ली की सड़कों पर शुरू हुए हिंदू विरोधी दंगों में लगभग 42 लोगों की मौत हो गई, जबकि और 200 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में सुरक्षा बलों के करीब 70 लोग शामिल हैं। मृतकों में दिल्ली पुुलिस का हेड कांस्टेबल रतनलाल और आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा भी शामिल हैं। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मनदीप सिंह रंधावा ने शुक्रवार को बताया कि दंगों के सिलसिले में 123 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है जिसमें 23 गोली चलाने के मामलों की है। उन्होंने बताया कि दंगाइयों की पहचान कर उन्हें शिकंजे में लेने का काम तेजी से जारी है। अब तक 630 लोग हिरासत में लिए गए हैं या गिरफ्तार किए गए हैं।

मजहबी भीड़ ने फूँक दी दुकान, ‘श्याम चाय वाले’ की मदद के लिए आएँ आगे, ये रहे बैंक डिटेल्स

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान मजहबी भीड़ ने करावल नगर इलाके में मौजूद ‘श्याम टी स्टॉल’ को निशाना बनाया। लूटपाट के बाद दुकान को आग के हवाले कर दिया। इस दुकान के मालिक श्याम साहनी सब कुछ देख रहे थे, लेकिन चाहकर भी कुछ कर न सके। इस घटना के बाद से श्याम का परिवार, जो हर रोज सुबह से शाम तक इलाके के न जाने कितने लोगों के दिन की शुरुआत एक कप मीठी चाय के साथ कराता था, आज उसी परिवार को एक कप चाय नसीब नहीं हो रही है। श्याम अपने बीबी-बच्चों की जान को बचाने के लिए एक घर से दूसरे घरों में छिपते हुए बिता रहे हैं।

श्याम साहनी दशकों पहले रोजी-रोटी की तलाश में बिहार से दिल्ली आए थे। करावल नगर में ‘श्याम टी स्टॉल’ के नाम से दुकान खोली। लेकिन, श्याम ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जिन लोगों को वह अपने हाथों से मिठास भरी चाय बनाकर पिलाते हैं एक दिन उन्हीं में से कुछ लोग दुकान को आग लगा देंगे।

सोमवार (24 फरवरी 2020) को हिंसा भड़कने के बाद श्याम अपनी दुकान बंद ही कर रहे थे कि दंगाइयों की भीड़ अचानक से पत्थरबाजी करती हुई आई। दंगाइयों ने पहले तो जमकर लूटपाट और तोड़फोड़ की। इसके बाद उन्हीं की आँखों के सामने दंगाई मजहबी भीड़ ने चाय की दुकान को आग के हवाले कर दिया। श्याम किसी तरह अपनी जान बचाकर भागे। इसके बाद डर से श्याम ने किराए का मकान खाली कर दिया। बीबी-बच्चों के साथ एक परिचित के घर में पनाह ले राखी है। जब ऑपइंडिया की टीम मौके पर पहुँची तो आस-पास के लोगों ने बताया था, “चार दिन तक श्याम ने कपड़े बदलना तो दूर कुछ खाया तक नहीं। उसकी आँखों के सामने उसका सब कुछ बर्बाद हो गया।”

ताहिर हुसैन की छत से चले पेट्रोल बम में बर्बाद हुई ‘श्याम टी स्टॉल’

दरअसल बिहार वैशाली के चंदपुरा पातेपुर गांव के रहने वाले श्याम साहनी, पुत्र रामचन्द्र साहनी करीब 33 साल पहले (1987) दिल्ली में नौकरी करने के लिए आए थे। इसके बाद वह बच्चों को भी दिल्ली ले गए। श्याम के चार छोटे-छोटे बच्चे नीरज कुमार, धीरज कुमार, सन्नी और रोशन हैं, जो कि दंगों के बाद से बेहद डरे हुए हैं। इस घटना के बाद श्याम के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। श्याम का परिवार इन दिनों दूसरे के घरों में माँगकर खाना खाने को मजबूर है। अब ऐसे में बड़ा सवाल ये खड़ा होता कि इस हालात में श्याम अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे कर पाएगा?

श्याम का परिवार रुंधे गले से बस एक ही बात कहता है कि “अब मेरा गुजारा कैसे होगा बाबू जी”। श्याम के मुताबिक उसकी दुकान में करीब पाँच लाख रुपए का नुकसान हुआ है। ऑपइंडिया ने श्याम को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। श्याम के बैंक अकाउंट की पुष्टि के बाद सारी डिटेल्स नीचे दे रहे हैं। इस मुश्किल वक़्त में दंगा पीड़ित श्याम साहनी के परिवार की मदद के लिए आगे आएँ।

Shyam Sahni
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