Home Blog Page 5058

‘गो बैक केजरीवाल’: बलिदानी रतन लाल के परिवार से मिलने पहुँचे CM को जनता ने गरिया कर भगाया

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल गोकुलपुरी थाने के वीरगति को प्राप्त हेड कॉन्स्टेबल ऑफ पुलिस रतन लाल के यहाँ पीड़ित परिवार से मिलने गए थे, जहाँ से उन्हें भगा दिया गया। जनता ने दिल्ली के मुखिया के विरुद्ध जम कर नारेबाजी की और उन्हें पीड़ित परिवार से मिले बिना ही वापस जाना पड़ा। बता दें कि केजरीवाल दिल्ली में हिंसा भड़कने के बाद ही तरह-तरह से ड्रामे करने में लगे हुए हैं और कभी राजघाट पर मौन धरना दे रहे हैं तो कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के गृह मंत्रालय से एक्शन लेने की अपील कर रहे हैं। ऐसे में, लोग अरविन्द केजरीवाल से नाराज़ हैं और उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।

ज्ञात हो कि नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में सीएए विरोधी दंगाइयों ने सोमवार (फरवरी 24, 2020) को रतन लाल को मार डाला था। वो एक जाँबाज पुलिस अधिकारी थे, जो कोई भी कठिन टास्क आने पर उसे तुरंत लपक लेते थे और निकल पड़ते थे। उन्होंने ही 2013 में दो आदिवासी महिलाओं के साथ हुए बलात्कार के मुख्य आरोपित को धर दबोचा था। रतन लाल की पत्नी छोटे-छोटे बच्चे हैं, जो पूछ रहे हैं कि उनके पापा का क्या कसूर था कि उन्हें मार डाला गया? उन्होंने अपनी माँ से वादा किया था कि वो अबकी होली राजस्थान के सीकर स्थित अपने गाँव फतेहपुर तिहावली में पूरे परिवार के साथ मनाएँगे। उनका ये वादा अधूरा ही रह गया।

अरविन्द केजरीवाल और दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया वीरगति को प्राप्त रतन लाल के परिवार से मिलने जैसे ही पहुँचे, आक्रोशित लोगों ने ‘केजरीवाल, वापस जाओ’ और ‘गो बैक केजरीवाल’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। साथ ही, कुछ अश्लील गालियाँ भी दीं। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे केजरीवाल को लोगों के विरोध के कारण सिसोदिया के साथ उलटे पाँव वापस लौटना पड़ा:

रतन लाल के छोटे भाई ने बताया कि रतन शुरू से ही पुलिस की वर्दी पहनना चाहते थे। उनके भीतर धैर्य की अद्भुत क्षमता थी। उनके भाई बताते हैं कि उन्होंने कभी रतनलाल को आपा खोते या किसी पर चिल्लाते नहीं देखा था। क़रीब एक महीने पहले पूरा परिवार मिला था, जब एक रिश्तेदार की मौत हो गई थी। उनके छोटे भाई दिनेश कहते हैं कि आज उन्होंने अपने भाई को खोया है, कल को उनकी जगह कोई और हो सकता है।

दिल्ली में अर्धसैनिक बल के जवानों पर ‘एसिड’ से हमला, स्थानीय हिंदुओं ने की पीड़ितों की मदद

दिल्ली में दंगाइयों का उत्पात बढ़ता ही जा रहा है। अर्धसैनिक बलों के जवानों पर एसिड से हमला किया गया है। ‘टाइम्स नाउ’ की ख़बर के अनुसार, ये करवाल नगर की घटना है। ख़बर के अनुसार, अर्धसैनिक बल के जवान वहाँ स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए करावल नगर के मुहल्लों में गए थे, तभी उन पर एसिड या एसिड की तरह किसी केमिकल से हमला किया गया। उसके तुरंत बाद उन्हें जीटीबी हॉस्पिटल में ले जाया गया। दंगाई हथियारों से लैस थे और उन्होंने पूरी साज़िश के तहत हमला किया।

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के कई इलाक़ों में हिंसा अभी भी जारी है। चाँदबाग़ इलाक़े में हिंसा भड़कने के बाद फिर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। करावल नगर में जवानों पर एसिड फेंके जाने के बाद स्थानीय लोगों ने घरेलू तरीकों से उनका उपचार करने का प्रयास किया। उसके बाद जवानों को हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया।

नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कैसे एसिड अटैक से पीड़ित सुरक्षा बलों के जवानों की स्थानीय हिन्दू मदद कर रहे हैं:

दिल्ली पुलिस ने भी स्पष्ट किया है कि उनके पास पुलिस बलों के जवानों की कमी नहीं है और गृह मंत्रालय से उन्हें पूर्ण समर्थन मिल रहा है। दिल्ली विभिन्न इलाक़ों में धारा-144 लागू किया गया है। पुलिस ने कर्फ्यू लागू करने की बात नकार दी है। अभी तक 11 लोगों की मौत और पुलिसकर्मियों सहित 186 लोगों के घायल होने की ख़बर है। गृह मंत्री अमित शाह ने सुबह ही बैठक कर के स्थिति की समीक्षा की थी।

NDTV ने फैलाया झूठ, कहा पुलिस के पास पर्याप्त लोग नहीं; कमिश्नर ने कहा- झूठ मत फैलाओ

दिल्ली में दंगाई लगातार अपनी ख़तरनाक गतिविधियाँ बढ़ाते जा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने बताया है कि राज्य में पर्याप्त पुलिस बलों की तैनाती की है। उन्होंने कहा कि कुछ समाचार एजेंसियों ने ख़बर चलाई थी कि दिल्ली पुलिस को गृह मंत्रालय से पर्याप्त बल नहीं मिला है, जो कि ग़लत है। इनमें से NDTV का नाम प्रमुख है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय लगातार दिल्ली पुलिस की सहायता कर रहा है और उनके पास पर्याप्त बल उपलब्ध कराए गए हैं। पटनायक ने आश्वासन दिया कि उपद्रवियों को बख्शा नहीं जाएगा। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता एमएस रंधावा ने कहा कि पुलिस की पहली प्राथमिकता स्थिति को नियंत्रित करने की थी, जो हो गई है।

रंधावा ने बताया कि जितने भी एफआईआर रजिस्टर किए गए हैं, उन सभी के अंतर्गत जाँच होगी और इस दंगे के मुख्य साज़िशकर्ता को पकड़ा जाएगा। वहीं उधर एमनेस्टी इंडिया ने कहा है कि कुछ नेतागण घृणा फैला रहे हैं, जिन पर रोक लगनी चाहिए। गाज़ियाबाद शहर में भी धारा-144 लगा दिया गया है और साथ ही सारे शराब की दुकानों को बंद कर दिया गया है। मुस्तफाबाद में एक क्षेत्र में आगजनी की गई, जिसके बाद वहाँ से SOS संदेश भेजा गया। वहाँ फायर ब्रिगेड, पुलिस और मीडिया से मदद माँगी गई है।

करावल नगर, मौजपुर, चाँदपुर और बाबरपुर- दिल्ली के इन चार थाना क्षेत्रों में धारा-144 लगा दिया गया है। उधर लखनऊ में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। अलीगढ़ में क़ानून-व्यवस्था पहले से ही तगड़ी रखी गई है। उधर सीएए दंगाइयों की हिंसा के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए पुलिस कॉन्स्टेबल रतन लाल के पार्थिव शरीर को उनके बुरारी स्थित निवास पर लाया गया। दिल्ली के चाँदबाग़ इलाक़े में भी फिर से हिंसा भड़कने की ख़बर है। वहाँ पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस के गोले दागने पड़े।

सबसे ज्यादा स्थिति नार्थ-ईस्ट दिल्ली में ख़राब है। ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी रखी जा रही है। दिल्ली पुलिस ने बताया है कि अब तक उसके 56 जवान घायल हुए हैं, वहीं 130 नागरिक भी घायलों की सूची में शामिल हैं। स्पेशल सीपी सतीश गोलछा ने कहा कि खजूरी ख़ास इलाक़े में हिंसा भड़काने वालों को जल्द शिकंजे में लिया जाएगा। पुलिस ने दोषियों के ख़िलाफ़ लीगल एक्शन लेने की बात कही है। भजनपुरा क्षेत्र में धारा-144 लगने के बाद से स्थिति नियंत्रण में है।

दिल्ली के खजूरी ख़ास में पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने मिल कर फ्लैग मार्च भी किया। कॉन्ग्रेस पार्टी ने हिंसा पर चर्चा के लिए अपनी वर्किंग कमिटी की बैठक बुलाई है। दिल्ली के एलजी अनिल बैजल ने भी शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। जीटीबी अस्पताल में एक और व्यक्ति की मौत के बाद अब तक हिंसा में मरने वालों की संख्या 11 हो गई है।

दिल्ली के हीरो की हत्या की, अब ‘हाहा’ रिएक्ट कर जश्न मना रहे कट्टरपंथी

हाहा। ये एक ऐसा रिएक्शन है जो फेसबुक पर मजाकिया पोस्टों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। सोमवार (फरवरी 24, 2020) को भड़की हिंसा में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के गोकुलपुरी इलाक़े के पुलिस कॉन्स्टेबल रतन लाल को सीएए विरोधियों ने मार डाला। दंगाइयों ने एक भरे-पूरे परिवार को उजाड़ दिया। उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं, जो पूछे रहे हैं कि आख़िर उनके पिता का क्या कसूर था? रतन लाल एक निर्भीक, धैर्यवान और आगे से नेतृत्व करने वाले पुलिसकर्मी थे, जिन्हें कभी किसी ने आपा खोते हुए नहीं देखा था। जब कोई कठिन टास्क आता तो वो उसे लपक कर निकल पड़ते थे।

अगर आप समझते हैं कि दंगाइयों में रतन लाल की मौत को लेकर किसी भी प्रकार का पश्चाताप है या फिर क्षोभ है, तो आप ग़लत हैं। इसके लिए हमने कई ऐसे पोस्ट्स को खंगाला, जहाँ रतन लाल से सम्बंधित समाचार प्रकाशित किए गए थे। काफ़ी लोगों ने उन पोस्ट्स पर मजाकिया रिएक्शन दिया था।

जी हाँ, देश के एक जाँबाज पुलिसकर्मी की मौत पर ख़ुशी मनाने वाले ये लोग इसी देश के हैं। हमनें ‘ज़ी न्यूज़’ के एक पोस्ट को खँगाला, जहाँ अली ख़ान, बाबा रउफ, इफ्तिखार अली, अवैस हैदर और इशाक वानी जैसे लोगों ने ‘हाहा’ रिएक्शन दे रखा था। ये कौन लोग हैं, आप ख़ुद देख लीजिए।

रतन लाल की हत्या के बाद ख़ुशी मनाते लोग कर रहे हैं ‘हाहा’ रियेक्ट

इसी तरह ‘रिपब्लिक टीवी’ ने भी वीरगति को प्राप्त रतन लाल की ख़बर चलाई, जिसपर बशीर, जिबान, मुदस्सिर, इमरान, ज़ाहिब आकिब, फ़ारूक़ ख़ान और मुहम्मद शहजाद ने ‘हाहा’ रिएक्शन दिया। जैसा कि आप देख सकते हैं, ये सभी मुस्लिम हैं। ये सभी देश के एक वीर जवान की मौत नहीं बल्कि इसे हत्या कहिए, पर ख़ुशी मना रहे हैं, झूम रहे हैं। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने भी इस ट्रेंड की तरफ़ लोगों का ध्यान आकृष्ट कराया:

जैसा कि आप देख सकते हैं, ‘टाइम्स नाउ’ ने बलिदानी रतन लाल वाली ख़बर शेयर की थी, जिसके बाद हामिद, हसीब, मुदस्सिर, जिया उर रहमान, फैसल, अफजल और रेहान सहित कई लोगों ने ‘हाहा’ रिएक्ट किया। यहाँ भी अधिकतर दूसरे मजहब वाले ही थे। पुलिस ने हिंसा को लेकर भी मोहम्मद शाहरुख़ को गिरफ़्तार किया है। उससे पहले शाहरुख़ की वायरल फोटो के जरिए ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी गढ़ी जा रही थी जो फेल हो गई।

जहाँ तक वीरगति को प्राप्त रतन लाल की बात है, उन्होंने ही 2013 में दो आदिवासी महिलाओं का बलात्कार करने वाले दोषी को धर दबोचा था। सीमापुरी के एक रेस्टॉरेंट में कुछ पहलवानों ने तबाही मचाई थी, तब उनसे रतन लाल ही निपटने गए थे। वो एक योद्धा की तरह वीरगति को प्राप्त हुए, नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में सीएए विरोधी दंगाइयों से लड़ते हुए। उन्होंने 1998 में कॉन्स्टेबल के रूप में दिल्ली पुलिस ज्वाइन की थी। वह गोकुलपुरी में पोस्टेड थे।

गुजरात में हिन्दुओं के घरों व गाड़ियों को जलाया, 85 गिरफ़्तार: सड़क पर उतरे प्रताड़ित लोग

गुजरात के आनंद जिले में स्थित खम्बात में एक बार फिर से हिंसा भड़क गई है। लगातार तीसरे दिन निकली उग्र भीड़ ने दो घरों को जला डाला और कई गाड़ियों में आग लगा दी। प्रताड़ित हिन्दुओं ने मंगलवार (फरवरी 25, 2020) को क्षेत्र में बंद का आह्वान किया था। स्कूल, कॉलेज व बाजार बंद रहे। पुलिस ने हिंसा की वारदात के बाद 5 लोगों को हिरासत में लिया है। हिन्दू संगठनों की माँग है कि रविवार और सोमवार को हुई हिंसक वारदातों में शामिल लोगों को सज़ा दी जाए। अहमदाबाद के आईजी आइके जडेजा ने बताया कि आरएएफ और एसआरपी की कुछ टुकड़ियाँ तैनात की गई हैं।

हर टुकड़ी में 80 जवान शामिल हैं। 23 फरवरी को हुई हिंसा के बाद से अब तक कुल 85 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है। इनमें से अधिकतर पत्थरबाजी और आगजनी करने वाले दंगाई हैं। रविवार को कई घरों को फूँक डाला गया था, जिसमें 50 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था। सोमवार को तो हद ही हो गई, जब पुलिसकर्मियों को ही निशाना बनाया जाने लगा।

रविवार से लेकर अब तक कुल 20 घरों को आग के हवाले किया जा चुका है और इतनी ही गाड़ियों को भी फूँका जा चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनवरी में भी हिंसा भड़की थी, जिसके बाद कुछ लोगों को गिरफ़्तार किया गया था। अब उन्हीं लोगों ने जेल से बाहर आते ही ताण्डव मचाना शुरू कर दिया है।

वहीं प्रताड़ित हिन्दुओं ने बंद के दौरान अपने ऊपर हो रही हिंसा के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि समुदाय विशेष ने हिन्दुओं को निशाना बनाया। अकबरपुर में मुस्लिम भीड़ ने पुलिसकर्मियों की तैनाती में कमी का फायदा उठाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे के कारण अहमदाबाद में अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, जिसका फायदा उठा कर हिन्दुओं के घरों व गाड़ियों को जला डाला गया। इस मामले में पुलिस ने कुल 4 एफआईआर दर्ज की है और उसके तहत कार्रवाई की जा रही है। सरफराज, युसूफ, ज़ाहिर, हनीफ और मोईनुद्दीन सहित कइयों को गिरफ़्तार किया गया है।

प्रताड़ना से तंग आकर सड़क पर निकले हिन्दू

आनंद की एसपी इंचार्ज दिव्या कुमारी ने कहा कि खम्बात क्षेत्र का सांप्रदायिक हिंसा का पुराना इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि हिंसा कैसे शुरू हुई, ये स्पष्ट नहीं है लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है। हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए 6 लोगों को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।

CAA विरोधी दंगों में बलिदानी हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की पत्नी को अमित शाह ने लिखा संवेदना पत्र

देश की राजधानी दिल्ली में CAA विरोधियों द्वारा शुरू की गई हिंसा के बीच सोमवार को दंगाइयों की पत्थरबाजी और गोली का निशाना बने दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हेड कॉन्स्टेबल मृतक रतन लाल की मृत्यु पर गहरी संवेदना व्यक्त की है और श्रद्धांजलि व्यक्त की है।

अमित शाह ने दिल्ली हिंसा में मृतक रतन लाल की पत्नी पूनम देवी को मंगलवार (फरवरी 25, 2020) को लिखे पत्र में संवेदना व्यक्त की। उन्होंने पत्र में लिखा है कि रतन लाल एक बहादुर एवं कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी थे, जिन्होंने कठिन चुनौतियों का सामना किया और एक सच्चे सिपाही की तरह उन्होंने देश की सेवा में अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया है।

गौरतलब है कि सोमवार को पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में इस्लामिक पत्थरबाजों ने नागरिकता कानून के विरोध के बहाने गोलियाँ, पत्थरबाजी और आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया। इस बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया जिसमें हाथ में बन्दूक लिए लाल कमीज पहने मोहम्मद शाहरु को एक के बाद एक कई राउंड फायरिंग करते हुए देखा गया।

दिन भर चली पत्थरबाजी और फायरिंग के नाटक के बीच एक पुलिसकर्मी रतन लाल को अपनी जान गँवानी पड़ी और एक पुलिस अधिकारी को गंभीर हालातों में अस्पताल भर्ती किया गया।

मंगलवार को भी नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के कर्दमपुरी में हिंसा भड़क गई है। वहाँ गोलीबारी भी हुई है। गोलीबारी की सूचना मिलते ही अर्धसैनिक बलों को वहाँ के लिए रवाना कर दिया गया है। वहीं खजूरी ख़ास क्षेत्र में पत्थरबाजी फिर से तेज़ हो गई है। करावल नगर की तरफ़ जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया गया है। खजूरी ख़ास में लगातार तीसरे दिन हिंसा भड़की है और वहाँ पुलिस की उपस्थिति भी नगण्य है, जिससे दंगाई खुलेआम तांडव कर रहे हैं। वहाँ कई घरों को जलाए जाने की ख़बरें भी आ रही हैं

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में एक पत्रकार को भी गोली मारने की ख़बर आई है। अभी इस बारे में और सूचना आनी बाकी है। वहीं शाहीन बाग़ के उपद्रवियों ने शांति बनाए रखने की अपील की है। इन्हीं उपद्रवियों का आधिकारिक सोशल मीडिया पेज झूठे अफवाह फैला रहा था। सोमवार की रात भजनपुरा-यमुना विहार में दंगाइयों ने हिंसा की एक के बाद एक वारदातों को अंजाम दिया। एनडीटीवी की पत्रकार निधि राजदान ने दावा किया है कि टीवी चैनल के दो पत्रकारों की पिटाई की गई है।

मनीष सिसोदिया को झटका: क्लीनचिट देने वाली ATR खारिज, कोर्ट ने दिया नई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश

दिल्ली की एक अदालत ने जामिया हिंसा मामले में उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दी गई क्लीन चिट देने वाली कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) को खारिज करते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को नए सिरे से रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। बता दें कि सिसोदिया ने ट्वीट कर जामिया हिंसा के दौरान बस जलाने का आरोप पुलिसकर्मी पर लगाया था। इस मामले में जाँच के बाद दिल्ली पुलिस ने सिसोदिया को क्लीन चिट देते हुए कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नई रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विशाल पाहूजा ने पुलिस प्रमुख को 17 मार्च तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। सोमवार को दाखिल एटीआर में कहा गया था कि ट्वीट की विषयवस्तु से मनीष सिसोदिया के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता। मनीष सिसोदिया ने उस वीडियो क्लिप पर अपनी राय रखते हुए ट्वीट किया था जो कि कई न्यूज चैनलों पर चल रहा था।

पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा शिकायत पर गौर करने के बाद पता चला कि ट्वीट पुलिस के खिलाफ महज आरोप थे और आईपीसी की धारा 153, 153-ए, 504,505 के तहत कोई अपराध नहीं बनता। जाँच में सिसोदिया के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला है और उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता।

थाना तिलक मार्ग पुलिस की ओर से पेश की गई इस एटीआर रिपोर्ट का शिकायतकर्ता अलख आलोक श्रीवास्तव ने विरोध किया। अदालत ने शिकायतकर्ता की दलीलें सुनने के बाद सिसोदिया को दी गई क्लीन चिट खारिज कर दी। बता दें कि अलख आलोक ने आईपीसी की धारा 153, 153-ए, 504 और 505 के तहत सिसोदिया के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की माँग करते हुए दावा किया था कि आम आदमी पार्टी के नेता ने ट्विटर के जरिए फर्जी खबर फैलाकर दिल्ली पुलिसकर्मियों पर पिछले साल 15 दिसंबर को जामिया नगर में हिंसा के दौरान डीटीसी बस को जलाने का आरोप लगाया था।

उल्लेखनीय है कि सिसोदिया ने 15 दिसंबर 2019 को प्रदर्शन के दौरान हुई आगजनी का एक वीडियो शेयर करते हुए दिल्ली पुलिस पर ही बसों में आग लगाने का आरोप लगा दिया था। सिसोदिया ने ट्विटर पर कुछ फोटो शेयर कर दावा किया था कि दिल्ली पुलिस भाजपा के इशारों पर बसों को आग के हवाले कर रही है। हालाँकि गलती से उन्होंने दिल्ली पुलिस की वो फोटो शेयर कर दी, जिसमें पुलिस आग बुझाती हुई दिख रही है। जबकि, सिसोदिया ने दावा किया था कि पुलिस आग लगा रही है।

दिल्ली की मस्जिद में तोड़-फोड़, भगवा झंडा लहराया: स्वघोषित पत्रकार राणा अयूब ने शेयर किया वीडियो

दिल्ली में नागरिकता कानून के विरोध में चल रही हिंसा और दंगों के बीच सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें मस्जिदों को जलाते हुए देखा जा सकता है। हालाँकि, यह वीडियो अभी मात्र सोशल मीडिया पर ही तेजी से शेयर किया जा रहा है। इस बात की कोई प्रमाणिकता नहीं है कि यहाँ घटना कहाँ की है और ऐसा करने वाले कौन लोग हैं? ट्विटर पर हिन्दू विरोधी अजेंडा चलाने के लिए मशहूर तथाकथित जर्नलिस्ट राणा अयूब द्वारा भी एक ऐसा ही वीडियो शेयर किया गया है।

अपने ट्वीट में प्रोपेगैंडा पत्रकार राणा ने लिखा है- “एक मस्जिद तोड़ दी गई है। लोग भगवा झंडे इस पर लहरा रहे हैं।” राणा अयूब के ही ट्वीट पर एक ट्विटर यूजर ने सवाल किया है कि क्या झंडा लहराने का मतलब ‘तोड़ना’ होता है?

सोशल मीडिया के जरिए सामने आ रहे ये वीडियो दिल्ली के अशोक नगर के बताए जा रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग मस्जिद के ऊपर चढ़कर मस्जिद के स्पीकर नीचे फेंक रहे हैं और उस पर कोई झंडा फहरा रहे हैं।

गौरतलब है कि CAA विरोध के नाम पर दिल्ली में रविवार शाम से ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे से ठीक पहले ही देश की राजधानी दिल्ली सहित ही गुजरात और अलीगढ में भी दंगे भड़काने की कोशिशें की गई हैं। इन दंगों में दिल्ली पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल को अपनी जान गँवानी पड़ी है और कई अन्य गोलीबारी और पत्थरबाजी में घायल हो गए हैं।

इससे कुछ समय पहले, चाँदनी चौक में मंदिर तोड़ा गया था। बंगाल में मस्जिद से एक भीड़ निकलती है और रेलवे स्टेशन से लेकर जो कुछ सामने आता है आग लगा देती है। सीलमपुर में पुलिस को मजहबी भीड़ ने दिसंबर में हमला बोल कर भागने पर मजबूर किया था। जामिया नगर में बसों को फूँका गया।

शाहीन बाग़ से हो रही परेशानी का कोई अंत नहीं। पटना के फुलवारी शरीफ में मंदिर पर पत्थरबाज़ी की घटना भी CAA की आड़ में हुई थी। ये सब होता रहा और मीडिया नैरेटिव से लगातार गायब किया गया। अलीगढ़ में ही परसों मुस्लिमों की एक भीड़ द्वारा पत्थरबाजी भी की गई थी।

बाकी देशों की तुलना में भारत में ज्‍यादा धार्मिक आजादी, CAA भारत का आंतरिक मसला: ट्रम्प

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (फरवरी 25, 2020) को दिल्ली में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने कई विषयों पर बातचीत की। यहाँ तक कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के सवाल पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने हुए कहा कि धार्मिक आजादी पर भारत अच्छा काम कर रहा है।

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों ने जब डोनाल्ड ट्रम्प से दिल्ली हिंसा पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि पीएम मोदी से इस मसले पर कोई बात नहीं हुई। ट्रम्प ने कहा कि बाकी देशों के मुकाबले भारत ज्यादा धार्मिक है, इस बारे में पीएम मोदी से बातचीत भी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि नरेंद्र मोदी सबकी धार्मिक स्वतंत्रता चाहते हैं।

दरअसल, रविवार से भड़की हुई उत्तर पूर्वी दिल्ली और सीएए को लेकर हिंसा पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्प ने कहा- “हमने धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में बात की थी। पीएम ने कहा कि वह चाहते हैं कि लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता मिले। उन्होंने इस पर वास्तव में कड़ी मेहनत की है। मैंने व्यक्तिगत हमलों के बारे में सुना, लेकिन मैंने इसकी चर्चा नहीं की। यह भारत पर निर्भर है। बाकी देशों की तुलना में भारत में ज्‍यादा धार्मिक आजादी है। धार्मिक आजादी की दिशा में भारत अच्‍छा काम कर रहा है।”

‘भारत ने मेरा शानदार स्वागत किया गया’

डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रेस को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत में जैसा स्वागत उनका किया गया है, वैसा आज तक किसी अमेरिकी शख्स का नहीं हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस समय भारत-अमेरिका के रिश्ते सबसे बेहतरीन हैं और दोनों देशों के द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा- “हमने कई मुद्दों पर विचार किया है, हम भारत के साथ आपसी संबंधों को बढ़ावा देना चाहते हैं। हम पूरे विश्व में शांति चाहते हैं।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा, “हमें बहुत ही आनंद आया। हमारी शानदार बैठकें हुईं … यह एक जबरदस्त देश है। मुझे लगता है कि उन्होंने हमें जितना पसंद किया है, उससे कहीं ज्यादा वे हमें पसंद करते हैं। प्रधानमंत्री और मेरे बीच एक गहरा रिश्ता है।”  

‘रेडि‍कल इस्‍लामिक आतंकवाद को खत्‍म करने के लिए प्रयासरत’

कट्टरपंथी आतंकवाद के विषय पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्प ने कहा, “आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए हमने कई कदम उठाए। रेडि‍कल इस्‍लामिक आतंकवाद को खत्‍म करने के लिए प्रयासरत हैं। हम आतंकवाद को रोकने के लिए सौ फीसदी काम करना चाहते हैं। इस्‍लामिक आतंकवाद पर नकेल लगाने की दिशा में काम हो रहा है। हम पाकिस्‍तान पर दबाव बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।”

पीएम मोदी और ट्रम्प की बातचीत से पहले भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि भारतीय पक्ष ने अमेरिका के सामने H1 B वीजा का मुद्दा उठाया और आईटी क्षेत्र में भारतीय पेशेवरों के योगदान पर प्रकाश डाला गया। इस दौरान विशेष रूप से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के भीतर वैश्विक संदर्भ में कनेक्टिविटी पर चर्चा की गई।

चिदंबरम ने दिल्ली दंगों के लिए जनता को बताया जिम्मेदार, कहा- अदूरदर्शी लोगों को सत्ता देने की चुका रहे कीमत

दिल्ली के दंगों पर भी कॉन्ग्रेस नेता राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिंदबरम ने इसके बहाने बीजेपी पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि जनता ‘असंवेदनशील तथा अदूरदर्शी’ नेताओं को सत्ता में पहुॅंचाने की कीमत चुका रही है। ऐसा कहते हुए उन्होंने न केवल देश के मतदाताओं की समझदारी पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी भूल गए कि इसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया ने वह सरकार चुनी थी जिसमें वे मंत्री रहे हैं।

चिदंबरम ने इस मसले पर कई ट्वीट किए हैं। इसमें उन्होंने कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून पर तत्काल प्रभाव से रोक लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक सीएए को रोक देना चाहिए। सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों की बात सुननी चाहिए।

गौरतलब है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 150 घायल हुए हैं। घायलों में अर्द्धसैनिक बलों और दिल्ली पुलिस के कर्मी भी शामिल हैं। उपद्रवियों ने घरों, दुकानों, वाहनों और एक पेट्रोल पंप को आग लगा दिया और पथराव किया। चिदंबरम ने कहा कि सोमवार को दिल्ली में हुई हिंसा और उसमें लोगों की मौत बहुत स्तब्धकारी है और इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘लोग असंवेदनशील और अदूरदर्शी लोगों को सत्ता में बैठाने की कीमत चुका रहे हैं। भारत में नागरिकता कानून 1955 लागू था और उसमें किसी संशोधन की जरूरत नहीं पड़ी थी। तो कानून में अब संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी? संशोधन (सीएए) को तुरंत रद्द कर देना चाहिए।’’

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘‘अब भी देर नहीं हुई। सरकार को सीएए का विरोध कर रहे लोगों की बात चुनना चाहिए और घोषणा करना चाहिए कि कानून की वैधता के बारे में उच्चतम न्यायालय का फैसला आने तक इस पर रोक रहेगी।’’

कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी ने चेतावनी दी थी कि सीएए बहुत अधिक विभाजनकारी है और इसे रद्द कर देना या छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमारी चेतावनी अनसुनी की गई।’’