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न अमन की खोखली बातों से बुझेगी ये आग, न जीते-जी भरेंगे घाव: बारूद के ढेर को चिंगारी से बचाने की मुश्किल

दंगे के तुरंत बाद अमन की बात वो करते हैं जिन्हें दंगों के अपराधों को छुपाना होता है। जिस तरह दंगे एक जघन्य अपराध हैं, ठीक उसी तरह दंगों की तैयारी करना भी। दंगों का जख्म अमन की खोखली बातों से नहीं भरता। दंगों का जख्म केवल इंसाफ से भरता है। जिसने अपना बच्चा खोया, जिसने अपना संबंधी खोया, जिसने अपने जीवन भर की कमाई खोई, जिसने अपने सारे व्यवसाय को सबेरे जला हुआ पाया, उनसे फकत अमन की बात करना बेमानी है।

ये अपराध इंसाफ मॉंगता है। उन कारणों और उन लोगों की पहचान मॉंगता है जिन्होंने इस दंगे के लिए इतनी तैयारी की थी। उन लोगों की पहचान माँगता है जिन्होंने हज़ारों की दंगाई भीड़ इकट्ठा करके दो रात तक अलग अलग मोहल्लों में छापामार दंगा करके इंसानियत को शर्मसार किया।

वजह कई हैं पर फिलहाल एक वजह साफ स्पष्ट दिख रही है। ट्रंप और विदेशी मीडिया के सामने पाक प्रायोजित हिंसा, जिसे भारत के ही कुछ लोगों ने उन लोगों से पैसा या कुछ और प्रलोभन दे कर फैलाया। हमें इस दंगे की तह में जाना ही चाहिए। इस कैंसर को खत्म करना ही चाहिए। और बंद होनी चाहिए अमन की खोखली बातें। दो महीने से ज्यादा हो गए तब तो नहीं हुआ था दिल्ली के उस हिस्से में रास्ता रोको, दिल्ली रोको आंदोलन। अचानक से सब होना ट्रंप के आते ही और वो भी इस तैयारी के साथ, बस एक ही बात बताता है कि दुश्मन किस तरह से हमारे देश के अंदर अपनी वैश्विक राजनीति हेतु सक्षम है। क्या इस खतरे के साथ हम हमेशा रहने को सक्षम हैं?
क्या अनपढ़, क्या पढ़ा-लिखा, क्या वामपंथी विचारधारा वाले अदूरदर्शी नाटककार सब सम्मिलित हैं, भारत की राजव्यवस्था को तोड़ने में और बहाना बना रहे हैं संविधान की रक्षा का।

ये जितने भी लोग संविधान की रक्षा के नाम पर आज रोड ब्लॉक करने की और आगजनी करके सरकार को सबक सिखाने की कोशिश कर रहे हैं, याद रखिएगा इनका तो घोषित छद्म उद्देश्य ही संविधान और लोकतंत्र की हत्या है। जिस भी दिन ये केंद्रीय सत्ता पर आरूढ़ हुए या क्षमतावान हुए तो इनका पहला प्रहार संविधान पर ही होगा।

दो गुट हैं, एक भारत की व्यवस्था को चीनी माओवादी बनाना चाहता है और दूसरा भारत को चूस-चूस के शरिया की ओर ले जाना चाहता है।

वैश्विक स्तर पर एक-दूसरे को फूटी आँख ना सुहाने वाले भारत के दो दुश्मन देखिए कैसे एक हुए हैं- भारत को बर्बाद करने के नाम पर। दोनो एक-दूसरे को ज्यादा चालाक समझ रहे हैं। दुनिया में कई वामपंथी विचार वाली निरंकुश सरकारें हैं। साथ ही साथ कई इस्लामी मुल्क भी। एक भी ऐसा उदाहरण नहीं मिलेगा जहाँ या तो वामपंथी मुल्क में इस्लामी राजनैतिक विचार की आज़ादी हो और ना ही एक भी ऐसा इस्लामी मुल्क जहाँ वामपंथियों को अपना दफ्तर खोलने की अनुमति हो। फिर भी भारत में इनका याराना देखिए।

मूर्खों को ये नहीं पता कि लोकतंत्र की दुहाई दे कर ये इसी लोकगणराज्य की हत्या कर अपने लोगों के लिए केवल एक देश चाहते हैं। इन्हें भारत की विविधता और बहुल सोच वाली संस्कृति से कोई सरोकार नहीं। क्या ऐसे लोग जो अपनी बात मनवाने के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को छोड़ कर सड़क जाम कर, दंगे भड़का कर समाज में भय पैदा कर सरकार को दवाब में डाल रहे हैं, क्या वे लोग भारत के लोकतांत्रिक अधिकारों के लायक भी हैं। क्या ऐसे लोग भारत के नागरिक कहलाने के काबिल हैं। सोचना होगा हमें। क्या भारत में जन्मा हर व्यक्ति जिसकी सोच अब गैर भारतीय हो गई हो, भारत की विविधता और संवैधानिक प्रक्रियाओं से इतर हो गई हो, को भारत का नागरिक कहा जा सकता है। कुछ ऐसे लोग जो रोग (rouge) हो गए हैं से नागरिकता छीन ही नहीं लेनी चाहिए।

संवैधानिक व्यवस्था में सबको विरोध का अधिकार है। लेकिन सरकार के द्वारा प्रक्रिया अंतर्गत बनाए कानून के विरोध में महीने-दो महीने रोड जाम करने का अधिकार किसी को है क्या? क्या सड़क जाम कर और दंगा भड़का कर हम किसी कानून को वापस करवा सकते हैं? बिल्कुल नहीं। अगर आप सरकार के किसी कदम से असहमत हैं तो जनजागरण कीजिए, चुनाव लड़िए, अगले चुनाव में जीत कर आइए, कानून बदल दीजिए। कोर्ट में सरकार के खिलाफ मुकदमा लड़िए। विरोध का वो तरीका और वो स्थान चुनिए जहाँ से भारत के अन्य सामान्य नागरिकों को दिक्कत नहीं हो, वैसे लोग क्यों भुगतें जो आपकी तरह नासमझ नहीं हैं या जिन्हें आपके आंदोलन से कोई सरोकार नहीं है। समाज में तनाव का माहौल बनेगा तो कहीं न कहीं फूटेगा ही।

ये आग जो भड़की है ये अमन की खोखली बातों से मुझे तो बुझती नहीं दिखती। दंगों के समय हुआ अपराध त्वरित न्याय माँगता है। कुछ लोगों ने अपने दूरगामी राजनैतिक वैश्विक और क्षेत्रीय मंसूबों के खातिर अपने ही लोगों और मोहल्ले का नुकसान कराया ही, साथ ही साथ अपने पड़ोसियों को भी ऐसा घाव दे दिया है जो शायद ही उनके जीते जी भर पाए। वो सारे मोहल्ले अब काफी लंबे समय तक दंगे के भय और अविश्वास के साथ जिएंगे। ऐसा अविश्वास जो या तो इंसाफ से खत्म होगा या इंतकाम से। सरकार के लिए बड़ी मुश्किल घड़ी है। इस बारूद के ढ़ेर को चिंगारी से कैसे बचाया जाए।

जो लोग समाज में राजनीति के इस बारूद का इस्तेमाल करते हैं, जो दंगों में आपराधिक गुटों का सहयोग लेते हैं, जो इसकी तैयारी महीनों करते हैं। पूरे के पूरे समाज को एक कानून के नाम पर झूठ बोल-बोल कर गुमराह करते हैं। गिद्धों की तरह अपनी कलम से, अपनी कला से, लाशों के बिछाए जाने की पटकथा लिखते हैं, उनलोगों के साथ क्या करना चाहिए। हम सभी के मन में ये प्रश्न हैं। क्या हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया इस तरह के छद्म तरीके से लड़े जा रहे युद्ध के लिए तैयार है? क्या हमारी प्रकिया ऐसे अपराधियों को ढूंढ कर सजा देने के काबिल है?

याद रखियेगा पाकिस्तान का आईडिया सारे जहाँ से अच्छा लिखने वाले अल्लामा इकबाल ने ही दिया था। उन्होंने ही सबसे पहले कहा था भारत में एक पाक स्थान है जो कि एक धर्म विशेष के आधार पर चलता है। यानी कि भारत की बहुलता वादी सोच, बहुईश्वरवाद से भिन्न है और साथ नहीं रह सकता। नतीजा हम सब जानते हैं। ये वही सोच है जो फिर से सर उठा रही है। जाते-जाते एक बात और, अरब की क्रांति जो कि वहाँ के निरंकुश राजाओं के विरुद्ध हुई थी, अब वो विशुद्ध रूप से इस्लामी रूप ले चुकी है और ISIS को जन्म दे चुकी है। इस हेतु किसी भी आंदोलन के मूल स्वभाव और उद्देश्यों को समझे बिना उसे अपने जीवन का हिस्सा मत बनाइए। हर तरह का डिसेंट या बागी विचार जरूरी नहीं कि सही ही हो। कुछ बागी तेवर काफी खतरनाक होते हैं। जहरीले नाग की तरह, इनको मारने के बाद इनका फन भी कुचलना जरूरी होता है।

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पुलवामा के फिदायीन आदिल अहमद डार को शाकिर ने दी थी पनाह, NIA ने किया गिरफ्तार

पुलवामा आतंकी हमला मामले की जाँच कर रही राष्‍ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को बड़ी कामयाबी मिली है। NIA ने शुक्रवार (फरवरी 28, 2020) को इस मामले में शाकिर बशीर मागरे को गिरफ्तार किया। शाकिर जैश-ए-मोहम्‍मद का ओवर ग्राउंड वर्कर है। शाकिर ने ही आत्‍मघाती हमलावर आदिल अहमद डार को अपने यहाँ पनाह दी थी और हमले के लिए जरूरी मदद उपलब्ध कराए थे।

आरोपित शाकिर ने पूछताछ में खुलासा किया कि उसने साल 2018 के अंत से फरवरी 2019 तक अपने घर में आदिल अहमद डार और पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक को शरण दी थी। इतना ही नहीं शाकिर ने इन दोनों आतंकियों को विस्‍फोटक IED जमा करने में मदद की थी। फिलहाल शाकिर को पूछताछ के लिए 15 दिन की NIA की कस्टडी में भेज दिया गया है।

पूछताछ में शाकिर ने बताया कि उसकी दुकान लेथपुरा पुल के पास स्थित है। 2018 में जैश के पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद उमर फारूक ने शाकिर की मुलाकात डार से कराई। इसके बाद शाकिर जैश के लिए फुलटाइम काम करने लगा। पुलवामा हमले की साजिश भी 2018 में रची गई। इसके बाद आदिल और फारूक, शाकिर के घर रहने लगे। शाकिर ने कार में रखे विस्फोटक को तैयार किया। लेथपोरा स्थित दुकान से वह सीआरपीएफ काफिले की मूवमेंट पर नजर रखता था। बीते साल जनवरी में उसने मूवमेंट की जानकारी आदिल व फारूक को दी थी।

उसने फारूक के कहने पर जनवरी 2019 में जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर सीआरपीएफ के काफिले के आने जाने की टोह लेनी शुरू कर दी थी और इसके बारे में आतंकवादियों को सूचित करता था। इसके अलावा जिस मारुति ईको कार का इस्तेमाल किया गया था उसमें आईडी फिट करने में भी उसकी भूमिका थी। शाकिर ने फरवरी के पहले सप्ताह में ईको कार में अमोनियम नाइट्रेट, नाइट्रो ग्लिसरीन और आरडीएक्स लगाया गया। कार को पूरी तरह से मोडिफाई किया गया ताकि किसी को शक न हो।

शाकिर ने यह भी बताया कि विस्फोटकों से भरी मारुति ईको कार जिसका इस्तेमाल सीआरपीएफ के काफिले पर हमला करने के लिए किया गया था, उसे वह ही चलाकर घटनास्थल से लगभग 500 मीटर पहले तक लेकर गया था। हमले की जगह से 500 मीटर दूर वह गाड़ी से उतर गया और इसके बाद आदिल अहमद डार उस गाड़ी को चलाकर गया और हमले को अंजाम दिया।

बता दें कि दक्षिण कश्मीर के शोपियाँ में बुनिगाम गाँव में सुरक्षाबलों द्वारा चलाए गए तलाशी अभियान में एक आतंकी ठिकाने का पता चला है। पुलिस का कहना है कि बुनिगाम गाँव से विश्वसनीय सूत्रों से यह सूचना मिली कि इलाके में कुछ संदिग्ध लोग देखे गए हैं। सूचना पर तुरंत अमल करते हुए पुलिस, सीआरपीएफ और सेना के जवान गाँव में पहुँच गए। उन्होंने पूरे इलाके की घेराबंदी कर आतंकियों की तलाश में अभियान छेड़ दिया। अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने जब आतंकियों को ढूँढने के लिए घरों की तलाशी लेना शुरू किया तो इस दौरान नसीर अहमद मंटू नाम के शख्स के मकान से आतंकियों द्वारा छिपाए गए हथियार व गोला-बारूद बरामद हुआ।

उल्लेखनीय है कि पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को आतंकवादियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था और इस हमले में 40 सीआरपीएफ जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। कई अन्य घायल हो गए थे। 

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कन्हैया कुमार और उसके साथियों पर चलेगा देशद्रोह का केस: टुकड़े-टुकड़े गैंग पर कसा शिकंजा

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई नेता कन्हैया कुमार की मुश्किलें बढ़ गई है। हाल में गृह राज्य बिहार में उन्हें लगातार भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। जन गण मन यात्रा के तहत राज्य के जिस शहर में भी कन्हैया कुमार गए वहीं उन्हें विरोध झेलना पड़ा। उन पर अंडे, मोबिल, पत्थर, चप्पल तक फेंके गए।

अब 2016 में जेएनयू परिसर में लगे देश विरोधी नारे के मामलों में भी उन पर और उनके साथियों पर शिंकजा कस गया है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कन्हैया और अन्य पर देशद्रोह का केस चलाने को मॅंजूरी दे दी है। केजरीवाल सरकार सालभर से ज्यादा समय से इससे संबंधित फाइल पर कुंडली मारे बैठी थी। शुक्रवार (फरवरी 28, 2020) को भारत विरोधी नारे लगाने और नफरत भड़काने के आरोप में देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मँजूरी दी गई।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सीपीआई नेता कन्हैया कुमार ने ट्वीट किया, “दिल्ली सरकार को सेडिशन केस की परमिशन देने के लिए धन्यवाद। दिल्ली पुलिस और सरकारी वकीलों से आग्रह है कि इस केस को अब गंभीरता से लिया जाए, फॉस्ट ट्रैक कोर्ट में स्पीडी ट्रायल हो और TV वाली ‘आपकी अदालत’ की जगह कानून की अदालत में न्याय सुनिश्चित किया जाए। सत्यमेव जयते।”

एक अन्य ट्वीट में कन्हैया कुमार ने लिखा, “सेडिशन केस में फास्ट ट्रैक कोर्ट और त्वरित कार्रवाई की जरूरत इसलिए है ताकि देश को पता चल सके कि कैसे सेडिशन कानून का दुरुपयोग इस पूरे मामले में राजनीतिक लाभ और लोगों को उनके बुनियादी मसलों से भटकाने के लिए किया गया है।”

कन्हैया कुमार समेत अन्य लोगों को देशद्रोह का मुकदमा चलाने की इजाजत मिलने के बाद राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा ने इस मामले में आम आदमी पार्टी पर देर से और दबाव में फैसले का आरोप लगाया है। वहीं कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम को कन्हैया के खिलाफ देशद्रोह का केस चलाना रास नहीं आया है। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए ट्वीट किया, “देशद्रोह कानून के बारे में केंद्र सरकार की तरह ही दिल्ली सरकार की भी समझ कम है। मैं भारतीय दंड सहिंता की धारा 124ए और 120बी के तहत कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ राजद्रोह का केस चलाने की मँजूरी देने का कड़ा विरोध करता हूँ।”

भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “लोगो के दबाव के कारण आखिर दिल्ली सरकार को JNU मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति देनी पड़ी। 3 साल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल यह अनुमति टालते रहे लेकिन आखिर उन्हें जनता के आगे झुकना पड़ा। भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह, भारत की बर्बादी तक…जंग चलेगी..जंग चलेगी, एक अफ़ज़ल मारोगे तो हर घर से अफ़ज़ल निकलेगा, अफजल हम शर्मिंदा है, तेरे कातिल जिंदा है यह नारे देशद्रोही है। अब न्याय होगा।”

वहीं दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा, “केजरीवाल सरकार ने मौजूदा राजनीतिक हालात को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया है। हम इसकी माँग करते आ रहे थे कि केजरीवाल सरकार इसकी मँजूरी दे और कानून को अपना काम करने दे।”

सीपीआई नेता कन्हैया कुमार पर वर्ष 2016 में जेएनयू परिसर में लगे भारत विरोधी नारे और नफरत फैलाने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने साल भर पहले आरोप-पत्र दाखिल किया था। कन्हैया कुमार पर देशद्रोह समेत 8 धाराएँ लगाई गई हैं। कन्हैया कुमार पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की इजाजत देने संबंधी फाइल दिल्ली सरकार के गृह विभाग के पास पड़ी हुई थी।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने कन्हैया कुमार के अलावा जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद, अनिर्बान और सात अन्‍य लोगों के खिलाफ पिछले साल 14 जनवरी को देशद्रोह, दंगा भड़काने और आपराधिक साजिश के तहत आरोप-पत्र दायर किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली सरकार से मुकदमा चलाने की इजाजत माँगी थी।

दिल्ली सरकार ने उस समय कहा था कि दिल्ली पुलिस ने नियमों का उल्लंघन किया है। उनसे बगैर अनुमति के आरोप-पत्र दाखिल किया गया है। बाद में दिल्ली सरकार ने कहा था कि इस मामले में कानूनी राय ली जा रही है। हाल ही में संपन्न हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने इस मामले को उछाला था और आम आदमी पार्टी को घेरने की कोशिश की थी।

इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पटियाला हाउस के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सुमित आनंद की कोर्ट में 1200 पन्नों का आरोप-पत्र दायर किया था। हाल ही में दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली सरकार से स्टेटस रिपोर्ट माँगते हुए पुलिस को निर्देश दिया था कि वह दिल्ली सरकार को इस मामले में रिमाइंडर भेजे। अदालत ने इसकी अगली सुनवाई के लिए 3 अप्रैल की तारीख तय की थी।  

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‘आतंकियों से ताहिर हुसैन के लिंक की जाँच कर रहे थे IB के अंकित शर्मा, इसलिए कर दी गई हत्या’

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों का सूत्रधार बनकर पार्षद ताहिर हुसैन उभरा है। उसके घर से हिन्दुओं पर पत्थरबाजी हुई। पेट्रोल बम फेंके गए। गोलियॉं चलाई गई। स्थानीय लोगों के अनुसार दंगाई लोगों को खींचकर उसके घर ले गए और फिर निर्मम तरीके से हत्या कर लाश नाले में फेंक दी। आईबी के अंकित शर्मा की हत्या भी उसके घर में किए जाने का आरोप है। उनका शव नाले से बरामद किया गया था और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि उन्हें 400 से ज्यादा बार गोदा गया था।

एफआईआर दर्ज होने के बाद से ताहिर हुसैन फरार बताया जा रहा है। आप ने भी उसे पार्टी से निलंबित कर दिया है। हालॉंकि अमानतुल्लाह खान जैसे आप विधायक अब भी उसका बचाव कर रहे हैं। इस बीच, भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मामले को एक नया मोड़ दिया है। उन्होंने आशंका जताई है कि ताहिर हुसैन के आतंकियों से रिश्ते हैं और इसकी जाँच के कारण ही अंकित शर्मा की हत्या की गई।

स्वामी ने ट्वीट किया, “सरकार को यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा कहीं बांग्लादेशी आतंकियों के साथ ताहिर हुसैन के संबंधों के तार तो नहीं ढूँढ रहे थे और इसीलिए उनकी हत्या ताहिर के इशारे पर कर दी गई। अंकित की हत्या अगर बांग्लादेशी आतंकियों के साथ ताहिर के संबंधों पर नजर रखने के लिए हुई है तो यह बेहद गंभीर मामला है।”

बता दें कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक अंकित के शरीर पर 400 से ज़्यादा बार चाकुओं से गोदा गया। अंकित के शरीर के हर हिस्से पर चाकू मारे गए थे। उनके शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं था जिसमें चाकू के गहरे घाव न हों। यहाँ तक की उनकी आँत तक को निकाल लिया गया था। अंकित के साथ हुई भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि इस तरह से यातना का शिकार और क्षत-विक्षत बॉडी उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा।

अंकित शर्मा का शव 26 फरवरी को चाँद बाग के एक नाले से मिला। अंकित शर्मा के पिता राजिंदर कुमार का आरोप है कि उनके बेटे की हत्या के पीछे ताहिर हुसैन का हाथ है। अंंकित शर्मा के पिता ने शुक्रवार (फरवरी 28, 2020) को नया खुलासा करते हुए कहा कि अंकित शर्मा के शव को दंगाइयों ने मस्जिद से नाले में फेंका था। उन्होंने दिल्ली के दयालपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए AAP के निलंबित नेता और नगर पार्षद ताहिर हुसैन के अलावे कई अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया है।

अंकित के पिता रविन्द्र शर्मा की तहरीर पर दिल्ली पुलिस ने हिंसा को बढ़ावा देने, आगजनी और अंकित की हत्या सहित कई मामलों नगर पार्षद ताहिर हुसैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के घर को सील कर उसके ख़िलाफ़ जाँच शुरू कर दी है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के खजूरी ख़ास क्षेत्र स्थित ताहिर हुसैन की फैक्ट्री को भी सील कर दिया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक ताहिर हुसैन के घर में 3000 दंगाई इकट्ठा थे। दंगों के बाद उसके घर की छत पर से ईंट-पत्थर और पेट्रोल बम का जखीरा भी बरामद हुआ है।

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बहू-बेटियों की इज्जत बचाने के लिए हिन्दू खा रहे थे गोली और पत्थर: शिव विहार ग्राउंड रिपोर्ट

दिल्ली में हिन्दू-विरोधी दंगों में मजहबी दंगाई भीड़ ने जमकर कहर बरपाया। जहाँ एक तरफ मीडिया का एक बड़ा वर्ग इस मामले में एकदम पक्षतापूर्ण रिपोर्टिंग में लगा हुआ है, हमने ग्राउंड पर जाकर सही स्थिति को आप तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया। इसी क्रम में हम नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के करावल नगर स्थित शिव विहार पहुँचे, जो इन भीषण दंगों का सबसे बड़ा गवाह बना है। वहाँ हमने स्थानीय लोगों से बातचीत की, मजहबी भीड़ की क्रूरता की कहानियाँ सुनीं और फिर हर एक विवरण को कैमरे में कैद करने का प्रयास किया। शिव विहार चौक पर इन दंगों का सबसे ज्यादा असर हुआ।

शिव विहार चौक पर दो स्कूल हैं। एक का नाम है- राजधानी पब्लिक स्कूल। वहीं दूसरे का नाम है- डीआरपी स्कूल। राजधानी स्कूल एक समुदाय विशेष के व्यक्ति का है, जबकि डीआरपी स्कूल के ओनर कोई शर्मा जी हैं। एक स्कूल को ख़ाक में मिला दिया गया, जबकि दूसरे स्कूल को पूरे क्षेत्र में शांति भंग करने का अड्डा बनाया गया। आप समझ सकते हैं कि किस स्कूल के साथ क्या किया गया होगा। राजधानी स्कूल को एक ‘अटैक बेस’ की तरह प्रयोग में लाया गया। वहाँ दंगाइयों को संरक्षण मिला। वहाँ से पूरे क्षेत्र में बमबारी की गई, पत्थरबाजी हुई, गोली चलाई गई। उसकी छत पर हमें कई गुलेल पड़े मिले, जिनका इस्तेमाल कर भारी पत्थरों और पेट्रोल बम को भी दूर तक निशाना बना कर फेंका गया।

शिव विहार का राजधानी स्कूल- जो बना ‘आतंक का अड्डा’

जब ऑपइंडिया की टीम राजधानी स्कूल की छत पर पहुँची तो वहाँ का माहौल देख कर ऐसा लगा कि वहाँ कई दिनों से हमले की पूरी तैयारी की जा रही थी। वहीं पर एक स्थानीय व्यक्ति सुरक्षा बलों को खाना-पीना खिलाने में लगे हुए थे। उन्होंने हमें बताया कि जितनी भारी संख्या में पत्थर और पेट्रोल बमों का प्रयाग किया गया, लगता नहीं था कि इतना सबकुछ एक ही दिन में जुटाना संभव हो पाया होगा। हमने कई ऐसे बड़े-बड़े कंटेनर देखे, जिनमें पत्थर अभी तक भरे हुए थे। उन कंटेनरों का इस्तेमाल पत्थर ढोने के लिए किया गया था।

राजधानी स्कूल के बगल में एक मैरिज हॉल है, जिसमें कई गाड़ियाँ लगी हुई थीं। वहाँ काफ़ी सारे स्थानीय लोग जमा थे, जो इस बात की शिकायत कर रहे थे कि मीडिया यहाँ काफ़ी देर से पहुँचा। स्थानीय लोगों ने बताया कि उस मैरिज हॉल को उन्हीं मजहबी दंगाइयों ने तबाह किया, जो राजधानी स्कूल को ‘अटैक बेस’ बनाए हुए थे। उसके बगल में स्थित डीआरपी स्कूल जलाने के पीछे भी राजधानी स्कूल में जमा मजहबी दंगाइयों की भीड़ को ही जिम्मेदार ठहराया गया। जैसे-जैसे हम लोगों से बातचीत करते हुए आगे बढ़ रहे थे, हमें एक-एक बात पूरी तरह स्पष्ट होती हुई दिख रही थी। वो ये कि यहाँ भी उसी तरह से दंगे को अंजाम दिया गया, जिस तरह से चाँदबाग़ में ताहिर हुसैन के बहुमंजिला मकान को बेस बनाकर अधिक से अधिक हिन्दुओं को नुकसान पहुँचाया गया।


दंगाई भीड़ द्वारा DRP स्कूल को पूरी तरह से जला दिया गया – टूटे दरवाजे, हर तरफ आग ही आग

जैसे चाँदबाग में आम आदमी पार्टी के निलंबित निगम पार्षद ताहिर हुसैन की इमारत आतंकियों की पनाहगार बनी, शिव विहार चौक पर स्थित राजधानी स्कूल को भी यही किरदार दिया गया। आइए, अब आपको बताते हैं कि हुआ क्या था। सबसे पहले तो कट्टरपंथियों की एक बड़ी भीड़ राजधानी स्कूल पहुँची। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वो स्कूल के मालिक के समुदाय विशेष से होने के कारण योजना के तहत ही उसे चुना गया था। राजधानी स्कूल की छत पर पत्थर, पेट्रोल बम और गुलेल सहित कई हथियारों का इंतजाम पहले से ही किया गया था। साथ ही सामने की एक चार मंजिला इमारत भी आतंक का अड्डा था जहाँ से पेट्रोल बम, पत्थर फेंके गए, गोली दागी गई। इन दोनों जगहों पर ‘अटैक बेस’ बनने से कट्टरपंथी दंगाइयों को काफ़ी फायदे हुआ, क्योंकि वे काफी ऊँचाई से आस-पास के काफी दूर तक हिन्दुओं के घरों को निशाना बना सकते थे। कहीं-कहीं दंगाइयों की संख्या 1000 से ज़्यादा बताई जा रही है।

सबसे पहली बात तो ये कि वो स्कूल की इमारत उस क्षेत्र के बाकी इमारतों से अपेक्षाकृत ऊँची है। इससे आसपास के घरों पर हमला करना आसान हो गया। उसके आसपास हिन्दुओं के प्रतिष्ठान हैं और कई हिन्दुओं के घर हैं। एक भी ऐसे घर की छत नहीं दिखी, जहाँ राजधानी स्कूल की छत से पत्थरबाजी न हुई हो। छत से गोली भी चलाई गई। गोली लगने से एक व्यक्ति की तत्काल मौत हो गई थी, जिसका नाम दिनेश कुमार है। इसके अलावा कई हिन्दू घायल हैं जिनका इलाज चल रहा है। मजहबी दंगाई भीड़ की गोली से मरने वाले दिनेश जी के भाई सुरेश से ऑपइंडिया ने संपर्क किया है और जल्द ही इस पर विस्तृत रिपोर्ट आएगी। गोली दिनेश के सिर के ठीक बीच में लगी थी।

ये दंगाई इसी थोड़े से क्षेत्र तक सीमित रहे चौक से आगे बढ़कर और अंदर तक हिन्दुओं को नुकसान न पहुँचाएँ इसके लिए उन्हें भी सड़क पर उतरना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया जब जब हिन्दुओं ने जवाबी कार्रवाई की तब मजहबी भीड़ थोड़ी डर गई। फिर भी कोई पहले से प्लानिंग न होने और उनकी तुलना में नीचे से प्रतिकार करने की वजह से हिन्दू समुदाय का नुकसान ज़्यादा हुआ। मजहबी भीड़ को रोकने के लिए पत्थर खाना, पेट्रोल बम का वार सहना और गोली से निशाना बनना- ये सब हिन्दुओं की मज़बूरी थी। जब हमने सामने की दुकान में बैठे एक बुजुर्ग से पूछा कि आख़िर हिन्दू राजधानी स्कूल के नीचे जमा ही क्यों हुए थे, जब उन्हें पता था कि ऊपर से हमले हो रहे हैं? बुजुर्ग ने बताया:

“हमेशा ऊपर से नीचे वार करना आसान रहता है और किसी भी संघर्ष में नीचे पड़ जाने वाले को नुकसान होता आया है। हिन्दुओं की मज़बूरी थी कि वो पत्थरों के वार सहें, पेट्रोल बम से घायल हों और गोलियों की जद में जाएँ। अगर हिन्दू ऐसा नहीं करते तो शायद आज हमारी बहू-बेटियों की इज्जत नहीं बचती। अगर हिन्दू राजधानी स्कूल के नीचे से टस से मस भी होते तो इस्लामी भीड़ हमारे घरों में घुस जाती तो हमारी बहू-बेटियों का क्या होता, ये आप ही समझ लीजिए। हिन्दुओं ने इसलिए संघर्ष करना उचित समझा क्योंकि उग्र दंगाई भीड़ को रोकने का यही एक तरीका था- भले उनका निशाना बनो लेकिन डटे रहो।”

राजधानी स्कूल में तोड़फोड़ वाली ख़बर मीडिया में ख़ूब चलीं लेकिन किसी ने यह नहीं बताया कि ये तोड़फोड़ एकदम दिखावटी था। स्थानीय लोगों का सवाल है कि डीआरपी स्कूल को राख में बदल दिया गया और राजधानी स्कूल में मामूली सी तोड़फोड़ हुई, ऐसा कैसे सम्भव है? हमने सच्चाई जानने के लिए दोनों स्कूलों का कोना-कोना खंगाल डाला और हमने जो पाया, वो बेहद चौंकाने वाला था। जी हाँ, राजधानी स्कूल में अधिकतर कक्षाओं में बेंच-डेस्क एकदम सही तरीके से रखे गए थे और 2-4 डेस्क उलट-पलट दिए गए थे। सबसे नीचे वाले फर्श पर जरूर कुछ सामान बिखरा था, लेकिन वहाँ के लोगों का कहना है कि ये सब दिखावटी तौर पर था ताकि लगे कि यहाँ भी हिंसा हुई है।

वहाँ कुछेक चीजों को जला कर एक जगह रखा गया था, जिससे प्रतीत होता था कि उन्हें जलाया गया है। लेकिन, स्कूल की दीवारों को जरा भी नुकसान नहीं पहुँचाया गया था। वो स्कूल, जिसके दरवाजे पर ही लिखा हुआ था- “नो सीएए, नो एनपीआर“। सोचिए, वहाँ बच्चों को क्या पाठ पढ़ाया जाता होगा। स्कूल के हर फ्लोर तक पहुँचे हम लेकिन कहीं भी ऐसा नहीं दिखा कि कोई बड़ी तोड़फोड़ हुई हो। जैसा कि हमने ऊपर बताया, स्कूल की छत पर वो सारे सबूत मौजूद थे, जिनसे पता चलता है कि वहाँ एक ‘युद्ध’ के हिसाब से तैयारी की गई थी। बम बनाने में प्रयोग होने वाले कई मटेरियल भी पड़े हुए थे।

अब बगल के डीआरपी स्कूल का हाल सुनिए, जहाँ कई पेरेंट्स अपने बच्चों के साथ जमा हुए थे। वहाँ हमें एक जंजीर लटकी हुई दिखाई गई, जिसके सहारे दंगाई राजधानी स्कूल से उतर कर डीआरपी स्कूल में आए थे। फिर बाहर से भी करीब 300 के आसपास दंगाई DRP स्कूल में घूसे और स्कूल की हर एक कक्षा में एक-एक बेंच-डेस्क सहित पूरा स्कूल जला डाला। ब्लैकबोर्ड्स तोड़ डाले गए।


दंगाई भीड़ द्वारा DRP स्कूल को पूरी तरह से जला दिया गया , यहाँ तक की फर्नीचर भी एक जगह इकट्ठा करके आग के हवाले कर दिया गया

जली हुई वस्तुओं की दुर्गन्ध वातावरण में बुरी तरह फैली हुई थी। अपनी भतीजी के साथ आई एक महिला ने बताया कि ये सब समुदाय विशेष के कट्टरपंथियों ने किया है। वहाँ विडियो शूट करने आए एक युट्यूबर ने हमें बताया कि भारतीय संस्कृति में गुरु का दर्जा सबसे ऊपर है और विद्या के जिस मंदिर में बच्चों को पढ़ाया जाता है, उसका ये हाल करना दिखाता है कि दंगाई भीड़ पर किस कदर मजहबी उन्माद हावी था।

वहाँ एक स्थानीय नागरिक उमेश हमें मिले। “ये सब मुस्लिमों ने किया है, मोहम्डन की करतूत है ये।“- उन्होंने हमारे सवाल का यही जवाब दिया। हालाँकि, कई लोग ऑफ द रिकॉर्ड यही बात दोहरा रहे थे लेकिन कैमरे के सामने बोलने से बच रहे थे, क्योंकि उनका कहना था कि अगर उन्हें उसी इलाक़े में रहना है तो कैमरे के सामने आना सही नहीं होगा क्योंकि जैसे आज निशाना बनाया कल भी बना लेंगे।

पूरी कहानी कुछ यूँ है- राजधानी स्कूल की छत पर और आसपास मौजूद हजारों की मजहबी भीड़ ने फायरिंग की, बमबारी की, पत्थरबाजी की और फिर बगल के करीब 300 मजहबी दंगाई भीड़ ने DRP स्कूल को जला दिया। कितने मरे हैं इस सवाल पर लोगों का कहना हैं कि वहाँ के नाले में अभी भी कई लाशें पड़ी हो सकती हैं, जिन पर किसी का ध्यान नहीं गया है। क्योंकि घरों से लोग गायब हैं।

इस लेख में सलग्न किए गए विभिन्न विडियो और फोटो में आप तबाही का मंजर देख सकते हैं और स्थानीय लोगों की राय भी सुन सकते हैं। पीड़ित हिन्दुओं का कहना है कि उनका दुख-दर्द कोई मीडिया वाले नहीं दिखा रहे। वे आक्रोशित और हतोत्साहित हैं। वे पीड़ित भी हैं और मीडिया का एक बड़ा वर्ग उन्हें दंगाई दिखाने में भी लगा हुआ है। दो स्कूलों की इस कहानी से स्पष्ट पता चलता है, कि कौन पीड़ित है और कौन दंगाई ?

पहले से जमा कर रखे थे पत्थर, हिंदुओं पर हमले के लिए बहू-बेटियों को भी दे रहे थे लाठी: महिला चश्मदीद

जो हिंदू लड़की करती थी दुआ सलाम, उसी की शादी को जला कर राख कर डाला: चाँद बाग ग्राउंड रिपोर्ट

‘हमारी बेटियों को नंगा करके भेजा दंगाइयों ने, कपड़े उतारकर अश्लील हरकतें की’ – करावल नगर ग्राउंड रिपोर्ट

जो हिंदू लड़की करती थी दुआ सलाम, उसी की शादी को जला कर राख कर डाला: चाँद बाग ग्राउंड रिपोर्ट

शादी वाले घर में बेटी की शादी की तैयारियाँ चल रही थीं। रिश्तेदारों का जमावड़ा था। मेहमानों के स्वागत में दावत का इंतजाम किया जा रहा था। घर में कढ़ाई-छोलनी चल रही थी, मुँह में पानी लाने वाले तरह-तरह के व्यंजन हलवाई द्वारा बनाए जा रहे थे। लेकिन फ़िल्मी सीन की तरह कुछ ऐसा होता है कि पल भर में शादी वाले घर की खुशियाँ मातम में बदल जाती है। यह कोई आतंकी हमला नहीं था। बल्कि हमलावर घर के पड़ोस में रहने वाले वही अब्बा जान, भाई जान थे; जिनसे शादी वाले घर की बहन-बेटियाँ हर रोज दुआ सलाम करती थीं।

हम बात कर रहे हैं दिल्ली के उस हिंसा प्रभावित इलाके चाँद बाग और करावल नगर की, जहाँ दंगाइयों ने हिंदुओं के घरों को निशाना ही नहीं बनाया बल्कि उनकी दुकानों को पहले तो जमकर लूटा और फिर उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। लेकिन इस बीच सबसे दुखद और रुह कंपा देने वाली उस घटना को भी अंजाम दिया गया, जिसे जिस किसी ने भी देखा, वह अपने आँसू बहने से नहीं रोक सका। घटना थी ताहिर हुसैन के बराबर वाले मकान में चल रही बेटी की शादी की तैयारियाँ और फिर उसमें दंगाइयों के कारण पसरा सन्नाटा।

पार्किंग चलाने वाले घटना के चश्मदीद प्रदीप और उनके साथी बताते हैं, “सीएए विरोध के नाम पर बड़ी संख्या में मुस्लिम चाँद बाग नाले की पुलिया पर खड़े हुए थे, जिसे कवर करने के लिए एक मीडिया हाउस की इनोवा गाड़ी पुलिया के पास जैसे ही पहुँचती है, वैसे ही कट्टरपंथियों द्वारा उस पर पथराव शुरू कर दिया गया। इसी के साथ मजहबी भीड़ करावल नगर की ओर बढ़ गई। दोपहर का समय था, पार्किंग का शटर पूरा खुला हुआ था। बाहर मेन रोड की ओर से जोर-जोर से आवाजें आ रही थीं। हमने देखा तो बाहर दुकानों पर पत्थरबाजी शुरू हो गई। हमने तुरंत अपने शटर को गिराया और अंदर एक कोने में जाकर खड़े हो गए, लेकिन शटर गिरने के बाद भी दंगाइयों ने रॉड की मदद से शटर को तोड़ दिया और अंदर प्रवेश कर गए।”

पार्किंग के अंदर घुसे दंगाइयों ने पहले तो प्रदीप और उनके साथी को रॉड से जमकर पीटा, जिससे प्रदीप लहूलुहान हो गए। देखते ही देखते दंगाइयों ने पार्किंग को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद दोनों जान बचाने के लिए छत की ओर भागे। वहाँ भी ताहिर की छत से दंगाई पत्थरबाजी कर रहे थे। इसके बाद दोनों ने अपनी जान बचाने के लिए दूसरी मंजिल से ही छलांग लगा दी, जिसमें प्रदीप गंभीर रूप से घायल हो गए।

वहीं दूसरी मंजिल पर एक हिंदू लड़की की शादी की तैयारियाँ चल रही थीं। मेहमानों के स्वागत सत्कार के लिए दर्जनों हलवाई लजीज व्यंजन बनाने में लगे हुए थे। इतने में ही ताहिर हुसैन की छत पर मौजूद हजारों दंगाइयों की भीड़ ने दूसरी मंजिल पर शादी की तैयारी में लगे लोगों पर पहले तो ईंट-पत्थर फिर टाइल्स फेंकना शुरू कर दिया। जैसे ही उनको पता चला कि मजहबी भीड़ नीचे से भी और ऊपर से भी हिंदुओं पर हमला कर रही है, वैसे ही सारे लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर की दीवारों से पीछे की ओर कूद गए। दंगाई यहीं शांत नहीं हुए। उन्होंने इसके बाद वहाँ रखे सिलिंडर में आग लगाकर विस्फोट करने की कोशिश की। इसमें वह सफल नहीं हो सके, जिसके बाद पेट्रोल बम से आग लगाकर फरार हो गए।

आग इतनी भयंकर थी कि पार्किंग में खड़ी सभी गाड़ियाँ जल कर राख हो गईं और शादी का सारा सामान बर्बाद हो गया। शादी की तैयारियाँ धरी की धरी रह गईं। छत पर कहीं गोल गप्पे दिखाई दे रहे थे तो कहीं कालाजामुन। इसी के साथ शादी वाले घर में पल भर के अंदर खुशियों की बजाय मातम फैल गया। दुकान और मकान में फैली आग का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि मकान का सारा प्लास्टर आग की लपटों से गर्म होकर नीचे जमीन में पड़ा हुआ था और आग से निकले धुएँ से काली हुई दीवारें दंगे की आग को चीख-चीखकर बयाँ कर रही थीं।

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दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों की सच्चाई और उसे छिपाने का प्रोपेगेंडा: 9 कार्टून से खुली पोल

आँतें फाड़कर निकाल दी गई, 6 लोगों ने 400 से ज़्यादा बार चाकू भोंका: IB के अंकित शर्मा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

दिल्ली दंगा: … जब जान बचाने के लिए 9 और 5 साल के बच्चों को प्रीति ने छत से नीचे फेंका

आईबी के अंकित शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि उन्हें 400 से ज़्यादा बार चाकुओं से गोदा गया। यह निर्ममता केवल उन्हीं हिंदुओं के साथ नहीं हुई, जिनकी जान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों में गई है। ​जो हिंदू जान बचाने में कामयाब रहे उनकी आपबीती भी सिहरन पैदा करती है। 19 साल के विवेक के सिर में दंगाइयों ने ड्रिल मशीन से छेद कर दिया। प्रीति तो जान बचाने के लिए अपने 9 और 5 साल के बच्चों को छत से नीचे फेंकने को मजबूर तक हो गई।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक आज भी प्रीति उस वक्त को याद कर सिहर जाती हैं। आँखों में मौत का खौफ दिखाई देता है और गला भर आता है। प्रीति यमुना विहार के बी-ब्लॉक में रहती हैं। उनके परिवार की जान पर 24 फरवरी को बन आई थी। इसी दिन उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंदू विरोधी दंगे भड़के थे। वैसे हिंसा की शुरुआत रविवार को ही हो गई थी।

प्रीति के हवाले से दैनिक जागरण ने बताया है 24 फरवरी की दोपहर उसने अपनी आँखों से मौत को देखा। दंगाई पेट्रोल बम फेंक रहे थे। पहली मंजिल से वह अपने घर को बेबस हो जलता देख रही थी। घर को दंगाइयों ने सामने से घेर रखा था। अंदर प्रीति के साथ उसके पति और दो बच्चे फँसे थे। पेट्रोल बम से घर में आग लग चुकी थी।

बकौल प्रीति, “मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। घर के पीछे की तरफ पहुँची तो गली में मोहल्ले के लोग खड़े थे। जान बचाने के लिए 9 साल के संयम और 5 साल के विहान को पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया। लोगों ने उन्हें नीचे पकड़ लिया और उनकी जान बच गई।” बच्चों को सही सलामत निकालने के बाद प्रीति और उसके पति दीपक गुप्ता दूसरे मंजिल से बगल वाली इमारत में किसी तरह पहुॅंचे। उस इमारत के पिछले रास्ते से दोनों बाहर निकले। प्रीति के मुताबिक सैकड़ों की संख्या में दंगाई सुबह से ही जमा होने लगे थे, जबकि पुलिस वाले वहॉं महज चार-पाँच ही थे। जब दंगाइयों का उपद्रव शुरू हुआ तो जान बचाने के लिए उन्हें भी भागना पड़ा। संयम ने दैनिक जागरण को बताया कि इस घटना के बाद वह इतना डर गया था कि पूरी रात सो नहीं पाया।

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दिलबर सिंह नेगी के हाथ-पैर काट दंगाइयों ने दुकान की आग में झोंका: बचकर भागे श्याम ने बताई आपबीती

‘मस्जिद से फेंकी गई थी अंकित शर्मा की लाश’ – पिता ने FIR में ताहिर हुसैन को बताया हत्या का आरोपी

दिल्ली में हुई हिंसा के बाद चाँद बाग के नाले से मिले इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अंकित शर्मा के शव को लेकर हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पहले जानकारी मिली कि वह अपनी ड्यूटी से लौट रहे थे। फिर जानकारी मिली कि वह दंगाइयों को समझाने में लगे हुए थे। इसके बाद पता चला कि दंगाइयों ने उनको पकड़ कर ताहिर हुसैन के घर में खींचा था। फिर जानकारी सामने आई कि दंगाइयों ने अंकित शर्मा के साथ तीन अन्य लोगों को भी ताहिर के घर में खींंचा था। इसके बाद आज अंंकित शर्मा के पिता ने नया खुलासा करते हुए कहा कि अंकित शर्मा के शव को दंगाइयों ने मस्जिद से नाले में फेंका था।

अंकित शर्मा के पिता रविन्द्र शर्मा ने दिल्ली के दयालपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए AAP नेता और नगर पार्षद ताहिर हुसैन के अलावे कई अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया है। रविन्द्र शर्मा ने दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया है कि अंकित शर्मा के शव को मस्जिद से नाले में फेंका गया था। वहीं ने आज फॉरेंसिक टीम उस स्थान का निरीक्षण करने में लगी हुई है, जहाँ 26 फरवरी को इंटेलिजेंस ब्यूरो के अंकित शर्मा का शव मिला था। दरअसल उनका शव नार्थ-ईस्ट दिल्ली के चाँद बाग इलाके में मिला था।

अंकित के पिता रविन्द्र शर्मा ने प्रशासन से तारिक हुसैन की आपराधिक रिकॉर्ड की जाँच कराने का आह्वान करते हुए कहा कि ताहिर हुसैन ने अपने आवास पर गुंडों को इकट्ठा किया था। ये सभी ताहिर की छत से लगातार फायरिंग कर रहे थे और नीचे खड़े लोगों पर छत से पेट्रोल बम भी फेंक रहे थे, जिससे इलाके में रहने वाले लोगों में तनाव और डर का माहौल पैदा हुआ। थाने में दी गई एफआईआर के मुताबिक अंकित शर्मा अपने दो दोस्तों के साथ मंगलवार शाम 4.30 बजे अपनी ड्यूटी से लौट रहे थे। इसी बीच अंकित ने दंगा प्रभावित क्षेत्र में अराजकता देखी तो वह अपने दोनों दोस्तों के साथ यह देखने के लिए आगे बढ़ गए कि क्या हो रहा है।

वहीं रविन्द्र ने यह भी बताया कि 25 फरवरी को देर शाम तक अंकित के घर नहीं लौटने पर उन्होंने उसकी तलाश शुरू कर दी। वो पहले खजूरी खास, दयालपुर के नजदीकी पुलिस थानों में गए और बाद में आसपास के अस्पतालों में उनके बारे में पूछताछ की। इसके बाद पूरी रात उसकी खोज की गई, लेकिन अंकित कहीं नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने 26 फरवरी को पुलिस में एक गुमशुदगी दर्ज कराई।

अंकित के पिता रविन्द्र शर्मा की तहरीर पर दिल्ली पुलिस ने हिंसा को बढ़ावा देने, आगजनी और अंकित की हत्या सहित कई मामलों नगर पार्षद ताहिर हुसैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद ताहिर हुसैन के खजूरी इलाके में स्थित घर को सील कर दिया गया। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी इसके बाद कार्रवाई करते हुए ताहिर हुसैन को पार्टी से निलंबित कर दिया। दरअसल हिंसा वाले दिन ताहिर हुसैन के घर से दंगाइयों ने नीचे खड़े लोगों पर और आस-पास में मौजूद हिंदुओं के मकानों पर पेट्रोल बम, ईंट-पत्थर बरसाए थे।

दिल्ली पुलिस पीआरओ एमएस रंधावा के मुताबिक दिल्ली हिंदू-विरोधी हिंसा मामले में अब तक दिल्ली पुलिस ने 123 एफआईआर दर्ज की हैं, जबकि 630 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

आँतें फाड़कर निकाल दी गई, 6 लोगों ने 400 से ज़्यादा बार चाकू भोंका: IB के अंकित शर्मा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

‘हमारी बेटियों को नंगा करके भेजा दंगाइयों ने, कपड़े उतारकर अश्लील हरकतें की’ – करावल नगर ग्राउंड रिपोर्ट

मजदूरी करने दिल्ली आया था कल्लन का बेटा ताहिर, 20 साल में खड़ा कर लिया ‘दंगों का हेडक्वार्टर’

मुस्लिमों को 5% आरक्षण का ऐलान: हिंदुत्व का दावा करने वाली शिवसेना झुकी कॉन्ग्रेस-NCP के सामने

महाराष्ट्र में सरकारी स्कूल और कॉलेज में मुस्लिमों को 5 फीसदी आरक्षण दिए जाने को लेकर उद्धव कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि जल्द ही इसे विधानसभा से पारित किया जाएगा। यूँ तो पिछले काफी वक्त से इसे लेकर राजनीतिक चर्चा चल रही थी लेकिन उद्धव ठाकरे सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक के इस ऐलान के साथ ही शिवसेना की हिंदूवादी राजनीति को लेकर सवाल खड़े होते दिख रहे हैं।

नवाब मलिक ने कहा, “हाई कोर्ट ने सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिम समुदाय को 5 फीसदी आरक्षण को हरी झंडी दी थी। पिछली सरकार के कार्यकाल में इस संबंध में कोई ऐक्शन नहीं लिया गया। इसलिए हमने हाई कोर्ट के आदेश को कानून के रूप में अमल करने का ऐलान किया है।”

इससे पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी एक कार्यक्रम के दौरान अल्पसंख्यकों की प्रशंसा की थी। तब उन्होंने कहा था कि अल्पसंख्यकों, विशेष तौर पर मुस्लिमों ने राज्य चुनाव में भाजपा के लिए वोट नहीं किया। उन्होंने कहा कि समुदाय के सदस्य जब कोई निर्णय लेते हैं तो यह किसी पार्टी की हार सुनिश्चित करने के लिए होता है।

बता दें कि मुस्लिम समुदाय को 5 फीसदी आरक्षण के लिए कॉन्ग्रेस और एनसीपी की तरफ से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर पहले से ही दबाव बनाया जा रहा था। और जो शिवसेना कभी महाराष्ट्र में धर्म के आधार पर आरक्षण देने के सख्त खिलाफ थी, उसी ने आज कॉन्ग्रेस और एनसीपी के आगे झुककर इस प्रस्ताव को सहमति दी।

गौरतलब है कि साल 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले जून महीने में राज्य की तत्कालीन कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार ने मुस्लिमों के लिए 5 फीसदी के आरक्षण की व्यवस्था की थी और इस संबंध में अध्यादेश भी जारी किया था। मगर इसके बाद हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना गठबंधन की सरकार सत्ता में आ गई। नई सरकार ने मराठा आरक्षण बरकरार रखा, लेकिन मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण पर कोई कदम नहीं उठाया। यह अध्यादेश लैप्स हो गया था। तब भाजपा के साथ शिवसेना सत्ता में साझीदार थी, जब मुस्लिम आरक्षण के लिए अध्यादेश लैप्स हो गया था। यह आरक्षण धर्म पर आधारित था। बॉम्बे हाइकोर्ट ने 2014 में इस पर रोक लगाते हुए सिर्फ शिक्षा में मुस्लिमों को 5 फीसदी आरक्षण को बरकरार रखा, जबकि नौकरी में आरक्षण को खारिज कर दिया था।

याद हैं न बलिदानी रतनलाल: परिवार की मदद के लिए आएँ आगे, ये रहे बैंक डिटेल्स

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में हेड कॉन्सटेबल रतनलाल वीरगति को प्राप्त हो गए। उनकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि दंगाइयों की गोली लगने के कारण उनकी मृत्यु हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि दंगे के दौरान मारी गई गोली उनके बाएँ कंधे में जाकर लगी और दाएँ कंधे में जाकर फँस गई। गोली को पोस्टमॉर्टम के दौरान निकाला गया।

रतनलाल मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर तिहवाली गाँव के निवासी थे। लेकिन अपनी पत्नी और 3 बच्चों के साथ वो पिछले काफी समय से दिल्ली के बुराड़ी में ही रह रहे थे। उन्होंने अपनी माँ से इन छुट्टियों में गाँव आने का वादा किया था। लेकिन हिंदू-विरोधी दंगों में उनकी ख्वाहिश अधूरी ही रह गई। वो माँ को किया वादा पूरा करने से पहले ही दुनिया को छोड़कर चले गए।

उनके जाने के बाद अब उनका परिवार बिलकुल अकेला है। उनके पीछे उनकी पत्नी पूनम के अलावा दो मासूम बेटियाँ सिद्धि (12) और कनक (10) के साथ-साथ एक बेटा राम (7) रह गया है। इनके अलावा रतनलाल की माँ और एक छोटा भाई दिनेश भी हैं। ये दोनों गाँव में रहते हैं। पिता बृजमोहन का तो ढाई साल पहले ही देहांत हो चुका है। अब ऐसे में आखिर उनका घर चलाने वाला है ही कौन?

ऐसे में रतनलाल के परिवार की आर्थिक मदद के लिए कुछ दिन पहले अरुण बोथरा नाम के एक IPS ऑफिसर ने सोशल मीडिया पर रतनलाल के परिवार (पत्नी) का बैंक डिटेल्स अपलोड किया था। बैंक अकाउंट की पुष्टि के लिए ऑपइंडिया ने उनके भाई दिनेश से बात की। सारी डिटेल्स सही निकली। जब ऑपइंडिया ने रतनलाल के भाई से पूछा कि उनके परिवार को क्या-क्या जरूरत है… तो उनकी आवाज भारी हो गई और वह केवल यही कह पाए, “जैसी जिसकी भावना।”

अब अगर आप भी इन दंगों में वीरगति को प्राप्त हुए हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल के परिवार की मदद करना चाहते हैं या फिर आर्थिक सहयोग करने में सक्षम हैं, तो हम उनकी बैंक डिटेल्स नीचे साझा कर रहे हैं। कृपया उनकी मदद के लिए आगे आएँ, जो खुद की जान की परवाह किए बिना दंगाइयों के सामने सीना ताने खड़े रहे और हमारे और आपके लिए अपने पूरे परिवार को छोड़कर चले गए।

Name: Mrs Poonam Bari
A/C no: 33150100023786
Bank of Baroda
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(Fifth Character is Zero)