Home Blog Page 5094

असलम ने सोनू बन की शादी, 6 साल बाद राज खुला तो भाइयों संग मिल पत्नी को प्रताड़ित किया

उत्तर प्रदेश में मजहब छिपाकर एक महिला से शादी करने का मामला सामने आया है। जब राज खुला तो आरोपित ने अपने भाइयों संग मिलकर पत्नी को प्रताड़ित किया। मामला बस्ती का है। महिला के मुताबिक उसे पति के मजहब का पता तब चला जब वह शादी के करीब छह साल बाद ससुराल आई। पीड़िता ने इसका विरोध किया तो उसे जमकर प्रताड़ित किया गया और गला दबाकर मारने की कोशिश की गई।

ऑपइंडिया ने जब इस मामले बस्ती के कोतवाली पुलिस स्टेशन से संपर्क किया तो बताया गया कि महिला की शिकायत पर असलम सहित चार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस मामले की जॉंच कर रही है। पुलिस ने बताया कि महिला की शादी 6 साल पहले असलम से हुई थी। दोनों का 3 साल का एक बच्चा भी है। पीड़िता का आरोप है कि असलम ने अपना नाम सोनू बताकर उससे नजदीकियाँ बढ़ाईं और शादी कर ली।

पुलिस ने बताया कि असलम से शादी के पहले पीड़ित महिला की शादी संतोष नामक व्यक्ति से हुई थी, जिससे उसके दो बच्चे हैं। बाद में महिला और संतोष के बीच अनबन हो गई। इसके बाद महिला अलग रहने लगी। तभी असलम ने मौका देख सोनू बनकर महिला से सहानुभूति जताने के बहाने नजदीकियाँ बढ़ाई और उससे शादी कर ली। पुलिस के अनुसार शादी के बाद आरोपी महिला को लेकर किराए के मकान में रहने लगा। कुछ ही दिन पहले वह महिला को लेकर कसाईबाड़ा स्थित अपने घर आया था। तब महिला को उसके मुस्लिम होने का पता चला।

पीड़ित महिला ने अपने आरोप में कहा है कि जब उसने इस धोखाधड़ी का विरोध किया तो उसके पति सोनू उर्फ़ असलम और उसके भाइयों ने उसे मारा-पीटा और गला दबाकर जान से मारने की कोशिश भी की। कोतवाल ने बताया कि इस मामले में महिला के पति सोनू उर्फ़ असलम, उसके भाई रज्जाक, भाईजान और मो. इस्लाम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पूरे मामले की तफ्तीश की जा रही है।

पाकिस्तान के नदीम खान के जाल में फॅंस दुबई भागी मेरठ की युवती, पिता ने लव जिहाद बता लगाई गुहार

लव जिहाद मामले में शादीशुदा मुस्लिम युवक ने हिन्दू लड़की को किया अगवा, हालात बेक़ाबू

डॉक्टर बनना चाहती थी केरल की निमिषा, लव जिहादियों ने पहले फातिमा बनाया फिर फिदायीन बम

पुलवामा हमले की बरसी पर 3 कश्मीरी छात्र ने लगाए ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे, कुटाई के बाद गिरफ्तार

पुलवामा में बीते साल 14 फरवरी को आतंकी हमले में 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। हमला सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाकर किया गया था। इसकी पहली बरसी पर पूरे देश ने जान गॅंवाने वाले जवानों को नमन किया। लेकिन, एक वीडियो सामने आया है जिसमें कुछ लोग पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं।

वीडियो में नजर आने वाले तीनों लोग कश्मीर के हैं। कर्नाटक के हुबली स्थित एक कॉलेज में तीनों पढ़ते हैं। वीडियो वायरल होने के बाद नाराज लोगों ने कश्‍मीरी छात्रों की पिटाई की। बाद में पुलिस ने इन छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। हुबली-धारवाड़ के पुलिस कमिश्नर ने बताया कि मामले की जानकारी होने पर तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके कॉलेज ने भी शिकायत दर्ज कराई है। मामले की जॉंच की जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, तीनों आरोपी लड़कों को पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया है। ये केएलई इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाट्सएप्प पर वीडियो आने के बाद लोगों ने कॉलेज में घुसकर इन छात्रों की पिटाई भी की।

इस वीडियो के बीच में एक छात्र आजादी के नारे भी लगाते हुए सुना जा सकता है। इन तीनों के नाम आमिर, बासित और तालिब हैं। पुलिस के अनुसार, ये इंजीनियरिंग कॉलेज में सेकेंड ईयर के स्टूडेंट हैं और कॉलेज हॉस्टल में ही रहते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में तीनों अपना नाम बता रहे हैं। जिस वीडियो के लिए इन तीनों छात्रों की धुनाई के बाद गिरफ्तारी हुई है, उसके बैकग्राउंड में गाना बज रहा है- “खाई है ये कसम, खाई है ये कसम, सुन ले दुश्मन सभी, है ये दिल की सदा.. पाकिस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद।”

मिलिए शादाब से: जामिया का कश्मीरी छात्र जिसे गोली लगी, पढ़िए इसके जहरीले फेसबुक पोस्ट

पुलवामा से भी बड़े फिदायीन हमले की साजिश नाकाम, कश्मीरी छात्र हिलाल अहमद गिरफ्तार

कश्मीरी छात्राओं की पत्थरबाजी और Pak-जिंदाबाद के नारों से गरमाया देहरादून का माहौल

शशि थरूर ने मोदी को बताया था ‘शिवलिंग का बिच्छू’, हाजिर न होने पर कोर्ट ने लगाया 5 हजार का जुर्माना

अक्सर अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर पर दिल्ली की एक अदालत ने मानहानि मामले में कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर पाँच हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। बीजेपी नेता राजीव बब्बर ने थरूर के ख़िलाफ़ मानहानि की याचिका दायर कर रखी है। कोर्ट ने कई बार कॉन्ग्रेस सांसद को नोटिस जारी किया। लेकिन नोटिस पर शनिवार को भी कोर्ट में पेश नहीं होने पाँच हजार रूपए का जुर्माना लगा दिया। दरअसल थरूर ने मोदी पर टिप्पणी करते हुए उनकी तुलना शिवलिंग पर बैठे बिच्छू से की थी।

इससे पहले पिछले वर्ष दिसंबर माह में मामले पर हुई सुनवाई को 15 फरवरी 2020 तक के लिए टाल दिया गया था। दिसंबर में भी कोर्ट ने थरूर को पाँच हजार रुपए की गारंटी जमा करने का निर्देश दिया था। वहीं कोर्ट ने भाजपा नेता राजीव बब्बर पर भी सुनवाई के दौरान मौजूद नहीं रहने पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया था।

बीजेपी नेता बब्बर ने अदालत में शिकायत दायर करते हुए आरोप लगाया था कि थरूर ने अक्टूबर 2018 में बेंगलुरू में आयोजित एक कार्यक्रम में एक लेख का हवाला देते हुए एक विवादित बयान दिया था, जिसमें थरूर ने कहा था कि मोदी शिवलिंग पर बैठे बिच्छू की तरह हैं। कॉन्ग्रेस नेता के इस बयान के तीखी आलोचना हुई थी। उस समय बीजेपी नेताओं ने इस बयान के लिए माफी माँगने के लिए कहा था। हालाँकि थरूर ने ऐसा नहीं किया। इसके बाद ही बब्बर ने कोर्ट में याचिका दायर की।

आपको बता दें कि शशि थरूर तिरुवनंतपुरम से सांसद हैं। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में वे विदेश राज्यमंत्री भी रह चुके हैं। थरूर अक्सर बीजेपी और पीएम मोदी को लेकर बयान देते रहे हैं।

हिंदुत्व को नीचा दिखाने की कोशिश में इस्लाम को ठेस पहुॅंचा गए थरूर, ‘लिबरल’ की नजरों में चढ़े

‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ पर थरूर ने जताई आपत्ति, इस्लामी कट्टरपंथियों ने कहा – हमें न सिखाओ, तुम खुद सॉफ्ट कट्टर

पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का नहीं? शशि थरूर ने भारत का ग़लत नक़्शा पोस्ट कर तो यही संदेश दिया!

पत्रकारिता के नाम पर बिग BC: पूछा- कैसे करें पेशाब, ट्विटर यूजर्स ने दिए ‘क्रांतिकारी’ जवाब

भारतीय मीडिया का एक वर्ग ऐसा भी है जिसे तैमूर के डायपर बदलने से लेकर शौच करने के तरीकों में दिलचस्पी है। कुछ लोग प्रोग्रेसिव होने का चोला पहनकर ऐसा करते हैं तो कुछ केवल प्रासंगिक बने रहने के लिए। लेकिन यदि बात मीडिया गिरोह के बीबीसी जैसे सदस्य की हो तो ऐसा दोनों कारणों से किया जाता है।

कश्मीरी आतंकी मोहम्मद मकबूल भट्ट का महिमामंडन करते हुए इसकी फाँसी पर मार्मिक साहित्य लिखना हो या फिर सेक्स जैसे मुद्दे हों, बीबीसी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटता। आज भी बीबीसी एक रिपोर्ट के जरिए बेहद क्रांतिकारी मुद्दा सामने ले कर आया है। मुद्दा है- “पुरुषों को बैठकर पेशाब करना चाहिए या खड़े होकर?”

इसके बदले में बीबीसी को जो प्रतिक्रियाएँ मिलीं, वो इस शीर्षक से भी ज्यादा ‘क्रांतिकारी’ हैं।

बीबीसी के इस सवाल की प्रतिक्रिया में ट्विटर यूज़र ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए एक से बढ़कर एक क्रिएटिव जवाब देकर बीबीसी की मदद की। @Garima1907 ने इस खबर पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह किसी पुरुषवादी महिला द्वारा लिखी गई खबर है।

@sajidrazvi8 ने बीबीसी को जवाब में लिखा- “इस्लाम ने 1400 साल पहले ही बता दिया है बैठ कर पेशाब करना चाहिए, मुझे किसी से सीखने की ज़रूरत नही।”

इस पर @I_ThakurKhem ने जवाब में लिखा – “दुनिया 1400 साल से पुरानी हैं और हमारे पुरखे हजारों सालों से बैठ कर करते आ रहे हैं।”

देश के ‘लिबरल प्रोग्रेसिव विचारक वर्ग’ के बीच महिला-पुरुषों के ऐसे मुद्दे अक्सर चर्चा का विषय बनते देखे जाते हैं। यहाँ तक कि ट्विटर पर महिलाओं के भी खड़े होकर पेशाब करने के अधिकारों पर भी #peestandingup जैसे हैशटैग चलाए जा चुके हैं।

यह पहली बार नहीं है, या फिर इस प्रकार की रिपोर्टिंग करने वालों में बीबीसी ही अकेला नहीं है। बीबीसी की ही तर्ज पर दी लल्लनटॉप एक साल पहले इस तरह की रिपोर्ट शेयर कर चुका है। वैसे लल्लनटॉप एक बार हिटलर का लिंग भी नाप चुका है।

बिग BC का नया चुटकुला: ‘कन्हैया कुमार की लोकप्रियता से मोदी ही नहीं, पूरी सरकार चिंतित है’

बुर्क़ा होता है मुस्लिम महिला की पहचान, घूँघट से रहती है हिंदू महिला परेशान: BBC की बिग BC

सिंधिया ने कहा- वादा पूरा नहीं हुआ तो सड़क पर उतरेंगे, जवाब में कमलनाथ बोले – उतर जाएँ

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार घोषणा पत्र को पूरी तरह लागू नहीं करती है तो वह सड़क पर उतरेंगे। एक सभा के दौरान उन्होंने कहा, “घोषणा पत्र का एक-एक अंश पूरा होगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो आपके साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया भी सड़क पर उतरेगा।”

इसको लेकर जब पत्रकारों ने कमलनाथ से पूछा गया कि सिंधिया कह रहे हैं कि अगर किसानों की कर्जमाफी का वादा पूरा नहीं होगा तो वो सड़क पर उतरेंगे, तो इसका जवाब देते हुए कमलनाथ ने कहा, “तो उतर जाएँ।”

बता दें कि मध्य प्रदेश में किसानों से कर्जमाफी का वादा करके ही सत्ता में आई कॉन्ग्रेस की कमलनाथ सरकार के मंत्रियों ने सार्वजनिक तौर पर कहना शुरू कर दिया है कि पार्टी तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के वादे को पूरा कर पाने में नाकाम रही है। चार महीने में दूसरी बार, मध्य प्रदेश में कृषि ऋण माफ करने में देरी के लिए राज्य के मंत्री ने किसानों से माफी माँगी है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार कमलनाथ पर कर्जमाफी का वादा पूरा न करने का आरोप लगाते रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने इसको लेकर अपनी ही सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था, “किसानों का कर्ज पूरी तरह से माफ नहीं किया गया है। केवल 50 हजार रुपए का कर्ज माफ किया गया है, जबकि हमने कहा था कि 2 लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा। 2 लाख रुपए तक के कर्ज को माफ किया जाना चाहिए।” सिंधिया ने कहा था कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वो अन्नदाताओं के साथ कंधा मिलाकर खड़ी रहे। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित किसानों को प्रति बीघे के हिसाब से 8-30 हजार रुपए तक का मुआवजा मिलना चाहिए। 

गौरतलब है कि 2018 में हुए मध्य प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान तब के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने सरकार बनने के 10 दिन के भीतर किसानों के 2 लाख रुपए तक के कर्ज को माफ़ करने का वादा किया था। उन्होंने तब यह भी कहा था कि ऐसा न कर पाने की स्थिति में वो अपने मुख्यमंत्री को बदल देंगे।

अभी हाल में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणामों को निराशाजनक करार देते हुए कहा था कि पार्टी को नई विचारधारा, नई सोच और कामकाज के नए तरीकों से खुद को मजबूत करने की जरूरत है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था, “दिल्ली के परिणाम पार्टी के लिए बहुत निराशाजनक हैं और नई सोच, नई विचारधारा व कामकाज के नए तरीकों की आवश्यकता है।”

‘माफ़ कर दो, हम लोन माफ़ी का राहुल गाँधी वाला वादा पूरा नहीं कर पाए’

औरंगजेब के छक्के छुड़ाने वाले शिवाजी का अपमान बर्दाश्त नहीं: कमलनाथ सरकार पर बरसे शिवराज

बीते दिनों मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के गृह क्षेत्र छिंदवाड़ा में शिवाजी की प्रतिमा हटा दी गई थी। छिंदवाड़ा के सौंसर के मोहगॉंव तिराहे पर लगी इस प्रतिमा को जेसीबी से तोड़ने के मसले पर शिवसेना ने भले चुप्पी साध रखी हो, लेकिन बीजेपी लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। शनिवार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद सौंसर पहुॅंचे। उन्होंने उस जगह भूमिपूजन किया जहॉं से शिवाजी की प्रतिमा हटाई गई।

यहॉं सभा को संबोधित करते हुए पूर्व सीएम ने कमलनाथ सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज का तुम अपमान करते रहो और हम चुप बैठे रहें यह हो नहीं सकता। कमलनाथ जी, जरूरत पड़ी तो अपने महापुरुषों के सम्मान में खून के बदले खून दे देंगे।” शिवराज ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज, जिन्होंने औरंगजेब के छक्के छुड़ा दिए थे, जो भारत के गौरव का प्रतीक हैं, उनका अपमान किया गया। उनकी प्रतिमा को गिराने के लिए जेसीबी मशीन। देश अपने महापुरुषों का अपमान सहन नहीं करेगा।”

शिवराज ने ट्वीट कर बताया, “छिंदवाड़ा के सौंसर में मोहगाँव चौराहे पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा की पुनर्स्थापना के लिए भूमिपूजन किया। हर देशवासी और प्रदेशवासी के लिए वह गौरव व सम्मान का प्रतीक हैं। भारत में शौर्य, साहस, पराक्रम के प्रतीक वीर शिवाजी के चरणों में नमन।”

शिवराज सिंह ने कहा, “हिन्दवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्रीय गौरव हैं और हमारी प्रेरणा के स्रोत हैं। देश के करोड़ों लोग उनको अपना आराध्य मानते हैं। ऐसे महापुरुष का अपमान यह कॉन्ग्रेस सरकार कर रही है।”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “पहले तो मूर्ति गिराकर छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया गया और उसके बाद पैसों का दम्भ भरा गया! सौंसर की जनता में इतना सामर्थ्य है कि वे जनभागीदारी से प्रतिमा को ससम्मान पुनर्स्थापित कर सकें।”

बीजेपी नेता ने कहा, “छत्रपति शिवाजी देश का गौरव हैं। कॉन्ग्रेस सरकार ने उनकी मूर्ति हटाकर उनका अनादर किया है। प्रतिमा के ऊपरी हिस्से को हटाने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने मूर्ति को खंडित करने की कोशिश की। महान व्यक्तित्वों का अपमान करने की कॉन्ग्रेस की परंपरा बन गई है। मध्य प्रदेश और भारत इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। छत्रपति शिवाजी का अपमान करने वालों पर जाँच होनी चाहिए।”

बता दें कि इससे पहले भी बीजेपी नेता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्र का गौरव हैं, हमारे आराध्य हैं व देश की प्रेरणा के स्रोत हैं। उनका अपमान किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। अगर आपत्ति थी तो उनकी प्रतिमा को सम्मानजनक तरीके से भी हटाया जा सकता था लेकिन यह सरकार तो महापुरुषों का अपमान करने में गर्व का अनुभव करती है।”

वहीं बीजेपी नेता मेजर सुरेंद्र पुनिया ने इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया था, “मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने छत्रपति शिवाजी महाराज, जो पूरे राष्ट्र के गौरव हैं उनकी प्रतिमा को छिन्दवाड़ा में गिरा दिया। क्या  कमलनाथ जी कभी नेहरू जी इंदिरा जी या राजीव जी की मूर्ति को इस तरह गिराएँगे ??? नहीं, तो फिर शिवाजी की क्यों? उद्धव जी, आप कॉन्ग्रेस को कुछ कहोगे?”

गौरतलब है कि जो कॉन्ग्रेस दिन रात नेहरू और गाँधी परिवार की आराधना करती रहती है और उनकी वैधानिक आलोचना तक सहन नहीं कर पाती वो कॉन्ग्रेस अक्सर महापुरुषों का अपमान करती है। वीर सावरकर पर तो राहुल गाँधी खुद कई बार अभद्र बयान दे चुके हैं। इससे पहले कमलनाथ सरकार के दौरान ही महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ हुई थी।

कमलनाथ के गृह क्षेत्र में जेसीबी से ढहा दी गई छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा, शिवसेना ने साधी चुप्पी

जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दफ़न की गई थी मंदिरों से लूटी गई हिन्दू प्रतिमाएँ, ये रहा सबूत

पुणे में बैठ कर दिल्ली चलाने वाला मराठा: 16 की उम्र में सँभाली कमान, निज़ाम और मैसूर को किया चित

लिव इन में था, मंदिर में प्रेमिका को मार डाला, चेहरे को गाड़ी से कुचला: पकड़ा गया 3 बार का कॉन्ग्रेसी MLA

7 मई 2016 में छत्तीसगढ़ की रायगढ़ पुलिस को दो लाशें मिली। चेहरा बुरी तरह कुचला हुआ था। बाद में इन शवों की पहचान कल्पना दास (32) और उसकी बेटी पार्वती दास उर्फ बबली (14) के तौर पर हुई। अब इस मामले में पूर्व ओडिशा के विधायक अनूप कुमार साय की गिरफ्तारी हुई है। साय ओडिशा के ब्रजराजनगर क्षेत्र से तीन बार कॉन्ग्रेस का विधायक रह चुका है। फिलहाल वह सत्ताधारी बीजद से जुड़ा हुआ है।

रायगढ़ के एसपी ने बताया कि अपना राजनीतिक करियर बचाने के लिए साय ने महिला वकील कल्पना दास और उसकी बेटी की हत्या की थी। असल में, कल्पना के साथ पूर्व एमएलए साय लिव इन रिलेशन में थे। कल्पना उन पर लगातार शादी के लिए दबाव बना रही थी। इससे आजिज आकर उसने कल्पना और उसकी बेटी की छत्तीसगढ़ ले जाकर हत्या कर दी और इसे दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया गया।

पूर्व एमएलए ने पुलिस को बताया है कि कल्पना लगातार शादी और संपत्ति में हिस्से की माँग कर रही थी। हत्या वाले दिन वे उसको अर्दना स्थित साईं मंदिर शादी करने की बात कहकर लाया था। वहाँ लोहे की राड से उसने कल्पना और उसकी बेटी के सिर पर वार किया और फिर लाश की पहचान छिपाने के लिए उनके चहरे को गाड़ी से कुचल दिया।

हत्या में उसके चालक बर्मन टेप्पो भी शामिल था। वारदात में प्रयुक्त हथियार और गाड़ी अभी तक बरामद नहीं हुए हैं। दोनों के शव छत्तीसगढ़ के चक्रधर नगर क्षेत्र के संबलपुरी में मिले थे। शुरुआत में पुलिस के पास इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए कोई सुराग हाथ नहीं लग रहा था। लेकिन डीएनए टेस्ट के बाद जैसे ही शवों की पहचान हुई पुलिस को सुराग मिलते गए। इनके सहारे जाँच आगे बढ़ी जो अनूप साय के दरवाजे पर जा पूरी हुई।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने बुधवार रात को ओडिशा के पूर्व विधायक को हिरासत में लिया। साय बीजद का ताकतवर नेता है। कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद उसने 2014 का चुनाव बीजद की टिकट पर लड़ा था, लेकिन हार गया। 2019 चुनावों के दौरान वह बीजद प्रमुख नवीन पटनायक की सीट बीजेपुर की कैम्पेन कमेटी का चेयरमैन था। अगस्त 2019 में उसे ओडिशा वेयरहाउस कॉर्पोरेशन का चेयरमैन बना दिया गया। मर्डर केस में गिरफ्तारी के बाद उसे बीजद और कॉर्पोरेशन की चेयरमैनशिप से हटा दिया गया है।

राज्य बीजेपी के उपाध्यक्ष ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि नवीन पटनायक कार्रवाई करते हैं। उन्होंने न सिर्फ राज्य में महिलाओं के खिलाफ माहौल तैयार कर दिया है, बल्कि ज्यादातर मामलों में स्त्रियों के खिलाफ हिंसा और अपराध के आरोपी उनकी ही पार्टी से डायरेक्ट जुड़े हुए निकलते हैं। इनको अंतिम क्षण तक राज्य की पुलिस बचाने का प्रयास करती है।

मृतक महिला के पूर्व पति सुनील श्रीवास्तव ने पूर्व विधायक को फाँसी देने की मांग की है। सुनील ने बताया कि उसने नवंबर 2000 में कल्पना दास के साथ प्रेम विवाह किया था। लेकिन शादी के चार साल बाद ही पारिवारिक झगड़े के चलते उन लोगों ने तलाक ले लिय। बेटी के लिए उसने कई बार कल्पना से मिलने की कोशिश की पर वह उससे बात नहीं करती थी। 2006 में उसे कल्पना और अनूप साय के बीच संबंधों की जानकारी मिली। पता चला कि साय ने कल्पना को सुंदरपदा में एक फ्लैट में रहने के लिए दिया था। उसने एक बार बेटी से मिलने की कोशिश भी की पर साय ने मिलने नहीं दिया। 

दिल्ली में चुने गए MLA में से 43 पर दर्ज हैं हत्या की साजिश, रेप जैसे गंभीर आपराधिक मामले: ADR रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में एक और BJP नेता की हत्या: गोली मारने के बाद चाकू से ताबड़तोड़ वार, पार्टी ने TMC पर लगाया आरोप

नीरज प्रजापति की हत्या के मामले में 16 गिरफ्तार, CAA समर्थन रैली के समय मुस्लिम कॉलोनी में हुआ था हमला

धर्म को ‘अछूत’ मानने वाले वामपंथियों ने गंगाजल से धोई अंबेडकर प्रतिमा… गिरिराज के छूने से वो हुई थी ‘मैली’

बिहार में गंगाजल से धोकर बाबा साहब अम्बेडकर की प्रतिमा के शुद्धिकरण का एक मामला सामने आया है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यह काम किसी और ने नहीं बल्कि बहुजन क्रांति मोर्चा, राजद और वाम दलों ने किया है।

यह मामला बिहार में बेगूसराय जिले के बलिया प्रखंड का है। यहाँ केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह द्वारा भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद विपक्षी पार्टियों ने प्रतिमा सहित पूरे मंदिर परिसर को धोकर अपना विरोध जताया। ज्ञात हो कि गिरिराज सिंह बेगूसराय लोकसभा सीट से सांसद हैं और उन्होंने CPI नेता कन्हैया कुमार को हराया था।

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के समर्थन और पुलवामा आतंकी हमले की बरसी पर पुलवामा के बलिदानी जवानों की याद में साहेबपुर कमाल से बलिया तक केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ‘भारतवंशी जागृति यात्रा’ निकाली थी। यात्रा के दौरान उन्होंने बलिया प्रखंड कार्यालय स्थित अंबेडकर पार्क में लगी भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का माल्यार्पण किया। लेकिन इसके बाद शनिवार (फरवरी 15, 2020) को बहुजन क्रांति मोर्चा, राजद (RJD) और वाम दल के कार्यकर्ताओं ने पानी से धोकर उसका शुद्धीकरण किया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अंबेडकर की प्रतिमा को धोने वाले कार्यकर्ताओं ने ऐसा करने के पीछे तर्क देते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह नफरत की राजनीति करते हैं और बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके उन्होंने बाबा साहब की मूर्ति को अशुद्ध किया है।

Oops Sorry शेखर गुप्ता! वित्त मंत्री ने बताया द प्रिंट की रिपोर्ट को फर्जी, कहा- नहीं दिए ऐसे बयान

सरकार और उसके मंत्रालयों के खिलाफ आम जनता तक सबसे ज्यादा गुमराह करने का काम आज के समय में यदि कोई कर रहा है तो वह हमारे देश की कथित लिबरल मीडिया ही है। यही वजह है कि आम लोग नागरिकता संशोधन कानून से लेकर आधार कार्ड जैसे विषयों पर भी अक्सर गुमराह ही नजर आते हैं। और इसमें सबसे बड़ा योगदान होता है अपने मन से सिर्फ सत्ता के विरोध के लिए काल्पनिक, बेबुनियाद दावे करने वाले मीडिया गिरोहों का।

शेखर गुप्ता के प्रोपेगंडा वेबसाइट ‘दी प्रिंट’ ने फरवरी 14, 2020 को ही एक ऐसी खबर प्रकाशित की, जिसने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को इस पर स्पष्टीकरण देने पर मजबूर कर दिया। दरअसल, दी प्रिंट ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से सम्बन्धित एक ऐसी रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसे वित्त मंत्री ने एकदम मजाक और काल्पनिक कहते हुए कहा कि उन्होंने कभी इस तरह के कोई बयान दिए ही नहीं।

इसके बाद ट्विटर पर ही ‘दी प्रिंट’ ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को जवाब देते हुए कहा कि वो इस रिपोर्ट को एक बार फिर जाँचेंगे कि वास्तव में ऐसा कुछ हुआ भी है या नहीं। इसके बाद दी प्रिंट द्वारा इस पूरी रिपोर्ट की काया ही पलट दी गई और रिपोर्ट के ‘सत्यापित होने तक’ छुपा दिया।

दी प्रिंट की एक रिपोर्ट का शीर्षक था- “Why Nirmala Sitharaman doesn’t understand ‘Bombay people’” जिसका हिंदी अर्थ है – “निर्मला सीतारमण बॉम्बे के लोगों को क्यों नहीं समझती हैं?”

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी प्रिंट की यह खबर ट्वीट करते हुए पुछा- “क्या यह कोई मजाक है? अगर यह मजाक न होकर गंभीर है तो फिर यह बदनाम करने के लिए और दुर्भावनापूर्ण है क्योंकि इस रिपोर्ट में जो कुछ मेरे हवाले से लिखा गया है वो शब्द मेरे नहीं हैं।”

‘दी प्रिंट’ की इस खबर में बताया गया था कि वित्त मंत्री ने मुंबई के उद्योगपतियों का अपमान किया है। इसके बाद वित्त मंत्री के व्यवहार पर ज्ञान देते हुए दी प्रिंट ने लिखा है कि निर्मला सीतारमण लोगों की खिंचाई करने के लिए जानी जाती हैं, खासतौर पर जब वो किसी मुद्दे पर हाशिए पर हों।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बजट के बाद मुंबई में शीर्ष व्यवसायियों के साथ एक मीटिंग के दौरान उनसे डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स सम्बन्धी सवाल पूछे गए। रिपोर्ट में बताया गया था कि इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वहीं मौजूद इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के एक नामी व्यक्ति को अपमानित करते हुए कहा- “मैंने तुम लोगों के लिए सब कुछ किया, इससे ज्यादा तुम लोग क्या चाहते हो?”

‘दी प्रिंट’ ने लिखा है कि वित्त मंत्री यहीं पर नहीं रुकीं और उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से कहा- “मैं बॉम्बे के लोगों को नहीं समझ पाती हूँ। हमने सब कुछ कर रखा है लेकिन यह तीसरे क्वार्टर की विकास दर अभी भी 4.3% पर ही अटकी हुई है। तुम लोग कर क्या रहे हो?”

मीडिया गिरोह की ‘बेस्ट कोटेशंस’ के प्रति लगाव, चाहे वो फैज़ हो या फिर कोई विदेशी द्वारा कही गई हो, कोई नई बात नहीं है। वित्त मंत्री द्वारा कहे गए इस (दी प्रिंट के अनुसार) घटना पर दी प्रिंट ने यूएस के एक पूर्व राष्ट्रपति जॉन कैनेडी की एक उक्ति को भी लिखा है- ““Ask not what your country can do for you…” यानी, यह मत पूछिए कि आपका देश क्या कर सकता है?

‘दी प्रिंट’ की इस खबर का स्क्रीनशॉट आप यहाँ पढ़ सकते हैं, यह अब उनकी वेबसाइट पर मौजूद नहीं है –

लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की आपत्ति के बाद ‘दी प्रिंट’ ने रिपोर्ट के इस हिस्से को फ़ौरन एडिट करते हुए काट दिया और अंत में एक अस्वीकरण के साथ लिखा है- “इस खबर के सत्यापन तक इसे वापस ले लिया गया है।”

जब मीडिया ही सूचना की जगह अफवाह का स्रोत बन जाए

हम एक ऐसे समय में रह रहे हैं, जब हमारे ‘मीडिया प्रमुख’ खबर छापने के बाद उसके सत्यापन के लिए दौड़ते हैं। ऐसा करने वालों में ‘दी प्रिंट’ अकेला महारथी नहीं है, बल्कि इसके जैसे ही और कई बार कहीं बड़े मीडिया प्रमुखों की घातक टुकड़ियाँ यही काम सदियों से करती आ रही है।

जब मीडिया ही, जो कि लोकत्नत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है, सूचनाओं के बजाए अफवाहों का प्रमुख स्रोत बन जाए तो फिर क्या किया जा सकता है? वामपंथी मीडिया का यह पुराना शगल है। रवीश कुमार जैसे पत्रकार यह कहते हुए भी सुने गए हैं कि मीडिया द्वारा लगाए गए आरोपों पर मानहानि नहीं की जानी चाहिए। रवीश कुमार, मीडिया के प्रोपेगेंडा प्रमुख, इस बात के समर्थन में कहते हैं कि मानहानी मीडिया की स्वतन्त्रता में बाधक है।

वास्तव में मनगढ़ंत आरोपों के खिलाफ मानहानि मीडिया की स्वतन्त्रता नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा पत्रकारों की चुगलखोरी की स्वतन्त्रता में बाधक है। लेकिन गद्य और पद्य शैली में प्रोपेगेंडा को पत्रकारिता नाम देने वाले कभी भी अपनी स्पष्ट जुबान से यह स्वीकार नहीं करना चाहेंगे कि उन्हें पत्रकारिता नहीं बल्कि राजनीतिक द्वेष के लिए चुगलखोरी की आजादी चाहिए।

हर दूसरे दिन मीडिया ऐसी सैकड़ों खबरें प्रकाशित कर रहा होता है, जिनकी प्रमाणिकता हमेशा संदेहास्पद ही होती है और इसके कई सबूत भी मौजूद हैं। लेकिन भारतीय मीडिया यदि ऐसे हवा में तीर छोड़ना बंद कर दे तो फिर वह सनसनी कैसे कर सकेगा?

फिलहाल, ‘दी प्रिंट’ ने अपने आर्टिकल को छुपा दिया है। लगता नहीं है कि सत्यापन जैसी कोई चीज बाहर आ सकेगी। यह जरूर हो सकता है कि स्पष्टीकरण के बदले सरकार और मंत्रालय पर नया कोई मनगढ़ंत आरोप लगाते हुए ‘दी प्रिंट’ की कोई नई रिपोर्ट प्रकाशित हो जाए।

‘द प्रिंट’ का नया फ़र्ज़ीवाड़ा: ऐसी कोई ‘IB रिपोर्ट’ मौजूद नहीं है, जो संस्थानों के मोदी-विरोधी होने की बात करती हो

‘पगला गए हो क्या?’ दि प्रिंट के शिवम विज ने पहले फ़र्ज़ी बयान छापा, पकड़े जाने पर की बेहूदगी

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने ‘द प्रिंट’ के भ्रामक लेख का दिया करारा जवाब

16 फरवरी को रामलीला मैदान में हाजिरी लगाएँगे मास्टर साहब: शपथ ग्रहण में शिक्षकों को बुलाने पर विवाद

दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली शानदार जीत के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 16 फरवरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इसके लिए आम आदमी पार्टी (AAP) की तैयारियाँ लगभग पूरी हो चुकी है। शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन रामलीला मैदान में होगा। कई बड़े नेताओं को न्योता भेजा गया है। साथ ही शपथ ग्रहण समारोह में सरकारी स्कूल के शिक्षकों को भी शामिल होने का आदेश दिया गया है।

इसको लेकर दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें सभी स्कूलों को आदेश दिया गया है कि वे अपने यहाँ से 20 शिक्षकों को शपथ ग्रहण स्थल पर भेजें। सर्कुलर जारी होते ही भाजपा और कॉन्ग्रेस ने केजरीवाल सरकार पर हमला बोला है।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने इस पर सवाल खड़ा करते हुए कहा, “सरकार के शपथ ग्रहण में टीचर्स आए ये अच्छी बात है। लेकिन सरकारी ऑर्डर निकालकर जबरदस्ती टीचर्स को लाया जाए। टीचर्स की हाजिरी रामलीला मैदान में लगाई जाए। ये एक गलत परंपरा की शुरुआत है। शपथ ग्रहण को ऐसे ‘अनावश्यक ग्रहणों’ से मुक्त रखना चाहिए।”

बीजेपी नेता मेजर सुरेंद्र पुनिया ने ट्वीट करते हुए लिखा, “तुग़लकी फ़रमान। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के शिक्षकों को आदेश दिया कि वो उनके शपथ ग्रहण में पहुँचे वरना…लोकतंत्र का यह कौन सा मॉडल है? सरकारी खर्चे/तानाशाही आदेश से भीड़ इकट्ठी की जाएगी? मीडिया इस शिक्षा क्रांति पर बोलेगी? ज़ोर ज़बर्दस्ती या तो तानाशाह करते हैं या फिर गुण्डे।”

बीजेपी विधायक विजेंदर गुप्ता ने इस बाबत अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में उन्होंने शिक्षकों को रामलीला मैदान में बुलाए जाने वाले ऑर्डर को तुगलकी फरमान बताया है। गुप्ता ने यह ऑर्डर वापस लेने की माँग की है।

वहीं कॉन्ग्रेस प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने ट्वीट कर कहा कि शपथ ग्रहण में भीड़ जुटाने के लिए शक्ति का दुरुपयोग किया जा रहा है। शर्मा ने उपराज्यपाल से इसकी जाँच कराने की माँग की है। उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 70 में से 62 सीटें जीती हैं। सरकारी अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री की सलाह पर 6 विधायकों को मंत्री भी नियुक्त किया है। 16 फरवरी को अरविंद केजरीवाल के साथ जो 6 मंत्री भी शपथ लेंगे। ये हैं- मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, गोपाल राय, कैलाश गहलोत, इमरान हुसैन और राजेंद्र गौतम।

दिल्ली में शिक्षा क्रांति के दावे ऊँचे, हकीकत फीकी: 500 स्कूल नहीं खुले, कमरे गिनवा रही केजरीवाल सरकार

AAP की शिक्षा क्रांति! 12वीं में घट गए बच्चे, 10वीं के नतीजे 13 साल में सबसे बदतर

अनुसूचित जातियों और गरीब बच्चों के साथ खिलवाड़: दिल्ली की ‘शिक्षा क्रांति’ का काला सच