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मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड के दोषी ब्रजेश ठाकुर को उम्र कैद

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस मामले में दिल्ली के साकेत कोर्ट ने आरोपित ब्रजेश ठाकुर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दिल्ली स्थित साकेत कोर्ट ने 4 फरवरी को सजा पर बहस पूरी कर ली थी। इसके बाद 11 फरवरी सजा की तारीख तय की गई थी। मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड देश के चर्चित यौन उत्पीड़न कांडों में से एक होने के कारण पूरे देश की नजर आरोपितों की सजा पर टिकी हुई थी।

दिल्ली साकेत कोर्ट ने इस मामले के ‘किंगपिन’ और दोषी करार दिए गए ब्रजेश ठाकुर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह प्रकरण मुंबई के टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) की रिपोर्ट के बाद सामने आया था। इस मामले में साकेत कोर्ट ने ब्रजेश ठाकुर समेत 21 आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो (POCSO), बलात्कार, आपराधिक साजिश और अन्य धाराओं में आरोप तय किया था।

ब्रजेश ठाकुर के अलावा बालिका गृह की अधीक्षक इंदु कुमारी, बालिकागृह की गृह माता मीनू देवी, चंदा देवी, काउंसलर मंजू देवी, नर्स नेहा कुमारी, केस वर्कर हेमा मसीह, सहायक किरण कुमारी, तत्कालीन सीपीओ रवि कुमार, सीडब्लूसी के अध्यक्ष दिलीप कुमार, सीडब्लूसी के सदस्य विकास कुमार, ब्रजेश ठाकुर का ड्राइवर विजय तिवारी, कर्मचारी गुड्डू पटेल, कृष्णा राम, बाल संरक्षण इकाई की तत्कालीन सहायक निदेशक रोजी रानी, रामानुज ठाकुर, रामाशंकर सिंह, बालिकागृह के डॉक्टर अश्विनी, साइस्ता परवीन उर्फ मधु को अदालत ने दोषी करार दिया था।

मुजफ्फरपुर शेल्‍टर होम केस को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्‍ली ट्रांसफर किया गया था। तब से इस मामले की सुनवाई साकेत कोर्ट में चल रही थी और अब जाकर आखिरकार इसमें फैसला सुनाया गया। अदालत ने इस मामले में मार्च 20, 2018 को आरोप तय किए थे।

रोहिंग्या समुदाय के 16 लोगों की मौत, 40 लापता: बंगाल की खाड़ी में खचा-खच भरी नाव डूबी

मंगलवार (फरवरी 11, 2020) को बंगाल की खाड़ी में लगभग 125 रोहिंग्या शरणार्थियों को भरकर ले जा रही एक नाव के डूब जाने की घटना सामने आई है, जिसमें कम से कम 16 लोग मारे गए हैं। बांग्लादेशी अधिकारियों ने इसकी सूचना दी है। इस हादसे में करीब 40 लोग अभी भी लापता हैं।

क्षमता से ज्यादा भरी हुई लकड़ी की नाव में रोहिंग्या समुदाय के लोग बांग्लादेश के तटवर्ती इलाके कॉक्स बाजार से मलेशिया की ओर जा रहे थे, जब नाव बंगाल की खाड़ी में डूब गई है। तटरक्षक बल, नौसेना के गोताखोरों और अन्य बचाव दल ने सेंट मार्टिन द्वीप से लकड़ी की नाव के बरामद होने के बाद 14 महिलाओं, एक बच्चे और एक आदमी के शव को बरामद किया।

यह हादसा सोमवार देर रात उस समय हुआ, जब नौका बंगाल की खाड़ी के चेरादीप में सेंट मार्टिन द्वीप के नजदीक डूब गई। इस हादसे में रोहिंग्या समुदाय के 62 लोगों को बचा लिया गया है।

JNU वाले इलाके से वामपंथ गायब: लेफ्ट को नोटा से भी कम मिले वोट, आँकड़ों में भारी अंतर

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के नतीजें लगभग साफ है। चुनाव आयोग के आँकड़ों के मुताबिक दिल्ली की 70 सीटों में आम आदमी पार्टी 63 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। बीजेपी 7 सीटों पर आगे चल रही है। इसी बीच महरौली सीट के रुझान हैरान कर देने वाले हैं।

बता दें कि महरौली जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) विधानसभा इलाके में आता है और राजनीतिक गलियारों के मुताबिक यहाँ लेफ्ट पार्टियों का बोलबाला रहा है। इसके बावजूद इस बार यहाँ के आँकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। यहाँ लेफ्ट पार्टी को नोटा से भी कम वोट मिले हैं।

महरौली असेंबली सीट पर बीजेपी की ओर से कुसुम खत्री मैदान में हैं। कॉन्ग्रेस ने यहाँ से महेंदर चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया है, तो वहीं आम आदमी पार्टी ने नरेश यादव को फिर से मौका दिया है। यहाँ साल 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार नरेश यादव को जीत मिली थी। इस बार भी AAP उम्मीदवार नरेश यादव ही आगे चल रहे हैं। चुनाव आयोग के आँकड़ों के मुताबिक इस सीट से नोटा को अब तक 231 वोट मिले हैं, जबकि ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक नाम की लेफ्ट पार्टी को महज 58 वोट मिले हैं।

उल्लेखनीय है कि इस बार करीब 62.59 प्रतिशत मतदान हुआ है। चुनाव आयोग ने मतदान के करीब 24 घंटे बाद ये आँकड़े जारी किए, जिस पर आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाए थे। इस बार दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर कुल 672 प्रत्याशी मैदान में थे। इससे पहले एग्जिट पोल्स में आम आदमी पार्टी की बंपर जीत का अनुमान लगाया गया था।

NOTA से 15 गुना पीछे वामपंथ: दिल्ली चुनाव में लेफ्ट का सूपड़ा साफ़, JNU तक सिमटे

दिल्ली विधानसभा चुनाव में जहाँ भाजपा की लगातार आलोचना की जा रही है, वामपंथियों को लेकर कोई चर्चा नहीं चल रही। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, आम आदमी पार्टी 53.54% मतों के साथ नंबर एक पर चल रही है और पार्टी के खाते में 61 सीटें जाती हुई दिख रही हैं, भारतीय जनता पार्टी 38.78% वोट शेयर और 9 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर चल रही है। हालाँकि, पहले और दूसरे स्थानों पर चल रही पार्टियों के बीच काफ़ी बड़ा फासला है।

इस बड़ी टक्कर के बीच लोगों ने कॉन्ग्रेस को तो थोड़ा-बहुत याद भी किया लेकिन वामपंथियों को पूरी तरह भुला दिया। कॉन्ग्रेस 4.29% वोट शेयर के साथ तीसरे नंबर पर ज़रूर चल रही है लेकिन पार्टी का वोटिंग प्रतिशत पिछले चुनाव के मुकाबले गिरा है और मुस्लिम वोटर भी AAP के पाले में जाते दिख रहे हैं। कॉन्ग्रेस के वोट्स केजरीवाल की पार्टी को ट्रांसफर हुए हैं। अब आते हैं लेफ्ट पर।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में वामपंथियों और नोटा के बीच कड़ी टक्कर चल रही है। ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, नोटा वामपंथियों से 15 गुना वोटों से आगे चल रहा है। जहाँ नोटा पर अब तक कुल 0.47% वोटरों ने भरोसा जताया है, सीपीआई और सीपीएम को मिला दें तो वो 0.03% वोटरों की पसंद बने हैं। इससे पता चलता है कि वामपंथी अब सिर्फ़ जेएनयू तक ही सीमित रह गए हैं। दिल्ली में उन्हें कोई पूछने वाला भी नहीं बचा है। पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में उनका आधार खिसक चुका है। एक केरल में वो किसी तरह टिके हुए हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम: ख़बर लिखे जाने तक के आँकड़े

कन्हैया कुमार के रूप में वामपंथ को एक चेहरा मिला है, जिसे वो बिहार में भुनाना चाह रहे हैं। कन्हैया बिहार में जहाँ भी रैली करने जा रहे हैं, जनता उन्हें मारने दौड़ रही है। कहीं अंडे-मोबिल तो कहीं जूते-चप्पलों से उनका स्वागत किया जा रहा है। वामपंथी भले ही भाजपा की हार से ख़ुश हो जाएँ, उनकी ख़ुद की पार्टी का क्या हाल है- इस पर कोई सवाल नहीं कर रहा। स्पष्ट है, वामपंथी विचारधारा को पूरी तरह, सिरे से नकार दिया गया है।

‘मुस्लिम पूरा पोलराइज हुआ, हिन्दू घंटा हुआ’

दिल्ली की राजनीति में कॉन्ग्रेस की ‘दमदार’ वापसी, EVM पर दिग्विजय सिंह ने सवाल उठा किया एकमात्र काम

मतगणना के साथ ही खाली हुआ शाहीन बाग, नजर आए इक्के-दुक्के प्रदर्शनकारी

मतगणना के साथ ही खाली हुआ शाहीन बाग, नजर आए इक्के-दुक्के प्रदर्शनकारी

दिल्ली चुनावों से पहले सीएए विरोध के नाम पर शाहीन बाग में बैठे प्रदर्शनकारी अब बीच रोड पर लगे टेंट में दिखाई नहीं दे रहे। खाली पड़े टेंट को देखकर ऐसा लग रहा है मानो प्रदर्शनकारी संविधान को भूलकर केजरीवाल का गुणगान करने में लगे हुए हैं, जोकि एक तरह से शाहीन बाग की ख़िलाफत के बराबर है।

आज मतगणना के दिन शाहीन बाग में सन्नाटा है, जहाँ सुबह से ही प्रदर्शनकारी जुटने लगते थे, वहीं मंगलवार को शाहीन बाग पूरी तरह खाली नज़र आया, दोपहर के समय में मात्र इक्का-दुक्का लोग दिखाई दिए। क्या शाहीन बाग दिल्ली विधान सभा चुनाव स्टंट का एक हिस्सा था? अब जब उन्हें कोई हटा नहीं रहा है तो वे खुद ही शाहीन बाग छोड़ के क्यों चले गए हैं?

दरअसल शाहीन बाग इलाका ओखला विधानसभा क्षेत्र में आता है। यही कारण रहा कि वोटिंग वाले दिन मतदान स्थल पर वोटरों की खासी भीड़ नज़र आई। भीड़ भी इस कदर कि करीब पाँच सौ मीटर लंबी वोटरों की लाइन लग गई। हालाँकि, क्षेत्र से आप उम्मीदवार अमानतुल्ला ख़ान के जीतने पर लोगों में खुशी भी देखी जा रही है।

पिछले करीब दो महीनों से दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ धरना चल रहा है, जिसमें लगातार पहुँच रही प्रदर्शनकारियों की भीड़ दिल्ली चुनावों से पहले संविधान को बचाने की दुहाई दे रही थी। इतना ही नहीं यह प्रदर्शनकारी दिन रात बीच रोड पर लगे टेंट में डटे हुए थे, लेकिन जैसे ही दिल्ली विधानसभा चुनावों के वोट पड़े वैसे ही प्रदर्शनकारी शाहीन बाग से गायब होने लगे। वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों के बीच यह अफवाह फैली हुई है कि दिल्ली में सरकार बनते ही शाहीन बाग को जबरन खाली करा दिया जाएगा।

आपको बता दें कि शाहीन बाग में करीब दो महीने से सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ लोगों का धरना प्रदर्शन चल रहा है। वहीं शाहीन बाग रोड बंद होने के कारण आम लोगों को भारी जाम से जूझना पड़ रहा है। गौरतलब है कि पिछले दिनों शाहीन बाग धरने के ख़िलाफ आम लोगों ने मार्च निकाला था, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि जहाँ जाना है वहाँ जाएँ, लेकिन रोड को खाली करें।

‘मुस्लिम पूरा पोलराइज हुआ, हिन्दू घंटा हुआ’

भारत की संसद से लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय तक दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों का इंतजार हो रहा था। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने तो पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि दिल्ली में भाजपा की बड़ी हार होने वाली है क्योंकि उसने अनुच्छेद 370 से छेड़छाड़ किया, कश्मीरियों पर ‘अत्याचार’ किया और नागरिकता को लेकर क़ानून लाया। वहीं भारतोय मीडिया का एक बड़े तबके में भी उत्साह का माहौल है। गिरोह विशेष के पत्रकारों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है।

इसी बीच देश के बड़े मीडिया संस्थानों में से एक ‘द हिन्दू’ की पोलिटिकल एडिटर निस्तुला हेब्बर ने एक ट्वीट किया, जो दिल्ली चुनाव के बारे में देश के कुछ जनप्रतिनिधियों की राय को बयाँ करता है। आप भी उनके ट्वीट पर एक नज़र डालिए। संसद भवन में कवरेज के दौरान उन्होंने कुछ सांसदों को बातचीत करते हुए सुना। बकौल निस्तुला, बातचीत के दौरान सांसद कह रहे थे- “सीधी बात है। मुस्लिम पूरा पोलराइज हुआ, हिन्दू घंटा हुआ।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में शाहीन बाग़ पूरी तरह छाया रहा। अमानतुल्लाह ख़ान के क्षेत्र में मुस्लिम महिलाओं ने धरने पर बैठ कर मीडिया को उलझाए रखा। कॉन्ग्रेस का वोटिंग प्रतिशत धड़ाम से गिरा है और कहा जा रहा है कि ये वोट्स केजरीवाल की पार्टी को ट्रांसफर हुए। मुस्लिमों ने कॉन्ग्रेस की बजाए AAP पर विश्वास जताया, क्योंकि उन्हें भाजपा को हराने से मतलब था।

दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाक़ों के ट्रेंड्स पर नज़र डालें तो बहुत कुछ साफ हो जाता है। ओखला, सीलमपुर, मटिया महल और बल्लीमरान विधानसभा क्षेत्रों से आम आदमी पार्टी आगे चल रही है। इन चारों ही क्षेत्रों से AAP ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। इनके अलावा मुस्तफाबाद, किराड़ी, बाबरपुर और चाँदनी चौक से भी AAP ही आगे चल रही है।

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21348 अवैध घुसपैठिए किए गए प्रत्यर्पित, 9205 को किया गया गिरफ़्तार: गृह मंत्रालय ने जारी किए आँकड़े

अवैध घुसपैठियों को लेकर सरकार ने आँकड़े जारी किए हैं। लोकसभा में एक सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय ने पिछले 5 वर्षों का आँकड़ा दिया। गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत-बांग्लादेश सीमा पर पिछले 5 सालों में 21,348 अवैध घुसपैठियों को प्रत्यर्पित किया गया है। ये आँकड़े 2015 से लेकर अब तक के हैं। इसके अलावा सीमा सुरक्षा बल द्वारा 9205 घुसपैठियों को गिरफ़्तार किया गया है। ये आँकड़े भी भारत-बांग्लादेश सीमा से सम्बंधित ही हैं और पिछले 5 सालों के हैं।

वहीं इस दौरान गृह मंत्रालय ने कुछ अन्य जानकारियाँ भी दी। 1947 के भारत-पाक युद्ध की बात करते हुए बताया गया कि उस समय 31,619 ऐसे परिवारों को रजिस्टर किया गया था, जो विस्थापित हो गए थे। इनमें से 26,319 परिवार पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य में बस गए थे। वहीं 5300 परिवारों ने जम्मू कश्मीर छोड़ कर देश के अन्य हिस्सों में बसना पसंद किया। वहीँ 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में छम्ब नियाबत क्षेत्र से 10,065 परिवार विस्थापित हुए।

उधर मंगलवार को ही गृह मंत्रालय ने ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ को लेकर सवाल का जवाब दिया। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने बताया कि मंत्रालय के पास ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ को लेकर कोई सूचना नहीं है। मंत्रालय के पास इसकी कोई सूचना नहीं है कि ऐसे किसी गैंग के बारे में किसी जाँच एजेंसी ने सूचित किया हो। हालाँकि, कॉन्ग्रेस नेता विन्सेंट एच पाला और जसबीर सिंह गिल का ये सवाल ही बेहूदा था, क्योंकि ‘टुकड़े-टुकड़े’ कोई आधिकारिक शब्दावली है ही नहीं।

दिल्ली की राजनीति में कॉन्ग्रेस की ‘दमदार’ वापसी, EVM पर दिग्विजय सिंह ने सवाल उठा किया एकमात्र काम

कॉन्ग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंगलवार (फरवरी 11, 2020) को दिल्ली में जारी मतगणना के बीच EVM का मुद्दा उठाया है। अभी तक के रूझानों में आम आदमी पार्टी (AAP) को बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी दूसरे स्थान पर चल रही है। वहीं कॉन्ग्रेस का खाता भी नहीं खुला है। दिल्ली में 15 साल तक राज करने वाली कॉन्ग्रेस चुनाव में पूरी तरह से साफ हो गई है और खाता खोलने के लिए भी जूझ रही है। 

इस बीच कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने जारी मतगणना के बीच EVM पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सवा अरब लोगों के जनादेश को चुराने की इजाजत नहीं दी जा सकती। दिग्विजय सिंह ने ने कहा कि ईवीएम टेंपर-प्रूफ नहीं है और कोई विकसित देश इनका उपयोग नहीं करता है। उन्होंने ट्वीट किया, “चिप वाली कोई मशीन टेंपर-प्रूफ नहीं है। और कृपया एक मिनट के लिए सोचें कि विकसित देश ईवीएम का उपयोग क्यों नहीं करते?” उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तथा चुनाव आयोग से भी ईवीएम का मुद्दा उठाने का आग्रह किया।

सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा, “क्या चुनाव आयोग और माननीय सुप्रीम कोर्ट भारत में ईवीएम मतदान के मुद्दे पर एक बार फिर सोचेंगे? हम दुनिया में सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और हम कुछ बेईमान लोगों को चुनाव परिणाम हैक करने और 1.3 अरब लोगों के जनादेश को चुराने की अनुमति नहीं दे सकते।” दिग्विजय सिंह ने जोर देकर कहा कि पोस्टल बैलेटों की भी गिनती की जानी चाहिए।

आगे उन्होंने कहा कि अगर उनका काउंटिंग यूनिट के वोटों से मिलान होता है तो परिणाम की घोषणा कर दें। अगर उनका मिलान नहीं होता है तो सभी मतदान केंद्र के बैलटों की गिनती सदन में की जाए। इससे सभी लोग सहमत होंगे और समय भी बचेगा क्योंकि चुनाव आयोग ईवीएम के पक्ष में लगातार यही तर्क देता रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी दिग्विजय सिंह ने EVM पर सवाल उठाया था। उन्होंने अपने ऑफिशियल टि्वटर हैंडल पर वीडियो शेयर कर चुनाव आयोग को EVM की निष्पक्षता के संबंध में चुनौती दी थी, जिसमें अमेरिका के तीन सबसे बड़े वोटिंग उपकरण निर्माताओं के सीईओ का मानना था कि वोटिंग मशीन 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं है।

बता दें कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के रुझानों में आम आदमी पार्टी फिर बहुमत की ओर बढ़ रही है। वहीं, बीजेपी का प्रदर्शन पिछली बार के मुकाबले थोड़ा सुधरा है। जबकि दूसरी तरफ शीला दीक्षित की अगुआई में राज्य में 15 साल तक राज करने वाली कॉन्ग्रेस खाता खोलने के लिए भी जूझ रही है। लेकिन अफसोस कि अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए जिस वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को लाख प्रयास करने चाहिए थे, वो सिर्फ एक काम करके निश्चिंत हैं – EVM का राग रोना! और चूँकि इनका EVM राग चुनाव दर चुनाव बरकरार है, इसलिए हर मतगणना वाले दिन ये इसका रोना रोकर अपना राजनीतिक वापसी की घोषणा भी कर देते हैं!

कॉन्ग्रेस का खाता न खुलने पर मध्य प्रदेश के मुख्यमत्री कमलनाथ कहते हैं, “ये तो हम पहले से ही जानते थे, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि भाजपा का क्या परिणाम हुआ? जो इतनी लम्बी-लम्बी बातें करते हैं।” 

वहीं कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी तो पहले से ही अपनी हार से आश्वस्त नजर आए। उन्होंने कहा, “दिल्ली में कॉन्ग्रेस पार्टी ने सत्ता पर कब्ज़ा करने का कभी नहीं सोचा, हमने सोचा था कि कॉन्ग्रेस कुछ सीटें जीते और दिल्ली में कॉन्ग्रेस पार्टी का अस्तित्व बना रहे।”

तुगलकाबाद में आमने-सामने आए CAA-NRC विरोधी और समर्थक, दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग कर खदेड़ा

नागरिकता संसोधन कानून (सीएए) बनने के बाद से ही देशभर में इसे लेकर कहीं विरोध प्रदर्शन तो कहीं समर्थन में रैली निकाली जा रही हैं, लेकिन सीएए का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों को अब इसके समर्थकों से जवाब भी मिलने लगा है। कुछ ऐसा ही हुआ कल शाम को दिल्ली के तुगलकाबाद में, जहाँ सीएए के विरोध में नारेबाजी कर रहे लोगों के सामने सीएए के समर्थक आकर खड़े हो गए। हालाँकि, पुलिस ने तत्काल ही मौके पर पहुँचकर स्थिति को काबू में कर लिया।

दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले करीब दो माह से प्रदर्शनकारियों का सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन जारी है। वहीं सोमवार देर शाम को दिल्ली के तुगलकाबाद क्षेत्र में कुछ लोग सीएए के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर आ गए और ज़ोर-ज़ोर से सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाजी करते हुए संविधान को बचाने की दुहाई देने लगे, जिसमें जामिया के कुछ छात्र भी शामिल थे। इसी बीच सीएए के समर्थन में कुछ लोग हिंदुस्तान ज़िंदाबाद, वंदे मातरम के नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों के सामने आकर खड़े हो गए।

देखते ही देखते दोनों ओर से जमकर नारेबाजी होने लगी और माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसकी जानकारी जैसे ही दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को हुई वह तत्काल पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुँच गए, लेकिन पुलिस के मौके पर पहुँचने के बाद भी कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ और आमने-सामने खड़े होकर नारेबाजी करते रहे। आख़िर में दिल्ली पुलिस को हल्का बल प्रयोग करके सड़क पर डटे लोगों को खदेड़ना पड़ा। तब कहीं जाकर पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से पहले ही काबू में कर लिया।

आपकों बता दें कि बीते सोमवार को मंडी हाउस में प्रदर्शनकारियों ने सीएए के विरोध में मार्च निकालने का आह्वान किया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने यह कहते हुए पहले ही बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया था कि यहाँ कोई विरोध-प्रदर्शन या धरना देने का स्थान नहीं है, किसी को धरना देना या विरोध-प्रदर्शन करना है तो वह जंतर-मंतर जाए। गौरतलब है कि पिछले करीब दो महीने से दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों का सीएए के ख़िलाफ़ रोड पर धरना जारी है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पिछले दिनों स्थानीय लोगों ने शाहीन बाग धरने के ख़िलाफ़ भी एक विरोध मार्च निकाला था, जिसमें लोगों ने दिल्ली पुलिस से धरना हटवाने की माँग करते हुए कहा था कि, जहाँ जाना है वहाँ जाओ, लेकिन सड़क को खाली करो।

954 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी वाले इंजीनियर यादव सिंह को CBI ने फिर किया गिरफ्तार

भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने नोए़डा अथॉरिटी के पूर्व इंजीनियर यादव सिंह को एक बार फिर से गिरफ्तार कर लिया है। हाल ही में यादव सिंह जमानत पर रिहा हुए थे। यादव सिंह पर भ्रष्टाचार के अलावा आय से अधिक संपत्ति समेत कई मामले चल रहे रहे हैं। बता दें कि यादव सिंह नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर रह चुके हैं।

पहली बार यादव सिंह के खिलाफ 2015 में जाँच शुरू हुई थी। 2016-17 में CBI ने उनके खिलाफ दो चार्जशीट तैयार की थी। CBI ने अपने आरोप पत्र में कहा था कि अप्रैल 2004 से 4 अगस्त 2015 के बीच यादव सिंह ने आय से अधिक 23.15 करोड़ रुपए जमा किए। ये उनकी आय के स्रोत से लगभग 512.6 प्रतिशत ज्यादा है। यादव सिंह पर कुल 954 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का भी आरोप लगा है। जनवरी 2018 में जब CBI ने इस मामले की जाँच शुरू की, तब वो नोएडा अथॉरिटी में बतौर चीफ इंजीनियर काम कर रहे थे।

CBI के एक अधिकारी ने बताया कि जब यादव चीफ इंजीनियर थे, तब कुल 116.39 करोड़ का टेंडर 5 प्राइवेट फर्म्स को जारी हआ था। ये टेंडर फर्म्सगुल इंजीनियरिंग, एसएमपी टेक्नोलॉजी, अबू इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और संजय इलेक्ट्रॉनिक्स तथा शाकंभरी प्रोजेक्ट को दिए गए थे। CBI इस मामले की भी जाँच कर रही है।

CBI का आरोप है कि गुल इंजीनियरिंग के मालिक जावेद अहमद, यादव सिंह के पुराने और करीबी दोस्त हैं। इस कंपनी को नियमों का उल्लंघन करके टेंडर दिया गया था। जाँच एजेंसी का कहना है कि जावेद अहमद प्राय: यादव सिंह को रिश्वत दिया करते थे। आरोप है कि यादव व अथॉरिटी के अन्य अधिकारियों ने तमाम नियमों को ताक पर रखकर इस कंपनी को 31 ठेके दिए थे। इसके बदले में डायरेक्टर जावेद अहमद ने यादव सिंह को बतौर रिश्वत एक इनोवा कार भी दी थी।

गौरतलब है कि CBI यादव सिंह को इसके पहले भी दो अन्य मामलों में गिरफ्तार कर चुकी है। जिसमें यादव सिंह लंबे समय तक जेल में रहे थे और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वह हाल ही में जमानत पर जेल से रिहा हुए थे। हालाँकि कोर्ट ने CBI को इस बात की छूट दी थी कि यदि यादव सबूत के साथ छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश करें तो वह जमानत रद्द करने के लिए आवेदन कर सकती है। बता दें कि यादव सिंह का नाम उत्तर प्रदेश के कई दिग्गज नेताओं के साथ जोड़ा जाता रहा है और यह भी आरोप लगता रहा है कि यादव सिंह रिश्वत की रकम को नेताओं तक पहुँचाते थे।