दिल्ली विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है। हर किसी की निगाहें परिणाम पर टिकी हुई हैं। भले ही रुझानों में आम आदमी पार्टी को बहुमत मिलता दिख रहा है, जोकि अभी तक 57 सीटों पर आगे चल रही है। लेकिन 13 सीटों पर बीजेपी ने भी बढ़त बना रखी है। साथ ही कॉन्ग्रेस और अन्य के खाते में एक भी सीट जाती हुई नहीं दिख रही। वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया अपनी विधानसभा क्षेत्र पटपड़गंज से पीछे चल रहे हैं।
13 सीटों (जहाँ BJP आगे है) के अलावा दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली की करीब 9 सीटें ऐसी हैं, जहाँ बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच काँटे का टक्कर चल रहा है। इन सीटों पर बढ़त का अंतर एक हजार वोटों से कम का है। इनमें विश्वास नगर विधानसभा, सीलमपुर, आदर्श नगर, द्वारका, हरिनगर, किराड़ी, कालकाजी, नजफगढ़, मुंडका, ओखला, शालीमार बाग शामिल है।
Delhi BJP Chief Manoj Tiwari: Trends indicate that there is a gap between AAP-BJP, there is still time. We are hopeful. Whatever the outcome, being the State Chief I am responsible. #DelhiElectionResultspic.twitter.com/k2G7r0OGCu
दिल्ली चुनाव को लेकर वोटों की गिनती जारी है। रुझानों में आम आदमी पार्टी (AAP) को 50 सीट मिलती हुई दिखाई दे रही है, जो एग्जिट पोल के अनुरूप ही है। रुझानों में दिल्ली में लगातार तीसरी बार अरविंद केजरीवाल की आदमी पार्टी की सरकार बनती दिख रही है। आम आदमी पार्टी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा पर एक आरामदायक बढ़त बना ली है। चुनाव आयोग के अनुसार, कुल मतदान 62.59 प्रतिशत दर्ज किया गया। ऐसे में लोगों की नजर दिल्ली की 8 मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर है। आइए डालते हैं इन मुस्लिम बहुल सीटों पर एक नजर:-
ओखला विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के अमानतुल्ला खान आगे
मटिया महल विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के शोएब इकबाल आगे
बल्लीमरान विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के इमरान हसन आगे
सीलमपुर से आम आदमी पार्टी के अब्दुल रहमान आगे
मुस्तफाबाद से भारतीय जनता पार्टी के जगदीश प्रधान आगे
एक बॉलीवुड निर्देशक हैं- विधु विनोद चोपड़ा। ये खुद को कश्मीरी पंडित बताते हैं, उनके दर्द को समझने का दावा करते हुए फिल्म बनाते हैं- शिकारा। मगर जिस तरह से उन्होंने इस फिल्म में कश्मीरी पंडितों के साथ 1990 में घटित त्रासदी के साथ अन्याय किया, उसका मजाक बनाया, उसके लिए कश्मीरी पंडित उन्हें कभी माफ नहीं कर पाएँगे। कहने को तो उन्होंने कहा था कि इस फिल्म में उन्होंने कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के दर्द को दिखाया है। उन्होंने दावा किया था कि इसमें दिखाया गया है कि कैसे और किन परिस्थितियों से गुजर कर कश्मीरी पंडितों को घाटी से पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा।
मगर अफसोस की बात है कि ये सब कश्मीरी पंडितों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ के सिवाय और कुछ नहीं था। उन्होंने ना सिर्फ कश्मीरी पंडितों के दर्द का ध्रुवीकरण कर उन्हें धोखा दिया है बल्कि इस फिल्म के जरिए उन्होंने कट्टरपंथियों को भी जस्टिफाई किया है। कश्मीरी पंडितों का कहना है कि मूवी में कट्टरपंथी इस्लाम पर लीपापोती करने के लिए तथ्यों के साथ खिलवाड़ किया गया है और उन्हें तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। फिल्म के रिलीज होने के बाद से हर वो कश्मीरी पंडित क्षुब्ध और आक्रोशित है, जिनसे विधु विनोद चोपड़ा ने कहा था कि ये आपकी कहानी है, हम आपके दर्द को दिखाने जा रहे हैं।
इन्हीं कश्मीरी पंडितों में से एक हैं- रोमिला टट्टू। रोमिला का घर जम्मू में है। वो ऑपइंडिया से बात करते हुए बताती हैं कि विधु विनोद चोपड़ा और फिल्म के स्क्रिप्ट राइटर राहुल पंडिता ने उनके परिवार से कहा था कि वो फिल्मी पर्दे के जरिए कश्मीर में हुए नरसंहार, रेप, हत्या आदि को दिखाने वाले हैं। इसलिए हमसे जुड़िए और हमें अपनी कहानी बताइए। वो कहती हैं कि उनके परिवार को लगा कि कोई तो है जो उनके दर्द को दिखाएगा और उनका परिवार पूरी जी-जान से उनकी मदद में जुट गया। फिल्मकार ने उन्हें जहाँ-जहाँ बुलाया, वो लोग गए। उनसे प्रमोशन करावाया, उनके नाम पर हमदर्दी हासिल की और दिखाया क्या… प्रेम कहानी! रोमिला सवाल करती हैं कि जब प्रेम कहानी ही दिखाना था, तो हमें इसमें क्यों घसीटा?
और उनका सवाल भी वाजिब है। आप फिल्मकार हैं। आपके पास पैसे हैं। आप किसी भी विषय पर फिल्म बना सकते हैं। लेकिन इसके लिए उनके दर्द को कुरेदने का और फिर बिजनेस और मार्केटिंग के लिए प्रेम कहानी दिखा देना कहाँ तक उचित है? रोमिला ने बताया कि विधु विनोद चोपड़ा ने बताया कि इस फिल्म में कश्मीरी पंडितों के दर्द को दिखाने के लिए बंसी लाल मट्टू के नाम का इस्तेमाल किया। मगर फिल्म में उनके सीन कितने दिखाए गए… मात्र तीन! जिसमें से एक भी सिंगल फ्रेम में नहीं।
फिल्म रिलीज के बाद विधु विनोद चोपड़ा का ट्रांसलेटेड फेसबुक पोस्ट
बंसी लाल मट्टू, रोमिला के पति के छोटे दादाजी थे। उन्होंने हमसे अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि जिस समय विधु विनोद चोपड़ा ने बंसी लाल से फिल्म बनाने की बात कही थी और कहा था कि वो उनकी कहानी को, उनके दर्द को पर्दे पर दिखाएँगे, उस समय वो कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। मगर चोपड़ा की बात सुनकर उन्होंने ये बात ना तो उन्हें बताई और न ही परिवार में किसी को इसकी भनक लगने दी, ताकि वो शूटिंग कर सके। उन्होंने अपने कैंसर की रिपोर्ट घर वालों से छुपाई। कैंसर से जूझते हुए उन्होंने मूवी में काम किया। बंसी लाल ने फिल्म पूरी होने के बाद कैंसर वाली बात परिवार वालों को बताई, फिर उनका ट्रीटमेंट शुरू हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वो बच नहीं पाए। रोमिला कहती हैं कि अगर बंशी लाल को पता होता कि ये एक लव स्टोरी है, तो कभी भी इसमें एक्ट नहीं करते, वो भी कैंसर की हालत में! वो बिफरते हुए कहती हैं, “विधु विनोद चोपड़ा ने हर स्टेज पर कहा कि बंसी लाल जी को कैंसर था, फिर भी उन्होंने हमारे लिए काम किया। तो क्या आपने यही ईनाम दिया उनके बलिदान का?”
विधु विनोद चोपड़ा के पोस्ट पर रोमिला टट्टू की प्रतिक्रिया
रोमिला ने बताया कि पिछले एक महीने से उनके परिवार से कोई न कोई इंटरव्यू के लिए जा रहे थे। उन्हें INDIA TV, NDTV, INDIA TODAY जैसे बड़े-बड़े प्लेटफॉर्मों पर ले जाया जा रहा था। वो भी बसों से। 60 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को भी बसों में भरकर ले जाया जा रहा था। और वो भी जा रहे थे क्योंकि उन्हें लग रहा था कि उन्होंने फिल्म में उनकी कहानी दिखाई है, मगर बेहद अफसोस की बात है कि उन्होंने फिल्म में एक भी वास्तविक सीन को रिक्रिएट करके नहीं दिखाया।
विधु विनोद चोपड़ा के पोस्ट पर शिवानी मट्टू की प्रतिक्रिया
इसके अलावा राम मंदिर के लिए जो विधु विनोद चोपड़ा के दिल में नफरत भरी हुई है, उसे भी फिल्म में दिखाने से वो चूके नहीं हैं और इसके लिए उन्होंने बड़ी ही बेशरमी से एक छोटे बच्चे का इस्तेमाल किया है। मतलब वो कितना नीचे गिर सकते हैं कि एक छोटे से बच्चे से ‘मंदिर वहीं बनाएँगे’ का नारा लगवाया जाता है और इसे नफरत फैलाने वाला और देश तोड़ने वाला नारा बताया जाता है।
मगर कहीं भी जिहादी नारे नहीं दिखाए गए। पूरी फिल्म में समुदाय विशेष को शांतिप्रिय दिखाया गया है। कहीं भी मूवी में उन्होंने यह नहीं दिखाया कि आखिर कश्मीरी पंडितों के वहाँ से भागने की वजह क्या थी? उन्होंने एक भी जिहादी नारे लगते हुए नहीं दिखाए, कश्मीरी पंडितों की बहू-बेटियों के साथ हुए सामूहिक बलात्कार, नृशंस हत्या को नहीं दिखाया गया। आगजनी के नाम पर दूर से एक-दो घरों को जलते हुए दिखाया गया। क्या यही वजह है उनके वहाँ से अपने घर-बार को छोड़कर भागने की?
@VVCFilms Sach sach hota hai aur uske liye ek hi basha kafi hai woh hai sach ki…10 languages mai likhne se kuch nahi hoga sahab abh sach likhna padega. You must have understood ki YEH INDIA ABH SUNTA HI NAHI SUNATA BHI HAI. pic.twitter.com/w9VH1CILD5
रोमिला के साथ ही बंसी लाल मट्टू की पौत्री शिवानी मट्टू ने भी ऑपइंडिया से बात की। शिवानी ने कहा कि विधु विनोद चोपड़ा ने एक बार फिर से बड़ी ही निर्लज्जता से पंडितों को खंडित करने का काम किया है। वो बताती हैं कि मूवी की शुरुआत से लेकर अंत तक लतीफ नाम के एक ब्यक्ति को रहम दिल और शांतिप्रिय दिखाया जाता है। शुरुआती सीन में दिखाया जाता है कि भारत की सरकार लतीफ के अब्बू को मार देती है, जिसके बाद वो आतंकवादी बन जाता है, लेकिन उसके अंदर जमीर जिंदा रहता है। वो शिवकुमार धर नाम के किरदार से कहता है, “मैंने तो अपने अब्बू को खो दिया, तुम अपने अब्बू को बचा लो, दिल्ली चले जाओ।” यहाँ पर वो यह भी सवाल करती हैं कि उस समय भारत की सरकार कैसे कर सकती है, जबकि उस समय तो अनुच्छेद 370 लागू था। उस समय तो फारुक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती का ही शासन था। 370 तो 5 अगस्त 2019 को निरस्त हुआ है। वो यह भी कहती हैं कि फिल्म में लतीफ और शिकुमार को भाई दिखाया जाता है। ये दोनों भाई कैसे हो सकते हैं… भगवान जाने!
वो कहती हैं कि एक सीन में दिखाया जाता है कि शिवकुमार के मकान बनाने के लिए लतीफ ने पत्थर दिए थे। यानी कि उन्होंने ये दिखाया कि एक दूसरे समुदाय के व्यक्ति ने हिंदुओं की मदद की। बाकी ज्यादातर दूसरे समुदाय के कश्मीरी हिंदुओं को यही कहते हुए दिखाया गया कि भाई तुम लोगों को डरने की कोई जरूरत नहीं है। हमलोग तुम्हारे साथ हैं। ये बस चंद लोग हैं, जो इस प्रकार का कर रहे हैं।
एक बड़ी ही विचित्र बात बताई रोमिला जी ने कि जिस शांति का किरदार दिखाया गया है, वो सरला भट्ट का है। सरला भट्ट नर्स थी और फिल्म में शांति को भी नर्स दिखाया गया है। मगर उन्होंने इसमें ये नहीं दिखाया कि कैसे आतंंकवादियों द्वारा सरला भट्ट का सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर बढ़ई की आरी से उसके शरीर को तीन हिस्सों में चीर कर सरे बाजार घुमाया गया। ऐसा हजारों हिन्दू महिलाओं के साथ किया गया। लेकिन यहाँ पर उन्होंने इस किरदार को शांति नाम देकर, जो कि उनकी स्वर्गीय माताजी का भी नाम है, प्रेम कहानी बना दी। रोमिला कहती हैं कि शांति के किरदार के बारे में आम आदमी नहीं समझ पाएँगे कि वो किस तरह से सरला से जुड़ा है, लेकिन चूँकि उन्होंने नजदीक से देखा है तो ये दावा कर सकती हैं।
रोमिला कहती हैं कि अगर डायरेक्टर का दावा है कि वो सच्ची घटना को दिखा रहे हैं, तो उस समय की जो त्रासदी थी, उसमें कौन रोमांस कर रहा था, जो उन्होंने लव स्टोरी दिखाई है? लोगों के सर के ऊपर छत नहीं थी, हालत खराब थी, लोग कट्टरपंथियों के शिकार होने के अलावा साँप-बिच्छू काटने से, अत्यधिक गर्मी और कई अन्य बीमारियों से मर रहे थे। इसे तो नहीं दिखाया गया। वो कहती हैं, “उस समय की त्रासदी ऐसी थी कि चोपड़ा जी लिखते-लिखते थक जाएँगे, लेकिन हम बताते-बताते नहीं थकेंगे।” वहीं जब रोमिला और शिवानी से पूछा गया कि विधु विनोद चोपड़ा और राहुल पंडित, वो दोनों भी तो कश्मीरी पंडित हैं तो वो भी इस दर्द से गुजरे होंगे, तो उन्होंने सच ही दिखाया होगा? इस पर रोमिला बिफरते हुए कहती है कि उन्हें तो इस बात पर भी शक है कि वो दोनों कश्मीरी पंडित हैं, अगर होते तो इस तरह की निर्लज्जता नहीं करते। शिवानी इसका जवाब देते हुए कहती हैं, ‘घर का भेदी लंका ढाए’। मतलब तो आप समझ ही गए होंगे।
रोमिला यहाँ पर फिल्म के कास्ट पर सवाल करते हुए कहती हैं कि वो कश्मीरी पंडित एक्टर्स को भी कास्ट कर सकते थे, लेकिन उन्होंने मुस्लिम एक्टर्स को क्यों चुना। यह राजनीति क्यों खेली? एक जगह पर सादिया, जो कि शांति का किरदार निभा रही थी, वो सामान पैक करते समय मंदिर उठाकर रखती है। रोमिला इस पर आपत्ति जताते हुए कहती हैं, “मैं किसी धर्म से नफरत नहीं करती। धर्म से हमारा मतलब एक ही है कि वो हमारा पालनहार है, लेकिन जब वो लोग हमें अपने मजहब में नहीं घुसने देते तो फिर एक मुस्लिम एक्ट्रेस ने हमारा मंदिर कैसे छुआ? क्या पता वो गाय खाकर बैठी हो। वो हमारे पवित्र मंदिर को हाथ कैसे लगा सकती है?” वो कहती है कि कश्मीर में हजारों मंदिरों को तोड़ा गया, लेकिन इसमें एक भी मंदिर को नहीं दिखाया गया। वो यहाँ पर एक और बात कहती हैं, “विधु विनोद चोपड़ा कहते हैं कि वो इस फिल्म के जरिए अपनी माँ को श्रद्धांजलि दे रहे हैं तो क्या कोई अपनी माँ को श्रद्धांजलि में लव स्टोरी देता है?”
शिवानी कहती हैं, “ट्रेलर देखकर लगा था कि किसी ने हमारी कहानी दिखाने की हिम्मत की, लेकिन प्रीमियर के समय बायस्ड लल्लनटॉप, एनडीटीवी, रवीश कुमार, बरखा दत्त वगैरह को देखकर लग गया था कि हमारी भावनाओं के साथ खिलवाड़ हुआ है। क्योंकि ये रवीश कुमार और बरखा दत्त वही लोग हैं, जिन्होंने इस मुद्दे पर काफी राजनीतिक रोटियाँ सेंकी थीं।” रोमिला मीडिया के बारे में बात करते हुए कहती हैं कि जब उनके परिवार वाले इंडिया टीवी को इंटरव्यू देने के लिए गए थे तो उनके ससुर जी भी मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने बंसी लाल और 1990 के दौरान घटी घटनाओं को साझा किया था। उन्होंने बताया था कि 1990 ही नहीं, बल्कि वो लोग 1967 से इस्लामिक आतंकवाद से जूझ रहे हैं। इंडिया टीवी वालों ने बड़ी ही धूर्तता से उस सेशन को ही हटा दिया था।
रोमिला बताती हैं कि फिल्म में कहीं भी इस सच्चाई को भी नहीं दिखाया गया है कि कश्मीरी पंडित मुस्लिमों के बच्चों को पढ़ाया करते थे। वो कहती हैं कि 1997 में भी आतंकियों के आतंक का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उस समय में उनके पति के मौसाजी, जिनका नाम अशोक कुमार रैना था। उनकी पोस्टिंग जम्मू में हुई थी। वो बस से वहाँ उन मुस्लिमों के बच्चों को पढ़ाने के लिए जा रहे थे। बीच में ही बस रोककर वो लोग चढ़े और पूछा कि कौन-कौन हिंदू है? तो अशोक के साथ दो अन्य के बारे में बता दिया गया। जिसके बाद इन तीनों को बस से नीचे उतारकर एक-एक करके गोली मारकर हत्या कर दी गई। शिवानी आगे बताती हैं कि विस्थापन के दौरान इन लोगों को जिस कैंप में रखा गया था, उसमें वॉशरूम वगैरह भी नहीं थे। किसी तरह से बाँस और पत्थर की सहायता से पर्दे टाँगकर काम चलाते थे। एक दिन यही पत्थर, जिससे उन लोगों ने पर्दे बाँध रखे थे, उनके एक दोस्त के सिर पर जा गिरा। वो जख्मी हो गया और फिर उसे 6 टाँके लगाने पड़े।
शिवानी और रोमिला कहती हैं कि फिल्म में एक जगह बेनजीर भुट्टो का धुँधला सा वीडियो दिखाया जाता है, इससे ज्यादा स्पष्ट तो यूट्यूब पर उपलब्ध है। वो कहती हैं कि और सोर्सेज का इस्तेमाल करके ही सही कश्मीरियों के दर्द को भी दिखा दिया होता। लेकिन इतनी हिम्मत कहाँ उनमें? रोमिला कहती हैं कि ये वही विधु विनोद चोपड़ा हैं, जिन्होंने फिल्म ‘संजू’ में संजय दत्त को क्लीन चिट दे दी थी, पीके में भगवान शिव का मजाक बनाया था। वो बताती हैं, “विधु विनोद चोपड़ा ने बंसी लाल मट्टू की मौत के बाद भी उनकी पत्नी को प्रमोशन के लिए हर स्टेज पर बुलाया और फिल्म रिलीज से एक दिन पहले फिल्म का नाम शिकारा- द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ कश्मीरी पंडित से बदलकर लव स्टोरी कर दिया। वो अगर आज मूवी देखेंगी तो उनके दिल पर क्या बीतेगी? जिनका पति कुछ दिनों पहले मरा हो, वो भी उस मूवी के लिए अपनी बीमारी छुपाई।”
यहाँ पर शिवानी एक और बात पर चिंता व्यक्त करती हैं कि विधु विनोद चोपड़ा ने इस फिल्म को बनाकर जो गलत बेंचमार्क सेट किया है, उसका असर उन्हें बाद तक झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “अभी मेरे बच्चे छोटे हैं। कल को जब वो मुझसे कश्मीरी पंडितों के बारे में पूछेंगे और मैं उनको आपबीती बताऊँगी तो वो इन पर विश्वास न करके फिल्म पर विश्वास करेंगे और कहेंगे कि ये फिल्म तो कश्मीरी पंडितों पर बनी है और इसमें तो ऐसा कुछ नहीं दिखाया गया है।” वो कहती हैं, “मैं विधु विनोद चोपड़ा को बताना चाहती हूँ कि हम कश्मीरी पंडितों के साथ इतना कुछ होने के बाद भी आपको कोई भी कश्मीरी पंडित भीख माँगते हुए या आतंकवादी नहीं दिखाई देगा। सभी अपने पैरों पर खड़े हैं। ये मेरी गारंटी है आपको।”
रोमिला और शिवानी कहती हैं, “उन्हें कश्मीरी पंडितों के ऊपर फिल्म नहीं बनानी थी तो नहीं बनाते और अगर लव स्टोरी ही बनानी थी तो उन्होंने उनके परिवारवालों को इसमें क्यों घसीटा? अपने लीड एक्टर-एक्ट्रेस को ले जाते प्रमोशन के लिए और लोगों से कहते कि हमने कश्मीरी कल्चर पर लव स्टोरी बनाई है।” मतलब कश्मीरी पंडितों के नाम पर फिल्म बनाकर विधु विनोद चोपड़ा ने उनके ज़ख्मों पर नमक नहीं, बल्कि तेजाब छिड़का है।
पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों पर गत वर्ष की गई एयर स्ट्राइक के बाद भारत ने अपनी हवाई ताकत को बढ़ाने का फैसला किया है। इसके लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने भारत को इंटीग्रेटेड एयर डिफेन्स वेपन सिस्टम (IADWS) बेचने की मंजूरी दे दी है। इससे भारत को अपने आर्म्ड फाॅर्स को आधुनिक बनाने के साथ ही वर्तमान एयर डिफेन्स सिस्टम को मजबूत और इसका विस्तार करने में सहायता मिलेगी।
Donald Trump administration approves sale of Integrated Air Defense Weapon System to India https://t.co/oLr4mo2wQm
डिफेन्स डील की यह खबर ऐसे समय में आई है, जब हाल ही में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (आईडीएस) से कहा था कि वह एयर डिफेंस कमांड के निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार करें। जनरल रावत ने इसके लिए 30 जून की समयसीमा तय की है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, डिफेंस सिक्योरिटी को-ऑपरेशन एजेंसी ने सोमवार को बताया कि ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी संसद से स्पष्ट कहा कि उसका भारत को इंटीग्रेटेड एयर डिफेन्स वेपन सिस्टम (IADWS) बेचने का पक्का इरादा है। 1.9 बिलियन डॉलर की इस डील को अमेरिका ने मंजूरी दे दी है। अमेरिका का कहना है कि इस डिफेंस डील से दोनों देशों के सामरिक संबंध मजबूत होंगे और दोनों देशों की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा में इजाफा होगा।
संसद को दी गई सूचना के अनुसार भारत ने अमेरिका से कहा था कि वह (IADWS) खरीदना चाहता है। इस डील के अंतर्गत भारत निम्न हथियारों को खरीदने जा रहा है –
5 AN/MPQ-64Fl सेंटिनेल राडार प्रणाली
118 AMRAAM AIM-120C-7/C-8 मिसाइलें
3 AMRAAM गाइडेंस सेक्शन
4 AMRAAM कंट्रोल सेक्शन
134 स्ट्रिंगर FIM-92L मिसाइलें
इस डिफेंस सिस्टम में वही आमराम मिसाइल (AMRAAM) भी शामिल हैं, जिसे पिछले वर्ष पाकिस्तान एयरफोर्स (पीएएफ) की तरफ से विंग कमांडर अभिनंदन के मिग-21 पर दागा गया था। पाकिस्तानी लड़ाकू विमान एफ-16 ने भारतीय लड़ाकू विमान मिग-21 को निशाना बनाते हुए चार से पाँच अमेरिकी आमराम (AMRAAM) मिसाइलें दागीं थीं। हालाँकि, सभी मिसाइलें अपने लक्ष्य को भेदने में असफल रहीं। ये आमराम अमेरिकी मिसाइलें उन्नन किस्म की हैं, जो कि मध्यम दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हैं। अमेरिकी कॉन्ग्रेस की तरफ से इस डील को लेकर नोटिफिकेशन दे दिया गया है।
दिल्ली विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है, ऐसे में उन नेताओं पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, जिन्होंने अपनी पार्टी को छोड़कर दूसरे राजनीतिक दलों में जाकर अपनी पैठ जमाई और फ़िर विधानसभा का टिकट भी हासिल किया। बस इंतजार है दिल्ली के चुनावी परिणाम का।
दिल्ली विधानसभा चुनावों को जीतने के लिए मैदान में उतरे विभिन्न दलों के प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला आज हो जाएगा। इस बीच अपने दल को छोड़ दूसरे दल से मैदान में उतरे उन प्रत्याशियों पर सभी की निगाहें हैं, क्योंकि दिल्ली का यही चुनावी परिणाम उनकी भविष्य की राजनीति तय करेगा। दिल्ली में एक-दो नहीं करीब 10 से भी अधिक प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्होंने पार्टी को छोड़कर दूसरी राजनीतिक पार्टी को ज्वॉइन किया और फ़िर उस पार्टी की टिकट से मैदान में भी उतरे। ऐसे प्रत्याशियों में आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ने वाले सबसे अधिक नेता हैं।
ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय।।
हे ईश्वर! हमको असत्य से सत्य की ओर ले चलो। अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। मृत्यु से अमरता के भाव की ओर ले चलो।
दल बदलकर चुनाव लड़ने वालों में सबसे अधिक आम आदमी पार्टी से मैदान में है। इसमें द्वारका से महाबल मिश्रा के बेटे विनय मिश्रा, बदरपुर से रामसिंह नेताजी, मटियामहल से शोएब इकबाल, चाँदनी चौक से प्रहलाद साहनी, हरि नगर से राजकुमारी ढिल्लन समेत अन्य नेता हैं। पार्टी के साथ इनकी भी प्रतिष्ठा दाँव पर है। दल बदलने के बाद चुनावी नतीजों से इनके आगे का राजनीतिक भविष्य तय होगा।
इस लिस्ट में कपिल मिश्रा का नाम भी आता है, जोकि आम आदमी पार्टी से विधायक रहे, लेकिन उन्होंने AAP का साथ छोड़ा और बीजेपी में शामिल हुए, फ़िर मॉडल टाउन से दिल्ली विधानसभा का टिकट भी हासिल किया। वहीं दूसरा नाम आता है अल्का लांबा का, जोकि AAP से निकलकर कॉन्ग्रेस में शामिल हुईं और चाँदनी चौक विधानसभा से टिकट भी हासिल किया। ऐसे ही कुछ अनिल वाजपेयी हैं, जोकि AAP को छोड़कर बीजेपी के टिकट से चुनावी मैदान में हैं।
वहीं टिकट कटने से नाराज AAP विधायक एनडी शर्मा भी हैं, जो इस बार बसपा से बदरपुर से चुनाव लड़े। कमांडो सुरेंद्र दिल्ली कैंट से एनसीपी के टिकट पर चुनाव लड़े। उनकी हार जीत आगे का राजनीतिक भविष्य तय होगा। हालाँकि यह सभी नेता अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। वहीं गौर करें तो हरियाणा विधानसभा चुनावों में जनता ने दल-बदलू नेताओं को महत्व नहीं दिया था, जिसमें सबसे अधिक बीजेपी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था।
दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणामों के बीच सबसे पहले कॉन्ग्रेस के नेता मैदान छोड़ते नजर आ रहे हैं। वोटिंग के परिणाम और रुझान आने के बाद दिल्ली में एक बार फिर आम आदमी पार्टी की सरकार बनने की संभावना देखी जा रही है।
मतगणना शुरू होने के बाद सबसे पहले कॉन्ग्रेस नेता मुकेश शर्मा ने ट्वीट के माध्यम से अपनी हार स्वीकार की है।उन्होंने ट्वीट में लिखा है- “मैं अपनी हार स्वीकार करते हुए, विकासपुरी विधानसभा क्षेत्र के सभी मतदाताओं व कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करता हूँ और आशा करता हूँ कि क्षेत्र का चौमुखी (चहुमुखी) विकास होगा। मैं भविष्य में भी दिल्ली, विकासपुरी व उत्तम नगर विधानसभा क्षेत्र के चौमुखी विकास के लिए लड़ाई लड़ता रहूँगा।”
मैं अपनी हार स्वीकार करते हुए, विकासपुरी विधानसभा क्षेत्र के सभी मतदाताओं व कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करता हूं और आशा करता हूं कि क्षेत्र का चौमुखी विकास होगा।
मैं भविष्य में भी दिल्ली, विकासपुरी व उत्तम नगर विधानसभा क्षेत्र के चौमुखी विकास के लिए लड़ाई लड़ता रहूंगा।
वोटों की गिनती शुरू होने के बाद से ही आम आदमी पार्टी बढ़त बनाए हुए आगे चल रही है, जबकि भाजपा फिलहाल दुसरे स्थान पर नजर आ रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अभी तक भाजपा और आम आदमी पार्टी 10-10 सीटों पर आगे चल रही हैं।
ज्ञात हो कि सभी एग्जिट पोल आम आदमी पार्टी की जीत की घोषणा कर चुके हैं। जबकि भाजपा नेता मनोज तिवारी और कपिल मिश्रा यह कहते हुए देखे गए कि चुनाव परिणाम के दिन सब्भी एग्जिट पोल झूठे साबित होंगे और भाजपा 48 सीटों पर कब्जा जमाने में सफल रहेगी।
इंग्लैंड में 23 वर्षीय महिला के साथ रेप का मामला सामने आया है। सईद अहमद और नजीरुल मियाँ ने नकली कैब ड्राइवर के साथ मिलकर रेप किया। अदालत में रेप और यौन उत्पीड़न के दोषी साबित होने के बाद दोषियों को कुल 23 साल की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने सईद अहमद को 11 साल की, जबकि नजीरुल मियाँ को 12 साल की सजा सुनाई है।
जानकारी के मुताबिक घटना इंग्लैंड के संडरलैंड का है। जहाँ पर पीड़िता के मोबाइल की बैट्री खत्म हो चुकी थी, जिसकी वजह से उसका फोन बंद हो गया था। उसने घर जाने के लिए लिफ्ट लेने का सोचा। तभी सईद अहमद और नजीरुल मियाँ उसके पास नकली कैब ड्राइव बनकर आए। तो पीड़िता ने उनसे घर छोड़ देने के लिए कहा। जिस पर दोनों तैयार हो गए और पीड़िता गाड़ी में बैठ गई।
गाड़ी अहमद चला रहा था। अहमद ने कुछ दूर तक तो सही रास्ते पर गाड़ी चलाई। इसके बाद उसने बीच रास्ते में गाड़ी को मोड़ दिया और सुनसान जगह पर ले गया। पीड़िता इससे पहले कि कुछ समझ पाती अहमद और मियाँ ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। इतना ही नहीं, जब महिला ने रोकने की कोशिश की और विरोध जताया तो उसने कहा, “अच्छी महिला बनो, जो कहते हैं करो।”
कोर्ट में पीड़िता की तरफ से दिए बयान में कहा गया कि वारदात का महिला के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है। वह इस घटना से इतना ज्यादा टूट चुकी है कि वो घर से बाहर निकलने से घबरा रही है और किसी भी अनजान आदमी से डरती है। उसका लोगों पर से भरोसा उठ गया है। कोर्ट में कहा गया कि घटना ने पीड़िता का जीवन तबाह कर दिया है। पीड़िता ने कोर्ट में दिए अपने एक बयान में कहा कि उस रात कार में आने का उसका फैसला उसके लिए जीवन भर का पछतावा है। पीड़िता ने कहा कि उस रात वो उनके लिए एक आसान विकल्प थी और उन्होंने उसका फायदा उठाया। वो कहती है कि जैसा जिंदगी वो जी रही है, वैसा किसी ने अपने बुरे से बुरे सपने में भी नहीं सोचा होगा।
वहीं अहमद की पार्टनर ने भी पीड़ित महिला से फेसबुक पर संपर्क किया और उसे इमोशनल ब्लैकमेल करने की कोशिश की। उसने पैसे के बदले आरोप वापस लेने पर मजबूर करने की कोशिश की। कोर्ट ने ऐसा करने पर महिला को 16 महीने कैद की सजा सुनाई है।
एग्जिट पोल और EVM की बहस के बाद आखिरकार 8 फरवरी को हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के फैसले का दिन आ चुका है। आज सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती शुरू होने के बाद शुरुआती नतीजों में आम आदमी पार्टी बढ़त के साथ आगे चल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, AAP अभी तक 51 सीट और बीजेपी 19 सीट पर आगे चल रही है। हालाँकि, चुनाव आयोग के आधिकारिक रुझानों के मुताबिक फिलहाल बीजेपी और आम आदमी पार्टी 10-10 सीट पर आगे चल रही हैं।
दिल्ली में किस की सरकार बनने जा रही है, यह दोपहर के बाद तक स्पष्ट हो जाएगा। हालाँकि, आम आदमी पार्टी के कार्यालय पर जश्न शुरू हो चुका है और भारी संख्या में कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय के बाहर जमा होने लगे हैं।
दिल्ली में हरिनगर विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी तजिंदर पाल सिंह बग्गा और मॉडल टाउन से भाजपा नेता कपिल मिश्रा आगे चल रहे हैं।
पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने 70 में से 67 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत वाली सरकार बनाने में कामयाब रही थी। इस बार के एक्जिट पोल की मानें तो इस बार भी दिल्ली में AAP की ही सरकार बननी तय है। लगभग सभी एक्ज़िट पोल में AAP को 50 से ज्यादा सीट बताई गईं हैं।
देर शाम यह खबर आई कि भाजपा ने अपने सारे सांसदों को कल संसद में उपस्थित रहने को कहा है और निर्देश दिया है कि वो सरकार के समर्थन में खड़े रहें। हालाँकि, इस ‘व्हिप’ में कहीं भी विषय का जिक्र नहीं है कि समर्थन आखिर किस बात का करना है। खबरों के मुताबिक यह कहा गया है कि कुछ अतिमहत्वपूर्ण मुद्दे कल संसद में उठाए जा सकते हैं, अतः सारे सांसदों को मंगलवार, 11 फरवरी, को राज्यसभा में उपस्थित रहना है।
BJP's letter states 'All BJP MPs of Rajya Sabha are informed that some very important Legislative work will be brought to the House on Tuesday, 11th February 2020, to be discussed and to be passed'. https://t.co/kQ03pFZ69k
इसके साथ ही अटकलबाज़ी का दौर शुरु हो गया और लोगों ने तमाम तरह की अटकलें लगानी शुरु कर दीं। ज्ञात हो कि कल दिल्ली विधानसभा चुनावों के परिणाम भी आने वाले हैं, अतः कल का दिन दिल्ली में वैसे भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन भाजपा की तरफ से आई इस खबर के कारण सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें हो रही हैं।
इन सबके बीच, ट्विटर पर एक कागज का प्रिंटआउट घूमता पाया गया जिसके निचले हिस्से में राज्यसभा में कुछ विधेयकों की प्रस्तुति की बात है। इसके ऊपरी भाग में पार्लियामेंट हाउस एनेक्स छपा हुआ है और नीचे कुछ संसदीय कागजात की बातें हैं। इसी पत्र के निचले हिस्से में राज्यसभा में प्रस्तुत होने वाले विधेयकों का भी जिक्र है।
ऐसे कुल छः विधेयक हैं, लेकिन एक विधेयक जो सबसे ज्यादा ध्यानाकर्षण करता है वो है तीसरे नंबर पर लिखा ‘द यूनिफॉर्म सिविल कोड ऑफ इंडिया बिल, 2020’। और पाँचवे नंबर पर संविधान संशोधन बिल का भी जिक्र है। हालाँकि, जिस बिल का जिक्र इस दस्तावेज में है, जो कि दिनांक 6 फरवरी का है, वो एक प्राइवेट मेंबर बिल है न कि सरकार द्वारा लाया जाने वाला बिल।
ट्विटर पर यह तस्वीर खूब घूम रही है
जब इसको ले कर सोशल मीडिया पर खूब हल्ला होने लगा तो हमने राज्यसभा की साइट पर जा कर देखा कि क्या वाकई ऐसी कोई बात लिस्ट की गई है? वहाँ ऐसा कुछ नहीं मिला। कल की लिस्टिंग में राज्यसभा की कार्यवाही में किसी भी ऐसे बिल के प्रस्तुत होने की बात नहीं लिखी हुई है।
11 फरवरी की राज्यसभा की कार्यवाही में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल का जिक्र नहीं है
यह कागज आधिकारिक दस्तावेज़ों को किसी अधिकारी तक पहुँचाने की बात करता है। 6 फरवरी के इस कागज में ऊपर में यह लिखा है कि ‘निम्नलिखित काग़ज़ात प्राप्त किए जाएँ’ और नीचे उनके नाम हैं। यह तय है कि यह कागज राज्यसभा के कल की कार्यवाही का बिलकुल नहीं है। यह भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा द्वारा लाए गए यूनिफार्म सिविल कोड ऑफ इंडिया बिल, 2020 की बात करता प्रतीत होता है। हमने राज्यसभा की साइट पर जा कर खोजा, तो इस बिल के बावत हुई कार्यवाही का भी जिक्र मिला।
लेकिन, भाजपा के व्हिप के मद्देनजर, हो सकता है कि कोई महत्वपूर्ण बिल कल सामने आए। CAA और NRC के मुद्दे पर छिटपुट आंदोलन झेलती सरकार क्या यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसा विधेयक लाएगी, यह एक बड़ा प्रश्न है। लेकिन, नई सरकार ने जिस तेजी से लगातार अपने मेनिफेस्टो में किए गए वादों पर कार्य किया है, असंभव तो कुछ भी नहीं लगता।
रवीश कुमार ने आज-कल लिखना बहुत कम कर दिया है। 4-5 दिन में 1 से 2 पोस्ट लिखे जा रहे हैं। प्राइम टाइम भी कम कर दिया है। वैसे जो भी लिखा है बकवास ही लिखा है। फिलहाल हम उनके दो प्राइम टाइम पर चर्चा करेंगे। पहला- प्रधानमंत्री के भाषण के ऊपर लिखे गए उनके पोस्ट और दूसरा, ‘शाहीन बाग से मुगल राज आ जाएगा क्या?’
रवीश कुमार ने प्रधानमंत्री के भाषण का हेडलाइन दिया- ‘तथ्यों और संदर्भों से जूझता प्रधानमंत्री का भाषण।’ नहीं रवीश जी, आप जूझ रहे हैं तथ्यों और संदर्भों से। आपने प्रधानमंत्री के भाषण को शब्दश: लिया है। उन्होंने शाहीन बाग के धरने को अहिंसापूर्ण बताया। स्वास्तिक जलाना, गाय को काट कर कमल पर दिखाना, आजादी के नारे, तेरा बाप भी देगा आजादी, खिलाफत की बातें, बुर्के में हिंदू औरतों को दिखाना, ये भी एक तरह की हिंसा है। इसे वैचारिक हिंसा कहते हैं। जिसको आप जैसे वामपंथी समय-समय पर कोट करते रहते हैं।