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राहुल गाँधी ने कहा था- मंदिर जाने वाले लड़की छेड़ते हैं, कॉन्ग्रेसी मंत्री ने कहा- तीर्थ पर घूमने जाते हैं बुजुर्ग

मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार ने 2012 में तीर्थ दर्शन योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत बुजुर्गों को सरकारी खर्चे पर धार्मिक यात्राएँ कराई जाती है। लेकिन, कमलनाथ के नेतृत्व में चल ही कॉन्ग्रेस की मौजूदा सरकार ने हजारों बुजुर्गों की यात्रा को अचानक रद्द कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बुजुर्गों को इस योजना के तहत वैष्णो देवी, रामेश्वरम्, तिरुपति, काशी और द्वारका धाम की यात्रा कराने का कार्यक्रम बना था। लेकिन, दो दिन पहले ट्रेनों को निरस्त कर दिया गया। इनमें 15 फरवरी को भोपाल से वैष्णोदेवी जाने वाली तीर्थयात्रियों की विशेष ट्रेन भी शामिल है।

कमलनाथ सरकार के एक मंत्री ने इस योजना पर सवाल खड़े करते हुए इसे बंद करने की वकालत की है। मंत्री ने कहा है कि सरकार का काम लोगों को तीर्थ यात्रा कराना नहीं है। इतना ही नहीं मंत्री महोदय के अनुसार आईफा अवॉर्ड जैसे आयोजनों से प्रदेश का विकास होगा।

गौरतलब है कि तीर्थयात्रा के लिए बुक की गई पाँच ट्रेनों में से पहली ट्रेन को 15 फरवरी को 800 यात्रियों के साथ भोपाल से वैष्णो देवी के लिए रवाना होनी थी। इसके लिए चुने गए यात्रियों ने सामान वगैरह की पेकिंग के साथ सभी जरूरी तैयारियाँ कर ली थी। लेकिन 12 फरवरी को अचानक सरकार ने आख़िरी समय में इस यात्रा को रद्द कर दिया। इसके बाद से तीर्थ यात्रा को लेकर उत्साहित बुजुर्ग मायूस हैं।

कमलनाथ सरकार के सहकारिता मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता गोविंद सिंह ने इस योजना को ही फालतू बताया है। उन्होंने तीर्थ स्थल जाने वालों के श्रद्धा पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा, “तीर्थ दर्शन योजना में लोग भक्ति भाव से नहीं, बल्कि घूमने-फिरने के लिए जाते हैं। खुद के मेहनत के रुपयों से भगवान के दर पर जाएँगे तो उनके जीवन में खुशहाली आएगी। ऐसी योजनाएँ विकास के बजाय सिर्फ वोटरों को लुभाने के लिए शुरू की गई हैं। अब उन्हें बंद किया जाना चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी भी कह चुके हैं कि मंदिर जाने वाले लोग ही छेड़खानी करते हैं। राहुल ने यह बयान 2014 में दिया था। दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में राजीव गॉंधी की 70वीं जयंती पर महिला कॉन्ग्रेस के अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, “जो लोग मंदिर जाते हैं, मंदिर में जाकर मत्था टेकते हैं और जो आपको मॉं-बहन कहते हैं वही लोग आपको बस में छेड़ते हैं।”

साथ ही मंत्री गोविंद सिंह ने आईफा अवॉर्ड पर खर्च होने वाली राशि को लेकर कहा कि इसके जरिए प्रदेश के पर्यटन स्थलों को एक अलग पहचान मिलेगी और हजारों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। आईफा अवॉर्ड प्रदेश के विकास के लिए जरूरी है।

ट्रेनें रद्द किए जाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ सरकार की आलोचना की है। शिवराज सिंह ने ट्वीट कर कहा है, “भावनात्मक संबंधों को समझना कॉन्ग्रेस के बस की बात नहीं है। बुज़ुर्गों को तीर्थयात्रा कराना पवित्र और पुनीत कार्य है, ऐसे अच्छे कार्यों को कॉन्ग्रेस सरकार बंद कर रही है।”

तीर्थ दर्शन योजना के तहत 4000 बुजुर्गों को वैष्णो देवी, काशी, द्वारका और रामेश्वरम की यात्रा करनी थी। ऐसा पहली बार हुआ है जब इस यात्रा को आख़िरी समय में रद्द किया गया है। इस यात्रा को रद्द करने के पीछे राज्य के लगातार बढ़ते वित्तीय संकट को माना जा रहा है। साथ ही सरकार IRCTC के 17 करोड़ रुपए का भुगतान अभी तक नहीं कर पाई है।

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सिर्फ टेलिकॉम ही नहीं, इन सरकारी कंपनियों को भी चुकाना होगा AGR बकाया: SC की फटकार के बाद सब लाइन में

सुप्रीम कोर्ट ने AGR बकाए (Adjusted Gross Revenue dues) का भुगतान करने के आदेश का अनुपालन न करने पर शुक्रवार (फरवरी 14, 2020) को दूरसंचार कंपनियों को फटकार लगाई। उच्चतम न्यायालय ने दूरसंचार एवं अन्य कंपनियों के निदेशकों, प्रबंध निदेशकों से यह बताने को कहा कि AGR बकाए के भुगतान के आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने को लेकर उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई क्यों नहीं की जाए?

इसके बाद दूरसंचार विभाग ने शुक्रवार की आधी रात को निजी दूरसंचार कंपनियों के लिए समय सीमा तय की और साथ ही कुछ बड़े पब्लिक सेक्टरों को भी सरकार को 4 लाख करोड़ रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है। जानकारी के मुताबिक इन टेलीकॉम कंपनियों ने पिछले चार महीनों से एक पैसा भी नहीं चुकाया था। जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कंपनी के साथ-साथ उनके निदेशकों को अवमानना नोटिस जारी किया और सुनवाई की अगली तारीख 17 मार्च तय की। इस दौरान बेंच ने कहा, “उस समय तक राशि निश्चित रूप से जमा हो जानी चाहिए, वरना फिर हम आपको दिखाएँगे कि हम कितने कठोर हो सकते हैं।”

सुप्रीम कोर्ट की इस फटकार ने कुछ घंटों के भीतर अपना असर दिखा दिया। पब्लिक टेलीकॉम कंपनियों ने जल्द ही रकम चुकाने की बात कही। एयरटेल, जिसके ऊपर 35,000 करोड़ रुपए का बकाया है, उसने कहा कि वो 20 फरवरी तक 10,000 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान कर देगी और बाकी की बकाया राशि कोर्ट की अगली सुनवाई से पहले यानी कि 17 मार्च से पहले कर देगी। इसके साथ ही संभावना जताई जा रही है कि टाटा भी कोर्ट की अगली सुनवाई से पहले बकाया राशि 14,000 करोड़ रुपए चुका देगी। हालाँकि घाटे में चल रही टाटा टेलीसर्विसेज को 13,823 करोड़ रुपए के AGR बकाया के भुगतान के लिए पेरेंट कंपनी टाटा संस पर निर्भर रहना होगा। बता दें कि टाटा ने अपना टेलीकॉम बिजनेस एयरटेल को बेच दिया है।

वहीं वोडाफोन आइडिया पर 53,000 करोड़ रुपए का बकाया है। बताया जा रहा है कि कंपनी के मालिक कुमार मंगलम बिरला ने दूरसंचार मंत्री के सामने इस मुद्दे को उठाया था। मगर अब इस बात में संशय है कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सरकार इसमें कोई दखलअंदाज़ी करेगी या नहीं। 

न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कड़ी प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा कि यह दूरसंचार विभाग के ‘डेस्क अधिकारी’ का दुस्साहस है कि उसने न्यायालय के आदेश को काटने की कोशिश की। न्यायालय ने भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों को सरकार का सांविधिक बकाया 23 जनवरी तक चुकाने का आदेश दिया था। लेकिन डेस्क अधिकारी ने 23 जनवरी को ही उपरोक्त आदेश पारित किया, जिसे लेकर न्यायालय ने शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जाहिर की। इसके साथ ही अधिकारी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने की भी बात कही गई।

सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने फटकार लगाते हुए कहा, “क्या यह सर्वोच्च न्यायालय के लिए सम्मान है? एक डेस्क अधिकारी कैसे कह सकता है कि हमारे आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई? अगर आपके मन में कोर्ट के आदेश के प्रति यही सम्मान है तो फिर बंद कर दीजिए सुप्रीम कोर्ट… देश में कानून का कोई राज नहीं है। इससे तो अच्छा है कि देश ही छोड़ दिया जाए। ऐसा लगता है कि मुझे इस देश में इस तरह काम नहीं करना चाहिए। मैं ये बातें जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ। क्या सुप्रीम कोर्ट की कोई वैल्यू नहीं है? ये मनी पावर का परिणाम है। ये इस देश में क्या हो रहा है?”

आगे बेंच ने सॉलिसीटर तुषार मेहता से कहा, “वह (डीओटी अधिकारी) कहते हैं कि अगले आदेश तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाएगी। उसने हमारे आदेश को रद्द कर दिया है। क्या आपने उसे उस आदेश को वापस लेने के लिए कहा है? इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है और हम इस तरह से कार्य नहीं कर सकते हैं।”

जिसके बाद तुषार मेहता ने अदालत से माफी माँगी और आश्वासन दिया कि आदेश को वापस ले लिया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद शाम में दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम और पब्लिक सेक्टर कंपनियों के दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। बता दें कि पब्लिक सेक्टर की जिन कंपनियों पर भारी मात्रा में बकाया है, उनमें गैस ऑथोरिटी ऑफ इंडिया, ऑयल इंडिया, पावरग्रिड कॉर्पोरेशन और दिल्ली मेट्रो शामिल हैं। बता दें कि GAIL के ऊपर 1,72,656 करोड़ रुपए का बकाया है, तो वहीं ऑयल इंडिया के ऊपर 48,489 करोड़ रुपए का बकाया है। इसके साथ ही पॉवरग्रिड कॉर्पोरेशन को 22,063 करोड़ राशि का भुगतान करना होगा।

‘मैं कसम खाती हूँ कि मैं प्रेम में नहीं पड़ूँगी और ना ही प्रेम विवाह करूँगी’ – पंकजा मुंडे ने जताई आपत्ति, देखें Video

वैलेंटाइन डे यानी 14 फरवरी को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के महिला व कला महाविद्यालय की छात्राओं ने एक बेतुकी शपथ ली। वैलेंटाइन डे के दिन छात्राओं ने अपने प्रोफेसर के सामने यह शपथ ली कि वह किसी लड़के से प्रेम नहीं करेंगी। इसके साथ ही वह प्रेम विवाह भी नहीं करेंगी।

छात्राओं को ये शपथ उस वक्त दिलाई गई, जब वो एनएसएस कैंप में हिस्सा लेने के लिए गई थी। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि एक पुरुष और कुछ महिला टीचर छात्राओं को लव मैरिज न करने की शपथ दिला रहे हैं। बता दें कि इस कॉलेज को विदर्भ यूथ वेलफ़ेयर सोसायटी नाम की संस्था द्वारा चलाया जाता है। इसके स्थापना कॉन्ग्रेस नेता और राज्य सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री रहे स्वर्गीय राम मेघे ने की थी।

स्कूल की इस हरकत के खिलाफ बीजेपी नेता और राज्य की पूर्व महिला एवं बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने ट्वीट कर पूछा कि सिर्फ लड़कियाँ ही क्यों इस तरह की शपथ लेंगी? उन्होंने लिखा, “ये निहायत ही बकवास भरा है। चिंतूर के एक स्कूल में छात्राओं से कहा जा रहा है वो किसी से प्यार न करें और लव मैरिज भी न करें। ये कसम सिर्फ छात्राएँ ही क्यों लें?”

पंकजा ने आगे कहा, “लड़कियों के बजाय लड़कों को शपथ दिलाएँ कि वो एकतरफा प्यार में लड़की पर तेजाब नहीं फेंकेंगे और उसे जिंदा नहीं जलाएँगे। उन्हें शपथ लेना चाहिए कि वो कभी भी लड़कियों को गंदी नजर से नहीं देखेंगे और वो कभी भी किसी के साथ ऐसा नहीं होने देंगे।”

बता दें कि शपथ ग्रहण करते वक्त छात्राओं ने कहा, “मैं कसम खाती हूँ कि मैं अपने माता-पिता में पूरा विश्वास रखूँगी। मैं प्रेम में नहीं पड़ूँगी और ना ही प्रेम विवाह करूँगी। इसके साथ ही मैं दहेज के लिए भी शादी नहीं करूँगी, यदि मेरे माता-पिता सामाजिक बंधनों के चलते मेरी शादी में दहेज देते हैं तो भविष्य में मैं जब माँ बनूँगी तो ना तो मैं अपने बेटे या बेटी की शादी में दहेज दूँगी और ना ही लूँगी। मैं यह शपथ एक मजबूत और स्वस्थ भारत के लिए ले रही हूँ।”

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पूर्व IAS शाह फैसल पर और कसा शिकंजा, अब PSA के तहत मुकदमा दर्ज

पूर्व IAS अधिकारी रहे शाह फैसल पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत कार्रवाई की है। सरकार द्वारा राज्य से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद 14 अगस्त को पुलिस ने शाह फैसल को दिल्ली के एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। इसके बाद फैसल को श्रीनगर के एमएलए हॉस्टल में रखा गया था।

पूर्व IAS शाह फैसल पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अब PSA लगाया है। इसके तहत शाह फैसल के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालाँकि अभी तक यह साफ़ नहीं हुआ है कि फैसल को कहाँ रखा जाएगा। बता दें कि IAS की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए शाह फैसल ने जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) का गठन किया, जिसके वह अध्यक्ष भी हैं।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद फैसल ने एक ट्वीट किया था, “राजनीतिक अधिकारों को फिर से पाने के लिए कश्मीर को लंबे, निरंतर और अहिंसक राजनीतिक आंदोलन की जरूरत है।” इसके अलावा शाह फैसल ने एक फेसबुक पोस्ट में केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए लिखा था, “घाटी में पुलिस की कार्रवाई से करीब 80 लाख लोग बंदी के समान रहने को मजबूर हो गए हैं।”

शाह फैसल से पहले राज्य के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, पीडीपी नेता और पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती, अली मोहम्मद सागर, सरताज मदनी, हिलाल लोन और नईम अख्तर पर भी पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। आपको बता दें कि पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म कर देने के बाद, वहाँ के हालातों को संभालने के लिए घाटी के तमाम दिग्गज नेताओं को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया गया था।

आपको बता दें कि पब्लिक सेफ्टी एक्ट जम्मू कश्मीर का एक विशेष कानून है। इसे 1978 में फारूक अब्दुल्ला के पिता शेख अब्दुल्ला ने ही राज्य में लागू किया था। इस कानून के तहत किसी भी शख्स को अचानक से हिरासत में लिया जा सकता है। इतना ही नहीं इस कानून के प्रावधानों के मुताबिक राज्य सरकार किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ बिना केस चलाए उसे दो साल तक जेल में रख सकती है।

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हिंदू रहीं महिला के शव को दफनाने जा रहा था ईसाई परिवार, गिरिराज सिंह ने हाथ जोड़कर कराया दाह संस्‍कार

केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय से बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र में हिंदू से ईसाई बने परिवार की महिला का अंतिम संस्‍कार हिंदू रीति-रिवाज से कराकर एक विवाद का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान कराया। इस दौरान गिर‍िराज सिंह ने हाथ जोड़कर महिला के परिवार से अपील की कि वे हिंदू रही महिला का दाह संस्‍कार करें। केंद्रीय मंत्री की अपील को परिवार ने मान लिया और महिला का सिमरिया घाट पर दाह संस्‍कार किया गया।

इस मौके पर मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि कोई लोभ देकर धर्म का परिवर्तन न करे। उन्‍होंने कहा, “कोई लोभ देकर किसी का धर्म परिवर्तन न करे। मैं हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि धर्म से बड़ा कोई चीज नहीं होता है। किसी धर्म में चचेरे भाई-बहन में शादी होता है। मगर हमारे धर्म में ऐसा नहीं होता है… यही मेरा धर्म है। आदमी हम भी हैं और वे भी हैं। हम अपने धर्म की रक्षा करें। मैं आप लोगों से अपील करता हूँ कि धर्म से बड़ा कुछ नहीं है।”

दरअसल, एक हिंदू महिला के शव को उसके परिवार वाले ईसाई धर्म के रीति रिवाज मुताबिक दफनाने ले जा रहे थे। इसकी खबर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को लग गई। बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुँच गए और महिला को दफनाने का विरोध किया। उन्होंने महिला का दाह-संस्कार हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार करने की विनती की, लेकिन वे नहीं माने। जिसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता गिर‍िराज सिंह के पास गए। गिरिराज सिंह के समझाने पर महिला के परिवार वाले मान गए और शव का दाह संस्‍कार किया गया। 

इस दौरान गिरिराज सिंह ने धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्त कानून बनाने की माँग की, ताकि प्रलोभन देकर किसी का धर्म परिवर्तन न किया जा सके। उन्होंने दावा किया कि बिहार में हिंदुओं को जबरन ईसाई बनाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों खबर आई थी कि बिहार के नवादा जिले के 15 हिंदू परिवारों के 50 सदस्यों ने धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपना लिया है। नवादा के ताराटाड टोला में अब हिदू धर्म को मानने वाले महज तीन परिवार ही बचे हैं, लेकिन उन पर भी धर्मातरण के लिए दबाव है।

बिहार में धर्म परिवर्तन का खेल: नवादा में 15 परिवार के 50 सदस्य बने ईसाई, खौफ में बाकी बचे 3 हिंदू परिवार

प्यार के लिए खतना तक कराया, दर्द सहे: ईसाई युवक को मुस्लिम प्रेमिका के अब्बा ने पीट कर भगाया

ईसाई नहीं बनने की सजा… 34000 वैष्णव हिंदुओं को अपने ही देश में 23 साल रहना पड़ा शरणार्थी बन कर!

पिछली सीट पर अकेली लड़की, कैब ड्राइवर गाड़ी चलाते-चलाते करने लगा अश्लील हरकत: पुलिस ने किया अरेस्ट

लड़कियाँ, महिलाएँ कहाँ सुरक्षित हैं? घर में, दफ्तर में, स्कूल-कॉलेज में, ट्रेन या बस में या फिर कैब में? शायद कहीं नहीं! हर जगह इन्हें सतर्क रहने की जरूरत है। भीड़-भाड़ से बचने के लिए बुक किए गए कैब में तो खासकर। क्योंकि यह पहला मामला नहीं, जब किसी लड़की को देखकर कैब ड्राइवर ने अश्लील हरकत की हो। ऐसा अक्सर कैब में सवार लड़कियों के साथ हुआ है, हो ही रहा है।

गुड़गाँव की एक लड़की के साथ कुछ ऐसा ही। लेकिन उन्होंने तत्काल उस कैब ड्राइवर के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर आरोपित कैब ड्राइवर को गिरफ्तार भी कर लिया। साथ ही पुलिस ने गाड़ी को भी जब्त कर लिया है। आरोपित की पहचान 38 वर्षीय कैब चालक सतीश शर्मा के रूप में हुई है।

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक गुड़गाँव की एक वकील युवती ने अपने मोबाइल से गुड़गाँव से दिल्ली कोर्ट के लिए कैब बुक की। जब कैब चल पड़ी तो कैब ड्राइवर ने गाड़ी में लगे शीशे की मदद से सवार युवती को घूरना शुरू कर दिया। फिर कुछ देर बाद वो अश्लील हरकतें (हस्तमैथुन) भी करने लगा। कैब ड्राइवर की इन हरकतों को देख युवती दंग रह गई। हालाँकि युवती उस समय ड्राइवर की सारी हरकतों को देखती रही और ड्राइवर को कुछ नहीं बोला, लेकिन कैब से उतरते ही युवती ने पुलिस को कॉल कर सारी बातें बताई।

इसके बाद हरकत में आई पुलिस ने गाड़ी नंबर और बुकिंग के रिकॉर्ड के जरिए आरोपित के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर लिया। इतना ही नहीं पुलिस ने आरोपित को बीते शुक्रवार को ही गिरफ्तार भी कर लिया।

नई दिल्ली के अडिशनल डीसीपी दीपक कुमार यादव ने बताया कि पेशे से वकील और गुड़गाँव में रहने वाली 25 साल की एक युवती ने गुरुवार दोपहर दिल्ली हाई कोर्ट आने के लिए मोबाइल से कैब बुक कराई थी। युवती ने पुलिस को यह भी बताया कि ड्राइवर ने उसके साथ को छेड़खानी नहीं की।

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वेलेंटाइन-डे पर भिड़े कॉन्ग्रेसी और वामपंथी, जमकर चले लाठी-डंडे: केरल में लॉ कॉलेज के 20 छात्र घायल

केरल के एक लॉ कॉलेज में वेलेंटाइन-डे पर आयोजित कार्यक्रमों को लेकर दो गुट आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ गया कि देखते ही देखते दोने गुट हिंसक हो गए। इस हिंसक लड़ाई में 20 छात्रों के घायल होने की खबर है। इनमें से 12 घायल छात्रों को शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। साथ ही कानून व्यवस्था को संभालने के लिए कॉलेज में परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

घटना की सामने आई एक वीडियो में कॉलेज परिसर के अंदर मौजूद सैकड़ों छात्रों को आपस में मारते-पीटते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में दिख रहा है कि छात्र एक-दूसरे का कॉलर पकड़कर लात-घूँसे और लाठी-डंडे बरसाने में लगे हुए हैं। वहीं कुछ छात्र पीछे की ओर से पत्थर फेंकते भी देखे जा सकते हैं। नज़दीक खड़ी कॉलेज की छात्राएँ घटना को देख चीखती-चिल्लाती और वहाँ से दौड़ती हुई नजर आ रही हैं।

यह दृश्य किसी फिल्मी सीन से कम नहीं है। लेकिन यह वास्तव में हुआ है। शुक्रवार को केरल के एर्नाकुलम के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में कॉलेज यूनियन के सदस्यों ने वेलेंटाइन-डे पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किय था, जिसमें SFI के सदस्य भी शामिल थे।

इसी बीच KSU (कॉन्ग्रेस की छात्र इकाई) के सदस्यों ने भी शुक्रवार को ही कॉलेज परिसर के अंदर अलग से वेलेंटाइन-डे पर एक दूसरा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया। इसे लेकर SFI सदस्यों ने सवाल खड़ा किया कि जब छात्र संघ पूरे कॉलेज के लिए कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, तो कैंपस में दूसरा कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता क्याें? इसके बाद दोनों पक्षों में पैदा हुआ मतभेद और यह बदल गया हिंसक लड़ाई में।

खबर के मुताबिक इस घटना में 20 छात्र घायल हुए हैं। गंभीर रूप से घायल 12 छात्रों में से KSU के आठ जबकि SFI के चार सदस्य शामिल हैं। इस घटना के बाद शहर की पुलिस ने कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कॉलेज परिसर में और आसपास के इलाके में बड़ी संख्य में पुलिस बल तैनात कर दिया है। हालाँकि इस मामले में अभी तक पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज कराने जैसी खबर सामने नहीं आई है।

…वो मामला, जिससे ढाई महीने पुरानी ठाकरे सरकार संकट में: NCP और कॉन्ग्रेस के सीनियर नेता हुए नाराज

एल्गार परिषद केस को लेकर राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस (NCP) के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। बता दें कि इस मामले की जाँच अब केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है, जिसको लेकर शरद पवार ने उद्धव ठाकरे सरकार की आलोचना की है। शरद पवार का कहना है कि कानून व्यवस्था का मामला राज्य का है और राज्य सरकार को केंद्र के ऐसे निर्णय का समर्थन नहीं करना चाहिए।

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में शरद पवार ने इस मसले पर खुलकर बात की। उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जाँच को राज्य से वापस अपने हाथ में लेने का आरोप लगाया। शरद पवार का कहना है कि भीमा कोरेगाँव मामले में महाराष्ट्र सरकार कुछ एक्शन लेने वाली थी, इसलिए केंद्र ने एल्गार परिषद के मामले को अपने हाथ में ले लिया।

एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा, “मामले की जाँच NIA को सौंपकर केंद्र सरकार ने ठीक नहीं किया और इससे भी ज्यादा गलत बात यह हुई कि राज्य सरकार ने इसका समर्थन किया।” गौरतलब है कि एनसीपी, शिवसेना के नेतृत्व वाले महा विकास आघाड़ी सरकार की सहयोगी है और इसके नेता अनिल देशमुख राज्य के गृहमंत्री हैं।

बता दें कि शरद पवार इस मामले की स्वतंत्र जाँच की माँग उठा चुके थे। शिवसेना के साथ सरकार बनने के बाद इसकी संभावना भी दिखने लगी थी, मगर अचानक से महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में यू टर्न ले लिया और पुणे की कोर्ट ने मामला NIA कोर्ट के सुपुर्द कर दिया। इस कदम के बाद अब गृह मंत्री अनिल देशमुख कह रहे हैं कि इस पर आखिरी फैसला मुख्यमंत्री का ही होता है। हालाँकि एनसीपी प्रमुख इसको लेकर काफी खफा हो गए हैं।

वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता भी एल्गार परिषद केस की जाँच को लेकर अपने आलाकमान पर निशाना साध रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम पहले NPR को लेकर ट्वीट करते हुए पार्टी में कनफ्यूज बताया था और फिर उसके बाद उन्होंने एल्गार परिषद केस को लेकर भी इसी तरह की कनफ्यूजन की बात कही है। उन्होंने कहा कि इस को एनसीपी SIT से जाँच करवाना चाहती है। केंद्र सरकार ने इसे NIA को सौंप दी है और महाराष्ट्र के सीएम (शिवसेना) भी बीजेपी के लाइन पर चलते हुए इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। क्या दिल्ली में कॉन्ग्रेस नेतृत्व को इसकी जानकारी है?

संजय निरुपम की बातों से साफ मतलब निकलता है कि अगर उन्हें इसकी जानकारी नहीं है तो क्यों नहीं है? क्या वे सत्ता में नहीं हैं? या फिर उनका इस गठबंधन में कोई अस्तित्व ही नहीं है कि वो इन्हें कुछ बताना या फिर इस पर सलाह-मशविरा करना जरूरी नहीं समझते? और यदि कॉन्ग्रेस को इस बात की जानकारी है फिर वो गठबंधन में क्या कर रहे हैं? एक तरफ वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम NPR का विरोध करने की बात कह रहे हैं और महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने एक मई से 15 जून के बीच NPR कराने का ऐलान किया है। या तो पार्टी टोटल कनफ्यूज है या फिर अब इनकी प्रासंगिकता ही इतनी रह गई है।

कभी नहीं कहा कि हम एक नहीं हो सकते: BJP से हाथ मिलाने पर महाराष्ट्र के CM उद्धव ठाकरे

CM पद से इस्तीफा दे देंगे उद्धव ठाकरे: महाराष्ट्र गठबंधन में बढ़ती कलह के बीच कॉन्ग्रेस नेता का बयान

उद्धव ठाकरे सरकार में खींचतान शुरू: शिवसेना के मंत्री अब्दुल सत्तार ने दिया इस्तीफ़ा

नाम बदल कर प्यार, धर्म परिवर्तन के बाद निकाह, फिर खिलाया गोमांस: शिमला से दिल्ली तक हिंदू लड़की का दर्द

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में धर्म परिवर्तन कराकर जबरन निकाह करने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक एक मुस्लिम लड़का हिंदू लड़की को नौकरी और शादी का झाँसा देकर दिल्ली ले गया। लड़की ने पुलिस को इसकी शिकायत करते हुए कहा कि लड़के ने उसका धर्म परिवर्तन कराकर जबरन उसके साथ निकाह किया। 

लड़की ने आरोप लगाया कि लड़के ने उससे अपना धर्म छुपाया था। दिल्ली ले जाने के बाद लड़के ने बताया कि वह पहले से ही शादीशुदा है और दो बच्चों का बाप है, साथ ही मुस्लिम धर्म का है। यह सुनकर लड़की ने शादी से मना कर दिया। जिसके बाद लड़के ने युवती का जबरन धर्म परिवर्तन करवा कर जोर-जबरदस्ती के साथ निकाह कर लिया। इस दौरान लड़के और उसकी बहन ने लड़की से मारपीट भी की। लड़के का नाम शामी बताया जा रहा है। 

इतना ही नहीं शामी के परिवारवालों ने पीड़िता को गोमांस भी खिलाया और औलाद प्राप्ति की नीयत से एक दिन के लिए कब्रिस्तान में भी रखा। हालाँकि पीड़िता 7 फरवरी को जैसे-तैसे लड़के के चंगुल से भाग कर शिमला अपने माता-पिता के पास पहुँची और लड़के के खिलाफ शिमला डीसी कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है।

वहीं, मामला सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद लड़की के साथ खड़ा हो गया है और मुस्लिम लड़के के खिलाफ कड़ी कारवाई करने की माँग की है। विश्व हिंदू परिषद के जिला संगठन मंत्री कुशल चंद ने कहा कि प्रदेश में बाहरी राज्यों से लोग बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन के रह रहे हैं, जो इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में दलित, महिला या नाबालिग का जबरन धर्मांतरण कराने पर 2 से 7 साल तक की कैद की सजा का प्रावधान है। अगस्त 2019 में यह कानून लाया गया। इस कानून के मुताबिक अगर कोई शख्स अपना मजहब बदलना चाहता है तो उसे कम से कम एक महीने पहले जिलाधिकारी को लिखकर देना होगा। उसे यह बताना होगा कि वह स्वेच्छा से ऐसा कर रहा है। धर्मांतरण कराने वाले पुरोहित/पादरी या किसी धर्माचार्य को भी एक महीने पहले इसकी सूचना देनी होगी।

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‘माफ़ कर दो, हम लोन माफ़ी का राहुल गाँधी वाला वादा पूरा नहीं कर पाए’

किसानों की कर्ज माफ़ी का वायदा न पूरा कर सकने के लिए कमलनाथ सरकार में मंत्री गोविन्द सिंह ने आम जनता से माफ़ी माँगी है। 2018 में हुए मध्य प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान तब के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने सरकार बनने के 10 दिन के भीतर किसानों के 2 लाख रुपए तक के कर्ज को माफ़ करने का वादा किया था। उन्होंने तब यह भी कहा था कि ऐसा न कर पाने की स्थिति में वो अपने मुख्यमंत्री को बदले देंगे।

सामान्य प्रशासन मंत्री गोविन्द सिंह ने राहुल गाँधी के इसी वादे को याद करते हुए, इसके पूरे न होने पर जनता से माफ़ी माँगी। हालाँकि उन्होंने इसके लिए प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा कि पिछली सरकार हमारे ऊपर 14,000 करोड़ रुपए का कर्जा छोड़ गई है, जिस कारण से हमारी कमलनाथ सरकार वित्तीय दबावों से जूझ रही है।

तमाम जतन के बाद मध्य प्रदेश में वापसी कर पाई कॉन्ग्रेस ने कमलनाथ के नेतृत्व में पहले चरण में कुल 7,154 करोड़ तथा दिसंबर 2019 लोन माफ़ी के दूसरे चरण में 11,675 करोड़ रुपए की कर्ज माफ़ी की गई, जिसमें से ज्यादातर किसानों पर कर्ज 50,000 रुपए से कम था जबकि वादा 2 लाख रुपए तक के कर्ज को माफ़ करने का किया गया था।

कॉन्ग्रेस सरकार की इस कर्जमाफी पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस सरकार बनने के साल भर से ज्यादा होने के बावजूद भी अब तक राहुल गाँधी द्वारा किया गया कर्जमाफी का वादा आधा ही पूरा हो सका है।