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‘पीके’ के मीडिया मैनेजमेंट से उपजे दिल्ली के Exit Polls?: उनकी ही कोर टीम के सदस्य का बड़ा खुलासा

दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रचार का सारा दारोमदार उन्हीं की कम्पनी पर था। उन्होंने ख़ुद व्यक्तिगत रूप से परदे के पीछे से कमान संभाल रखी थी। मोदी की लोकप्रियता के कारण चुनावी गणितज्ञ का तमगा पाने वाले किशोर ने मोदी को धोखा देकर 2015 में नीतीश-लालू गठबंधन का साथ दिया था। हालिया दिल्ली चुनाव में उनके द्वारा मीडिया को मैनेज करने की ख़बर आई। प्रेस क्लब में हुई बैठक में एक-एक पत्रकार को समझाया गया कि माहौल कैसे बनाना है।

मीडिया संस्थान ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ के संपादक ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने प्रशांत किशोर की कोर टीम के ही एक सदस्य से बातचीत की। बातचीत के दौरान पता चला कि इस बार के एग्जिट पोल्स भीषण तरीके से ग़लत होने वाले हैं। ऐसा ख़ुद दिल्ली चुनाव की कमान संभाल रहे प्रशांत किशोर की कोर टीम के सदस्य ने कहा। हालाँकि, पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने उक्त व्यक्ति का नाम जाहिर करने से इनकार कर दिया। लेकिन, इससे कई सवाल उभर कर आते हैं? क्या प्रशांत किशोर ने जनता के बीच मेहनत करने से ज्यादा मीडिया में हाइप बनाने में सारा जोर लगाया?

2014 में माहौल ही ऐसा था और नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता ही इतनी थी कि उन्हें सत्ता मिली। ज्ञात हो कि केंद्र में होने वाले चुनावों में उनकी लोकप्रियता बढ़ी ही है, घटी नहीं है। इसके बाद प्रशांत किशोर बिहार पहुँचे। मीडिया ने ऐसा प्रचारित किया कि वो राजनीति के ‘चाणक्य’ हो गए हैं और उनसे बड़ा चुनावी रणनीतिकार कोई है ही नहीं। बिहार में लालू-नीतीश की जीत ने मीडिया को इस नैरेटिव को हवा देने में और मदद की। बिहार का समीकरण सीधा है। अगर दो प्रमुख दल मिल जाएँ तो वहाँ सरकार बनने में दिक्कत नहीं आती। राज्य के दो सबसे बड़े जनाधार वाली पार्टियाँ मिल गईं और क्रेडिट प्रशांत ने लूटा।

पंजाब में उन्होंने कॉन्ग्रेस के लिए चुनाव प्रचार किया। बादल परिवार के ख़िलाफ़ माहौल और अकाली-भाजपा सरकार की एंटी-इंकम्बेंसी का उन्होंने ख़ूब फायदा उठाया। कॉन्ग्रेस की जीत की सम्भावना पहले से ही जताई जा रही थी लेकिन प्रशांत किशोर ने फिर लहरिया लूटने की कोशिश की। मीडिया ने फिर उनका साथ दिया। आंध्र प्रदेश में किसे नहीं पता था कि जगनमोहन रेड्डी की सरकार आने वाली है? उनकी बड़ी जीत हुई और प्रशांत किशोर फिर से ख़ुद को बड़ा ‘रणनीतिकार’ साबित करने में जुट गए। श्रेय लेने के लिए वो हर उस जगह गए, जहाँ माहौल अनुरूप था।

प्रशांत किशोर ने क्या आम आदमी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए अपने हिसाब से एग्जिट पोल्स तैयार किए? क्या मीडिया ने वही किया जो ‘सेटिंग-गेटिंग’ के तहत उन्हें पाठ पढ़ाया गया? जिस तरह से केजरीवाल मीडिया में रह-रह कर मोदी के मुकाबले खड़े किए जाते हैं, उनके प्रति मीडिया के एक बड़े वर्ग की वफादारी छिपी नहीं है। ऐसे में, सवाल तो पूछे जाएँगे। ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ के सम्पादक ने जो खुलासा किया है, उसे आधार बना कर ऐसे कई सवाल पूछे जा सकते हैं।

‘EVM अभी प्रेग्नेंट, डिलीवरी नॉर्मल होगी तो आम आदमी पार्टी ऑपरेशन हुआ तो भाजपा’

दिल्ली में शनिवार को विधानसभा चुनाव 2020 के लिए मतदान संपन्न हो गया है। तो एक ओर जहाँ अब सभी दलों को चुनाव परिणाम का इंतजार है वहीं अब EVM को लेकर भी बयानबाजी शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के हरियाणा इकाई के प्रवक्ता और आईटी एवं सोशल मीडिया प्रमुख सुधीर यादव ने बड़ा अजीबोगरीब बयान दिया है। उन्होंने कहा, “अभी ईवीएम (EVM) प्रेग्नेंट है। अगर नॉरमल डिलिवरी हुई तो आम आदमी पार्टी (AAP) पैदा होगी और अगर ऑपरेशन हुआ तो बीजेपी (BJP)”

रिपोर्ट्स के अनुसार चुनाव के बाद लोगों में अब इस बात की चर्चा जोरों पर है कि दिल्ली में आखिर किसकी सरकार बन रही है? दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच है। सारे एक्जिट पोल में इस बार भी AAP की सरकार बनती दिख रही है। इस बार के चुनावी घमासान से मुख्य तौर पर दो बातें सामने निकलकर आई हैं। पहली यह कि इस बार के चुनाव में दिल्ली की जनता ने आम मुद्दे को ज्यादा तवज्जो दी है, दूसरी बात यह है कि जहाँ इस चुनावी जंग की शुरुआत में भाजपा को काफी कम सीटें मिलती दिख रही थीं, वहीं उसके काफी बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

शाहीन बाग

AAP संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भाजपा के सांसद और दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इस लड़ाई को बखूबी लड़ा। हालाँकि, केजरीवाल इस लड़ाई को अपने पक्ष में भुनाने में कामयाब होते नजर आ रहे हैं। पहले जहाँ केजरीवाल की पार्टी इस मुद्दे पर कथित लिबरल गुटों के साथ सुर में सुर मिलाती दिख रही थी लेकिन चुनाव नजदीक आते-आते उसने पलटी मारते हुए शाहीन बाग़ के कारण आम दिल्ली वासियों को होती दिक्कतों पर घड़ियाली आंसू बहाने शुरू कर दिए थे और उल्टा भाजपा को ही शाहीन बाग़ का जिम्मेदार ठहरा दिया था कि आखिर क्यों नहीं अमित शाह शाहीन बाग़ के सड़क को खुलवाते हैं।

फ्री बिजली फ्री पानी फ्री मेट्रो फ्री बस खूब चले

केजरीवाल ने मोदी के विकास के जवाब में बिजली पानी मुफ्त करने को खूब मार्केटिंग की। इसके आलावा शिक्षा में किए गए खुद की सरकार के काम पर भी केजरीवाल ने जमकर भाषण दिए।

एग्जिट पोल्स के दावों के बावजूद AAP की हालत पस्त नज़र आ रही है। उसे किसी भी एग्जिट पोल्स पर भरोसा नहीं हो रहा है। वहीं बीजेपी के इस दावे ने कि वह सरकार बनाने जा रही है। केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी की नींदें उड़ा दी है।

Pak में भी हो रहा दिल्ली चुनाव परिणाम का इंतजार, विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा- BJP की होगी बड़ी हार

दिल्ली विधानसभा चुनाव का परिणाम मंगलवार (फरवरी 11, 2020) को आने वाले हैं। इसके लिए जहाँ भारत में हर ओर लोग इंतजार कर रहे हैं क्योंकि मामला देश की राजधानी का है, वहीं पाकिस्तान में भी चुनाव परिणाम का बेसब्री से इन्तजार हो रहा है। कम से कम वहाँ के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बयान से तो यही लगता है। कुरैशी ने दावा किया है कि भाजपा को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि भाजपा इस चुनाव में बुरी तरह हारने वाली है।

कराची में एक सभा को सम्बोधित करते हुए कुरैशी ने कहा कि भाजपा ने 2019 लोकसभा चुनावों में भले ही भारी जीत दर्ज कर ली, उसके बाद से उन्हें 3 राज्यों में परेशानियों का सामना करना पड़ा है। बकौल पाकिस्तानी विदेश मंत्री, हार का कारण सीएए होगा। नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर उन्होंने कहा कि इसके कारण मोदी से एक बड़ा तबका नाराज़ है। उन्होंने कहा कि मोदी ने नागरिकता पर जो फैसले लिए हैं, उसके कारण उनकी पार्टी को बुरी हार मिलेगी।

कुरैशी ने कहा कि जम्मू कश्मीर में जो ‘अत्याचारी नीति’ अपनाई है, उसके कारण उसे चुनाव में हार मिलने जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सीएए और एनआरसी के कारण पूरे भारत में भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हालाँकि, इस दौरान पाकिस्तान को अन्य देशों से समर्थन न मिल पाने का उनका दुःख भी झलका। उन्होंने कहा कि भारत का सभी देश समर्थन इसीलिए करते हैं क्योंकि वो बहुत बड़ा बाजार है और अन्य देशों को अपना बाजार खोने का डर है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा जब से सत्ता में आई है, तब से भारत की विकास दर आधे से भी कम हो गई है। उन्होंने कहा कि भारत फिर से ‘पुलवामा जैसे घटना’ करा सकता है, ताकि वहाँ की जनता देश की आर्थिक समस्याओं की तरफ ध्यान न देकर पाकिस्तान की बातें करें। बता दें कि पुलवामा में हुए पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ के जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

भारतीयों ने 50 सालों से J&K की माँ-बहन एक कर दी है: सामने आए ‘शिकारा’ वाले चोपड़ा के पुराने बयान

मूवी ‘शिकारा’ ने दावा किया था कि वो कश्मीरी पंडितों की अनकही कहानी कहेगी। अब यही फ़िल्म कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को कमतर दिखाने के आरोपों का सामना कर रही है। उम्मीद थी कि कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार को नकारने के संगठित प्रयासों के खिलाफ, बम्बइया फिल्म इंडस्ट्री पहली बार शिकारा मूवी के जरिए अपनी भूमिका का निर्वहन करेगी।

लेकिन हुआ इसके उलट। लोगों की अपेक्षाओं पर खरी न उतरने के कारण शिकारा मूवी आलोचनाओं के केंद्र में है। एक कश्मीरी पंडित लड़की ने मूवी देखते हुए अपना संयम खो डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा को खूब जली कटी सुनाई। उन्हें शांत करते हुए विधि विनोद चोपड़ा ने कहा,”सत्य के दो पहलू होते हैं।” हर किसी का अपना दृश्टिकोण होता है, विभिन्न विचार हो सकता है। शिकारा डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा यहीं पर नहीं रुके और उस कश्मीरी पंडित लड़की के दुःख का मजाक उड़ाते लहजे में कहने लगे कि मैं आपके लिए शिकारा का सीक्वल बनाऊँगा।

इस प्रकार का असंवेदनशील बयान चोपड़ा के वैचारिक झुकाव की तरफ भी इशारा करने वाला है। विधु विनोद चोपड़ा के वैचारिक झुकाव पर स्थिति तब और भी साफ हो जाती है जब 2000 में आई उनकी फिल्म ‘मिशन कश्मीर’ की स्क्रिप्ट लिखने वाले सुकेतु मेहता की किताब ‘मैक्सिमम सिटी: बॉम्बे लॉस्ट एंड फाउंड’ को कोई पढ़ने बैठता है। मेहता अपनी किताब में चोपड़ा को उद्धृत करते हुए लिखते हैं, “The Indians have f**ked Kashmir. मैं कश्मीरी हूँ, मुझे पता है। They have been f**king Kashmir for fifty years.”

मेहता अपनी किताब में लिखते हैं कि विनोद चाहते थे कि फिल्म के द्वारा कश्मीरियत के विचार को आम लोगों तक दुबारा पहुँचाया जाए जहाँ एक ही देश में समुदाय विशेष के लिए हजरत बल दरगाह और हिन्दुओं के लिए शंकराचार्य मंदिर में पूजा करने की बराबर जगह हो।

मेहता के शब्दों में विधु विनोद चोपड़ा के लिहाज से कश्मीर एक खुशनुमा बाग़ जैसा ही था जहाँ अलग अलग समुदायों के लोग ‘बूमरो बूमरो’ गाया करते थे कि तभी केंद्र सरकार रंग में भंग डालने पहुँच गई। मिशन कश्मीर नामक फिल्म इसी विचार से बनी होने के कारण न सिर्फ इस्लामिक आतंकवाद के लिए ज़रूरी जस्टिफिकेशन मुहैय्या करती है बल्कि कश्मीर में चल रहे आतंकवाद पर पर्दा डालती हुई भी दिखती है।

मेहता अपनी किताब में लिखते हैं कि इस फिल्म के लिए स्क्रिप्ट लिखते समय विधु विनोद चोपड़ा समुदाय विशेष की भावनाओं का ख्याल रखने, पोलिटिकली करेक्ट बने रहने पर खासा जोर देते थे।

इस किताब के लेखक और मिशन कश्मीर फिल्म के स्क्रिप्ट राइटर के खुद के विचार भी बेहद समस्या परक हैं। अपनी किताब में वो लिखते हैं, “फिल्म के कई सारे सीन्स से मैं खुद को रिलेट नहीं कर पाता। मैं चाहता था कि कश्मीरी आतंकवाद की जड़ में वहाँ की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों पर भी बात हो। मैं अपने 1987 के कश्मीर दौरे पर भी बात करना चाहता था, जिसमें मैंने देखा है कि वहाँ की राज्य सरकार देश की सबसे भ्रष्ट राज्य सरकार है।” उन्होंने आगे लिखा है:

“वहाँ जिनसे मेरी बात हुई उनमें से ज्यादातर स्थानीय लोग भारत से अलग होने की ख्वाहिश रखते थे। साथ ही मैं कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद के भारत में विलय के संबंध में भारत की जो दोहरी नीति रही है, जिसमें हैदराबाद और जूनागढ़ का भारत में विलय कर लिया गया क्योंकि वहाँ की अधिसंख्य आबादी हिन्दू थी पर कश्मीर में महाराजा जो हिन्दू था और राज्य की जनता जो मुस्लिम बहुसंख्यक थी पर फिर भी कश्मीर का विलय भारत में कर लिया गया, आदि पर बात करना चाहता था लेकिन मेरी हैसियत उतनी नहीं थी इसलिए मैंने अपने पॉइंट पर बहुत जोर नहीं दिया।”

मैक्सिमम सिटी नामक यह किताब कई पुरस्कार जीत चुकी है। 2005 में पुलित्जर अवार्ड की फाइनलिस्ट, तथा किरियामा अवार्ड जीतने वाली यह किताब 2004 में इकोनॉमिस्ट द्वारा चुनी हुई किताबों में शामिल थी। इसे 2005 सामुएल जॉनसन पुरस्कार भी मिला था।

यह किताब जो कुछ भी बताती है विधु विनोद चोपड़ा के बारे में उसके बाद शिकारा को लेकर किसी भी प्रकार के आश्चर्य की अब कोई जगह शेष नहीं रह जाती। विधु विनोद चोपड़ा ने ‘शिकारा’ नामक फिल्म को उसी तरह ट्रीट किया है जिस दृष्टि से वह कश्मीर घाटी में इस्लामिक आतंकवाद को देखते हैं। और वह अपने वर्ल्ड व्यू में ‘मिशन कश्मीर’ से लेकर ‘शिकारा’ तक इसी विचारधारा से चलते रहे हैं। ऐसे आदमी की बनाई मूवी कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार के साथ कितना न्याय कर सकती थी, अब इस पर कोई संदेह नहीं है। इस कारण कश्मीरी पंडित अगर खुद को छला गया महसूस करते हैं, खुद के नरसंहार को किसी के द्वारा भुनाने की कोशिशों पर क्रोधित होते हैं, अपना संयम खो बैठते हैं भरे सिनेमा हॉल में, तो वह बेहद नैसर्गिक मानवीय प्रतिक्रिया है।

दर्शकों के अनुसार, ‘शिकारा’ मूवी कश्मीरी पंडितों की जगह जिहादियों के प्रति ज्यादा संवेदना व्यक्त करती दिखती है। दर्शकों ने यह भी कहा है कि इस मूवी में कट्टरपंथी इस्लाम पर लीपापोती करने के लिए तथ्यों के साथ खिलवाड़ किया गया है और उन्हें तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। मूवी पर यह भी आरोप है कि इसने कश्मीरी पंडितों की अनकही कहानी के नाम पर प्रेम कहानी दिखा, उनके जख्मों पर नमक रगड़ने का काम किया गया है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता हिलाल अकबर लोन को PSA के तहत किया गया गिरफ़्तार

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता हिलाल अकबर लोन को छह माह तक हिरासत में रखने के बाद सोमवार को प्रशासन ने एक बार फ़िर से जन सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत गिरफ़्तार कर लिया। हिलाल अकबर के पिता मोहम्मद अकबर लोन पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य विधानसभा के स्पीकर और बारामूला-कुपवाड़ा संसदीय क्षेत्र के मौजूदा सांसद हैं।

हिलाल अकबर लोन को भी कश्मीर घाटी में पाँच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को लागू किए जाने के मद्देनजर प्रशासन ने हिरासत में लिया था। इसके साथ ही नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, कॉन्ग्रेस, माकपा व अन्य दलों के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया था। शुरूआत में इन नेताओं को सेंटूर की एक जेल में रखा गया था, लेकिन पिछले वर्ष नवंबर माह से हिलाल अकबर लोन और कुछ अन्य नेताओं को सब जेल के एमएलए हॉस्टल में रखा गया था।

वहीं PSA के तहत बंदी बनाए जाने के बाद हिलाल अकबर लोन को गुपकार रोड पर एक बंगले में बनाई गई अस्थायी सब जेल में ले जाया गया है। इससे पूर्व गत सप्ताह प्रशासन ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अली मोहम्मद सागर, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पीडीपी के वरिष्ठ नेता सरताज मदनी, नईद अख्तर को PSA के तहत बंदी बनाया है।

नए Exit Poll में भाजपा को पूर्ण बहुमत, दोपहर 3 बजे के बाद पलट गया था गेम

हाल ही में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत की भविष्यवाणी लगभग सभी एग्जिट पोल्स द्वारा की जा रही है। अधिकतर एग्जिट पोल कह रहे हैं कि केजरीवाल की पार्टी प्रचंड जीत के साथ सत्ता में लौटेगी। लेकिन, इसी बीच एक ऐसा एग्जिट पोल भी आया है जिसमें भाजपा को बहुमत मिलता दिख रहा है। चिंतामणि-5 डॉट्स के एग्जिट पोल के अनुसार, दिल्ली में भाजपा आगे जा सकती है और आम आदमी पार्टी उससे पीछे हो सकती है। इस एग्जिट पोल में भाजपा को 27-39 सीटें दी गई हैं, वहीं AAP को 31-43 सीटें मिलने की सम्भावना जताई गई है।

ये आँकड़े ‘एलेक्शंस डॉट इन’ पर प्रकाशित हुए। जहाँ तक कॉन्ग्रेस पार्टी की बात है, बाकी एग्जिट पोल्स की तरह इसमें भी उसका पत्ता गोल होता हुआ नज़र आ रहा है और पार्टी का खाता खोलना भी मुश्किल लग रहा है। उसे 0-2 सीटें दी गई है। रिसर्च की मानें तो अंतिम 2 घंटों में वोटिंग प्रतिशत में जो बड़ी बढ़ोतरी हुई है, उससे भाजपा को भारी फायदा होने जा रहा है। ग्राउंड रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस को मिलने वाले वोटों में कमी आएगी।

इस एग्जिट पोल में उस हिस्से को कवर किया गया है, जो बाकी एग्जिट पोल्स ने छोड़ दिया। यानी 3 बजे के बाद हुए वोटिंग का डेटा। पोलिंग को 2 भाग में बाँटा गया है। फेज-1 में दोपहर 3 बजे तक के आँकड़े हैं, जिनके अनुसार केजरीवाल की पार्टी 15-20% ज्यादा वोटों के साथ भाजपा से आगे होगी। अधिकतर एग्जिट पोल्स में इसके बाद का हिस्सा छोड़ दिया गया। इस एग्जिट पोल के आँकड़ों पर नज़र डालें तो दूसरे फेज में भाजपा ने AAP पर 30-40% वोटों की लीड बना ली।

ये एकमात्र ऐसा एग्जिट पोल है, जिसमें भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने की सम्भावना जताई गई है। बता दें कि लोकसभा चुनाव के बाद चिंतामणि ने भाजपा को 297 सीटें मिलने की सम्भावना जताई थी। भाजपा इन आँकड़ों से आगे निकल कर 303 सीटें जीत गई लेकिन दोनों नंबरों के बीच ज्यादा अंतर नहीं था। ऐसे में काफ़ी लोगों को चिंतामणि के एग्जिट पोल पर भरोसा जताया।

प्रेमी ने युवती को धोखे से मिलने बुलाया, मनीरुद्दीन और निजामुद्दीन सहित 4 ने किया गैंगरेप

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में कुछ दरिंदों ने झारखण्ड की एक लड़की को धोखे से बुलाया और फिर उसके साथ समूहिक बलात्कार किया। 2019 में बीरभूम के मोहम्मद बाजार में एक आदिवासी लड़की के साथ गैंगरेप की घटना हुई थी। ताज़ा वारदात भी यहीं पर हुई है। लड़की फोन से लड़के से बात करती थी और धीरे-धीरे लड़के ने उसे अपने भरोसे में ले लिया। मुख्य आरोपित मोहम्मदबाज़ार थाना क्षेत्र का ही निवासी है। उसने युवती को मिलने के लिए बुलाया था।

दोनों के बीच फोन पर खूब बातें होती थीं, जिसके बाद युवती उस लड़के से प्रेम करने लगी थी। युवती भी लड़के से मिलना चाहती थी, इसीलिए मौका देख कर आरोपित ने उसे बुला लिया। ‘दैनिक जागरण’ की ख़बर के अनुसार, जब उक्त युवती वहाँ पर पहुँची, तब आरोपित उसे बाइक पर बिठा कर सेकड्डा इलाके में गनपुर जंगल की तरफ ले गया। वहाँ उसने युवती के साथ बलात्कार किया। उसके बाद उसके तीन दोस्त भी आए, जिन्होंने पीड़िता के साथ बलात्कार किया। दरिंदगी का ये आलम रात भर यूँ ही जारी रहा।

बाद में वो चारों वहाँ से फरार हो गए। सुबह होश में आने पर पीड़िता ने थाने पहुँच कर पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर मनीरउद्दीन शेख, निजामुद्दीन शेख तथा नीलमाधव मिर्धा नामक तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपित अभी भी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है। पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने उसका मेडिकल जाँच भी कराया है। अदालत में भी युवती का कलमबंद बयान दर्ज कर लिया गया है।

बता दें कि जुलाई 2018 में इसी इलाक़े में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की का सामूहिक बलात्कार किया गया था। पीड़िता ख़ून से लथपथ सड़क किनारे पड़ी हुई मिली थी। इस घटना में पाँच लोगों की गिरफ़्तारी हुई थी।

मूल मुस्लिम समुदाय गोरिया, मोरिया, देसी और जोलाह की पहचान करेगी असम सरकार, जल्द होगा सर्वे

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर असम में चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच सरकार मूल मुस्लिम आबादी की पहचान करने के लिए एक सर्वेक्षण कराने की योजना बना रही है। राज्य सरकार मूल मुस्लिम आबादी की पहचान करने और उन्हें बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों से अलग करने की कवायद के तहत एक सर्वेक्षण कराने की योजना बना रही है। योजना के तहत यह सर्वेक्षण चार समुदाय के लोगों की पहचान करने के लिए है।

यह चार सुमदाय हैं- गोरिया, मोरिया, देसी और जोलाह। इन्हें राज्य का मूल निवासी माना जाता है। असम के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रंजीत दत्ता ने चार समुदायों के विभिन्न संगठनों तथा अन्य पक्षकारों की मंगलवार (फरवरी 11, 2020) को एक बैठक बुलाई है। जिसमें इस योजना के अंतिम रूप दिया जाएगा।

असम अल्पसंख्यक विकास बोर्ड के अध्यक्ष मूमिनुल ओवाल ने कहा, “स्वदेशी मुस्लिम और बांग्लादेशी मुस्लमों के नाम एक जैसे हैं। जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के वक्त सरकार को उनकी पहचान में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, हमारी सरकार स्वदेशी मुस्लिमों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है, ऐसे में उनकी अलग पहचान होनी चाहिए।”

मूमिनुल ओवाल ने बताया कि असम में कुल 1.3 करोड़ मुस्लिम आबादी है जिनमें से करीब 90 लाख बांग्लादेशी मूल के हैं। शेष 40 लाख विभिन्न जनजातियों से हैं और उनकी पहचान करना जरूरी है। उन्होंने कहा, “बिना सही पहचान के मूल मुस्लिम आबादी को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। NRC में बांग्लादेशी मूल के लाखों लोग शामिल हैं, इसलिए हम इस पर भरोसा नहीं कर सकते। अगर हमने अब कुछ नहीं किया तो एक दिन असम से सभी मूल जनजातियाँ सामाप्त हो जाएँगी।”

ओवाल ने कहा कि जनगणना की तैयारी आखिरी चरण में है और उम्मीद है कि यह पूरी प्रक्रिया इस वित्तीय वर्ष में शुरू हो जाएगी। राज्य अल्पसंख्यक विकास विभाग समेत स्वदेशी मुस्लिम समुदायों से ताल्लुक रखने वाले लोगों की एक बैठक 11 फरवरी को बुलाई गई है। इसमें जनगणना के लिए आगे की योजना पर चर्चा की जाएगी।

विदेशी आतंकी संगठनों के निशाने पर RSS नेता, VBIED का कर सकते हैं इस्तेमाल: कई राज्यों में अलर्ट

अब आतंकियों की नज़र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर है। आरएसएस के कई नेता आतंकियों के निशाने पर आ गए हैं। ख़ुफ़िया सूचनाओं से पता चला है कि विदेशी आतंकी संगठन अब संघ के नेताओं को निशाना बनाने की साज़िश रचने में लगे हैं। इसके लिए IED या फिर VBIED (Vehicle-borne improvised IED) का इस्तेमाल किया जा सकता है। सभी राज्यों की पुलिस को संघ नेताओं पर हमले की आशंका से अवगत करा दिया गया है। बता दें कि ये मामला इसीलिए भी गंभीर है क्योंकि अधिकतर संघ नेता किसी ख़ास प्रकार की सुरक्षा लेकर नहीं चलते हैं।

संघ के नेता लगातार ज़मीन पर सक्रिय रहते हैं और उन्हें लगातार कई प्रदेशों व राज्यों की यात्राएँ करनी होती हैं। ऐसे में उन्हें निशाना बना कर आतंकी भारत सरकार और भाजपा को भी ख़ास सन्देश देना चाह रहे हों, ऐसा हो सकता है। इंटेलिजेंस ब्यूरो ने इस सम्बन्ध में ख़ुफ़िया सूचना दी है। वीबी-आईडी विस्फोटक से लदे वाहन होते हैं। ट्रक से लेकर साइकिल तक, इन विस्फोटकों को किसी भी वाहन से ले जाया जा सकता है। इसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में लेकर जाना आसान होता है।

सबसे बड़ी बात ये है कि विदेशी आतंकी संगठन संघ नेताओं को निशाना बनाने पर तुले हुए हैं। वैश्विक इस्लामी आतंकी संगठन संघ के नेताओं पर हमले की साज़िश रच रहे हैं। महाराष्ट्र, पंजाब और राजस्थान में ऐसे हमले होने की आशंका जताई गई है। हालाँकि, अन्य कई राज्यों को भी सतर्क कर दिया गया है। इन राज्यों के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश और असम में भी पुलिस को सचेत कर दिया गया है। दिसंबर 2018 में बेंगलुरु में एक संघ कार्यकर्ता की हत्या की कोशिश की गई थी क्योंकि उन्होंने सीएए समर्थन रैली में भाग लिया था। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को गिरफ़्तार किया है।

उक्त मामले में मोहम्मद इरफ़ान, सैयद अकबर, सैयर सिद्दीक़, अकबर भाषा, शनाउल्ला शरीफ और शादिकुल अमीन को गिरफ़्तार किया गया। पुलिस ने बताया है कि ये सभी किसी बड़े वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे।

AMU छात्रों ने किया शांति भंग: आमिर, हमजा, इम्तियाज, मोइनुद्दीन पर ₹1-1 लाख का जुर्माना

जिला प्रशासन को शांति बनाए रखने का आश्वासन देने के बाद भी AMU में हिंसा करने वाले छात्रों से अब अलीगढ़ प्रशासन लाखों का जुर्माना बसूल करेगा। दरअसल 15 दिसंबर को छात्रों ने सीएए विरोध के नाम पर कैंपस में हिंसा की थी, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। वहीं जिला प्रशासन अब ऐसे चार छात्रों से जुर्माने के तौर पर एक-एक लाख रुपए वसूल करेगा।

अतिरिक्त शहर मजिस्ट्रेट (ACM) रणजीत सिंह ने रविवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि धारा 107 के तहत चार बांड पर AMU के दो पूर्व छात्रों सहित चार छात्रों ने हस्ताक्षर करते हुए प्रशासन को आश्वासन दिया था कि वे शहर में शांति बनाए रखेंगे, लेकिन इसके बाद 15 दिसंबर को कैंपस में हुई हिंसा में चारों छात्रों को कथित तौर पर शामिल पाया गया। इस हिंसा में कई लोग घायल हो गए थे।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के चार छात्रों को 1-1 लाख रुपए का जुर्माना देना होगा, क्योंकि अलीगढ़ जिला प्रशासन ने ज़मानत बांड को प्रत्येक छात्र से वसूल करने का फैसला किया है, दरअसल 15 दिसंबर को कैंपस में हुई हिंसा से पहले छात्रों द्वारा इस बांड पर हस्ताक्षर किए थे। रणजीत सिंह ने कहा कि इन चारों छात्रों मे छात्र संघ के पूर्व सचिव हुजैफा आमिर, पूर्व उपाध्यक्ष हमजा सूफियान, रिसर्च स्कॉलर सलमान इम्तियाज, जो कि छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष हैं, और एक छात्र मोइनुद्दीन शामिल हैं।

वहीं एसीएम ने कहा कि जिला प्रशासन ने AMU से जुड़े 44 छात्रों सहित कुल 58 लोगों की भी पहचान की है, जिनको शहर में शांति भंग करने के लिए प्रशासन नोटिस जारी कर रहा है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन को भी उनके पते उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।

रिसर्च स्कॉलर सलमान इम्तियाज ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि, दो अलग-अलग घटनाओं में तीन छात्रों के खिलाफ प्रशासन द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के फैसले पर कुलपति कार्यालय में हंगामा किया गया था। इसके बाद 1 अगस्त को अन्य छात्रों के साथ हमने हस्ताक्षर किए थे।

इस बीच, एएमयू प्रॉक्टर वसीम अली ने कहा कि यह दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं है कि वे एएमयू के छात्र हैं या युनिवर्सिटी से जुड़े हैं। सिर्फ नामों के आधार पर, हम पुष्टि नहीं कर सकते हैं कि ये प्रशासन द्वारा पहचाने जाने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने ये नाम नहीं दिए हैं, जिनमें एक ही नाम के एक से अधिक छात्र हैं। एएमयू प्रॉक्टर ने कहा कि विश्वविद्यालय का माहौल फिलहाल सामान्य स्थिति में है। वहीं कक्षाओं में भी अब छात्र भाग ले रहे हैं और इसी के साथ विभिन्न विभागों द्वारा लंबित परीक्षाएँ भी आयोजित की गई हैं।

आपके बता दें कि 15 दिसंबर को सीएए विरोध के नाम पर एएमयू में हुई हिंसा के बाद से ही प्रदर्शकारी बाबे सैयद गेट पर 15 दिसंबर से धरने पर बैठे हुए हैं।