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गोद में बच्चा और ‘आजादी’ का नारा… साथ में कॉन्ग्रेसी सलमान खुर्शीद भी बार-बार चिल्ला रहे आजादी – वीडियो वायरल

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो ‘आजादी’ के नारे लगा रहे हैं। ये वीडियो राजधानी दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के पास का बताया जा रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है जब एक बच्चा कहता है, “हम क्या चाहते” और उसके पीछे-पीछे खुर्शीद कहते हैं, “आजादी” 

बच्चा आगे कहता है – “जोर से बोलो, तुम जेल में डालो” इस पर भी खुर्शीद कहते हैं – आजादी। फिर बच्चा कहता है, ‘तुम गोली मारो’, ‘तुम कुछ भी कर लो’, ‘तुम कैसे ना दोगे’, ‘हम छीन के लेंगे’… इन सबके जवाब में खुर्शीद कहते हैं – ‘आजादी’

हालाँकि कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से अभी तक इस पर किसी तरह की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उनके वरिष्ठ नेता का इस तरह से आज़ादी के नारे लगाना पार्टी की मानसिकता को दिखाता है। बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर जामिया, शाहीन बाग में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में ये नारे आम हैं। इन नारों को लेकर कई बार सवाल भी उठते हैं कि आखिरकार प्रदर्शनकारी आजाद देश में किससे आजादी की बात कर रहे हैं?

ये बेहद शर्मनाक बात है। वो भी ऐसे में जब कुछ दिनों पहले ही शाहीन बाग में प्रदर्शन में जा रहे चार महीने की एक बच्ची की मौत के बाद किसी भी बच्चे को विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं किए जाने पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की बात कही थी। बच्ची की मौत के बाद जेन सदावर्ते नामक 12 वर्षीय बच्ची ने देश के मुख्य न्यायाधीश बोबडे को पत्र लिख कर इस मामले को संज्ञान में लेने की अपील की थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने संज्ञान लिया था।

बता दें कि कुछ महीने पहले जन्मीं उस बच्ची को लेकर उसकी अम्मी जामिया नगर और शाहीन बाग और के सीएए विरोधी प्रदर्शनों में जाती थी। भीषण ठण्ड में भी उस बच्ची और ऐसे कई बच्चे-बच्चियों को उनके परिजन विरोध प्रदर्शन में लेकर सिर्फ़ इसीलिए जाते थे ताकि मीडिया अटेंशन मिले, खासकर इंटरनेशनल मीडिया का।

इससे भी हैरानी की बात है कि बच्ची की मौत के बाद उसकी अम्मी ने कहा था कि उसने सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में अपनी बच्ची को कुर्बान कर दिया। जबकि अन्य प्रोटेस्टरों का कहना था कि वो अल्लाह की बच्ची थी और उसे अल्लाह ने ले लिया। ऐसे कई बयान दिए गए, जिससे पता चलता है कि बच्ची मरी नहीं, उसकी ‘हत्या’ की गई। अब कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता का इस तरह से प्रदर्शन में बच्चे का इस्तेमाल करना और आजादी के नारे लगाना कई सवाल खड़े करता है। ट्विटर यूजर्स ने भी इस पर सवाल उठाए और इसे देश के लिए बेहद खतरनाक बताया। एक यूजर ने तो यहाँ तक लिख दिया कि कॉन्ग्रेसी तो हमेशा से ही देश विरोधी रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनका पर्दाफाश हो रहा है।

वारंट के बाद फरार हुए हार्दिक पटेल, पत्नी ने कहा- रात में घर में घुस आती है पुलिस, लेती है तलाशी

कॉन्ग्रेस नेता हार्दिक पटेल फरार हो गए हैं। उनकी बीवी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कहा है कि उनके पति गायब हैं। ख़ुद को पाटीदार नेता बताने वाले हार्दिक पटेल पर कई मुक़दमे दर्ज हैं। उन्हें पुलिस ने गिरफ़्त में भी लिया था। उनके ख़िलाफ़ जारी वारंट और पुलिस के बढ़ते शिकंजे के बीच वो भूमिगत हो गए हैं। उनकी पत्नी किंजल ने अपने पति के लिए सोशल मीडिया पर मोर्चा सम्भाला हुआ है। उनका कहना है कि गुजरात पुलिस और सरकार उनके पति को बेवजह प्रताड़ित कर रही है।

किंजल ने अहमदाबाद पुलिस पर भी कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि क्राइम ब्रांच के अधिकारी रात के 10 बजे घर में घुस जाते हैं और जबरदस्ती तलाशी लेते हैं। किंजल ने पुलिस को आड़े हाथ लेते हुए लिखा है कि किसी को मार डालना ही आतंकवाद नहीं होता है, किसी को डराकर कोने में बिठा देने की कोशिश करना भी आतंकवाद होता है। हार्दिक 24 जनवरी को जेल से रिहा हुए थे। इसके बाद उन्होंने कहा था:

“7 दिन बाद तानाशाही की कैद से आजाद हुआ हूँ। मेरा गुनाह क्‍या है? क्‍या मैं किसान, युवा, छात्रों के अधिकार तथा शिक्षा व रोजगार की बात करता हूँ, इसलिए इनके निशाने पर हूँ? मुझे संविधान इसका अधिकार देता है। सरकार में बेठे हिटलरवादी लोगों ने मुझे डराने और झुकाने के लिए सभी ताक़त का इस्तेमाल कर लिया है।”

हार्दिक पटेल के ख़िलाफ़ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है। उन पर देशद्रोह का मामला दर्ज है। किंजल पटेल अपने पति हार्दिक का आधिकारिक ट्विटर हैंडल भी चलाती हैं। उनका कहना है कि आंदोलन से हार्दिक या उनका परिवार करोड़पति नहीं बन पाया और निर्दोष भाव से काम किया लेकिन आज लोग उनके साथ नहीं खड़े हैं।

साबरमती जेल से बाहर आते ही हार्दिक पटेल को अहमदाबाद पुलिस ने दूसरे मामले में किया गिरफ़्तार

देशद्रोह मामले में हाजिर नहीं हुए कॉन्ग्रेस नेता हार्दिक पटेल, गिरफ़्तारी के बाद भेजे गए जेल

चुनावी जनसभा के दौरान हार्दिक पटेल को पड़ा झापड़, BJP को ठहराया दोषी

कॉन्ग्रेस सरकार ने लिया था आरक्षण ख़त्म करने का फ़ैसला, सच्चाई छिपाने के लिए भाजपा व संघ को दे रहे दोष

उत्तराखंड मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के कारण प्रमोशन में रिजर्वेशन का मामला छाया हुआ है। पदोन्नति में आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार के उस फ़ैसले को सही करारा दिया है, जिसमें इसे रोक दिया गया था। अब कॉन्ग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने इस पर राजनीति शुरू कर दी है। राहुल गाँधी ने पुराना राग अलापते हुए कह डाला कि सरसंघचालक मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिल कर आरक्षण को ख़त्म करना चाहते हैं। उन्होंने दावा कर दिया कि आरक्षण को कॉन्ग्रेस कभी भी ख़त्म नहीं होने देगी।

दरअसल, ये मामला न तो भाजपा से जुड़ा है और न ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले का केंद्र सरकार या भाजपा से कुछ लेना-देना है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी राज्य पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि प्रमोशन में आरक्षण लेना मूलभूत अधिकारों के अंतर्गत नहीं आता। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस हमनी गुप्ता की पीठ ने ये फ़ैसला सुनाया। साथ ही कोर्ट ने प्रमोशन में रिजर्वेशन देने के लिए राज्य सरकार को आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।

अब आते हैं कॉन्ग्रेस के आरोपों पर। आज संसद में जब केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्री थावरचंद गहलोत ने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने 2012 में फ़ैसला लिया था कि वो प्रमोशन में रिजर्वेशन नहीं देगी, तो कॉन्ग्रेस सांसद सदन से वॉकआउट कर गए। दरअसल, गहलोत ने सदन में कॉन्ग्रेस को सही आइना दिखाया क्योंकि ये मामला सितम्बर 2012 का है। उस समय विजय बहुगुणा के नेतृत्व में राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार चल रही थी। उसी सरकार ने निर्णय लिया था कि एससी-एसटी को आरक्षण दिए बिना राज्य में सारे सार्वजनिक पदों को भरा जाएगा।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भारत सरकार इस मामले पर उच्च-स्तरीय बैठकों के जरिए चर्चा कर रही है। भारत सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में कोई पक्ष थी ही नहीं। ऐसे में, कॉन्ग्रेस अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णय के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रही है। ये भी जानने लायक बात है कि तब कॉन्ग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे विजय बहुगुणा ने मई 2018 में भाजपा का दामन थाम लिया था। अब कॉन्ग्रेस अपने किए-धरे को छिपाने में जुटी है और संघ-भाजपा पर दोषारोपण कर रही है।

‘भारत धर्मशाला नहीं, CAA-NRC का विरोध कर मुस्लिम किसको अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं?’

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अपने भगवा रंग को और गाढ़ा करते हुए रविवार को मुंबई के आजाद मैदान तक पाकिस्तानी और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ महा रैली निकाली। नागरिकता कानून को अपना समर्थन देते हुए राज ठाकरे ने रैली में कहा कि यदि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दुओं को डर लगता है तो उन्हें भारत की नागरिकता देने में क्या बुराई है?

एनआरसी का समर्थन करते हुए राज ठाकरे ने अपनी रैली में कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है, न सिर्फ हम ने ही मानवता का सारा ठेका ले रखा है, दुनिया के सभी देशों में स्पष्ट प्रावधान हैं कि अगर आप गैर क़ानूनी ढंग से वहाँ रह रहे हैं तो फिर या तो आपको वापस जाना होगा या फिर जेल जाना होगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार ठाकरे ने रैली को सम्बोधित करते हुए कहा, “उनकी पार्टी नागरिकता कानून का विरोध करते लोगों को सटीक जवाब देगी। आज का महामोर्चा, नागरिकता कानून और एनआरसी के विरोध में हुए विरोध प्रदर्शनों के जवाब में निकाला गया है। रैली का जवाब रैली से दिया जाएगा, पत्थर का जवाब पत्थर से, और तलवार का जवाब तलवार से।”

रविवार की दोपहर मनसे ने अवैध पाकिस्तानी और बांग्लादेशियों को देश से निकालने की माँग करते हुए गिरगाँव चौपाटी से आजाद मैदान तक एक विशाल रैली निकाली जिसमें हजारों की संख्या में मनसे कार्यकर्ता शामिल हुए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रैली से पहले राज ठाकरे ने अपनी पत्नी व बेटे के साथ सिद्ध विनायक मंदिर जा भगवान गणेश की आरती की।

रैली को सम्बोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा, “मैं समझ नहीं पा रहा कि मुस्लिम नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ क्यों विरोध प्रदर्शन कर रहे। कौन उनको देश से निकालने जा रहा जो जन्म से भारतीय हैं?नागरिकता कानून और एनआरसी का विरोध कर आप किसको अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं?”

ठाकरे ने इन देश भर में जारी इन विरोध प्रदर्शनों को गलतफहमी का नतीजा बताया, जो सिर्फ विषय की ठीक से समझ न होने के कारण पैदा हुई है।

जिस सीरियल बम धमाके में गई थी 257 लोगों की जान, उसका दोषी मुनाफ हलारी मूसा गिरफ्तार

साल 1993 में हुए मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में जाँच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। आतंकी मुनाफ हलारी मूसा को मुंबई एयरपोर्ट से गिरप्तार कर लिया गया है। मुनाफ हलारी को गुजरात एंटी टेरेरिज्म स्क्वॉड ने गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक वो पाकिस्तान के पासपोर्ट पर यात्रा कर रहा था।

मुनाफ हलारी 1993 में जावेरी बाज़ार में ब्लास्ट मामले में दोषी था। जाँच एजेंसियों को लंबे समय से इसकी तलाश थी। 12 मार्च 1993 को मुंबई में सिर्फ दो घंटे के अंदर अलग-अलग जगह पर 12 धमाके हुए थे। इन धमाकों में 257 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 713 लोग घायल हो गए थे। 19 नवंबर 1993 में ये मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। 19 अप्रैल 1995 को मुंबई की टाडा अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई थी। अगले दो महीनों में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को पहले ही फाँसी दी जा चुकी है, जबकि मुख्य दोषी दाऊद इब्राहिम अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

मूसा लंबे समय से जाँच एजेंसियों को चकमा देकर बच रहा था। मगर सोमवार (फरवरी 10, 2020) को वो जाँच एजेंसी के हत्थे चढ़ गया। एटीएस को खबर मिली कि मूसा पाकिस्तानी पासपोर्ट पर यात्रा कर रहा है। इसके बाद मुंबई एयरपोर्ट से उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। गुजरात एटीएस आज दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी।

जाँच अधिकारियों ने बताया कि ब्लास्ट करने के बाद मूसा देश से फरार हो गया था। फिर बाद में उसके दक्षिण अफ्रीका में छुपे होने की बात पता चली थी। मूसा ड्रग्स के काले कारोबार की दुनिया में बड़ा नाम है। पिछले साल पुलिस ने 1500 करोड़ रुपए के एक ड्रग रैकेट का पर्दाफाश किया था, जिसमें उसकी बड़ी भूमिका थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुजरात एटीएस इस पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सकती है। इस गिरफ्तारी के बाद दक्षिण अफ्रीका में एक बड़े ड्रग रैकेट का पता चल सकता है।

दिल्ली चुनाव ख़त्म होते ही ठंडा पड़ा जोश: रामलीला मैदान शिफ्ट होने को तैयार शाहीन बाग़ के उपद्रवी

शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों का जोश ठंडा हो गया है क्योंकि दिल्ली चुनाव बीत गया है। मतदान संपन्न होने के साथ ही अब सीएए के नाम पर विरोध प्रदर्शन कर रही मुस्लिम महिलाएँ वहाँ से कहीं और शिफ्ट होने के लिए तैयार हो गई हैं। हालाँकि, वो वहाँ से हटने के लिए कोई न कोई बहाना ढूँढ रहे थे क्योंकि उनका इरादा दिल्ली चुनाव के दौरान चर्चा में रहना था। इस विरोध प्रदर्शन को विदेश से फंडिंग मिलने के कई आरोप लगे थे।

ईडी मामले की जाँच कर रही है, जिसके तार आम आदमी पार्टी के संजय सिंह तक जुड़ते नज़र आ रहे हैं। ओवैसी की पार्टी के नेताओं की भी संलिप्तता मिली है। केजरीवाल के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान भी उपद्रवी भीड़ का नेतृत्व करते देखे गए थे।

शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों ने ये भी कहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करेंगे और इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि देश की शीर्ष अदालत क्या कहती है। न्यायपालिका के प्रति आस्था का दिखावा करते हुए एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जैसा कहेगा, वैसा किया जाएगा।

शाहीन बाग़ के उपद्रवियों का कहना है कि अब वो रामलीला मैदान शिफ्ट होने के लिए तैयार हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी की है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर इतने दिनों तक सड़कें बाधित कर के नहीं रखी जा सकतीं और लोगों को परेशान नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद शाहीन बाग़ के उपद्रवियों को वहाँ से हटने का बहाना मिल गया है। उनका कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट निर्देशित करता है तो वो रामलीला मैदान में जाकर सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करेंगे।

वहीं इसके बाद उपद्रवियों से सहानुभूति रखने वाले तहसीन पूनावाला सरीखे लोग संघ को घेरने लगे हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हुए प्रदर्शनकारी जगह बदलने को तैयार हुए हैं। हालाँकि, ये स्पष्ट दिख रहा है कि दिल्ली चुनाव ख़त्म होने के बाद उनकी ज़रूरत ही नहीं बची थी और उन पर लगातार लग रहे आरोपों के बीच उन्हें मीडिया कवरेज मिलना भी बंद हो गया था, इसीलिए वो वहाँ से हट कर धीरे-धीरे इस विरोध प्रदर्शन को ख़त्म करने में जुटे हैं।

शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वो लोगों की दिक्कतों को बढ़ाना नहीं चाहते। हालाँकि, पिछले 2 महीने से उनके कारण पूरे क्षेत्र में लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहाँ बिरयानी पार्टी हो रही है और पिकनिक मनाई जा रही है, ऐसा लोगों का कहना है।

कन्हैया कुमार के काफिले पर 5वीं बार हमला: फेंके गए अंडे और मोबिल, बाउंसरों ने की बदतमीजी

बिहार के जमुई में कन्हैया कुमार के काफिले पर हमले की ख़बर आई है। कन्हैया बिहार में जहाँ भी जा रहे हैं, लोग उन्हें मारने दौड़ रहे हैं। अबकी कन्हैया के काफिले में गाड़ियों पर अंडे फेंके गए। लोगों ने कन्हैया की गाड़ी पर मोबिल भी फेंका। पिछले कुछ दिनों में ये पाँचवी बार है, जब कन्हैया कुमार के काफिले पर हमला हुआ है। हालाँकि, बिहार में उनकी रैलियों में लोग भी जुट रहे हैं क्योंकि वामपंथी दलों को वहाँ एक चेहरा मिल गया है। भाकपा कन्हैया कुमार की ‘जन गण मन’ यात्रा के जरिए अपने पुराने कैडर को एक्टिवेट करने में जुटी है।

कन्हैया कुमार पर हो रहे हमले में सिर्फ़ लोगों का दोष नहीं है। उनके बाउंसर्स भी मीडियाकर्मी और लोगों के साथ बदतमीजी से पेश आते हैं और मारपीट करते हैं। कन्हैया का काफिला जहाँ से गुजरता है, वहाँ नारेबाजी की जाती है। इसी तरह की नारेबाजी के दौरान एक दूसरा गुट आ गया और वो भी विरोध में नारेबाजी करने लगा। इस भिड़ंत में कन्हैया कुमार पर हमला कर दिया गया। ये मामला बिहार के जमुई का है। आढा आने के क्रम में महिसौड़ी चौक पर ये घटना हुई।

कन्हैया कुमार के समर्थकों का आरोप है कि पुलिस व प्रशासन इस मामले में लापरवाही बरत रहा है। विरोधी गुट का कहना है कि कन्हैया देशद्रोही है। लगभग 15 मिनट तक चली झड़प के कारण वहाँ जाम लगा रहा। जेएनयू छात्र संगठन के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार जमुई परिसदन में रात्रि विश्राम के बाद सोमवार को अलीगंज के लिए निकले थे। सोमवार को अलीगंज प्रखंड में उनकी सभा हुई। इससे पहले मोतिहारी, सुपौल, कटिहार और सीवान में कन्हैया कुमार पर हमला हो चुका है।

कन्हैया कुमार इस यात्रा के दौरान कुल 50 सभाएँ करने वाले हैं। 29 फरवरी तक चलने वाली इस रैली के जरिए वो सक्रिय राजनीति में पाँव जमाने निकले हैं। 30 जनवरी को बेतिया से उनकी ये यात्रा शुरू हुई थी। वो सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं।

शाहीन बाग में मासूम की मौत पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, CJI ने पूछा- क्या 4 महीने का बच्चा खुद प्रदर्शन करने गया था?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (फरवरी 10, 2020) को शाहीन बाग़ विरोध प्रदर्शन में बच्चों को शामिल किए जाने के मामले में सुनवाई की। देश की शीर्ष अदालत ने इस मामले में केंद्र और राज्य, दोनों ही सरकारों को नोटिस जारी किया है। शाहीन बाग़ में महिलाएँ अपने छोटे-छोटे बच्चों को भी लेकर आ रही हैं। हाल ही में 4 महीने के एक बच्चे की मौत हो गई थी, जिसे लेकर उसके परिजन जामिया नगर और शाहीन बाग़ के विरोध प्रदर्शनों में जाते थे।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे ने इस घटना पर दुःख जताया है। सीजेआई ने कहा कि हमारे मन में मातृत्व के प्रति उच्च-कोटि का सम्मान है और बच्चों के लिए उनके मन में काफ़ी चिंताएँ हैं। सीजेआई ने कहा कि बच्चों के साथ बुरा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। 30 जनवरी को शाहीन बाग़ में ठण्ड लगने से बच्चे की मौत हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की है। मुंबई की 12 वर्षीय छात्रा जेन सदावर्ते ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा था। सदावर्ते 2018 में ‘राष्ट्रीय वीरता पुरष्कार’ से सम्मानित हो चुकी हैं

वहीं मृत बच्ची की अम्मी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में भी वही सब दोहराया, जो इस्लामी कट्टरपंथी बाहर बोलते हैं।महिला के वकील ने कहा कि बच्चे स्कूल से रोते हुए घर आते हैं क्योंकि उन्हें पाकिस्तान और आतंकवादी कहा जाता है। वकील ने मुस्लिम बच्चों को लेकर ये बातें कही। सीजेआई बोबडे ने कहा कि वो इस बयान पर टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि इसका बच्ची की मौत वाले मामले से कोई लेनादेना नहीं है। सीजेआई ने वकील से कहा कि वो इस प्लेटफार्म का प्रयोग इस तरह के बयान देने के लिए नहीं कर सकता। सीजेआई ने कहा:

“क्या एक 4 महीने का बच्चा विरोध प्रदर्शन करने के लिए जा सकता है? मैं तो कहता हूँ कि सभी माँओं की इस मामले में एक राय होनी चाहिए, बच्चों के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता। कृपया आपलोग और समस्या पैदा न करें।”

सीजेआई ने कहा कि उन चीजों पर यहाँ चर्चा नहीं हो रही है। इसके बाद भी जब वकील ने अपना प्रोपेगंडा जारी रखा तो सीजेआई ने उसे टोका। जस्टिस बोबडे ने कहा कि वो नहीं चाहते कि लोग स्थिति को और बिगाड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट जैसे प्लेटफार्म का इस्तेमाल करें। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि न तो ये केस सीएए व एनआरसी से जुड़ा है और न ही बच्चों को पाकिस्तानी अथवा आतंकवादी कहे जाने पर। शाहीन बाग़ में लगभग 2 महीने से विरोध प्रदर्शन चल रहा है, जिसपर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विरोध के लिए सड़क बाधित कर के लोगों को परेशानी में नहीं डाला जा सकता है।

उस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय किशन कॉल ने पूछा कि अगर सभी व्यक्ति हर जगह विरोध प्रदर्शन करने लगे तो स्थिति क्या होगी? शाहीन बाग़ में मुस्लिम महिलाएँ विरोध प्रदर्शन पर बैठी हैं। हालाँकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि वहाँ पिकनिक मनाई जाती है और बिरयानी की पार्टी होती है।

उत्तर प्रदेश पुलिस से भिड़े CAA प्रदर्शनकारी, लाठीचार्ज कर खाली कराया मोहम्मद अली पार्क

उत्तर प्रदेश के कानपुर में सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे धरना प्रदर्शन को समाप्त कराने पहुँची पुलिस टीम पर प्रदर्शनकारियों ने पथराव कर दिया। इस दौरान पुलिस को हालात काबू करने के लिए लाठीचार्ज भी करना पड़ा। वहीं इसके बाद से इलाके में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। हालाँकि, पुलिस ने पार्क को खाली करा दिया है।

सोमवार को पुलिस फोर्स के साथ धरना स्थल पर पहुँचे प्रशासनिक अधिकारियों को देख प्रदर्शकारी महिलाओं ने सड़क पर उतरकर हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान तनावपूर्ण माहौल उत्पन्न हो गया। वहीं प्रदर्शनकारियों ने जब पुलिस पर पथराव करने की कोशिश की तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर धरने पर बैठे लोगों को खदेड़ना शुरू कर दिया और देखते ही देखते पुलिस ने पार्क को पूरी तरह से खाली करा दिया। वहीं माहौल को देखते हुए प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया है। पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ प्रदर्शनकारी महिलाओं ने चमनगंज रोड को जाम कर दिया है।

कानपुर चमनगंज के मोहम्मद अली पार्क में पिछले करीब एक महीने से सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ लोगों का धरना चल रहा था। बीते शनिवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस अधिकारियों की बीच वार्ता हुई। इसके बाद शनिवार को घोषणा कर दी गई कि समझौते के मुताबिक धरने को समाप्त कर दिया जाएगा, लेकिन घोषणा के बाद भी धरने को समाप्त नहीं किया गया और इसके बाद भी धरना स्थल पर करीब 100 की संख्या में लोग बैठे रहे। इस बात की जानकारी जैसे ही पुलिस अधिकारियों को हुई, तो वह सोमवार सुबह को ही मौके पर पहुँच गए।

आपको बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को डीआईजी अनंत देव ने दो टूक कहा था कि 80 लोगों को नोटिस देने और 200 लोगों को पाबंद करने के बाद भी धरना खत्म न हुआ तो पुलिस देशद्रोह की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी करेगी। साथ ही धरने का चेहरा बने और उपद्रवियों को पनाह देने के आरोपितों पर रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी। डीआईजी ने कहा था कि मोहम्मद अली पार्क और फूल पार्क में धरने को बाहर से लोग आकर समर्थन देने के साथ धरने पर बैठे लोगों को उकसा भी रहे हैं।

‘अनिश्चित समय के लिए कोई कैसे पूरी सड़क को जाम कर सकता है’ – शाहीन बाग पर SC की तीखी टिप्पणी

दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे धरने के ख़िलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि आप इतने लंबे समय तक कैसे किसी सड़क को रोक सकते हैं। हालाँकि कोर्ट ने इस पर किसी भी तरह का फैसला अभी नहीं सुनाया है और इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 17 फरवरी को दे दी है।

शाहीन बाग धरने के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर सोमवार दोपहर को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि विरोध ऐसा हो कि किसी दूसरे को कोई परेशानी न हो। सुनवाई को दौरान जजों ने तीखी टिप्पणी भी की और कहा कि अनिश्चित समय के लिए कोई कैसे पूरी सड़क को जाम कर सकता है।

इस मामले को लेकर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और सरकार को एक नोटिस जारी किया। हालाँकि कोर्ट ने मामले पर अपना अंतरिम फैसला सुनाने से फिलहाल इनकार कर दिया। वहीं इस मामले पर फिर से 17 फरवरी को अगली सुनवाई की जाएगी।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई दिल्ली चुनाव की वजह से टाल दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में शनिवार को मतदान को प्रभावित नहीं करना चाहता। तब न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने कहा था कि हम इस बात को समझते हैं कि वहाँ समस्या है और हमें देखना होगा कि इसे कैसे सुलझाया जाए। हम सोमवार को इस पर सुनवाई करेंगे।

बता दें कि बीजेपी नेता नंद किशोर गर्ग ने कोर्ट से दिल्ली और नोएडा को जोड़ने वाले अहम मार्ग पर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन से लोगों को आ रही समस्या पर गौर करते हुए अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया था, जिस पर प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि आप याचिका का उल्लेख करने वाले अधिकारी के पास जाएँ।

गौरतलब है कि जाम की समस्या से जूझ रहे लोगों ने पिछले दिनों मार्च निकालते हुए कहा थी कि हमें प्रदर्शन से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन सड़क खाली होनी चाहिए। चाहे तो ये लोग रामलीला मैदान, जंतर-मंतर या कहीं और प्रदर्शन करें। इन लोगों की माँग है कि धरना जल्दी से जल्दी खत्म कर सड़क खुलवाई जाए, क्योंकि इससे आम लोगों खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

शाहीन बाग में फ्री लंगर का AIMIM कनेक्शन: AAP, कॉन्ग्रेस, PFI के बाद अब ओवैसी का भी साथ

हिन्दुओं! उपकार मानो कि शाहीन बाग़ ने एक शव यात्रा के लिए रास्ता दिया है, वो चाहते तो…

जहाँ जाना है जाओ, लेकिन सड़क खाली करो: शाहीन बाग में CAA-विरोधियों के खिलाफ प्रदर्शन