Home Blog Page 5097

कॉन्ग्रेस पर ₹100 करोड़ की मानहानि का केस करेंगे सावरकर के पोते, उद्धव ठाकरे से भी कार्रवाई को कहा

वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के खिलाफ 100 करोड़ रुपए का मानहानि का केस दायर करने की बात कही है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भी कॉन्ग्रेस के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है। रंजीत सावरकर बीते साल के आखिर में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी की सार्वजनिक रूप से पिटाई करने की मॉंग भी उद्धव से की थी।

ताजा मामला महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस की मराठी भाषा की मासिक पत्रिका शिदोरी में छपे दो लेख से जुड़ा है। ​पत्रिका के फरवरी अंक में सावरकर पर दो लेख हैं। इनमें से एक लेख का शीर्षक ‘स्वातंत्र्यवीर नव्हे, माफीवीर’ (स्वातंत्र्यवीर नहीं, माफीवीर) और दूसरे का शीर्षक ‘अंधारातील सावकर’ (सावरकर के अनजाने पहलू) है। रंजीत सावरकर ने कहा है, “महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस ने सावरकर के चरित्र को धूमिल करने के लिए उनके खिलाफ आर्टिकल छापे। मैं सीएम से एक्शन लेने की अपील करता हूॅं। हमने कॉन्ग्रेस के खिलाफ दो केस दर्ज किए हैं और अब बॉम्बे हाई कोर्ट में कॉन्ग्रेस के खिलाफ 100 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा दर्ज करेंगे।”

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पहले लेख में कहा गया है कि सावरकर से जुड़े जो तमाम दस्तावेज सामने आते हैं, उन्हें देखने के बाद वह स्वातंत्र्यवीर नहीं, बल्कि माफीवीर के रूप में सामने आते हैं। यह लेख मराठी की मासिक पत्रिका ‘साम्य योग साधना’ से लिया गया है। दूसरे लेख में सावरकर के जीवन से जुड़े कुछ बेहद निजी पहलुओं को रखा गया है।

इस साल की शुरुआत में मध्य प्रदेश के भोपाल में अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस सेवा दल के प्रशिक्षण शिविर में ‘वीर सावरकर’ नाम की पुस्तिका का वितरण करने का मामला सामने आया था। इस पुस्तिका में बीजेपी पर निशाना साधने के लिए सावरकर को टारगेट करते हुए उनके आसपास की कई घटनाओं, सवालों और विवादों का जिक्र है। विनायक दामोदर सावरकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर कॉन्ग्रेस द्वारा जारी की गई विवादित पुस्तिका में दावा किया गया था, “महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के साथ हिंदू महासभा के सह-संस्थापक का शारीरिक संबंध थे।”

गौरतलब है कि दिसंबर में दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई रैली में राहुल गॉंधी ने ‘रेप इन इंडिया’ वाली टिप्पणी के लिए भाजपा की माफी की मॉंग पर पलटवार करते हुए कहा था, ‘‘संसद में भाजपा के लोगों ने कहा कि मैं अपने भाषण के लिए माफी मॉंगूॅं। मुझे कहते हैं कि सही बात बोलने के लिए माफी मॉंगो। मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है, मेरा नाम राहुल गॉंधी है। मैं सच्चाई के लिए कभी माफी नहीं मॉंगूॅंगा। मर जाऊँगा मगर माफी नहीं मॉंगूॅंगा और न कोई कॉन्ग्रेस वाला माफी मॉंगेगा।’’ इसके जवाब में राहुल सावरकर ने कहा था, “यह अच्छा है कि राहुल गॉंधी, राहुल सावरकर नहीं हैं। ऐसा होता हम सबको अपना मुॅंह छिपाना पड़ता। अब हम उम्मीद करते हैं कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपना वादा निभाएँगे। वे कई बार कह चुके हैं कि यदि किसी ने सावरकर का अपमान किया तो वे उसे सार्वजनिक रूप से पीटेंगे। मैं उम्मीद करता हूॅं कि शिवसेना ने सावरकर पर अपना स्टैंड नहीं बदला होगा।”

कॉन्ग्रेस से गठबंधन के चलते CM उद्धव के पास वीर सावरकर के लिए समय नहीं, रंजीत सावरकर लौटे खाली हाथ

8 दिन के लिए जेल भेजी गई पायल रोहतगी, लोगों ने पूछा- सावरकर के अपमान पर राहुल गाँधी की गिरफ्तारी कब

MP में वीर सावरकर की फ़ोटो वाली कॉपियाँ बच्चों को बाँटने पर प्रधानाचार्य निलंबित, BJP ने कॉन्ग्रेस को घेरा

NDTV का प्रोपेगेंडा: बीजेपी को दागदार बताने के लिए ग्राफ में 39% को 81% से बड़ा दिखाया

यह जगजाहिर है कि ख़बरों के नाम पर धुर वामपंथी चैनल NDTV दर्शकों के सामने प्रोपेगेंडा पेश करता है। आए दिन खुद की झूठी खबरों के पकड़े जाने के बावजूद वह इस कारस्तानी से बाज नहीं आ रहा है। गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान उसने आँकड़ों का ग्राफ गलत तरीके से पेश किया ताकि यह भ्रम पैदा हो कि सबसे ज्यादा दागी सांसद बीजेपी के हैं।

यह कार्यक्रम सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि सभी राजनीतिक दलों को अब अपनी साइट और सोशल मीडिया एकाउंट पर आपराधिक नेताओं की प्रोफाइल अपडेट करनी होगी। इसे लेकर NDTV ने कुछ गेस्टों के साथ चर्चा की। कार्यक्रम के एंकर विष्णु सोम हैं। चर्चा में ADR इंडिया के संस्थापक प्रोफेसर जगदीप छोकर, पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी, पूर्व सांसद कलिकेश नारायण सिंह देव और बीजेपी के विवेक रेड्डी शामिल थे। इसी दौरान एक ऐसा ग्राफिक दिखाया गया जिससे प्रतीत होता है कि अन्य दलों की तुलना में आपराधिक आरोपों वाले सबसे ज्यादा सांसद बीजेपी के हैं।

एडीआर के आँकड़ों के आधार पर जो ग्राफिक एनडीटीवी ने दिखाया उसमें पॉंच पार्टियों की तुलना की गई थी। इसमें बीजेपी, कॉन्ग्रेस, जदयू, डीएमके और तृणमूल कॉन्ग्रेस शामिल हैं। इन दलों में सबसे कम आपराधिक आरोपों वाले सासंद करीब 39 फीसदी बीजेपी के हैं, जबकि सबसे ज्यादा क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले सांसद 81 फीसदी जदयू के हैं। कॉन्ग्रेस के सांसदों दागदार सांसदों का प्रतिशत 57 और DMK तथा टीएमसी का क्रमश: 43 एवं 41 फीसदी है। इन आँकड़ों के आधार पर तैयार ग्राफ में बीजेपी का हिस्सा सबसे छोटा और जदयू का सबसे बड़ा होना चाहिए। लेकिन, सबसे बड़ा ग्राफ बीजेपी का दिखाया गया।

NDTV के बीजेपी के कम प्रतिशत को ग्राफ में सबसे ज्यादा दिखाया है

यह बताता है कि बीजेपी को लेकर एनडीटीवी किस कदर पूर्वाग्रह से ग्रसित है और कॉन्ग्रेस को पाक-साफ दिखाने के लिए वह कैसे चीजों को गलत तरीके से पेश करता है। गौरतलब है कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक पार्टियों को दिशा-निर्देश जारी करते हुए उनसे उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने को कहा था। कहा था कि वे आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को टिकट देने का कारण भी बताएँ। साथ ही कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को उम्मीदवार के आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में तमाम जानकारी अपने आधिकारिक फेसबुक और ट्विटर हैंडल पर भी देनी होगी।

एडीआर की रिपोर्ट बताती है कि अलग तरह की राजनीति का दावा कर अस्तित्व में आई आप ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में जिन लोगों को उतारा था उनमें से 60 फीसदी दागी हैं। 51 फीसदी पर तो गंभीर आपराधिक आरोप हैं। रिपोर्ट के अनुसार आप के 70 उम्मीदवारों में से 42 के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। 36 आप उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

NDTV में आखिर क्यों हाशिए पर ढकेले गए रवीश कुमार

NDTV पत्रकार की दलील: स्कूली छात्रों को CAA के बारे में बताना राजनीति है, क्योंकि इसे बड़े लोग नहीं समझ सके

सरकारी योजनाओं में नहीं होगा फर्जीवाड़ा, घुसपैठ रुकेगा: NDTV के इस वीडियो से समझें NPR के फायदे

राहुल, सोनिया, प्रियंका अब लाइन में खड़े होंगे एयरपोर्ट पर! गृह मंत्रालय को नागरिक उड्डयन ने भेजा प्रस्ताव

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी को भी अब विमान से यात्रा करने के लिए आम हवाई यात्री की तरह एयरपोर्ट की सुरक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा। अब उन्हें भी कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना होगा। इससे पहले, इन तीनों को सुरक्षा जाँच को दरकिनार करते हुए एयरक्राफ्ट के बोर्डिंग तक कार से जाने की अनुमति प्राप्त थी।

बता दें कि नवंबर में ही मोदी सरकार ने सोनिया गाँधी, उनके बेटे, वायनाड सांसद और कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी व प्रियंका गाँधी को मिला हुआ एसपीजी सुरक्षा कवच हटाने का निर्णय लिया था। अब उनकी सुरक्षा का स्तर घटा कर ज़ेड प्लस कर दिया गया है। यानी इनकी सुरक्षा अर्द्धसैनिक बल सीआरपीएफ (सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स) की ज़िम्मेदारी है। सोमवार (11 नवंबर, 2019 को) को सीआरपीएफ़ ने एसपीजी जवानों से तीनों की सुरक्षा के संबंध में जानकारी ली थी। फिलहाल एसपीजी सीआरपीएफ़ के सहायक की भूमिका में है।

जानकारी के मुताबिक एसपीजी कवर वापस लेते ही विशेषाधिकारों को समाप्त हो जाना चाहिए था। हालाँकि एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया और ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सेक्योरिटी ने अनौपचारिक रूप से गाँधी परिवार को ये सुविधा इस्तेमाल करने दिया था। लेकिन हाल ही में उनकी कार एयरपोर्ट के एक अन्य कार से टकरा गई। जिसके बाद एयरपोर्ट के सुरक्षा अधिकारियों ने FIR दर्ज करने की धमकी दी है।

इस हाई प्रोफाइल मामले को CRPF की मदद से सँभाल लिया गया। लेकिन नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो की तरफ से कहा गया कि आगे से इस तरह की घटनाएँ न हों और वो अपनी विशेष सुरक्षा के दायरे में रहें। अब अगर गृह मंत्रालय नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो के प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो गाँधी को हवाई अड्डे की सुरक्षा से गुजरना होगा और घरेलू या अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सवार होने के लिए अन्य यात्रियों के साथ कतार में खड़ा होना होगा।

उल्लेखनीय है कि एसपीजी सुरक्षा व्यवस्था वापस लिए जाने के विरोध में कॉन्ग्रेस सदस्यों ने लोकसभा में जमकर हंगामा किया था। लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा था, “सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी सुरक्षा पाने वाले मामूली लोग नहीं हैं। वाजपेयी जी ने गाँधी परिवार को एसपीजी सुरक्षा दी थी। 1991 से अब तक एनडीए दो बार सत्ता में आई, लेकिन उनकी एसपीजी सुरक्षा कभी नहीं हटाई गई।”

सिखों का नरसंहार करने वालों ने पूछा- पुलवामा के आतंकी हमले से किसे हुआ फायदा?

इकोनॉमी में कॉन्ग्रेस का 6.30 लाख का योगदान, जमानत बचाने वाले 3 नेताओं को शो कॉज नोटिस!

पटेल ही नहीं राजेंद्र प्रसाद, टंडन, करियप्पा, राम… किसी को नहीं चाहते थे नेहरू

भीमा कोरेगाँव मामला: अर्बन नक्सलियों को नहीं मिली राहत, बॉम्बे HC ने अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

बॉम्बे उच्च न्यायलय ने भीमा कोरेगाँव हिंसा से जुड़े एल्गार परिषद केस में शुक्रवार को कथित नागरिक अधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबडे को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबडे पर माओवादियों से सम्पर्क रखने के आरोप हैं।

हालाँकि न्यायमूर्ति पीडी नाइक ने उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं को अस्वीकार कर दिया है तथापि आरोपियों को चार हफ्ते की मोहलत जरूर दी है, जिससे वे सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने के लिए अपील कर सकें।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक जनवरी 2018 को पुणे जिले के भीमा कोरेगाँव में हिंसा होने के बाद माओवादी संपर्कों तथा कई अन्य आरोपों में नवलखा, तेलतुंबडे और कई अन्य कार्यकर्ताओं पर पुणे पुलिस ने मामला दर्ज किया था। पुणे पुलिस ने अपने आरोपों में कहा है कि 31 दिसंबर 2017 को पुणे में हुए एल्गार परिषद सम्मेलन में आरोपितों गौतम नवलखा आदि ने उत्तेजक भाषण और भड़काऊ बयान दिए, जिससे कारण अगले दिन कोरेगांव भीमा में जातीय हिंसा भड़की।

पुणे पुलिस ने इन पर आरोप लगाया था कि एलगार परिषद को माओवादियों का समर्थन मिला हुआ था। तेलतुंबडे और नवलखा ने पुणे की एक सत्र अदालत द्वारा उनकी याचिकाओं को खारिज किए जाने के बाद पिछले साल नवंबर में अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था।

पिछले दिसंबर में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत याचिकाओं के निस्तारण की सुनवाई लंबित रहने के कारण गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी।

ध्यातव्य है कि पुणे पुलिस इस मामले की जाँच कर रही थी लेकिन केंद्र सरकार ने पिछले महीने इसकी जाँच पुणे पुलिस से लेकर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को सौंप दी।

भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले की जाँच में महाराष्ट्र सरकार के हस्तक्षेप से पुणे पुलिस नाख़ुश: रिपोर्ट

लड़े दलित और कथित अल्पसंख्यक, लेकिन दलित बनाम ब्राह्मण कह कर आग लगाई जाती है: भीमा कोरेगाँव का सच

भीमा कोरेगाँव: बाबासाहेब अंबेदकर ने नहीं दी थी ब्राह्मणों को गाली, झूठ बोलते हैं अर्बन नक्सली

किडनैपिंग और वीडियो कॉल से देह व्यापार के धंधे का खुलासा, मेघा बनी बांग्लादेशी बेगम खातून थी मास्टरमाइंड

इंदौर में फर्जी पासपोर्ट बनवाकर रहने वाले तीन बांग्‍लादेशी गिरफ्तार हुए हैं। आरोपित पहचान बदलकर ना सिर्फ इंदौर में रह रहे थे बल्कि देह व्यापार और नकली नोट का धंधा भी चला रहे थे। इस गिरोह की सरगना बांग्लादेशी महिला है। इसका असली नाम बेगम खातून है। काम की तलाश में मुंबई पहुँची बेगम खातून ने नाम बदलकर मेघा रख लिया और यहाँ देह व्यापार में लिप्त हो गई। वह 10 साल पहले यहाँ आई थी। वो बिना पासपोर्ट के ही देश में घुसी थी।

यहाँ आकर उसने एक ड्राइवर से प्रेम विवाह कर लिया और जाली नोट भी छापने लगी। इसके बाद उसने बांग्लादेश और भारत में अलग-अलग पासपोर्ट बनवा लिए थे। इसने बांग्लादेश के अलावा फर्जी दस्तावेजों के जरिए भोपाल से मेघा नाम से एक पासपोर्ट भी बनवा लिया था। इन दस्तावेजों को प्राप्त करने के लिए बेगम खातून ने फर्जी मार्कशीट भी बनवाई। आरोपितों के पास से नकली सील, मार्कशीट, जाली नोट, प्रिंटर, फोटो कॉपी मशीन समेत कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद हुई हैं। 

बेगम खातून की तीन साल पहले शिर्डी में किशोर से मुलाकात हुई थी। उसने पहले किशोर को अपना नाम मेघा ही बताया लेकिन बाद में उसे पता चला गया कि वह बांग्लादेश से है। दोनों ने शादी कर ली। इसके बाद ये दोनों अहमदाबाद, मुंबई, शिर्डी, नासिक, बेंगलुरु, पीथमपुर में घूमते रहे। एएसपी डॉ प्रशांत चौबे ने बताया कि वीजा की अवधि खत्म हुई तो खातून ने आठवीं की फर्जी मार्कशीट बनवाई। इस आधार पर पासपोर्ट तैयार कर मेघा के नाम से रहने लगी। रेंट एग्रीमेंट के जरिए उसने आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज में इंदौर का पता अपडेट करवा लिया।

इसके अलावा लीमा व रोनी को भी गिरफ्तार किया गया है। वो दोनों भी बांग्लादेशी नागरिक हैं और बिना पासपोर्ट अवैध रूप से भारत में आए थे। खातून की मुलाकात इसी साल जनवरी में रोनी शेख व लीमा से हुई थी, जिसके बाद उसने इन दोनों को भी देह व्यापार से जोड़ लिया। आरोपित किशोर व मेघा ने बताया कि वर्ष 2018 में विश्वास नगर में रहते थे। इस दौरान दोनों कलर प्रिंटर और फोटो कॉपी मशीन के माध्यम से 100, 200, 500 के जाली नोट छाप चुके हैं।

एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र ने बताया कि हीरा नगर इलाके में स्कूल कर्मचारी अनिल पाल का अपहरण हो गया था। मामले में पुलिस ने किशोर खंडारे निवासी वाशिम महाराष्ट्र, मेघा खंडारे निवासी दत्त नगर, रोनी शेख, लीमा हलधर को गिरफ्तार किया है। आरोपितों ने अनिल पाल को बंधक बनाकर पीटा और उसकी पत्नी को कॉल कर दो लाख रुपए की फिरौती माँगी। उन्होंने कनपटी पर पिस्टल रख वीडियो कॉल कर पत्नी को डराया भी था। जिसके बाद पत्नी ने वीडियो का स्क्रीन शॉट लेकर पुलिस को सौंप दिया था। पुलिस इस पर कार्रवाई करते हुए मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपितों को गिरफ्तार किया।

नाम बदलकर भिलाई में रह रही बांग्लादेशी महिला गिरफ्तार, स्थानीय युवक से विवाह कर दे रही थी पुलिस को झाँसा

फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी के साथ बांग्लादेशी मोहम्मद बिलाल धनबाद से गिरफ्तार

6 महीने में 2 करोड़ रुपए की ठगी: बांग्लादेशी सलीम मोहम्मद को CCTV की मदद से पुलिस ने दबोचा

61000 किमी की यात्रा, वीरगति प्राप्त 40 जवानों के परिजनों का बाँटा दर्द, उनके घरों की मिट्टी ले पुलवामा पहुॅंचे जाधव

बीते साल 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। हमले की पहली बरसी पर पूरा देश इन जवानों को नमन कर रहा है। पुलवामा में सीआरपीएफ के लेथपुरा कैंप में स्थित स्मारक पर श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान महाराष्ट्र के उमेश गोपीनाथ जाधव विशिष्ट अतिथि थे।

अरसे से बेंगलूरू में रह रहे गोपीनाथ ने इस हमले के बाद एक संकल्प लिया था। अपने संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने करीब 61 हजार किमी की यात्रा की। पुलवामा में वीरगति पाने वाले 40 जवानों के घर गए। उनके परिजनों के साथ दर्द बॉंटा। उनके घरों की मिट्टी कलश में इकट्ठा की। शुक्रवार को यह कलश उन्होंने सेना को सौंप दी।

गोपीनाथ ने अपनी यात्रा पिछले वर्ष 9 अप्रैल को बेंगलूरू से शुरू की थी। उनकी यात्रा को सीआरपीएफ के डीआइजी सनंद कमल ने हरी झंडी दिखाई थी। उमेश बताते हैं कि वह पुलवामा हमले वाले दिन वे अजमेर से अपने घर बेंगलूरू लौट रहे थे। जयपुर एयरपोर्ट पर लगी टीवी स्क्रीन पर उन्होंने सीआरपीएफ पर हमले की खबर देखी। इसके बाद ही उन्होंने जवानों के परिजनों के लिए कुछ करने का संकल्प लिया था।

अपनी इस यात्रा को ‘तीर्थ यात्रा’ मानने वाले जाधव ने बताया, “मुझे गर्व है कि मैंने पुलवामा में वीरगति प्राप्त करने वाले सभी जवानों के परिवार से मुलाकात की। उनका आशीर्वाद लिया। इस हमले में माता-पिता ने अपने बेटे को खो दिया, पत्नियों ने अपने पति को खो दिया, बच्चों ने अपने पिता को खो दिया, दोस्तों ने अपने दोस्तों को खो दिया। मैंने उनके घरों और उनके श्मशान घाटों से मिट्टी इकट्ठा की।” 

वीरगति प्राप्त करने वाले जवानों की याद में बनाए गए स्मारक का लेथपुरा कैंप में शुक्रवार को उद्घाटन किया गया। सीआरपीएफ के अतिरिक्त महानिदेशक जुल्फिकार हसन ने गुरुवार को स्मारक स्थल का दौरा करने के बाद कहा था, ‘यह उन बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि देने का तरीका है जिन्होंने हमले में अपनी जान गॅंवाई।’ स्मारक में वीरगति प्राप्त करने वाले जवानों के नामों के साथ उनकी तस्वीरें भी हैं। साथ ही केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का ध्येय वाक्य ‘सेवा और निष्ठा’ भी लिखा है। जाधव द्वारा एकत्र की गई मिट्टी को भी स्मारक पर रखा गया है।

सिखों का नरसंहार करने वालों ने पूछा- पुलवामा के आतंकी हमले से किसे हुआ फायदा?

पुलवामा हमले की पहली बरसी: वीरगति की 11 कहानियाँ, कोई जन्मदिन मनाकर लौटा था तो किसी की थी सालगिरह

सिखों का नरसंहार करने वालों ने पूछा- पुलवामा के आतंकी हमले से किसे हुआ फायदा?

पुलवामा आतंकी हमले की पहली बरसी पर आज जहाँ पूरा देश सीआरपीएफ के जवानों को याद कर रहा है और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है, वहीं कॉन्ग्रेस नेता ने अपनी छोटी सोच को एक बार फिर से उजागर किया है। पुलवामा हमले के बाद राहुल गाँधी हर जगह ये ज्ञान देते नजर आए थे कि पुलवामा हमले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, लेकिन उन्होंने खुद ही मोदी विरोध के चक्कर में भारतीय सेना पर सवाल उठाए। अब इस हमले की पहली बरसी पर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने एक ट्वीट कर साबित कर दिया है कि उनकी विकृत सोच साल भर बाद भी नहीं बदली है।

उन्होंने ट्वीट कर तीन सवाल पूछे हैं। पहले सवाल में उन्होंने पूछा है कि इस आतंकी हमले से सबसे ज्यादा फायदा किसे हुआ? इस सवाल का साफ मतलब है कि कॉन्ग्रेसियों को लगता है कि ये हमला भाजपा ने ही करवाया था क्योंकि उसको फायदा मिलता। उस समय भी कॉन्ग्रेस के कई नेताओं समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग में शिकायत दी थी कि पीएम मोदी पुलवामा हमले और एयरस्‍ट्राइक का चुनावी फायदा लेने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गाँधी अपने पहले सवाल के माध्यम से यह कहना चाह रहे हैं कि चूँकि बीजेपी पुलवामा हमले को चुनाव में भुनाना चाहती थी, इसलिए उसने यह हमला करवाया था।

राहुल गाँधी आज पुलवामा हमले पर नफे-नुकसान की ओछी राजनीति कर रहे हैं। इस हिसाब से तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि महात्मा गाँधी की हत्या का फायदा किसे हुआ? लाल बहादुर शास्त्री जी की हत्या का लाभ किसे हुआ? इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद सिखों का नरसंहार कराने का लाभ किसे हुआ? राजीव गाँधी की हत्या के बाद सियासी फायदा किसने उठाया था? खैर, देश ने कॉन्ग्रेस की इस शर्मनाक हरकत का जवाब लोकसभा चुनाव 2019 में दे दिया है, लेकिन ये अभी भी सेना के शौर्य पर सवाल करके गंदी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे।

कॉन्ग्रेस नेता ने अपने दूसरे सवाल में पूछा कि पुलवामा आतंकी हमले की हुई जाँच में क्या निकला? वहीं उनका तीसरा सवाल है कि बीजेपी सरकार में सुरक्षा में चूक के लिए किसकी जवाबदेही तय हुई? अंध-विरोध के चक्कर में ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर भी राहुल गाँधी ने बेतुके बयान देकर ओछी राजनीति का परिचय दिया है। राहुल गाँधी ने इस ट्वीट से अपनी संवेदनहीनता को प्रमाणित करने का काम किया है। एक सच्चे देशभक्त होने के नाते तो उन्हें तो सेना के वीरों पर गर्व होना चाहिए, जो जान को हथेली पर रखकर वर्दी धारण करते हैं और देश की रक्षा करते हैं। मगर वो तो इस पर आज भी राजनीतिक रोटियाँ सेंक रहे हैं। उनके इस ट्वीट के बाद तो लोग यह भी सवाल कर रहे हैं कि कॉन्ग्रेस भारत की राजनैतिक पार्टी है या पाकिस्तान की, जो आज बलिदान दिवस पर भी ओछी राजनीति कर रही है।

वैसे कुछ सवाल तो लोगों के पास भी है, जिसका जवाब राहुल गाँधी को देना चाहिए। जब देश का बँटवारा हुआ तब सरकार किसकी थी? जब पाक अधिकृत कश्मीर बना तब सरकार किसकी थी? जब मुंबई पर हमला हुआ तब सरकार किसकी थी? जब चीन ने ज़मीन हड़पी थी, तब सरकार किसकी थी? जब वीर सैनिकों के सर काट के पाकिस्तानी ले गए थे तब किसकी सरकार थी? जब बोफोर्स का घोटाला हुआ तब सरकार किसकी थी?

एक तरफ जहाँ पूरा देश जाबांजों की शहादत पर गम में डूबा है, वहीं दूसरी तरफ राहुल गाँधी ने दिखा दिया कि उनके लिए देशभक्ति से ऊपर राजनीति है। तभी तो इस मौके पर भी वो राजनीति करने से बाज नहीं आए। उन्होंने साबित कर दिया कि उन्हें तो बस अपनी राजनीति चमकाने से मतलब है। वैसे ये पहली बार नहीं है, जब कॉन्ग्रेस नेताओं ने इनकी शहादत पर सवाल उठाए हों या फिर इनका मजाक उड़ाया हो। उनके ट्वीट से उनकी मानसिकता साफ झलकती है, लेकिन हैरत की बात तो यह भी है कि कॉन्ग्रेस के किसी नेता की इतनी हिम्मत नहीं होती कि उनके इस तरह की बयान की निंदा कर सके। वैसे करेंगे भी कैसे, पूरी पार्टी को ही वीरों और भारतीय सेना के अपमान करने पर शर्म नहीं आती है।

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह से लेकर, सलमान खुर्शीद, नवजोत सिंह सिद्धू और कमलनाथ तक सब ने लगातार इस पर सवाल उठाए। ये तो इनके सीनियर नेताओं के कुकर्म हैं, छोटे नेताओं को तो गिना भी नहीं जा रहा। कॉन्ग्रेस से राज्यसभा संसद बीके हरिप्रसाद ने इस हमले में मोदी और इमरान खान की मिलीभगत बताते हुए कहा था, “पुलवामा अटैक के बाद के घटनाक्रम पर यदि आप नजर डालेंगे तो पता चलता है कि यह पीएम नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच मैच फिक्सिंग थी।”

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह जैसे कई नेता भारतीय सेना और IAF का मजाक बनाते दिखे थे। दिग्विजय सिंह ने पुलवामा हमले को ‘दुर्घटना’ बताया तो वहीं नवजोत सिंह सिद्धू जैसे कुछ नेता तो एयर स्ट्राइक पर ही यह कहकर सवाल उठाया था कि आतंकी मारने गए थे या पेड़ गिराने? गाँधी परिवार के बेहद क़रीबी और इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने अपना पाकिस्तान प्रेम दिखाते हुए कहा था कि पुलवामा हमले के लिए पूरे पाकिस्तान को दोषी ठहराना गलत है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई हमले के लिए भी पूरे पाकिस्तान पर आरोप लगाना सही नहीं है।

राहुल गाँधी की राजनीति से इतर पुलवामा हमले के एक साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीरों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारत हमेशा हमारे बहादुरों और उनके परिवारों का आभारी रहेगा जिन्होंने हमारी मातृभूमि की संप्रभुता और अखंडता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। देश उनकी शहादत को नहीं भूलेगा। वहीं सीआरपीएफ ने पुलवामा के वीरों को शत्-शत् नमन करते हुए लिखा, “तुम्हारे शौर्य के गीत, कर्कश शोर में खोए नहीं। गर्व इतना था कि हम देर तक रोए नहीं।”

पुलवामा हमले की पहली बरसी: वीरगति की 11 कहानियाँ, कोई जन्मदिन मनाकर लौटा था तो किसी की थी सालगिरह

पीएम मोदी के खिलाफ की अपमानजनक टिप्पणी, राज्यसभा के सुरक्षा अधिकारी का ओहदा घटा

राज्यसभा के उप निदेशक सुरक्षा (सुरक्षा) उरजुल हसन को डिमोट यानी ओहदा कम कर दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कुछ केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के खिलाफ सोशल मीडिया में अपमानजनक पोस्ट किए थे। हसन के खिलाफ राज्यसभा सेवा नियम 1957 और केंद्रीय लोक सेवा (आचरण) नियमों के तहत कार्रवाई की गई है। यह नियम कर्मचारियों को वैसी गतिविधियों में शामिल होने से रोकता जिनसे उनकी राजनीतिक तटस्थता प्रभावित होती है।

12 फरवरी को जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है, “उरजुल हसन पर प्रधानमंत्री और कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक पोस्ट करने का आरोप है। उन्होंने सक्रिय राजनीति से जुड़े पोस्ट को सोशल मीडिया पर शेयर भी किया था। राजनैतिक तटस्थता बनाए रखने में नाकाम रहने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।” हसन को इस मामले में शुरुआती जॉंच के बाद निलंबित कर दिया गया था। उन्हें जून 2018 में निलंबित किया गया था। ताजा आदेश के बाद उन्हें डिप्टी डायरेक्टर सिक्योरिटी से अगले 5 वर्षों के लिए सिक्योरिटी अफसर की पोस्ट पर डिमोट किया गया है। इस दौरान उन्हें वेतन में वृद्धि का लाभ नहीं मिलेगा। मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि इस अधिकारी को असल में वरिष्ठता क्रम में कुल 15 वर्षों की हानि उठानी होगी।

हसन का निलंबन 10 फरवरी को समाप्त कर दिया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार डिमोशन की प्रक्रिया 10 फरवरी से लागू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा सचिवालय पिछले 9 से 10 महीने से हसन की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। राज्यसभा के सभापति एम.वेंकैया नायडु ने अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। आदेश में ये भी कहा गया था कि दोषी अधिकारी फिर से अपने वरिष्ठ पद तक नहीं पहुॅंच सकेंगे।

‘तुम्हारा चेहरा बिगाड़ दूँ, तो तुम क्या कर लोगे’: महाराष्ट्र में मेडिकल सर्वे टीम पर एसिड अटैक

महाराष्ट्र के वर्धा जिले के हिंगणघाट में प्राध्यापिका को पेट्रोल छिड़ककर जलाने की घटना के बाद अब राज्य के सावनेर में महिला डॉक्टर पर एसिड हमले की घटना सामने आई है। गुरुवार (फरवरी 13, 2020) की दोपहर हुए इस हमले में महिला डॉक्टर के साथ दो अन्य भी झुलस गए। इनमें एक 14 साल की नाबालिग है।

जानकारी के मुताबिक कि हमलावर नीलेश कान्हेरे ने “तुम्हारा ऐसा चेहरा बिगाड़ दूँ, तो तुम क्या कर लोगे?” कहते हुए महिला डॉक्टर और लेक्चरर के चेहरे की तरफ एसिड फेंका। हालाँकि महिला ने उससे बचने की कोशिश की और काफी हद तक वो इसमें कामयाब भी हुई। उसने अपने चेहरे को तो एसिड अटैक से तो बचा लिया, लेकिन एसिड के कुछ छींटे उसके दाहिने हाथ पर जा गिरे।

दरअसल आरोपित नीलेश ने महिला डॉक्टर के करीब जाकर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद वो वहाँ से जाने लगी तो आरोपित ने उसका पीछा करते हुए इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस का कहना है कि आरोपित के पास बाथरूम साफ करने वाली एसिड थी। तीनों घायलों को नागपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

उनका कहना है कि तीनों के चेहरे और शरीर के अन्य हिस्से मामूली रूप से झुलस गए हैं। इस हमले में महिला डॉक्टर के साथ साथ एक मरीज भी घायल हो गया। यह हादसा उस समय हुआ जब वो गुरुवार को नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (NACO) के प्रोजेक्ट के तहत टीम सर्वे करने नागपुर से सटे सावनेर गई थी। GMCH के डॉक्टरों की पाँच सदस्यीय टीम यौन-संक्रमित संक्रमण (STI) और प्रजनन पथ संक्रमण (RTI) पर एक सर्वेक्षण और स्क्रीनिंग परियोजना का काम कर रही थी।

घटना के बाद कलेक्टर रवींद्र ठाकरे ने कहा कि वह एसिड और पेट्रोल की उपलब्धता और ट्रांसपोर्टेशन के खिलाफ सख्त नियम लाने वाले हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि वो इस तरह के हमलों के खिलाफ जागरूकता अभियान भी चलाएँगे। बताया जा रहा है कि घटना के बाद स्थानीय लोगों ने आरोपित को पकड़ कर बुरी तरह से पिटाई कर दी और फिर पुलिस के हवाले किया। 

घटना के बाद सावनेर थाने के सामने भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। नागरिक आरोपित के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की माँग पर अड़ गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय को सूचना दी गई। एडिशनल एसपी मोनिका राऊत सावनेर पहुँची। उन्होंने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि जाँच की जा रही है। जानकारी के मुताबिक घटना के समय आरोपित नशे की हालत में था। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसका कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड तो नहीं है।

बता दें कि नीलेश बूचड़खाने पर काम करना सीख रहा था, लेकिन कुछ समय पहले ही उसे निकाल दिया गया था। उसने अपने दोस्तों के साथ सिनेमाहॉल में टॉयलेट साफ करना का काम करता था। इसके लिए वो एसिड का इस्तेमाल करता था और बताया जा रहा है कि इसमें कुछ एसिड उसने बचा लिए थे। इससे वो उस आदमी के टू व्हीलर के ऊपर अटैक करना चाहता थाा, जिसके अंदर उसने काम किया था, लेकिन उसने डॉक्टरों को देखा और उन पर हमला कर दिया।

एडिशनल एसपी मोनिका राउत ने कहा कि आरोपित से पूछताछ की जा रही है, लेकिन वो लगातार अपने बयान बदल रहा है, जिससे काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा, “हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उसके हमले का कारण क्या है और उसे ये एसिड कहाँ से मिला। पूछताछ में उसने कई एसिड स्पालयर्स के नाम बताए, लेकिन सभी फर्जी निकले।”  

एसिड अटैक सर्वाइवर का दीपिका ने TikTok पर उड़ाया मजाक… JNU कांड के बाद फिर पड़ रही गाली

आरिफ, शाहनवाज, शरीफ, आबिद ने एसिड से जलाया… क्योंकि पीड़िता ने रेप केस वापस लेने से किया इनकार

छपाक कैसा होता होगा? कोई चंदा बाबू से पूछे…

सुपर मॉम जिसने कहा था- आप मंगल ग्रह पर फँस गए तो भी भारतीय दूतावास आपकी मदद करेगा

अपने बच्चों के लिए तो मॉं सुपर मॉम होती हैं। लेकिन, ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि कोई महिला देश के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करते-करते सुपर मॉम का दर्जा हासिल कर ले। लेकिन, वह अलग ही मिट्टी की बनी थी। विदेश मंत्री बनीं तो कहा कि अग़र आप मंगल ग्रह पर भी फँस गए तो भी भारतीय दूतावास आपकी मदद करेगा। हाल में कोरोना वायरस से घिरे चीनी शहर वुहान से भारतीय छात्रों को निकालना इसी रीति-नीति का हिस्सा था।

हम बात कर रहे है देश की विदेश मंत्री रहीं दिवंगत सुषमा स्वराज का, जिनका आज जन्मदिन है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री रहीं सुषमा ने दूर-दराज देशों में फँसे अपने लोगों को भारत वापसी करवाने में अहम भूमिका निभाई थी। चाहे वह पाकिस्तान से गीता की वापसी हो ​या फिर युद्धग्रस्त यमन से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी वे लोगों की मदद के लिए तत्पर रहती थीं। इसी सक्रियता के कारण ही वॉशिंगटन पोस्ट ने उन्हें ‘सुपर मॉम’ के नाम से नवाजा था।

एक प्रखर वक्ता से कुशल राजनेत्री का सफर तय करने वाली पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 25 साल की उम्र में ही विधायक बन गईं थीं। जब 1977 में जॉर्ज फर्नां​डीस ने जेल से लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन भरा तो सुषमा ही दिल्ली से मुजफ्फरपुर पहुॅंचीं और हथकड़ियों में जकड़ी जॉर्ज की तस्वीर दिखा प्रचार किया। उन दिनों ‘जेल का फाटक टूटेगा, जॉर्ज हमारा छूटेगा’ का उनका दिया नारा सबकी ज़ुबान पर था। हालांकि वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके दिखाए मार्गों पर आज भी देश उसी संकल्प के साथ चल रहा है, जो सुषमा ने अपने जीते जी लिए थे।

उनके लिए संकल्प का असर पिछले दिनों बखूबी देखने को मिला कि जब वुहान में फँसे भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकाला गया। वहीं पाकिस्तान ने अपने छात्रों को उनके हाल पर छोड़ दिया। हाल ही में इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें एक पाकिस्तानी छात्र कहता सुनाई पड़ रहा था, “ये भारतीय छात्र हैं और ये बस इन्हें लेने आई है, जो इनके दूतावास ने भेजी है। वुहान की यूनिवर्सिटी से इस बस से इन छात्रों को एयरपोर्ट ले जाया जाएगा और वहाँ से फिर इन्हें इनके घर पहुँचाया जाएगा। बांग्लादेश वाले भी आज रात यहाँ से ले जाए जाएँगे। एक हम पाकिस्तानी हैं, जो यहाँ पर फँसे हैं। जिनकी सरकार कहती है कि आप मरो या जियो, हम आपको नहीं निकालेंगे। शेम ऑन यू पाकिस्तान, सीखो भारत से कुछ सीखो।”

सुषमा के जन्मदिवस से एक दिन पूर्व यानी 13 फरवरी को भारत सरकार ने प्रवासी भारतीय केंद्र और विदेशी सेवा संस्थान का नाम बदलकर दिवंगत सुषमा स्वराज के नाम पर रखने की घोषणा की थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि, सरकार ने प्रवासी भारतीय केंद्र का नाम सुषमा स्वराज भवन और विदेशी सेवा संस्थान का नाम सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस रखने का फैसला किया है। एक महान शख्सियत को दी गई श्रद्धांजलि हमें हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

बीते साल अनंत ​यात्रा पर निकलने से महज तीन घंटे पहले उनके द्वारा अनुच्छेद 370 हटाने पर किया गया आखिरी ट्वीट यह दर्शाता है कि, अपने विचारों के प्रति सुषमा स्वराज कितनी प्रतिबद्ध थीं। खराब स्वास्थ्य के कारण वो भले कुछ दिनों से सक्रिय राजनीति से दूर थीं, लेकिन वह अपने विचारों को लेकर अंतिम क्षण तक सक्रिय बनी रहीं थीं। उन्होंने अपने आखिरी ट्वीट में कहा था, “प्रधानमंत्री जी-आपका हार्दिक अभिनंदन। मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी।”

इस ट्वीट के करीब तीन घंटे बाद ही 6 अगस्त 2019 को भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके द्वारा किए गए कार्यों को देश हमेशा याद रखेगा। इस साल गणतंत्र दिवस पर सुषमा स्वराज को मरणोपरांत पद्म विभूषण से नवाजा गया। उनके साथ यह सम्मान जॉर्ज फर्नांडीस को भी मिला, जिनकी हथकड़ी लगी तस्वीरें लेकर कभी वे मुजफ्फरपुर गई थीं।

सुषमा स्वराज की आखिरी इच्छा पूरी, बेटी बाँसुरी ने हरीश साल्वे को दिया फीस का ‘एक रुपया’

सुषमा की मृत्यु के बाद अब खुला यह राज: उन्होंने कहा था- उनकी किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी अगर विदेश में हुई तो…

सुषमा स्वराज: बेल्लारी की नायिका, जिसने कहा था-हॉं, हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि धारा 370 हटाने की बात करते हैं