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दिल्ली चुनाव ख़त्म होते ही ठंडा पड़ा जोश: रामलीला मैदान शिफ्ट होने को तैयार शाहीन बाग़ के उपद्रवी

शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों का जोश ठंडा हो गया है क्योंकि दिल्ली चुनाव बीत गया है। मतदान संपन्न होने के साथ ही अब सीएए के नाम पर विरोध प्रदर्शन कर रही मुस्लिम महिलाएँ वहाँ से कहीं और शिफ्ट होने के लिए तैयार हो गई हैं। हालाँकि, वो वहाँ से हटने के लिए कोई न कोई बहाना ढूँढ रहे थे क्योंकि उनका इरादा दिल्ली चुनाव के दौरान चर्चा में रहना था। इस विरोध प्रदर्शन को विदेश से फंडिंग मिलने के कई आरोप लगे थे।

ईडी मामले की जाँच कर रही है, जिसके तार आम आदमी पार्टी के संजय सिंह तक जुड़ते नज़र आ रहे हैं। ओवैसी की पार्टी के नेताओं की भी संलिप्तता मिली है। केजरीवाल के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान भी उपद्रवी भीड़ का नेतृत्व करते देखे गए थे।

शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों ने ये भी कहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करेंगे और इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि देश की शीर्ष अदालत क्या कहती है। न्यायपालिका के प्रति आस्था का दिखावा करते हुए एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जैसा कहेगा, वैसा किया जाएगा।

शाहीन बाग़ के उपद्रवियों का कहना है कि अब वो रामलीला मैदान शिफ्ट होने के लिए तैयार हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी की है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर इतने दिनों तक सड़कें बाधित कर के नहीं रखी जा सकतीं और लोगों को परेशान नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद शाहीन बाग़ के उपद्रवियों को वहाँ से हटने का बहाना मिल गया है। उनका कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट निर्देशित करता है तो वो रामलीला मैदान में जाकर सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करेंगे।

वहीं इसके बाद उपद्रवियों से सहानुभूति रखने वाले तहसीन पूनावाला सरीखे लोग संघ को घेरने लगे हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हुए प्रदर्शनकारी जगह बदलने को तैयार हुए हैं। हालाँकि, ये स्पष्ट दिख रहा है कि दिल्ली चुनाव ख़त्म होने के बाद उनकी ज़रूरत ही नहीं बची थी और उन पर लगातार लग रहे आरोपों के बीच उन्हें मीडिया कवरेज मिलना भी बंद हो गया था, इसीलिए वो वहाँ से हट कर धीरे-धीरे इस विरोध प्रदर्शन को ख़त्म करने में जुटे हैं।

शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वो लोगों की दिक्कतों को बढ़ाना नहीं चाहते। हालाँकि, पिछले 2 महीने से उनके कारण पूरे क्षेत्र में लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहाँ बिरयानी पार्टी हो रही है और पिकनिक मनाई जा रही है, ऐसा लोगों का कहना है।

कन्हैया कुमार के काफिले पर 5वीं बार हमला: फेंके गए अंडे और मोबिल, बाउंसरों ने की बदतमीजी

बिहार के जमुई में कन्हैया कुमार के काफिले पर हमले की ख़बर आई है। कन्हैया बिहार में जहाँ भी जा रहे हैं, लोग उन्हें मारने दौड़ रहे हैं। अबकी कन्हैया के काफिले में गाड़ियों पर अंडे फेंके गए। लोगों ने कन्हैया की गाड़ी पर मोबिल भी फेंका। पिछले कुछ दिनों में ये पाँचवी बार है, जब कन्हैया कुमार के काफिले पर हमला हुआ है। हालाँकि, बिहार में उनकी रैलियों में लोग भी जुट रहे हैं क्योंकि वामपंथी दलों को वहाँ एक चेहरा मिल गया है। भाकपा कन्हैया कुमार की ‘जन गण मन’ यात्रा के जरिए अपने पुराने कैडर को एक्टिवेट करने में जुटी है।

कन्हैया कुमार पर हो रहे हमले में सिर्फ़ लोगों का दोष नहीं है। उनके बाउंसर्स भी मीडियाकर्मी और लोगों के साथ बदतमीजी से पेश आते हैं और मारपीट करते हैं। कन्हैया का काफिला जहाँ से गुजरता है, वहाँ नारेबाजी की जाती है। इसी तरह की नारेबाजी के दौरान एक दूसरा गुट आ गया और वो भी विरोध में नारेबाजी करने लगा। इस भिड़ंत में कन्हैया कुमार पर हमला कर दिया गया। ये मामला बिहार के जमुई का है। आढा आने के क्रम में महिसौड़ी चौक पर ये घटना हुई।

कन्हैया कुमार के समर्थकों का आरोप है कि पुलिस व प्रशासन इस मामले में लापरवाही बरत रहा है। विरोधी गुट का कहना है कि कन्हैया देशद्रोही है। लगभग 15 मिनट तक चली झड़प के कारण वहाँ जाम लगा रहा। जेएनयू छात्र संगठन के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार जमुई परिसदन में रात्रि विश्राम के बाद सोमवार को अलीगंज के लिए निकले थे। सोमवार को अलीगंज प्रखंड में उनकी सभा हुई। इससे पहले मोतिहारी, सुपौल, कटिहार और सीवान में कन्हैया कुमार पर हमला हो चुका है।

कन्हैया कुमार इस यात्रा के दौरान कुल 50 सभाएँ करने वाले हैं। 29 फरवरी तक चलने वाली इस रैली के जरिए वो सक्रिय राजनीति में पाँव जमाने निकले हैं। 30 जनवरी को बेतिया से उनकी ये यात्रा शुरू हुई थी। वो सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं।

शाहीन बाग में मासूम की मौत पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, CJI ने पूछा- क्या 4 महीने का बच्चा खुद प्रदर्शन करने गया था?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (फरवरी 10, 2020) को शाहीन बाग़ विरोध प्रदर्शन में बच्चों को शामिल किए जाने के मामले में सुनवाई की। देश की शीर्ष अदालत ने इस मामले में केंद्र और राज्य, दोनों ही सरकारों को नोटिस जारी किया है। शाहीन बाग़ में महिलाएँ अपने छोटे-छोटे बच्चों को भी लेकर आ रही हैं। हाल ही में 4 महीने के एक बच्चे की मौत हो गई थी, जिसे लेकर उसके परिजन जामिया नगर और शाहीन बाग़ के विरोध प्रदर्शनों में जाते थे।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे ने इस घटना पर दुःख जताया है। सीजेआई ने कहा कि हमारे मन में मातृत्व के प्रति उच्च-कोटि का सम्मान है और बच्चों के लिए उनके मन में काफ़ी चिंताएँ हैं। सीजेआई ने कहा कि बच्चों के साथ बुरा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। 30 जनवरी को शाहीन बाग़ में ठण्ड लगने से बच्चे की मौत हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की है। मुंबई की 12 वर्षीय छात्रा जेन सदावर्ते ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा था। सदावर्ते 2018 में ‘राष्ट्रीय वीरता पुरष्कार’ से सम्मानित हो चुकी हैं

वहीं मृत बच्ची की अम्मी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में भी वही सब दोहराया, जो इस्लामी कट्टरपंथी बाहर बोलते हैं।महिला के वकील ने कहा कि बच्चे स्कूल से रोते हुए घर आते हैं क्योंकि उन्हें पाकिस्तान और आतंकवादी कहा जाता है। वकील ने मुस्लिम बच्चों को लेकर ये बातें कही। सीजेआई बोबडे ने कहा कि वो इस बयान पर टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि इसका बच्ची की मौत वाले मामले से कोई लेनादेना नहीं है। सीजेआई ने वकील से कहा कि वो इस प्लेटफार्म का प्रयोग इस तरह के बयान देने के लिए नहीं कर सकता। सीजेआई ने कहा:

“क्या एक 4 महीने का बच्चा विरोध प्रदर्शन करने के लिए जा सकता है? मैं तो कहता हूँ कि सभी माँओं की इस मामले में एक राय होनी चाहिए, बच्चों के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता। कृपया आपलोग और समस्या पैदा न करें।”

सीजेआई ने कहा कि उन चीजों पर यहाँ चर्चा नहीं हो रही है। इसके बाद भी जब वकील ने अपना प्रोपेगंडा जारी रखा तो सीजेआई ने उसे टोका। जस्टिस बोबडे ने कहा कि वो नहीं चाहते कि लोग स्थिति को और बिगाड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट जैसे प्लेटफार्म का इस्तेमाल करें। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि न तो ये केस सीएए व एनआरसी से जुड़ा है और न ही बच्चों को पाकिस्तानी अथवा आतंकवादी कहे जाने पर। शाहीन बाग़ में लगभग 2 महीने से विरोध प्रदर्शन चल रहा है, जिसपर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विरोध के लिए सड़क बाधित कर के लोगों को परेशानी में नहीं डाला जा सकता है।

उस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय किशन कॉल ने पूछा कि अगर सभी व्यक्ति हर जगह विरोध प्रदर्शन करने लगे तो स्थिति क्या होगी? शाहीन बाग़ में मुस्लिम महिलाएँ विरोध प्रदर्शन पर बैठी हैं। हालाँकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि वहाँ पिकनिक मनाई जाती है और बिरयानी की पार्टी होती है।

उत्तर प्रदेश पुलिस से भिड़े CAA प्रदर्शनकारी, लाठीचार्ज कर खाली कराया मोहम्मद अली पार्क

उत्तर प्रदेश के कानपुर में सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे धरना प्रदर्शन को समाप्त कराने पहुँची पुलिस टीम पर प्रदर्शनकारियों ने पथराव कर दिया। इस दौरान पुलिस को हालात काबू करने के लिए लाठीचार्ज भी करना पड़ा। वहीं इसके बाद से इलाके में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। हालाँकि, पुलिस ने पार्क को खाली करा दिया है।

सोमवार को पुलिस फोर्स के साथ धरना स्थल पर पहुँचे प्रशासनिक अधिकारियों को देख प्रदर्शकारी महिलाओं ने सड़क पर उतरकर हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान तनावपूर्ण माहौल उत्पन्न हो गया। वहीं प्रदर्शनकारियों ने जब पुलिस पर पथराव करने की कोशिश की तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर धरने पर बैठे लोगों को खदेड़ना शुरू कर दिया और देखते ही देखते पुलिस ने पार्क को पूरी तरह से खाली करा दिया। वहीं माहौल को देखते हुए प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया है। पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ प्रदर्शनकारी महिलाओं ने चमनगंज रोड को जाम कर दिया है।

कानपुर चमनगंज के मोहम्मद अली पार्क में पिछले करीब एक महीने से सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ लोगों का धरना चल रहा था। बीते शनिवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस अधिकारियों की बीच वार्ता हुई। इसके बाद शनिवार को घोषणा कर दी गई कि समझौते के मुताबिक धरने को समाप्त कर दिया जाएगा, लेकिन घोषणा के बाद भी धरने को समाप्त नहीं किया गया और इसके बाद भी धरना स्थल पर करीब 100 की संख्या में लोग बैठे रहे। इस बात की जानकारी जैसे ही पुलिस अधिकारियों को हुई, तो वह सोमवार सुबह को ही मौके पर पहुँच गए।

आपको बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को डीआईजी अनंत देव ने दो टूक कहा था कि 80 लोगों को नोटिस देने और 200 लोगों को पाबंद करने के बाद भी धरना खत्म न हुआ तो पुलिस देशद्रोह की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी करेगी। साथ ही धरने का चेहरा बने और उपद्रवियों को पनाह देने के आरोपितों पर रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी। डीआईजी ने कहा था कि मोहम्मद अली पार्क और फूल पार्क में धरने को बाहर से लोग आकर समर्थन देने के साथ धरने पर बैठे लोगों को उकसा भी रहे हैं।

‘अनिश्चित समय के लिए कोई कैसे पूरी सड़क को जाम कर सकता है’ – शाहीन बाग पर SC की तीखी टिप्पणी

दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे धरने के ख़िलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि आप इतने लंबे समय तक कैसे किसी सड़क को रोक सकते हैं। हालाँकि कोर्ट ने इस पर किसी भी तरह का फैसला अभी नहीं सुनाया है और इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 17 फरवरी को दे दी है।

शाहीन बाग धरने के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर सोमवार दोपहर को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि विरोध ऐसा हो कि किसी दूसरे को कोई परेशानी न हो। सुनवाई को दौरान जजों ने तीखी टिप्पणी भी की और कहा कि अनिश्चित समय के लिए कोई कैसे पूरी सड़क को जाम कर सकता है।

इस मामले को लेकर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और सरकार को एक नोटिस जारी किया। हालाँकि कोर्ट ने मामले पर अपना अंतरिम फैसला सुनाने से फिलहाल इनकार कर दिया। वहीं इस मामले पर फिर से 17 फरवरी को अगली सुनवाई की जाएगी।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई दिल्ली चुनाव की वजह से टाल दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में शनिवार को मतदान को प्रभावित नहीं करना चाहता। तब न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने कहा था कि हम इस बात को समझते हैं कि वहाँ समस्या है और हमें देखना होगा कि इसे कैसे सुलझाया जाए। हम सोमवार को इस पर सुनवाई करेंगे।

बता दें कि बीजेपी नेता नंद किशोर गर्ग ने कोर्ट से दिल्ली और नोएडा को जोड़ने वाले अहम मार्ग पर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन से लोगों को आ रही समस्या पर गौर करते हुए अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया था, जिस पर प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि आप याचिका का उल्लेख करने वाले अधिकारी के पास जाएँ।

गौरतलब है कि जाम की समस्या से जूझ रहे लोगों ने पिछले दिनों मार्च निकालते हुए कहा थी कि हमें प्रदर्शन से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन सड़क खाली होनी चाहिए। चाहे तो ये लोग रामलीला मैदान, जंतर-मंतर या कहीं और प्रदर्शन करें। इन लोगों की माँग है कि धरना जल्दी से जल्दी खत्म कर सड़क खुलवाई जाए, क्योंकि इससे आम लोगों खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

शाहीन बाग में फ्री लंगर का AIMIM कनेक्शन: AAP, कॉन्ग्रेस, PFI के बाद अब ओवैसी का भी साथ

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‘हम पहले मुस्लिम हैं, उसके बाद कुछ और…’ – शायर बाप मुनव्वर राणा के बाद अब बेटी ने उगला जहर

भारत ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लाकर उन लोगों को नागरिकता देने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया है, जो वर्षों से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में क्रूरता, अत्याचार और शोषण के शिकार हो रहे हैं। अपने धर्म, अपनी बेटियों और बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए जो लोग भारत में शरण लेने आए हैं, उनके खिलाफ मुनव्वर राणा जैसे लोग अपनी मजहबी कट्टरता को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं और लोगों को भारत के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन करने के लिए उकसा रहे हैं।

वहीं मुनव्वर राणा की बेटी के भीतर मासूम और प्रताड़ित हिंदुओं और बाकी के 5 अन्य संप्रदायों (जिन सभी को CAA के तहत नागरिकता का प्रावधान है) के खिलाफ इतना जहर भरा है कि उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि भारत से ज्यादा महत्वपूर्ण उनके लिये इस्लाम है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में चल रहे सीएए, एनआरसी के विरोध प्रदर्शन को शनिवार को दो महीने पूरे हो गए। शनिवार को नमाज और कुरान ख्वानी के बाद मुस्लिम महिलाओं ने ‘आजादी’ के भी नारे लगाए थे।

इस अवसर पर धरने पर पहुँची मुनव्वर राणा की बेटी सुमैया राणा ने कहा, “हमें ध्यान रखना है कि हमें इतना भी न्यूट्रल (तटस्थ) नहीं होना है कि हमारी पहचान ही खत्म हो जाए। पहले हम मुस्लिम हैं और उसके बाद कुछ और हैं। हमारे अंदर का जो दीन है, जो इमान है, वह जिंदा रहना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि हम अल्लाह को भी मुँह दिखाने लायक न रह जाएँ।”

इतना ही नहीं, सुमैया राणा ने उत्तर प्रदेश की पुलिस को चोर बताया और कहा कि आज हम जिस हिंदुस्तान में साँस ले रहे हैं, वो वाकई बहुत भयानक है। घुटन महसूस हो रही है। इस पर भाजपा सांसद सतीश गौतम ने पलटवार करते हुए कहा कि सुमैया राणा का अगर भारत में दम घुट रहा है तो वे पाकिस्तान चली जाएँ। उनके पास वीजा और पासपोर्ट दोनों हैं। भारत में आजादी की कमी महसूस करने वाले लोगों के लिए पाकिस्तान जाने के रास्ते खुले हैं। गौतम ने कहा कि ये भारत है जिसमें इतनी आजादी में खुले रूप से बोल सकते हो। ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाल्लाह’ कह सकते हो। आप भारत में आजादी के साथ कहकर चली गईं। यही पाकिस्तान होता तो आपको पता चल जाता कि आजादी क्या होती है। 

इसके अलावा धरना स्थल पर एएमयू छात्र संघ का पूर्व अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी भी पहुँचा। उसने एलान किया कि देश में सीएए को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा। जब तक सरकार इसको वापस नहीं ले लेती, तब तक इसका विरोध जारी रहेगा। इसके साथ ही उस्मानी ने सीएम योगी को ढोंगी व केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर को देशद्रोही बताया। इस दौरान छात्रों ने योगी-मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।

जानकारी के मुताबिक हाल ही में ईदगाह कॉम्पलेक्स में प्रदर्शन कर रही 250 महिलाओं के खिलाफ गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने का केस दर्ज किया गया था और साथ ही अधिकतर प्रदर्शनकारियों को नोटिस भी भेजा गया है। उन्हें चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने प्रदर्शन जारी रखा तो उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। इस बारे में एसएसपी आकाश कुलहरि ने कहा है कि असामाजिक तत्व ईदगाह में प्रदर्शनों का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

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प्राचीन काल की बात है। 40-50 साल पहले शताब्दी ही दूसरी थी तो प्राचीन काल ही कहेंगे ना! खैर तो हुआ यूँ कि उस समय ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी का एक छात्र यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में चुनाव नतीजों से सम्बंधित दस्तावेजों के पन्ने पलट रहा था। वो खोजने की कोशिश कर रहा था कि सांख्यिकी के आधार पर चुनावी नतीजों की भविष्यवाणी हो सकती है या नहीं। उससे पहले भी कई गणितज्ञ सूरमा ऐसा करने के प्रयासों में असफल हो चुके थे इसलिए उसे कामयाबी ना मिलना कोई अनूठी बात नहीं होती।

इस छात्र का नाम था- डेविड बटलर। उन्हें अचानक से कठिन गणित समीकरणों के बीच एक आसान सा फार्मूला दिखा। उसने पाया कि दो पार्टियों के मत प्रतिशत में अगर A:B का सम्बन्ध हो तो “टू द पॉवर थ्री” पर उनकी सीटों की गिनती निकल रही है! यानी (A x A x A) : (B x B x B) पर सीटों की भविष्यवाणी की जा सकती है! जब उसने ब्रिटिश चुनाव नतीजों पर इस फॉर्मूले को बिठाकर देखा तो नतीजे बिलकुल सटीक निकल आए। फिर क्या था! थोड़े ही समय में इस छात्र की ख्याति चारों ओर फैल गई। जब चर्चिल ने डेविड बटलर को खाने पर आमंत्रित किया था, तो वो उस समय छात्र ही थे।

डेविड बटलर के इस नियम को “क्यूब लॉ” कहते हैं। इससे दो दलों वाले लोकतांत्रिक चुनावों में बिलकुल सटीक व्याख्या की जा सकती है। ये तीन पार्टियों तक भी चल जाता है मगर जहाँ भारत की तरह कई राजनैतिक दल (और निर्दलीय भी) चुनाव मैदान में हों वहाँ ये फार्मूला पूरी तरह बेकार है। ऐसे नियमों के बारे में खुद बटलर कहते हैं कि किसी एक देश में बना ऐसा कोई नियम 10 साल टिक सकता है लेकिन हर देश में यही नियम लगाना, या कई दलों वाले चुनाव में इसे इस्तेमाल करना वैज्ञानिक तरीका नहीं होगा।

अगर इसी फॉर्मूले को दिल्ली चुनावों पर इस्तेमाल करके देखें तो पिछले चुनावों में AAP के करीब 54%, कॉन्ग्रेस के करीब 9% और भाजपा के 34% के लगभग वोट थे। 70 सीट में इनका बँटवारा किया जाए तो भाजपा को 14-15 आती हैं, AAP को 55-56 मिलेंगी और आखरी बचे कॉन्ग्रेसी, तो उन्हें 0-1 सीट पर संतोष करना पड़ेगा। अधिकांश चैनल पर आए पूर्वानुमानों में आपको करीब यही आँकड़े दिखेंगे। समस्या वही है जो बटलर ने पहले ही बता दी है। ये तीन पार्टियों का चुनाव नहीं था, इसमें और भी दावेदार शामिल हुए थे। इसलिए ये पूर्वानुमान गलत साबित होने वाला है।

चूँकि ये फॉर्मूले धंधे के अन्दर की बात है। इसलिए इनके बारे में पेड मीडिया पर बात नहीं होती। जिन्हें ये फॉर्मूले पता है, वो लोग इनका इस्तेमाल नेताओं से “नजदीकी सम्बन्ध” गाँठने में करेंगे। आपको ये सिखाकर भला क्या फायदा? इसलिए प्रणय रॉय और अशोक लाहिरी के आमंत्रण पर डेविड बटलर भारत आए तो थे लेकिन उनका नाम भी अधिकतर लोगों ने नहीं सुना है। अधिकांश भारतीय लोगों ने चुनाव विश्लेषण बस टीवी पर ही देखा होता है। इन विषयों पर काम करने वाले डॉ एन भास्कर राव भी लगभग अज्ञात जीव हैं।

वो क्या है न कि जानकारी न हो तो ठगने में आसानी रहती है। ये गणित तीन पार्टी वाले चुनाव तक चलता है, मगर कई पार्टियों के बीच होने वाले चुनावों में नहीं, ऐसा बताए बिना अगर विश्लेषण सुनाए जाएँ तभी तो लोग देखेंगे-सुनेंगे! अगर पता हो कि इसके नाकाम होने की ही संभावना ज्यादा है तो भला न्यूज़ बेचने वाले पर भरोसा कौन करेगा? इसके नाकाम होने पर आगे चलकर राग EVM के जरिए समाचार बेचने वाले एवं हारे हुए नेतागण और कुछ दिन मनोरंजन कर पाएँगे। एक मामूली से क्यूब और रेश्यो के फॉर्मूले से 15 दिन का धंधा डूबता है।

बाकी भारत देश में चुनाव करीब-करीब हर समय चलते ही रहते हैं और पोस्टर छापने, चुनाव प्रचार के लिए टेंट-लाउडस्पीकर, कुर्सियाँ किराए पर देने से लेकर, कई छुपे हुए उपहारों की खरीद बिक्री के लिहाज से चुनाव फायदे का धंधा है। कुछ चुनावी चकल्लस चले और चंचला लक्ष्मी उनके घर से निकलकर हमारे घर भी आए तो अच्छा लगता है! चुनाव होते रहने चाहिए मित्रों!

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SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने पलटा अपना फैसला, केंद्र सरकार के संशोधन को मंजूरी: मूल रूप में बना रहेगा कानून

अनुसूचित जाति-जनजाति के उत्पीड़न से जुड़े कानून (एससी-एसटी एक्ट) के प्रावधानों में पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधनों को सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है। अर्थात यदि किसी के खिलाफ इस कानून के तहत केस दर्ज किया जाता है, तो बगैर जाँच के उसकी गिरफ्तारी हो सकेगी। इस कानून के तहत एससी/एसटी के खिलाफ अत्याचार के आरोपितों के लिए अग्रिम जमानत के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है।

जस्टिस अरुण मिश्र, जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस रवींद्र भट्ट की तीन जजों वाली बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। रिपोर्ट्स के अनुसार बेंच ने सोमवार को इस मामले में 2-1 से अपना फैसला दिया, यानी दो जजों ने निर्णय के पक्ष में जबकि तीसरे जज ने फैसले से अलग राय रखी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केस दर्ज करने के लिए प्राथमिक जाँच आवश्यक नहीं है।

कोर्ट ने पहले ही दे दिए थे संकेत

ध्यातव्य है कि पिछले साल अक्टूबर में ही जजों की पीठ ने संकेत दे दिया था कि वह तत्काल गिरफ्तारी और अग्रिम जमानत पर रोक लगाने के लिए एससी/एसटी अधिनियम में केंद्र द्वारा किए गए संशोधनों को बरकरार रखेगा। कोर्ट ने इस दौरान सुनवाई करते हुए कहा था, “हम किसी भी प्रावधान को कम नहीं कर रहे हैं। इन प्रावधानों को कम नहीं किया जाएगा। कानून वैसा ही होना चाहिए, जैसा वह था।”

कोर्ट ने क्या कहा था

कोर्ट ने इस दौरान यह भी स्पष्ट किया था कि एससी/एसटी कानून के तहत किसी भी शिकायत पर कोई कार्रवाई करने से पहले पुलिस प्राथमिक जाँच कर सकती है लेकिन तभी अगर प्रथम दृष्टया में उसे शिकायतें झूठी लगती हैं तो।

दोबारा पुराना कानून लागू

20 मार्च, 2018 को अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने इस कानून के तहत शिकायत पर अग्रिम जमानत का प्रावधान जोड़ने के साथ-साथ स्वत: गिरफ्तारी के प्रावधान पर भी रोक लगा दी थी। इसके बाद पुराने कानून को सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने 30 सितंबर, 2019 को बहाल कर दिया था। केंद्र सरकार द्वारा कानून में संशोधन करके सुप्रीम कोर्ट के 20 मार्च 2018 के फैसले को पलटकर दोबारा पुराने कानून को लागू कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने मार्च, 2018 में में एससी-एसटी कानून के दुरुपयोग की शिकायतों के बाद स्वत: संज्ञान लेकर निर्णय दिया था कि एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोपी की सीधे गिरफ्तारी नहीं हो सकेगी। इस आदेश के अनुसार, मामले में अंतरिम जमानत का प्रावधान किया गया था और गिरफ्तारी से पहले पुलिस को एक प्रारंभिक जाँच करनी थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद एससी/एसटी समुदाय के लोगों ने देशभर में व्यापक प्रदर्शन किए थे।

व्यापक विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र ने पलटा था कोर्ट का फैसला

व्यापक प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने कोर्ट में एक याचिका दायर की थी और बाद में संसद ने अदालत के आदेश को पलटने के लिए कानून में संशोधन किया था। संशोधित कानून के लागू होने पर कोर्ट ने किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई थी। सरकार के इस फैसले के बाद कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई। इसमें आरोप लगाया गया था कि संसद ने मनमाने तरीके से इस कानून को लागू कराया है।

नौकरी या प्रमोशन में आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं: SC ने पलटा 2012 में दिया हाई कोर्ट का आदेश

‘जो मोदी-शाह के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएगा वो मर्द-ए-मुजाहिद कह लाएगा’ – ओवैसी ने CAA को जिहाद से जोड़ा

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर सीएए और एनआरसी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। औवेसी ने कहा कि मोदी-शाह के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले ही असली मर्द है और वो वतन में तो रहेंगे, लेकिन कागज नहीं दिखाएँगे।

हैदराबाद के सांसद और AIMIM के प्रमुख ने सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “जो मोदी-शाह के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएगा वो सही मायने में मर्द-ए-मुजाहिद कह लाएगा। मैं वतन में रहूँगा, पर कागज नहीं दिखाऊँगा। कागज अग़र दिखाने की बात होगी, तो सीना दिखाएँगे कि मार गोली। मार दिल पे गोली मार, क्योंकि दिल में भारत की मोहब्बत है।”

असदुद्दीन ओवैसी रविवार को आंध्र प्रदेश के करनाल ज़िले में सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। जहाँ ओवैसी ने सीएए को लेकर मोदी सरकार के ख़िलाफ लोगों को खूब भड़काया। इतना ही नहीं ओवैसी ने लोगों को कागज न दिखाने की भी बात कही।

आपको बता दें कि यह पहला मौका नहीं कि जब असदुद्दीन ओवैसी ने सीएए और एनआरसी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा हो। इससे पहले भी कई बार वो इस क़ानून को लेकर सरकार पर सवाल खड़ा कर चुके हैं। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि यह कानून समुदाय विशेष के हित में नहीं है। वहीं पिछले दिनों ओवैसी ने कहा था कि दिल्ली चुनाव के बाद मोदी सरकार शाहीन बाग को जलियाँवाला बाग बना देगी। यह बयान उन्होंने बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर द्वारा दिए गए एक बयान पर पलटवार करते हुए दिया था।

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हनुमान चालीसा के वितरण से किसी को क्या दिक्कत! ममता सरकार की पुलिस ने पुस्तक मेले में लगाया प्रतिबंध

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में चल रहे पुस्तक मेले में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा बाँटी जा रही हनुमान चालीसा की पुस्तकों पर पुलिस ने अचानक से रोक लगा दी। पुलिस ने बताया कि इसके वितरण से बाहरी लोग भावनाओं में बह सकते हैं, जिससे माहौल खराब भी हो सकता है। इसके बाद दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया।

कोलकाता के सेंट्रल पार्क में चल रहे 44वें अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में रविवार को विश्व हिंदू परिषद द्वारा हनुमान चालीसा की पुस्तकें लोगों को वितरित की जा रही थीं। इस बात की जानकारी जैसे ही ममता सरकार की पुलिस को हुई, उन्होंने तत्काल मौके पर पहुँचकर हनुमान चालीसा के वितरण पर रोक लगा दी। उन्होंने बताया कि हनुमान चालीसा के वितरण से शहर में कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है, पुस्तक मेले में आने वाले लोग भावनाओं में बह सकते हैं।

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पुलिस के इस आदेश के बाद दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया। विहिप के अधिकारियों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाव खड़ा करते हुए कहा कि जब मेले में कुरान और बाइबिल की पुस्तकें बाँटी जा सकती हैं तो हनुमान चालीसा की क्यों नहीं? माहौल में गर्मी पैदा होते देख कोलकाता पुलिस कुछ ही देर में बैकफुट पर आ गई और हनुमान चालीसा के वितरण से रोक को हटा लिया गया। इसके बाद विहिप के कार्यकर्ता फिर से हनुमान चालीसा की पुस्तकें लोगों को वितरित करने में जुट गए।

आपको बता दें कि कोलकाता के सेंट्रल पार्क में 29 जनवरी से 44वाँ अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया था। इस मेले का 9 फरवरी को अंतिम दिन था और मेले के आखिरी दिन ही हनुमान चालीसा के वितरण को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। इस मेले में इस बार करीब 600 स्टॉल लगाए गए, जिनमें से करीब 200 स्टॉल लिटिल मैगजीन और विदेशी प्रकाशकों के थे।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष इस मेले में करीब 2.4 मिलियन लोगों ने शिरकत की थी। वहीं करीब 22 करोड़ पुस्तकों की बिक्री हुई थी।