Home Blog Page 5106

चुपके से दबोचने और चुम्मा लेकर भाग जाने वाला सीरियल मॉलेस्टर हबिबूर खान गिरफ्तार, VIDEO में सबूत

मुंबई के माटुंगा रेलवे ब्रिज पर महिलाओं के साथ लगातार बदसलूकी करने वाले रैजूर हबिबूर खान को पुलिस ने गुरुवार (फरवरी 6, 2020) को गिरफ्तार कर लिया। रैजूर की हरकतें कैमरे में रिकॉर्ड होने के बाद पुलिस ने ये एक्शन लिया। हालाँकि, अभी तक रैजूर के ख़िलाफ़ किसी महिला ने सामने से आकर शिकायत नहीं दर्ज करवाई है। लेकिन पुलिस ने उसे चोरी के इल्जाम में गिरफ्तार कर लिया है।

इसके अलावा पुलिस द्वारा महिलाओं से अपील की जा रही है कि वे सामने आकर आरोपित के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाएँ। पुलिस महिलाओं को आश्वासन दे रही है कि उनकी पहचान का खुलासा किसी कीमत पर नहीं किया जाएगा।

गौरतलब है कि रैजूर की हरकतों के बारे में पुलिस को सबसे पहली बार 25 जनवरी को मालूम हुआ था। जब सीसीटीवी फुटेज में देखा गया था कि आरोपित, महिलाओं के पहले करीब जाता है, उन्हें दबोचता है और फिर उन्हें किस (चुम्मा) करके वहाँ से भाग जाता है।

जानकारी के अनुसार, इस मामले में एक महिला ने पुलिस के पास रैजूर की हरकतों की शिकायत की थी। लेकिन उस समय आधिकारिक रूप से केस दर्ज नहीं हुआ था। मगर, सीसीटीवी फुटेज से हकीकत सामने आने के बाद पुलिस ने कुछ अन्य फुटेज भी खँगाले। जिनसे कुछ और घटनाओं का खुलासा हुआ। जिनमें साफ देखा गया कि रैजूर अन्य महिलाओं को मोलेस्ट करता रहा है।

सबूत जुटाने के बाद पुलिस ने एक दिन रैजूर को पकड़ने के लिए ब्रिज पर जाल बिछाया और आम कपड़ो में जाकर वहाँ खड़े हो गए। तभी रैजूर एक अन्य महिला को अपना टारगेट बनाने के लिए सामने आया। लेकिन वहाँ मौजूद पुलिस ने उसे फौरन पकड़ लिया और उसके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 379 के तहत चोरी का मामला दर्ज किया।

गौरतलब है कि जिस ब्रिज पर आरोपित इस घटना को अंजाम देता था, वो जगह अधिकतर सुनसान रहती है। वहाँ केवल कुछ लोग ही आते-जाते हैं। पुलिस के अनुसार, रैजूर, पेशे से बढ़ई है। वो उत्तर प्रदेश से मुंबई में काम की तलाश में आया था। लेकिन यहाँ आकर ये सब करने लगा। कई महिलाओं का उत्पीड़न करने वाले रैजूर की शादी हो चुकी है और उसका एक बच्चा भी है।

शेयरचैट पर दोस्ती कर 9वीं की छात्रा का वाहिद ने किया यौन शोषण: 46 लड़कियों के साथ की थी बातचीत, गिरफ्तार

11 साल का बच्चा, 1000 से अधिक बार यौन शोषण… अपने ‘कनेक्शन’ वाले पादरी को मदर टेरेसा ने ऐसे बचाया

13 से 16 साल की बच्चियों से रेप, यौन शोषण व तस्करी: कॉन्स्टेबल अमजद, नदीम, साजिद सहित 16 गिरफ्तार

PM मोदी के ‘ट्यूबलाइट’ बयान पर नहीं रोक पाए हँसी, राहुल गाँधी के बगल में बैठे थे कॉन्ग्रेस सांसद रमेश

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर उन्हें धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी पर भी निशाना साधा। पीएम मोदी ने राहुल गाँधी पर तंज कसते हुए कहा- “कल कॉन्ग्रेस के एक नेता ने कहा कि 6 महीने में मोदी को डंडे पड़ेंगे। मैं इन छह महीनों में और ज्यादा सूर्य नमस्कार करूँगा, ताकि मेरी पीठ को भी हर डंडा झेलने की आदत हो जाए।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वो पिछले 40 मिनट से भाषण दे रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों तक करेंट अब पहुँचा है।

प्रधानमंत्री के इस मजाकिया अंदाज़ से पक्ष ही नहीं बल्कि विपक्षी नेता भी बेंच थपथपाते नज़र आए। इनमें से एक कोडिकुन्नील रमेश भी शामिल थे। वो कॉन्ग्रेस के सांसद हैं लेकिन जब पीएम मोदी ने बिना नाम लिए राहुल गाँधी को ट्यूबलाइट कहा तो वो अपनी हँसी नहीं रोक पाए। सबसे रोचक बात तो ये है कि रमेश उस वक्त राहुल गाँधी के बगल में ही बैठे हुए थे। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे सांसद रमेश पीएम मोदी के सम्बोधन के दौरान हँस रहे थे।

जब प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद प्रस्ताव शुरू हुआ तब लोकसभा में जय श्री राम के नारे लगाए गए। मोदी जैसे ही बोलने के लिए खड़े हुए कॉन्ग्रेस और बाकी विपक्षी सांसदों ने महात्मा गाँधी जिंदाबाद के नारे लाने शुरू कर दिए। इस पर पीएम मोदी ने कहा- “बस इतना ही?”

इस पर कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन उठे और जवाब देते हुए कहा कि यह तो बस ट्रेलर है। लेकिन हाजिरजवाबी में माहिर नरेंद्र मोदी ने तुरंत ही इस पर कॉन्ग्रेस नेता को जवाब देते हुए कहा कि आपके लिए गाँधी जी ट्रेलर हो सकते हैं, हमारे लिए जिंदगी हैं।

FACT CHECK: मनोज तिवारी ने नहीं लिखा नड्डा को पत्र, फर्जी लेटर वायरल

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी के नाम से एक फ़र्ज़ी पत्र वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने ये पत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजा है। पत्र शेयर करने वाले दावा कर रहे हैं कि दिल्ली में भावी हार से घबरा कर तिवारी ने ये पत्र लिखा है। उन्हें पता चल गया है कि आम आदमी पार्टी भारी जीत की तरफ बढ़ रही है और भाजपा दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार जाएगी, ऐसा दावा किया जा रहा है। क्या है इस पत्र के पीछे की सच्चाई?

सबसे पहले बताते हैं कि इस पत्र में लिखा गया है। वायरल पोस्ट्स और ट्वीट्स के अनुसार, मनोज तिवारी ने इस पत्र में जेपी नड्डा से गुहार लगाई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार से दूर रखा जाए क्योंकि भाजपा हार रही है। मनोज तिवारी इस पत्र में लिखते हैं कि वो हार की जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं क्योंकि इसकी आँच मोदी-शाह तक नहीं जानी चाहिए। इस पत्र में लिखा हुआ है कि आंतरिक सर्वे में भी भाजपा पीछे चल रही है। परिस्थितियों को भाजपा के लिए प्रतिकूल बताया गया है।

दरअसल, वायरल पत्र फ़र्ज़ी है। मनोज तिवारी ने ऐसा कोई पत्र जेपी नड्डा को नहीं लिखा है। और न ही भाजपा के आंतरिक सर्वे में ऐसी कोई बात सामने आई है, जिससे पता चलता हो कि वो दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की पार्टी से पीछे चल रही है। ऑपइंडिया ने जनवरी 26, 2020 को एक ख़बर प्रकाशित की थी, जिसमें बताया गया था कि भाजपा के आंतरिक सर्वे में पार्टी को 40 सीटें मिलती दिख रही है। यह बहुमत से 4 सीटें ज्यादा है। उसके बाद भाजपा के बड़े नेताओं ने गहन चुनाव प्रचार अभियान चलाया है।

मनोज तिवारी के नाम से वायरल हुए फ़र्ज़ी पत्र

अब आते हैं इस पत्र के अन्य पहलुओं पर। मनोज तिवारी का ‘लेटर हेड’ अलग है। नीचे दिए गए पत्र को देखिए, जो मनोज तिवारी ने दिसंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा था। इस पत्र में भाजपा का चुनाव चिह्न भी अलग है। भाजपा ने 2014 के बाद अपने चुनाव चिह्न में बदलाव किया है। भाजपा नेता नीलकंठ बख्शी ने भी इस बात की पुष्टि की है। एक और अंतर ये है कि असली लेटर हेड में भाजपा का नाम हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखा हुआ है, जबकि फ़र्ज़ी पत्र में केवल हिंदी में ही लिखा हुआ है।

मनोज तिवारी का असली लेटर हेड

फ़र्ज़ी पत्र वायरल करने वाले ने एक ग़लती ये की है कि उसने भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय का पता लिख दिया है। जबकि, मनोज तिवारी के पत्र में भाजपा के राज्य मुख्यालय का पता लिखा होता है। अर्थात, पता ‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय मार्ग’ न होकर ‘पंडित पंत मार्ग’ होगा। भाजपा ने इस पत्र को विरोधियों को साज़िश करार दिया है और फ़र्ज़ी बताया है। वायरल पत्र फ़र्ज़ी है। मनोज तिवारी ने ऐसा कोई पत्र लिखा ही नहीं है।

दिल्ली की शिक्षा पर रवीश ने क्या छुपाया? डेटा से कैसे खेले? अजीत भारती का वीडियो | Ravish lies on Delhi education

रवीश कुमार ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के बारे में बात करते हुए कहा कि यह पहला चुनाव है जब शिक्षा का सवाल केंद्र में आते-आते रह गया। जबकि इनके प्राइम टाइम का मूल मुद्दा ही यही था कि कैसे दिल्ली ने शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम व नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं और बाकी जगह बेकार है।

रवीश को ये भी बताना था कि दिल्ली की पूरी जीडीपी का कितना प्रतिशत शिक्षा को जा रहा है। वो बताएँगे तो पता चल जाएगा कि यह 2 प्रतिशत से कम है, लेकिन रवीश यह नहीं बताएँगे। रवीश ने दिल्ली की शिक्षा के बारे में बहुत कुछ छुपाया तो वहीं आँकड़ों के साथ भी खूब खेल खेला।

पूरा वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

NDTV में आखिर क्यों हाशिए पर ढकेले गए रवीश कुमार

रवीश कुमार देश के बड़े हिन्दीभाषी पत्रकारों में से एक हैं। एनडीटीवी पर आने वाला उनका शो ‘प्राइम टाइम’ हर उस मामले पर आवाज़ उठाने के लिए जाना जाता है, जिसमें भाजपा या पीएम मोदी की आलोचना का जरा भी चांस हो। अगर ऐसे मामले नहीं मिलते तो रवीश क्रिएट भी कर लेते हैं। तमिलनाडु के किसी गाँव में किसी बिजली के पोल का तार टूट जाए तो रवीश को देरी नहीं लगती ये साबित करने में कि पीएम मोदी का 100% इलेक्ट्रिफिकेशन का आँकड़ा झूठा है। जंगल में किसी शेरनी को कच्चा माँस खाते देख वो आवाज़ उठा सकते हैं कि उसे शिकार को पकाने के लिए ‘उज्ज्वला योजना’ का लाभ क्यों नहीं मिला?

रवीश के एक शुभचिंतक के रूप में मेरी चिंता ये है कि उनकी टीआरपी लगातार गिर रही है। एनडीटीवी देखने वाले अब भारत में कुछेक ही बचे हैं। हाँ, पाकिस्तान में यहाँ से ज़्यादा दर्शक हैं जो उनका शो देखते हैं। रवीश कुमार जिस एनडीटीवी के लिए इतना कुछ कर रहे हैं, अगर वही उन्हें धोखा दे दे तो वो भला कहाँ जाएँगे? जी हाँ, हमारी चिंता एकदम जायज है क्योंकि एनडीटीवी की वेबसाइट के पहले पेज पर रवीश को छोटी सी जगह में समेट दिया गया है। उन्हें महज ‘278 * 81’ पिक्सल्स की जगह मिली है

जहाँ पहले वेबसाइट खोलते ही रवीश का ब्लॉग छाया रहता था, वेब गंजे को कंघी बेचने, सॉरी गंजापन दूर करने वाली ख़बर को भी उनके ब्लॉग से ज्यादा प्राथमिकता मिलती दिख रही है। अक्षय कुमार का एड है लेकिन रवीश को कहीं कोने में भेज दिया गया है। पहले क्या दिन था! वेबसाइट खोलो तो रवीश के ब्लॉग पर ही पहली नज़र जाती थी। रोज़ रवीश के लेख आते थे। अब वो राजनीतिक मुद्दों पर कुछ दिनों से लिख ही नहीं रहे। जब देखो गोबर से खाद बनाने की विधि समझाते रहते हैं। क्या एनडीटीवी रवीश को हटा देगा? ये चर्चा आम हो गई है।

रवीश के ब्लॉग को एक कोने में कहीं ढकेल दिया गया है

ऊपर वाले स्क्रीनशॉट में देखिए। एनडीटीवी की हिंदी वेबसाइट पर रवीश को कहाँ किस कोने में ढकेल दिया गया है। उनके लेख को ‘विचार’ वाली केटेगरी में नीचे की तरफ़ डाल दिया गया है। स्क्रॉल करने पर ही मिलता है।उनके लेख के नीचे ही कमाल खान का लेख है। वेबसाइट खुलते ही अमेज़न का प्रचार आता है। यहाँ तक कि इन्सुरेंस प्लान को भी रवीश से ज़्यादा जगह दी गई है। इसके पीछे का कारण क्या है? रवीश कुमार अपने उसी संस्थान में क्यों किनारे किए जा रहे हैं, जहाँ उन्होंने पसीना बहा कर प्रोपेगेंडा फैलाया है।

कहीं ऐसा तो नहीं कि रवीश कुमार के शो की गिरती टीआरपी का असर उनके ब्लॉग पर दिख रहा हो? एनडीटीवी वेबसाइट वाले शायद नहीं चाहते होंगे कि उनके शो ‘प्राइम टाइम’ की तरह कहीं ‘एनडीटीवी डॉट इन’ का भी भट्ठा बैठ जाए। हालाँकि, ऑपइंडिया में फ़िलहाल कोई वैकेंसी नहीं है वरना रवीश कुमार अगर आवेदन करें तो यहाँ विचार ज़रूर किया जाएगा। चूँकि, मैं उनके ही गृह जिले से हूँ, मुझे उनकी चिंता होनी स्वाभाविक है। हम एनडीटीवी से माँग करते हैं कि रवीश के ब्लॉग को वेबसाइट पर पूरे सम्मान के साथ उचित स्थान दिया जाए।

भूमिहार कन्हैया! मज़हब, जाति को धंधा बना कर दलाली करने वाले वामपंथी लम्पटों के सरगना हो तुम

अपने विवादित बयानों के सहारे राजनीति की दुकान खोले बैठे भाकपा नेता और जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार फिर से एक बार आसमां पर थूकने की कुचेष्टा कर बैठे हैं। महाबौद्धिक श्री श्री कन्हैया कुमार जी अपनी विवादित ट्वीट को लेकर आज चर्चा में रहे। भाई फिर थोड़ा भावनाओं में बह गए आज। श्रीमान जी ट्वीट करते हैं कि हिन्दुओं के लिए धर्म आस्था का सवाल है तो वहीं संघियों के लिए महज एक धंधा!! देखिये सर क्या क्या बोल देते हैं ई बड़का लोग…. अब जैसे संघियों में हिन्दू न होकर किसी दूसरे गृह के लोग शामिल हैं। खैर चलिए अगर ये मान भी लें कि संघी सब के लिए धर्म एक धंधा ही है तब भी क्या वामपंथियों को यह अधिकार है कि वे दूसरों को धर्म जाति भाषा आदि पर राजनीति न करने का उपदेश ठेलें?

धर्म अफीम है का सूत्रवाक्य देने वाले वामपंथियों ने जितना धर्म को राजनीति में घुसेड़ा है उतना तो शायद किसी ने भी नहीं। 1989 के पहले अयोध्या विवाद कभी उतना महत्वपूर्ण नहीं रहा जितना इस मुद्दे को अपनी राजनीति के लिए हाईजैक करने वाले वामपंथियों ने बना दिया था। वामी उपन्यासकार रोमिला थापर जैसों ने कहानियों का ढेर लगाते हुए अयोध्या के साधारण से विवाद को हिन्दू मुस्लिम के बीच गहरी खायी खोदने के लिए इस्तेमाल किया।

लेकिन फिर इतना दूर क्यों जाना है जब हमारी याददाश्त में रोहित वेमुला की मृत्यु की सरेआम हुई बिकवाली ताज़ा ही है। रोहित वेमुला की मौत को एक दलित की मौत, एक दलित की मौत कह दमभर भुनाने वाले वामपंथी गैंग लाश नोच खाने वाले गिद्धों से कहाँ ही कम ठहरते हैं। नहीं ठहरिये! गिद्धों से इनकी तुलना करना अन्याय हो जाएगा उनके साथ, जो मृत इंसानी देहों, मृत पशुओं को खा पर्यावरण संरक्षण में अपनी अद्वितीय भूमिका का निर्वहन करते हैं। इसलिए गिद्धों के लिए संरक्षण के लिए कई सारे सरकारी गैर सरकारी प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन विलुप्त होने की कगार पर पहुँचे वामपंथियों के लिए किसी भी तरह के संरक्षण की एकमात्र आस वही इस्लामिस्ट्स हैं जो कश्मीर के पुलवामा में बम बांध फटने के साथ-साथ शाहीन बाग या शरजील इमाम जैसे जिहादी तत्वों के रूप में अक्सर सामने आते रहते हैं।

इसलिए जब इस्लामिस्ट्स के तलवों में तेल लगाते वामपंथी किसी और पर धर्म का धंधा करने का आरोप लगाते हैं तो समझ नहीं आता कि इंसान ऐसे बयानों पर प्रतिक्रिया दे भी तो कैसे!

“अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल अभी जिन्दा हैं” का नारा बुलंद करने वाले गैंग के सरदार शिरोमणि आजकल बिहार में कोई जन-गण-मन यात्रा पर निकले हैं। देखिए कितनी विडंबना है यह कि देश के ‘टुकड़े टुकड़े करने’ का सपना पालने वाले गैंग भी अब कैसी-कैसी यात्रा निकाल रहे हैं। इनकी यह यात्रा नागरिकता कानून में हुए संशोधनों समेत उस NRC के खिलाफ भी निकाली जा रही है जिसका अभी कहीं कोई अता-पता ही नहीं है। इसी यात्रा के दौरान सुपौल में हुए हमले के बाद शायद दिमागी सुध-बुध खो बैठे कन्हैया कुमार अपना आपा खो, थोड़ा इधर उधर निकल गए। कन्हैया भाई कहते हैं कि ‘हम आजाद भारत में आजादी’ के नारों से आकाश गुंजा देंगें। अब कोई पूछे इनसे कि कौन वाली आजादी के नारे? जिन्नाह वाली आजादी जिसके नारे शाहीन बाग में लगाए जाते रहे या ‘शरजील इमाम वाली आजादी’ जिसमें 5 लाख कथित अल्पसंख्यकों को इकट्ठा कर भारत की ‘चिकन नेक’ को काट असम को देश से अलग करना शामिल है।

कन्हैया भाई की याददाश्त अगर कमजोर है तो उनको याद दिला दिया जाए कि अभी 6 महीने पहले ही वो लोकसभा चुनाव में अपनी जाति भुनाते घूम रहे थे। सर्वहारा की राजनीति की दुहाई देने वाले कन्हैया लोकसभा चुनाव के दौरान किस सरलता से भूमिहार हो गए पता ही नहीं चला। वो तब घर के भीतर फोटोग्राफरों के लिए पलक पाँवडें बिछाए खुद के परिवार की आर्थिक स्थिति को कैश कराने की कशिश में जुटे नजर आते थे।

खैर उनकी मंशा जो भी हो इस यात्रा के पीछे लेकिन अगर “भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह” कहने वाले ‘जन-गण-मन’ नामक यात्रा निकालने में जुट गए हैं तो फिर और कितने अच्छे दिन चाहिए आपको?

सेना को रेपिस्ट बताना, शरजील के लिए नारेबाजी, बलात्कारियों का समर्थन: TISS में फैलता वामपंथी ज़हर

‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज’ (TISS) देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है। अब यहाँ भी वामपंथी मीडिया का ज़हर फ़ैल रहा है। ऐसा एक साज़िश के तहत किया जा रहा है, जिसमें चंद लोग शामिल हैं। भले ही इसमें मुट्ठी भर लोग शामिल हों, इसके दुष्प्रभाव पूरे संस्थान और उसके छात्रों व प्रोफेसरों पर पड़ता है। वामपंथी गतिविधियों से हो सकता है कुछ लोगों को दिक्कत नहीं हो लेकिन अगर किसी शैक्षिक संस्थान के कैम्पस में देश-विरोधी गतिविधियों को साजिशन अंजाम दिया जाए, तो ये छात्रों के भविष्य के लिए और अंततः देश के भविष्य के लिए अच्छा नहीं है।

ऑपइंडिया को टीआईएसएस के कुछ छात्रों ने इस बारे में बताया। छात्रों से बातचीत के दौरान कई बातें पता चलीं, जिन्हें हम आपके सामने रख रहे हैं। हमें सारी सूचनाएँ वहाँ के छात्रों से ही मिली है, जो कैम्पस में मौजूद हैं। छात्रों का तो यहाँ तक कहना है कि देश-विरोधी गतिविधियों की बात करें तो टीआईएसएस इस मामले में जेएनयू से भी आगे जा चुका है। सीएए विरोध के नाम पर यहाँ प्रदर्शन हुए लेकिन ये तो पूरी साज़िश की एक कड़ी भर थी। असली उद्देश्य तो कुछ और ही है।

भाजपा के विरोध के चक्कर में देश के ‘टुकड़े-टुकड़े’ की बात करना और फिर हिंदुत्व को गाली देना वामपंथियों का पेशा है। यहाँ हम सबूतों के साथ आपको बताएँगे कि कैसे टीआईएसएस के कैम्पस में ये खेल चल रहा है। सबसे पहले वामपंथियों का निशाना तो भाजपा होती है। भाजपा के साथ एबीवीपी को गालियाँ दी जाती हैं और फिर आरएसएस को निशाने पर लिया जाता है, जो राजनीतिक संगठन भी नहीं है। प्रोफेसर क्लास लेते वक्त इनकी आलोचना करते हैं और छात्रों के मन में इन संगठनों के ख़िलाफ़ ज़हर भरते हैं।

आरएसएस-भाजपा-एबीवीपी को गाली देना कैम्पस में एक ट्रेंड सा बन गया है और हर मुद्दे को इससे जोड़ कर देखा जाता है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को बदनाम करने के लिए पूरा जोर लगाया जाता है। एक पोस्टर में आरोप लगाया गया कि यूपी में पुलिस ने 18 लोगों को मार डाला है, जिनमें एक 8 साल का बच्चा भी शामिल है। झूठे आरोप लगाए गए कि यूपी पुलिस कथित अल्पसंख्यकों के घर में घुस कर उन्हें पीट रही है, उनकी संपत्ति को नुकसान पहुँचा रही है और युवाओं को जेल में बंद कर रही है। इसे ‘उत्तर प्रदेश में आपातकाल’ बताते हुए पेश किया गया।

यूपी में आपातकाल की बात कही गई, झूठे आरोप लगाए गए

ये सब आज से नहीं हो रहा बल्कि काफ़ी पहले से ऐसी गतिविधियाँ शुरू कर दी गई थीं। इसके सबूत हम आपको ‘टीआईएसएस क्वीर कलेक्टिव’ नामक व्हाट्सप्प ग्रुप के स्क्रीनशॉट्स से दे रहे हैं, जिनमें देश व सेना के प्रति कई आपत्तिजनक बातें कही गई हैं। पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। उपर्युक्त व्हाट्सप्प ग्रुप में एक व्यक्ति ने मैसेज कर के लिखा कि इन्हीं जवानों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर हज़ारों निर्दोष नागरिकों की हत्या की है और कइयों का बलात्कार किया है। उक्त व्यक्ति ने एक तरह से जवानों के बलिदान की खिल्ली उड़ाते हुए हँसने की बात कही।

पुलवामा हमले के बाद व्हाट्सप्प ग्रुप में भारतीय सेना का अपमान

साथ ही भारत की सुरक्षा एजेंसियों व जवानों को सरकार समर्थित हिंसा फ़ैलाने वाला भी बताया गया। इस ग्रुप में सभी लोग एक-दूसरे से बातें करते हुए केवल सेना और देश की खिल्ली उड़ा रहे थे। एक व्यक्ति ‘नो टू ऑल आर्मी मेन’ लिख कर सेना का मजाक बनाता है। साथ ही उसने हँसने वाले इमोट्स भी दिए। एक अन्य व्यक्ति ने सेना को हिंसक और शक्तिशाली संगठन बताया। पुलवामा के बलिदानियों के बारे में कहा गया कि वो बलात्कार और हत्या में शामिल नहीं थे इस बात पर विश्वास करना कठिन है। साथ ही लिखा गया कि ऐसा न करने पर भी वो दोषी हैं क्योंकि सभी हत्यारी संस्था से जुड़े हैं।

उस व्यक्ति ने एक क़दम और आगे बढ़ते हुए लिखा कि सेना का हर एक जीवित और मृत जवान जम्मू कश्मीर और उत्तर-पूर्व भारत में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं। उसने कहा कि जब तक दोषियों को सामने नहीं लाया जाता, एक-एक जवान इसके लिए जिम्मेदार है। जब हुतात्मा जवानों को श्रद्धांजलि देने की बात किसी ने की तो एक व्यक्ति ने व्हाट्सप्प ग्रुप में ‘लोल’ लिख कर मैसेज किया।

सेना के हर जवान को हिंसक और अत्याचारी बताया गया

इन सबका अर्थ है कि कैम्पस में वामपंथी लगातार ज़हर फैलाने, सेना व देश को गाली देने और दूसरे छात्रों की भावनाओं का अपमान करने में लगे हुए हैं। हॉस्टल के दरवाजों पर ‘MUCK FODI’ लिखा मिलेगा। इसका इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी की ओर था।

पीएम मोदी पर की गई अश्लील आपत्तिजनक टिप्पणी

इसी तरह ‘गेटवे ऑफ इंडिया’ पर एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें सीएए, एनआरसी और एनपीआर के ख़िलाफ़ ज़हर उगला गया। गेटवे ऑफ इंडिया को शाहीन बाग़ बनाने के लिए लोगों को सलाह दी गई कि वो रोज़मर्रा को वस्तुएँ लेकर आएँ। मुंबई में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए मैच में टीआईएसएस के छात्रों ने अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ मिल कर सीएए और एनआरसी का विरोध किया। सोशल मीडिया पर स्वरा भास्कर ने इस हरकत का समर्थन करते हुए ताली बजाई।

इसके पीछे एक बड़ा कारण टीआईएसएस छात्र संगठन का रवैया भी है, जो जेएनयूएसयू से कम नहीं है। टीआईएसएस के छात्र संगठन ने एक विज्ञप्ति जारी कर जेएनयू में 5 जनवरी को हुई हिंसा के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया। छात्र संगठन ने लिखा कि जेएनयू में एबीवीपी और आरएसएस के ‘गुंडों’ ने छात्रों को पीटा और अध्यक्ष आईसी घोष की भी पिटाई हुई। उलटा चोर कोतवाल को डाँटे की तर्ज पर एबीवीपी को हिंसा का जिम्मेदार बताया और कहा गया कि केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और जेएनयू प्रशासन ने मिल कर छात्रों व प्रोफेसरों की पिटाई की गई है।

टीआईएसएस छात्र संगठन ने आरोप लगाया कि जो भी छात्र केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं, उन्हें भाजपा हिंसा के जरिए चुप करा रही है। आरोप लगाया गया कि 70 दिनों तक जेएनयू के छात्रों ने फी बढ़ाए जाने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया और इसीलिए सरकार ने अंत में हिंसा का सहारा लिया। छात्र संगठन ने सभी कॉलेजों के कैम्पस में छात्रों को सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ एकजुट होने व जेएनयू के छात्रों के प्रति मज़बूरी से खड़े रहने की सलाह दी गई।

टीआईएसएस छात्र संगठन ने जेएनयू के वामपंथियों का किया था समर्थन

जब अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर जम्मू कश्मीर के विकास के लिए अभूतपूर्व क़दम उठाया, तब टीआईएसएस छात्र संगठन ने इसे वहाँ के जनता के प्रति क्रूरता और भेदभाव भरा फ़ैसला करार दिया था। इस निर्णय को अलोकतांत्रित और असंवैधानिक बताया गया। इस बिल को यूएपीए और तीन तलाक़ से जुड़े क़ानून से जोड़ कर देखा गया। टीआईएसएस छात्र संगठन का कहना था कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करना जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ धोखा है।

अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने से भड़का TISS छात्र संगठन

टीआईएसएस के अन्य कई छात्र संगठन भी हैं, जो केंद्र सरकार की आलोचना में लगे रहते हैं। वो दुष्प्रचार फैलाते हैं। निर्भया के बलात्कारियों की फाँसी की सज़ा माफ़ करवाने के लिए राष्ट्रपति को पत्र लिखते हैं। उन्होंने बलात्कारी दरिंदों की फाँसी माफ़ कराने के लिए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि ‘शरजील तेरे सपनों को, हम मंजिल तक पहुँचाएँगे’ के नारे लग रहे हैं।

भारत के ‘टुकड़े-टुकड़े’करने की बात करने वाला शरजील के समर्थन में नारे

उसी शरजील इमाम का समर्थन किया जा रहा है, जो राजद्रोह के आरोप में कार्रवाई का सामना कर रहा है। वो फ़िलहाल तिहाड़ में बंद है। उसने महात्मा गाँधी को सबसे बड़ा फासिस्ट नेता बताया था। उसने पूरे नॉर्थ-ईस्ट को शेष भारत से अलग करने के लिए समुदाय विशेष को भड़काया था।

इसके अलावा ‘एबीवीपी की कब्र खुदेगी’ जैसे भड़काऊ नारे भी लगाए गए। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप टीआईएसएस के वामपंथी छात्रों की इस हरकत को देख सकते हैं:

एबीवीपी को लेकर लगाए गए आपत्तिजनक नारे

टीआईएसएस के कुछ छात्रों ने ऑपइंडिया को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली देना वहाँ हॉस्टल में रह रहे छात्रों का पसंददीदा हरकत है। कैम्पस में राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है लेकिन फिर भी वामपंथी गुट ने पर्चे बाँटे और अपना संगठन ज्वाइन करने के लिए छात्रों को उकसाया। टीआईएसएस के छात्रों ने गेटवे ऑफ मुंबई पर विरोध प्रदर्शन बिना किसी आधिकारिक अनुमति के आयोजित किया। जेएनयू में जब वामपंथी गुंडों ने सर्वर रूम में तोड़फोड़ मचाई, तब टीआईएसएस के वामपंथियों ने उलटा गुंडों का ही समर्थन किया और एबीवीपी पर आरोप मढ़ा।

इस घटना के अगले ही दिन जेएनयू छात्र संगठन के पूर्व अध्यक्ष एन साई बालाजी टीआईएसएस पहुँच गया। इससे पता चलता है कि सबकुछ एक साजिश के तहत योजना बना आकर किया जा रहा था। हालाँकि, बालाजी को कैम्पस के भीतर नहीं आने दिया गया लेकिन उसने कैम्पस के गेट के बाहर ही छात्रों को सम्बोधित किया और भड़काया। ये लोग चेम्बूर के आंबेडकर गार्डन में दिल्ली के शाहीन बाग़ की तर्ज पर विरोध प्रदर्शन शुरू करना चाहते थे ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का अटेंशन मिले।

छत्रपति शिवाजी की बहू महारानी ताराबाई की समाधी का बुरा हाल, मुगलों के ख़िलाफ़ राष्ट्रहित में लड़ी थीं

छत्रपति शिवाजी महाराज की बहू और उनके बेटे राजाराम की पत्नी महारानी ताराबाई की समाधि आज जीर्णशीर्ण हालत में है। सन 1700-1707 में मुगलों के खिलाफ मराठा लड़ाई का नेतृत्व करने वाली महारानी ताराबाई मोहिते की समाधि की तरफ ध्यान लेखिका मानोशी सिन्हा ने आज एक ट्वीट के जरिये आकृष्ट किया।

उन्होंने एक और ट्वीट के जरिए यह भी सूचित किया कि अब एक संगठन सरकार के सहयोग से महारानी ताराबाई की समाधि के संरक्षण का दायित्व संभालेगी। लेखिका ने समाधि के मौजूदा हाल पर अफ़सोस जाहिर करते हुए कहा कि जहाँ एक तरफ आक्रांताओं के मकबरों का खूब ख्याल रखा गया है वहीं आजादी के 72 वर्षों बाद भी हिन्दू धर्म संस्कृति के लिए लड़ने वाली ताराबाई की समाधि को कोई पूछने वाला नहीं।

ताराबाई की लड़ाइयों और उनके महत्त्व को समझने के लिए इतिहासकार जदुनाथ सरकार की उन पर की गयी एक टिपण्णी ही पर्याप्त है। इसमें वे लिखते हैं ,”1700 -1707 के बीच महाराष्ट्र में सर्वप्रमुख प्रेरक शक्ति कोई मंत्री न होकर महारानी ताराबाई ही थीं जिन्होंने अपनी कुशल प्रशासनिक क्षमता तथा मजबूत चारित्रिक क्षमता के बल पर उस कठिन समय पर राष्ट्र की रक्षा की।”

इंसाफ और अंसारुद्दीन ने बच्चे से मिलने केरल आई विदेशी महिला के साथ किया बलात्कार, हुए गिरफ्तार

केरल के एक होटल में 46 वर्षीय विदेशी महिला का यौन उत्पीड़न करने के मामले में कोचि की पुलिस ने आज दो युवकों को गिरफ्तार किया। घटना बुधवार (फरवरी 5, 2020) की रात घटी। जानकारी के अनुसार, केरल आने के बाद महिला एमजी रोड पर स्थित एक होटल में ठहरी थी, जहाँ मोहम्मद इंसाफ और अंसारुद्दीन भी रुके थे। यहीं इन दोनों ने पूरी घटना को अंजाम दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता के बयान दर्ज कराने के बाद आरोपित मोहम्मद इंसाफ और उसके मित्र अंसारुद्दीन को गिरफ्तार किया गया। आरोपित मलप्पुरम जिले के कोंडोटी के रहने वाले हैं। बताया जा रहा है महिला ने मलप्पुरम जिले के एक स्कूल में अपने बच्चे का पंजीकरण कराया था जिसके बाद वह पिछले सात महीने से इंसाफ की फेसबुक पर मित्र थी।

बुधवार को महिला जब अपने बच्चे से मिलने आई, तो यहीं एक होटल में रुक गई। पुलिस ने बताया कि जब इंसाफ उससे मिलने आया तो उसके साथ उसका अंसारुद्दीन भी था। दोनों ने यहीं महिला का बलात्कार किया।

खबरों के अनुसार, विदेशी महिला की चिकित्सकीय जाँच समेत सभी औपचारिकताएँ पूरी हो गई हैं और आरोपितों को गुरुवार को अदालत में पेश किया जाएगा। इनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 376 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। महिला पुलिस के संरक्षण में हैं। द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, एर्नाकुलम एसीपी के लालजी ने उन्हें बताया कि महिला जिस देश की है, उसकी एंबेसी ने इस मामले पर जानकारी देते हुए उनके देश का नाम रिपोर्ट में लिखने के लिए मना किया हैं।

गौरतलब है कि ये पहला मामला नहीं है, जब केरल में किसी विदेशी महिला के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया हो। इससे पहले साल 2018 में कोवालम में एक विदेशी महिला का रेप करके उसकी बर्बरता से हत्या कर दी गई थी। करीब एक महीने बाद उसका बिना सिर का सड़ चुका शव जंगलों से बरामद हुआ था।

Video: तारीख पूछने वालो! अब काशी ज्ञानवापी मस्जिद पर कोर्ट ने दरवाजे खोल दिए हैं

वाराणसी की फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में स्वयंभू भगवान विश्वनाथ और यूपी सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के बीच मुकदमा चल रहा है। इस मामले में अंजुमन इंतेजामिया बनारस भी वक़्फ़ बोर्ड के साथ है। मुस्लिम पक्ष की माँग थी कि इस मामले में स्टे बरक़रार रहे लेकिन कोर्ट ने उनकी माँग ख़ारिज कर दी है। अब ज्ञानवापी मस्‍जि‍द के पुरातत्‍वि‍क सर्वेक्षण की वादी पक्ष की माँग पर अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी। प्रतिवादियों की याचिका ख़ारिज होने के बाद लोगों में उम्मीद बँधी है कि अब इस मामले में तेज़ी से सुनवाई होगी।

इस मामले में भगवान विश्वेश्वर पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील राजेंद्र प्रताप पांडेय पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अंजुमन इंतेजामि‍या बनारस और यूपी सुन्‍नी सेंट्रल चाहता था कि इस कार्यवाही को स्थगित कर दी जाए और आगे कोई सुनवाई न हो। कोर्ट द्वारा उनकी माँगें ख़ारिज किए जाने के बाद अब इस मामले में कार्यवाही चलेगी। नवम्बर 2019 में सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के पक्ष में फ़ैसला आने के बाद अब लोगों के भीतर उम्मीद जगी है कि मथुरा व काशी विवाद में भी हिन्दुओं को न्याय मिलेगा।

ये भी पढ़ें:

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में मुस्लिम पक्ष की याचिका ख़ारिज, अयोध्या के बाद काशी का केस खुला

काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी मस्जिद पर स्टे खत्म, 9 जनवरी से सुनवाई शुरू: रिपोर्ट्स