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नए Exit Poll में भाजपा को पूर्ण बहुमत, दोपहर 3 बजे के बाद पलट गया था गेम

हाल ही में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत की भविष्यवाणी लगभग सभी एग्जिट पोल्स द्वारा की जा रही है। अधिकतर एग्जिट पोल कह रहे हैं कि केजरीवाल की पार्टी प्रचंड जीत के साथ सत्ता में लौटेगी। लेकिन, इसी बीच एक ऐसा एग्जिट पोल भी आया है जिसमें भाजपा को बहुमत मिलता दिख रहा है। चिंतामणि-5 डॉट्स के एग्जिट पोल के अनुसार, दिल्ली में भाजपा आगे जा सकती है और आम आदमी पार्टी उससे पीछे हो सकती है। इस एग्जिट पोल में भाजपा को 27-39 सीटें दी गई हैं, वहीं AAP को 31-43 सीटें मिलने की सम्भावना जताई गई है।

ये आँकड़े ‘एलेक्शंस डॉट इन’ पर प्रकाशित हुए। जहाँ तक कॉन्ग्रेस पार्टी की बात है, बाकी एग्जिट पोल्स की तरह इसमें भी उसका पत्ता गोल होता हुआ नज़र आ रहा है और पार्टी का खाता खोलना भी मुश्किल लग रहा है। उसे 0-2 सीटें दी गई है। रिसर्च की मानें तो अंतिम 2 घंटों में वोटिंग प्रतिशत में जो बड़ी बढ़ोतरी हुई है, उससे भाजपा को भारी फायदा होने जा रहा है। ग्राउंड रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस को मिलने वाले वोटों में कमी आएगी।

इस एग्जिट पोल में उस हिस्से को कवर किया गया है, जो बाकी एग्जिट पोल्स ने छोड़ दिया। यानी 3 बजे के बाद हुए वोटिंग का डेटा। पोलिंग को 2 भाग में बाँटा गया है। फेज-1 में दोपहर 3 बजे तक के आँकड़े हैं, जिनके अनुसार केजरीवाल की पार्टी 15-20% ज्यादा वोटों के साथ भाजपा से आगे होगी। अधिकतर एग्जिट पोल्स में इसके बाद का हिस्सा छोड़ दिया गया। इस एग्जिट पोल के आँकड़ों पर नज़र डालें तो दूसरे फेज में भाजपा ने AAP पर 30-40% वोटों की लीड बना ली।

ये एकमात्र ऐसा एग्जिट पोल है, जिसमें भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने की सम्भावना जताई गई है। बता दें कि लोकसभा चुनाव के बाद चिंतामणि ने भाजपा को 297 सीटें मिलने की सम्भावना जताई थी। भाजपा इन आँकड़ों से आगे निकल कर 303 सीटें जीत गई लेकिन दोनों नंबरों के बीच ज्यादा अंतर नहीं था। ऐसे में काफ़ी लोगों को चिंतामणि के एग्जिट पोल पर भरोसा जताया।

प्रेमी ने युवती को धोखे से मिलने बुलाया, मनीरुद्दीन और निजामुद्दीन सहित 4 ने किया गैंगरेप

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में कुछ दरिंदों ने झारखण्ड की एक लड़की को धोखे से बुलाया और फिर उसके साथ समूहिक बलात्कार किया। 2019 में बीरभूम के मोहम्मद बाजार में एक आदिवासी लड़की के साथ गैंगरेप की घटना हुई थी। ताज़ा वारदात भी यहीं पर हुई है। लड़की फोन से लड़के से बात करती थी और धीरे-धीरे लड़के ने उसे अपने भरोसे में ले लिया। मुख्य आरोपित मोहम्मदबाज़ार थाना क्षेत्र का ही निवासी है। उसने युवती को मिलने के लिए बुलाया था।

दोनों के बीच फोन पर खूब बातें होती थीं, जिसके बाद युवती उस लड़के से प्रेम करने लगी थी। युवती भी लड़के से मिलना चाहती थी, इसीलिए मौका देख कर आरोपित ने उसे बुला लिया। ‘दैनिक जागरण’ की ख़बर के अनुसार, जब उक्त युवती वहाँ पर पहुँची, तब आरोपित उसे बाइक पर बिठा कर सेकड्डा इलाके में गनपुर जंगल की तरफ ले गया। वहाँ उसने युवती के साथ बलात्कार किया। उसके बाद उसके तीन दोस्त भी आए, जिन्होंने पीड़िता के साथ बलात्कार किया। दरिंदगी का ये आलम रात भर यूँ ही जारी रहा।

बाद में वो चारों वहाँ से फरार हो गए। सुबह होश में आने पर पीड़िता ने थाने पहुँच कर पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर मनीरउद्दीन शेख, निजामुद्दीन शेख तथा नीलमाधव मिर्धा नामक तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपित अभी भी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है। पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने उसका मेडिकल जाँच भी कराया है। अदालत में भी युवती का कलमबंद बयान दर्ज कर लिया गया है।

बता दें कि जुलाई 2018 में इसी इलाक़े में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की का सामूहिक बलात्कार किया गया था। पीड़िता ख़ून से लथपथ सड़क किनारे पड़ी हुई मिली थी। इस घटना में पाँच लोगों की गिरफ़्तारी हुई थी।

मूल मुस्लिम समुदाय गोरिया, मोरिया, देसी और जोलाह की पहचान करेगी असम सरकार, जल्द होगा सर्वे

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर असम में चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच सरकार मूल मुस्लिम आबादी की पहचान करने के लिए एक सर्वेक्षण कराने की योजना बना रही है। राज्य सरकार मूल मुस्लिम आबादी की पहचान करने और उन्हें बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों से अलग करने की कवायद के तहत एक सर्वेक्षण कराने की योजना बना रही है। योजना के तहत यह सर्वेक्षण चार समुदाय के लोगों की पहचान करने के लिए है।

यह चार सुमदाय हैं- गोरिया, मोरिया, देसी और जोलाह। इन्हें राज्य का मूल निवासी माना जाता है। असम के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रंजीत दत्ता ने चार समुदायों के विभिन्न संगठनों तथा अन्य पक्षकारों की मंगलवार (फरवरी 11, 2020) को एक बैठक बुलाई है। जिसमें इस योजना के अंतिम रूप दिया जाएगा।

असम अल्पसंख्यक विकास बोर्ड के अध्यक्ष मूमिनुल ओवाल ने कहा, “स्वदेशी मुस्लिम और बांग्लादेशी मुस्लमों के नाम एक जैसे हैं। जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के वक्त सरकार को उनकी पहचान में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, हमारी सरकार स्वदेशी मुस्लिमों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है, ऐसे में उनकी अलग पहचान होनी चाहिए।”

मूमिनुल ओवाल ने बताया कि असम में कुल 1.3 करोड़ मुस्लिम आबादी है जिनमें से करीब 90 लाख बांग्लादेशी मूल के हैं। शेष 40 लाख विभिन्न जनजातियों से हैं और उनकी पहचान करना जरूरी है। उन्होंने कहा, “बिना सही पहचान के मूल मुस्लिम आबादी को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। NRC में बांग्लादेशी मूल के लाखों लोग शामिल हैं, इसलिए हम इस पर भरोसा नहीं कर सकते। अगर हमने अब कुछ नहीं किया तो एक दिन असम से सभी मूल जनजातियाँ सामाप्त हो जाएँगी।”

ओवाल ने कहा कि जनगणना की तैयारी आखिरी चरण में है और उम्मीद है कि यह पूरी प्रक्रिया इस वित्तीय वर्ष में शुरू हो जाएगी। राज्य अल्पसंख्यक विकास विभाग समेत स्वदेशी मुस्लिम समुदायों से ताल्लुक रखने वाले लोगों की एक बैठक 11 फरवरी को बुलाई गई है। इसमें जनगणना के लिए आगे की योजना पर चर्चा की जाएगी।

विदेशी आतंकी संगठनों के निशाने पर RSS नेता, VBIED का कर सकते हैं इस्तेमाल: कई राज्यों में अलर्ट

अब आतंकियों की नज़र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर है। आरएसएस के कई नेता आतंकियों के निशाने पर आ गए हैं। ख़ुफ़िया सूचनाओं से पता चला है कि विदेशी आतंकी संगठन अब संघ के नेताओं को निशाना बनाने की साज़िश रचने में लगे हैं। इसके लिए IED या फिर VBIED (Vehicle-borne improvised IED) का इस्तेमाल किया जा सकता है। सभी राज्यों की पुलिस को संघ नेताओं पर हमले की आशंका से अवगत करा दिया गया है। बता दें कि ये मामला इसीलिए भी गंभीर है क्योंकि अधिकतर संघ नेता किसी ख़ास प्रकार की सुरक्षा लेकर नहीं चलते हैं।

संघ के नेता लगातार ज़मीन पर सक्रिय रहते हैं और उन्हें लगातार कई प्रदेशों व राज्यों की यात्राएँ करनी होती हैं। ऐसे में उन्हें निशाना बना कर आतंकी भारत सरकार और भाजपा को भी ख़ास सन्देश देना चाह रहे हों, ऐसा हो सकता है। इंटेलिजेंस ब्यूरो ने इस सम्बन्ध में ख़ुफ़िया सूचना दी है। वीबी-आईडी विस्फोटक से लदे वाहन होते हैं। ट्रक से लेकर साइकिल तक, इन विस्फोटकों को किसी भी वाहन से ले जाया जा सकता है। इसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में लेकर जाना आसान होता है।

सबसे बड़ी बात ये है कि विदेशी आतंकी संगठन संघ नेताओं को निशाना बनाने पर तुले हुए हैं। वैश्विक इस्लामी आतंकी संगठन संघ के नेताओं पर हमले की साज़िश रच रहे हैं। महाराष्ट्र, पंजाब और राजस्थान में ऐसे हमले होने की आशंका जताई गई है। हालाँकि, अन्य कई राज्यों को भी सतर्क कर दिया गया है। इन राज्यों के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश और असम में भी पुलिस को सचेत कर दिया गया है। दिसंबर 2018 में बेंगलुरु में एक संघ कार्यकर्ता की हत्या की कोशिश की गई थी क्योंकि उन्होंने सीएए समर्थन रैली में भाग लिया था। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को गिरफ़्तार किया है।

उक्त मामले में मोहम्मद इरफ़ान, सैयद अकबर, सैयर सिद्दीक़, अकबर भाषा, शनाउल्ला शरीफ और शादिकुल अमीन को गिरफ़्तार किया गया। पुलिस ने बताया है कि ये सभी किसी बड़े वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे।

AMU छात्रों ने किया शांति भंग: आमिर, हमजा, इम्तियाज, मोइनुद्दीन पर ₹1-1 लाख का जुर्माना

जिला प्रशासन को शांति बनाए रखने का आश्वासन देने के बाद भी AMU में हिंसा करने वाले छात्रों से अब अलीगढ़ प्रशासन लाखों का जुर्माना बसूल करेगा। दरअसल 15 दिसंबर को छात्रों ने सीएए विरोध के नाम पर कैंपस में हिंसा की थी, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। वहीं जिला प्रशासन अब ऐसे चार छात्रों से जुर्माने के तौर पर एक-एक लाख रुपए वसूल करेगा।

अतिरिक्त शहर मजिस्ट्रेट (ACM) रणजीत सिंह ने रविवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि धारा 107 के तहत चार बांड पर AMU के दो पूर्व छात्रों सहित चार छात्रों ने हस्ताक्षर करते हुए प्रशासन को आश्वासन दिया था कि वे शहर में शांति बनाए रखेंगे, लेकिन इसके बाद 15 दिसंबर को कैंपस में हुई हिंसा में चारों छात्रों को कथित तौर पर शामिल पाया गया। इस हिंसा में कई लोग घायल हो गए थे।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के चार छात्रों को 1-1 लाख रुपए का जुर्माना देना होगा, क्योंकि अलीगढ़ जिला प्रशासन ने ज़मानत बांड को प्रत्येक छात्र से वसूल करने का फैसला किया है, दरअसल 15 दिसंबर को कैंपस में हुई हिंसा से पहले छात्रों द्वारा इस बांड पर हस्ताक्षर किए थे। रणजीत सिंह ने कहा कि इन चारों छात्रों मे छात्र संघ के पूर्व सचिव हुजैफा आमिर, पूर्व उपाध्यक्ष हमजा सूफियान, रिसर्च स्कॉलर सलमान इम्तियाज, जो कि छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष हैं, और एक छात्र मोइनुद्दीन शामिल हैं।

वहीं एसीएम ने कहा कि जिला प्रशासन ने AMU से जुड़े 44 छात्रों सहित कुल 58 लोगों की भी पहचान की है, जिनको शहर में शांति भंग करने के लिए प्रशासन नोटिस जारी कर रहा है। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन को भी उनके पते उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।

रिसर्च स्कॉलर सलमान इम्तियाज ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि, दो अलग-अलग घटनाओं में तीन छात्रों के खिलाफ प्रशासन द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के फैसले पर कुलपति कार्यालय में हंगामा किया गया था। इसके बाद 1 अगस्त को अन्य छात्रों के साथ हमने हस्ताक्षर किए थे।

इस बीच, एएमयू प्रॉक्टर वसीम अली ने कहा कि यह दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं है कि वे एएमयू के छात्र हैं या युनिवर्सिटी से जुड़े हैं। सिर्फ नामों के आधार पर, हम पुष्टि नहीं कर सकते हैं कि ये प्रशासन द्वारा पहचाने जाने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने ये नाम नहीं दिए हैं, जिनमें एक ही नाम के एक से अधिक छात्र हैं। एएमयू प्रॉक्टर ने कहा कि विश्वविद्यालय का माहौल फिलहाल सामान्य स्थिति में है। वहीं कक्षाओं में भी अब छात्र भाग ले रहे हैं और इसी के साथ विभिन्न विभागों द्वारा लंबित परीक्षाएँ भी आयोजित की गई हैं।

आपके बता दें कि 15 दिसंबर को सीएए विरोध के नाम पर एएमयू में हुई हिंसा के बाद से ही प्रदर्शकारी बाबे सैयद गेट पर 15 दिसंबर से धरने पर बैठे हुए हैं।

गोद में बच्चा और ‘आजादी’ का नारा… साथ में कॉन्ग्रेसी सलमान खुर्शीद भी बार-बार चिल्ला रहे आजादी – वीडियो वायरल

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो ‘आजादी’ के नारे लगा रहे हैं। ये वीडियो राजधानी दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के पास का बताया जा रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है जब एक बच्चा कहता है, “हम क्या चाहते” और उसके पीछे-पीछे खुर्शीद कहते हैं, “आजादी” 

बच्चा आगे कहता है – “जोर से बोलो, तुम जेल में डालो” इस पर भी खुर्शीद कहते हैं – आजादी। फिर बच्चा कहता है, ‘तुम गोली मारो’, ‘तुम कुछ भी कर लो’, ‘तुम कैसे ना दोगे’, ‘हम छीन के लेंगे’… इन सबके जवाब में खुर्शीद कहते हैं – ‘आजादी’

हालाँकि कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से अभी तक इस पर किसी तरह की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उनके वरिष्ठ नेता का इस तरह से आज़ादी के नारे लगाना पार्टी की मानसिकता को दिखाता है। बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर जामिया, शाहीन बाग में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में ये नारे आम हैं। इन नारों को लेकर कई बार सवाल भी उठते हैं कि आखिरकार प्रदर्शनकारी आजाद देश में किससे आजादी की बात कर रहे हैं?

ये बेहद शर्मनाक बात है। वो भी ऐसे में जब कुछ दिनों पहले ही शाहीन बाग में प्रदर्शन में जा रहे चार महीने की एक बच्ची की मौत के बाद किसी भी बच्चे को विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं किए जाने पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की बात कही थी। बच्ची की मौत के बाद जेन सदावर्ते नामक 12 वर्षीय बच्ची ने देश के मुख्य न्यायाधीश बोबडे को पत्र लिख कर इस मामले को संज्ञान में लेने की अपील की थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने संज्ञान लिया था।

बता दें कि कुछ महीने पहले जन्मीं उस बच्ची को लेकर उसकी अम्मी जामिया नगर और शाहीन बाग और के सीएए विरोधी प्रदर्शनों में जाती थी। भीषण ठण्ड में भी उस बच्ची और ऐसे कई बच्चे-बच्चियों को उनके परिजन विरोध प्रदर्शन में लेकर सिर्फ़ इसीलिए जाते थे ताकि मीडिया अटेंशन मिले, खासकर इंटरनेशनल मीडिया का।

इससे भी हैरानी की बात है कि बच्ची की मौत के बाद उसकी अम्मी ने कहा था कि उसने सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में अपनी बच्ची को कुर्बान कर दिया। जबकि अन्य प्रोटेस्टरों का कहना था कि वो अल्लाह की बच्ची थी और उसे अल्लाह ने ले लिया। ऐसे कई बयान दिए गए, जिससे पता चलता है कि बच्ची मरी नहीं, उसकी ‘हत्या’ की गई। अब कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता का इस तरह से प्रदर्शन में बच्चे का इस्तेमाल करना और आजादी के नारे लगाना कई सवाल खड़े करता है। ट्विटर यूजर्स ने भी इस पर सवाल उठाए और इसे देश के लिए बेहद खतरनाक बताया। एक यूजर ने तो यहाँ तक लिख दिया कि कॉन्ग्रेसी तो हमेशा से ही देश विरोधी रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनका पर्दाफाश हो रहा है।

वारंट के बाद फरार हुए हार्दिक पटेल, पत्नी ने कहा- रात में घर में घुस आती है पुलिस, लेती है तलाशी

कॉन्ग्रेस नेता हार्दिक पटेल फरार हो गए हैं। उनकी बीवी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कहा है कि उनके पति गायब हैं। ख़ुद को पाटीदार नेता बताने वाले हार्दिक पटेल पर कई मुक़दमे दर्ज हैं। उन्हें पुलिस ने गिरफ़्त में भी लिया था। उनके ख़िलाफ़ जारी वारंट और पुलिस के बढ़ते शिकंजे के बीच वो भूमिगत हो गए हैं। उनकी पत्नी किंजल ने अपने पति के लिए सोशल मीडिया पर मोर्चा सम्भाला हुआ है। उनका कहना है कि गुजरात पुलिस और सरकार उनके पति को बेवजह प्रताड़ित कर रही है।

किंजल ने अहमदाबाद पुलिस पर भी कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि क्राइम ब्रांच के अधिकारी रात के 10 बजे घर में घुस जाते हैं और जबरदस्ती तलाशी लेते हैं। किंजल ने पुलिस को आड़े हाथ लेते हुए लिखा है कि किसी को मार डालना ही आतंकवाद नहीं होता है, किसी को डराकर कोने में बिठा देने की कोशिश करना भी आतंकवाद होता है। हार्दिक 24 जनवरी को जेल से रिहा हुए थे। इसके बाद उन्होंने कहा था:

“7 दिन बाद तानाशाही की कैद से आजाद हुआ हूँ। मेरा गुनाह क्‍या है? क्‍या मैं किसान, युवा, छात्रों के अधिकार तथा शिक्षा व रोजगार की बात करता हूँ, इसलिए इनके निशाने पर हूँ? मुझे संविधान इसका अधिकार देता है। सरकार में बेठे हिटलरवादी लोगों ने मुझे डराने और झुकाने के लिए सभी ताक़त का इस्तेमाल कर लिया है।”

हार्दिक पटेल के ख़िलाफ़ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है। उन पर देशद्रोह का मामला दर्ज है। किंजल पटेल अपने पति हार्दिक का आधिकारिक ट्विटर हैंडल भी चलाती हैं। उनका कहना है कि आंदोलन से हार्दिक या उनका परिवार करोड़पति नहीं बन पाया और निर्दोष भाव से काम किया लेकिन आज लोग उनके साथ नहीं खड़े हैं।

साबरमती जेल से बाहर आते ही हार्दिक पटेल को अहमदाबाद पुलिस ने दूसरे मामले में किया गिरफ़्तार

देशद्रोह मामले में हाजिर नहीं हुए कॉन्ग्रेस नेता हार्दिक पटेल, गिरफ़्तारी के बाद भेजे गए जेल

चुनावी जनसभा के दौरान हार्दिक पटेल को पड़ा झापड़, BJP को ठहराया दोषी

कॉन्ग्रेस सरकार ने लिया था आरक्षण ख़त्म करने का फ़ैसला, सच्चाई छिपाने के लिए भाजपा व संघ को दे रहे दोष

उत्तराखंड मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के कारण प्रमोशन में रिजर्वेशन का मामला छाया हुआ है। पदोन्नति में आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार के उस फ़ैसले को सही करारा दिया है, जिसमें इसे रोक दिया गया था। अब कॉन्ग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने इस पर राजनीति शुरू कर दी है। राहुल गाँधी ने पुराना राग अलापते हुए कह डाला कि सरसंघचालक मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिल कर आरक्षण को ख़त्म करना चाहते हैं। उन्होंने दावा कर दिया कि आरक्षण को कॉन्ग्रेस कभी भी ख़त्म नहीं होने देगी।

दरअसल, ये मामला न तो भाजपा से जुड़ा है और न ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले का केंद्र सरकार या भाजपा से कुछ लेना-देना है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी राज्य पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि प्रमोशन में आरक्षण लेना मूलभूत अधिकारों के अंतर्गत नहीं आता। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस हमनी गुप्ता की पीठ ने ये फ़ैसला सुनाया। साथ ही कोर्ट ने प्रमोशन में रिजर्वेशन देने के लिए राज्य सरकार को आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।

अब आते हैं कॉन्ग्रेस के आरोपों पर। आज संसद में जब केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्री थावरचंद गहलोत ने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने 2012 में फ़ैसला लिया था कि वो प्रमोशन में रिजर्वेशन नहीं देगी, तो कॉन्ग्रेस सांसद सदन से वॉकआउट कर गए। दरअसल, गहलोत ने सदन में कॉन्ग्रेस को सही आइना दिखाया क्योंकि ये मामला सितम्बर 2012 का है। उस समय विजय बहुगुणा के नेतृत्व में राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार चल रही थी। उसी सरकार ने निर्णय लिया था कि एससी-एसटी को आरक्षण दिए बिना राज्य में सारे सार्वजनिक पदों को भरा जाएगा।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भारत सरकार इस मामले पर उच्च-स्तरीय बैठकों के जरिए चर्चा कर रही है। भारत सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में कोई पक्ष थी ही नहीं। ऐसे में, कॉन्ग्रेस अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णय के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रही है। ये भी जानने लायक बात है कि तब कॉन्ग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे विजय बहुगुणा ने मई 2018 में भाजपा का दामन थाम लिया था। अब कॉन्ग्रेस अपने किए-धरे को छिपाने में जुटी है और संघ-भाजपा पर दोषारोपण कर रही है।

‘भारत धर्मशाला नहीं, CAA-NRC का विरोध कर मुस्लिम किसको अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं?’

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अपने भगवा रंग को और गाढ़ा करते हुए रविवार को मुंबई के आजाद मैदान तक पाकिस्तानी और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ महा रैली निकाली। नागरिकता कानून को अपना समर्थन देते हुए राज ठाकरे ने रैली में कहा कि यदि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दुओं को डर लगता है तो उन्हें भारत की नागरिकता देने में क्या बुराई है?

एनआरसी का समर्थन करते हुए राज ठाकरे ने अपनी रैली में कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है, न सिर्फ हम ने ही मानवता का सारा ठेका ले रखा है, दुनिया के सभी देशों में स्पष्ट प्रावधान हैं कि अगर आप गैर क़ानूनी ढंग से वहाँ रह रहे हैं तो फिर या तो आपको वापस जाना होगा या फिर जेल जाना होगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार ठाकरे ने रैली को सम्बोधित करते हुए कहा, “उनकी पार्टी नागरिकता कानून का विरोध करते लोगों को सटीक जवाब देगी। आज का महामोर्चा, नागरिकता कानून और एनआरसी के विरोध में हुए विरोध प्रदर्शनों के जवाब में निकाला गया है। रैली का जवाब रैली से दिया जाएगा, पत्थर का जवाब पत्थर से, और तलवार का जवाब तलवार से।”

रविवार की दोपहर मनसे ने अवैध पाकिस्तानी और बांग्लादेशियों को देश से निकालने की माँग करते हुए गिरगाँव चौपाटी से आजाद मैदान तक एक विशाल रैली निकाली जिसमें हजारों की संख्या में मनसे कार्यकर्ता शामिल हुए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रैली से पहले राज ठाकरे ने अपनी पत्नी व बेटे के साथ सिद्ध विनायक मंदिर जा भगवान गणेश की आरती की।

रैली को सम्बोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा, “मैं समझ नहीं पा रहा कि मुस्लिम नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ क्यों विरोध प्रदर्शन कर रहे। कौन उनको देश से निकालने जा रहा जो जन्म से भारतीय हैं?नागरिकता कानून और एनआरसी का विरोध कर आप किसको अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं?”

ठाकरे ने इन देश भर में जारी इन विरोध प्रदर्शनों को गलतफहमी का नतीजा बताया, जो सिर्फ विषय की ठीक से समझ न होने के कारण पैदा हुई है।

जिस सीरियल बम धमाके में गई थी 257 लोगों की जान, उसका दोषी मुनाफ हलारी मूसा गिरफ्तार

साल 1993 में हुए मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में जाँच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। आतंकी मुनाफ हलारी मूसा को मुंबई एयरपोर्ट से गिरप्तार कर लिया गया है। मुनाफ हलारी को गुजरात एंटी टेरेरिज्म स्क्वॉड ने गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक वो पाकिस्तान के पासपोर्ट पर यात्रा कर रहा था।

मुनाफ हलारी 1993 में जावेरी बाज़ार में ब्लास्ट मामले में दोषी था। जाँच एजेंसियों को लंबे समय से इसकी तलाश थी। 12 मार्च 1993 को मुंबई में सिर्फ दो घंटे के अंदर अलग-अलग जगह पर 12 धमाके हुए थे। इन धमाकों में 257 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 713 लोग घायल हो गए थे। 19 नवंबर 1993 में ये मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। 19 अप्रैल 1995 को मुंबई की टाडा अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई थी। अगले दो महीनों में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को पहले ही फाँसी दी जा चुकी है, जबकि मुख्य दोषी दाऊद इब्राहिम अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

मूसा लंबे समय से जाँच एजेंसियों को चकमा देकर बच रहा था। मगर सोमवार (फरवरी 10, 2020) को वो जाँच एजेंसी के हत्थे चढ़ गया। एटीएस को खबर मिली कि मूसा पाकिस्तानी पासपोर्ट पर यात्रा कर रहा है। इसके बाद मुंबई एयरपोर्ट से उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। गुजरात एटीएस आज दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी।

जाँच अधिकारियों ने बताया कि ब्लास्ट करने के बाद मूसा देश से फरार हो गया था। फिर बाद में उसके दक्षिण अफ्रीका में छुपे होने की बात पता चली थी। मूसा ड्रग्स के काले कारोबार की दुनिया में बड़ा नाम है। पिछले साल पुलिस ने 1500 करोड़ रुपए के एक ड्रग रैकेट का पर्दाफाश किया था, जिसमें उसकी बड़ी भूमिका थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुजरात एटीएस इस पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सकती है। इस गिरफ्तारी के बाद दक्षिण अफ्रीका में एक बड़े ड्रग रैकेट का पता चल सकता है।