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ज्ञानवापी मस्जिद मामले में मुस्लिम पक्ष की याचिका ख़ारिज, अयोध्या के बाद काशी का केस खुला

वाराणसी की फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में स्वयंभू भगवान विश्वनाथ और यूपी सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के बीच मुकदमा चल रहा है। इस मामले में अंजुमन इंतेजामिया बनारस भी वक़्फ़ बोर्ड के साथ है। मुस्लिम पक्ष की माँग थी कि इस मामले में स्टे बरक़रार रहे लेकिन कोर्ट ने उनकी माँग ख़ारिज कर दी है। अब ज्ञानवापी मस्‍जि‍द के पुरातत्‍वि‍क सर्वेक्षण की वादी पक्ष की माँग पर अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी। प्रतिवादियों की याचिका ख़ारिज होने के बाद लोगों में उम्मीद बँधी है कि अब इस मामले में तेज़ी से सुनवाई होगी।

इस मामले में भगवान विश्वेश्वर पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील राजेंद्र प्रताप पांडेय पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अंजुमन इंतेजामि‍या बनारस और यूपी सुन्‍नी सेंट्रल चाहता था कि इस कार्यवाही को स्थगित कर दी जाए और आगे कोई सुनवाई न हो। कोर्ट द्वारा उनकी माँगें ख़ारिज किए जाने के बाद अब इस मामले में कार्यवाही चलेगी। नवम्बर 2019 में सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के पक्ष में फ़ैसला आने के बाद अब लोगों के भीतर उम्मीद जगी है कि मथुरा व काशी विवाद में भी हिन्दुओं को न्याय मिलेगा।

काशी विश्वनाथ व ज्ञानवापी मस्जिद का मामला हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट, दोनों में ही चल रहा था। बाद में हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमा एक ही कोर्ट में चलेगा और सेशन कोर्ट में जारी रहेगा। वादी पक्ष की तरफ से पूरे ज्ञानवापी परिसर के एएसआई द्वारा भौतिक सर्वे कराने के लिए आवेदन दिया गया था, जिस पर मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति जताई थी। उसका कहना था कि हाईकोर्ट के 1998 में दिए गए आदेश के अनुसार इस मामले में स्टे लगा हुआ है।

वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र पांडेय ने दी मामले की जानकारी

हिन्दू पक्ष का कहना है कि ये मामला हिन्दुओं की भावनाओं से जुड़ा हुआ है, इसीलिए एएसआई द्वारा सर्वेक्षण कराना ज़रूरी है। ज्ञानवापी मस्जिद भी काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में ही स्थित है। हिन्दुओं का मानना है कि विवादित परिसर में अभी भी स्वयंभू विश्वेश्वर विराजमान हैं।

काशी विश्वेश्वर बनाम अंजुमन इंतेजामिया मामले में कोर्ट का ऑर्डर

अधिवक्ता राजेंद्र पांडेय का भी यही कहना है। पांडेय ने कहा कि शिवलिंग ज्ञानवापी में विराजमान है और वो स्वयंभू हैं क्योंकि वो स्वयं प्रकट हुए हैं। 17 फरवरी को फिर से बहस होगी, जिसमें एएसआई से सर्वेक्षण कराने को लेकर कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलों को सुनेगी।

कोर्ट ऑर्डर: काशी विश्वेश्वर बनाम अंजुमन इंतेजामिया

आखिर ये मुकदमा किस बात को लेकर है? इस सवाल के जवाब में अधिवक्ता राजेंद्र पांडेय ने बताया कि ज्ञानवापी में सतयुग से ही भगवान विश्वेश्वर विराजमान हैं और एएसआई के सर्वे के बाद इस मामले में सच्चाई समाने आ जाएगी। उनका कहना है कि उस परिसर के मालिक भी भगवान विश्वेश्वर ही हैं। लेकिन एक मंडप को तोड़ कर औरंगज़ेब ने मस्जिद खड़ी कर दी थी।

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‘शरद पवार हिंदू विरोधी, किसी भी कार्यक्रम में मत बुलाओ’ – विट्ठल भक्तों के वारकरी संप्रदाय ने लिया फैसला

विट्ठल भक्तों की प्रमुख संस्था राष्ट्रीय वारकरी परिषद ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार को हिन्दू विरोधी करार दे दिया है। वारकरी परिषद ने उनका बहिष्कार करने का फैसला किया है। परिषद प्रमुख वक्ते महाराज ने वारकरी समुदाय के किसी भी कार्यक्रम में शरद पवार को न आमंत्रित करने की बात भी कही।

राष्ट्रीय वारकरी सम्प्रदाय के वक्ते महाराज ने शरद पवार पर हमेशा से हिन्दू विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पवार कभी रामायण पर कटाक्ष करते हैं तो कभी उसको अप्रासंगिक बताते हैं। और न ही वे पांडुरंग की पूजा में शामिल होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पवार नास्तिक मंडलियों के साथ हैं। और ऐसे में अगर पैसों के लालच में उन्हें कोई कार्यक्रमों में बुलाता है तो यह अधार्मिक ही है।

बताते चलें कि महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे, मराठवाड़ा तथा विदर्भ क्षेत्र में विट्ठल भगवान पर आस्था रखने वाले वारकरी सम्प्रदाय का अच्छा खासा प्रभाव है। राष्ट्रीय वारकरी परिषद के वक्ते महाराज को 2018 में महाराष्ट्र सरकार ने ज्ञानबा तुकाराम पुरस्कार से भी सम्मानित किया था। इनका हिन्दू संगठनों पर काफी प्रभाव माना जाता है।

क्या है वारकरी संप्रदाय

वारकरी भगवान विट्ठल (श्रीकृष्ण)- रुक्मिणी पर आस्था रखते हैं। इस सम्प्रदाय को मानने वाले सोलापुर के पंढरपुर में स्थापित भगवान विट्ठल की परिक्रमा करते हैं तथा भजन कीर्तन करते हुए संयमित जीवन शैली में विश्वास रखने वाले हैं। यह सम्प्रदाय नाम स्मरण चिंतन अदि उपासना पद्धति को फॉलो करता है। इस सम्प्रदाय के प्रवर्तकों में संत ज्ञानेश्वर का महत्त्वपूर्ण स्थान है।

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प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गाँधी को कहा ट्यूबलाइट: मैं 40 मिनट से बोल रहा था, करेंट इतनी देर में वहाँ पहुँचा!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 06, 2020 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर संसद में पेश धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर जवाब दिया। बजट सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जनवरी 31, 2020 को संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्‍त बैठक को संबोधित किया था। संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण के प्रस्ताव को लेकर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा चल रही। इस संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा की।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को धन्यवाद देने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि राष्‍ट्रपति का अभिभाषण देश के लोगों के दिलों में विश्‍वास पैदा करने वाला है और सदन के सदस्‍यों ने बहुत ही अच्छे ढंग से अपने विचार रखे हैं। उन्होंने कहा कि हर किसी ने चर्चा को समृद्ध करने का प्रयास किया है।

लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा- “हम अगर उसी तरीके से चलते, जिस तरीके से आप लोग चलते हैं तो इस देश से अनुच्‍छेद 370 नहीं हटता, तो मुस्‍लिम बहनों को तीन तलाक की तलवार आज भी डराती रहती, तो नाबालिग से रेप के मामले में फाँसी की सजा का कानून नहीं बनता, तो राम जन्‍मभूमि आज भी विवादों में रहती, तो करतारपुर कॉरिडोर कभी नहीं बनता, तो भारत-बांग्‍लादेश सीमा विवाद कभी नहीं सुधरता।”

इसके साथ ही लोकसभा में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि सीमा विवाद का मसला हो या सामरिक क्षेत्र का, ऐसे कई मुद्दे हैं, जो दशकों से लटके हुए थे और उसे मोदी सरकार ने सुलझाने का काम किया।

पीएम मोदी ने राहुल गाँधी पर तंज कसते हुए कहा- “कल कॉन्ग्रेस के एक नेता ने कहा कि 6 महीने में मोदी को डंडे पड़ेंगे। मैं इन छह महीनों में और ज्यादा सूर्य नमस्कार करूँगा, ताकि मेरी पीठ को भी हर डंडा झेलने की आदत हो जाए।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वो पिछले 40 मिनट से भाषण दे रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों तक करेंट अब पहुँचा है।

भाषण की कुछ प्रमुख बातें

  1. गाँधी जी उनके लिए ट्रेलर हो सकते हैं, लेकिन हमारे लिए जिंदगी हैं।
  2. क्यों नहीं हुआ, कब होगा, कैसे होगा? जैसे सवाल करने वालों का मैं बुरा नहीं मानता, मैं समझता हूँ कि आप मान चुके हैं कि करेगा तो यही (मोदी) करेगा।
  3. राजनीति करिए, करनी भी चाहिए, लेकिन किसानों से खिलवाड़ न करे विपक्ष।
  4. हमने तेज काम किया तभी 2 करोड़ को घर दिया, तभी 37 करोड़ खाते खुले।
  5. तेज गति नहीं होती तो 11 करोड़ शौचालय नहीं बनते, 13 करोड़ गैस चूल्हे नहीं होते।
  6. अगर कॉन्ग्रेस के रास्ते पर चलते तो शत्रु संपत्ति कानून का इंतजार कर रहे होते। बेनामी संपत्ति कानून 28 साल बाद भी लागू नहीं होता। चीफ ऑफ डिफेंस 20 साल बाद भी नहीं आता।
  7. यह सरकार अच्छे से समझती है कि 70 साल बाद अब लोग लंबा इंतजार नहीं चाहते।
  8. पूर्व में सूरज सबसे पहले उगता था, लेकिन सुबह नहीं आता था। लेकिन बोडो समझौते के बाद नई सुबह आई है। वह प्रकाश जब दिखेगा जब आप अपने चश्मे बदलोगे।

जब प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद प्रस्ताव शुरू तब लोकसभा में जय श्री राम के नारे लगाए गए। मोदी जैसे ही बोलने के लिए खड़े हुए कॉन्ग्रेस और बाकी विपक्षी सांसदों ने महात्मा गाँधी जिंदाबाद के नारे लाने शुरू कर दिए। इस पर पीएम मोदी ने कहा- “बस इतना ही?” इस पर कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन उठे और जवाब देते हुए कहा कि यह तो बस ट्रेलर है। लेकिन हाजिरजवाबी में माहिर नरेंद्र मोदी ने तुरंत ही इस पर कॉन्ग्रेस नेता को जवाब देते हुए कहा कि आपके लिए गाँधी जी ट्रेलर हो सकते हैं, हमारे लिए जिंदगी हैं।

अपने भाषण में पीएम मोदी ने सर्वेश्वर दयाल की कविता का भी जिक्र करते हुए कहा- “लीक पर वे चलें जिनके, चरण दुर्बल और हारे हैं, हमें तो जो हमारी यात्रा से बने, ऐसे अनिर्मित पन्थ प्यारे हैं।”

ट्विटर को नहीं पसंद आई दक्षिणपंथी कार्टूनिस्ट की कला, एकाउंट किया सस्पेंड

सोशल मीडिया पर दक्षिणपंथी विचारधारा के वर्चस्व के साथ ही उसके खिलाफ वैचारिक हमले और उनकी आवाज दबाने के तरीके भी बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। इन्हीं में से एक ट्विटर भी है। ट्विटर और उसका दक्षिणपंथी विचारधारा के प्रति पूर्वग्रह कोई नई बात नहीं है।

हाल ही में ऑपइंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में एक कार्टूनिस्ट्स का जिक्र किया था जो ‘टीपूडा‘ नाम से लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। इनका यूजरनेम है- @PR1CELES5। टीपूडा ने कई सारे कार्टून्स को सही (राजनीतिक रूप से) किया है, खासकर सतीश आचार्य द्वारा बनाए गए कार्टून्स। उन्होंने इन कार्टून्स को सही करते हुए बताया है कि कैसे ये ओरिजिनल कार्टून्स पक्षपाती हैं और सिर्फ एक ही पक्ष को दिखाते हैं।

लेकिन ट्विटर को टिपूडा की यह रचनात्मकता शायद रास नहीं आई और उनका ट्विटर एकाउंट सस्पेंड कर दिया गया। यह इस बात का भी सबूत है कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इकतरफा ही काम करती है- इकतरफा यानी, जब तक यह दक्षिणपंथी सरकार विरोधी आवाज हो, तब तक इसे बड़े स्तर पर सेलिब्रेट किया जाता है, लेकिन यदि यह आवाज विरोधियों के नेरेटिव्स का खंडन करने वाली हो तो उसे दबाने के लिए हर प्रकार का जोर लगाया जाता है।

टीपूडा का असली नाम अमोल है। वो प्रोफेशनल कार्टूनिस्ट नहीं है, लेकिन कार्टून के माध्यम से चीजों का खंडन करने के लिए वो काफी पॉपुलर है। अमोल ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा था कि उन्होंने ये सब कार्टून मजे के लिए बनाए थे, लेकिन साथ ही वो एक मैसेज भी देना चाहते थे। उन्होंने कहा कि समय मिलने पर वो और भी कार्टून बनाएँगे।

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शाहीन बाग़ में इस्लामी कट्टरपंथी PFI के पैसों का खेल: ED की छापेमारी से कॉन्ग्रेस-AAP का भी पर्दाफाश

दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक छापेमारी की है, जिसका संबंध शाहीन बाग़ में चल रहे विरोध प्रदर्शन से पाया गया है। प्रवर्तन निदेशालय ने इस छापेमारी की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को बंद लिफ़ाफ़े में भेज दी है। इसमें राजनीतिक दलों के भी नाम सामने आए हैं।

ED की रिपोर्ट में पाया गया है कि PFI के एक्टिविस्ट और कार्यकर्ता देश भर से लोगों से रुपए इकट्ठा करते हैं और इस रुपए को उस क्षेत्र के ही किसी आदमी को सौंप देते हैं, जो कि फिर दिल्ली आकर इस कैश को PFI के हेडऑफिस में छोड़ जाते हैं, जो कि शाहीन बाग़ के ही पास है। ज्ञात हो कि मोहम्मद परवेज अहमद, PFI के दिल्ली के प्रेजिडेंट और अन्य पार्टी कार्यकर्ता CAA विरोध में शामिल था।

ED द्वारा गृहमंत्रालय को भेजी गई कॉपी-1

ईडी के मुताबिक नागरिकता संशोधन विधेयक संसद में पेश होने के बाद कुल 15 खातों में 1.04 करोड़ रुपए जमा किए गए, जिसमें 10 खाते पीएफआई और 5 खाते रिहैब इंडिया फाउंडेशन के हैं। ये जमा राशियाँ 5 हजार से लेकर 49 हजार रुपए तक थीं और इन्हें नकद अथवा मोबाइल का इस्तेमाल कर तत्काल भुगतान सेवा द्वारा जमा कराया गया था। जमाकर्ता की पहचान छुपाने के लिए धनराशि 50 हजार से कम रखी गई थी। इन 15 बैंक खातों से 4 दिसंबर 2019 से 6 जनवरी 2020 के दौरान 1.34 करोड़ रुपए निकाले गए। इस धन का नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों में इस्तेमाल किया गया।

ED द्वारा गृहमंत्रालय को भेजी गई कॉपी-2

इसी तरह पीएफआई के खिलाफ एनआईए की जाँच में कुल 73 बैंक खातों का पता चला है, जिसमें पीएफआई के 27, इसकी संबंधित इकाई रिहैब इंडिया फाउंडेशन के 9, और 17 अलग अलग बैकों में इससे जुड़े व्यक्तियों के 37 खाते हैं। इन बैंक खातो में 120.5 करोड़ रुपए जमा किए गए जो उसी दिन या फिर दो या तीन दिनों के भीतर ही निकाल लिए गए।

यही मोहम्मद परवेज अहमद, आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह से व्यक्तिगत रूप से भी फोन और व्हाट्सएप मैसेज के द्वारा जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही, परवेज अहमद कुछ कॉन्ग्रेस नेता के साथ भी जुड़ा हुआ है, जिनमें से उदित राज भी हैं। इसके अलावा परवेज अहमद ‘भीम आदमी’ जैसे दलों के व्हाट्सएप समूह से भी जुड़ा हुआ है। इस रिपोर्ट में संजय सिंह के व्हाट्सएप चैट भी दिए गए हैं, जिनमें थाने के आगे विरोध प्रदर्शन करने की रणनीति पर बात की जा रही है।

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जिस विधायक का AAP ने काटा टिकट, उन पर जानलेवा हमला: सिसोदिया पर लगाया था टिकट बेचने का आरोप

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता मनीष सिसोदिया पर टिकट बेचने का आरोप लगाने वाले मौजूदा विधायक नारायण दत्त शर्मा पर बीती रात (5-6 फरवरी की रात) जानलेवा हमला किया गया। उन पर यह हमला रात के तकरीबन 1:30 बजे किया गया। विधायक नारायण दत्त शर्मा इस बार बदरपुर सीट से बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।

नारायण दत्त शर्मा ने कहा, “मुझे संदेह है कि मैं जिनके खिलाफ चुनाव लड़ रहा हूँ, यह जानलेवा हमला उन्हीं लोगों ने करवाया है।” रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार की आधी रात को मोलरबंद में इन पर अज्ञात हमलावरों ने जानलेवा हमला कर दिया।

नारयण दत्त शर्मा वही विधायक हैं, पार्टी ने जिनकी टिकट काट कॉन्ग्रेसी नेता राम सिंह को दे दी थी। अपनी टिकट काटे जाने पर MLA नारायण दत्त शर्मा ने AAP पर बदरपुर के भू माफियाओं को 20 करोड़ रुपए में टिकट बेचने का आरोप लगाया था।

नारायण दत्त शर्मा ने 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP की टिकट पर 50000 वोटों के अंतर से चुनाव जीता था।

आपको बता दें कि नारायण दत्त शर्मा ने अपनी टिकट काटे जाने के बाद केजरीवाल के खिलाफ बगावती रुख अपना लिया था। अभी वे बदरपुर सीट से बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव के मैदान में हैं।

4 बच्चों की माँ से दरोगा उमराव खान समेत इब्राहिम, मैनुद्दीन, शाहिद ने किया गैंगरेप: Video वायरल होने पर खुलासा

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक विवाहिता के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आई है। शर्मनाक बात यह है कि महिला का गैंगरेप करने वाला कोई और नहीं, बल्कि एक दरोगा है। जिसने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया।

घटना भेलूपुर थाना क्षेत्र के बजरडीहा इलाके की है। जहाँ एक महिला ने शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि एक सप्‍ताह पहले उसका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उसके साथ दरोगा उमराव खान समेत चार अन्‍य दुष्कर्म कर रहे हैं। महिला का आरोप है कि तीन साल पहले नशीला पदार्थ ख़िलाकर दरोगा तथा इलाके के ही इब्राहिम, हाजी मैनुद्दीन और शाहिद ने उसका गैंगरेप किया था।

मीडिया खबरों के मुताबिक, 4 बच्चों की माँ ने दरोगा समेत चार लोगों पर आरोप लगाते हुए कहा कि साल 2016 में बजरडीहा चौकी पर तैनात सब इंस्पेक्टर उमराव खान किन्हीं वजहों से उसके संपर्क में आया था। जिसके कुछ समय बाद इस घटना को अंजाम दिया गया।

महिला शिकायत में बताती हैं कि उस समय समाज में अपनी इज्जत बचाए रखने के कारण उसने किसी तरह की शिकायत पुलिस थाने में नहीं की थी। लेकिन कुछ दिन पहले उसका वायरल वीडियो दिखाकर उसे ब्लैकमेल किया जाने लगा। साथ ही फिर से संबंध बनाने के लिए उसे मजबूर किया गया। जिसके बाद पीड़िता ने शहर के भेलूपुर थाने में जाकर आरोपी सब इंस्पेक्टर उमराव खान और उसके तीन अन्य साथियों के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज कराया।

जानकारी के अनुसार, इस घटना के खुलासे के बाद आला अधिकारियों ने फौरन मऊ जनपद में तैनात आरोपित सब इंस्पेक्टर उमराव खान को सस्पेंड कर दिया है और आरोपितों की तलाश शुरू कर दी गई। पुलिस आरोपितों की तलाश में छापेमारी कर रही है।

नाबालिग को घर से उठाया, गैंगरेप के बाद मर्डर: 7 दिन बाद मिली लाश, पोस्टमार्टम के लिए MP पुलिस ने माँगी रिश्वत

झाड़फूँक के नाम पर मौलवी कलीम शेख समेत 4 ने किया गैंगरेप, पीड़िता को जान से मारने की दी धमकी

₹5,000 के लिए अब्दुल ने 13 साल की बच्ची से किया रेप, ₹2500 के लिए महिला से गैंगरेप

मस्जिद के लिए योगी सरकार ने दे दी 5 एकड़ जमीन लेकिन… मुस्लिम पक्ष असंतुष्ट, कहा – SC में डालेंगे याचिका

मोदी सरकार द्वारा बुधवार को राम मंदिर ट्रस्ट की घोषणा के बाद अब योगी कैबिनेट ने भी सुन्नी वक्फ बोर्ड को जमीन देने के प्रस्ताव को पास कर दिया है। मीडिया खबर के मुताबिक, अयोध्या के सोहावल तहसील के धन्नीपुर गाँव में सुन्नी वक्फ बोर्ड को जमीन देने का फैसला किया गया है।

सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि आज 5 एकड़ जमीन का प्रस्ताव पास हो गया है। उन्होंने कहा, “हमने 3 विकल्प केंद्र को भेजे थे, जिसमें से एक पर सहमति बन गई है। मस्जिद के लिए धन्नीपुर में जमीन दी जाएगी। यह जमीन अयोध्या मुख्यालय से 18 किलोमीटर और अयोध्या में स्थित रामजन्मभूमि से करीब 25 किलोमीटर दूर है।

अब गौरतलब है कि यूपी सरकार के इस फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष संतुष्ट नहीं है। मुस्लिम पक्षकारों ने रामकोट स्थित श्रीरामजन्मभूमि से 25 किमी दूर रौनाही थाने के पीछे दी गई भूमि को मस्जिद के लिए अनुपयुक्त बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के मुताबिक मस्जिद निर्माण के लिए भूमि उपयुक्त जगह पर नहीं दी गई है। वहाँ अयोध्या के लोग नमाज पढ़ने नहीं जा सकते। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि अब राज्य सरकार के आवंटन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशवर्त के पूर्व अध्यक्ष एवं दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफर इस्लाम खान का कहना है, “कोई वो जमीन नहीं लेगा। सुन्नी वक्फ बोर्ड सरकारी संस्थान हैं। वे न कैसे कहेंगे? अगर आप मुस्लिम समुदाय से पूछते हैं, तो कोई उस जमीन को नहीं चाहता। मुझे नहीं लगता वहाँ पर मस्जिद बनेगी। और अगर ऐसा होता भी है, तो वहाँ कोई भी नमाज पढ़ने नहीं जाएगा। मुझे लगता है दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ये उत्तेजना में उठाया कदम है।”

वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य के अध्यक्ष जफरयाब जिलानी ने भी इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के ख़िलाफ़ बताया है और कहा कि फैजाबाद जिले का नाम बदल देने से वो अयोध्या नहीं हो जाएगी।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक जिलाने ने कहा,”सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन अयोध्या के बाहरी इलाके में दी गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन है। मैं सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड से अपील करता हूँ कि वो इस जमीन को स्वीकार न करें। हमारे पास अब भी अयोध्या मामले पर फैसले के खिलाफ क्यूरेटिव पिटीशन फाइल करने का विकल्प है। मैं अभी AIMPLB के दूसरे सदस्यों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा हूँ। मैंने सीनियर एडवोकेट राजीव धवन से भी बात की है।”

इधर, लोकसभा सांसद और AIMIM के अध्यक्ष ओवैसी ने संसद के बाहर ही सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा जमीन स्वीकारने को गलत फैसला बताया। उन्होंने कहा,”सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा आवंटित जमीन को स्वीकारना गलत फैसला है। उन्हें इसे नहीं लेना चाहिए, क्योकि AIMPLB जिसमें कई बुद्धिजीवी शामिल थे, उनका एकमत था कि मस्जिद बनाने के लिए वो जमीन नहीं ली जानी चाहिए।”

गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा में कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने बताया कि राम मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट का नाम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र होगा और 67.7 एकड़ की अधिग्रहित भूमि भी राम मंदिर निर्माण के ट्रस्ट को दी जाएगी।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र: राम मंदिर ट्रस्ट का ऐलान, PM मोदी की घोषणा और लोकसभा में गूँजे ‘जय श्री राम’ के नारे

योगी आदित्यनाथ ने भव्य राम मंदिर के लिए हर परिवार से माँगे ₹11 और एक ईंट

15 दिन में 2.75 लाख गाँव में लगेगी भगवान राम की प्रतिमा, इन्हीं गाँवों से 30 साल पहले राम मंदिर के लिए आई थी ईंटे

‘हिन्दू बात से नहीं लात से मानता है’ – PTI नेता मो. उस्मान का जिन्ना की तस्वीर के साथ भड़काऊ पोस्टर वायरल

सोशल मीडिया पर अक्सर हिन्दू-घृणा से भरे हुए पोस्टर और नारे खूब देखे जाते हैं। शाहीन बाग़ में भी हिन्दू विरोध और इस्लामी नारों के जरिए सरकार का विरोध किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही ट्वीट खूब शेयर किया जा रहा है, जिसमें हिन्दुओं को सबक सिखाने का संदेश देता हुआ एक पोस्टर देखा जा सकता है। यह पोस्टर उर्दू भाषा में लिखा गया है।

आरिफ़ आजाकिया, जो कि एक मानवाधिकार कार्यकर्ता (उनके ट्विटर अकाउंट से मिली जानकारी के अनुसार) हैं, ने इस पोस्टर का अनुवाद करते हुए लिखा है- “हिन्दू बात से नहीं, लात से मानता है। मियाँ मोहम्मद अकरम उस्मान, जनरल सेक्रेटरी PTI, लाहौर डिवीजन।” मियाँ मोहम्मद अकरम उस्मान ने इस पोस्टर में मुहम्मद अली जिन्ना और पकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तस्वीर लगाई है। इसके साथ ही, पोस्टर में भारत के झंडे तिरंगा को भी दिखाया गया है, जिस पर ‘क्रॉस’ का निशान लगाया गया है।

पाकिस्तान में हिन्दुओं की स्थिति और मानवाधिकारों पर अक्सर सवाल उठाए जाते रहे हैं। यही नहीं, हाल ही में भारत में भी नागरिकता कानून विरोधी प्रदर्शनों में ‘जिन्ना वाली आजादी‘ जैसे नारे भी सुने गए हैं। ऐसे में पाकिस्तान में PTI (पाकिस्तान तहरीक ए इन्साफ) पार्टी के इस नेता का यह हिन्दू विरोधी पोस्टर देखा जाना अपने आप में यह सबित करने के लिए काफी है कि पाकिस्तान में हिन्दुओं के साथ किस तरह का बर्ताव किया जाता रहा है।

नए साल में 2210 पाकिस्तानी हिंदू आए भारत, कहा- चाहे जान ले लो, मगर वापस जाने के लिए न कहो

घर की लड़की अगवा, गौमांस खाने को किया मजबूर: पाकिस्तान में सांसद बनने की हिंदू को सजा

‘पाकिस्तान में न तो हिंदू लड़कियों को ज्यादा आजादी है और न ही… बेटियों की खातिर भारत आए’

बिहार में कन्हैया कुमार के काफिले पर हमला, पथराव में ड्राइवर के साथ घायल

बिहार में जेएनयू के पूर्व छात्र संघ नेता और CPIM नेता कन्हैया कुमार के काफिले पर हमला किया गया है। इस हमले में कन्हैया और उनके ड्राइवर घायल हो गए हैं। यह हमला बिहार के सुपौल में हुआ है। बताया जा रहा है कि कुछ अज्ञात लोगों ने उनके काफिले पर पथराव किया है। बताया जा रहा है कि इस हमले में गाड़ी के ड्राइवर का सिर फटा है। कन्हैया कुमार भी घायल हुए हैं और उन्हें नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

रिपोर्ट्स के अनुसार, कन्हैया कुमार के काफिले में शामिल दो लोग जख्‍मी हो गए और दो वाहनों के शीशे भी फूट गए हैं। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को पुलिस को हिरासत में लिया है। इसके पहले आज ही झंझारपुर में CPIM नेता कन्‍हैया के काफिले को काला झंडा दिखाया गया था। झंझारपुर के बाद ही कन्‍हैया कुमार सुपौल पहुँचे थे।

बुधवार शाम करीब साढ़े पाँच बजे सभा के बाद कन्हैया कुमार अपने काफिले के साथ सहरसा के लिए निकले थे। उनके काफिले के आगे-पीछे कड़ी सुरक्षा भी थी। उसी समय शहर के सदर थाना के पास 25-30 की संख्या में खड़े युवक सीएए, एनआरसी के समर्थन में नारे लगा रहे थे। जैसे ही कन्हैया कुमार का वाहन वहाँ से गुजरा, कुछ लोगों ने उस पर काली स्याही भी फेंकी।

कन्हैया कुमार के काफिले में शामिल वाहनों के रुकते ही वहाँ जाम लग गया। इसके बाद पुलिस वाहनों को निकालने लगी। तभी पीछे से कुछ लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। पत्थर से कन्हैया कुमार की इस जन मन गण यात्रा का रथ और एक अन्य वाहन का शीशा टूट गया। बाद में कड़ी सुरक्षा के बीच सभी वाहनों को निकाला गया।