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चुनाव से पहले AAP की छीछालेदर: फर्जी डिग्री वाले MLA का पत्ता कटा, अब बीवी लड़ेंगी चुनाव

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने त्रिनगर विधानसभा सीट से AAP उम्मीदवार जितेंद्र सिंह तोमर का टिकट काटकर उनकी पत्नी प्रीति तोमर को प्रत्याशी बनाया है। दिल्‍ली हाई कोर्ट ने हलफनामे में झूठी सूचना के आधार पर जितेंद्र सिंह तोमर की विधायकी रद्द कर दी थी, जिसके बाद आम आदमी पार्टी को यह कदम उठाना पड़ा।

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले दिनों फर्जी डिग्री के कारण जितेंद्र तोमर के 2015 के विधानसभा निर्वाचन को रद्द कर दिया था। इसके बावजूद आम आदमी पार्टी ने जितेंद्र तोमर को इस बार भी प्रत्याशी बनाया था। इसके खिलाफ सोमवार (जनवरी 20, 2019) को ही बीजेपी चुनाव आयोग पहुँची थी। बीजेपी की ओर से चुनाव आयोग में दायर की गई याचिका में कहा गया था कि दिल्ली हाई कोर्ट ने जितेंद्र सिंह तोमर की डिग्री को फर्जी पाया था, लेकिन आम आदमी पार्टी ने फिर से त्रिनगर से जितेंद्र सिंह तोमर को उम्मीदवार बना दिया।

बीजेपी ने इसको लेकर सीएम केजरीवाल पर निशाना साधते हुए ट्वीट भी किया था। बीजेपी ने Jhoothi AAP Sarkar के हैशटैग के साथ ट्वीट करते हुए लिखा, “फर्जी डिग्री के बावजूद केजरीवाल ने दिया जितेन्द्र तोमर को टिकट। वोट बैंक के लालच में कितना गिरोगे ‘आप’।” अब आम आदमी पार्टी ने जितेंद्र सिंह तोमर की जगह उनकी पत्नी प्रीति तोमर को मैदान में उतारा है।

फरवरी 2015 में जितेंद्र सिंह तोमर केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री बने थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने जून 2015 में उनको फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार कर लिया। फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तोमर को अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था। पिछले शुक्रवार (जनवरी 17, 2019) को ही हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जितेंद्र सिंह तोमर की डिग्री को फर्जी करार दिया था।

दिल्ली सरकार में कानून मंत्री रह चुके जितेंद्र सिंह तोमर को अपने खिलाफ फर्जी डिग्री देने के आरोप के बाद पद से इस्तीफा देना पड़ा था। 2017 में बिहार में टीएम भागलपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें दी गई कानून की डिग्री को रद्द कर दिया था। जाँच में यह पाया गया कि तोमर ने विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से धोखाधड़ी की थी। साथ ही दिल्ली पुलिस की जाँच में पाया गया था कि तोमर के कानून और बीएससी की डिग्री फर्जी थी। जाँच में यह बात सामने आया था कि तौमर ने डिग्री पाने के लिए कोई परीक्षा नहीं दी थी। तोमर के साथ 16 अन्य लोग भी फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने में शामिल थे।

AAP नेता जितेंद्र सिंह तोमर ने 2013 और 2015 में त्रिनगर सीट से चुनाव लड़ा था। 2013 में वह लगभग 2800 वोटों से हार गए, जबकि 2015 में उन्हें लगभग 22 हजार वोटों से जीत मिली थी। जिसके बाद तोमर को दिल्ली सरकार में कानून मंत्री बनाया गया था। लेकिन जुलाई 2015 में उन्हें दिल्ली पुलिस ने फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि बाद में तोमर जमानत पर रिहा हो गए थे।

दिल्ली में 8 फरवरी को मतदान होगा जबकि नतीजे 11 फरवरी को घोषित होंगे। इससे पहले 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटें हासिल की थीं।

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मस्जिदों में अजान के लिए लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत देने से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के एक गाँव की दो मस्जिदों पर अजान के लिए लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति की माँग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कोई भी धर्म पूजा या इबादत के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देता।

बता दें कि संबंधित क्षेत्र के एसडीएम ने दो समुदायों के बीच विवाद को रोकने के लिए किसी भी धार्मिक स्थल पर लाउडस्पीकर लगाने पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद याचिकाकर्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रूख किया था मगर हाईकोर्ट ने भी एसडीएम की रोक को सही ठहराते हुए इस पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि ऐसा करने पर सामाजिक असंतुलन खड़ा हो सकता है।

जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस विपिन चंद्र दीक्षित ने अपने आदेश में कहा, “कोई भी धर्म यह आदेश या उपदेश नहीं देता है कि ध्वनि विस्तारक यंत्रों के जरिए प्रार्थना की जाए या प्रार्थना के लिए ड्रम बजाए जाएँ और यदि ऐसी कोई परंपरा है, तो उससे दूसरों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए, न किसी को परेशान किया जाना चा‌हिए।”

याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि यह उनकी धार्मिक परंपरा का एक अनिवार्य हिस्सा है और बढ़ती आबादी के मद्देनजर एम्पलीफायरों और लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल कर लोगों को प्रार्थना के लिए बुलाना आवश्यक हो गया है। 

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस दलील को खारिज करते हुए कहा, “यह सच है कि जैसा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 (1)के तहत यह अधिकार देता है कि कोई भी व्यक्ति अपने धर्म का प्रचार-प्रसार कर सकता है, हालाँकि यह अधिकार निरपेक्ष अधिकार नहीं है। अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त अधिकार व्यापक स्तर पर अनुच्छेद 19 (1) (ए) के अधीन है और इस तरह दोनों को एक साथ पढ़ा जाना चाहिए और सामंजस्यपूर्ण ढंग से लागू किया जाना चाहिए।”

मामले में आचार्य महाराजश्री नरंद्रप्रसादजी आनंदप्रसादजी महाराज बनाम गुजरात राज्य, 1975 (1) एससीसी 11 के फैसले का हवाला दिया गया।

कोर्ट ने कहा कि मामले में शामिल मस्जिदें, जिस क्षेत्र में हैं, वो हिंदू और मुस्लिमों की मिश्रित आबादी का इलाका है और पूर्व में इस मसले पर हुए विवादों ने गंभीर रूप ले लिया है। इसलिए अगर किसी भी पक्ष को साउंड एम्पलीफायरों के उपयोग करने की अनुमति दी जाती है तो दो समूहों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका होगी। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने लाउडस्पीकरों के उपयोग की अनुमति न देकर ठीक ही किया, विशेष रूप से उस इलाके में जहाँ दो धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी पैदा होने की संभावना थी, जिससे कानून और व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती थी।

कोर्ट ने कहा, “किसी भी क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों की होती है और वो अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए बाध्य होते हैं। उन्हें ये सुनिश्चित करना होता है कि क्षेत्र की शांति और व्यवस्‍था भंग न हो और अगर किसी घटना के संबंध में कोई तनाव या विवाद हो तो उस पर सुलह और समझौता किया जा सकता है। उन पर तनाव कम करने और यह सुनिश्चित करने की जिम्‍मेदारी होती है कि क्षेत्र में शांति बनी रहे।”

हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि उनका स्पष्ट मत है कि कोर्ट को अपने असाधारण क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए इस मामले में किसी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, ऐसा करने से सामाजिक असंतुलन पैदा हो सकता है।

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विधानसभा में पारित… अगर परिषद में हो गया पास तो देश का पहला राज्य, जहाँ की होगी 3-3 राजधानी

आंध्र प्रदेश में तीन राजधानियाँ बनाने की योजना को आकार देने संबंधी ‘आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण और सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास विधेयक, 2020’ विधानसभा में पारित हो गया। इसमें विशाखापत्तनम को कार्यकारी राजधानी, अमरावती को विधायी राजधानी और कुर्नूल को न्यायिक राजधानी बनाए जाने का प्रस्ताव है। इस विधेयक को अब विधान परिषद में पेश किया जाएगा। हालाँकि, वहाँ इसके पारित होने में थोड़ी मुश्किल है क्योंकि सत्ताधारी वाईएसआर कॉन्ग्रेस वहाँ बहुमत में नहीं है। 58 सदस्यों वाले विधान परिषद में पार्टी के पास केवल 9 विधायक हैं।

बता दें कि विधान परिषद में यह विधेयक पास होने के बाद देश के इतिहास में यह पहला राज्य होगा, जहाँ की तीन-तीन राजधानी होगी। इससे पहले अब तक महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश की दो राजधानी होती रही है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार के इस प्रस्ताव का विपक्षी तेलुगू देशम पार्टी विरोध कर रही है। प्रस्ताव के पेश होने के दौरान तेलुगु देशम पार्टी के नेताओं ने काफी हंगामा मचाया और स्पीकर के आसन तक आ गए।

जिसके बाद तेलुगु देशम पार्टी के 17 विधायकों को एक दिन के लिए स्पीकर ने निलंबित कर दिया। टीडीपी विधायकों की माँग थी कि उनके नेता चंद्रबाबू नायडू को इस मुद्दे पर बोलने दिया जाए। टीडीपी नेताओं ने विधानसभा में ‘जय अमरावती’ के नारे भी लगाए।

वहीं प्रस्ताव पर बोलते हुए मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने सदन में कहा कि विकेंद्रीकरण पर ध्यान केंद्रित करके उनकी सरकार ऐतिहासिक भूलों और गलतियों को सुधार रही है। सीएम रेड्डी ने कहा, “हम राजधानी को बदल नहीं रहे हैं। हम सिर्फ दो और नई राजधानी जोड़ रहे हैं। अमरावती पहले जैसी ही रहेगी। हम किसी भी क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं करेंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं लोगों को सिर्फ ग्राफिक्स दिखा करके बेवकूफ नहीं बना सकता हूँ।” उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू के अमरावती को स्व-वित्तपोषित परियोजना होने के दावे को भी खारिज कर दिया। इससे पहले विधानसभा में विपक्ष के नेता ने कहा था कि वह हाथ जोड़कर अपील करते हैं कि राजधानी को अमरावती से विशाखापत्तनम न ले जाया जाए।

टीडीपी सांसदों के निलंबन और तीन राजधानी के प्रस्ताव के विरोध में विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू ने अपने साथियों के साथ विधानसभा के प्रवेश द्वार पर धरना दिया। उन्होंने इसका विरोध करते हुए कहा, “पूरी दुनिया में कहीं भी एक राज्य की तीन राजधानी नहीं है। यह एक काला दिन है। हम अमरावती और आंध्र प्रदेश को बचाना चाहते हैं। सिर्फ मैं ही नहीं पूरे प्रदेश में लोग सड़कों पर आ रहे हैं। सरकार सबको गिरफ्तार कर रही है, यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।”

हालाँकि कुछ देर बाद एन चंद्रबाबू नायडू को राज्य विधानसभा के बाहर हिरासत में लिया गया था, क्योंकि वह अमरावती के गाँवों में जाना चाहते थे। पुलिस उन्हें और अन्य लोगों को एक पुलिस वैन में ले गई और फिर नायडू को हिरासत में लेकर उनके घर छोड़ा गया।

CM योगी रात में बुलाते हैं विधानसभा, हमें जाने में डर लगता है: ‘सेक्स रैकेट कांड’ से फेमस हुए सपा नेता अबरार अहमद

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले की इसौली विधानसभा से समाजवादी पार्टी के ‘बुजुर्ग’ विधायक अबरार अहमद ने सोमवार (जनवरी 20, 2020) को योगी आदित्यनाथ की नीतियों के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि सीएम योगी आदित्यनाथ रात में विधानसभा बुलाते हैं और उनको रात में जाने से डर लगता है। इसलिए वे वहाँ जाएंँगे ही नहीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सपा विधायक ने कहा, “सीएम योगी आदित्यनाथ रात में विधानसभा बुलाते हैं, हम जाएँगे ही नहीं। हमें रात में विधानसभा जाने में डर लगता है, वहाँ सीएम योगी बेईमानी करते हैं।”

बता दें कि अकसर अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहने वाले सपा नेता ने इस दौरान जिले के एक बीजेपी नेता और एक जिला पंचायत सदस्य पर गोवंश के मांस बेचने का आरोप भी लगाया। साथ ही सरकार द्वारा किए गए कार्यों पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एसपी विधायक ने बयान दिया। उन्होंने कहा “योगी सरकार आने के बाद अजीब सिस्टम बन गया है। जब चाहा विधानसभा बुला लिया। रात है कि दिन, यह इनके लिए मायने नहीं रखता।”

इसके अलावा अबरार अहमद ने शिकायतों की अपनी सूची में हाईवे न बनने और टोल टैक्स वसूली पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “हमने बहुत पहले ही टैक्स का विरोध किया था लेकिन बताया गया कि काम पूरा हो गया है जबकि यह गलत है। काम पूरा न होने से कई सड़क दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं।”

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा नेतााओं पर आरोप लगाने का काम वैसे तो विपक्ष अक्सर करता रहता है। लेकिन अबरार अहमद सपा के वो नेता हैं, जो विपक्षी पार्टी के साथ अपने नेताओं के लिए ही बेतुके बोल बोलने के कारण सुर्खियों में रहे हैं।

दरअसल साल 2016 में उनकी सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई थी। जिसमें उन्होंने उस समय की जिला पंचायत अध्यक्षा को सेक्स रैकेट चलाने वाली बताया था। उनका कहना था कि उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष को सपा में शामिल कराकर बड़ी भूल की। इस ऑडियो को सुनने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष उस समय के सपा सुप्रीमो और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक ये बात पहुँचाने की तैयारी में थीं, जबकि उनके पति ने कहा था कि विधायक जी बुजुर्ग हो गए हैं, उनका मानसिक संतुलन दुरुस्त नहीं है।

‘मोदी और योगी के खिलाफ नारे लगाने वालों को जिंदा दफन कर दूँगा, संभल जाओ, वरना पटक-पटक कर मारेंगे’

‘जानवरों की तरह बच्चे पैदा करना हानिकारक… जो महिलाओं को यूज कर रहे, वो चूड़ियाँ पहन लें’

उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने सोमवार (जनवरी 21, 2019) को मीडिया से बातचीत में कई मुद्दों पर बयान दिए। रिजवी ने इस दौरान जनसंख्या नियंत्रण का मामला उठाया। कश्मीरी पंडितों को न्याय देने की बात की। कॉन्ग्रेस पर गंदी राजनीति करने के आरोप लगाए और सीएए को लेकर अपना पक्ष साफ किया।

रिजवी ने जनसंख्या कानून को देश की भलाई के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि देश की भलाई के लिए जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लागू होना चाहिए। वसीम रिजवी ने कहा कि कुछ लोगों का मानना ​​है कि बच्चों का पैदा होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन जानवरों की तरह अधिक बच्चों को जन्म देना समाज और देश के लिए हानिकारक है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लागू होने पर यह देश के लिए अच्छा होगा।

इस बातचीत में रिजवी ने सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन पर बैठे लोगों की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “जो लोग CAA के खिलाफ शहीन बाग और लखनऊ में धरने पर बैठे हैं उन्होंने कश्मीरी पंडितों के लिए धरना क्यों नही किया था।” इसके अलावा उन्होंने दिल्ली के शाहीन बाग प्रदर्शन पर बैठे लोगों को कॉन्ग्रेस की गंदी राजनीति का शिकार बताया।

उन्होंने कहा कि जो लोग आज इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाकर सीएए/एनआरसी और एनपीआर का विरोध कर रहे हैं, उन्हें हम कहना चाहते हैं कि वो लोग तब कहाँ थे, जब 1990 में कश्मीरी पंडितों को जबरन निकाला जा रहा था और हजारों पंडितों को मारा जा रहा था।

रिजवी ने 1984 के नरसंहार की कड़वी यादों पर बात करते हुए कहा कि जब इंदिरा गाँधी की हत्या हुई थी, उस वक्त दिल्ली की सड़कों को सिखों का कत्ल कर लाल कर दिया गया था। उस वक्त अगर लोग जागरूक होते तो हजारों कश्मीरी पंडितों और सिखों को बचाया जा सकता। रिजवी ने प्रदर्शन में महिलाओं और बच्चों को रात भर बैठाने पर निशाना साधा और कहा कि ऐसे लोगों को चूड़ियाँ पहन लेनी चाहिए।

गौरतलब है कि अपने बयानों को लेकर चर्चा में आने वाले शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने हाल ही में नई पार्टी का गठन किया है। लेकिन नई पार्टी बनाने के मामले में मंगलवार को बाबरी मस्जिद मामले के मुद्दई इकबाल अंसारी ने उनके ख़िलाफ बयान दे दिया। अंसारी ने कहा कि बाबरी मस्जिद मामले में उनके (रिजवी) बयानों को लेकर समुदाय विशेष अब पहचान चुका है, वह वसीम रिजवी की पार्टी से नहीं जुड़ेगा और ना ही शिया कौम ही उनकी पार्टी से जुड़ेगी। इकबाल अंसारी ने वसीम रिजवी को चैलेंज करते हुए कहा कि उनकी नई पार्टी इंडियन आवामी लीग एक भी सभासद बना दें तो वे राजनीति छोड़ देंगे।

BJP की दूसरी लिस्ट जारी: CM केजरीवाल के खिलाफ सुनील यादव, हरिनगर से तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को टिकट

भारतीय जनता पार्टी ने 8 फरवरी को होने जा रहे दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी कर दी है। सोमवार (जनवरी 20, 2019) देर रात जारी इस लिस्ट में 10 उम्मीदवारों के नाम हैं। बीजेपी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नई दिल्ली सीट से सुनील यादव को उतारा है, तो वहीं बीजेपी प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को हरिनगर से उम्मीवार बनाया गया है।

बीजेपी ने नांगलोई जाट से सुमनलता शौकीन को टिकट दिया है, जबकि राजौरी गार्डन से रमेश खन्ना किस्मत आजमाएँगे। इसी तरह कस्तूरबा नगर से रविंद्र चौधरी, महरौली से कुसुम खत्री, कालकाजी से धर्मवीर सिंह, दिल्ली कैंट से मनीष सिंह, कृष्णा नगर से अनिल गोयल और शाहदरा से संजय गोयल को उम्मीदवार बनाया गया है।

इसके पहले शुक्रवार को बीजेपी ने अपने 57 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने एक संवाददाता सम्मेलन में पार्टी प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया था। तिवारी ने बताया था कि पार्टी के 57 प्रत्याशियों में 11 अनुसूचित जाति समुदाय से हैं और चार महिलाएँ थीं। अब दूसरी लिस्ट आने के बाद बीजेपी के उम्मीदवारों की संख्या 67 हो गई है।

वहीं दूसरी तरह बिहार में गठबंधन के बाद बीजेपी ने अन्य बची तीन सीटों में से दो जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और एक लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के लिए छोड़ी हैं। इनके बीच दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन की घोषणा हो चुकी है। गठबंधन के मुताबिक जदयू को संगम बिहार और बुराड़ी की सीटें दी गई हैं और लोजपा को सीमापुरी।

उल्लेखनीय है कि बीजेपी की पहली लिस्ट जारी होने पर तेजिंदर पाल सिंह बग्गा का नाम न होने पर विपक्षियों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया था, लेकिन अब बीजेपी ने दूसरी लिस्ट में उन्हें हरिनगर से उम्मीदवार बनाकर ट्रोल करने वालों का मुँह बंद करवा दिया है। लिस्ट में नाम आते ही लोगों ने बग्गा के लिए रैप सॉन्ग भी लॉन्च कर दिया है। जिसे ट्विटर पर शेयर करते हुए बग्गा ने सभी का शुक्रिया अदा किया है। 

बता दें कि भाजपा प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने मुख्यमंत्री केजरीवाल की नीतियों के खिलाफ लगातार हमलावर रहे हैं। पिछले दिनों भी उन्होंने निर्भया गैंगरेप केस के दोषियों की फाँसी की सजा में देरी होने को लेकर केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने शेम ऑफ केजरीवाल हैशटैग के साथ ट्वीट करते हुए लिखा था, “बलात्कारियों की फाँसी को रोका है, निर्भया को दिया धोखा है।”

गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने दिल्ली में विधानसभा चुनाव का ऐलान करते हुए कहा था कि चुनाव सिंगल फेज में होगा और नॉमिनेशन की अंतिम तिथि 21 जनवरी होगी। वहीं, नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 24 जनवरी रखी गई है। साल 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 70 में से 67 सीटें मिली थीं। भाजपा ने 3 सीटें जीती थीं, वहीं कॉन्ग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी।

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केरल में ABVP की बढ़ती लोकप्रियता से कुढ़े SFI के गुंडों ने किया छात्रों पर जानलेवा हमला

वामपंथी आतंकवाद JNU से लेकर केरल तक की शिक्षा संस्थानों में अपने पैर पसार रहा है। कहीं न कहीं इसके पीछे वामपंथ का सिकुड़ता आधार भी बड़ी वजह जो इन वामपंथी संगठनों को हिंसा आदि के जरिए युवाओं पर दबाव बनाकर, उन्हें बरगलाकर अपनी रक्तपात की मानसिकता को बचाए रखना चाहता है।

अभी JNU में ABVP के छात्रों और उनके समर्थकों पर वामपंथी नकाबपोशों के हमले के बाद जिसमें चार प्रमुख वामपंथी संगठन हिंसा के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा आरोपित ठहराए गए हैं। जिस पर अभी आगे जाँच जारी है। ऐसे में ताजा मामला केरल से है जहाँ SFI के गुंडों द्वारा ABVP के कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें कई छात्रों और ABVP कार्यकर्ताओं को गहरी चोट आई हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, केरल के वज़ूर NSS कॉलेज में वामपंथी गुंडागर्दी और आतंक के लिए कुख्यात SFI ने ABVP कार्यकर्ताओं पर कायराना हमला किया है। वामपंथी गुट SFI की निरंतर चली आ रही ऐसी हरकतों की वजह से कैम्पस में लगातार माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। कहा जा रहा है, कैम्पस में ABVP की बढ़ती हुई लोकप्रियता को देखकर SFI अब हर तरह की गुंडागिर्दी पर उतर आया है।

गौरतलब है कि, केरल के वज़ूर NSS कॉलेज में एबीवीपी ने पिछले बृहस्पतिवार को एकता सम्मेलन का आयोजन किया था जिसमें काफी संख्या में छात्रों की उपस्थिति देखी गई। यह देखकर स्वतन्त्रता और सहिष्णुता का दिखावा करने वाले SFI की, छात्रों के बीच ABVP की बढ़ती लोकप्रियता देखकर चिन्ताएँ इतनी बढ़ गईं कि ये गुंडागर्दी और मारपीट पर उतारू हो गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ABVP की छात्रों के बीच बढ़ती लोकप्रियता से परेशान SFI के गुंडों द्वारा ABVP के कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला किया गया, जिनमें से कई छात्रों को गहरी चोट आई हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि ABVP कार्यकर्ताओं के खिलाफ हमले इस एक सप्ताह में बढ़ गए हैं, खासकर समारोह में आई भीड़ के बाद से लगातार ABVP के कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, SFI के इस गुंडागर्दी वाले आक्रामक व्यवहार, उनके मार-काट करने वाली मानसिकता के लिए SFI की आलोचना की जा रही है और आम छात्रों द्वारा केरल कॉलेज, CMS कॉलेज, CUSAT आदि परिसरों में आम छात्रों द्वारा इसका बड़े स्तर पर विरोध किया जा रहा है।

SFI द्वारा बनाए जा रहे इस गुंडागिर्दी के माहौल के कारण छात्रों का शान्ति से पढ़ना भी मुश्किल हो चुका है। पीड़ित छात्र निरंतर SFI की इन हरकतों का विरोध कर रहे हैं।

बता दें कि केरल में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर पहले भी हमले होते आए हैं। तब भी केरल में बीजेपी की बढ़ती लोकप्रियता एक बड़ा कारण रही है। हाल ही में, वामपंथी छात्रों की गुंडई का उदाहरण JNU में भी देखने को मिला था।

सिर्फ ‘तीसरे कैंडिडेट’ की भूमिका में है दिल्ली चुनावों में कॉन्ग्रेस, BJP ही लगा सकती है केजरी के झाँसों में सेंध

दिल्ली 2013 और 2015 में हुई ऐतिहासिक चुनावी उठा-पटक के बाद एक बार फिर चुनाव के लिए तैयार है। जंतर-मंतर में ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ जैसे आंदोलन से निकले अरविन्द केजरीवाल में आम आदमी ने अपने चेहरे को देखते हुए 2015 के विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें आम आदमी पार्टी के खाते में डाल दीं।

हालाँकि, एक नाटकीय तरीके से शुरू हुआ यह क्रम जल्द ही जनता के सामने बेनकाब भी होता गया। लेकिन, बावजूद इसके अरविन्द केजरीवाल इन पाँच सालों में कभी राज्यपाल तो कभी दिल्ली सरकार के पास पुलिस और ‘अधिकार’ ना होने का रोना रोकर लगातार राष्ट्रीय चर्चा बने रहने में कामयाब रहे।

इस सबके बीच दिल्ली में आम आदमी की चर्चा में से कॉन्ग्रेस निरंतर गायब ही नजर आई। बात चाहे लोकसभा चुनावों की हो, आम आदमी पार्टी द्वारा किए गए फ्री वाई-फ़ाई और CCTV के अधूरे वादों की हो, या फिर मनोज तिवारी द्वारा दिल्ली में भाजपा को एक चेहरा देने के लिए की गई कोशिशों की हो, कॉन्ग्रेस हर पहलू पर चर्चा से नदारद ही मिली।

सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात देश में सबसे लम्बे समय तक इकतरफा सत्ता में रहने वाले कॉन्ग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल का पतन है। यदि मात्र दिल्ली की ही बात करें तो 15 साल सरकार चलाने के बाद 2013 के दिल्ली चुनाव में कॉन्ग्रेस मात्र 8 सीटें जीत सकी। फिर जब 2015 में चुनाव हुए तो यह पार्टी अपना खाता तक खोल पाने में नाकाम रही। हालात यह हैं कि अब 2020 के विधानसभा चुनावों में भी यह पार्टी संघर्ष करती हुई नजर आ रही है।

कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी करने में अभी तक सिर्फ आम आदमी पार्टी ही सबसे ज्यादा आत्मविश्वास में नजर आई है। आम आदमी पार्टी ने पहले ही झटके में सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कि, जबकि भाजपा ने भी 57 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। हालाँकि, आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल के विरुद्ध एक चेहरा उतारने में भाजपा ने अभी भी कोई जल्द बाजी नहीं दिखाई है। कॉन्ग्रेस ने अभी तक 54 उम्मीदवारों को नामित कर लिया है लेकिन दिल्ली में पार्टी का चेहरा कौन होगा, इस बात पर अभी भी संशय ही है।

एक समय तक दिल्ली में कॉन्ग्रेस का मुख्य चेहरा माने जा रहे अजय माकन इस चुनाव में बहुत उत्साहित नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में अरविंदर सिंह लवली, जो कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शिला दीक्षित के करीबी माने जाते रहे, पर ही कॉन्ग्रेस अपना विश्वास जता सकती है। यूँ तो भाजपा के पूर्वांचल के मास्टरस्ट्रोक के खिलाफ कॉन्ग्रेस महाबल मिश्र जैसे चेहरे को सामने ला सकती है, लेकिन कॉन्ग्रेस के इस वरिष्ठ नेता के बेटे विनय मिश्र ने हाल ही में आम आदमी पार्टी से नाता जोड़ लिया है और AAP ने उन्हें द्वारका से टिकट भी दे दिया है। ऐसे में महाबल मिश्र अपने बेटे के ख़िलाफ़ कोई कदम उठाएँगे यह संभव नहीं लगता है।

लेकिन कॉन्ग्रेस के लिए पार्टी का एक चेहरा तलाशने से ज्यादा ज़रूरी इस समय दिल्ली चुनाव में खुद को किसी तरह प्रासंगिक बनाए रखना है। दिल्ली में ही होने के बावजूद कॉन्ग्रेस इस चुनाव में पूरी तरह से उदासीन ही नजर आ रही है। आखिरी बार कॉन्ग्रेस जब वाहवाही बटोरती हुई देखी गयी थी, तब उसने 2013 के चुनाव में आम आदमी पार्टी को अपना बाहरी समर्थन देकर और लोकपाल के मुद्दे पर किनारा कर अरविन्द केजरीवाल के एजेंडे को बेनकाब करने (न चाहते हुए भी) का काम किया था।

कॉन्ग्रेस आज देश में इतनी पस्त है कि अक्सर वो भाजपा की हार पर खुश होती देखी जा सकती है। कभी जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गाँधी जैसे चेहरों वाले कॉन्ग्रेस दल ने आज अपने लक्ष्य इतने सीमित कर दिए हैं कि उसके लिए अपनी जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण भाजपा के हारने की खबरों का इन्तजार रहने लगा है। अक्सर कॉन्ग्रेस के नेता लोगों को भाजपा के खिलाफ एकजुट होने जैसा बयान देते।

हाल ही में पी चिदंबरम ने भी कहा कि लोगों को CAA और NRC के विरोध के जरिए भाजपा के खिलाफ एक मंच पर आना चाहिए। जिसका स्पष्ट अर्थ विरोधी दलों को कॉन्ग्रेस के झंडे के नीचे शरण देने का आह्वाहन था। लेकिन दिल्ली चुनावों में कॉन्ग्रेस किसी और को समर्थन क्या देगी, इस चुनाव में तो अगर कोई सबसे छोटा दल नजर आ रहा है तो वो खुद कॉन्ग्रेस है।

दिल्ली चुनावों में सबसे बेहतरीन बात यह है कि यह आम जनता के मुद्दों पर लड़ा जा रहा है। अरविन्द केजरीवाल ने लोगों को मुफ्त बिजली और पानी देने के बहाने साफ़ पानी, बिजली की निरंतरता, सस्ता इलाज और अच्छी शिक्षा जैसे कई अन्य बुनियादी जरूरतों की ओर ध्यान ही नहीं जाने दिया है। वहीं भाजपा दिल्ली में सरकार बनाने के एक मौके के इन्तजार में है। अरविन्द केजरीवाल जिस तरह के आरोप-प्रत्यारोप और केंद्र सरकार पर बदले की राजनीति करने के आरोप लगाकर पाँच साल काट चुके हों, यह भी हो सकता है कि जनता इसका दीर्घकालीन उपचार कर भाजपा को ही दिल्ली की सत्ता सौंप दे।

अरविन्द केजरीवाल ने अपनी ही पार्टी के कुछ जीते हुए प्रत्याशियों की जगह दल-बदलकर आए हुए नेताओं को प्राथमिकता दी है, जिसका प्रभाव दिल्ली चुनाव परिणामों पर पड़ना तय है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी दिल्ली में सिख समुदाय और पूर्वांचल के वोट बैंक को साधने का हर संभव प्रयास करेगी। ऐसे में देखना यह है कि कपिल मिश्रा और मनोज तिवारी आम आदमी पार्टी के साथ अपने एक्सपीरियंस का इस्तेमाल भाजपा के लिए दिल्ली में जगह बनाने के लिए कर पाते हैं या नहीं?

खुद को वोट कटुआ पार्टी कहने वाली कॉन्ग्रेस तब भी कहीं मैदान में नजर नहीं आती है। वैसे भी कॉन्ग्रेस का योगदान इस चुनाव में सिर्फ आम आदमी पार्टी का ‘सेक्युलर’ वोट काटने तक ही सीमित रहने वाला है। आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल से झगड़ा मोल लेकर उनकी विधायक अलका लंबा ने भी कॉन्ग्रेस की डूबती नाँव का सहारा लिया है। चाँदनी चौक विधानसभा इसी वजह से चर्चा का विषय भी बनी रहेगी।

इसके अलावा कालका जी सीट से आतिशी मार्लेना, मॉडल टाउन से कपिल मिश्रा और नई दिल्ली सीट से अरविन्द केजरीवाल इस चुनाव का हॉट टॉपिक रहने वाले हैं। आमिर खान और सलमान खान की एक मशहूर फिल्म अंदाज अपना-अपना में रवीना जी और करिश्मा जी को पाने रेस में एक समय एक ‘तीसरा’ कैंडिडेट भी नजर आया था, कॉन्ग्रेस की हालात आज उस तीसरे कैंडिडेट से भी बद्तर है।

मेंगलुरू एयरपोर्ट पर बैग में IED मिलने से हड़कंप: पुलिस ने जारी की संदिग्ध की तस्वीर

कर्नाटक के मंगलूरू एयरपोर्ट पर एक संदिग्ध बैग में IED मिलने से हड़कंप मच गया। IED से भरा यह बैग केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को प्राप्त हुआ। घटना की सूचना के बाद एयरपोर्ट पर अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया। CISF के DIG अनिल पांडे ने बताया कि था कि उन्हें मंगलूरू एयरपोर्ट के टिकट काउंटर पर यह बैग मिला, इसमें IED होने के सबूत मिले। इसके बाद पूरे क्षेत्र को खाली कराते हुए बैग को एयरपोर्ट से बाहर निकाल दिया गया। फ़िलहाल अब तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि यह बैग किसने रखा था।

DIG अनिल पांडे ने बताया कि CCTV फुटेज के अनुसार, मंगलूरू हवाई अड्डे पर एक संदिग्ध व्यक्ति ने बैग रखा था और चेहरा छिपाते हुए वो ऑटो में जाते दिख रहा है। संदिग्ध वस्तु का समय पर पता लगा लिया गया और स्थानीय बम निरोधक टीम निष्क्रिय करने में जुट गई। मंगलूरू पुलिस ने संदिग्ध शख्स और ऑटो की तस्वीर जारी की है।

ख़बर के अनुसार, हवाई अड्डे की सुरक्षा में तैनात केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है। मंगलूरू पुलिस आयुक्त पीएस हर्ष भी पुलिस टीम के साथ हवाई अड्डे पर पहुँचे। बम निरोधक दस्ते ने खोजी कुत्तों और मेटल डिटेक्टर्स की मदद से बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। एक वीडियो बयान देते हुए पुलिस आयुक्त हर्ष ने कहा कि CISF ने एक संदिग्ध बैग बरामद किया था, सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत हालात पर क़ाबू पा लिया गया और पुलिस नियंत्रण कक्ष को सूचित कर दिया गया है।

इसके अलावा, पुलिस आयुक्त ने बताया था कि नागरिकों को बैग से दूर कर दिया गया और हालात सामान्य रहे। पुलिस सभी सावधानियाँ बरत रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार दो लोग एक ऑटो रिक्शा मे आए थे और वो बैग रखकर वहाँ से चले गए। फ़िलहाल मंगलूरू पुलिस मामले की तफ़्तीश में जुटी हुई है।

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कश्मीर में डी-रेडिकलाइज़ेशन केंद्रों की ज़रूरत, इससे भटके हुए लोगों को मिलेगी मदद: डीजीपी दिलबाग सिंह

जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ ज़िले में तीन आतंकियों के ढेर होने की ख़बर सामने आई है। इस सन्दर्भ में जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स आयोजित कर बताया कि हिज़बुल मुजाहिदीन का एक कमांडर जो 2017 से सक्रिय था उसे मार गिराया गया है। उसके ख़िलाफ़ 19 FIR दर्ज थे और वो 4 नागरिकों समेत 4 पुलिसकर्मियों की हत्या में भी वो शामिल था। मारे गए आतंकियों में दूसरा आतंकी आदिल शेख था और तीसरे की पहचान जहाँगीर के रूप में हुई। इसके अलावा उन्होंने कहा कि हिजबुल मुजाहिदीन दक्षिण-कश्मीर में पूरी तरह से ख़त्म होने की कगार पर है।

प्रेस कॉफ्रेंस में कश्मीर में डी-रेडिकलाइज़ेशन केंद्रों की ज़रूरत के सवाल पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अगर ऐसी कोई सुविधा सामने आती है जो एक अच्छा संकेत होता, तो ऐसा होना चाहिए। यह निश्चित तौर पर लोगों की मदद करेगा, विशेषतौर पर जो लोग भटक गए हैं।

इसके अलावा उन्होंने कहा, “अगर इस तरह की कोई सेंसिबल व्यवस्था की जाए तो सिविल सोसाइटी के लोग और एक्सपर्ट जो धर्म, ऐसे अन्य विषय और प्रासंगिक पहलुओं से निपटते है… उनके लिए आसानी होगी। मुझे लगता है कि यह एक सही कदम होगा। इस तरह की पहल का स्वागत किया जाना चाहिए।”

इससे पहले, बुधवार (15 जनवरी) को आयोजित एक कार्यक्रम में चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ (CDS) और पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत ने कहा था कि अगर आतंक का ख़ात्मा करना है तो आतंकवादियों से अमेरिका की तरह लड़ाई लड़नी होगी। जैसा कि उन्होंने 9/11 के बाद आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी। इस दौरान सेनाध्यक्ष ने यह भी कहा था कि आतंकियों के ख़िलाफ़ एक लंबी लड़ाई लड़नी होगी, इसके लिए वैश्विक जंग की आवश्यकता है। ऐसा करके आतंकियों को विश्व में अलग-थलग किया जा सकता है।

इतना ही नहीं जनरल रावत ने पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा था कि, जो देश आतंकियों की हर तरह से मदद करते हों वह अपने को आतंक से पीड़ित नहीं बता सकते। इसलिए ऐसे देशों को इस वैश्विक जंग में बाहर करना होगा तभी हम इनके ख़िलाफ़ बेहतर लड़ाई लड़ी जा सकती है। याद दिला दें कि पिछले साल 15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल क़िले की प्राचीर से तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिएए सीडीएस के पद की घोषणा की थी। इस पद की ज़िम्मेदारी सबसे पहले जनरल विपिन रावत को सौंपी गई है।

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