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AAP में फूल कंफ्यूजन: केजरीवाल ने कहा- ‘मैं बहुत खुश हूँ’, छोटे नेता बता रहे BJP की साजिश

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के लिए मंगलवार (जनवरी 21, 2019) को नामांकन करने का अंतिम दिन है, इसलिए तेजी से नामांकन प्रक्रिया जारी है। नई दिल्ली विधानसभा सीट पर केजरीवाल के अलावा 35 से अधिक प्रत्याशी नामांकन कराने पहुँचे हैं। अपनी बारी के इंतजार में अरविंद केजरीवाल को टोकन नंबर 45 मिला है।

नामांकन में हो रही देरी के पीछे भी आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने भाजपा का हाथ बताया है। उन्होंने कहा कि 35 उम्मीदवार बिना पेपर के आरओ ऑफिस पहुँच गए हैं। उनके पास नामांकन के लिए उचित दस्‍तावेज नहीं हैं। वे जोर दे रहे हैं कि जब तक उनके कागजात पूर्ण और नामांकन दाखिल नहीं होते हैं, वे सीएम केजरीवाल को नामांकन दाखिल करने की अनुमति नहीं देंगे। भारद्वाज ने बताया कि इन सबके पीछे भाजपा का हाथ है।

वहीं नामांकन के लिए इंतजार कर रहे सीएम केजरीवाल ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “मैं अपना नामांकन दाखिल करने के लिए इंतजार कर रहा हूँ। मेरा टोकन नंबर 45 है। मैं बहुत खुश हूँ कि लोकतंत्र के इस पर्व में काफी लोग हिस्सा ले रहे हैं।” यानी कि अरविंद केजरीवाल को इससे कोई दिक्कत नहीं है, मगर उनके नेता को लगता है कि इसके पीछे भी बीजेपी का ही हाथ है।

उल्लेखनीय है कि सौरभ भारद्वाज ने इससे पहले भी बीजेपी के उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट को शेयर करते हुए ट्वीट किया था, “बीजेपी उम्मीदवारों की लिस्ट देखते हुए और सीएम अरविंद केजरीवाल के खिलाफ उम्मीदवार को देखकर ऐसा लग रहा है कि बीजेपी ने पहले ही सरेंडर कर दिया है। 70/70” 

गौरतलब है कि दिल्ली में 8 फरवरी को मतदान होगा जबकि नतीजे 11 फरवरी को घोषित होंगे। इससे पहले 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटें हासिल की थीं।

बीवी को कुत्ते से कटवाने से लेकर साली के शोषण व कार्यकर्ता के बलात्कार तक: केजरीवाल के साथ दागियों की फौज

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बीवी को कुत्ते से कटवाने से लेकर साली के शोषण व कार्यकर्ता के बलात्कार तक: केजरीवाल के साथ दागियों की फौज

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल लगातार महिलाओं के हित में काम करने का दावा करते हैं। दिल्ली में सीसीटीवी फुटेज लगाने से लेकर महिलाओं के लिए बस यात्रा मुफ़्त करने तक, उन्होंने कई ऐसे वादे किए और फ़ैसले लिए, जिन्हें उनकी पार्टी ने महिलाओं के पक्ष में लिए गए निर्णय बता कर भुनाया। हालाँकि, टिकट वितरण में तस्वीर इसके उलट दिख रही है। आइए, जानते हैं आम आदमी पार्टी के 6 ऐसे उम्मीदवारों के बारे में, जिन पर महिलाओं का यौन शोषण से लेकर दुर्व्यवहार तक के आरोप लगे।

शरद चौहान

केजरीवाल के विधायक शरद चौहान अपनी ही पार्टी की महिला कार्यकर्ता की आत्महत्या मामले में पूर्व में गिरफ़्तार किए जा चुके हैं। जुलाई 2016 में क्राइम ब्रांच ने विधायक सहित 7 अन्य आरोपितों को गिरफ़्तार किया था। सोनी ने आत्महत्या से पहले आप कार्यकर्त्ता रमेश भारद्वाज पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। चौहान को फिर से नरेला से ही प्रत्याशी बनाया गया है।

अमानतुल्लाह ख़ान

जहाँ शरद चौहान पर अपनी पार्टी की कार्यकर्त्ता को शिकार बनाने का आरोप लगा, अमानतुल्लाह ख़ान ने अपने परिजनों तक को नहीं बख्शा। अमानतुल्लाह की साली ने ही जामिया नगर कोर्ट में विधायक पर यौन शोषण का आरोप लगाया। उन्होंने इस मामले के सामने आने के बाद केजरीवाल को इस्तीफे की पेशकश तक कर दी थी। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा था कि अमानतुल्लाह उस पर हमबिस्तर होने के लिए दबाव बना रहे हैं।

भाजपा ने केजरीवाल के उम्मीदवारों पर साधा निशाना

सोमनाथ भारती

सोमनाथ भारती इस मामले में काफ़ी पहले से कुख्यात हैं। उन्होंने अपनी बीवी को ही कुत्ते से कटवा दिया था। इस घटना के बाद भारती और उनका कुत्ता, दोनों फरार हो गए थे। उनका कुत्ता ‘डॉन’ काफ़ी खोजबीन के बाद पुलिस के शिकंजे में आया था। एक महिला न्यूज़ एंकर से तो वो इतने नाराज़ हो गए कि उसे विधायक ने वेश्या बन जाने की आपत्तिजनक सलाह दे डाली।

मोहिंदर गोयल

रिठाला के विधायक मोहिंदर गोयल पर एक महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया। केजरीवाल ने एक बार फिर से उन पर भरोसा जताया है। आरोप है कि एक महिला पेंशन सम्बन्धी शिकायत लेकर उनके पास आई थी, जिसके बाद विधायक गोयल ने उसके साथ बलात्कार किया। गोयल ने अपने दफ़्तर में पीड़िता का दोबारा बलात्कार किया। उन्होंने अश्लील वीडियो भी बना लिए और वायरल करने की धमकी देकर महिला का उत्पीड़न करने लगे।

दिनेश मोहनिया

एक 60 साल के बुजुर्ग ने जब मोहनिया को पहचाना नहीं तो उन्होंने उसे थप्पड़ जड़ दिया। उन पर एक महिला के यौन शोषण का भी आरोप लगा। 50,000 रुपए के मुचलके और सबूत के साथ छेड़छाड़ न करने की शर्त पर उन्हें किसी तरह इस मामले में जमानत मिली। उन्हें कई दिनों तक न्यायिक हिरासत में रखा गया था।

दिल्ली भाजपा ने केजरीवाल के विधायकों पर साधा निशाना

ऋतुराज गोविन्द

आप विधायक ऋतुराज गोविन्द पर एक महिला नेता पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। उनपर छठ पूजा के समय जबरन घाट कब्जाने का भी आरोप लगा था, जिसके बाद उनकी गिरफ़्तारी भी हुई थी।

JNU में पढ़ने वाले 82 विदेशी छात्र किस देश के नागरिक हैं, खुद यूनिवर्सिटी को भी कुछ नहीं पता

अपडेट: जेएनयू ने उन ख़बरों को नकार दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि यूनिवर्सिटी के पास विदेशी 82 छात्रों की राष्ट्रीयता की जानकारी नहीं है। जेएनयू ने अपने ताज़ा बयान में कहा है कि यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे सभी विदेशी छात्रों के बारे में विश्वविद्यालय प्रशासन के पास सारी ज़रूरी सूचनाएँ उपलब्ध हैं।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में सिर्फ़ भारतीय छात्र ही नहीं पढ़ते बल्कि विदेश से भी सैंकड़ों छात्र यहाँ अध्ययन के लिए आते हैं। अगर आँकड़ों की बात करें तो जेएनयू में कुल 8805 छात्र पढ़ रहे हैं, जिनमें से 301 विदेशी हैं। लेकिन, चौंकाने वाली बात ये है कि इनमें से 82 ऐसे विदेशी छात्र हैं, जिनकी राष्ट्रीयता जेएनयू को मालूम ही नहीं है। अर्थात, जेएनयू को पता ही नहीं है कि ये 82 छात्र किस देश के रहने वाले हैं। जेएनयू प्रशासन ने एक आरटीआई की रिप्लाई में ये बातें बताई

जेएनयू प्रशासन ने कहा कि यूनिवर्सिटी के 48% छात्र एमफिल या पीएचडी का कोर्ट कर रहे हैं। सभी छात्रों की बात करें तो वे ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी तक 41 विभिन्न कोर्सों के तहत दाखिला लेकर जेएनयू में पढ़ाई कर रहे हैं। अगर विदेशी छात्रों की बात करें तो उनमें सबसे ज़्यादा संख्या कोरियन छात्रों की है और उसके बाद नेपाली आते हैं। कैम्पस में कुल 35 कोरियन और 25 नेपाली छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।

इसी तरह चीन से 24, अफ़ग़ानिस्तान से 21 और जापान से 16 और जर्मनी से 13 छात्र जेएनयू में दाखिला लेकर अध्ययन कर रहे हैं। 10 अमेरिकी छात्र भी जेएनयूए अध्ययनरत हैं। बांग्लादेश और सीरिया के सात-सात छात्र यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं। 8805 छात्रों में से 4251 छात्र एमफिल अथवा पीएचडी कोर्सों के तहत पढ़ाई कर रहे हैं।

वहीं 1264 छात्र ग्रेजुएशन में एडमिशन लेकर पढ़ रहे हैं। 2877 ऐसे छात्र हैं, जिन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सों में दाखिला लिया हुआ है। विदेशी छात्रों में से 82 ऐसे हैं, जो किस देश के नागरिक हैं- इस सम्बन्ध में जेनयू को कुछ नहीं मालूम। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अपनी नागरिकता बताए बिना जेएनयू में एडमिशन लेना संभव है?

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CAA समर्थन रैली में अमित शाह ने विपक्ष पर साधा निशाना, डंके की चोट पर कहा- नहीं वापस होगा कानून

नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में मंगलवार (21 जनवरी, 2019) को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लखनऊ में एक जनसभा की। प्रदेश की राजधानी में इस जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने विपक्ष के खिलाफ़ हुंकार भरी। उन्होंने भाषण की शुरुआत ‘भारत माता की जय’ से करते हुए समाजवादी पार्टी, कॉन्ग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, तृणमूल कॉन्ग्रेस को नागरिकता कानून को लिए जिम्मेदार ठहराया। साथ ही ये भी कहा कि कोई कुछ भी कर ले, सीएए वापस नहीं होगा।

अमित शाह ने सीएए के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार कर रहे नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है कि इसकी वजह से इस देश के मुस्लिमों की नागरिकता चली जाएगी। ममता दीदी, राहुल बाबा, अखिलेश यादव चर्चा करने के लिए सार्वजनिक मंच तलाश लो, हमारा स्वतंत्र देव चर्चा करने के लिए तैयार है। सीएए की कोई भी धारा, मुस्लिम छोड़ दीजिए, अल्पसंख्यक छोड़ दीजिए किसी भी व्यक्ति की नागरिकता ले सकती है तो वह मुझे दिखा दीजिए।”

इस दौरान गृहमंत्री ने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल बाबा ऐंड कंपनी, ममता, बहन मायावती, अखिलेश यादव नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ काँव-काँव करने लगे। मैं उत्तर प्रदेश की जनता को बताने आया हूँ कि सीएए क्या है।”

गृहमंत्री ने सीएए का समर्थन करते हुए बताया कि देश में भ्रम फैलाया जा रहा है, दंगे कराए जा रहे हैं, आगजनी की जा रही है। यह धरना प्रदर्शन, यह विरोध, यह भ्रांति एसपी-बीएसपी, कॉन्ग्रेस, तृणमूल कॉन्ग्रेस फैला रही है। इसमें किसी की नागरिकता छीनने का कोई प्रावधान नहीं है। इस बिल के अंदर नागरिकता देने का प्रावधान है।

गौरतलब है कि अमित शाह ने इस दौरान विपक्ष से कश्मीरी पंडितों के मामले पर भी सवाल उठाया और पूछा कि उस समय मानवाधिकार कहाँ गया था। जब लाखों कश्मीरी पंडितों को उनके घरों से निकाल दिया गया था।

अमित शाह ने कहा, “पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान… जहाँ भारत के विभाजन के बाद करोड़ों हिंदू वहाँ रह गए। सिख वहाँ रह गए। ईसाई, जैन, बौध, पारसी वहाँ रह गए। मैंने उनके दर्द को सुना है। महात्मा गाँधी की जयंती के दिन एक हजार माताओं-बहनों से बलात्कार किया जाता है, उनको जबरन निकाह पढ़ाया जाता है। हजारों की संख्या में मंदिर-गुरुद्वारे तोड़े जाते हैं। अफगानिस्तान के अंदर आसमान को छूने वाली मूर्ति को तोप के गोले से क्षतिग्रस्त कर दिया गया।”

गृहमंत्री ने विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों से सवाल किया कि विभाजन के समय हिंदू, सिख, बौद्ध, और जैन की संख्या बांग्लादेश में 30 प्रतिशत थी और पाकिस्तान में 23 प्रतिशत। लेकिन आज ये संख्या सिर्फ़ 7% और 3% बची है। ऐसा क्यों और कहाँ गए बाकी लोग।

उन्होंने कहा, “मैं आज डंके की चोट पर कहने आया हूँ कि जिसको विरोध करना है करे, CAA वापस नहीं होने वाला है।” उन्होंने कहा, “मैं वोट बैंक के लोभी नेताओं को कहना चाहता हूँ, आप इनके कैंप में जाइए, कल तक जो सौ-सौ हेक्टेयर के मालिक थे, वे आज एक छोटी सी झोपड़ी में परिवार के साथ भीख माँगकर गुजारा कर रहे हैं।”

गृहमंत्री के अनुसार, पहले कॉन्ग्रेस के पाप के कारण धर्म के आधार पर भारत के 2 टुकड़े हुए। और फिर पाकिस्तान, अफ्गानिस्तान, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक की संख्या कम होती रही। उनके मुताबिक इन देशों से गायब लोगों में कुछ को मार दिया गया। कुछ का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया। जिसके बाद से शर्णार्थियों के आने का सिलसिला चल रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू के कथन को याद कराया और कहा कि केंद्रीय राहत कोष का उपयोग शरणार्थियों को राहत देने के लिए करना चाहिए था। इनको नागरिकता देने के लिए जो करना चाहिए वह करना चाहिए, लेकिन कॉन्ग्रेस ने कुछ नहीं किया। अमित शाह ने कहा कि वर्षों से प्रताड़ित लोगों को उनके जीवन का नया अध्याय शुरू करने का मौका दिया है।

‘The Quint’ के यौन शोषण आरोपित और आत्महत्या के लिए उकसाने वाली पत्रकार को मिला रामनाथ गोयनका अवॉर्ड

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार (जनवरी 20, 2019) को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकारों को रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया। इसमें वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द क्विंट’ के चार पत्रकारों को तीन अवॉर्ड दिया गया है। पूनम अग्रवाल को उनके इलेक्टोरल बॉन्ड के लिए, तो अस्मिता नंदी और मेघनाद बोस को उनकी डॉक्यूमेंट्री ‘लिंचिस्तान’ के लिए अवॉर्ड दिया गया। इसके साथ ही शादाब मोइजी को 2013 में हुए मुज़फ्फरनगर दंगे पर बनाए गए डॉक्यूमेंट्री के लिए दिया गया।

बता दें कि मेघनाद बोस वही रिपोर्टर हैं, जिनके ऊपर मी टू मूवमेंट के दौरान यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। मेघनाद के खिलाफ यौन उप्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला का कहना था कि एक रात वह अपने कैंपस में लौटी तो उसने शराब पी रखी थी। कैंपस में लौटने के बाद वो लॉन पर दोस्तों के साथ मस्ती कर रही थी। तभी मेघनाद भी वहाँ पर आ गए।

थोड़ी देर के बाद महिला की दोस्तों ने उन दोनों को अकेला छोड़कर ऊपर अपने कमरे में चली गईं। पीड़िता दावा करती है कि उसके सिर में थोड़ा सा दर्द था तो उसने अपना सिर मेघनाद की गोद में रखा था। मगर जल्द ही उसे महसूस हुआ कि वो उसके होंठ और उसके मुँह को छूने की कोशिश कर रहा था। इतना ही नहीं, मेघनाद ने महिला के मुँह में ऊँगली भी डाल दी थी। जिसके बाद वह उठी और वहाँ से चली गई।

इसी तरह एक अन्य महिला ने मेघनाद पर आरोप लगाया था कि उन्होंने कैंटीन में सबके सामने उससे पूछा था कि क्या उसने पुश-अप ब्रा पहनी है? इस तरह के तमाम आरोप लगने के बाद क्विंट के पत्रकार मेघनाद ने सोशल मीडिया पर अपने व्यवहार के लिए माफी माँगी। उन्होंने उन सभी महिलाओं से बिना शर्त माफी माँगी, जिसे उन्होंने असहज महसूस करवाया था। हालाँकि, जब उन्होंने बिना शर्त माफी माँगी तो यह भी कहा कि उन्हें ये बात याद नहीं है कि उन्होंने किसी के मुँह में ऊँगली डाली थी।

क्विंट की दूसरी पत्रकार पूनम अग्रवाल के खिलाफ सेना के एक जवान के आत्महत्या के केस में मामला दर्ज किया गया था। पूनम अग्रवाल पर आरोप था कि उनके एक ‘स्टिंग ऑपरेशन’ की वजह से सेना के जवान ने आत्महत्या की। दरअसल पूनम ने महाराष्ट्र के नासिक में देओलली छावनी में एक पत्रकार के रूप में अपनी पहचान छुपाते हुए हिडेन कैमरों के साथ घुस गई थी और ऐसे वीडियो रिकॉर्ड किए जिनमें सेना के जवानों को सहायकों के रूप में काम करते हुए दिखाया गया था, जो कि उन्हें नहीं करनी चाहिए।

इस दौरान पूनम ने खास तौर पर लांस नायक रॉय मैथ्यू से बात की। मैथ्यू को इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि वो एक पत्रकार से बात कर रहे हैं और इस दौरान पूनम अग्रवाल ने बातचीत के माध्यम से यह साबित करने की कोशिश की थी कि जवान सहायक प्रणाली से खुश नहीं था और उसका शोषण किया जा रहा था। 

इसके कुछ ही दिनों बाद रॉय मैथ्यू को छावनी के बैरक में मृत पाया गया। बैरक से एक डायरी बरामद हुई। जिससे पता चला कि जवान दबाव में था और यह आत्महत्या का मामला था। रॉय मैथ्यू के परिवार के सदस्यों ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि वह डर गया था। जवान के परिवार ने बताया कि ‘स्टिंग ऑपरेशन’ के बाद से रॉय मैथ्यू दबाव में था क्योंकि मीडिया कवरेज के कारण उनकी पहचान उजागर हो गई थी। हालाँकि, पूनम के खिलाफ लगाया गया यह आरोप बाद में न्यायपालिका द्वारा निरस्त कर दिए गए।

आज दुग्गल साहब, अर्थव्यवस्था के जानकार बन बोले – India ने साली दुनिया भर की economy का भट्ठा बैठा दिया

फ़िल्म निर्देशक अनुराग कश्यप अक्सर अपशब्दों का इस्तेमाल कर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते रहते हैं। बेतुका बयान देते हुए भाजपा को आतंकी संगठन बताते हैं। आज दुग्गल साहब आर्थिक विशेषज्ञ बने हैं। उन्होंने न सिर्फ़ मोदी को भारत की अर्थव्यवस्था बिगड़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया बल्कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्था गिरने के पीछे भी मोदी-शाह का ही हाथ बताया। उन्होंने अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए तंज कसा कि सारी दुनिया ही देशद्रोही है।

अनुराग कश्यप ने अजीबोगरीब बयान देते हुए कहा कि भारत ने अपनी ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक प्रगति का भट्ठा बैठा दिया है। उन्होंने आइएमफ के बयान पर चुटकी लेते हुए कहा कि यहाँ सब अच्छा होने के बावजूद आईएमएफ की ऐसा बोलने की हिम्मत कैसे हुई? अनुराग कश्यप हर एक घटना में मोदी-शाह का हाथ ढूँढ लाते हैं और गालियाँ बकते रहते हैं। आश्चर्य की बात यह कि चार दिन पहले ही खुद इन्हीं जनाब ने अमेजन के द्वारा नौकरियाँ देने पर ट्वीट पेल रहे थे। सवाल फिर वही – अगर अर्थव्यवस्था चौपट है तो अमेजन नौकरी कैसे दे रहा है?

अनुराग कश्यप की पिछली कई फ़िल्में फ्लॉप रही हैं, ऐसे में उनके द्वारा लगातार अजीबोगरीब बयान देना चर्चा का विषय बना हुआ है। वो सभी विषयों पर जबरदस्ती अपनी राय रखते रहते हैं और भाजपा को गाली देना नहीं भूलते। इस बार भी उनका बयान ग़लत है क्योंकि आईएमएफ ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ़ भारत ही नहीं बल्कि कई देशों में अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी है, जिसका असर ग्लोबल इकॉनमी पर पड़ रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक विकास दर का धीमा होना एक साइक्लिक प्रक्रिया है, जो कुछेक चौमाही के बाद वापस पटरी पर आ जाएगा।

अनुराग कश्यप के हालिया बयानों की बात करें तो उन्होंने एक ट्वीट करते हुए लिखा था, “आज CAA लागू हो गया। मोदी को बोलो पहले अपने कागज, अपनी डिग्री इन “entire political science” दिखाए, और अपने बाप का और ख़ानदान का birth सर्टिफ़िकेट दिखाए सारे हिंदुस्तान को। फिर हमसे माँगे। #f**k CAA” इसके बाद कई लोगों ने उन्हें मानसिक दिवालिया की संज्ञा दी थी।

लौट रही है अर्थव्यवस्था की तेज़ी, सरकार द्वारा लिए गए फैसले होंगे बेहद प्रभावी: मुकेश अम्बानी

सांड की आँख, मुक्केबाज, पेंशन बंद… सबके लिए मोदी को गरियाएगा अनुराग कश्यप

मौखिक दस्त से ग्रस्त गालीबाज अनुराग कश्यप शायद पागलपन के कगार पर, CAA को करेंगे f**k

पत्रकार आजकल खुद ही बन जाते हैं पुलिस, वकील और जज: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

राजधानी दिल्ली में सोमवार (जनवरी 20, 2019) को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकारों को रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पत्रकारिता के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाले पत्रकारों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया। इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पत्रकारिता के मौजूदा हालात पर चिंता जाहिर की। 

उन्होंने कहा, “पत्रकारिता एक कठिन दौर से गुजर रही है। फर्जी खबरें नए खतरे के रूप में सामने आई हैं, जिसका प्रसार करने वाले खुद को पत्रकार के रूप में पेश कर इस महान पेशे को कलंकित करते हैं।”

राष्ट्रपति ने कहा, “ब्रेकिंग न्यूज सिंड्रोम के शोर-शराबे में संयम और जिम्मेदारी के मूलभूत सिद्धांत की अनदेखी की जा रही है। पुराने लोग फाइव डब्ल्यू एंड एच (what, when, why, where, who and how) के मूलभूत सिद्धांतों को याद रखते थे, जिनका जवाब देना किसी सूचना के खबर की परिभाषा में आने के लिए अनिवार्य था।”

उन्होंने आगे कहा कि पत्रकारों को अपने कर्तव्य के निर्वहन के दौरान कई तरह का काम करना पड़ता है। मगर इन दिनों वे अक्सर एक साथ जाँचकर्ता, अभियोजक और न्यायाधीश की भूमिका निभाने लगते हैं।

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, ‘सच्चाई तक पहुँचने के लिए एक समय में कई भूमिका निभाने की खातिर पत्रकारों को काफी आंतरिक शक्ति और अद्भुत जुनून की आवश्यकता होती है। पत्रकारों की बहुमुखी प्रतिभा प्रशंसनीय है। लेकिन वह मुझे यह पूछने के लिए प्रेरित करता है कि क्या इस तरह की व्यापक शक्ति के इस्तेमाल से वास्तविक जवाबदेही होती है?”

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद पत्रकारों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सत्य की खोज निश्चित रूप से कठिन है। यह कहना आसान है और करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि हमारे जैसा लोकतंत्र तथ्यों के उजागर होने और उन पर बहस करने की इच्छा पर निर्भर करता है। लोकतंत्र तभी सार्थक है, जब नागरिक अच्छी तरह से जानकार हो।

उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को उजागर करने वाली खबरों की अनदेखी की जाती है और उनका स्थान तुच्छ बातों ने ले लिया है। वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करने में मदद के बजाय कुछ पत्रकार रेटिंग पाने और ध्यान खींचने के लिए अतार्किक तरीके से काम करते हैं।

बेचारा अफ़ज़ल गुरु निर्दोष निकला तो उसे वापस कौन लाएगा, ये न्याय का मज़ाक: आलिया की मम्मी

बॉलीवुड के वरिष्ठ फ़िल्म निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट की दूसरी बीवी सोनी राज़दान ने संसद भवन पर हमले के दोषी आतंकी अफ़ज़ल गुरु को लेकर विवादित बयान दिया है। सोनी राजदान ने अफजल गुरु का एक बयान शेयर किया, जिसमे उसने डीएसपी देवेंद्र पर गंभीर आरोप लगाया था। बकौल अफजल, देवेंद्र ने उससे कहा था कि उसे उनके लिए एक छोटा सा काम करना पड़ेगा। बता दें कि हाल ही में डीएसपी देवेंद्र सिंह को हिज़्बुल मुजाहिद्दीन के दो आतंकियों के साथ गिरफ़्तार किया गया, जिसे वो अपनी गाड़ी में लिफ्ट दे रहे थे। सोनी राज़दान ने अफजल गुरु के उस बयान को शेयर किया, जिसमें उसने देवेंद्र सिंह पर टॉर्चर करने के आरोप लगाए थे।

सोनी राज़दान ने तो यहाँ तक अंदेशा जताया कि आतंकी सरगना अफजल गुरु निर्दोष था। फ़िल्म अभिनेत्री आलिया भट्ट की माँ सोनी राज़दान ने अफजल गुरु के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि मरे हुए आदमी को कौन वापस ला सकता है, अगर वो निर्दोष निकला तो? राजदान ने सज़ा-ए-मौत का विरोध करते हुए लिखा कि फाँसी की सज़ा को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने अफजल गुरु को ‘बलि का बकरा’ बनाए जाने का आरोप लगाते हुए इस मामले में उच्च-स्तरीय जाँच की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि ये न्याय का मज़ाक है।

सोनी राज़दान के इस बयान का सोशल मीडिया पर ख़ूब विरोध हुआ। जेएनयू में भी ‘अफजल हम शर्मिंदा हैं, तेरे क़ातिल ज़िंदा हैं’ जैसे नारे लग चुके हैं। बता दें कि अफजल गुरु को पूरी क़ानूनी प्रक्रिया ख़त्म होने के बाद ही फाँसी दी गई थी। विशेष अदालत ने उसे-दिसंबर 2002 में सज़ा-ए-मौत दी थी, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2003 में सही ठहराया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। देश की शीर्ष अदालत ने अगस्त 2005 में अफजल गुरु की सज़ा को बरकरार रखा। इसी मामले में समीक्षा याचिका भी दायर की गई, जिसे खारिज कर दिया गया।

अंततः अफजल गुरु ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी। मानवाधिकार की बात करने वाले संगठनों ने अफजल गुरु को बचाने के लिए व्यापक अभियान चलाया लेकिन फ़रवरी 2013 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी। इसके लगभग एक सप्ताह बाद उसे फाँसी पर लटका दिया गया। कई फ़िल्मों में काम कर चुकीं सोनी राज़दान का ये बयान चौंकाने वाला है।

पेरियार ने दिखाई राम-सीता की आपत्तिजनक तस्वीरें, साबित कर सकता हूँ, माफी नहीं मागूँगा: रजनीकांत

तमिल फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत पेरियार पर टिप्पणी करने के कारण इन दिनों विवादों में हैं। उनपर इस मामले के संबंध में बीते दिनों एफआईआर भी दर्ज हुई। लेकिन ताजा जानकारी के अनुसार उन्होंने अपने बयान पर माफी माँगने से इंकार कर दिया। रजनीकांत का कहना है कि वे इस मामले के संबंध में माफी बिलकुल नहीं माँगेंगे। क्योंकि कार्यक्रम में उन्होंने पेरियार को लेकर जो कहा वो उस समय मीडिया में भी प्रकाशित हुआ था। जिसके सबूत उनके पास अब भी है। इसलिए वे माफी नहीं माँगेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 14 जनवरी को तुगलक मैगजीन की 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान पेरियार ईवी रामासामी को लेकर रजनीकांत ने कहा था कि पेरियार हिंदू देवी-देवताओं के कट्टर आलोचक थे और उन्‍होंने 1971 में सलेम में अंधविश्वास उन्मूलन सम्मेलन के दौरान भगवान राम और सीता की आपत्तिजनक तस्वीरें भी दिखाई थीं। लेकिन इसके बाद भी किसी ने पेरियार की आलोचना नहीं की। केवल चो (तुगलक मैग्जीन के संस्थापक) ने इस मामले को उजागर किया।

रजनीकांत ने इस कार्यक्रम में अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि तुगलक ही अकेली मैगजीन थी, जिसने उस कार्यक्रम को कवर किया और हिंदू देवी-देवताओं के अपमान की बात उजागर की। लेकिन ये बात सत्‍तारूढ़ डीएमके को पसंद नहीं आई। मैगजीन के उस संस्‍करण को तमिलनाडु सरकार ने जब्‍त कर लिया। मगर, चो ने इसे दोबारा छापा।

रजनीकांत के अनुसार इसके बाद ये मैगजीन ब्‍लैक में बिकी। उस दौरान जो मैगजीन 10 रुपए की बिकती थी, उसकी बिक्री 50 और 60 रुपए में हुई। एम. करुणानिधि ने मैगजीन को मुफ्त की पब्लिसिटी दे दी। जिसके लिए अगले संस्‍करण में चो ने उन्‍हें पब्लिसिटी मैनेजर के तौर पर काम करने के लिए धन्‍यवाद भी दिया। हालाँकि, इसके बाद मैग्जीन के संस्थापक चो को करुणानिधि का गुस्सा झेलना पड़ा। लेकिन तब तक वे पूरे देश में लोकप्रिय हो गए थे।

गौरतलब है कि रजनीकांत की इसी टिप्‍पणी के बाद द्रविड़ विधुथलाई कझगम (DVK) ने उनपर आरोप लगाया कि रजनीकांत ने पेरियार के बारे में सरासर झूठ बोला। साथ ही अभिनेता से इस मामले में माफी माँगने की माँग उठाई। लेकिन अब रजनीकांत ने सरेआम इस मामले पर माफी माँगने से इनकार कर दिया हैं। रजनीकांत ने सोमवार को कहा, “मैं अपनी बात से पीछे नहीं हटूँगा। क्योंकि मैं इसे साबित कर सकता हूँ।”

बता दें, बीते शुक्रवार को कोयंबटूर पुलिस आयुक्‍त को रजनीकांत के खिलाफ मामले में शिकायत मिली। डीवीके के कोयंबटूर प्रमुख नेहरूदास ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 153 (a) (धर्म के आधार पर समाज में शत्रुता फैलाना) और 505 (लोगों को भ्रमित करने और उकसाने वाला बयान देना) के तहत कार्रवाई की माँग की और उनके माफी माँगने को कहा।।

नाम बदलकर भिलाई में रह रही बांग्लादेशी महिला गिरफ्तार, स्थानीय युवक से विवाह कर दे रही थी पुलिस को झाँसा

एनआरसी के विरोध में इस समय देश के कोने-कोने से आवाजें उठ रही हैं। देश का एक निश्चित तबका और एक निश्चित गिरोह चाहता है कि केंद्र सरकार इस कानून को पूरे देश में लागू न करे। जिसके लिए वे लगातार प्रदर्शन भी कर रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर यदि देखें तो बिना एनआरसी के आए ही देश में घुसपैठियों की पहचान कर उनपर एक्शन लेने की कवायद चल चुकी है। जिसके मद्देनजर अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ के भिलाई में पुलिस ने फर्जी तरीके से भारतीय नागरिकता पाकर भारत में रहने वाली बांग्लादेशी महिला को गिरफ्तार किया। महिला की पहचान आशा अख्तर उर्फ़ प्रिया पराडकर के रूप में हुई है। 

महिला पर आरोप है कि उसने भिलाई स्थित जामुल के एक युवक से शादी करने के बाद उसकी मदद से भारतीय पासपोर्ट और अन्य पहचान पत्र बनवा लिए थे। और अपने पति हेंमेंद्र के साथ भिलाई में रह रही थी।

आरोपित महिला के पास से पुलिस ने भारतीय पासपोर्ट के साथ ही बांग्लादेश का भी पासपोर्ट बरामद किया है। पुलिस ने दंपति के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना तथा भारतीय पासपोर्ट अधिनियम के साथ ही विदेशी विषयक अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की है।

नई दुनिया में प्रकाशित संबधित खबर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छावनी के नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) विश्वास चंद्राकर ने बताया कि 32 एकड़ हाउसिंग बोर्ड जामुल निवासी हेमेंद्र पराडकर और उसकी पत्नी आशा अख्तर उर्फ प्रिया पराडकर (24) को गिरफ्तार कर लिया गया है। बांग्लादेश की आशा यहाँ नाम बदलकर रह रही थी। उसने 5 अक्टूबर 2017 को हेमेंद्र पराडकर से रायपुर के आर्य समाज मंदिर में शादी की थी।

चंद्राकर ने बताया कि आशा के पास से टूरिस्ट वीजा भी मिला है, जिसकी वैधता 29 अक्टूबर 2019 को समाप्त हो चुकी है। प्रारंभिक जाँच में पता चला है कि आरोपित महिला देह व्यापार में लिप्त है। वो यहांँ भी यही काम करती थी। शादी के बाद पति के नाम का सहारा लेकर उसने दस्तावेज तैयार करवा लिए थे।

गौरतलब है कि बीते दिनों कई ऐसे घुसपैठियों की गिरफ्तारी की खबरें मीडिया में आई, जो अपनी पहचान छुपाकर भारत में गुजर-बसर कर रहे थे और यहाँ अपराधों को भी अंजाम दे रहे थे। इसके अलावा एनआरसी के डर से भारत छोड़ने वाले घुसपैठियों की बात को भी खुद बांग्लादेश ने स्वीकारा और इसी बीच 445 बांग्लादेशियों को भारत का बॉर्डर क्रॉस करते गिरफ्तार किया गया। महाराष्ट्र से भी करीब 12 बांग्लादेशी घुसपैठियों की गिरफ्तारी हुई है

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