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मैंने गूगल पर देखी थी जमीन, पैसा कहाँ से आया याद नहीं: वाड्रा की बेजोड़ दलील

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा इन दिनों बीकानेर लैंड डील में जाँच का सामना कर रहे है। मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच में एक नई बात निकलकर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा ने ED से कहा कि उन्होंने बीकानेर के दो गाँवों में जो जमीन खरीदी, उसके लिए पैसा कहाँ से आया, ये उन्हें याद नहीं आ रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने तो बस गूगल मैप पर जमीन देखी थी। बता दें कि जमीन की इस खरीददारी से उनके बिजनेस को काफी फायदा पहुँचा है।

अगस्त 2017 में राजस्थान सरकार द्वारा बीकानेर जमीन घोटाला की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपने के बाद ED और CBI दोनों ही इस मामले की जाँच कर रही है। जाँच एजेंसी ED के मुताबिक जब बीकानेर के दो गाँवों में धोखाधड़ी करके जमीन खरीदी गई थी, उस समय वाड्रा M/s Skylight Hospitality Pvt Ltd कंपनी के ‘एक्टिव डायरेक्टर’ थे। Skylight कंपनी में 99% शेयर वाड्रा का है और इसी वजह से उन्हें कंपनी के सारे फैसले लेने का अधिकार है।

ED ने आरोप लगाया कि बीकानेर के जगनेर और गोयलरी में स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी द्वारा 2010 में 72 लाख रुपए में जमीन खरीदी गई और फिर 2012 में उसे M/s Allegeny Finlease (P) Ltd को 5.15 करोड़ रुपए में बेच दी गई। इस दौरान कथित तौर पर 4.43 करोड़ रुपए का लाभ पहुँचा। ED ने आरोप लगाया कि वाड्रा की कंपनी ने इस पैसे का इस्तेमाल दिल्ली के सुखदेव विहार में घर खरीदने में किया। जो कि ED ने जाँच के लिए कुर्क कर लिया है।

ED ने जब वाड्रा से उनकी कंपनी द्वारा जमीन की खरीद के लिए फंड के सोर्स के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें फंड का सोर्स याद नहीं है। वाड्रा ने कहा कि फंड की व्यवस्था कंपनी के इनकम से की गई होगी और इसका भुगतान बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किया गया है, लोगों को पता है। वाड्रा ने ईडी से कि उन्होंने केवल “गूगल मैप” पर जमीन देखी थी, जो कि कंपनी के एक अधिकृत प्रतिनिधि महेश नागर ने उन्हें दिखाया था। 

वहीं यह पूछे जाने पर कि क्या जमीन की खरीद-बिक्री से पहले वह बीकानेर गए थे, तो उन्होंने इसका जवाब नहीं में दिया। साथ ही वाड्रा ने यह भी कहा कि वह जमीन के कागजात के बारे में भी नहीं जानते क्योंकि वेरिफिकेशन का काम राजेश खुराना को सौंपा गया था।

इतना ही नहीं वाड्रा ने उन चार लोगों को भी पहचानने से इनकार कर दिया, जिन पर ED ने बीकानेर जमीन घोटाले के संबंध में मामला दर्ज किया है। भुगतान के तरीके के बारे में पूछे जाने पर वाड्रा ने कहा कि उन्होंने महेश नागर के नाम चेक जारी किए थे और डॉक्यूमेंट्स की जाँच राजेश खुराना ने की थी। वाड्रा ने कहा कि वह जमीन के मालिक को नहीं जानते। उन्होंने कहा कि महेश नागर के कहने पर भुगतान किया गया।

जब वाड्रा को स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के बैंक स्टेटमेंट और सेल डीड दिखाए गए तो उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि M/s Allegeny Finlease Pvt Ltd को भुगतान किया गया है और फिर इसका इस्तेमाल नई दिल्ली के सुखदेव विहार में प्रॉपर्टी खरीदने में किया गया है। वाड्रा ने लगातार मामले में किसी भी तरह के फर्जी काम से इनकार किया। ED ने रॉबर्ट वाड्रा की माँ मौरीन वाड्रा और स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के तत्कालीन निदेशक और अब कंपनी में पार्टनर से भी पूछताछ की थी। मौरीन ने कहा कि उस कंपनी में उनकी सिर्फ एक फीसदी की हिस्सेदारी थी।

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क़ानून व्यवस्था बहाल करे पुलिस: शाहीन बाग़ में पिकनिक मना रहे लोगों पर हाई कोर्ट हुआ सख़्त

दिल्ली हाईकोर्ट ने शाहीन बाग़ में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर पुलिस से कहा है कि वो जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए काम करे। कोर्ट ने कहा कि बड़े स्तर पर जनता के हित को देखते हुए क़ानून-व्यवस्था बहाल किए जाने की दिशा में प्रयास किए जाएँ। सीएए विरोधी प्रदर्शनों के कारण कालिंदी कुंज-शाहीन बाग़ रास्ता दिसंबर 15, 2020 से ही बंद पड़ा है और इसीलिए स्थानीय जनता को ख़ासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वहाँ विरोध प्रदर्शन के नाम पर जमे लोग बिरयानी व अंडे खा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के पिकनिक मनाने पर भी स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है।

मंगलवार (जनवरी 14, 2020) को दिल्ली हाईकोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें बंद रास्ते को खोलने के लिए दिल्ली पुलिस को निर्देशित करने की माँग की गई थी। इस याचिका में कहा गया है कि शाहीन बाग़ में हो रहे प्रदर्शन के कारण ऐसे लाखों लोगों को परेशानी का समाना करना पड़ रहा हुई, जो रोज़ाना उस रास्ते से ही सफर करते रहे हैं। पिछले 1 महीने से ऐसे लोग अलग रास्तों से आते-जाते हैं, जिसके कारण उनके कई अतिरिक्त घंटे बर्बाद हो जाते हैं।

इस याचिका को सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अमित साहनी ने दायर किया था। याचिका में ओखला अंडरपास को भी खोलने की बात कही गई है, जो कई दिनों से बंद पड़ा है। पहले इन रास्तों को अस्थायी रूप से बंद किया गया था लेकिन बाद में इसकी अवधि बढ़ती चली गई क्योंकि शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारी उठने का नाम नहीं ले रहे हैं। मंगलवार को लोहड़ी के दिन भी वहाँ काफ़ी ख़ुशी का माहौल था और लोगों ने आग जला कर नाच-गान में हिस्सा लिया। कन्हैया कुमार, बरखा दत्त और योगेंद्र यादव सरीखे नेता व पत्रकार भी वहाँ पहुँच कर फोटो क्लिक करवाने में लगे हुए थे।

सड़क जाम के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को हो रही है। उन्हें स्कूल जाने में 2 घंटे का अतिरिक्त समय लग रहा है। प्रदर्शनकारियों के कारण दिल्ली, यूपी और हरियाणा- तीन राज्यों के लोगों को परेशानी का समाना करना पड़ रहा है। आश्रम क्षेत्र में स्थिति ये है कि जाम की वजह से सिर्फ़ 1 ट्रैफिक सिग्नल को पार करने में 20 मिनट का समय लग रहा है। इस याचिका में कहा गया है कि जहाँ पहले इस रास्ते से प्रतिदिन 30,000 गाड़ियाँ जाती थीं, शाहीन बाग़ इलाक़े वाला रास्ता बंद होने का कारण 1 लाख अतिरिक्त गाड़ियों की संख्या बढ़ गई है।

बता दें कि शाहीन बाग़ प्रदर्शन को मीडिया का भी बड़ा कवरेज मिल रहा है और इसे मुस्लिम महिलाओं की ज़ंग बता कर प्रचारित किया जा रहा है। यहाँ एक 20 दिन की नवजात बच्ची को आंदोलन का चेहरा बताया गया था। कुछ बूढ़ी महिलाओं को एनडीटीवी ने अपने स्टूडियो में बुला कर इस प्रदर्शन के महिमामंडन का प्रयास किया था।

‘शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारी खा रहे बिरयानी, मना रहे पिकनिक’ – जाम से परेशान स्थानीय लोग सड़क पर

‘जिन्ना वाली आजादी’ के नारे से गूँजा शाहीन बाग: CAA के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन का पर्दाफाश, Video Viral

शाहीन बाग़ की आवारा भीड़ पर बावली हुई जा रही मीडिया की नज़र में कोटा के बच्चों की जान सस्ती

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी 8वाँ अजूबा: मात्र 6 दिन में कमाए ₹3.8 करोड़, 1 साल में ₹82 करोड़

गुजरात के वडोदरा से 100 किलोमीटर दूर नर्मदा जिले में ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभ भाई पटेल की 182 मीटर ऊँची प्रतिमा को दुनिया के आठ अजूबों में शामिल कर लिया गया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खुद सोमवार (जनवरी 13, 2019) को इसकी जानकारी दी। उन्होंने ट्वीट कर बताया कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को शंघाई कॉपरेशन ऑर्गनाइजेशन की 8 अजूबों की लिस्ट में शामिल किया गया है। जिसके लिए वह एससीओ के कदम की सराहना करते हैं। उनके मुताबिक इस कदम को एक प्रेरणा की तरह देखा जाएगा।

भारत के लिए यह एक उपलब्धि की बात है कि न्यूयॉर्क स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ से दोगुने लंबे सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा को मात्र एक साल में ही इतनी ख्याति मिल गई। लेकिन अफसोस! अपने ही देश में ध्रुव राठी की तरह कुछ लोग ऐसे हैं, जो मोदी सरकार पर सवाल उठाने के लिहाज से शायद आज भी इसकी आलोचना करने से नहीं थकें।

उल्लेखनीय है कि साल 2018 में मोदी सरकार द्वारा प्रतिमा अनावरण के बाद कुछ विरोधियों ने बारिश के मौसम में दावा किया था कि मात्र 2 साल में ये प्रतिमा खराब हो जाएगी।

लेकिन, अब परिस्थितियाँ और आँकड़े देखकर लगता है कि मोदी सरकार की ये देन विरोधियों के मुँह पर एक तमाचा है। जिससे देश में न केवल पर्यटन क्षेत्र का विस्तार हुआ, बल्कि राजस्व में भी बढ़ोतरी हुई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मात्र क्रिसमस वीक में ही 1.77 लाख पर्यटक स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने आए और सिर्फ़ 6 दिन के अंदर ₹3.8 करोड़ की कमाई हुई।

इसके अलावा प्रतिमा अनावरण के बाद से अब तक 38 लाख पर्यटक इस जगह आकर घूम चुके हैं। नवंबर महीने में तो यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या ने स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को भी पछाड़ दिया था। स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी में जहाँ पर्यटकों की संख्या 10,000 गिनी गई थी, वहीं नवंबर महीने में ही लौह पुरुष की इस प्रतिमा को देखने 15,036 लोग पहुँचे थे।

इसके अलावा बता दें कि मात्र एक साल के भीतर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से ₹82 करोड़ राजस्व प्राप्ति हुई है। जबकि 1632 में बने ताजमहल की कमाई ₹86 करोड़ हुई। इसके अतिरिक्त 1 नवंबर 2019 से 12 सितंबर 2019 तक के आँकड़ों के अनुसार इस स्थल को देखने पहुँचे लोगों की तादाद ने ताजमहल को देखने पहुँचने वाले लोगों की संख्या को पछाड़ दिया था। जानकारी के अनुसार इस अंतराल में 26 लाख लोग इसे देखने पहुँचे थे और कमाई 57 करोड़ रुपए हुई थी। इसके अलावा टाइम्स मैग्जीन के द्वारा सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा को दुनिया की 100 महानतम जगहों में शामिल किया गया था।

सरदार पटेल के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने तोड़ डाला अमेरिका के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का रिकॉर्ड

‘तुम बहुत छोटे कर्मचारी हो, बाहर भागो’ – डॉक्टर को सरेआम धमकाया अखिलेश यादव ने, वीडियो हो गया Viral

कन्नौज हादसे में घायलों से मिलने अस्पताल पहुँचे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर को ही जमकर हड़काया। इसका वीडियो भी सामने आया है। जिसमें वो अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर को सरेआम धमकाते, डाँटते और बदसलूकी से बात करते नज़र आ रहे हैं।

तिलमिलाए अखिलेश यादव ने चीफ मेडिकल ऑफिसर से यहाँ तक कह दिया कि ‘बाहर भागो यहाँ से।’ इस वीडियो में नजर आ रहा है कि अखिलेश यादव कन्नौज के छिबरामऊ स्थित अस्पताल में घायलों से मिलने पहुँचे थे और उनका हालचाल पूछ रहे थे। इसी बीच इलाज करा रहे एक मरीज के परिजन ने कहा कि ‘अभी तक इसको चेक तक नहीं दिया गया है।’ 

इस पर अखिलेश यादव पूछते हैं कि काहे जी… तभी ही वहाँ मौजूद इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर कहते हैं कि मिल गई है भैया… इसके बाद अखिलेश यादव डॉक्टर से मुखातिब होते हुए कहते हैं, “तुम मत बोलो, तुम सरकारी आदमी हो। हम जानते हैं, सरकार क्या होती है। तुम मत बोलो, इसलिए मत बोलो क्योंकि तुम सरकार के आदमी हो। तुम्हें नहीं बोलना चाहिए। तुम सरकार का पक्ष नहीं ले सकते। तुम बहुत छोटे अधिकारी हो। बहुत छोटे कर्मचारी हो। आरएसएस के हो सकते हो, बीजेपी के हो सकते हो, लेकिन ये बात नहीं कह सकते कि वो क्या कह रहा है, तुम मुझे नहीं समझा सकते। दूर हो जाओ एकदम… एकदम दूर हो जाओ… एकदम हट जाओ यहाँ से, भाग जाइए यहाँ से, बाहर भागो यहाँ से।”

इसके बाद अखिलेश यादव अस्पताल के कमरे में मौजूद लोगों से पूछते हैं कि ‘क्या पोस्ट है इसकी? और वहाँ मौजूद लोगों में से कोई कहता है कि ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) हैं। इस पर अखिलेश यादव कहते हैं कि इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर हैं तो कहाँ के रहने वाले हैं। तभी एक शख्स जवाब देता है ‘गोरखपुर’। तब अखिलेश यादव फिर कहते हैं कि गोरखपुर के हैं, इसलिए सरकार की साइड ले रहे हैं।

इस संबंध में इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ डीएस मिश्रा का कहना है कि पूर्व सीएम ने उनके साथ अभद्रता की है। उन्हें भाजपा व आरएसएस का व्यक्ति बताकर कमरे से बाहर निकाल दिया। वह इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात थे। डीएस मिश्रा ने बताया कि जब अखिलेश यादव अस्पताल पहुँचे थे तो वो वहाँ पर मरीजों का इलाज कर रहे थे। अखिलेश यादव के आने पर एक मरीज ने कहा कि उसे मुआवजे का चेक नहीं मिला है। जिसके बाद उन्होंने स्पष्ट करने की कोशिश की कि चेक दिया गया है। इस पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव भड़क गए और उन्हें कमरे से बाहर जाने के लिए कह दिया।

…जब 14 साल पहले राजदीप सरदेसाई ने फर्जी स्टिंग ऑपरेशन से एक डॉक्टर की जिंदगी कर दी थी बर्बाद

जेएनयू हिंसा मामले पर कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर मीडिया ग्रुप इंडिया टुडे लगातार सुर्खियाँ बटोर रहा है। वही फर्जी स्टिंग ऑपरेशन, जिसका न सिर है और न ही पाँव। दरअसल इंडिया टुडे के पत्रकारों का फर्जी स्टिंग ऑपरेशन को लेकर पुराना इतिहास रहा है या फिर यूँ कहें कि इनका इससे गहरा नाता रहा है। आइए बताते हैं कि ये ‘पत्रकार’ किस तरह से ‘पत्रकारिता’ के नाम पर कारनामा करते हैं और आम लोगों की जिंदगी बर्बाद करते हैं।

इसमें प्रमुख नाम है: बार-बार अपनी फजीहत कराने वाले अविश्वसनीय पत्रकार राजदीप सरदेसाई का। जिन्होंने अभी हाल ही में 2007 में किए गए फर्जी स्टिंग ऑपरेशन को लेकर कोर्ट के समक्ष माफी माँगी थी। हालाँकि राजदीप सरदेसाई तो यह कभी नहीं चाहते होंगे कि उनके द्वारा कोर्ट के समक्ष माफी माँगने की घटना सामने आए, लेकिन ऐसा हो नहीं सका।

खैर, फर्जी स्टिंग ऑपरेशन के मामले में इनकी फेहरिस्त लंबी है और इन्हें इसका अच्छा-खासा अनुभव भी है। अब हम आपको उनके 2006 में किए गए उस ‘कारनामे’ से भी रूबरू करवाते हैं, जिसने एक आम आदमी की जिंदगी को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। यहाँ पर हम आपको बता दें कि राजदीप अकेले ही इसमें शामिल नहीं हैं। इनका पूरा गिरोह ही इस मामले में काफी सक्रिय रहा है। राजदीप के इस गिरोह में उनके अलावा पत्रकार से नेता और फिर भाव न मिलने पर पत्रकार बने आशुतोष, राघव बहल (तब IBN के थे, अब Quint के मालिक) और जमशेद खान भी शामिल है। ये वही जमशेद खान हैं, जिन्होंने जेएनयू के फर्जी स्टिंग ऑपरेशन में भी अहम भूमिका निभाई है।

‘मीडिया’ और ‘पत्रकार’ किस तरह से माफिया की तरह काम करता है, इसका उदाहरण है यह मामला। दरअसल यह मामला 2006 का है, जब नोएडा के सरकारी अस्पताल के डॉक्टर अजय अग्रवाल के खिलाफ IBN-7 और CNN-IBN चैनल ने ‘शैतान डॉक्टर’ नाम से एक ‘स्टिंग ऑपरेशन’ किया था। इस तथाकथित स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया गया था कि डॉक्टर अग्रवाल भीख मँगवाने वाले गिरोहों के लिए बच्चों के हाथ-पैर काटने का काम करते हैं। इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद डॉक्टर अग्रवाल की जिंदगी में तूफान आ गया। उनका घर से निकलना मुश्किल हो गया। जिंदगी नर्क बन गई। लोगों ने उनके घर पर पथराव भी किया।

हालाँकि, अभी तक की जाँचों में डॉक्टर अग्रवाल को निर्दोष पाया गया है। लेकिन इसके बावजूद इन लोगों ने डॉक्टर अग्रवाल से माफी नहीं माँगी है। बता दें कि इस फर्जी स्टिंग ऑपरेशन के कर्ता-धर्ता थे राजदीप सरदेसाई, जो कि उस समय IBN-7 के एडिटर इन चीफ थे और आशुतोष चैनल के एडिटर थे। डॉक्टर अग्रवाल ने फर्जी केस में फँसाने को लेकर राजदीप सरदेसाई, आशुतोष, चैनल के मालिक राघव बहल और रिपोर्टर जमशेद खान, अरुणोदय मुखर्जी समेत कई अन्य के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया था। केस अभी भी कोर्ट में लंबित है। इन पर केस चल रहा है।

टीवी पर बैठकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले ये तथाकथित पत्रकार किस कदर शातिर हैं, ये इसी बात से पता चलता है कि उन्होंने गलती पकड़े जाने के बावजूद कभी माफी नहीं माँगी। जब उन्हें कोर्ट का नोटिस आया, तो वो उसकी भी कई सालों तक अनदेखी करते रहे। आखिरकार जब अदालत ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया, तब जाकर 12 साल बाद 2018 में राजदीप सरदेसाई, आशुतोष और अरुणोदय मुखर्जी ने सरेंडर किया। हालाँकि इन्हें जेल से बेल मिल गई।

डॉक्टर अग्रवाल ने आरोप लगाया कि राजदीप सरदेसाई, आशुतोष और राघव बहल ने चैनल की टीआरपी बढ़ाने के लिए उनकी जिंदगी बर्बाद कर दी। 2006 में चैनल के शुरू होने के कुछ दिन बाद ही ये स्टिंग ऑपरेशन दिखाया गया था। ये कार्यक्रम पूरे एक सप्ताह तक चला गया था। डॉक्टर अग्रवाल तब नोएडा के सरकारी अस्पताल में ऑर्थोपेडिक सर्जन के तौर पर तैनात थे। डॉक्टर अग्रवाल ने जमशेद खान को ब्लैकमेलकर करार देते हुए आरोप लगाया था कि उसी ने फर्जी स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया था और फिर इसे IBN7 को दिया था।

उन्होंने आगे आरोप लगाते हुए कहा था कि उस समय IBN7 और CNN-IBN चैनल नए लॉन्च किए गए थे और वे किसी सनसनीखेज स्टोरीज की तलाश में थे, ताकि चैनल को टीआरपी मिल सके। और यही वजह है कि उन्होंने जुलाई 2006 में लगभग एक सप्ताह तक लगातार इस फर्जी स्टिंग ऑपरेशन को प्रसारित किया। फिलहाल राघव बहल THE QUINT नाम के वेबसाइट से प्रोपेगेंडा फैलाने का काम कर रहे हैं, जो बीजेपी और भारतीय सेना के खिलाफ फर्जी खबरें छापती है।

मैंने झूठी खबर चलाई, मुझे माफ़ कर दो: पढ़िए, राजदीप सरदेसाई का माफीनामा

JNUSU कार्यकर्ता को ABVP का बता डाला… राहुल कंवल ने स्टिंग के नाम पर ऐसे किया गड़बड़झाला

हमारे कैमरे की सेटिंग ख़राब थी: इंडिया टुडे की JNU हिंसा के फर्जी स्टिंग पर सफाई

TikTok पर युवराज सिंह ने जीता सबका दिल: अमिताभ बच्चन, ऋतिक रोशन को करनी पड़ी तारीफ

पिछले कुछ समय में टिकटॉक के जरिए कई लोगों ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर अपनी एक अलग पहचान बनाई। कुछ ने इसके जरिए अच्छी कमाई की, तो कुछ ने इसे सिर्फ मनोरंजन समझा। कई बार टिकटॉक स्टार्स बहुत फेमस भी हुए। लेकिन कई बार कुछ लोग चंद फॉलोवर्स में सिमट गए। ऐसे में इस बीच एक नाम राजस्थान के रहने वाले युवराज सिंह का छाया। जिनके डांस वीडियो टिकटॉक पर देखकर न केवल दर्शक बल्कि बड़े-बड़े बॉलीवुड स्टार भी उनके फैन हो गए और पूछने लगे कि ये शख्स कौन है। इन स्टार्स की सूची में अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, सुनील शेट्टी और ऋतिक रौशन जैसे जाने-माने कलाकार हैं।

बता दें कि युवराज अपनी एक वीडियो के आखिर में ‘औकात’ की बात करते हैं और बड़ी सादगी से दिखाते हैं कि कैसे वे खुद ही अपनी वीडियो बनाते हैं। जिसके बाद शशांक नामक यूजर उन्हें फेमस करने की ठानते हैं और सोशल मीडिया पर उनकी वीडियो को अपने अकॉउंट से शेयर करते हैं। जिसके बाद देखते-देखते ही ये वायरल हो जाती है। युवराज के वीडियो को अब तक शशांक के अकॉउंट से 15 हजार से ज्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है और अनगिनत लोग उनकी प्रतिभा के लिए उनकी तारीफ कर रहे हैं।

ऋतिक रौशन ने उन्हें ‘Smoothest Airwalker’ कहा है और पूछा है कि ये शख्स कौन है?

अनुपम खेर ने युवराज सिंह की वीडियो शेयर करते हुए उन्हें बेमिसाल बताया है और अपने फॉलोवर्स से उन्हें देखने को कहा है।

वहीं सुनील शेट्टी और अरशद वारसी ने भी युवराज की तारीफ की है।

बता दें कि दिग्गज कलाकारों से तारीफ पाने के बाद सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने भी ‘wow’ लिखकर उनके वीडियो को शेयर किया।

इसके बाद युवराज काफी भावुक हो गए और एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए उन्होंने अमिताभ बच्चन को धन्यवाद दिया। युवराज ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि लेजेंडरी अभिनेता उनकी वीडियो शेयर करेंगे।

शशांक सिंह जिन्होंने युवराज की वीडियो शेयर करके उन्हें फेमस बनाया, उन्होंने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि उनका टिकटॉक पर अकॉउंट नहीं है, लेकिन वो अपने खाली समय में इस पर वीडियो देखते हैं। उनके मुताबिक युवराज के वीडियो मिलने से पहले भी वो टिकटॉक वीडियोज़ स्क्रॉल कर रहे थे, कि तभी उन्होंने युवराज का डांस देखा।

उन्होंने बताया, “वीडियो देखने के बाद मैं युवराज की प्रोफाइल पर गया और एक-एक कर सारी वीडियो देखने लगा। मैं इस दौरान उसके पैरों से अपनी आँखें नहीं हटा पाया।” शशांक के अनुसार जब उन्होंने एक वीडियो में देखा कि शशांक कैसे पत्थर पर रखकर अपने वीडियो बनाते हैं, तो उन्होंने तय किया कि युवराज को वो मिलना चाहिए, जिसके वो हकदार हैं। बता दें कि शशांक के अनुसार उनके दोस्तों ने इस वीडियो को आगे बढ़ाने में बहुत मदद की। वो उम्मीद करते हैं, युवराज जिस काबिल हैं, वो उसे जरूर मिले।

Tanhaji उत्तर प्रदेश में हुई टैक्स फ्री, अजय देवगन ने CM योगी आदित्यनाथ से की फिल्म देखने की गुजारिश

17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी के सेनापति सूबेदार तानाजी मालुसरे की विजयगाथा पर आधारित फिल्म ‘तानाजी: द अनसंग वॉरियर’ को योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में आज आधिकारिक रूप से टैक्स फ्री कर दिया। बता दें कि अजय देवगन ने खुद इसके लिए सीएम योगी से अनुरोध किया था।

उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय की कॉपी

तानाजी के अभिनेता अजय देवगन ने ट्वीट करके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया। साथ ही उनसे गुजारिश भी किया कि अगर संभव है तो वो इस मूवी को जरूर देखें।

इस फिल्म में मुख्यत: सिंहगढ़ का युद्ध दर्शाया गया है। जिसे छत्रपति शिवाजी की ओर से उनके सेनापति सूबेदार तानाजी मालुसरे और मुगलों की ओर से उदय सिंह भान ने लड़ा था। युद्ध का कारण कोंढाना का किला था। जिसे मालुसरे की अगुवाई में जीतकर मराठाओं ने भगवे की शान को डगमगाने नहीं दिया था।

इस युद्ध में तानाजी ने अपनी जान गवा दी थी। जिसके बाद छत्रपति शिवाजी ने उनके सम्मान में कोंढाना किले का नाम सिंहागढ़ कर दिया था। और उनकी वीरगति की खबर सुनकर कहा था “गढ़ आला, पण सिंह गेला” यानी मराठाओं ने तो किला जीत लिया, लेकिन अपना शेर खो दिया।

फिल्म में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों को शानदार तरीके से पेश किया गया है। भगवे की शान को दृश्यों के साथ-साथ डॉयलॉग डिलीवरी ने बरकरार रखा है। जिसके कारण कई वामंपथी इस फिल्म की आलोचना कर रहे हैं। इन वामपंथियों का कहना है कि फिल्म हिंदुत्व को बढ़ावा दे रही है और इस्लामोफोबिक है।

द वायर जैसे संस्थान इस फिल्म को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से जोड़कर पेश कर रहे हैं और इसे ‘हिंदू राष्ट्र’ के लिए ट्रिब्यूट बताकर इस पर तंज कस रहे हैं। द क्विंट भी इस सूची में पीछे नहीं हैं। ट्रेलर देखकर लंबा चौड़ा पोस्ट लिखने वाला ये संस्थान अब फिल्म आने के बाद इसमें मौजूद गीत ‘मॉय भवानी से लेकर शंकरा रे शंकरा’ से भी आहत है।

गौरतलब है कि, बीते शुक्रवार को बड़े पर्दे पर आ चुकी इस फिल्म ने शरुआत में ही 16 करोड़ की कमाई कर ली है। जबकि उसी दिन आई छपाक मात्र 4,75 करोड़ की कमाई कर पाई। लेकिन बता दें, 10 जनवरी को तानाजी के साथ पर्दे पर आई फिल्म छपाक फिल्म किन्हीं भी मायनों में कम नहीं है। ये फिल्म एक एसिड सर्वाइवर की कहानी है। जिसने हार मानकर चुप बैठने से बेहतर समाज में बदलाव लाने को समझा और सब के लिए प्रेरणा बनी। दोनों फिल्मों की स्टोरी लाइन बिलकुल अलग है और काबिल-ए-तारीफ है। लेकिन, मुमकिन है फिल्म में लक्ष्मी अग्रवाल का किरदार निभाने वाली दीपिका पादुकोण के विवादों में आने के कारण फिल्म की कमाई पर असर पड़ा।

शवयात्रा में भी नहीं थी राम नाम लेने की इजाजत, Tanhaji ने बताया औरंगज़ेब कितना ‘महान’

तानाजी की वीरता से वामपंथी पोर्टल मूर्छित, खुन्नस में देश के अस्तित्व को ही नकारा

Tanhaji से आहत वामपंथी मीडिया: मजहबी वीरों पर रेटिंग देने वाला हिंदू शासकों की शौर्य-कथा पर बिलबिलाया

CM केजरीवाल की तुलना नपुंसक से! चुनाव से एक महीने पहले शशि थरूर ने क्यों की ऐसी बात?

राजधानी दिल्ली में 8 फरवरी को मतदान होने वाला है। इसको लेकर सियासी माहौल गर्माया हुआ है। इस बीच कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखे हमले करते हुए कहा कि वो ‘बगैर जिम्मेदारी का सत्ता’ (power without responsibility) चाहते हैं।

उन्होंने यह बात एक इंटरव्यू के दौरान कही। उनसे जब दिल्ली चुनाव और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर अरविंद केजरीवाल के रवैये को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर संशोधित नागरिकता अधिनियम के खिलाफ मजबूत रुख नहीं अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री कानून के समर्थक और विरोधियों दोनों को अपने पक्ष में करना चाहते थे। 

थरूर ने कहा कि केजरीवाल शायद नागरिकता संशोधन कानून के समर्थक और विरोधी दोनों लोगों को अपनी तरफ चाहते हैं, इसलिए उन्होंने इस पर कोई कड़ा रुख नहीं अपनाया। वो दोनों लोगों को अपनी तरफ करके वोट पाना चाहते हैं। आगे थरूर ने कहा कि केजरीवाल ने CAA और NRC को हटाने वाले बयान दिए हैं लेकिन उन्होंने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। 

उन्होंने केजरीवाल पर तीखे हमले करते हुए कहा, “केजरीवाल ने अपने राज्य में हुई हिंसा के पीड़ितों के साथ वो सहानुभूति भी नहीं दिखाई, जो कि लोग एक मुख्यमंत्री से अपेक्षा रखते हैं। अगर किसी राज्य में छात्रों के साथ इस तरह की हिंसा होती तो मुख्यमंत्री जरूर उनसे मिलने जाते और सहानुभूति जताते। असल में केजरीवाल ‘जिम्मेदारी के बिना सत्ता’ चाहते हैं, जैसा कि नपुंसक हमेशा से चाहते हैं।”

थरूर के इस बयान पर उनकी काफी फजीहत हुई। जिसके बाद उन्होंने बिना ‘जिम्मेदारी के सत्ता’ का इस्तेमाल करने के लिए माफी माँगी है। उन्होंने इसे ब्रटिश पॉलिटिक्स का पुराना लाइन बताते हुए कहा कि हाल ही में इसका इस्तेमाल टॉम स्टॉपर्ड ने किया था। थरूर ने कहा कि इसका इस्तेमाल अनुचित था और वो अपने इस बयान को वापस लेते हैं।  

आश्चर्य की बात यह है कि थरूर ने अपने ‘बगैर जिम्मेदारी की सत्ता’ के लिए तो माफी माँगी लेकिन नपुंसक शब्द के लिए माफी नहीं माँगी। लोग कयास यह लगा रहे हैं कि शायद ‘बगैर जिम्मेदारी की सत्ता’ पर थरूर ने इसलिए माफी माँग ली होगी, क्योंकि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर भी ‘बिना जिम्मेदारी के सत्ता का सुख भोगने’ का आरोप लगाया जाता रहा है। अब कॉन्ग्रेस नेता से नपुंसक शब्द के लिए भी माफी माँगने की माँग की जा रही है।

JNU हिंसा: लेफ्ट की पोल खोलते हुए ABVP ने जारी किए 8 वीडियो, दिखी CPI के बड़े नेता की बेटी

जेएनयू में भड़की हिंसा के बाद वामपंथी संगठनों ने मुखर होकर एबीवीपी कार्यकर्ताओं को पूरी घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया। हालाँकि, इस दौरान कई उपलब्ध साक्ष्यों ने लेफ्ट के दावों को खारिज किया। लेकिन, फिर भी सिर्फ़ और सिर्फ़ एबीवीपी पर आरोप मढ़े जाते रहे। इसी बीच अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कल 13 जनवरी को एबीवीपी ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जहाँ संगठन ने हिंसा में शामिल वामपंथ की परतों को सबूतों सहित खोलकर रख दिया।

कल प्रेस वार्ता में न केवल एबीवीपी ने लेफ्ट को 5 जनवरी की हिंसा के लिए उत्तरदायी बताया। बल्कि एक साथ 8 वीडियो जारी कर लेफ्ट का पर्दाफाश भी किया। जानकारी के अनुसार इन वीडियो में लेफ्ट कार्यकर्ताओं को स्पष्ट रूप से एबीवीपी कार्यकर्ताओं को मारते देखा जा सकता है। साथ ही उन लोगों को भी साफ देखा जा सकता है, जिनके नाम पुलिस ने हिंसा के मद्देनजर लिए। बता दें, पत्रकारों से बात करते हुए एबीवीपी नेताओं ने मामले में विस्तार से जाँच की माँग उठाई।

गौरतलब है कि इस कॉन्फ्रेंस में एक ओर जहाँ एबीवीपी के प्रदेश सचिव सिद्धार्थ यादव, वीडियो में सीपीआई नेता डी. राजा की बेटी अपराजिता के हाथ में डंडे पर ध्यान सबका आकर्षित करवाते दिखे। वहीं, अपराजिता की मां और सीपीआई लीडर ऐनी राजा ने कहा कि एबीवीपी जेएनयू कैंपस में हुए हमले से ध्यान हटाने के लिए इस तरह की बात कर रही है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता सिद्धार्थ यादव ने कहा कि लेफ्ट विंग के ऐक्टिविस्टिस और छात्र विडियो में मफलर पहने हुए रॉड और डंडे इकट्ठे करते दिख रहे हैं।

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एक अन्य वीडियो में आइशी घोष और जेएनयू स्टूडेंट यूनियन की पूर्व संयुक्त सचिव अमुथा जयदीप डंडे लेकर पेरियार हॉस्टल में जाती दिख रही हैं। वहीं, दूसरे वीडियो में वामपंथी प्रोफेसर बीएस बडोला को सुरक्षाकर्मियों को धमकी देते देखा जा सकता है। यहाँ साफ कर दें कि एबीवीपी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक बीएस बडोली वहीं प्रोफेसर हैं, जिन्होंने लेफ्ट गुंडों को परिसर में घुसाने में मदद की थी।

इसके अलवा जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष गीता कुमारी को नकाबपोशों के साथ बैठा देखा जा सकता है और चुनचुनकुमार को हाथ में डंडा लेकर छात्रों को दौड़ाते, हमला करते देखा जा सकता है।

बता दें कि एबीवीपी ने इस वार्ता में बताया कि जेएनयू का माहौल 28 अक्टूबर से ही तनावपूर्ण था। संगठन का आरोप है कि वामपंथियों ने छात्रों की भावनाओं को भड़काया, उनका दुरुपयोग किया। लेकिन जब छात्र उनके झाँसे में ज्यादा दिन नहीं फँसे रहे तो उन्होंने हिंसा का प्रयोग किया और विश्वविद्यालय में सभी शैक्षणिक गतिविधियों को बाधित किया। एबीवीपी का कहना है कि जेएनयू में पिछले 2 महीने से कक्षाएँ नहीं चल रहीं थी। वामपंथी परीक्षा भी नहीं होने दे रहे थे। ऐसे में अब पंजीकरण करने से रोकने के लिए छात्रों पर भी हमला कर दिया।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का आरोप है कि वामपंथी छात्र उन वामपंथी प्रोफेसरों के निर्देशों पर ये सब कर रहे हैं, जो राजनीति से प्रेरित हैं और अपनी भयानक राजनीति खेलने के लिए ऐसा कर रहे हैं।

यहाँ स्पष्ट कर दें कि एबीवीपी ने पुलिस को सभी वीडियो साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए हैं। साथ ही 28 अक्टूबर से शुरू होने वाली घटनाों की श्रृंखला की निष्पक्ष और विस्तृत जाँच की माँग की है।

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रिपब्लिक के पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की कर चुकी है वामपंथियों को कोचिंग देने वाली ‘इंडिया टुडे’ की तनुश्री

मकर संक्रांति: जीवन की गतिशीलता का विज्ञान, चरम बोध और अप्रतिम आनंद का उत्सव

‘मकर संक्रांति’ का त्यौहार वैसे तो दही-चूड़ा, लाई, गुड़ और तिल की मिठाइयों और पतंगबाजी के भक्काटे, अगर आप गुजरात निकल गए हैं तो ‘काए पो छे’ के शोर के लिए मशहूर है। हो सकता है, आप खो भी गए हों कि आख़िरी बार कब आपने लम्बे नख से किसी की पतंग काटी थी। बनारस में कटी पतंग के साथ ‘भक्काटे’ का शोर बच्चों के लिए तो महादेव की डमरू से गूँजा अनहद नाद ही है। वहाँ तो हर शरारत को महादेव से जोड़कर बच निकलने का चलन है। बड़े कितना भी डांटे लेकिन मकर संक्रांति जिसे बनारस में खिचड़ी भी कहते हैं बच्चों के लिए ‘पतंग उत्सव’ ही हो जाता है। गुजरात में तो पतंगबाजी पूरे परिवार के लिए प्रेम का उत्सव भी हो जाता है।

भारत की सांस्कृतिक विरासत यूँ ही इतनी विविधताओं से आच्छादित नहीं है। इन सबके पीछे छिपा है जीवन का सनातन सिद्धांत। भारत की इस अति प्राचीन धरा पर हर कार्य से पहले उसके सफलतापूर्वक सम्पन्न होने की मंगल कामना का विधान है। और, पूरा होने के बाद उत्सवों का दौर अर्थात जीवन के अप्रतिम आनन्द का भोग, तत्पश्चात ही अगले कार्य की तैयारी। मेहनत पहले और आनंद बाद में, भागवत गीता के शब्दों में कहा जाए तो कर्म पहले और फल बाद में, इस तरह आनंद/मंगल/ख़ुशहाली और कर्म का चक्र निरंतर चलता रहता है।

आम तौर पर उत्तर भारत में 14 जनवरी को मकर संक्रांति और उसके एक दिन पहले लोहड़ी मनाया जाता है। लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार भारतीय त्योहारों के पीछे एक विज्ञान है। उसी के अनुसार हर त्यौहार की तिथि एक लम्बी-चौड़ी गड़ना के उपरांत ही तय होती है। तो इस बार मकर संक्रांति के लिए कौन सी तिथि तय है और क्यों? इसे जान लेते हैं। शास्त्रों में सूर्य के गोचर को संक्रांति कहा जाता है। कहते हैं, मकर संक्रांति से अग्नि तत्त्व की शुरुआत होती है और कर्क संक्रांति से जल तत्त्व की। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तराय़ण में प्रवेश करते हैं। सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। और इस वर्ष ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, सूर्य, मकर राशि में 14 जनवरी 2020 की रात 02:07 बजे प्रवेश करेगा। फलस्वरूप, मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी।

आज जब वामपंथी प्रकोप से हमारे सभी पर्व त्यौहार उनके विषवमन का शिकार होते जा रहे हैं। ऐसे में अपनी भावी पीढ़ियों को हर त्यौहार की न सिर्फ ऐतिहासिकता बल्कि परंपरा और उसके पीछे की गूढ़ वैज्ञानिकता को भी समझाना ज़रूरी हो जाता है ताकि विषैले वामपंथ की हर विषबेल को काटा जा सके।

ऐसे में यह समझना ज़रूरी है कि लेख के शुरुआत में मकर संक्रांति का जो सामान्य परिचय दिया गया है तो क्या मकर संक्रांति का मतलब इतना ही है? चलिए इसी बहाने मकर संक्रांति के पीछे छिपे गहरे रहस्यों पर भी प्रकाश डालता हूँ। किस तरह मकर संक्रांति का पर्व ब्रह्मांडीय और मानव ज्यामिति की एक गहरी समझ पर आधारित है। मकर संक्रांति फ़सल कटाई के उपरांत आनंद का उत्सव भी है। मकर संक्रांति को फ़सलों से जुड़े त्यौहार या पर्व के रूप में भी बहुतायत कृषक परिवारों में जाना व पहचाना जाता है।

लोकपर्व मकर संक्रांति

दरअसल, यही वह समय है, जब फ़सल तैयार हो चुकी है और कृषि प्रधान देश का कृषक समाज उसी की ख़ुशी व उत्सव मना रहे होते हैं। इस दिन हम हर उस चीज के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं, जिसने खेती करने व फ़सल उगाने में मदद की है। कृषि से जुड़े संसाधनों व पशुओं का भी जिनका खेती में बड़ा योगदान होता है। इन सबसे भी परे, इस त्यौहार का खगोलीय और आध्यात्मिक महत्व ज़्यादा है।

‘मकर’ का अर्थ है शीतकालीन समय अर्थात ऐसा समय जब सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे नीचे होता है। और ‘संक्रांति’ का अर्थ है गति। मकर संक्रांति के दिन राशिचक्र में एक बड़ा बदलाव आता है। इस खगोलीय परिवर्तन से जो नए बदलाव होते हैं उन्हें हम धरती पर देख और महसूस कर सकते हैं। ये समय आध्यात्मिक साधना के लिए भी महत्वपूर्ण है। तमाम योगी, साधक एवं श्रद्धालु इस अवसर का उपयोग अपनी आत्मिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए करते हैं। सनातन परंपरा में महाकुम्भ, कुम्भ, अर्ध कुम्भ और मकर संक्रांति के स्नान का भी बड़ा महात्म्य है।इसलिए मकर संक्रांति पर खासतौर से गंगा स्नान करने को श्रद्धालु माँ गंगा के पावन तट पर उमड़ पड़ते हैं फिर चाहे वो हरिद्वार हो, संगम तट प्रयागराज या मोक्षदायिनी काशी सभी जगह भक्तों की भीड़ देखी जा सकती है।

वैसे तो साल भर में 12 संक्रान्तियाँ होती हैं। पर इनमें से दो संक्रातियों का विशेष महत्व है। पहली मकर संक्रांति और दूसरी, इससे बिल्कुल उलट, जून महीने में होने वाली मेष संक्रांति। इन दोनों के बीच में कई और संक्रान्तियाँ होती हैं। हर बार जब-जब राशि चक्र बदलता है तो उसे संक्रांति कहते हैं।

संक्रांति शब्द का मतलब हमें पृथ्वी की गतिशीलता के बारे में याद दिलाना है, और यह एहसास कराना है कि हमारा जीवन इसी गतिशीलता की देन है और इसी से पोषित और संवर्धित भी। कभी सोचा है आपने अगर यह गति रुक जाए तो क्या होगा? अगर ऐसा हुआ तो जीवन संचालन से जुड़ा हर आयाम ठहर जाएगा।

हर 22 दिसंबर को अयनांत (Solstice) होता है। सूर्य के संदर्भ में अगर कहूँ तो इस दिन पृथ्वी का झुकाव सूर्य की तरफ़ सबसे ज़्यादा होता है। फिर इस दिन के बाद से गति उत्तर की ओर बढ़ने लगती है। फलस्वरूप, धरती पर भौगोलिक परिवर्तन बढ़ जाता है। हर चीज़ बदलनी शुरू हो जाती है। यही गतिशीलता ही है, जो जीवन का आधार बनी। जीवन की प्रक्रिया, आदि और अंत भी इसी गतिशीलता की उपज है।

जब बात इस गतिशीलता के पीछे के कारणों को जानने की आएगी तो आदिदेव महादेव शिव ‘शंकर’ की विराटता और अनश्वरता की बात आएगी। शिवोहम की बात आएगी। इस चराचर ब्रह्माण्ड के पीछे जो है, वह है शिव। शिव अर्थात वह जो नहीं है। जो नहीं है, वही पूर्ण अचल है। कहा जाता है निश्चलता ही गति का आधार और मूल भी है। बात पहेली सी लग सकती है, इसे आम भाषा में समझाता हूँ।

जब कोई इंसान अपने भीतर की स्थिरता से संबंध बना लेता है, तभी वह गतिशीलता का आनंद ले सकता है। अन्यथा इंसान, जीवन की गतिशीलता से डर जाता है। मनुष्य के जीवन में आने वाला हर बदलाव या किसी भी तरह का परिवर्तन उसके लिए अक्सर दुःख या पीड़ा का कारण हो जाता है।

आज इस भागती-दौड़ती दुनिया का तथाकथित आधुनिक जीवन ही ऐसा हो चुका है। जिसके हर बदलाव में पीड़ा निहित है। आज जब भी बचपन एक तनाव बन चुका है, किशोरावस्था या युवावस्था उससे भी बड़ा दुख। प्रौढ़ावस्था असहनीय है। बुढ़ापा डरा और सकुचा-सहमा हुआ और मृत्यु या जीवन का अंत किसी घोर आतंक या ख़ौफ़ से कम नहीं है। आज पैदा होने से लेकर मृत्यु पर्यन्त जीवन के हर स्तर या चरण पर कुछ न कुछ समस्या है।

लोकपर्व मकर संक्रांति

वह इसलिए है, क्योंकि इंसान को हर बदलाव से दिक्कत है। ऐसा इसलिए है कि, इन्सान यह स्वीकार करने को ही तैयार नहीं कि जीवन की असली प्रकृति ही बदलाव है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। सदगुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं, “आप गतिशीलता का तभी आनंद ले पाएँगे या उत्सव मना पाएँगे, जब आपका एक पैर स्थिरता में दृढ़ता से जमा होगा। और दूसरा गतिशील।” मकर संक्रांति का पर्व इस बात का भी उद्घोष है कि गतिशीलता का उत्सव मनाना तभी संभव है, जब आपको अपने भीतर स्थिरता का एहसास हो।

मकर संक्रांति के बाद से सर्दी धीरे-धारे कम होने लगती है। इस तथ्य से तो आप परिचित ही हैं कि हम सभी सौर ऊर्जा से संचालित हैं। तो मकर संक्रांति का महत्व ये समझने में भी है कि हमारे जीवन का स्रोत कहाँ है? इस ग्रह पर व्याप्त हर एक पौधा, पेड़, कीट, पतंगा, कीड़ा, जानवर, पशु-पक्षी, पुरुष, महिला, बच्चा, हर प्राणी सौर ऊर्जा से संचालित होता है। सौर ऊर्जा कोई नई तकनीक नहीं है। हम सभी सौर ऊर्जा से ही संचालित हैं, सौर ऊर्जा धरती पर जीवन के आरम्भ और उत्कर्ष का आधार भी है।

सदगुरु जग्गी वासुदेव का मकर संक्रांति को लेकर कहना है कि भारतीय संस्कृति में हम साल के इस नए पड़ाव का, जब हमारे पास सर्वाधिक सौर ऊर्जा होती है, हम इसे ‘मकर संक्रांति’ के रूप में मनाते हैं। इसलिए हम सूरज का स्वागत करते हैं। जैसे-जैसे हम हिमालय से दूर जाते हैं। उन जगहों पर आज से ही सूर्य की प्रचंडता बढ़ने लगती है। लोग ग्रीष्म ऋतु के आगमन की आहट पा परेशान होने लगते हैं। उनकी बढ़ती परेशानी की वज़ह ग्लोबल वार्मिंग भी है। आने वाली पीढ़ियों के लिए ज़रूरत है एक ऐसा माहौल बनाने की, जहाँ हम अपने जीवन के स्रोत का अधिकतम लाभ उठा सकें। ये त्यौहार हमें ये भी याद दिलाते हैं कि हमें अपने वर्तमान और भविष्य को पूरी चैतन्यता और जागरूकता के साथ गढ़ने की ज़रूरत है।

यदि आप चाहते हैं कि इस देश की भावी पीढ़ियाँ आने वाली गर्मी का स्वागत करने एवं आनंद लेने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम हो, तो यह तभी संभव है जब हम प्रकृति के साथ एक अनुकूलन पैदा करें। धरती, वनस्पतियों, जल संसाधनों से समृद्ध और मिट्टी में पानी को सोखने में सक्षम हो। तभी हम सही मायने में मकर संक्रांति का जश्न मना सकते हैं।