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Pak की तरह भारत के भी टुकड़े हो जाएँगे: बच्चों की मौत पर घिरे गहलोत का CAA पर प्रलाप

कोटा के एक सरकारी अस्पताल में सौ से अधिक बच्चों की मौत को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से जोड़ चुके राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने फिर से विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि CAA वापस नहीं लिया गया तो देश के टुकड़े हो जाएँगे। उन्होंने यह बात शुक्रवार (जनवरी 3, 2020) को अपने गृहनगर जोधपुर में कही। उसी दिन यहॉं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सीएए के समर्थन में एक रैली को संबोधित किया था।

एक ही दिन जिले में मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के होने के कारण सियासी पारा वैसे ही गर्म था। इस दौरान नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर निशाना साधा। शाह ने आक्रामक रुख दिखाते हुए विपक्ष को चेताया। कहा कि विपक्षी पार्टियाँ एक साथ मिल कर जितनी अफवाहें फैलानी है फैला ले, भाजपा घर-घर जाकर लोगों को सीएए के फायदों के बारे में बताएगी। इससे एक इंच पीछे नहीं हटेगी।

वहीं गहलोत ने सीएए और एनआरसी को लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर बने मुल्क कभी भी एक नहीं रह पाते हैं। गहलोत ने केंद्र सरकार पर हिन्दू राष्ट्र की विचारधारा को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया और चेताया कि आगे चल कर ये काफ़ी घातक सिद्ध होगा। उन्होंने उदाहरण के रूप में पाकिस्तान और रूस का नाम गिनाया। मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि कुछ फिरकापरस्त लोगों ने पाकिस्तान तो बना लिया, लेकिन बाद में उसके दो टुकड़े हो गए।

गहलोत और शाह के बयान: ‘दैनिक भास्कर’ के जोधपुर संस्करण में प्रकाशित ख़बर

उधर, अमित शाह ने जोधपुर में राज्य की सत्ताधारी पार्टी कॉन्ग्रेस को घेरा। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन दोनों को सीएए पढ़ना चाहिए। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि अगर उन दोनों को क़ानून समझ में नहीं आते है तो वो इसका इटालियन में अनुवाद कराने को भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भारत पर जितना उनका हक़ है, उतना ही पीड़ित शरणार्थियों का है। उन्होंने याद दिलाया कि 2005 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने राजस्थान में 13, 000 शरणार्थियों को नागरिकता दी थी।

इससे पहले गहलोत कोटा में बच्चों की मौत को भी नागरिकता संशोधन कानून से जोड़ चुके हैं। 2 जनवरी को उन्होंने कहा था, “सीएए के खिलाफ पूरे देश में जो माहौल बना हुआ है, उससे ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। मैं पहले ही कह चुका हूॅं इस साल शिशुओं की मौत के आँकड़ों में पिछले कुछ सालों की तुलना में काफी कमी आई है।” राजस्थान के कोटा के जेके लोन अस्पताल में दिसंबर से अब तक 105 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस मामले में लगातार गहलोत सरकार की लापरवाही और असंवदेनशीलता सामने आ रही है। बजट की कमी का रोना रोने वाले राज्य के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के उलट बयान देते हुए मंत्री प्रताप सिंह ने बताया कि 6 करोड़ रुपए जेके लोन अस्पताल के पास पड़े रह गए।

इस बीच, सोनिया गाँधी ने उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को हालात का जायजा लेने कोटा भेजा। वहाँ स्थिति देखने के पास पायलट ने कहा कि राज्य सरकार को कुछ और सहानुभूति के साथ कार्य करना चाहिए था। पायलट का मानना है कि गहलोत सरकार ने स्थिति के प्रति उतनी संवेदनशीलता नहीं दिखाई।

सचिन पायलट ने अपनी ही सरकार के लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि एक वर्ष से भी अधिक तक सत्ता में रहने के बाद पूर्ववर्ती सरकारों पर इल्जाम लगाने का कोई तुक नहीं बनता है। बकौल पायलट, सबकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उधर, गहलोत ने जोधपुर में बच्चों की मौत के अलावा हर विषय पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आज बिखरने की कगार पर है, उसी तरह भारत में हिन्दू राष्ट्र की विचारधारा को आगे बढ़ाना भी विनाशकारी सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह को सीएए को वापस लेने पर विचार करना चाहिए।

सचिन पायलट के बयान को कई लोग राजस्थान में कॉन्ग्रेस के आंतरिक कलह से जोड़ कर भी देख रहे हैं। उपमुख्यमंत्री पायलट राजस्थान कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। पिछले दिनों वो दिल्ली में थे, जहाँ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कोटा में बच्चों की मौत को लेकर नाराज़गी जताई। इसके बाद उन्होंने कोटा पहुँच कर पीड़ित परिजनों से मुलाक़ात की। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की पहल के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम भी सक्रिय है।

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मंदिर में तोड़फोड़, हिंदुओं के घरों को जलाया: मुस्लिमों की भीड़ का कहर, देखती रही पुलिस

पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले में मुस्लिमों की एक बड़ी भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया। एक मुस्लिम दुकानदार की ‘अप्राकृतिक मृत्यु’ के बाद मुस्लिमों ने पूरे इलाक़े में आगजनी की और दंगे किए। मारा गया दुकानदार एक महिला के यौन शोषण का आरोपित था। आसपास के क्षेत्रों में इंटरनेट सर्विस सस्पेंड कर दिया गया। मुस्लिमों ने हिन्दू बहुल इलाक़े में तोड़फोड़ मचाई, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में धारा-144 लागू कर दिया गया। मृतक का नाम असदुल सलाम है, जो रोजमर्रा की चीजें बेचा करता था। इसी दौरान उसने एक हिन्दू महिला ग्राहक के साथ बदतमीजी की।

उसने उस महिला के साथ दुर्व्यवहार किया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में रेप की भी बात कही जा रही है, जिसकी पुष्टि नहीं हुई है। दत्तपुकुर के लोकल क्लब प्रगति संघ के मेले में सामान बेच रहे असदुल की शिकायत क्लब वालों से की गई। मुस्लिमों का आरोप है कि क्लब वालों ने पहले तो उसे खूब मारा-पीटा और उसके बाद उसका मृत शरीर लटकता हुआ मिला। क्लब का कहना है कि असदुल ने आत्महत्या की। मुस्लिम ये मानने को तैयार नहीं हैं। जैसे ही असदुल की मौत की ख़बर फैली, हज़ारों की संख्या में मुस्लिम भीड़ निकल आई और उन्होंने आगजनी शुरू कर दी

सबसे पहले तो वो क्लब में घुस गए और चीजों को तहस-नहस कर डाला। उन्होंने अंदर रखे फर्नीचर और अन्य वस्तुओं को पटक कर तोड़ डाला। आधे दंगाई मुस्लिम क्लब के अंदर तोड़फोड़ मचाने में व्यस्त थे, वहीं बाकी के मुस्लिमों ने बाहर बैरिकेड बनाया हुआ था ताकि पुलिस को क्लब के अंदर घुसने से रोका जा सके। मुस्लिमों ने वहाँ कई दुकानों को तहस-नहस कर दिया। पश्चिम बंगाल पुलिस खड़े होकर ये सब तमाशा देखती रही। इतने पर भी मुस्लिमों का गुस्सा शांत नहीं हुआ तो वो हिन्दू बहुल इलाक़े में घुस गए।

हिन्दुओं के कई घरों व दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। कई हिन्दुओं की गाड़ियों और अन्य सम्पत्तियों को आग के हवाले कर दिया गया। रास्ते में पड़ने वाले एटीएम, इलेक्ट्रिक पोस्ट्स और स्ट्रीट लाइट्स को भी तोड़ डाला गया। उत्पाती मुस्लिम भीड़ ने रास्ते में जैसे ही एक मंदिर को देखा, वो वहाँ घुस गए। उन्होंने मंदिर में जम कर तोड़फोड़ मचाई। इसके बाद उन्होंने रेल पटरियों को जाम कर दिया, जिससे इलाक़े में लोकल ट्रेनों के परिचालन में बाधा आई। हज़ारों रेलयात्री घटों तक फँसे रहे।

इतने पर भी मुस्लिम नहीं थमे। उन्होंने डंडे लेकर हिंसा शुरू कर दी। जम कर पत्थरबाजी की गई। वो अपने घरों में से बम लेकर भी आए थे। कई दिशाओं से आ रहे बमों का निशाना पुलिस अधिकारियों को भी बनाया गया। अंत में अतिरिक्त पुलिस बल बुला कर लाठीचार्ज किया गया और आँसू गैस के गोले छोड़े गए, जिसके बाद स्थिति नियंत्रित हुई। असदुल की लाश को क्लब से हटाया गया। मीडिया ने इस ख़बर को छिपा लिया लेकिन स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पीड़ा बताई। इसी इलाक़े में सीएए के विरोध में भी दंगा हुआ था।

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जम्मू-कश्मीर में वहाँ के मुस्लिमों ने ईरान के जनरल सुलेमानी के मारे जाने के जाने ख़िलाफ़ रैली निकाली। बता दें कि सुलेमानी को अमेरिका ने बग़दाद में मार गिराया था। हज़ारों मुस्लिमों ने अमेरिका और इजरायल के ख़िलाफ़ भड़काऊ नारेबाजी करते हुए सुलेमानी के मारे जाने पर रोष जताया। शुक्रवार (जनवरी 3, 2020) को जुमे की नमाज के कारण घाटी में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी थी। इसके बीच कई शिया बहुल इलाक़ों से लोग इस रैली में शिरकत करने पहुँचे। लद्दाख के कारगिल में हुए इस विरोध-प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित मुस्लिमों ने अमेरिका को भला-बुरा कहा।

जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में हज़ारों की संख्या में मुस्लिमों ने निकल कर जनरल सुलेमानी की मौत के ख़िलाफ़ अपना आक्रोश प्रदर्शित किया। मुस्लिमों ने ‘अल्लाहु अकबर’ जैसे नारे लगाए। वो सभी सुलेमानी के बड़े-बड़े पोस्टर्स अपने हाथों में लिए हुए थे। प्रदर्शनकारियों के नेता ने इस दौरान मुस्लिमों की भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा:

“हम यहाँ अपने महान नेता जनरल सुलेमानी को श्रद्धांजलि देने आए हैं। हम क़ासिम सुलेमानी के प्रति अपने प्यार से पूरी दुनिया को वाकिफ कराना चाहते हैं। इसीलिए, हम सड़कों पर उतरे हैं। क़ासिम सुलेमानी एक शहीद हैं। उन्हें जिस तरह से आतंकवादियों ने क्रूर तरीके से मार डाला, उसके लिए हम अमेरिका की निंदा करते हैं। हमारे दिलों का शहजादा चला गया, शहीद हो गया।”

ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि किस प्रकार से मुस्लिम भीड़ आक्रामक नारेबाजी करते हुए जनरल सुलेमानी की मौत के ख़िलाफ़ अपना आक्रोश दिखा रही है। उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया है कि सुलेमानी पर निर्दोष लोगों की मौत की सनक सवार थी और उसने दिल्ली में भी आतंकी साज़िश को अंजाम दिया था। फ्लोरिडा में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दिल्ली में हुई आतंकी घटनाओं के पीछे भी सुलेमानी का हाथ रहा है। उसने लंदन में भी आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया था।

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CAA पर ‘पॉलिटिक्स’ करने पहुँचीं प्रियंका गाँधी, आपस में ही लड़ गए कॉन्ग्रेसी: देखें Video

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के विरोध के नाम पर देश के कई हिस्सों में हिंसा की गई। आगजनी, पत्थरबाज़ी, पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों पर जानलेवा हमले किए गए। मेरठ में तो पूरी की पूरी पुलिस टीम (30 पुलिसकर्मी) को एक दुकान में बँधक बनाकर ज़िंदा जला देने की ख़ौफनाक वारदात को अंजाम देने की कोशिश की गई। दंगाइयों ने तो दुकान के बाहर आग लगाकर पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलने के लिए छोड़ ही दिया था, वो तो पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी के चलते वे बाल-बाल बच गए।

इस हिंसक भीड़ में शामिल लोगों से लगाव दिखाने का कॉन्ग्रेस और उसकी महासचिव प्रियंका गाँधी कोई मौका नहीं छोड़ रहीं। इसी क्रम में वे शनिवार को हिंसा में जख्मी लोगों और मृतक के परिजन से मिलने पहुॅंचीं। वह परतापुर इलाके में गईं। यहॉं कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच पहले बहस हुई। बाद में धक्कामुक्की तक की नौबत आ गई। इस दौरान प्रियंका भी वहीं मौजूद थीं।

इससे पहले ऐसी ही अराजकता प्रियंका के लखनऊ दौरे के दौरान भी देखने को मिली थी। 28 दिसंबर 2019 को प्रियंका ने एक महिला अधिकारी पर गला दबाने का आरोप मढ़ दिया। लेकिन, अपने दावे के समर्थन में वह कोई सबूत नहीं पेश कर पाई। यहॉं तक कि कॉन्ग्रेस ने जो वीडियो शेयर किया उसमें भी प्रियंका के साथ खड़े लोग ही महिला अधिकारी के साथ धक्का-मुक्की करते नजर आए। बाद में प्रियंका गॉंधी भी गला दबाने की बात से पलट गई।

महि​ला अधिकारी अर्चना सिंह ने बाद में बताया कि कैसे प्रियंका पहले से तय रास्ते को छोड़कर दूसरे मार्ग से निकलने लगी तो अपनी ड्यूटी निभाते हुए उन्होंने उन्हें रोक कर इस संबंध में बात की। उन्होंने बताया, “इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। मैं उनकी (प्रियंका गाँधी) फ्लीट इंचार्ज थी। उनके साथ किसी ने भी अभद्रता नहीं की। मैंने सिर्फ अपनी ड्यूटी की। इस घटना के दौरान मेरे साथ धक्का-मुक्की की गई थी।”

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आतंकियों से जुड़े हो सकते हैं बंगाल पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट के तार, मालिक नूर मोहम्मद गिरफ़्तार

पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के नैहाटी में स्थित एक पटाखा फक्ट्री में आग लगने से 4 लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में फैक्ट्री के मालिक नूर हुसैन को गिरफ़्तार कर लिया है। उसके ख़िलाफ़ ‘एक्सीडेंटल मर्डर’ व अन्य धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने काफ़ी देर तक नूर हुसैन से पूछताछ की। ब्लास्ट में मारे गए चारों व्यक्ति उस पटाखा फैक्ट्री में बतौर मजदूर कार्यरत थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि धमाका इतना जबरदस्त था कि 3 किलोमीटर दूर तक आवाज सुनाई पड़ी। फैक्ट्री की छत का नामोनिशान तक मिट गया और दीवारें ढह गईं।

इतना बड़ा धमाका होने के कारण पुलिस को शक है कि फैक्ट्री में अवैध और प्रतिबंधित बम बनाए जा रहे थे। पटाखा फैक्ट्री के नाम पर बम बनाने की फैक्ट्री चलाई जा रही थी, स्थानीय लोगों ने ऐसा दावा किया है। भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने आशंका जताई कि इस फैक्ट्री का सम्बन्ध आईएसआई या अन्य आतंकी संगठनों से हो सकता है। उन्होंने कहा कि इलाक़े में कई ऐसी फैक्ट्रियाँ हैं, जहाँ पटाखों के नाम पर प्रतिबंधित बम बनाए जाते हैं। उन्होंने इन फैक्ट्रियों के टेरर लिंक की जाँच एनआईए से कराने की माँग की। फैक्ट्री में क्रूड बम बनाने जाने की सम्भावना राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी जताई है। उन्होंने इस मामले की जाँच किए जाने की बात कही।

पश्चिम बंगाल के अवैध बम फक्ट्री में भीषण ब्लास्ट

राज्यपाल ने कहा कि वो नैहाटी के मस्जिदपारा में हुए ब्लास्ट से हैरान हैं और 4 मौतों के कारण दुःखी हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए हर स्तर पर जो भी लोग जिम्मेदार हैं, उनकी पहचान होनी चाहिए। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सम्बोधित करते हुए ये बातें कही। पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कारण आतंकी गतिविधियों में इजाफा हुआ है। कोलकाता से 100 किलोमीटर दूर बर्दवान में हुए एक ब्लास्ट में कई बांग्लादेशी जिहादियों के नाम सामने आए थे। इस घटना के बाद पता चला था कि बांग्लादेशी जिहादी राज्य को नए पनाहगार के रूप में प्रयोग कर रहे हैं।

उस ब्लास्ट में इंडियन मुजाहिद्दीन के 2 आतंकी मारे गए थे और एक व्यक्ति घायल हो गया था। इस ब्लास्ट के बाद तलाशी में भारी मात्रा में हथियार बरमाद किया गया था। मृतकों का नाम शकील अहमद और स्वप्न मंडल था। वहीं घायल की पहचान अब्दुल हामिद के रूप में हुई थी। इसके बाद एनआईए ने जाँच में कई ऐसे मदरसों को अपने रडार में लिया था, जहाँ आतंकियों को पनाह दी जा रही थी और आतंकी गतिविधियाँ खुलेआम संचालित की जा रही थी।

बंगाल के मदरसों में आतंकी गतिविधियाँ चला रहे हैं बांग्लादेश के संगठन: केंद्रीय गृह मंत्रालय

मदरसे में रह रहा था अलकायदा का खूँखार आतंकी कलीमुद्दीन, ATS ने जिहाद करने से पहले धर दबोचा

जहीरुल शेख इंदौर से गिरफ्तार: JMB का यह आतंकी बर्दवान धमाके का है मुख्य आरोपित

NDTV के पत्रकार ने इमरान खान को फेक वीडियो भेज कर कराई Pak की फजीहत, रवीश ने जारी किया बयान!

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने शुक्रवार (जनवरी 3, 2019) को एक वीडियो ट्वीट किया। उस वीडियो के बारे में उन्होंने बताया कि भारत में पुलिस द्वारा अल्पसंख्यकों पर जुर्म किया जा रहा है। 1 किलो टमाटर के एवज में पाक पीएमओ के एक अधिकारी ने बताया कि जब इमरान ख़ान ये ट्वीट कर रहे थे, तब उनकी टेबल पर यूएन की एक रिपोर्ट पड़ी हुई थी। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि इमरान के कार्यकाल में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के ऊपर हो रहे मजहबी प्रताड़ना में वृद्धि हुई है इमरान ख़ान 47 पन्नों की उस रिपोर्ट को देखते ही आग बबूला हो गए और उन्होंने वीडियो ट्वीट कर दिया।

वीडियो फेक निकला। वीडियो में जिन पुलिसवालों को भारत का बता कर दिखाया गया था, उनकी वर्दी पर साफ़-साफ़ RAB लिखा था। रैब, अर्थात रैपिड एक्शन बटालियन। ये बांग्लादेश का सुरक्षा बल है। वीडियो में बंगाली भाषा भी सुनी जा सकती है। लेकिन, इमरान ने इसे यूपी का बता कर ट्वीट कर दिया। दंगाइयों के एक-एक पत्थर के बदले उनकी संपत्ति बिकवाने वाली यूपी पुलिस भला इसे कैसे बर्दाश्त कर सकती थी? यूपी पुलिस ने फैक्ट्स के साथ इमरान को आइना दिखाया। फेक वीडियो शेयर करने वाले इमरान ने फजीहत होने के बाद अपना ट्वीट डिलीट कर लिया।

अब ऑपइंडिया के ‘तीखी मिर्ची सेल’ को कुछ सूत्रों ने बताया है कि इमरान ख़ान को ये वीडियो किसी भारतीय पत्रकार ने भेजा था। सोशल मीडिया पर ये बात लीक हो गई। क्विंट, वायर और स्क्रॉल जैसे मीडिया घरानों में हड़कंप मचा कि उनके किसी बाँकुरे ने तो ऐसा नहीं किया। पाकिस्तान इससे पहले भी क्विंट की रिपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पेश कर के कुलभूषण जाधव की फाँसी की सज़ा को सही ठहरा चुका है। हालाँकि, इन तीनों ने पाया कि अभी वो इतने भी बड़े नहीं हुए हैं कि इमरान ख़ान उनका भेजा वीडियो शेयर करें।

अब पता चल रहा है कि एनडीटीवी के किसी पत्रकार ने इमरान ख़ान को ये वीडियो भेजी थी। रवीश कुमार लगातार पुलिस के कथित अत्याचार पर शो कर रहे हैं। एनडीटीवी भी दंगाइयों के घर-घर जाकर उनके माता-पिता का इंटरव्यू ले रहा है। ऐसे में एनडीटीवी के किसी पत्रकार ने ये फेक वीडियो इमरान को भेज दिया। दरअसल, ग़लती उस पत्रकार की भी नहीं है। उसे भी किसी ने ये वीडियो भेजा था और दावा किया था कि इसे व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी से पीएचडी डिग्रीधारी स्कॉलर ने सत्यापित किया है। फिर क्या था, उसने इसे इमरान को ख़ुश करने का मौक़ा समझ इसे गँवाना उचित नहीं समझा।

सूत्र बताते हैं कि इमरान ख़ान ने ‘Indian Sickulars’ नाम से एक पूरा का पूरा व्हाट्सप्प ग्रुप ही बना रखा है, जिसमें राणा अयूब, सदानंद धुमे और बरखा दत्त सरीखे पत्रकार एडमिन के रूप में उपस्थित हैं। उसी ग्रुप में एनडीटीवी के किसी पत्रकार ने उक्त वीडियो भेजा, जिसे इमरान ने ट्वीट कर दिया। अब इमरान ख़ान ने उक्त पत्रकार को खरी-खोटी सुना कर उसे ग्रुप से लात मार कर निकाल बाहर किया है, क्योंकि उसने फेक वीडियो शेयर कर के पाकिस्तान की बेइज्जती कराई। ग्रुप के एडमिन्स ने भी माना है कि जब सवाल पाकिस्तान को ख़ुश करने का आए, तब उन्हें फेक न्यूज़ से बचना चाहिए।

फेक न्यूज़ पर उस ग्रुप में पूरा डिस्कशन हुआ। इसका निष्कर्ष ये निकला कि फेक न्यूज़ को भारतीय ट्विटर हैंडल्स से ही शेयर किया जाना चाहिए। इसमें पाकिस्तान या इमरान का नाम नहीं आना चाहिए। एनडीटीवी ने भी उक्त पत्रकार को निकाल बाहर करने का फ़ैसला किया है, क्योंकि वो पाकिस्तान से वफादारी के मामले में कोई रिस्क नहीं ले सकता। उसे डर है कि अगर बात जनरल बाजवा तक पहुँची तो स्थिति बिगड़ सकती है। इसीलिए, एनडीटीवी ने उस पत्रकार को लताड़ कर बाहर कर दिया है। ऐसा भी पता चला है कि उस पत्रकार ने एनडीटीवी के एक बड़े नाम के कहने पर ये वीडियो इमरान को भेजा था।

ये पहली बार नहीं है, जब एनडीटीवी और पाकिस्तान गलबहियाँ डाले घुमते नज़र आ रहे हों। अर्नब गोस्वामी ने भी अपने शो में इसकी पुष्टि की थी। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तानी एनडीटीवी की ख़बरों और राहुल गाँधी के बयानों से विशेष प्रेम करते हैं। एनडीटीवी ने विंग कमांडर अभिनन्दन वर्तमान को लेकर भी पाकिस्तान-परस्त रवैया अपनाया था। इमरान ख़ान की पार्टी इससे पहले भी एनडीटीवी का वीडियो शेयर कर चुकी है। रवीश कुमार ने तो खुलेआम मीडिया को सलाह दे डाली थी कि भारत-पाक विवाद को कवरेज न दें, क्योंकि इससे भाजपा को चुनावी फ़ायदा होता है। इसी तरह एनडीटीवी के पत्रकार श्रीनिवासन जैन ने ननकाना साहिब पर मुस्लिम भीड़ द्वारा किए गए हमले से ज्यादा इस बात से चिंतित हैं कि कहीं इससे सीएए समर्थकों को फ़ायदा न हो जाए।


इमरान ख़ान ने बेइज्जती के बाद डिलीट किया फेक वीडियो

एनडीटीवी और पाकिस्तान के एक-दूसरे के प्रति प्रेम को देखते हुए इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि उसके ही किसी पत्रकार ने इमरान ख़ान को ये वीडियो भेजा। एनडीटीवी ने अब अपने सभी पत्रकारों के लिए ‘पाकिस्तान गाइडलाइंस’ जारी की है, जिसमें बताया गया है कि भविष्य में ऐसी गलतियों से कैसे बचना है। इस बारे में रवीश कुमार ने अपने चैनल के सभी पत्रकारों को ये सन्देश जारी किया है:

“हमारे पत्रकार ने तो इमरान ख़ान को सही वीडियो भेजा था। उसके फोन से इमरान के फोन तक पहुँचते ही वीडियो बदल गया। क्या आपको नहीं लगता कि ये भाजपा आईटी सेल की करतूत है। वो हमारे मोबाइलों में घुस चुके हैं। आपलोग टीवी मत देखिए, मोबाइल भी यूज नहीं कीजिए। भाजपा आईटी सेल वालों ने रास्ते में ही वीडियो मैसेज को पकड़ के उसे बदल दिया। क्या एक देश के प्रधानमंत्री की इस तरह बेइज्जती कराना सही है? क्या हमें हमारे प्यारे पड़ोसी से मिलजुल कर नहीं रहना चाहिए? आपलोग अपने-अपने मोबाइल फोन फोड़ डालिए क्योंकि उनमें आईटी सेल घुस चुका है। कभी-कभी तो मैं भी लिखना कुछ चाहता हूँ और लिख कुछ और देता हूँ। आईटी सेल वाले टाइपिंग के समय उँगलियों को इधर-उधर कर देते हैं। डर का माहौल है।”

एनडीटीवी को इस बात का डर है कि कहीं उसके बचे-खुचे निवेशक भी नाराज़ न हो जाएँ। इसलिए, प्रणय रॉय ने कहा है कि जल्द से जल्द पाकिस्तान और इमरान ख़ान को ख़ुश करने के लिए कुछ किया जाए, नहीं तो वित्तीय संकट से जूझ रहे चैनल को बेचने की नौबत आ सकती है। वहीं क्विंट, वायर और स्क्रॉल काफ़ी ख़ुश हैं। इमरान भी अब एनडीटीवी से उब कर इन तीनों में से किसी को पूर्ण पाकिस्तानी छत्रछाया प्रदान कर सकते हैं। रेस में तो न्यूज़लॉन्ड्री भी है लेकिन उसे अभी ‘इंटर्न’ होने के कारण ये मौक़ा नहीं दिया जा सकता। ऑपइंडिया जल्द ही आपको इस बारे में सूचित करेगा।

खोज उस क्रिएटिव डॉक्टर की, जिसने नकली पीड़ितों के हिजाब और जैकेट पर बैंडेज लगाया

हैदराबाद एनकाउंटर पर रवीश कुमार के प्राइम टाइम की स्क्रिप्ट हुई लीक, NDTV में मचा हड़कम्प

पत्रकारिता के अंतिम पैगंबर रवीश जी के अंतरात्मा की आवाज: सुप्रीम कोर्ट बेवफा है!

PM मोदी की हत्या का पोल चलाने वाले ‘वामपंथी गिरोह’ के रोहित चोपड़ा का अकाउंट सस्पेंड, लेख हटाया गया

वामपंथियों द्वारा हिन्दू धर्म और खासतौर से मोदी के प्रति उनकी घृणा छिपी नहीं है। ऐसे ही एक इसी लिबरल गिरोह का रोहित चोपड़ा अक्सर हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने का काम करता है। रोहित ने इस कार्य के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। चोपड़ा ने एक बार फिर से हिंदुओं को उकसाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर कई हिंदू विरोधी पोस्ट किए हैं।

हिंदुओं और विशेष रूप से मोदी के प्रति वामपंथी गिरोह द्वारा व्यक्त की गई घृणा किसी से छिपी नहीं है। इन्ही में से वामपंथियों का एक तथाकथित बुद्धजीवी ग्रुप ऐसा है जो सोशल मीडिया पर अक्सर फर्जी खबरें चलाता है। एक घटना सामने आई है जिसमें पीएम मोदी की अमित शाह द्वारा न सिर्फ हत्या की इच्छा व्यक्त की गई बल्कि ट्विटर पर इसके लिए एक पोल भी चलाया गया।


The Twitter poll ran by Rohit Chopra.

इस ट्वीट को रोहित चोपड़ा ने अपने ट्विटर अकाउंट ‘IndiaExplained’ पर ट्वीट किया। जिसमें यूजर को यह तय करने के साथ वोट देने के लिए कहा गया कि गृह मंत्री अमित शाह अगले प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की हत्या कैसे करेंगे? साथ ही देश के प्रधानमंत्री की हत्या की बात किया गया और पीएम मोदी की हत्या के लिए चार बेहद घृणात्मक विकल्प भी प्रस्तुत किए। अब इसके बाद आप अंदाजा लगा सकते हैं कि चोपड़ा के मन में पीएम मोदी के प्रति नफरत का ज़हर किस तरह भरा हुआ है और चोपड़ा की पीएम मोदी के प्रति यह घृणा किसी को भी परेशान कर सकती है।

चोपड़ा ने आगे अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी किया। जिसने कई लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।


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बाद में पता चला कि उसे देश की राजधानी दिल्ली स्थित थिंक-टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) ने प्रकाशित किया है। इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने न केवल तथाकथित पोल के खिलाफ, बल्कि उन्होंने यह भी बताया कि अल्ट्रा-लेफ्ट विंग फर्जी न्यूज पेडलर ओआरएफ का ही हिस्सा था। सोशल मीडिया पर लोगों की नाराजगी के बाद, ORF के अध्यक्ष समीर सरन ने कहा कि संगठन सोशल मीडिया पर ‘हेट स्पीच’ को समर्थन नहीं देता। इसलिए रोहित के लेख को हटा लिया जाएगा।

अपने अकाउंट से सोशल मीडिया पर इस तरह के नफरत फैलाने वाले पोल चलाने के बाद ट्विटर ने रोहित चोपड़ा के ट्विटर अकाउंट ‘@IndiaExplained’ को निलंबित कर दिया। इसके बाद भी अपने पर्सनल अकाउंट से रोहित का जहर फैलाना जारी रहा। अपने खुद के अकाउंट से वही पोल डाल दिया। और अकाउंट डिलीट करने की चुनौती दी।


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ORF द्वारा लेख हटा लिए जाने के बाद रोहित चोपड़ा ने फिर से इस आशय का एक ट्वीट अपने अकाउंट से किया।


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यह पहली बार नहीं है कि रोहित चोपड़ा द्वारा चलाया गया सोशल मीडिया अकाउंट विवादों में घिर गया हो। पहले भी चोपड़ा को पैरोडी अकाउंट ‘@RushdieExplains’ द्वारा सलमान रुश्दी के विचार पोस्ट करने के कारण फटकार लगी थी। चोपड़ा की यह हरकत बताती है कि यह वामपंथी गिरोह आज भी अपने तरीके को बदलने के लिए तैयार नहीं है. इसी गिरोह का रोहित चोपड़ा जो कि आपने नए प्रोफ़ाइल ‘@Indiaexplained’ के माध्यम से उसी प्रकार का हेट-स्पीच जारी रखे हुए था। बहरहाल इस ट्विटर अकाउंट को अब मोदी और शाह की हत्या के लिए कॉल करने के लिए ट्विटर द्वारा सस्पेंड कर दिया गया है।

कोटा पर कॉन्ग्रेसी मंत्री की खुली पोल: कहा- बीजेपी ने ₹1.7 करोड़ नहीं दिए, पता चला ₹6 करोड़ पड़े रह गए

कोटा के जेके लोन अस्पताल में शुक्रवार (जनवरी 3, 2020) को 2 और बच्चों की मौत हो गई। राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा भी सौ से ज्यादा बच्चों की मौत होने के बाद अस्पताल का जायजा लेने पहुॅंचे। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार की नाकामियों को छिपाने पर पूरा जोर लगाया। बावजूद उनके एक दावे की पोल खुल गई।

शर्मा ने पिछले दिनों अस्पताल की खस्ताहालत का दोष पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर मढ़ने की कोशिश की थी। कहा था कि भाजपा सरकार ने पर्याप्त पैसे नहीं दिए। उनका कहना था कि 2012 में जब कॉन्ग्रेस सत्ता में थी तो अस्पताल के लिए 5 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया गया था। लेकिन, सरकार बदल गई और उसने 5 करोड़ के बदले 1.7 करोड़ रुपए ही जारी किए। अब पता चला है कि अस्पताल के पास 6 करोड़ रुपए पड़े थे। लेकिन, इनका इस्तेमाल उपकरण वगैरह को ठीक करने के लिए नहीं किया गया।

यह बात खुद जिले के प्रभारी मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कही है। वे भी शर्मा के साथ कोटा के जेके लोन अस्पताल पहुॅंचे थे। बाद में शर्मा ने भी ट्वीट कर बताया कि अस्पताल प्रशासन के पास 6 करोड़ का पर्याप्त बजट उपलब्ध था।

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यह तथ्य सामने आने के बाद राज्य सरकार की नाकामी को छिपाने की कोशिश करते हुए दोनों मंत्री ने सारा ठीकरा मीडिया और प्रशासन के सिर फोड़ दिया। प्रताप सिंह ने कहा कि उपकरण ख़रीद की ज़िम्मेदारी डॉक्टरों और अधिकारियों की होती है। उन्होंने लापरवाही की। वहीं अस्पताल के नए अधीक्षक डॉक्टर एससी दुलारा ने बताया कि उन्होंने अब तक बैलेंस शीट नहीं देखी है, इसीलिए उन्हें ख़र्च का अंदाज़ा नहीं है।

रघु शर्मा ने अस्तपाल की जायजा लेने के बाद कहा कि बजट की कमी नहीं है। सबकुछ जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा। जबकि चंद दिन पहले ही उन्होंने वसुंधरा राजे की पूर्ववर्ती सरकार पर बजट आवंटन में पक्षपात करने का आरोप लगाया था और कहा था कि जितने बेड की अनुशंसा अशोक गहलोत के पिछले कार्यकाल में की गई थी, उतना नहीं बढ़ाया गया। बजट न होने का रोना रोने वाले रघु शर्मा और उनके साथी मंत्री प्रताप सिंह अब कह रह 6 करोड़ रुपए पड़े हुए थे। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि रुपयों की कमी के कारण मौतें हुईं तो फिर 6 करोड़ पड़े क्यों रह गए? पहले से मौजूद राशि को ख़र्च क्यों नहीं किया गया?

राजस्थान पत्रिका के कोटा संस्करण में 4 जनवरी 2020 को प्रकाशित खबर

‘राजस्थान पत्रिका’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में 533 में से 320 उपकरण ख़राब पड़े हुए हैं। अर्थात, अस्पताल में 60% से ज़्यादा उपकरण ख़राब हैं। मुख्यमंत्री कहते हैं कि बच्चों की मौत कोई ‘नई बात’ नहीं है और चिकित्सा मंत्री कहते हैं कि राजनीति की जा रही है। अगर बच्चों की मौत होगी तो बातें होंगी ही। वो अलग बात है कि मीडिया इसे गोरखपुर अथवा मुजफ्फरपुर ट्रेजडी की तरह तवज्जो नहीं दे रहा। अस्पताल के 19 वेंटिलेटर में से 14 ख़राब पड़े हैं। यानी, 73% वेंटिलेटर ख़राब अवस्था में हैं। कई ट्यूबलाइट बंद थे, पर्दे-चादर वगैरह गंदे थे और परिसर में गाय-भैंस घूम रहे थे।

स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा के दौरे के कारण अस्पताल की 6 बार सफाई की गई, सारे कपड़ों और लाइटों को बदल दिया गया। डॉक्टरों और स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही की बातें भी सामने आ रही है। लेकिन रजथान की कॉन्ग्रेस सरकार ख़ुद को पाक-साफ़ दिखाने के लिए उन पर सारा दोष मढ़ बच निकलना चाहती है।

मर गए 14 और बच्चे: कोटा के जेके लोन अस्पताल में टूटे हुए हैं ख़िड़की-दरवाजे, घूमते हैं सूअर

जिस अस्पताल में 6 साल में मरे 6646 बच्चे, वहाँ मंत्री के स्वागत में बिछा ग्रीन कारपेट

नए साल पर सबसे ज्यादा किलकारियाँ भारत में गूँजी, फिर नरगिस के मरने की परवाह क्यों करें गहलोत

कॉन्ग्रेस ने ननकाना साहिब पर हमले के वीडियो को बताया फेक, गुलाम नबी ने कहा- घटना के बारे में पता नहीं

पाकिस्तान के मुस्लिम कट्टरपंथियों ने शुक्रवार (3 जनवरी) को जुमे की नमाज के बाद सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल ननकाना साहिब गुरुद्वारे को घेर लिया। जमकर पत्थरबाज़ी की। मुस्लिम भीड़ ने सिखों को मारने-पीटने के अलावा उन्हें भगाने और ननकाना साहिब का नाम बदलकर ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा रखने की धमकी दी। इस कट्टरपंथी भीड़ का नेतृत्व मोहम्मद हसन का परिवार कर रहा था। मोहम्मद हसन वही युवक है जिससे सिख लड़की जगजीत कौर का अपहरण कर जबरन निक़ाह कराया गया था। मोहम्मद हसन के आतंकी सरगना हाफ़िज़ सईद के संगठन से जुड़े होने की भी खबर आई थी।

बता दें कि जगजीत कौर गुरुद्वारे के ग्रंथी की बेटी हैं। इस घटना से जुड़े वीडियो में यह साफ़ तौर पर दिखा कि किस तरह से मुस्लिम भीड़ ने ननकाना साहिब गुरुद्वारे को घेरा हुआ था, वहाँ उन्होंने अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाए और सिखों पर को भगा देने की बाते कही। दुनिया भर में यह वीडियो बड़ी तेज़ी से वायरल हो चुका है और इसकी कड़ी निंदा हो रही है। इस मामले में भारत सरकार ने भी बयान जारी कर पाकिस्तान से कड़ी कार्रवाई करने को कहा है।

इन सबमें हैरान कर देने वाली बात यह है कि जहाँ पूरी दुनिया इस घटना से परिचित है, वहीं कॉन्ग्रेस का मानना है कि यह वीडियो ही फेक है, इसमें कोई सच्चाई नहीं है। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजयसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आज़ाद का कहना है कि उन्हें इस घटना के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

इस पर उसी वीडियो का सन्दर्भ लेते हुए, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने चुटकी ली और कहा कि कोई वीडियो में धमकी देने वाले मुस्लिम के शब्दों (मैं आ रहा हूँ सिखों.. भागो.. अंजाम बहुत बुरा होगा.. या अल्लाह.. लाइलहाह इलल्लाह) का इतावली भाषा में अनुवाद कर दें ताकि कॉन्ग्रेस पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का सबूत माँगना बंद कर दे।

भाजपा नेता के ट्वीट के जवाब में छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल ने लिखा, “किसी भाषा में अनुवाद करने की ज़रूरत नहीं है, सब जानते हैं कि यह “संघी” भाषा है। इस भाषा में कुछ दिन पहले इंडिया गेट पर “गोली मारो..” के नारे भाजपा नेताओं द्वारा लगाए जा रहे थे। दोनों तरफ से एक जैसे झूठे वीडियो ट्वीट हो रहे हैं, एक जैसी भाषा बोली जा रही है। सभी क्रोनोलोजी समझें।”

सबसे पहले, यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि घटना का वीडियो फेक नहीं है। पत्रकार रविन्द्र रॉबिन सिंह ने कई वीडियो पोस्ट किए, जहाँ एक ही कपड़े के एक ही आदमी को पाकिस्तान में ननकाना साहिब गुरुद्वारा पर हमला करने वाली भीड़ के हिस्से के रूप में देखा गया।

नीचे दी गई पहली इमेज पत्रकार द्वारा अपलोड किए गए वीडियो का एक स्नैपशॉट है, जिसके माध्यम से ब्रेकिंग न्यूज़ पोस्ट की गई। दूसरा उस वीडियो भाजपा नेता संबित पात्रा द्वारा पोस्ट किया गया। दोनों ही वीडियो में एक ही शख़्स (मुल्ला) है जो एक ही कपड़े में है।

पत्रकार द्वारा अपलोड किए गए वीडियो का स्क्रीनशॉट

भाजपा नेता संबित पात्रा द्वारा अपलोड किए गए वीडियो का स्क्रीनशॉट

इसके अलावा, एक बात और चौंकाने वाली है कि कॉन्ग्रेस को उस सिख लड़की के हितों से कोई लेना-देना नहीं है जिसका ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन करा निक़ाह करवा दिया गया। ननकाना साहिब पर हुए हमले से जुड़े वीडियो को नकारने के साथ ही वो मोहम्मद हसन जैसे मुस्लिमों का तो बचाव कर ही रही है, साथ ही पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे ज़ुल्म से भी इनकार करती नज़र आ रही है।

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ दंगाइयों ने जब “ला इलाहा इल्लल्लाह” और “हिन्दुओं से आज़ादी” के नारे लगाए थे तब भी कॉन्ग्रेस ने चुप्पी साध रखी थी। ज़ाहिर सी बात है, ऐसा करके वो भारत के इस्लामी कट्टरपंथियों और पाकिस्तान के जिहादियों के भारत-विरोधी हरक़तों पर पर्दा डालने की जुगत में है।

इसी क्रम में, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मुझे इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं है। ननकाना साहिब सिखों के लिए एक पवित्र स्थान है और सभी धर्मों के लोग इसका सम्मान करते हैं। अगर ऐसी कोई घटना हुई है, तो हम सभी इसकी कड़ी निंदा करते हैं।”

NDTV के पत्रकार को ननकाना साहिब पर मुसलमानों के हमले से दिक्कत नहीं, CAA समर्थकों को मुद्दा मिलने की चिंता

ननकाना साहेब गुरुद्वारे पर मुस्लिमों का हमला, कहा- कोई सिख नहीं रहेगा यहाँ, नाम होगा गुलाम-ए-मुस्तफा

अगवा सिख लड़की पहुँची घर, हाफ़िज़ सईद के आतंकी संगठन के मो. हसन से करवाया गया था निकाह

कॉन्ग्रेस नेता ने शेयर की फेक तस्वीर, कहा- CAA का विरोध करने पर असम में महिला के कपड़े फाड़ रही सेना

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) पर दुष्प्रचार फैलाने के लिए कॉन्ग्रेस तमाम हथकंडे अपना रही है। सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ शेयर कर उसके नेता अफवाह फैला रहे हैं। ऐसी ही एक फोटो पिंकू गिरि ने शेयर की है। गिरि बिहार के दरभंगा जिला कॉन्ग्रेस सोशल मीडिया आईटी सेल का जिलाध्यक्ष है। उसने जो फोटो शेयर की है उसमें एक जवान महिला के साथ दुर्व्यवहार करते और उसके कपड़े पकड़ कर खींचते हुए दिख रहा है। इस फोटो को शेयर कर कॉन्ग्रेस नेता ने दावा किया कि असम में महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।

इस फोटो के बारे में कॉन्ग्रेस नेता ने दावा किया- “आज असम में ये हालत हैं तो कल यूपी और दिल्ली में भी ज़रूर नज़र आएँगे। दिल्ली में तो देश भर के कोने-कोने से आकर लोग बसे हुए हैं, वो कहाँ से अपने कागज दिखाएँगे?” कॉन्ग्रेस नेता ने सीएए के विरोध-प्रदर्शन के नाम पर भारतीय सेना को बदनाम करने का प्रयास किया। दावा किया कि असम में सेना महिलाओं के साथ बुरा व्यवहार कर रही है, क्योंकि उनके पास डाक्यूमेंट्स नहीं हैं। साथ ही कहा कि कल को दिल्ली व यूपी-बिहार के लोगों के साथ भी ऐसा ही किया जाएगा।

कॉन्ग्रेस नेता ने भारतीय सेना को किया बदनाम

लेकिन, कॉन्ग्रेस के प्रोपेगंडा की पोल तब खुल गई, जब पता चला कि ये फोटो असम का है ही नहीं। साथ ही ये फोटो भारत के किसी हिस्से का भी नहीं है। इसमें सेना की वर्दी में दिख रहे लोग भी भारतीय सेना के नहीं हैं। असल में ये फोटो 2008 का है। इसे आज से 12 साल पहले रायटर्स ने अपलोड किया था। कॉन्ग्रेस नेता ने जो फोटो शेयर कर के लोगों को डराया, वो नेपाल की राजधानी काठमांडू का है। फोटो में दिख रहे प्रदर्शनकारी भी भारतीय नहीं हैं, वो तिब्बती हैं। वे सभी काठमांडू में यूएन बिल्डिंग के पास मार्च 24, 2008 को प्रदर्शन कर रहे थे।

गोबर हैं भाजपा शासित राज्य: कॉन्ग्रेस नेता का फेसबुक पोस्ट

जब ऑपइंडिया ने कॉन्ग्रेस नेता का फेसबुक प्रोफाइल खँगाला तो पता चला कि वो फेक न्यूज़ फैलाने में माहिर है। उसने महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे से स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के शारीरिक सम्बन्ध होने की बात भी फेसबुक पर पोस्ट की थी। एक फेसबुक पोस्ट में उसने गुजरातियों को लुटेरा साबित करने का प्रयास करते हुए दावा किया कि 29 गुजराती देश का रुपया लेकर भाग चुके हैं। एक फेसबुक पोस्ट में उसने भारत का नक्शा दिखा कर दावा किया कि जहाँ-जहाँ भाजपा का राज्य है, वो राज्य गोबर हैं। फेक न्यूज़ शेयर करने और पोल खुलने के बावजूद कॉन्ग्रेस नेता ने अपना फेसबुक पोस्ट डिलीट नहीं किया।

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…16 साल पुराना मनमोहन सिंह का वो वीडियो, CAA पर भ्रम फैलाने से पहले कॉन्ग्रेस को देखना चाहिए