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मेरी नहीं तो किसी और की भी नहीं होगी… जिंदा जला देंगे: CM गहलोत के सामने फूट- फूट कर रोई छात्रा

हैदराबाद, उन्नाव… और अब जोधपुर। हैवानियत का सिलसिला टूटता नहीं दिख रहा है। राजस्थान के जोधपुर में एक छात्रा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जान बचाने की गुहार लगाई है। सीएम की जनसुवाई में पहुॅंची छात्रा अपनी पीड़ा बताते हुए रो पड़ी। कहा- मुख्यमंत्री जी मुझे बचा लो…दरिंदे मुझे जिंदा जला देंगे।

मामला जोधपुर के भोपालगढ़ थाना क्षेत्र का है। पीड़िता रविवार (नवंबर 8, 2019) को जोधपुर में सीएम अशोक गहलोत की जनसुनवाई में पहुँची थी। मुख्यमंत्री को उसने बताया कि कुछ लड़के उसे करीब 2 महीने से लगातार परेशान कर रहे हैं। आरोपितों ने खुद के नंबर वाले व्हाट्सअप पर उसकी फोटो की डीपी लगा रखी है। स्टेटस में लिख रखा है, ‘मेरी नहीं तो किसी और की भी नहीं होगी।’

मुख्यमंत्री के सामने छात्रा बिलख पड़ती है और कहती है, “वे लड़के मेरे को बोलते हैं कि मेरे से बात कर। वे ब्लैकमेल करते हैं। सोशल मीडिया में मेरी फोटो लगा देते हैं। मेरे पापा उसके घरवालों को समझाने गए तो उन पर हमला कर दिया। पापा को ज्यादा चोट पहुँची तो एमजीएम हॉस्पिटल में एडमिट कराना पड़ा। मेरे को बोलते हैं कि एफआईआर करवाई तो तेरे को जिंदा जला देंगे। एफआईआर करवाए दो महीने हो गए, पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही।”

आगे लड़की कहती है कि वह कलेक्टर से लेकर एसपी, आईजी तक के पास गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लड़की का कहना है, “इससे उन लड़कों के हौसले बुलंद हो रहे हैं और हम डर रहे हैं। हमारे घरवाले सब्जी लेने तक के लिए बाहर नहीं जाते हैं। हमलोग उनसे डर के मारे घर में बैठे हैं। मैं पढ़ नहीं पा रही हूँ। उनकी वजह से मेरी पीएमटी (प्री-मेडिकल टेस्‍ट) की पढ़ाई छूट गई है।”

जानकारी के मुताबिक सीएम गहलोत ने लड़की को ढाढस बँधाया और साथ ही वहाँ मौजूद पुलिस कमिश्नर प्रफुल्ल कुमार को बुलाकर कार्रवाई के आदेश दिए। चूँकि मामला जोधपुर ग्रामीण का था, इसलिए वहाँ के एसपी राहुल बारहट को बुलाया गया। एसपी ने बताया कि सुरपुरा खुर्द के रहने वाले कैलाश, उसके भाई भगवान और मुकेश को 6 महीने पहले गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में वे जमानत पर छूट गए।

हैदराबाद, उन्नाव, मुजफ्फरपुर जैसी वारदातों में पुलिस का लापरवाही भरा रवैया रहा है। इस मामले में भी पुलिस-प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा दिख रहा है।

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1400 साल से सुन्नी कर रहे शिया पर अत्याचार, उन्हें भी CAB में करें शामिल: अमित शाह से वसीम रिजवी

नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) को लेकर शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। पत्र में रिजवी ने माँग की है कि इस बिल में शिया समुदाय को भी शामिल किया जाए। रिजवी ने कहा है कि शिया लोगों पर तमाम देशों में जुल्म हो रहा है। उन्हें ज्यादती से बचाने के लिए केंद्र सरकार को कदम उठाना चाहिए।

पत्र में रिजवी ने कहा है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान सहित सीरिया, सऊदी अरब और कीनिया जैसे देश जहाँ सुन्नी बहुमत में है और शिया अल्पसंख्यक हैं, वहाँ उनके साथ अमानवीय कृत्य किए जा रहे हैं। शिया होने की वजह से उनकी हत्याएँ की जा रही हैं।

रिजवी ने कहा है कि शिया समाज का शोषण लगभग 1400 वर्षों से लगातार मुस्लिम बहुसंख्यक सुन्नी समाज द्वारा पूरी दुनिया में किया जा रहा है। यह आज भी जारी है। उन्होंने नागरिकता संशोधन विधेयक में दूसरे मजहब के शिया वर्ग को भी शामिल करने की अपील अमित शाह से की है। रिजवी ने कहा है कि शिया समाज को जुल्म और ज्यदती से बचाने की दृष्टि से यह न्यायसंगत होगा।

बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार (दिसंबर 9, 2019) को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश किया। इस बिल में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध शरणार्थी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। समुदाय विशेष को इसमें शामिल नहीं किया गया है। बिल के जरिए 6दशक पुराने नागरिकता कानून में संशोधन की बात है।

इस विधेयक के विरोध में पूर्वोत्तर के राज्यों में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं। कॉन्ग्रेस समेत ज्यादातर विपक्षी दाल भी इसका विरोध कर रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि धर्म के आधार पर नागरिकता भारत के संविधान और उसकी तहजीब के खिलाफ है।

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218 फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करेगी योगी सरकार, कैबिनेट में फैसला: रेप मामलों में अब जल्द मिलेगा न्याय

महिलाओं के ख़िलाफ़ लगातार हो रही हिंसक व यौन वारदातों ने निपटने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार सख्त हो उठी है। हाल ही में उन्नाव में गैंगरेप पीड़िता को जला कर मार डालने वाली घटना से पूरे देश में आक्रोश माहौल है। अदालतों में लामतों पड़े हज़ारों मामलों को देखते हुए योगी कैबिनेट ने सोमवार (दिसंबर 9, 2019) को हुई बैठक में अहम निर्णय लिया। योगी कैबिनेट ने फ़ैसला लिया कि महिलाओं व नाबालिगों के साथ होने वाले अपराध के मामलों में अपराधियों को शीध्र सज़ा दिलाने के लिए 218 फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएँगे

इनमें से 144 फ़ास्ट ट्रैक अदालतें ऐसी होंगी, जहाँ सिर्फ़ बलात्कार के मामलों की सुनवाई होगी। इससे बलात्कार के मामलों का शीघ्र निपटारा होगा और पीड़ित महिलाओं को जल्द से जल्द न्याय मिल सकेगा। नाबालिगों के साथ आए दिन होने वाले अपराध से जुड़े मामलों को जल्द से जल्द निपटाने के लिए 74 फ़ास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित की जाएँगी। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने इस सम्बन्ध में आदेश दे दिया है।

नाबालिग के साथ होने वाले अपराध के मामलों में पोस्को एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है। लखनऊ के लोक भवन में हुई कैबिनेट बैठक में ये फ़ैसले लिए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्नाव पीड़िता के परिजनों की भी सभी माँगें मान ली हैं और उन्हें हरसंभव सहायता देने का वादा किया है। महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध रोकने के लिए पुलिस को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। यूपी के क़ानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए बताया:

“उत्तर प्रदेश में 42389 पोस्को और 25749 बलात्कार के मामले अभी लंबित पड़े हुए हैं। इसके कारण राज्य सरकार ने ये बड़ा निर्णय लिया है। नए फ़ास्ट ट्रैक अदालतों के लिए जजों की भर्ती जल्द ही शुरू की जाएगी। हर कोर्ट का खर्च 75 लाख रुपए आएगा।”

इसके अलावा योगी कैबिनेट ने कई अन्य मुद्दों पर भी बैठक में अहम निर्णय लिए। राज्य के 14 शहरों में इलेक्ट्रिक एसी बसें चलाने का फ़ैसला लिया गया। अयोध्या, गोरखपुर और फ़िरोज़ाबाद नगर निगम की सीमाओं के विस्तार पर भी मुहर लगा दी गई।

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जहाँ एक तरफ सरकार शरणार्थी हिन्दुओं को भारत की नागरिकता देकर उन्हें अपना ‘घर’ देने के लिए नागरिकता संसद में संशोधन विधेयक लेकर आ रही है, वहीं दूसरी तरफ इसे लेकर दुष्प्रचार करने वालों की एक फौज तैयार हो गई है। ऐसे लोगों में न सिर्फ़ राजनेता बल्कि सेलिब्रिटी भी शामिल हैं। अरविन्द केजरीवाल के लिए चुनाव प्रचार कर चुके आम आदमी पार्टी समर्थक विशाल डडलानी ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी डाली, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगीत निर्देशक डडलानी ने नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर विवादस्पद और आपत्तिजनक टिप्पणी की है।

विशाल डडलानी ने प्याज के बढ़ते दाम और हैदराबाद में प्रीति रेड्डी के गैंगरेप व हत्या के आरोपितों के एनकाउंटर को एक ही चश्मे से देखते हुए कहा कि यह सब ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। फ़िलहाल सोनी चैनल पर प्रसारित होने वाले ‘इंडियन आइडल 11’ में जज की भूमिका निभा रहे विशाल डडलानी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा:

“लगातार हो रही बलात्कार की घटनाएँ हों या फिर हत्या की वारदातें, हो सकता है कि ये सभी पूर्व नियोजित हैं। एक बड़ी साज़िश के तहत ये सभी आपराधिक वारदातें एक ख़ास तरीके से तैयार की गई हो सकती हैं। बलात्कार और हत्या की वारदातें इसलिए कराई जा रही हैं ताकि नागरिकता संशोधन विधेयक की तरफ़ से लोगों का ध्यान हटाया जा सके। ये विधेयक हद से ज्यादा ख़तरनाक है।’

म्यूजिक डायरेक्टर विशाल डडलानी ने बलात्कार और हत्या की वारदातों को बताया पूर्व-नियोजित

विशाल डडलानी दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुए छात्र संघ चुनाव से लेकर लोकसभा और विधानसभा चुनाव तक, हर जगह आम आदमी पार्टी का प्रचार कर चुके हैं। केजरीवाल के लिए प्रचार कर चुके डडलानी को यह भी लगता है कि नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) से ध्यान हटाने के लिए बलात्कार और हत्या की वारदातें कराई जा रही हैं। ये सभी आपराधिक घटनाएँ पूर्व नियोजित हैं। इसकी साज़िश पहले ही रच ली गई थी। यह विधेयक हद से ज्यादा ख़तरनाक है।” उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अपनी आँखें खोलो और इन सभी चीजों पर सवाल खड़े करें।

उनका ये बयान अजीब है क्योंकि कुछ ही दिनों पहले तक डडलानी बलात्कारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई न करने का आरोप लगा कर मोदी सरकार पर निशाना साध रहे थे। उन्होंने कहा कि पीएम ने झूठ बोला कि उनके शासन के दौरान बलात्कारियों को महीने भर के अंदर फाँसी पर लटका दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्भया के बलात्कारी, कठुआ नाबालिग रेपकांड के दोषी और उन्नाव के आरोपित विधायक कुलदीप सेंगर सहित कई ऐसे लोग हैं, जो अभी भी ज़िंदा हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि पीएम मोदी महिलाओं की पीड़ा का इस्तेमाल कर अपना प्रोपेगेंडा चला रहे हैं।

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NRC और CAB एक ही सिक्के के पहलू, बंगाल में लागू नहीं होने दूँगी: ममता बनर्जी

6 साल की बच्ची से रेप, गला दबाकर हत्या: महिला जज ने सुनाई फाँसी की सज़ा, हत्यारे को पछतावा नहीं

राजस्थान के जयपुर के दूदू की अपर सेशन कोर्ट ने क़रीब आठ साल पहले 6 साल की बच्ची से बलात्कार के बाद बेरहमी से उसकी हत्या करने के मामले के बलात्कारी महेंद्र उर्फ़ धर्मेंद्र बैरवा को फाँसी की सज़ा सुनाई है। बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या की घटना फागी इलाक़े में हुई थी। कोर्ट ने दोषी को न सिर्फ़ फाँसी की सज़ा सुनाई बल्कि कई धाराओं के तहत उसके ऊपर 8.20 लाख रुपए का ज़ुर्माना भी लगाया। 

अपर सेशन की महिला जज शिल्पा समीर ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ़ रेयरेस्ट माना और फ़ैसला सुनाते हुए मासूम बच्ची की पीड़ा को कविता रूपी मार्मिक शब्दों में कुछ इस तरह बयाँ किया…

‘मैं नन्हीं सी गुड़िया थी,

मुझे जीना था,

हँसना था,

खेलना था,

फिर क्यों इतना दर्द दिया,

बिना कसूर, बिना ग़लती के,

क्यों निष्ठुरता से तोड़कर,

मुझको फेंक दिया।’

महिला जज ने इस मामले पर फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि 6 साल की बच्ची असहाय थी, उसके अंदर इतनी ताक़त नहीं थी कि वो अपने ख़िलाफ़ हो रहे अपराध का प्रतिरोध कर सके। अभियुक्त ने उस मासूम का बलात्कार कर बड़ी बेरहमी से उसका गला घोंटकर हत्या कर दी। यह अपराध ख़ौफ़नाक ही नहीं बल्कि समाज को पूरी तरह से प्रभावित करने वाला है। इस घटना के बारे में मात्र सोचने से ही लोग नि:शब्द हो जाते हैं, भावनाएँ ख़ामोशी का रूप ले लेती हैं। इस दर्दनाक घटना के दौरान मासूम बच्ची की पीड़ा का अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता, उसे व्यक्त करने के लिए शब्द भी कम पड़ जाएँगे।

इसके आगे महिला जज कहा कि मासूम बच्ची के सम्मान को तो वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन उसके साथ हैवानियत भरी घटना को अंजाम देने वाले अपराधी को सज़ा देकर दंडित करने का दायित्व अदालत का है। ऐसे अपराधियों को कठोर दंड देकर उनके अंदर डर पैदा किया जा सके, इसके लिए सज़ा-ए-मौत के अलावा दूसरी कोई अन्य सज़ा नहीं हो सकती।    

महिला जज शिल्पा समीर ने जब यह फ़ैसला सुनाया तो कोर्ट में मौजूद हर शख़्स मासूम की हत्या व बलात्कार की वारदात को सोचकर बेहद भावुक हो गया, लेकिन इस नृशंस वारदात को अंजाम देने वाले दरिंदे महेंद्र के चेहरे पर एक शिकन भी नहीं आई। हालाँकि, इस सज़ा को सुनने के बाद वो एक पल के लिए हैरान ज़रूर हुआ, लेकिन उसे अपने किए पर बिलकुल पछतावा नहीं था। फ़ैसला सुनाए जाने के बाद गार्ड उसे जेल ले गया।

ख़बर के अनुसार, 21 मई 2011 को आरोपी महेंद्र फागी निवासी अपने परिचित के घर आया था। जहाँ उसने देखा कि 6 वर्षीय बच्ची परिचित की बेटी अकेली है। उसने मौक़े का फ़ायदा उठाया और बच्ची को उठाकर उसके कच्चे मकान के एक कमरे में ले गया। वहाँ उसने बच्ची का बलात्कार किया और उसके बाद सूंतली (रस्सी) से बच्ची का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने बच्ची के शव को एक बक्से में डाला और परिचित के घर में बँधे एक बकरे को लेकर वहाँ से फ़रार हो गया।

काफ़ी समय तक जब बच्ची नज़र नहीं आई तो उसके परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। इसके बाद परिजनों को ख़ून से लथपथ बच्ची का शव मिला। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद 27 वर्षीय महेंद्र उर्फ़ धर्मेंद्र बैरवा को गिरफ़्तार कर लिया।

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शाह का गणित और फ्लोर मैनेजमेंट: राज्यसभा में ऐसे पास होगा नागरिकता संसोधन विधेयक!

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 पेश कर दिया है। लोकसभा में तो सरकार के पास नंबर है लेकिन दिक्कत राज्यसभा में हो सकती है। वहाँ भी विधेयक पास हो जाए, इसके लिए तैयारी करनी होती है। फ्लोर मैनेजमेंट उसी को कहते हैं। आइए कुछ आँकड़ो से समझते हैं इस विधेयक के पास होने के गुणा-गणित को।

कॉन्ग्रेस और तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा समर्थित UPA के नेतृत्व वाले विपक्ष के पास सदन की कुल संख्या 245 में से 100 से कम लग रही है। कॉन्ग्रेस के पास 46 सांसद हैं, लेकिन मोतीलाल वोहरा स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते अनुपस्थित हैं।

उच्च सदन में ममता बनर्जी की तृणमूल में 13 सदस्य हैं। समाजवादी पार्टी के 9 हैं, डीएमके के पास 5, RJD और बसपा दोनों के पास 4-4 सांसद हैं, और अन्य छोटे दलों को मिलाकर यह संख्या 100 तक पहुँचती है।

जबकि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NDA और उनकी संख्या पर नज़र डालें तो इनके अपने 83 सांसद हैं, जिसमें नव-निर्वाचित सांसद अरुण सिंह और केसी राममूर्ति भी शामिल हैं।

शिरोमणि अकाली के पास 3 सांसद हैं और दूसरी सहयोगी पार्टी AIADMK के पास 11 सदस्यों ने वोट देकर अपना समर्थन दिया। जदयू के नीतीश कुमार ने भी बिल का समर्थन करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा नॉमिनेटिड सांसदों को सम्मिलित करके अन्य 12 सदस्यों, स्वतंत्र  एवं लघु पार्टियों और नॉर्थ ईस्ट के सहयोगी दलों को ही केवल गणना में जोड़ा गया है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में भाजपा और शिवसेना के बीच राजनैतिक घमासान हुआ, जिसकी वजह से उनका गठबंधन टूट गया। इसके बावजूद उद्धव ठाकरे की पार्टी ने इस विधेयक का समर्थन किया। जबकि निष्पक्ष पार्टियों का अब भी केंद्र सरकार के समर्थन में आना बाकी है।

इसके अलावा, नवीन पटनायक की बीजू जनता दल ने भी 7 मतों से अपना समर्थन दिया। हालाँकि पार्टी ने इसमें कुछ काट-छाँट की माँग करते हुए संशोधनों को प्रस्ताव रखा।

TRS के 6 सासंदों ने और YS जगन की YSRCP ने 2 वोटों से अपना समर्थन दिया। वहीं, भाजपा की पूर्व सहयोगी पार्टी तेलगु देशम पार्टी भी 2 वोटों से अपना समर्थन देगी।

बता दें कि अनिल बलूनी को मिलाकर भाजपा के कम से कम 2 सांसद मेडिकल लीव पर हैं और दो स्वतंत्र दावेदारों का समर्थन भी नदारद है। और इस तरह NDA के पास सांसदो की संख्या 120 यानी आधे से ऊपर 132 तक पहुँचती नज़र आ रही है।

शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही अमित शाह की क़रीबी टीम सहित फ्लोर मैनेजर अपने काम में लगे हुए हैं। इसी तरह की क़वायद, अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के प्रस्ताव पर हुई थी।

रेल मंत्री पीयूष गोयल अपने मंत्रिमंडल के सहयोगी धर्मेंद्र प्रधान के रूप में AIADMK को अपने पक्ष में लाने में रहे, उन्होंने बीजेडी को भी लूप में रखा।

पार्टी के महासचिव भूपेंद्र यादव JDU से बात कर रहे हैं। संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी TRS, YSR और TDP समेत छोटे दलों से बात कर रहे हैं।

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हर सवाल का जवाब दूँगा, भागना मत: शाह ने पेश किया CAB, ओवैसी ने कहा- इस हिटलर से बचाओ

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि ये बिल 0.001% भी अल्पसंख्यकों के विरुद्ध नहीं है। कॉन्ग्रेस संसदीय दाल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया था कि अल्पसंख्यकों को डराने के लिए मोदी सरकार ये विधेयक लेकर आ रही है। अमित शाह ने विपक्ष से कहा कि अगर वो भागे नहीं तो उन्हें उनकी हर आपत्ति का जवाब दिया जाएगा। अमित शाह ने जैसे ही बिल को सदन के पटल पर रखा विपक्ष का हंगामा शुरू हो गया। रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह विधेयक भारत के संविधान में निहित मूल्यों के विरुद्ध है।

आगे बढ़ने से पहले ये बताना ज़रूरी है कि नागरिकता संशोधन विधेयक यानी CAB पास होने के बाद बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से भारत में आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के शरणार्थियों को ‘अवैध इमिग्रेंट’ नहीं माना जाएगा और उन्हें भारत का नागरिक बनाने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। ये सुविधा दिसंबर 31 2014 से पहले भारत में आकर रह रहे शरणार्थियों को मिलेगी। कुछ लोग कह रहे हैं कि इससे उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोग नाराज़ हो जाएँगे, क्योंकि ये बिल असम एकॉर्ड का उल्लंघन करता है। नॉथ-ईस्ट के राज्यों में कई वामपंथी संगठन इसके ख़िलाफ़ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

संसद में मुस्लिम लीग व अन्य मुस्लिम नेताओं ने इस बिल के ख़िलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराया। एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इस गृहमंत्री से देश को बचा लो। उन्होंने कहा कि इतिहास में अमित शाह का नाम हिटलर के साथ लिया जाएगा। संसद के शीतकालीन सत्र में इस बिल को लेकर लगातार हंगामा जारी है।

शाह ने यूएस ग्रीन कार्ड का जिक्र करते हुए कहा कि वहाँ के नियम-क़ायदे शरणार्थियों के मामले में काफ़ी सख्त हैं। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से हर देश के लोगों को अपनाता आया है। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इस बिल को विभाजनकारी और असंवैधानिक बताया। सांसद सौगत रॉय ने कहा कि ये डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के मूल्यों के ख़िलाफ़ है।

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बलात्कारी कहकर गोली मारने Vs न्यायिक प्रक्रिया के त्वरित होने Vs ‘बनाना रिपब्लिक’ में फर्क होता है

कानून की धज्जियाँ उड़ते देखना हो तो मौजूदा दौर देखिए। जिसे हैदराबाद कांड के नाम से जाना जाता है, उसमें पीड़िता का नाम, वो काम क्या करती थी, या उसकी तस्वीरें, आसानी से उपलब्ध हैं। कानून साफ़ तौर पर कहता है (आईपीसी की धारा 228A और पॉक्सो एक्ट की धारा 23) कि बलात्कार जैसे मामलों में पीड़ित की पहचान, किसी भी तरह से उजागर नहीं की जा सकती। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर पीड़िता की तस्वीरें तो तैरती दिखी ही, नाम भी हैश टैग की तरह ट्रेंड करता रहा। पत्रकारिता की नौकरी करने वाले हरेक व्यक्ति को (चाहे धारा याद हो ना हो) ये कानून जरूर पता होता है। सवाल ये है कि फिर किसी ने लोगों को क्या ये बताया कि ऐसा करना अपराध भी है और अनैतिक भी लगता है?

ऐसा इसलिए है क्योंकि इस धारा 228A में एक पेचीदगी है। कुछ स्थितियों में पीड़ित की पहचान जाहिर की जा सकती है। जैसे कि पीड़ित की मृत्यु हो जाए, अथवा वो नाबालिग हो या उसकी मानसिक हालत ठीक ना हो तो उसके परिवार की लिखित इजाजत पर ऐसा किया जा सकता है। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायाधीश सी हरि शंकर ने (13 अप्रैल 2018 को) 12 समाचार बेचने वाली कंपनियों को नोटिस जारी किया था। कठुआ कांड में पीड़ित की पहचान उजागर करने के मामले में जिन्हें नोटिस दिया गया था उनमे ‘द टाइम्स ऑफ़ इंडिया’, ‘द हिंदुस्तान टाइम्स’, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’, ‘द हिन्दू’, ‘एनडीटीवी’, ‘रिपब्लिक टीवी’, और ‘फर्स्टपोस्ट’ शामिल थे।

अक्सर ‘न्याय की हत्या’ के दावे ठोकने वाले वही काम करते हैं जिन पर लोगों को कानूनों और नीतियों के बारे में जानकारी देने की ‘जिम्मेदारी’ (कथित तौर पर) होती है। जहाँ तक अदालतों का सवाल है, किसी की जीवन-मृत्यु का फैसला सुनाना ऐसे ही मुश्किल होता होगा, ऊपर से जहाँ मामले बलात्कार जैसे हों, जिसे अज्ञात कारणों से कुछ भाषाओं में औरत की इज्जत से जोड़ा जाता है (कृपया “औरत” और बलात्कार को “अस्मत-दारी” कहना इन्टरनेट पर ढूँढ कर पढ़ें) तो मुश्किलें और भी बढ़ जाती होंगी। ऐसे ही एक मामले पर कुछ साल पहले “पिकिंग कॉटन” नाम की किताब लिखी गई थी।

जेनिफर थॉमसन के अपार्टमेंट के कमरे में कोई अपराधी घुस आया और छुरे की नोक पर उसने जेनिफर का बलात्कार किया था। जैसे तैसे सिर्फ एक कम्बल लपेटे जेनिफर वहाँ से भागी और उन्होंने पुलिस को बताया कि वो अपराधी को पहचान लेंगी। तीन दिन बाद जब अपराधियों की पहचान करवाई गई तो उन्होंने रोनाल्ड कॉटन को पहचाना। मुकदमा चला और जेनिफर की गवाही पर रोनाल्ड को सजा भी हो गई। 11 साल जेल में काटने के बाद जब डीएनए टेस्ट को सबूत के तौर पर मान्यता मिली तब जाकर पता चल पाया कि रोनाल्ड कॉटन ने तो अपराध किया ही नहीं था! जब उन्हें बरी किया गया तो वो ग्यारह साल, यानी अपनी पूरी जवानी जेल में काट चुके थे।

ऐसा सिर्फ एक बार नहीं हुआ, ऐसे मामलों से निर्दोषों को बचाने के लिए एक पूरा “इनोसेंस प्रोजेक्ट” चलता है जो किसी भी वक्त हजारों मुकदमों की जाँच कर रहा होता है। वो तय करते हैं कि किन मामलों में किसी बेगुनाह को सजा हुई है और उसका मुकदमा दोबारा देखा जाना चाहिए। भारत का मामला देखें तो यहाँ ऐसे भी मामले मिलेंगे जब किसी को बरसों पहले जमानत मिली मगर बेल बांड भर पाने में असमर्थ होने के कारण वो बरसों जेल में सड़ते रहे। न्यायिक प्रक्रिया में सुधारों की बात कई न्यायाधीश अपने पद से मुक्त होने, रिटायर होने के बाद करते हैं।

जहाँ एक तथ्य ये है कि बलात्कार के मामलों में से कई अदालतों तक पहुँचते ही नहीं, क्योंकि कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई, वहीँ एक तथ्य ये भी है कि इनमें से कई मामले फर्जी भी होते हैं। नवम्बर 2003 में वीएस मलिमथ की अध्यक्षता में एक समिति (सीआरसीजेएस) दहेज़ प्रताड़ना के लिए इस्तेमाल होने वाली धारा 498A को जमानती बनाने की सलाह दे चुकी है। बलात्कार, यौन उत्पीड़न जैसे मामले भी ब्लैकमेल के लिए इस्तेमाल होते हैं। कानूनों में सुधार की ऐसी कोई भी चर्चा दब जाती है, या नारीविरोधी कहलाने के खतरे के डर से भी दबा दी जाती है।

न्यायिक प्रक्रिया पर जनता से ज्यादा राजनीतिज्ञों का भरोसा दिखता है, जब वो कहते हैं कि उन्हें कानूनी प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। शायद वो वाकिफ होते हैं कि अदालती फैसले इतने लम्बे समय तक लटकाए जा सकेंगे कि फैसला आने तक एक तो अपराधी की मृत्यु हो चुकी हो, ऊपर से लोग अपराध और उसकी भयावहता को भी भूल जाएँ। जो ये मानते हैं कि अदालती इन्साफ अमीरों के लिए है, गरीबों के लिए नहीं वो अक्सर जमानत पाए व्यक्तियों के जेल में होने का उदाहरण भी देते ही रहते हैं। एक पुलिस एनकाउंटर में आरोपियों को जब हैदराबाद में मार गिराया जाता है तब आम आदमी की जो प्रक्रिया आती है, वो भी दर्शाती है कि न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कितना बचा है।

बाकी भारतीय कानून अपराध पर नहीं, अपराध क्यों किया गया, इस आधार पर फैसले देता है। यानी क्राइम ही नहीं, मोटिव (प्रेरणा) भी सिद्ध करनी पड़ती है। अगर सिर्फ आरोप के आधार पर किसी को बलात्कारी कहकर गोली मारने का जोश थोड़ा कम हो गया हो तो सोचिएगा। न्यायिक प्रक्रिया के त्वरित होने, और ‘बनाना रिपब्लिक’ होने में फर्क तो होता है ना?

‘नित्यानंद से मत उलझो, कोई बेवकूफ अदालत मुझ पर मुकदमा नहीं चला सकती, मैं परम शिवा हूँ’

मोदी सरकार द्वारा पासपोर्ट रद्द किए जाने के बाद बलात्कार और यौन शोषण के आरोपित स्वामी नित्यानंद का सोशल मीडिया पर एक विवादित वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में नित्यानंद खुद को ‘परम शिवा’ बताते नजर आ रहे हैं और कह रहे हैं कि कोई भी “बेवकूफ अदालत” उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।

वीडियो में नित्यानंद को कहते सुना जा सकता है, “पूरी दुनिया मेरे खिलाफ है। मैं कहता हूँ नित्यानंद से मत उलझो। लेकिन, अगर तुम यहाँ होकर मुझे अपनी निष्ठा दिखाते हो तो मैं तुम्हें वास्तविकता और सच्चाई का खुलासा करके अपनी निष्ठा दिखाऊँगा। अब, मुझे कोई भी छू नहीं सकता। मैं परम शिवा हूँ, समझे। सच का खुलासा करने के लिए कोई बेवकूफ अदालत मुझ पर मुकदमा नहीं कर सकती। मैं परम शिवा हूँ।

उल्लेखनीय है कि इस वायरल वीडियो से पहले मोदी सरकार स्वयंभू बाबा नित्यानंद पर कड़ा एक्शन लेते हुए उनका पासपोर्ट रद्द कर चुकी है। साथ ही मोदी सरकार द्वारा नित्यांनंद के नए पासपोर्ट की याचिका को भी खारिज किया जा चुका है। जिसकी जानकारी स्वंय मंत्रालय प्रवक्ता रवीश कुमार ने बीते शुक्रवार (दिसंबर 6, 2019) को दी।

उन्होंने बताया, सरकार ने विवादास्पद स्वयंभू बाबा नित्यानंद का पासपोर्ट रद्द कर दिया है और उसकी नए पासपोर्ट की याचिका भी खारिज कर दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने यह भी कहा कि मंत्रालय ने विदेशों में स्थित सभी मिशनों और पोस्टों को नित्यानंद के बारे में सतर्क कर दिया है।

बता दें, 9 वर्ष पहले साल 2010 में स्वामी नित्यानंद की एक सेक्स CD सामने आई थी। जिसके बाद ‘बाबा’ को अरेस्ट भी किया गया था। लेकिन कुछ समय बाद वह जमानत पर छूटकर बाहर आ गया। साल 2012 में फिर स्वयंभू बाबा पर बलात्कार के आरोप लगे, जिसका अभी भी ट्रायल चल रहा है। इतना ही नहीं गुजरात में भी नित्यानंद के ऊपर नाबालिग लड़के लड़कियों को बंधक बनाने और उन्हें टॉर्चर करने के आरोप में आपराधिक मामले चल रहे हैं।

हालाँकि, अभी हाल ही में नित्यानंद पर दो लड़कियों को अगवा करने और गायब कर देने के आरोप में नया मोड़ आया है। दरअसल, जिन दो बहनों के अपहरण और उन्हें जबरन आश्रम में रखने का आरोप स्वामी नित्यानंद पर है, उनमें से एक ने आगे आकर एक वीडियो मैसेज में नित्यानंद को क्लीन चिट दी है और अपने पिता पर ही उनके खिलाफ साज़िश करने का आरोप लगाया है

पाकिस्तानी शेख गुलजार गिरफ्तार: 11 साल से रह रहा था भारत में, साथ में बीवी और 5 बच्चे भी

आंध्र प्रदेश से एक पाकिस्तानी नागरिक को गिरफ्तार किया गया है। वह पिछले 11 सालों से यहाँ रह रहा था। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान शेख गुलजार खान के रूप में हुई है। वह आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के गाडीवमुला गाँव में एक चित्रकार के रूप में अपनी आजीविका चला रहा था। उसे 3 दिसंबर को सिकंदराबाद से गिरफ्तार किया गया। जानकारी के मुताबिक वह अपनी बीबी और पाँच बच्चों के साथ अपने घर लौटने की कोशिश कर रहा था। 

पुलिस ने बताया कि वह पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के हडमरला के कुल्लूवाल गाँव से है। बताया जा रहा है कि उसके पास वैध दस्तावेज न होने के कारण उसे जनवरी 2008 में दुबई से निकाल दिया गया था। उस समय गुलजार ने तब दावा किया था कि वह भारत का मूल निवासी है, जिसके बाद उसे यहाँ भेज दिया गया था।

भारत आने के बाद वो मुंबई में काम करने लगा। फिर उसने कुरनूल की रहने वाली दौलत बी के साथ निकाह कर लिया। दौलत बी पहले से ही शादीशुदा थी। पहले निकाह से उसे एक बच्चा था। बाद में गुलजार और दौलत के चार बच्चे हुए। वो लोग वहाँ पर किराए पर रहते थे। गुलजार ने किसी से भी अपनी पहचान उजागर नहीं की और अपनी मूल पहचान का खुलासा किए बिना गुलजार ने अपने और अपने परिवार के लिए आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड प्राप्त करने में कामयाब रहा। इसके अलावा 21 नवंबर को उसने विजयवाड़ा में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से पासपोर्ट प्राप्त करने में भी सफल रहा।

बता दें कि वह 6 महीने पहले खुफिया एजेंसी के रडार पर आया था, जब उसने पाकिस्तान में रह रहे अपने परिवार के सदस्यों से संपर्क करने के लिए एक एंड्रॉइड मोबाइल फोन खरीदा था। पुलिस ने बताया कि किसी तरह वह पड़ोसी देश स्थित कुल्लूवाल में एक कपड़ा व्यापारी से संपर्क करने में कामयाब रहा, जिसने उसे अपनी 70 वर्षीय अम्मी शरीफबी से संपर्क करने में मदद की। इसके बाद खान लगातार अपने भाई शहजाद, बहन जमीला और बहनोई अर्सलान के साथ बात कर रहे थे, जो दुबई में रहते हैं।

जानकारी के मुताबिक गुलजार के कॉल डिटेल से पाकिस्तान से लिंक होने का संकेत मिला था। इसके बाद तेलंगाना पुलिस के सीआई सेल द्वारा खान को निगरानी में रखा गया था और फिर 4 नवंबर को उसे हिरासत में लिया गया था।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार पासपोर्ट हासिल करने के बाद गुलजार ने करतारपुर तीर्थयात्री होने की आड़ में अपने परिवार के साथ पाकिस्तान जाने की योजना बनाई थी। मगर गुलजार की बीबी दौलत के भाई नसीब ने उनकी योजना पर पानी फेर दिया। नसीब को शक हुआ कि उसकी बहन और बच्चों को पाकिस्तान ले जाया जा रहा है। जिसके बाद उसने कुरनूल रेलवे पुलिस को सूचित किया। हालाँकि, पुलिस त्वरित कार्रवाई करने में विफल रही, लेकिन फिर बाद में उसे 3 दिसंबर को सिकंदराबाद से गिरफ्तार कर लिया गया।

गुलजार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, विदेशियों विषयक अधिनियम-1946, भारतीय पासपोर्ट अधिनियम और विशेष जाँच दल के पासपोर्ट की धारा 3 अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसकी बीबी और बच्चों को उनके रिश्तेदारों को सौंप दिया गया। जबकि खान को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।