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CAA पर भड़काऊ बयानबाजी: रवीश कुमार पर केस, सोनिया, प्रियंका और ओवैसी भी नामजद

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के साथ ही पत्रकार रवीश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। इन सब पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट में प्रदीप गुप्ता नाम के वकील ने सोनिया, प्रियंका, ओवैसी और रवीश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

दैनिक जागरण को गुप्ता ने बताया कि कई लोगों ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है। बावजूद इसके सोनिया, प्रियंका और ओवैसी साजिश के तहत लोगों को उकसाने वाले बयान दे रहे हैं। उनका कहना है कि इसके कारण ही दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में हिंसा भड़की। गुप्ता के अनुसार इसके बाद रवीश कुमार ने इस घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। नतीजतन, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी सहित देश के अन्य हिस्सों में हिंसा हुई। कोर्ट ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मामले में सुनवाई की अगली तारीख 24 जनवरी तय की है।

दैनिक जागरण के अलीगढ़ संस्करण में प्रकाशित खबर

इससे पहले राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को मेरठ बॉर्डर पुलिस रोक लिया और उन्हें वापस दिल्ली लौटा दिया। राहुल और प्रियंका शुक्रवार को मेरठ में हुए हिंसक प्रदर्शन में मारे गए लागों के परिजनों से मिलने जा रहे थे। अधिकारियों ने दोनों नेताओं को यह कह कर लौटा दिया कि शहर में अभी भी धारा-144 लागू है और उनके जाने से कानून-व्यवस्था की स्तिथि बिगड़ सकती है। बता दें कि दोनों को रोकने की तैयारी मेरठ सीमा पर मोहिउद्दीनपुर में ही कर ली गई थी। इसके लिए खरखौदा वाले रोड पर पुलिस ने पूरी तरह से नाकाबंदी की थी। लेकिन, वहाँ पुलिस प्रियंका और राहुल को नहीं रोक पाई क्योंकि उनके सुरक्षाकर्मियों ने सीओ व अन्य पुलिसवालों को धक्का देकर किसी तरह गाड़ी आगे बढ़ा दिया। वहाँ मौजूद एक सीओ ने बताया कि एक पल के लिए उन्हें ऐसा लगा कि गाड़ी उन्हें टक्कर मार देगी।

बता दें कि कॉन्ग्रेस ने सोमवार को संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध और तेज कर दिया। सोनिया गाँधी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी ने राजघाट स्थित महात्मा गाँधी के स्मारक पर जहाँ एकता के लिए सत्याग्रह किया, वहीं उसकी सहयोगी DMK ने चेन्नई में बड़ी रैली आयोजित की थी।

नागरिकता कानून के खिलाफ रैली करने के लिए DMK प्रमुख एमके स्टालिन समेत आठ हजार लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने पुलिस की अनुमति के बिना रैली निकाली थी। उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन कानून के तहत तीन पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी, जैन और बुद्ध धर्मावलंबियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी।

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1 अप्रैल से NPR: घर-घर जाकर जुटाया जाएगा डाटा, मोदी सरकार ने ₹8500 करोड़ की दी मंजूरी

मोदी कैबिनेट ने नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) को मंजूरी दे दी है। इस संबंध में 1 दिन पहले ही सूचना जारी कर दी गई थी। केंद्र सरकार ने अपने नोटिफिकेशन में कहा है कि 2003 के ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ सिटीजन्स एन्ड इशू ऑफ नेशनल आइडेंटिटी कार्ड्स’ के नियमों के तहत इस प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है। इसके अंतर्गत पॉपुलेशन रजिस्टर को तैयार कर अपडेट किया जाएगा। इसे फील्ड वर्क के जरिए पूरा किया जाएगा। घर-घर जाकर डाटा जुटाया जाएगा।

एनपीआर की प्रक्रिया के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने 85,00 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किए जाने को भी मंजूरी दे दी है। यह नागरिकता का प्रमाण नहीं होगा और न ही एनआरसी (NRC) से इसका कोई सरोकार है। इससे पहले 2011 की जनगणना से पहले 2010 में भी जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट किया गया था। उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए-2 सरकार थी।

असम को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अप्रैल 2020 से सितंबर 2020 तक एनपीआर को अपडेट करने का काम किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत उन लोगो की सूची और उनका विवरण तैयार किया जाएगा, जो लोकल रजिस्ट्रार के अंतर्गत आते हैं। सेंसस कमीशन ने कहा है कि एनपीआर का मकसद देश में रहने वाले लोगों की पहचान का एक डाटाबेस तैयार करना है

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2021 में अगली जनगणना होनी है। पश्चिम बंगाल और केरल की सरकारों ने एनपीआर की प्रक्रिया रोक दी है। कई गैर भाजपा शासित राज्यों ने कहा है कि वो एनपीआर की प्रक्रिया के लिए वर्क फोर्स देने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि चीजें स्पष्ट नहीं हैं। विपक्ष का आरोप है कि ये एनआरसी की प्रक्रिया का एक हिस्सा है, जबकि सरकार ने स्पष्ट कहा है कि पूरे देश में एनआरसी के लिए अभी तक कोई अधिकारिक चर्चा हुई ही नहीं है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि जब तक सरकार ‘चीजें स्पष्ट नहीं करती’, तब तक राज्य में एनपीआर से जुड़ी सभी गतिविधियाँ बंद रहेंगी। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के डीएम को निर्देश दिया है कि एनपीआर का कार्य स्थगित कर दिया जाए। बता दें कि एनपीआर एक नियमित प्रक्रिया है, जिसे जनगणना के पहले किया जाना है, इसका एनआरसी से कोई सम्बन्ध नहीं है।

एनपीआर और एनआरसी में बुनियादी अंतर है। NRC का मकसद देश में अवैध तरीके से रह रहे लोगों की पहचान करना है। वहीं, NPR में 6 महीने या उससे अधिक समय से रह रहे हर निवासी को अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। कोई विदेशी भी अगर देश के किसी हिस्से में छह महीने से रह रहा है, तो उसे भी NPR में अपना विवरण दर्ज कराना होगा।

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13 से 16 साल की बच्चियों से रेप, यौन शोषण व तस्करी: कॉन्स्टेबल अमजद, नदीम, साजिद सहित 16 गिरफ्तार

यूनाइटेड किंगडम में 35 वर्षीय पुलिस कॉन्स्टेबल अमजद दित्ता समेत 16 लोगों पर नाबालिग लड़कियों के साथ यौन शोषण और उनकी तस्करी करने का आरोप है। वेस्ट यॉर्कशायर पुलिस ने कहा कि आरोप 2006 और 2009 के बीच हैलिफ़ैक्स में तीन नाबालिग लड़कियों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित हैं। पुलिस ने बताया कि पीड़ित नाबालिग लड़कियों की उम्र 13 से 16 वर्ष के बीच थी।

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार अमजद दित्ता को अमजद हुसैन के नाम से भी जाना जाता है। अमजद एक पुलिस कॉन्स्टेबल है। उस पर 2009 में हैलिफ़ैक्स में काम करने के दौरान एक लड़की को गलत तरीके से छूने का आरोप है। एक प्रवक्ता ने बताया कि अमजद को फिलहाल ड्यूटी से निलंबित कर दिया गया है और अन्य 15 आरोपितों के साथ 6 जनवरी 2020 को ब्रैडफोर्ड मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है।

पुलिस ने कहा कि 2009 में जब उन्होंने यौन अपराध को अंजाम दिया था, उस समय वह एक सेवारत पुलिस अधिकारी था। अमजद के अलावा गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपितों में वकास अब्बास, नदीम अदलात, साजिद अदालत, वसीम अदलात, क्रिस्टोफर ईस्टवुड, मेटाब इस्लाम, मोहम्मद रिजवान इकबाल, इश्तियाक लतीफ, असद महमूद, अरफ महमूद, अरफ मीर, यूनिस मोहम्मद उर्फ यूनिस खान, नदीम नासिर, शहज़ाद नवाज़, शाज़ाद नज़ीर, और सोहेल जाफ़र का नाम शामिल है।

30 साल के वकास अब्बास पर रेप के तीन मामले और क्लास सी ड्रग सप्लाई करने के तीन आरोप हैं। 34 वर्षीय नदीम अदलात पर बलात्कार के चार आरोप और क्लास सी ड्रग सप्लाय करने के चार आरोप हैं। 43 वर्षीय साजिद अदलात पर बलात्कार का आरोप है। 33 वर्षीय वसीम अदालत पर रेप के दो आरोप के साथ ही मानव तस्करी और क्लास सी ड्रग सप्लाय करने का आरोप है। इसके अलावा बाकी सब भी नाबालिगों के साथ बलात्कार, यौन शोषण और क्लास सी ड्रग सप्लाय करने के आरोपित हैं।

मेरठ में घुसने से पहले ही वापस लौटाए गए राहुल व प्रियंका, यूपी पुलिस से धक्का-मुक्की

राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को उत्तर प्रदेश के मेरठ जाने से रोक दिया गया है। दोनों कॉन्ग्रेस नेता बिजनौर से मेरठ की तरफ आ रहे थे लेकिन पुलिस ने दोनों को परतापुर से ही वापस लौटा दिया। उन्हें मेरठ सीमा पर मोहिउद्दीनपुर में ही रोकने की तैयारी कर ली गई थी। इसके लिए खरखौदा वाले रोड पर पुलिस ने पूरी तरह से नाकाबंदी की थी। लेकिन, वहाँ पुलिस प्रियंका और राहुल को नहीं रोक पाई क्योंकि उनके सुरक्षाकर्मियों ने सीओ व अन्य पुलिसवालों को धक्का देकर किसी तरह गाड़ी आगे बढ़ा दिया। वहाँ मौजूद एक सीओ ने बताया कि एक पल के लिए उन्हें ऐसा लगा कि गाड़ी उन्हें टक्कर मार देगी।

दरअसल, राहुल और प्रियंका सीएए हिंसा में मारे गए मोहसिन के परिजनों से मिलने पहुँचे थे। पूरे उत्तर प्रदेश में सीएए के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा और उपद्रव किया गया। दंगाइयों ने पुलिस से झड़प की, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया और क़ानून-व्यवस्था अपने हाथ में लिया। इस हिंसा में मारे गए लोगों का समर्थन करते हुए कॉन्ग्रेस ने योगी सरकार को इसके लिए जिम्मेदार बताया है। पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा कि वो बुधवार (दिसंबर 25, 2019) को फिर से मेरठ जाएँगे।

मेरठ में सीएए को लेकर हुई हिंसा में मोहसिन, आसिफ, जहीर, आलिम और दिल्ली के आसिफ की मौत हो गई थी। इसमें 35 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं, जिनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इस मामले में अब तक 102 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है। पुलिस की ‘सोशल मीडिया लैब’ डिजिटल रूप से भड़काऊ पोस्ट्स व ट्वीट्स पर नज़र रख रही है। कई क्षेत्रों में ‘शांति कमिटियों’ का गठन कर के सामाजिक सौहार्द बरक़रार रखने का प्रयास जारी है। पुलिस ने कहा है कि बाकी आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए धर-पकड़ जारी है।

कॉन्ग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा कि राहुल व प्रियंका मृतक के परिजनों का दुःख बाँटने आए थे। दोनों नेताओं ने परिजनों से फोन पर भी बातचीत की। इलाक़े में बड़ी संख्या में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता जमा हो गए थे, जिन्हें राहुल-प्रियंका के न पहुँचने से निराशा हुई।

‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ वाले वरुण के शो में बिना कागज़ दिखाए एंट्री नहीं, चाहिए वैध आईडी प्रूफ

कथित कॉमेडियन वरुण ग्रोवर ने नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध करने के लिए एनआरसी का मुद्दा उठाया और वाहवाही लूटने का प्रयास किया। जबकि सरकार बार-बार स्पष्ट कर चुकी है कि सीएए व एनआरसी का आपस में कोई सम्बन्ध नहीं है और देश भर में एनआरसी लागू करने के लिए कोई आधिकारिक चर्चा तक नहीं हुई है, वरुण ग्रोवर ने फिर भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया। सीएए के विरोध के लिए उन्होंने ‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ नामक एक कविता भी लिखी, जिसे वामपंथियों का खुला समर्थन मिला। मोदीविरोधी गैंग ने इस कविता को सोशल मीडिया में वायरल करने में जान लगा दी।

हालाँकि, सरकार को कागज़ न दिखाने की बात करने वाले वरुण ग्रोवर के शो में जाने के लिए आपके पास वैध आईडी कार्ड होना चाहिए, वो भी सरकारी। अगर ऐसा नहीं है तो बाउंसर्स आपको धक्के देकर बाहर निकाल सकते हैं। वरुण ग्रोवर भले ही सरकार को कागज़ न दिखाने की बात करते हों और दूसरों को भी ऐसा ही सलाह देते हों लेकिन उनके शो में जाने वाले लोगों को कागज़ दिखाना ही पड़ेगा। सोशल मीडिया में लोगों ने वरुण ग्रोवर के इस दोहरे रवैये को आड़े हाथों लिया।

‘मसान’ और ‘सेक्रेड गेम्स’ की पटकथा लिखने वाले वरुण ग्रोवर ‘ऐसी तैसी डेमोक्रेसी’ के तत्वाधान में शो कर रहे हैं, जिसके लिए लोगों से कहा गया है कि वो वैलिड आईडी कार्ड लेकर ही आएँ। वहीं जो चीज पूरे देश में अभी न आई है और न ही इसका कोई ड्राफ्ट आया है, उसका विरोध वरुण इस तरह से करते हैं:

तानाशाह आके जाएँगे, हम कागज नहीं दिखाएँगे।
तुम आँसू गैस उछालोगे, तुम जहर की चाय उबालोगे
हम प्यार की शक्कर घोल के उसको, गट गट गट पी जाएँगे
हम कागज नहीं दिखाएँगे

वरुण ग्रोवर को 2016 में ‘दम लगा के हइसा’ फ़िल्म के गाने ‘मोह मोह के धागे’ के लिए बेस्ट लिरिक्स का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। बता दें कि उस समय भी भाजपा की ही सरकार थी। वरुण ग्रोवर अक्सर मोदी सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते रहते हैं।

अंदर बच्चे अपनी डिग्रियों के लिए इंतजार करते रहे… बाहर रोक दिया राज्यपाल का रास्ता: पश्चिम बंगाल में हालत खराब

पश्चिम बंगाल के जाधवपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को उनकी डिग्रियाँ देने पहुँचे राज्यपाल जगदीप धनकड़ के साथ लगातार दूसरे दिन बदसलूकी का मामले सामने आया है। जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय के गेट नंबर 5 के बाहर तृणमूल के कुछ छात्र संगठनों ने उन्हें रोककर उनका रास्ता बंद कर दिया है। उन्हें काले झंडे दिखाए जा रहे हैं। साथ ही उनके ख़िलाफ नारेबाजी भी चालू है। बताया जा रहा है राज्यपाल पिछले एक घंटे से इस भीड़ में फँसे हुए हैं।

इस बीच उन्होंने ट्वीट किया और बताया कि वे जाधवपुर यूनिवर्सिटी में हैं, ताकि छात्रों को उनकी डिग्रियाँ दे सकें, लेकिन जहाँ से उन्हें जाना है, वहाँ का रास्ता जाम कर दिया गया है।

मीडिया से बातचीत में राज्य के राज्यपाल ने इस घटना को अपने लिए बतौर चांसलर एवं राज्यपाल होने के नाते एक दर्दनाक क्षण बताया। उन्होंने कहा, “अंदर बच्चे अपनी डिग्रियों के लिए इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बाहर खड़े इन मुट्ठी भर लोगों ने मेरा रास्ता रोक दिया है। ये पूर्ण रूप से कानून का पतन है। आज राज्य सरकार ने शिक्षा को बंदी बना लिया है। यूनिवर्सिटी और राज्य प्रशासन कुछ नहीं कर रहा है। राज्य में पूरी तरीके से कानून व्यवस्था चरमरा गई है। यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि राज्य सरकार ने शिक्षा को अपने कब्जे में ले लिया है। वाइस चांसलर रिमोट कंट्रोल से चलाए जा रहे हैं।”

इसके अलावा राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी के बाहर हालात देखकर अपने ट्विटर पर लिखा, “दर्दनाक हालत है क्योंकि जाधवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति अपने दायित्वों के बारे में जान-बूझकर अनजान हैं। वह अपनी अनुपस्थिति का बहाना बना रहे हैं। वह कानून के शासन के पतन वाले कैंपस की अध्यक्षता कर रहे हैं। बर्बादी की स्थिति है।”

आगे वे लिखते हैं, “मुझे हैरानी है कि वाइस चांसलर निष्क्रिय मुद्रा में मूक दर्शक बनकर बैठे हुए हैं। हमारे सिस्टम के नाकाम होने की इस अप्रत्याशित घटना पर वह चुप्पी साधे हैं। यह काम उन ताकतों द्वारा किया गया है, जिन्हें हमारी शिक्षा व्यवस्था पर कम या लंबे समय तक होने वाले नुकसान का अनुमान नहीं है।”

गौरतलब है कि राज्यपाल के साथ यूनिवर्सिटी में लगातार दूसरे दिन बदसलूकी की घटना सामने आई है। कल भी जगदीप धनखड़ को इसी तरह का विरोध यूनिवर्सिटी के बाहर झेलना पड़ा जब वे दीक्षांत समारोह को लेकर बुलाई गई बैठक में शामिल होने के लिए पहुँचे थे। लेकिन कल भी जैसे ही वे विश्वविद्यालय पहुँचे थे, छात्रों ने उनकी गाड़ी रोक ली थी और उनकी गाड़ी के सामने विरोध प्रदर्शन करने लगे थे। इस दौरान गो बैक के नारे लगाए गए थे। साथ ही छात्रों ने उन्हें काले झंडे और पोस्टर्स भी दिखाए थे और ‘भाजपा कार्यकर्ता जगदीप धनखड़ वापस जाओ’ के नारे भी लगाए थे। इसके अलावा उन्हें धमकी भी दी गई थी कि धनखड़ अगर मंगलवार को वार्षिक दीक्षांत समारोह में आते हैं तो वे फिर उनका विरोध करेंगे।

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जाधवपुर के वामपंथी लम्पट अपने ही दॉंव से पिटे, कार्यालय में घुसकर ABVP और दुर्गा वाहिनी ने की तोड़फोड़

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CAA पर बवाल में जख्मी तारिक AMU में पढ़ाएगा: जिस VC को छात्रों ने ‘निष्कासित’ किया था उसकी मुहर

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर हुई हिंसा के दौरान जख्मी हुए लोगों को पुरस्कृत करने का काम शुरू हो गया है। पहले दिल्ली के जामिया हिंसा के दौरान घायल मिन्हाज को आप विधायक अमानतुल्लाह ने 5 लाख रुपए देते हुए वक्फ बोर्ड में नौकरी देने का ऐलान किया था। अब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) ने अपने यहॉं हुए बवाल में जख्मी छात्र मोहम्मद तारिक को एडहॉक पर असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति केमेस्ट्री डिपार्टमेंट में की गई है।

मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि वाइस चांसलर तारिक मंसूर ने मानवीय आधार पर उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी है। एएमयू के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है, “मानवीय आधार पर वीसी ने मोहम्मद तारिक को एडहॉक पर केमेस्ट्री डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किया है। तारिक के पास पीएचडी की डिग्री है और उसने NET और JRF भी क्वालिफाई कर रखा है। जिस दिना हिंसा हुई थी तारिक के हाथ में गंभीर चोटें आई थी। इस बात को ध्यान में रखते हुए केमेस्ट्री फैकल्टी से सलाह-मशविरे के बाद उसकी नियुक्ति की गई है।”

बता दें कि जिस वाइस चांसलर तारिक मंसूर ने इस नियुक्ति को मंजूरी दी है उन्हें रविवार (22 दिसंबर) को अलीगढ़ में इंटरनेट सेवाओं की बहाली के तुरंत बाद, शिक्षकों, छात्रों और ग़ैर-शिक्षण कर्मचारियों ने निष्कासित कर दिया था। बाक़ायदा नोटिस जारी कर बताया गया था कि वाइस चांसलर प्रोफ़ेसर तारिक मंसूर और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एस अब्दुल हामिद को निष्कासित कर दिया गया है। जब तक दोनों इस्तीफा नहीं देंगे और कैंपस छोड़कर नहीं जाएँगे तब तक सभी लोग विश्वविद्यालय प्रशासन का बहिष्कार करेंगे।

छात्रों का आरोप था कि वाइस चांसलर तारिक मंसूर ने ही कैंपस में यूपी पुलिस को विरोध-प्रदर्शन के दौरान अंदर घुसने की अनुमति दी थी। ग़ौरतलब है कि नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध के नाम पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 15 दिसंबर 2019 को जमकर बवाल कटा था। छात्रों ने एडमिशन ब्लॉक के बाहर निकलकर पुलिस पर पथराव और हवाई फायरिंग की थी। इसके बाद स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोले दागने पड़े थे।

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संसद में नागरिकता बिल का समर्थन करने पर BJP सांसद को धमकी, कहा- घुटने नहीं टेकूँगा

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर केवल हिंसा ही नहीं हो रही है। इसकी आड़ में भाजपा के जनप्रतिनिधियों को धमकी भी दी जा रही है। त्रिपुरा से भाजपा के सांसद रेबती कुमार त्रिपुरा को संसद में इस बिल का समर्थन करने के लिए धमकी दी गई है। रेबती कुमार ने बताया कि धमकी प्रतिबंधित नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT) ने दी है।

पूर्वी त्रिपुरा से सांसद ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें कुछ दिन पहले एनएलएफटी का पत्र मिला है। इसमें उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई है। उन्होंने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, “मुझे धमकी देते हुए कहा गया है कि संसद में नागरिकता संशोधन बिल के समर्थन में वोट देकर मैंने राज्य के आदिवासियों के साथ धोखा किया है। “

पहली बार सांसद बने रेबती त्रिपुरा के प्रमुख जनजाति नेताओं में से एक हैं। उन्होंने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून राज्य के लोगों को प्रभावित नहीं करेगा। वे इस धमकी के सामने घुटने नहीं टेकेंगे और राज्य के आदिवासी लोगों के कल्याण के लिए काम करते रहेंगे।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह NLFT की धमकी को लेकर चिंतित हैं, सांसद ने कहा, “हाँ, यह चिंता का विषय है। मैं इसके बारे में चिंतित हूँ, क्योंकि हम सभी अतीत में इस प्रतिबंधित समूह की गतिविधियों के को जानते हैं। मैंने पहले ही राज्य के कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं से बात की है। मैं इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब से भी बात करूँगा।”

गौरतलब है कि NLFT को गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और बाद में आतंकवाद निरोधक अधिनियम (POTA) के तहत 1997 में गैरकानूनी घोषित करते हुए प्रतिबंधित किया गया था। गृह मंत्रालय के मुताबिक, NLFT 317 उग्रवादी घटनाओं समेत कई हिंसक गतिविधियों के लिए जिम्मेदार था। इस उग्रवादी और हिंसक घटनाओं में साल 2005 से 2015 के बीच 28 सुरक्षा बलों और 62 नागरिकों की जान चली गई थी।

नागरिकता (संशोधन) कानून की आवश्यकता क्यों?

मरीचझापी में जिन 7000 शरणार्थियों का संहार हुआ वे भी दलित थे, जय भीम-जय मीम का नया छलावा है ‘रावण’

इस उन्माद, मजहबी नारों के पीछे साजिश गहरी… क्योंकि CAA से न जयंती का लेना है और न जोया का देना

UP पुलिस का एक चेहरा ये भी: आग की लपटों में घिरा था मकान, खिड़की तोड़ अंदर घुसे दारोगा, बचाई 4 की जान

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुई हिंसा के दौरान पुलिस को उन्मादी भीड़ द्वारा निशाना बनाने की कई घटनाएं सामने आई है। बावजूद इसके हालात पर काबू पाने के लिए जब पुलिस ने दंगाइयों से सख्ती की तो एक वर्ग इसके खिलाफ खड़ा हो गया। खासकर यूपी पुलिस को बदनाम करने की नीयत से बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया में कई तरह का प्रोपेगेंडा रचा रहा है। इसी बीच, रायबरेली से ऐसी तस्वीरें सामने आई है जब जो दंगाइयों से सख्ती से निपटने वाली यूपी पुलिस का एक अलग ही चेहरा पेश करती है।

पुलिस के इस चेहरे का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रामलीला मैदान की रैली में भी किया था। उन्होंने कहा था, “जब दिल्ली की मंडी में आग लगी थी, तब पुलिस वालों ने बिना महजब देखे ही लोगों को बचाया था। जिन पुलिसकर्मियों ने तुम्हें बचाया, उन्हीं पर पत्थर चला रहे हो?”

ताजा मामला रायबरेली के लालगंज के घोसियाना मोहल्ले का है। यहाँ चार मंजिला मकान के निचले हिस्से भीषण आग लग गई। आग तेजी से फैलने लगी। तीसरे माले पर पप्पू गुप्ता, वैभव, छवि और एक साल बच्चा फँसा हुआ था।

देखते ही देखते यहाँ आग ने विकराल रूप ले लिया और इन चारों लोगों के लिए बिल्डिंग से निकालना नामुमकिन हो गया। इसी बीच मौक़े पर पहुँचे दारोगा विनोद सिंह। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए पड़ोस के एक घर से उस मकान की ख़िड़की तोड़ अंदर घुस गए। फिर एक-एक कर वहाँ फँसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

इस आगजनी में लाखों की संपत्ति खाक हो गई। लेकिन, खाकी की बहादुरी से किसी की जान नहीं गई। दारोगा विनोद सिंह के इस साहस की तारीफ हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिस घर में आग लगी वह निर्मल कुमार गुप्ता का है। वे कपड़े के व्यवसायी हैं। दुकान वे अपने 4 मंजिला घर के नीचे वाले माले पर चलाते थे, जिसका गोदाम भी उन्होंने घर की दूसरी मंजिल पर बनाया हुआ था। लेकिन रविवार की दुकान में आग लग गई जो फैलते-फैलते उनके गोदाम तक आ पहुँची। देखते ही देखते आग ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि ऊपर फँसे लोगों के पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा।

थोड़ी देर बाद आग की सूचना मिलने पर पुलिस वहाँ पहुँची और अग्निशमन के कमर्चारियों के साथ आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। घर में फँसे लोगों को निकालने का रास्ता नहीं मिल रहा था। इसी बीच पुलिस ने सीढ़ियों की व्यवस्था की और थानेदार विनोद सिंह ने सीढ़ियों की मदद से घर में प्रवेश किया और बिना किसी नुकसान के सबको सुरक्षित वापस निकाल लिया। आग लगने के कारणों का अब तक पता नहीं लग पाया है।

यूपी पुलिस ने चौराहे पर टाँगी दंगाइयों की तस्वीर, कहा- बवालियों की पहचान कर फ़ौरन खबर करें

वीडियो: CAA विरोध के नाम पर उत्पात मचाने निकली थी दंगाई भीड़, यूपी पुलिस ने खदेड़-खदेड़ कर पीटा

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बरखा दत्त की बहन बहार की पकड़ी गई चोरी, किताब में टीप डाला जानकी लेनिन का आर्टिकल!

प्रोपेगेंडा की रानी बरखा दत्त की बहन बहार पर चोरी का आरोप लगा है। यहॉं चोरी का मतलब पैसों से नहीं है। बरख दत्त पर साहित्यिक चोरी यानी प्लेज्यरिज्म का आरोप लगा है। आरोप लगाया है कि फिल्मकार और वन्यजीव लेखिका जानकी लेनिन ने। लेनिन के अनुसार 2007 में उन्होंने ‘The Songs of Ganges Ghariyal’ आर्टिकल लिखा था। बहार ने इस आर्टिकल के अंश का इस्तेमाल अपनी किताब में किया है। लेकिन, इसके लिए लेनिन के आर्टिकल का हवाला नहीं दिया गया है।

जानकी लेनिन ने ट्वीट कर यह जानकारी दी और बहार को सवालों को घेरे में खड़ा किया। उन्होंने बताया कि बहार की ‘रीवाइल्डिंग’ पढ़ते समय उन्हें कछुओं और घड़ियाल पर लिखे पाठ में कुछ शब्द जाने-पहचाने मिले। उन्होंने कहा कि साल 2007 में उन्होंने एक आर्टिकल लिखा थाए जिसके अधिकतर वाक्य उन्हें बहार दत्त की किताब में मिले हैं।

इसके बाद जानकी ने अपने निबंध में लिखे कुछ वाक्यों को शेयर किया। साथ ही बहार की किताब का स्क्रीनशॉट भी ट्वीट में डाला। हैरानी की बात यह थी कि जानकी के आर्टिकल और बहार की किताब में लिखे शब्दों में कोई फर्क नहीं है। दोनों सामग्रियों में वाक्य लगभग एक जैसे थे।

लेनिन के ट्वीट ने साफ कर दिया कि मामला प्लेज्यरिज्म का है। इससे हैरान कुछ यूजर्स ने सोशल मीडिया पर लेनिन को एक्शन लेने की सलाह दी। कुछ ने कहा कि सामग्री ‘लगभग’ एक जैसी नहीं है, बल्कि पूरी की पूरी ‘कॉपी’ की गई है।

इस मामले में बहार दत्त की सफाई भी आई है। आरोपों को खारिज करते हुए बहार ने कहा कि अपनी किताब में इन शब्दों का जिक्र करते हुए उन्होंने उन्होंने रोमूलस विटेकर (वन्यजीव संरक्षणवादी ) को कोट किया है। उनका जिक्र संदर्भ सूची में भी है।

साथ ही बहार ने इन आरोपों पर हैरानी जताते हुए कहा कि रोम और उनके बीच भेजे गए सभी मेल ऑन रिकॉर्ड हैं। उनके मुताबिक हर कथन और कागज जो रोम ने उनके साथ साझा किया, उसका जिक्र उन्होंने अपनी किताब के संदर्भ सूची में किया है।

बहार ने कहा कि उन्होंने अपनी किताब में लेनिन द्वारा जिक्र की गई सामग्री का इस्तेमाल रोम द्वारा इन्हें साझा करने के बाद किया। ऐसे में अगर वो रोम की तरफ से ये सब कह रही हैं, तो उनका नाम क्यों नहीं लिख रहीं।

बता दें कि रोम, जानकी लेनिन के पति हैं। बावजूद इसके विवाद होने की वजह यह है कि बहार ने अपनी किताब में रोम द्वारा मुहैया कराई गई सामग्री का इस्तेमाल करते हुए उसका हवाला नहीं दिया। जब लेनिन ने उनकी चोरी पकड़ी तो उन्होंने रोम के मेल का जिक्र किया। हालाँकि इसके बाद लेनिन ने बहार दत्त से वे सभी मेल भेजने के लिए कहा जो रोम ने उन्हें भेजे थे। सोशल मीडिया में लोग इस हरकत के लिए बहार दत्त की आलोचना कर रहे हैं।

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