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‘किस ऑफ लव’ शुरू करने वाली दंपत्ति को पुलिस ने किया गिरफ्तार, सेक्स ट्रैफिकिंग का है मामला

ऑनलाइन सेक्स ट्रैफिकिंग मामले में 23 दिसंबर को केरल पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ‘किस ऑफ लव’ अभियान शुरु करने वाली दंपत्ति के ख़िलाफ़ तिरुवनंतपुरम की पॉक्सो विशेष अदालत में हलफनामा दर्ज किया है।

क्राइम ब्रांच के आईजी एस श्रीजिथ, जिन्होंने ‘ऑपरेशन बिग डैडी’ को भी लीड किया था और जिसके तहत रैकेट का भांडाफोड़ हुआ। उनके द्वारा कोर्ट में दायर हलफनामे में मॉडल रेस्मी आर नय्यर और राहुल पशुपालन नामक इस दंपत्ति पर आरोप लगाया गया है कि दोनों पति-पत्नी एक ऐसी गैंग की मदद करते थे, जो बच्चों की सप्लाई ‘पेडोफाइल्स’ को करती थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेक्स रैकेट मामले में दायर हुई चार्जशीट में रेस्मी पर आरोप है कि वे नाबालिग लड़कियों को अमीर क्लाइंटों के साथ ‘Paid sex’ के लिए तैयार करती थी। जबकि उसका पति राहुल पशुपालन इस रैकेट के बारे में जानता था और साथ ही इस काम में उसका साथ भी देता था।

गौरतलब है कि इस मामले में पहली दफा एफआईआर साल 2015 में दर्ज हुई थी। जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने इस दंपत्ति को नेदमबेसरी (Nedumbasserry) से पहली बार गिरफ्तार किया था। उस दौरान इनके अलावा चार अन्य लोगों को भी रैकेट में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

इस हलफनामे में इस दंपत्ति द्वारा शुरु किए गए अभियान ‘किस ऑफ लव’ का भी जिक्र किया गया है और कहा गया है कि ये दंपत्ति बंगलुरु से केरल में नाबालिग लड़कियों की तस्करी करती थी। ताकि उन्हें वेश्यावृति में भेजा जा सके। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में इन दोनों के अलावा 11 अन्य लोगों को भी इस चार्जशीट में आरोपित बनाया गया है।

भाजपा ने नहीं, कॉन्ग्रेस की सरकार ने NPR को NRC से जोड़ा था: 9 साल बाद मोदी सरकार ने अलग किया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर (NPR) का एनआरसी से कोई लेनादेना नहीं है। लेकिन, विपक्ष फिर भी बाज नहीं आ रहा। उनका कहना है कि भाजपा का ये क़दम एनआरसी की दिशा में प्रारंभिक क़दम है। असल में न तो एनपीआर भाजपा ने शुरू किया है और न ही पार्टी ने इसे एनआरसी का हिस्सा बताया है। ये दोनों ही काम उसी पार्टी ने किए हैं, जो आज इसका सबसे ज़्यादा विरोध कर रही है। कॉन्ग्रेस ने केंद्र में अपनी सरकार रहते न सिर्फ़ पहली बार एनपीआर को तैयार किया था, बल्कि पार्टी ने इसे एनआरसी से भी जोड़ा था।

हम बता चुके हैं कि एनपीआर का पहला डाटा देश की इकलौती महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का था। 25 जुलाई 2007 से 25 जुलाई 2012 तक वह राष्ट्रपति रही थीं। जुलाई 2012 में जारी की गई प्रेस रिलीज में स्पष्ट बताया गया है कि एनपीआर तैयार करने के लिए जनसांख्यिकीय आँकड़े अप्रैल से सितंबर 2010 के दौरान पूरे देश में घर-घर जाकर गणना कर एकत्रित किए गए थे। इसमें कहा गया था कि एकत्र किए गए एनपीआर आँकड़ों को बॉयोमीट्रिक्‍स के साथ UIDAI के पास यूआईडी संख्‍याओं (आधार) के डि-डुप्‍लिकेशन और अपक्रमण के लिए भेजा जाएगा।

अब आपको बताते हैं कि कैसे कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार ने ही इसे एनआरसी की प्रक्रिया का हिस्सा बताया था। ‘सेंसस इंडिया’ ने अपनी वेबसाइट पर 2011 में बताया था कि ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटीजन्स (NRIC)’ की दिशा में एनपीआर पहला क़दम है। इसमें एनपीआर की प्रक्रिया में शामिल होना भारत में रह रहे लोगों के लिए अनिवार्य बताया गया है। यूपीए-2 सरकार ने बताया था कि एमपीआर में प्रत्येक व्यक्ति के 15 सूचीबद्ध डिटेल्स के अलावा फोटो, फिंगरप्रिंट और आईरिस सहित तीन बायोमेट्रिक डिटेल्स भी होंगे।

‘सेन्सस इंडिया’ की वेबसाइट ने 2011 में ही बताया था कि ये NRC का हिस्सा है

वहीं अप्रैल 2020 से शुरू होने वाली एनपीआर की प्रक्रिया को लेकर गृह मंत्री अमित ने चीजें स्पष्ट करते हुए बताया:

NPR जनसंख्या का रजिस्टर है। देश में जो भी रहते हैं, उनके नाम रजिस्टर किए जाते हैं, जिसके आधार पर अलग-अलग योजनाओं का आकार बनता है। NRC में नागरिकता का प्रमाण माँगा जाता है। इन दोनों प्रक्रिया का कोई लेन-देन नहीं है। NRC का कांसेप्ट राजीव गाँधी लेकर आए थे, आज सोनिया गाँधी उसका विरोध कर रही हैं।

आज वही कॉन्ग्रेस एनपीआर का सबसे ज़्यादा विरोध कर रही है, जिसने कभी इस पूरी प्रक्रिया को पहली बार कराया था। सीताराम येचुरी और प्रकाश करार सरीखे वामपंथी नेता एनपीआर को एनआरसी का दूसरा रूप बता रहे हैं। ओवैसी ने भी इसे एनआरसी की तरफ़ पहला क़दम बताया है। कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन 2018-19 के गृह मंत्रालय की रिपोर्ट देख कर दावा करते हैं कि एनपीआर की प्रक्रिया एनआरसी का अगला क़दम है, लेकिन अपनी ही सरकार के दौरान ‘सेंसस इंडिया’ की वेबसाइट पर कही गई बात को भूल जाते हैं।

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मौलाना हाफिज बहार अली ने मदरसे में 12 वर्षीय छात्रा का किया बलात्कार: FIR दर्ज, आरोपित संचालक फरार

उत्तर प्रदेश के अमरोहा कोतवाली क्षेत्र में मदरसे में नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। गाँव के आवासीय मदरसे में पढ़ने वाली 12 वर्षीय छात्रा के साथ मौलाना ने दुष्कर्म किया। आरोपित की पहचान मदरसा संचालक हाफिज बहार अली के रूप में हुई है, जिसने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया है।

मंगलवार (दिसंबर 24, 2019) को पीड़िता के परिजनों ने थाने पहुँचकर मामले की तहरीर दी है। मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। वहीं दुष्कर्म पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल आरोपित मौलाना फरार है। जानकारी के मुताबिक घटना 20 दिसंबर की रात की है। शिकायत में कहा गया है कि मौलाना ने बहला-फुसलाकर छात्रा को अपने कमरे में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

दैनिक जागरण के लखनऊ संस्करण में प्रकाशित खबर

23 दिसंबर देर शाम को पीड़िता के परिजनों को इसकी जानकारी हुई। जब वो उससे मिलने मदरसा पहुँचे थे। बेटी के साथ मदरसे में दुष्कर्म होने की बात सुनकर परिजनों के होश उड़ गए। पुलिस ने बताया कि कोतवाली क्षेत्र के एक गाँव का है। किसान ने अपनी दो बेटियों को पड़ोसी गाँव में एक आवासीय निजी मदरसे में दीनी तालीम हासिल करने के लिए भेजा था। दुष्कर्म पीड़िता के पिता ने पुलिस को बताया कि 23 दिसंबर को जब वो अपनी पत्नी के साथ मदरसे में बेटियों से मिलने गए तो 12 वर्षीय बेटी अपनी माँ से लिपट-लिपटकर रोने लगी।

रोने की वजह पूछी तो बेटी ने बताया कि 20 दिसंबर की रात वो कमरे में सोई हुई थी। तभी मदरसे का हाफिज वहाँ पहुँचा और बहला-फुसलाकर उसे अपने कमरे में ले गया। वहाँ कमरा बंद करके डरा धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपित मौलाना ने छात्रा को किसी से कहने पर जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता के पिता ने बताया कि जब उन्होंने आरोपित हाफिज से इस संबंध में शिकायत की तो वह मारपीट पर उतारू हो गया। इसके बाद पीड़िता के परिजन ने पुलिस में शिकायत की।

प्रभारी निरीक्षक आरपी शर्मा ने बताया कि मदरसा संचालक हाफिज बहार अली द्वारा छात्रा से दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है। आरोपित हाफिज बहार अली के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपित की तलाश की जा रही है। जल्द ही आरोपित मौलाना को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

बाबा CM तो बेटे को Z सिक्योरिटी: आदित्य ठाकरे की सुरक्षा बढ़ी, सचिन तेंदुलकर की घटी

महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस, एनसीपी के साथ सरकार बनाने के कुछ दिन बाद ही उद्धव सरकार ने वर्ली के विधायक आदित्य ठाकरे की सुरक्षा बढाने और क्रिकेट का भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर की सुरक्षा को घटाने का फैसला लिया है। सचिन के अलावा उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल नाम नाईक की सुरक्षा में भी कटौती की गई है और आदित्य ठाकरे की तरह उद्धव ठाकरे, अन्ना हजारे की सुरक्षा को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। महाराष्ट्र सरकार ने ये फैसला सुरक्षा समिति की बैठक के बाद लिया है।

जानकारी के मुताबिक सुरक्षा समिति की बैठक में कुल 97 लोगों की सुरक्षा की समीक्षा की गई। जिसके बाद 29 लोगों की सुरक्षा में कटौती की गई और 16 लोगों के पास से सुरक्षा हटाई गई। बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से यह निर्णय इंटेलीजेंस की ओर से मिली रिपोर्ट के आधार किया गया है।

मीडिया खबरों के अनुसार मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे की सुरक्षा को जहाँ वाई श्रेणी से अपग्रेड करके जेड सिक्योरिटी प्रदान की गई है। वहीं अभी तक जेड सिक्योरिटी में रहने वाले उत्‍तर प्रदेश के पूर्व राज्‍यपाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम नाईक की सुरक्षा को घटाकर एक्स कर दिया गया है।

इसी तरह कहा जा रहा है कि अभी तक वीआईपी सुरक्षा के तहत सचिन तेंदुलकर के पास जो पुलिसकर्मी तैनात रहता था, उसे हालिया निर्णय के बाद हटा लिया जाएगा और उन्हें केवल एक पुलिस एस्कॉर्ट दिया जाएगा।

गौरतलब है कि नेता और खिलाड़ियों के अलावा देश के नामी वकील उज्‍ज्‍वल निकल की सुरक्षा को भी महाराष्ट्र सरकार ने बैठक के बाद जेड प्‍लस से हटाकर अब वाई कर दिया है। साथ ही भाजपा के वरिष्‍ठ नेता एकनाथ खड़से के पास जो अब तक वाई श्रेणी की सुरक्षा रहती थी, उसमें भी कटौती हुई है, जिसके कारण उनके एस्कॉर्ट को हटा लिया गया है।

वहीं, विधायक आदित्‍य ठाकरे के अलावा जिन लोगों की सुरक्षा में बढ़ोत्‍तरी की गई है, उनमें एक नाम अन्‍ना हजारे का भी है, जिन्‍हें अब तक वाई श्रेणी की सुरक्षा मिलती थी, लेकिन अब उसे जेड कर दिया गया है।

गुजरात: कॉन्ग्रेस MLA जावेद पीरजादा और भिखाभाई दंगों के दोषी, 8 अन्य को भी अदालत ने सुनाई सजा

गुजरात में कॉन्ग्रेस के दो विधायकों को दंगों के मामले में अदालत ने दोषी ठहराया है। आठ अन्य लोगों को भी इस मामले में सजा सुनाई गई है। मामला 2008 का है। राजकोट के कलेक्टर कार्यालय में तोड़फोड़ के मामले में स्थानीय अदालत ने मंगलवार (दिसंबर 24, 2019) को कॉन्ग्रेस के दो विधायकों और एक पूर्व सांसद समेत 10 लोगों को दोषी ठहराते हुए एक साल कैद की सजा सुनाई। साथ ही पाँच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रूपा एस राजपूत ने सजा सुनाई। दोषी करार दिए गए मोहम्मद जावेद पीरजादा वांकानेर से और भिखाभाई जोशी जूनागढ़ से कॉन्ग्रेस विधायक हैं। जिन लोगों को सजा सुनाई गई है उनमें राजकोट ईस्ट के पूर्व कॉन्ग्रेस विधायक इंद्रनील राजगुरु और पूर्व भाजपा सांसद देवजी फतेपारा भी शामिल हैं। दैनिक जागरण के अनुसार दोषी ठहराए गए छह अन्य लोगों में राजकोट जिला दुग्ध सहकारी समिति के अध्यक्ष गोविंद रणपरिया के अलावा कांग्रेस नेता अशोक डांगर, जसवंत सिंह भाटी, महेश राजपूत, भीखू वडोडरिया और गोवर्धन दमेलिया शामिल हैं।

सजा सुनाए जाने के बाद सभी 10 दोषियों को पाँच-पाँच हजार रुपए के मुचलके पर जमानत दे दी गई। भूमि कब्जा मामले में तत्कालीन कॉन्ग्रेस विधायक कुंवरजी बवालिया की गिरफ्तारी के खिलाफ 1500 से ज्यादा लोगों की भीड़ का नेतृत्व कर रहे 179 नेताओं के खिलाफ दिसंबर 2008 में प्रद्युम्न नगर थाने में मामला दर्ज किया गया था। इन पर आरोप था कि इन्होंने दिसंबर 2008 में 1500 लोगों की भीड़ का नेतृत्व करते हुए गिरफ्तार किए गए तत्कालीन कॉन्ग्रेस विधायक कुंवरजी बवालिया को छुड़ाने के लिए उकसाया था।

इन पर आईपीसी की धारा 143, 147, 149, 186,188 और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान करने की धारा 3 एवं 7 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। बवालिया अब भाजपा में शामिल हो गए हैं । दोषी ठहराए गए अन्य लोगों में राजकोट जिला दुग्ध सहकारी अध्यक्ष गोविंद राणापारिया, कॉन्ग्रेस नेता अशोक डांगर, जसवंत सिंह भाटी, महेश राजपूत, भिखू वडोदरिया और गोरधन दामेलिया हैं। 

जेम्स थॉमसन ने किया CT स्कैन के दौरान 40 वर्षीय महिला का यौन उत्पीड़न, शिकायत दर्ज

महाराष्ट्र के उल्हासनगर से एक शर्मनाक खबर आई हैं। यहाँ 24 साल के युवक पर एक 40 साल की महिला का कथित तौर पर उत्पीड़न करने का आरोप लगा है। युवक की पहचान जेम्स थॉमसन के रूप में हुई है। हिल लाइन पुलिस के अनुसार, जेम्स एक स्थानीय अस्पताल में टेक्निशियन के रूप में काम करता है। जहाँ उसे सिटी स्कैन की मशीन ऑपरेट करनी होती हैं।

पुलिस के मुताबिक, जेम्स के ख़िलाफ़ महिला ने शिकायत दर्ज करवाते हुए उसपर आरोप लगाया कि सीटी स्कैन के दौरान जेम्स ने उसका शोषण किया और उसकी तस्वीरें खींचीं।

महिला ने पुलिस को बताया कि सोमवार को वह फुल बॉडी का सीटी स्कैन कराने के लिए अस्पताल गई थी। लेकिन मशीन में जाते समय थॉमस ने उसे बेढंगे तरीके से छुआ और उसकी तस्वीरें ले लीं। जब महिला को असहज महसूस हुआ। तो उसने पुलिस को संपर्क किया और सोमवार की शाम युवक के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाई। जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।

इंडिया टुडे के अनुसार मामले के संबंध के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “महिला ने जेम्स की हरकत के लिए पहले ही अस्पताल में शिकायत कर दी थी। लेकिन हमने मंगलवार को गिरफ्तार किया। अब 27 दिसंबर तक वो हमारी हिरासत में है।” बता दें इस मामले में आगे की पड़ताल जारी है और पुलिस थॉमस के साथ उसके फोन की भी जाँच कर रही है।

गौरतलब है कि महिला के साथ अस्पताल में उत्पीड़न की ये पहली घटना नहीं हैं। इससे पहले अलग-अलग राज्य के कई जिलों से ऐसी खबरे सुनने में आई हैं। जहाँ इलाज के लिए गई महिला का उत्पीड़न किया। साल 2017 में मुंबई में ही एक महिला ने वहाँ के प्रतिष्ठित अस्पताल में भर्ती अपनी बहन के यौन उत्पीड़न के लिए अस्पताल के कर्मचारी पर आरोप लगाया था। जिसके बाद आरोपित पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354 ए के तहत मामला दर्ज किया गया था।

NPR का पहला डाटा किसका: जिसके लिए कॉन्ग्रेसी मंत्री ने कहा था- इंदिरा गाँधी की रसोई सँभालती थी

मोदी कैबिनेट ने मंगलवार (24 दिसंबर 2019) को 2021 में होने वाली जनगणना की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया। इस बाबत राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर (NPR) अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू करने को भी मंजूरी दी गई। पहले चरण में अगले साल अप्रैल-सितंबर तक प्रत्‍येक घर और उसमें रहने वाले व्‍यक्तियों की सूची बनाई जाएगी। असम को छोड़ देश के अन्‍य हिस्‍सों में यह काम होगा। दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 तक जनसंख्‍या की गणना का काम होगा। जनगणना प्रक्रिया पर 8754.23 करोड़ रुपए और एनपीआर को अपडेट करने पर 3941.35 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

एनपीआर को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद से विपक्ष उसी तरह अफवाह फैलाने में जुट गया है जैसा उसने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर किया। जिस तरीके से CAA को NRC से जोड़ा गया, उसी तरह अब NPR को भी NRC से जोड़कर दिखाने की कोशिश हो रही है। जबकि तथ्य यह है नागरिकता कानून 1955 और नागरिकता नियम 2003 के तहत NPR पहली बार 2010 में तैयार किया गया था। आधार से जोड़े जाने के बाद 2015 में इसे अपडेट किया गया था। 2010 में जब इसकी शुरुआत हुई तब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की सरकार हुआ करती थी।

क्या आप जानते हैं कि एनपीआर के तहत सबसे पहले किसका डाटा अपडेट हुआ था? जवाब सुन शायद आप चौंक जाएँ। एनपीआर का पहला डाटा देश की इकलौती महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का था। 25 जुलाई 2007 से 25 जुलाई 2012 तक वह राष्ट्रपति रही थीं।

NPR में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद प्रतिभा पाटिल

6 जुलाई 2012 में राष्ट्रपति भवन में एनपीआर में उनका नाम दर्ज किया गया था। इसके बाद उन्होंने देश के सभी लोगों से सरकार की इस प्रमुख योजना में अपना रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित कराने को कहा था। इस दौरान उनके साथ तब के केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम भी थे। देखे वीडियो;

यदि आपको लगे कि यह वीडियो तो भाजपा के प्रवक्ता ने पोस्ट किया है तो यह प्रेस रिलीज पढ़ लीजिए। भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की साइट पर यह आज भी उपलब्ध है।

इसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया है, “एनपीआर तैयार करने के लिए जनसांख्यिकीय आँकड़े अप्रैल से सितंबर 2010 के दौरान पूरे देश में घर-घर जाकर गणना कर एकत्रित किए गए थे। आँकड़ों का तब से अंकीकरण किया जा रहा था और वर्तमान में बॉयो-मीट्रिक नामांकन का कार्य चल रहा है। एकत्र किए गए एनपीआर आँकड़ों को बॉयोमीट्रिक्‍स के साथ UIDAI के पास यूआईडी संख्‍याओं (आधार) के डि-डुप्‍लिकेशन और अपक्रमण के लिए भेजा जाएगा। सरकार का एनपीआर के अधीन निवासी पहचान (स्‍मार्ट) कार्ड जारी करने का भी प्रस्‍ताव है।” साथ ही कहा गया है कि NPR में पंजीकरण कराना देश के सभी नागरिकों के लिए नागरिकता अधिनियम 1955 और नागरिकता नियम 2003 के अंतर्गत आवश्‍यक है।

6 जुलाई 2012 को राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी बयान का अंश

अब जिनको लगता है कि गॉंधी परिवार का बयान ही शासन है। तो उनके लिए एक और जानकारी। प्रतिभा पाटिल गॉंधी परिवार की बेहद करीबी बताई जाती हैं। कितनी करीबी? कॉन्ग्रेस के ही एक नेता के अनुसार-
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल किसी जमाने में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गाँधी के घर में रसोई सँभालती थीं। इसी वफादारी के नतीजे में सोनिया गाँधी ने उन्हें राष्ट्रपति बना दिया। यह बात फरवरी 2011 में अमीन खान ने राजस्थान के पाली में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही थी। उस समय राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार हुआ करती थी और अशोक गहलोत ही उस समय भी मुख्यमंत्री थे। खान उनकी कैबिनेट में पंचायत और वक्फ राज्यमंत्री हुआ करते थे। अमीन खान ने निष्ठा और समर्पण के उदाहरण के रूप में प्रतिभा पाटिल का हवाला देते हुआ कहा था, ‘जब इंदिरा गाँधी 1977 में चुनाव हारने के बाद प्रधानमंत्री नहीं थी, तब वह (प्रतिभा पाटिल) उनके घर पर रसोई में भोजन बनाती थीं और बर्तन धोती थीं। वह अनुशासित कार्यकर्ता रहीं, इसलिए आज राष्ट्रपति हैं।”

अमित शाह ने बताया किन लोगों के लिए है डिटेंशन सेंटर, कहा- NPR का NRC से कोई संबंध नहीं

1 अप्रैल से NPR: घर-घर जाकर जुटाया जाएगा डाटा, मोदी सरकार ने ₹8500 करोड़ की दी मंजूरी

5 साल का सबसे बड़ा हमला: अरबिंदा में 35 की मौत, जवानों ने 80 आतंकी भी मार गिराए

अफ्रीकी देश बुर्किना फासो के अरबिंदा शहर में एक बड़ा आतंकवादी हमला हुआ। इसमें 35 लोगों की मौत हो गई। सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 80 आतंकवादी भी मारे गए। राष्ट्रपति रोच मार्क काबोर ने ट्विटर के जरिए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि हमले के बाद सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में करीब 80 आतंकवादी मारे गए।

हमले के बाद बुर्किना फासो की सेना ने बयान जारी कर इसे कायरतापूर्ण हमला करार दिया। बताया कि हमले में 8 जवानों की मौत हो गई। सेना ने कहा, “इस कायरतापूर्ण हमले में हमारे 8 जवान भी शहीद हुए हैं। मारे गए लोगों में से ज्यादातर महिलाएँ हैं और कुल 35 लोगों की जान गई है। सुरक्षा बलों के हमारे जवानों ने आतंकियों का पूरे साहस के साथ सामना किया।” मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 5 साल में हुआ यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है।

राष्ट्रपति ने इस आतंकी घटना के बाद देश में 2 दिनों का शोक घोषित किया है। जाँच एजेंसियों की ओर से कहा गया है कि मामले की जाँच चल रही है। अभी तक किसी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

उल्लेखनीय है कि अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में कई आतंकी संगठन सक्रिय हैं और वहाँ खूनी संघर्ष की घटनाएँ कई बार हो चुकी हैं। बुर्किना फासो के पड़ोसी देश माली और नाइजर हैं, जहाँ अक्सर आतंकी हमले होते रहते हैं। इस पूरे इलाके में 2015 के आसपास से आतंकी घटनाओं में इजाफा देखा गया है।

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कमलेश तिवारी मर्डर: 2 पर हत्या और 11 पर साजिश रचने का चलेगा मामला, तनवीर अब भी फरार

हिंदू समाज पार्टी के अध्यश कमलेश तिवारी हत्याकांड में पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस की चार्जशीट में 13 लोगों के नाम है, इन 13 लोगों को हत्या और साजिश रचने का आरोपित बनाया है। पुलिस ने अशफाक और मोइनुद्दीन को कमलेश तिवारी की हत्या का आरोपित बनाया है, जबकि बाकी लोगों को साजिश रचने का आरोपित बनाया है। बता दें कि पिछली कुछ रिपोर्ट में अशफाक की पहचान अशरफ के रूप में हुई थी। 

मुख्य आरोपित अशफाक और मोईनुद्दीन पर हत्या का केस चलेगा। इन दोनों को गुजरात एटीएस ने गिरफ्तार किया था। इसके अलावा गुजरात के सूरत निवासी रशीद अहमद पठान उर्फ राशिद, मौलाना मोहसिन शेख, फैजान यूनुस, इनके मददगार नागपुर के सैय्यद आसिम अली, बरेली के कैफी अली, वकील नावेद, कामरान, लखीमपुर के पलिया निवासी रईस व आसिफ को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस की चार्जशीट में इनके नाम भी शामिल हैं। 

जानकारी के मुताबिक चार्जशीट लखनऊ की एक स्थानीय अदालत में दायर किया गया है। चार्जशीट में आरोपित बनाए गए 13 लोगों में से 11 फिलहाल जेल में हैं। मौलाना कैफी अली रिजवी जमानत पर बाहर है। कैफी को एटीएस ने 21 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। कैफी के जमानत का इंतजाम दरगाह के लोगों द्वारा किया गया था। जाँच एजेंसियों के अनुसार, अशफाक और मोइनुद्दीन का लास्ट लोकेशन बरेली था और बताया गया था कि दोनों तिवारी की हत्या के बाद बरेली में मौलाना कैफी अली रिजवी से मिलने गए थे। हत्यारों का एक अन्य मददगार तनवीर अब तक पुलिस की पकड़ से दूर है। बताया जा रहा है कि उसने हत्यारों को आश्रय दिया था।

गौरतलब है कि लखनऊ के नाका के खुर्शीदबाग की तंग गलियों में रहने वाले हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की 18 अक्टूबर को दो बदमाशों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी। दोनों बदमाश मिठाई के डिब्बे में पिस्टल व चाकू छिपाकर कमलेश के घर की पहली मंजिल पर स्थित दफ्तर पहुँचे थे। आरोपितों ने पहले कमलेश की गर्दन पर गोली मारी। फिर चाकू से ताबड़तोड़ वार करने के बाद गला रेत दिया था। पुलिस ने मौके से एक पिस्टल व एक खोखा बरामद किया था।

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देश में पहली बार… फेक न्यूज फैलाने वालों पर FIR: जामिया नगर, सीलमपुर हिंसा में 100 लोग पुलिस की रडार पर

बीते दिनों देश भर में नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ भड़की हिंसा के पीछे सोशल मीडिया एक बड़ा कारण रहा। लोगों ने इस प्लेटफॉर्म का इस बीच जमकर इस्तेमाल (गलत संदर्भों में) किया और सीएए के खि़लाफ़ लोगों को भड़काने के लिए फर्जी न्यूज फैलाई। अब ऐसी स्थिति में दिल्ली पुलिस ने नागरिकता कानून के बारे में सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार कर रहे लोगों पर लगाम कसने के लिए इस पर बड़ा एक्शन लिया और आरोपितों की शिनाख्त की। दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले में अब तक 100 ऐसे अकाउंट्स की पहचान की है, जिन्होंने विरोध प्रदर्शन से पहले न केवल सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाई बल्कि हिंसा करवाने और दंगे भड़काने का भी काम किया। ऐसा पहली बार हो रहा है कि पुलिस फेक न्यूज फैलाने वालों पर आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर रही है।

गौरतलब है कि पुलिस की रडार में इस समय वे लोग भी हैं, जिन्होंने गैरकानूनी रूप से लोगों को एकत्रित किया और उनको भड़काने का काम किया। खबरों के मुताबिक पुलिस ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को पत्र लिखा है ताकि वे उन 70 अकॉउंट्स को ब्लॉक कर दें, जिन्होंने अपुष्ट खबरों की सच्चाई जाने बिना उसे फैलाने का काम किया और बाद में व्हॉट्सऐप के जरिए प्रदर्शनकारियों को भड़काया। पुलिस का मानना है कि इन्हीं संदेशों के कारण दिल्ली के जामिया नगर और अन्य इलाकों में हिंसा फैली।

अपनी जाँच में पुलिस ने पाया कि सीलमपुर में कम से कम 12 ऐसे व्हॉट्सऐप ग्रुप थे, जिन्हें स्थानीय लोगों द्वारा संचालित किया जा रहा था और जिसमें इंटरनेट से सामग्री कॉपी पेस्ट करके ये संदेश दिया जा रहा था कि पुलिस पर पलटकर हमला करें।

इसके अलावा कई वेबसाइट भी फेक तस्वीर और स्टोरी शेयर करते पुलिस की नजर में आई हैं। इस संदर्भ में पुलिस ने उनके मालिक पर मामला दर्ज किया है। पुलिस ने एजेंसियों ने अपील की है कि वे इस तरह की वेबसाइट्स को ब्लॉक करें।

जानकारी के अनुसार, जामिया नगर में हुई हिंसा के पीछे सोशल मीडिया का बड़ा हाथ था। क्योंकि यहाँ कुछ लोगों ने व्हॉट्सएप के जरिए अफवाह उड़ा दी थी कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को जान से मार रही है और हॉस्टल में घुसकर पीट रही है। यही वो कारण था, जिससे लोग जामिया नगर में सड़कों पर उतर आए। वहीं सीलमपुर में भी किसी ने यूट्यूब की एक फर्जी वीडियो को सर्कुलेट कर दिया था, जिसमें प्रदर्शनकारियों के ऊपर पुलिस की बर्बता दिख रही थी। इसके अलाव दरियागंज में हुए दंगों में भी 10,000 लोगों की भीड़ को व्हॉट्सऐप और फेसबुक के जरिए ही भड़काया गया था।

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