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कय्यूम और अय्यूब ने सेंधमारी करके 100 से अधिक चोरी की वारदातों को दिया अंजाम: बनाई करोड़ों की प्रॉपर्टी

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (6 दिसंबर) को ऐसे दो सगे भाइयों को गिरफ़्तार किया है जो पिछले कुछ समय से यमुनापार इलाक़े में चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहे थे। गिरफ़्तार किए गए आरोपितों की पहचान कय्यूम (30 वर्षीय) और अय्यूब (40 वर्षीय) के रूप में हुई है। दोनों आरोपित नंद नगरी इलाक़े के रहने वाले हैं। पुलिस का कहना है कि दोनों भाइयों ने अब तक पूर्वी दिल्ली में 100 से अधिक चोरी की वारदातों को अंजाम दिया है।

दोनों भाइयों ने चोरी के माल से दिल्ली के कबीर नगर में 47 लाख रुपए और यमुना विहार में 65 लाख रुपए के दो मकान भी ख़रीद लिए थे। इतना ही नहीं, पुलिस ने इनके पास से 27 लाख रुपए नकद, 53 मास्टर की (चाबी), 2.5 किलोग्राम का सोना, 11 घड़ियाँ, 7 मोबाइल फोन और कई होम अप्लाइंसेज बरामद किए हैं। इसके अलावा, इन दोनों की गिरफ़्तारी से चोरी की 64 वारदातों को सुलझाने का दावा भी पुलिस ने किया।

डीसीपी ईस्ट डिस्ट्रिक जसमीत सिंह का कहना है कि कुछ महीनों में दिन में चोरी की कई वारदातों की घटनाएँ सामने आ रही थी। स्पेशल स्टाफ़ की टीम लंबे समय से चाेराें की तलाश में जानकारी जुटा रही थी। कई जगह से सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खँगाली गई, इन फुटेज में आरोपित नज़र आए, लेकिन उनकी पहचान नहीं हो पा रही थी। 

इसके आगे उन्होंने बताया कि शुक्रवार को पुलिस को एक अहम सुराग मिला। एक मुखबिर ने बताया कि इन वारदाताें में शामिल आरोपित कड़कड़डूमा कोर्ट के पास आएँगे। उसके बाद ट्रैप लगाकर दोनों भाइयाें को धर लिया गया। कय्यूम पर 13 केस दर्ज हैं। वहीं, अय्यूम भी एक बार गिरफ़्तार हो चुका है। पुलिस ने बताया कि दाेनाें ने चोरी के पैसाें से खरीदे मकानों की साज-सज्जा पर दिल खोलकर पैसा ख़र्च किया था। 

पुलिस को इस बात का भी पता चला है कि जब दोनों भाई चोरी की वारदात को अंजाम देने जाते थे, तो उस दौरान एक भाई चाेरी करता था और दूसरा बाहर खड़ा रहकर पहरा देता था।

आरोपितों ने पूछताछ के दौरान अपना ज़ुर्म क़बूल करते हुए बताया कि वह दाेनाें यमुनापार इलाक़े में ही चोरी करते थे। अय्यूब चाेरी वाले घराें से कुछ दूर खड़ा होकर बाहर पहरा देता, जबकि कय्यूम घर के अंदर घुस जाता था। वारदात को अंजाम देने से पहले दोनों भाई पड़ोसियों से बातचीत कर खाली घराें की जानकारी जुटाते थे। चोरी के लिए मास्टर की का इस्तेमाल करते थे। इससे पहले, कय्यूम 2015 में पहली बार पकड़ा गया था। उस समय वो चोरी की मंशा से एक लड़की के घर में घुसा था, लेकिन उसके शोर मचाने पर की वजह से वो मौके पर ही पकड़ा गया था।

ख़बर के अनुसार, सेंधमारी के लिए ऐसे घरों का चयन किया जाता था, जो काफ़ी समय से बंद हों और वहाँ कोई रहता न हो। इसके बाद आरोपित उस घर में सेंधमारी करने जाते थे तो अच्छे कपड़े पहनकर जाते थे, जिससे पड़ोसियों को लगे कि वो उस घर के सदस्यों के कोई रिश्तेदार हों।

डॉ रेड्डी के पास बन्दूक होती तो वो भी वही करतीं जो पुलिस ने किया: साइना ने ‘मानवाधिकार पत्रकार’ को लताड़ा

हैदराबाद में डॉक्टर प्रीति (बदला हुआ नाम) गैंगरेप व हत्याकांड के चारों आरोपितों को हैदराबाद पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। घटनास्थल पर क्राइम सीन के रीक्रिएशन के दौरान मोहम्मद आरिफ और जोल्लू शिवा समेत सभी आरोपितों ने पुलिस का बन्दूक छीन कर भागने की कोशिश की और पत्थरबाजी की, जिसके बाद पुलिस को आत्मरक्षा में उन्हें गोली मारनी पड़ी। बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल और पहलवान गीता फोगट सहित कई अन्य सेलेब्रिटीज ने भी हैदराबाद पुलिस की पीठ थपथपाई। एक पत्रकार ने साइना नेहवाल के इस बयान के लिए उनकी आलोचना की, जिसके बाद उन्हें साइना ने करारा जवाब दिया।

विश्व की नंबर एक बैडमिंटन खिलाड़ी रहीं साइना नेहवाल के बयान को बेतुका बताते हुए पत्रकार अन्ना एमएम वेत्तिकाड ने कहा कि इससे उन्हें भले ही तालियाँ मिल जाएँगी लेकिन इससे समाज को काफ़ी हानि होगी। अन्ना ने कहा कि महिलाओं की पॉजिटिव रोल मॉडल होने के बावजूद साइना का इस तरह से बयान देने का दुष्प्रभाव बहुत बड़ा होगा। उन्होंने कहा कि वो साइना से निवेदन करती हैं, भीख माँगती हैं और अनुरोध करती हैं कि किसी भी मुद्दे पर टिप्पणी करने से पहले उसका अच्छे से अध्ययन कर लें।

साइना नेहवाल द्वारा हैदराबाद पुलिस की तारीफ़ किया जाना फ़िल्म समीक्षक वेत्तिकाड को नागवार गुजरा और उन्होंने स्टार बैडमिंटन प्लेयर को भला-बुरा सुना दिया। इसके बाद साइना ने पत्रकार को करारा जवाब दिया। साइना ने स्पष्ट कर दिया कि वो इसीलिए बयान नहीं देती हैं कि लोग तालियाँ पीटें। साइना नेहवाल ने कहा कि पीड़िता डॉक्टर रेड्डी पर जो गुजरी, उसके बारे में उनके पास सोचने तक की भी हिम्मत नहीं है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि इस घटना के होने के बावजूद उन्हें बाद में ख़ुशी तब मिली जब चारों बलात्कारियों को पुलिस ने मार गिराया।

साइना नेहवाल ने पत्रकार अन्ना को कहा कि उनके विचारों से न तो बलात्कारियों के मन में कोई डर बैठेगा और न ही क़ानून बदल जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर इस घटना के समय पीड़िता के पास बन्दूक होती तो वो भी यही करतीं। अगर डॉक्टर रेड्डी के पास बन्दूक होती तो वो भी चारों को मार गिराती। साइना नेहवाल के इस जवाब के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी प्रशंसा की।

अजित पवार ने मुझसे सरकार बनाने के लिए किया था सम्पर्क, पर्दे के पीछे का सारा सच बाहर आएगा: देवेंद्र फडणवीस

पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार (7 दिसंबर) को एक टीवी चैनल को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) नेता अजित पवार ने उनसे भाजपा के साथ सरकार बनाने की माँग की थी और कहा था कि उनके चाचा शरद पवार को उनकी इस प्लानिंग के बारे में पता है।

फडणवीस ने कहा,

“अजित पवार मेरे पास आए और कहा कि वे कॉन्ग्रेस के साथ सरकार नहीं बनाना चाहते हैं, और यह कि तीन दलों वाली सरकार स्थिर नहीं रह पाएगी। उन्होंने कहा था कि इस बारे में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार को अपनी योजनाओं की जानकारी दी थी। इसके अलावा, उन्होंने NCP के उन विधायकों को भी बताया जो उनके सम्पर्क में थे इस बात से भी शरद पवार वाक़िफ़ थे।”

ग़ौरतलब है कि इससे पहले एक साक्षात्कार में शरद पवार ने कहा था कि वह जानते हैं कि अजित पवार, फडणवीस से मिल रहे हैं, लेकिन सरकार बनाने को लेकर उनके बीच क्या बातचीत हो रही थी, इससे वो अनभिज्ञ थे। 

इसके आगे भाजपा नेता फडणवीस ने कहा कि अजित के साथ उनकी चर्चा कुछ दिनों से चल रही थी और ज्यादातर NCP विधायकों को भाजपा से हाथ मिलाने के बारे में जानकारी थी। उनहोंने कहा, “मैं कह सकता हूँ कि अधिकांश विधायक इससे अवगत थे। न केवल वे जो अजित पवार के सम्पर्क में थे, बल्कि मैंने ख़ुद उनमें से कई लोगों से बात की।”

फडणवीस ने बताया कि 1-2 दिनों की बातचीत को अंतिम रूप दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि सरकार बनाने पर कोई भी निर्णय केवल एक दिन की चर्चा से नहीं लिया जा सकता बल्कि उससे पहले से बातचीत करनी होती है। बाद में, NCP ने फडणवीस के दावों का खंडन किया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि अजित पवार अपने हिसाब से आए थे। उन्होंने कहा, “क्या कोई उन्हें कुछ भी करने के लिए मजबूर कर सकता है? वह अपनी मर्ज़ी से आए थे और उनके साथ NCP के कई विधायक भी थे जो उनका समर्थन कर रहे थे।”

यह पूछे जाने पर कि क्या वास्तव में शरद पवार को सब पता था, इस पर फडणवीस ने कहा,

“यह आपको अजित पवार से पूछना होगा। उन्होंने मुझे बताया था कि वो (शरद पवार) जानते थे। मैं केवल यह कह सकता हूँ कि पर्दे के पीछे जो कुछ भी है, वो उचित समय पर सामने आएगा।”

उन्होंने कहा कि अजित के विद्रोह से कुछ समय पहले पीएम नरेंद्र मोदी के साथ शरद पवार की मुलाक़ात के बारे में भी कुछ नहीं बताया गया था। पवार ने कहा था कि मोदी ने उन्हें भाजपा के साथ काम करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।

फडणवीस ने कहा, “बैठक से पहले और उसके दौरान चर्चा हुई थी। यह सही समय पर सामने आएगा।” इसके अलावा, फडणवीस ने यह भी कहा कि सिंचाई घोटाले में अजित पवार को मिली क्लीन चिट से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि भष्टाचार विरोधक शाखा का हलफ़नामा 27 नवंबर का है और उन्होंने 26 नवंबर को इस्तीफ़ा दे दिया था।

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उन्नाव रेप पर भी राजनीति से बाज नहीं आई प्रियंका: बोला झूठ, पुलिस ने खोली पोल

उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की मौत के बाद शनिवार (दिसंबर 7, 2019) दोपहर कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान भी कॉन्ग्रेस नेता अपनी राजनीति करने की आदत से बाज नहीं आई और दावा किया कि पिछले 1 साल में उत्तर प्रदेश के उन्नाव में बलात्कार के 90 से अधिक मामले सामने आए। अब उन्नाव पुलिस प्रियंका गाँधी वाड्रा के झूठे दावे को आईना दिखाने के लिए सामने आई है।

उन्नाव के पुलिस अधीक्षक ने इंडिया टुडे से बात की और दावा किया कि उन्नाव में पिछले एक साल में बलात्कार के 51 मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में 90 मामले दर्ज नहीं हुए, जैसा कि प्रियंका गाँधी वाड्रा ने दावा किया था।

उन्नाव के एसपी विक्रांत वीर ने इंडिया टुडे को बताया, “उन्नाव जिले के अंतर्गत आने वाले पुलिस थानों में 1 जनवरी से 30 नवंबर तक बलात्कार के 51 मामले दर्ज किए गए हैं। 2018 में बलात्कार के 24 मामले दर्ज किए गए। इसके साथ ही 2017 में 54, 2016 में 37 और 2015 में 39 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए।”

कॉन्ग्रेस पार्टी की नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा ने कहा था, “इस साल उन्नाव जिले से बलात्कार के लगभग 90 मामले सामने आए हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं और सरकार अपराधियों को बचाने में व्यस्त है। यूपी के सीएम को अपने कार्यालय में महिलाओं के लिए एक हेल्पलाइन सेट अप करना चाहिए जो किसी भी शिकायत पर तेजी से कार्रवाई कर सके।”

ऐसे समय में जब देश भर से भयावह बलात्कार के मामले सामने आ रहे हैं, तब एक राजनीतिक पार्टी द्वारा सिर्फ एक ही मामले के बारे में बात करना उनकी कुटिलता को दर्शाता है। यह पार्टी सिर्फ इस मामले में ही बात करती है, क्योंकि यह राज्य (उत्तर प्रदेश) विपक्षी पार्टी द्वारा शासित है। दरअसल सरकार के बाहर रहकर सरकार के ऊपर दोषारोपण करना बेहद आसान होता है। और यही काम कॉन्ग्रेस पार्टी ने अब तक किया और अब भी कर रही है।

चूँकि, इनकी पार्टी आज विपक्ष में हैं इसलिए सत्ता पक्ष द्वारा शासित राज्य को टारगेट कर रही हैं, वो भी रेप के मुद्दे पर। लेकिन शायद यह भूल रही हैं कि 16 दिसंबर 2012 को जब देश को झकझोर देने वाला निर्भया रेप कांड हुआ था, तब इनकी ही सरकार थी।

उल्लेखनीय है कि उन्नाव में पीड़िता को गुरुवार (दिसंबर 5, 2019) की सुबह केरोसिन तेल डालकर आग लगा दी गई थी। बता दें कि पीड़िता को जलाने वाले आरोपित वही लोग हैं, जिन्होंने उनका बलात्कार किया था। आरोपितों से बचने के लिए पीड़िता 1 किलोमीटर तक जलते हुए भी बदहवास अवस्था में भागती रहीं। यहाँ तक कि उसने 112 नंबर पर पुलिस को भी कॉल किया था। जब पुलिस मौके पर पहुँची, तब तक वह 90 प्रतिशत जल चुकी थीं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को उन्नाव बलात्कार पीड़िता के परिवार के लिए 25 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। इसके अलावा पीड़िता के परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक घर देने की भी घोषणा की गई। उन्होंने पीड़िता के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सभी अपराधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाकर कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

₹25 लाख, 2 मकान, लाइसेंसी हथियार, नौकरी, 24 घंटे सुरक्षा: सरकार ने मानी पीड़ित परिवार की सभी माँगें

उन्नाव गैंगरेप पीड़िता को जला कर मार डालने के बाद परिवार ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था। उनकी कुछ माँगे थीं, जिस पर वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आश्वासन चाहते थे। अब ख़बर आई है कि पुलिस ने उनकी माँगों को मान लिया है। पीड़िता के परिवार को मुआवजे के रूप में 25 लाख रुपए दिए जाएँगे। पुलिस कमिश्नर ने जानकारी देते हुए बताया कि पीड़िता की बहन को सरकारी नौकरी दी जाएगी। साथ ही पीड़ित परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान दिया जाएगा। परिवार की सुरक्षा का भी बंदोबस्त किया गया है। पीड़ित परिवार के घर पर भी पुलिस को तैनात किया जाएगा।

माँगों को माने जाने के बाद परिवार पीड़िता का अंतिम संस्कार करने पर राज़ी हो गया। परिवार को कुल 2 मकान दिए जाएँगे। पहले से जो मकान है, उसे पक्का किया जाएगा। लड़की की बहन को सुरक्षा देने के आलावा घर पर भी 24 घंटे सुरक्षा दी जाएगी। आर्म्स एक्ट के तहत पीड़िता के भाई को हथियार रखने की अनुमति दी जाएगी। हथियार का लाइसेंस भी उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। परिवार के राजी होने के साथ ही पीड़िता के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए जे जाया गया। इस दौरान पुलिस बल मुस्तैदी से तैनात था।

पीड़िता के शव को दफनाया गया क्योंकि उसके भाई ने पहले ही कह दिया था कि 90% से भी अधिक शरीर जलने के बाद अंतिम संस्कार के लिए जलाने को कुछ बचा ही नहीं है। इससे पहले परिवार ने कहा था कि जब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ख़ुद मौके पर आकर आश्वासन नहीं देते, तब तक अंतिम संस्कार नहीं होगा। पीड़िता के भाई ने अपनी बहन के लिए स्मारक बनाने की बात भी कही है। उसे गाँव के बाहर परिवार की ज़मीन में ही दफनाया गया।

पुणे से कुछ रिश्तेदारों के पहुँचने के बाद अंतिम संस्कार किया गया। पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचे नेताओं का भी विरोध हुआ। स्थानीय सांसद साक्षी महाराज और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का लोकल लोगों ने विरोध किया। लोगों ने नाराज़गी जताई। पूरे उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है।

रात के 10 से सुबह के 6 बजे तक महिलाओं को FREE में ड्रॉप करेगी पुलिस: कर्नाटक में सराहनीय पहल

इन दिनों महिलाओं की सुरक्षा देश के लिए अहम सवाल बना हुआ है। आए दिन महिलाओं के साथ रेप की घटनाएँ सामने आ रही है। महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ रही अपराध की घटनाओं को देखते हुए कर्नाटक की बीजेपी सरकार ने बड़ा फैसला लिया। 

कर्नाटक की गडग पुलिस ने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच महिलाओं के लिए मुफ्त ड्रॉप सेवा शुरूआत की है। गडग के एसपी श्रीनाथ जोशी कहते हैं कि इस समय के बीच महिलाएँ किसी भी पुलिस स्टेशन या टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकती हैं। पुलिस उन्हें पिक कर लेगी और उन्हें उनके निर्धारित स्थानों तक सुरक्षित पहुँचाएगी। रात 10 से सुबह 6 बजे तक कोई भी महिला इस सुविधा का लाभ उठा सकती है।

कर्नाटक पुलिस का यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब देश में एक के बाद एक महिलाओं के साथ रेप और बर्बर तरीके से हत्या के मामले सामने आ रहे हैं। पूरे देश में इन घटनाओं के कारण रोष व्याप्त है। कर्नाटक पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए मुफ्त ड्रॉप सेवा शुरू करके ये दिखाया है कि वो महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कितने सतर्क एवं चिंतित हैं। पुलिस का यह कदम वाकई काफी सराहनीय है। वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधियों को तो पुलिस सजा देती ही है, लेकिन अपराध होने की नौबत ही न आए, इसके लिए ये कदम उठाकर कर्नाटक पुलिस ने मिसाल पेश की है।

इससे पहले केंद्र की मोदी सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया था। इसमें कहा गया था कि महिला सुरक्षा को लेकर देशभर के सभी थानों में महिला डेस्क बनाए जाएँगे। इन थानों के लिए गृह मंत्रालय ने निर्भया फंड से 100 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जाएगी। गृह मंत्रालय ने पुलिस स्टेशनों में महिला हेल्प डेस्क बनाने की योजना को मंजूरी देते हुए इसके लिए निर्भया फंड से 100 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की है।

पुलिस स्टेशनों को महिलाओं के अनुकूल और पहुँच योग्य बनाने के लिए महिला सहायता डेस्क बनाने का फैसला लिया गया है। इससे कोई भी महिला पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायक महिला डेस्क पर कर सकेंगी। इस डेस्क पर अनिवार्य रूप से महिला पुलिस अधिकारियों को तैनात किया जाएगा।

महिला हेल्प डेस्क के अधिकारियों को महिलाओं के प्रति संवेदनशील होने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। ये हेल्प डेस्क कानूनी सहायता, परामर्श, आश्रय, पुनर्वास और प्रशिक्षण आदि की सुविधा देने के लिए वकीलों, मनोवैज्ञानिकों, गैर सरकारी संगठनों और विशेषज्ञों के पैनल को सूचीबद्ध करेगी. इन सभी का इस्तेमाल महिलाओं को मदद करने में किया जाएगा।

बाल ठाकरे मेमोरियल के लिए कटेंगे 1000 पेड़: मेट्रो प्रोजेक्ट रोकने वाली शिवसेना का दोहरा रवैया

देवेंद्र फडणवीस सरकार के रहते जब मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट के लिए आरे जंगल में पेड़ों को काटा जा रहा था, तब आदित्य ठाकरे ने उसका विरोध किया था। शिवसेना ने सत्ता संभालते ही मेट्रो प्रोजेक्ट को रोकने की घोषणा की और इसकी समीक्षा की बात कही। उद्धव ने मुख्यमंत्री बनते ही घोषणा करते हुए कहा कि मेट्रो नहीं रुकेगा लेकिन आरे में अब पेड़ तो क्या, एक पत्ता भी नहीं काटा जाएगा। पर्यावरण एक्टिविस्ट्स ने इसका स्वागत किया। अब ख़बर आई है कि मराठवाड़ा के औरंगाबाद में बाल ठाकरे मेमोरियल के लिए 1000 पेड़ों को काटा जाएगा।लोग इसे शिवसेना का दोहरा रवैया बता रहे हैं।

बाल ठाकरे शिवसेना का संस्थापक थे। औरंगाबाद के प्रियदर्शिनी पार्क में उनका मेमोरियल बनाया जा रहा है। औरंगाबाद म्युनिसिपल कॉपोरेशन (AMC) इसके लिए 1000 पेड़ों को काट कर वहाँ से हटाना चाहती है। औरंगाबाद नगरपालिका पर फ़िलहाल शिवसेना का ही कब्ज़ा है। 17 एकड़ में फैला प्रियदर्शिनी पार्क औरंगाबाद के बीचोंबीच स्थित है। यह एक घने जंगल की तरह है। लोग यहाँ टहलने, जॉगिंग करने या हरियाली के बीच अपना समय व्यतीत करने के लिए आते हैं। इस पार्क का इस शहर के लिए ख़ासा महत्व है। कई जीव-जंतुओं ने भी यहाँ अपना बसेरा बना रखा है।

प्रियदर्शिनी पार्क को पक्षियों की 70 प्रजातियों के अलावा तितलियों की 40 प्रजातियों ने अपना बसेरा बनाया हुआ है। इसके अतिरिक्त यहाँ कई रेप्टाइल्स और छोटे जानवर भी रहते हैं। जाहिर है, पेड़ों को काटना इन जानवरों के घरों को तोड़ने जैसा होगा। शिवसेना यहाँ बाल ठाकरे का एक विशाल मेमोरियल बनाने की योजना बना रही है। साथ ही एक बड़ा गैलरी और थिएटर भी बनाया जाएगा। शिवसेना के नियंत्रण वाली औरंगाबाद म्युनिसिपल कारपोरेशन ने एक फूड कोर्ट और एक म्यूजियम के निर्माण की भी योजना तैयार की है।

3 एकड़ में बनने वाले मेमोरियल के निर्माण में कुल 61 करोड़ रुपए ख़र्च आएँगे। पेड़ों को काटने के ख़िलाफ़ अदालत में पीआईएल दाखिल करने वाले सन्नी खिनवसरा ने कहा कि एएमसी ने कोर्ट में डाले गए एफिडेविट में स्पष्ट नहीं बताया है कि कितने पेड़ काटे जाएँगे और कहा है कि कम से कम पेड़ों को काटा जाएगा। एएमसी ने एक स्थानीय अख़बार में 330 पेड़ काटने के लिए टेंडर आमंत्रित किया है। उन्होंने बताया कि ये पार्क एएमसी ने सिटी एंड इंडसट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (CIDCO) से लिया और तब से इसकी हालत बदतर होती जा रही है।

अब तक एएमसी 1200 पेड़ों को काट चुकी है। पर्यावरणविदों ने माँग की है कि आरे की तरह औरंगाबाद में बाल ठाकरे मेमोरियल का काम भी रोका जाए। इससे पहले आरे में मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर पेड़ काटने पर शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय के माध्यम से कहा गया था कि पेड़ों के पास मताधिकार नहीं होते हैं, इसीलिए उन्हें काटा जाता है। शिवसेना ने पूछा था कि ‘पेड़ों की हत्या’ को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप क्यों हैं? लेकिन अब शिवसेना खुद ही पेड़ कटवाने जा रही है।

17 साल की गोद ली गई बेटी, बाप पर यौन शोषण का आरोप और प्राइवेट पार्ट कटी हुई लाश: मुंबई केस सॉल्व

मुंबई पुलिस ने शनिवार (7 दिसंबर) को 59 साल के बुज़ुर्ग की हत्या और उनके शरीर के अंगों को काटने, बैग में भरने के बाद नदी में फेंकने के ज़ुर्म में एक नाबालिग समेत दो लोगों को गिरफ़्तार किया।

पुलिस के हाथों जिस वक़्त यह सूटकेस लगा, तो उन्हें उसमें आदमी के पैर, एक हाथ और प्राइवेट पार्ट मिला। खोजबीन के बाद पता चला कि आरोपित कुमारी आराध्या जितेंद्र पाटिल उर्फ़ ​​रिया (19) और उसके 16 वर्षीय प्रेमी ने मिलकर 27 नवंबर को मुंबई के वकोला में द्वारका कुंज में स्थित अपने घर पर चाकू और बाँस की छड़ी से बेनेट रेबेलो की हत्या कर दी थी।

लड़की और उसके प्रेमी ने बेनेट रेबेलो पर मच्छर मारने की दवा का छिड़काव भी किया था क्योंकि वह चाकू मारे जाने के बाद भी जीवित थे। लेकिन, इस पूरे प्रकरण में ट्विस्ट तब आया जब पुलिस को अपनी छानबीन में पता चला कि बेनेट रेबेलो ने रिया को गोद लिया था और उसका यौन शोषण भी किया था। इसके अलावा बेनेट रेबेलो अपनी गोद ली हुई बेटी के नाबालिग प्रेमी को लेकर भी काफ़ी नाराज़ थे।

रिया और उसके नाबालिग प्रेमी ने 27 नवंबर को बेनेट रेबेलो की हत्या कर दी। उन्होंने बेनेट रेबेलो को मारने के लिए एक चाकू और बाँस का इस्तेमाल किया था। लेकिन वह चाकू मारे जाने के बाद भी साँस ले रहे थे। इसके बाद दोनों ने मिलकर बेनेट पर मच्छर मारने वाले स्प्रे का छिड़काव किया।

एक बार जब दोनों को यह विश्वास हो गया कि बेनेट रेबेलो मर चुके हैं, तब उन्होंने उनके शरीर के अंगों को काटने के लिए गर्म चाकू का इस्तेमाल किया। उन्होंने ने बेनेट रेबेलो के शव को टुकड़ों-टुकड़ों में काटा और एक सूटकेस समेत 3 बैग में उसे रख दिया। इसके बाद सूटकेस को मुंबई के मीठी नदी में फेंक दिया

आरोपितों ने शव को नदी में बहाने के लिए 3 दिन लगाए। सूटकेस में बेनेट रेबेलो का एक पैर, हाथ और प्राइवेट पार्ट मिला। मीठी नदी से सूटकेस बरामद होने के बाद इस मामले की जाँच के लिए मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 5 टीम का गठन किया और उसने पूरे मामले की गुत्थी को सुलझा लिया।

इस मामले को सुलझाने के लिए पहले सुराग के रूप में पुलिस के हाथों एक स्वेटर लगा। इसका इस्तेमाल शरीर के अंगों को ढकने के लिए किया गया था। इस स्वेटर पर जो स्टिकर लगा हुआ था, वो कुर्ला स्थित अल्मो मेन्स वियर दुकान का था। पुलिस जब इस दुकान पर पहुँची तो वहाँ से बेनेट के नाम पर एक रसीद मिली।

मुंबई पुलिस ने आगे की जाँच के लिए सोशल मीडिया पर इसकी तलाश की और बेनेट नामक शख्स को फेसबुक पर ढूँढ लिया। बेनेट की मैरून कलर की एक तस्वीर भी मिली, जो सूटकेस में मिले स्वेटर से मेल खाती थी। इन सबूतों के आधार पर पुलिस ने तय किया कि यह शख़्स बेनेट रेबेलो ही है। रेबेलो का विजिटिंग कार्ड उनके एक फेसबुक पोस्ट पर मिला, जिसके माध्यम से पुलिस उनके घर तक पहुंँच गई, लेकिन वो घर बंद था।

पुलिस ने आगे जाँच की तो पता चला कि वो पिछले 10 दिनों से ग़ायब थे। इसके अलावा, पुलिस को यह भी पता चला कि रेबेला एक गिटार वादक थे और स्थानीय क्लब में गिटार भी बजाते थे।

अपनी जाँच के दौरान मुंबई पुलिस को जल्द ही पता चल गया कि रेबेलो ने रिया नाम की एक लड़की को गोद लिया था, जिसका एक प्रेमी था। पुलिस ने रिया और उसके प्रेमी के साथ लगातार पूछताछ की। पूछताछ के दौरान लड़की ने आरोप लगाया कि रिबेलो ने उनका यौन शोषण किया और उनके प्रेम संबंधों का विरोध किया था।

ख़बर के अनुसार, डीसीपी डिटेक्शन, शाहजी उमाप ने कहा,

“हम अभी इस वीभत्स अपराध की जाँच कर रहे हैं कि यह एक सुनियोजित हत्या थी या नहीं! आरोपित (रिया) को दो साल पहले ही रेबेलो ने गोद लिया था। उसके माता-पिता घाटकोपर स्थित असल्फा में रहते हैं। नाबालिग आरोपित (प्रेमी) असल्फा में उसका पड़ोसी था।”

मुंबई पुलिस को एक सुटकेस तो मिल चुका था, लेकिन बाकी के बैग अभी तक नहीं मिले, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है। फ़िलहाल, पुलिस हत्या के पीछे के कारणों का पता नहीं लगा सकी है। 

वहीं, पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि मृतक के प्राइवेट पार्ट को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त किया गया था। मृतक बेनेट के बारे में पता चला है कि वो वकोला में अकेला रहता था, उन्होंने दो बार शादी की थी लेकिन दोनों ही पत्नियों से उनका तलाक हो गया था।

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हैदराबाद में महिला वेटनरी डॉक्टर से गैंगरेप के बाद हत्या करने के सभी आरोपितों को तेलंगाना पुलिस ने शुक्रवार (दिसंबर 6, 2019) को एनकाउंटर में मार गिराया था। इस एनकाउंटर को लेकर भले ही कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हों, लेकिन तेलंगाना के मंत्री ने इसे जायज ठहराया है। उन्होंने कहा कि जो कोई भी इस तरह के क्रूर अपराध को अंजाम देता है, उसके दिमाग में अब इस तरह के एनकाउंटर का डर हो सकता है। मंत्री ने कहा कि यह एक तरह का संदेश है। उन्होंने कहा कि अगर आपका आचरण गलत है, तो आप किसी भी अदालती मुकदमे, जेल की सजा या बाद की जमानत का लाभ नहीं उठा सकेंगे, क्योंकि हम ऐसा होने ही नहीं देंगे। इस एनकाउंटर के माध्यम से हम संदेश देना चाहते हैं कि जो कोई भी क्रूर और गलत है, उसका एनकाउंटर होगा।

राज्य के पशुपालन मंत्री तलसानी श्रीनिवास यादव ने द संडे एक्सप्रेस से बात करते हुए पहली बार इस एनकाउंटर में सरकार की कथित भूमिका पर बोला। उन्होंने कहा कि यह एनकाउंटर पूरे देश के लिए संदेश है। आगे उन्होंने कहा कि सरकार पर तत्काल कार्रवाई के लिए दबाव था। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था पर संदेह जाहिर करते हुए कहा कि अगर अदालती प्रक्रिया से न्याय होता तो इसमें काफी लंबा समय लगता। उनका कहना है कि भारतीय न्यायिक प्रक्रिया लंंबे समय तक चलती है।

एनकाउंटर को लेकर उन्होंने कहा, “इसका क्रेडिट मुख्यमंत्री को जाता है।” उन्होंने संडे एक्सप्रेस को बताया कि क्राइम सीन को रिक्रिएट करना और फिर एनकाउंटर करना ‘ऊपर’ से अनुमति के बिना नहीं हुई होगी। यह पूछे जाने पर कि क्या शीर्ष नेतृत्व की जानकारी के बिना एनकाउंटर हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि 100% क्राइम सीन को रिक्रिएट करना ‘ऊपर’ के निर्देश से हुआ। उन्होंने कहा कि तेलंगाना राज्य तत्काल कार्रवाई करने में बहुत तेज है।

आगे यह पूछे जाने पर कि क्या यह कहा जा सकता है कि एनकाउंटर के लिए सीएम की अनुमति थी, उन्होंने कहा, “अनुमति नहीं, लेकिन जब पुलिस को कार्रवाई करनी है, तो हम क्या कर सकते हैं? अनुमति नहीं थी, लेकिन तत्काल कार्रवाई के लिए दबाव था।” बलात्कार के आरोपितों के एनकाउंटर हत्या के बारे में बात करते हुए वह कहते हैं, “मैं बहुत खुश हूँ। पूरे भारत में लोग खुश हैं। मैं इस मंत्रिमंडल का हिस्सा बनकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ।” उन्होंने कहा कि यह पूरे भारत के लिए एक संदेश है। 

तलसानी श्रीनिवास यादव ने आगे कहा कि 16 दिसंबर को दिल्ली में हुए सामूहिक बलात्कार के सात साल हो चुके हैं। लेकिन आज तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ है। यह केस भारत के साथ-साथ पूरे विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण मामला था। इससे यह संदेश जाता है कि देश में कोई कानून-व्यवस्था नहीं है। लोग जेल जाते हैं, बाहर आते हैं और फिर से अपराध करने का मौका मिलता है। भारत में यही हालत है। इसलिए इस मामले में यह (एनकाउंटर) पूरे भारत में एक मजबूत संदेश है।

यह पूछे जाने पर कि क्या इस दबाव ने सरकार को मजबूर किया, उन्होंने कहा, “हाँ, हाँ, यह पूरे भारत से महसूस किया गया था। यह घटना सभी के लिए एक झटका थी। तेलंगाना पुलिस बहुत मजबूत है। पूरे भारत में हैदराबाद पुलिस बहुत मजबूत है।” तेलंगाना मंत्री ने बताया कि कैसे बसपा प्रमुख मायावती और दिल्ली सामूहिक बलात्कार पीड़िता निर्भया की माँ ने एनकाउंटर के बाद तेलंगाना सरकार की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा, “कल, पूरे भारत में यह एकमात्र राष्ट्रीय समाचार था।”

वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सहित मानवाधिकार समूहों द्वारा उठाई गई चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “ऐसे लोग (कुछ भी) कह सकते हैं। (पीड़ित के) परिवार के बारे में क्या? वे उन्हें क्या बोलेंगे?” यादव ने इस बात पर भी संदेह व्यक्त किया कि अगर न्यायिक प्रक्रिया से चारों आरोपित गुजरे होते तो क्या न्याय मिलता? उन्होंने कहा, “इसका कोई अंत नहीं होगा। भारतीय कानून, भारतीय न्यायिक प्रक्रिया… हमेशा के लिए चलेगी। पूरे भारत के लोग जानते हैं कि भारतीय न्यायपालिका में बहुत देरी होती है, जिसकी वजह से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहाँ तक कि निर्भया की माँ ने भी इस पर नाराजगी जताई। यही है भारतीय कानून है। अभी इसमें काफी बदलाव की आवश्यकता है। लोगों को इसके बारे में सोचना होगा।”

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CM कमलनाथ के साथ व्यापम घोटाले का मास्टरमाइंड, दिग्विजय सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले का मुख्य आरोपित जगदीश सागर शनिवार (7 दिसंबर) को एक स्कूली कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ बैठा दिखा। इस कार्यक्रम में, कमलनाथ के अलावा उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भाग लिया था। इस घोटाले के सामने आने के बाद जगदीश सागर को 2013 में मुंबई की एक होटल से इंदौर क्राइम ब्रांच ने गिरफ़्तार किया था।

ख़बर के अनुसार, सूट पहने और काले रंग का सनग्लास पहने हुए जगदीश सागर ने शुरुआत में मीडियाकर्मियों के कैमरों को हटाने की कोशिश की और बाद में कार्यक्रम स्थल से चले गए। उल्लेखनीय रूप से, कॉन्ग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनावों के दौरान व्यापम में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को लेकर पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार पर निशाना साधा था। इसके बाद, सागर को बहुजन समाज पार्टी ने भिंड ज़िले में गोहद विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारा था। सागर को व्यापम घोटाले के मास्टरमाइंड के रूप में जाना जाता है और इस मामले में उनकी गिरफ़्तारी भी हुई थी

व्यापम घोटाला मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षाओं में अनियमितता के लिए जाना जाता है। यह घोटाला 2013 में सामने आया था और इस घोटाले ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था के मूल को हिला कर रख दिया था। इसमें राजनेताओं, वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों सहित कई घोटालेबाज़ शामिल थे। इंदौर की क्राइम ब्रांच ने 20 ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ मामला दायर किया था। इन मामलों में परीक्षा देने वाले छात्र की जगह किसी और ने परीक्षा दी थी। इसके अलावा, परीक्षा हॉल में बैठने की व्यवस्था में हेरफेर करना और अधिकारियों को रिश्वत देकर जाली उत्तर पुस्तिकाओं की आपूर्ति करने की व्यवस्था भी इस घोटाले में शामिल था।

जगदीश सागर जो कि एक चिकित्सक भी हैं, उनके ऊपर प्री-मेडिकल टेस्ट में धाँधली करने और सैकड़ों छात्रों को अनुचित साधनों के माध्यम से परीक्षा देने में मदद करने का आरोप लगा हुआ है। अपने चुनावी हलफ़नामे में, उनके ख़िलाफ़ दर्ज आपराधिक मामलों में, सागर ने कई मामलों का उल्लेख किया है, इनमें मध्य प्रदेश प्री मेडिकल टेस्ट (MPMT) घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के दर्ज मामले शामिल हैं।

प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले साल जगदीश सागर के ख़िलाफ़ आरोपों की जाँच के बाद खुलासा किया था कि जगदीश सागर ने अवैध रूप से PMT-2012, पूर्व-पीजी परीक्षा-2012, PMT-2013 में गड़बड़ी का सहारा लेकर धन अर्जित किया था। उन्होंने अपनी अवैध कमाई को नियमित रूप से बैंक में जमा किया था और विभिन्न सम्पत्तियों का अधिग्रहण किया था।

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