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उन्नाव रेप और अपहरण केस के दोषी कुलदीप सेंगर को उम्र क़ैद, ₹25 लाख का जुर्माना

उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित उन्नाव रेप मामले के दोषी कुलदीप सेंगर को दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट ने उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है, साथ ही 25 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया गया है। जिस समय कुलदीप सेंगर को सज़ा सुनाई गई, उस दौरान उसने जज के सामने हाथ जोड़ दिए।

ख़बर के अनुसार, सेंगर के दस्तावेज़ों के आधार पर उसकी कुल चल और अचल सम्पत्ति 44 लाख रुपए आँकी गई। सुनवाई के दौरान सेंगर के वकील ने कहा कि इसका मूल्य फ़िलहाल घट चुका है, क्योंकि उनकी कार की क़ीमत कम हो चुकी है। साथ ही वकील ने यह भी कहा कि आँकी गई सम्पत्ति का मूल्य अभी और कम होगा क्योंकि सेंगर की बेटी का दाखिला मेडिकल में कराया गया है। मेडिकल की फ़ीस देने के बाद सेंगर की रक़म और कम हो जाएगी।

दूसरी तरफ़, रेप पीड़िता के वकील ने पीड़िता का माली हालत पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पीड़िता का घर पूरी तरह से टूट चुका है। पीड़िता के पिता के पास तीन भाइयों के बीच कुल तीन बीघे ज़मीन है। पीड़िता के वकील ने कहा कि कुलदीप सेंगर ने अपने अपराध को छिपाने के लिए पीड़िता पर न सिर्फ़ केस वापस लेने का दबाव बनाया बल्कि एक विधायक के तौर पर डराया-धमकाया भी।

ग़ौरतलब है कि दिल्ली की एक अदालत ने 16 दिसंबर को कुलदीप सिंह सेंगर को बलात्कार के आरोप में दोषी करार दिया था। उसे दुष्कर्म और अपहरण के आरोप में दोषी ठहराया गया। तीस हजारी कोर्ट ने इस मामले में मंगलवार (दिसंबर 10, 2019) को ही फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था।

सेंगर को भाजपा ने पहले ही निष्कासित कर दिया था। उस पर 2017 में उन्नाव की एक लड़की को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप था। ढाई साल से चल रहे इस मामले में पीड़िता के परिजनों को भी काफ़ी कुछ झेलना पड़ा।

पीड़िता ख़ुद अभी दिल्ली एम्स में भर्ती है। वहीं, उसके चाचा, चाची और मौसी की मौत हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केस को लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर किया गया था। 5 अगस्त से ही नियमित सुनवाई शुरू कर दी गई थी। सुनवाई बंद कमरे में हो रही थी। इस दौरान अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों और बचाव पक्ष के 9 गवाहों के बीच जिरह हुई।

कोर्ट ने भाजपा के निष्कासित नेता कुलदीप सेंगर पर आपराधिक षड्यंत्र, अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप तय किए थे। फिलहाल, वह तिहाड़ जेल में बंद है। अदालत ने मामले में सह आरोपी शशि सिंह के खिलाफ भी आरोप तय किए थे। वह लड़की को सेंगर के पास लेकर गई थी। कोर्ट ने शशि सिंह को बरी कर दिया है। शशि ने कोर्ट में ख़ुद को पीड़ित बताया था।

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फिरोजाबाद में पुलिस पर फायरिंग, इंस्पेक्टर की पिस्टल छीनी: जुमे की नमाज के बाद UP में एक दर्जन+ शहरों में बवाल

नागरिकता कानून के विरोध में उत्तर प्रदेश में फिर से विरोध-प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। जिन शहरों से हिंसक वारदातों की रिपोर्ट आ रही है, उनमें प्रमुख हैं – फिरोजाबाद, हापुड़, कानपुर, बहराइच, सीतापुर, गोरखपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, अलीगढ़, बलरामपुर, बिजनौर, गोंडा और हमीरपुर।

उत्तर प्रदेश में जैसा सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा था, बिल्कुल वैसा ही हुआ। जुमे की नमाज के बाद CAA के विरोध की आड़ में उग्र भीड़ ने इन शहरों में पुलिस के साथ झड़प की और जगह-जगह पथराव से लेकर आगजनी की। यही कारण था कि प्रशासन ने गुरुवार की रात 10 बजे से ही राज्य के 15 जिलों में इंटरनेट को बंद कर दिया था।

अलीगढ़ में स्थित शाह जमाल ईदगाह पर उग्र हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर भी पथराव किया। इसके जवाब में पुलिस ने भी प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करके उन्हें तितर-बितर किया। सबसे बुरी खबर फिरोजाबाद जिले से आई है। यहाँ पर भीड़ ने पुलिस की 12 गाड़ियों जला दिया। पुलिस चौकी को भी आग के हवाले कर दिया। इस दौरान पुलिस पर फायरिंग भी की गई।

फिरोजाबाद के नालबंद पुलिस चौकी में दंगाईयों ने आग लगा दी। इसके बाद कानपुर हाईवे पर कब्जा भी कर लिया। जब पुलिस यहाँ पहुँची और उपद्रवियों को शांत करना चाही तो उन पर ही फायरिंग की गई। इन दंगाईयों ने इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार सिंह को घेरकर उनकी पिस्टल भी छीन ली। यहाँ पर इंस्पेक्टर सिंह सहित तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

वहीं दूसरी ओर बुलंदशहर में लगभग 10000 की भीड़ ने नमाज के नारेबाजी और प्रदर्शन शुरू की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जब रोकने की कोशिश की तो उन पर पथराव किया गया। यहाँ भी पुलिस पर फायरिंग की गई। जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की। हालाँकि अभी किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

दंगों से कुछ तस्वीरें, जो बताती हैं पुलिस वाले भी चोट खाते हैं, उनका भी ख़ून बहता है…

कॉन्ग्रेस कॉरपोरेटर शहज़ाद ख़ान समेत 49 दंगाई हिरासत में: शाह-ए-आलम में पुलिस पर हुआ था जानलेवा हमला

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प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा दिल्ली पुलिस की हिरासत में, अमित शाह के घर के बाहर कर रही थी प्रदर्शन

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में शुक्रवार (दिसंबर 20, 2019) को गृह मंत्री अमित शाह के आवास के पास प्रदर्शन के दौरान दिल्ली महिला कॉन्ग्रेस की प्रमुख शर्मिष्ठा मुखर्जी को संगठन के कुछ अन्य सदस्यों के साथ हिरासत में लिया गया। कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा ने बताया कि दिल्ली महिला कॉन्ग्रेस की करीब 50 अन्य सदस्यों को भी हिरासत में लिया गया और मंदिर मार्ग पुलिस थाना ले जाया गया। 

पुलिस ने बताया कि उन्होंने अमित शाह के आवास के पास प्रदर्शन मार्च के दौरान शर्मिष्ठा मुखर्जी और संगठन के कुछ अन्य सदस्यों को हिरासत में लिया है। कॉन्ग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल इस कानून के खिलाफ देश भर में हिंसक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनो को देखते हुए एहतियात के तौर पर दिल्ली में कई मेट्रो को बंद कर दिया गया है। वहीं सीआरपीएफ और आरएएफ की 10 कंपनियों सहित पर्याप्त मात्रा में सुरक्षाबलों को उत्तर पूर्वी दिल्ली में तैनात किया गया है।

बता दें कि दिल्ली की जामा मस्जिद में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहा है। जुमे की नमाज के बाद जामा मस्जिद के बाहर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने CAA के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान यहाँ पर भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर भी मौजूद रहे और नारेबाजी की। इन चीजों को ध्यान में रखते हुए पुलिस बलों की यहाँ भारी संख्या में तैनाती की गई है और ड्रोन कैमरे से भी प्रदर्शनकारियों पर नजर रखी जा रही है।

जामा मस्जिद में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आज़ाद को हिरासत में लेने की कोशिश की थी, लेकिन समर्थकों की मदद से वो मौके से भाग निकले। बता दें कि भीम आर्मी ने जामा मस्जिद से जंतर-मंतर तक प्रोटेस्ट मार्च निकालने के लिए दिल्ली पुलिस से परमिशन माँगी थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने मना कर दिया। हालाँकि, इसके बावजूद भीम आर्मी के चीफ चन्द्रशेखर आजाद जामा मस्जिद पहुँचे हुए हैं।

दंगों से कुछ तस्वीरें, जो बताती हैं पुलिस वाले भी चोट खाते हैं, उनका भी ख़ून बहता है…

देशभर में नागरिकता क़ानून (CAA) के विरोध में प्रदर्शन जारी हैं। इन विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना एक बड़ी संख्या में पुलिस दल-बल सक्रिय रूप से तैनात है। दंगाईयों द्वारा हिंसात्मक विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के दौरान कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। 

गुजरात के अहमदाबाद के शाह-ए-आलम इलाक़े में दंगाईयों ने जमकर हिंसा की। इस दौरान पुलिस वालों पर भीड़ जानवरों की तरह टूट पड़ी। एसीपी राजपाल सिंह राणा की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एसीपी राजपाल सिंह राणा की तस्वीर बहुत कुछ बयाँ कर रही है। इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि सिर में चोट लगने के बावजूद उनके चेहरे पर दर्द का नामो-निशान तक नहीं है। ख़ून से लथपथ होने के बावजूद वो हिंसक हालात पर क़ाबू पाने के लिए अपनी टीम के साथ निकल पड़ते हैं।

इस हमले में डीसीपी, एसीपी, कई इंसपेक्टरों समेत 19 पुलिसकर्मी भी ज़ख़्मी हुए।

नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ दिल्‍ली के जामिया में हिंसक प्रदर्शन हुए, कई बसों में आग लगाई गई। आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की 4 गाड़ियाँ मौके पर पहुँची, लेकिन दंगाईयों ने एक दमकल गाड़ी में तोड़फोड़ कर दी, जिसमें 3 फायरमैन चोटिल हो गए।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बाहर नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ उपद्रवियों ने विरोध-प्रदर्शन करते हुए पुलिस पर पत्थरबाज़ी शुरू कर दी थी। इस दौरान दो सुरक्षाकर्मी समेत पुलिसकर्मी घायल हो गए।

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स ने शुक्रवार (13 दिसंबर) को विश्वविद्यालय परिसर से संसद तक मार्च का आह्वान किया। जहाँ पुलिस ने उन्हें बीच में ही रोक दिया।

इस दौरान दंगाईयों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हुई जिनमें कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।

दंगाईयों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों को लाठीचार्ज करना पड़ा और आँसू गैस के गोले भी दागे। उपद्रवियों ने इस दौरान पुलिसकर्मियों पर जमकर पत्थरबाज़ी की।

घायल पुलिसकर्मियों का उपचार करने के लिए डॉक्टरों की टीम कई बार घटनास्थल पर ही बुलानी पड़ी।

लखनऊ में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में गुरुवार को जमकर हिंसा हुई। इसमें उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर जमकर पथराव किया, उनपर काँच की बोतलें बरसाईं। दंगाईयों की भीड़ शहर के मुख्य इलाकों में घुस गई और जमकर आगजनी व पथराव किया। हालात पर क़ाबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। तब कहीं जाकर बवाल शांत हुआ।

पैगंबर मो. पर सवाल पूछने वाले प्रोफेसर का नजीब ने काटा था हाथ, NIA ने दोबारा किया गिरफ्तार

साल 2010 में ईशनिंदा के इल्जाम में केरल के प्रोफेसर टीजे जोसेफ पर हमला कर उनका दाहिना हाथ काटने वाले आरोपित नजीब को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने दोबारा गिरफ्तार कर लिया। 43 वर्षीय नजीब एर्नाकुलम जिले के अलुवा का निवासी है और साथ ही कट्टरपंथी इस्लामिक समूह पॉपुलर फ्रंट इंडिया का सदस्य भी।

इसी मामले में इससे पहले उसकी गिरफ्तारी 10 अप्रैल 2015 को कोयंबटूर से हुई थी। लेकिन, 23 जुलाई को केरल हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान उसे जमानत दे दी। इसके बाद एनआईए ने केरल कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर सुनवाई के बाद केरल कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी गई और नजीब को दोबारा बुधवार को गिरफ्तार किया गया।

गौरतलब है कि 4 जुलाई 2010 को एर्नाकुलम जिले के थोदुपुझा में प्रोफेसर टीजे जोसेफ पर घातक हमले की साजिश रचने और हमलावरों की मदद करने के आरोप में नजीब के खिलाफ आइपीसी की विभिन्न धाराओं, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में एनआईए ने 13 लोगों को आरोपित बनाया था।

जानकारी के अनुसार, टीजे जोसेफ केरल के इदुकी जिले के एक कॉलेज में मलयालम पढ़ाते थे। 2010 में उन पर कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन के सदस्य नजीब समेत कुछ युवकों ने चाकुओं से उनका दाहिना हाथ काट दिया था। घटना रविवार के दिन तब घटी थी, जब जोसेफ अपने परिवार के साथ चर्च से प्रार्थना कर लौट रहे थे। आरोपित युवकों ने आरोप लगाया था कि जोसेफ ने एक परीक्षा ली थी, जिसमें उन्होंने छात्रों से ईशनिंदा वाले प्रश्न पूछे थे।

जोसेफ पर आरोप लगा था कि उन्होंने मलयालम भाषा में एक विवादित प्रश्नपत्र तैयार किया था, जिससे समुदाय विशेष की मजहबी भावनाएँ आहत हुईं। हालाँकि इस बीच कई लोगों ने उन पर सवाल उठाए और कॉलेज प्रशासन ने उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया था। तब इस मामले पर वहाँ की शिक्षा मंत्री ने उन्हें कहा भी कि वे चाहें तो यूनिवर्सिटी के ट्रिब्यूनल में अपना मामला दर्ज करवा सकते हैं। लेकिन फिर भी उन्होंने फैसला किया कि वे कॉलेज के फैसले के ख़िलाफ़ कोई कानूनी कदम नहीं उठाएँगे।

इतना ही नहीं, अपने ऊपर कट्टरपंथियों के हमले के बाद भी जोसेफ ने तो ये भी कहा था कि उन्होंने सभी आरोपितों को माफ कर दिया है और अपना जीवन सामान्य रूप से जीने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मजहबी संगठनों के दबाव में कॉलेज प्रशासन के फैसले से उनका जीवन सामान्य नहीं रहने दिया। सामाजिक दबाव और आर्थिक परेशानियों के चलते उनकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली और बाद में प्रोफेसर को वापस पढ़ाने की इजाजत दी गई। कुछ समय पहले वे रिटायर हो गए।

उनके दोषियों को भले ही उन्होंने अपनी अच्छाई के चलते माफ कर दिया। लेकिन कोर्ट ने उन पर कार्रवाई जारी रखी और कुछ साल पहले उन्हें प्रोफेसर पर हमला करने का दोषी पाया गया। आरोपितों पर फैसला उस समय आया जब 57 साल के जोसेफ की लिखी एक किताब रिलीज हुई है। इदुकी जिले में एक छोटे कार्यक्रम में अपनी किताब को रिलीज करने के दौरान जोसेफ का कहना था, “ये किताब मैंने दाहिने हाथ से लिखी थी, आज मैं आपके सामने इसे बाएँ हाथ से पेश कर रहा हूँ।” बता दें कि हमले के बाद जोसेफ की दाहिनी हथेली को डॉक्टरों ने वापस जोड़ दिया था।

परवेज मुशर्रफ के खिलाफ फैसला देने वाले जज पर कार्रवाई की तैयारी: मंत्री ने जज को बताया ‘मानसिक बीमार’

पाकिस्तान में पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को फाँसी की सजा सुनाए जाने के बाद से बवाल मच गया है। बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति, सैन्य जनरल और मुल्क को कारगिल की शर्मनाक हार में झोंकने वाले पूर्व तानाशाह परवेज़ मुशर्रफ़ को पेशावर कोर्ट ने मौत की सज़ा सुनाई है। इसके बाद से सरकार और सेना एक तरफ खड़े नजर आ रहे हैं तो वहीं कोर्ट दूसरी तरफ। परवेज मुशर्रफ के खिलाफ सजा का ऐलान होने के बाद सेना ने इस फैसले की आलोचना की है। 

विशेष अदालत के फैसले से नाराज पाकिस्तान सरकार ने भी जज वकार अहमद सेठ को हटाने के लिए
सुप्रीम जूडीशियल कॉन्सिल का रुख करने का फैसला किया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने गुरुवार (दिसंबर 19, 2019) को विशेष अदालत द्वारा दिए गए इस फैसले को देश में ‘अराजकता’ और ‘अशांति’ पैदा करने का प्रयास करार दिया।

इमरान खान ने गुरुवार को मीडिया रणनीति समिति की बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “सरकार किसी भी स्थिति की अनुमति नहीं देगी, जो देश में अस्थिरता पैदा करती है या संस्थानों के बीच टकराव पैदा करती है।” इस बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकार विशेष अदालत के चीफ जस्टिस वकार अहमद सेठ के खिलाफ सुप्रीम जूडीशियल कॉन्सिल का रुख करेगी। लीगल टीम ने विशेष अदालत के फैसले को ‘असंवैधानिक’, ‘अवैध’ और ‘अमानवीय’ बताया।

पाकिस्तान के कानून मंत्री फरोग नसीम ने कहा कि यह फैसला दिखाता है कि न्यायमूर्ति सेठ ‘मानसिक रूप से अस्वस्थ’ हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी सजा पाकिस्तान के किसी भी कानून के खिलाफ है। जस्टिस वकार अहमद सेठ द्वारा सुनाए गए निर्णय को देखते हुए सरकार ने फैसला किया है कि सुप्रीम जूडीशियल कॉन्सिल में रेफरेंस दायर किया जाएगा और उनसे अनुरोध किया जाएगा कि ऐसे जज को न तो पाकिस्तान के हाई कोर्ट के जज होने का अधिकार है और न ही सुप्रीम कोर्ट के जज होने का। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के फैसले से न सिर्फ कोर्ट का विशेषाधिकार धूमिल होता है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

फरोग नसीम ने कहा, “हमारा अनुरोध है कि क्योंकि उन्होंने (वकार अहमद) खुद को मानसिक रूप से अयोग्य और अक्षम साबित कर दिया है, तो उन्हें तुरंत काम करने से रोका जाना चाहिए। हम सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से अनुरोध करते हैं कि वे उन्हें किसी भी प्रशासनिक या न्यायिक कार्य करने से रोकें।” नसीम ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी करने वाला कोई भी जज न केवल कानून के खिलाफ काम कर रहा है, बल्कि खुद को इस विश्वास के प्रति प्रतिकूल साबित कर रहा है कि न्यायपालिका में विश्वास होना चाहिए।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को वहाँ के सुप्रीम कोर्ट ने सज़ा-ए-मौत सुनाते हुए यह भी बताया कि मुशर्रफ के मरने के बाद उनके साथ क्या किया जाना है। पाक सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फ़ैसले के पॉइंट नंबर 66 के अनुसार, फाँसी देकर मारे जाने के बाद मुशर्रफ की लाश को घसीटते हुए इस्लामाबाद के डेमोक्रेसी चौक (डी-चौक) तक लाया जाना चाहिए और वहाँ 3 दिनों तक उसे लटका कर रखा जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाक सुप्रीम कोर्ट ने वहाँ की फौज को नीचा दिखाने के लिए ऐसा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व पाक सेनाध्यक्ष जनरल मुशर्रफ को भगोड़ा बताते हुए कहा कि उसे सज़ा देना मुश्किल है क्योंकि वो काफ़ी ताक़तवर है। 167 पेज के फ़ैसले को कोर्ट ने लिखा है कि मुशर्रफ ने हमेशा अपनी बीमारी और सुरक्षा का हवाला देते हुए कोर्ट की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया। वहीं पाक के फौज का कहना है कि 40 सालों तक देश के लिए लड़ने वाला इंसान कभी भी देशद्रोही नहीं हो सकता। पाक फौज ने कोर्ट की कार्यवाही को त्रुटिपूर्ण करार दिया।

खिसियाया रवीश ऑपइंडिया नोचे: न्यूज़लॉन्ड्री का लेख रवीश ने ही लिखवाया, एडिट किया, नहीं चला तो खुद शेयर किया

पता चला है कि रवीश जी बहुत परेशान हैं। यह बात उन लोगों से पता चली है जिनसे उन्होंने अपनी परेशानी दूर करने के लिए मदद माँगी है। बताया गया कि रवीश जी का फ़ेसबुक देखिए। मैंने देखा तो वहाँ पर न्यूज़लॉन्ड्री नाम की एक कॉन्ग्रेसी प्रोपेगेंडा वेबसाइट का लिंक शेयर किया हुआ था। जिसमें ऑपइंडिया वेबसाइट के बारे में कुछ खुलासे जैसा किया गया था। क़रीब तीन किलोमीटर लंबा लेख था जिसका एक लाइन में मतलब यह है, “रवीश जी बहुत परेशान हैं क्योंकि ऑपइंडिया नाम की एक वेबसाइट उनके बारे में बहुत बुरा-बुरा लिख रही है।”

बताने वाले ने ही बताया, “वो रवीश जी ने ही पोस्ट करवाया है। उसका ड्राफ़्ट भी उनसे चेक कराया गया था। वेबसाइट पर जब अपलोड किया गया तो तीन दिन तक कोई रिस्पॉन्स नहीं आया तब रवीश जी ने परेशान होकर ख़ुद ही फ़ेसबुक पर शेयर किया ताकि ऑपइंडिया की पोल खुल जाए।” यह सुनकर मैं हैरान था कि पत्रकार का चोला ओढ़े इतना बड़ा दलाल ऑपइंडिया जैसी नई-नवेली न्यूज़ वेबसाइट से डर गया। डर भी उस लेख से जो दरअसल व्यंग्य (Satire) में लिखा गया है। जब कोई व्यक्ति व्यंग्य या मज़ाक को सीरियसली लेना शुरू कर दे तो फौरन समझ जाना चाहिए कि उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं है।

नक़ली आदमी चाहे जितना भी बड़ा हो जाए है उसका यह डर नहीं जाता कि कहीं लोग उसकी सच्चाई जान न जाएँ। जिस तरह से ऑपइंडिया ने पिछले कुछ दिनों में एनडीटीवी पर चलने वाले जिहादी और नक्सली समर्थक प्रोपेगेंडा को उजागर किया है वो अपने आप में एक मिसाल है। ऑपइंडिया कोई नया काम नहीं कर रहा। इससे पहले रवीश जी की पत्रकारिता की पोल तो चाँदनी चौक के कम पढ़े-लिखे दुकानदारों ने भी खोल दी थी, जब नोटबंदी के दौरान वो कॉन्ग्रेस के एक नेता को चाँदनी चौक का दुकानदार बताकर उससे नोटबंदी के ख़िलाफ़ बुलवा रहे थे। जब लोगों ने इसका विरोध किया तो रवीश जी ने भागते हुए बोलना शुरू कर दिया था कि ये सब बीजेपी के गुंडे हैं। रवीश जी के ऐसे स्वाँग के ढेरों उदाहरण हैं। न जाने कितने लोगों को उन्होंने फेक न्यूज़ और फेक नैरेटिव का शिकार बनाया। ऑपइंडिया बस ऐसे लोगों की ही आवाज़ बन गया, इसीलिए रवीश कुमार उससे डर रहे हैं।

रवीश जी ऑपइंडिया को आईटी सेल बोलकर ख़ारिज करने की कोशिश ज़रूर करते हैं। लेकिन खुद उनसे बेहतर कोई नहीं जानता कि वास्तव में ऐसा नहीं हैं। आईटी सेल वालों को तो वो कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के आईटी सेल की मदद से कई बार पानी पिला चुके हैं। उन्हें क्या लगता है कि #ISupportRavishKumar जैसे जो हैशटैग ट्विटर पर ट्रेंड कराए जाते हैं वो कौन कराता है यह लोगों को पता नहीं चलता? ऑपइंडिया में कोई डेकोरेटेड और पुरस्कार प्राप्त पत्रकार नहीं हैं। ये सारे आम नौजवान हैं जिनके किसी और ज्यादा कमाई वाले पेशे में जाने की संभावना अधिक थी। लेकिन शायद कोई जुनून था जो उन्होंने यह वेबसाइट चलाई।

मुझे नहीं लगता कि इनमें कोई बड़े-बड़े मीडिया इंस्टीट्यूट से पढ़कर आया है। ये सभी लोअर मिडिल क्लास के लड़के हैं, जो बिहारी स्टाइल में ‘कहके लेते’ हैं। इन्होंने पत्रकारिता की बनी-बनाई भाषा नहीं अपनाई, बल्कि अपनी भाषा और शैली गढ़ी है। रवीश जी को लगता होगा कि ऑपइंडिया सिर्फ उनके नाम पर चल रहा है तो ये उनकी गलतफहमी है। यह वेबसाइट उनके अलावा 50 से ज्यादा प्रोपेगेंडा चैनलों, अखबारों, वेबसाइटों, पत्रकारों और उनके सियासी सरगनाओं से पंगा ले रही है। ये आसान काम नहीं है।

ऐसा नहीं है कि ऑपइंडिया वालों को पता नहीं होगा कि कॉन्ग्रेस की सरकार के समय मीडिया के इस माफ़िया से टकराने वालों का क्या अंजाम हुआ करता था। 26/11 के मुंबई हमलों के बाद ‘The Hoot’ नाम की एक मामूली वेबसाइट ने बरखा दत्त की भूमिका के बारे में पूरे सबूतों के साथ एक रिपोर्ट की थी। जिस पर बरखा दत्त ने उसे चलाने वाले को जेल के दरवाजे तक पहुँचा दिया था। ऐसे ही न जाने कितनी वेबसाइटों और ब्लॉग्स का दम घोंटने का श्रेय इस दलाल मंडली को जाता है। पहले अपनी सरकार थी तब जेल भिजवा देते थे, अब नहीं भिजवा पाते इसीलिए “डर का माहौल” है।

रवीश जी बहुत कुढ़कर रह जाते होंगे। इसीलिए हर उस आदमी को गोदी मीडिया, आईटी सेल, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी बोल देते हैं, जो उनके पाखंड की पोल खोलने की जुर्रत करता है। मुझे भरोसा है कि रवीश जी सबका नाम किसी कॉपी में लिखकर रख रहे होंगे कि जब राहुल गाँधी प्रधानमंत्री बनेंगे तो उनसे बोलकर सबको जेल भिजवाएँगे। उस कॉपी में ऑपइंडिया और उनके संपादक अजीत भारती का नाम सबसे ऊपर स्केच पेन से अंडरलाइन करके लिखा होगा।

रवीश जी को यह समझना चाहिए कि ऑपइंडिया के ख़िलाफ़ अपनी भड़ास निकालकर कुछ नहीं मिलेगा। उसके खिलाफ साजिशें बंद कीजिए। अपने चमचों से उसे डाउनग्रेड करवाने जैसी चिरकुटई से बाज आइए। ऑपइंडिया नहीं होगा तो कोई और नाम होगा। आपने पत्रकारिता के नाम पर नफ़रत की जो खेती की है उसकी प्रतिक्रिया न हो यह कैसे हो सकता है? आप न्यूज़लॉन्ड्री की आड़ लीजिए या वायर की, कोई न कोई मामूली आदमी आपकी झूठ की लंका में छुरछुरी लगाता रहेगा।

अच्छी भाषा की उम्मीद मत कीजिएगा, क्योंकि ज़रूरी नहीं कि हर किसी को चाशनी में डूबे ज़हरीले शब्द लिखने की ट्रेनिंग मिली हो। मैं एक पाठक के तौर पर ऑपइंडिया की पूरी टीम और अजीत भारती को बधाई दूँगा। रवीश कुमार जैसे ठगों औऱ दलालों की तिलमिलाहट इस बात का सबूत है कि वो बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। उन्हीं की फेसबुक वॉल पर किसी Anumeha Pandit का कमेंट याद दिलाना चाहूँगा, “आप शानदार काम कर रहे हैं। ध्यान रखिएगा अपने मानक का क्योंकि आप इतिहास दर्ज़ कर रहे हैं। इस समय की सबसे महत्वपूर्ण आवाज़ आप हैं।”

अजीत भारती का जवाब यहाँ देखें: https://www.youtube.com/watch?v=j9ietZ2CUvQ
यह भी पढ़ें: जामिया में मजहबी नारे ‘नारा-ए-तकबीर’, ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ क्यों लग रहे? विरोध तो सरकार का है न?

यह लेख चंद्र प्रकाश जी ने लिखा है।

कॉन्ग्रेस कॉरपोरेटर शहज़ाद ख़ान समेत 49 दंगाई हिरासत में: शाह-ए-आलम में पुलिस पर हुआ था जानलेवा हमला

अहमदाबाद के शाह-ए-आलम इलाक़े में मुस्लिम भीड़ द्वारा नागरिकता क़ानून के विरोध में हिंसा की गई। पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला किया गया। इन आरोपों में अहमदाबाद पुलिस ने कॉन्ग्रेस कॉरपोरेटर शहज़ाद खान पठान समेत 49 दंगाईयों को हिरासत में लिया है।

देश गुजरात नामक न्यूज वेबसाइट के अनुसार, हिंसा भड़काने के आरोप में जिन लोगों हिरासत में लिया गया है, उन सभी को इसानपुर पुलिस स्टेशन ले जाया गया है।

पुलिस ने बताया कि अहमदाबाद के सभी विरोध-प्रदर्शन वाली जगहों से कुल 213 उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया है। हिरासत में लिए गए लोगों में कॉन्ग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी भी शामिल थे।

इससे पहले, यह ख़बर भी आई थी कि नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) का विरोध करने वाली मुस्लिम भीड़ ने जिग्नेश मेवाणी के वडगाम निर्वाचन क्षेत्र में हिंसक प्रदर्शन किया और उसने छपी-पालनपुर राजमार्ग को भी अवरुद्ध कर दिया गया था। यहाँ जमा हुई भीड़ जल्द ही हिंसक हो गई और उसने एक पुलिस वैन पर हमला कर दिया।

शाह-ए-आलम में, मुस्लिम भीड़ ने उग्र प्रदर्शन किया और पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ अँधाधुँध पथराव किया। इस हिंसा से जुड़े कई हैरान कर देने वाले वीडियो भी सामने आए, इनमें मुस्लिम भीड़ ने न सिर्फ़ पुलिस पर पथराव किया था बल्कि भीड़ के एक हिस्से ने एक पुलिसकर्मी को गोली मारने की भी कोशिश की थी।

यहाँ इस बात पर ग़ौर किया जाना बेहद ज़रूरी है कि देश के कई क्षेत्रों में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। धारा-144 लागू होने के बावजूद दंगाईयों की भीड़ ने विरोध-प्रदर्शनों के लिए पत्थर और औजार जुटाए। इससे पहले, आपइंडिया ने ख़ुलासा किया था कि पूरे देश में, विशेषकर विश्वविद्यालयों में नागरिकता क़ानून के विरोध में विरोध-प्रदर्शन आयोजन करने में NSUI एक सक्रिय भागीदार के तौर पर था। NSUI ने अहमदाबाद में ‘विरोध प्रदर्शन’ की योजना बनाई थी।

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जामिया हिंसा: ‘Shame on you’ के नारे लगाने वाले वकीलों पर HC सख्त, होगी कार्रवाई, जाँच समिति गठित

जामिया मिलिया इस्लामिया में हिंसा की जाँच के लिए एक न्यायिक आयोग के गठन का अनुरोध करने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान छात्र दंगाइयों को किसी भी तरह से अंतरिम संरक्षण प्रदान करने से इनकार करने वाले फैसले पर ‘शेम-शेम’ का नारा लगाने वाले वकीलों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। 

हाई कोर्ट ने अदालत परिसर में नारेबाजी के प्रकरण की जाँच के लिए एक समिति बनाने का निर्देश दिया है। समिति गहराई से जाँच के बाद दोषी वकीलों के खिलाफ कार्रवाई पर उचित दिशा-निर्देश देगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि मामले की जाँच के लिए एक कमिटी बनेगी जो कार्रवाई को लेकर उचित फैसला करेगी। इसके पहले कुछ वकीलों ने अदालत से गुजारिश की थी कि वह गुरुवार (दिसंबर 19, 2019) को अदालत परिसर में हुई नारेबाजी का स्वतः संज्ञान लेते हुए दोषी वकीलों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करे।

बता दें कि अदालत ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस को एक नोटिस भी जारी किया, जिसमें जामिया मिलिया इस्लामिया की घटना पर जवाब दाखिल करने को कहा गया। अदालत इस मामले की सुनवाई आगामी 4 फरवरी को करेगी। इतनी लंबी तारीख़ मिलने पर याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से इसे और जल्दी देने की माँग की तो कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया। जिसके बाद हाईकोर्ट के फ़ैसले से असंतुष्ट, वकीलों की लॉबी ने कथित तौर पर न्यायाधीशों पर ‘Shame on you’ के नारे लगाना शुरू कर दिया। 

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में रविवार (दिसंबर 15, 2019) को दिल्ली के जामिया इलाके में जमकर हिंसा हुई थी। रविवार शाम प्रदर्शनकारियों ने कई बसें और बाइक फूँक दी। उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने अराजक तत्वों के जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में घुसे होने के संदेह पर कैंपस से सभी छात्रों को बाहर निकाल दिया।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने बसों और वाहनों में आग लगा दी। जामिया में इस हिंसा के खिलाफ जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों के अलावा जेएनयू और दूसरे संगठनों के लोगों ने भी पुलिस मुख्यालय पर देर रात प्रदर्शन किया। देर रात पुलिस द्वारा 50 छात्रों को रिहा करने के बाद सोमवार (दिसंबर 16, 2019) सुबह 4 बजे प्रदर्शन खत्म हुआ। जामिया कैंपस में 5 जनवरी तक छुट्टी घोषित कर दी गई है।

…जो सीलमपुर बवाल में बम फेंक भी नहीं पाया, हाथ भी गँवाया, उस रईस को पुलिस ने धर दबोचा

सीलमपुर में मंगलवार (दिसंबर 17, 2019) को हुए दंगों के बीच पेट्रोल बम फेंकने की कोशिश करने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। युवक की पहचान रईस के रूप में हुई। जानकारी के मुताबिक रईस मंगलवार को भीड़ के बीच से पेट्रोल बम पुलिस पर फेंकने जा रहा था, लेकिन हमला करने से पहले ही बम उसके हाथ में फट गया। जिसके कारण उसके हाथ के चीथड़े उड़ गए।

पुलिस के अनुसार, घटना के बाद से रईस ने अपनी पहचान छिपाई हुई थी और जीटीबी अस्पताल में अपना ईलाज करवा रहा था। लेकिन, तलाश में जुटी पुलिस को उसकी जानकारी मिल गई। जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रईस अब भी अस्पताल में ही है। लेकिन, पुलिस उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की तैयारी कर रही है। चूँकि बम फटने के कारण रईस के हाथ में काफी गंभीर चोट आई है, इसलिए पुलिस की ओर से उसे अभी कुछ नहीं कहा गया है। पुलिस का कहना है कि रईस को फिलहाल ईलाज मुहैया करवाया जा रहा है और ईलाज के बाद उस पर एक्शन लिया जाएगा।

बता दें, सीलमपुर में हुए दंगों में पुलिस ने दंगाई समेत तोड़फोड़ करने वालों में 21 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि बाकी लोगों की भी पहचान कर ली गई है। कहा जा रहा है कि आज इलाके में तनाव दोबारा फैल सकता है, लेकिन पुलिस स्थानीय लोगों से बातचीत करके भरोसा कायम करने की कोशिश कर रही है।

गौरतलब है कि सीलमपुर में हुई हिंसा से जुड़े कई वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। लेकिन इसी बीच बम फोड़ने का ऐसा वीडियो भी सामने आया। जिसने दिल्ली पुलिस समेत जाँच एजेंसियों के कान खड़े दिए। हालाँकि भले ही बम फेंकने की मंशा से भीड़ में पहुँचे युवक की गिरफ्तारी हो चुकी है। लेकिन ये सोचने का विषय है कि क्या नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर दिल्ली में कोई और साजिश रची जा रही है? जिसकी एक झलक हमें वीडियो में देखने को मिली।

पुलिस फिलहाल रईस से पूछताछ में जुटी है। साथ ही सीलमपुर, जाफराबाद और दयालपुर में हुई हिंसा पर भी अपनी नजर बनाए हुए है। इस बीच खूफिया एजेंसियों से कई इनपुट पुलिस को मिले हैं, जिस पर जाँच जारी है। इसके अलावा दिल्ली के कई इलाकों में धारा 144 लगी हुई है। लेकिन, पुलिस लगातार लोगों के बीच गश्त करके शांति व्यवस्था बनाने की तैयारी कर रही है।

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