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जामिया और AMU में हिंसक प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- सुनेंगे पर पहले हिंसा रुकनी चाहिए

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर राजधानी दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में हिंसक प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मामले की कल सुनवाई करेगा, लेकिन उससे पहले हिंसा रुकनी चाहिए।

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह की ओर से यह याचिका दाखिल की गई थी। लेकिन, चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन, हिंसा के माहौल में कोई बात नहीं सुनी जा सकती। जयसिंह ने मानवाधिकारों के हनन का हवाला देते हुए अदालत से इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने की अपील की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर मंगलवार (17 दिसंबर) को सुनवाई करने पर सहमति दी है, लेकिन साथ में यह निर्देश भी दिया कि हिंसा रुकनी चाहिए। CJI ने कहा कि हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन के ख़िलाफ़ नहीं हैं और अधिकारों के संरक्षण के लिए अपनी ज़िम्मेदारी समझते हैं। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में पुलिस द्वारा की गई हिंसा का कथित वीडियो होने की बात कही। इस पर CJI ने फ़टकार लगाते हुए कहा कि यह कोर्ट रूम है, यहाँ शांति से अपनी बात रखनी होगी।

CJI ने कहा:

“वे विद्यार्थी हैं, इसका अर्थ यह नहीं है कि वे क़ानून -व्यवस्था अपने हाथ में ले सकते हैं, इस पर सब कुछ शांत होने पर फ़ैसला लेना होगा। इस समय ऐसा माहौल नहीं है, जब हम कुछ तय कर सकें, दंगे रुकने दीजिए।”

चीफ जस्टिस ने दिल्ली पुलिस द्वारा हिंसा किए जाने के तर्क पर कहा कि यह कानून-प्रशासन का मामला है, ऐसे हालात में पुलिस को कदम उठाना ही होगा। हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अधिकारों के खिलाफ नहीं हैं। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुॅंचाया जा सकता। वहीं, दिल्ली पुलिस ने जामिया में हुई हिंसा से जुड़े दो मामले रविवार (15 दिसंबर) को दर्ज किए। दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया विश्वविद्यालय में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में दाखिल याचिका को सुनवाई के लिए तुरंत सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले रजिस्ट्री कराएँ और फिर अनिवार्य प्रक्रिया का पालन करते हुए यहाँ आएँ। इस बीच जामिया के छात्रों ने परिसर खाली करना शुरू कर दिया है। हिंसक प्रदर्शन के बाद यूनिवर्सिटी 5 जनवरी तक के लिए बंद कर दिया गया है।

बता दें कि जामिया में जहाँ हिंसा हुई थी, वहाँ पर आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान भी मौजूद थे। हालाँकि, अमानतुल्लाह ख़ान ने दावा किया है कि वो वारदात वाली जगह पर न तो विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे और न ही उसका हिस्सा थे। उन्होंने भले ही आरोपों से इनकार किया हो लेकिन वीडियो में उन्हें उस विरोध प्रदर्शन में देखा जा सकता है, जो बाद में इतना हिंसक हो उठा कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आँसू गैस का प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने कहा है कि इस पूरे मामले की जाँच की जा रही है।

वहीं, जामिया की वीसी नजमा अख्तर का कहना है कि जामिया के छात्रों ने प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया था। उन्होंने कहा, “मुझे बताया गया कि आसपास की कॉलोनियों के लोगों ने प्रदर्शन का आह्वान किया था। उनकी पुलिस के साथ झड़प हो गई और वे यूनिवर्सिटी का गेट तोड़कर कैंपस के अंदर आ गए। पुलिस प्रदर्शनकारियों और लाइब्रेरी में बैठे छात्रों के बीच अंतर नहीं कर पाई।”

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निर्भया के गुनहगारों को फॉंसी देने के लिए जल्लाद को मिलेंगे ₹1 लाख, अब तक का सबसे बड़ा मेहनताना

दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद निर्भया के कातिलों को जल्द से जल्द फाँसी देने की माँग हो रही है। कहा जा रहा है कि 16 दिसंबर 2012 की रात दरिंदगी को अंजाम देने वाले चारों दोषियों को इसी हफ्ते फँदे पर लटकाया जाएगा। खबरों के अनुसार निर्भया के कातिलों को फाँसी देने वाले जल्लाद को अब तक का सबसे अधिक मेहनताना दिया जाएगा। यह 70 हजार से 1 लाख रुपए तक हो सकता है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस बात की सूचना खुद तिहाड़ के एक अधिकारी ने दी है। अधिकारी ने बताया कि पुराने समय में फाँसी देने के लिए जल्लाद को 500 रुपए से 5000 रुपए तक दिए जाते थे। लेकिन महंगाई देखते हुए प्रत्येक दोषी को फाँसी पर लटकाने के लिए जल्लाद को 25 हजार रुपए तक भी दिया जा सकता है। बता दें जल्लादों की सैलरी (वन टाइम मेहनताना) इस बात पर निर्भर करती है कि जिस राज्य से जल्लाद को बुलाया जाएगा वह उसके लिए प्रति फाँसी कितना पैसा तय करता है। ऐसे में निर्भया के चार दोषियों को फाँसी देने वाले जल्लाद के लिए माना जा रहा है कि 1 लाख रुपए तक मिल सकती है।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर

जानकारी के लिए बता दें, इससे पहले इन चारों दोषियों को फँदे पर लटकाने के लिए बक्सर जेल से 10 रस्सियाँ मँगाईं जा चुकी हैं। जिनमें प्रत्येक की कीमत सवा 2 हजार रुपए है। अब तिहाड़ में इन्हें लटकाने की तैयारी चालू है। जेल प्रशासन दोषियों को फाँसी देने के लिए देश भर से जल्लाद ढूँढ रहा है। जिसके मद्देनजर यूपी से ही 2 जल्लादों को इस काम के लिए ग्रीन सिग्नल मिला है। अगर फाँसी का समय नजदीक आते-आते कहीं और से जल्लाद नहीं मिलता तो मेरठ से पवन जल्लाद ही इस काम को पूरा करेंगे।

पवन मेरठ जेल (Meerut Jail) से जुड़े अधिकृत जल्लाद हैं। जिसके कारण उन्हें हर महीने एक तय रकम वेतन के रूप में भी मिलती है। इसके अलावा वे साइकिल पर कपड़ा बेचने का भी काम करता है। उनकी उम्र वर्तमान में 56 साल है और फाँसी देने के काम को वो महज एक पेशे के तौर पर देखते हैं। उनका मानना है कि कोई व्यक्ति न्यायपालिका से दंडित हुआ होगा और उसने वैसा काम किया होगा, तभी उसे फाँसी की सजा दी जा रही होगी, लिहाजा वो केवल अपने पेशे को ईमानदारी से निभाने का काम करता है।

हालाँकि, जेल अधिकारियों का ये भी कहना है कि नियमानुसार बिना जल्लाद के भी फाँसी दी जा सकती हैं। क्योंकि संसद हमले के दोषी आतंकी अफजल गुरु को बिना जल्लाद के ही फाँसी पर लटकाया गया है। जिसके चलते इस कार्य को कोई स्टाफ सदस्य भी कर सकता है।

बलात्कार दोषसिद्धि दर केवल 32 प्रतिशत

गौरतलब है कि पूरे देश को हिलाकर रखने वाले निर्भया कांड के बाद देश के कोने-कोने से महिला सुरक्षा पर सवाल उठे थे। ढीली न्यायप्रक्रिया पर लोगों ने आवाज उठाई थी और उसी दौरान यौन उत्पीड़न पर सख्त कानून बनाए गए थे। लेकिन बावजूद इन सबके आज भी देश में बलात्कार के मामलों में दोषसिद्धि दर 32.2 प्रतिशत है। जिसकी पुष्टि खुद एनसीआरबी के आँकड़ों ने की है। दरअसल,वर्ष 2017 के लिए उपलब्ध राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार उस वर्ष बलात्कार के मामलों की कुल संख्या 1,46,201 थी, लेकिन उनमें से केवल 5,822 लोगों की दोषसिद्धि हुई। एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि 2017 में बलात्कार के मामलों में आरोप-पत्र की दर घटकर 86.4 प्रतिशत रह गई जो 2013 में 95.4 प्रतिशत थी। 

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घुसपैठियों की घर वापसी के लिए बांग्लादेश तैयार, भारत से माँगी लिस्ट

बांग्लादेश ने भारत में अवैध तरीके से रह रहे अपने देश के लोगों की सूची माँगी है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने रविवार (दिसंबर 15, 2019) को कहा कि हमने भारत से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की सूची मुहैया कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा सूची मुहैया कराने पर उन नागरिकों को लौटने की मंजूरी दी जाएगी।

वहीं, भारत की राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) पर एक सवाल के जवाब में मोमेन ने कहा कि बांग्लादेश-भारत के संबंध सामान्य और काफी अच्छे हैं तथा इन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मोमेन ने व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देते हुए गुरूवार (12 दिसंबर) को भारत की अपनी यात्रा रद्द कर दी थी।

उन्होंने कहा कि भारत ने एनआरसी प्रक्रिया को अपना आंतरिक मामला बताया है और ढाका को आश्वस्त किया कि इससे बांग्लादेश पर असर नहीं पड़ेगा। भारत के विरोध की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “कुछ भारतीय आर्थिक कारणों से बिचौलियों के जरिए बांग्लादेश आ जाते हैं। लेकिन यदि हमारे नागरिकों के अलावा कोई बांग्लादेश में घुसता है तो हम उसे वापस भेज देंगे।”

मोमेन ने कहा कि बांग्लादेश ने नई दिल्ली से अनुरोध किया है कि अगर उसके पास भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की कोई सूची है तो उन्हें मुहैया कराए। उन्होंने कहा, “हम बांग्लादेशी नागरिकों को वापस आने की अनुमति देंगे क्योंकि उनके पास अपने देश में प्रवेश करने का अधिकार है।” यह पूछे जाने पर कि उन्होंने भारत की यात्रा रद्द क्यों कर दी, इस पर मोमेन ने कहा कि व्यस्त कार्यक्रम और विदेश मामलों के राज्य मंत्री शहरयार आलम और देश में मंत्रालय के सचिव की अनुपस्थिति के कारण उन्होंने यात्रा रद्द कर दी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मोमेन और गृह मंत्री असदुज्जमां खान ने संसद में विवादित नागरिकता (संशोधन) विधेयक के पारित होने के बाद पैदा हुई स्थिति को देखते हुए भारत की अपनी यात्रा रद्द कर दी। मोमेन ने अपनी यात्रा रद्द करने से पहले गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान को गलत बताया था जिसमें कहा गया था कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न किया गया। भारत में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि मोमेन ने अपनी यात्रा रद्द करने के बारे में भारत को बता दिया है और साथ ही यह भी कहा गया कि अमित शाह ने सैन्य शासन के दौरान बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न का हवाला दिया था, न कि मौजूदा सरकार के शासन में।

बता दें कि 30 अगस्त को NRC की अंतिम लिस्ट प्रकाशित हुई थी। इसके लिए 3.3 करोड़ आवेदकों ने आवेदन किया था। जिसमें से 19 लाख से अधिक लोगों को बाहर रखा गया। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सितंबर में न्यूयॉर्क में द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ NRC का मुद्दा उठाया था। हालाँकि भारत ने बता दिया कि यह मुद्दा देश का आंतरिक मामला है।

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बंगाल में लगातार तीसरे दिन हिंसा: अकरा रेलवे स्टेशन पर दंगाइयों का उत्पात, टॉयलेट में छिप कर्मचारियों ने बचाई जान

देशभर में नागरिकता संशोधन क़ानून (CAB) के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। रविवार (15 दिसंबर) को पश्चिम बंगाल में भी इसको लेकर प्रदर्शन हुए। पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध जारी है। बंगाल में तीसरे दिन भी उत्पातियों ने मुर्शिदाबाद के पास रेलवे स्टेशनों में तोड़फोड़ और आगजनी की। रेल पटरी पर टायर जलाकर ट्रेनों को रोका और पथराव किया। मौक़े पर पहुँची पुलिस के वाहन को भी फूँक दिया। एहतियातन कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया। साथ ही 6 ज़िलों में इंटरनेट सेवाएँ भी बंद कर दी गई हैं।

रविवार को बंगाल में मुर्शिदाबाद, बीरभूम और उत्तर 24 परगना में हिंसक प्रदर्शन हुए। इन विरोध-प्रदर्शनों के चलते यातायात प्रभावित रहा और लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। हावड़ा 24 परगना और मुर्शिदाबाद के विभिन्न स्टेशनों पर ट्रेनों को रेक दिया गया। इस बीच, मालदा और आसपास के ज़िलों में इंटरनेट सेवा बंद रही।

दक्षिण 24 परगना जिले में नुंगी और अकरा स्टेशनों के बीच रेल सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुईं क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने रेल पटरियों को ब्लॉक कर दिया। अकरा स्टेशन पर तोड़फोड़ व आगजनी की। भीड़ ने स्टेशन के टिकट काउंटर पर रखे रुपए भी लूट लिए। मुट्ठी भर रेलवे कर्मचारियों ने अपनी जान बचाने के लिए ख़ुद को शौचालय में बंद कर लिया। रेलवे के एक वाणिज्यिक कर्मचारी ने कहा, “हम अपनी जान बचाने के लिए शौचालय में छिप गए।” एक पीड़ित ने बताया, “वे क्षण बेहद भयानक थे। बाहर बहुत हंगामा हो रहा था। स्टेशन पर हमला किया जा रहा था और फिर आग लगा दी गई।” उन्होंने बताया कि पूर्वी रेलवे का अकरा स्टेशन किसी उबड़-खाबड़ युद्ध क्षेत्र से कम नहीं था।

यह सब लगभग सुबह 10.30 बजे शुरू हुआ नागरिकता क़ानून के विरोध में प्रदर्शनकारियों का एक समूह ट्रेनों की आवाजाही को रोकते हुए पटरियों पर इकट्ठा हो गया। जल्द ही उन्होंने स्टेशन पर ट्रेनों पर हमला करना शुरू कर दिया। बुडगे बडग-बाउंड सियालदह लोकल के ड्राइवर को उसके केबिन से बाहर निकाल दिया गया। ड्राइवर ने बताया:

“पटरियों पर एक बड़ी भीड़ को देखते हुए, मैंने ट्रेन रोक दी। फिर उन्होंने मुझे केबिन छोड़ने के लिए कहा। जब मैंने अपने वरिष्ठों को सूचित किया, तो उन्होंने मुझे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा।”


सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मालदा, उत्तर दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जिले के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवा पर रोक लगाई गई है। पुलिस के अनुसार नदिया, बीरभूम, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और हावड़ा जिलों में हिंसा, लूट और आगजनी की घटनाएँ सामने आई हैं। भाजपा महासचिव और बंगाल के पार्टी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने राज्य सरकार पर दंगाइयों को शह देने का आरोप लगाया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “बांग्लादेश से लगे सभी जिलों में घुसपैठियों द्वारा हिन्दुओं के घरों में लूटपाट और आगजनी की जा रही है।”

पश्चिम बंगाल में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच राज्यपाल जगदीप धनखड़ का कहना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का वो विज्ञापन असंवैधानिक है जिसमें उन्होंने कहा था कि NRC और नागरिकता क़ानून को लागू नहीं किया जाएगा। राज्यपाल ने कहा कि सरकार के प्रमुख के तौर पर ममता बनर्जी ऐसे विज्ञापनों पर सरकार के पैसे का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं।

पश्चिम बंगाल की जनता से अपील करते हुए उन्होंने कहा, “मेरी राज्य के लोगों से अपील है कि वे शांति बनाए रखने के लिए और परेशानी में फँसे लोगों की मदद करने के लिए जो कर सकते हैं वह करें। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि मुख्यमंत्री कम से कम विज्ञापन हटाएँगी, क्योंकि यह असंवैधानिक है।”

ख़बर के अनुसार, ममता सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते हुए, राज्य के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा,

“इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है क्योंकि वे नहीं चाहते कि यह हिंसा लोगों की नज़र में आए। TMC पार्टी इन हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम देने की कसूरवार है। अगर TMC चाहती तो स्थिति पर क़ाबू पाया जा सकता था। राज्य सरकार ने अराजकता फैलाने लिए पूरी ताक़त असामाजिकों के तत्वों को दे दी है।”

वहीं, बंगाल के मंत्री सुजीत बोस ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा, “हमारी मुख्यमंत्री ने इस बार फिर से कहा है, हम कभी भी हिंसक विरोध का समर्थन नहीं करते हैं। हम लोकतांत्रिक विरोध में विश्वास करते हैं। हम NRC और CAA के ख़िलाफ़ हैं। भाजपा बहुत सी बातें कहती है, लेकिन बंगाल के लोग उन्हें जवाब देते रहे हैं, ऐसा भविष्य में भी होता रहेगा।”

दरअसल, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों की सरकारों ने अपने यहाँ नागरिकता संशोधन कानून लागू नहीं करने का ऐलान किया है। राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने केंद्र सरकार पर वादाख़िलाफ़ी का आरोप लगाते हुए बताया था कि पश्चिम बंगाल में NRC और CAB दोनों लागू नहीं किए जाएँगे।

ग़ौरतलब है कि नागरिकता संशोधन विधेयक का उद्देश्य पड़ोसी इस्लामिक देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के हिन्दुओं, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों जैसे उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देना है। यह विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पारित हो चुका है और इसे राष्ट्रपति कोविंद की भी मंज़ूरी मिल चुकी है।

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AMU के छात्रों ने किया पथराव, हवाई फायरिंग: कैंपस में दाखिल हुई पुलिस, हॉस्टल खाली कराए

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में कल (दिसंबर 15, 2019) जमकर बवाल कटा। छात्रों ने एडमिशन ब्लॉक के बाहर निकलकर पुलिस पर पथराव और हवाई फायरिंग की। जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज कर रबर बुलेट दागी। यूनिवर्सिटी में माहौल बिगड़ता देख 5 जनवरी तक कॉलेज को बंद कर दिया गया और देर रात ही सभी हॉस्टल खाली कराए गए। इसके अलावा सुरक्षा लिहाज से अलीगढ़ में इंटरनेट सेवाएँ भी सोमवार तक बंद हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 6 जिलों मेरठ, बुलंदशहर, कासगंज, बागपत, सहारनपुर एवं बरेली में एहतियातन धारा 144 लागू की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कल दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई पुलिस कार्रवाई पर आक्रोश जताते हुए प्रदर्शन के लिए निकली छात्रों की भीड़ परिसर का मुख्य गेट तोड़कर एएमयू सर्किल पर आ गई। जहाँ पुलिस ने इन्हें पानी की बौछार कर रोकने की कोशिश की, लेकिन छात्रों ने रुकने के बजाय पुलिस पर पथराव किया। हालाँकि, जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने लाठीचार्ज कर छात्रों को दौड़ाने का प्रयास किया। मगर इस बीच छात्र पथराव के अलावा हवाई फायरिंग करने लगे। जिसमें प्रॉक्टोरियल टीम, डीआइजी डॉ. प्रीतेंदर सिंह, एसपी सिटी अभिषेक कुमार के अलावा आरएएफ व पुलिस के 20 जवान घायल हो गए। इसके अलावा 30 छात्रों को भी चोटें आई। हालात काबू में पाने के लिए पुलिस आँसू के गोले छोड़ते हुए कैंपस में अंदर घुस गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रात 11 बजे तक चले इस टकराव के बाद पुलिस ने एएमयू के अंदर से 8 युवकों को गिरफ्तार किया और देखते ही देखते पूरा कैंपस छावनी में बदल गया। छात्रों की ओर से लगातार पथराव के बाद आरएएफ के दो वज्र वाहन, वाटर कैनन की गाड़ी और एक फायर ब्रिगेड की गाड़ी पुलिस बल के साथ कैंपस में घुस गई। ऐसा पहली बार हुआ है, जब एएमयू के अंदर व्रज वाहन गए। 

दिल्ली के जामिया और अलीगढ़ में हुए बवाल के बाद सहारनपुर पुलिस प्रशासन ने हाईअलर्ट जारी कर दिया है। इसके अलावा इंटरनेट बंद करने का फैसला भी प्रशासन ने खुफिया विभाग से मिले इनपुटों के आधार पर लिया है। जिलाधिकारी के अनुसार सोशल मीडिया के दुरुपयोग की संभावना के मद्देनजर यह आदेश जारी किया गया है। 

बता दें कि रविवार को एएमयू में माहौल बिगड़ता देख शाम छह बजे डीएम ने सभी अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। लेकिन, बैठक के खत्म होते ही एएमयू में यह बवाल शुरू हो गया। छात्रों ने पथराव करने के साथ प्रशासनिक भवन की बैरिकेडिंग तोड़ी। साथ ही कई स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों को भी नुकसान पहुँचाया गया।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन विधेयक पर जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच कुछ वीडियो वायरल हो रही हैं। जिनमें पुलिस और छात्रों के बीच का टकराव नहीं, बल्कि कुछ लोगों द्वारा लगाए जा रहे आपत्तिजनक नारे सुनाई पड़ रहे हैं। इस वीडियो को सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लैटफॉर्म पर शेयर किया जा रहा है। साथ ही दावा किया जा रहा है कि ये छात्र जामिया और एएमयू के हैं।

अलीगढ़ से वायरल वीडियो में सुना जा सकता है कि छात्र परिसर में खड़े होकर कह रहे हैं, “हिंदुत्व की कब्र खुदेगी एएमयू की छाती पर, सावरकर की कब्र खुदेगी एएमयू की धरती पर, बीजेपी की कब्र खुदेगी एएमयू की छाती पर…।” यह वीडियो कब का यह साफ़ नहीं है।

जामिया में लगे ‘हिंदुओं से आजादी’ के नारे; AAP विधायक अमानतुल्लाह कर रहा था हिंसक भीड़ की अगुवाई
AMU में हिंदुत्व मुर्दाबाद के नारों के साथ नागरिकता संशोधन बिल की जलाई कॉपियाँ, 720 पर FIR
कौन हैं वे ‘बाहरी’ जिनके हाथों में खेले जामिया के छात्र: लगाए मजहबी नारे, किया बलवा
जामिया में मजहबी नारे ‘नारा-ए-तकबीर’, ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ क्यों लग रहे? विरोध तो सरकार का है न?

उपद्रव, उत्तेजक नारों के बाद जामिया कैंपस में दाखिल हुई दिल्ली पुलिस, काबू में हालात

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में रविवार को दिल्ली के जामिया इलाके में जमकर हिंसा हुई। रविवार (दिसंबर 15, 2019) शाम प्रदर्शनकारियों ने कई बसें और बाइक फूँक दी। उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने अराजक तत्वों के जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में घुसे होने के संदेह पर कैंपस से सभी छात्रों को बाहर निकाल दिया।

रविवार शाम दिल्ली के जामिया इलाके में शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन पहले उग्र हुआ, जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने बसों और वाहनों में आग लगा दी। जामिया में इस हिंसा के खिलाफ जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों के अलावा जेएनयू और दूसरे संगठनों के लोगों ने भी पुलिस मुख्यालय पर देर रात प्रदर्शन किया। देर रात पुलिस द्वारा 50 छात्रों को रिहा करने के बाद सोमवार (दिसंबर 16, 2019) सुबह 4 बजे प्रदर्शन खत्म हुआ।

हालाँकि जामिया इलाके में हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। दिल्‍ली सरकार ने इलाके में स्‍कूलों की छुट्टी कर दी है। जामिया कैंपस में 5 जनवरी तक छुट्टी घोषित कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने निष्‍पक्ष और स्‍वतंत्र जाँच की बात कही है। सोमवार को पुलिस और छात्रों के एक दल की मुलाकात हो सकती है। बता दें कि रविवार को जामिया में प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई हिंसा और पथराव में दक्षिण पूर्व जिला डीसीपी, अतिरिक्त डीसीपी (दक्षिण), 2 सहायक पुलिस आयुक्त, 5 स्टेशन हाउस अधिकारी और निरीक्षक सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

वहीं यूनिवर्सिटी ने पुलिस पर जबरन विश्वविद्यालय परिसर में घुसने और छात्रों के साथ मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। जिसका जवाब देते हुए दिल्ली पुलिस ने स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस का कहना है कि वे स्थिति को नियंत्रित करने के लिए परिसर में दाखिल हुए थे। उन्होंने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों को हिरासत में लिया गया है।

दिल्ली पुलिस ने कहा, “हमने हिंसा के बाद स्थिति से निपटने के लिए कार्रवाई की। जामिया यूनिवर्सिटी में स्थिति नियंत्रण में है। यह हिंसक भीड़ थी, जिसमें से कुछ को हिरासत में लिया गया है।” दक्षिण पूर्व दिल्ली पुलिस के डीसीपी चिनमय बिस्वाल ने कहा, “किसी पर कोई फायरिंग नहीं की गई है। झूठी जानकारियाँ फैलाई जा रही हैं।” उन्होंने कहा, “भीड़ ने आगजनी की, मोटरसाइकलों में आग लगा दी गई, हम पर पथराव किया गया। हमारा एकमात्र उद्देश्य भीड़ को पीछे करना था, ताकि इलाके में कानून-व्यवस्था बरकरार रखी जाए। यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स से हमें कोई दिक्कत नहीं है।” दिल्‍ली पुलिस ने बताया कि हिरासत में लिए गए 35 छात्रों को कालकाजी पुलिस स्‍टेशन से छोड़ दिया गया। इसके अलावा 15 छात्रों को न्‍यू फ्रेंड्स कॉलोनी से छोड़ा गया।

बता दें कि जहाँ पर हिंसा हुई थी, वहाँ पर आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान भी मौजूद थे। हालाँकि, अमानतुल्लाह ख़ान ने दावा किया है कि वो वारदात वाली जगह पर न तो विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे और न ही उसका हिस्सा थे। उन्होंने भले ही आरोपों से इनकार किया हो लेकिन वीडियो में उन्हें उस विरोध प्रदर्शन में देखा जा सकता है, जो बाद में इतना हिंसक हो उठा कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आँसू गैस का प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने कहा है कि इस पूरे मामले की जाँच की जा रही है।

जामिया की वीसी नजमा अख्तर ने बताया कि जामिया के छात्रों ने प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया था। उन्होंने कहा कि मुझे बताया गया कि आसपास की कॉलोनियों के लोगों ने प्रदर्शन का आह्वान किया था। उनकी पुलिस के साथ झड़प हो गई और वे यूनिवर्सिटी का गेट तोड़कर कैंपस के अंदर आ गए। पुलिस प्रदर्शनकारियों और लाइब्रेरी में बैठे छात्रों के बीच अंतर नहीं कर पाई।

जामिया में लगे ‘हिंदुओं से आजादी’ के नारे; AAP विधायक अमानतुल्लाह कर रहा था हिंसक भीड़ की अगुवाई

पुलिस ने लगाई बसों में आग: अमानतुल्लाह का बचाव करने के लिए सिसोदिया ने फैलाया झूठ

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पुलिस ने लगाई बसों में आग: अमानतुल्लाह का बचाव करने के लिए सिसोदिया ने फैलाया झूठ

दिल्ली में 4 बसों में आग लगाए जाने को लेकर सियासत गरमा गई है। जहाँ एक तरफ़ मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ऐसे हिंसक विरोध-प्रदर्शनों को अस्वीकार्य बता रहे हैं तो उनके विधायक अमानतुल्लाह ख़ान उपद्रवी भीड़ का नेतृत्व करते नज़र आते हैं। अब ‘उलटा चोर कोतवाल को डाँटे’ वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली पुलिस पर ही बसों में आग लगाने का आरोप लगा दिया है। सिसोदिया ने ट्विटर पर कुछ फोटो शेयर कर दावा किया है कि दिल्ली पुलिस भाजपा के इशारों पर बसों को आग के हवाले कर रही है।

हालाँकि, सिसोदिया यहाँ ग़लती कर गए। उन्होंने दिल्ली पुलिस की वो फोटो शेयर कर दी, जिसमें पुलिस आग बुझाती हुई दिख रही है। जबकि, सिसोदिया ने दावा किया कि पुलिस आग लगा रही है। जहाँ ये वारदात हुई, वहाँ जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे और आप विधायक अमानतुल्लाह भी वहाँ देखे गए थे। अमानतुल्लाह ने भी इसे सिसोदिया की तरह ही भाजपा की साज़िश करार दिया। कई अन्य ट्विटर यूजर्स ने सिसोदिया को झूठ बोलने के लिए लताड़ लगाई और उन्हें समझाया कि पुलिस आग लगा नहीं रही, बल्कि बुझा रही है।

उपद्रवियों ने बसों को आग के हवाले करने के बाद अन्य वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्हें खदेड़ने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोलों का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद पुलिस ने डब्बों में पानी भर कर आग बुझाने की कोशिश की। दमकलकर्मियों को सूचना दे दी गई थी, लेकिन वो कुछ देर बाद मौके पर पहुँचे। जामिया के छात्रों ने इस घटना में अपना हाथ होने से इनकार करते हुए इसे आंदोलन को बदनाम करने की साज़िश बताया। जामिया के छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और अहिंसक है।

दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री ने जिस तरह से भाजपा को लपेटे में लेने के लिए दिल्ली पुलिस को बदनाम किया, वो लोगों को नागवार गुजरा। पुलिस लोगों से पानी लेकर आग बुझाने के लिए डाल रही थी, इसे सिसोदिया ने आग लगाना समझ लिया और बिना कुछ सोचे-समझे फोटो ट्वीट कर आरोप भी लगा दिया।

साउथ ईस्ट दिल्ली के डीसीपी चिन्मय विश्वास ने कहा है कि स्थिति अब नियंत्रण में है। मीडिया से बात करते समय डीसीपी मौके पर ही मौजूद थे और हेलमेट पहने हुए थे। उन्होंने बताया कि पुलिस उपद्रवी भीड़ को पीछे खदेड़ने में प्रयासरत है ताकि इलाक़े में शांति-व्यवस्था बहाल की जा सके। उन्होंने कहा कि पुलिस को जामिया के छात्रों से कोई दुश्मनी नहीं है। उन्होंने बताया कि उपद्रवी भीड़ काफ़ी हिंसक थी और 6 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

डीसीपी विश्वास ने बताया कि ग़लत अफवाह फैलाई जा रही है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई। उन्होंने जानकारी दी कि पुलिस ने कोई फायरिंग नहीं की है। वहीं दिल्ली पुलिस के पीआरओ एमएस रंधावा ने कहा है कि पुलिस हिंसा में संलग्न असामाजिक तत्वों की पहचान में जुटी है और उनपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। रंधावा ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है और पुलिस हर गतिविधि पर नज़र रख रही है।

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काश! सुनामी आ जाए और PM मोदी डूब कर मर जाएँ: HT की पत्रकार ने की ओछी हरकत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पत्रकारों के एक बड़े गिरोह की अदावत किसी से छिपी नहीं है। उन्हें लेकर तरह-तरह की बातें कही जाती हैं। इनमें से अधिकतर व्यक्तिगत हमले होते हैं। अब ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक पत्रकार ने एक क़दम और आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र नरेंद्र मोदी की मौत की कामना की है। एक बड़े अंग्रेजी समाचारपत्र की पत्रकार की इस ओछी हरकत की सोशल मीडिया में निंदा हो रही है। ऐसी हरकत करने वाली पत्रकार हैं- नूपुर कश्यप।

नूपुर कश्यप ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने रविवार (दिसंबर 15, 2019) को एक फेसबुक यूजर से कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौत की दुआ माँगे। सोशल मीडिया यूजर ने दो स्क्रीनशॉट शेयर कर के नूपुर कश्यप की पोल खोली। कश्यप ने दुआ माँगी कि नदी में सुनामी आ जाए, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डूब जाएँ।

दरअसल, ख़बर आई थी कि प्रधानमंत्री नेशनल गंगा काउंसिल की बैठक में भाग लेने कानपुर जाएँगे। इस दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी उनके साथ होंगे। एक रिवर क्रूज पर बैठ कर उनके द्वारा गंगा का मुआयना किए जाने की बात भी कही गई थी। इस ख़बर पर टिप्पणी करते हुए मम टमूट नामक फेसबुक यूजर ने लिखा कि सरकार के लिए रिवर क्रूज नागरिकों की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने लिखा कि युवा लड़के असम में मर रहे हैं। उन्होंने मोदी को ‘फेकू’ बताते हुए लिखा कि क्या वो एक मनुष्य भी हैं?

नूपुर ने इसी कमेंट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि ये सब कमेंट करने का क्या फ़ायदा? उन्होंने लिखा कि उन्हें दुआ करनी चाहिए कि मोदी जिस नाव पर बैठें, वो नाव ही डूब जाए। इसके बाद उन्होंने भगवान से दुआ करते हुए लिखा कि काश नदी में सुनामी आ जाए और मोदी की नाव डूब जाए।

यह भी जानने लायक बात है कि ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की मालिक शोभना भरतिया कॉन्ग्रेस की सांसद रह चुकी हैं। नूपुर कश्यप के फेसबुक प्रोफाइल पर भी लिखा है कि वो ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के साथ जुड़ी हुई हैं। इससे पहले एनडीटीवी की पत्रकार सुनेत्रा चक्रवर्ती ने दुआ माँगी थी कि पीएम मोदी को स्वाइन फ्लू हो जाए। ‘टाइम्स नाउ’ के एक पत्रकार प्रशांत कुमार ने कहा था कि काश पीएम मोदी की हत्या कर दी जाए।

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कड़ाके की ठंड, घुप्प अँधेरी रात, 20 किमी घुमाया, कपड़े उतरवाए: दिलीप मंडल का विरोध करने की सजा

सौरभ कुमार, प्रखरादित्य, राघवेन्द्र, आशुतोष, अभिलाष, अर्पित, अंकित, रविरंजन… ये चंद नाम हैं जो हाल ही में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एमपी नगर थाने की कागजों में दर्ज किए गए हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए ये उन छात्रों के नाम हैं जो भोपाल में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया की पढ़ाई कर रहे हैं। इनका कसूर यह है कि इन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन से दो प्राध्यापकों के खिलाफ जातिगत भेदभाव को लेकर शिकायत की। प्रशासन ने उनकी नहीं सुनी तो वे शांतिपूर्वक धरने पर बैठ गए। प्रशासन को यह नागवार गुजरा और पुलिस फौरन हरकत में आई। इसके बाद इन छात्रों के साथ क्या हुआ इसकी कहानी पर आने से पहले उन दो प्रोफेसरों का नाम जान लीजिए जो आरोपों के घेरे में हैं।

एक हैं दिलीप मंडल। मंडल साहब के ब्राह्मणवाद विरोधी ट्वीट पर सोशल मीडिया में आपकी नजर पड़ती ही होगी। ये ब्राह्मणवादी ट्विटर से लड़कर ब्लू टिक लेने के लिए भी कु-ख्यात हैं। दूसरे हैं मुकेश कुमार। प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद इस विश्वविद्यालय में राजनीतिक जो प्रयोगों का सिलसिला शुरू हुआ है उसके तहत ही कुछ महीने पहले दोनों की अनुबंध पर नियुक्ति हुई है। आरोप है कि दोनों प्रोफेसर ने छात्रों के बीच जातिगत भेदभाव कर माहौल खराब कर रहे हैं।

इस संबंध में 11 दिसंबर को छात्रों ने कुलपति के नाम एक लिखित आवेदन दिया था। उन्होंने शिकायत की थी कि दिलीप सी मंडल और मुकेश कुमार जाति के आधार पर छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और जातिगत कटुता बढ़ाने का काम कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि दिलीप मंडल और मुकेश कुमार सोशल मीडिया पर जाति विशेष को लेकर लगातार पोस्ट कर रहे हैं। छात्रों ने 24 घंटे इंतजार किया मगर इस दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से न तो उनसे संपर्क करने की कोई कोशिश की गई और न ही ज्ञापन से संबंधित कोई जवाब दिया गया। उल्टा कुलपति ने इनके खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज करवा दी।

छात्र अर्पित शर्मा ने ऑप इंडिया को बताया कि दिलीप मंडल और मुकेश कुमार क्लास में छात्रों की जाति जानना चाहते हैं। जाति का पता चलने के बाद कथित तौर पर सवर्ण छात्रों से बदतमीज़ी करते हैं। इसके लिए वो क्लास में आते ही छात्र से पूरा नाम पूछते हैं और सवर्ण होने पर उन पर जातिगत टिप्पणियाँ की जाती है। उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।

नई दुनिया में प्रकाशित खबर

इससे त्रस्त छात्र जब 12 दिसंबर को कुलपति को दिए ज्ञापन का जवाब माँगने पहुँचे तो किसी ने उनसे बात नहीं की। इसके बाद छात्र कुलपति कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण धरने पर बैठ गए और भजन करने लगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने काफी देर तक छात्रों से कोई बातचीत नहीं की। उसके बाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार दीपक बघेल छात्रों से बात करने आए मगर उनकी कोई बात नहीं सुनी। उन्होंने छात्रों को भगाने की कोशिश की। छात्रों ने जब कुलपति से फोन पर बात करनी चाही तो तरह-तरह के बहाने बनाए जाने लगे। उनसे कहा गया कि वह सेमिनार में हैं और फोन पर उपलब्ध नहीं हो सकते। फिर जब उन्होंने लिखित आश्वासन माँगा तो रजिस्ट्रार एवं विभागाध्यक्षों ने कहा कि वो लिखित में नहीं दे सकते लेकिन कुलपति के साथ उनकी बात करा सकते हैं।

अगले दिन जब छात्र कुलपति से मिलने पहुँचे तो सभी को कॉन्फ्रेंस हॉल में बैठाया गया। उनसे कहा गया कि वे अपना नाम, कोर्स और मोबाइल नंबर लिख कर दें। इसके बाद कुलपति ने छात्रों से चर्चा की। चर्चा के दौरान कुलपति ने सभी की बातें सुनी, उन्होंने सभी बोलने का मौका तो दिया, लेकिन कोई समाधान नहीं दिया। छात्रों ने अपनी माँगों के संबंध में कुलपति से लिखित आश्वासन की माँग की, जिसके लिए भी कुलपति ने साफ तौर पर इनकार कर दिया।

पीड़ित छात्र सौरव कुमार सुना रहे पुलिसिया जुल्म की दास्तॉं

विश्विद्यालय के एक छात्र सौरभ कुमार ने इस घटना के बारे में ऑप इंडिया को बताया, “कुलपति द्वारा माँगों को न माने के बाद विद्यार्थी शांतिपूर्वक कुलपति कक्ष के बिल्कुल बाहर गाँधीवादी तरीके से धरने पर बैठ गए। इस दौरान हम सब ‘रघुपति राघव राजा राम’ का पाठ कर रहे थे एवं संविधान की पुस्तक अपने साथ लेकर बैठे थे। हमने किसी का भी रास्ता नहीं रोका था। इस दौरान शिक्षकों एवं अन्य आगंतुकों की आवाजाही बनी रही, जो कि  सीसीटीवी में साफ तौर पर देखा जा सकता है। थोड़ी देर बाद पुलिस पहुँची और हमे हटने की चेतावनी दी गई। हम शांतिपूर्वक भजन करते रहे।”

सौरभ ने आगे बताया कि इसके पुलिस ने बलपूर्वक विद्यार्थियों को धकेलना शुरू किया। फिर पुलिस उन्हें जबरदस्ती सीढ़ियों से घसीटकर नीचे ले गई। इस दौरान एक छात्र आशुतोष भार्गव के पाँव में  फ्रैक्चर हो गया। अन्य छात्रों को भी चोटें आई। लेकिन पुलिसिया दमन नहीं रुका।

एक छात्र आकाश शुक्ला के सीने में चोट लगी और वह बेहोश हो गए। इसके बावजूद कोई पुलिसकर्मी या प्रशासन का कोई व्यक्ति छात्रों की मदद के लिए नहीं आया। छात्रों को जब पुलिस ने बलपूर्वक बिल्डिंग से बाहर निकाल दिया तो वे मुख्य द्वार की सीढ़ियों के पास धरने पर बैठ गए।

एक अन्य छात्र रवि रंजन ने बताया उनके जिन साथियों को चोंटें लगीं थीं, उनकी फर्स्ट एड की व्यवस्था भी नहीं की गई। छात्रों ने खुद ही अपनी ज़ख्म साफ किए। कुछ देर बाद रात 9 बजे के करीब पुलिस ने 10 मिनट के अंदर परिसर खाली न करने पर लाठी चार्ज करने की धमकी दी। छात्रों ने परिसर खाली करने से इनकार किया तो पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हें गिरफ्तार किया। इतना ही नहीं गिरफ्तार करने के बाद बगल के एमपी नगर थाने ले जाने की बजाए ठंड की रात में पुलिस छात्रों को लगभग 20 किलोमीटर दूर बिलखिरिया थाने ले गई (वीडियो में सुनें सौरभ कुमार का बयान)।

थाने में देर रात छात्रों के कपडे उतरवाए गए। इसके बाद छात्रों को कुछ कागजों पर दस्तख़त के लिए मजबूर किया गया। आखिरकार 4 घंटे के बाद छात्रों को एमपीनगर थाने लाया गया और रात के 2 बजे के आसपास छात्रों को कागजों पर दस्तखत करवा कर छोड़ दिया गया। पीड़ित छात्रों ने बताया की अभी तक 25 लोगों पर नामज़द FIR दर्ज करवाया गया है। रघुपति राघव राजा राम गा रहे छात्रों पर बलवे की धारा लगाई गई है। इस संबंध में हमने पुलिस का पक्ष जानने की कोशिश की पर बात नहीं हो पाई।

छात्र दोनों प्रोफेसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई चाहते हैं। एक समिति बनाई गई है। कमेटी 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देगी। सौरभ ने बताया कि रजिस्ट्रार दीपेंद्र बघेल ने उनकी दो माँगें तो मान ली है। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों पर कर्मचारियों के साथ जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का जो आरोप लगाया था उसका अब तक खंडन नहीं किया गया है। रजिस्ट्रार दीपेंद्र बघेल ने बताया, “मामले की जाँच की जा रही है। जाँच पूरी होने तक दिलीप मंडल और मुकेश कुमार विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं करेंगे।”

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जामिया मिलिया इस्लामिया में नागरिकता संसोधन क़ानून के ख़िलाफ़ चल रहा विरोध-प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। आपत्तिजनक नारों से लोगों को भड़काने की कोशिश की जा रही है। इसी क्रम में एक नया वीडियो आया है। इसमें जामिया के छात्र हिन्दुओं के ख़िलाफ़ नारेबाजी कर रहे हैं। घृणा फैलाने वाले नारे लगा रहे हैं। इस वीडियो में जामिया के छात्रों को ‘हिन्दुओं से आज़ादी’ के नारे लगाते देखा जा सकता है। हालाँकि, नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध-प्रदर्शन में उन्होंने हिन्दुओं के प्रति घृणास्पद नारे क्यों लगाए, ये चर्चा का विषय है।

जामिया में लगा ‘हिन्दुओं से आज़ादी’ का नारा

जामिया के छात्रों ने ‘हिन्दुओं से लेकर रहेंगे आज़ादी’ का नारा लगाया। इससे पता चलता है कि इन विरोध-प्रदर्शनों का मुख्य उद्देश्य नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध नहीं, बल्कि कुछ और है। अगर एक यूनिवर्सिटी में पढ़े-लिखे छात्र इस तरह की नारेबाजी कर सकते हैं तो फिर बंगाल में हजारों की संख्या में मस्जिद से निकल कर सार्वजनिक संपत्ति को तहस-नहस करने वाले मुस्लिम दंगाइयों के मन में क्या सब चल रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। पूरे बंगाल में कई रेलवे स्टेशनों में तोड़-फोड़ कर के यात्रियों को घंटों बंधक बनाए रखे जाने की ख़बरें आ रही हैं।

नागरिकता संशोधन क़ानून के नाम पर जामिया नगर में कई वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। डीटीसी की 3 बसों को फूँक डाला गया। बसें काफ़ी देर तक धू-धू कर जलीं और दमकलकर्मियों ने किसी तरह आग पर काबू पाया। जिस जगह पर यह घटना हुई, वहाँ जामिया के छात्र ही विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। हालाँकि, छात्रों ने इस वारदात को आंदोलन को बदनाम किए जाने की साज़िश करार दिया।

अब पता चला है कि जहाँ ये घटना हुई, वहाँ आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान भी मौजूद थे। जहाँ एक तरफ केजरीवाल ऐसी घटना को अस्वीकार्य बता रहे हैं, दूसरी तरफ उनके विधायक पर पर हिंसक भीड़ की अगुवाई करने का आरोप लग रहा है।

हालाँकि, अमानतुल्लाह ख़ान ने दावा किया है कि वो वारदात वाली जगह पर न तो विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे और न ही उसका हिस्सा थे। उन्होंने भले ही आरोपों से इनकार किया हो लेकिन वीडियो में उन्हें उस विरोध प्रदर्शन में देखा जा सकता है, जो बाद में इतना हिंसक हो उठा कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आँसू गैस का प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने कहा है कि इस पूरे मामले की जाँच की जा रही है।

ख़ान ने भाजपा के मत्थे पूरा दोष मढ़ते हुए कहा कि पार्टी उन्हें बदनाम करने पर तुली हुई है और अफवाह फैला रही है। उन्होंने कहा कि वो दूसरे प्रदर्शन में थे और वहाँ सबकुछ लोकतान्त्रिक एवं शांतिपूर्ण ढंग से हुआ। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी से साबित हो जाएगा कि वो वहाँ पर नहीं थे।

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कौन हैं वे ‘बाहरी’ जिनके हाथों में खेले जामिया के छात्र: लगाए मजहबी नारे, किया बलवा