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8 दिन के लिए जेल भेजी गई पायल रोहतगी, लोगों ने पूछा- सावरकर के अपमान पर राहुल गाँधी की गिरफ्तारी कब

राजस्थान पुलिस ने आज (दिसंबर 16, 2019) को अभिनेत्री पायल रोहतगी को बूॅंदी की स्थानीय अदालत में पेश किया। अदालत ने उन्हें 8 दिन के लिए यानी 24 दिसंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। एसजीएम कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर मंगलवार (दिसंबर 17, 2019) को सुनवाई होगी।

पायल को बूॅंदी पुलिस ने रविवार को अहमदाबाद स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था। उन पर नेहरू को लेकर सोशल मीडिया में आपत्तिजनक पोस्ट करने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में सोशल मीडिया में ‘आई स्टैंड विथ पायल रोहतगी’ ट्रेंड करने लगा था। जेल भेजे जाने के बाद एक बार फिर लोग सोशल मीडिया में उनका समर्थन कर रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि सावरकर पर अपमानजनक टिप्पणी के लिए महाराष्ट्र सरकार कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी को कब गिरफ्तार करेगी।

बता दें कि पूर्व बिग बॉस प्रतियोगी पायल रोहतगी सोशल मीडिया में अपने वीडियो लेकर आती रहती हैं, जिनमें वो हिंदुत्व को लेकर बातें करती हैं और कॉन्ग्रेस पर निशाना साधती हैं। आरोप है कि ऐसे ही एक वीडियो में उन्होंने पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मोतीलाल नेहरू को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। मोतीलाल देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पिता थे। उनके ख़िलाफ़ राजस्थान यूथ कॉन्ग्रेस के महासचिव चर्मेश शर्मा ने बूँदी जिले के सदर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई थी।

रविवार को पायल ने ट्वीट किया था, “मुझे राजस्थान पुलिस ने मोतीलाल नेहरू पर एक वीडियो शेयर करने के लिए गिरफ्तार किया है। उस वीडियो को मैंने गूगल से जानकारी लेकर बनाया था। बोलने की आजादी एक मजाक है।” अपने ट्वीट में उन्होंने राजस्थान पुलिस, पीएमओ, होम मिनिस्ट्री के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट को टैग किया था।

पायल की गिरफ्तारी पर पुलिस अधिकारी ने बताया था कि रोहतगी के खिलाफ पुलिस को 10 अक्टूबर 2019 को शिकायत मिली थी। उनपर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता चर्मेश शर्मा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाए थे कि अभिनेत्री ने फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से नेहरू और उनके परिजनों के खिलाफ विवादास्पद विडियो बनाकर पोस्ट किए हैं। पायल पर हुई इस कार्रवाई के बाद उनके पति संग्राम सिंह ने ट्वीट कर पीएम मोदी से इस मामले में मदद की गुहार लगाई थी।

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हिन्दुओं से आजादी: फैक्ट चेकर BoomLive ने किया फर्जी Fact-Check: खुद ही देखिए वीडियो

‘फैक्ट-चेकिंग’ वेबसाइट BoomLive ने जामिया में हुई हिंसा के दौरान हिन्दुओं के ख़िलाफ़ लगाए गए नारे की ऑपइंडिया की ख़बर का ग़लत fact-check किया। इस ख़बर में ऑपइंडिया ने दावा किया था कि जामिया मिलिया इस्लामिया में ‘हिन्दुओं से आज़ादी’ के नारे लगाए गए थे। वहीं, BoomLive ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 12 दिसंबर को लगाए नारे का एक fact-check किया। इसमें मुस्लिम भीड़ को ‘हिन्दुओं की कब्र खुदेगी’ ‘AMU की छाती पर’ नारे हिन्दू-विरोधी नारे लगाते सुना जा सकता है।

उपरोक्त वीडियो में मुस्लिम भीड़ तंत्र एक सुर में यह कहता दिखता है कि वे AMU के परिसर में हिन्दुत्व, सावरकर, भाजपा, ब्राह्मणवाद और जातिवाद की कब्र खोदेंगे।

जबकि बहुतों ने ‘हिन्दुत्व’ के रूप में ‘हिन्दुओं’ शब्द का इस्तेमाल किया। BoomLive ने इस ख़बर का fact-check किया लेकिन, इसमें उन्होंने इस बात का उल्लेख नहीं किया कि यह वीडियो कल का नहीं बल्कि संभवतः पिछले सप्ताह का है।

वहीं, ऑपइंडिया ने जो वीडियो शेयर किया, वह रविवार को नई दिल्ली के जामिया नगर में हुए विरोध-प्रदर्शनों का था। इसका उल्लेख ऑपइंडिया ने YouTube पर भी किया और साथ ही लेख में भी इस वीडियो को अपलोड किया।

जामिया नगर में शूट किए गए इस वीडियो के छठे सेकंड में आप सुन सकते हैं कि एक व्यक्ति यह कहता दिखता है कि वो मोदी, अमित शाह और हिन्दुओं से ‘आज़ादी’ लेकर रहेंगे। 

जबकि BoomLive ने अपने fact-check में ऑपइंडिया पर निशाना साधते हुए लिखा कि ख़बर में इस बात का उल्लेख नहीं किया कि जो वीडियो लगा हुआ है वो जामिया नगर का है या AMU का।

बता दें कि BoomLive को फेसबुक द्वारा ’स्पॉट फ़ेक न्यूज़’ के लिए भुगतान और अधिकार दिया जाता है और इसी वजह से वो ख़बरों को गंभीरता से लिए बिना ही केवल प्रोपेगेंडा फ़ैलाने में व्यस्त रहते हैं।

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बीजेपी सत्ता में आई, तो यूपी की तरह आप सिर नहीं उठा पाएँगे: TMC नेता की मजहबी दंगाइयों को सीख

शनिवार को, कोलकाता के मेयर और सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता फ़रहाद हकीम ने मुस्लिम दंगाई भीड़ से राज्य में दंगा न करने और सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान नहीं पहुँचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी पहले ही घोषणा कर चुकी हैं कि राज्य में NRC और CAA लागू नहीं किया जाएगा, इसलिए उन्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।

हकीम ने कहा कि बंगाल के लोगों को अपने ही राज्य के अन्य लोगों को नुक़सान नहीं पहुँचाना चाहिए। हमें बंगाल के लोगों की सार्वजनिक सम्पत्ति को नुक़सान नहीं पहुँचाना चाहिए। अगर ऐसा किया जाएगा तो फिर वो लोग अमित शाह का समर्थन करना शुरू कर देंगे। अगर उनमें से 70% लोग अमित शाह का समर्थन करते हैं, तो जब बीजेपी यहाँ सत्ता में आ जाएगी तो आप अपना सिर नहीं उठा सकेंगे जैसा वो (बीजेपी) उत्तर प्रदेश में करते हैं। तब कोई भी सड़कों पर नहीं आएगा।

उन्होंने कहा, “विरोध करना चाहते हैं तो ममता बनर्जी की रैली में शामिल हों। लोकतांत्रिक, सामाजिक तरीके से CAB और NRC के ख़िलाफ़ विरोध करें। हम अपराधी नहीं हैं कि हम बसों को जलाएँ और अराजकता फैलाएँ। मैं उन भाइयों से अनुरोध करता हूँ जो इन विरोध-प्रदर्शनों में समझदारी से विचार कर रहे हैं। बंगाल के लोग आहत हो रहे हैं और दिल्ली के अमित शाह इस पर हँस रहे हैं।”

मुस्लिम दंगाई पश्चिम बंगाल में उग्र रूप से फैल गए हैं और राज्य सरकार ने अब तक उनसे सख़्ती से पेश नहीं आई है। बसों को जला दिया गया है, गाड़ियों में आग लगा दी गई है और राज्य से सार्वजनिक सम्पत्ति को भारी नुकसान हुआ है।

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अनुज से शादी के लिए शबाना बनी सरिता: लड़की के घर वालों ने दोनों की जिन्दा जलाने की दी धमकी

उत्तर प्रदेश के मेरठ में धर्मपरिवर्तन कर हिंदू लड़के से शादी करने पर एक मुस्लिम महिला पर और उसके पति पर हमला किया गया। जानकारी के मुताबिक महिला के परिजनों ने रविवार (दिसंबर 15,2019) की सुबह ससुराल पहुँचकर उन दोनों से मारपीट की और काफी तोड़फोड़ भी मचाई। इसके बाद पुलिस के पहुँचने से पहले वे फरार हो गए। इस मामले के संबंध में महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने 20 नामजद लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया। सरिता और अनुज के अनुसार रविवार की सुबह वे दवाई लेने के लिए घर से निकलने वाले थे। तभी सरिता के मायके पक्ष से 20 लोगों ने उनपर हमला बोला और लाठी-डंडो से उनसे मारपीट की गई। साथ ही उनपर पत्थर बरसाए गए।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले 14 अप्रैल को शाहपुर जदीद निवासी एक मुस्लिम महिला शबाना (बदला हुआ नाम) ने आर्य समाज मंदिर में अपना धर्म परिवर्तन करके अनुजपाल नामक हिंदू लड़के से शादी की थी। लेकिन हिंदू लड़के से विवाह, सरिता के घरवालों को गवारा न था। इसलिए वह नव-विवाहित दंपत्ति को जिंदा जलाने की धमकी देते थे। घरवालों की धमकियों से तंग आकर सरिता ने 7 दिसंबर को एसएसपी दफ्तर पहुँचकर सुरक्षा के लिए की गुहार लगाई थी। जिसपर सुनवाई करते हुए उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने के लिए दौराला इंस्पेक्टर को निर्देश दिए गए थे। लेकिन उस समय सुरक्षा के नाम पर पुलिस उन्हें केवल ससुराल छोड़ आई। नतीजतन 9 दिन बाद ही उसपर हमले की खबर आ गई।

हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर

जानकारी के मुताबिक, दौराला क्षेत्र के शाहपुर जदीद गाँव में रहने वाले आबिद अली की बेटी 14 अप्रैल को घर छोड़कर चली गई थी। इसके बाद परिजनों ने थाना दौराला में युवती की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। उधर, युवती का कहना था कि उसने 22 अप्रैल को गाँव के अनुजपाल से आर्य समाज मंदिर देवबंद में धर्म परिवर्तन कर शादी कर ली थी। इसके बाद युवती ने कोर्ट में पेश होकर अपने बयान भी दर्ज करा दिए थे। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने युवती को उसके पति के साथ भेज दिया, उसके बाद से ही दोनों एक किराए के मकान में रहने लगे।

मामला तब पुलिस की चौखट पर पहुँचा जब युवती के परिजनों उन्हें मारने की धमकी देने लगे। युवती ने पुलिस को बताया कि वो बालिग है और अपने पति के साथ उसके गाँव में ही रहना चाहती है, लेकिन गाँव में घुसने पर उनकी जान को ख़तरा है। इस बात का भी पता चला है कि एक सप्ताह पहले युवती के परिजनों ने दोनों का अपहरण करने की भी कोशिश की थी। युवती ने एसपी क्राइम को अपनी शिक़ायत में बताया कि उनके अब्बू ने गाँव में अन्य लोगों के साथ मिलकर पंचायत की, जिसमें यह तय किया है कि अगर उन्होंने (दंपति) गाँव में पैर रखा तो उनकी हत्या कर दी जाएगी।

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जिंदा है शाकिर! मीडिया गिरोह ने जामिया के 3 छात्रों के मरने की अफवाह फैलाई, कुलपति ने किया खंडन

जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों के हिंसक प्रदर्शन के दौरान अफवाहों का बाजार भी गर्म रहा। सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से अफवाहें फैलाई गई कि दिल्ली पुलिस ने छात्रों ने साथ न सिर्फ़ बर्बरता की, बल्कि 3 छात्रों को मार भी डाला। पुलिस ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है और जामिया प्रशासन ने भी ऐसी किसी भी ख़बर को नकार दिया है। व्हाट्सप्प ग्रुप्स में बेहोश या घायल छात्रों की फोटो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि ये पुलिस की गोली से मरे हैं।

कई प्रोपेगंडा पोर्टल्स ने भी इस अफवाह को फैलाने में हाथ बँटाया। मीडिया से ऐसे मौक़ों पर उम्मीद रहती है कि वो शांति कायम करने के लिए प्रयास करेगी और ख़बरों की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी तरह जाँच-परख करने के बाद ही उन्हें प्रकाशित करेगी। लेकिन, एक बड़ा वर्ग इसके एकदम विपरीत चल रहा है। जामिया के छात्र उग्र प्रदर्शन कर रहे थे, वहाँ 4 बसों को जला डाला गया और कई वाहन क्षतिग्रस्त कर डाले गए। इसके बाद पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज किया और आँसू गैस के गोले छोड़े।

प्रोपेगंडा पोर्टल ‘इंडस डिक्टम’ ने अपनी फेक ख़बर को बाद में किया अपडेट

‘इंडस डिक्टम’ और ‘जनता का रिपोर्टर’ जैसे प्रोपेगेंडा पोर्टल्स ने लिखा कि पुलिस ने छात्रों को मार डाला है। हालाँकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन का बयान आने का बाद इंडस ने अपनी वेबसाइट पर ख़बर को अपडेट करते हुए लिखा कि पुलिस ने सभी छात्रों को छोड़ दिया है और किसी के भी मरने की सूचना नहीं है। कोटा के रहने वाले शाकिर नामक युवक की मौत की ख़बर चलाई गई थी, जो ग़लत निकली। उसे बस कुछ चोटें आई थीं, जिससे वह घायल हो गया था।

‘जनता का रिपोर्टर’ ने भी फैलाई झूठी अफवाह

जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने भी पुष्टि की है कि पुलिस ने जिन उपद्रवी छात्रों को हिरासत में लिया था, उन सभी को रिहा कर दिया गया है। जामिया की कुलपति नज़मा अख्तर ने बताया कि 2 छात्रों के मारे जाने की जो अफवाह फैली है, यूनिवर्सिटी उसका पूरी तरह से खंडन करता है। उन्होंने कहा कि संपत्ति का काफ़ी नुकसान हुआ है, जिसके लिए वो एफआईआर दर्ज कराएँगी। उन्होंने दावा किया कि लगभग 200 लोग चोटिल हुए हैं, जिनमें से अधिकतर जामिया के छात्र हैं।

अफवाहों को चारों तरफ़ से नकारे जाने के बाद भी सोशल मीडिया पर पुलिस की गोली से जामिया के छात्रों के मारे जाने की ख़बरें लगातार सर्कुलेट होती रहीं। न सिर्फ़ प्रोपेगंडा पोर्टलों बल्कि कई पत्रकारों ने भी छात्रों को भड़काने के लिए झूठी ख़बरें शेयर की। अब आप सोचिए, अगर सही में ऐसा होता, किसी की मौत होती, तो कितना बड़ा बवाल हो जाता?

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नोट: जामिया में छात्रों के मरने की अपुष्ट ख़बर ऑपइंडिया के पास भी आई थी लेकिन हमनें इंतज़ार करना बेहतर समझा। ट्रैफिक या वित्त के लालच में प्रोपेगंडा पोर्टल्स ने इन ख़बरों को चला कर अफवाह फैला दिया, जिससे और भारी क्षति हो सकती थी। हमें जानबूझकर ऐसा नहीं किया। जामिया के कुलपति, पुलिस और छात्र संगठन- सभी ने इन अफवाहों को नकार दिया है, खंडन किया है। शुक्र मनाइए कि मीडिया के एक वर्ग विशेष की ये चाल कामयाब नहीं हुई, वरना हिंसा की और भी वारदातें हो सकती थीं।

‘रेप इन इंडिया’ पर मुश्किल में राहुल गाँधी, स्मृति ईरानी की शिकायत पर चुनाव आयोग ने माँगा जवाब

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गाँधी ‘रेप इन इंडिया’ के बयान पर बुरे फँसते नजर आ रहे हैं। पूरे देश में किरकिरी के बाद अब चुनाव आयोग ने रिपोर्ट तलब की है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की शिकायत पर चुनाव आयोग ने झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से जवाब माँगा है। बता दें कि झारखंड के गोड्डा में चुनाव रैली के दौरान 12 दिसंबर को राहुल गाँधी ने रेप इन इंडिया वाला बयान दिया था। झारखंड में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री के प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ पर चुटकी लेते हुए राहुल गाँधी ने कहा था, “पहले ‘मेक इन इंडिया’ था, लेकिन अब यह ‘रेप इन इंडिया’ बन गया है।”

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी की इस टिप्पणी पर शुक्रवार को उन्हें निशाने पर लिया था और इसे दुखद बताते हुए कहा था कि कॉन्ग्रेस नेता दुष्कर्म पर राजनीति कर रहे हैं। स्मृति ने राहुल की माँ और कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी से राहुल को सलाह देने और उनका मार्गदर्शन करने का आग्रह किया था।

लोकसभा में स्मृति ईरानी ने कहा था, ‘‘देश की महिलाओं के लिए गाँधी खानदान के सांसद ने कहा है कि महिलाओं का बलात्कार होना चाहिए। इस देश का हर पुरुष, हर भाई, हर पिता बलात्कारी नहीं है, जो बलात्कारी है, उसे कानून कड़ी से कड़ी सजा देता है, यह हमानी कानूनी प्रतिबद्धता है। लेकिन हर महिला को कलंकित करने का उसको बलात्कार करने का आह्वान करने का यह पाप करने वाले को दंड अवश्य मिलना चाहिए, देश की महिलाएँ उनकी बपौती नहीं है। रेप इन इंडिया का बयान देने का जो दुस्साहस उन्होंने किया है, उस पर एक्शन होना चाहिए।”

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी राहुल गाँधी के ‘रेप इन इंडिया’ टिप्पणी की निंदा की थी। शर्मा ने अपने ट्वीट में राहुल गाँधी की निंदा करते हुए कहा, “राहुल गाँधी ‘रेप इन इंडिया’ कह कर क्या संदेश देना चाहते हैं? ‘रेप’ शब्द का इस्तेमाल करना इतना सहज कैसे है? क्या उन्हें एहसास है कि यह महिला के लिए कितना कष्टप्रद है? दो राज्यों में, जहाँ इन मामलों की संख्या ज्यादा है, जहाँ महिला आयोग नहीं है, वहाँ कॉन्ग्रेस की सरकारें हैं। इस बारे में क्या कहेंगे?”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले राहुल गाँधी ने केरल के कालपेट्टा में रेप को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की रेप कैपिटल के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल न्यूजपेपर में भारत को रेप कैपिटल कहा जाता है।

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हाई कोर्ट ने नहीं मानी आजम खान की बीवी की दलील, बेटे अब्दुल्ला का निर्वाचन रद्द

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता व रामपुर सीट से सांसद आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम को बड़ा झटका दिया है। हाई कोर्ट ने रामपुर की स्वार सीट से विधायक अब्दुल्ला आजम का निर्वाचन रद्द कर दिया है। अदालत ने चुनाव के वक्त न्यूनतम निर्धारित 25 साल की उम्र नहीं होने की वजह से यह फैसला सुनाया।

बता दें कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार रहे नवाब काज़िम अली ने अब्दुल्ला आजम के चुनाव के खिलाफ याचिका दी थी। इस याचिका में अब्दुल्ला पर फर्जी दस्तावेज लगाकर चुनाव लड़ने का आरोप लगाया था। हाई कोर्ट की जस्टिस एसपी केसरवानी की बेंच ने इस पर अपना निर्णय दिया। 

अब्दुल्ला के खिलाफ याचिका दायर करने वाले नवाब काज़िम का कहना था कि 2017 में चुनाव के समय अब्दुल्ला की उम्र 25 साल से कम थी, इसलिए वह चुनाव नहीं लड़ सकते थे। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद नवाब काजिम अली खान ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी।

24 अप्रैल 2017 को हाईकोर्ट में दायर चुनाव याचिका में नवाब काजिम अली खान ने अब्दुल्ला आजम की सीबीएसई बोर्ड की हाईस्कूल की मार्कशीट पेश की थी, जिसमें अब्दुल्ला की जन्म तिथि 01.01.1993 है। इसके हिसाब में वह चुनाव नहीं लड़ सकते थे। हालाँकि, पूरे मामले को लेकर अब्दुल्ला आजम का कहना था कि प्राइमरी में दाखिले के वक्त टीचर ने अंदाज से जन्मतिथि दर्ज की थी। उनकी माँ तंजीन फातिमा ने भी कहा था कि अब्दुल्ला का जन्म 30 सितंबर 1990 को हुआ था। तंजीन फातिमा ने कोर्ट को बताया था कि अब्दुल्ला का जन्म लखनऊ में हुआ था। वह उस समय सरकारी सेवा में थीं। उन्होंने बताया था कि क्वींस मैरी हॉस्पिटल में 30 सितंबर 1990 को अब्दुल्ला का जन्म हुआ था और यह अस्पताल के दस्तावेजों में भी दर्ज है। उन्होंने हाई स्कूल में दर्ज गलत जन्म तिथि को दुरुस्त करने के लिए अर्जी देने की बात भी कही थी।

बता दें कि इससे पहले इस मामले में 27 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। अब हाईकोर्ट ने इस पर फैसला सुना दिया है। अब्दुल्ला आजम सपा सांसद आजम खान के छोटे बेटे हैं। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में अब्दुल्ला ने पहली बार चुनाव लड़ा था। अब्दुल्ला ने रामपुर क्षेत्र की स्वार विधानसभा सीट से चुनाव जीता था। उल्लेखनीय है कि इसी साल जनवरी में भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर आजम खान के पूरे परिवार के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। सक्सेना ने अपनी शिकायत में आजम खान के बेटे विधायक अब्दुला आजम पर दो जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने का आरोप लगाया था।

जया प्रदा पर ‘खाकी अंडरवियर’ टिप्पणी के मामले में सपा के भू-माफिया आजम खान के खिलाफ वारंट

आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर चलेगा बुलडोजर, एनजीटी के आदेश के बाद नोटिस जारी

आजम खान और उनके MLA बेटे अब्दुल्ला ने मुझ पर कराया जानलेवा हमला: कॉन्ग्रेस नेता

जामिया और AMU के बाद लखनऊ के नदवा कॉलेज के छात्र हुए बवाली, पुलिस ने काबू पाया

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों की हिंसा के बाद लखनऊ के नदवा कॉलेज से भी माहौल बिगड़ने की खबर आई है। कॉलेज के छात्रों ने पथराव किया है।

रविवार की देर रात यहाँ छात्रों ने गेट पर खड़े होकर नारेबाजी भी की थी। हालाँकि उस समय सूचना मिलते ही आधा दर्जन थानों की पुलिस ने मौक़े पर पहुँचकर सभी छात्रों को तुरंत गेट के अंदर कर दिया था। मगर सुबह फिर बड़ी तादाद में छात्र इकट्ठा हुए और पथराव किया। इसके बाद मौक़े पर मौजूद पुलिस कॉलेजों के गेट को बंद कर दिया। जामिया के छात्रों के समर्थन में यहाँ विरोध प्रदर्शन किया गया।

लखनऊ के एसपी कालनिधि नैथानी ने बताया कि प्रदर्शन और नारेबाजी करने के लिए बाहर आए 150 लोगों ने लगभग 30 सेकेंड तक पत्थरबाजी की थी। लेकिन, अब हालात सामान्य हैं और सभी छात्र कक्षाओं में लौट गए हैं।

लखनऊ के अलावा बिहार की राजधानी पटना में भी उत्पात की खबर है। रविवार की शाम वहाँ वीआईपी इलाका कारगिल चौक पर उपद्रवियों ने न केवल जमकर हंगामा किया, बल्कि आधा दर्जन वाहनों और पुलिस पोस्ट में भी आग लगा दी

इस दौरान पुलिस पर पथराव भी हुआ। जिसमें डीएसपी सुरेश शर्मा घायल हो गए। इसके बाद जब पुलिस ने उत्पातियों को खदेड़ा तो उन्होंने पीएमएचसी के पास जाकर आगजनी की। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उपद्रवियों को रोकने के लिए पुलिस को फायरिंग भी करनी पड़ी।

उल्लेखनीय है कि अभी इस बात की सूचना नहीं मिल पाई है कि वीआईपी इलाके में ये उपद्रवी कहाँ से आए। लेकिन, इस उत्पात को देखकर इलाके में हर कोई दहशत में हैं। पुलिस फिलहाल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार इलाके में मार्च कर रही है।

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‘दिल्ली में गोधरा दोहराने की साज़िश’: जामिया नगर में DTC की 3 बसों को किया आग के हवाले
ममता के बंगाल में जुमे की नमाज के बाद योजना बनाकर की जमकर हिंसा, पत्थरबाजी, आगजनी

भाजपा विधायकों का ‘मी पण सावरकर’, उद्धव ठाकरे ने भी कहा- विचारधारा से नहीं होगा समझौता

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा दिल्ली में आयोजित भारत बचाओ रैली के दौरान वीर सावरकर को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद महाराष्ट्र की सियासत गरमाई हुई है। शिवसेना ने जहाँ कॉन्ग्रेस सांसद को वीर सावरकर की किताब पढ़ने की सलाह दी है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत पर भी इसका असर देखने को मिला।

पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस सहित सभी भाजपा विधायक शीतकालीन सत्र में शामिल होने के लिए ‘मी पण सावरकर’ (मैं हूँ सावरकर) लिखी लाल रंग की टोपी पहनकर नागपुर पहुँचे। महाराष्ट्र के सीएम और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी राहुल गाँधी के सावरकर वाले बयान की निंदा की है। ठाकरे ने रविवार (दिसंबर 15, 2019) को नागपुर में सावकर को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करने की बात कही। उन्होंने कहा कि महाअघाड़ी में शामिल पार्टियों के बीच समझौता विचारधारा पर नहीं, सिर्फ कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के आधार पर हुआ है।

उन्होंने कहा, “हमारी सरकार (शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन) न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत काम करती है, न कि किसी खास विचारधारा पर। सावरकर पर हमारी सोच अब भी पहले जैसी ही है।” वहीं नागरिकता संशोधन कानून पर उन्होंने कहा, “देखते हैं कि अदालत क्या फैसला करती है, इसके बाद हम अपना पक्ष रखेंगे।”

इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने महाराष्ट्र में आने वाले राजनीतिक भूकंप की ओर इशारा करते हुए कहा, “महाराष्ट्र में ये दो महीना भूकंप वाला ही है। एक बार देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार का भूकंप हो गया, उसके बाद उद्धव ठाकरे का हुआ और अभी कैसा भूकंप होता है हम देखेंगे। कोई न कोई भूकंप होने की संभावना है।”

राहुल गॉंधी ने सावरकर को लेकर टिप्पणी शनिवार को रामलीला मैदान में कॉन्ग्रेस की रैली के दौरान की थी। ‘रेप इन इंडिया’ वाली टिप्पणी पर भाजपा माफी की मॉंग पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘संसद में शुक्रवार को भाजपा के लोगों ने कहा कि मैं अपने भाषण के लिए माफी मॉंगूॅं। मुझे कहते हैं कि सही बात बोलने के लिए माफी मॉंगो। मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है, मेरा नाम राहुल गॉंधी है। मैं सच्चाई के लिए कभी माफी नहीं मॉंगूॅंगा। मर जाऊँगा मगर माफी नहीं मॉंगूॅंगा और न कोई कॉन्ग्रेस वाला माफी मॉंगेगा।’’ राहुल का यह बयान बीजेपी के साथ ही शिवसेना को भी रास नहीं आया।

वहीं, वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने भी कहा है कि राहुल गाँधी के इस बयान के लिए उद्धव ठाकरे को राहुल गॉंधी की सार्वजनिक रूप से पिटाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “यह अच्छा है कि राहुल गॉंधी, राहुल सावरकर नहीं हैं। ऐसा होता हम सबको अपना मुॅंह छिपाना पड़ता। अब हम उम्मीद करते हैं कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपना वादा निभाएँगे। वे कई बार कह चुके हैं कि यदि किसी ने सावरकर का अपमान किया तो वे उसे सार्वजनिक रूप से पीटेंगे। मैं उम्मीद करता हूॅं कि शिवसेना ने सावरकर पर अपना स्टैंड नहीं बदला होगा।”

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रेडियो मिर्ची की RJ सायमा ने पहले लोगों को पुलिस मुख्यालय घेरने के लिए बुलाया, फिर ट्वीट डिलीट कर भागी

रेडियो मिर्ची की रेडियो जॉकी (RJ) सायमा ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन करने के लिए भीड़ जुटाने के लिए अपने ट्विटर हैंडल का इस्तेमाल किया। उन्होंने ट्वीट कर दिल्ली के लोगों को पुलिस मुख्यालय के बाहर बड़े पैमाने पर इकट्ठा होने का आग्रह किया, जिससे ‘दिल्ली पुलिस द्वारा’ हिंसा के ख़िलाफ़ ‘शांतिपूर्ण ढंग से विरोध किया जा सके।’

दिल्ली पुलिस को जामिया नगर में प्रदर्शनकारियों द्वारा की जा रही हिंसात्मक गतिविधियों पर विराम लेने के लिए सख़्ती से कार्रवाई करनी पड़ी। बता दें कि जामिया मिलिया इस्लामिया में CAB के विरोध में सरकारी सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचाते हुए बसों में आग लगा दी और मज़हबी नारे भी लगाए गए। इसके बाद सायमा ने ITO स्थित दिल्ली पुलिस के पुराने मुख्यालय पर एकजुट होने का आह्वान किया।

सायमा के इस ट्वीट के बाद, यूज़र्स ने रेडियो चैनल रेडियो मिर्ची कंपनी से पूछा कि क्या वो भी सायमा के विचारों का समर्थन करती है।

सायमा, जो आम आदमी पार्टी की समर्थक हैं, वो हमेशा से अरविंद केजरीवाल के समर्थन में काफ़ी मुखर रही हैं।

इससे पहले, सायमा शेहला रशिद के समर्थन में उतरीं थी, जब उन्होंने (शेहला) रिपब्लिक भारत टीवी चैनल के एक पत्रकार को लताड़ लगाई थी।

भाजपा दिल्ली के प्रवक्ता ने भी ट्वीट किया कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि भाजपा दिल्ली आगामी चुनावों के दौरान रेडियो मिर्ची को कोई विज्ञापन नहीं देगी।

हालाँकि, बाद में, सायमा ने भीड़ जुटाने वाले अपने इस ट्वीट को अब डिलीट कर दिया है।

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