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PAK में प्रोफेसर जुनैद हाफिज को सजा-ए-मौत, फेसबुक पोस्ट के जरिए ईशनिंदा का था आरोप

पाकिस्‍तान की एक जिला एवं सत्र अदालत ने मुल्‍तान की बहाउद्दीन जकारिया यूनिवर्सिटी के एक लेक्‍चरर को ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। प्रोफेसर का नाम जुनैद हाफ‍िज है। जुनैद पंजाब प्रांत के मुल्तान शहर की यूनिवर्सिटी में इंग्लिश लिट्रेचर विभाग में बतौर अतिथि लेक्‍चरर के तौर पर कार्यरत थे। उन पर एक फेसबुक पोस्ट में ईश निंदा करने के आरोप में बीते 23 मार्च 2013 को मामला दर्ज हुआ था। लेकिन मामले की कार्रवाई साल 2014 में शुरू की गई। इसके बाद से ही वे जेल में हैं।

पाकिस्‍तानी मीडिया डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, अतिरिक्‍त सत्र न्‍यायाधीश काशिफ कयूम ने उन्हें यह सजा सुनाई। अदालत की ओर से आरोपित जुनैद हाफ‍िज पर 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। उन्हें ये सजा पाकिस्‍तान दंड संहिता की धारा- 295-C के तहत सुनाई गई।

इसके अलावा, अदालत ने जुनैद हाफ‍िज को कुछ अन्य धारों के तहत उम्रकैद एवं 1 लाख रुपए जुर्माने की सजा भी सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि सभी सजाएँ साथ चलेंगी और दोषी को धारा 382-B CrPC का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून में दोषी के लिए रहम की इजाजत नहीं है। इस मामले में अभियोक्ता की ओर से दावा किया गया कि जाँचकर्ताओं ने उनके लैपटॉप से ऐसी चीजें बरामद कीं, जो मजहब के ख़िलाफ़ है।

गौरतलब है कि पिछले 6 साल से पाकिस्तान की जेल में जीवन काट रहे जुनैद हाफिज का नाम बीते दिनों अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने अपने वैश्विक पीड़ितों के डेटाबेस में शामिल किया था। इस दौरान आयोग ने स्पष्ट किया था कि जुनैद किस भयावह संकट में हैं और जेल में उनकी जान को किस हद तक खतरा है।

इसके अलावा यूएससीआईआरएफ ने उनके मामले में ये भी कहा था कि जुनैद के इतने लंबे मामले में अब आठवें जज की नियुक्ति हुई और अभियोजन कथित ईशनिंदा का एक भी सबूत नहीं पेश कर सका। इस दौरान जुनैद को भयावह मानसिक व शारीरिक पीड़ा से गुजरना पड़ा। साथ ही उन्हें, उनके परिवार व वकीलों को जान से मारने की धमकियाँ दी गईं। इतना ही नहीं, बता दें साल 2014 में जुनैद के वकील को उनके कार्यालय में घुसकर मारा गया।

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Loc पर सेना की जवाबी कार्रवाई, 2 पाकिस्तानी रेंजर्स ढेर, 1 पोस्ट भी तबाह

जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भारतीय सेना ने पाकिस्तान की नापाक हरकतों पर जवाबी कार्रवाई करते हुए उनके 2 रेंजर्स को मार गिराया और साथ ही उनका एक पोस्ट भी तबाह कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में रक्षा सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार की रात पाकिस्तान ने अग्रिम चौकियों को निशाना बनाया और बिना किसी के उकसाए सेक्टर में फायरिंग शुरू की। इसके बाद भारतीय सेना ने प्रभावी तरीके से उनकी इस हरकत का जवाब दिया और सुबह एलओसी के पास 2 शव पड़े देखे।

जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान की ओर से अब भी इलाके में गोलीबारी की जा रही है और साथ ही सीमा पार से लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन हो रहा है। लेकिन, ऐसी स्थिति में भी संतोषजनक बात ये है कि भारतीय सेना चुप नहीं बैठी है। वह पड़ोसी मुल्क की हरकतों का लगातार मुँहतोड़ जवाब दे रही हैं। जिसके चलते उन्हें जान-माल दोनों का काफी नुकसान हो रहा है।

गौरतलब है कि अखनूर सेक्टर के अलावा पाकिस्तान ने सुंदरबनी सेक्टर के केरी बट्टल इलाके में सीज फायर का उल्लंघन किया है। लेकिन यहाँ भी उन्हें भारतीय सुरक्षाबल की ओर से करारा जवाब मिला। पाकिस्तान की ओर ये यहाँ करीब 11.30 बजे फायरिंग की गई थी।

इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के तंगधार और कंझालवान सेक्टर में आज यानी शनिवार को पाकिस्तान की तरफ से भारी गोलीबारी की गई है। यहाँ अभी तक किसी भी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है।

बवैसे तो जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में पाकिस्तान की ओर से लगातार सीजफायर उल्लंघन करने की खबरें मीडिया में आ रही हैं, लेकिन यदि क्षेत्र के हिसाब से देखा जाए तो पिछले कुछ समय में पाकिस्तान ने सबसे ज्यादा पुंछ जिले की एलओसी पर सीजफायर का उल्लंघन किया है। खबरों की मानें तो अकेले पुंछ में ही इस साल 1800 से अधिक बार पाकिस्तान की ओर सीजफायर तोड़ा गया है। 

25-30 पुलिस वालों को दुकान में बंद कर जिंदा जलाने का प्रयास: नमाज के बाद हापुड़ में उपद्रवियों का तांडव

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन के नाम पर गुंडई हो रही है। यह किसी भी दृष्टिकोण से विरोध प्रदर्शन नहीं दिख रहा है। यदि प्रदर्शनकारियों द्वारा किए जा रहे इस हिंसक प्रदर्शन को दंगा कहा जाए, तो शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी और इसे करने वाले को प्रदर्शनकारी नहीं बल्कि उपद्रवी या दंगई कहना चाहिए, क्योंकि प्रदर्शन करने का ये तरीका तो बिल्कुल नहीं होता है।

जिस तरह से ये प्रदर्शन कर रहे हैं, उसमें साफ दिख रहा है कि इनके ऊपर खून सवार है और ये जान लेने पर उतारू हैं। वरना 25 पुलिसकर्मी की भीड़ को घेरना और भी उन्हें एक दुकान में बंद कर आगजनी और पथराव करना मामूली बात नहीं है। बता दें कि मेरठ में शुक्रवार (दिसंबर 20, 2019) जुमे की नमाज के बाद अचानक अराजकता फैली और उपद्रवी सड़कों पर आ गए। मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और बुलंदशहर में उपद्रवियों ने जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान एक बैंक व पुलिस चौकी समेत सैकड़ों वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। उपद्रवियों को नियंत्रित करने में पुलिस व दंगा नियंत्रण बल को खासी मशक्कत करनी पड़ी।

अमर उजाला के मेरठ संस्करण में प्रकाशित खबर

हापुड़ में बवालियों का मन इतना बढ़ गया कि पुलिस की एक पूरी टीम की घेराबंदी की और एक दुकान में बंधक बना लिया था। उपद्रवियों ने पुलिस को दुकान के अंदर बंद करके शटर पर आग लगाने का प्रयास किया। जब सूचना पाकर पर पुलिस वहाँ पहुँची तो उपद्रवियों ने उनकी गाड़ी पर भी पथराव किया और फायरिंग कर उन्हें दौड़ा दिया। इसके बाद एसडीएम-सीओ भी आए, लेकिन वो ट्रेनी सिपाहियों को बंधनमुक्त नहीं करा पाए। एक बात तो निश्चित है कि अगर ट्रेनी सिपाही शटर तोड़कर निकलते तो उपद्रवी उन्हें छोड़ते नहीं।

इसके अलावा बुलंदशहर में भीड़ में शामिल युवकों ने अवैध हथियारों से पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी, जिससे पुलिसकर्मी भागकर थाने में घुस गए। इस दौरान भीड़ ने सड़क के किनारे खड़े एक दर्जन से अधिक चार पहिया और दो पहिया वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। उपद्रवियों ने पथराव भी किया, जिसमें आधादर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए।

इससे पहले इसी तरह के हिंसक प्रदर्शन की कई तस्वीरें गुजरात के अहमदाबाद से भी आईं थी। अहमदाबाद के शाह आलम इलाके में दरगाह में इकट्ठी हुई भीड़ ने नमाज के पुलिसकर्मियों को घेर लिया और उन पर पथराव शुरू कर दिया था। पुलिसकर्मी भागकर छिपने की कोशिश कर रहे होते हैं, लेकिन उपद्रवी लगातार उन पर पत्थर लाठियों से वार करते रहे।

उपद्रवियों का ये जानलेवा और हिंसक रवैया दिखाता है कि इनके अंदर न तो कानून का डर है और न ही इंसानियत बची है और कुछ लोग इसे ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन’ और इन उपद्रवियों को ‘शांतिप्रिय प्रदर्शनकारी’ कहते हैं। वहीं कुछ लोगों द्वारा उपद्रवियों की इस भीड़ को ‘डरा हुआ’ भी कहा जा रहा है। पता नहीं वो लोग किस चश्मा से देख रहे हैं इस हिंसक प्रदर्शन को।

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कानपुर में CAA पर हिंसा: दंगाइयों ने पुलिस पर तेज़ाब और पेट्रोल बम से किया हमला, 50 गिरफ़्तार-12 को लगी गोली

उत्तर प्रदेश के कानपुर में नागरिकता क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ शुक्रवार (20 दिसंबर) को जुमे की नमाज़ के बाद दंगाइयों ने क़रीब ढाई घंटे तक जमकर उत्पात मचाया। बाबूपुरवा के बेगमपुरवा, बगाही मस्जिद के पास प्रदर्शन के दौरान अराजक तत्वों ने पुलिस पर तेज़ाब से हमला कर दिया। यहाँ आगजनी, पथराव और गोलीबारी में 12 लोगों को गोली लगी है।

पथराव में दो सर्किल ऑफ़िसर (सीओ), दो दारोगा समेत सात पुलिसकर्मी बुरी तरह से ज़ख़्मी हो गए। पुलिस पर पथराव करने के आरोप में मुक़दमा दर्ज कर बिल्हौर के पालिकाध्यक्ष शादाब ख़ान समेत क़रीब 50 उपद्रवियों को गिरफ़्तार किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बिल्हौर, नौबस्ता, मुरे कंपनी पुल, चकेरी, जाजमऊ आदि क्षेत्रों में भी प्रदर्शन कर जमकर बवाल काटा।

ख़बर के अनुसार, कानपुर में दंगाइयों ने फ़ोर्स के साथ खड़े बाबूपुरवा चौकी इंचार्ज पर तेज़ाब से भरी बोतल फेंककर हमला कर दिया। बोलत को अपनी तरफ आता देख चौकी इंचार्ज वहाँ से पीछे हट गए। ऐसा करके ही वो हिंसक हमले का शिकार होने से ख़ुद को बाल-बाल बचा सके। हालाँकि, तेज़ाब की छींटे उनकी पैंट पर पड़ गईं थी। पुलिस पर पथराव के साथ-साथ खाली बोतलों से भी हमला किया गया। हमले में पुलिसकर्मियों के अलावा वहाँ मौजूद मीडियाकर्मियों को भी चोटें आई।

उपद्रवियों द्वारा पुलिस पर पथराव किए जाने से पूरी सड़के ईंट-पत्थरों से पट गई। बेक़ाबू हालात पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज, आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। लाठीचार्ज से दंगाइयों पर तोड़ा असर तो पड़ा, लेकिन गलियों और छतों से उनके ऊपर पथराव करना शुरू कर दिया गया।

यतीमखाना और नई सड़क की तरफ़ से आ रहे उत्पातियों ने सबसे पहले सद्भावना चौकी के सामने नारेबाज़ी की। इसके बाद नारेबाज़ी करते हुए क़रीब 20 हज़ार दंगाई परेड चौराहे स्थित एकता चौकी पहुँचे। पहले तो उन्होंने सड़क पर बैठकर नारेबाज़ी की फिर इसके बाद प्रेस क्लब में घुसने की कोशिश की।

फ़िलहाल, हाईअलर्ट के बीच भारी पुलिस व अर्धसैनिक बल तैनात किया गया है। बाबूपुरवा में सेवन क्रिमिनल एक्ट के तहत 1500 अज्ञात समेत शहर के 10 थाना क्षेत्रों में 15 हज़ार उपद्रवी भीड़ के ख़िलाफ़ 12 मुक़दमे दर्ज किए गए। उपद्रवियों की ओर से सुरक्षा बलों पर पेट्रोल बम फेंके गए तो हालात और ख़राब हो गए। पुलिस के आला अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे और उपद्रवी भीड़ को तितर-बितर किया। पथराव में सीओ बाबूपुरवा मनोज कुमार गुप्ता, बेगमपुरवा चौकी प्रभारी अनूप कुमार, बाबूपुरवा चौकी प्रभारी राजकुमार रावत समेत सात पुलिस कर्मी घायल हो गए।

इस मामले पर जानकारी देते हुए कानपुर के एडीजी प्रेम प्रकाश ने बताया कि उपद्रवियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि बेगमपुर में गोली लगने से 12 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा उन्होंने पुलिस द्वारा गोलीबारी से इनकार किया। उन्होंने बताया कि आत्मरक्षा के लिए पैलट गन का प्रयोग किया गया था, और जो घायल हुए हैं वो उपद्रवियों द्वारा चलाई गई गोली से हुए हैं।

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CAA विरोधी ट्वीट से नहीं हुई परिणीति चोपड़ा की छुट्टी, 2017 में ही समाप्त हो गया था कॉन्ट्रेक्ट

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर बॉलीवुड के कई सितारों की प्रतिक्रिया सामने आई है। इसके विरोध में एक ट्वीट अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा का भी आया। इसके बाद सोशल मीडिया पर खबरें फैल गईं कि सीएए का विरोध करने पर परिणीति चोपड़ा को हरियाणा सरकार ने ‘बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ’ अभियान के एंबेसडर से की भूमिका से हटा दिया है।

अब चूँकि हरियाणा में भाजपा की सरकार है और ऐसी खबर से सीधे केंद्र सरकार पर सवाल उठते, तो लगभग हर मीडिया हाउस ने बिना सच्चाई की जाँच-परख किए इस खबर को जोर-शोर से कवर किया। शेखर गुप्ता समेत कई लोगों ने इसे अपने पर्सनल अकॉउंट से शेयर कर लोगों में भ्रम फैलाने की पूरी कोशिश की। इसके बाद लोग नरेंद्र मोदी सरकार पर तरह-तरह के सवाल उठाने लगे। सोशल मीडिया पर यूजर टैग कर पूछने लगे कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ बोलने वाले अब बेटी के बोलने पर उसे उसके पद से हटा रहे हैं। आखिर ये क्या बात हुई?

इस महत्वाकांक्षी अभियान से परिणीति चोपड़ा को हरियाणा सरकार द्वारा अलग करने की खबरें मीडिया रिपोर्ट्स में ‘कथित तौर पर’ लिखकर चलाई गई थी। इससे पहले कोई इस बात की पुष्टि या खारिज करता, खुद हरियाणा सरकार ने इसका खंडन कर दिया है।

अफवाहों का खंडन करते हुए हरियाणा के महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस पूरे मामले में सच्चाई बताई और कहा कि एक्ट्रेस को अभियान से अलग करने जाने की खबरें निराधार हैं। परिणीति चोपड़ा के साथ सरकार का कॉन्ट्रेक्ट केवल 1 साल का था। यह 2017 में ही खत्म हो चुका है। इसके बाद इस कभी नवीकृत नहीं किया गया। जाहिर है, इस अभियान से परिणीति के अलग होने की वजह CAA के ख़िलाफ़ बोलना नहीं है। वह समझौता है जो साल 2017 में ही समाप्त हो चुका है। बताया गया है, “एक्ट्रेस को ट्वीट करने पर एंबेसडर की भूमिका से नहीं हटाया गया है। हमने एक्ट्रेस से एक साल का एग्रीमेंट साइन किया था, जो अप्रैल 2017 में खत्म हो गया था, जिसे बाद में रिन्यू भी नहीं किया गया था।”

महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रवक्ता ने यह झूठ फैलाने के लिए कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला पर भी निशाना साधा और कहा कि वे इस मामले पर गलत जानकारी शेयर कर बेवजह विवाद खड़े कर रहे हैं। उन्होंने हर किसी से अपील की बिना तथ्यों के ऐसी ख़बरें प्रकाशित कर गलत सूचना को न फैलाएँ, क्योंकि इससे राष्ट्रीय योजना के मूल उद्देश्य को भी नुकसान पहुँच सकता है।

गौरतलब है कि बीते दिनों सीएए का विरोध कर रहे लोगों पर कार्रवाई को लेकर एतराज जताते हुए परिणीति ने लिखा था कि “जब भी एक नागरिक अपना विरोध करना चाहेगा और यह सब होगा तो सीएए को भूल जाओ। हमें चाहिए कि ऐसा बिल पास करे, जिसमें हम देश को आगे से लोकतांत्रिक ना बता पाएँ! अपनी बात कहने के लिए मासूम लोगों को पीटना बर्बरता है।”

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CAA-NRC पर गुमराह कर रहे राजनीतिक दल, मुस्लिम संयम रखें: शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर भ्रम के कारण फैली हिंसा के बीच शिया धर्मगुरु और मजलिस-ए-उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना कल्बे जवाद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि CAA से मुस्लिमों को कोई खतरा नहीं है। इस कानून को लेकर किसी को यदि कोई भ्रम है तो जानकारों से इस सम्बन्ध में पूछना चाहिए।

मौलाना कल्बे जवाद ने कहा, “CAA और NRC दो अलग-अलग चीजें हैं। NRC अब तक केवल असम में लागू किया गया है। यह पूरे भारत में लागू नहीं किया गया है। हम अभी तक यह नहीं जानते हैं कि NRC में क्या नियम होंगे। राजनीति पार्टियाँ इस पर गुमराह कर रही हैं। मुस्लिमों से अपील है कि वे संयम बनाए रखें।”

शिया धर्मगुरु ने शुक्रवार (दिसंबर 20, 2019) की नमाज से पहले बड़ा इमामबाड़ा के असफी मस्जिद में शिया मुस्लिमों को संबोधित करते हुए संयम बरतने और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का विरोध नहीं करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह सिर्फ असम में लागू है। यदि NRC देशव्यापी लागू किया जाता है तो शिया मुस्लिमों को नागरिकता का कोई भी प्रमाण देने से इनकार कर सविनय अवज्ञा का सहारा लेना चाहिए।

अपने 8 मिनट के संबोधन में जवाद ने कहा कि 20 करोड़ से अधिक मुस्लिम भारत में रहते हैं और अगर वे सभी सविनय अवज्ञा का सहारा लेते हैं, तो यह बहुत बड़ा प्रभाव डालेगा। उन्होंने कहा, “हम देखेंगे कि वे (सरकार) इतनी बड़ी आबादी के खिलाफ कैसे कार्रवाई करेंगे।” वहीं लखनऊ में प्रदर्शनकारियों पर तथाकथित पुलिस की कार्रवाई पर चुप रहने के लिए मुस्लिम राजनेताओं पर भड़कते हुए मौलवी ने कहा था, “एक व्यक्ति मारा गया, 50 से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए और निर्दोष लोगों पर लाठीचार्ज किया गया, लेकिन आजम खान जैसे वरिष्ठ राजनेता चुप हैं।”

उल्लेखनीय है कि संसद से जैसे ही नागरिकता संशोधन बिल पास हुआ, वैसे ही देश के कई हिस्सों में इसका विरोध शुरू हो गया। नए नागरिकता कानून के खिलाफ सबसे पहले नॉर्थ ईस्ट से विरोध की आवाज उठी, जो धीरे-धीरे देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँच गई। 

असम, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात जैसे तमाम राज्यों में विरोध प्रदर्शन का हिंसक रूप दिखा। कुछ जगहों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के इतर मारपीट, आगजनी और पत्थरबाजी हुई। उत्तर प्रदेश में तो हिंसक विरोध-प्रदर्शन के कारण कई लोगों की जान भी चली गई। एहतियातन दिल्ली के कुछ इलाकों सहित गाजियाबाद और दूसरी कई जगहों पर प्रशासन ने इंटरनेट सेवा बंद कर दी है। प्रदर्शन अब भी जारी है।

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हैदराबाद एनकाउंटर में मारे गए आरोपितों के शवों का दोबारा होगा पोस्टमॉर्टम: हाई कोर्ट का आदेश

हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक डॉक्टर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के साथ गैंगरेप और निर्मम हत्या के चारों आरोपितों के शवों का फिर से पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश जारी किया गया है। यह आदेश तेलंगाना हाईकोर्ट ने जारी किया है। दरअसल, हैदराबाद के गाँधी अस्पताल के वरिष्ठ मेडिकल ऑफ़िसर ने चिंता जताई थी कि शवों को लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकेगा। अस्पताल प्रशासन ने कोर्ट से माँग की थी कि वह शवों के संबंध में जल्द कोई निर्देश जारी करे।

कोर्ट ने इससे पहले मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि एनकाउंटर से जुड़े तथ्यों का पता लगाने के लिए दिल्ली की विशेषज्ञ टीम एक बार फिर शवों का पोस्टमॉर्टम कर सकती है। हालाँकि, उन्होंने कहा था कि इसके लिए अस्पताल के अधिकारियों से शवों की स्थिति के बारे में भी पूछा गया था। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए एनकाउंटर में मारे से चारों आरोपितों के शवों को दोबारा पोस्टमॉर्टम करने का आदेश जारी कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में चारों आरोपितों की एनकाउंटर में की गई हत्या की जाँच के लिए तीन सदस्यीय जाँच आयोग का गठन किया था। इस आयोग में बॉम्बे हाई कोर्ट की रिटायर्ड जज रेखा बलदोटा और सीबीआई के पूर्व निदेशक कार्तिकेयन शामिल हैं। 6 महीने में यह आयोग अपनी रिपोर्ट सौपेंगा।

ग़ौरतलब है कि 27 नवंबर को हैदराबाद के बाहरी इलाके शादनगर में एक युवती का अधजला शव बरामद हुआ था। उस शव की पहचान प्रीति रेड्डी के तौर पर हुई थी। प्रीति रेड्डी की गैंगरेप के बाद हत्या की गई और फिर लाश को जला दिया गया था। इस मामले में मोहम्मद पाशा, नवीन, चिंताकुंता केशावुलु और शिवा को गिरफ़्तार किया गया था।

आरोपितों की गिरफ़्तारी के बाद सोशल मीडिया पर लोग इन्हें जल्द से जल्द फाँसी की सज़ा दिलवाने की माँग कर रहे थे। घटना के 9 दिन के भीतर ही ख़बर आई थी कि हैदराबाद पुलिस ने इनका एनकाउंटर कर दिया है। आरोपितों को पुलिस घटनास्थल पर क्राइम सीन रिक्रिएट करने ले गई थी। वहाँ पुलिस का हथियार छीन आरोपितों ने भागने की कोशिश की और पुलिस कार्रवाई में वो मारे गए।

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जामिया दंगों में जो मिन्हाजुद्दीन हुआ घायल, उसे AAP विधायक अमानतुल्लाह ने दिया ₹5 लाख और सरकारी नौकरी

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में जामिया मिलिया इस्लामिया के एक छात्र को चोट लगी। रिपोर्ट के अनुसार उसके एक आँख की रोशनी चली गई है। इसके बाद आम आदमी पार्टी के विधायक और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने घायल लड़के मिन्हाजुद्दीन को 5 लाख रुपए का चेक दिया और वक्फ बोर्ड में लीगल असिसटेंट के पद पर नौकरी देने का ऐलान भी किया।

दंगों में घायल हुए 26 वर्षीय छात्र का नाम मिन्हाजुद्दीन है। यह जामिया में एलएलएम के फाईनल ईयर का छात्र है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्षऔर AAP विधायक ने खुद उससे उसके घर जाकर मुलाकात की। यहाँ अमानतुल्लाह खान ने मिन्हाजुद्दीन को आर्थिक सहायता देने के लिए 5 लाख रुपए का चेक सौंपा और साथ ही उसे जॉब का ऑफर लेटर दिया।

हालाँकि, विश्वविद्यालय की कुलपति नज्मा अख्तर पहले ही इस बात का ऐलान कर चुकी हैं कि प्रदर्शन के दौरान घायल छात्रों के इलाज का खर्चा विश्वविद्यालय उठाएगा, लेकिन उसके बाद भी अमानतुल्लाह की ओर से मिन्हाजुद्दीन को मदद पहुँचाना केजरीवाल सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा कर रहा है… सोशल मीडिया पर इस ऐलान के बाद अमानतुल्लाह समेत पूरी AAP सरकार को घेरा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर विधायक अमानतुल्लाह के इस कदम पर लोग सवाल उठ रहे हैं। लोग इसे राष्ट्रविरोधी कदम बता रहे हैं और पूछ रहे हैं कि केजरीवाल सरकार की यह कैसी नीति है?

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ऑटो में बच्ची बैठी हो या औरत… हम तो डंडे बरसाएँगे: लालू यादव की पार्टी के नेताओं की गुंडई

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ देश भर में लगातार हो रहे हिंसक-विरोधों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, कर्नाटक, असम के बाद अब बिहार में भी विरोध-प्रदर्शन काफ़ी उग्र हो गया है। बिहार में पिछले कुछ दिनों से चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच राज्य में मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने आज बंद का ऐलान किया था। सुबह से ही RJD कार्यकर्ताओं का दल सड़कों पर उतरा हुआ है। विरोध-प्रदर्शन के दौरान बसों और ट्रेनों को जबरन रुकवाया गया।

भागलपुर में RJD कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर चल रहे वाहनों तक में जमकर तोड़फोड़ की है। इसी दोरान एक ऑटो पर हमलावर होते हुए RJD कार्यकर्ताओं को इतना भी होश नहीं रहा कि वो जिस चलते ऑटोरिक्शे पर लाठी बरसाते हुए उसके शीशे तोड़ रहे थे, उसके अंदर बैठी सवारियों में एक बच्ची भी मौजूद थी।

क्या होता अगर ऑटोरिक्शे में बैठी सवारियों में से किसी को कुछ हो जाता, आख़िर कौन होता उनके जानमाल की हानि का दोषी, क्या लालू यादव की पार्टी के कार्यकर्ता इन विरोध-प्रदर्शन की आग में अपनी सारी मानवता को भी झोंक चुके हैं, जबकि RJD के नेता तेजस्वी यादव ने कहा था कि बिहार बंद शांतिपूर्ण तरीक़े से होगा। लेकिन, किसे पता था कि तेजस्वी यादव इस तरह के शांति की बात कर रहे थे!

अगर उन्हें विरोध-प्रदर्शन करना ही है तो वो सड़क पर चलते राहगीरों पर क्यों डंडा बरसाने में जुटे हैं, भला विरोध करने का यह कौन-सा तरीका हुआ, जिसका दंश आम जनता को झेलना पड़ रहा है। लगता है RJD के मुखिया और कार्यकर्ता शायद यह पूरी तरह से भुला बैठे हैं कि आज जिस जनता पर वो उतना क़हर बरसा रहे हैं, चुनाव आने पर वो उन्हीं की चौखट पर वोट की भीख माँगने पहुँच जाते हैं। इतना ही नहीं उन्होंने नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते हुए दुकानदारों से जबरन दुकाने बंद करने को कहा, जो और भी दु:खद है।

उधर, राजधानी पटना में पुलिस ने सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए हैं और सड़कों पर भारी पुलिसबल तैनात है। हालाँकि, RJD समर्थकों ने हाथों में लाठी-डंडे लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। बस स्टैंड के पास कार्यकर्ताओं ने कुछ गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इन सभी कार्यकर्ताओं का कहना है कि CAA और NRC ग़लत है और हम इसका विरोध करते हैं।

पटना में RJD समर्थकों ने जलाया टायर (तस्वीर साभार: नवभारत टाइम्स)

ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के कार्यकर्ता भी इस बंद का समर्थन कर रहे हैं। पटना में विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के वर्कर्स ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस के बैरिकेड को हटा दिया। इसके अलावा, नवादा ज़िले में RJD कार्यकर्ताओं ने पटना-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग पर सद्बावना चौक के पास आगज़नी की और रास्ता जाम किया। इस वजह से सड़कों पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई।

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‘सभी मूर्तियों को हटा दिया जाएगा… केवल अल्लाह का नाम रहेगा’: IIT कानपुर में हिंदू व देश विरोधी-प्रदर्शन

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-कानपुर (IIT-K) के मैकेनिकल विभाग ने संस्थान के निदेशक को एक लिखित शिक़ायत दी है। इस शिक़ायत में कैंपस में आयोजित एक कार्यक्रम ‘solidarity with Jamia students’ के दौरान भारत विरोधी नारे और साम्प्रदायिक बयानों पर आपत्ति जताई गई है।

स्वराज्य में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, इस कार्यक्रम का आयोजन 17 दिसंबर को संस्थान के ओपन एयर थिएटर (OAT) में किया गया था।

शिक़ायतकर्ता डॉ वाशी शर्मा, मैकेनिकल विभाग से हैं। उन्होंने मोबाइल पर बने विरोध-प्रदर्शन की वीडियो क्लिप को दिखाते हुए निर्देशक से दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई किए जाने की अपील की। इस वीडियो क्लिप की एक कॉपी स्वराज्य की संवाददाता और सीनियर एडिटर स्वाति गोयल के साथ भी शेयर की गई है।

इस वीडियो क्लिप में OAT में सौ से अधिक लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। इनमें से एक ने अपनी तख़्ती पर लिख रखा था, “तुम्हारी लाठी और गोली से तेज़ हमारी आवाज़ है।” वहीं, दूसरे ने अपनी तख़्ती पर लिखा था, “IIT कानपुर जामिया और एएमयू छात्रों पर पुलिस की बर्बरता की निंदा करता है। दिल्ली पुलिस पर शर्म करो।”

एक जगह पर, भीड़ में शामिल एक दंगाई अपने मोबाइल फ़ोन पर रिकॉर्ड की गई कुछ पंक्तियों को सुनाता है, जिसकी पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:

लाज़िम है कि हम भी देखेंगे
जब अर्ज-ए-ख़ुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जाएँगे…
सब ताज उछाले जाएँगे
सब तख़्त गिराए जाएँगे
बस नाम रहेगा अल्लाह का…

यह फैज़ अहमद फैज़ की एक कविता की पंक्तियाँ हैं।

IIT निदेशक को दी गई शिक़ायत में कहा गया है कि ये पंक्तियाँ “सभी मूर्तियों को नष्ट करने का आह्वान करती हैं” (जैसा कि मूर्ति पूजा इस्लाम में निषिद्ध है) और इस बात पर ज़ोर दिया गया है, “केवल अल्लाह की पूजा होनी चाहिए।“

शिक़ायत के अनुसार, “कविता की पंक्तियाँ कश्मीर में भारत-विरोधी उग्रवाद का अभिन्न अंग हैं और आतंकवादियों और प्रदर्शनकारियों द्वारा इस्तेमाल की जाती है।” इन पंक्तियों का हिन्दी अनुवाद इस प्रकार है:

“हम गवाह हैं
यह निश्चित है कि हम भी गवाह होंगे
जब अल्लाह की जगह से
जब सभी मूर्तियों को हटा दिया जाएगा
जब मुकुट उछाले जाएँगे
जब सिंहासन लुप्त हो जाएँगे
केवल अल्लाह का नाम रहेगा…”

निदेशक के साथ शेयर किए गए एक वीडियो में एक छात्र दंगाईयों के कार्यक्रम को रोकते हुए बार-बार रोते हुए यह कहता दिखा, “ये नहीं चलेगा”। उस दौरान छात्र के साथ शिक़ायतकर्ता डॉ वाशी शर्मा भी मौजूद थे। इसके अगले कुछ मिनटों में उस छात्र और डॉ शर्मा को कविता पढ़ने के दौरान ही सुरक्षाकर्मियों ने हूटिंग करती भीड़ से अलग कर दिया। इसके बाद विरोधियों की सभा जल्द ही भंग हो गई।

डॉ शर्मा की शिक़ायत, जिस पर संस्थान के 15 छात्रों ने हस्ताक्षर किए हैं, उन्होंने कहा, “मैं हैरान था क्योंकि इन पंक्तियों का इस्तेमाल पाकिस्तान में अक्सर एक साम्प्रदायिक हिंसा फैलाने के रूप किया जाता है। इन पंक्तियों को पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान की कट्टरपंथी भारत-विरोधी पार्टी, पीटीआई द्वारा लोकप्रिय किया गया है। यह कविता ख़ान की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित होती हैं।”

उन्होंने कहा कि यह बात स्पष्ट है कि सभा में अराजक तत्व दकियानूसी हरक़तों को अंंजाम दे रहे थे। इसका उद्देश्य निर्दोष छात्रों को कट्टरपंथी बनाना, भारत के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाना, आपसी विश्वास को ख़त्म करने और संस्थान के वातावरण को साम्प्रदायिक रंग में रंगने का था।

डॉ शर्मा अपनी शिक़ायत में उन छात्रों की तत्काल सुरक्षा की माँग की, जिन्होंने अराजक तत्वों के बयानों पर आपत्ति दर्ज की थी। उन्होंने एक छात्र का सन्दर्भ लेते हुए अपनी शिक़ायत में लिखा कि जब वो छात्र अपने घर लौट रहा था तो मुस्लिम भीड़ के एक सदस्य ने उसे पहचानते हुए उस पर ऊँगली उठाते हुए कहा कि अच्छा तो ‘यह यहाँ रहता है’। ऐसा करने के पीछे उसकी मंशा छात्र को डराने-धमकाने से था, इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि अराजक तत्वों से उसकी जान को ख़तरा है।

शिक़ायतकर्ता डॉ वाशी शर्मा ने IIT प्रशासन से “नफ़रत फैलाने वाली भीड़ के ख़िलाफ तत्काल अनुशासनात्मक और क़ानूनी कार्रवाई” करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजकों और मास्टरमाइंड की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें तुरंत निष्कासित कर दिया जाना चाहिए।

वहीं, संस्थान के उप निदेशक डॉ मणींद्र अग्रवाल ने स्वराज्य की संवाददाता स्वाति गोयल को बताया कि आयोजकों को प्रशासन द्वारा एक बड़ी सभा आयोजित करने की कोई अनुमति नहीं दी गई थी।

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