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मोहम्मद आमिर ने 18 और 10 साल की 2 बहनों को किया अगवा, भाई मूसा के साथ मिल कर किया बलात्कार

18 साल की एक युवती को अगवा कर उसके साथ बलात्कार करने के आरोप में तेलंगाना की चंद्रींगुट्टा पुलिस ने शनिवार (14 दिसंबर) को दो लोगों को गिरफ़्तार किया था। इनकी पहचान मोहम्मद मूसा (21) और मोहम्मद आमिर के रूप में हुई है। आमिर ऑटोरिक्शा चालक है।

पुलिस के अनुसार, पीड़िता अपनी 10 वर्षीय बहन के साथ 8 दिसंबर को अपनी दादी के घर जाने के लिए हशमाबाद रोड पर खड़ी थी। उनकी दादी हशमाबाद की नई बस्ती में रहती हैं। इस दौरान ऑटो रिक्शा चालक आमिर पीड़िता के पास आया उन्हें उनकी दादी के घर छोड़ने के लिए लिफ़्ट देने की बात कही। इसके बाद वो उन्हें हमशाबाद की बजाए तीन किलोमीटर दूर वाट्टेपल्ली अपने घर ले गया।

पुलिस ने बताया कि आमिर ने दोनों बहनों को बंधक बना लिया। रात 11 बजे के आसपास, जब आमिर का छोटा भाई मूसा काम से लौटा तो उसने घर में दोनों बहनों को देखा। दोनों भाइयों ने पीड़िता की छोटी बहन के सोने का इंतज़ार किया और बाद में पीड़िता के साथ बलात्कार किया।

अगली सुबह, आमिर ने दोनों बहनों को फलकनुमा रेलवे स्टेशन के पास एक सुनसान जगह पर छोड़ दिया और वहाँ से भाग गए। दोनों बहनों ने कुछ स्थानीय लोगों की मदद से अपने रिश्तेदारों को बुलाया और फिर अपने घर वापस लौटीं।

ख़बर के अनुसार, इससे पहले दोनों लड़कियों के परिजनों ने 8 दिसंबर को पुलिस से सम्पर्क किया था और दोनों लड़कियों के घर नहीं पहुँचने पर उनकी गुमशुदगी की शिक़ायत दर्ज कराई थी। दोनों बहनों के घर पहुँचने के बाद परिजन पुलिस के पास पहुँचे और उन्होंने पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा दिया।

इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों आरोपितों की तलाश शुरू कर दी। शनिवार को दोनों भाइयों को पुलिस ने धर दबोचा। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 366, 372 (2) (जे) (एन) के तहत मामला दर्ज किया और जाँच शुरू कर दी है। पीड़िता को भरोसा सेंटर भेजा गया जहाँ उनका बयान दर्ज किया गया। इसके बाद, पीड़िता को मेडिकल जाँच के लिए भी भेज दिया गया।

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‘दिल्ली में गोधरा दोहराने की साज़िश’: जामिया नगर में DTC की 3 बसों को किया आग के हवाले

दिल्ली में नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर विरोध-प्रदर्शन तेज़ हो गया है। जामिया नगर में उपद्रवियों ने डीटीसी की 3 बसों को आग के हवाले कर दिया। ड्राइवर व अन्य स्टाफ अपनी जान बचा कर भागे। पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज किया और आँसू गैस के गोले छोड़े। जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने बसों को जलाए जाने में अपना हाथ होने से इनकार कर दिया है। केंद्र सरकार के निर्णय के ख़िलाफ़ विपक्षी दल और कई मुस्लिम संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

जामिया नगर में न सिर्फ़ बसों को जलाया गया बल्कि पत्थरबाजी कर कई बसों के शीशे भी फोड़ डाले गए। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि क्षतिग्रस्त बसों के पास पत्थर के टुकड़े पड़े हैं और कैसे उपद्रवियों ने सार्वजनिक संपत्ति को तहस-नहस किया;

बसों में लगाई गई आग को बुझाने के लिए दमकलकर्मियों को लगाया गया। सूचना मिलते ही दमकलकर्मी और फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ वहाँ पर पहुँचीं। ताज़ा सूचना मिलने तक प्रदर्शनकारी वहाँ से भाग खड़े हुए थे लेकिन बसों से तेज़ धुआँ लगातार उठ रहा था। मौके पर कई प्राइवेट वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। जब ये घटना हुई, तब जामिया के कई छात्र वहाँ पर प्रदर्शन कर रहे थे।

हालाँकि, जामिया के छात्रों ने दावा किया है कि ये हरकत उन्होंने नहीं की है। उन्होंने कहा कि उनका विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण और अहिंसक है। छात्रों ने आरोप लगाया कि उनके आंदोलन को बदनाम करने के लिए शरारती तत्वों ने बसों को जलाने का काम किया है। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगा कर प्रदर्शनकारियों को रोका, लेकिन जब वो नहीं माने तो लाठीचार्ज और आँसू गैस का सहारा लिया गया। आसपास के क्षेत्र को खाली करा लिया गया है। जब सदन में नागरिकता संशोधन बिल पेश किए जाने की बात चल रही थी, तभी से इन इलाक़े में तनाव व्याप्त हो गया था।

जामिया कैम्पस के भीतर छात्रों का प्रदर्शन अभी भी जारी है और वो लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। जहाँ ये घटना हुई है, वो जगह जामिया कैम्पस से कुछ ही दूरी पर जामिया नगर में स्थित है। जामिया के पूर्व छात्रों के संगठन ने इस घटना की निंदा की है। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने आशंका जताई है कि ये दिल्ली में गोधरा दोहराने की साज़िश है। वहीं मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा है कि विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए और इस तरह की हिंसा स्वीकार्य नहीं है।

ट्रैफिक पुलिस ने ओखला अंडरपास से सरिता विहार जाने वाले मार्ग पर यातायात रोक दिया है। लोगों से अपील की गई है कि वे इस रास्ते न गुजरें। ज्ञात हो कि केंद्रीय दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है। वहाँ पूर्वोत्तर के छात्र संशोधित नागरिकता कानून का विरोध करने के लिए जुटे हैं।

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‘CAB पर हिंसा करने वाले गजवा-ए-हिंद के समर्थक, पाकिस्तान की ताल पर नाच रहे राहुल गाँधी’

नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ ज़िले में तनाव की स्थिति है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं। भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने नागरिकता क़ानून का विरोध करने वालों को गजवा-ए-हिंद का समर्थक बताया है। 

बीजेपी नेता ने रविवार (15 दिसंबर) को ट्वीट कर कहा, “CAB में नागरिकता देने का प्रावधान है लेने का नहीं…गजवा-ए-हिंद के समर्थक केरल, AMU या अन्य जगह पर उपद्रव कर रहे हैं। यह गजवा-ए-हिंद के समर्थक हो सकते हैं, हिंदुस्तान के नहीं।”

मोदी सरकार में पशुपालन मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि महादेव ने माँ भारती को सशक्त और सेवा करने के लिए भेजा, मोदी जी ने सर्जिकल स्ट्राइक, अनुच्छेद-370, तीन तलाक़, नागरिकता संशोधन क़ानून (CAB), NRC, राम मंदिर जैसे कई महान कार्य किए। 

राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वो पाकिस्तान की ताल पर नाच रहे हैं और उनकी भाषा बोलकर हिन्दुस्तान को बदनाम और कमज़ोर करने की साज़िश रच रहे हैं। 

इसके अलावा, गिरिराज सिंह ने बिहार और बंगाल में भारतीय राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने के लिए माँग फिर से दोहराई। उन्होंने कहा कि NRC आएगा तो इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए और राज्यों को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद यह क़ानून पूरे देश में एक साथ लागू होना चाहिए।

ग़ौरतलब है कि विपक्ष के विरोध के बावजूद नागरिकता (संशोधन) विधेयक बुधवार (11 दिसंबर) को राज्यसभा द्वारा और सोमवार (9 दिसंबर) को लोकसभा द्वारा पारित किया गया। मौजूदा क़ानून के मुताबिक किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल यहाँ रहना अनिवार्य था। नए कानून में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए यह अवधि घटाकर 6 साल कर दी गई है। मौजूदा क़ानून के तहत भारत में अवैध तरीके से दाखिल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती थी और उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने का प्रावधान था।

वहीं, CAB के पारित होने के बाद विभिन्न मुस्लिम संगठनों से संबंधित कई सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किए। हालाँकि, यह विरोध प्रदर्शन तक ही सीमित नहीं रहा, ये जल्द ही हिंसा में तब्दील हो गया। खासकर पश्चिम बंगाल में हिंसा का उग्र रूप देखने को मिला।

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले में एक रेलवे स्टेशन परिसर में शुक्रवार शाम को हजारों लोगों द्वारा आग लगा दी गई, जिसमें अधिकतर लोग समुदाय विशेष से संबंधित थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बेलडांगा रेलवे स्टेशन परिसर में रेलवे पुलिस बल के कर्मियों की भी पिटाई की।

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ओवैसी के डर से बंगाल में दंगाइयों को खुली छूट दे रही हैं ममता!

नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध के नाम पर पश्चिम बंगाल में जिस तरह हिंसा हुई है उससे हर कोई हैरान है। मुस्लिम भीड़ ने रेलवे स्टेशनों को तहस-नहस कर दिया, यात्रियों को घंटों बंधक बनाया और सार्वजनिक संपत्ति को ख़ासा नुकसान पहुँचाया। पूरे देश ने देखा कि कैसे जुमे की नमाज के बाद मस्जिद से निकली भीड़ ने हिंसा की। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभी तक इन दंगाइयों के ख़िलाफ़ कोई सख़्त कार्रवाई नहीं की है। दंगाई मुस्लिमों को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने भी कुछ ख़ास नहीं किया है।

क्या यह सब सिर्फ़ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कारण हो रहा है? मालूम हो कि ममता काफ़ी समय से इस नीति पर काम कर रही हैं। लेकिन ठहरिए, इसके पीछे और बड़े कारण भी हैं। मुस्लिम दंगाइयों के इस कुकृत्य से इतना तो साफ़ हो ही गया है कि पीड़ित हिन्दुओं का झुकाव अब भाजपा की तरफ़ बढ़ेगा। तृणमूल कॉन्ग्रेस पर पड़ने वाले इस्लामिक हिंसा के इस राजनीतिक दुष्प्रभाव से ममता बनर्जी भलीभाँति परिचित हैं, फिर भी वो ऐसा क्यों होने दे रही हैं?

इसका उत्तर है- असदुद्दीन ओवैसी फैक्टर। हैदराबाद के सांसद ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने 2021 बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की है। पार्टी प्रवक्ता असीम वक़ार ने ममता को चेताते हुए कहा था:

“ये सही है कि हम संख्या में कम हैं लेकिन लेकिन कोई हमें छूने की भी हिम्मत न करे। हमलोग एटम बम हैं। दीदी (ममता बनर्जी), हमें आपकी दोस्ती भी पसंद है और हम आपकी दुश्मनी का भी स्वागत करते हैं। अब ये आपके ऊपर है कि आप हमें अपना दोस्त समझती हैं या फिर दुश्मन।”

कोलकाता के धर्मतला में एआईएमआईएम की एक बैठक हुई थी, जिसमें महाराष्ट्र के पूर्व विधायक वारिस पठान भी मौजूद थे। ममता ने नवंबर 2018 में ओवैसी भाइयों की कट्टरवादी छवि को लेकर जनता को अप्रत्यक्ष रूप से चेताया था। कूच विहार में कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए बिना किसी का नाम लिए तृणमूल सुप्रीमो ने कहा था कि ‘उनका’ आधार हैदराबाद में है और ‘उनकी’ बातें नहीं सुनी जानी चाहिए।

दिसंबर में जमीरुल हसन ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी उनकी पार्टी एआईएमआईएम को निशाना बना रही हैं। उन्होंने कहा था:

“पूरे बंगाल में हमारे कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा डराया-धमकाया जा रहा है। हमें गालियाँ दी जा रही हैं। पुलिस हमारे राजनीतिक कार्यक्रमों को रोक रही है। ऐसा मुख्यमंत्री के इशारों पर हो रहा है। ममता ने पुलिस को छूट दे रखी है कि वो एआईएमआईएम की एक भी बैठक या राजनीतिक कार्यक्रम न होने दे। हम कोलकाता में एक भव्य रैली आयोजित करेंगे, जिसमें हमारी पार्टी के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी मुख्य वक्ता होंगे।”

ममता बनर्जी के लिए अब चीजें उतनी आसान नहीं लग रही हैं। उन्होंने मुस्लिम वोट बैंक पर अपना सब कुछ खपा दिया है। उन्होंने हिन्दुओं के एक बड़े वर्ग को लगातार नज़रअंदाज़ किया, जो अब भाजपा का वोटर बन चुका है। 2019 में भाजपा ने 18 सीटें जीतीं, जिसमें इस वोट बैंक का बड़ा योगदान है।

अब दिक्कत ये है कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी के लिए तैयार है। मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए मेहनत करने वाली ममता ऐसा होने नहीं देना चाहती हैं। हिन्दुओं का एक बड़ा वर्ग पहले ही भाजपा के साथ जा चुका है। नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर सीएम ममता के पास दो विकल्प थे। पहला, वो इसका समर्थन कर देतीं। अगर वो ऐसा करतीं तो मुस्लिम वोट बैंक उनके हाथ से स्पष्ट रूप से फिसल जाता। उन्होंने दूसरा विकल्प चुना और मुस्लिमों को ख़ुश करने के लिए सदन में बिल का विरोध किया।

ममता बनर्जी को पता था कि पहला विकल्प चुनने पर उन्हें कोई राजनीतिक लाभ नहीं होता। भाजपा के पक्ष में जा चुके हिन्दुओं का अब उनकी पार्टी का वोटर बनना मुश्किल है। विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने रिस्क लिया है- अपने मुस्लिम वोट बैंक को रिझाने के लिए। ओवैसी को ममता का चुनावी गणित बिगाड़ने के लिए पूरे मुस्लिम वोट बैंक की ज़रूरत नहीं है। अगर वो 5% के आसपास वोट शेयर हासिल करने में कामयाब रहते हैं, तब भी भाजपा को इसका बड़ा फायदा मिलेगा।

हालाँकि, अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगा लेकिन स्पष्ट दिख रहा है कि बंगाल में मुस्लिम दंगाइयों के कारण उत्पन्न हुई अव्यवस्था के कारण हिन्दुओं में से अधिकतर भाजपा का रुख करेंगे। 2021 विधानसभा चुनाव में ममता का ये दाँव उलटा पड़ने जा रहा है, ऐसा प्रतीत हो रहा है। उन्होंने अपने हिन्दू वोट बैंक को दाँव पर लगा दिया है और मुस्लिम उनके साथ बने ही रहेंगे, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है।

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क्या यही है वो ‘गुरु’ जिसे ढूँढ रहे हैं सचिन तेंदुलकर, जिसके कहने पर बदल दिया था…

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को चाहने वालों की यूँ तो कोई कमी नहीं है, लेकिन एक फैन
ऐसा भी है जिसकी तलाश ख़ुद सचिन कर रहे हैं। दरअसल, इसी फैन की सलाह पर सचिन ने अपने एल्बो गार्ड फिर से डिज़ाइन करवाए थे, जिसके बाद उनके प्रदर्शन में सकारात्मक सुधार भी देखने को मिला था।

सचिन तेंदुलकर ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो शेयर कर इस फैन का ज़िक्र किया है। वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “मैं चेन्नई के ताज कोरोमंडल में टेस्ट सीरीज़ के दौरान एक स्टाफ़ से मिला था। मेरी उसके साथ एल्बो गार्ड को लेकर बात हुई थी। उसी की सलाह पर मैंने अपना एल्बो गार्ड रिडिजाइन किया था। मैं नहीं जानता कि वह अब कहाँ है और मैं उससे मिलना चाहता हूँ। क्या आप लोग उस वेटर की तलाश में मेरी मदद कर सकते हैं।”

न्यूज़ 18 ने सचिन की इस तलाश को पूरा करने का दावा किया है। उस वेटर का नाम गुरु प्रसाद है जो 19 साल पहले सचिन तेंदुलकर से मिला था। उस समय टीम इंडिया टेस्ट सीरीज़ खेलने के लिए चेन्नई गई थी और सचिन वहाँ ताज कोरोमंडल में रुके थे।

सचिन ने अपने वीडियो में बताया है कि उन्हें अच्छी तरह याद है कि वह वेटर एक दिन उनके कमरें में आया था। वह कॉफी लेकर आया था। उसने उनसे एल्बो गार्ड पहनकर खेलते हुए बैट स्विंग के बारे में बात की थी। सचिन ने अपने वीडियो में कहा:

“उसने मुझसे कहा था कि एल्बो गार्ड पहनकर खेलते हुए मेरा बैट स्विंग बदल जाता है। वह मेरा बड़ा फैन था और मेरे एक्शन को कई बार देखता था। मैंने उससे कहा था कि तुम सही हो और दुनिया के पहले ऐसे इंसान हो, जिसने इस कमी को पकड़ा है। इसके बाद मैं मैदान से जब अपने कमरे में आया तब मैंने अपना एल्बो गार्ड रिडिज़ाइन किया था।”

ग़ौरतलब है कि सचिन तेंदुलकर का नाम क्रिकेट के इतिहास में विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों गिना जाता है। देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित होने वाले वह सर्वप्रथम खिलाड़ी और सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर पर एक बायोपिक फिल्म ‘सचिन : ए बिलियन ड्रीम्स’ बनाई जा चुकी है।

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एक शांतिपूर्ण आंदोलन का स्वरूप कैसा होता है? इसका ताज़ा उदाहरण बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के ‘धर्म विज्ञान संकाय’ के उन छात्रों ने पेश किया है, जो फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति का विरोध कर रहे थे। आंदोलन के दौरान न पत्थरबाजी की ख़बर आई, न ही पुलिस के साथ झड़प की। आंदोलन के तहत हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड का पाठ, साधु-संतों का सम्बोधन और भगवद्गीता पर चर्चा जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। लेकिन, भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री का एक जाना-माना चेहरा ऐसा भी है, जो इन छात्रों को ‘धब्बा’ मानता है। अर्थात, उन्हें कलंक की संज्ञा देता है।

जिस नायक-निर्माता-निर्देशक-संगीतकार-गायक की नज़र में हनुमान चालीसा का पाठ कर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने वाले छात्र ‘धब्बा’ हैं। फिर, स्टेशन पर लोगों को बंधक बना कर ट्रेन परिचालन ठप्प करने वाले लोग उसकी नज़र में क्या होंगे? हजारों यात्रियों पर पत्थरबाजी करते हुए रॉड और डंडों से उन्हें नुकसान पहुँचाने वाले लोग उसकी नज़र में क्या होंगे? बीएचयू के छात्रों को ‘धब्बा’ मानने वाले इस सेलेब्रिटी की नज़र में यह सब जायज है, उसके ख़िलाफ़ बोलना पाप है और उस तरफ़ ध्यान दिलाया जाना भी कट्टरता है। आइए जानते हैं, कैसे?

जहाँ एक तरफ जावेद अख्तर पटकथा लेखक से गीतकार और फिर ट्विटर ट्रोल तक का सफर पूरा कर चुके हैं, उनके बेटे फरहान अख्तर भी उन्हीं की राह पर चलते दिख रहे हैं। डॉन और दिल चाहता है जैसी हिट फ़िल्मों का निर्देशन कर चुके फरहान अख्तर सोशल मीडिया पर वही भाषा बोल रहे हैं, जो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर दंगा कर रहे मुस्लिमों की जबान से निकल रहा है। एक सेलेब्रिटी होने के नाते शांति की अपील करने का फ़र्ज़ छोड़ कर फरहान अख्तर ने अपने दोहरे रवैये का परिचय दिया है। आतंक फैला रही भीड़ की निंदा करना तो दूर, उसके बारे में बात करने के लिए भी वो तैयार नहीं हैं।

जावेद अख्तर, उनकी पत्नी शबाना आज़मी और उनके बेटे फरहान अख्तर अक्सर सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहते हैं। इस तिकड़ी को केंद्र की मौजूदा भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ लगातार बयान देने के लिए जाना जाता है। इसी क्रम में सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर हुआ, जिसमें कैब के विरोध के नाम पर आगजनी की गई, ट्रेनों को नुकसान पहुँचाया गया और सार्वजनिक संपत्ति को तहस-नहस कर दिया गया। ये वीडियो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का था। किसी ने फरहान अख्तर का ध्यान इस घटना की ओर दिलाया।

ट्विटर यूजर गीतिका ने अख्तर परिवार की तिकड़ी को टैग करते हुए लिखा कि वो अपने कौम से शांति की अपील करें। वो अपने समुदाय के लोगों से कहें कि वो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाएँ। ट्विटर यूजर ने याद दिलाया कि बाद में जब इन दंगाइयों को पकड़ कर पीटा जाएगा और उन्हें सज़ा दी जाएगी, तब यही लोग उनके पक्ष में आवाज़ उठाएँगे। गीतिका ने सलाह दी कि इनके गिरफ़्तार होने के बाद रोना चालू करने से अच्छा है कि फरहान, जावेद और शबाना अभी भी अपने क़ौम से शांति बनाए रखने की अपील करें।

फरहान अख्तर को गीतिका की ये सलाह नागवार गुजरी और उन्होंने ट्विटर यूजर को ही कट्टरवादी करार दिया। फरहान अख्तर ने लिखा कि वो फ़िल्म निर्देशक डेविड धवन को कहेंगे कि वो ‘Bigot No.1’ फ़िल्म बनाएँ और गीतिका को उसमें लें, क्योंकि वो उसमें अभिनय करने के लिए सबसे उपयुक्त पसंद रहेंगी। एक तरह से उन्होंने गीतिका को धर्मांध कट्टरपंथी साबित करने की कोशिश की। बता दें कि धवन ‘कुली नंबर 1’, ‘हीरो नंबर 1’, ‘बीवी नंबर 1’, ‘जोड़ी नंबर 1’ और ‘शादी नंबर 1’ जैसी फ़िल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं, इसीलिए फरहान ने इस ट्वीट में उनका जिक्र किया।

फरहान अख्तर ने उन दंगाइयों के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा। शायद अपने क़ौम के लोग ऐसा काम कर रहे थे तो उनकी निंदा तो दूर, वो उन्हें शांत रहने की सलाह भी नहीं दे सकते थे। उलटा उन्होंने गीतिका को ही लपेटे में ले लिया। कथित सेलेब्रिटीज की इस सूची में जावेद जाफरी जैसे पुराने अभिनेता और अली फजल जैसे नए-नवेले कलाकार भी शामिल हैं। इन सभी ने कैब का विरोध करते हुए दंगाई भीड़ के ख़िलाफ़ एक शब्द भी नहीं बोला, उलटा उनका अप्रत्यक्ष समर्थन किया। गीतिका ने सही लिखा था कि कल को अगर इन्हीं दंगाइयों की पुलिस पिटाई करे तो ये मानवाधिकार हनन और फासिज़्म की बातें करने लगेंगे।

फरहान अख्तर के लिए ये नया नहीं है। उनके लिए एक बस पर पत्थरबाजी करने वाली भीड़ आतंकवादी है, जबकि पूरे के पूरे स्टेशन को तबाह कर कई ट्रेनों के परिचालन को ठप्प कर हज़ारों-लाखों लोगों को परेशान करने वाली मुस्लिम भीड़ का हर कुकृत्य जायज है। इसे समझने के लिए हमें 2 साल पीछे जाना होगा, जब करणी सेना संजय लीला भंसाली की फ़िल्म ‘पद्मावत’ के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रही थी। तब ख़बर आई थी कि राजपूत संगठन करणी सेना ने एक स्कूली बस पर पत्थरबाजी की। हालाँकि, संगठन ने बाद में गुरुग्राम में हुई इस घटना में अपना हाथ होने से इनकार कर दिया था।

तब फरहान अख़्तर ने बस पर पत्थरबाजी करने वालों को आतंकवादी कहा था। उन्हों ट्वीट कर के कहा था कि बस पर हमला करना आंदोलन नहीं है बल्कि आतंकवाद है। उन्होंने लिखा था कि जिन लोगों ने ऐसा किया, वो आतंकवादी हैं। बस पर पत्थरबाजी को आतंकवाद बताने वाले फरहान अख्तर के लिए ट्रेन की खिड़कियाँ तोड़ डालने वाली भीड़ का कुकृत्य शायद इसीलिए जायज है, क्योंकि वो जुमे की नमाज के बाद किसी मस्जिद से निकलती है। उस भीड़ में शामिल बच्चे-बूढ़े और युवा कुर्ता-पायजामा पहने होते हैं और इस्लामी स्कल-कैप पहने होते हैं। वहीं अगर उनके माथे पर टीका होता तो फरहान उन्हें अब तक आतंकी करार दे चुके होते।

बस पर पत्थरबाजी करने वाले 10 लोग आतंकी हैं। बीएचयू में शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वाले एकाध दर्जन छात्र ‘धब्बा’ हैं लेकिन हजारों की संख्या में निकल कर आतंक मचाने वालों के ख़िलाफ़ एक शब्द भी लिखना ‘Bigotry’ है। तभी तो बाबासाहब आंबेडकर ने कहा था- “मुस्लिम कभी भी अपने मजहब से ऊपर देश को नहीं रखेंगे। वो हिन्दुओं को कभी भी अपना स्वजन नहीं मानेंगे।” फरहान अख्तर का उदाहरण उनके इस वक्तव्य की पुष्टि करता है। लेकिन हाँ, आतंक मचाने वाले इन लोगों पर जब कार्रवाई होगी, तब फरहान ज़रूर ट्वीट करेंगे।

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ये जो आग लगा रहे हैं, कपड़ों से ही पता चल जाता है कि वे कौन हैं: PM मोदी ने दंगाइयों को चेताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर हो रही हिंसा को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा है कि भाजपा का विरोध करते-करते कॉन्ग्रेस अब सीमा लाँघ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि इस एक्ट का विरोध कर रहे लोग कौन हैं, ये उनके कपड़ों से ही पता चलता है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की बात जब नहीं चल रही है तो पार्टी अब आगजनी पर उतर आई है। पीएम मोदी ने कहा- “ये जो लोग आग लगा रहे हैं, टीवी पर उनके दृश्य देखने को मिल रहे हैं। उनके कपड़ों से ही पता चल रहा है कि ये प्रदर्शनकारी कौन हैं?

नागरिकता संशोधन कानून से पड़ोसी देशों से आए अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया। दोनों सदनों से इसके पास होने के साथ ही नॉर्थ-ईस्ट और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में आगजनी शुरू हो गई। जुमे की नमाज के बाद मस्जिद से निकली भीड़ ने जगह-जगह पर हिंसा की और सार्वजनिक संपत्ति को तहस-नहस कर दिया। ट्रेनें घंटों रोक कर रखी गईं और हजारों-लाखों यात्रियों को ख़ासी परेशानी हुई। विपक्षी दलों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में लगातार हिस्सा लिया।

प्रधानमंत्री ने कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी दलों को निशाने पर लेते हुए कहा कि वो लोग तूफ़ान खड़ा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो नॉर्थ-ईस्ट और बंगाल के लोगों का अभिनन्दन करते हैं, क्योंकि उन्होंने हिंसा करने का इरादा रखने वालों को अलग कर दिया है। पीएम ने कहा कि असम और पूर्वोत्तर का हमेशा से देश का मान-सम्मान बढ़ाने वाला व्यवहार ही रहा है। नरेंद्र मोदी ने कहा:

“दुनिया के देशों में भारत के ही दूतावास के सामने कभी कोई भारत का व्यक्ति प्रदर्शन करता है? कॉन्ग्रेस द्वारा दुनिया में हिंदुस्तान में बदनाम करने का काम हो रहा है। तब लगता है कि भारत की संसद में नागरिकता कानून में बदलाव का निर्णय सही है। आप हैरान हो जाएँगे, जो काम लंदन में हमेशा पाकिस्तान करता रहता है, पाकिस्तान के पैसों से कुछ बिकाऊ लोग करते रहते हैं, पहली बार वह काम कॉन्ग्रेस ने किया है। इससे ज्यादा शर्म की बात क्या हो सकती है? रामजन्मभूमि का निर्णय हुआ, अनुच्छेद 370 का निर्णय हुआ, पाकिस्तान के लोगों ने लंदन में दूतावास के सामने जाकर प्रदर्शन किया, हिंसक वारदातें की थीं।”

प्रधानमंत्री ने विपक्ष को चेताते हुए कहा कि जनता उनकी करतूतें देख रही है और उसका भाजपा में विश्वास और पक्का होते जा रहा है। उन्होंने कहा कि संसद ने नागरिकता क़ानून बनाकर देश को बचा लिया है, ऐसा लोगों के समर्थन से प्रतीत होता है। झारखण्ड के दुमका में चुनावी रैली को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस का अब एक ही ध्येय बचा है- भाजपा का विरोध करो और मोदी को गाली दो। इस दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी सभा को सम्बोधित किया।

स्टेशन पर ट्रेन जैसे ही रुकी, जुमे की नमाज़ के बाद 700 लोगों की भीड़ एक मस्जिद से निकली और…

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गुंडों के डर से भागने वाली राजस्थान पुलिस नेहरू पर फास्ट, अहमदाबाद से अभिनेत्री को उठाया

आँकड़े बताते हैं कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार आने के बाद से अपराध बढ़े हैं। लेकिन, गुंडों के डर से थाना छोड़कर भागने वाली राजस्थान की पुलिस कितनी मुस्तैद है इसका नमूना आज (रविवार, 15 दिसंबर 2019) देखने को मिला। राज्य के बूॅंदी जिले की पुलिस अभिनेत्री रोहतगी को हिरासत में लेने के लिए पड़ोसी राज्य गुजरात के अहमदाबाद तक पहुॅंच गई। रोहतगी पर नेहरू को लेकर सोशल मीडिया में आपत्तिजनक पोस्ट करने का आरोप है।

पायल ने पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मोतीलाल नेहरू को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। मोतीलाल देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पिता थे। पायल पर नेहरू खानदान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। ऐसा उन्होंने एक वीडियो के माध्यम से किया था। बता दें कि पूर्व बिग बॉस प्रतियोगी पायल रोहतगी ट्विटर पर अपने वीडियो लेकर आती रहती हैं, जिनमें वो हिंदुत्व को लेकर बातें करती हैं और कॉन्ग्रेस पर निशाना साधती हैं।

सोशल मीडिया पर पायल के समर्थन में ‘आई स्टैंड विथ पायल रोहतगी’ ट्रेंड कर रहा है। लोगों ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार और कॉन्ग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात की है। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी अथवा फ्रीडम ऑफ स्पीच की बात करने वाली कॉन्ग्रेस की सरकार ने एक टिप्पणी के लिए पायल रोहतगी को गिरफ़्तार करवाया। पायल ने ट्विटर पर जानकारी देते हुए बताया कि मोतीलाल नेहरू के बारे में उन्होंने जो भी कहा, वो सूचना गूगल से ली गई थी।

वहीं, वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने पायल रोहतगी की गिरफ़्तारी को अवैध, अनुचित और अन्यायपूर्ण बताया है। अलख ने दावा किया कि पायल रोहतगी सोशल मीडिया पर हिंदुत्व की एक मजबूत आवाज़ हैं और उनकी गिरफ़्तारी हिन्दुओं को चुप कराने की बड़ी साज़िश का हिस्सा है। उन्होंने अपना कांटेक्ट नंबर शेयर करते हुए लिखा कि वो पायल को छुड़ाने के लिए उन्हें मुफ़्त लीगल सहायता देंगे और कोर्ट में उनकी तरफ़ से पैरवी करेंगे। पायल ने भी प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय को टैग कर के अपनी गिरफ़्तारी की जानकारी दी।

पायल रोहतगी को बूँदी पुलिस ने गिरफ़्तार किया है। उनके ख़िलाफ़ केस भी दर्ज कर लिया गया है। उन्हें सोमवार को अदालत में पेश किया जाएगा। उनके ख़िलाफ़ राजस्थान यूथ कॉन्ग्रेस के महासचिव चर्मेश शर्मा ने बूँदी जिले के सदर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई थी। पायल रोहतगी के ख़िलाफ़ आईटी एक्ट के तहत मामला चलाया जाएगा। ’36 चाइना टाउन’ में काम कर चुकीं पायल ने इससे पहले राजा राममोहन रॉय को अंग्रेजों का चमचा बता कर विवाद खड़ा कर दिया था। फ़िलहाल सोशल मीडिया पर लोग उनकी रिहाई की माँग कर रहे हैं।

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‘अमित शाह दुनिया छोड़ो’: मजहबी नारों और हिंसा के बाद जामिया में मोदी को हिटलर बताते स्लोगन

राजधानी दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में बीते शुक्रवार (13 दिसंबर) को नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध के नाम पर जमकर उत्पात मचाया गया था। इस दौरान मजहबी नारे भी लगे थे। अब यूनिवर्सिटी कैंपस से जो तस्वीरें आई है उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर आपत्तिजनक नारे दिख रहे हैं। इन नारों में मोदी की तुलना हिटलर से तो शाह के मरने की कामना की गई है।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पुलिस पर पत्थरबाजी और आगजनी की थी। प्रदर्शन के कुछ वीडियो सामने आए थे। इसमें छात्र ‘अल्ला-हु-अकबर‘ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारे लगाते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। “तेरा मेरा रिश्ता क्या- ला इलाहा इल्लल्लाह, ये शहर जगमगाएगा- नूर-ए-इलाहा से”, जैसे भी नारे लगे थे। अमूमन ऐसे नारे कश्मीर में पाकिस्तान के समर्थन में आतंकी लगाते सुनाई पड़ते रहे हैं।

हालॉंकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बाद में सफाई देते हुए कहा था कि प्रदर्शन में शामिल ज्यादातर लोग बाहरी थे। लेकिन, कैंपस की दीवारों पर लिखे नारे कुछ और ही कहानी बयॉं कर रहे हैं। कैंपस की दीवारों पर पीएम मोदी की तुलना हिटलर से करते हुए चित्र बनाए गए हैं और उनके ख़िलाफ़ स्लोगन लिखे गए हैं। वहीं, अमित शाह के मरने की दुआ करते हुए कैंपस की दीवारों पर लिखा गया कि ‘अमित शाह दुनिया छोड़ो’।


विश्वविद्यालय कैंपस की दीवार पर गृह मंत्री अमित शाह की मृत्यु की कामना करते हुए भड़काऊ नारे लिखे गए

विश्वविद्यालय की एक दीवार पर लिखे नारों के ज़रिए सरकार के ख़िलाफ़ विद्रोह बढ़ाने और देश में अराजकता फैलाने का प्रयास किया गया है। कैंपस की एक दीवार पर स्लोगन लिखा है कि ‘ज़िंदा कौम 5 साल इंतज़ार नहीं करती।’ ऐसे नारे न केवल देश की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार की वैधता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि लोगों को हिंसा के लिए भी उकसाता है।


कैंपस की एक दीवार पर लिखा ‘ज़िंदा कौम 5 साल इंतज़ार नहीं करती’

कैंपस की दीवारों पर एक चित्र जो सबसे विचित्र था, उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर के बीच तुलना करने की कोशिश की गई है। जामिया में की दीवारों पर बने इस चित्र में आधा चेहरा पीएम मोदी का दर्शाया गया और आधा हिटलर के रूप में प्रदर्शित किया गया है।


प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर के बीच तुलना

रविवार (15 दिसंबर) को जामिया के जनसम्पर्क अधिकारी अहमद अज़ीम ने कहा, “विश्वविद्यालय परिसर में न तो प्रदर्शन हुआ और न ही यह विरोध जामिया का था। बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने इसमें भाग लिया। हमने छात्रों के साथ बातचीत की, अब वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं।”

जामिया में शुक्रवार को हुए प्रदर्शन में 12 से अधिक लोग घायल हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया था। छात्रों ने कैंपस और बाहर सड़क पर फजर (सुबह की पहली नमाज) की नमाज के बाद 8 से 10 बजे के बीच सेमेस्टर परीक्षाएँ लेने पहुँचे शिक्षकों को विभागों से बाहर निकाल ताला लगा दिया था। लेकिन, प्रशासन का दावा है कि इन प्रदर्शनकारियों में छात्रों की संख्या बेहद कम थी। ज्यादातर बाहरी थे।

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एक साथ 4 फंदे टाँगूँगा, एक-एक कर… जल्लाद ने बताया निर्भया के दोषियों को एक साथ कैसे देगा मौत

निर्भया के मामले में मौत की सजा पाए चारों गुनहगारों को कब फॉंसी दी जाएगी यह अब तक स्पष्ट नहीं है। चारों तिहाड़ जेल में फंदे पर लटकाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसके लिए जेल प्रशासन भी तैयारियों में जुटा है। इस बीच, जल्लाद पवन ने बताया है कि वह कैसे इन चारों दरिदों को फॉंसी के फंदे पर लटकाएगा।

उसने कहा, “एक साथ चार फंदे टाँगूँगा। फिर एक-एक करके चारों मुजरिमों को पहले पीछे की ओर (पीठ की तरफ) दोनों हाथ, फिर रस्सी से दोनों पाँव बाँध दूँगा। चारों को गले में फंदा डालकर खड़ा कर दूँगा। जैसे ही जेलर रुमाल हिलाकर इशारा करेगा, एक साथ चारों ही फंदों के तख्ते का लीवर खींच दूँगा।”

आगे जल्लाद कहता है, “आधे घंटे या फिर 45 मिनट बाद मौत के कुएँ में लटक रहे शवों की पड़ताल के लिए सबसे पहले मैं और एक डॉक्टर उतरेगा। जब डॉक्टर चारों की मौत का इशारा करेंगे, तब कुएँ के भीतर मौजूद लाइट्स को जलाकर रोशनी की जाएगी। उसके बाद जल्लाद और डॉक्टर के इशारे पर फाँसी घर के कुएँ से चंद कदम दूर खड़े जेलर साहब कुएँ की तरफ बढ़ेंगे और वहाँ का मुआयना करने के बाद कागज पर मौके के हालात लिखित में दर्ज करेंगे।”

बताया जा रहा है कि मेरठ के इस खानदानी जल्लाद को निर्भया केस में फाँसी के मुद्दे पर कम बोलने और मीडिया से दूरी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। पवन का कहना है कि उसे मेरठ के जेल अफसरों की ओर से यह हिदायत दी गई है। निर्भया के दोषियों की फाँसी की माँग तेज होती जा रही है।

उल्लेखनीय है कि निर्भया गैंगरेप-हत्या मामले में चारों दोषियों पवन, मुकेश, अक्षय और विनय को जल्द फाँसी देने की याचिका पर 18 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। निर्भया की माँ ने कहा कि चारों दोषी फाँसी की सजा से बचने के लिए कानूनी दाँवपेंच अपना रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि 18 दिसंबर को अंतिम फैसला आएगा और डेथ वारंट जारी होने के बाद जल्द चारों को फाँसी दी जाएगी। तिहाड़ जेल में पिछले कुछ दिनों से फाँसी घर में डमी को फंदे पर लटकाने की प्रैक्टिस की जा रही थी। फिलहाल कानूनी प्रक्रियाओं को देखते हुए इसे रोक दिया गया है।

सात साल पहले 16 दिसंबर 2012 को निर्भया के साथ 6 दरिंदों ने चलती बस में गैंगरेप किया था। 6 में से एक दोषी नाबालिग था, जो जुवेनाइल एक्ट के तहत अब छूट चुका है। वहीं एक आरोपित राम सिंह ने तिहाड़ में ही आत्महत्या कर ली थी। बाकी बचे चार दरिंदे फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। जघन्य अपराध के जुर्म में चारों को निचली अदालत ने फाँसी की सजा सुनाई थी, जिसे ऊपरी अदालतों ने भी कायम रखा था।

‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाने पर बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इक़बाल अंसारी की पिटाई करने वाली इंटरनेशनल शूटर वर्तिका सिंह ने भी निर्भया रेप केस के चारों दोषियों को फाँसी के फंदे पर लटकाने की इच्छा जाहिर की है। वर्तिका सिंह ने इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को खून से पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि निर्भया के दोषियों को फाँसी पर लटकाने का मौका एक महिला को मिलना चाहिए।

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‘निर्भया के दोषियों को 16 दिसंबर को ही फाँसी दो या फिर मुझे इच्छामृत्यु दे दो’

गंगा किनारे स्थित इस जेल में तैयार हो रही 10 रस्सियाँ, फाँसी के फंदे पर झूलेंगे निर्भया के गुनहगार?