NRC का असर: बंगाल से वापस बांग्लादेश लौटने लगे घुसपैठिए, कन्हैया सहित वामपंथी नेताओं ने सरकार को कोसा

बीएसएफ का कोकरौदा कैम्प बंगलादेश सीमा के बेहद नज़दीक है। इसके करीब दर्जनों ऐसे गाँव हैं जो एनआरसी के फैसले के बाद सूने हो गए हैं। पास के ही एक गाँव पंडितपारा के रहने वाले मोहम्मद शमशाद आलम ने बताया कि.....

भारत-बांग्लादेश की सीमा से सटे इलाकों में एनआरसी का असर साफ़ दिखाने लगा है। सरकार ने जब से एनआरसी को लेकर अपनी नीति स्पष्ट की है। तब से ही देश में बाहर से आकर अवैध रूपसे बसने वालों के बीच खलबली मच गई है।

अख़बार में छपी एक खबर के मुताबिक जो लोग कभी सीमा पर तैनात सुरक्षाबालों की निगरानी से बचते-बचाते भारत में घुस आए थे आज वे सभी वापस सीमा पर जाने लगे हैं। यही कारण है कि बंगाल के सीमावर्ती गाँवों में एकदम सन्नाटा पसर गया है। बता दें कि बांग्लादेश से आए यह लोग चाय-पत्ती तोड़ने से लेकर रुई धुनने और घर बनाने का काम किया करते थे।

एनआरसी के बाद अवैध शरणार्थियों के गाँव को छोड़कर चले जाने के बाद स्थानीय विधायक ने इसपर राजनीति शुरू कर दी। इस सम्बन्ध स्थानीय विधायक अली इमरान ने एक सभा बुलाई थी। इस सभा में वामपंथी नेता कन्हैया कुमार भी शामिल हुए थे। सभी ने एक सुर में एनआरसी और बीजेपी सरकार को खूब कोसा।

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दरअसल बीएसएफ का कोकरौदा कैम्प बंगलादेश सीमा के बेहद नज़दीक है। इसके करीब दर्जनों ऐसे गाँव हैं जो एनआरसी के फैसले के बाद सूने हो गए हैं। पास के ही एक गाँव पंडितपारा के रहने वाले मोहम्मद शमशाद आलम ने बताया कि अधिकतर गाँव पूरी तरह से खाली हो गए हैं। इन गाँव में रहने वाले लोग अब सीमा पार करके वापस जाने लगे हैं।

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