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कर्नाटक उपचुनाव: नतीजों से राजदीप सरदेसाई आहत, कहा- जनता ने दलबदलुओं को कबूला

कर्नाटक विधानसभा उपचुनावों में भाजपा की जीत मीडिया गिरोह के जाने-माने नाम राजदीप सरदेसाई आहत हैं। परिणामों की तस्वीर साफ होते-होते उन्होंने एक ट्वीट किया है और बताया है कि उनके लिए यकीन कर पाना बेहद मुश्किल है कि भाजपा सत्ता में बनी रहेगी।

राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट कर कहा है कि कर्नाटक के संदेश स्पष्ट हैं। राज्य में भाजपा नंबर वन पार्टी है। कॉन्ग्रेस और जेडीएस अभी भी गुटबाजी में फॅंसी है। मतदाता खुशी-खुशी दलबदलुओं को स्वीकार कर रही है। उन्होंने पैसे और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल से नतीजों पर असर डाले जाने की बात भी कही है।

येदियुरप्पा की अगुवाई वाली भाजपा सरकार का भविष्य उपचुनावों के नतीजे पर टिका था। 15 सीटों में से कम से 7 पर जीत बीजेपी के लिए जरूरी थी। लेकिन, वह 12 सीटें जीतने में कामयाब रही है। इससे आहत राजदीप ने जनता को ही इशारों इशारों में कसूरवार ठहराते हुए उसे ‘दलबदलुओं’ का समर्थक बता दिया।

करारी शिकस्त के बाद कॉन्ग्रेस में भी इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है। दिनेश गुंडू राव ने कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दिया था।

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BHU के छात्रों ने किया परीक्षा का बहिष्कार, प्रशासन ने अंतिम निर्णय फिरोज पर छोड़ा, आमरण अनशन की तैयारी

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में छात्रों को डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति के विरोध में प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करते हुए आज 33 दिन बीत चुके हैं। प्रशासन द्वारा फिरोज खान की SVDV में नियुक्ति के विरोध का हल ढूँढने के लिए माँगी गई गई 10 दिन की समय सीमा भी 30 नवंबर को ही समाप्त हो गई। निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने कोई हल न देकर आधे-अधूरे जवाब दिए, जिससे असंतुष्ट छात्र फिर से अपनी माँगों को लेकर पिछले 9 दिन से धरने पर हैं। छात्रों का कहना है कि हम यहाँ पढ़ने आए हैं आंदोलन करने नहीं लेकिन प्रशासन समाधान न ढूँढकर छात्रों के धैर्य की परीक्षा लेते हुए उन्हें कोई बड़ा कदम उठाने को मजबूर कर रहा है।

बता दें कि प्रशासन द्वारा इस पूरे प्रकरण में कोई निर्णय न लेने के कारण आज भारी संख्या में छात्र SVDV में धरनास्थल पर इकट्ठे हुए। छात्रों की माँगों और अनिश्चित कालीन धरना को देखते हुए आज एक बार फिर BHU प्रशासन की तरफ से BHU के चीफ प्राक्टर ओपी राय, संकाय पहुँचे थे। जहाँ पहले तो उन्होंने SVDV के छात्रों को मनाने की कोशिश की, लेकिन जब छात्र नहीं माने और अंतिम परिणाम तक अपना विरोध-प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प दोहराया तो चीफ प्रॉक्टर प्रशासन द्वारा अब तक उठाए गए कदमों को बताने लगे जिस पर छात्रों ने हंगामा किया कि वास्तविक तौर पर अभी कुछ नहीं किया गया है।

प्रशासन की तरफ से छात्रों को समझाते चीफ प्रॉक्टर

इस पर चीफ प्रॉक्टर ने छात्रों से बात करते हुए कहा कि संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्त डॉ. फिरोज खान को आयुर्वेद और कला संकाय के संस्कृत विभाग में भी चुन लिया गया है और उन्हें ज्वाइन करने के लिए सोमवार को नियुक्ति पत्र मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि बीएचयू प्रशासन ने फिरोज खान को स्वतः संकाय चुनने की छूट दे दी है। वहीं, आंदोलन करने वाले छात्रों का कहना है कि अगर वो खुद चुनेगे तो इसमें प्रशासन ने क्या किया?

SVDV के छात्र शशिकांत मिश्र ने ऑपइंडिया को बताया, “महामना जी द्वारा स्थापित इस संकाय में महामना की इच्छा संकल्पना एवं विधि द्वारा स्थापित परंपरा के संरक्षण हेतु छात्र आज भी धरनारत हैं काशी हिंदू विश्वविद्यालय संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के छात्रों का संकाय में चल रहे आंदोलन का आज 33वां दिन है। BHU प्रशासन द्वारा लिया गया समय भी बहुत पहले ही पूरा हो चुका है, दिल्ली में कार्यकारिणी कमेटी की बैठक पूरी हो चुकी है, लिफाफा खुल चुका है उसके बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को गुमराह कर रहा है। पहले तो जिस दिन उनकी मौखिक परीक्षा हुई थी उसके दूसरे दिन ही ज्वाइन करा दिया गया रातो रात रजिस्ट्रार के ऑफिस में ही विरोध करने के बाद भी। परंतु अब उनको 1 महीने का टाइम दिया जा रहा है।, कहीं न कहीं ये आंदोलन को ख़त्म करने की साजिश के साथ, छात्रों के सब्र का इम्तिहान भी लिया जा रहा है।”

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे चक्रपाणि ओझा ने कहा, “छात्रों का एग्जाम है, लेकिन छात्रों के भविष्य की प्रशासन को कोई चिंता नहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से आंदोलन को नजरअंदाज कर रही है अगर प्रशासन इस प्रकरण में कोई ठोस कदम नहीं उठाता है तो छात्र आमरण अनशन के लिए बाध्य होंगे जिसका जिम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन खुद ही होगा।”

बता दें कि एसवीडीवी के बाद डॉ. फिरोज खान का आयुर्वेद और कला संकाय के संस्कृत भाषा विभाग में भी चयन हुआ है। अब वह संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में ही रहते है या नए विभागों में से किसी एक को चुनते हैं, यह फैसला उन्हें एक महीने के अंदर करना होगा। नियुक्ति पत्र मिलने के साथ ही एक महीने की डेडलाइन भी शुरू हो जाएगी।

इस बीच छात्रों ने संकाय में कल 10 दिसंबर से आयोजित होने वाली परीक्षा का बहिष्कार कर दिया है जिसे देखते हुए BHU प्रशासन ने संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में होने वाली सेमेस्टर एग्जाम को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। जिसके बाबत प्रशासन द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है।

प्रशासन द्वारा जारी नोटिस

गौरतलब है कि एसवीडीवी में 5 नवंबर को साक्षात्कार के बाद छह को जारी परिणाम में डॉ. फिरोज खान को असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त कर दिया गया था। 6 नवम्बर को उन्हें नियुक्ति पत्र मिला और 7 नवंबर को ही वह SVDV संकाय में ज्वाइन करने वाले थे, तभी छात्रों को किसी गैर हिन्दू के संकाय में नियुक्ति की खबर लगते है छात्रों ने फिरोज की SVDV में नियुक्ति के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

बता दें कि डॉ. फिरोज खान 29 नवंबर को आयुर्वेद संकाय के संहिता एवं संस्कृत विभाग और 4 दिसंबर को कला संकाय के संस्कृत विभाग में उन्होंने साक्षात्कार दिया और वह वहाँ भी चयनित हुए। जिसका लिफाफा दिल्ली में BHU के कार्यकारिणी की बैठक में खुला। हालाँकि, फिरोज को लेकर कार्यकारिणी में क्या बात हुई इसका खुलासा प्रशासन द्वारा नहीं किया गया है। आंदोलन की अगली कड़ी में छात्र बड़े पैमाने पर आमरण अनशन करने की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन के ढुलमुल रवैये के कारण छात्रों के बीच आक्रोश बढ़ता जा रहा।

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राष्ट्रपति भवन तक मार्च नहीं कर पाए JNU के प्रदर्शनकारी छात्र, लाठीचार्ज

जेएनयू के छात्र सोमवार को एक बार फिर फीस वृद्धि वापसी लेने की मॉंग को लेकर सड़क पर उतरे। उन्होंने राष्ट्रपति भवन तक मार्च करने की कोशिश की। पुलिस की सख्ती के कारण ऐसा हो नहीं पाया। लाठीचार्ज कर पुलिस ने छात्रों को तितर-बितर कर दिया।

पुलिस ने सुबह से ही किसी भी प्रकार के उत्पात से निपटने की पूरी तैयारी कर रखी थी। पिछले महीने फ़ीस बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ जेएनयू कैम्पस के अंदर हुआ प्रदर्शन काफ़ी हिंसक हो गया था, इसलिए पुलिस ने सार्वजनिक स्थल पर प्रदर्शन को लेकर पूरी मुस्तैदी दिखाई। जेएनयू की तरफ जाने वाली सड़कों पर आवागमन रोक दिया गया। कम्युनिस्ट SFI और बिरसा अम्बेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (बापसा) के बैनर तले होने वाले मार्च को लेकर सुरक्षा-व्यवस्था इतनी कड़ी थी कि दिल्ली मेट्रो भी लोक कल्याण मार्ग और उद्योग भवन स्टेशनों पर नहीं रुकी। इन दोनों स्टेशनों के अलावा केंद्रीय सचिवालय स्टेशन पर भी मेट्रो में घुसने और उससे निकलने के रास्ते बंद कर दिए गए।

यहाँ यह जान लेना ज़रूरी है कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद फीस में हुई बढ़ोतरी को एक नहीं, दो-दो बार कम भी किया गया। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने जेएनयू में सामान्य कामकाज बहाल करने और प्रदर्शनरत छात्रों तथा प्रशासन के बीच मध्यस्थता करने के तरीकों को तलाश करने के लिए तीन सदस्यीय समिति भी गठित की। उस समिति ने मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। लेकिन मंत्रालय के फैसले का इंतज़ार किए बिना छात्रावास की फीस को लेकर, जो ₹10 और ₹20 से बढ़ाकर मासिक ₹300 कर दी गई है, छात्रों के कुछ संगठन फिर सड़क पर उतर आये हैं।

लाठीचार्ज के कारण के बारे में लाइव हिंदुस्तान ने दिल्ली यातायात पुलिस के हवाले से दावा किया है कि इस प्रदर्शन और लम्बे मार्च के चलते बाबा गंगनाथ मार्ग पूरी तरह ठप हो गया था। गौरतलब है कि इलाके में बाबा गंगनाथ मार्ग बहुत ही महत्वपूर्ण सड़क है और इस पर ट्रैफिक रुक जाने का मतलब है सैकड़ों-हज़ारों लोगों की दिनचर्या में रुकावट पड़ जाना। इसके पहले वामपंथी छात्र संगठनों ने संसद के शीत सत्र के पहले दिन (18 नवंबर, 2019 को) संसद का भी घेराव करने की कोशिश की थी- वह भी बिना किसी पूर्वानुमति के। उस समय भी पुलिस ने बल प्रयोग किया था। 100 के करीब प्रदर्शनकारियों को पुलिस की निषेधाज्ञा की अवहेलना के आरोप में हिरासत में भी लिया था।

सिद्धारमैया के बाद कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव ने भी दिया इस्तीफ़ा

कर्नाटक विधानसभा उपचुनावों में कॉन्ग्रेस की करारी शिकस्त के बाद इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो गया है। दिनेश गुंडू राव ने कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दिया था। 15 सीटों पर हुए ये उपचुनाव येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे।

गुंडू राव ने कहा, “मैं हार की ज़िम्मेदारी ले रहा हूँ और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे रहा हूँ।”
सिद्धारमैया ने इस्तीफ़ा देते हुए कहा, “विधायक दल के नेता के रूप में, मुझे लोकतंत्र का सम्मान करना चाहिए। मैंने कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में इस्तीफ़ा दे दिया है। मैंने अपना इस्तीफ़ा सोनिया गाँधी जी को सौंप दिया है।”

ग़ौरतलब है कि भाजपा के पास 105 विधायक थे, जिसमें एक निर्दलीय विधायक भी शामिल था। इसीलिए कॉन्गेस की नज़र भी कर्नाटक के उप चुनाव के नतीजों पर लगातार बनी हुई थी, क्योंकि इसके नेता JD (S) के साथ फिर से गठजोड़ कर सरकार बनाने की फ़िराक में थे। जानकारी के अनुसार, कॉन्ग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने कहा था कि नतीजों के बाद बहुत सी चीजें बदल जाएँगी। दरअसल, येदियुरप्पा की सरकार बनने से पहले कॉन्ग्रेस-JD (S) की सरकार में कॉन्ग्रेस के 14 और JD (S) के तीन विधायकों द्वारा इस्तीफ़ा दिए जाने से गठबंधन सरकार गिर गई थी।

इसके बाद सभी बागी विधायकों को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने अयोग्य घोषित कर दिया था। उन्हीं 15 सीटों पर उप चुनाव कराए गए हैं। बता दें कि बीजेपी का इस चुनाव से वोट पर्सेंट बढ़ा है। चुनाव आयोग से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, बीजेपी पार्टी को 49.7% वोट हासिल हुए हैं, जबकि कॉन्ग्रेस को 31% वोट मिले। इसके अलावा, कुमारस्वामी की JD (S) को तगड़ा झटका लगा है। ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी अभी तक अपना खाता भी नहीं खोल पाई। आँकड़ों के अनुसार, JD (S) को सबसे कम यानी 13.3% ही वोट मिले हैं।

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भारत ने किसी ‘समुदाय विशेष’ का ठेका नहीं ले रखा NDTV के सम्पादक महोदय! अल्पसंख्यक का रोना बंद करें

नागरिकता विधेयक पर अपने पिछले लेख की ही तरह इस बार भी मैं शुरुआत इसी सवाल से करूँगा कि मजहब विशेष के लोग भारत में ‘माइनॉरिटी’ आखिर किस पैमाने पर, किस तर्क से हैं? 20 करोड़ की आबादी, जनसंख्या में दूसरी सबसे बड़ी हिस्सेदारी, तकरीबन 1000 साल तक इस देश पर शासन, फिर पहले ब्रिटिश और उसके बाद सेक्युलर सरकारों द्वारा जमाईयों वाला आदर-सत्कार। इसके बाद भी यह मजहब अगर खुद को ‘सताया हुआ’ समझते हैं तो इसमें किस का दोष है?

पहले इस्लामी शासन में अपनी संख्या बढ़ाने के लिए जजिया से लेकर तलवार और बलात्कार के इस्तेमाल की छूट, हज़ारों मंदिरों को ढहा कर उनके ऊपर मस्जिद बनाने की स्वच्छंदता, और ब्रिटिश शासन के अंत में देश के हिन्दुओं से उनकी एक तिहाई ज़मीन छीन लेना- इतना सब जी भर कर एक हज़ार साल तक करने के बाद भी अगर इस देश के समुदाय विशेष के पूर्वजों ने उन्हें ऐसी स्थिति में छोड़ा कि उनका एक बड़ा तबका ‘ghetto’ वाली झुग्गियों में रहता है, आधुनिक शिक्षा को ‘हराम’ मानता है, अपनी बीवियों से जबरन हलाला करवाता है, दूसरे मज़हबों के जुलूसों पर पत्थरबाज़ी करता है, तो इसमें हिन्दुओं का दोष कहाँ से हुआ?

इतनी बड़ी भूमिका बाँधना गैर-ज़रूरी लग सकता है, लेकिन है अति-आवश्यक। NDTV के सम्पादक श्रीनिवासन जैन नागरिकता विधेयक को लेकर अपने ट्वीट के चंद शब्दों ‘excludes a specific minority community’ में जो हिन्दुओं के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने, उन्हें नाहक ग्लानि का अनुभव कराने और मजहब विशेष को बिना किसी ठोस आधार के बेचारा दिखाने का जो प्रपंच रच रहे हैं, उसे विस्तार से ही काटा जा सकता है।

जिस ‘specific minority community’ यानी कि कथित अल्पसंख्यकों के लिए उनके दिल में इतनी हूक उभर रही है, भारत के, और दूसरे देशों के, संदर्भ में उसे स-प्रसंग देखे जाने की ज़रूरत है।

भारत के संदर्भ में हमने देखा कि अगर वे मानव विकास के कुछ सूचकांकों पर, एक हज़ार साल की प्रभुसत्ता के बाद भी, पिछड़े हुए हैं, तो यह हिन्दुओं या अन्य किसी समुदाय की गलती से नहीं है, जो वह समुदाय अपने हितों, या देश के राष्ट्रीय हितों को कुर्बान कर इसकी भरपाई करे।

और भी ज़्यादा ज़रूरी नागरिकता बिल के संदर्भ को देखा जाना है। नागरिकता बिल के संदर्भ में जिन लोगों की बात हो रही है, यानी अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, वे अल्पसंख्यक नहीं हैं- इस्लामी देशों के बहुसंख्यक समुदाय हैं। और अगर NDTV यह नहीं कह रहा है कि ऐसा केवल और केवल हिन्दू-बहुल देशों और इलाकों में ही होता है कि अल्पसंख्यकों पर ही अत्याचार हो, व अत्याचार करने वाला बहुसंख्यक ही हो, तो उसके द्वारा प्रतिपादित अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक संबंधों के फ़लसफ़े के हिसाब से तो इन देशों में शोषण, प्रताड़ना, हिंसा, बलात्कार करने वाले बहुसंख्यक यानी मजहब विशेष से हुए, और इसके शिकार होने वाले अल्पसंख्यक यानी हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई आदि। यानी NDTV के संपादक महोदय खुद के ट्वीट में ही कंफ्यूजियाए से, अतार्किक दिखते हैं।

भारत सरकार यह बिल मानवीयता के आधार पर, न कि किसी क़ानूनी जिम्मेदारी के तहत, दूसरे देशों के उन नागरिकों के लिए ला रही है, जो वहाँ पर मज़हबी प्रताड़ना का शिकार हैं। पहली बात तो मानवीयता किसके अंदर किस आधार पर होगी, किस हद तक होगी, यह न संविधान या कानून तय करते हैं, न ही मीडिया गिरोह। दूसरी बात, अगर इस्लामी आक्रांताओं ने भारत के पड़ोसियों में कोई ऐसा देश छोड़ा होता, जहाँ समुदाय विशेष वाले अल्पसंख्या में होते और शांति से रह कर दिखा देते, तो उन पर विचार करने की बात आती। अब बाबर, अब्दाली, तुग़लक़ और लोदी ने कोई ऐसा समाज भारत के आसपास मजहबी-प्रभुत्व से अछूता छोड़ा ही नहीं, तो इसमें हम क्या करें!

भारत अपनी मर्ज़ी से, बिना किसी संवैधानिक अनिवार्यता के किसी देश के अल्पसंख्यकों की जान बचाने का ज़िम्मा ले रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि उस देश के अत्याचारी बहुसंख्यक समुदाय का भी ठेका उसके सिर केवल इसलिए आ जाए क्योंकि वह जिहादी बहुसंख्यक समुदाय इस देश के ‘समुदाय विशेष’ की उम्मत का हिस्सा है।

सच्चाई यही है कि इनके राजनीतिक आकाओं को समुदाय विशेष के वोटों की काटनी है फ़सल! लेकिन अभी के राजनीतिक समीकरण में यह होता जा रहा है मुश्किल। क्योंकि अब मजहब विशेष के एक हिस्से ने कट्टरता से किनारा करना शुरू कर दिया है (जिसका सबूत है इस साल लोकसभा चुनावों में आधी मजहबी प्रभुत्व वाली सीटों पर अकेले मोदी/BJP का जीत दर्ज करना, हलाला पर प्रतिबंध को समुदाय विशेष की महिलाओं का समर्थन, आदि)। इसके अलावा हिन्दू भी भाजपा के पक्ष में होने लगे हैं ध्रुवीकृत, जो उनके ख़िलाफ़ चल रही नफ़रती मुहिम के चलते स्वभाविक है। इसलिए भारत के इस मजहब में वही असुरक्षा और कुंठा भरने का काम अब पत्रकारिता का समुदाय विशेष कर रहा है, जो सैकड़ों सालों से इन्हें हिंसा और जिहाद की घुट्टी पिलाने वाले करते चले आए हैं।

और हाँ! एक सच यह भी है कि इस सच को मानने के बजाय श्रीनिवासन जैन साहब और उनका समूचा NDTV दिल्ली के ज़ाफ़राबाद, जाकिरनगर, सीलमपुर, मुबारकपुर, जामियानगर, या निजामुद्दीन शिफ़्ट हो जाना पसंद करेगा बजाय कैलाश कॉलनी के अपने वर्तमान पते के!

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रॉबर्ट वाड्रा बीमार: विदेश में कराएँगे इलाज, कोर्ट ने 2 हफ्ते के लिए दी इजाजत

कॉन्ग्रेस महसचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वाड्रा को विदेश जाने की इजाजत दे दी है। वाड्रा ने मेडिकट ट्रीटमेंट और बिजनेस कारणों से विदेश यात्रा की इजाजत माँगी थी। उनका कहना था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती। इलाज के लिए वे विदेश जाना चाहते हैं।

बता दें कि वह फिलहाल मनी लॉड्रिंग मामले में अंतरिम जमानत पर हैं। कोर्ट ने उन्हें दो सप्‍ताह के लिए विदेश जाने की छूट दी है। इससे पहले कोर्ट ने ईडी और वाड्रा दोनों पक्षों की दलीलों को सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। वाड्रा की याचिका पर कोर्ट ने ईडी से जवाब माँगा था। ईडी ने वाड्रा की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि वह जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें विदेश नहीं जाने दिया जाए।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा मनी लॉड्रिंग मामले में फँसे हुए हैं। उन पर लंदन में बेनामी संपत्ति खरीदने का आरोप है। इसके अलावा राजस्थान के बीकानेर में भी जमीन खरीदने की जाँच चल रही है। लंदन में एक फ्लैट को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वाड्रा के करीबी मनोज अरोड़ा के खिलाफ केस दर्ज किया था। ईडी का आरोप है कि यह फ्लैट मनोज अरोड़ा की बजाय रॉबर्ट्र वाड्रा का है। यह संपत्ति हथियार डीलर संजय भंडारी से साल 2010 में खरीदा गया था।

रॉबर्ट वाड्रा पर आरोप है कि लंदन स्थित ब्रायनटन स्क्वेयर में 1.2 करोड़ रुपए की संपत्ति खरीदने में मनी लॉन्ड्रिंग की गई। संपत्ति की कीमत 19 लाख पाउंड है। कथित तौर पर संपत्ति का स्वामित्व वाड्रा के पास है। इसे लेकर ईडी रॉबर्ट वाड्रा से कई चरणों में पूछताछ कर चुका है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले कोर्ट ने वाड्रा को 6 सप्ताहों के लिए अमेरिका तथा नीदरलैंड जाने की इजाजत दी थी। हालाँकि वाड्रा को लंदन जाने की अनुमति नहीं मिली थी, क्योंकि लंदन में ही संपत्ति खरीद की जाँच ईडी कर रही है। वाड्रा को 1 अप्रैल को कोर्ट ने सशर्त अग्रिम जमानत देते हुए कहा था कि वह कोर्ट से मंजूरी लिए बिना देश नहीं छोड़ सकते हैं।

प्रियंका की सुरक्षा में ‘सेल्फी वाली’ चूक रॉबर्ट वाड्रा के लिए बलात्कार, यौन अपराध जैसे?

रॉबर्ट वाड्रा की लैंड डील कराने वाले डीलर के ठिकानों से 6 बोरी कागजात के साथ 11 लाख कैश बरामद

रॉबर्ट वाड्रा सहयोग नहीं कर रहे, हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता, मनी लॉन्ड्रिंग में उनका सीधा संबंध: ED

1 मिनट का VIDEO, जिससे सुलझी हैदराबाद रेप ऐंड मर्डर केस की गुत्थी

हैदराबाद में प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) हत्याकांड मामले में पुलिस को आरोपितों तक पहुँचाने वाली महत्तवपूर्ण सीसीटीवी फुटेज सामने आई है। वीडिया हैदराबाद के बाहरी इलाके शमशाबाद टोल प्लाजा की है। 1 मिनट की इस फुटेज में देखा जा सकता है कि एक ट्रक टोल प्लाजा पर पार्क है। थोड़ी देर में उसकी हेडलाइट जलती है और ट्रक धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगती है। इसके बाद ट्रक टोल लेन में एंटर करता है और फिर उस इलाके से निकल जाता है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इसी वीडियो की मदद से पुलिस ने आरोपितों की धड़-पकड़ की। फुटेज के मुताबिक 26 नवंबर को यह ट्रक टोल प्लाजा में पार्क हुआ था। लेकिन, 27 नवंबर को इस ट्रक में हरकत तब देखी गई जब प्रीति रेड्डी के साथ गैंगरेप के बाद उनकी हत्या कर दी गई। इस फुटेज में ट्रक के पास कई लोगों की गतिविधियाँ देखने को मिल रही है। ट्रक में कई लोगों को घुसते हुए देखा जा सकता है।

इस सीसीटीवी फुटेज ने ही पुलिस को आरोपितों तक पहुँचाया। इस फुटेज के हाथ लगने के बाद ही पुलिस ने टोल प्लाजा जाकर इस ट्रक से संबंधी सारी जानकारी जुटाई और वीडियो में नजर आ रहे ट्रक का पंजीकृत नंबर निकलवाया। नंबर मिलने के बाद पुलिस ट्रक के मालिक श्रीनिवास रेड्डी के पास पहुँची। रेड्डी ने पुलिस को बताया कि उनका ट्रक चेन्नाकेशवुलु और मोहम्मद आरिफ चलाते हैं।

इसी जानकारी पर पुलिस ने आगे की जाँच शुरू की और जल्द ही पता लगा लिया कि चारों आरोपित घटना को अंजाम देने के बाद नेशनल हाइवे के पेट्रोल पंप पर पेट्रोल लेने पहुँचे थे, ताकि वो प्रीति रेड्डी के शव में आग लगा सकें। जहाँ पहले पेट्रोल पंप पर एक शख्स ने उन्हें पेट्रोल देने से मना कर दिया। इसके बाद वह दूसरे पेट्रोल पंप पर गए और वहाँ से पेट्रोल लिया।

इसी पंप से पेट्रोल देने वाले शख्स ने मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस को कॉल किया और चारों आरोपितों का स्केच बनवाने में पुलिस की मदद की। इसके बाद पुलिस ने चारों हैवानों की शिनाख्त की और एक दिन के भीतर ही दावा किया कि उन्होंने प्रीति रेड्डी के साथ हैवानियत करने वाले दरिंदो को पकड़ लिया।

29 नवंबर को चारों आरोपित-शिवा, मोहम्मद आरिफ, चिंताकुनु चेन्नाकेशवुलु, जोलू नवीन को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बीते शुक्रवार को पुलिस उन्हें क्राइम सीन रीक्रिएट करने के लिए मौके पर ले गई। वहाँ उन्होंने पुलिस के हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और एनकाउंटर में मारे गए।

मारे गए सभी आरोपित: पुलिस ने वहीं किया एनकाउंटर, जहाँ ‘प्रीति रेड्डी’ के साथ किया था जघन्य अपराध

आरिफ ने ‘प्रीति रेड्डी’ का मुँह-नाक दबाया, उसी ने डेड बॉडी पर पेट्रोल डाला: पुलिस की रिपोर्ट में भयावह खुलासे

…वो पेट्रोल पम्प वर्कर, जिसकी मदद से ‘प्रीति रेड्डी’ के बलात्कारी-हत्यारे तक पहुँच पाई पुलिस
प्रीति रेड्डी मर गई फिर भी रेप करते रहे दरिंदे: आरिफ के प्लानिंग की पूरी डिटेल

डॉ. प्रीति रेड्डी का आखिरी फोन कॉल… पहचान हुई उस लॉरी की जहाँ मौत के बाद भी दरिंदों ने उन्हें नोचा था

सोनिया गाँधी को झटका, सिद्धारमैया ने सौंपा इस्तीफ़ा: कर्नाटक उप चुनाव में पार्टी की हुई छीछालेदर

कर्नाटक में 15 सीटों के लिए हुए उप चुनाव के लिए वोटों की गिनती अभी भी जारी है। अभी तक के आए रुझानों में जनादेश स्पष्ट तौर पर बीजेपी के समर्थन में नज़र आ रहा है। बीजेपी ने 10 सीटें जीत ली हैं और 2 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, क़ॉन्ग्रेस अभी तक केवल दो सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई है।

निर्वाचन आयोग की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट

कॉन्ग्रेस ने अपनी हार स्वीकारते हुए कहा कि 15 सीटों पर मतदाताओं के जनादेश से हमें सहमत होना पड़ेगा। इस बीच ख़बर आई है कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कॉन्ग्रेस के विधायक दल के नेता पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने कहा, “विधायक दल के नेता के रूप में, मुझे लोकतंत्र का सम्मान करना चाहिए। मैंने कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में इस्तीफ़ा दे दिया है। मैंने अपना इस्तीफ़ा सोनिया गाँधी जी को सौंप दिया है।”

बता दें कि बीजेपी का इस चुनाव से वोट पर्सेंट बढ़ा है। चुनाव आयोग से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, बीजेपी पार्टी को 49.7% वोट हासिल हुए हैं, जबकि कॉन्ग्रेस को 31% वोट मिले। इसके अलावा, कुमारस्वामी की JD (S) को तगड़ा झटका लगा है। ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी अभी तक अपना खाता भी नहीं खोल पाई। आँकड़ों के अनुसार, JD (S) को सबसे कम यानी 13.3% ही वोट मिले हैं।

उधर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा, “मैं लोगों के जनादेश से ख़ुश हूँ। अब बिना किसी समस्या के हम एक स्थायी सरकार बना सकते हैं।”

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कर्नाटक में छोटे को बड़े भाई से हार कबूल फिर सिद्धारमैया को क्यों अखर रही ये जीत

कर्नाटक में ​15 विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में कॉन्ग्रेस को करारी हार मिली है। पार्टी की हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन, उनके लिए सबसे बड़ा झटका गोकाक सीट से पूर्व मंत्री रमेश जरकीहोली की जीत बताई जा रही है।

बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे रमेश जरकीहोली ने अपने छोटे भाई और कॉन्ग्रेस उम्मीदवार लखन जारकीहोली को भारी अंतर से हराया है। कर्नाटक में येदियुरप्पा की अगुआई में बीजेपी की सरकार बनवाने में रमेश जरकीहोली की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने ही 16 अन्य विधायकों के साथ बगावत की थी जिसके कारण कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार गिरी थी।

अपनी हार स्वीकार करते हुए उनके छोटे भाई लखन जरकीहोली ने कहा है कि जनता ने रमेश को चुना है और वे जनादेश को स्वीकार करते हैं। उन्होंने क्षेत्र का विकास होने की उम्मीद जताई।

रमेश जरकीहोली ने PLD बैंक चुनावों के बाद अक्टूबर 2018 में कॉन्ग्रेस के ख़िलाफ़ खुले तौर पर विद्रोह कर दिया था, जहाँ उनकी प्रतिद्वंद्वी, लक्ष्मी हेब्बलकर को PLD बैंक के अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। इसके अलावा, उन्होंने पूर्व जल संसाधन मंत्री डीके शिवकुमार पर बेलगावी कॉन्ग्रेस की राजनीति में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था।

कैबिनेट फ़ेरबदल के दौरान नगर पालिकाओं के मंत्री के रूप में हटाए जाने के लिए रमेश जरकीहोली पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से भी नाख़ुश थे। इस साल नवंबर में, रमेश जरकीहोली ने खुले तौर पर कहा था कि उन्होंने गुप्त रूप से विद्रोह की योजना बनाई थी। रमेश ने कहा था कि उन्होंने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से सम्पर्क किया था, जिसके बाद उन्होंने हैदराबाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुरलीधर राव के साथ बातचीत की थी। इस बातचीत में उन्होंने भाजपा नेताओं से 16 विधायकों को गठबंधन में लाने का वादा किया था।

इस साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोग्य ठहराए गए विधायकों को चुनाव लड़ने की अनुमति देने के तुरंत बाद, रमेश जारकीहोली ने कहा था कि जुलाई में सफल होने से पहले ही उन्होंने सात बार गठबंधन सरकार को गिराने की कोशिश की थी। उनकी जीत कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के लिए एक बड़ा झटका सा प्रतीत हो रही है, क्योंकि गोकाक में यह चुनावी दंगल सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के लिए एक व्यक्तिगत लड़ाई के रूप में थी। डीके शिवकुमार को भी बेलगावी में प्रचार करने की अनुमति नहीं दी गई थी और सूत्रों का कहना है कि अनुमति नहीं मिलने का कारण उनके ख़िलाफ़ दायर धन शोधन मामला था।

गोकाक सीट पर रमेश जारकीहोली का 1999 से ही कब्जा रहा है। वे यहॉं से पॉंच बार विधायक रह चुके हैं। वे सिद्धारमैया के वफादार हुआ करते थे। यही कारण है कि जब उन्होंने बगावत की तो शुरुआत में माना गया कि यह सिद्धारमैया के ही इशारे पर हुआ है।

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जो-जो बागी हैं और BJP के टिकट पर चुनाव जीते हैं, सबको मंत्री पद दिया जाएगा: येदियुरप्पा

कर्नाटक की 15 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव की मतगणना जारी है। अभी तक के रुझानों में जनादेश स्पष्ट रूप से बीजेपी के पक्ष में है। बीजेपी ने 10 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है और 2 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कॉन्ग्रेस महज दो सीटें ही जीत पाई है और एक विधानसभा सीट पर निर्दलीय आगे है।

सत्ता में वापसी करने के बाद सोमवार (दिसंबर 9, 2019) को कर्नाटक के सीएम बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि भाजपा के टिकट पर उपचुनाव जीतने वाले पूर्व कॉन्ग्रेस और जद (एस) के बागियों को मंत्री पद दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम इन सभी विधायकों को मंत्री पद देंगे, जिन्होंने हमें सत्ता में वापस आने में मदद की। येदियुरप्पा ने कहा कि हमने इन नेताओं से वादा किया था कि अगर उन्हें जीत मिलती है तो हम उन्हें मंत्री पद देंगे और हम अपना वादा निभाएँगे।

चुनाव के रुझानों को देखते हुए कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने हार मान ली है। कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने कहा, “हमें 15 सीटों पर वोटरों के जनादेश से सहमत होना पड़ेगा। लोगों ने दलबदलुओं को स्वीकार कर लिया है। हमने हार मान ली है, मुझे नहीं लगता कि हमें हतोत्साहित होने की जरूरत है।”

वहीं कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने कॉन्ग्रेस के विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को सौंप दिया है। उपचुनाव में बीजेपी की जीत पर सीएम येदियुरप्पा ने खुशी जताते हुए कहा कि अब बिना किसी समस्या के स्थायी सरकार चल सकती है। बता दें कि उपचुनाव में येदियुरप्पा को सत्ता में बने रहने के लिए हर हाल में 6 सीट जीतना जरूरी था। 

बीजेपी का इस चुनाव में वोट पर्सेंट भी बढ़ा है। चुनाव आयोग से मिले आँकड़ों के मुताबिक पार्टी को 49.7 फीसदी वोट हासिल हुए हैं, जबकि कॉन्ग्रेस 31 प्रतिशत मत मिले हैं। वहीं कुमारस्वामी की जेडीएस को सबसे बड़ा झटका लगा है। जहाँ एक ओर पार्टी को एक भी सीट पर जीत नसीब नहीं हुई, वहीं उसके खाते में सबसे कम 13.3 प्रतिशत वोट आए हैं।