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बलात्कारी कहकर गोली मारने Vs न्यायिक प्रक्रिया के त्वरित होने Vs ‘बनाना रिपब्लिक’ में फर्क होता है

कानून की धज्जियाँ उड़ते देखना हो तो मौजूदा दौर देखिए। जिसे हैदराबाद कांड के नाम से जाना जाता है, उसमें पीड़िता का नाम, वो काम क्या करती थी, या उसकी तस्वीरें, आसानी से उपलब्ध हैं। कानून साफ़ तौर पर कहता है (आईपीसी की धारा 228A और पॉक्सो एक्ट की धारा 23) कि बलात्कार जैसे मामलों में पीड़ित की पहचान, किसी भी तरह से उजागर नहीं की जा सकती। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर पीड़िता की तस्वीरें तो तैरती दिखी ही, नाम भी हैश टैग की तरह ट्रेंड करता रहा। पत्रकारिता की नौकरी करने वाले हरेक व्यक्ति को (चाहे धारा याद हो ना हो) ये कानून जरूर पता होता है। सवाल ये है कि फिर किसी ने लोगों को क्या ये बताया कि ऐसा करना अपराध भी है और अनैतिक भी लगता है?

ऐसा इसलिए है क्योंकि इस धारा 228A में एक पेचीदगी है। कुछ स्थितियों में पीड़ित की पहचान जाहिर की जा सकती है। जैसे कि पीड़ित की मृत्यु हो जाए, अथवा वो नाबालिग हो या उसकी मानसिक हालत ठीक ना हो तो उसके परिवार की लिखित इजाजत पर ऐसा किया जा सकता है। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायाधीश सी हरि शंकर ने (13 अप्रैल 2018 को) 12 समाचार बेचने वाली कंपनियों को नोटिस जारी किया था। कठुआ कांड में पीड़ित की पहचान उजागर करने के मामले में जिन्हें नोटिस दिया गया था उनमे ‘द टाइम्स ऑफ़ इंडिया’, ‘द हिंदुस्तान टाइम्स’, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’, ‘द हिन्दू’, ‘एनडीटीवी’, ‘रिपब्लिक टीवी’, और ‘फर्स्टपोस्ट’ शामिल थे।

अक्सर ‘न्याय की हत्या’ के दावे ठोकने वाले वही काम करते हैं जिन पर लोगों को कानूनों और नीतियों के बारे में जानकारी देने की ‘जिम्मेदारी’ (कथित तौर पर) होती है। जहाँ तक अदालतों का सवाल है, किसी की जीवन-मृत्यु का फैसला सुनाना ऐसे ही मुश्किल होता होगा, ऊपर से जहाँ मामले बलात्कार जैसे हों, जिसे अज्ञात कारणों से कुछ भाषाओं में औरत की इज्जत से जोड़ा जाता है (कृपया “औरत” और बलात्कार को “अस्मत-दारी” कहना इन्टरनेट पर ढूँढ कर पढ़ें) तो मुश्किलें और भी बढ़ जाती होंगी। ऐसे ही एक मामले पर कुछ साल पहले “पिकिंग कॉटन” नाम की किताब लिखी गई थी।

जेनिफर थॉमसन के अपार्टमेंट के कमरे में कोई अपराधी घुस आया और छुरे की नोक पर उसने जेनिफर का बलात्कार किया था। जैसे तैसे सिर्फ एक कम्बल लपेटे जेनिफर वहाँ से भागी और उन्होंने पुलिस को बताया कि वो अपराधी को पहचान लेंगी। तीन दिन बाद जब अपराधियों की पहचान करवाई गई तो उन्होंने रोनाल्ड कॉटन को पहचाना। मुकदमा चला और जेनिफर की गवाही पर रोनाल्ड को सजा भी हो गई। 11 साल जेल में काटने के बाद जब डीएनए टेस्ट को सबूत के तौर पर मान्यता मिली तब जाकर पता चल पाया कि रोनाल्ड कॉटन ने तो अपराध किया ही नहीं था! जब उन्हें बरी किया गया तो वो ग्यारह साल, यानी अपनी पूरी जवानी जेल में काट चुके थे।

ऐसा सिर्फ एक बार नहीं हुआ, ऐसे मामलों से निर्दोषों को बचाने के लिए एक पूरा “इनोसेंस प्रोजेक्ट” चलता है जो किसी भी वक्त हजारों मुकदमों की जाँच कर रहा होता है। वो तय करते हैं कि किन मामलों में किसी बेगुनाह को सजा हुई है और उसका मुकदमा दोबारा देखा जाना चाहिए। भारत का मामला देखें तो यहाँ ऐसे भी मामले मिलेंगे जब किसी को बरसों पहले जमानत मिली मगर बेल बांड भर पाने में असमर्थ होने के कारण वो बरसों जेल में सड़ते रहे। न्यायिक प्रक्रिया में सुधारों की बात कई न्यायाधीश अपने पद से मुक्त होने, रिटायर होने के बाद करते हैं।

जहाँ एक तथ्य ये है कि बलात्कार के मामलों में से कई अदालतों तक पहुँचते ही नहीं, क्योंकि कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई, वहीँ एक तथ्य ये भी है कि इनमें से कई मामले फर्जी भी होते हैं। नवम्बर 2003 में वीएस मलिमथ की अध्यक्षता में एक समिति (सीआरसीजेएस) दहेज़ प्रताड़ना के लिए इस्तेमाल होने वाली धारा 498A को जमानती बनाने की सलाह दे चुकी है। बलात्कार, यौन उत्पीड़न जैसे मामले भी ब्लैकमेल के लिए इस्तेमाल होते हैं। कानूनों में सुधार की ऐसी कोई भी चर्चा दब जाती है, या नारीविरोधी कहलाने के खतरे के डर से भी दबा दी जाती है।

न्यायिक प्रक्रिया पर जनता से ज्यादा राजनीतिज्ञों का भरोसा दिखता है, जब वो कहते हैं कि उन्हें कानूनी प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। शायद वो वाकिफ होते हैं कि अदालती फैसले इतने लम्बे समय तक लटकाए जा सकेंगे कि फैसला आने तक एक तो अपराधी की मृत्यु हो चुकी हो, ऊपर से लोग अपराध और उसकी भयावहता को भी भूल जाएँ। जो ये मानते हैं कि अदालती इन्साफ अमीरों के लिए है, गरीबों के लिए नहीं वो अक्सर जमानत पाए व्यक्तियों के जेल में होने का उदाहरण भी देते ही रहते हैं। एक पुलिस एनकाउंटर में आरोपियों को जब हैदराबाद में मार गिराया जाता है तब आम आदमी की जो प्रक्रिया आती है, वो भी दर्शाती है कि न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कितना बचा है।

बाकी भारतीय कानून अपराध पर नहीं, अपराध क्यों किया गया, इस आधार पर फैसले देता है। यानी क्राइम ही नहीं, मोटिव (प्रेरणा) भी सिद्ध करनी पड़ती है। अगर सिर्फ आरोप के आधार पर किसी को बलात्कारी कहकर गोली मारने का जोश थोड़ा कम हो गया हो तो सोचिएगा। न्यायिक प्रक्रिया के त्वरित होने, और ‘बनाना रिपब्लिक’ होने में फर्क तो होता है ना?

‘नित्यानंद से मत उलझो, कोई बेवकूफ अदालत मुझ पर मुकदमा नहीं चला सकती, मैं परम शिवा हूँ’

मोदी सरकार द्वारा पासपोर्ट रद्द किए जाने के बाद बलात्कार और यौन शोषण के आरोपित स्वामी नित्यानंद का सोशल मीडिया पर एक विवादित वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में नित्यानंद खुद को ‘परम शिवा’ बताते नजर आ रहे हैं और कह रहे हैं कि कोई भी “बेवकूफ अदालत” उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।

वीडियो में नित्यानंद को कहते सुना जा सकता है, “पूरी दुनिया मेरे खिलाफ है। मैं कहता हूँ नित्यानंद से मत उलझो। लेकिन, अगर तुम यहाँ होकर मुझे अपनी निष्ठा दिखाते हो तो मैं तुम्हें वास्तविकता और सच्चाई का खुलासा करके अपनी निष्ठा दिखाऊँगा। अब, मुझे कोई भी छू नहीं सकता। मैं परम शिवा हूँ, समझे। सच का खुलासा करने के लिए कोई बेवकूफ अदालत मुझ पर मुकदमा नहीं कर सकती। मैं परम शिवा हूँ।“

उल्लेखनीय है कि इस वायरल वीडियो से पहले मोदी सरकार स्वयंभू बाबा नित्यानंद पर कड़ा एक्शन लेते हुए उनका पासपोर्ट रद्द कर चुकी है। साथ ही मोदी सरकार द्वारा नित्यांनंद के नए पासपोर्ट की याचिका को भी खारिज किया जा चुका है। जिसकी जानकारी स्वंय मंत्रालय प्रवक्ता रवीश कुमार ने बीते शुक्रवार (दिसंबर 6, 2019) को दी।

उन्होंने बताया, सरकार ने विवादास्पद स्वयंभू बाबा नित्यानंद का पासपोर्ट रद्द कर दिया है और उसकी नए पासपोर्ट की याचिका भी खारिज कर दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने यह भी कहा कि मंत्रालय ने विदेशों में स्थित सभी मिशनों और पोस्टों को नित्यानंद के बारे में सतर्क कर दिया है।

बता दें, 9 वर्ष पहले साल 2010 में स्वामी नित्यानंद की एक सेक्स CD सामने आई थी। जिसके बाद ‘बाबा’ को अरेस्ट भी किया गया था। लेकिन कुछ समय बाद वह जमानत पर छूटकर बाहर आ गया। साल 2012 में फिर स्वयंभू बाबा पर बलात्कार के आरोप लगे, जिसका अभी भी ट्रायल चल रहा है। इतना ही नहीं गुजरात में भी नित्यानंद के ऊपर नाबालिग लड़के लड़कियों को बंधक बनाने और उन्हें टॉर्चर करने के आरोप में आपराधिक मामले चल रहे हैं।

हालाँकि, अभी हाल ही में नित्यानंद पर दो लड़कियों को अगवा करने और गायब कर देने के आरोप में नया मोड़ आया है। दरअसल, जिन दो बहनों के अपहरण और उन्हें जबरन आश्रम में रखने का आरोप स्वामी नित्यानंद पर है, उनमें से एक ने आगे आकर एक वीडियो मैसेज में नित्यानंद को क्लीन चिट दी है और अपने पिता पर ही उनके खिलाफ साज़िश करने का आरोप लगाया है।

पाकिस्तानी शेख गुलजार गिरफ्तार: 11 साल से रह रहा था भारत में, साथ में बीवी और 5 बच्चे भी

आंध्र प्रदेश से एक पाकिस्तानी नागरिक को गिरफ्तार किया गया है। वह पिछले 11 सालों से यहाँ रह रहा था। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान शेख गुलजार खान के रूप में हुई है। वह आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के गाडीवमुला गाँव में एक चित्रकार के रूप में अपनी आजीविका चला रहा था। उसे 3 दिसंबर को सिकंदराबाद से गिरफ्तार किया गया। जानकारी के मुताबिक वह अपनी बीबी और पाँच बच्चों के साथ अपने घर लौटने की कोशिश कर रहा था। 

पुलिस ने बताया कि वह पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के हडमरला के कुल्लूवाल गाँव से है। बताया जा रहा है कि उसके पास वैध दस्तावेज न होने के कारण उसे जनवरी 2008 में दुबई से निकाल दिया गया था। उस समय गुलजार ने तब दावा किया था कि वह भारत का मूल निवासी है, जिसके बाद उसे यहाँ भेज दिया गया था।

भारत आने के बाद वो मुंबई में काम करने लगा। फिर उसने कुरनूल की रहने वाली दौलत बी के साथ निकाह कर लिया। दौलत बी पहले से ही शादीशुदा थी। पहले निकाह से उसे एक बच्चा था। बाद में गुलजार और दौलत के चार बच्चे हुए। वो लोग वहाँ पर किराए पर रहते थे। गुलजार ने किसी से भी अपनी पहचान उजागर नहीं की और अपनी मूल पहचान का खुलासा किए बिना गुलजार ने अपने और अपने परिवार के लिए आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड प्राप्त करने में कामयाब रहा। इसके अलावा 21 नवंबर को उसने विजयवाड़ा में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से पासपोर्ट प्राप्त करने में भी सफल रहा।

बता दें कि वह 6 महीने पहले खुफिया एजेंसी के रडार पर आया था, जब उसने पाकिस्तान में रह रहे अपने परिवार के सदस्यों से संपर्क करने के लिए एक एंड्रॉइड मोबाइल फोन खरीदा था। पुलिस ने बताया कि किसी तरह वह पड़ोसी देश स्थित कुल्लूवाल में एक कपड़ा व्यापारी से संपर्क करने में कामयाब रहा, जिसने उसे अपनी 70 वर्षीय अम्मी शरीफबी से संपर्क करने में मदद की। इसके बाद खान लगातार अपने भाई शहजाद, बहन जमीला और बहनोई अर्सलान के साथ बात कर रहे थे, जो दुबई में रहते हैं।

जानकारी के मुताबिक गुलजार के कॉल डिटेल से पाकिस्तान से लिंक होने का संकेत मिला था। इसके बाद तेलंगाना पुलिस के सीआई सेल द्वारा खान को निगरानी में रखा गया था और फिर 4 नवंबर को उसे हिरासत में लिया गया था।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार पासपोर्ट हासिल करने के बाद गुलजार ने करतारपुर तीर्थयात्री होने की आड़ में अपने परिवार के साथ पाकिस्तान जाने की योजना बनाई थी। मगर गुलजार की बीबी दौलत के भाई नसीब ने उनकी योजना पर पानी फेर दिया। नसीब को शक हुआ कि उसकी बहन और बच्चों को पाकिस्तान ले जाया जा रहा है। जिसके बाद उसने कुरनूल रेलवे पुलिस को सूचित किया। हालाँकि, पुलिस त्वरित कार्रवाई करने में विफल रही, लेकिन फिर बाद में उसे 3 दिसंबर को सिकंदराबाद से गिरफ्तार कर लिया गया।

गुलजार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, विदेशियों विषयक अधिनियम-1946, भारतीय पासपोर्ट अधिनियम और विशेष जाँच दल के पासपोर्ट की धारा 3 अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसकी बीबी और बच्चों को उनके रिश्तेदारों को सौंप दिया गया। जबकि खान को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पिता के ख़िलाफ़ लिखने वालों को इनबॉक्स में धमका रहे कार्ति चिदंबरम, ट्विटर पर ‘सड़क-छाप’ हरकत

देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम सोशल मीडिया पर लोगों को धमकाने के लिए जाने जाते हैं। ये बात बहुत कम लोगों को पता है लेकिन वो अक्सर सोशल मीडिया पर अपने या अपने पिता के बारे में लिखने वालों को धमकाते हैं। यहाँ तक कि आईएनएक्स मीडिया स्कैम में सवाल पूछे जाने पर वो किसी के इनबॉक्स में पहुँच कर धमकी देना शुरू कर देते हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के पूर्व राज्य सचिव प्रकाश बेलवाड़े पाटिल ने एक ट्वीट कर के पी चिदंबरम को सुझाव दिया कि वो अपने और अपने बेटे के बारे में भी एक आर्टिकल लिखे, जिसमें बताएँ कि वो अवैध तरीके से रुपए कैसे कमाते हैं?

दरसल, पी चिदंबरम ने एक ट्वीट कर के घोषणा की थी कि वो ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में कॉलम लिखना फिर से शुरू कर रहे हैं। उसी पर बेलवाड़ी ने तंज कसा कि सुप्रिया सुले ने बताया है कि 10 एकड़ में बैगन उपजा कर हजारों करोड़ रुपए कैसे कमाए जाते हैं। इसी तरह चिदंबरम भी अपने तरीके को लोगों के सामने रखें।

इस ट्वीट के बाद कॉन्ग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम नाराज़ हो गए। उन्होंने बेलावड़ी को मैसेज भेज कर धमकाया। कार्ति ने इनबॉक्स में पहुँच कर लिखा- “मैंने सुना है कि तुम मेरी सलाह चाहते हो। जरा मेरे दफ्तर में आ जाना।” नीचे उस मैसेज का स्क्रीनशॉट प्रस्तुत है:

कार्ति ने इनबॉक्स में मैसेज कर धमकाया

वैसे ये पहली बार नहीं है जब कार्ति सड़क-छाप धमकियों पर उतर आए हों। इससे पहले भी वो लोगों को धमकी और गाली देते रहे हैं। माधव नाम के एक व्यक्ति को कार्ति ने धमकाते हुए मैसेज किया था- “मैं तुम्हें एक दिन देख लूँगा। मेरी बात याद रखना।” एक व्यक्ति ने कार्ति के पिता की आलोचना की तो उन्होंने मैसेज कर के पूछा कि क्या उसे डिक्शनरी की ज़रूरत है?

प्रतोष नामक व्यक्ति ने लिखा कि वो जब भी चिदंबरम पिता-पुत्र के ख़िलाफ़ कुछ लिखते हैं तो कार्ति उन्हें इनबॉक्स में पहुँच कर धमकी देना नहीं भूलते।

अर्पित भटनागर नामक व्यक्ति ने जब चिदंबरम के विरुद्ध लिखा तो उन्होंने मैसेज कर के उसे पागल करार दिया। कार्ति ने कहा कि उसे किसी मानसिक रोगों के अस्पताल में दिखाए जाने की ज़रूरत है।

तमिलनाडु स्थित शिवगंगा के सांसद कार्ति चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया केस में अपने पिता पी चिदंबरम के साथ आरोपित हैं। मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर विदेश में संपत्ति का खुलासा न करने तक, उन पर कई मामले चल रहे हैं। एयरसेल मैक्सिस केस में भी उनके ख़िलाफ़ सरकारी एजेंसियाँ जाँच चला रही हैं। उनके पिता पी चिदंबरम हाल ही में जेल में 106 दिन गुजार कर निकले हैं।

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हैदराबाद, उन्नाव के बाद मुजफ्फरपुर: रेप करने में नाकाम, आरोपित ने पीड़िता को घर में घुसकर जिंदा जलाया

देश में लगातार महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले सामने आ रहे हैं। पहले हैदराबाद में आरोपितों ने महिला के साथ गैंगरेप करके उसे जिंदा जला दिया। उसके बाद उन्नाव में गैंगरेप पीड़िता को कोर्ट जाते समय में जला दिया और अब बिहार के मुजफ्फरपुर में युवती को जलाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार आरोपित ने युवती के साथ रेप करने की कोशिश की, लेकिन जब वह ऐसा करने में विफल रहा तो उसने पीड़िता को जला दिया। पीड़िता 80 फीसदी जल गई हैं, फिलहाल मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

दरअसल आरोपित ने युवती के साथ रेप करने की कोशिश की, लेकिन जब वह ऐसा नहीं कर पाया तो उसने पीड़िता को उसके घर नजीरपुर गाँव में उसे आग के हवाले कर दिया। यह घटना शनिवार (दिसंबर 7, 2019) दोपहर की है। पुलिस ने बताया कि फिलहाल पीड़िता अस्पताल में के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हैं, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। इस मामले में पीड़िता की माँ ने आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता की माँ की शिकायत के आधार पर पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस का कहना है कि पीड़िता का बयान अभी रिकॉर्ड किया जाना है और इस मामले में जाँच की जा रही है। परिवार का आरोप है कि आरोपित शख्स ने घर में घुसकर पीड़िता के साथ रेप का प्रयास किया था लेकिन पीड़िता के विरोध के बाद जब वह नाकाम रहा तो उसने केरोसिन तेल छिड़कर पीड़िता को जिंदा जलाने की कोशिश की। तुरंत ही पीड़िता को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

बिहार में यह मामला ऐसे वक्त सामने आया है जब देश भर में हैदराबाद व उन्नाव में रेप पीड़िता को जला दिया गया, जिसके चलते उनकी मौत हो गई। इन दोनों ही घटनाओं के बाद देशभर में लोगों के भीतर जबरदस्त गुस्सा है। लोग लगातार रेप के दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

इससे पहले मेरठ में रेप पीड़िता पर तेजाब फेंकने का मामला सामने आया था। रेप आरोपित आरिफ, शाहनवाज, शरीफ और आबिद ने बुुधवार (दिसंबर 4, 2019) को महिला के 30 वर्षीय महिला के घर में जबरन घुसकर उस पर तेजाब फेंक दिया, क्योंकि महिला ने आरोपितों के खिलाफ रेप का मामला वापस लेने से इनकार कर दिया था।

गंगा किनारे स्थित इस जेल में तैयार हो रही 10 रस्सियाँ, फाँसी के फंदे पर झूलेंगे निर्भया के गुनहगार?

कुछ दिन पहले ख़बर आई थी कि तिहाड़ जेल के पास निर्भया गैंगरेप के दोषियों को फाँसी देने के लिए लोग ही नहीं मौजूद हैं। अब इस मामले में तिहाड़ ने दूसरे जेलों से मदद माँगी है। इसके बाद बिहार का बक्सर जेल आगे आया है। बक्सर जेल में बंद कुछ अपराधी आजकल ओवरटाइम काम कर रहे हैं। दरअसल, उन्हें फाँसी के फंदे वाली रस्सी तैयार करने का जिम्मा दिया गया है। ऐसी कुल 10 रस्सियाँ तैयार की जा रही हैं। चर्चा है कि दिल्ली निर्भया गैंगरेप व हत्या के गुनहगारों को फाँसी के फंदे पर चढ़ाने के लिए इन्हीं रस्सियों का इस्तेमाल किया जाएगा।

बक्सर सेंट्रल जेल इस मामले में हमेशा से आगे बढ़ कर पहल करता रहा है। फ़रवरी 9, 2013 को जब आतंकी अफजल गुरू फाँसी के फंदे पर झूला था, तब तिहाड़ जेल ने बक्सर जेल से ही रस्सियाँ मँगाई थीं। अफजल गुरू 2001 में संसद भवन पर हुए हमलों में दोषी पाया गया था। गंगा नदी के किनारे स्थित बक्सर सेंट्रल जेल ऐसी रस्सियाँ तैयार करने के मामले में हमेशा अव्वल रहा है। पहले इन रस्सियों को ‘मनीला रोप’ भी कहा जाता था। बक्सर जेल सुपरिटेंडेंट वोइजे कुमार अरोड़ा ने इस बारे में बात करते हुए कहा:

“मुझे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निर्देश दिया गया है कि हमें 10 रस्सियाँ तैयार कर के रखनी हैं। मुझे तो ये भी नहीं पता कि इतनी बड़ी संख्या में फाँसी के फंदों वाली रस्सियों की माँग किस जेल ने की है? लेकिन हमलोग पूरी मेहनत से अपना काम करने में लगे हुए हैं।”

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से दरख्वास्त किया है कि निर्भया गैंगरेप व हत्या के एक दोषी की दया याचिका खारिज कर दी जाए। इसके बाद से ही इस मामले में सुगबुगाहट बढ़ गई है। जेल के एक अधिकारी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को बताया कि गृह मंत्रालय के इस निवेदन के आलोक में यही प्रतीत होता है कि निर्भया गैंगरेप व हत्या के दोषियों को जल्द ही फाँसी मिलने वाली है।

बक्सर जेल में अभी भी कुछ ऐसे अपराधी हैं, जिन्होंने अफजल गुरू के फाँसी का फंदा तैयार किया था। उन्हें धागों का प्रयोग कर के मजबूत रस्सियाँ बनाने का पुराना तकनीकी अनुभव है। 7 लोग मिल कर लगातार 4 दिन पूरी लगन से काम करते हैं, तब जाकर ऐसी एक रस्सी तैयार होती है। अफजल गुरू को फाँसी पर लटकाने के लिए जिस रस्सी का प्रयोग किया गया था, उसे बनाने में 1725 रुपए ख़र्च आए थे। चूँकि अब धागों व इसमें प्रयोग होने वाली अन्य चीजों के दाम बढ़ गए हैं, इस बार ख़र्च ज्यादा आएगा।

इस रस्सी को बनाने में प्रयोग किए जाने वाले ‘Brass Bush’ की क़ीमत में भी उछाल आया है। फाँसी के फंदे वाली रस्सी की लम्बाई उस व्यक्ति से 1.6 गुना ज्यादा होनी चाहिए, जिसे उस पर झुलाया जाएगा। गया स्थित मानपुर के टेक्सटाइल व्यापारी अब तक इसके लिए धागों की सप्लाई करते आए हैं। इससे पहले इन्हें पंजाब के भटिंडा से ख़रीदा जाता था। अब तक सामान्यतः बक्सर जेल देश में अकेला ऐसा जेल था, जहाँ ये रस्सियाँ बनाई जा रही थीं। लेकिन, अब कई अन्य जेल भी इस मामले में आगे बढ़ कर काम कर रहे हैं।

1930 से ही ‘मनीला रोप’ तैयार कर रहे बक्सर जेल के अधिकारी गर्व से बताते हैं कि उनकी बनाई रस्सियाँ आज तक कभी भी विफल नहीं हुई हैं और अपराधी की मृत्यु ज़रूर हुई है। 1992 और 1995 में भागलपुर जेल में बंद कुछ अपराधियों को फाँसी पर लटकाया गया था, तब बक्सर जेल ने ही रस्सियाँ सप्लाई की थी। पश्चिम बंगाल में बलात्कारी धनंजय चटर्जी भी बक्सर जेल की बनी रस्सी से ही फाँसी पर झूला था। जेल के आईजी ने कहा कि फाँसी पर लटकने की प्रक्रिया में विलम्ब न हो, इसीलिए एडवांस में ही रस्सियाँ तैयार की जा रही हैं।

निर्भया के बलात्कारियों को फाँसी देने के लिए जल्लाद की आवश्यकता: लोगों ने कहा- मुझे बुला लो, फ्री में करेंगे

CRPF हमला: 4 जिहादियों शरीफ़, फ़ारूक़, सलाउद्दीन और इमरान को फाँसी, 2 हैं पाकिस्तानी

निर्भया के बलात्कारियों और फाँसी के बीच अब सिर्फ दया याचिका, जेल अधीक्षक ने दे दिया नोटिस

‘हिन्दुओं’ को नहीं मिलने चाहिए वोटिंग राइट्स: नागरिकता विधेयक पर ‘सेक्युलर’ बनी शिवसेना

नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) पर शिवसेना पेंडुलम की तरह झूलती नज़र आ रही है। जहाँ एक तरफ़ कुछ नेता इसका विरोध कर रहे हैं, शिवसेना ने कहा था कि वो अपने सहयोगी दलों कॉन्ग्रेस व एनसीपी से अलग रुख अख्तियार करते हुए विधेयक का समर्थन करेगी। अब संजय राउत ने ‘बीच का रास्ता’ निकालने की कोशिश करते हुए यह दिखाने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी अपनी विचारधारा को त्यागे बिना ‘सेक्युलर’ हो गई है। राउत ने कहा कि हिन्दुओं (पड़ोसी देशों के प्रताड़ित) को भले ही नागरिकता दे दी जाए, उन्हें मताधिकार नहीं देना चाहिए। ये शिवसेना के पुराने रुख के एकदम विपरीत है, जब वो हिन्दुओं को सभी अधिकार देने की बात करती थी।

संजय राउत ने कहा कि अवैध घुसपैठियों को निकाल बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शरणार्थी हिन्दुओं को भारत की नागरिकता देने का उनकी पार्टी समर्थन करती है। लेकिन, साथ ही उन्होंने जोड़ा कि शरणार्थी हिन्दुओं को वोट देने का अधिकार न मिले। शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत ने ट्विटर पर लिखा:

“केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी, आरोप लग रहे हैं कि शरणार्थी हिन्दुओं को भारत की नागरिकता देकर भाजपा अपना वोट बैंक तैयार कर रही है। इन आरोपों को थामने का सबसे अच्छा उपाय ये है कि उन हिन्दुओं को वोटिंग राइट्स ही न दिए जाएँ। और हाँ, उन कश्मीरी पंडितों का क्या? क्या अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद वो अपने घर वापस जाने में कामयाब हुए हैं?”

उधर ‘सामना’ में ये आशंका जताई गई है कि भारत सरकार अपने इस क़दम के हिन्दुओं व दूसरे मजहब के बीच अदृश्य विभाजन को बढ़ावा देते हुए विभिन्न धर्मों के बीच युद्ध की स्थिति पैदा करना चाहती है। बता दें कि इस बिल के पास होने से शरणार्थी विदेशी हिन्दुओं को भारत की नागरिकता मिलने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। शिवसेना ने ‘सामना’ के जरिये पूछा कि क्या भारत में पहले से समस्याओं की कमी थी जो CAB के रूप में एक नई समस्या खड़ी कर दी गई है? शिवसेना ने दावा किया कि उत्तर-पूर्वी राज्यों के अलावा बिहार में भी इस विधेयक का विरोध हो रहा है, जहाँ भाजपा सत्ता में है।

शिवसेना ने कहा कि हिन्दू शरणार्थियों की संख्या की पुष्टि होनी चाहिए। पार्टी ने पूछा कि लाखों की संख्या में भारत में आए इन हिन्दू शरणार्थियों को देश में कहाँ बसाया जाएगा? पार्टी ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों को इन शरणार्थी हिन्दुओं को बसाने के लिए पहल करनी पड़ेगी।

सिटीजन बिल पर मोदी कैबिनेट की मुहर: पाक, बांग्लादेश के प्रताड़ित हिंदुओं को नागरिकता का प्रावधान

पूर्व AAP विधायक और कॉन्ग्रेसी नेता अलका लांबा की कैट फिल्टर के साथ फेसबुक पर लाइव स्ट्रीमिंग

AAP की पूर्व विधायक और वर्तमान में कॉन्ग्रेस नेता अलका लांबा हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक धरना-प्रदर्शन में गईं। वहाँ जाने-अनजाने एक ऐसी हरक़त हो गई, जिस पर सोशल मीडिया के यूज़र्स जमकर हँसी के ठहाके लगा रहे हैं।

दरअसल, धरना-प्रदर्शन के दौरान जब वो हाथ में माइक लिए लोगों से बात कर रही थीं, तो जिस शख़्स को उन्होंने अपना फ़ोन फ़ेसबुस से लाइव स्ट्रीमिंग के लिए दिया था, वो फ़िल्टर्स हटाना भूल गया। इससे हुआ यह कि उस दौरान अलका लांबा जिस भी व्यक्ति से उनकी परेशानी पूछने जातीं, उस व्यक्ति के चेहरे पर कभी बिल्ली, पिल्ले और दाढ़ी-मूँछ वाला फ़िल्टर आ जाता। इससे वो व्यक्ति कभी बूढ़ा दिखने लगता, तो कभी उसके चेहरे पर अचानक मूँछें आ जातीं, कभी लंबी दाढ़ी दिखने लगती तो कभी बिल्ली जैसे कान वाली शक़्ल दिखने लगती।

ऐसा ही भद्दा मज़ाक हुआ एक दिव्यांग व्यक्ति के साथ। जब अलका लांबा उनके पास पहुँची तो दिव्यांग व्यक्ति के चेहरे पर कभी गॉगल्स का फ़िल्टर लग जाता है, तो कभी सिर पर हैट लग जाता है, कभी बैंगनी रंग की मूँछ लग जाती है। ऐसा तब तक होता रहा, जब तक अलका लांबा उस व्यक्ति से बात करती रहीं।

इसके बाद अलका लांबा जब एक महिला के पास पहुँची तो उनके चेहरे पपर लंबी दाढ़ी वाला फ़िल्टर लग गया, जिससे वो बूढ़ी नज़र आने लगीं। इसके बाद महिला के चेहरे पर गुगली आँखों वाला फ़िल्टर लग गया, जो बेदह हास्यास्पद लग रहा था।

बता दें कि यह धरना-प्रदर्शन रोज़गार के अवसरों को लेकर पिछले कई दिनों से दिल्ली के मंडी हाउस चौराहे पर हो रहा था। इस दौरान अलका लांबा ख़ुद भी कई फ़िल्टर्स के साथ दिखाई दीं। 

लांबा के इस फ़ेसबुक लाइव स्ट्रीमिंग पर कई लोगों ने मज़ेदार टिप्पणियाँ की हैं।

एक साहब SRK ने लांबा को सूचित किया कि वीडियो बनाने वाला व्यक्ति एक ‘साइको’ है। फ़िलहाल, अब इस वीडियो को फ़ेसबुक से हटा लिया गया है।

लांबा की राजनीतिक यात्रा

अलका लांबा हाल ही में आम आदमी पार्टी के साथ अपने सार्वजनिक सम्पर्क टूटने के बाद वापस कॉन्ग्रेस में चली गईं, जहाँ उन्होंने ट्विटर पर सबको बता दिया कि कैसे दिल्ली के सीएम और AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप से हटा दिया था। 20 वर्षों से विभिन्न क्षमताओं में कॉन्ग्रेस की सेवा करने के बाद, उन्होंने दिसंबर 2014 में AAP में शामिल होने के लिए पुरानी पार्टी छोड़ दी थी। हालाँकि, AAP में रहने के 5 साल के भीतर, लांबा का पार्टी नेतृत्व से मोहभंग हो गया था। उन्होंने एक साल से अधिक समय तक रूकने के बाद आख़िरकार सितंबर-2019 में पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया था।

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‘भैया मैं साँस नहीं ले पा रहा, मेरे बच्चों का ख्याल रखना’ – मौत से पहले आखिरी कॉल का दर्दनाक Audio

दिल्ली के रानी झाँसी रोड स्थित चार मंजिला अनाज मंडी इमारत में रविवार (दिसंबर 8, 2019) को आग और धुएँ के बीच घिरे कई बदनसीबों को अपनी मौत का अंदाजा हो गया था। इनमें से कुछ ने अपने-अपने घरों पर परिजनों को फोन मिलाए। किसी ने अपने बूढ़े पिता से खुद को बचाने की गुहार लगाई, किसी ने अपने दोस्त को परिवार का ध्यान रखने के लिए कहा, तो किसी ने अपनी गर्भवती बीबी को आखिरी कॉल करके जिंदा न बचने की आशंका जाहिर की।

मौत सामने खड़ी देख मोहम्मद इमरान ने अपने पिता को फोन कर उसे बचाने की गुहार लगाई और कहा कि वह जिंदा बाहर नहीं आ पाएगा। इमरान ने अंतिम कॉल में अपने पिता से कहा, “अब्बा बहुत डर लग रहा है। फैक्ट्री में आग लग गई है। बचना मुश्किल लग रहा है। हमें बचा लो।” जवाब में पिता ने कहा, “चिंता मत करो, अल्लाह पर भरोसा रखो।” बेटे और पिता के बीच इतनी ही बात हो पाई थी कि फोन कट गया। पिता हेलो… हेलो… बोलते रहे, लेकिन उन्हें बेटे की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

बिहार के सहरसा के 18 वर्षीय मुस्तकिन ने अपने 24 वर्षीय बड़े भाई अफसद को इस त्रासदी में खो दिया। मुस्तकिन ने कहा, “अफसद इस बार अपने परिवार के साथ ईद नहीं मना पाया था। वह सोमवार सुबह घर जाने वाला था और शनिवार रात को किए गए आखिरी फोन में उसने मुझसे घर का कुछ सामान खरीदने को कहा था।”

इस आग ने 43 लोगों की जान ले ली। रविवार तड़के 5 बजे के आसपास जब पूरी दिल्ली नींद के आगोश में डूबी हुई थी, तब आग में फँसा मोहम्मद मुशर्रफ अपने दोस्त को फोन मिला रहा था। मोनू को कॉल करके मुशर्रफ न केवल रो रहा था, बल्कि अपने दोस्त से कह रहा था कि कुछ ही देर में वह मरने वाला है और वह उसके बाद उसके परिवार को ख्याल रखे।

मुशर्रफ अपने दोस्त को फोन कर कहता है, “मोनू, भैया मैं आज खत्म होने वाला हूँ… चारों ओर धुआँ ही धुआँ है, एक-एक साँस लेना मुश्किल हो रहा है और कुछ ही पलों में आग लगने वाली है यहाँ। मोनू तुम करोल बाग आ जाना गुलजार से नंबर ले लेना…”

मोनू: कहाँ, दिल्ली? 

मुशर्रफ: हाँ…

मोनू: किसी तरह तुम निकलो वहाँ से…

मुशर्रफ: अब कोई रास्ता नहीं बचा… बस मैं खत्म हूँ मैं भैया आज… मेरे बाद मेरे परिवार को ख्याल रखना… अब साँस भी नहीं आ रहा है।

मोनू: पुलिस, फायर ब्रिगेड किसी नंबर पर कॉल कर बचने का प्रयास करो।

तभी मुशर्रफ का दम घुटने लगता है… मौत का सामने खड़ा देख वह रोने लगता है… और अल्लाह को याद करता है। फिर अचानक से मुशर्रफ की आवाज आने बंद हो जाती है और उसका दोस्त मोनू हेलो… हेलो करता है…

इंडिया टुडे टीवी से बात करते हुए मोनू ने कहा, “मैंने एक भाई खो दिया है। मैं उसके परिवार की मदद करने की अपनी प्रतिबद्धता लेकर जिऊँगा लेकिन मैंने आज सब कुछ खो दिया है। मेरा सबसे अच्छा दोस्त हमेशा के लिए चला गया।”

बिहार के मधुबनी जिले से 32 वर्षीय जाकिर हुसैन ने कहा कि उसके छोटे भाई शाकिर हुसैन ने अंतिम कॉल अपनी प्रेगनेंट बीबी को की थी। वह चौथी मंजिल पर स्थित टोपी बनाने वाले कारखाने में काम करता था। जाकिर ने कहा, “मैं फँस गया हूँ। मैं जिंदा बाहर नहीं आ पाऊँगा।”

दोनों भाइयों ने कल रात फोन पर बात की थी। उनके पिता भी दिल्ली में ही काम करते हैं और वे तीनों सोमवार को अपने गृहनगर जाने वाले थे। भाइयों ने रविवार को खरीददारी करने का मन बनाया था। जाकिर ने कहा, “शाकिर के तीन बच्चे हैं-दो बेटियाँ और एक बेटा। उसकी पत्नी गर्भवती है। वह एक और बच्चे का पिता बनने वाला था, लेकिन वो अपने बच्चों को अनाथ छोड़कर चला गया।”

उत्तर प्रदेश के शहजाद ने भी अपने सुबह 5 बजे अपने माता पिता को कॉल किया बचाने की गुहार लगाई। मगर कॉल बीच में ही कट हो गया और जल्द ही शहजाद के माता पिता को पता चला कि शहजाद मर चुका है। इसके अलावा राजू नाम के अन्य कर्मचारी ने भी अपने दोस्त फुरकान अहमद को कॉल किया। अहमद ने उस कॉल के बारे में बात करते हुए कहा, “उसकी आवाज़ अस्पष्ट थी लेकिन उसने मुझे बचाने के लिए विनती की। उसने कहा कि चारों तरफ आग और धुआँ था। मैंने पूछा कि क्या उन्होंने और अन्य लोगों ने पुलिस को मदद के लिए बुलाया, लेकिन मैं उनकी प्रतिक्रिया नहीं सुन सका। यह बातचीत केवल 30-40 सेकंड तक चली।”

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847 करोड़ रुपए के साथ 36 लाख+ महिलाओं की बदली जिंदगी: MP, महाराष्ट्र और ओडिशा सबसे आगे

कृषि मंत्रालय ने पिछले सप्ताह संसद को बताया कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार की फ्लैगशिप योजना से 36 लाख से अधिक महिला लाभान्वित हुईं। महिलाओं को कृषि गतिविधियों में संलग्न करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 84 परियोजनाओं के लिए 847 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

ख़बर के अनुसार, एक सवाल – ‘क्या सरकार महिला किसानों के लिए कोई योजना चला रही है’ – के लिखित जवाब में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय महिलाओं की भागीदारी और उत्पादकता बढ़ाने के लिए व्यवस्थित निवेश करके महिला किसान सशक्तीकरण योजना (MKSP) को लागू किया गया है।

उन्होंने कहा,

“MKSP के तहत, देश में 24 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 84 परियोजनाओं के माध्यम से 36.06 लाख महिला किसान लाभान्वित हुई हैं। इनमें से महाराष्ट्र में 1.81 लाख महिलाओं को लाभान्वित किया गया है। मंज़ूर परियोजनाओं के कार्यान्वयन की दिशा में केंद्र की ओर से कुल 847.5 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।”

MSKP वेबसाइट के अनुसार, मध्य प्रदेश की महिला किसान केंद्रीय योजना का लाभ उठाने में सबसे आगे हैं, उनका आँकड़ा 6.46 लाख है। सरकारी आँकड़ों से पता चला है कि दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र है, जहाँ यह आँकड़ा 5.18 लाख रहा और उसके बाद ओडिशा का नंबर है, जहाँ लाभ उठाने वाली महिला किसानों का आँकड़ा 4.61 लाख था।

MSKP राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का एक उप-घटक है, जिसका उद्देश्य कृषि में महिलाओं की स्थिति में सुधार करना है। अधिकतर मामलों में, किसानों ने सरकारी सहायता प्राप्त करने और व्यवस्थित खेती के लिए स्वयं सहायता समूह बनाकर लाभ उठाया है।

MKSP योजना के तहत सहायता प्रदान करने के अलावा, कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि सरकार कृषि-क्लिनिक और कृषि-व्यवसाय केंद्र, कृषि विपणन की एकीकृत योजनाएँ, कृषि यांत्रिकीकरण के उप-मिशन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन जैसी योजनाओं के तहत महिला किसानों को अतिरिक्त सहयोग और सहायता दे रही है।

चालू वित्त वर्ष के दौरान, सरकार ने इन योजनाओं के लिए 3,756 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। मंत्री ने कहा, “इसके अलावा, महिला किसान पात्रता के अनुसार विभाग द्वारा कार्यान्वित सभी योजनाओं के तहत लाभ उठा सकती हैं।”