नेहरू-गाँधी परिवार के दामाद रॉबर्ड वाड्रा ने संवेदनहीनता की पराकाष्ठा का प्रदर्शन करते हुए अपनी पत्नी प्रियंका गाँधी वाड्रा के घर पर कथित सुरक्षा उल्लंघन की तुलना यौन अपराधों की क्रूरता के साथ की है। रॉबर्ट वाड्रा ने एक फेसबुक पोस्ट में यौन अपराधों में राजनीति को घुसाते हुए केंद्र सरकार को इन अपराधों के लिए दोषी ठहराया। जबकि कानून-व्यवस्था एक राज्य का विषय होता है।
रॉबर्ट वाड्रा ने फेसबुक पर लिखा, “यह प्रियंका की सुरक्षा के लिए नहीं है और ना ही मेरी बेटा-बेटी या फिर गाँधी परिवार के लिए है। यह हमारे नागरिकों के लिए है विशेषकर देश की महिलाओं को सुरक्षा देने की बात है ताकि वो खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। देश भर में महिलाओं को सही तरीके से सुरक्षा नहीं मिल रही है… लड़कियों से छेड़खानी और दुष्कर्म हो रहा है… किस तरह का समाज हम बना रहे हैं। हर नागरिक की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है। अगर हम अपने देश, अपने घर, सड़क पर या फिर दिन या रात के वक्त महफूज नहीं है तो फिर आखिर कहाँ और कब हम सुरक्षित रह सकते हैं?”
रॉबर्ट वाड्रा का फेसबुक पोस्ट
बता दें कि कुछ ही दिनों प्रियंका गाँधी के आवास पर कथित तौर पर कुछ अज्ञात लोग सेल्फी लेने के लिए घुस आए थे। प्रियंका गाँधी की सुरक्षा में हुई इस चूक का मुद्दा सीआरपीएफ के सामने भी उठाया गया था। देश भर में हो रहे यौन अपराधों के साथ इसकी तुलना करना बेहद संवेदनहीनता है। प्रियंका गाँधी के पास जेड-प्लस सुरक्षा कवर भी है, जिसमें उनके सुरक्षा में सीआरपीएफ कमांडो शामिल हैं। कथित तौर पर हुई सुरक्षा चूक के लिए सरकार को टारगेट करना कतई सही नहीं है।
बहरहाल, प्रियंका गाँधी जिस सुरक्षा चूक की बात कर रही थीं, वो उनके जानबूझकर किया गया ड्रामा साबित हुआ, क्योंकि जिस गाड़ी के प्रियंका के घर में ‘घुस आने’ को उन्हें मिली ज़ेड प्लस सुरक्षा की खामी बताया जा रहा है, उस गाड़ी में बैठी महिला को प्रियंका के ही निजी सचिव ने मिलने का समय दिया था। और तो और वो महिला कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुकीं हैं।
प्रियंका गाँधी की सुरक्षा में कथित चूक के साथ यौन अपराधों की तुलना करके रॉबर्ट वाड्रा ने कॉन्ग्रेस पार्टी के नैतिक अवहेलना की विरासत का परिचय दिया है। यह घटना न केवल यह दिखाता है कि क्यों हाल ही में हुए चुनाव में पार्टी को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ रहा था, बल्कि इससे यह बात भी सामने आ रही है कि पार्टी पर राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में अप्रासंगिक होने का गंभीर खतरा है। फिलहाल पार्टी जिस तरह की राजनीति कर रही है, उसमें पार्टी को आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता है, अन्यथा भविष्य में पार्टी की हालत और भी खराब होने वाली है।
बिहार और झारखण्ड में भाजपा नक्सलियों के लिए सिरदर्द बन गई है। नक्सली संगठन भाजपा ही नहीं बल्कि राष्ट्रोय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद और वनवासी कल्याण आश्रम जैसे संगठनों के लगातार बढ़ते प्रभाव से सकते में हैं। नक्सलियों को लगातार मजबूत होती भाजयुमो (भारतीय जनता युवा मोर्चा) का भी डर सता रहा है। नक्सली इन हिंदूवादी संगठनों के ख़िलाफ़ बड़ी साज़िश रच रहे हैं। ख़ुफ़िया विभाग को इस सम्बन्ध में सूचना मिली है। इसके बाद पुलिस महानिरीक्षक (स्पेशल ब्रांच) ने सभी जिले को सतर्क करते हुए नक्सलियों की साज़िश विफल करने के लिए लिखा है।
सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों की सफलता से नक्सली निराश हैं। वो उत्पीड़ित लोगों को खोज कर संगठन में भर्ती करना चाह रहे हैं ताकि सरकार के ख़िलाफ़ लड़ाई को धार दे सकें। ‘हिंदुस्तान’ की एक्सक्लूसिव ख़बर के अनुसार, नक्सली हिंदूवादी संगठनों के विस्तार को रोकने के लिए बड़ी साज़िश कर रहे हैं। इसके लिए गुरिल्ला युद्धनीति और लैंडमाइंस का प्रयोग करने की योजना नक्सलियों द्वारा बनाई जा रही है। नक्सली बिहार के विभिन्न जिलों में घूम कर संगठन को मजबूत करने में लगे हुए हैं।
‘हिंदुस्तान’ ने अपनी ख़बर में बताया है कि पूर्वी बिहार, पूर्वोत्तर झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के सचिव सहदेव सोरेन उर्फ प्रवेश दा उर्फ अनुज का दस्ता मुंगेर जिले के खड़गपुर थाना क्षेत्र के कंदनी जंगल के अलावा जमुई के बरहट दुधपनिया आदि जगहों पर भ्रमणशील है। नक्सलियों के स्पेशल पलटन के कमांडर सिद्धू कोड़ा को जमुई के गिद्धेश्वर पहाड़ पर देखा गया है। एक अन्य नक्सली नेता पिंटू राणा जमुई व नवादा में देखा गया है। गया और औरंगाबाद में कई बड़े नक्सली लगातार भ्रमणशील हैं।
नक्सलियों के टॉप कमांडर अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में भाजपा और आरएसएस के विस्तार को रोकने की कोशिश में लग गये हैं। पढ़ें पूरी खबर…https://t.co/6iB35nhWw3
नक्सली संगठन 2 से 8 दिसंबर तक गुरिल्ला आर्मी (PLF) की 19वीं वर्षगाँठ मनाएँगे। इस दौरान उन्होंने ‘जुझारू सप्ताह’ मनाने का फ़ैसला लिया है। ग्रामीण व शहरी इलाक़ों में लड़कों को इसके लिए तैयारियाँ करने के लिए लगाया गया है। आशंका है कि नक्सली इस दौरान किसी बड़ी हिंसक वारदात को अंजाम दे सकते हैं। मुंगेर रेंज के डीआईजी मनु महाराज ने बताया कि हाल ही में पुलिस व नक्सलियों की मुठभेड़ हुई है। उन्होंने बताया कि पुलिस लगातार पहाड़ों पर अभियान चला रही है, जिससे नक्सलियों के मंसूबों को नाकाम किया जा सके।
गुजरात के अहमदाबाद शहर में हिट एन्ड रन (गाड़ी से किसी को टक्कर मार कर भाग जाना) का मामला सामने आया है। कल रात (सोमवार, 2 दिसंबर, 2019 को) हुए इस वाकये में गुजरात कॉन्ग्रेस के एमएलए शैलेश परमार का नाम मीडिया रिपोर्टों में सामने आ रहा है। बताया कि मृतक एक 47-वर्षीय पुरुष थे, जिनकी स्कूटर को कॉन्ग्रेस विधायक ने टक्कर मार दी। घटना अहमदाबाद के मेमनगर इलाके की है।
My driver was driving car: Congress MLA Shailesh Parmar denies charges of driving the car that killed a bike rider near Bhuyangdev, yesterday.#Gujarat#TV9Newspic.twitter.com/g4CSvsMdwE
मृतक प्रफुल पटेल के परिवार वालों के हवाले से इंडिया टुडे की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टक्कर गाड़ी चला रहे परमार के बेटे ने मारी है। वहीं विधायक ही नहीं, स्थानीय पुलिस का भी दावा है कि गाड़ी परमार का बेटा नहीं, ड्राइवर देवेंद्र भावसार चला रहा था। भावसार दुर्घटना के बाद से ही फ़रार बताया जा रहा है। वहीं आज तक की रिपोर्ट में यह भी दावा किया हग्या है कि गाड़ी को पुलिस ने बरामद कर लिया है।
पुलिस के अनुसार उन्हें सीसीटीवी फुटेज की जाँच से ज्ञात हुआ है कि गाड़ी ड्राइवर भावसार चला रहा था और दुर्घटना के समय वह गाड़ी में अकेला था। इस बीच दानिलिमड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक परमार ने मृतक प्रफुल पटेल की हर तरीके से मदद का आश्वासन दिया है। दानिलिमड़ा अहमदाबाद का ही एक विधानसभा क्षेत्र स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों में बताया जा रहा है।
बकौल परमार, “मुझे कल रात हुई दुर्घटना के बारे में उसके होने के करीब डेढ़ घंटे बाद पता चला है। मैंने बाद में पीड़ित के परिवार से फ़ोन पर बात की है और उन्हें आश्वासन दिया है कि उन्हें मेरा पूरा समर्थन रहेगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे जाँच में पुलिस के साथ सहयोग करेंगे, और यह दुर्घटना उनके ड्राइवर धर्मेश भावसार से हुई है।
हैदराबाद के शादनगर इलाके में हुई वेटरिनरी डॉक्टर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) से रेप और हत्या की नृशंस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक पीड़िता डॉक्टर के हत्यारे को कड़ी से कड़ी सजा देने की माँग उठ रही है। इसको लेकर पीड़िता की माँ ने कहा है कि उनकी बेटी बहुत मासूम थी। वो चाहती हैं कि आरोपितों को उसी तरह से जलाया जाए जिस तरह से उनकी बेटी को जलाया गया था।
आज तक टीवी को दिए एक इंटरव्यू पीड़िता की माँ कहती है, “मैं चाहती हूँ कि वे उसी तरह से जले, जैसे उसने मेरी बेटी को जलाया।” वो प्रीति रेड्डी के साथ हुई आखिरी बातचीत को याद करके भावुक हो जाती हैं और कहती हैं, “आखिरी बार जब उसने मुझसे बात की थी, तो वो रास्ते में थी। उसने मुझसे फल काटकर रखने के लिए कहा था। उसने कहा था कि उसे बहुत भूख लगी है। इस दौरान उसने मुझे स्कूटी के टायर पंक्चर होने की बात नहीं कही थी। मैं खाना तैयार करके उसके घर आने का इंतजार कर रही थी।”
डॉ. रेड्डी के पिता ने कहा कि इस दर्दनाक घटना ने उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया है। जब से ये घटना घटी है, उनका परिवार सो नहीं पाया है। वो कहते हैं, “पुलिस अगले दिन सुबह 10 बजे शव की पहचान करने के लिए हमें ले गई। मैंने तुरंत अपनी बेटी के जले हुए शरीर के कुछ हिस्सों और आसपास पड़ी कुछ वस्तुओं को देखकर पहचान लिया। पुलिस को सुबह 7:30 बजे ही इसके बारे में पता चल गया था, लेकिन उन्होंने हमें सूचित करने की जहमत नहीं उठाई।”
पीड़िता के पिता कहते हैं कि लोग उन्हें बताते हैं कि उसे (डॉ. रेड्डी) 100 पर पुलिस को बुलाना चाहिए था। 100 नंबर कॉल करने के लिए बहुत सारे दिशा-निर्देश का पालन करना पड़ता है। उन्होंने रोष जाहिर करते हुए सवाल किया, “तेलंगाना में एक व्यक्ति का नाम बताएँ, जिसे 100 डायल करने के बाद बचाया गया हो।”
वो पुरानी बातों को याद करते हुए कहते हैं, “उनकी बेटी अपने सपने को हासिल करने के लिए दिन में 14 घंटे पढ़ती थीं। उसने अपना सपना पूरा कर लिया था। वह रोजाना 14 घंटे पढ़ाई करती थी और फिर उसे नौकरी मिल गई। उसने 3 साल तक जॉब की और फिर उसकी मौत हो गई।”
हालाँकि, पिता अभी भी अपनी बेटी की हत्या करने वाले बलात्कारियों और दोषियों को मौत के घाट उतारने के आह्वान से सहमत नहीं है। वह कहते हैं, “सरकार को कार्रवाई करने के लिए एक होना चाहिए। अगर इसे जनता पर छोड़ दिया जाता है, तो यह पूरे देश में एक कानून और व्यवस्था बन जाएगा। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत कानून बनाएँ।”
बता दें कि इससे पहले आरोपितों के परिवारों ने साफ कहा था कि उनके बेटों को अगर मौत की सजा दी जाती है तो वे विरोध नहीं करेंगे। एक आरोपित के परिवार की ओर से कहा गया कि जो अपराध उन्होंने किया उसके लिए उन्हें या तो फाँसी दी जानी चाहिए या फिर जिंदा ही जला देना चाहिए। आरोपित सी चेन्ना केशवुलु की माँ ने स्थानीय मीडिया से कहा था, “मेरी खुद की भी एक बेटी है, मैं मृतक लड़की के परिवार का दर्द समझ सकती हूँ”। उन्होंने कहा कि इस हैवानियत भरे कृत्य के लिए उनके बेटे को फाँसी दे दी जानी चाहिए या फिर जिंदा जला दिया जाना चाहिए।
गौरलतब है कि हैदराबाद में एक वेटेनरी डॉक्टर के तौर पर काम करने वाली डॉ. प्रीति के साथ गैंगरेप करने के बाद आरोपितों ने उन्हें जला दिया था। इस मामले में पुलिस ने सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। गैंगरेप के दौरान ही दुष्कर्म पीड़िता की मौत हो गई थी। इसके बाद सभी आरोपित डॉ प्रीति के शव को गाड़ी में रखकर रिंग रोड के करीब ले गए, जहाँ कम्बल में लिपटे उनकी लाश को उन सबने पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। गिरफ़्तारी के बाद शनिवार को मजिस्ट्रेट ने सभी आरोपितों [मोहम्मद आरिफ (26 साल), जोल्लू शिवा (20 साल), जोल्लू नवीन कुमार (20 साल), चिन्ताकुट्टा चेन्ना केशवुलु (21 साल)] को 14 दिनों की हिरासत में भेज दिया।
अभी हैदराबाद में एक महिला डॉक्टर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद गला घोंटकर उसकी नृशंस हत्या के बाद शव को मोहम्मद आरिफ और उसके साथियों ने पेट्रोल से जला दिया था। इस घटना की आग अभी शांत भी नहीं हुई थी कि हैदराबाद की ही तरह बिहार के बक्सर जिले में भी दरिंदों ने एक किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और फिर गोली मारकर उसकी हत्या करने के बाद उसी तरह पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक की सूचना के आधार पर कुछ अज्ञात लोगों ने बक्सर जिले के इटाढ़ी थाना क्षेत्र में एक किशोरी साथ गैंगरेप के बाद उसे गोली मार देने की खबर है। यहाँ भी अपराधियों ने साक्ष्य मिटाने के लिए किशोरी के शव को पेट्रोल छिड़ककर जला दिया। हैदराबाद की घटना के मद्देनजर, इस घटना की सूचना मिलते ही पूरे जिले में अफरातफरी मच गई। पुलिस ने घटनास्थल से एक खोखा बरामद किया है जिससे गोली चलने का पता चलता है। हालाँकि, बुरी तरह से जल चुकी किशोरी की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह भी कहा जा रहा है मंगलवार की सुबह इटाढ़ी थाना क्षेत्र के कुकुड़ा गाँव के कुछ लोग खेत में गये थे। लोगों ने देखा कि वहाँ एक किशोरी का शव जला हुआ पड़ा है। जैसे ही इसकी सूचना गाँव के बाकी लोगों को हुई पूरा गाँव घटनास्थल पर इकठ्ठा हो गया। स्थानीय लोगों ने इस घटना की सूचना इटाढ़ी थाने की पुलिस को दी।
रिपोर्ट के अनुसार, सूचना मिलते ही आनन-फानन पुलिस मौके पर पहुँच कर तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचना दे दी। सूचना मिलने पर वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँचकर जाँच शुरू कर दी। पुलिस ने किशोरी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस ने किशोरी की पहचान के लिए आसपास के सभी थानों समेत जिलों के अन्य थानों से संपर्क साध रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, घटना के संबंध में एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा ने बताया कि युवती को गोली मारकर शव को जला दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा कि युवती के साथ गैंगरेप हुआ है कि नहीं। अभी तक युवती की पहचान नहीं हो पायी है।
अभी तक इस घटना पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं आई है लेकिन प्रथमदृष्टया मामला संदिग्ध लग रहा है। और जिस तरह से किशोरी का शव खेत में जिस वीभत्स हालत में मिला है। उससे गैंगरेप और हत्या की बातें रिपोर्टों में की जा रही हैं लेकिन अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यदि सभी आशंकाएँ सही साबित होती हैं तो एक तरह से हैदराबाद की घटना को दोहराने की कोशिश के रूप में इसे देखा जा रहा है।
फिलहाल, पुलिस इस मामले की छानबीन कर रही है लेकिन अभी तक किसी भी आरोपित का नाम सामने नहीं आया है।
बजाज समूह के चेयरमैन राहुल बजाज ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के समक्ष देश में ‘डर के माहौल’ का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आज लोग सरकार के ख़िलाफ़ बोलने से डरते हैं। 40,000 करोड़ के मालिक राहुल ने अपने बढ़ते कारोबार के बीच जब ये ‘डर’ जताया और ‘लिंचिंग’ का मुद्दा उठाया, तो गृहमंत्री ने उनके आरोपों को नकार दिया। शाह ने कहा कि किसी को डरने की ज़रूरत नहीं है। विपक्षी नेताओं ने राहुल बजाज के आरोपों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। मीडिया के भी एक वर्ग ने ‘डर का माहौल’ वाले नैरेटिव को लेकर राहुल बजाज के बयान को प्राथमिकता दी।
लेकिन, इन सबके बीच राहुल बजाज भी कुछ आरोपों से घिर गए हैं। हालाँकि, वो पहले राहुल गाँधी की भी प्रशंसा कर चुके हैं लेकिन इस बार आरोप गंभीर है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर-खीरी से भाजपा सांसद अजय टेनी मिश्रा ने राहुल बजाज को लेकर संसद में कुछ अहम खुलासे किए। लखीमपुर गन्ना उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों में से एक है। वहाँ के किसान बड़ी मात्रा में गन्ना उपजाते हैं। वहाँ पर 10 बड़ी चीनी मिलें हैं। भाजपा सांसद ने इसके बारे में बताया कि उन 10 चीनी मिलों में से 3 बजाज परिवार की हैं।
राहुल बजाज राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। उनके बारे में जब भाजपा सांसद ने बोलना शुरू किया तो विपक्ष ने हंगामा शुरू कर लिया। हालाँकि, सभापति के चेयर पर मौजूद मीनाक्षी लेखी ने विपक्ष की आपत्ति को दरकिनार कर दिया। अजय ने कहा कि जब विपक्ष बजाज का नाम लेकर सरकार पर आरोप लगा रहा है तो वो भी उनका नाम ले सकते हैं। इस दौरान अजय ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि बजाज परिवार की चीनी मिलों पर पिछले 2 साल में गन्ना किसानों का 10,000 करोड़ रुपया बकाया है।
विपक्ष ने राहुल बजाज के समर्थन में ख़ूब हंगामा किया लेकिन मीनाक्षी लेखी ने उन्हें शांत कराते हुए कहा कि सांसद अजय जो कुछ भी बोलेंगे, सदन में आँकड़े रखे जाएँगे और रिकॉर्ड के माध्यम से उसे वेरीफाई किया जाएगा। अजय मिश्र ने विपक्ष को दो टूक जवाब देते हुए कहा कि वो उस क्षेत्र के सांसद हैं और वहाँ के किसानों की समस्याएँ उन्हें अच्छी तरह मालूम हैं। सांसद ने कहा कि मौजूदा सरकार गन्ना किसानों को उनका बकाया दिलवाने की दिशा में सक्रिय है और इसी सख्ती के कारण राहुल बजाज सरकार के ख़िलाफ़ बयान दे रहे हैं। सांसद ने कहा:
“उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री उन चीनी मिलों को लेकर सख्त हैं, जो किसानों का बकाया रुपया नहीं दे रहे हैं। ऐसी चीनी मिलों पर कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में, लखीमपुर के 3 चीनी मिलों के मालिक राहुल बजाज का भयभीत होना स्वाभाविक है। जो भी लोग ग़लत कार्यों से जुड़े हुए हैं, वो सारे भयभीत हैं। उन्हें भयभीत होना भी चाहिए। राहुल बजाज का उन चीनी मिलों के सञ्चालन पर क़रीबी नज़र रखता है और हर तीसरे महीने वहाँ जाता है।”
लोकसभा में सांसद अजय मिश्र ने राहुल बजाज को लेकर किया बड़ा खुलासा
हालाँकि, सदन में कुछ विपक्षी नेताओं ने आपत्ति जताई कि उन चीनी मिलों का सञ्चालन करने वाली कम्पनी का नाम बदल गया है। इसका जवाब देते हुए सांसद ने कहा कि नाम बदल लेने से ग़लत कार्य सही नहीं हो जाते क्योंकि अभी भी राहुल बजाज के बेटे के अंतर्गत ही उन चीनी मिलों को चलाया जा रहा है (हो सकता है कि सांसद ने कुशाग्र को राहुल बजाज का बेटा समझ लिया हो जबकि वो राहुल के भतीजे हैं।)।
बता दें कि ‘बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड (BHSL)’ भारत की प्रमुख चीनी उत्पादक कम्पनी है। पहले इसका नाम ‘हिंदुस्तान शुगर मिल्स लिमिटेड’ था। इसकी स्थापना जमनलाल बजाज ने 1931 में की थी। 1988 में इसका नाम बदला गया। ‘बजाज हिंदुस्तान’ के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कुशाग्र बजाज हैं। वो शिशिर बजाज के बेटे हैं। शिशिर बजाज और राहुल बजाज भाई हैं। अर्थात, कुशाग्र राहुल के भतीजे हैं। यूपी में बजाज की 14 चीनी मिलें हैं।
बजाज समूह वैसे भी किसानों का रुपया दबा कर रखने में अव्वल रहा है। फ़रवरी 2018 में ‘अमर उजाला’ की एक ख़बर में बताया गया था कि बजाज समूह द्वारा भुगतान न किए जाने के कारण किसान तंगहाली से गुज़र रहे हैं। लखीमपुर में बजाज समूह की गोला, पलिया और खंभाड़खेरा चीनी मिलों ने फ़रवरी 2018 तक किसानों का 473 करोड़ रुपया बकाया रखा हुआ था। ‘दैनिक जागरण’ की एक रिपोर्ट में भी बताया गया था कि बजाज द्वारा संचालित तीनों चीनी मिले किसानों के गन्ने ख़रीदने के एवज में भुगतान करने में सबसे ज्यादा फिसड्डी हैं। इस ख़बर के आँकड़ों के अनुसार, तीनों मिलों के पास किसानों का लगभग 800 करोड़ रुपया बकाया है।
कश्मीर में संविधान का अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से अब तक के कालखंड में जिहादी आतंक की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। इस आशय के आँकड़े गृह मंत्रालय ने एक सवाल के जवाब में सदन के पटल पर रखे। गौरतलब है कि इसी साल 5 अगस्त, 2019 को सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करते हुए भारत का पूरा संविधान वहाँ लागू किए जाने की घोषणा की गई थी। इसी के साथ सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र-शासित हिस्सों में भी बाँट दिया था- केंद्र के सीधे और पूर्ण नियंत्रण वाला लद्दाख, और विधानसभा वाला केंद्र-शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर।
मंगलवार को (आज, 3 दिसंबर, 2019 को) लोक सभा में 4 लोक सभा सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने यह जानकारियाँ सदन के पटल पर रखीं।
#BREAKING – Decline in terrorist in Jammu and Kashmir, infiltration attempts on the rise.
88 terror incidents post August 5 and 106 between April and August.
सरकार के मुताबिक 370 हटाए जाने के बाद के 115 दिनों में जिहादियों ने 88 घटनाओं को अंजाम दिया है। यह संख्या 370 हटने के पहले के 115 दिनों (12 अप्रैल, 2019 से 4 अगस्त, 2019 तक) में हुई ऐसी ही 106 घटनाओं के मुकाबले 17% कम है।
MHA in Lok Sabha on Infiltration & attacks after removal of Art 370, in Kashmir: Incidents of terrorist violence declined after 5th August. From 5th August 2019-27th November 2019, there have been 88 such incidents as compared to 106 such incidents from 12 April 2019-4 Aug 2019.
हालाँकि एक चिंताजनक बात ज़रूर निकल कर आई है। गृह मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान ने 5 अगस्त के बाद से भारत में घुसपैठ की कोशिशों में ज़रूर बढ़ोतरी कर दी है। इन 115 दिनों में सरहद पार के जिहादियों ने भारत में घुसपैठ की 84 कोशिशों को अंजाम दिया है, जबकि 5 अगस्त के पहले के 115 दिनों में केवल 53 घुसपैठ की घटनाएँ हुईं थीं।
राहत की बात यह है कि इनमें से अधिकाँश कोशिशों को सुरक्षा बलों ने नाकाम भी कर दिया। घुसपैठ कर पाने में जिहादी 84 में केवल 32 बार ही कामयाब रहे। इसके अलावा सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के चलते मारे गए जिहादियों की संख्या भी इस साल अभी तक 157 है, और अभी लगभग एक महीना इस साल में अभी बचा ही हुआ है।
शिवम विज नाम के एक पत्रकार हैं। खुद को लिबरल थिंकर कहते हैं। शेखर गुप्ता के द प्रिंट के लिए काम करते हैं। लेकिन हकीकत में यह झूठ फ़ैलाने की ज़िम्मेदारी लेकर खुलेआम घूमने वाले शख्स हैं। यह आरोप निराधार नहीं है। क्यों? क्योंकि विज साहब ने कश्मीरी पंडितों पर एक रिपोर्ट लिखी। इस रिपोर्ट में अपना एजेंडा थोपने के लिए उन्होंने अरविन्द गिगू से बातचीत को जबरन डाल दिया। वैसे तो शिवम विज द प्रिंट के कॉन्ट्रीब्यूटिंग एडिटर हैं लेकिन अपने पद को बदनाम करने में अपनी संस्था से भी दो कदम आगे हैं। कश्मीरी पंडितों की अपनी रिपोर्ट में शिवम ने जिस लेक्चरर के हवाले से झूठ फैलाने की कोशिश की, उन्हीं के बेटे सिद्धार्थ ने उसे अपने पिता के नाम से चलाई जा रही उस भ्रामक लाइन को हटाने के लिए कहा है।
This is to state & clarify that this article cites my father, Arvind Gigoo’s quote. The truth is my father NEVER gave this quote. The reporter, Shivam Vij, has lied. Hello @ShekharGupta@ThePrintIndia , please remove my father’s quote from the article and apologize. https://t.co/XtI7hYO33J
फिलहाल तो द प्रिंट के संपादक शेखर गुप्ता ने यह नहीं कहा है कि असफलताओं के लिए खुद को जिम्मेदार मानने की ज़रूरत है, लेकिन 2007 में जब वो इंडियन एक्सप्रेस के साथ थे, तब उन्होंने ये बातें कहीं थीं। उन्होंने अनिल विज के संदर्भ में ये बातें कतई नहीं कही है। वैसे चीजों को तोड़-मरोड़ कर अपने तरीके से गढ़कर पेश करना द प्रिंट की पुरानी आदत रही है। अपनी इस बेशर्मी के लिए उसे लताड़ा भी जाता रहा है। चूँकि द प्रिंट दशकों पुराने उद्धरणों को वर्तमान परिदृश्यों के लिए जिम्मेदार मानता है, इसलिए हमने सोचा कि यह देखना काफी मजेदार होगा कि समय कैसे बदलता है।
शिवम विज के लेख का हिस्सा
बता दें कि शिवम विज ने कश्मीरी पंडितों पर अपनी एक रिपोर्ट में लिखा था, “अरविन्द गिगू कश्मीर के एक रिटायर्ड अंग्रेजी लेक्चरर हैं, जो 1991 के कश्मीर घाटी पलायन में निकलकर जम्मू आ गए और अब वहीं फ्लैट लेकर रहते हैं। उन्होंने कहा कि अब वे यहीं रहते हैं क्योंकि उनके ज़्यादातर दोस्त यहीं हैं। यही कारण है कि वह दिल्ली में अपने बेटे के साथ नहीं रहते। शिवम ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि सालों बाद जब वह श्रीनगर गए तो उन्हें एक बाहरी जैसा महसूस हुआ, वहाँ वे अब किसी को नहीं जानते।”
शिवम विज ने अपने प्रोपेगेंडा को हवा देने के लिए के लिए अरविन्द गिगू के नाम का सहारा लिया और कहा कि उन्होंने जो भी कहा है, वो उनके हवाले से कहा है। हालाँकि अरविन्द गिगू के बेटे सिद्धार्थ गूगू ने इसे सिरे से नकारते हुए, शिवम विज को झूठा करार देते हुए कहा कि उनके पिता ने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया था। सिद्धार्थ ने तो यहाँ तक कह दिया कि उनके पिता ने तो कभी द प्रिंट के साथ बात ही नहीं की है।
सिद्धार्थ गिगू के इस टिप्पणी के बाद शेखर गुप्ता ने शिवम विज द्वारा लिखे गए रिपोर्ट को सही बताते हुए वकालत की। शेखर गुप्ता ने द प्रिंट का नेतृत्व करते हुए दावा किया कि यह बयान सटीक है और 2010 में अरविंद गिगू के साथ विज की मीटिंग से लिया गया है। शिवम विज ने भी इसी तरह का ट्वीट किया। शिवम विज के ट्विटर हैंडल को चेक करने पर उनकी बेशर्मी और भी स्पष्ट हो जाती है।
द प्रिंट ने किया शिवम विज का बचाव
दरअसल द प्रिंट और शिवम विज का सोचना यह है कि एक दशक पुरानी बात, जब समय और परिस्थितियाँ अलग थीं, उस समय की घटनाओं और परिस्थितियों का हवाला देते हुए आज के समय में वो अपने प्रोपेगेंडा को फैलाने में इस्तेमाल कर सकते हैं। द प्रिंट और शिवम विज द्वारा हेकड़ीपन और अक्खड़पने के बेशर्म प्रदर्शन के बाद द प्रिंट ने चुपके से उस पैराग्राफ को बदल दिया जहाँ अरविंद गिगू का हवाला दिया गया था।
शिवम विज की बेशर्मी
शिवम विज ने दावा किया कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में जो जानकारी साझा किया है, वो बिल्कुल सटीक है। उनका कहना है कि यह जानकारी 2010 से 2012 में लिया गया था। यानी कि जिस उद्धरण की वो बात कर रहे हैं, वो लगभग एक दशक पहले का है, जब कश्मीर में आतंकवाद अपने चरम पर था। वहीं जब सिद्दार्थ गिगू, विज से इसको लेकर सवाल किया, तो विज बेशर्मी पर उतर आते हैं और बोलते हैं, “क्या वह पागल हो गया है?”
द प्रिंट के लेख में किया गया बदलाव
द प्रिंट का मानना है कि यह पूरी तरह से उचित है कि 2007 में शेखर गुप्ता के बयान को वर्तमान संदर्भ में, बिना वर्तमान परिस्थिति की परवाह किए इस्तेमाल किया जा सकता है। 2007 में शेखर गुप्ता ने इंडियन एक्सप्रेस के कर्मचारियों को 2751 शब्द का एक ईमेल लिखा था, जिसमें कहा गया था कि समूह खुद को “एक बड़ी छलांग के लिए” तैयार है। इसे एक ईमानदार आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है और हमारी विफलताओं और कमजोरियों को स्वीकार करने की आवश्यकता है। उन्होंने आगे लिखा, “एक साल में जब मीडिया उद्योग में लगभग 25% की वृद्धि हुई है, हमारे राजस्व में 3% की गिरावट आई है। इसका मतलब है कि हम अपने लक्ष्य (लाभ) से पिछड़ रहे हैं।”
शेखर गुप्ता उस समय इंडियन एक्सप्रेस समूह के प्रधान संपादक थे। इस दौरान उन्होंने शीर्ष प्रबंधन टीम के सदस्यों से उस वर्ष के लिए वेतन फ्रीज करने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि वो मार्केट में पिछड़ रहे हैं। इसलिए उन्होंने खुद भी वेतन के एक महत्वपूर्ण हिस्से को तब तक न लेने का फैसला किया है जब तक कि वो इसमें कुछ वास्तविक सुधार नहीं देखते।
शेखर गुप्ता और उनके वर्तमान मीडिया हाउस द प्रिंट, गलतियों को स्वीकार न करने के बहुत ही बेशर्म हो गया है। हमारे विचार से द प्रिंट के संपादकीय मानकों को देखते हुए शिवज विज द्वारा किए गए बेहूदगी को आज आसानी से शेखर गुप्ता को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा की सुरक्षा में हुई तथाकथित चूक के बारे में न्यूज़ चैनल टाइम्स नाउ ने हैरतअंगेज़ खुलासा किया है। अंग्रेजी समाचार चैनल के दावे के अनुसार यह पूरा प्रकरण जानबूझकर किया गया ड्रामा प्रतीत हो रहा है। क्योंकि जिस गाड़ी के प्रियंका के घर में ‘घुस आने’ को उन्हें मिली ज़ेड प्लस सुरक्षा की खामी बताया जा रहा है, उस गाड़ी में बैठी महिला को प्रियंका के ही निजी सचिव ने मिलने का समय दिया था। और तो और वो महिला कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुकीं हैं।
गौरतलब है कि प्रियंका गाँधी वाड्रा को कुछ दिन पहले तक पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की बेटी होने और राजीव गाँधी की हत्या किए जाने के चलते हाई-रिस्क सिक्योरिटी वाला व्यक्ति मानते हुए एसपीजी सुरक्षा मिली हुई थी। आम तौर पर यह सुरक्षा कवच केवल तत्कालीन प्रधानमन्त्री को मुहैया कराई जाता है। हाल ही में मोदी सरकार के गृह मंत्री अमित शाह ने एसपीजी एक्ट को संशोधित करने का प्रस्ताव संसद में पेश किया है, जिसके तहत इसे फिर से केवल वर्तमान प्रधानमंत्री की सुरक्षा वाला बिल बना दिया जाएगा। यह बिल लोक सभा से पारित हो चुका है, और इसे राज्य सभा में पेश किया जाना है।
इसी के साथ गृह मंत्रालय की सुरक्षा आकलन समिति ने प्रियंका गाँधी, कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी और पार्टी अध्यक्षा सोनिया गाँधी की सुरक्षा का दर्जा बदलकर ज़ेड प्लस कर दिया था। इसी के बाद कल (2 दिसंबर, 2019, सोमवार को) कॉन्ग्रेस ने अचानक दावा करना शुरू कर दिया था कि एसपीजी से ज़ेड प्लस सुरक्षा हो जाने के बाद प्रियंका के घर में एक परिवार अनाधिकारिक तरीके से घुस आया था।
लेकिन आज टाइम्स नाउ की तहकीकात में कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से घुसने वाली एसयूवी गाड़ी के मालिक चंद्रशेखर त्यागी ने दावा किया है कि वे और उनकी बहन गरिमा त्यागी समय लेकर प्रियंका गाँधी से मिलने पहुँचे थे। यही नहीं, उनकी बहन गरिमा त्यागी कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुकीं हैं, और पूरा परिवार कॉन्ग्रेस और गाँधी परिवार का वफ़ादार रहा है।
#Exclusive | TIMES NOW investigates the alleged ‘breach’ in @priyankagandhi’s security. The car owner & the occupant have been tracked down.
चंद्रशेखर त्यागी की टाइम्स नाउ के साथ बातचीत को सुनें तो उसमें उस समय (जब त्यागी परिवार प्रियंका से मिलने पहुँचा था) तो किसी तरह की नाराज़गी भी नहीं जताई गई थी। केवल प्रियंका ने दो दिन बाद आने का समय लेने के लिए कहा क्योंकि उस समय वे कहीं जा रहीं थीं।
इस पूरे मामले में ‘चूक’ जैसा कुछ रहा तो केवल यह कि सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ़ के सुरक्षाकर्मियों ने त्यागी परिवार की गाड़ी की तलाशी नहीं ली। लेकिन जिस तरह का मसला कॉन्ग्रेस इसे बना रही है, कि प्रियंका की सुरक्षा एसपीजी कवर जाने से खतरे में पड़ गई है, कोई भी, कैसे भी उनके दरवाज़े पहुँच सकता है, वैसी कोई भी चीज़ इस घटना में देखने को नहीं मिली है।
महाराष्ट्र में सरकार का गठन हो जाने के बाद जिस अगले बड़े विधानसभा चुनाव पर देश की नज़रें टिकीं हैं, वह है झारखण्ड। बिहार से अलग होकर पिछले दशक के शुरुआती वर्षों में अलग राज्य का दर्जा पाने वाले इस सूबे में पिछले 5 सालों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, और मुख्यमंत्री की नियुक्ति में भाजपा नेतृत्व ने राज्य की लीक तोड़कर एक गैर-आदिवासी रघुबर दास को ज़िम्मेदारी सौंपी थी। और आज उनके पाँच साल के कामकाज को चुनौती देने के लिए कॉन्ग्रेस ने जिस विधानसभा प्रत्याशियों की ‘फ़ौज’ को टिकट थमाया है, उनमें से दूसरे दौर के चुनाव में जा रहे दो तिहाई (67%) ‘दागी’ हैं– यानि कि उन पर किसी न किसी किस्म के आपराधिक कृत्य के मामले विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।
राज्य में दूसरे दौर का चुनाव आगामी रविवार (7 दिसंबर, 2019) को होने हैं। पहले दौर के चुनाव 30 नवंबर, 2019 को हुए थे। 23 दिसंबर को मतगणना के बाद 5 चरणों के चुनाव का नतीजा 26 दिसंबर, 2019 को आएगा।
राजनीतिक दलों की शुचिता पर नज़र रखने वाली गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के अनुसार इस चरण के प्रत्याशियों में कुल 26% दागी हैं, जिनमें से 17% के खिलाफ लंबित मामले गम्भीर प्रकृति के हैं। इस दूसरे चरण में औद्योगिक नगरी जमशेदपुर की दो सीटों समेत 20 सीटों पर 260 प्रत्याशी चुनाव में खड़े हैं।
पार्टीवार बात करें तो कॉन्ग्रेस के प्रत्याशियों में 67%, पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 50%, ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के 42% प्रत्याशी दागी हैं। भाजपा और झारखण्ड विकास मोर्चा-प्रजातान्त्रिक (झाविमो-पी) के महज़ 40-40% प्रत्याशी मुकदमों का सामना कर रहे हैं। गंभीर अपराधों की भी बात करें कॉन्ग्रेस 50% के साथ चोटी पर है, और भाजपा 25% के साथ नीचे से दूसरे पायदान पर है। यह आँकड़े इन प्रत्याशियों द्वारा ही दाखिल हलफ़नामे के मुताबिक हैं।
दागी प्रत्याशियों में से 8 के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास के मुकदमे चल रहे हैं। 4 के खिलाफ हत्या के भी मुकदमे हैं। 3 ऐसे भी प्रत्याशी कानून बनाने वाले बनने के इच्छुक हैं जिनको अदालतें कानून तोड़ने के आरोप में दोषी पा चुकी हैं।
नक्सलवाद से पीड़ित झारखण्ड में भाजपा की सरकार दिसंबर, 2014 में 81 में से 37 सीटें जीतकर बनी थी। झाविमो के 6 के 6 विधायकों ने 11 फरवरी 2015 को सरकार बनने के कुछ ही समय बाद भाजपा की सदस्यता ले ली थी।