Home Blog Page 5271

न त्वहं कामये राज्यं: ‘गीता जयंती’ में नहीं पहुँचे BHU के कुलपति, परीक्षा का बहिष्कार करेंगे ‘धर्म संकाय’ के छात्र

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में संस्कृत धर्म विज्ञान संकाय में फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अभी तक थमने का नाम नहीं ले रहा है। विश्यविद्यालय प्रशासन ने भले ही मामले को ढकने के लिए तमाम प्रयास किए हों, छात्रों का विरोध-प्रदर्शन अनवरत जारी है। रविवार (दिसंबर 8, 2019) को संकाय के छात्रों ने इस उपलक्ष्य में गीता पाठ का आयोजन किया। छात्रों ने बताया कि बीएचयू के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय प्रत्येक रविवार को गीता का विशेष रूप से प्रवचन किया करते थे। इसकी परम्परा धर्म विज्ञान संकाय आज भी निभा रहा है। प्रत्येक रविवार को मालवीय भवन में गीता प्रवचन अभी भी अनवरत होता चला आ रहा है। संयोग से आज गीता जयंती के साथ रविवार भी है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर राकेश भटनागर रविवार को भी गीता जयंती के अवसर पर पूर्व निर्धारित गीता जयंती महोत्सव’ में नहीं पहुँचे। छात्रों का आरोप है कि हिन्दू धर्म से जुड़े कार्यक्रमों से दूरी बना कर रखने वाले कुलपति ने यह पहली बार नहीं किया है बल्कि अपनी नियुक्ति के समय से ही वह मालवीय भवन से दूरी बनाए हुए हैं। और ऐसे में उनसे मालवीय मूल्यों की रक्षा की उम्मीद रखना बेमानी है।

हालाँकि, अंतिम समय में गीता जयंती के कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के रेक्टर शामिल हुए और कुलपति पास के ही होलकर भवन में व्यस्त रहे। प्रशासन ने जिसकी सूचना आज ही ट्वीट के माध्यम से दी। छात्रों ने कहा गीता जयंती की अध्यक्षता कुलपति की जगह रेक्टर वी. के. शुक्ला ने की। जबकि मालवीय भवन जहाँ गीता जयंती समारोह मनाया जा रहा था वहाँ से चंद कदम की ही दूरी पर कुलपति जी नियुक्तियों के लिए साक्षात्कार लेने में व्यस्त रहे। दिल्ली में कार्यपरिषद की बैठक से आने के बाद रविवार होने पर भी साक्षात्कार कराना तो याद रहा पर 1 महीने से आंदोलन कर रहे छात्रों की माँगों पर कुछ बोलना भी उचित नहीं समझा, कार्यवाही तो दूर की बात रही।

वहीं अगर आज की बात करें तो संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में पिछले एक महीने से चल रहे आंदोलन में धर्म व मालवीय मूल्यों के रक्षार्थ गीता जयंती के अवसर पर भगवद्गीता का पाठ किया गया व साथ ही भजन कीर्तन भी किया गया। गीता पाठ कार्यक्रम में उपस्थित संकाय के पूर्व छात्र डॉ. मुनीश कुमार मिश्र ने बताया कि महामना जी को गीता का ग्रंथ सबसे प्रिय था। वह प्रतिदिन गीता का पाठ किया करते थे व रविवार को गीता पर स्वयं ही प्रवचन करते थे, जिसको सुनने के लिए विश्वविद्यालय ही नहीं दूर-दूर से विद्वतजनों का आगमन होता था। आज भी धर्म विज्ञान संकाय के द्वारा वह परंपरा मालवीय भवन में संचालित की जा रही है।

आंदोलनरत छात्रों ने बताया कि महामना को जैसे गीता प्रिय थी, उसी तरह धर्म विज्ञान संकाय भी प्रिय था। छात्रों ने आगे कहा कि उनके द्वारा धर्म की रक्षा के लिए जो आंदोलन किया जा रहा है, उसमें कहीं न कहीं महामना की ही प्रेरणा है। महामना गीता के इस श्लोक को बार-बार दोहराया करते थे:

न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं नापुनर्भवम् ।
कामये दुःखतप्तानां प्राणिनामार्तिनाशनम् ॥

भावार्थ: हे प्रभु! मुझे राज्य की कामना नही, स्वर्ग-सुख की चाह नही तथा मुक्ति की भी इच्छा नही। एकमात्र इच्छा यही है कि दुख से संतप्त प्राणियों का कष्ट समाप्त हो जाये।

धर्म संकाय के छात्रों ने विश्वास जताया कि महामना ने अगर आंदोलन के लिए प्रेरित किया है तो उनकी ही प्रेरणा से इसका उचित समाधान अवश्य ही मिलेगा। प्रदर्शनकारी छात्र शुभम तिवारी ने कहा कि अगर सोमवार तक छात्रों की बात नहीं मानी जाती है तो 10 दिसम्बर से होने वाली सेमेस्टर परीक्षा का बहिष्कार किया जाएगा। आंदोलन के नेतृत्व कर रहे छात्र चक्रपाणि ओझा ने कहा:

“जल्द ही आंदोलन को बड़ा रूप दिया जाएगा। हम शांत हैं तो तो प्रशासन ये न समझे कि चुप हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन हमें हल्के में न ले। हमारी माँगें जल्द मानी जाए अन्यथा हम सभी छात्र बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”

शुभम तिवारी ने कहा कि अगर सोमवार तक हमारी बात नहीं मानी जाती है तो छात्र 10 दिसम्बर से होने वाली सेमेस्टर परीक्षा का बहिष्कार करेंगे। धरनारत छात्रों में अभिषेक, धीरज मिश्र, शशिकांत मिश्र, प्रिंस, प्रशांत चतुर्वेदी, आनंद मोहन झा, कृष्ण कुमार सहित कई अन्य छात्र भी उपस्थित रहे।

इससे पहले छात्रों ने आरोप लगाया कि फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति के लिए उन्हें विशेषाधिकार के तहत हर जगह जबरदस्ती टॉप कराया गया। ऐसा यह सिद्ध करने के लिए किया गया कि वो 100% योग्य हैं। छात्रों का आरोप है कि इसी कारण उन्हें 10 में 10 नम्बर दिया गया था। बीएचयू प्रशासन की हठधर्मिता को उजागर करते हुए छात्रों ने कहा कि ग़लती सुधारने की बजाय यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि जो चयन समिति ने किया वहीं ठीक था।

ये भी पढ़ें:

BHU प्रशासन का सफ़ेद झूठ: क्या VC गैर-हिन्दुओं से जुड़े इन ‘संवैधानिक बिंदुओं’ का जवाब दे पाएँगे?

BHU में अगर गैर हिन्दू कुलपति नहीं हो सकता तो ‘धर्म विज्ञान संकाय’ में ही बदलाव क्यों: छात्रों ने पूछे कई गंभीर सवाल

फिरोज खान काण्ड पर तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा उठाए गए हर प्रश्न का BHU के विद्वानों ने दिया उत्तर

अगर वीसी ने धर्म संकाय में नियुक्ति नियमों का ध्यान रखा होता तो BHU की बदनामी नहीं होती: प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी

सुबह 43 परिवार उजड़ गए, शाम को ‘बधाई’ कार्यक्रम में दिखे दिल्ली के CM केजरीवाल

नॉर्थ दिल्ली की अनाज मंडी में भीषण आग लगने के कारण रविवार (दिसंबर 8, 2019) की सुबह 43 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे, और इधर उसी दिन मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल शाम को ‘बधाई कार्यक्रम’ में शामिल हुए। दिल्ली की इस त्रासदी के बाद जहाँ दिल्ली भाजपा और आम आदमी पार्टी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में लगी है। आप सुप्रीमो अरविन्द केजरीवाल से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने इस घटना को लेकर शोक जताया। अस्पतालों में अभी भी अपने करीबियों का हालचाल जानने के लिए लोग पहुँच रहे हैं। परिजनों को बुला कर लाशों की पहचान कराई जा रही है।

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि जहाँ एक तरफ पूरी दिल्ली मातम में डूबी है, 43 परिवार उजड़ गए और कई लोग घायल हैं, दिल्ली के मुख्यमंत्री जी ‘बधाई तिमारपुर’ कार्यक्रम कर रहे हैं। तिवारी ने केजरीवाल से पूछा कि वो इतने संवेदन शून्य कैसे हो सकते हैं? रिहायशी इलाक़े की अवैध फैक्ट्री में लगी आग के बाद उस फैक्ट्री के मालिक रेहान को गिरफ़्तार कर लिया गया है। वो फरार हो गया था लेकिन पुलिस ने उसे धर-दबोचा, जिसके बाद उससे पूछताछ की गई।

दरअसल, तिमारपुर में सीवर लाइन प्रोजेक्ट का उद्घाटन होना था, जिसमें केजरीवाल शामिल हुए। भाजपा ने इसे लेकर आपत्ति जताई। पार्टी ने कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी के दिन मुख्यमंत्री को शोक-संतप्त परिजनों को ढाँढस बँधाना चाहिए था लेकिन वो जश्न में मशगूल हैं। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा;

“निगम द्वारा कोई भी लाइसेंस नहीं दिया गया है। केजरीवाल ये बताएँ कि फैक्ट्री चलाने वाला रेहान कौन है, जिसे वहाँ के विधायक का संरक्षण प्राप्त है? हम इसकी उच्च स्तरीय जाँच की माँग करते हैं।”

मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। राज्य के गृहमंत्री सत्येंद्र जैन भी घटनास्थल पर पहुँचे। दिल्ली सरकार और एमसीडी के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह चर्चा चल रही है कि दिल्ली में ऐसी कई अनाधिकृत कॉलोनियाँ व फैक्ट्रियाँ हैं, जहाँ ऐसी त्रासदी हो सकती है। उन्हें समय रहते रोका जाना चाहिए।

जिसने राफेल को सुप्रीम कोर्ट में घसीटा, अपने उस बीमार आलोचक का हाल जानने पहुँचे PM मोदी

इस वर्ष हुए लोकसभा चुनाव में राफेल सबसे बड़ा मुद्दा बना था। मोदी सरकार के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट से लेकर चुनावी रैलियों तक, हर जगह माहौल बनाने की कोशिश की गई थी। इसमें सबसे प्रमुख नाम भाजपा के ही दो पूर्व दिग्गजों का था। पूर्व केंद्रीय मंत्रीगण अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा मोदी सरकार के सबसे प्रखर आलोचकों में से एक बन गए थे। इन दोनों को मीडिया के तमाम प्रोपेगंडा पोर्टल्स में जगह मिली और उनके बयानों को रोज़ाना प्रकाशित किया जाने लगा। आज जब वही अरुण शौरी बीमार पड़े तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुणे पहुँच कर अपने पुराने साथी का हालचाल लिया।

अरुण शौरी एक सप्ताह पहले हॉस्पीटलाइज्ड हो गए थे। उन्हें पुणे के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 78 वर्षीय वरिष्ठ नेता रात को अचानक से गिर पड़े थे, जिसके बाद परिवार आनन-फानन में उन्हें लेकर अस्पताल पहुँचा। डॉक्टरों ने विभिन्न टेस्ट करने के बाद कहा था कि उनकी हालत स्थिर है। रविवार (दिसंबर 8, 2019) को उनसे मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साथ तस्वीरें साझा की। पीएम ने लिखा कि उन्होंने अरुण शौरी के स्वास्थ्य की जानकारी ली। साथ ही उन्होंने बताया कि शौरी से बातचीत काफ़ी अच्छी रही।

ये वही अरुण शौरी हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले को ही त्रुटिपूर्ण करार दिया था, जिसमें मोदी सरकार को राफेल मामले में क्लीनचिट दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी उन्होंने समीक्षा याचिका दायर की थी और अधिकारियों पर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगा कर उनके ख़िलाफ़ भी याचिका दाखिल की थी। मोदी के प्रखर आलोचक रहे अरुण शौरी रविवार को पीएम से मुलाक़ात के दौरान काफ़ी ख़ुश नज़र आए। लेकिन कुछ ही महीनों पहले तक शौरी, प्रशांत भूषण और यशवंत सिन्हा के साथ मिल कर नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे थे।

अरुण शौरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कारोबारी अनिल अम्बानी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई किए जाने की माँग की थी। उनका आरोप था कि वो सुप्रीम कोर्ट जाने को इसीलिए मजबूर हुए क्योंकि सीबीआई सरकारी दबाव के कारण मामला दर्ज नहीं कर रही थी।

तिलक लगा कर गर्लफ्रेंड के साथ लंदन के मंदिर पहुँचे ब्रिटिश PM, कहा- मोदी बना रहे हैं New India

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन शनिवार (दिसंबर 7, 2019) को लंदन में स्थित एक हिन्दू मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुँचे। यूके के पीएम ने प्रमुख स्वामी महाराज के 98वें जन्मदिवस के अवसर पर लंदन के स्वामीनारायण मंदिर में दर्शन किया और भारतीय समुदाय को सम्बोधित भी किया। उन्होंने ब्रिटेन में भारत-विरोधी और हिन्दू-विरोधी भावनाओं पर लगाम लगाने का आश्वासन देते हुए कहा कि उनके देश में रेसिज्म के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश-भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने विश्वास दिलाया कि ब्रिटेन में पूर्वाग्रह और भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि मात्र 2% भारतीय समुदाय ब्रिटेन की जीडीपी में 6.5% से भी अधिक का योगदान देता है। उन्होंने वीजा के लिए यूरोपियन यूनियन को प्राथमिकता देने सम्बन्धी नियम-क़ायदों को बदलने की भी बात कही। जॉनसन अपनी गर्लफ्रेंड कैरी सायमंड्स के साथ मंदिर पहुँचे। उन्होंने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिल कर नए भारत के निर्माण की दिशा में काम करना चाहते हैं। गुरुवार को यूके में आम चुनाव होने हैं और ऐसे में भारतीय समुदाय के वोट अहम माने जा रहे हैं।

इंग्लैंड का सबसे लोकप्रिय स्वामीनारायण मंदिर उत्तर-पश्चिम लंदन के नास्डेन में स्थित है। 55 वर्षीय ब्रिटिश पीएम ने कहा कि उन्हें पता है कि पीएम मोदी एक नया भारत बना रहे हैं। जॉनसन ने कहा कि उनकी सरकार मोदी के इस कार्य में पूर्ण सहयोग देगी। ओपिनियन पोल्स में जॉनसन की कंजर्वेटिव पार्टी बाकी दलों से आगे चल रही है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से भारत के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने वाले लेबर पार्टी के नेताओं को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि पूर्व में उनकी पार्टी की जीत में भारतीय समुदाय का अहम योगदान रहा है।

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने ये बात पीएम मोदी को बताई तो उन्होंने हँस कर कहा कि भारतीय हमेशा विजेता के पक्ष में ही होते हैं। बोरिस जॉनसन ने इस दौरान फूल-माला पहनी और माथे पर तिलक भी धारण किया। स्वामीनारायण मंदिर के बारे में उन्होंने कहा कि ये ब्रिटेन को हिन्दू समुदाय की तरफ़ से दी गई सबसे अमूल्य भेंट है। उन्होंने कहा कि चैरिटी करने में अव्वल इस मंदिर के होने से लंदन और यूके भाग्यशाली है। इस दौरान यूके की गृह सचिव प्रीति पटेल भी उपस्थित रहीं। उन्होंने साड़ी पहन रखी थी।

प्रमुख स्वामी महाराज स्वामीनारायण संस्था के अध्यक्ष हैं। आज इस संस्था के मंदिर कई देशों में हैं और अच्छी कार्यों की वजह से कई देशों की सरकारों ने इसकी प्रशंसा भी की है।

मुस्लिम महिला ने धर्म परिवर्तन कर मंदिर में की शादी, परिजन दे रहे हैं दम्पति को ज़िंदा जलाने की धमकी

उत्तर प्रदेश के मेरठ में शनिवार (7 दिसंबर) को एक नव दंपति ने एसएसपी दफ़्तर में जाकर मदद की गुहार लगाई। नव विवाहिता (जो पहले मुस्लिम थी) ने पुलिस को बताया कि उसने अपना धर्म बदलकर आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली थी। लेकिन अब युवती के परिजन उन्हें कभी ज़िंदा जलाने की धमकी दे रहे हैं, तो कहीं हत्या करने की बात कह रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी क्राइम ने प्रेमी युगल को सुरक्षा देने के लिए इंस्पेक्टर दौराला को निर्देश दिए हैं।

ख़बर के अनुसार, दौराला क्षेत्र के शाहपुर जदीद गाँव में रहने वाले आबिद अली की बेटी 14 अप्रैल को घर छोड़कर चली गई थी। इसके बाद परिजनों ने थाना दौराला में युवती की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। उधर, युवती का कहना था कि उसने 22 अप्रैल को गाँव के अनुजपाल से आर्य समाज मंदिर में देवबंद में धर्म परिवर्तन कर शादी कर ली थी। इसके बाद युवती ने कोर्ट में पेश होकर अपने बयान भी दर्ज करा दिए थे। इसके बाद, कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने युवती को उसके पति के साथ भेज दिया, उसके बाद से ही दोनों एक किराए के मकान में रहने लगे।

मामला तब पुलिस की चौखट पर पहुँचा जब युवती के परिजनों ने उन्हें मारने की धमकी देने लगे। युवती ने पुलिस को बताया कि वो बालिग है और अपने पति के साथ उसके गाँव में ही रहना चाहती है, लेकिन गाँव में घुसने पर उनकी जान को ख़तरा है। इस बात का भी पता चला है कि एक सप्ताह पहले युवती के परिजनों ने दोनों का अपहरण करने की भी कोशिश की थी। युवती ने एसपी क्राइम को अपनी शिक़ायत में बताया कि उनके अब्बू ने गाँव में अन्य लोगों के साथ मिलकर पंचायत की, जिसमें यह तय किया है कि अगर उन्होंने (दंपति) गाँव में पैर रखा तो उनकी हत्या कर दी जाएगी।

एसपी क्राइम रामअर्ज़ ने दौराला थाना पुलिस को दंपति को सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने दंपति को मदद और पूरी सुरक्षा मुहैया कराने का भरोसा दिलाया है।

मराठा आंदोलन में हिंसा करने वालों की बल्ले-बल्ले: 3000 लोगों के ख़िलाफ़ केस वापस लेगी ठाकरे सरकार

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार एक के बाद एक देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्रित्व काल में हुए फ़ैसलों को पलटने में लगी हुई है। आरे जंगल में मेट्रो शेड प्रोजेक्ट को रोक दिया गया। भीमा-कोरेगाँव हिंसा भड़काने वालों के ख़िलाफ़ मामला वापस लिया जा रहा है। अब शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बड़े वर्ग को ख़ुश करने के लिए मराठा आंदोलन में हिंसा फैलाने के आरोपितों के ख़िलाफ़ चल रहे मामलों को ख़त्म करने का निर्णय लिया है। मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर 3000 लोगों के ख़िलाफ़ अदालतों में 288 मामले चल रहे हैं, जिसे सरकार वापस ले लेगी।

इससे पहले उद्धव ठाकरे की सरकार ने आरे जंगल में पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया था। इसी तरह ननर ऑइल रिफाइनरी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों के विरुद्ध चल रहे मामलों को भी ख़त्म करने का फ़ैसला लिया गया। ये आंदोलन जनवरी 2018 में रत्नागिरी में हुआ था। किसान आंदोलन के दौरान जिन्होंने हिंसा फैलाई, उनके ख़िलाफ़ चल रहे मामले भी ख़त्म होंगे। मराठा आंदोलन से जुड़े 3 मामले दस्तावेजों की अनुपलब्धता की वजह से लंबित रहेंगे।

इनमें से 35 केस ऐसे भी हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला किया और उन्हें क्षति पहुँचाई। सरकार के ख़िलाफ़ ऐसी मामलों में सबूत भी हैं। इन मामलों को त्वरित रूप से वापस नहीं लिया जा सकता क्योंकि इन प्रदर्शनकारियों ने 5 लाख रुपए से भी अधिक की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया था। इन प्रदर्शनों में सरकारी अधिकारियों और पुलिसबलों पर हमले किए गए थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई आन्दोलनों में हिंसा फैलाने वालों के ख़िलाफ़ चल रहे मामले वापस लिए जा रहे हैं।

आरे जंगल में मेट्रो प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ चल रहे मामलों में 29 लोगों के विरुद्ध दर्ज विभिन्न केस वापस लिए गए। महाराष्ट्र के गृह मंत्रालय ने उन सभी मामलों के विवरण मँगाए हैं, जिन्हें वापस लिया जाना है। बुधवार (दिसंबर 4, 2019) को हुई उद्धव कैबिनेट की बैठक में ही ये फ़ैसला ले लिया गया था कि विभिन्न आन्दोलनों में कई लोगों के ख़िलाफ़ चल रहे अदालती केस वापस ले लिए जाएँगे। हालाँकि, जिन मामलों में पुलिस के पास सीसीटीवी फुटेज जैसे मजबूत साक्ष्य हैं, उन्हें वापस नहीं लिया जा सकता।

ज़िंदा जलाने की धमकी देने वाले कॉन्ग्रेस MLA के ख़िलाफ़ ‘सत्याग्रह’ पर बैठीं साध्वी प्रज्ञा, मंत्री ने बताया नौटंकी

कॉन्ग्रेस के विधायक ने भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को ज़िंदा जला देने की धमकी दी थी। विधायक गोवर्धन दांगी के ख़िलाफ़ पुलिस में मामला दर्ज कराने पहुँचीं साध्वी प्रज्ञा धरने पर बैठ गई हैं। उनका आरोप है कि पुलिस कॉन्ग्रेस विधायक के ख़िलाफ़ मामला नहीं दर्ज कर रही है। विधायक ने कहा था कि वो सिर्फ़ पुतले ही नहीं जलाएँगे बल्कि साध्वी प्रज्ञा अगर राजगढ़ आती हैं तो उन्हें ही ज़िंदा जला देंगे। अब साध्वी प्रज्ञा ने आरोप लगाया है कि पुलिस कॉन्ग्रेस सरकार के दबाव के कारण मामला दर्ज नहीं कर रही है।

संसद में साध्वी प्रज्ञा द्वारा नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने की ख़बर आई थी, जिसके बाद विधायक दांगी ने आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए धमकी दी थी। साध्वी प्रज्ञा ने शनिवार को भी कमला नगर पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया था। अधिकारियों ने साध्वी प्रज्ञा से लिखित शिकायत की माँग की, लेकिन साध्वी की ज़िद थी कि बिना आवेदन के पहले एफआईआर दर्ज की जाए। इसके बाद पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी तीखी नोक-झोंक हुई। हालाँकि, शनिवार (दिसंबर 7, 2019) को महिलाओं के सम्मान की लड़ाई जारी रखने की बात कह साध्वी ने धरना ख़त्म कर दिया था।

रविवार को भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा फिर से धरने पर बैठीं। कमलनाथ के मंत्री पीसी शर्मा ने साध्वी प्रज्ञा के धरने की तुलना ‘एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी’ वाले कहावत से की है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोडसे को महिमामंडित करने के कारण ही साध्वी प्रज्ञा को रक्षा सम्बन्धी संसदीय समिति में शामिल किया गया था। उन्होंने साध्वी के धरने को ‘नौटंकी’ बताते हुए कहा कि उन्हें भोपाल की जगह दिल्ली में धरने पर बैठना चाहिए। वहीं साध्वी प्रज्ञा ने अपने धरने को ‘सत्याग्रह’ का नाम दिया है।

इससे पहले कॉन्ग्रेस मंत्री के ज़िंदा जलाने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए साध्वी प्रज्ञा ने कहा था कि कॉन्ग्रेसियों को ज़िंदा जलाने का पुराना अनुभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने 1984 में सिखों को जलाया और नैना साहनी को तंदूर में जलाया। साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने उन्हें आतंकी बताया है और उनके विधायक उन्हें ज़िंदा जलाने की धमकी दे रहे हैं।

‘सबसे बड़ा रेपिस्ट था नेहरू, उसके ही खानदान की देन है बलात्कार, आतंकवाद और नक्सलवाद’

विश्व हिन्दू परिषद की नेता साध्वी प्राची ने मेरठ के एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि नक्सलवाद, आतंकवाद, बलात्कार यह सब नेहरू खानदान की देन है। उन्होंने कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ भी मोर्चा खोला। दरअसल, राहुल गाँधी ने हाल ही में हैदराबाद और उन्नाव के गैंगरेप पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि भारत रेप कैपिटल में विकसित हो रहा है, उनके इसी बयान पर साध्वी प्राची ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “सबसे बड़ा रेपिस्ट तो नेहरू था।”

ख़बर के अनुसार, साध्वी प्राची ने केवल राहुल गाँधी पर ही नहीं बल्कि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब अखिलेश सत्ता पर आसीन होते हैं तो वो बलात्कारियों को बचाते हैं और जब वो विपक्ष में होते हैं तो धरने पर बैठते हैं। बता दें कि शनिवार (7 दिसंबर) को सपा नेता अखिलेश यादव उन्नाव रेप कांड के ख़िलाफ़ विधानसभा के बाहर धरने पर बैठे थे।

वहीं, VHP नेता साध्वी प्राची ने हैदराबाद गैंगरेप के आरोपितों के एनकाउंटर पर हैदराबाद पुलिस की तारीफ़ की। इस दौरान उन्होंने कहा कि जैसा हैदराबाद पुलिस ने किया उससे सीख लेकर यूपी पुलिस को भी उन्नाव कांड पर ऐसी ही कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने उन्नाव गैंगरेप के सभी आरोपितों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की माँग भी की।

इससे पहले साध्वी प्राची ने उन्नाव गैंगरेप पीड़िता की मृत्यु के बाद कहा था कि आरोपितों को ऑन स्पॉट सज़ा दिए जाने की आवश्यकता है। मालूम हो कि साल भर पहले शुभम और शिवम त्रिवेदी ने पीड़िता का अपहरण करने बाद उसके साथ गैंगरेप किया था। मार्च 2019 में पुलिस ने केस दर्ज किया। 30 नवम्बर को इन्हें बेल मिली। गुरुवार (5 दिसंबर) को जब पीड़िता रायबरेली कोर्ट जा रही थीं, तब शिवम और शुभम के अलावा हरिशंकर त्रिवेदी, राम किशोर त्रिवेदी और उमेश बाजपाई ने उन्हें पीटा, चाकुओं से गोदा और फिर तेल उड़ेल कर आग लगा दी।

पीड़िता को गुरुवार (5 दिसंबर) की शाम को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। अस्पताल ने तभी कहा था, “अगले 24-48 घंटे उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अभी वेंटिलेटर पर रखा गया है। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। उनका शरीर 90 प्रतिशत तक जल गया है, शरीर पर काफी चोटें हैं।” लेकिन डॉक्टरों की पूरी कोशिश के बावजूद उन्नाव की यह बेटी अपने साथ हुए जघन्य अपराध के दोषियों को सजा मिलते देख पाने की ख्वाहिश लिए इस दुनिया से चली गईं।

यह भी पढ़ें:

₹25 लाख, 2 मकान, लाइसेंसी हथियार, नौकरी, 24 घंटे सुरक्षा: सरकार ने मानी पीड़ित परिवार की सभी माँगें

…एक और ‘प्रीति रेड्डी’, उन्नाव में गैंगरेप पीड़िता पर लाठी-डंडे-चाकू से वार, केरोसिन डाल जलाया ज़िंदा

उन्नाव की बेटी भी मर गई, कल ये 5 भी एनकाउंटर में मारे जाएँ तो समाज जश्न क्यों न मनाए?

मारे गए सभी आरोपित: पुलिस ने वहीं किया एनकाउंटर, जहाँ ‘प्रीति रेड्डी’ के साथ किया था जघन्य अपराध

हैदराबाद एनकाउंटर: आरिफ ने पुलिस से छीने थे हथियार, कर्नाटक में भी अपराधों को अंजाम दे चुके थे प्रीति रेड्डी के गुनहगार

आरिफ ने ‘प्रीति रेड्डी’ का मुँह-नाक दबाया, उसी ने डेड बॉडी पर पेट्रोल डाला: पुलिस की रिपोर्ट में भयावह खुलासे

43 की मौत के बाद फैक्ट्री मालिक रेहान के ख़िलाफ़ FIR दर्ज, पुलिस ने किया गिरफ्तार, पूछताछ जारी

रविवार को दिल्ली की अनाज मंडी इलाक़े में तड़के एक सामान बनाने वाली फैक्ट्री में आग लगने से 43 लोगों की मौत हो गई। इस घटना के संबंध में एक FIR दर्ज की गई है और मामले को आगे की जाँच के लिए अपराध शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया है। खबर के अनुसार फैक्ट्री मालिक रेहान को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

ख़बर के अनुसार, प्लॉट के मालिक मोहम्मद रहीम हैं, जिन्होंने इसे दस साल पहले ख़रीदा था। बाद में, उन्होंने इसे अपने तीन बेटों: रेहान, शान ई-लाही और इमरान के बीच समान रूप से बाँट दिया था। आज सुबह जो आग लगी थी वो रेहान के कारखाने के हिस्से में लगी थी। अब, कारखाने के मालिक के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 304 (10 साल की अधिकतम कारावास के साथ ग़ैरइरादन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

दिल्ली पुलिस पीआरओ एमएस रंधावा ने कहा,

“आईपीसी की धारा 304 के तहत FIR दर्ज की गई है। मामला अब क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है। सुबह 5.22 बजे एक इमारत में आग लगने की सूचना पुलिस को मिली थी। आग बुझाने के लिए फायर टेंडरों को मौके पर भेजा गया। बचाव अभियान में, हमने लगभग 60 लोगों को बचाया लेकिन दुर्भाग्य से 43 लोगों ने अपनी जान गँवा दी।”

उन्होंने कहा, “आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। आग लगने के बाद उठे धुएँ के कारण परिसर में बहुत सारा प्लास्टिक था। अधिकतर मौतें धुएँ के कारण श्वासावरोध के कारण हुईं। हमने अधिकांश घायलों को एलएनजेपी अस्पताल और लेडी हार्डिंग अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया है।”

इसके अलावा, यह भी बताया गया कि चार मंज़िला इमारत में दिल्ली अग्निशमन सेवा से आग की निकासी नहीं है और इसके परिसर में कोई अग्नि सुरक्षा उपकरण भी स्थापित नहीं किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि दमकल विभाग और भीड़भाड़ वाले इलाक़े में से किसी भी इकाई के पास अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) नहीं था, जिससे बचाव कार्य और मुश्किल हो गया।

आज सुबह आग लगने पर 50 से अधिक लोग इमारत के अंदर थे। आग लगने की सूचना मिलने पर 15 फायर टेंडरों को घटनास्थल पर भेजा गया, लेकिन बाद में आग की चपेट में आने के कारण 10-12 और फायर टेंडर भेजे गए। अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की कि आग को पूरी तरह से बुझा दिया गया था।

तवलीन सिंह के लिए CAB-NRC एक, कहा- अवैध घुसपैठियों को नहीं दी नागरिकता तो मुस्लिम जिहादी बन जाएँगे

जब से हिंदुओं के ख़िलाफ़ लगातार जहर उगलने वाले और टाइम मैगजीन में लिखने वाले पत्रकार आतिश तासीर की ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) स्टेटस को रद किया गया है। इनकी माँ तवलीन सिंह केंद्र सरकार से काफी चिढ़ी हुई हैं। आतिश तासीर की ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया स्टेस के रद हो जाने के बाद से ही तवलीन सिंह लगातार सरकार के ऊपर हमलावर है। इस बार उन्होंने सरकार के ऊपर निशाना साधने के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) टॉपिक चुना है।

द इंडियन एक्सप्रेस के एक लेख में, तवलीन सिंह का दावा है कि नागरिकता संशोधन विधेयक के माध्यम से समुदाय विशेष को निशाना बनाया जा रहा है। लेखों में वह जिस भाषा का उपयोग करती है, उससे यह जानना मुश्किल हो जाता है कि वह CAB की बात कर रही हैं या फिर NRC की। शायद उसके हिसाब से दोनों एक ही मुद्दा है, लेकिन वास्तव में दोनों मुद्दे बेहद अलग हैं।

तवलीन सिंह ने नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में अपने लेख में लिखा है, “नागरिकता विधेयक के बारे में ऐसी बातें हैं जो बहुत परेशान करती हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने जिस तरह से यह स्पष्ट किया है कि यह मुस्लिमों को निशाना बनाता है, वह और भी परेशान करता है।” हालाँकि, अमित शाह ने कभी भी ऐसी कोई बात नहीं कही है। नागरिकता संशोधन विधेयक पड़ोसी देशों में उत्पीड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करना चाहता है। यह उल्लेखनीय रूप से यह बताने से इनकार करता है कि अन्य देशों के मुस्लिमों को नागरिकता संशोधन विधेयक के माध्यम से निशाना बनाया जा रहा है।

तवलीन सिंह लेख में आगे लिखती हैं, अधिकांश ‘दीमक’ जिसका शाह ने अपमान किया है, वे बहुत गरीब लोग हैं। आम तौर पर उनके पास यह साबित करने के लिए दस्तावेज नहीं हैं कि वे भारतीय हैं या नहीं। वे अब उन अधिकारियों की दया पर निर्भर होंगे जो अक्सर कानून का दुरुपयोग अमानवीय जबरन वसूली के नए स्रोत के रूप में करेंगे।” यहाँ पर यह स्पष्ट हो जाता है कि तवलीन सिंह NRC और CAB के मुद्दे को एक ही समझ रही हैं।

बता दें कि अमित शाह ने कभी भी किसी भारतीय मुस्लिम के लिए ‘दीमक’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है। उन्होंने गैरकानूनी प्रवासियों पर बात करते हुए एक उदाहरण दिया, जो कि उत्तर पूर्व और पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर जनसांख्यिकीय बदलाव का कारण बन रहा है। अगर लोग बांग्लादेश से अवैध अप्रवासन का मुद्दा उठाते हैं, तो यह दावा करना हास्यास्पद है कि भारतीय मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा यदि हम एक मजबूत और सुरक्षित राष्ट्र चाहते हैं, तो NRC एक आवश्यकता है। और जिन लोगों को इसमें जगह नहीं मिलती है, उन्हें अपनी परिस्थिति को साबित करने का पर्याप्त अवसर दिया जाएगा। इसलिए इस तरह का सुझाव देना बेहद निंदनीय है।

तवलीन के लेख में सबसे अधिक आपत्तिजनक हिस्सा तब आता है जब यह कहा जाता है कि CAB का विभाजन से कोई लेना-देना नहीं है। वह कहती हैं, “कोई है जो पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के परिवार से है, मैं आपको बता सकती हूँ कि विभाजन का ‘नतीजा’ बहुत पहले निपटा दिया गया था। यह नया कानून भारतीय मुस्लिमों को यह साबित करने के लिए एक अधिनायकवादी और बहुत ही ख़राब काम से ज्यादा कुछ नहीं है कि नए भारत में मुस्लिमों के पास हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों और ईसाइयों की तुलना में कम अधिकार है और वे पहले से ही बेहतर रूप से इसके आदी हैं।

यह बहुत स्पष्ट नहीं है कि नागरिकता के लिए पड़ोसी देशों से धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्राथमिकता कैसे दी जाती है जो भारतीय मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाती है। दरअसल भारतीय मुस्लिमों का CAB से कोई लेना-देना नहीं है और वे किसी भी तरह से इससे प्रभावित नहीं हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे तवलीन सिंह अपनी तरफ से खुद को पीड़ित महसूस कर रही हैं जबकि उनके पास ऐसा करने का कोई कारण नहीं है।

और CAB का विभाजन के साथ सब कुछ करना है। लिबरल गिरोह हमें यह बताना चाह रहा है कि भारत 15 अगस्त, 1947 को एक खाली स्लेट से शुरू हुआ था और जब तीन साल बाद 26 जनवरी को नया संविधान लागू हुआ, तो पिछली बातें जादुई रूप से ख़त्म हो गई। हालाँकि, देश ऐसा नहीं सोचता है। अगर कोई राज्य खुद को पूरी तरह से उन कारकों से अलग कर लेता है, जो उसके अस्तित्व के कारण होते हैं, तो वह एक समृद्ध राज्य होने की उम्मीद नहीं कर सकता है।

भले ही लिबरल कुछ भी कहें, भारत के पास पड़ोसी देशों में मुस्लिमों की तुलना में गैर-मुस्लिमों की अधिक जिम्मेदारी है। इसका कारण यह है कि भारत का विभाजन धर्म के आधार पर ही हुआ था। भारत के पास उन लोगों के वंशजों के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं है जो एक गृहयुद्ध में लगे हुए थे ताकि उनके बच्चे एक इस्लामिक राज्य में रह सकें।

तवलीन सिंह अवैध अप्रवासी समस्या के बारे में अपनी महान अज्ञानता को प्रदर्शित करती हैं, जब वह लिखती हैं, “यदि हमारे पास संयुक्त राज्य अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर मौजूद समान स्थिति है, या फिर जब सीरियाई युद्ध एक बड़े पैमाने पर पलायन का कारण बना, तो यूरोप में यह संशोधन हुआ। इसका वर्तमान भेदभावपूर्ण रूप में भी कुछ अर्थ हो सकता है। लेकिन यह वह स्थिति नहीं है जिसका हम सामना कर रहे हैं।”

स्पष्ट रूप से, तवलीन सिंह का देश के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में क्या हो रहा है, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। कस्बों और गाँवों में इतनी जल्दी बदलाव आया है कि इसे बहुत अच्छी तरह से जनसांख्यिकीय आक्रमण के रूप में चिह्नित किया जा सकता है। इसके अलावा भारत को इस बात की परवाह नहीं करनी चाहिए कि यूरोप क्या कर रहा है या अमरीका क्या सोचता है। हमारे लोगों की सुरक्षा और हमारे देश की स्थिरता पश्चिम के समर्थन या पसंदगी से अधिक मायने रखती है। हालाँकि, तवलीन सिंह के लिए यह मानना मुश्किल हो सकता है कि यह कैसे है।

अंततः तवलीन सिंह एक बड़ा ट्विस्ट देते हुए लिखतीं है, “दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी होने का बाद भी मुस्लिमों ने दुनिया भर में जिहाद के लिए बहुत कम प्रयास किया है। लेकिन इस तरह से चीजें कब तक बनी रहेंगी?” इस तरह, से तो अब भारतीय मुस्लिम CAB और NRC की वजह से भारत के खिलाफ जिहाद शुरू कर सकते हैं।” इस पर बहस करना बेहूदा और मूर्खतापूर्ण है।

वैसे लिबरल द्वारा किए गए तर्क अक्सर जिहाद के औचित्य के लिए आधार बनाने के रूप में दिखाई देते हैं। अगर तवलीन सिंह की माने तो CAB और NRC भारतीय मुस्लिमों के लिए एक नया जिहाद शुरू करने के लिए पर्याप्त है। जिहाद किसी भी तरह से उचित नहीं है लेकिन फिर भी यहाँ तवलीन सिंह उसे उकसाता हुआ तर्क देती हैं।

यह किसी के लिए आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए कि लिबरलों, वामपंथियों ने लंबे समय तक कश्मीर में जिहाद को सही ठहराया है। वे गंभीरता से मानते आए हैं कि जिहाद सरकारी नीतियों के कारण होता है न कि उनके धर्म के फरमानों और मौलवी और मौलानाओं द्वारा फैलाई गई विषाक्तता के कारण। क्या भविष्य में भारत को एक और गृहयुद्ध का सामना करना चाहिए, ऐसा मालूम होता है कि उदारवादी यह दावा करेंगे कि भारत अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए लागू की गई नीतियों के कारण ऐसा कर रहा था। ऐसा लगता है कि तवलीन सिंह जैसे उदारवादियों ने भारतीय राज्य के खिलाफ जिहाद छेड़ने वाले मुस्लिमों के लिए सरकार को दोषी ठहराया है, न कि उनके धर्म के समस्यात्मक पहलुओं को। और यह वास्तव में बेहद चिंता का विषय है।

तवलीन सिंह ने नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में अपने लेख में यह तर्क दिया है कि न केवल सरकार को भारतीय मुस्लिमों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने से सावधान रहना चाहिए, बल्कि उन्हें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उम्मा को अपमानित न करें। हालाँकि अपने लेख में वह यह नहीं बताती हैं कि भारतीय मुस्लिमों को CAB द्वारा पीड़ित क्यों महसूस करना चाहिए। लेकिन यहाँ तवलीन सिंह को यकीन है कि CAB, जो पड़ोसी देशों के मुस्लिमों को एक निश्चित विशेषाधिकार प्रदान नहीं करता है, वो भारतीय मुस्लिमों को भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए विवश करेगा और इसका जिम्मेदार CAB होगा। उनके लेख से ऐसा प्रतीत होता है कि वह ग्लोबल उम्मा में विश्वास करती है। वो न केवल उम्मा में अपने विश्वास की पुष्टि करती हुई नजर आ रही हैं, बल्कि वह निश्चित रूप से इसके साथ वकालत करती हुई भी दिखाई दे रही हैं।