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15 वर्षीय छात्रा को मैथ टीचर मो. दानिश बहलाकर ढाई महीने से था फरार, पुलिस की सख्ती से हुआ गिरफ्तार

लव जिहाद का खेल पटना में भी जारी है। पटना पुलिस ने एक नाबालिग छात्रा को अपने प्यार में फँसाकर भगा ले जाने वाले शिक्षक मोहम्मद दानिश को सोमवार (दिसंबर 2, 2019) को गिरफ्तार किया। मोहम्मद दानिश लगभग ढाई महीने से फरार था। पुलिस ने उसे पटना के दानापुर इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। दानिश के साथ नाबालिग छात्रा को भी गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि नाबालिग छात्रा दूसरे धर्म की है। फिलहाल दोनों को पुलिस सुरक्षा में सोमवार को दानापुर कोर्ट में पेशी के लिए भेज दिया गया है।

लड़की के घरवालों के मुताबिक मामला लव जिहाद का है। उनका आरोप है कि दानिश ने लड़की का धर्म परिवर्तन कराकर उसके साथ शादी रचाने के लिए उसे लेकर भागा था। जानकारी के मुताबिक लगभग दो महीने पहले दानापुर खगौल से मोहम्मद दानिश नाम का मैथ टीचर अपनी ही 15 वर्षीय स्टूडेंट, जो कि दूसरे धर्म की बताई जाती है को लेकर फरार हो गया था और उसका धर्मांतरण कराने की भी फिराक में था।

इसके बाद लड़की के पिता ने स्थानीय थाने में शिक्षक मोहम्मद दानिश और उसके परिवार वालों के खिलाफ 17 सितंबर को पुत्री के अपहरण का मामला दर्ज कराया था। आरोप है कि नाबालिग छात्रा को मोहम्मद दानिश ने बहला फुसला कर शादी की नीयत से अगवा कर फरार हो गया था। पुलिस ने दानिश के घर पर इश्तेहार भी चिपकाया था। इसके बाद दानिश के परिजन घर में ताला बंद कर फरार चल रहे थे।

बाद में पुलिस ने मोहम्मद दानिश की अम्मी और अब्बू को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद दो महीना 13 दिन के बाद पुलिस ने आखिरकार मोहम्मद दानिश और उसके परिवार को गिरफ्तार कर लिया। वहीं दानिश युवती से किसी भी तरह का धर्म परिवर्तन और शादी करने से इंकार कर रहा है। दानिश का कहना है कि उसने लड़की को दो महीने तक अपने साथ रखा और उसे कोलकात्ता घुमाता रहा। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले को जाँच का विषय बता रही है। पुलिस का कहना है कि हर बिंदु को ध्यान में रखते हुए जाँच की जा रही है।

पति, पत्नी, बच्चे को मार कर लाशों के साथ ‘सेक्स उन्मत्त’ नसीरुद्दीन ने 3 घंटे तक किया रेप, बनाया वीडियो

आज़मगढ़ के मुबारकपुर स्थित इब्राहिमपुर में एक सप्ताह पहले एक दम्पति को मृत पाया गया था। उनकी हत्या कर दी गई थी। साथ ही उनके एक नवजात शिशु की भी हत्या कर दी गई थी। दो बच्चे इस घटना में घायल हो गए थे। अब पुलिस ने इस घटना को अंजाम देने वाले शख्स को गिरफ़्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया है कि आरोपित नसीरुद्दीन ‘सेक्स-उन्मत्त’ है। वह हमेशा ‘सेक्स की भूख’ लिए पागलों की तरह घूमता रहता है और लोगों को मार कर लाशों को अपना शिकार बनाता है। नसीरुद्दीन ज़िंदा लोगों के साथ बलात्कार कर उन्हें मार डालता था और फिर उनकी लाशों का भी रेप करता था। वह मर्द, औरत और बच्चे- किसी को भी नहीं छोड़ता था।

नसीरुद्दीन को पुलिस ने ‘Necrophile’ करार दिया है, अर्थात लाशों के साथ सेक्स करने का भूखा। उसे पुलिस ने ‘Sex Maniac’ पाया है, अर्थात हमेशा सेक्स की इच्छा लिए घूमने वाला मानसिक पागल। नसीरुद्दीन ने स्वीकार किया है कि वह दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में ऐसे कई अपराधों को अंजाम दे चुका है। पुलिस ने पाया है कि वो पूर्व में कई भयावह अपराध कर चुका है और उन सबके पीछे उसका एक ही उद्देश्य था- सेक्स। आरोपित नसीरुद्दीन ने कबूल किया है कि उसने आज़मगढ़ की 30 वर्षीय महिला का ख़ून किया और उसके पति को भी मार डाला।

नसीरुद्दीन ने महिला का बलात्कार किया और फिर उसे मार डाला। इसके बाद उसने महिला की 4 वर्षीय बेटी का बलात्कार किया। फिर उसने महिला के पति और 4 महीने के बच्चे को भी मार डाला। नसीरुद्दीन ने तीनों की लाशों के साथ लगातार 3 घंटे तक सेक्स किया और इस कुकृत्य का वीडियो भी बनाया। उसने ये वीडियो अपनी साली को दिखया, जिसे देख कर वह काँप उठी। नसीरुद्दीन अपने साथ हमेशा उत्तेजक ड्रग्स लेकर चलता है। वह हमेशा अपने साथ कॉन्डोम के पैकेट रखता है। नसीरुद्दीन ऐसे अपराध को अंजाम देने के लिए हमेशा तत्पर रहता था।

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आरोपित आज़मगढ़ की महिला के घर में 24 नवंबर को तब घुसा, जब वह रात को सो रही थी। महिला, उसके पति व शिशु को मार डालने के बाद नसीरुद्दीन ने उनकी 10 वर्षीय बेटी के साथ भी रेप किया। इसके बाद उसने उनके 4 साल के बेटे पर भी हमला कर दिया। उसने पुलिस के समक्ष अपना गुनाह कबूल कर लिया है। पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद सबूतों के आधार पर उसे पकड़ा। विभिन्न राज्यों के बीच पुलिस में तालमेल न होने का फ़ायदा उठा कर उसने बंगाल, दिल्ली और हरियाणा में भी ऐसे कई अपराध किए हैं।

प्रीति रेड्डी मर गई फिर भी रेप करते रहे दरिंदे: आरिफ के प्लानिंग की पूरी डिटेल

‘प्रीति’ रेड्डी केस: खेत में घसीट कर बारी-बारी से किया रेप, ट्रक में लाश डाल खरीदा था पेट्रोल-डीजल

गैंग रेप व हत्या के आरोपितों को डिनर में परोसी गई मटन-करी, लोगों ने जेल प्रशासन से जताई नाराज़गी

वेश्यावृत्ति व पोर्नोग्राफी को लीगल कर देने से रेप की घटनाओं में कमी आएगी? जानिए क्यों बेकार है ये तर्क

निर्भया के बलात्कारियों को फाँसी देने के लिए जल्लाद की आवश्यकता: लोगों ने कहा- मुझे बुला लो, फ्री में करेंगे

हैदराबाद की बेटी के साथ हुई दरिंदगी से गुस्सा देश भर में फूटा है। हर कोई बलात्कारियों की फाँसी की माँग कर रहा है। कुछ ऐसा ही सात साल पहले दिल्ली में निर्भया के साथ हुई वारदात के बाद हुआ था। इसके बाद कानून तक बदला गया। निर्भया के गुनहगारों को निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक फाँसी की सजा सुनाई गई, लेकिन अभी तक वे फाँसी के फंदे पर नहीं चढ़े हैं। 

हाल ही में आरोपितों की दया याचिका खारिज होने के बाद इस मामले पर जल्द ही फैसला आने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट ने अपील याचिका के बाद ही विशेष अनुमति याचिका को भी खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा 5 मई 2017 को दोषी को सुनाई गई फाँसी की सजा को बरकरार रखा। 

हालाँकि, अफसोस की बात यह है कि तिहाड़ जेल में दरिंदों को फाँसी देने वाला ही नहीं है। जेल अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनके पास फाँसी देने के लिए जल्लाद नहीं है। अदालत द्वारा “ब्लैक वारंट” जारी करने के बाद दोषी दरिंदों को फाँसी दी जा सकती है। राष्ट्रपति द्वारा दोषियों की दया याचिका की अस्वीकृति के बाद वारंट जारी किया जाएगा और संभावना है कि एक महीने के अंदर इसका फैसला हो जाएगा।

देश से अपराध खत्म करने के लिए प्रशासन कितना सक्रिय और उत्सुक है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपराधियों को सजा देने के लिए जेल में जल्लाद उपलब्ध नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक जेल के वरिष्ठ अधिकारी जल्लाद की तलाश में हैं और बताया जा रहा है कि इसके लिए वैकेंसी भी निकाली गई है।

संभावना जताई जा रही है कि संसद हमले के दोषी अफजल गुरू के समय की तरह ही तिहाड़ इस बार भी जल्लाद की नियुक्ति नहीं करेगा। बता दें कि अफजल गुरू को फाँसी देने के समय एक जेल अधीक्षक ने ही लीवर खींचा था। इस बार जल्लाद को एक बार के कॉन्ट्रैक्ट (one-time contract) पर रखा जाएगा। टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार राजशेखर झा ने इस खबर को शेयर किया। 

जिसके बाद पत्रकार के पास निर्भया के बलात्कारियों को फाँसी देने के लिए उत्सुक नेटिजन्स का ‘आवेदन’ आने लगा। सभी लोग उन बलात्कारियों को फाँसी देना चाहते हैं। कोई कहता है, “मुझे बुला लो” तो कोई कहता है कि वो फ्री में ये काम करने के लिए तैयार है। एक ने लिखा, “जो भी रस्सी खींचेगा वह मानवता का उपकारक होगा।” एक यूजर ने लिखा, “सोशल मीडिया पर बस नौकरी पोस्ट करें – जब तक पूर्व अनुभव अनिवार्य आवश्यकता नहीं है, तब तक हजारों इसे करने के लिए तैयार होंगे।”

राजशेखर झा के खबर शेयर करने के बाद उनके पास इतने ज्यादा ईमेल और ‘आवेदन’ आने लगे कि उन्हें एक अन्य ट्वीट करते हुए लिखना पड़ा कि इस नौकरी के लिए वो इंटरव्यू नहीं लेने वाले हैं। उन्होंने लिखा कि जो लोग इसमें रूचि रखते हैं, वो जेल अथॉरिटी से संपर्क कर सकते हैं।

वहीं बताया जा रहा है कि जल्लाद न होने की समस्या को समाप्त करने के लिए तिहाड़ जेल के वरिष्ठ अधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से अन्य जेलों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। अन्य जेलों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या उनके पास जल्लाद है। वे उत्तर प्रदेश के कुछ गाँवों में भी पूछताछ कर रहे हैं, जहाँ से अंतिम जल्लाद था।

एक जेल अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “हमारे सिस्टम में अक्सर परीक्षाएँ नहीं होती हैं क्योंकि दुर्लभ मामलों में मौत की सजा दी जाती है। इसलिए, पूर्णकालिक जल्लाद व्यवहार्य नहीं है। इसके अलावा इस नौकरी के लिए पूर्णकालिक कर्मचारी ढूँढना मुश्किल काम है।”

वेश्यावृत्ति व पोर्नोग्राफी को लीगल कर देने से रेप की घटनाओं में कमी आएगी? जानिए क्यों बेकार है ये तर्क

वेश्यावृत्ति, पोर्नोग्राफी और बलात्कार- इन तीनों को अगर कोई एक चीज एक पंक्ति में खड़ा करती है तो वो है सेक्स। अगर सेक्स इन तीनों का अहम हिस्सा है तो इसका ये अर्थ नहीं कि ये तीनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं। हैदराबाद में 26 वर्षीय डॉक्टर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) की गैंगरेप और हत्या के बाद कई लोगों का मानना है कि वेश्यावृत्ति को वैध कर देने से ऐसी घटनाएँ रुक जाएँगी। ये सही नहीं है। बता दें कि डॉक्टर रेड्डी का मोहम्मद आरिफ सहित 4 लोगों ने मिल कर बलात्कार किया और फिर नाक-मुँह दबा कर मार डाला। दरिंदगी का आलम ये था कि पेट्रोल छिड़क कर जलाने से पहले लाश के साथ भी बलात्कार किया गया।

कुछ लोग कह रहे हैं कि न सिर्फ़ वेश्यावृत्ति को लीगल कर देना चाहिए बल्कि पोर्नोग्राफी पर लगे बैन को भी हटा देना चाहिए। उन लोगों का मानना है कि इससे महिलाएँ सुरक्षित रहेंगी। वो ये भी कह रहे हैं कि ये दोनों क़दम उठाने से बलात्कार की घटनाएँ भी कम होंगे। भारत की समस्या यह है कि यहाँ किसी भी समस्या को ठीक से समझे बिना राय देने वाला संक्रमण फ़ैल रहा है। इसी तरह लोगों के ये विचार भी त्रुटिपूर्ण हैं। इससे पता चलता है कि बलात्कार की समस्या को भी लोगों ने ठीक से समझे बिना राय देना शुरू कर दिया है।

कई यूरोपियन देशों ने वेश्यावृत्ति और पोर्नोग्राफी को लीगल किया हुआ है। लेकिन, क्या इससे वहाँ बलात्कार की घटनाएँ नहीं होतीं या फिर पहले से कम हुई हैं? अगर आँकड़ों की बात करें तो प्रति 1000 की जनसंख्या पर उन देशों में बलात्कार की औसत घटनाएँ भारत से ज्यादा ही होती हैं। हाँ, ये भी एक सत्य है कि भारत में ऐसी कई घटनाएँ पुलिस में दर्ज ही नहीं कराई जातीं। यहाँ हम इस पर विचार कर रहे हैं कि क्या वेश्यावृत्ति और पोर्नोग्राफी को लीगल करने से रेप में कमी आएगी?

इसका जवाब है- नहीं। पोर्नोग्राफी और वेश्यावृत्ति को लीगल कर देना बलात्कार की घटनाओं को थामने का समाधान नहीं है। ऐसा इसीलिए क्योंकि इससे उन कई देशों में कोई लाभ नहीं हुआ है, जहाँ सेक्स वर्कर और पोर्न इंडस्ट्री मौजूद है, ये सब लीगल भी है। यूरोप में तो बलात्कार की समस्याएँ और बढ़ती ही जा रही हैं। स्थिति विकट होती जा रही है। यहाँ हम एक-एक कर दोनों चीजों को उठाते हैं। सबसे पहले बात वेश्यावृत्ति की।

सबसे पहले हमें समझना होगा कि लोग ऐसा क्यों कह रहे हैं कि प्रोस्टीटूशन को लीगल कर देने से बलात्कार की घटनाओं में कमी आएगी? इसके पीछे लोगों की वो सोच है, जिसमें वह समझते हैं कि बलात्कार की घटनाएँ इसीलिए होती हैं क्योंकि लोगों को आसानी से सेक्स नहीं मिल पाता। लोगों के मन में थोड़ा और गहरा पैठें तो उनकी ये सोच सामने निकलती है- रेप होते हैं क्योंकि लोगों को सहमति के साथ सेक्स करने के लिए महिलाएँ नहीं मिलतीं।

अगर लोगों की यह धारणा सही होती तो कोई भी शादीशुदा व्यक्ति कभी बलात्कार करता ही नहीं। आजकल अदालतों में वकील अजीब-अजीब दलीलें देते हैं। कल को किसी बलात्कारी का वकील अपने ‘बेचारे’ क्लाइंट के बचाव में जिरह करते हुए ये भी कह सकता है कि उसकी पत्नी उसके साथ नियमित रूप से सेक्स नहीं कर रही थी, इसीलिए उसने ‘मजबूरी में’ किसी का बलात्कार कर दिया। एक और सवाल यह है कि क्या वेश्यालय जाने वाले लोग रेप नहीं करते?

ऐसे लोग भी तो बलात्कार के मामले में दोषी पाए गए हैं, जिनकी कई गर्लफ्रेंड्स हों या फिर वो दिखने में आकर्षक हो। ये उस तर्क को ही काटने वाला है जिसमें कहा जा रहा है कि सेक्स के लिए कोई न मिलने के कारण लोग रेप करते हैं। क्या वेश्यावृत्ति को लीगल कर देने से इस इंडस्ट्री में लाखों महिलाएँ आ जाएँगी और फिर सेक्स लोगों के लिए सस्ता और आसान पहुँच वाला हो जाएगा? नहीं। वेश्यालय जाने के लिए रुपए लगेंगे और हैदराबाद गैंगरेप व हत्याकांड के आरोपितों की आर्थिक पृष्ठभूमि देख कर आपको लगता है कि वो लोग रुपए देकर सेक्स करने जाएँगे?

दूसरी बात कही जा रही है पोर्नोग्राफी की। तुलनात्मक रूप से देखें तो भारत में दुनिया का सबसे सस्ता इंटरनेट है। घर-घर में लोगों के हाथ में स्मार्टफोन हैं। क्या ये मानने लायक बात है कि ये सारी सुविधाओं के बावजूद लोग पोर्न देखने में अक्षम होते होंगे? कोर्ट ने कुछ पोर्न वेबसाइटों पर प्रतिबन्ध ज़रूर लगाया हुआ है लेकिन आजकल व्हाट्सप्प वगैरह के माध्यम से ऐसे वीडियोज कहाँ नहीं पहुँच जाते? लोग वीपीएन का प्रयोग कर के प्रतिबंधित साइटों को एक्सेस करते हैं। हैदराबाद के आरोपितों के फोन में भी पोर्न वीडियोज हो सकते हैं।

2013 का शक्ति मिल गैंग रेप कांड तो आपको याद ही होगा? 22 वर्षीय फोटो-जर्नलिस्ट का 5 लोगों ने मिल कर बलात्कार किया था। जाँच में पता चला था कि सारे आरोपित न सिर्फ़ पोर्न एडिक्टेड थे बल्कि उन्होंने पीड़िता से वही सब करवाया, जैसे पोर्न वीडियोज में दिखाया जाता है। पोर्न वीडियोज में एक्टर जो भी करते हैं, आरोपितों ने वैसा ही करने की कोशिश की। पोर्न के एडिक्शन का आलम ये होता है कि एक-दो वीडियो के बाद लोग और नए भी खोजने लगते हैं। कई मामलों में पता चला है कि पोर्नोग्राफी रेप जैसे अपराधों को कम करना तो दूर, उल्टा बढ़ा देता है।

पोर्नोग्राफी और वेश्यावृत्ति को रेप से जोड़ने वाले लोग समझते हैं कि रेप का कारण सिर्फ़ सेक्स ही है। लेकिन नहीं, ये हमेशा सेक्स को लेकर ही नहीं होता। इसीलिए, पोर्नोग्राफी और प्रोस्टीटूशन को रेप से जोड़ कर देखना ही सबसे बड़ी गलती है।

शर्मनाक: पोर्न साइट्स पर हैदराबाद बलात्कार पीड़िता का नाम ‘ट्रेंड’ में, सोशल मीडिया यूज़र्स ने जताया दु:ख

‘कश्मीरी पोर्न स्टार’ के साथ लगाई शेहला रशीद की फोटो, दिल्ली पुलिस से अरेस्ट करने की गुहार

कॉन्ग्रेस नेता गिरफ्तार: Whatsapp पर पार्टी की महिला नेताओं को भेजा पोर्न वीडियो

जहाँगीर ने 45 लड़कियों से किया रेप, पत्नी किरण वीडियो बनाकर बेचती थी एडल्ट वेबसाइट्स को

कॉन्ग्रेस को इनकम टैक्स की नोटिस: ₹170 करोड़ हवाला के जरिए पार्टी के अकाउंट में गया

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस (INC) को इनकम टैक्स विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ये नोटिस सोमवार (दिसंबर 3, 2019) को जारी किया गया। ये मामला हैदराबाद की एक कम्पनी से कॉन्ग्रेस के खजाने में रुपए आने से सम्बंधित है। कॉन्ग्रेस इस सम्बन्ध में दस्तावेज पेश करने में विफल रही है और इसीलिए आईटी डिपार्टमेंट ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

इस मामले में कॉन्ग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को समन भेजा गया था। उन्हें 4 नवंबर को आईटी विभाग के समक्ष पेश होने को कहा गया था। इन नेताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। ये पूरा का पूरा मामला हवाला लेन-देन से जुड़ा है। आयकर विभाग ने जाँच में पाया है कि हैदराबाद की एक कम्पनी ने कॉन्ग्रेस को 170 करोड़ ट्रांसफर किए। ऐसा हवाला नेटवर्क के जरिए किया गया।

इस पूरे फंड को सरकारी प्रोजेक्ट्स से गबन किया गया। इसके लिए बोगस बिलिंग का सहारा लिया गया। फेक बिलिंग का उपयोग कर के सरकारी प्रोजेक्ट के लिए आवंटित धनराशि का गबन किया गया और फिर हवाला नेटवर्क के जरिए 170 करोड़ रुपया भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के अकाउंट में पहुँचा। सरकार ने उक्त कम्पनी को आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों के लिए योजनाओं के संचालन के लिए धनराशि आवंटित की थी, जिसका गबन कर लिया गया।

नेशनल हेराल्ड मामले में गाँधी परिवार सहित कॉन्ग्रेस के कई नेता पहले से ही आरोपित चल रहे हैं। अब पूरी पार्टी ही वित्तीय लेन-देन के मामले में इनकम टैक्स के रडार पर आ गई है।

₹100 करोड़ की टैक्स फाइल खुली: मुश्किल में सोनिया-राहुल, नेशनल हेराल्ड से जुड़ा है मामला

22 की उम्र, ₹108 करोड़ संपत्ति: कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार की बेटी ऐश्वर्या से ED करेगी पूछताछ

₹150 करोड़ का बेनामी होटल सीज, हरियाणा कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व CM के बेटों के नाम है संपत्ति

संकट में कॉन्ग्रेस: ₹511 करोड़ का अवैध लेनदेन, विदेशी बैंकों में 80 कम्पनियों का काले धन – एक ‘बड़ा नेता’ शक के घेरे में

इनकम टैक्स विभाग ने सोनिया-राहुल को भेजा ₹100 करोड़ का टैक्स नोटिस

100 लड़कियों को अश्लील वीडियो कॉल करने वाला हुसैनकर गिरफ़्तार, दिखाता था अपने प्राइवेट पार्ट्स

मुंबई के वर्ली के रहने वाले एक शख्स को एक या दो नहीं बल्कि 100 से भी अधिक महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है। वह लड़कियों को वीडियो कॉल कर के उन्हें परेशान करता था। उसने अब तक 100 सभी अधिक लड़कियों को वीडियो कॉल किया है। उस पर पोस्को एक्ट (The Protection of Children from Sexual Offences) के तहत मामला चलाया जाएगा। आरोपित का नाम संभाजी हुसैनकर है, जो महिलाओं के साथ अश्लील बातचीत करने के साथ-साथ उन्हें अपने प्राइवेट पार्ट्स दिखाता था। वह वीडियो कॉल पर गन्दी हरकतें करता था।

पुलिस ने बताया कि हुसैनकर महिलाओं को प्रताड़ित करने का आदी है। पुलिस पूरे मामले की छानबीन में जुट गई है। 26 वर्षीय हुसैनकार महिलाओं को अपना शिकार बनाने के लिए एक ऐप के माध्यम से व्हाट्सप्प पर उनकी प्रोफाइल पिक्स चेक करता था और फिर उनमें से किसी को चुनता था। हुसैनकार मूल रूप से कोल्हापुर का रहने वाला है, जहाँ वह ग्रैंड रोड पर स्थित एक गैराज में मैकेनिक का काम करता था। हुसैनकर की गिरफ़्तारी एक नाबालिग लड़की की शिकायत के बाद हुई।

वडाला की 17 वर्षीय बीकॉम की छात्रा को हुसैनकर शनिवार (नवंबर 30, 2019) की शाम से ही लगातार वीडियो कॉल कर के परेशान कर रहा था। शुरुआत में उस लड़की ने अनजान नंबर होने के कारण कॉल नहीं उठाया। जब लगातार वीडियो कॉल आने लगे तो उसे लगा कि उसका कोई सम्बन्धी उससे बात करना चाह रहा है और उसने कॉल रिसीव कर लिया। हुसैनकर ने हाय-हैलो करने के बाद अश्लील बातचीत शुरू कर दी। इससे पहले कि नाबालिग पीड़िता कॉल डिसकनेक्ट करती, हुसैनकार उसे वीडियो कॉल पर अपने प्राइवेट पार्ट्स दिखाने लगा।

पोर्ट जोन की डीसीपी रश्मि रश्मि करंदीकर मने इस बाबत अधिक जानकारी देते हुए बताया कि पीड़िता द्वारा कॉल डिसकनेक्ट करने के बावजूद आरोपित उसे बार-बार वीडियो कॉल करता रहा। परेशान होकर पीड़िता को अपना फोन ही स्विच ऑफ करना पड़ा। उसने अपने माता-पिता को ये बात बताई। पैरेंट्स ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तकनीकी छानबीन कर के आरोपित को वर्ली से धर-दबोचा। आरोपित के आपराधिक इतिहास की छानबीन की गई तो पता चला कि वह पूर्व में भी छेड़खानी के आरोप में गिरफ़्तार किया जा चुका है।

हुसैनकर शादीशुदा है और ऐसे अश्लील वीडियो कॉल करने का आदी है। पुलिस ने बताया कि वह लड़कियों को वीडियो कॉल्स करने का एडिक्टेड हो चुका है। वह सामान्यतः ऐसे कॉल रात को किया करता था। जब भी वह अपने काम से फुर्सत पाता, वह अश्लील हरकतों में लग जाता था। पूर्व में गिरफ़्तारी के बाद उसे ज़मानत पर रिहा कर दिया गया था।

अरशद ने अश्लील वीडियो बना मालकिन से ऐंठे ₹1 करोड़, फर्जी निकाहनामा तैयार कर हत्या की रच रहा था साजिश

अबसार ख़ान ने भगवान राम और सीता को कहे अश्लील अपशब्द: महिला को भेजे प्राइवेट पार्ट्स के फोटो

19 वर्ष की लड़की से जसीम ने किया बलात्कार: अश्लील वीडियो बनाकर इस्लाम कबूलने की धमकी

करतारपुर साहिब मत्था टेकने गई सिख लड़की को पाकिस्तानी लड़कों ने फुसलाया, 3 दिन बाद मिली, 4 गिरफ्तार

हरियाणा की रहने वाली एक सिख लड़की तीन दिन पहले करतारपुर साहिब में मत्था टेकने के लिए गए एक जत्थे के साथ गई थी, लेकिन पाकिस्तान जाने के बाद पता चला कि वो लड़की गायब हो गई है। तीन दिनों तक लापता रही यह लड़की सोमवार (दिसंबर 2, 2019) को मिली है। इस बारे में सोमवार देर रात शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्वीट कर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लड़की किसी पाकिस्तानी युवक से मिलने गई थी, जिसने बहला-फुसला कर लड़की को साथ ले गया था।

इस मामले की जाँच में पाकिस्तान पुलिस ने लाहौर व फैसलाबाद के रहने वाले चार युवकों को गिरफ्तार किया है। मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्विटर पर लिखा है कि पाकिस्तान में गायब हुई लड़की मिल गई है। पाक रेंजरों के माध्यम से उसे वापस भारत भेज दिया गया है। 

एक अन्य ट्वीट में सिरसा ने लिखा, “पाकिस्तान में हिंदू और सिख लड़कियों को बहकाकर लव जिहाद के जाल में फँसाने और फिर उन्हें इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए मजबूर करने का चलन जोरों पर है। मैं पाक में श्री करतारपुर साहिब के दर्शकों को सावधान करना चाहता हूँ कि कृपया इस ट्रैप के बारे में जागरूक और सतर्क रहें।”

बता दें कि भारत-पाकिस्तान के बीच यह करतारपुर कॉरिडोर का ऐतिहासिक गलियारा गुरु नानक देव की 550वीं वर्षगाँठ के अवसर पर खोला गया था। भारत की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब में और पाकिस्तान में इमरान खान ने 9 नवंबर को इसका उद्धाटन किया था। इस गलियारे के रास्ते भारत से रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए वहाँ जा रहे हैं।

डॉ राजेंद्र प्रसाद को राष्ट्रपति बनने से रोकने के लिए नेहरू ने बोला झूठ तो पटेल ने कहा- शादी नक्की

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे और संविधान सभा के अध्यक्ष भी थे। लेकिन, देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू नहीं चाहते थे कि डॉक्टर प्रसाद भारत के राष्ट्रपति बनें। लेकिन नेहरू के विरोध के बावजूद वो 1950, 1952 और 1957 में लगातार तीन बार देश के राष्ट्रपति चुने गए (पहली बार संविधान सभा द्वारा)। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने जब दूसरी बार राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की, तब नेहरू ने आपत्ति जताई। नेहरू चाहते थे कि एक बार 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाला व्यक्ति दूसरी बार राष्ट्रपति न बने। ये अलग बात है कि खुद नेहरू ख़ुद 1947 से 1964 तक प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे रहे।

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को दूसरी बार राष्ट्रपति बनाने के लिए जब हस्ताक्षर अभियान चल रहा था, तब नेहरू उनसे मिलने पहुँचे। उन्होंने ‘एक पुराने दोस्त होने के नाते’ उनसे आग्रह किया कि वो दूसरी बार राष्ट्रपति चुनाव न लड़ें। हालाँकि, डॉक्टर प्रसाद ने उन्हें किसी प्रकार का भरोसा नहीं दिया। वो चुप रहे। कॉन्ग्रेस की संसदीय समिति की बैठक हुई। इस बैठक में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की उम्मीदवारी का सिर्फ़ एक व्यक्ति ने विरोध किया और वो थे जवाहरलाल नेहरू। पार्लियामेंट्री बोर्ड के 6 सदस्यों में से नेहरू अकेले व्यक्ति थे, जो राजेंद्र प्रसाद को फिर से राष्ट्रपति बनाए जाने के ख़िलाफ़ थे।

हालाँकि, मोरारजी देसाई भी ऐसा नहीं चाहते थे लेकिन बीमार होने के कारण वो उस बैठक में हिस्सा नहीं ले रहे थे। आज तक देश के इतिहास में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के अलावा कोई दूरी बार राष्ट्रपति नहीं बन पाया। 1957 में जवाहरलाल नेहरू एस राधाकृष्णन को राष्ट्रपति बनाना चाहते थे। इसी तरह वो 1952 में चक्रवर्ती राजगोपालचारी के पक्ष में थे। लेकिन उन्हें दोनों बार निराशा हाथ लगी। 1949 में जब देश के प्रथम राष्ट्रपति के लिए बीतचीत शुरू हुई, तब नेहरू ने राजगोपालचारी के पक्ष में गोलबंदी शुरू की। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने एक बयान जारी कर जनता को प्रोपेगंडा से बचने की सलाह दी और कहा कि ‘राजाजी’ और उनके बीच राष्ट्रपति बनने के लिए कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं है।

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे। 1950 में राष्ट्रपति भी इसी सभा को चुनना था। ऐसे में, नेहरू ने प्रसाद को चिट्ठी लिखी कि वो इसके लिए राजाजी का नाम आगे करें। उन्होंने लिखा कि वल्लभभाई पटेल भी इसके लिए अपनी सहमति दे चुके हैं। डॉक्टर प्रसाद दुःखी हुए। वो इस बात से निराश हुए कि नेहरू उन्हें ‘आदेश’ दे रहे हैं। उनका मानना था कि वो तो इन सब में पड़ने के लिए तैयार ही नहीं थे लेकिन जब उन्हें संविधान सभा का अध्यक्ष बनाया गया है तो उनकी विदाई भी सम्मानजनक तरीके से होनी चाहिए। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने नेहरू और पटेल को एक लम्बा-चौड़ा पत्र भेजा

लेकिन, यहाँ एक बात पता चलती है कि जवहारलाल नेहरू ने झूठ बोला था। उन्होंने राजगोपालचारी को राष्ट्रपति बनाने के लिए सरदार पटेल की सहमति नहीं ली थी। नेहरू ने बिना पटेल की अनुमति के उनका नाम घसीट दिया था। डॉक्टर प्रसाद की चिट्ठी आने के बाद ये भेद खुला और पटेल इस बात से नाराज़ हुए कि नेहरू ने उनका नाम बिना पूछे इस्तेमाल किया। जब पोल खुल गई तो नेहरू ने डॉक्टर प्रसाद को फिर से पत्र लिख कर बताया कि उन्होंने उनसे जो कुछ भी कहा था, उसका पटेल से कुछ लेना-देना नहीं है। नेहरू ने लिखा कि उन्होंने पूरी तरह अपने बात सामने रखी थी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इसके लिए पटेल से उन्होंने कोई चर्चा नहीं की है।

नाराज़ डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को नेहरू ने माफ़ी माँगते हुए लिखा कि वो उनका पूरा सम्मान करते हैं और उनकी भावनाओं को चोट पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। नेहरू को यूके और अमेरिका के 6 दिनों के दौरे पर जाना था। वो चाहते थे कि उससे पहले राजाजी के पक्ष में फ़ैसला हो जाए, तो वो निश्चिंत होकर विदेश दौरे पर जा सकें। संविधान सभा की बैठक में जब उन्होंने ये बातें रखी, तो कई नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई। कुछ ने तो इसका कड़ा विरोध किया। माहौल इतना गर्म हो गया कि सरदार पटेल को मामला थामना पड़ा। उन्होंने शांति की अपील करते हुए कहा के कॉन्ग्रेस हमेशा की तरह मतभेदों से ऊपर उठ कर निर्णय लेगी।

सरदार पटेल ने तब तक डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को लेकर मन बना लिया था। डॉक्टर प्रसाद के राष्ट्रपति बनने से जुड़े एक सवाल के जवाब में पटेल ने कहा- “अगर दूल्हा पालकी छोड़ कर ना भागे तो शादी नक्की।” पटेल का इशारा था कि अगर डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ख़ुद से पीछे हट कर राजाजी के लिए रास्ता नहीं छोड़ते हैं तो उन्हें राष्ट्रपति बनने से कोई नहीं रोक सकता। वो इस तरह से डॉक्टर प्रसाद के सीधे-सादे व्यवहार का भी जिक्र कर रहे थे। चुनाव हुआ और डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को 5,07,400 वोट मिले। उनकी जीत पक्की जान कर कॉन्ग्रेस के 65 सांसदों और 479 विधायकों ने वोट देने की भी जहमत नहीं उठाई।

इसी तरह 1957 में नेहरू एस राधाकृष्णन के पक्ष में गोलबंदी कर रहे थे लेकिन कॉन्ग्रेस डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को लेकर एकमत थी। राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति के रूप में इस्तीफा देने का मन बना लिया था लेकिन उन्हें किसी तरह मनाया गया। नेहरू ने तब कहा था कि वो 1947 के बाद से अब तक इतने खिन्न नहीं थे, जितने अब हैं। नेहरू और प्रसाद के बीच हिन्दू कोड बिल को लेकर भी मतभेद थे। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने काशी में ब्राह्मणों के पाँव धोए थे। नेहरू ने इस पर आपत्ति जताई थी। नेहरू तो यह भी नहीं चाहते थे कि डॉक्टर प्रसाद सोमनाथ मंदिर का शिलान्यास करने जाएँ।

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महिलाओं को क्या करना है और क्या नहीं… कुल 14 सलाह: हैदराबाद पुलिस की एडवाइजरी, पड़ रही ‘गाली’

हैदराबाद में डॉक्टर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के गैंगरेप व हत्या के बाद महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस व प्रशासन के दावों की पोल खुल रही है। देश भर के कई हिस्सों से लगातार आती ऐसी ख़बरों के बीच हैदराबाद पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि महिलाओं को क्या करना है और क्या नहीं? पुलिस ने कुल 14 सलाह जारी किए हैं, जिनका महिलाओं को पालन करने के लिए कहा गया है। सोशल मीडिया पर इस एडवाइजरी को लेकर लोगों का गुस्सा फूटा। लोगों ने पूछा कि अगर सब कुछ आम नागरिकों व महिलाओं को ही करना है तो फिर पुलिस क्या करेगी?

तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर की भी लगातार आलोचना हो रही है। पुलिस की एडवाइजरी ने आग में घी डालने का काम किया है। इस एडवाइजरी में निम्नलिखित 14 सलाह हैं:

  1. महिलाएँ जब भी घर से बाहर निकलें, वो अपने दोस्तों, रिश्तेदारों अथवा परिजनों को बता कर जाएँ कि वो कहाँ जा रही हैं। साथ ही यह भी बताएँ कि वो कब तक वापस लौटेंगी।
  2. अपना अंतिम लोकेशन हमेशा शेयर करते रहें।
  3. ट्रांसपोर्ट का माध्यम: अगर महिलाएँ टैक्सी या ऑटो से जा रही हैं तो उसके नंबर प्लेट की फोटो लेकर शेयर करें। ड्राइवर की बैकसीट पर उसके फोन नंबर इत्यादि का विवरण होता है। उसे भी शेयर करें। टैक्सी के आईडी कार्ड से भी ये जानकारियाँ ली जा सकती हैं।
  4. अगर महिलाएँ किसी अनजान जगह पर जा रही हैं तो वहाँ का रुट पहले से पता कर लें और रास्तों से परिचित हो जाएँ।
  5. अगर महिलाएँ किसी का इंतज़ार कर रही हैं तो हमेशा भीड़भाड़ वाले इलाक़े में ही रहें। जहाँ रौशनी हो या अँधेरा न हो, उसी इलाक़े में इंतज़ार करें। अगर मदद की ज़रूरत हो तो पुलिस की पट्रॉल कार या फिर ब्लू कलर की पुलिस बाइक को इशारा देकर रोकें। वो आपकी ही सुरक्षा और सलामती के लिए हैं।
  6. अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति नहीं है तो नजदीकी दुकान पर चली जाएँ। किसी भी कमर्शियल यूनिट के पास खड़ी हो जाएँ, इससे आसपास की ट्रैफिक में लोग आपको आसानी से देख सकते हैं और मदद कर सकते हैं।
  7. हमेशा अपने-आप को पुलिस की 100 नंबर पर कॉल करने के लिए तैयार रखें।
  8. कृपया ‘हॉक आई’ एप्लिकेशन डाउनलोड करें और लोकेशन सर्विस हमेशा ऑन रखें।
  9. किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में आसपास के लोगों से मदद माँगें।
  10. अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति है तो फोन पर अपने किसी सम्बन्धी से बात करने का नाटक करें। ऐसा दिखाएँ कि वो सम्बन्धी कोई पुलिसवाला है और उससे बातचीत का ड्रामा करते हुए अपनी लोकेशन शेयर करें। इससे आप पर ग़लत नज़र रखने वाले डर जाएँगे।
  11. आत्मविश्वासी बनें और कोई कुछ गड़बड़ करता है तो उससे ऊँची व रौबदार आवाज़ में बात करें। अगर स्थिति और ख़राब होती है तो मदद के लिए ज़ोर से चिल्लाएँ।
  12. अगर स्थिति और ख़राब हो जाए तो मदद के लिए चिल्लाते हुए भीड़भाड़ वाले इलाक़े की ओर भागें।
  13. इलाक़े के गड़बड़ लोगों के बारे में पुलिस को सूचित करें। हमें साथ मिल कर अपराध को रोकना है।
  14. अगर आप वेरिफिकेशन के लिए फोटो भेजना चाहते हैं तो 9490616555 पर व्हाट्सप्प के माध्यम से सेंड करें।

ये एडवाइजरी हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर अंजनी कुमार ने जारी की है। सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा कि महिलाएँ तो पहले से ही सावधान होकर चलती हैं, ऐसे में उन्हें सलाहों का पुलिंदा थमा देना कहाँ तक उचित है? महिलाएँ अगर हर पल अपनी सुरक्षा और सलामती के बारे में ही सोचती रहें फिर वो और काम कैसे करेंगी? कुछ लोगों ने लिखा कि महिलाओं को घर में ही रहने की एडवाइजरी जारी कर देनी चाहिए। वो न घर से निकलेंगी और न अपराध होगा। एक अन्य यूजर ने इसकी तुलना शरिया क़ानून से कर डाली।

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जिसने फाड़ा राम जन्मभूमि का नक्शा और की मस्जिद की वकालत, मुस्लिम पक्ष ने उस वकील को ही हटा दिया

अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को केस से हटा दिया गया है। इसकी जानकारी खुद उन्होंने दी। राजीव धवन ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा, “मुझे ये बताया गया कि मुझे केस से हटा दिया गया है, क्योंकि मेरी तबियत ठीक नहीं है। ये बिल्कुल बकवास बात है। जमीयत को ये हक है कि वो मुझे केस से हटा सकते हैं लेकिन जो वजह दी गई है वह गलत है।” बता दें कि राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम पार्टियों का पक्ष रखा था।

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मुझे एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड और जमीयत का प्रतिनिधित्व करने वाले एजाज मकबूल ने बाबरी मामले से हटा दिया है। मैंने बिना आपत्ति के उन्हें खुद को हटाए जाने के निर्णय को स्वीकार करते हुए औपचारिक पत्र भेज दिया है।”

आगे उन्होंने कहा कि अब वे इस मामले में शामिल नहीं होंगे। इससे पहले सोमवार (दिसंबर 2, 2019) को जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल किया है। अपनी याचिका में जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वो 9 नवंबर को सुनाए गए फ़ैसले की समीक्षा करे। इतना ही नहीं, हिन्दुओं के पक्ष में आए उस फ़ैसले पर स्टे लगाने का भी आग्रह किया गया है। इसके साथ ही इस पुनर्विचार याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में ’14 गलतियाँ’ गिनाई गई हैं और दावा किया गया है कि समीक्षा का आधार भी यही है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को अयोध्या मामले पर अपना फैसला सुनाया था। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली पाँच जजों की पीठ ने विवादित जमीन पर रामलला विराजमान के हक में फैसला दिया है। साथ ही सरकार को यह भी आदेश दिया कि वह मस्जिद के लिए सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को अलग से पाँच एकड़ जमीन मुहैया कराए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को राम मंदिर के लिए 3 महीने में एक्शन रिपोर्ट बनाकर निर्माण कार्य शुरू करने का आदेश दिया है।

जमीयत ने इसे शरीयत के ख़िलाफ़ बताया था। मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि एक बार जिस जगह पर मस्जिद बन गई, क़यामत तक वहाँ सिर्फ़ मस्जिद ही रहती है। जमीयत ने अपनी याचिका में कहा है कि मुस्लिम पक्ष ने मस्जिद के लिए कहीं और जमीन नहीं मॉंगी थी। लेकिन, फैसले में संतुलन बनाने के इरादे से ऐसा आदेश सुनाया गया।