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ज़िंदा जलाने की धमकी देने वाले कॉन्ग्रेस MLA के ख़िलाफ़ ‘सत्याग्रह’ पर बैठीं साध्वी प्रज्ञा, मंत्री ने बताया नौटंकी

कॉन्ग्रेस के विधायक ने भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को ज़िंदा जला देने की धमकी दी थी। विधायक गोवर्धन दांगी के ख़िलाफ़ पुलिस में मामला दर्ज कराने पहुँचीं साध्वी प्रज्ञा धरने पर बैठ गई हैं। उनका आरोप है कि पुलिस कॉन्ग्रेस विधायक के ख़िलाफ़ मामला नहीं दर्ज कर रही है। विधायक ने कहा था कि वो सिर्फ़ पुतले ही नहीं जलाएँगे बल्कि साध्वी प्रज्ञा अगर राजगढ़ आती हैं तो उन्हें ही ज़िंदा जला देंगे। अब साध्वी प्रज्ञा ने आरोप लगाया है कि पुलिस कॉन्ग्रेस सरकार के दबाव के कारण मामला दर्ज नहीं कर रही है।

संसद में साध्वी प्रज्ञा द्वारा नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने की ख़बर आई थी, जिसके बाद विधायक दांगी ने आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए धमकी दी थी। साध्वी प्रज्ञा ने शनिवार को भी कमला नगर पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया था। अधिकारियों ने साध्वी प्रज्ञा से लिखित शिकायत की माँग की, लेकिन साध्वी की ज़िद थी कि बिना आवेदन के पहले एफआईआर दर्ज की जाए। इसके बाद पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी तीखी नोक-झोंक हुई। हालाँकि, शनिवार (दिसंबर 7, 2019) को महिलाओं के सम्मान की लड़ाई जारी रखने की बात कह साध्वी ने धरना ख़त्म कर दिया था।

रविवार को भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा फिर से धरने पर बैठीं। कमलनाथ के मंत्री पीसी शर्मा ने साध्वी प्रज्ञा के धरने की तुलना ‘एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी’ वाले कहावत से की है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोडसे को महिमामंडित करने के कारण ही साध्वी प्रज्ञा को रक्षा सम्बन्धी संसदीय समिति में शामिल किया गया था। उन्होंने साध्वी के धरने को ‘नौटंकी’ बताते हुए कहा कि उन्हें भोपाल की जगह दिल्ली में धरने पर बैठना चाहिए। वहीं साध्वी प्रज्ञा ने अपने धरने को ‘सत्याग्रह’ का नाम दिया है।

इससे पहले कॉन्ग्रेस मंत्री के ज़िंदा जलाने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए साध्वी प्रज्ञा ने कहा था कि कॉन्ग्रेसियों को ज़िंदा जलाने का पुराना अनुभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने 1984 में सिखों को जलाया और नैना साहनी को तंदूर में जलाया। साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने उन्हें आतंकी बताया है और उनके विधायक उन्हें ज़िंदा जलाने की धमकी दे रहे हैं।

‘सबसे बड़ा रेपिस्ट था नेहरू, उसके ही खानदान की देन है बलात्कार, आतंकवाद और नक्सलवाद’

विश्व हिन्दू परिषद की नेता साध्वी प्राची ने मेरठ के एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि नक्सलवाद, आतंकवाद, बलात्कार यह सब नेहरू खानदान की देन है। उन्होंने कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ भी मोर्चा खोला। दरअसल, राहुल गाँधी ने हाल ही में हैदराबाद और उन्नाव के गैंगरेप पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि भारत रेप कैपिटल में विकसित हो रहा है, उनके इसी बयान पर साध्वी प्राची ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “सबसे बड़ा रेपिस्ट तो नेहरू था।”

ख़बर के अनुसार, साध्वी प्राची ने केवल राहुल गाँधी पर ही नहीं बल्कि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब अखिलेश सत्ता पर आसीन होते हैं तो वो बलात्कारियों को बचाते हैं और जब वो विपक्ष में होते हैं तो धरने पर बैठते हैं। बता दें कि शनिवार (7 दिसंबर) को सपा नेता अखिलेश यादव उन्नाव रेप कांड के ख़िलाफ़ विधानसभा के बाहर धरने पर बैठे थे।

वहीं, VHP नेता साध्वी प्राची ने हैदराबाद गैंगरेप के आरोपितों के एनकाउंटर पर हैदराबाद पुलिस की तारीफ़ की। इस दौरान उन्होंने कहा कि जैसा हैदराबाद पुलिस ने किया उससे सीख लेकर यूपी पुलिस को भी उन्नाव कांड पर ऐसी ही कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने उन्नाव गैंगरेप के सभी आरोपितों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की माँग भी की।

इससे पहले साध्वी प्राची ने उन्नाव गैंगरेप पीड़िता की मृत्यु के बाद कहा था कि आरोपितों को ऑन स्पॉट सज़ा दिए जाने की आवश्यकता है। मालूम हो कि साल भर पहले शुभम और शिवम त्रिवेदी ने पीड़िता का अपहरण करने बाद उसके साथ गैंगरेप किया था। मार्च 2019 में पुलिस ने केस दर्ज किया। 30 नवम्बर को इन्हें बेल मिली। गुरुवार (5 दिसंबर) को जब पीड़िता रायबरेली कोर्ट जा रही थीं, तब शिवम और शुभम के अलावा हरिशंकर त्रिवेदी, राम किशोर त्रिवेदी और उमेश बाजपाई ने उन्हें पीटा, चाकुओं से गोदा और फिर तेल उड़ेल कर आग लगा दी।

पीड़िता को गुरुवार (5 दिसंबर) की शाम को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। अस्पताल ने तभी कहा था, “अगले 24-48 घंटे उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अभी वेंटिलेटर पर रखा गया है। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। उनका शरीर 90 प्रतिशत तक जल गया है, शरीर पर काफी चोटें हैं।” लेकिन डॉक्टरों की पूरी कोशिश के बावजूद उन्नाव की यह बेटी अपने साथ हुए जघन्य अपराध के दोषियों को सजा मिलते देख पाने की ख्वाहिश लिए इस दुनिया से चली गईं।

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43 की मौत के बाद फैक्ट्री मालिक रेहान के ख़िलाफ़ FIR दर्ज, पुलिस ने किया गिरफ्तार, पूछताछ जारी

रविवार को दिल्ली की अनाज मंडी इलाक़े में तड़के एक सामान बनाने वाली फैक्ट्री में आग लगने से 43 लोगों की मौत हो गई। इस घटना के संबंध में एक FIR दर्ज की गई है और मामले को आगे की जाँच के लिए अपराध शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया है। खबर के अनुसार फैक्ट्री मालिक रेहान को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

ख़बर के अनुसार, प्लॉट के मालिक मोहम्मद रहीम हैं, जिन्होंने इसे दस साल पहले ख़रीदा था। बाद में, उन्होंने इसे अपने तीन बेटों: रेहान, शान ई-लाही और इमरान के बीच समान रूप से बाँट दिया था। आज सुबह जो आग लगी थी वो रेहान के कारखाने के हिस्से में लगी थी। अब, कारखाने के मालिक के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 304 (10 साल की अधिकतम कारावास के साथ ग़ैरइरादन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

दिल्ली पुलिस पीआरओ एमएस रंधावा ने कहा,

“आईपीसी की धारा 304 के तहत FIR दर्ज की गई है। मामला अब क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है। सुबह 5.22 बजे एक इमारत में आग लगने की सूचना पुलिस को मिली थी। आग बुझाने के लिए फायर टेंडरों को मौके पर भेजा गया। बचाव अभियान में, हमने लगभग 60 लोगों को बचाया लेकिन दुर्भाग्य से 43 लोगों ने अपनी जान गँवा दी।”

उन्होंने कहा, “आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। आग लगने के बाद उठे धुएँ के कारण परिसर में बहुत सारा प्लास्टिक था। अधिकतर मौतें धुएँ के कारण श्वासावरोध के कारण हुईं। हमने अधिकांश घायलों को एलएनजेपी अस्पताल और लेडी हार्डिंग अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया है।”

इसके अलावा, यह भी बताया गया कि चार मंज़िला इमारत में दिल्ली अग्निशमन सेवा से आग की निकासी नहीं है और इसके परिसर में कोई अग्नि सुरक्षा उपकरण भी स्थापित नहीं किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि दमकल विभाग और भीड़भाड़ वाले इलाक़े में से किसी भी इकाई के पास अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) नहीं था, जिससे बचाव कार्य और मुश्किल हो गया।

आज सुबह आग लगने पर 50 से अधिक लोग इमारत के अंदर थे। आग लगने की सूचना मिलने पर 15 फायर टेंडरों को घटनास्थल पर भेजा गया, लेकिन बाद में आग की चपेट में आने के कारण 10-12 और फायर टेंडर भेजे गए। अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की कि आग को पूरी तरह से बुझा दिया गया था।

तवलीन सिंह के लिए CAB-NRC एक, कहा- अवैध घुसपैठियों को नहीं दी नागरिकता तो मुस्लिम जिहादी बन जाएँगे

जब से हिंदुओं के ख़िलाफ़ लगातार जहर उगलने वाले और टाइम मैगजीन में लिखने वाले पत्रकार आतिश तासीर की ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) स्टेटस को रद किया गया है। इनकी माँ तवलीन सिंह केंद्र सरकार से काफी चिढ़ी हुई हैं। आतिश तासीर की ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया स्टेस के रद हो जाने के बाद से ही तवलीन सिंह लगातार सरकार के ऊपर हमलावर है। इस बार उन्होंने सरकार के ऊपर निशाना साधने के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) टॉपिक चुना है।

द इंडियन एक्सप्रेस के एक लेख में, तवलीन सिंह का दावा है कि नागरिकता संशोधन विधेयक के माध्यम से समुदाय विशेष को निशाना बनाया जा रहा है। लेखों में वह जिस भाषा का उपयोग करती है, उससे यह जानना मुश्किल हो जाता है कि वह CAB की बात कर रही हैं या फिर NRC की। शायद उसके हिसाब से दोनों एक ही मुद्दा है, लेकिन वास्तव में दोनों मुद्दे बेहद अलग हैं।

तवलीन सिंह ने नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में अपने लेख में लिखा है, “नागरिकता विधेयक के बारे में ऐसी बातें हैं जो बहुत परेशान करती हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने जिस तरह से यह स्पष्ट किया है कि यह मुस्लिमों को निशाना बनाता है, वह और भी परेशान करता है।” हालाँकि, अमित शाह ने कभी भी ऐसी कोई बात नहीं कही है। नागरिकता संशोधन विधेयक पड़ोसी देशों में उत्पीड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करना चाहता है। यह उल्लेखनीय रूप से यह बताने से इनकार करता है कि अन्य देशों के मुस्लिमों को नागरिकता संशोधन विधेयक के माध्यम से निशाना बनाया जा रहा है।

तवलीन सिंह लेख में आगे लिखती हैं, अधिकांश ‘दीमक’ जिसका शाह ने अपमान किया है, वे बहुत गरीब लोग हैं। आम तौर पर उनके पास यह साबित करने के लिए दस्तावेज नहीं हैं कि वे भारतीय हैं या नहीं। वे अब उन अधिकारियों की दया पर निर्भर होंगे जो अक्सर कानून का दुरुपयोग अमानवीय जबरन वसूली के नए स्रोत के रूप में करेंगे।” यहाँ पर यह स्पष्ट हो जाता है कि तवलीन सिंह NRC और CAB के मुद्दे को एक ही समझ रही हैं।

बता दें कि अमित शाह ने कभी भी किसी भारतीय मुस्लिम के लिए ‘दीमक’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है। उन्होंने गैरकानूनी प्रवासियों पर बात करते हुए एक उदाहरण दिया, जो कि उत्तर पूर्व और पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर जनसांख्यिकीय बदलाव का कारण बन रहा है। अगर लोग बांग्लादेश से अवैध अप्रवासन का मुद्दा उठाते हैं, तो यह दावा करना हास्यास्पद है कि भारतीय मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा यदि हम एक मजबूत और सुरक्षित राष्ट्र चाहते हैं, तो NRC एक आवश्यकता है। और जिन लोगों को इसमें जगह नहीं मिलती है, उन्हें अपनी परिस्थिति को साबित करने का पर्याप्त अवसर दिया जाएगा। इसलिए इस तरह का सुझाव देना बेहद निंदनीय है।

तवलीन के लेख में सबसे अधिक आपत्तिजनक हिस्सा तब आता है जब यह कहा जाता है कि CAB का विभाजन से कोई लेना-देना नहीं है। वह कहती हैं, “कोई है जो पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के परिवार से है, मैं आपको बता सकती हूँ कि विभाजन का ‘नतीजा’ बहुत पहले निपटा दिया गया था। यह नया कानून भारतीय मुस्लिमों को यह साबित करने के लिए एक अधिनायकवादी और बहुत ही ख़राब काम से ज्यादा कुछ नहीं है कि नए भारत में मुस्लिमों के पास हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों और ईसाइयों की तुलना में कम अधिकार है और वे पहले से ही बेहतर रूप से इसके आदी हैं।

यह बहुत स्पष्ट नहीं है कि नागरिकता के लिए पड़ोसी देशों से धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्राथमिकता कैसे दी जाती है जो भारतीय मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाती है। दरअसल भारतीय मुस्लिमों का CAB से कोई लेना-देना नहीं है और वे किसी भी तरह से इससे प्रभावित नहीं हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे तवलीन सिंह अपनी तरफ से खुद को पीड़ित महसूस कर रही हैं जबकि उनके पास ऐसा करने का कोई कारण नहीं है।

और CAB का विभाजन के साथ सब कुछ करना है। लिबरल गिरोह हमें यह बताना चाह रहा है कि भारत 15 अगस्त, 1947 को एक खाली स्लेट से शुरू हुआ था और जब तीन साल बाद 26 जनवरी को नया संविधान लागू हुआ, तो पिछली बातें जादुई रूप से ख़त्म हो गई। हालाँकि, देश ऐसा नहीं सोचता है। अगर कोई राज्य खुद को पूरी तरह से उन कारकों से अलग कर लेता है, जो उसके अस्तित्व के कारण होते हैं, तो वह एक समृद्ध राज्य होने की उम्मीद नहीं कर सकता है।

भले ही लिबरल कुछ भी कहें, भारत के पास पड़ोसी देशों में मुस्लिमों की तुलना में गैर-मुस्लिमों की अधिक जिम्मेदारी है। इसका कारण यह है कि भारत का विभाजन धर्म के आधार पर ही हुआ था। भारत के पास उन लोगों के वंशजों के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं है जो एक गृहयुद्ध में लगे हुए थे ताकि उनके बच्चे एक इस्लामिक राज्य में रह सकें।

तवलीन सिंह अवैध अप्रवासी समस्या के बारे में अपनी महान अज्ञानता को प्रदर्शित करती हैं, जब वह लिखती हैं, “यदि हमारे पास संयुक्त राज्य अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर मौजूद समान स्थिति है, या फिर जब सीरियाई युद्ध एक बड़े पैमाने पर पलायन का कारण बना, तो यूरोप में यह संशोधन हुआ। इसका वर्तमान भेदभावपूर्ण रूप में भी कुछ अर्थ हो सकता है। लेकिन यह वह स्थिति नहीं है जिसका हम सामना कर रहे हैं।”

स्पष्ट रूप से, तवलीन सिंह का देश के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में क्या हो रहा है, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। कस्बों और गाँवों में इतनी जल्दी बदलाव आया है कि इसे बहुत अच्छी तरह से जनसांख्यिकीय आक्रमण के रूप में चिह्नित किया जा सकता है। इसके अलावा भारत को इस बात की परवाह नहीं करनी चाहिए कि यूरोप क्या कर रहा है या अमरीका क्या सोचता है। हमारे लोगों की सुरक्षा और हमारे देश की स्थिरता पश्चिम के समर्थन या पसंदगी से अधिक मायने रखती है। हालाँकि, तवलीन सिंह के लिए यह मानना मुश्किल हो सकता है कि यह कैसे है।

अंततः तवलीन सिंह एक बड़ा ट्विस्ट देते हुए लिखतीं है, “दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी होने का बाद भी मुस्लिमों ने दुनिया भर में जिहाद के लिए बहुत कम प्रयास किया है। लेकिन इस तरह से चीजें कब तक बनी रहेंगी?” इस तरह, से तो अब भारतीय मुस्लिम CAB और NRC की वजह से भारत के खिलाफ जिहाद शुरू कर सकते हैं।” इस पर बहस करना बेहूदा और मूर्खतापूर्ण है।

वैसे लिबरल द्वारा किए गए तर्क अक्सर जिहाद के औचित्य के लिए आधार बनाने के रूप में दिखाई देते हैं। अगर तवलीन सिंह की माने तो CAB और NRC भारतीय मुस्लिमों के लिए एक नया जिहाद शुरू करने के लिए पर्याप्त है। जिहाद किसी भी तरह से उचित नहीं है लेकिन फिर भी यहाँ तवलीन सिंह उसे उकसाता हुआ तर्क देती हैं।

यह किसी के लिए आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए कि लिबरलों, वामपंथियों ने लंबे समय तक कश्मीर में जिहाद को सही ठहराया है। वे गंभीरता से मानते आए हैं कि जिहाद सरकारी नीतियों के कारण होता है न कि उनके धर्म के फरमानों और मौलवी और मौलानाओं द्वारा फैलाई गई विषाक्तता के कारण। क्या भविष्य में भारत को एक और गृहयुद्ध का सामना करना चाहिए, ऐसा मालूम होता है कि उदारवादी यह दावा करेंगे कि भारत अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए लागू की गई नीतियों के कारण ऐसा कर रहा था। ऐसा लगता है कि तवलीन सिंह जैसे उदारवादियों ने भारतीय राज्य के खिलाफ जिहाद छेड़ने वाले मुस्लिमों के लिए सरकार को दोषी ठहराया है, न कि उनके धर्म के समस्यात्मक पहलुओं को। और यह वास्तव में बेहद चिंता का विषय है।

तवलीन सिंह ने नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में अपने लेख में यह तर्क दिया है कि न केवल सरकार को भारतीय मुस्लिमों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने से सावधान रहना चाहिए, बल्कि उन्हें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उम्मा को अपमानित न करें। हालाँकि अपने लेख में वह यह नहीं बताती हैं कि भारतीय मुस्लिमों को CAB द्वारा पीड़ित क्यों महसूस करना चाहिए। लेकिन यहाँ तवलीन सिंह को यकीन है कि CAB, जो पड़ोसी देशों के मुस्लिमों को एक निश्चित विशेषाधिकार प्रदान नहीं करता है, वो भारतीय मुस्लिमों को भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए विवश करेगा और इसका जिम्मेदार CAB होगा। उनके लेख से ऐसा प्रतीत होता है कि वह ग्लोबल उम्मा में विश्वास करती है। वो न केवल उम्मा में अपने विश्वास की पुष्टि करती हुई नजर आ रही हैं, बल्कि वह निश्चित रूप से इसके साथ वकालत करती हुई भी दिखाई दे रही हैं।

AMU के छात्र उस्मानी और तल्हा खान ने पोस्टर में बाबरी की जगह दिखाया आडवाणी का सिर, FIR दर्ज

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों के कारण चर्चा में है। बाबरी विध्वंस की बरसी पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान एएमयू के दो छात्रों ने पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को लेकर आपत्तिजनक पोस्टर तैयार किया। उस पोस्टर में बाबरी मस्जिद को आडवाणी के सिर के रूप में दिखाया गया। दोनों छात्रों पर मामला दर्ज कर लिया गया है। स्थानीय भाजपा नेता प्रतीक चौहान की शिकायत के बाद पुलिस ने सरजील उस्मानी और तल्हा मन्नन ख़ान के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की। 6 दिसंबर को पुलिस पूरी तरह सतर्क थी और डिजिटल मीडिया पर भी सक्रीय थी, फिर भी दोनों छात्रों ने आपत्तिजनक पोस्टर शेयर किए।

इन दोनों छात्रों ने एएमयू के कैनेडी हाउस लॉन में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की 27वीं बरसी पर विरोध दर्ज कराने के लिए सभा आयोजित की थी। दोनों के ख़िलाफ़ आईटी एक्ट धारा 153 ए (धर्म, मूलवंश, भाषा, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता फैलाने और आपसी सौहार्द्र भंग करने वाला कार्य करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। स्थानीय भाजयुमो नेताओं ने कहा कि इन छात्रों ने पूर्व उप-प्रधानमंत्री आडवाणी का अपमान किया है।

भाजयुमो नेता प्रतीक चौहान ने कहा कि ‘शौर्य दिवस’ से पहले हुई बैठक में पुलिस ने लोगों से कहा था कि वो ऐसा कोई भी कार्य न करें, जिससे सामाजिक सौहार्द को ख़तरा हो। भाजयुमो नेताओं ने कहा कि क़ानून-व्यवस्था भंग न हो, इसके लिए उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया। साथ ही उन्होंने पूछा कि एएमयू के छात्रों द्वारा बाबरी विध्वंस की बरसी पर सभा आयोजित करने का औचित्य क्या था? आरोपित उस्मानी ने बताया कि उनलोगों को धमकाने के लिए पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। उस्मानी ने कहा कि वो लोग नहीं चाहते हैं कि मुस्लिम बाबरी मस्जिद को याद रखें।

उस्मानी ने कहा कि बाबरी विध्वंस को वो लोग न तो भूल सकते हैं और न ही इसमें शामिल लोगों को माफ़ कर सकते हैं। ‘आउटलुक’ के साथ बातचीत में आरोपित ने कहा कि उसने जब यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया, तब से ही ऐसी सभाओं का आयोजन करता रहा है। उसने बताया कि ‘शौर्य दिवस’ के दिन हुई बैठक को उसके और तल्हा खान के अलावा 5 लोगों ने सम्बोधित किया, जिसमें सभी एएमयू के ही छात्र थे। साथ ही उसने कहा कि इस कार्यक्रम का पोस्टर उसने नहीं तैयार किया था बल्कि उसने तो सिर्फ़ उस पोस्टर को एडिट कर के उसमें कर्यक्रम के स्थान और समय के बारे में बताया था।

फिर उस्मानी ने पूछा कि अगर मान भी लिया जाए कि आडवाणी की वो तस्वीर उसने ही बनाई, फिर भी उसने क्या ग़लत किया? आरोपित ने दावा किया कि उसने ऐसा कर के कुछ भी ग़लत नहीं किया है। वहीं दूसरे आरोपित तल्हा ने कहा कि सोशल मीडिया पर भी अपने विचार रखने से उन्हें रोका जा रहा है। उसने कहा कि पोस्टर शेयर करना अपराध नहीं है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

कय्यूम और अय्यूब ने सेंधमारी करके 100 से अधिक चोरी की वारदातों को दिया अंजाम: बनाई करोड़ों की प्रॉपर्टी

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (6 दिसंबर) को ऐसे दो सगे भाइयों को गिरफ़्तार किया है जो पिछले कुछ समय से यमुनापार इलाक़े में चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहे थे। गिरफ़्तार किए गए आरोपितों की पहचान कय्यूम (30 वर्षीय) और अय्यूब (40 वर्षीय) के रूप में हुई है। दोनों आरोपित नंद नगरी इलाक़े के रहने वाले हैं। पुलिस का कहना है कि दोनों भाइयों ने अब तक पूर्वी दिल्ली में 100 से अधिक चोरी की वारदातों को अंजाम दिया है।

दोनों भाइयों ने चोरी के माल से दिल्ली के कबीर नगर में 47 लाख रुपए और यमुना विहार में 65 लाख रुपए के दो मकान भी ख़रीद लिए थे। इतना ही नहीं, पुलिस ने इनके पास से 27 लाख रुपए नकद, 53 मास्टर की (चाबी), 2.5 किलोग्राम का सोना, 11 घड़ियाँ, 7 मोबाइल फोन और कई होम अप्लाइंसेज बरामद किए हैं। इसके अलावा, इन दोनों की गिरफ़्तारी से चोरी की 64 वारदातों को सुलझाने का दावा भी पुलिस ने किया।

डीसीपी ईस्ट डिस्ट्रिक जसमीत सिंह का कहना है कि कुछ महीनों में दिन में चोरी की कई वारदातों की घटनाएँ सामने आ रही थी। स्पेशल स्टाफ़ की टीम लंबे समय से चाेराें की तलाश में जानकारी जुटा रही थी। कई जगह से सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खँगाली गई, इन फुटेज में आरोपित नज़र आए, लेकिन उनकी पहचान नहीं हो पा रही थी। 

इसके आगे उन्होंने बताया कि शुक्रवार को पुलिस को एक अहम सुराग मिला। एक मुखबिर ने बताया कि इन वारदाताें में शामिल आरोपित कड़कड़डूमा कोर्ट के पास आएँगे। उसके बाद ट्रैप लगाकर दोनों भाइयाें को धर लिया गया। कय्यूम पर 13 केस दर्ज हैं। वहीं, अय्यूम भी एक बार गिरफ़्तार हो चुका है। पुलिस ने बताया कि दाेनाें ने चोरी के पैसाें से खरीदे मकानों की साज-सज्जा पर दिल खोलकर पैसा ख़र्च किया था। 

पुलिस को इस बात का भी पता चला है कि जब दोनों भाई चोरी की वारदात को अंजाम देने जाते थे, तो उस दौरान एक भाई चाेरी करता था और दूसरा बाहर खड़ा रहकर पहरा देता था।

आरोपितों ने पूछताछ के दौरान अपना ज़ुर्म क़बूल करते हुए बताया कि वह दाेनाें यमुनापार इलाक़े में ही चोरी करते थे। अय्यूब चाेरी वाले घराें से कुछ दूर खड़ा होकर बाहर पहरा देता, जबकि कय्यूम घर के अंदर घुस जाता था। वारदात को अंजाम देने से पहले दोनों भाई पड़ोसियों से बातचीत कर खाली घराें की जानकारी जुटाते थे। चोरी के लिए मास्टर की का इस्तेमाल करते थे। इससे पहले, कय्यूम 2015 में पहली बार पकड़ा गया था। उस समय वो चोरी की मंशा से एक लड़की के घर में घुसा था, लेकिन उसके शोर मचाने पर की वजह से वो मौके पर ही पकड़ा गया था।

ख़बर के अनुसार, सेंधमारी के लिए ऐसे घरों का चयन किया जाता था, जो काफ़ी समय से बंद हों और वहाँ कोई रहता न हो। इसके बाद आरोपित उस घर में सेंधमारी करने जाते थे तो अच्छे कपड़े पहनकर जाते थे, जिससे पड़ोसियों को लगे कि वो उस घर के सदस्यों के कोई रिश्तेदार हों।

डॉ रेड्डी के पास बन्दूक होती तो वो भी वही करतीं जो पुलिस ने किया: साइना ने ‘मानवाधिकार पत्रकार’ को लताड़ा

हैदराबाद में डॉक्टर प्रीति (बदला हुआ नाम) गैंगरेप व हत्याकांड के चारों आरोपितों को हैदराबाद पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। घटनास्थल पर क्राइम सीन के रीक्रिएशन के दौरान मोहम्मद आरिफ और जोल्लू शिवा समेत सभी आरोपितों ने पुलिस का बन्दूक छीन कर भागने की कोशिश की और पत्थरबाजी की, जिसके बाद पुलिस को आत्मरक्षा में उन्हें गोली मारनी पड़ी। बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल और पहलवान गीता फोगट सहित कई अन्य सेलेब्रिटीज ने भी हैदराबाद पुलिस की पीठ थपथपाई। एक पत्रकार ने साइना नेहवाल के इस बयान के लिए उनकी आलोचना की, जिसके बाद उन्हें साइना ने करारा जवाब दिया।

विश्व की नंबर एक बैडमिंटन खिलाड़ी रहीं साइना नेहवाल के बयान को बेतुका बताते हुए पत्रकार अन्ना एमएम वेत्तिकाड ने कहा कि इससे उन्हें भले ही तालियाँ मिल जाएँगी लेकिन इससे समाज को काफ़ी हानि होगी। अन्ना ने कहा कि महिलाओं की पॉजिटिव रोल मॉडल होने के बावजूद साइना का इस तरह से बयान देने का दुष्प्रभाव बहुत बड़ा होगा। उन्होंने कहा कि वो साइना से निवेदन करती हैं, भीख माँगती हैं और अनुरोध करती हैं कि किसी भी मुद्दे पर टिप्पणी करने से पहले उसका अच्छे से अध्ययन कर लें।

साइना नेहवाल द्वारा हैदराबाद पुलिस की तारीफ़ किया जाना फ़िल्म समीक्षक वेत्तिकाड को नागवार गुजरा और उन्होंने स्टार बैडमिंटन प्लेयर को भला-बुरा सुना दिया। इसके बाद साइना ने पत्रकार को करारा जवाब दिया। साइना ने स्पष्ट कर दिया कि वो इसीलिए बयान नहीं देती हैं कि लोग तालियाँ पीटें। साइना नेहवाल ने कहा कि पीड़िता डॉक्टर रेड्डी पर जो गुजरी, उसके बारे में उनके पास सोचने तक की भी हिम्मत नहीं है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि इस घटना के होने के बावजूद उन्हें बाद में ख़ुशी तब मिली जब चारों बलात्कारियों को पुलिस ने मार गिराया।

साइना नेहवाल ने पत्रकार अन्ना को कहा कि उनके विचारों से न तो बलात्कारियों के मन में कोई डर बैठेगा और न ही क़ानून बदल जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर इस घटना के समय पीड़िता के पास बन्दूक होती तो वो भी यही करतीं। अगर डॉक्टर रेड्डी के पास बन्दूक होती तो वो भी चारों को मार गिराती। साइना नेहवाल के इस जवाब के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी प्रशंसा की।

अजित पवार ने मुझसे सरकार बनाने के लिए किया था सम्पर्क, पर्दे के पीछे का सारा सच बाहर आएगा: देवेंद्र फडणवीस

पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार (7 दिसंबर) को एक टीवी चैनल को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) नेता अजित पवार ने उनसे भाजपा के साथ सरकार बनाने की माँग की थी और कहा था कि उनके चाचा शरद पवार को उनकी इस प्लानिंग के बारे में पता है।

फडणवीस ने कहा,

“अजित पवार मेरे पास आए और कहा कि वे कॉन्ग्रेस के साथ सरकार नहीं बनाना चाहते हैं, और यह कि तीन दलों वाली सरकार स्थिर नहीं रह पाएगी। उन्होंने कहा था कि इस बारे में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार को अपनी योजनाओं की जानकारी दी थी। इसके अलावा, उन्होंने NCP के उन विधायकों को भी बताया जो उनके सम्पर्क में थे इस बात से भी शरद पवार वाक़िफ़ थे।”

ग़ौरतलब है कि इससे पहले एक साक्षात्कार में शरद पवार ने कहा था कि वह जानते हैं कि अजित पवार, फडणवीस से मिल रहे हैं, लेकिन सरकार बनाने को लेकर उनके बीच क्या बातचीत हो रही थी, इससे वो अनभिज्ञ थे। 

इसके आगे भाजपा नेता फडणवीस ने कहा कि अजित के साथ उनकी चर्चा कुछ दिनों से चल रही थी और ज्यादातर NCP विधायकों को भाजपा से हाथ मिलाने के बारे में जानकारी थी। उनहोंने कहा, “मैं कह सकता हूँ कि अधिकांश विधायक इससे अवगत थे। न केवल वे जो अजित पवार के सम्पर्क में थे, बल्कि मैंने ख़ुद उनमें से कई लोगों से बात की।”

फडणवीस ने बताया कि 1-2 दिनों की बातचीत को अंतिम रूप दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि सरकार बनाने पर कोई भी निर्णय केवल एक दिन की चर्चा से नहीं लिया जा सकता बल्कि उससे पहले से बातचीत करनी होती है। बाद में, NCP ने फडणवीस के दावों का खंडन किया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि अजित पवार अपने हिसाब से आए थे। उन्होंने कहा, “क्या कोई उन्हें कुछ भी करने के लिए मजबूर कर सकता है? वह अपनी मर्ज़ी से आए थे और उनके साथ NCP के कई विधायक भी थे जो उनका समर्थन कर रहे थे।”

यह पूछे जाने पर कि क्या वास्तव में शरद पवार को सब पता था, इस पर फडणवीस ने कहा,

“यह आपको अजित पवार से पूछना होगा। उन्होंने मुझे बताया था कि वो (शरद पवार) जानते थे। मैं केवल यह कह सकता हूँ कि पर्दे के पीछे जो कुछ भी है, वो उचित समय पर सामने आएगा।”

उन्होंने कहा कि अजित के विद्रोह से कुछ समय पहले पीएम नरेंद्र मोदी के साथ शरद पवार की मुलाक़ात के बारे में भी कुछ नहीं बताया गया था। पवार ने कहा था कि मोदी ने उन्हें भाजपा के साथ काम करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।

फडणवीस ने कहा, “बैठक से पहले और उसके दौरान चर्चा हुई थी। यह सही समय पर सामने आएगा।” इसके अलावा, फडणवीस ने यह भी कहा कि सिंचाई घोटाले में अजित पवार को मिली क्लीन चिट से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि भष्टाचार विरोधक शाखा का हलफ़नामा 27 नवंबर का है और उन्होंने 26 नवंबर को इस्तीफ़ा दे दिया था।

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उन्नाव रेप पर भी राजनीति से बाज नहीं आई प्रियंका: बोला झूठ, पुलिस ने खोली पोल

उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की मौत के बाद शनिवार (दिसंबर 7, 2019) दोपहर कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान भी कॉन्ग्रेस नेता अपनी राजनीति करने की आदत से बाज नहीं आई और दावा किया कि पिछले 1 साल में उत्तर प्रदेश के उन्नाव में बलात्कार के 90 से अधिक मामले सामने आए। अब उन्नाव पुलिस प्रियंका गाँधी वाड्रा के झूठे दावे को आईना दिखाने के लिए सामने आई है।

उन्नाव के पुलिस अधीक्षक ने इंडिया टुडे से बात की और दावा किया कि उन्नाव में पिछले एक साल में बलात्कार के 51 मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में 90 मामले दर्ज नहीं हुए, जैसा कि प्रियंका गाँधी वाड्रा ने दावा किया था।

उन्नाव के एसपी विक्रांत वीर ने इंडिया टुडे को बताया, “उन्नाव जिले के अंतर्गत आने वाले पुलिस थानों में 1 जनवरी से 30 नवंबर तक बलात्कार के 51 मामले दर्ज किए गए हैं। 2018 में बलात्कार के 24 मामले दर्ज किए गए। इसके साथ ही 2017 में 54, 2016 में 37 और 2015 में 39 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए।”

कॉन्ग्रेस पार्टी की नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा ने कहा था, “इस साल उन्नाव जिले से बलात्कार के लगभग 90 मामले सामने आए हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं और सरकार अपराधियों को बचाने में व्यस्त है। यूपी के सीएम को अपने कार्यालय में महिलाओं के लिए एक हेल्पलाइन सेट अप करना चाहिए जो किसी भी शिकायत पर तेजी से कार्रवाई कर सके।”

ऐसे समय में जब देश भर से भयावह बलात्कार के मामले सामने आ रहे हैं, तब एक राजनीतिक पार्टी द्वारा सिर्फ एक ही मामले के बारे में बात करना उनकी कुटिलता को दर्शाता है। यह पार्टी सिर्फ इस मामले में ही बात करती है, क्योंकि यह राज्य (उत्तर प्रदेश) विपक्षी पार्टी द्वारा शासित है। दरअसल सरकार के बाहर रहकर सरकार के ऊपर दोषारोपण करना बेहद आसान होता है। और यही काम कॉन्ग्रेस पार्टी ने अब तक किया और अब भी कर रही है।

चूँकि, इनकी पार्टी आज विपक्ष में हैं इसलिए सत्ता पक्ष द्वारा शासित राज्य को टारगेट कर रही हैं, वो भी रेप के मुद्दे पर। लेकिन शायद यह भूल रही हैं कि 16 दिसंबर 2012 को जब देश को झकझोर देने वाला निर्भया रेप कांड हुआ था, तब इनकी ही सरकार थी।

उल्लेखनीय है कि उन्नाव में पीड़िता को गुरुवार (दिसंबर 5, 2019) की सुबह केरोसिन तेल डालकर आग लगा दी गई थी। बता दें कि पीड़िता को जलाने वाले आरोपित वही लोग हैं, जिन्होंने उनका बलात्कार किया था। आरोपितों से बचने के लिए पीड़िता 1 किलोमीटर तक जलते हुए भी बदहवास अवस्था में भागती रहीं। यहाँ तक कि उसने 112 नंबर पर पुलिस को भी कॉल किया था। जब पुलिस मौके पर पहुँची, तब तक वह 90 प्रतिशत जल चुकी थीं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को उन्नाव बलात्कार पीड़िता के परिवार के लिए 25 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। इसके अलावा पीड़िता के परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक घर देने की भी घोषणा की गई। उन्होंने पीड़िता के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सभी अपराधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाकर कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

₹25 लाख, 2 मकान, लाइसेंसी हथियार, नौकरी, 24 घंटे सुरक्षा: सरकार ने मानी पीड़ित परिवार की सभी माँगें

उन्नाव गैंगरेप पीड़िता को जला कर मार डालने के बाद परिवार ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था। उनकी कुछ माँगे थीं, जिस पर वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आश्वासन चाहते थे। अब ख़बर आई है कि पुलिस ने उनकी माँगों को मान लिया है। पीड़िता के परिवार को मुआवजे के रूप में 25 लाख रुपए दिए जाएँगे। पुलिस कमिश्नर ने जानकारी देते हुए बताया कि पीड़िता की बहन को सरकारी नौकरी दी जाएगी। साथ ही पीड़ित परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान दिया जाएगा। परिवार की सुरक्षा का भी बंदोबस्त किया गया है। पीड़ित परिवार के घर पर भी पुलिस को तैनात किया जाएगा।

माँगों को माने जाने के बाद परिवार पीड़िता का अंतिम संस्कार करने पर राज़ी हो गया। परिवार को कुल 2 मकान दिए जाएँगे। पहले से जो मकान है, उसे पक्का किया जाएगा। लड़की की बहन को सुरक्षा देने के आलावा घर पर भी 24 घंटे सुरक्षा दी जाएगी। आर्म्स एक्ट के तहत पीड़िता के भाई को हथियार रखने की अनुमति दी जाएगी। हथियार का लाइसेंस भी उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। परिवार के राजी होने के साथ ही पीड़िता के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए जे जाया गया। इस दौरान पुलिस बल मुस्तैदी से तैनात था।

पीड़िता के शव को दफनाया गया क्योंकि उसके भाई ने पहले ही कह दिया था कि 90% से भी अधिक शरीर जलने के बाद अंतिम संस्कार के लिए जलाने को कुछ बचा ही नहीं है। इससे पहले परिवार ने कहा था कि जब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ख़ुद मौके पर आकर आश्वासन नहीं देते, तब तक अंतिम संस्कार नहीं होगा। पीड़िता के भाई ने अपनी बहन के लिए स्मारक बनाने की बात भी कही है। उसे गाँव के बाहर परिवार की ज़मीन में ही दफनाया गया।

पुणे से कुछ रिश्तेदारों के पहुँचने के बाद अंतिम संस्कार किया गया। पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचे नेताओं का भी विरोध हुआ। स्थानीय सांसद साक्षी महाराज और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का लोकल लोगों ने विरोध किया। लोगों ने नाराज़गी जताई। पूरे उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है।