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अगर मुझे भारत को सौंपा गया, तो मैं आत्महत्या कर लूँगा: नीरव मोदी

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) धोखाधड़ी मामले का मुख्य आरोपित और भगोड़ा घोषित हो चुके हीरा कारोबारी नीरव मोदी की ज़मानत याचिका एक बार फिर यूके कोर्ट में ख़ारिज हो गई है। सुनवाई के दौरान नीरव मोदी ने आपा खो दिया और गुस्से मेंं धमकी भरे लफ़्ज़ों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अगर उन्हें भारत को प्रत्यर्पित किया गया तो वो आत्महत्या कर लेगा। सुनवाई के दौरान नीरव मोदी ने यह भी कहा कि उन्हें तीन बार जेल में पीटा भी गया है। हालाँकि, कोर्ट में उनकी किसी बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ा और उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी गई।

नीरव मोदी के वकील हुय्गो कीथ ने कोर्ट को बताया कि नीरव मोदी को जेल में सबसे पहले अप्रैल में पीटा गया। अभी ताज़ा मामला पाँच नवंबर का है जब दो क़ैदी उनके कमरे में आ गए और उनके साथ मारपीट करने लगे। 

दरअसल, नीरव मोदी PNB से जुड़े दो अरब के धोखाधड़ी और धनशोधन मामले में भारत को प्रत्यर्पित किए जाने के ख़िलाफ़ केस लड़ रहे हैं। नीरव को लंदन में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की कोर्ट के समक्ष पेश किया गया था, जहाँ उनके ख़िलाफ़ अगले साल मई में मुक़दमें की सुनवाई शुरू होगी। नीरव मोदी ने इससे पहले ज़मानत पाने की कोशिश की। इस तरह 13000 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी मामले के आरोपित नीरव मोदी की ज़मानत याचिका पाँचवी बार भी ख़ारिज हो गई। फ़िलहाल वो लंदन की सबसे भीड़भाड़ वाली जेलों में से एक दक्षिण-पश्चिम लंदन के वैंड्सवर्थ जेल में बंद है।

ख़बर के अनुसार, नीरव मोदी ने मुचलके के तौर पर 40 लाख पाउंड भुगतान करने की पेशकश की थी, लेकिन न्यायाधीश एम्मा अर्बथनॉट ने उसकी ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी। ख़बर है कि अपनी पिछली पेशी की तुलना में नीरव इस दौरान अधिक तंदुरस्त दिखे। जबकि नीरव ने अपनी नई याचिका में बेचैनी और अवसाद की समस्या से घिरे होने का दावा किया। दरअसल, भारत सरकार के अनुरोध पर स्कॉटलैंड यार्ड (लंदन पुलिस) ने प्रत्यर्पण वारंट की तामील करते हुए उसे गिरफ़्तार किया था।

ग़ौरतलब है कि पंजाब नेशनल बेंक ने साल 2018 में नीरव मोदी और उसके रिश्तेदार मेहुल चौकसी के नेतृत्व वाले ज्वैलरी ग्रुपों पर फ़र्ज़ी गारंटी के माध्यम से क़र्ज़ लेने और धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए थे। लेकिन ये आरोप सामने आने से पहले ही दोनों चोरी से भारत छोड़कर चले गए।

काउंट डाउन शुरू: 4 दिन में आ सकते हैं ये बड़े फैसले, CJI की रिटायरमेंट को अब कुछ ही दिन शेष

सालों से ठंडे बस्ते में पड़े अयोध्या जैसे विवादित मामले पर माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट 17 नवंबर से पहले अपना फैसला सुना देगी। देखा जाए तो सीजेआई की रिटायरमेंट से पहले अब इस फैसले को आने में बहुत कम दिन शेष हैं। इसमें भी अगर छुट्टियों को निकाल दिया जाए तो जस्टिस गोगोई पर फैसला सुनाने के लिए कार्यदिवसों में केवल 4 दिन बचते हैं।

हालाँकि, अयोध्या मामले पर फैसला सुर्ख़ियों में रहने के कारण इस समय इसे सबसे महत्तवपूर्ण बताया जा रहा है। लेकिन इसके अलावा कुछ और ऐसे मामले हैं जिनकी सुनवाई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने की थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसका मतलब है कि यदि देखा जाए तो इन्हीं 4 कार्यदिवसों में हमें अयोध्या समेत इन मामलों पर 17 नवंबर से पहले फैसला सुनने को मिल सकता है। ये मामले कौन से हैं, आइए जानते हैं…

1.अयोध्या मामला

लंबे समय से विवादों का हिस्सा रहा राम-जन्मभूमि मामला अब जल्द ही सुलझ सकता है। 17 तारीख से पहले रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा इसपर फैसला सुनाने की पूरी संभावना है। इसके मद्देनजर समाज में हर समुदाय से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है और नसीहत दी जा रही है कि इसपर बेवजह की बयानबाजी करने से भी बचें।

2. सबरीमाला में महिलाओं का प्रवेश-

कोर्ट ने पिछले साल 28 सितंबर को केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को लिंग आधारित भेदभाव ठहराते हुए रद्द किया था। हालाँकि, ये फैसला 4-1 के बहुमत से था। जिसमें जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने बहुमत से असहमति जताई थी। लेकिन फैसला आने के बाद अयप्पा अनुयायी इस फैसले का भारी विरोध करने लगे। नतीजतन इसके ख़िलाफ़ 55 पुनर्विचार याचिकाओं सहित कुल 65 याचिकाएँ कोर्ट में दर्ज हुई। जिसपर सुनवाई करते हुए बीती 6 फरवरी को CJI गोगोई, जस्टिस आर.एफ. नरीमन, जस्टिस ए.एम. खानविल्कर, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​ने 45 से अधिक समीक्षा याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

3. राहुल गाँधी द्वारा अवमानना किए जाने पर माफी माँगने का मामला

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के चौकीदार चोर है बयान पर उनके खिलाफ लंबित अवमानना मामले में उन्हें माफी दिए जाने पर भी फैसला आना बाकी है। जिसमें भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने उन्हें माफी न देने की अपील कोर्ट से की है और कहा है कि इसके लिए केवल माफी काफी नहीं है बल्कि उन्हें सजा दी जानी चाहिए।

4. राफेल सौदे पर पुनर्विचार

दिसंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने राफेल फाइटर जेट सौदे में आपराधिक जाँच से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ याचिकाएँ दायर हुई थीं। CJI गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने इस साल मई में इन पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब सीजेआई को रिटायरमेंट से पहले इसपर सुनवाई करना है।

5. आरटीआई के दायरे में सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई का ऑफिस ‘लोक प्राधिकार’ है या नहीं

एक दशक से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित पड़े इस मामले पर भी फैसला आने की पूरी संभावना है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी और CJI गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अप्रैल 2019 के मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बता दें इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रवींद्र भट ने फैसला सुनाया था कि CJI का कार्यालय RTI जाँच के लिए खुला है।

महाराष्ट्र में पिछली विधानसभा का आज है आखिरी दिन: BJP और शिवसेना ने माँगा राज्यपाल से वक्त, अटकलें तेज

महाराष्ट्र की सियासत बीजेपी और शिवसेना के बीच नई सरकार गठन को लेकर गतिरोध अभी भी जारी है। एक तरफ़ बीजेपी ने दावा किया है कि अगले 48 घंटों में सरकार का गठन हो जाएगा। बीजेपी के वरिष्ठ नेता धीर मुनगंटीवार ने बुधवार (6 नवंबर) को कहा कि महाराष्ट्र का गठबंधन (शिवसेना-बीजेपी) बरक़रार है और लोग कभी भी ख़ुशख़बरी की उम्मीद कर सकते हैं। उन्होंने ‘हम साथ-साथ हैं’ का संदेश दिया। वहीं, शिवसेना का कहना है कि उन्हें बीजेपी की तरफ़ से सरकार बनाने का कोई भी प्रस्ताव अभी तक नहीं मिला है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, शिवसेना अभी भी अपने 50-50 के फ़ार्मूले पर आधारित अपनी माँग पर क़ायम है। लेकिन बीजेपी ने यह साफ़ किया है कि मुख्यमंत्री पद पर वो पीछे नहीं हटेगी। इस राजनीतिक गतिरोध पर विराम लगाने के लिए बीजेपी गुरुवार (7 नवंबर) को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाक़ात करेगी।

शिवसेना सांसद संजय राउत का कहना है कि वो महाराष्ट्र के राज्यपाल से मिल चुके हैं। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के रामदास अठावले भी राज्यपाल से मिल चुके हैं। अगर अब बीजेपी नेता राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा करने जा रहे हैं, तो उन्हें सरकार बनानी चाहिए।

वहीं, अगर एनसीपी की बात करें तो वो अभी भी सरकार बनाने के पक्ष में नहीं है, यह बात पार्टी सुप्रीमो शरद पवार कई बार स्पष्ट कर चुके हैं। पवार का कहना है कि एनसीपी और कॉन्ग्रेस मिलकर भी 100 सीटें नहीं जुटा सकती, ऐसे में सरकार बनाने की बात तो दूर की है। साथ ही पवार ने मुख्यमंत्री बनने की अफ़वाह को भी एक सिरे से यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि वो चार बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं, इसलिए अब वो मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे।

महाराष्ट्र की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल अगले दो दिनों में ख़त्म होने वाला है। दैनिक जागरण ने पीटीआई के सूत्रों के हवाले से लिखा कि अगले सप्ताह विधानसभा का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया जा सकता है, जिससे नए विधायकों को शपथ दिलाई जाए। हालाँकि, यह तस्वीर अभी तक साफ़ नहीं हो सकी है कि महाराष्ट्र में किसकी सरकार का गठन होगा।

ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 105 और उसकी सहयोगी शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं। कॉन्ग्रेस ने 44 और उसकी सहयोगी एनसीपी ने 54 सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में शिवसेना के साथ यदि कॉन्ग्रेस और एनसीपी आ जाते हैं तो सरकार बन सकती है। लेकिन, पवार ने नतीजों के तुरंत बाद कह दिया था कि उनकी पार्टी विपक्ष में बैठेगी। उन्होंने कहा था कि जनादेश भाजपा-शिवसेना गठबंधन को सरकार बनाने के लिए मिला है। इसके बाद से एनसीपी लगातार अपने इस रुख को दोहरा रही है।

ज़मीर की प्रेमिका सुनीता का बड़े भाई अनवर ने पहले पत्थर से सर फोड़ा, फिर पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जलाया, मौत

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा ज़िले में नवागढ़ में एक और लव जिहाद और हत्या का मामला सामने आया है। जहाँ छोटे भाई ज़मीर खान की प्रेमिका सुनीता कुशवाहा के सिर पर पत्थर मारकर बड़े भाई अनवर खान ने उसे पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जला दिया। अभी तक इस हत्या के कई वीडियो और तस्वीरें सामने आ चुकी हैं जिसमें क्रूरता और असंवेदनशीलता को साफ देखा जा सकता है। इतना ही नहीं हत्या की इस ख़ौफ़नाक वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपित अनवर ख़ान खुद पुलिस थाने गया और सरेंडर भी कर दिया, जैसे उसे अपने किए का कोई पछतावा न हो।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, थाने में पहुँचकर आरोपित ने जो कुछ भी बताया उसे सुनकर पुलिस भी दंग रह रह गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुँची। फ़िलहाल पुलिस आरोपित से पूछताछ में जुटी हुई है। ख़बर के अनुसार, महिला के जले हुए शव को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। नवागढ़ पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, नगर पंचायत नवागढ़ के वार्ड नंबर-2 में अनवर खान पिता सब्बीर खान का घर है। उसका छोटा भाई जमीर खान का 6-7 साल पहले सूरजपुर जिले के जयनगर थानांतार्गत सुनीता कुशवाहा (35) से बिलासपुर में काम के दौरान जान पहचान हुई और यह पहचान प्रेम में तब्दील हो गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान सुनीता गर्भवती भी हुई थी जिसके बाद सुनीता ने ज़मीर पर शादी का दबाव बनाया और मामला थाने तक भी पहुॅचा था।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रेम संबंध के दौरान ज़मीर ने सुनीता से शादी करने का वादा किया था। लेकिन, कुछ समय बाद ज़मीर नौकरी छोड़कर अपने गाँव नवागढ़ वापस चला गया। गाँव पहुँचने के बाद ज़मीर ने सुनीता से दूरी बना ली। एक तरफ सुनीता, ज़मीर पर शादी का दबाव बना रही थी, तो वहीं दूसरी तरफ़ ज़मीर ने सुनीता को बिना बताए अपने घरवालों की मर्जी से निक़ाह कर लिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, जिस दौरान वह ज़मीर के घर पहुँची तब उसका प्रेमी जमीर खान मौजूद नहीं था। मगर पुराने मामले को लेकर सुनीता कुशवाहा और प्रेमी के परिजनों के बीच जमकर विवाद हुआ। रात में ज़मीर के घरवालों ने उसे घर के बाहर निकालकर दरवाजा बंद कर दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, बाहर से सुनीता दरवाजा खटखटाती रही। खोलने की गुहार लगाती रही। इसी बीच देर रात जमीर का बड़ा भाई अनवर खान कहीं से कबड्डी खेलकर वापस घर लौटा तो सुनीता कुशवाहा घर के बाहर ही थीं। दरवाजा खटखटाते देख, अनवर खान ने तैश में आकर सुनीता के सिर पर पत्थर पटक दिया। जिससे वह लहूलुहान होकर गिर पड़ी। इसके बाद अनवर खान ने जेरीकेन में रखे पेट्रोल को सुनीता पर डालकर आग लगा दी। बुरी तरह जलने से व सिर पर पत्थर से प्रहार के चलते युवती की मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस का कहना है कि हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपित ख़ुद पुलिस थाने पहुँचा और सरेंडर कर दिया। उसने पुलिस को ख़ुद पूरी घटना बताई। नवागढ़ टीआई विवेक पांडेय के अनुसार, फिलहाल पुलिस आरोपित से पूछताछ में जुटी हुई है। जानकारी के मुताबिक़, पुलिस ने आरोपित के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा-302 के तहत अपराध का मामला दर्ज किया है। व युवती के मोबाइल के माध्यम से परिजनों को सूचना दे दी गई है।

राम मंदिर पर फैसले की आहट: PM ने मंत्रियों से कहा- अनावश्यक बयानबाजी से बचें, 34 संवेदनशील जिलों में रेड-अलर्ट

अयोध्या मामले पर फैसला आने से ठीक कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कैबिनेट मंत्रियों को नसीहत दी है कि वे इस मामले पर अनावश्यक बयानबाजी करने से बचें और देश में सद्भाव बनाएँ रखें।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीएम मोदी ने बुधवार (नवंबर 6, 2019) को अपने मंत्रियों के साथ बैठक करने के दौरान उन्हें कहा है कि अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है। ऐसे में देश में सद्भाव और शांति बनाए रखने की हम सभी की जिम्मेदारी है। इस मुद्दे पर सभी को अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए और साथ ही इसे हार-जीत के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

बता दें कि अयोध्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से पहले केंद्र सरकार ने सभी सांसदों (NDA) और मंत्रियों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में रहने को कहा है। इसके साथ ही फैसले के कुछ दिनों बाद तक शांति-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई है। जिसके मद्देनजर जैसे-जैसे फैसले की घड़ी नज़दीक आ रही हैं वैसे-वैसे कानून व्यवस्था कायम रखने वाली एजेंसियाँ पूरी तरह से मुस्तैद हो रही हैं।

अभी तक की जानकारी के मुताबिक पुलिस मुख्यालय ने सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील 34 जिलों के पुलिस प्रमुखों को भी निर्देश जारी कर दिए हैं। इन जिलों में मेरठ आगरा, अलीगढ़ रामपुर, बरेली, फिरोजाबाद, कानपुर, लखनऊ, शाहजहांपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और आजमगढ़ आदि हैं।

इसके अलावा याद दिला दें कि अभी कुछ दिन पहले ऐसी ही अपील राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा भी की गई थी। जिसमें संघ के शीर्ष नेताओं ने अपने प्रचारकों से अयोध्या मुद्दे पर फैसला अपने पक्ष में आने पर जश्न नहीं मनाने की अपील की थी।

इधर, केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के घर मुस्लिम धर्म गुरुओं और संघ नेताओं की बैठक के बाद भी फैसला लिया गया था कि अयोध्या में राम मंदिर को लेकर किसी भी तरह के मैसेज सर्कुलेट नहीं किए जाएँगे और फैसले के बाद सब एक दूसरे को हिम्मत देंगे।

पटना में मूर्ति विसर्जन के दौरान मस्जिद के सामने पथराव और आगजनी: आईजी समेत कई घायल

पटना में एक हिंसक झड़प दो समुदायों के बीच तब शुरू हो गई जब एक मूर्ति विसर्जन के लिए डालाजी मस्जिद के सामने से ले जाई रही थी। उसको लेकर हुई हिंसा में कई पुलिस वाले भी घायल हो गए, जिनमें इंस्पेक्टर जनरल (आईजी) संजय सिंह भी शामिल हैं। यह घटना परसों (सोमवार, 4 नवंबर, 2019 को) रात 11 बजे के आसपास की है। इलाके की सुरक्षा में बढ़ोतरी कर दी गई है क्योंकि मंगलवार (5 नवंबर, 2019) तक हालात तनावपूर्ण बने हुए थे

हिंसक लोगों ने जमकर तोड़फोड़ की जिसमें पुलिस की कई गाड़ियाँ और एक दमकल की गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गए। दंगाई इतने पर भी नहीं रुके, और 2 बाइकों को भी आग के हवाले कर के ही माने। उनमें से एक बाइक को तो मस्जिद के सामने ही आग लगाई गई। 11 बजे शुरू हुई हिंसा दो घंटे बाद तक यानि रात 1 बजे तक चलती रही। उसके बाद ही प्रशासन ने किसी तरह स्थिति पर काबू पाया।

दोनों भिड़े हुए गुटों के बीच फँसे पुलिस वालों को काफी चोटें भी आईं क्योंकि दोनों पक्षों के बीच भारी पथराव भी शुरू हो गया था। इसमें फँसने वालों में आईजी संजय सिंह भी शामिल हैं। यह भाँपने के बाद कि संघर्ष और भी भयानक रूप ले सकता है, पूरी पुलिस फ़ोर्स को ही आदेश दिया गया कि वे शहर के आलमगंज इलाके की तरफ कूच कर स्थिति को काबू में करने का प्रयास करें। इसके बाद बिहार मिलिट्री पुलिस (बीएमपी) की गोरखा वाहिनी को भी मौके पर तैनात किए जाने की नौबत आ ही गई। इस बीच आईजी संजय सिंह समेत घायल सभी पुलिस वालों को प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) आलमगंज थाने पर ही दिया गया।

स्थानीय निवासी मोहम्मद आलम के अनुसार यात्रा के साथ जा रहे युवा शराब पिए हुए थे और उनमें आपस ही में झगड़ा फसाद शुरू हो गया। “उनकी अपनी लड़ाई के दौरान मूर्ति टूट गई और उन सब ने यह दावा करना शुरू कर दिया कि मूर्ति तोड़ने वाला पत्थर मस्जिद से फेंका गया था। हालाँकि उस समय तो यात्रा आगे चली गई लेकिन बाद में वे युवा लौटे और मस्जिद पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद हालात काबू से बाहर हो गए।”

लेकिन मीडिया रिपोर्टों में पुलिस सूत्रों के हवाले से इसकी उलटी खबरें भी आ रहीं हैं। एक मीडिया सूत्र मूर्ति विसर्जन यात्रा में शामिल लोगों में से एक के हवाले से दावा करता है कि मूर्ति मस्जिद से फेंके गए पत्थर से ही टूटी थी।

टकराव की वजह की जड़ तक पहुँचने के लिए एक जाँच बिठा दी गई है। अभी तक पुलिस ने किसी को हिरासत में नहीं लिया है।

पाक जाने को बेहद उतावले सिद्धू: फिर लिखा पत्र, कहा- परमिशन नहीं मिली तो बाघा बॉर्डर से ही चले जाएँगे

अपने पाकिस्तान प्रेम को लेकर हमेशा विवादों में घिरे रहने वाले कॉन्ग्रेसी नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बार फिर पाकिस्तान जाने की अपनी दबी इच्छा को जताया है। कभी बाजवा से गले मिलने तो कभी इमरान खान की ताजपोशी में शामिल होने के चलते विवादों में घिरने वाले सिद्धू पाकिस्तान जाने को लकार काफी परेशान हैं।

दरअसल पाक में इमरान सरकार द्वारा नौ नवम्बर को होने वाले करतारपुर साहिब गलियारे के उद्घाटन कार्यक्रम में जाने के लिए सिद्धू ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से अनुमति माँगते हुए दूसरी बार चिट्ठी लिखी है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्री एस जयशंकर को लिखी अपनी चिट्ठी में सिद्धू ने कहा है कि वे पाकिस्तान जाना चाहते हैं क्योंकि वहाँ की सरकार ने सिद्धू को करतारपुर के दरबार साहिब के इस उद्घाटन समारोह कार्यक्रम में आने का न्योता दिया है। बता दें कि यह गलियारा पंजाब के गुरदासपुर स्थित डेरा बाबा नानक गुरूद्वारे को पाकिस्तान के करतारपुर स्थित दरबार साहिब से जोड़ेगा।

मंत्रालय को लिखे अपने पत्र में सिद्धू ने लिखा, “इस निमंत्रण की पहली प्रति पहले ही जा चुकी है। कार्यक्रम बहुत स्पष्ट है और उसका समय 11 बजे तय किया गया है इसीलिए मेरा निवेदन है कि मुझे नौ नवंबर सुबह 9:30 से पहले गलियारे की सीमा पार करने की अनुमति दी जाए।” सिद्धू ने कहा कि एक आम सिख की तरह वह करतारपुर स्थित दरबार साहिब में जाकर मत्था टेककर लंगर खाना चाहते हैं, कार्यक्रम में सम्मिलित होने के बाद वे शाम को गलियारे के रास्ते लौट आएँगे।

बता दें कि सिद्धू ने अपने पत्र में पाकिस्तान का वीजा न होने का उल्लेख करते हुए लिखा, “अगर सरकार से उन्हें परमिशन नहीं दी गई तो वह तय कार्यक्रम से एक दिन पहले आठ नवम्बर को वाघा स्थित भारत-पाक सीमा से पाकिस्तान जाएँगे, रात को गुरूद्वारे में ठहर कर अगले कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे और फिर अगले दिन गलियारे के ज़रिए भारत वापस आएँगे।”

दरअसल यह कोई पहला वाकया नहीं है कि जब सिद्धू पाकिस्तान को लेकर लालायित दिख रहे हैं। इससे पहले भी कई बार सिद्धू का नाम पाकिस्तान से जोड़ा जाता रहा है जिसके चलते अक्सर उनकी काफी आलोचना होती रहती है। करतारपुर के सम्बन्ध में सिद्धू ने शनिवार को भी पाकिस्तान जाने की अनुमति लेने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को चिट्ठी लिखी थी जिसे बाद में उन्होंने आगे की कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव के पास भेज दिया था। बता दें कि करतारपुर गलियारे के खुलने के साथ ही भारतीय श्रद्धालुओं को परमिट लेकर रावी नदी के दूसरी ओर पाकिस्तान के नरोवल जिले में स्थित करतारपुर साहिब के दर्शन करने की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।

फिर से सोच लो, आपको टीपू सुल्तान का जन्मदिवस मनाना चाहिए या नहीं: कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट की राय

एक दंग कर देने वाली सलाह में कर्नाटक के हाई कोर्ट ने राज्य की बीएस येद्दुरप्पा सरकार से इस्लामिक तानाशाह टीपू सुल्तान की जयंती न मनाने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है। भाजपा सरकार ने कॉन्ग्रेस के समय से चलती आ रही टीपू का जन्मदिन मनाए जाने की प्रथा पर रोक लगा दी थी। इसके खिलाफ एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) डाली गई और सरकार के निर्णय को चुनौती दी गई थी। उसी की सुनवाई में अदालत ने यह सलाह दी थी।

भाजपा सरकार ने अदालत को यह बताया कि अगर कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत स्तर पर टीपू सुल्तान के जन्म दिन का उत्सव करना चाहता है तो उस पर कोई रोक नहीं है। केवल कॉन्ग्रेस की सरकारों के उलट भाजपा की सरकार, सरकार के स्तर पर यह आयोजन नहीं करेगी। इसके बाद भी कर्नाटक की उच्च अदालत ने भारतीय जनता पार्टी को इस्लामी कट्टरपंथी और तानाशाह की जयंती मनाना छोड़ने के निर्णय के बारे में एक बार और सोचने की सलाह देना बंद नहीं किया।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने भाजपा सरकार को इस बारे में फैसला लेने के लिए दो महीने का समय दिया है, ‘सभी पहलुओं’ पर सोच विचार कर के निर्णय लेने के लिए। इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2020 में होगी। टीपू सुलतान का जन्म दिन 20 नवंबर को पड़ता है, यानि कम से कम इस साल अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार न चाहे तो टीपू सुल्तान जयंती नहीं मनाई जा सकती।

कल (6 नवंबर, 2019 को) बिलाल अली की पीआईएल की सुनवाई करने बैठी बेंच ने यह सभी टिप्पणियाँ की थीं। इस बेंच का नेतृत्व और कोई नहीं, खुद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ए एस ओका कर रहे थे। इसी बेंच ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या कारण है राज्य सरकार द्वारा पिछले चार साल से किए जा रहे आयोजन को रोकने का। याचिकाकर्ता बिलाल दिलचस्प रूप से खुद कर्नाटक के निवासी नहीं बल्कि लखनऊ, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। वे अलबत्ता टीपू नेशनल सर्विस एसोसिएशन और टीपू सुल्तान यूनाइटेड फोरम के अध्यक्ष ज़रूर हैं।

अपनी पीआईएल में उन्होंने सरकार के टीपू जयंती को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी। साथ ही दावा किया कि यह रद्द किया जाना संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के खिलाफ है।

दिलचस्प बात यह है कि तीन साल पहले 2016 में इसी हाई कोर्ट ने टीपू सुल्तान की जयंती सार्वजनिक धन से मनाए जाने के औचित्य पर ही सवाल खड़ा किया था। उस समय के मुख्य न्यायाधीश सुभ्रो कमल मुख़र्जी ने कहा था कि टीपू कोई स्वतंत्रता सेनानी नहीं, महज़ एक राजा था जिसने अपने स्वार्थ की रक्षा के लिए दुश्मनों से युद्ध किया था।

मिशनरी सेवा से गर्भवती होकर वापस लौटीं दो नन: कैथोलिक चर्च ने दिए जाँच के आदेश

एक कैथोलिक चर्च की नन जब मिशनरी का काम करने के बाद वापस पहुँचीं तो चर्च में हंगामा खड़ा हो गया। यह मामला उस वक़्त सामने आया जब समाजसेवा के नाम पर मिशनरी की ओर से काम करने गईं चर्च की दोनो नन अपने-अपने घर चली गईं मगर बाद में उन्हें इस बात का पता चला कि वह गर्भवती हैं और इस अवस्था में उन्हें कई दिन हो गए हैं।

जब यह मामला चर्च तक पहुँचा तो जाँच के आदेश दिए गए, पता चला कि मिशनरी के काम पर बाहर निकली इन दोनों औरतों और किसी पुरुष के बीच शारीरिक सम्बन्ध बनाए गए थे जिसके चलते यह स्थिति सामने आई और दोनों गर्भवती हो गईं। दो अलग-अलग पंथ को मानने वाली इन दोनों महिलाओं को अपने गर्भवती होने का जब आभास हुआ तब तक काफी देर हो चुकी थी। इनमें से एक महिला को अपनी गर्भवती होने की जानकारी तब हुई जब वह पेट में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल गई। इसके बाद जाँच में पाया गया कि वह गर्भवती हैं।

अफ़्रीकी महाद्वीप के सिसिली की रहने वाली यह नन बच्चे को जन्म देने के इतना करीब पहुँच गई कि उसने आखिर में अपना ठिकाना पलेर्मो को बना लिया। वहीं दूसरी नन को जब तक इस बात की जानकारी मिली तब तक वह अपने घर मेडागास्कर पहुँच चुकी थी। दरअसल यह महिला नन वाले अपने जीवन को छोड़ने पर विचार भी कर रही थी।

वहीं दूसरी ओर चर्च ने इन दोनों ही नन पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए जाँच शुरू कर दी है। ईसाईयों में नन और बिशप दोनों को अविवाहित जीवन की शपथ लेनी होती है जिसके बाद शारीरिक सम्बन्ध बनाने की आज़ादी नहीं रह जाती। बहुत सी नन महिलाओं ने कैथोलिक चर्च और मिशनरियों में पादरी द्वारा उनका शारीरिक शोषण करने के चौंकाने वाले खुलासे भी किए हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भी ऐसे ही कई मामले हैं जिनमें से एक के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था। इस कड़ी में सबसे अहम केस बिशप फ्रांको का है। इसी साल की शुरुआत में कई नन महिलाओं द्वारा ईसाई मिशनरियों में होने वाले शारीरिक शोषण को लेकर कई खुलासे किए गए थे जिसके बाद खुद पोप फ्रांसिस ने भी इस बात को स्वीकार किया था कि बहुत से बिशप-पादरियों ने कई नन महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया था।

‘आर्थिक सुस्ती’ के खिलाफ प्रदर्शन में खुद कॉन्ग्रेस हुई सुस्त: राहुल की ‘विदेशी छुट्टियों’ के कारण दिसंबर तक टला

भारत की सबसे पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस ने आज घोषणा की है कि वह 1 दिसंबर को सर्वदलीय विरोध रैली नई दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘आर्थिक सुस्ती और कृषि संकट’ के मुद्दे पर करेगी। यह सितंबर से अब तक कॉन्ग्रेस द्वारा घोषित तीसरी ऐसी रैली है।

सितम्बर में कॉन्ग्रेस ने घोषणा की थी कि वह 15 से 25 अक्टूबर के बीच देश भर में विरोध प्रदर्शन करेगी। उस समय भी एक महीने पहले घोषणा कर दी गई थी। लेकिन दिलचस्प यह रहा कि बिना विरोध प्रदर्शन की मेहनत किए कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अज्ञात विदेशी स्थान पर छुट्टी मनाने विरोध प्रदर्शनों की तारिख बीत जाने के बाद निकल गए।

इसके बाद अक्टूबर में विरोध प्रदर्शनों की नियत तिथि के अंतिम दिन, 25 अक्टूबर, 2019 के बीतने के पहले कॉन्ग्रेस ने विरोध प्रदर्शन की नई तिथि बता दी ‘आर्थिक सुस्ती’ के खिलाफ।

22 अक्टूबर को कॉन्ग्रेस ने कहा कि वे विरोध प्रदर्शन देश भर में नवंबर के पहले हफ्ते से करेंगे। कॉन्ग्रेस ने कहा 5 से 15 नवंबर तक पार्टी देश भर में विरोध प्रदर्शन और दिल्ली में एक रैली करेगी। इन प्रदर्शनों का विषय भी ‘बढ़ती बेरोजगारी’, ‘डूबती अर्थव्यवस्था’ और ‘कृषि संकट’ था।

5 नवंबर बीत जाने के बाद कॉन्ग्रेस नींद से उठी और यह ध्यान आया कि उन्होंने एक और अंतिम तिथि में चूक कर दी। तो 6 नवंबर को (आज) फिर से विरोध प्रदर्शन की नई तारीख की घोषणा कर दी- इस बार अन्य दलों के साथ।

इसके बाद ट्विटर पर यूज़रों ने मौका नहीं गँवाया कॉन्ग्रेस को उसके पूर्व अध्यक्ष से भी बड़ा मज़ाक बताने में। एक ने लिखा कि जल्दी क्या है, अभी तो नया साल पड़ा हुआ है।

कॉन्ग्रेस को सबसे आलसी विपक्ष का भी तमगा मिल गया।

किसी ने सलाह दी, “तुमसे न हो पाएगा!”

कुछ लोगों ने सीधे-सीधे पिछले विरोध प्रदर्शनों का क्या हुआ, यह भी पूछना शुरू कर दिया।

किसी को यह घर में सगाई के फंक्शन को आगे टालने जैसा लगने लगा।

और तो और, कॉन्ग्रेस के इतने बुरे दिन आ गए कि आम आदमी पार्टी के ट्रोल भी उन्हें ट्रोल करने लगे।

2 दिसंबर को क्या होगा? देखते जाइए, कॉन्ग्रेस विरोध प्रदर्शन को 2020 की न्यू ईयर पार्टी बना कर छोड़ेगी।