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विधायकों का समर्थन जुटाने के लिए शिवसेना ने माँगे 3 दिन, राज्यपाल ने NCP को बुलाया

मुंबई में शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिल कर सरकार गठन करने की इच्छा प्रकट की। हालाँकि, शिवसेना बहुमत के लिए ज़रूरी विधायकों का समर्थन पत्र राजभवन को नहीं सौंप सकी। उन्होंने राज्यपाल से कहा कि उन्हें सरकार बनाने के लिए विधायकों का समर्थन-पत्र सौंपने हेतु 3 दिनों का समय चाहिए। हालाँकि, राज्यपाल ने उन्हें तय समय-सीमा से ज्यादा समय देने से इनकार कर दिया।

कॉन्ग्रेस नेता माणिकराव ठाकरे ने कहा है कि न तो एनसीपी और न ही उनकी पार्टी की तरफ़ से शिवसेना को समर्थन देने वाला कोई पत्र राज्यपाल को सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि शरद पवार और कॉन्ग्रेस नेताओं की बातचीत के बाद पार्टी अगले क़दम का खुलासा करेगी। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा कि एनसीपी से बातचीत करने के बाद ही अब कुछ निर्णय लिया जाएगा।

उधर, एनसीपी नेता अजीत पवार ने कहा है कि राज्यपाल ने उनकी पार्टी को मिलने के लिए राजभवन बुलाया है।जब उनसे पूछा गया कि क्या राज्यपाल ने उन्हें सरकार गठन करने का न्योता दिया है, अजीत पवार ने जवाब दिया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। पवार ने कहा कि राज्यपाल ने उन्हें क्यों बुलाया है, यह बताया नहीं गया है।

इससे पहले शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कॉन्ग्रेस सुप्रीमो सोनिया गाँधी से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत के दौरान सरकार गठन पर बात हुई। जयपुर में कॉन्ग्रेस के कई नेताओं ने विधायकों के साथ बैठकें की थी। शिवसेना ने भी सोमवार (नवंबर 11, 2019) को कई राउंड की बैठकों के बीच सरकार गठन को लेकर भावी रणनीति पर विचार किया। ताज होटल में एनसीपी के संस्थापक अध्यक्ष शरद पवार और उद्धव की बैठक के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि एनसीपी और कॉन्ग्रेस शिवसेना को समर्थन दे सकती है।

आदित्य ठाकरे और एकनाथ शिंदे सहित अन्य शिवसेना नेता राजभवन पहुँचे थे। कहा जा रहा है कि जब सोनिया गाँधी दिल्ली में कॉन्ग्रेस के मराठी दिग्गजों के साथ बैठक कर रही थीं, तब जयपुर में एक रिसॉर्ट में ठहराए गए कई पार्टी विधायकों से उनकी बात भी कराई गई। सोनिया ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विधयकों की राय ली। कहा जा रहा है कि इन सब में गाँधी परिवार के वफादार अहमद पटेल की भी भूमिका है, क्योंकि उद्धव और सोनिया की बातचीत उन्होंने ही कराई। दोनों नेताओं की बातचीत क़रीब 5 मिनट तक चली।

उधर, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में कॉन्ग्रेस के महाराष्ट्र के नव-निर्वाचित विधायकों से मुलाक़ात की। 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में भाजपा को 105, शिवसेना को 56, कॉन्ग्रेस को 44 और एनसीपी को 54 सीटें मिली है। भाजपा-शिवसेना और कॉन्ग्रेस-एनसीपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था। लेकिन, ढाई साल के लिए सीएम पद की मॉंग पर शिवसेना के अड़ने के बाद भाजपा ने सरकार बनाने से कदम पीछे खींच लिए थे। इसके बाद राज्यपाल ने शिवसेना को सरकार गठन का न्योता दिया था।

भारत भक्ति का सामूहिक भाव मोदी सरकार के संकल्प से सिद्धि पथ का संबल

अयोध्या के राम जन्मभूमि पर माननीय उच्चतम न्यायालय का निर्णय आ चुका है। चूँकि भारत की आत्मा इसकी संस्कृति है और राम इस संस्कृति के शाश्वत व मूल पहचान हैं, अत: राम जन्म स्थान पर भव्य मंदिर का मार्ग प्रशस्त होने पर जिस प्रकार जाति, संप्रदाय, वर्ग व क्षेत्र आदि की भावना से ऊपर उठकर पूरे देश ने सत्य, न्याय व धर्म की विजय व एकता का प्रदर्शन किया और प्रसन्नता प्रकट की है, वह महर्षि वाल्मीकि और भगवान राम के बीच संवाद ‘सब के प्रिय सबके हितकारी, दुख सुख सरिस प्रशंसा गारी। कहहिं सत्य प्रिय बचन बिचारी, जागत सोवर सरन तुम्हारी’ की श्रेष्ठ भावना का प्रकटीकरण है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सदा ही पंडित दीन दयाल उपाध्याय के उस विचार पर चली है कि ‘भारत में नैतिकता के सिद्धांतों को धर्म अर्थात जीवन के नियम के रूप में माना जाता है। चूँकि धर्म सर्वोच्च है और हमारे राज्य के लिए आदर्श ‘धर्म का राज्य’ होना चाहिए।’ भाजपा अपनी स्थापना से ही नैतिकता के इन्हीं सिद्धांतों और भारतीयता के संकल्पों के आधार पर राजनीति की पक्षधर ही नहीं रही है, बल्कि भारतीय राजनीति को कोरे वादों, खोखले नारों और लोकलुभावन जुमलेबाजी से मुक्त कराकर देश को आगे ले जाने के संकल्प से लोककल्याण की सिद्धि के पथ पर अग्रसर कराने के लक्ष्य पर अहर्निश चल रही है।

इन्हीं संकल्पों के साथ भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनता के समक्ष अपना पक्ष रखा और जनता जर्नादन से सेवा का अवसर माँगा। जनता ने भाजपा के चरित्र व विश्वसनीयता एवं पीएम नरेन्द्र मोदी के वचनों पर विश्वास करके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को पूर्ण बहुमत दिया। पाँच वर्ष के कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी के संकल्पपत्र के एक-एक वचन को पूरा करके भारत को महाशक्ति और भारत की जनता को सुखी, समृद्ध और न्यायिक व सामाजिक समानता के अधिकारयुक्त बनाने की राह पर ऐतिहासिक रूप से आगे बढ़ी। जनता ने देखा कि यदि भाजपा नीत राजग की सरकार देश की वह पहली सरकार है, जिसने जनता के समक्ष लिए गए संकल्पों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने का कार्य किया है। परिणामत: 2019 के चुनाव में जनता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ऐतिहासिक बहुमत देकर सरकार और राजनीति दोनों में और सुदृढ़ता से अपना विश्वास प्रकट किया।

राम मंदिर, तीन तलाक और अनुच्छेद 370 भाजपा के उन तीन प्रमुख संकल्पों में सम्मिलित थे, जिसका उल्लेख उसके संकल्प पत्र में था। देश के मुस्लिम महिलाओं के प्रति अमानवीय कुप्रथा तीन तलाक का अंत भाजपा सरकार ने करके संसद में कानून पारित किया। जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा से अलग-थलग करने वाले अनुच्छेद 370 को हटाकर भाजपा ने डॉ. श्यामा प्रसाद के ‘एक देश, एक विधान और एक ध्वज’ के उस सपने को साकार किया, जो हर भारतीय का सपना था। अब उच्चतम न्यायालय द्वारा राममंदिर पर आए निर्णय के बाद प्रधानमंत्री मोदी की सरकार में 491 वर्ष से चले आ रहे इस विवाद का सुखद पटाक्षेप हो गया है।

ये तीनों विषय भारत की उन दीर्घकालिक समस्याओं में से थीं, जो जनभावना से जुड़ी थीं और देश की जनता इनसे छुटकारा पाना चाहती थी। लेकिन देश की सत्ता में 60 वर्ष से अधिक समय तक रहने वाले राजनैतिक दल स्वार्थ और वोट बैंक की राजनीति के चलते इन समस्याओं को सुलझाने के बजाय उलझाकर राजनीति की रोटियाँ सेंकते रहे। भाजपा नीत मोदी की सरकार ने राजनीतिक स्वार्थ और छलने वाली राजनीति का अंत कर ‘संकल्प से सिद्धि’ की ओर ‘एक भारत और श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण के साथ विकसित भारत बनाने की राजनीति का प्रारंभ किया। एक ऐसी राजनीति व सुशासन की शुरुआत की, जो मानवीय व राष्ट्रीय दोनों प्रकार से भारतीय संस्कृति के सिद्धांतों पर आधारित हो। उस भारतीय संस्कृति के सिद्धांतों पर जो विविधता व बहुलतावादी प्रकृति का संरक्षण करते हुए इनमें छिपी एकता पर आधारित हो।

निर्णय आने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे इसी एकता के प्रकटीकरण का अवसर बताया। पीएम मोदी ने कहा, “यह निर्णय न्यायिक प्रक्रियाओं में जन सामान्य के विश्वास को और मजबूत करेगा। हमारे देश की हजारों वर्ष की पुरानी भाईचारे की भावना के अनुरूप हम 130 करोड़ भारतीयों को शांति और संयम और भारत के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की अंतर्निहित भावना का परिचय देना है। इस निर्णय को किसी की जय या पराजय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का है।”

भारत भक्ति का यह सामूहिक भाव ही मोदी सरकार को ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ ‘सशक्त भारत और समृद्ध भारत’ की नींव रखने का साहस व संबल प्रदान करता है और संकल्प से सिद्धि के पथ पर अग्रसर होकर उस रामराज्य की स्थापना की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाने को प्रेरित करता है, जहाँ राजनीति व सत्ता का उद्देश्य केवल और केवल लोककल्याण है।

मस्जिद के लिए सहनवा में जमीन दे सकती है सरकार: यहीं दफन है बाबरी बनाने वाला मीर बाकी

सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या की पूरी जमीन रामलला को सुपुर्द कर दी थी। यहॉं मंदिर निर्माण के लिए सरकार से तीन महीने में ट्रस्ट बनाकर योजना तैयार करने का आदेश दिया था। साथ ही मुस्लिम पक्ष को भी अलग से मस्जिद के लिए पॉंच एकड़ जमीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। तब से ही यह सवाल उठ रहा है कि मस्जिद के लिए जमीन कहॉं दी जाएगी। कई नामों पर अटकलें लग रही है। इनमें से एक नाम अयोध्या से सटे सहनवा का भी उभर कर आया है।

सहनवा वही जगह है, जहाँ बाबर का सेनापति मीर बाकी दफ़न है। उसने ही 1528 में रामजन्मभूमि स्थान पर बाबरी मस्जिद बनवाई थी। न्यूज 18 की खबर के अनुसार मीर बाकी के वंशज चाहते हैं कि सहनवा में मस्जिद बनें। यही कारण है कि यहाँ पर मस्जिद बनाने हेतु जमीन देने का विचार किया जा रहा है। इसके अलावा मस्जिद के लिए अयोध्या के चांदपुर हरवंश और डाभासंभर पर भी चर्चा हो रही है। लेकिन सहनवा में जमीन दिए जाने की उम्मीद ज्यादा है।

उल्लेखनीय है कि रामजन्मभूमि से करीब 4 किलोमीटर दूरी पर स्थित सहनवा को अयोध्या नगर निगम में शामिल करने के लिए 2017 में ही प्रस्ताव भेजा जा चुका है। अब कहा जा रहा है कि सहनवा समेत 40 गाँवों को अयोध्या नगर निगम में शामिल होने की मंजूरी मिल सकती है।

सहनवा में मीर बाकी की मजार काफी जर्जर स्थिति में है। अयोध्या विवाद से पहले इस जगह को कोई जानता नहीं था। लेकिन, मीर बाकी के यहीं दफन होने की बात सामने आने के बाद यह जगह चर्चा में आई थी। अब यहीं मस्जिद के लिए जमीन देने की बात भी हो रही है।

वैसे, मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड जमीन लेगा या नहीं यह अभी स्पष्ट नहीं है। बताया जा रहा है कि बोर्ड 17 नवंबर की बैठक में इस पर फैसला करेगा। इस बीच, बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे इकबाल अंसारी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अगर मनमाफिक 5 एकड़ जमीन चिन्हित होकर मिलेगी तो हम जरूर लेंगे।

घर लौटीं स्वर कोकिला लता मंगेशकर, चेस्ट इन्फेक्शन के कारण अस्पताल में होना पड़ा था दाखिल

स्वर कोकिला लता मंगेशकर की तबीयत अचानक से बिगड़ गई। उन्हें कुछ घंटों के लिए साउथ मुंबई में स्थित ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। सोमवार (नवम्बर 11, 2019) की सुबह ही उन्होंने साँस लेने में तकलीफ की शिकायत की थी, जिसके बाद दोपहर में उन्हें इलाज के लिए हॉस्पिटल ले जाया गया।

ताज़ा सूचना के अनुसार, लता मंगेशकर को वापस उनके घर ले जाया गया है। उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। उनके नजदीकी लोगों ने बताया है कि उन्हें चेस्ट इन्फेक्शन के कारण हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बताया गया है कि उनकी हालत अब पहले से बेहतर है।

सितम्बर 28, 2019 को लता मंगेशकर ने अपना 90वाँ जन्मदिन मनाया था। हजारों गानों को अपनी मधुर आवाज़ से सँवार चुकी लता मंगेशकर 8 दशक तक भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रही हैं और उन्होंने कई भाषाओं में गाने गए हैं। 50 के दशक में एसडी बर्मन से लेकर 21वीं सदी में एएआर रहमान तक, लता मंगेशकर ने कई संगीत निर्देशकों की धुन को अमर बनाया है।

लता मंगेशकर को देश के शीर्ष सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा जा चुका है। उन्हें फिल्म जगत के सबसे बड़े सम्मान दादासाहब फाल्के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। 2014 लोकसभा चुनाव के पहले उन्होंने कहा था कि वो नरेंद्र मोदी को देश का प्रधाममंत्री बनते देखना चाहती हैं। लता मंगेशकर ने मुंबई में मोदी की उपस्थिति में ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ भी गुनगुनाया था। जब उन्होंने पहली बार ये गाना गया था, तब तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू की आँखों में भी आँसू आ गए थे।

मात्र ₹20 देकर सिंगल रूम में रहते हैं JNU के छात्र, बिजली बिल देने को कहा तो सड़क पर उतरे

जेएनयू के छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन पर फी बढ़ाने का आरोप लगा कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान छात्रों ने न सिर्फ़ पुलिस के साथ झड़प की, बल्कि महिला प्रोफेसर के साथ भी बदतमीजी की गई। महिला प्रोफेसर के कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारी छात्र जेएनयूएसयू के सदस्य और समर्थक हैं, जहाँ वामपंथी छात्र दलों का बोलबाला है। एबीवीपी ने पहले तो छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को समर्थन देने का ऐलान किया था, लेकिन आंदोलन उग्र होने के बाद आरोप लगाया कि इसे ग़लत दिशा में भटकाया जा रहा है और समर्थन वापस ले लिया।

अगर पहले और अभी के फी की बात करें तो मेस बिल और इस्टैब्लिशमेंट चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। छात्रों को बस बिजली और सफाई का बिल देने कहा गया, इतनी सी बात पर वामपंथी छात्र नेताओं ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया। क्रॉकरी, यूटेंसिल्स और समाचार-पत्रों के फी में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। रूम रेंट में बढ़ोतरी की गई है। सिंगल सीटर में छात्रों को मात्र 20 रुपए प्रति महीने देने होते थे। डबल सीटर में तो यह रेंट सिर्फ़ 10 रुपए ही था। अब इसे बढ़ाकर क्रमशः 600 रुपए और 300 रुपए कर दिया गया है। वहीं पानी और बिजली का बिल छात्रों को खपत के हिसाब से भरना पड़ेगा।

मेंटिनेंस, खाना, स्वच्छता और मेस सहित अन्य सर्विस चार्ज के रूप में 1700 रुपए प्रति महीने फी लिया जाएगा। इसी कारण छात्र आक्रोशित हैं। इसके अलावा नए नियमों के मुताबिक़, ‘वन टाइम मेस सिक्योरिटी’ के रूप में 12,000 रुपए लिए जाएँगे। पहले मात्र 5,500 रुपए लिए जाते थे। ये राशि रिफंडेबल है, अर्थात हॉस्टल छोड़ने पर इसे छात्रों को वापस लौटा दिया जाता है। छात्रों को सभी सेवाओं में खपत के हिसाब से रुपए देने को कहा गया है, बस इसीलिए इसे ‘फी हाइक’ बता कर आंदोलन किया जा रहा है। इस दौरान वामपंथी छात्र नेताओं ने कैम्पस में सीआरपीएफ की तैनाती की अफवाह भी फैलाई, जो झूठ निकली।

सोमवार (नवंबर 11, 2019) को जब दीक्षांत समारोह को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू सम्बोधित कर रहे थे, तब छात्र बाहर जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन कर रहे थे। वो कॉन्वोकेशन हॉल तक पहुँचने में लगे हुए थे। इस दौरान उन्होंने पुलिस के साथ झड़प की। पुलिस को वाटर कैनन का प्रयोग करना पड़ा। जेएनयू के कुलपति जगदीश कुमार ने छात्र नेताओं से मुलाक़ात भी की है, लेकिन फिर भी प्रदर्शन लगातार जारी है। एचआरडी मंत्री को रास्ता देने के लिए पुलिस ने वामपंथी छात्र नेता साकेत मेनन से छात्रों को समझाने की अपील की लेकिन उन्होंने साफ़ इनकार कर दिया। छात्रों ने केंद्रीय मंत्री निशंक से भी मुलाक़ात की।

केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को बाहर निकलने के लिए काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी। छात्रों ने इस दौरान बैरिकेड्स तोड़ डाले और पुलिस पर हमला कर दिया। कॉन्वोकेशन सेरेमनी के दौरान भी छात्रों का इस तरह से नारेबाजी और प्रदर्शन करना सोशल मीडिया पर लोगों की आलोचना का विषय बना। पुलिस ने अभी तक छात्रों के साथ कोई सख्ती नहीं बरती है। प्रदर्शनकारी छात्राओं को रोकने के लिए महिला पुलिस बल की तैनाती की गई है।

अकबर ने Whatsapp ग्रुप बना कर पाकिस्तानियों को जोड़ा, डाले अयोध्या से जुड़े भड़काऊ मैसेज, गिरफ़्तार

राजस्थान के बीकानेर में एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया। वह हिंसा भड़काने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा था। अयोध्या विवाद के बाद पुलिस की सोशल मीडिया पर पैनी नज़र है, क्योंकि हिंसा भड़काने और समाज में घृणा पैदा करने के लिए व्हाट्सप्प ग्रुप में आपत्तिजनक मैसेज धड़ल्ले से फॉरवर्ड किए जाते हैं, फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट्स किए जाते हैं और ट्विटर पर भड़काऊ ट्वीट डाले जाते हैं। बीकानेर में गिरफ़्तार किया गया अकबर एक व्हाट्सप्प ग्रुप का संचालक है।

ख़बर के अनुसार, अकबर ने 2 व्हाट्सप्प ग्रुप बनाया। उन ग्रुप्स में उसने पाकिस्तानी नागरिकों को भी जोड़ा। इसी क्रम में एक पाकिस्तानी नागरिक ने ग्रुप में आपत्तिजनक मैसेज शेयर कर दिया। उसने समाज में घृणा और वैमनयस्य पैदा करने के उद्देश्य से ऐसा किया। पुलिस को जैसे ही इस बात का पता चला, अकबर को गिरफ़्तार कर लिया गया। इस ग्रुप में शामिल पाकिस्तानी व्यक्ति हिन्दू-मुस्लिम के बीच तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहा था।

‘राजस्थान पत्रिका’ के बीकानेर संस्करण में प्रकाशित ख़बर

28 वर्षीय अकबर को आईपीसी की धारा 153 (उपद्रव कराने के लिए लोगों को भड़काना) और 295-ए (धार्मिक भावनाएँ भड़काने का प्रयास करना) के तहत गिरफ़्तार किया गया है। भगवानराम नामक व्यक्ति ने अकबर के ख़िलाफ़ दंतौर थाने में मामला दर्ज कराया था। भगवानराम ने बताया कि अकबर ने उसे भी अपने ग्रुप में शामिल कर लिया था। उसने जैसे ही ग्रुप में आपत्तिजनक मैसेज देखे, पुलिस को सूचित किया। इसके बाद पुलिस ने अकबर को गिरफ़्तार किया।

उक्त ग्रुप में कई आपत्तिजनक मैसेज डाले गए थे। बाबरी ढाँचे के फोटो के साथ उर्दू में मैसेज लिख कर शेयर किया जा रहा है। अंग्रेजी में भी भड़काऊ बातें लिख कर शेयर की जा रही थी। अकबर उस ग्रुप का एडमिन भी था। बता दें कि उत्तर प्रदेश में भी विभिन्न तकनीकों के माध्यम से पुलिस सोशल मीडिया पर नज़र रख रही है। यूपी पुलिस ने बताया है कि सोशल मीडिया पर 8275 से भी अधिक आपत्तिजनक पोस्ट्स के ख़िलाफ़ एक्शन लिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इमरजेंसी नंबर सेवा के दफ्तर का दौरा कर तैयारियों की जानकारी ली थी। राजस्थान में भी पुलिस इसी तरह सतर्कता बरत रही है।

JNU में महिला प्रोफेसर के कपड़े फाड़ने की कोशिश, विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस से भिड़े छात्र

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र महिला अधिकारों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए झंडा उठाए चल रहे हैं। जेएनयू की छात्राएँ भी ख़ुद को समाज के लिए चिंतित दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़तीं। ऐसे में यूनिवर्सिटी कैम्पस से ही महिलाओं को अपमानित किए जाने की ख़बर आए तो आपका रिएक्शन क्या होगा? यह भी बताना आवश्यक है कि यह काम जेएनयू उन्हीं छात्राओं का है जो दुनिया के सामने खुद को महिलाओं के सम्मान का झंडाबरदार बताती हैं। जेएनयू में चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच आए इस शर्मनाक वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर उक्त छात्रों की थू-थू हो रही है।

राष्ट्रीय अल्पसंख़्यक आयोग के सदस्य आतिफ रशीद ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया, जो जेएनयू में चल रहे हालिया विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है। इस वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि छात्राएँ एक महिला प्रोफेसर के साथ बदसलूकी कर रही हैं। आतिफ रशीद ने इस ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा:

जेएनयू में एक महिला प्रोफेसर के साथ इतनी बदसलूकी? यह कोई छात्र आन्दोलन नहीं हो सकता। ताज्जुब नहीं होगा यदि यह कपड़े फाड़ने का प्रयास करने वाली वामपंथी विचारधारा की समर्थक छात्रा, कल महिला अधिकारों पर भाषणबाजी करते हुए दिखे। शर्मनाक!

जेएनयू के कई छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्र-विरोधी नीतियाँ बनाने का आरोप लगा कर विरोध-प्रदर्शन में लगे हुए हैं। सोमवार (नवंबर 11, 2019) को दीक्षांत समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया और समारोह को सम्बोधित किया। इसके बावजूद छात्र लगातार प्रदर्शन और नारेबाजी करते रहे। ये छात्र ड्राफ्ट हॉस्टल मैन्युअल के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसे इंटर-हॉल प्रशासन द्वारा लाया गया है। छात्रों के आरोप है कि इस मैन्युअल के लागू होने के बाद फी बढ़ जाएगी, ड्रेस कोड लागू हो जाएगा और छात्रों के लिए कर्फ्यू जैसा माहौल होगा।

आज छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का भी प्रयोग किया। पुलिस और छात्रों के बीच झड़प भी हुई। इससे पहले जेएनयू के एक डीन की नारेबाजी की वजह से तबीयत ख़राब हो गई थी। छात्रों ने उन्हें घेर कर प्रदर्शन किया था। जिस एम्बुलेंस से उन्हें लेकर हॉस्पिटल ले जाया जा रहा था, छात्रों ने उसे घेर कर प्रदर्शन किया था। पिछले साल भी जेएनयू के छात्रों ने दीक्षांत समारोह का बहिष्कार करने की घोषणा की थी।

यूपी में साधु वेशधारी युवक की हत्या, आँखें फोड़ खेत में फेंकी लाश

यूपी के बांदा जिले में हत्या का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ के एक दुर्गा मंदिर में में रह रहे साधु वेशधारी युवक का शव मन्दिर से चंद कदम दूर खेत में मिला। इस घटना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने पुलिस को घटना की जानकारी दी।

घटना बबेरू कोतवाली क्षेत्र के बुढ़ौली गाँव की है। गाँव में मंदिर में रहने वाले साधु वेशधारी 40 वर्षीय युवक कृष्ण कुमार उर्फ लाला की हत्या करने के बाद शव को मंदिर से कुछ ही दूर के एक खेत में फेंक दिया गया। रविवार को सुबह कुछ लोग खेतों की तरफ गए तो मंदिर से करीब पाँच सौ मीटर दूर कृष्ण कुमार उर्फ लाला का रक्तरंजित शव धान के खेत में पड़ा देखा। इसकी सूचना पुलिस को दी गई।

सूचना मिलते ही संबंधित थाने की पुलिस मौके पर पहुँची और छानबीन में जुट गई। बेबरू के एसएचओ शशि कुमार पांडेय ने छानबीन के बाद बताया कि उसके हाथ-पैर एक साफी से पीछे की तरफ बँधे थे और दोनों आँखें फूटी हुई थीं। इसके अलावा गर्दन और जिस्म के अन्य हिस्सों में भी चोट के निशान थे।

बबेरू थाना के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) कुलदीप सिंह ने सोमवार (नवंबर 11, 2019) को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि कृष्ण कुमार की मौत गले में फंदा कसने से हुई है। कुलदीप सिंह ने बताया कि मृतक मुरवल गाँव का रहने वाला था और पिछले कुछ समय से बुढ़ौली गाँव के दुर्गा मंदिर में अन्य साधुओं के साथ रह रहा था।

ग्रामीणों का कहना है कि घटना वाली रात कृष्ण कुमार ने कुछ लोगों के साथ कृष्ण कुमार ने खाया-पीया भी था। पूछताछ के पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में ले लिया है। शशि कुमार ने कहा कि मृतक के दो भाई नोएडा में रहते हैं। उनके आने का इंतजार है। उन्हीं की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज होगी। सीओ ने यह भी बताया कि मृतक युवक आपराधिक प्रवृत्ति का था और बबेरू कोतवाली में उस पर पॉंच मुकदमे दर्ज हैं।

उद्धव और पावर की बैठक ख़त्म होते ही संजय राउत की तबीयत बिगड़ी, हॉस्पिटल में भर्ती

महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए चल रही सरगर्मियों के बीच शिवसेना नेता संजय राउत की तबीयत बिगड़ जाने के कारण उन्हें मुंबई के लीलावती असपताल में भर्ती किया गया है। संजय राउत राज्य में चुनाव नतीजों के आने के बाद से लगातार सुर्ख़ियों में हैं। उनके बयानों को ठाकरे परिवार का ही शब्द माना जाता है। सोमवार (नवंबर 11, 2019) को शाम 5 बजे शिवसेना की बैठक भी होने वाली है, ऐसे में पार्टी मुखपत्र सामना के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत की तबीयत अचानक से ख़राब हो जाना पार्टी के लिए चिंता का विषय हो सकता है। राउत को किन कारणों से हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

संजय राउत के भाई सुनील राउत ने कहा है कि ये बस रूटीन चेकअप है। हालाँकि, उन्होंने यह भी बताया कि वो आज लीलावती हॉस्पिटल में ही भर्ती रहेंगे। ख़बरों के अनुसार, राज्यसभा सांसद संजय राउत को मंगलवार को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया जाएगा। कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि उन्हें पैर में जोर का दर्द के कारण हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है और वो अगले 3 दिनों तक भर्ती रहेंगे। कुछ ख़बरों में उनके सीने में दर्द की शिकायत की बात कही गई है।

मोदी सरकार में शिवसेना के इकलौते मंत्री अरविन्द सावंत ने सुबह इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी अब राजग का साथ छोड़ कर कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बना सकती है। एनसीपी ने कहा है कि कॉन्ग्रेस से विचार करने के बाद ही आगे का फ़ैसला लिया जाएगा, जबकि कॉन्ग्रेस के विधायकों ने शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने की इच्छा पार्टी आलाकमान तक पहुँचा दी है। अरविन्द सावंत ने कहा है कि आदित्य ठाकरे एक बहुत अच्छे नेता हैं, क्योंकि वो यूट्यूब पर अच्छा बोलते हैं।

कॉन्ग्रेस के सभी विधायक जयपुर में एक रिसॉर्ट में रुके हुए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेतागण वहीं पर नव-निर्वाचित विधायकों के साथ लगातार मंत्रणा कर रहे हैं। अभी उद्धव ठाकरे कॉन्ग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद वो आगे की रणनीति तैयार करेंगे। राज्यपाल द्वारा शिवसेना को सरकार गठन के लिए दी गई समयसीमा आज शाम को ख़त्म हो जाएगी। इसीलिए, उद्धव ने आज ख़ुद शरद पवार से मुलाक़ात की।

कहा जा रहा है कि जब प्रणव मुखर्जी राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में मातोश्री गए थे, तब उनके साथ शरद पवार ही थे। इसीलिए, पुराने सम्बन्ध होने के कारण पवार और ठाकरे के बीच समझौते में दिक्कत आने की सम्भावना कम ही है।

ताज़ा घटनाक्रम को देख कर लगता है कि अब शिवसेना और एनसीपी, दोनों ही दलों की निगाहें कॉन्ग्रेस की तरफ ही हैं। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा है कि किसानों की दुर्दशा को देखते हुए जनता को वैकल्पिक व्यवस्था देने का काम किया जाएगा। उन्होंने भी कहा कि उन्हें कॉन्ग्रेस की प्रतिक्रिया का इन्तजार है। शिवसेना समर्थकों ने कई पोस्टर चिपका कर उद्धव को अगला सीएम बनाने की माँग की है। बता दें कि पहले ऐसे ही पोस्टर आदित्य को लेकर लगे हुए थे।

अयोध्या पर फैसला सुनाने के बाद जजों संग गुवाहाटी पहुँचे CJI गोगोई, कहा- आपकी शुभकामनाएँ चाहिए

9 नवंबर को अयोध्या मामले पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाने के बाद मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायधीशों से साथ गुवाहाटी पहुँचे। यहाँ वह ‘कोर्ट्स ऑफ इंडिया’ के लोकार्पण के दौरान उपस्थित रहे। वहॉं लोगों को संबोधित करते हुए वे भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “यह शायद मेरा आखिरी सार्वजनिक समारोह है। मैं किसी भी विवादास्पद मुद्दे पर नहीं जाना चाहता, यह अवसर भी नहीं है। मैं जीवन के दूसरे चरण में आपकी शुभकामनाएँ चाहता हूँ।”

हालाँकि इस दौरान भले ही सीजेआई अपने सुनाए फैसले पर कुछ भी कहने से बचे , लेकिन अन्य न्यायधीशों ने उनकी खुलकर तारीफ की। सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश जस्टिस ह्रषिकेश रॉय ने कहा, “सीजेआई रंजन गोगोई ने मिशन असंभव को संभव बना दिया हैं। उनके नेतृत्व में ये हुआ। जिसकी झलक अयोध्या विवाद पर फैसले में पूरी तरह दिखी। आज भारत माता CJI गोगोई को आशीर्वाद दे रही होंगी।”

इसके बाद जस्टिस रवीन्द्र भट ने मंच सँभालते हुए अयोध्या फैसले पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा, “शनिवार को भारतीय अदालत ने एक इतिहास देखा, जब अदालत ने एक आवाज में फैसला सुनाया। जहाँ हमने किसी एक न्यायाधीश की आवाज नहीं सुनी, बल्कि सभी ने एक आवाज में फैसला दिया।”

समारोह में मौजूद असम मुख्यमंत्री सर्बानंनद सोनोवाल ने भी इस दौरान सीजेआई की प्रशंसा की और उन्हें असमवासियों के गर्व का कारण बताया। उन्होंने कहा कि यह एक महान दिन है। सीजेआई पर हर असमवासी को गर्व होता है। ऐतिहासिक निर्णय देने के कारण अब हर कोई जस्टिस गोगोई से खुश हैं और असम के लोग बहुत गर्व कर रहे हैं। गौरतलब है सीजेआई रंजन गोगोई आगामी 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। इसके बाद वह अपने गुवाहाटी स्थित आवास में ही रहेंगे।

सभी जजों को लंच पर लेकर गए सीजेआई

अयोध्या मामले पर फैसला सुनाने के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पीठ के अन्य न्यायधीशों को रात में डिनर के लिए लेकर गए। जिनमें न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एसए नजीर, न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़़ शामिल थे। खबरों के मुताबिक सीजेआई ने डिनर की घोषणा फैसला सुनाने के तुरंत बाद कर दी थी। जिसके बाद वह सभी जजों को ताज मानसिंह होटल ले गए।

पाँचों जजों की एहतियातन बढ़ाई गई सुरक्षा

ऐतिहासिक फैसला सुनाने के बाद संवैधानिक पीठ में मौजूद पाँचों जजों की सुरक्षा को बढ़ाने का भी ऐलान कर दिया गया है। हालाँकि जजों की सुरक्षा जिम्मा संभाल रहे अधिकारियों का कहना है कि गंभीर खतरे की कोई सूचना नहीं है, लेकिन एहतियातन ये कदम उठाया गया है। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि पाँचों न्यायधीशों के आवास पर सुरक्षा ड्रिल के तहत अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक अधिकारी ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि सुरक्षा को सिर्फ इसलिए बढ़ाया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से निपटा जा सके। एहतियात के तौर पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। जजों को किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है।