आतंकवाद के पनाहगाह पाकिस्तान को शर्मसार करने वाली एक और खबर सामने आई है। बीते पॉंच साल में 134 मुल्कों से उसके पॉंच लाख से ज्यादा नागरिक बाहर किए गए है। फर्जी दस्तावेजों और आपराधिक मामलों के कारण इनलोगों को बाहर निकाला गया।
पाकिस्तानी गृह मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक 2014 के बाद से 519,000 पाकिस्तानी नागरिक विभिन्न मुल्कों से निर्वासित किए गए हैं। दिलचस्प यह है कि मजहब का मसीहा बनने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के नागरिक सबसे ज्यादा इस्लामिक मुल्कों से ही निकाले गए। पाकिस्तानियों को बाहर निकालने के मामले में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और तुर्की अव्वल हैं।
रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि तुर्की और सऊदी अरब के निर्वासित शिविरों में अभी भी कम से कम 65,000 पाकिस्तानी रह रहे हैं। सऊदी पाकिस्तानियों को निकालने में सबसे आगे है। 2014 के बाद से उसने 3,25,000 से अधिक पाकिस्तानियों को निष्कासित किया है। इसी दौरान 52,000 से अधिक पाकिस्तानियों को निष्कासित करके यूएई सूची में दूसरे स्थान पर है। ओमान और तुर्की में अवैध रूप से रह रहे 47,000 पाकिस्तानी पाँच साल के भीतर घर लौटाए गए हैं।
इसी तरह, 2014 से 2019 के बीच 18,312 पाकिस्तानी मलेशिया से, 15,320 ब्रिटेन से, 17,534 ग्रीस से, 15,413 ईरान से, 936 अमेरिका से, 275 चीन से, 445 कनाडा से और 920 जर्मनी से निकाले गए हैं। यूरोपीय देशों ने भी अच्छी-खासी तादाद में अवैध रूप से बस गए पाकिस्तानियों को बाहर किया है। इटली ने 945, फ्रांस ने 845, स्पेन ने 494, बेल्जियम ने 375, नॉर्वे ने 301, ऑस्ट्रिया ने 270, स्वीडन ने 112, नीदरलैंड ने 145, रोमानिया ने 165, स्विटजरलैंड ने 65 और बुल्गारिया ने 175 अप्रवासियों को वापस पाकिस्तान भेजा है।
कथित तौर पर, पाकिस्तानी निर्वासितों की यह बड़ी संख्या, पाकिस्तान में सक्रिय रूप से काम करने वाले मानव तस्करी समूहों का शिकार होती हैं। अब तक, आंतरिक मंत्रालय ने देश में ऐसे 1000 से अधिक समूहों की पहचान की है। मानव तस्कर अक्सर ऐसे लोगों का शिकार करते हैं जो बेहतर जीवन और बेहतर रोज़गार के अवसरों की तलाश में विदेश जाना चाहते हैं।
हिंदुत्ववादी नेता कमलेश तिवारी की निर्मम हत्या पर सोशल मीडिया में हा-हा करते ‘शांतिदूत’ तो आपने बहुतेरे देखे होंगे। अब लाइव टीवी पर भी इस जघन्य वारदात की निंदा करने से इनकार किया जा रहा है। टाइम्स नाउ के एक डिबेट में शामिल राजनीतिक विश्लेषक अब्दुल रज्जाक खान ने कहा कि कमलेश तिवारी की हत्या की वे निंदा नहीं करेंगे और वह इसका हकदार था।
स्वयंभू राजनीतिक विश्लेषक ने ये बातें शनिवार (19 अक्टूबर) को तिवारी की हत्या पर चल रहे डिबेट शो के दौरान कही। बहस के दौरान खान ने इस घटना की निंदा से इनकार कर जोर देते हुए कहा कि तिवारी इसके ही हकदार थे।
टाइम्स नाउ टीवी चैनल पर चल रही लाइव चर्चा में 6 पैनलिस्ट शामिल थे। अब्दुल रज्जाक ख़ान बतौर राजनीतिक विश्लेषक चर्चा में भाग ले रहे थे। ख़ान कई राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं। कथित तौर पर, वे बीबीएमपी नगरपालिका चुनावों में बसपा के उम्मीदवार थे। उससे पहले वे जेडीएस के प्रवक्ता भी रह चुके हैं।
गौरतलब है कि कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने हिन्दू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की 18 अक्टूबर को निर्मम हत्या कर दी थी। इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। लेकिन, मुस्लिमों का एक वर्ग इस जघन्य वारदात की सराहना करता भी नजर आ रहा है। सोशल मीडिया में कई लोगों ने उनकी हत्या को जायज ठहराया है।
बता दें कि मध्य प्रदेश के मुफ़्ती-ए-आज़म के अब्दुल रज्जाक ने कमलेश तिवारी के खिलाफ 2016 में लोगों को क़ानून हाथ में लेने के लिए उकसाया था। रज्जाक ने कहा था,
“हम पूरी निष्ठा के साथ भारत में रहते हैं और उम्मीद करते हैं कि भारत के कानून हमारे धार्मिक भावनाओं के प्रति निष्पक्ष और ईमानदार रहेंगे, खासकर पैगंबर के मामले में। लेकिन यदि कानून हमें न्याय प्रदान नहीं करता है, तो हमारे लिए कानून के प्रति वफादार रहना कठिन होगा और हमें इसे अपने हाथों में लेना होगा।”
उल्लेखनीय है कि कमलेश तिवारी की पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के बयान के बाद आई थी। आजम खान ने एक विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि आरएसएस के सदस्य समलैंगिक होते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना तुर्की दौरा रद्द कर दिया है। तुर्की द्वारा जम्मू कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को समर्थन दिए जाने के बाद भारत ने अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव करते हुए तुर्की की आलोचना की थी। तुर्की लगातार कुर्दिश और सीरिया के लोगों की हत्या कर रहा है, जिसकी भारत ने आलोचना की थी। भारत ने कुर्द की स्वतंत्रता का समर्थन किया था। साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी ने साइप्रस के राष्ट्रपति से मुलाक़ात कर उसकी सम्प्रभुता को समर्थन दिया था। बता दें कि तुर्की ने साइप्रस के एक बड़े भाग पर कब्ज़ा कर रखा है। पीएम मोदी का तुर्की दौरा रद्द होने से वहाँ के राष्ट्रपति रेसेप तैयब अर्दोगान को करारा झटका लगा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 दिन के दौरे पर तुर्की जाने वाले थे लेकिन वहाँ के राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में अनुच्छेद 370 निरस्त करने के ख़िलाफ़ दिए गए बयान को भारत ने गंभीरता से लिया है क्योंकि यह भारत का आंतरिक मामला है। यहाँ तक कि एफएटीएफ (फाइनेंसियल एक्शन टास्क फाॅर्स) की पेरिस में आयोजित बैठक में भी तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन किया। इससे पहले तुर्की, चीन और मलेशिया के समर्थन के कारण ही पाकिस्तान एफएटीएफ में ब्लैकलिस्ट होने से बच गया था।
Narendra Modi will not go ahead with a planned visit to Ankara this year to show displeasure over the Turkish President’s comments on India revoking autonomy of Kashmir, reports say https://t.co/1jrcUgmxLd
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्टूबर 27-28 को सऊदी में एक बड़े निवेश समिट में भाग लेने जा रहे हैं। वो वहीं से तुर्की जाने वाले थे। हालाँकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस दौरे को अभी तक अंतिम रूप दिया ही नहीं गया था, इसीलिए दौरा कैंसल करने वाली बात उठती ही नहीं। पीएम मोदी इससे पहले 2015 जी-20 समिट में भाग लेने तुर्की गए थे। तुर्की के राष्ट्रपति भी जुलाई 2018 में भारत दौरे पर आए थे। लेकिन, तुर्की के राष्ट्रपति ने जम्मू कश्मीर में ‘भारत द्वारा मानवाधिकार हनन’ की बातें कर के दोनों देशों के रिश्तों में खटास ला दी।
We call upon Turkey to exercise restraint and respect the sovereignty and territorial integrity of Syria.
We urge the peaceful settlement of all issues through dialogue and discussion.https://t.co/HuIzEYGbof
हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी तुर्की की आलोचना की थी। तुर्की की राष्ट्रपति को भेजे गए एक अजीबोगरीब पत्र में उन्होंने धमकी दी थी कि अगर वो एक डील पर सहमत न हुए तो तुर्की की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया जाएगा। भारत ने भी तुर्की को लताड़ लगाते हुए सलाह दी थी कि जम्मू कश्मीर पर बिना परिस्थितियों को समझे किसी देश के पूर्णरूपेण आंतरिक मुद्दे पर नकारात्मक टिप्पणी करना सही नहीं है। हालाँकि, तुर्की ने कुर्द पर बमबारी का सिलसिला अभी रोका नहीं है और वहाँ के राष्ट्रपति को कई हत्याओं का जिम्मेदार माना जा रहा है।
कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने करारा झटका दिया है। बनर्जी को नोबेल मिलने की घोषणा के बाद कॉन्ग्रेस नेताओं ने अपनी पार्टी से उनके जुड़ाव को प्रदर्शित करते हुए यह कहा था कि कैसे ‘न्याय योजना’ को तैयार करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। यहाँ तक कि राहुल ने भी उन्हें बधाई देते समय लिखा कि बनर्जी ने ‘न्याय योजना’ की रूपरेखा तैयार करने में मदद की थी। साथ ही राहुल यह कहना नहीं भूले कि इस योजना में ग़रीबी को ख़त्म करने और अर्थव्यवस्था को सुधारने की क्षमता थी।
अब नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी ने अपने दिए एक इंटरव्यू के दौरान राहुल गाँधी के कई दावों को नकार दिया है। बनर्जी ने कहा है कि ‘न्याय योजना’ के क्रियान्वयन के लिए इनकम टैक्स बढ़ाने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं था। बता दें कि इस योजना के तहत हर परिवार में किसी एक बेरोज़गार व्यक्ति को प्रति वर्ष 72,000 रुपए दिए जाने वाले थे। अभिजीत बनर्जी का मानना है कि अगर केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार बनती तो उन्हें इस योजना को लागू करने के लिए आम जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ाने के अलावा कोई अन्य चारा नहीं बचता। इससे राहुल के एक पुराने बयान की पोल खुलती नज़र आ रही है।
इस साल अप्रैल में तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा था कि ‘न्याय योजना’ के क्रियान्वयन के लिए इनकम टैक्स नहीं बढ़ाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि इस मिनिमम इनकम गारंटी स्कीम को फंड करने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मध्यम वर्ग से रुपए वसूले जाएँगे। राहुल ने इससे इनकार करते हुए कहा था कि ऐसा कुछ भी नहीं किया जाएगा। राहुल गाँधी ने अजीबोगरीब दावा करते हुए कहा था कि विजय माल्या, मेहुल चौकसी, अनिल अम्बानी, नीरव मोदी और ललित मोदी जैसों से इस योजना के लिए रुपए वसूले जाएँगे, जिन्हें ‘मोदी ने रुपए दे दिए।’
Basically Congress did not have any other option than raising taxes to fund NYAY. Abhijit Banerjee says it was fiscally unsustainable. In short NYAY was an election gimmick. Fantastic interview by @maryashakil#AbhijitBanerjeehttps://t.co/8VRhzkTsNF
अर्थशास्त्री बनर्जी ने कॉन्ग्रेस को झटका देते हुए कहा है कि वो नहीं मानते हैं कि ‘न्याय योजना’ एक अच्छी तरह तैयार की गई योजना थी। साथ ही उन्होंने इस योजना की रूपरेखा तैयार करने के लिए ख़ुद को ज़िम्मेदार बताने से भी इनकार कर दिया है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि अगर यूपीए की जीत हो जाती तो उस पर इतना राजनीतिक और आर्थिक दबाव होता कि उसे इस योजना में बदलाव करना पड़ता। बनर्जी ने कॉन्ग्रेस नेताओं के उन दावों को भी नकार दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि उन्होंने ‘न्याय योजना’ को डिज़ाइन किया है। बनर्जी ने कहा कि उनका योगदान सिर्फ़ सूचनाएँ और जानकारियाँ देने तक ही सीमित था, जिनका प्रयोग करना या न करना कॉन्ग्रेस के ऊपर था।
जब नोबेल विजेता से पूछा गया कि ये योजना इतनी ही अच्छी थी तो कॉन्ग्रेस ने इसे उन राज्यों में क्यों नहीं लागू किया जहाँ वे सत्ता में हैं? इसके जवाब में बनर्जी ने पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य एक तरह से वित्तीय मामलों में इतना कमज़ोर हो चुका है कि वो इस योजना को लागू कर ही नहीं सकता। अभिजीत बनर्जी ने इस बात को भी माना कि कॉन्ग्रेस एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने में विफल रही है।
आपको याद होगा कि लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस ने ‘न्याय योजना’ का बढ़-चढ़ कर प्रचार-प्रसार किया था और पार्टी को उम्मीद थी कि लोग इस योजना के लागू होने की आस में उसे वोट देंगे। कॉन्ग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गाँधी ने घोषणा की थी कि इस योजना के तहत ग़रीब परिवारों को ‘न्यूनतम आमदनी’ के रूप में प्रतिवर्ष 72,000 रुपए दिए जाएँगे। साथ ही पार्टी ने यह भी कहा था कि इसके लिए किसी अन्य सरकारी योजना का आवंटन कम नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ था कि कॉन्ग्रेस की सरकार बनने पर 7 लाख करोड़ रुपए सिर्फ़ सब्सिडी पर ही ख़र्च किए जाते।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मोजर बेयर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया है। इसके मुताबिक रतुल पुरी ने अमेरिका के एक नाइटक्लब में एक ही रात में 1.1 मिलियन डॉलर यानी करीब 7.8 करोड़ रुपए फूँक दिए थे।
बता दें कि चार्जशीट में रतुल पुरी के अलावा उनके सहयोगी और मोजर बेयर इंडिया (प्राइवेट) लिमिटेड (MBIL) का भी नाम शामिल है। पुरी मोजर बेयर के कार्यकारी निदेशक हैं। ईडी ने चार्जशीट में कहा है, “लेनदेन का सत्यापन किया गया और यह पता चला कि लेनदेन के पैसे का इस्तेमाल भारत और विदेशों के तमाम महँगे होटलों में ऐशो-आराम पर खर्च किए गए। प्रोवोकेटर नाम के एक नाइट क्लब में रतुल पुरी ने एक रात में 11,43,980 डॉलर खर्च कर डाले।”
एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि नवंबर 2011 और अक्टूबर 2016 के बीच पुरी का निजी खर्च 4.5 मिलियन डॉलर यानी 32 करोड़ रुपए रहा है। चार्जशीट में आकलन किया गया है कि पुरी ने लगभग 8,000 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की है, जो शुरुआती अनुमान से काफी ज्यादा है।
ईडी का कहना है कि MBIL ने बैंकों से लिए गए लोन को आसानी से खत्म करने के लिए कंपनियों का एक बेहद ही पेचीदा ढाँचा तैयार किया था। ईडी ने अपनी जाँच में ‘शेल कंपनियों’ के जाल पर विशेष गौर फरमाया है, जिनके जरिए हवाला का सारा खेल रचा गया। चार्जशीट में दर्जनों सहयोगी कंपनियों का जिक्र है, जिनके मार्फत फंड को डायवर्ट किया गया।
ईडी ने रतुल पुरी को 20 अगस्त को गिरफ्तार किया था। उसे 17 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। ईडी के अलावा सीबीआई और आयकर विभाग भी रतुल पुरी और उसकी मोजर बेयर कंपनी के खिलाफ जाँच कर रही है। रतुल पुरी अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर घोटाले में भी आरोपित है। उसकी अग्रिम जमानत खारिज कर दी गई थी। इसके साथ ही ईडी ने पुरी पर अगस्ता वेस्टलैंड मनी लॉन्ड्रिंग मामले के एक गवाह की हत्या का भी आरोप लगाया है।
सीबीआई ने रतुल पुरी, उसके पिता दीपक पुरी, माँ नीता और अन्य के खिलाफ 354 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी के मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने इन लोगों के खिलाफ शिकायत की थी। ईडी ने सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर मामला दर्ज किया। बैंक ने दावा किया था कि कंपनी और इसके निदेशकों ने जाली दस्तावेज सौंप कर बैंक को चूना लगाया।
हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश तिवारी हत्याकांड मामले में तीन नए वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो में संदिग्ध हत्यारे नज़र आ रहे हैं। पहले वीडियो में, खालसा होटल (लखनऊ) का वह कमरा है जहाँ संदिग्ध हत्यारे ठहरे हुए थे। इसी कमरे से पुलिस ने ख़ून में सने कुरता, बैग समेत बरामद किया है।
जाँच में पता चला है कि हत्यारों ने अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन के नाम से होटल का कमरा बुक कराया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार होटल मालिक के पास से आरोपियों की आईडी भी मिली है, जिस पर नाम के साथ सूरत का पता दर्ज है। हत्यारों की लोकेशन भी ट्रेस हो गई है। लखनऊ से निकल के हरदोई और बरेली होते हुए गाज़ियाबाद तक की लोकेशन मिली है।
इसके अलावा, एक दूसरा वीडियो सामने आया है जिसमें हत्यारे होटल के रिसेप्शन काउंटर पर नज़र आ रहे हैं। शायद यह वीडियो हत्या करने से पहले होटल का कमरा बुक करने के समय का है।
तीसरे वीडियो में संदिग्ध हत्यारा भगवा कपड़े में नज़र आ रहे हैं। एक के हाथ में पॉलीथिन है। शायद इसमें वही मिठाई का डिब्बा रहा होगा जिसमें छिपाकर हत्यारे चाकू और पिस्टल लेकर तिवारी के कार्यालय पहुॅंचे थे। इस फुटेज को देखकर यह पता चल रहा है कि यह वीडियो हत्या की वारदात को अंजाम देने से पहले का है। बता दें कि हत्या के दौरान कमलेश तिवारी के सीने और ठोड़ी पर 15 से अधिक वार किए गए थे।
इस बीच, तिवारी के परिजनों ने रविवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर भेंट की। मुलाकात के बाद कमलेश तिवारी की पत्नी किरण तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। किरण तिवारी ने कहा कि हत्यारों को मृत्युदंड दिए जाने की माँग पर मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि दोषियों को कड़ी सज़ा दिलवाई जाएगी। पीड़ित परिवार ने 11 सूत्री मॉंग पत्र सीएम को सौंपा। परिवार लखनऊ में कमलेश तिवारी की प्रतिमा लगाने की मांग कर रहा है। खुर्शीद बाग का नाम बदलकर कमलेश बाग रखने के साथ ही अपराधियों पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई है।
Kiran Tiwari, wife of Kamlesh Tiwari, after meeting UP CM Yogi Adityanath, in Lucknow: He (UP CM) assured us that justice will be done. We demanded capital punishment for the murderers. He assured us that they will be punished. #KamleshTiwariMurderpic.twitter.com/cxJHdpXiie
ग़ौरतलब है कि लखनऊ में नाका क्षेत्र स्थित हिन्दू महासभा कार्यालय में कमलेश तिवारी को बदमाशों ने गला रेतकर व गोली मारकर हत्या कर दी थी। शुक्रवार (18 अक्टूबर 2019) को हत्या की वारदात को अंजाम देकर हत्यारे वहाँ से फ़रार हो गए थे। गंभीर हालत में तिवारी को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।
इस मामले में गुजरात एटीएस ने सूरत के मौलाना मोहसिन शेख, फैजान पठान और राशिद पठान को हिरासत में लिया है। इसके साथ ही महाराष्ट्र एटीएस ने सैयद आसिम अली नाम के शख़्स को हिरासत में लिया है। राशिद पठान के पाकिस्तान से भी कनेक्शन होने की बात सामने आई है।
जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के तंगधार सेक्टर में पाकिस्तान द्वारा किए गए सीजफायर उल्लंघन का जवाब देते हुए भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में स्थित आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया है। तोपों से आतंकी शिविरों पर गोले दागे जाने की खबर है। इन शिविरों में जुटे दहशतगर्दों को घुसपैठ कराने की पाकिस्तानी सेना लगातार कोशिश कर रही थी। सूत्रों के अनुसार तंगधार सेक्टर से सटे पीओके के इलाकों में भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के 4-5 सैनिक मारे गए हैं और कई जख्मी भी हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार पीओके नीलम वैली में आतंकियों के चार लॉन्च पैड भी सेना ने तबाह कर दिए हैं। इससे पहले रविवार (अक्टूबर 20, 2019) को भी पाकिस्तानी सेना ने आतंकियों को घुसपैठ कराने के लिए सीजफायर का उल्लंघन किया। सीजफायर उल्लंघन में दो जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। साथ ही एक आम नागरिक की भी मौत हो गई।
Sources: As per reports, 4-5 Pakistan Army soldiers have been killed and several have been injured. Indian Army has launched attacks on terrorist camps situated inside Pakistan occupied Kashmir (PoK) opposite the Tangdhar sector. pic.twitter.com/SFFFjAReHX
घुसपैठ के मंसूबे नाकाम रहने पर पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलाबारी की। इससे 2 गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हो गईं और 19 गायों और भेड़ों के साथ 2 गोशाला भी नष्ट हो गए। सेना ने बताया कि पाकिस्तान की इस नापाक हरकत का करारा जवाब दिया गया है और जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा और उसके सैनिक भी मारे गए हैं।
Sources: Four terror launch pads in Neelam valley (Pakistan Occupied Kashmir) have been targeted/destroyed, fatalities reported. Indian Army has launched attacks on terrorist camps situated inside Pakistan occupied Kashmir (PoK) opposite the Tangdhar sector. pic.twitter.com/phQucUX9Zz
J&K: Houses of Manyari village in Hiranagar sector of Kathua district damaged, following shelling by Pakistan. Locals say, “We’re lucky children weren’t sleeping inside. We request the PM to give befitting reply to Pakistan.We’ve already suffered losses due to firing by Pakistan” pic.twitter.com/rpltN6a5IB
पाकिस्तान द्वारा गोलाबारी के बाद कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर के मनियारी गाँव के कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। पाकिस्तान की तरफ से लगातार की जा रही गोलाबारी से वहाँ के लोग काफी परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने इस पर अपनी व्यथा जाहिर करते हुए कहा, “हम भाग्यशाली हैं कि बच्चे अंदर नहीं सो रहे थे। हम पीएम से अनुरोध करते हैं कि वे पाकिस्तान को करारा जवाब दें। पाकिस्तान द्वारा गोलीबारी के कारण हमें पहले ही नुकसान हो चुका है।”
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान इससे पहले भी कई बार सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है। हालाँकि हर बार भारतीय जवानों ने इसका मुँहतोड़ जवाब देते हुआ पाकिस्तान की हर नापाक हरकत को नाकामयाब किया है।
हिंदू समाज पार्टी के प्रमुख और अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्याकांड में बड़ा ख़ुलासा हुआ है। दोनों हत्यारे लखनऊ के ही नाका थाना क्षेत्र के खालसा होटल में ठहरे थे। होटल से खून लगा भगवा कुर्ता और बैग बरामद किया गया है। पुलिस ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट के साथ मिलकर पूरे कमरे की जाँच की और सामान क़ब्ज़े में ले लिया।
जाँच में पता चला है कि हत्यारों ने अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन के नाम से होटल का कमरा बुक कराया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार होटल मालिक के पास से आरोपियों की आईडी भी मिली है, जिस पर नाम के साथ सूरत का पता दर्ज है। हत्यारों की लोकेशन भी ट्रेस हो गई है। लखनऊ से निकल के हरदोई और बरेली होते हुए गाज़ियाबाद तक की लोकेशन मिली है।
ख़बर के अनुसार, शनिवार (19 अक्टूबर) को मामले की जाँच कर रही टीम को सूचना मिली थी कि पश्चिमी क्षेत्र के अंतर्गत खालसा होटल के कमरे में कुछ भगवा कपड़े और बैग पड़ा है। सूचना मिलते ही लखनऊ पुलिस मौक़े पर पहुँची और फील्ड यूनिट को बुलाकर साक्ष्य इकट्ठे किए। मौक़े पर आला अधिकारियों ने भी पहुँचकर मुआयना किया।
बताया जा रहा है कि आरोपी इसी होटल में रुके थे। यहीं से भगवा कपड़ा पहनकर वे कमलेश तिवारी से मिलने पहुँचे थे। हत्या के बाद आरोपी दोबारा फिर होटल में आए। कपड़ा बदला और फरार हो गए।
जानकारी के मुताबिक़, 17 अक्तूबर को रात 11 बजे दोनों आरोपी होटल आए थे। 18 अक्टूबर को सुबह साढ़े 10 बजे होटल से निकल गए। इसके बाद दोपहर 1.21 बजे होटल में वापस आए और दोपहर को 1.37 बजे वापस निकल गए।
इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि दोनों हमलावरों की आख़िरी लोकेशन बरेली थी। हमलावर कुछ समय तक बरेली में रहे और फिर शहर से भाग गए। फ़िलहाल, यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) समेत कई पुलिस दल आरोपितों की धर-पकड़ में जुटे हुए हैं। ग़ौरतलब है कि लखनऊ में नाका क्षेत्र स्थित हिन्दू महासभा कार्यालय में कमलेश तिवारी को बदमाशों ने गला रेतकर व गोली मारकर हत्या कर दी थी। शुक्रवार (18 अक्टूबर 2019) को हत्या की वारदात को अंजाम देकर हमलावर वहाँ से फ़रार हो गए थे। गंभीर हालत में तिवारी को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।
इस मामले में गुजरात एटीएस ने सूरत के मौलाना मोहसिन शेख, फैजान पठान और राशिद पठान को हिरासत में लिया है। इसके साथ ही महाराष्ट्र एटीएस ने सैयद आसिम अली नाम के शख्स को हिरासत में लिया है। राशिद पठान के पाकिस्तान से भी कनेक्शन होने की बात सामने आई है।
पश्चिम बंगाल के मालदा में 14 अक्टूबर से लापता कॉलेज छात्रा मरजिना खातून का क्षत-विक्षत शव शुक्रवार (अक्टूबर 18, 2019) देर रात रतुआ थाना के सामसी रेल लाइन के किनारे मिला। जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया। स्थानीय लोगों ने मालदा-रतुआ राज्यमार्ग पर सड़क जाम कर दिया। उन लोगों ने इसके लिए मरजिना खातून के शौहर मोहम्मद अजहरुद्दीन को जिम्मेदार ठहराया और सजा की माँग की। लोगों का कहना है कि मरजिना के शौहर ने उसके चेहरे पर एसिड भी फेंका।
पुलिस ने मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मोहम्मद अजहरुद्दीन को गिरफ्तार किया और फिर शनिवार (अक्टूबर 19, 2019) को अदालत में पेश किया। जिसके बाद उसे 10 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि स्थानीय लोगों द्वारा किया जा रहा विरोध प्रदर्शन काफी हिंसक हो गया था। लोगों ने पुलिस के ऊपर पथराव किए और बम भी फेंके। जिसमें 4 पुलिस वाले घायल हो गए। स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
दैनिक जागरण में छपी खबर का स्क्रीनशॉट
खबर के मुताबिक मरजिना और सामसी निवासी अजहरुद्दीन का प्रेम संबंध था। फिर परिवारवालों की रजामंदी से दोनों के निकाह हो गया। मरजिना के परिजनों के अनुसार कुछ दिन बाद पता चला कि अजहरुद्दीन के पड़ोस की एक लड़की के साथ नाजायज संबंध हैं। नाजायज संबंध के बारे में पता चलने पर मरजिना अपने परिजनों के पास आ गई।
परिजनों का कहना है कि अजहरुद्दीन कुछ दिन बाद पहले मरजिना को अपने साथ ले गया था। सुसराल जाने के बाद से मरजिना लापता हो गई। परिजनों ने हर जगह उसकी तलाश की। लापता होने की शिकायत भी दर्ज कराई। इस दौरान अजहरुद्दीन भी फरार था। शव मिलने के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर अजहरूद्दीन को गिरफ्तार कर लिया। बता दें कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में आरोपी का नाम शेख बापी बताया है और वह मरजिना खातून का मंगेतर बताया गया है।
एक अखबार की एक रिपोर्ट पढ़ रहा था कि अयोध्या के दीपोत्सव की तैयारियाँ जोरों पर हैं: कलीम और कासिम बना रहे खड़ाऊँ, मल्लो, गुलाबो, सब्बो गूथ रहीं मालाएँ! एक लाइन में कितना सद्भाव है, आँखों में आँसू आ जाते हैं कि यही तो है गाँधी के सपनों का भारत, जहाँ स्वामी श्रद्धानंद की हत्या करने वाले अब्दुल के बारे में गाँधी ने कहा था कि अब्दुल भाई को माफ कर दो। लेकिन अब्दुल के बंधु-बांधव कमलेश तिवारी को माफ नहीं कर सके।
गाँधी के सपनों के इस भारत में बहुसंख्यक खौफ में जी रहा है। हिन्दू आज अपने ही देश में डर कर जीने को मजबूर है क्योंकि हर सोशल मीडिया पोस्ट पर किसी सरफराज को मेरा पता चाहिए ताकि वो मेरा गला रेत दे, इंशाअल्लाह! यही लिखता है सरफराज, अब्दुल, मोहिउद्दीन, अनवर और कई वैसे लोग। नाम आप बदल दीजिए, धमकी वही है कि पता बता दे, बताता हूँ आ कर।
ये वो नकारे लौंडे है जिन्हें पैदा कर दिया गया है और बताया नहीं गया कि अपने जीवन में करना क्या है। ये जो इधर-उधर से सुनते हैं, उन्हें वही सही लगता है। पढ़े-लिखे भाईजान टीवी पर बोलते हैं कि कमलेश तिवारी की हत्या जायज है। वो अपने मुसल्लम ईमान की लाज रख लेते हैं, उन पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बरसाई जाएँगीं, बंदनवार सजाए जाएँगे, मरहबा-मरहबा कह कर नाचा जाएगा।
लेकिन भारत के ईमान की लाज कौन रखेगा? ये जिम्मेदारी सिर्फ हिन्दुओं पर है कि वो अपने देवता की पूजा के लिए खड़ाऊँ और फूल मालाएँ गरीबुल निशाँ और उसकी बेटी नाजरा बानो से बनवा रहे हैं। कासिम के घर में प्रसाद का डिब्बा तैयार हो रहा है। संत-महंतों को लिए खड़ाऊँ और पोथी रखने के लिए रेहल बनाने वाले सलीम खुश हैं। कलीम खुश इसलिए हैं कि माहौल ठीक हो रहा है। मुस्लिम बहुल सुतहटी, रायगंज, बुराईकुआँ, राजघाट में भी यही माहौल है।
माहौल तो है, लेकिन क्यों है? यहाँ एक पूरा तंत्र है जो हलाल है, जिसका मतलब यह है कि किसी सामान या सुविधा के किसी के घर में पहुँचने तक की प्रक्रिया में सिर्फ एक मजहब के लोगों को ही काम मिला है, और यहाँ दूसरे धर्म के लोग हैं जो देवताओं के लिए मालाएँ उनसे बनवा रहे हैं जिनके मजहब के लिए हर हिन्दू अछूत है, काफिर है और हत्या के योग्य है।
यहाँ विधायक तक ऐलान करता है कैराना में कि हिन्दुओं से सामान मत खरीदो, थोड़ी दूर चलना पड़े तो चलो, इन हिन्दुओं की दुकानें बंद हो जाएँगी, ये खुद ही चले जाएँगे। इन्हें कितनी समस्या है हिन्दुओं से वो देख लीजिए। पहले कैराना से उन्हें भगाया, जो बचे हैं, उन्हें भी भगाना है। इनकी योजना कितनी सही है कि आर्थिक नुकसान पहुँचाओ, हिन्दू भाग जाएगा। लेकिन हिन्दू ऐसा नहीं करता।
हिन्दू ये देख कर सिनेमा नहीं देखता कि उसमें पांडे है कि खान। हिन्दू ये देख कर सामान नहीं खरीदता कि दुकानदार चौधरी है कि मलिक। हिन्दुओं का कोई हलाल सिस्टम है ही नहीं जहाँ बकरे के पैदा होने से लेकर, उसके कटने, छिलने, पैक होने और दुकान में रखे जाने तक बस एक ही मजहब के लोग हैं। हिन्दू तो अपनी मालाएँ भी उनसे बनवाता है जो कमलेश तिवारी की हत्या पर टीवी पर कहते हैं कि बिलकुल सही किया, उसने जो किया, उसे वही मिला। क्योंकि हिन्दुओं से मूर्ख प्रजाति और मिलेगी भी कहाँ!
जो चुप हैं उनसे बहुत ज्यादा डरिए
ऐसा नहीं है कि लेख या विडियो के कमेंट में आने वाला हर खास तरह के नाम वाला आदमी मुझे जान से मारने की ही बात करता है। नहीं, कुछ हैं जो मुझे बताते हैं कि फलाँ मजहब शांति का मजहब है और मुझे फलाँ किताब पढ़नी चाहिए ताकि मैं फलाँ मजहब को समझ सकूँ! बात तो वही है न कि जिस किताब और मजहब को उसी मजहब के लोग नहीं समझ सके, वो मैं कहाँ से समझ पाऊँगा! आखिर कमलेश तिवारी की गर्दन रेतने वाले ने तो दो-चार लाइन जरूर पढ़ी होगी, और उन सबके कृत्य को सही ठहराने वाला भी तो पढ़ा-लिखा ही लग रहा था, मजहब भी सेम बाय सेम। फिर मैं क्यों पढ़ूँ वो किताब? अगर इसे पढ़ने वाले करोड़ों लोग, एक लाख तो ऑन रिकॉर्ड उसकी जान लेने की माँग कर रहे थे, इस हत्या को जायज कहते हैं, तो मैं उस तरह की किताब क्यों पढ़ूँ?
आप डरिए इनसे क्योंकि डरना ज़रूरी है। डरिए और संभल कर रहिए क्योंकि कुछ लोग या तो घात लगाए बैठे हैं, या फिर मौन सहमति दे रहे हैं कि जो हो रहा ठीक ही है। चुप रहने वालों से ज्यादा डरिए क्योंकि हो सकता है वो इस इंतजाम में लगा हो कि उस पर तो किसी को शक होगा ही नहीं, और एक दिन वो जेब से छुरा निकाले और घोंप दे… और समय मिले तो रेत कर हलाल कर दे। ये चुप रहने वाले ज़्यादा खतरनाक होते हैं। इनसे डरिए।
डरने का मतलब यह नहीं है कि आप कमज़ोर हैं। डरने का मतलब है कि आप चौकन्ने हैं, आप की इन्द्रियाँ जागृत हैं। इनसे डरना ज़रूरी है क्योंकि इनमें से कुछ तो मिठाई के डिब्बे में छुरा ले कर घूम रहे हैं। और जो न मिठाई का डब्बा लेकर घूमते, न ही छुरा है उनके पास, वो या तो बिलकुल चुप हैं या फिर खुल्लमखुल्ला बोल रहे हैं कि जो हुआ कमलेश तिवारी के साथ, वो बिलकुल सही था। इसलिए डरना ज़रूरी है क्योंकि:
लिए डिब्बों में वो चलते हैं अब पिस्तौल और चाकू, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए रहो बच कर, रहो डर कर, रहो चुप-चुप, रहो गुम-सुम न जाने कब कहाँ कोई कहीं पिस्तौल ले आए
इन पंक्तियों पर आप हँस सकते हैं, लेकिन कविता का बेकार शिल्प उसके कथ्य को झुठला नहीं सकता।
मुझसे लोग पूछते हैं कि हम क्या करें?
जब किसी ने यह कह दिया हो कि यह युद्ध की शुरुआत है, और आप अगर उनसे सामान खरीद रहे हैं, जो हलाल सर्टिफिकेट के साथ आता है, तो आप अपनी मौत का भी सामान खरीद रहे हैं। ऐसी हर जगह से कमाई का एक हिस्सा ‘जिहाद’ के लिए जाता है। ‘जिहाद’ को कई बुद्धिमान लोग अलग परिभाषा देते हैं कि ये तो कोशिश है। होती होगी, लेकिन कोशिश किस बात की है, ये पूरी दुनिया को दिख रहा है जहाँ, अगर पिछले तीस दिन की बात करूँ तो 118 जिहादी हमले में 642 लोग 21 देशों में मारे गए हैं, 913 घायल हैं।
आप ही के पैसे से, आप ही के खिलाफ युद्ध छेड़ा जा रहा है। आप यह मत पूछिए कि आप क्या करें, चुनाव आपका है कि आपको क्या करना है। मैं आपको यह क्यों कहूँ कि आपको अपने सामान खरीदने के लिए थोड़ी मेहनत करनी पड़े, कीजिए। थोड़ा दूर चलना पड़े चलिए। कम से कम आपको किसी दिन जो गोली लगेगी, या जिस चाकू से रेता जाएगा, किसी दंगे में जो आपकी बच्ची का बलात्कार होगा, उसमें आपके पैसे नहीं लगे होंगे। मैं आपको यह नहीं कह सकता कि आप किसी खास मजहब के लोगों से सामान न खरीदें, उनकी टैक्सी में न बैठें, उनकी फिल्मों का सामूहिक बहिष्कार करें… ऐसा कहना बिलकुल ही अनैतिक है, और गलत भी। मैं ऐसा क्यों कहूँगा भला। आप अपने विवेक का इस्तेमाल कीजिए।
लेकिन मैं यह तो कह ही सकता हूँ अपनी पूजा-पाठ का सामान तो कम से कम अपने धर्म के लोगों से खरीदिए। दुकानदारों से पूछिए कि वो कहाँ से बन कर आता है, कौन बनाता है। बस जानकारी लीजिए और विवेक का इस्तेमाल कीजिए। किसी से मजहब के आधार पर भेदभाव करना हमारे संविधान की मूल भावना के खिलाफ है, लेकिन अपने धर्म को कस कर पकड़ना, उससे जुड़े माली से फूल खरीदना, उन तमाम गरीबों के घर में रोटी की व्यवस्था होने लायक खरीदारी करना न तो असंवैधानिक है, न ही भेदभावपूर्ण।
आपको पता है कथित निचली जातियों में कितनी गरीबी है? आपको मालूम है कि उनमें से कई लोग बहुत छोटे स्तर पर रोजगार करते हैं? आपने अपने पैसे का उपयोग क्या उनके स्तर को ऊपर उठाने के लिए किया? क्या आपने दिवाली के दिए उन कुम्भकारों से लिए जो मिट्टी के लोंदे से दीपक बनाते हैं? हर जाति के लोगों के पास उनका अपना कौशल है, आप स्वयं से पूछिए कि आपने उनकी बेहतरी के लिए क्या आर्थिक योगदान दिया है? मैं आपको उन्हें दान देने नहीं कह रहा, मैं कह रहा हूँ कि उन्हें पहचानिए, और उनके कौशल के लिए, उनकी प्रतिभा को अपना योगदान दीजिए।
आप अगर इन्हें ऊपर नहीं लाएँगे तो कौन लाएगा? आपने सोचा भी है कि मतपरिवर्तन कराने वाले इतनी आसानी से इन लोगों को क्यों खींच ले जाते हैं? क्योंकि आम आदमी तक ने इन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया। गंगाजल छिड़क कर हर चीज को शुद्ध मान कर धारण मत कीजिए, क्योंकि हो सकता है उसे बनाने में वो लोग लगे हों जिनके हाथों मजहबी जिहाद रक्त लगा हो। मानव रक्त बहुत अशुद्ध होता है। इसलिए थोड़ी मेहनत कीजिए, अपने धर्म को कस कर पकड़िए, अपने धर्म के व्यापारियों को कस कर पकड़िए। लेकिन हाँ, मजहब जान कर भेदभाव मत कीजिए, विवेक से चुनाव कीजिए। आपकी मानवता और नैतिकता दोनों बची रहेगी।
वैयक्तिक चुनाव ही सामूहिक बन कर फलित होगा
मैं ये नहीं कह रहा कि यही समाधान है क्योंकि मेरे पास ऐसा कहने के पीछे कोई आँकड़ा नहीं है। मैं जानता हूँ कि हिन्दू कभी भी सामूहिक रूप से कुछ भी नहीं करता। हर लेख के नीचे, हर विडियो के कमेंट में यही बात होती है कि हम बँटे हुए हैं। हम बँटे हुए नहीं है, हम टोलरेंट हैं, हम आदिकाल से सहिष्णु हैं, हम थोड़ी देर में उबलते हैं।
साथ ही, आज की दुनिया में जहाँ एक बच्चा पैदा कर के, उसे पाल लेना एक उपलब्धि है, तो उस दौर में आप दूसरों की तरह यह नहीं सोच सकते कि फलाने की राह में ये कुर्बानी है। वो सोच हिन्दुओं की है ही नहीं, तो सामूहिक रूप से अपनी रक्षा हेतु कुछ भी करने के लिए हम नहीं सोच पाते। लेकिन हाँ, वैयक्तिक तौर पर तो कुछ कदम उठाए ही जा सकते हैं।
अंग्रेजी में एक कहावत है कि ‘हिट देम व्हेयर इट हर्ट्स द मोस्ट’। इसका हिन्दी यह है कि उन्हें वहाँ मारो जहाँ सबसे ज़्यादा दर्द होता हो। कमलेश तिवारी को इन्होंने गोली ही नहीं मारी, समय लिया और गला रेता। एक बार फिर से सोचिए कि छटपटाते आदमी को एक ने पकड़ा होगा, दूसरा आराम से गले पर छुरा चला रहा होगा, हृदय से सर की तरफ जाती खून की नलियों से किस रफ्तार से खून निकला होगा, लेकिन वो दरिंदा रुका नहीं होगा।
क्योंकि उसका काम सिर्फ हत्या नहीं था, उसका काम एक संदेश देना था। मारना तो आसान है, उससे संदेश नहीं जाता। उससे आप ठीक तरह से सफल नहीं होते। उससे आप स्टेटमेंट नहीं दे पाते कि देखो हमारे उनको अगर वैसे कहोगे तो हम ये करेंगे। अब हम और आप छुरा लेकर तो चल नहीं सकते क्योंकि वो गैरकानूनी है, और हमारा धर्म हत्या की बात नहीं करता, इसलिए हम सब को अपने स्तर से संदेश भेजना चाहिए कि समय बदल रहा है।
संविधान और कानून के दायरे में रह कर, इस भारतभूमि के हर आदर्श का आदर करते हुए, अपनी प्रतिरक्षा में हमें हर वो कदम उठाना चाहिए जो आपको मजबूत करता है, आपको संगठित करता है। ये मैं नहीं बता सकता कि आपकी लड़ाई किस से है, हमारी लड़ाई किस से है। वो किन हथकंडों को अपना कर, विक्टिम बन कर, हम तो शांतिप्रिय हैं कह कर, किस तरह से आपके द्वारा बढ़ाए हाथ को काट देते हैं, ये छुपा नहीं है। समाधान यही नहीं है, और भी होंगे। सब पर गौर कीजिए, विवेक का इस्तेमाल कीजिए, रंगीन चश्मों से देखना बंद कीजिए, और अंग्रेजी के इस कहावत को बस यूँ ही याद करते रहिए ‘हिट देम व्हेयर इट हर्ट्स द मोस्ट’।