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कमलेश तिवारी के हत्यारों के साथ दिखी महिला है शहनाज बानो, कहा- चुनाव प्रचार कर रही थी

कमलेश तिवारी की हत्या के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज में तीन लोग नजर आए थे। इनमें दो पुरुष और एक महिला हैं। दोनों पुरुष तिवारी के संदिग्ध हत्यारे बताए जा रहे हैं। उनके पीछे चल रही महिला की पहचान शहनाज बानो के तौर पर हुई है। उसका कहना है कि वह कैंट उपचुनाव प्रचार के लिए उस इलाके में थी।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक महिला मड़ियांव की रहने वाली है। उसने पूछताछ में बताया कि युवकों ने उससे खुर्शेदबाग कॉलोनी का पता पूछा था। शुरुआती जॉंच के आधार पर पुलिस और एटीएस का कहना है कि तिवारी की हत्या से महिला का कोई संबंध नहीं है। महिला के परिजनों का दावा है कि फुटेज सामने आने के बाद उन लोगों ने खुद पुलिस से संपर्क किया था।

हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक विडियो में संदिग्ध युवकों में से एक युवक पीछे मुड़ता है और शहनाज से कुछ बातें करता है। यूपी के डीजीपी ओपी सिंह के हवाले से एएनआई ने बताया है कि फुटेज में नजर आई महिला से पुलिस ने पूछताछ की है। मामले की हर कोण से पड़ताल की जा रही है।

बता दें कि गुजरात एटीएस ने सूरत के मौलाना मोहसिन शेख, फैजान पठान और राशिद पठान को हिरासत में लिया है। इसके साथ ही महाराष्ट्र एटीएस ने सैयद आसिम अली नाम के शख्स को हिरासत में लिया है। राशिद पठान के पाकिस्तान से भी कनेक्शन होने की बात सामने आई है। कमलेश तिवारी के बेटे सत्यम तिवारी ने मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की माँग की है। यूपी डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि शुरुआती जाँच से ये जानकारी सामने आई है कि 2015 में पैगंबर मोहम्मद के ऊपर दिए गए विवादास्पद बयान के कारण इस घटनाक्रम को अंजाम दिया गया है। 

आज कमलेश तिवारी के परिजन उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मिलेंगे। वे मुलाकात के लिए सीतापुर से लखनऊ के लिए निकल चुके हैं। इससे पहले शनिवार (अक्टूबर 19, 2019) को लखनऊ डिवीजन के कमिश्नर मुकेश मेश्राम ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर में कमलेश तिवारी के परिवार से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि कमलेश तिवारी के बड़े बेटे के लिए यूपी प्रशासन सरकारी नौकरी की अनुशंसा करेगी। साथ ही आत्मरक्षा के लिए उसे लाइसेंसी हथियार भी प्रदान किया जाएगा। 

उन्होंने बताया कि उन्हें उचित वित्तीय सहायता प्रदान किया जाएगा। इन सभी बातों पर एक समिति द्वारा विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी योजना के तहत आवास मुहैया कराने और 48 घंटे के अंदर परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की बात कही थी।

ATS ने नागपुर से सैयद अली को दबोचा, कमलेश तिवारी मर्डर के पाकिस्तान और दुबई से जुड़ रहे तार

हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या के सिलसिले में महाराष्ट्र आतंक निरोधी दस्ते (ATS) ने नागपुर से सैयद आसिम अली नाम को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि हत्या के मास्टरमाइंड राशिद पठान ने सैयद को फोन कर हत्या की सूचना दी थी। पठान सहित तीन लोगों को गुजरात एटीएस ने शनिवार को सूरत से इस मामले में गिरफ्तार किया था। सैयद से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारी का कहना है कि तिवारी के विरोध में वह प्रदर्शन भी कर चुका है। उसने यूट्यूब वीडियो में उन्हें धमकी भी दी थी।

इस बीच, सोशल मीडिया पर कमलेश तिवारी का एक विडियो सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि ये वीडियो कुछ दिन पहले का है। इसमें कमलेश तिवारी दुबई और पाकिस्तान से धमकी भरे कॉल आने की बातें कह रहे हैं। जाँच से यह खुलासा हुआ कि राशिद पठान दुबई में रहता था। वो कुछ महीने पहले ही सूरत आया था। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कमलेश को दुबई से मिलीं धमकियों का कनेक्शन राशिद से ही है।

साथ ही राशिद पठान का पाकिस्तानी कनेक्शन भी सामने आ रहा है। जानकारी के मुताबिक पठान दुबई में जिस कंपनी में काम करता था, उसका मालिक पाकिस्तानी है। इस बात का खुलासा होने के बाद एटीएस उसके पाकिस्तान कनेक्शन की जाँच में जुटी हुई है।

यूपी के डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने बताया है स्थानीय पुलिस गुजरात और महाराष्ट्र एटीएस से संपर्क में है। उनका कहना है कि सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाली महिला से भी पूछताछ हुई है। महिला की पहचान शहनाज बानो के रूप में हुई है। डीजीपी ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की जाँच की जा रही है।

आज कमलेश तिवारी के परिजन उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मिलेंगे। वे मुलाकात के लिए सीतापुर से लखनऊ के लिए निकल चुके हैं। गौरतलब है कि इससे पहले गुजरात एटीएस ने सूरत के मौलाना मोहसिन शेख, फैजान पठान और राशिद पठान को हिरासत में लिया है। इस मामले में कुछ और लोगों को हिरासत लिया गया था लेकिन पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

राम मंदिर पर फ़ैसले की घड़ी में यह गोधरा दोहराने की साज़िश तो नहीं? अनुच्छेद 370 से भड़के हुए हैं कट्टरपंथी

राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है। जहाँ तक सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों की बहस की बात है, जिन लोगों ने क़रीब से देखा-सुना है, इतिहास और साक्ष्य हिंदुओं के पक्ष में दिखता है। इसी साल अगस्त की शुरुआत में मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर दिया। एनआरसी को लेकर बहस चल रही है। ऐसे में कमलेश तिवारी की हत्या किसी बड़ी साज़िश का हिसस तो नहीं है? सुब्रह्मण्यन स्वामी के एक ट्वीट से भी इस आशंका को बल मिलता है।

वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रह्मण्यन स्वामी ने अपनी ट्वीट में माँग की है कि कमलेश तिवारी हत्याकांड की जाँच एनआईए से कराई जानी चाहिए। स्वामी का अर्थ ये है कि भले ही पुलिस ने इस हत्याकांड में किसी आतंकी संगठन का हाथ होने से इनकार किया हो, लेकिन इसे अंजाम देने वाले ज़रूर आतंकी विचारधारा से प्रेरित हैं। स्वामी आगे लिखते हैं कि कट्टरपंथी मुस्लिम अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से ही कोई बड़ा दंगा कराने की फ़िराक़ में थे लेकिन वो बुरी तरह विफल रहे। इसीलिए, कमलेश तिवारी की हत्या ऐसे नाजुक समय में किसी बड़ी साज़िश की तरफ इशारा करती है।

स्वामी के इस ट्वीट का विश्लेषण करें तो कई एंगल निकल कर आते हैं। सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे पोस्ट्स का जब हमने अध्ययन किया तो पाया कि कई लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नाराज़गी जता रहे थे और भाजपा की आलोचना कर रहे थे, क्योंकि उनके मुताबिक़ भाजपा सरकार कमलेश तिवारी की सुरक्षा में विफल रही और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रयास नहीं किए गए। क्या इसे एक साज़िश का हिस्सा नहीं मान सकते? कट्टरपंथी इस्लामी ताक़तें ज़रूर चाहती होंगी कि भाजपा के कोर वोटर यानी हिन्दुओं का अपने ही सरकार से मोहभंग हो। और ऐसा करने के लिए किसी हिंदूवादी नेता की हत्या कर दी गई।

कट्टरपंथी इस्लामिक शक्तियों का इरादा यह हो सकता है कि भाजपा के अपने ही वोटर सरकार से भड़क जाएँ क्योंकि कमलेश तिवारी मामले में सरकार जो भी कार्रवाई करेगी, भावनात्मक रूप से इस संवेदनशील मामले से ख़ुद को जुड़ा महसूस कर रहे हिन्दुओं को कम ही लगेगा और वे सरकार की आलोचना करेंगे ही। वोटर पार्टी से नाराज़ होंगे तो भाजपा दबाव महसूस करेगी और कमज़ोर होगी। ऐसे मौक़ों पर छोटी-मोटी घटनाओं को भी बड़ा बना कर पेश किए जाने की मीडिया व जनता के एक वर्ग की परंपरा रही है, जिससे नाराज़गी और बढ़ेगी। राम मंदिर के हक़ में फ़ैसला आने के बाद राम मंदिर निर्माण को लेकर भी अड़ंगा डालने की यह एक कोशिश हो सकती है।

इलाहबाद हाईकोर्ट में राम मंदिर की सुनवाई के दौरान कमलेश तिवारी भी पक्षकार थे। ऐसे में इस हत्याकांड से राम मंदिर को जोड़ना की अतिशयोक्ति नहीं है। पुलिस यह साफ़ कर चुकी है कि इस हत्याकांड को इसीलिए अंजाम दिया गया, क्योंकि हत्यारे 4 साल पहले उनके पैगम्बर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी से नाराज़ थे। यह भी गौर करने वाली बात है कि कमलेश तिवारी ने ऐसे ही बयान नहीं दिया था। असल में सपा नेता आज़म ख़ान ने आरएसएस के सभी कार्यकर्ताओं को समलैंगिक बता दिया था, जिसके जवाब में कमलेश तिवारी ने टिप्पणी की थी। कई लोगों का तो यह भी पूछना है कि उसी मामले में अगर कमलेश तिवारी जेल जा सकते हैं तो आज़म ख़ान पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

हर एक्शन का एक रिएक्शन होता है। इस्लामिक कट्टरपंथियों को इस बात की कोई परवाह नहीं होगी अगर दंगे होते हैं और मुस्लिम भी मारे जाते हैं। चूँकि इस हत्याकांड की साज़िश क़रीब 2 महीने से रची जा रही थी, इस सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि कमलेश तिवारी की हत्या के साथ-साथ इसके और भी दूरगामी खतरनाक उद्देश्य हो सकते हैं। यूपी पुलिस के डीजीपी ने कहा है कि अभी और राज़ खुलने बाकी हैं। जाहिर है, पूछताछ में जैसे-जैसे चीजें निकलती जाएँगी, सार्वजनिक रूप से भी लोगों को इस बारे में पता चलता जाएगा। ये भले ही बड़ी साज़िश हो या छोटी, कमलेश तिवारी इसकी बलि चढ़ा चुके हैं।

गोधरा दंगे की तर्ज कर दंगे भड़काने की कोशिश की जा सकती है क्योंकि राम मंदिर मामले में फ़ैसला हिन्दुओं के पक्ष में आता दिख रहा है। अनुच्छेद 370 और एनआरसी से बौखलाए इस्लामिक कट्टरपंथी अभी तक शांत थे या फिर शांत रहने को मजबूर थे, क्योंकि सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। पाकिस्तान से घुसपैठ को लगातार नाकाम किया जा रहा था और यूपी में तो अपराधियों के लगातार एनकाउंटर हो रहे थे। हाल ही में ख़बर आई थी कि पाकिस्तान ने हिज़्बुल, लश्कर और जमात को अलग-अलग टास्क सौंपे हैं। आपको याद है कि इसमें से एक टास्क कुछ ख़ास नेताओं को निशाना बनाना भी था?

चूँकि पुलिस इस मामले में किसी आतंकी संगठन का हाथ होने से इनकार कर चुकी है, लेकिन इसकी गारंटी कोई नहीं दे सकता कि ये किसी आतंकी विचारधारा से प्रेरित न रहे हों। केरल से आईएसआईएस में शामिल होने वालों में सभी मुस्लिम हैं। एनआईए ने एक आतंकी साजिश रच रहे युवक को दबोचा, जिसके पास से ज़ाकिर नाइक की सीडी मिली। पैगम्बर मुहम्मद पर टिप्पणी के बाद उन इस्लामिक फेसबुक ग्रुप्स में कमलेश तिवारी के ख़िलाफ़ भड़काऊ चीजें ज़रूर शेयर हुई होंगी, जिन ग्रुप्स में अभी जश्न मनाया जा रहा। व्हाट्सप्प पर मैसेज जानबूझकर सर्कुलेट किए गए होंगे। मुस्लिमों को गुस्सा दिलाया गया होगा, उन्हें भड़काया गया होगा।

सुब्रह्मण्यन स्वामी की बातें सच हो या नहीं लेकिन उनकी आशंका ज़रूर वाजिब है। क्योंकि जिन ताकतों ने, जिस विचारधारा ने कमलेश तिवारी की हत्या की है वे घात लगाए बैठे हैं। राम मंदिर पर हिंदुओं के हक में फैसला आने पर वे फिर से शिकार पर निकल सकते हैं।

गोविंदा कर रहे भाजपा उम्मीदवार का प्रचार: एक और ‘कॉन्ग्रेसी’ चेहरा हुआ भगवा?

गोविंदा भले ही कॉन्ग्रेस से आधिकारिक तौर पर 2008 में ही किनारा कर चुके हों, लेकिन जनता की याद में उनकी आज सुबह तक ‘कॉन्ग्रेस वाला’ की छवि थी। मुंबई के लोग उन्हें भाजपा के कद्दावर नेता और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक को हराने वाले ‘जायंट किलर’ के रूप में याद रखते हैं। इसलिए कॉन्ग्रेस भले ही उनके आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा उम्मीदवार चैनसुख मदनलाल संचेती के पक्ष में प्रचार से कन्नी काटने की कोशिश करे, लेकिन इसे देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के घटते आभामंडल से जोड़ कर देखना गलत नहीं होगा।

1999-2000 में ‘सदी के सबसे चमकदार फ़िल्मी और मंच के सितारों’ की जिस फेहरिस्त में अमिताभ बच्चन ने ‘टॉप’ किया था, गोविंदा उसमें अंतरराष्ट्रीय 10वें नंबर के स्टार थे। यानी इंडस्ट्री के सबसे बड़े नामों में से एक। ऐसे बड़े सितारे को अपने से जोड़ पाना यकीनन वाजपेयी-आडवाणी की जोड़ी और ‘इंडिया शाइनिंग’ से टक्कर लेने वाली कॉन्ग्रेस के लिए यकीनन फायदे का सौदा हुआ। फ़िल्मी नगरी मुंबई में गोविंदा “आहूजा” (उनका उपनाम पहली बार सुर्ख़ियों का कारण राजनीति में आने के ही चलते बना, जिसके ज़रिए नाइक के पक्ष में भाजपा-शिव सेना के “मराठी माणूस” कार्ड को काटने के लिए ‘others’ को लामबंद किया गया) ने सारी चर्चाएँ और बाद में सारे वोट, लूट लिए। यही नहीं, उत्तर मुंबई सीट के बाहर भी गोविंदा की शोहरत ने कॉन्ग्रेस को खबरों और वोटर के दिमाग में बने रहने में मदद की।

“आवास, प्रवास, स्वास्थ्य, ज्ञान” के मुद्दे पर चुनाव लड़ने वाले गोविंदा ने जीत के बाद पहले राजनीति से ‘ब्रेक’ लिया, फिर सन्यास का ऐलान कर दिया। “राजनीति हमारे और हमारे परिवार के खून में ही नहीं रही। मैं यहाँ कभी नहीं लौटूँगा।” न केवल खबरें चलीं कि गोविंदा पार्टी से व्यथित हैं, उन्हें लगता है कि कॉन्ग्रेस ने उनका ‘इस्तेमाल किया’ भाजपा के गढ़ उत्तर मुंबई में सेंध लगाने के लिए, बल्कि खुद गोविंदा ने अपने अलविदा को ‘अमिताभ बच्चन जैसा’ बताया। ज़ाहिर था कि अमिताभ की तरह वे भी पंजे का ‘चाँटा’ महसूस कर रहे थे।

आज वही ‘विरार का छोरा’ लौटा है- भगवा तिलक लगाकर, भगवा पार्टी के कैंडिडेट का प्रचार करने के लिए, भगवा गमछा गले में टाँगे। लग रहा है कि वे लंबी पारी खेलने की फ़िराक में हैं- वे जिस प्रत्याशी चैनसुख संचेती का प्रचार कर रहे हैं, वे मलकापुर से 5 बार के विधायक हैं। राज्य की भाजपा इकाई के अध्यक्ष को छोड़कर लगभग सारे बड़े-बड़े पदों पर काबिज रह चुके हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र में राष्ट्रीय पटल की ही तरह लचर विपक्ष के चलते विकल्पहीनता है, जनता खुद भाजपा-फड़णवीस का विकल्प हाल-फ़िलहाल किसी को नहीं देखती। यानी संचेती का काम शायद गोविंदा की ‘स्टार पावर’ के बिना भी चल जाता।

ऐसे में ज्यादा संभावना इस बात की है कि संचेती का प्रचार कम हो रहा था, गोविंदा के खुद भाजपा में अपनी जगह तलाशने की संभावना अधिक है। यही कॉन्ग्रेस के लिए खतरे की घंटी होनी चाहिए- अगर वह राहुल गाँधी की बैंकॉक यात्राओं के औचित्य ढूँढ़ने से फुर्सत पा सके। उसे सोचना चाहिए कि क्यों जिसे वह राजनीति में लेकर आई, वह आज राजनीति में लौटना चाहता है तो ‘घर’ लौटने की बजाय नया घर तलाशने को मजबूर है।

हाल ही में गोविंदा की सह-अभिनेत्री रहीं उर्मिला ने भी कॉन्ग्रेस से हाथ जोड़ लिए थे- उसकी अंदरूनी राजनीति से तंग आकर। उसके गढ़ रहे उत्तर प्रदेश में उसकी VVIP सीट रायबरेली सदर की विधायक अदिति सिंह किसी भी दिन टाटा कर सकतीं हैं, प्रदेश के दो प्रभावशाली राजघराने पहले ही उसे अलविदा कह चुके हैं। गोविंदा की राजनीति का तो जो होना होगा सो होगा, पर कॉन्ग्रेस का क्या होगा??

इस माहौल में असुरक्षित महसूस कर रहा हूँ: राष्ट्रीय बजरंग दल के अध्यक्ष ने जताई हमले की आशंका

कमलेश तिवारी की हत्या के बाद देश भर में कई हिन्दू नेताओं ने ख़तरे की शंका जताई है। उन्हें डर है कि उन पर भी हमले हो सकते हैं। कई मुखर हिंदूवादी नेताओं ने अपने समर्थकों को भी सचेत रहने को कहा है। वहीं ‘राष्ट्रीय बजरंग दल’ के अध्यक्ष मनोज कुमार ने आशंका जताई है कि उन पर भी हमला किया जा सकता है। उन्होंने सरकार से सुरक्षा की माँग की है। वो इसे राम मंदिर निर्माण से जोड़ कर भी देख रहे हैं। बता दें कि राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है और 20 दिनों के भीतर इसे सुनाया जाना तय है।

हिंदूवादी नेता मनोज कुमार ने कहा है कि उन्हें पहले सुरक्षा दी गई थी लेकिन बाद में हटा ली गई। उन्होंने लगातार धमकी मिलने की बात भी कही है। ख़बरों के अनुसार, उन्होंने ख़ुद पर हमले की आशंका जताई है। मनोज कुमार ने दावा किया कि उनकी हत्या का 2 बार प्रयास हो चुका है। कुमार ने बताया कि उन पर पूर्व में गोली भी चलाई जा चुकी है लेकिन वह किसी तरह बच निकले। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियाँ ऐसी बन गई हैं कि वो ख़ुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

योगी सरकार ने कमलेश तिवारी हत्याकांड को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एसटीएफ का गठन किया, जिसके बाद मामले की जाँच तेज़ हुई। पुलिस ने इस मामले में 3 मुस्लिमों को गिरफ़्तार किया है, जिनमें 1 मौलवी भी है। इस हत्याकांड के तार सूरत से जुड़े मिले, जहाँ एक दुकान से मिठाई ख़रीदी गई और फिर उसी डब्बे में हथियार रख कर ले जाया गया था। सीसीटीवी फुटेज में 2 पुरुष और एक महिला दिख रहे हैं। रविवार (अक्टूबर 19, 2019) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मृतक कमलेश तिवारी के परिजनों से मुलाक़ात भी करेंगे। शनिवार को परिजनों को समझाने के बाद तिवारी का दाह-संस्कार किया गया।

गौरी लंकेश मामले में हिंदुत्व को हत्यारा बताने वालो, कमलेश तिवारी की हत्या का जश्न मना रहे कौन हैं?

सितम्बर 5, 2017 की तारीख। यही वो दिन है, जब गौरी लंकेश की हत्या कर दी गई थी। गौरी लंकेश की हत्या को लेकर एक ‘सनातन संस्था’ नामक किसी संगठन का नाम आया था। चूँकि, गौरी लंकेश अपने हिंदुत्व-विरोधी विचारों के लिए जानी जाती थीं (कई मीडिया संस्थानों ने ऐसा लिखा है कि वो अपने एंटी-हिंदुत्व विचारधारा के लिए लोकप्रिय थीं), उनकी हत्या पर ख़ूब बवाल मचा। अगर आप ये समझते हैं कि ये बवाल हत्यारों को सज़ा दिलाने के लिए मचा था तो आप ग़लत हैं। गौरी लंकेश की हत्या को लेकर पीएम मोदी तक पर निशाना साधा गया। इसे लेकर एक विचारधारा विशेष को गाली दी गई। गौरी लंकेश के आलोचकों को खोज-खोज कर निकाला गया और उन्हें फॉलो करने वालों को भी निशाना बनाया गया।

हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। उन्होंने 2015 में पैगम्बर मुहम्मद पर कुछ टिप्पणी की थी, जो मुस्लिमों को आपत्तिजनक लगी और उन्हें लेकर कई फतवे जारी हुए। आखिरकार कुछ मुस्लिमों ने उन्हें मार डाला। उनका गला रेत दिया। एनडीटीवी ने उन्हें ‘कट्टरवादी हिन्दू नेता’ बताते हुए उनकी हत्या की ख़बर प्रकाशित की। कमलेश तिवारी की हत्या के बाद ओवैसी समर्थक ग्रुप सहित फेसबुक पर कई मुस्लिम ग्रुपों में जश्न मनाया गया। गौरी लंकेश के समय यह सब पता करने के लिए सक्रिय लिबरल समूहों ने क्या कमलेश तिवारी की हत्या का जश्न मनाने वाले किस पार्टी से जुड़े हुए थे, ये पता करने की कोशिश की? उन्होंने नहीं की क्योंकि हत्यारोपित मुस्लिम हैं।

भाजपा के 18 करोड़ सदस्य हैं। भारत के किसी न किसी व्यक्ति का कोई न कोई रिश्तेदार या परिचित भाजपा का सदस्य निकल आएगा। ऐसे में मीडिया यह कह सकता है कि आरोपित भाजपा से जुड़ा था, क्योंकि उसका फलाँ परिचित मिस्ड कॉल मार कर भाजपा का सदस्य बना है। लेकिन नहीं। कमलेश तिवारी के मामले में उनकी हत्या का जश्न मना रहे लोगों का कोई मज़हब नहीं है। वो किसी नेता के समर्थक नहीं हैं। वो किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़े हैं। वो किसी विचारधारा से नहीं जुड़े हैं। लेकिन हाँ, मारे गए कमलेश तिवारी को ‘कट्टरवादी’ साबित करने में मीडिया ने कोई कसर नहीं छोड़ी। अगर गौरी लंकेश अपनी वामपंथी विचारधारा के लिए बुद्धिमान थीं तो कमलेश तिवारी अपनी हिंदूवादी विचारधारा के लिए ‘कट्टरवादी’ कैसे?

गौरी लंकेश की हत्या के बाद ‘हफ़्फिंगटन पोस्ट’ ने नरेंद्र मोदी की ट्विटर टाइमलाइन खंगालनी शुरू कर दी। मीडिया पोर्टल ने दावा किया कि जो भी लोग गौरी लंकेश की हत्या का जश्न मना रहे हैं, वे राइट विंग से जुड़े हैं। हफ़ ने तो इस मामले को खंगालने के लिए अलग ट्विटर अकाउंट तक बना डाला, जिसमें केवल उन्हीं लोगों को फॉलो किया गया, जिन्हें पीएम मोदी फॉलो करते हैं। इसके बाद उन्होंने क्या लिखा, क्या रिप्लाई दिया, क्या रीट्वीट किया- यह सब देखने के बाद स्क्रीनशॉट्स लेकर दावा किया गया कि वो लोग गौरी लंकेश की हत्या से ख़ुश हैं। कमलेश तिवारी मामले में शायद ही किसी मीडिया पोर्टल ने इतनी ज्यादा मेहनत की हो।

फ़िल्म निर्माता अशोक पंडित ने पूछा कि गौरी लंकेश की हत्या पर चिल्लाने वाले आज कमलेश तिवारी की हत्या पर चुप क्यों हैं? राजनीतिक विश्लेषक सुनंदा वशिष्ठ कहती हैं कि जब तक गौरी लंकेश और कमलेश तिवारी की हत्या को एक नज़र से नहीं देखा जाएगा, तब तक हम एक लिबरल लोकतंत्र नहीं बन सकते। लेखिका शेफाली वैद्य ने ध्यान दिलाया कि गौरी लंकेश का अंतिम दर्शन करने ख़ुद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पहुँचे थे और पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। क्या कमलेश तिवारी के मामले में ऐसा संभव है? सोनम महाजन लिखती हैं कि गौरी लंकेश ने अपने अंतिम पोस्ट में नक्सलियों से मतभेद की बात की थी, लेकिन फिर भी उनकी हत्या के लिए हिंदूवादियों को ज़िम्मेदार ठहराया गया।

अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने उनलोगों की आलोचना की, जो कमलेश तिवारी की हत्या के लिए उन्हें धमकी देने वालों को ज़िम्मेदार ठहरा रहे थे। महाजन ने स्वरा से पूछा कि क्या तिवारी को धमकी देने वाले मौलवियों ने उन्हें फोन कर बताया है कि उन्होंने तिवारी को नहीं मारा? आज हजारों ट्विटर और फेसबुक एकाउंट्स कमलेश तिवारी की हत्या का जश्न मना रहे हैं, उनके पीछे कोई न कोई व्यक्ति तो बैठा होगा। जो हज़ारों लोग खुश हैं, हाहा रिएक्ट कर रहे हैं- उनकी पहचान दिख रही है और उनका मजहब भी दिख रहा है। लेकिन फिर भी, वो घृणा नहीं फैला रहे। जबकि, गौरी लंकेश पर एकाध कमेंट्स के कारण पूरे हिन्दू समाज, राइट विंग और भाजपा, यहाँ तक कि प्रधानमंत्री मोदी तक को भी लपेट लिया गया था। यह दोहरा रवैया नहीं चलेगा।

गौरी लंकेश की हत्या के समय कथित दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने तो यहाँ तक दावा कर दिया कि जिन प्रमोद मुथालिक ने गौरी लंकेश की हत्या को लेकर ‘एक कुत्ता मारा गया’ वाला बयान दिया है, वो भाजपा के सदस्य हैं। इसके बाद भाजपा नेता सीटी रवि (फ़िलहाल कर्नाटक के पर्यटन मंत्री) ने उन्हें याद दिलाया कि मुथालिक भाजपा के नहीं हैं। इससे आप समझ सकते हैं कि गिरोह विशेष के लोगों को कितनी जल्दी थी गौरी लंकेश के ख़िलाफ़ बयान देने वाले हर एक व्यक्ति का भाजपा से जुड़ाव साबित करने की। हर ‘हिंदुत्ववादी संगठन’ भाजपा से जुड़ा नहीं होता और हर भगवाधारी भाजपाई नहीं होता, ये उन्हें कौन समझाए?

गौरी लंकेश के लेख काफी शेयर किए गए। उन्होंने मोदी सरकार को लेकर क्या आलोचना की थी, अल्पसंख्यकों के बारे में क्या कहा था, उन्होंने राइट विंग पर क्या आरोप लगाए थे, सब कुछ शेयर किया गया। क्या यही ईमानदारी कमलेश तिवारी के मामले में दिखाई जाएगी? कमलेश तिवारी ने जाते-जाते अपने सोशल मीडिया पोस्ट्स में कई बातें कही हैं। उन्होंने हिन्दू समाज को एक ‘सोया हुआ और मृत’ समाज बता कर जागने की अपील की है। क्या लिबरलपंथी उनके पोस्ट्स को शेयर करेंगे? वे ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि कमलेश तिवारी हिंदुत्ववादी थे। गौरी लंकेश की लाश पर भांगड़ा करने वाले वामपंथी शायद कमलेश तिवारी के हत्यारों की निंदा करने से भी कोसों भागें।

लेकिन, जब जनता सब कुछ देख रही है तो दोहरे चरित्र वाले गिरगिटों को उनकी करनी याद दिलाई ही जाएगी। तुमने गौरी लंकेश की हत्या को लेकर पीएम मोदी, उनके समर्थकों, भाजपा और राइट विंग- इन सभी को हत्यारा साबित करने की कोशिश की, क्योंकि लंकेश की विचारधारा तम्हारे अनुरूप थी। लेकिन, कमलेश तिवारी की गला रेत कर की गई हत्या और पकड़े गए आरोपितों की पहचान उजागर होने के बावजूद तुम्हारे मुँह से चूँ तक न निकलेगा, क्योंकि मरने वाला हिन्दू नेता था और मारने वाले मुस्लिम, जिसमें एक मौलवी भी शामिल है। लेकिन हाँ, हत्याओं का विचारधारा के आधार पर राजनीतिकरण करने वालों की पोल ज़रूर खुल गई।

पीएम मोदी के घर लगा सितारों का मेला, बापू पर सब ने की दिल की बात

पीएम मोदी ने महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती वर्ष को लेकर शनिवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने कला और सिनेमा जगत की दिग्गज हस्तियों से मुलाक़ात की। पीएम मोदी के इस कार्यक्रम में दिग्गज अभिनेता शाहरुख़ खान, आमिर खान समेत बॉलीवुड के कई बड़े चेहरे जुटे और उन्होंने महात्मा गाँधी को लेकर अपने विचार व्यक्त किए।

7, लोक कल्याण मार्ग स्थित पीएम आवास पर आयोजित इस इवेंट में मोदी ने कहा कि महात्मा गाँधी के विचार सादगी का पर्याय हैं। मोदी ने आगे कहा कि महात्मा गाँधी के विचार व्यापक हैं। मीटिंग के दौरान पीएम मोदी ने फिल्म जगत की हस्तियों से दांडी में बने गाँधी आश्रम घूमने की भी अपील की। पीएम मोदी ने स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी का भी ज़िक्र करते हुए उपस्थित फ़िल्मी सितारों से आग्रह किया कि वे वहाँ भी ज़रूर जाएँ।

मोदी ने कला और सिनेमा जगत के लोगों से कहा कि आप में रचनात्मकता की क्षमता काफी अधिक है और इसीलिए यह ज़रूरी है कि देश में इसे बढ़ावा मिल सके। पीएम के कार्यक्रम में अभिनेता आमिर खान ने कहा, “फिल्म जगत से महात्मा गाँधी के विचारों को प्रचारित करने के लिए फिल्म और टेलीविज़न में काम करने वाले तमाम लोग शानदार काम कर रहे है, इसकी मैं सराहना करता हूँ।” उन्होंने पीएम मोदी को भरोसा दिलाया कि बापू के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए फिल्म जगत ज़रूर प्रयास करेगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने ट्विटर एकाउंट से शाहरुख़ और आमिर का एक वीडियो शेयर किया है जिसमें दोनों पीएम मोदी की बापू को लेकर इस पहल की सराहना कर रहे हैं। साथ ही इस मौके पर एकता कपूर और अभिनेत्री कंगना रनौत ने कहा कि मोदी पहले ऐसे पीएम हैं जिन्होने फिल्म इंडस्ट्री को इतना महत्व दिया है।

मोदी के कार्यक्रम में पहुंचे किंग खान ने कहा, ‘बापू के विचारों के लिए हम सभी को एक मंच पर लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार प्रकट करता हूँ। मेरा ऐसा मानना है कि हमें एक बार फिर से दुनिया को बापू के विचारों से परिचित कराना चाहिए।’

इस मौके पर फ़िल्मी जगत के बड़े मशहूर फ़िल्मकार डायरेक्टर आनंद एल राय भी मौजूद थे जिन्होने कहा, ‘हम बतौर मनोरंजन की दुनिया का प्रतिनिधित्व करते हुए यहाँ आए थे मगर आपने गांधी जी के विचारों को प्रचारित करने ज़िम्मेदारी दी है।’ बता दें कि इस मौके पर डायरेक्टर राजकुमार हिरानी समेत कई अन्य मशहूर हस्तियाँ भी कार्यक्रम में मौजूद थीं।

अलग विधान-अलग निशान की मॉंग सरकार ने ठुकराई, कहा- बंदूक डालने पर ही होगी बात

केंद्र सरकार ने अलगाववादी नगा संगठन NSCN-IM की देश के उत्तर पूर्वी हिस्से में स्थित राज्य नगालैंड के लिए अलग संविधान और झंडे की माँग को सिरे से नकार दिया है। साथ ही संगठन को यह भी साफ़ कर दिया गया है कि “बंदूकों के साए में” अंतहीन वार्ताएँ भी बर्दाश्त नहीं की जाएँगी। नगा वार्ताओं के मध्यस्थ और ईसाई-बहुल राज्य के गवर्नर आरएन रवि ने कहा है कि सरकार का मज़बूत इरादा दशकों से चली आ रही इस वार्ता को बिना और देरी किए खत्म करने का है

एक बयान जारी कर के रवि ने कहा है कि अंतिम समझौता लिखे जाने के लिए तैयार है। इसमें सभी अहम मुद्दों का समावेश होगा। शुक्रवार को जारी इस बयान में कहा गया है, “दुर्भाग्य से इस शुभ मोड़ पर NSCN-IM ने एक देर करने वाला रवैया अपना लिया है। वे मामले का हल निकालने में देरी करने के लिए विवादास्पद प्रतीकात्मक मुद्दे जैसे अलग नगा राष्ट्रीय झंडा और संविधान जैसे मुद्दे उठा रहे हैं जिनके बारे में वे पूरी तरह जानते हैं कि भारत सरकार की पोजीशन क्या है।”

आरएन रवि का यह बयान महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से जब अनुच्छेद 370 हटाया था तो उसे मिले विशेष दर्जे के तहत उसका खुद का संविधान और झंडा भी रद्द हो गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री व सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह कई मौकों पर कह चुके हैं कि वे देश में केवल एक संविधान और एक झंडे के सिद्धांत में यकीन रखते हैं।

गवर्नर रवि ने NSCN-IM नेताओं पर आरोप लगाया कि वे बेवजह ‘Framework Agreement’ को दोबारा वार्ता में घसीट कर उसमें नई-नई कल्पित सामग्री जोड़ रहे हैं। गौरतलब है कि रवि की ही मौजूदगी में NSCN-IM के महासचिव Thuingaleng Muivah और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच Framework Agreement पर हस्ताक्षर हुए थे। रवि के अनुसार कुछ NSCN-IM नेता मीडिया प्लेटफॉर्मों के इस्तेमाल से लोगों को जानबूझकर “अजीबोगरीब अनुमानों और धारणाओं से” गुंमराह कर रहे हैं, वह भी उस चीज़ के बारे में जिस पर पहले ही सरकार से समझौता किया जा चुका है।

उनकी इन्हीं हरकतों के चलते रवि ने नगा समाज के नेताओं के साथ 18 अक्टूबर, 2019 को बैठक की थी। उन नेताओं के साथ रवि ने NSCN-IM के साथ हुए Framework Agreement की रूपरेखा आदि साझा किए थे। उपस्थित लोगों की शंकाओं का भी समाधान किया गया था। अपने बयान में रवि ने कहा है कि समझदार नगा समाज के नेताओं ने समस्या के समाधान को अतिशीघ्र लागू करने की बात पर सहमति जताई। बयान में कहा गया है, “नगा लोगों की इस इच्छा का सम्मान करने के लिए सरकार शांति प्रक्रिया का बिना किसी देरी के समापन करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

गौरतलब है कि जहाँ एक ओर ईसाई-बहुल नगालैंड में NSCN-IM अलग संविधान को लेकर हिंसक आंदोलन कई दशकों से चला रही है, वहीं अमित शाह ने पिछले महीने असम में कहा था कि सरकार स्थानीय संस्कृति को सीधे-सीधे प्रभावित करने वाले विषयों तक ही सीमित अनुच्छेद 371 जैसे प्रावधानों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगी, लेकिन संदेश में यह भी साफ था कि सरकार देश के भीतर 370 जैसी समानांतर राजनीतिक व्यवस्था दोबारा नहीं बनाने देगी।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री का दावा, मनमोहन सिंह ने खत लिख कर कहा- मैं आऊँगा

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने दावा किया है कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन में शामिल होने के लिए मान गए हैं। उन्होंने यह दावा पाकिस्तान के न्यूज़ चैनल Capital TV को दिए गए साक्षात्कार में किया है।

Capital TV से उन्होंने कहा, “मैंने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को निमंत्रित किया था। मैं उनका शुक्रगुज़ार हूँ। उन्होंने मुझे एक पत्र लिख कर कहा, ‘मैं आऊँगा, लेकिन मुख्य अतिथि के तौर पर नहीं, बल्कि एक आम आदमी के तौर पर। हम उनका स्वागत करेंगे भले ही वे आम आदमी की हैसियत से ही आएँ।”

इसके पहले पंजाब के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था कि इसकी संभावना बहुत कम है कि मनमोहन सिंह करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए पाकिस्तान जाएँ। न्यूज़ एजेंसी ANI से उन्होंने कहा था कि वे केवल करतारपुर साहिब गुरुद्वारे जाएँगे क्योंकि वह सिखों का पवित्र स्थल है, लेकिन उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह के बयान से पहले ऐसी ख़बरें चल रही थी कि 9 नवंबर, 2019 को करतारपुर जाने वाले पहले जत्थे में डॉ. मनमोहन सिंह शामिल हो सकते हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए डॉ. मनमोहन सिंह को खुद भी विशेष निमंत्रण भेजा था। लेकिन 10 अक्टूबर, 2019 इंडिया टुडे में प्रकाशित खबर के अनुसार उस समय पूर्व प्रधानमंत्री के ऑफ़िस ने भी उनके जाने की खबरों का खंडन करते हुए न्यौता मिलने से भी अनभिज्ञता जताई थी। करतारपुर कॉरिडोर सिखों के प्रथम गुरु नानकदेव की 12 नवंबर को 550वीं जयंती के पहले 9 नवंबर, 2019 को खोला जाना है।

कमलेश तिवारी हत्याकांड में सामने आया नया वीडियो, हत्यारों को पकड़ने के क़रीब है पुलिस

लखनऊ के कमलेश तिवारी हत्याकांड में कुछ नए वीडियो पुलिस के हाथ लगे हैं। माना जा रहा है कि इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी पुलिस इसके ज़रिये कमलेश तिवारी के हत्यारों के काफी करीब पहुँच सकती है। इससे पहले शुक्रवार (18 अक्टूबर) को भी एक वीडियो पुलिस के हाथ लगा था जिसमें नारंगी कपड़े पहने दो युवक जा रहे हैं। उनमे से एक के हाथ में पीले रंग की पॉलीथीन है। माना जा रहा है कि रहा इसमें मिठाई का वह डब्बा रहा होगा जिसमें बन्दूक छिपा कर रखी गई थी।

वीडियो में साफ़ है कि इस घटनाक्रम को अंजाम देने में तीन लोगों का हाथ है इनमें से दो पुरुष और एक महिला है। एक सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि हत्या को अंजाम देने के बाद तीनो अलग-अलग भाग जाते हैं। यूपी सरकार ने इस मामले में एसआईटी का भी गठन कर दिया है ताकि जल्द से जल्द हत्यारों को ढूँढा जा सके।

एक आधिकारिक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कमलेश तिवारी को एक गनर और एक गार्ड मुहैया कराया गया था। हत्या के एक दिन के भीतर पुलिस ने जो वीडियो जो हासिल किए हैं उनसे इस हत्याकांड में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिल सकती है। पुलिस असल अपराधी को पकड़ने करीब पहुँचती दिख रही है, क्योंकि वारदात को अंजाम देने वाले संदिग्ध हत्यारे सीसीटीवी फुटेज में क़ैद हो गए हैं।

बता दें कि फुटेज में दिख रहे संदिग्धों में एक महिला भी है जो बाद में अलग होकर घटनास्थल से निकलती है, इसके बाद दोनों संदिग्ध युवक निकलते हैं। इसी आधार पर पुलिस आरोपितों की तलाश कर रही है। एसपी कलानिधि नैथानी के निर्देश पर पुलिस की कई टीमें आरोपितों की तलाशी में जुट गई हैं। पुलिस ने भी इस विषय में यह दावा किया है कि जल्द ही हत्याकांड की गुत्थी को सुलाझा लिया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम में अभी तक पुलिस ने कुल तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और जाँच जारी है। इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि दहशत फ़ैलाने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होने दी जाएगी।