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फ्रांस से लौटकर राफेल पर बोले राजनाथ, कहा- बचपन से मानता हूँ कोई महाशक्ति है, पूजा पद्धति पर सवाल ठीक नहीं

फ्राँस के तीन दिवसीय दौरे के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार (गुरुवार 10, 2019) को लौट आए। यहाँ वापस आते ही उन्होंने राफेल की शस्त्र पूजा करने पर सवाल उठाने वाले लोगों पर अपना बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पूजा पद्धति पर सवाल उठाना ठीक नहीं।

रक्षा मंत्री ने कहा, “जो मुझे सही लगा मैंने वही किया। यह हमारी आस्था है कि कोई प्राकृतिक शक्ति है और मैं इस पर बचपन से भरोसा करता रहा हूँ।”

उन्होंने कहा, “सभी धर्मों के लोगों को अपनी आस्था के अनुसार प्रार्थना करने का अधिकार है। यदि किसी और ने ऐसा किया होता, तब मैं इस पर कोई आपत्ति नहीं करता। मुझे लगता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी में भी इस मामले पर राय बँटी हुई होगी। जरूरी नहीं है कि हर किसी की यही राय हो।”

गौरतलब है कि वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा की गई राफेल पूजा को तमाशा बताया था। उन्होंने कहा था कि जब कॉन्ग्रेस पार्टी ने बोफोर्स तोप खरीदी थी तब कोई उसे इस तरह दिखावा करके लेने नहीं गया था। जिसपर कॉन्ग्रेस के ही नेता संजय निरूपम ने उन्हें जवाब देते हुए कहा था कि शस्त्र पूजा को तमाशा नहीं कहा जा सकता हमारे देश में शस्त्र पूजा की पुरानी संस्कृति है। परेशानी ये है कि खड़गे जी नास्तिक हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी में हर कोई नास्तिक नहीं है।

गृह मंत्री अमित शाह ने भी खड़गे के इस बयान पर कॉन्ग्रेस को बुधवार को जवाब दिया था। उन्होंने कैथल में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, “क्या विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजा नहीं होनी चाहिए? उन्हें (कॉन्ग्रेस) इस बात पर चिंतन करना चाहिए कि किस चीज की आलोचना करनी है, किस चीज की नहीं।”

गौरतलब है कि 8 अक्टूबर को पेरिस पहुँचकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 36 राफेल लडाकू विमानों की खेप के तहत पहला विमान रिसीव किया था और दशहरे का अवसर होने के कारण उसकी शस्त्र पूजा भी की थी। बाद में उन्होंने इस विमान में उड़ान भी भरी थी। लेकिन शस्त्र पूजा के दौरान उन्होंने राफेल पर जो ऊँ लिखा, उससे खड़गे और संदीप दीक्षित जैसे विपक्षी नेता भड़क गए। इन नेताओं ने पूजा पर सवाल उठाए। इन्हीं सवालों का जवाब रक्षा मंत्री ने स्वदेश लौटकर विनम्रता से दिया है।

सांसद जी को खाली करना पड़ा सरकारी बंगला, तो उखाड़ ले गए खिड़की-दरवाजे-टाइल

बिहार से आने वाले पूर्व सांसद पप्पू यादव को सरकार ने बंगला खाली करने को कहा तो वे उसे ऐसे छोड़ कर गए हैं कि बिना भारी मरम्मत के किसी ‘माननीय’ के तो दूर की बात, किसी आम-से-आम आदमी के रहने लायक नहीं बचा है। मीडिया रिपोर्टों में उनके जाने के बाद बंगले के नज़ारे की तुलना युद्ध में मची तबाही से की गई है। फर्नीचर बिखरा पड़ा है, कमरों से खिड़की-दरवाज़े तो दीवारों से टाइलें निकाल ली गईं हैं। बताया जा रहा है कि बंगले की इस हालत का कारण यहाँ हुए ‘अतिरिक्त’ निर्माण कार्य को हटाया जाना है।

‘बिहार से आए 400 लोगों का रहता था इंतज़ाम’  

पप्पू यादव का यह बंगला दिल्ली के सबसे पॉश इलाकों में से एक लुटियंस ज़ोन में स्थित था। बलवंत राय मेहता लेन स्थित 11A बंगले में मौजूद यादव के निजी सचिव अजय कुमार के मुताबिक पप्पू यादव ने यहाँ पर 400 लोगों के ठहरने की व्यवस्था स्थापित की थी। अजय कुमार बताते हैं कि यह उन लोगों के लिए थी, जो मधेपुरा (सांसद के निर्वाचन क्षेत्र) सहित बिहार से दिल्ली इलाज कराने आते हैं। बंगले के बाहर ‘सुभाष चंद्र बोस सेवाश्रम’ का बोर्ड भी लगा था।

तोड़-फोड़ की तोहमत CPWD पर

अजय कुमार ने तोड़-फोड़ की तोहमत CPWD (केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग) पर लगाया है। उनके हिसाब से सारी तोड़-फोड़ CPWD अधिकारियों की मौजूदगी में की गई। वहीं मीडिया से बात करते हुए विभाग के अधिकारी इस दावे को सिरे से नकार रहे हैं। उनका कहना है कि विभाग को हाथ वहाँ लगना पड़ता है, जहाँ से बंगला जबरन खाली कराया जा रहा हो, जबकि पप्पू यादव का नाम अभी जबरिया खाली कराए जाने की सूची में था ही नहीं।

अखिलेश भी कर चुके हैं हरकत

इसके पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी ऐसी ही हरकत कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हारने के बाद पहले तो उन्होंने ये-वो बहाने कर के बंगला छोड़ा ही नहीं, और जब छोड़ा, तो उसकी टोंटियाँ तक साथ ले गए। वहीं पप्पू यादव के ही गृह राज्य बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का बंगला लंबी जद्दोजहद के बाद जब यादव का पदभार संभालने वाले सुशील मोदी को मिला तो पता चला कि तेजस्वी यादव ने बंगले में तमाम निर्माण कार्य करा रखा था। मोदी ने पत्रकारों को आलीशान बंगले का भ्रमण कराया, और उसके सौन्दर्यीकरण में तेजस्वी यादव के खर्च को करोड़ों के सरकारी धन का दुरुपयोग बताया था।

‘फूहड़’ बिग-बॉस पर प्रकाश जावड़ेकर ने दिखाई सख्ती, मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट- शो पर लटकी तलवार

हमेशा से विवादों में घिरे रहने वाला रियेलिटी शो बिग-बॉस हाल ही में अपने फूहड़ और अश्लील कारनामों के चलते लोगों के निशाने पर आ गया। इसके बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा ज़ाहिर करने से लेकर मंत्रालय तक इस सम्बन्ध में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी।

कई लोगों ने शो में पेश की जाने वाली अश्लीलता और फूहड़ कंटेंट को लेकर आपत्ति ज़ाहिर करते हुए यहाँ तक कह दिया था कि इस शो को बैन कर देना चाहिए। हाल ही में हुए इन तमाम घटनाक्रमों को लेकर इस शो ने दुबारा सुर्खियाँ बटोरी थीं। मगर सुर्ख़ियों की बीच तमाम शिकायतों और सोशल मीडिया तक पर लोगों की नाराज़गी के चलते सूचना प्रसारण मंत्रालय ने अब जो निर्णय लिया है, उसके बाद बिग-बॉस नामक इस शो और उससे जुड़े कलाकारों को धक्का लग सकता है क्योंकि फूहड़ता परोसने के लिए इस कार्यक्रम पर अब तलवार लटक रही है।

खबर है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने प्रसार भारती से इस कार्यक्रम में फूहड़ता और तमाम तरीके का आपत्तिजनक कंटेंट परोसे जाने को लेकर जानकारी माँगी है। साथ ही करनी सेना की ओर से इसको बैन करने की भी माँग हो रही है। उनका कहना है कि यह कल्चर के खिलाफ है और एक सभ्य समाज में इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को लिखे अपने पत्र में करनी सेना ने बिग-बॉस-13 के खिलाफ शिकायत करते हुए उस पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की माँग करते हुए सलमान खान के खिलाफ भी कार्रवाई करने की बात कही है। अपने पत्र में बिग-बॉस रियेलिटी शो का उल्लेख करते हुए करनी सेना ने कहा था कि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय प्रसारण पर लव जिहाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ हिन्दू संस्कृति का भी अपमान कर रहा है।

J&K पर जिसने उगला जहर, उसी से मिलने पहुँचा कॉन्ग्रेस प्रतिनिधिमंडल: आखिर पार्टी की मजबूरी क्या है?

भारत में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने का विरोध करने वाले ब्रिटिश संसद के नेता से मिलने गए कॉन्ग्रेस पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल की जमकर आलोचना हो रही है। ब्रिटेन के इस नेता का नाम जेरेमी कोर्बिन है, जिनकी राजनीति लेबर पार्टी से चलती है। हाल ही में कॉन्ग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बाद कोर्बिन ने कश्मीर में मानवाधिकार का मुद्दा उठाया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि कश्मीर क्षेत्र में तनाव कम करने की हर कोशिश को अपनाया जाना चाहिए।

मामला तब सुर्ख़ियों में आया जब ब्रिटिश नेता ने ट्विटर पर अपने एकाउंट से कॉन्ग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ अपनी तस्वीर पोस्ट कर उन्हें मानवाधिकार मुद्दों पर दोनों पक्षों की चर्चा की जानकारी दी। कोर्बिन द्वारा ट्वीट की गई तस्वीर में कमल धालीवाल को साफ़ देखा जा सकता है, जो यूनाइटेड किंगडम में ओवरसीज़ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष हैं।

यह मामला चर्चा का विषय तब बन गया जब भाजपा ने इसको लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। दरअसल भारतीय जनता पार्टी ने कश्मीर पर दिए कोर्बिन के इस बयान को आड़े-हाथों लेते हुए घटना के बारे में ट्वीट कर कहा, “घटिया”। इसके आगे बीजेपी ने लिखा, “देश की जनता कॉन्ग्रेस पार्टी से सफाई चाहती है कि उनके नेताओं ने विदेशी नेताओं से क्या बात की है? देश की जनता कॉन्ग्रेस पार्टी को उनकी इस धोखेबाजी के लिए करारा जवाब देगी।”

वैसे कश्मीर और अनुच्छेद 370 के हटने पर कॉन्ग्रेस की राजनीति कोई पहला मामला नहीं है, जिस कारण से पार्टी देशहित के खिलाफ जाने की अपनी आदत के चलते निशाने पर आई हो। साल 2017 में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया था, जब भारत-चीन सीमा पर डोकलाम विवाद हुआ था। इसके बाद सीमा पर तनाव के चलते दोनों देशों के संबंधों के बीच मतभेद गहरा गए थे मगर ऐसे माहौल में अचम्भा तब हुआ था, जब राहुल गाँधी के एक चीनी राजदूत से मिलने की खबर सामने आई थी।

1 लाख से ज्यादा कुँवारे ईसाई, शादी के लिए लड़की नहीं मिल रही: चिंता में चर्च

केरल के साइरो मालाबार चर्च (सीरियाई मालाबारी चर्च) ने ईसाई समुदाय की केरल की जनसंख्या में घटती हिस्सेदारी पर चिंता प्रकट की है। उन्होंने इसे समुदाय के लिए ‘चिंताजनक स्थिति’ बताया है। इसके लिए एक कारण समुदाय के एक लाख से भी अधिक अविवाहित पुरुषों का होना बताया गया है। चर्च के मुताबिक इन 1,00,000 पुरुषों की उम्र 30 वर्ष के ऊपर है।

सभी चर्चों में पढ़ा गया आर्चबिशप का पत्र

चंगन्चेरी आर्चडायोसीस के आर्चबिशप मार जोसेफ़ पेरुमतोट्टम ने ईसाई समुदाय को इस विषय पर एक पत्र लिखा है। विगत 6 अक्टूबर को साप्ताहिक रविवार ‘मास’ के बाद सभी पादरियों ने यह पत्र पढ़ कर ईसाई समुदाय को सुनाया। इसके अनुसार जीवनसाथी न मिलने के अलावा ईसाई समुदाय गिरती जन्म दर, बेरोजगारी, कृषि संकट और यहाँ तक कि हालिया बाढ़ का भी पीड़ित है। आर्चबिशप के पत्र के अनुसार बेरोजगारी से लेकर बाढ़ तक यह सभी मुद्दे ईसाई समुदाय के अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं।

‘पहले हम बहुत थे, अब तो सब छोड़-छोड़ कर भाग रहे हैं’

पत्र में ईसाईयों को याद दिलाया गया है कि कैसे जब केरल राज्य बना था तो ईसाई दूसरा सबसे बड़ा मज़हबी समुदाय था, जबकि आज महज़ 18.38% बचे हैं। हालिया वर्षों में ईसाई जन्म दर में 14% की गिरावट आई है। चर्च ने इसके अलावा युवा ईसाईयों में माँ-बाप को अकेला घर पर छोड़कर राज्य से बाहर चले जाने की प्रवृत्ति पर भी शोक व्यक्त किया। चर्च ने कहा, “अधिकांश युवा ईसाई NRI हैं। बेरोजगारी सबसे बड़ा कारण है और यह ईसाई समुदाय में बड़े पैमाने पर हो रहा है।”

छापेंगे किताब

चर्च ने तय किया है कि उसकी समस्याओं पर बाकायदा एक किताब/पाठ्यपुस्तक का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा समुदाय के सदस्यों में इन मामलों के बारे में जागरुकता के लिए एक शिक्षण समिति भी बनेगी। चर्च ने बताया, “इसके अलावा उन्हें एक हेलो डेस्क बनाकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की जानकारी दी जाएगी। यह योजना आर्चडायोसीस के अंतर्गत आने वाले एक-एक चर्च और स्कूल पर लागू होगी।”

नेहरु की गलती से हुआ था कश्मीर पर चीन का कब्ज़ा, मनीष तिवारी मोदी को दे रहे अक्साई चिन वापस लेने की सलाह

कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी ने चीन के मसले पर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को चीन से बात कर भारत के आतंरिक मामलों में दखल न देने की बात कहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को यह साफ़ कर देना चाहिए कि कश्मीर मुद्दा भारत का आंतरिक मामला है।

अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि यदि चीन यह कहता है कि उसकी नज़र कश्मीर पर है तो उसे यह भी याद दिला दिया जाना चाहिए कि हमारी (भारत की) नज़र हॉन्ग-कॉन्ग पर है।

हॉन्ग-कॉन्ग में मानवाधिकारों के उल्लंघन और लोकतान्त्रिक मूल्यों के पतन का हवाला देते हुए अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि तिब्बत में चीन का अत्याचार हम न जाने कब से देखते आ रहे हैं, साथ ही उन्होंने अपने इसी ट्वीट में दक्षिणी चीन सागर (साऊथ चाइना सी) का भी ज़िक्र किया। मनीष तिवारी ने सवाल उठाया कि चीन में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन पर भारत क्यों सवाल नहीं उठाता?

कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी ने यह बयान उस वक़्त दिया है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत दौरे पर आने वाले हैं। इतना ही नहीं, मनीष तिवारी ने यहाँ तक कह दिया कि मोदी को चीन से अक्साई चीन के मुद्दे पर बात करनी चाहिए जिसे अनधिकृत रूप से चीन ने अपने कब्ज़े में ले लिया था और मौजूदा वक़्त में उसने वह पकिस्तान को सौंपा हुआ है।

बता दें कि सन् 1962 में पंडित नेहरु के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार की बेहद लाचार रक्षा नीतियों के चलते भारत को चीन से युद्ध में पराजय का सामना करना पड़ा था जिसके बाद कश्मीर का एक हिस्सा चीन ने अपने कब्ज़े में ले लिया था जिसे आज हम अक्साई-चिन के नाम से जानते हैं।

14 अक्टूबर को खुलेआम हाफिज सईद करेगा POK में आतंकियों की रैली

खूँखार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक और जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद 14 अक्टूबर को POK में आतंकियों की एक बड़ी रैली करने जा रहा है। इसके लिए उसने सभी आतंकवादियों को बुलावा भेजा है। मुजफ्फराबाद में 14 अक्टूबर को होने वाली इस रैली में जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल के अधिकतर आतंकी शामिल होंगे।

कहा जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से पाकिस्तान में बैठे सभी आतंकी संगठन भारत के ख़िलाफ़ मिलकर कोई बड़ी साजिश रच रहे हैं। जिसके लिए वो लगातार घुसपैठ की कोशिश में जुटे हुए हैं, लेकिन सेना की सख्ती के कारण उनके मनसूबे कामयाब नहीं हो पा रहे। इसलिए आतंकी संगठनों ने POK के लोगों को बरगलाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में हाफिज सईद ने 14 अक्टूबर को मुजफ्फराबाद में रैली करने का फैसला किया है।

शायद हाफिज सईद को ना पता हो लेकिन असलियत यह है कि अभी कुछ दिन पहले ही इसी POK में बहुत बड़ी रैली निकली थी – लेकिन उस रैली में मौजूद हजारों की भीड़ पाकिस्तान से आजादी के नारे लगा रही थी। रैली के दौरान लोगों के हाथों में पोस्टर थे, जो उनकी आजादी की माँग को स्पष्ट कर रहे थे। किंतु वहाँ की पुलिस ने उनकी आवाज दबाने के लिए जम कर बल प्रयोग किया था और उन सभी लोगों पर आँसू गोले छोड़े गए थे। इस दौरान काफी लोग घायल हुए थे, साथ ही 25 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी।

उल्लेखनीय है कि 70 साल पहले हुए सीक्रेट ‘कराची एग्रीमेंट’ के जरिए कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा करने वाले पाकिस्तान के ख़िलाफ़ POK के लोग अक्सर अपनी आवाजें बुलंद करते रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान उनके ख़िलाफ़ कठोर कदम उठाता है।

इसके अलावा बताते चलें कि अभी कुछ दिन पहले ही POK में आतंकियों की रैली का योजन करने वाले हाफिज सईद को पाकिस्तान की गुहार पर ही संयुक्त राष्ट्र से राहत मिली थी। जिसमें उसे अपने रोजमर्रा के खर्चों के लिए बैंक खाते का इस्तेमाल करने की इजाजत मिली थी। ये इजाजत उसे पाकिस्तान खुद यूएन को लेटर लिखकर दिलवाई थी।

अगर नींबू-मिर्च से बलाएँ दूर होती हैं तो एकाध ट्रक सीमा पर फिंकवा दो: ओवैसी

ऐसा लग रहा है दूसरे समुदायों पर हमला करना और समुदाय विशेष की मज़हबी भावनाएँ भड़काना ही AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद अकबरुद्दीन ओवैसी की इकलौती चुनावी रणनीति बच गया है। AIMIM प्रमुख ने नांदेड़, महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों के पहले एक जनसभा को संबोधित करते हुए पहले तो सिखों पर बेअंत सिंह की हत्या के आरोपित बलवंत सिंह राजोआना की फाँसी रुकवाने के लिए अपने समुदाय की राजनीतिक ताकत के इस्तेमाल का आरोप लगाया। उसके बाद अब हिन्दुओं की धार्मिक परम्पराओं का मखौल उड़ाते हुए उन्होंने कहा कि अगर नींबू-मिर्ची के इस्तेमाल से किसी समस्या का समाधान होता है तो एक-आध ट्रक नींबू-मिर्ची सीमा पर फिंकवा दिया जाना चाहिए। ओवैसी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के फ़्रांस में राफेल विमान को ग्रहण करने के पहले उसकी आयुध-पूजा पर हमलावर थे।

‘कल्चर’ की आड़

ओवैसी ने आस्था पर हमलावर अपने हिन्दूफ़ोबिक बयान को ‘संस्कृति’ और ‘बहुलता’ की आड़ में छिपाने की कोशिश की। उन्होंने हिन्दुओं के किसी भी नए कार्य के समय विघ्न-हरण के लिए नींबू लटकाए जाने की तुलना समुदाय विशेष में किसी भी नए कार्य की शुरुआत में आगंतुकों को नींबू-पानी पिलाने से करते हुए बात को हल्का करने की कोशिश की। साथ ही बहस भाजपा की तरफ़ मोड़ने के प्रयास में दावा किया कि नींबू के ऐसे ‘अलग-अलग’ इस्तेमाल भारत की बहुलतावादी संस्कृति है, जिसे भाजपा UCC (यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड, समान नागरिक संहिता) लाकर खत्म कर देना चाहती है।

लेकिन उनका यह प्रयास हिन्दुओं की आस्था के प्रति उपहास और असम्मान के प्रदर्शन को ढँकने के लिए नाकाफ़ी साबित हुआ। हिन्दू नींबू-मिर्च इस आस्था के तहत लटकाते हैं कि यह दोनों चीजें अमूमन किसी छोटी-मोटी परेशानी की ‘नकारात्मक ऊर्जा’ को खुद सोख कर लोगों और उपकरणों को नुकसान से बचाती हैं, जबकि समुदाय विशेष का अपने आगंतुकों या ग्राहकों को नींबू-पानी पिलाना किसी भी लिहाज से इस्लामिक मज़हबी परम्परा का हिस्सा नहीं है।

यही नहीं, एक काल्पनिक शिव सेना नेता को, जो नींबू-मिर्ची लगाने के प्रति उनके असम्मान पर नाराज़गी प्रकट कर रहा था, बार-बार मूर्ख जता कर, और उसके तर्कों को तोड़ते-मरोड़ते हुए उनका मखौल उड़ाकर ओवैसी ने यह भी साफ़ कर दिया कि उनका मकसद हिन्दुओं की आस्था को ‘अन्धविश्वास’, ‘गलत’ दिखाना ही था। वे इतने पर भी नहीं रुके। उन्होंने नींबू-मिर्ची की प्रथा का फिर मज़ाक उड़ाते हुए समुदाय विशेष के मिर्च को कीमे में डालने को इससे बेहतर बताया। ओवैसी ने कहा, “हम किसी चीज़ को ज़ाया नहीं करते।”

कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री के घर पड़ा IT का छापा, कॉन्ग्रेस ने कहा ‘दुर्भावपूर्ण कदम’

कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर के निवास स्थान और उनके स्वामित्व वाले मेडिकल कॉलेज में आयकर विभाग ने गुरुवार (10 अक्टूबर 2019) को छापेमारी की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रेड के लिए पूर्व डिप्टी सीएम के लगभग 30 ठिकानों को चिह्नित किया गया है। कहा जा रहा है उनसे संबंधित ट्रस्ट द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेज में कुछ अनियमतताएँ पाई गई हैं। इसके अलावा आयकर विभाग ने कोलार में कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री आरएल जलाप्पा के स्वामित्व वाले मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पर भी छापेमारी की।

प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री का इस छापेमारी पर मीडिया से कहना है, “मुझे इन छापेमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मुझे नहीं मालूम आयकर विभाग के लोग कहाँ छापेमारी को अंजाम दे रहे हैं। उन्हें कर लेने दीजिए। मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं है, अगर हमारी तरफ से कोई गलती है तो हम इसे सुधारेंगे।”

इसके बाद अपने एक बयान में पूर्व उपमुख्यमंत्री कहते नजर आए कि अगर ये रेड केवल शैक्षणिक संस्थानों पर की जा रही हैं, तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं, आयकर विभाग सभी कागजातों की जाँच कर ले।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से ज्ञात हुआ है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री से संबंधित परिसरों में आज करीब आधे घंटे तक छापेमारी की गई। वहीं, एएनआई द्वारा दी जानकारी में कहा गया कि जी परमेश्वर स्वामित्व वाले मेडिकल कॉलेज (जिसका संचालन ट्रस्ट की तरफ से किया जा रहा है) में आयकर विभाग को अनियमितताएँ मिली हैं।

इस रेड पर पूर्व मुख्यमंत्री और प्रतिपक्ष नेता सिद्धारमैया ने आयकर छापे को राजनीति से प्रेरित और दुर्भावपूर्ण बताया। उन्होंने ट्वीट करके कहा, “आयकर विभाग के कई छापे जी परमेश्वर आर एल जलप्पा और अन्य के यहाँ पर राजनीति से प्रेरित और दुर्भावनापूर्ण सोच के लिए किए गए हैं।

पीएमसी मामले में खाता धारकों के हंगामे पर सीतारमण बोलीं – जरूरत पड़ी तो कानून में करेंगे ज़रूरी संशोधन

पीएमसी यानी पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला मामले में बवाल थमने की बजाए अलग ही रूप लेता जा रहा है। बैंक पर सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदियों के चलते कई खाताधारक नाराज़ हैं जिन्होंने आज खाताधारकों ने मुंबई स्थित भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया। बता दें कि खाताधारकों का यह प्रदर्शन उस वक़्त हुआ जब केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित बीजेपी दफ्तर में प्रेस कांफ्रेंस करने जा रहीं थीं।

हालांकि, पुलिस की मदद से प्रदर्शनकारियों पर काबू पा लिया गया। पूरे प्रदर्शन के दौरान नाराज़ खाताधारकों की मांग थी उनके साथ जो छल किया गया है उसके खिलाफ त्वरित कार्रवाई करते हुए उनके पैसे उन्हें लौटाए जाएं।
प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति ने कहा “हमें हमारे पैसे दिलाए जाएं। हमें इससे कोई मतलब नहीं कि कोर्ट या फिर आरबीआई क्या कर रहा है, हमें बस अपने पैसे चाहिए, क्योंकि जितने पैसे मैंने जोड़कर खाते में जमा किए थे वह मैं अब फिर से नहीं कमा सकता।”

इस दौरान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रदर्शन कर रहे खाताधारकों से भी मुलावत की, उन्होंने इस मुद्दे को लेकर कहा “हम ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस पूरे मामले पर आरबीआई नज़र रखे हुए है, इस मामले का वित्त मंत्रालय से कोई लेना देना नहीं है लेकिन अगर ज़रूरत पड़ी तो हम एक्ट में ज़रूरी बदलाव करेंगे, लेकिन अभी हम इस बदलाव के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकते।