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POK से आए 5300 परिवारों को मिलेगा ₹5.5 लाख, 370 के कारण जीना था दुश्वार

पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (POK) छोड़ कर हिंदुस्तान में ‘रिफ्यूजी’ की ज़िंदगी बसर करने को मजबूर 5,300 परिवारों को भारत सरकार ₹5.5 लाख प्रति परिवार का मुआवजा देगी। इन परिवारों को सालों से कश्मीर में रहने के बावजूद पीओके से भारत आए शरणार्थियों को मिलने वाली सामान्य धनराशि इसलिए उपलब्ध नहीं हो पा रही थी, क्योंकि 370 के तहत उनको कश्मीर के ‘डोमिसाइल’ का सर्टिफ़िकेट नहीं मिला हुआ था। अब 370 हटने के बाद इस सर्टिफ़िकेट का कोई औचित्य ही नहीं है।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज (बुधवार, 9 अक्टूबर 2019) प्रेस को सम्बोधित करते हुए केंद्र सरकार के इस कदम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन परिवारों को यह आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, वे POK से आने के बाद पहले तो जम्मू-कश्मीर के बाहर देश के दूसरे हिस्सों में बसे। बाद में वे जम्मू-कश्मीर चले गए।

उनकी शोचनीय स्थिति और आर्थिक तंगी के बारे में अनुच्छेद 370 हटने के तुरंत बाद 13 अगस्त 2019 को इकोनॉमिक टाइम्स में भी एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। उस रिपोर्ट के अनुसार करीब 1.5 लाख परिवार, यानी 10 लाख शरणार्थी आज भी शिविरों में रहने के लिए मजबूर हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लिखित था कि नवंबर, 2015 में केंद्र ने ₹2,000 करोड़ के एक “वन-टाइम सेटेलमेंट” पैकेज की घोषणा की थी। उसे भी यह शरणार्थी इसलिए नहीं ले पाए क्योंकि उनके पास डोमिसाइल सर्टिफ़िकेट नहीं था।

विधानसभा सीटों की भी माँग

उस समय एक और महत्वपूर्ण माँग थी, जिस पर अभी भी केंद्र का निर्णय लंबित है। वह माँग थी कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में खाली छोड़ी जा रहीं POK के हिस्से की 24 सीटों में से कम-से-कम एक-तिहाई POK के शरणार्थियों से भरीं जाएँ। 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटने के बाद से यह माँग कई बार विभिन्न मौकों पर की जा चुकी है।

उइगर मुस्लिम के कब्र की जगह लॉलीपॉप लिए पांडा: चीन ने 5 साल में तबाह कर दिए कई इस्लामी कब्रगाह

उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार के लिए चीन हमेशा नए-नए तरीके अपनाता रहा है। अब चीन ने उइगर मुस्लिमों के मरने के बाद भी उनकी शांति छीनने वाला काम शुरू किया है। चीन में उइगर मुस्लिमों के कई कब्रगाहों को तबाह कर दिया गया है। ये वो कब्रगाह थे, जहाँ उइगर मुस्लिमों की कई पीढ़ियों के लोगों को मरने के बाद दफ़न किया जाता रहा है। मृतकों की हड्डियाँ बिखरी पड़ी हैं और कब्रों को तहस-नहस कर दिया गया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि चीन ने उइगर मुस्लिमों को पूरी तरह मिटाने की ठान ली है। शिनजियांग में केवल 2 सालों में ही कई दर्जन कब्रगाहों को तबाह कर दिया गया है।

सैटेलाइट इमेज के अनुसार हुए खुलासे से इस बात का पता चला है। एएफपी ने कई फोटो जारी किए हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि मृतकों की हड्डियाँ इधर-उधर बिखरी पड़ी हैं और कब्रगाहों की ईंटें फैली हुई हैं। यह दिखाता है कि चीन ने इन कब्रगाहों को तबाह करने में जरा सी भी संवेदनशीलता का परिचय नहीं दिया और मृतकों तक को नहीं बख़्शा।

उइगर मुस्लिमों के कब्रगाह में चीन की तबाही का आलम: बिखरी पड़ी हड्डियाँ

चीन ने इन कब्रगाहों को विकास की आड़ में तबाह किया है। कई कब्रगाहों को तबाह करने के पीछे विकास और इंडस्ट्री बिठाने जैसे कारण आधिकारिक रूप से बताए गए। वहीं कई अन्य कब्रगाहों को तबाह करने के पीछे का कारण उन्हें मॉडर्न बनाने का प्रयास बताया गया। उइगर मुस्लिमों का कहना है कि चीन की सरकार उनके जीवन के हर एक क्षेत्र पर कब्ज़ा करना चाहती है। एक उइगर कार्यकर्ता ने बताया कि चीन उनके समाज की हर एक निशानी को मिटा रहा है ताकि कुछ दिनों बाद वे लोग ख़ुद के बारे में ही अनजान बन जाएँ।

एक उइगर कार्यकर्ता ने बताया कि उसके दादा के दादा जिस कब्रगाह में दफ़न किए गए थे, उस कब्रगाह को तबाह कर दिया गया है। उइगर कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनके इतिहास, उनकी पहचान और उनकी पूर्वजों की हर एक निशानी मिटाई जा रही है। लगभग 10 लाख उइगर मुस्लिमों को पकड़ कर शिक्षा देने के नाम पर चीन के डिटेंशन कैम्पस में रखा गया है। वहाँ उन्हें अपने मजहब का कोई भी चीज प्रैक्टिस नहीं करने दिया जाता। अगर कुछ उइगर मुस्लिम बाहर भी हैं तो उन्हें वही सब करना होता है, जो चीन की सरकार चाहती है। खुले में नमाज पढ़ने से लेकर क़ुरान रखने तक, उन पर कई पाबंदियाँ हैं।

उइगर मुस्लिमों के कब्र की तबाही के बाद ऐसी हालत हो गई है

विश्व भर में चल रही आलोचना के बाद भी चीन अपनी हरकतों पर अडिग है। मानवाधिकार के मुद्दे को लेकर अमेरिका ने भी कई चीनी अधिकारियों को वीजा देने से इनकार कर दिया है। अगर आँकड़ों की बात करें तो 2014 से लेकर अब तक चीन ने 45 उइगर कब्रगाहों को तबाह कर दिया है। पिछले दो साल की बात करें तो यह आँकड़ा 30 हो जाता है। शिनजियांग के उइगर कार्यकर्ताओं ने बताया कि यह सिर्फ़ मजहब को लेकर अत्याचार नहीं है बल्कि इसकी जड़ें और भी गहरी हैं। एक उइगर कवि के कब्र का तो कोई अता-पता ही नहीं है। उनके कब्र की जगह वहाँ हाथ में लॉलीपॉप लिए एक पांडा की मूर्ति है।

कई लोकप्रिय उइगर नेताओं या स्थानीय वरिष्ठ लोगों के मरने के बाद उनके कब्र पर उनका विवरण और तस्वीरें लगाई जाती हैं। चीन ने इन सब तक को भी तबाह कर दिया। चीन की सरकार ने कई उइगर कब्रगाहों को कहीं और शिफ्ट कर दिया है। हर कब्रगाह को तबाह करने के पीछे अलग-अलग आधिकारिक कारण गिनाए गए हैं। चीन ने जहाँ नए कब्रगाह बनाए हैं, वहाँ लिखा गया है कि ये कब्रगाह वातावरण को नुकसान नहीं पहुँचाता है और यहाँ सभ्य तरीके से अंतिम क्रिया संपन्न की जाएगी। इसका अर्थ यह है कि उइगर अब किस रीति-रिवाज से अपने समाज के मृतकों को दफ़नाएँगे, यह भी चीन ही तय करेगा।

2005 में सोनिया ने सुनील दत्त की नहीं सुनी, मौत के 14 साल बाद उनका कहा ही सत्य है

  • शस्त्र पूजा को आप तमाशा नहीं कह सकते। हमारे देश में इसकी पुरानी परंपरा रही है। दिक्कत यह है कि खड़गे जी नास्तिक हैं। लेकिन कॉन्ग्रेस में हर कोई नास्तिक नहीं।
  • सोनिया गाँधी के साथ जुड़े कुछ बड़े नेता साजिश रच रहे हैं। राहुल गाँधी के खिलाफ साजिश रची जा रही है। जो लोग राहुल गाँधी के साथ जुड़े हैं, उन्हें साजिश रचकर पार्टी में अलग-थलग किया जा रहा है।

मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे संजय निरुपम के ये हालिया बयान हैं। निरुपम उन कॉन्ग्रेस नेताओं में से हैं जिन्होंने सोनिया के दोबारा पार्टी की कमान संभालने के बाद से बगावती तेवर अपना रखे हैं।

निरुपम को कॉन्ग्रेस ने बड़े शोर-शराबे के साथ 25 अप्रैल 2005 में पार्टी में शामिल किया था। शिवसेना के मुखपत्र ‘दोपहर का सामना’ का संपादक रहा यह नेता पार्टी को उस वक्त इतना अजीज था कि सोनिया गॉंधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस ने सुनील दत्त की भी नहीं सुनी थी। चार बार लोकसभा के सांसद रहे अभिनेता सुनील दत्त उस वक़्त कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए वन सरकार में मंत्री थे। वे 2004 के आम चुनावों में निरुपम को पटखनी देकर ही लोकसभा में पहुॅंचे थे। उस चुनाव में निरुपम शिवसेना की तरफ से मैदान में थे।

सुनील दत्त ने 2004 में निरुपम के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी किया था। सो, जब उन्हें निरुपम को कॉन्ग्रेस में लाने की कोशिशों का पता चला तो उन्होंने इस पर एतराज जताया। लेकिन, उनकी सुनी नहीं गई। निरुपम के कॉन्ग्रेस में आने के महीने भर के भीतर 25 मई 2005 को सुनील दत्त का देहांत हो गया। उस समय की मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि निरुपम के पार्टी में आने से वे बेहद आहत थे।

हालॉंकि बाद में उनकी बेटी प्रिया दत्त कॉन्ग्रेस की सांसद भी रहीं और आज भी पार्टी में सक्रिय हैं। लेकिन, जानकार बताते हैं कि निरुपम के कॉन्ग्रेस में आने के बाद से दत्त और गॉंधी परिवार के रिश्तों में वैसी गर्मजोशी नहीं रही थी, जैसे पहले कभी हुआ करती थी। 2009 में सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त जब सपा के महासचिव बने तो उन्होंने इस विवाद पर खुलकर बोला था। संजय दत्त ने कहा था, “लोग दत्त साहब का काफी सम्मान करते हैं लेकिन उनके पिता ने भी कॉन्ग्रेस में काफी कुछ देखा। दत्त साहब संजय निरुपम को कॉन्ग्रेस में शामिल करने से खुश नहीं थे।” उन्होंने कहा था, ” मेरे पिता कॉन्ग्रेस के कारण मर गए। कॉन्ग्रेस ने उनकी नहीं सुनी और संजय निरुपम को पार्टी में शामिल कर लिया। जिस आदमी ने शिवसेना में रहते उन पर आरोप लगाए, उनको गाली दी उसे पार्टी में शामिल कर लिया गया। इसकी वजह से ही उनकी मौत हुई।”

समय के फेर देखिए। जब सुनील दत्त को अनसुना कर संजय निरुपम को कॉन्ग्रेस में लाया गया तब सोनिया गॉंधी पार्टी की अध्यक्ष हुआ करती थीं। सुनील दत्त के जाने के 14 साल बाद जब वही निरुपम पार्टी को आँखें दिखा रहे हैं तो सोनिया ही पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष हैं!

राजस्थान में खनन माफिया 2 पुलिसकर्मियों का अपहरण कर ले गए मध्य प्रदेश, पीट-पीट कर किया अधमरा

राजस्थान में खनन माफिया खुल्ले साँढ़ की तरह घूम रहे हैं और खुलेआम अपराध को अंजाम दे रहे हैं। यहाँ तक कि पुलिसकर्मी भी उनके सामने बेबस नज़र आ रहे हैं। धौलपुर शहर में एक ऐसा वाकया हुआ, जिससे राजस्थान में पुलिस प्रशासन की लापरवाही सामने आई। वहाँ स्थित चम्बल पुल से खनन माफियाओं ने 2 पुलिसकर्मियों को अगवा कर लिया और फिर लाठी एवं बेल्ट से उनकी पिटाई की। पुलिसकर्मियों को पीटने के लिए बदमाश उन्हें मध्य प्रदेश के बीहड़ में लेकर चले गए। इसके बाद बदमाश घायल पुलिसकर्मियों की पिटाई के बाद वहीं पर छोड़ कर आए गए। पिटाई के बाद दोनों पुलिसकर्मी अधमरी अवस्था में वहाँ तड़प रहे थे।

पीड़ित पुलिसकर्मियों की पहचान कॉन्स्टेबल हरिओम और कॉस्टेबल विजयपाल के रूप में हुई है। ये दोनों धौलपुर के सागरपाड़ा पुलिस चौकी में कार्यरत थे। ये घटना सोमवार (अक्टूबर 7, 2019) की रात को हुई। घटना के वक्त दोनों ही पुलिसकर्मी देर रात बाइक से गश्त कर रहे थे। मार से घायल हुए दोनों पुलिसकर्मियों को जिला अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में भर्ती कराया गया है। वहाँ पर उन दोनों का उपचार चल रहा है। दोनों ही पुलिसकर्मियों के हाथ, पैर, मुँह और पीठ में काफ़ी गंभीर चोटें आई हैं।

राजस्थान के धौलपुर और मध्य प्रदेश के मुरैना में सुप्रीम कोर्ट ने बजरी खनन पर रोक लगाई हुई है। तब भी सरायछोला पुलिस स्टेशन के सामने से ही ट्रक पर बजरी भर कर ले जाया जाता है। इससे पहले भी ऐसी ख़बर आई थी। इसके बाद राजस्थान प्रशासन में हड़कंप मच गया था। बीते 30 अगस्त को पुलिस और खनन माफिया के बीच मुठभेड़ हो गई थी। इसमें 2 युवकों की मौत हो गई है। उस घटना में 2 पुलिस कॉन्स्टेबल सहित 7 लोग घायल भी हो गए थे।

अभी वह मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब दो कॉन्स्टेबलों को मध्य प्रदेश ले जाकर पिटाई का मामला सामने आ गया। बताया जाता है कि खनन माफिया कार से आए और कॉन्स्टेबलों का अपहरण कर लिया। पुलिस ने बताया है कि इस सम्बन्ध में मुक़दमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है और जाँच चल रही है।

राहुल पर कॉन्ग्रेस में रार: खुर्शीद पर पलटवार कर बोले राशिद अल्वी- घर को आग लग गई घर के चिराग से

कॉन्ग्रेस का भीतरी घमासान थमता नहीं दिख रहा। पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी पर पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के बयान को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने उन पर पलटवार किया है। उन्होंने खुर्शीद पर निशाना साधते हुए कहा है कि पार्टी के भीतर ऐसे नेता हैं, जो पार्टी को ही नुकसान पहुँचा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अल्वी ने कहा है कि ये जो हर दूसरा कॉन्ग्रेस नेता अलग-अलग राग अलाप रहे हैं, ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आगे कॉन्ग्रेस की वर्तमान स्थिति को साफ़ करते हुए कहा, “घर को आग लग गई घर के चिराग से।”

राहुल गाँधी के इस्तीफे पर अल्वी ने कहा कि वे गलत नहीं थे। उन्हें कुछ नेताओं का समर्थन नहीं मिला, इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया। अपने बयान में उन्होंने साल 2004 में पार्टी को मिली जीत का भी जिक्र किया, जब कॉन्ग्रेस का नेतृत्व सोनिया गाँधी ने किया था।

उल्लेखनीय है कि सलमान खुर्शीद ने राहुल गाँधी के इस्तीफे को लेकर कहा था कि अब वक्त आ गया है, जब कॉन्ग्रेस अपनी बुरी हार की समीक्षा करे और यह समझने का प्रयास करे कि जनादेश का सन्देश क्या है? उन्होंने कहा कि पार्टी हार का विश्लेषण इसीलिए नहीं कर पाई, क्योंकि राहुल गाँधी ऐन मौके पर निकल गए, जिससे पार्टी में एक शून्य पैदा हो गया।

उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रह चुके खुर्शीद ने कहा कि कॉन्ग्रेस एकजुट होकर हार का विश्लेषण नहीं कर सकी, क्योंकि उनके नेता ही उन्हें छोड़ कर चला गया। खुर्शीद ने सोनिया गाँधी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर भी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि वह सोनिया के अंतरिम अध्यक्ष बनने से ख़ुश नहीं हैं। खुर्शीद ने कहा कि जो भी अध्यक्ष बने, वह टिका रहे। यूपीए-2 में विदेश, अल्पसंख्यक मामले और क़ानून जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके खुर्शीद ने बताया कि वह अपनी पीड़ा इसीलिए व्यक्ति कर रहे हैं ताकि नेतृत्व इसे सुने।

सलमान खुर्शीद के इस बयान के बाद संबित पात्रा ने इसे विधानसभा चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस द्वारा हार स्वीकार कर लेने के रूप में पेश किया है। उन्होंने खुर्शीद के बयान को आधार बनाकर कहा कि वे मान चुके है कि राहुल गाँधी भाग गए और सोनिया गांधी सिर्फ ‘फौरी इंतजाम’ देख रही हैं। इसका मतलब है कि कॉन्ग्रेस में कोई नेता, नीति और नीयत शेष नहीं है।

कॉन्ग्रेस J&K का स्थानीय चुनाव नहीं लड़ेगी, कहा – तारीख की घोषणा एकतरफ़ा थोपी गई

कॉन्ग्रेस ने जम्मू-कश्मीर में 24 अक्टूबर को होने वाले स्थानीय चुनावों में न लड़ने का ऐलान किया है। ब्लॉक डेवलपमेंट काउन्सिल (BDC) के यह चुनाव 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से राज्य में होने वाले पहले चुनाव होंगे। राज्य की प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी ने यह ऐलान अपने वरिष्ठ नेताओं की नज़रबंदी और उन पर तमाम बंदिशें चालू रहने के खिलाफ किया है।

‘हम करना तो चाहते थे, लेकिन लीडरान के बिना कैसे’

पार्टी के राज्य में मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने कहा कि सरकार कॉन्ग्रेस के साथ कोई सहयोग नहीं कर रही है, जबकि पार्टी ने चुनाव के समय और राज्य के हालात को लेकर शंकाओं के बावजूद सरकार के साथ सहयोग की इच्छा प्रकट की थी। रविंदर शर्मा ने कहा, “कश्मीर घाटी के हमारे वरिष्ठ नेताओं में से अधिकाँश पर पाबंदियाँ कम न होने के चलते पार्टी BDC चुनावों पर पुनर्विचार कर रही है।” इसके अलावा शर्मा ने सरकार पर चुनावों की तारीख की घोषणा एकतरफ़ा तरीके से थोपे जाने की भी बात की।

वहीं राज्य प्रशासन का कहना है कि नज़रबंद लोगों की रिहाई व्यक्तिगत तौर पर एक-एक व्यक्ति का विश्लेषण करने के बाद ही की जाएगी।

आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप

कॉन्ग्रेस के साथ ही उससे टूट कर अलग पार्टी बनी नेशनल पैंथर्स पार्टी ने भी ने भाजपा के पक्ष में आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप राज्य प्रशासन और राज्यपाल पर मढ़ा है। उनका कहना है कि राज्यपाल की कार्यवाहक सरकार द्वारा 370 हटने से राज्य को होने वाले फायदों का प्रचार-प्रसार असल में भाजपा का सरकारी खर्चे और आचार संहिता की बंदिशों को बाईपास कर के प्रचार करना है। पार्टी अध्यक्ष हर्ष देव सिंह ने घाटी में नए जनजातीय हॉस्टल की स्थापना, बिजली आपूर्ति में सात घंटे की बढ़ोतरी, गुरेज़ में विद्युत आधारभूत ढाँचे में वृद्धि, कश्मीर में गैस सिलिंडरों और ईंधन पहुँचाने की घोषणा को आचार संहिता के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इन सभी घोषणाओं का फायदा ले रही है, और चुनाव आयोग का अमला मूक दर्शक बन कर सब कुछ देख रहा है।

हत्या के गुनहगार अकील पठान ने गीता पढ़ने की जताई इच्छा, ग्वालियर के केंद्रीय कारागार में है कैद

ग्वालियर परिक्षेत्र के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह ने इन दिनों समाज के विभिन्न वर्गों में गीता के जरिए जागृति फैलाने का अभियान शुरू किया हुआ है। इस कड़ी में दशहरे पर उन्होंने ग्वालियर के केंद्रीय जेल में गीता का वितरण किया और सबको एक-एक माला दी। हत्या के मामले में कैद अकील पठान को भी गीता दी गई। इसके बाद उसने गीता पढ़ने की इच्छा जताई और कहा कि धर्म हमें एकता सिखाता है, मतभेद नहीं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक अकील पठान ने गीता की प्रति मिलने के बाद कहा कि धर्म हमेशा अच्छी चीजें सिखाता है। उसका कहना है कि वो जेल में रहकर किताबें पढ़ता रहता है और मुस्लिम होने के नाते वो अपने मजहब की किताबें भी पढ़ता रहा है। लेकिन अब उसे गीता मिली है, जिसे पढ़ने का वो इच्छुक है। अकील का कहना है कि वो गीता में दिए उपदेशों को समझने का और उन पर अमल करने की कोशिश करेगा।

रिपोर्ट के अनुसार एडीजी राजा बाबू सिंह समाज के अलग-अलग वर्गों में जाकर गीता के जरिए जागृति फैलाने की कड़ी में स्कूलों तक में जाकर बच्चों को गीता की प्रतियाँ देते हैं और गीता में दिए ज्ञान के बारे में बच्चों से बात करते हैं।

उन्होंने इंडिया टुडे से बातचीत करते हुए बताया कि उनका मानना है लोग अपने बुरे कर्मों के कारण अपराधी बनते हैं और फिर उन्हें जेल आना पड़ता है। वो बताते हैं कि गीता उन लोगों को आध्यात्म के प्रति जागृति और धार्मिक दिशा दिखाती है जो अपने पथ से डगमगा गए हैं।

इस आयोजन में वृंदावन के एक आध्यात्मिक गुरु आनंदेश्वर दास चैतन्य ने भी कैदियों को धार्मिक जीवन के गुणों के बारे में पढ़ाया। उन्होंने कहा, “गीता सिर्फ़ एक धार्मिक किताब नहीं है, यह एक आध्यात्मिक विकास है जिसे मनुष्य को जीवन के संविधान के रूप में स्वीकार करना चाहिए।” उन्होंने बताया कि जो देश के संविधान के ख़िलाफ़ जाता है, वो जेल में जाता है। इसी तरह जो आध्यात्म के संविधान का उल्लंघन करता है, वो इस जीवन चक्र में फँस जाता है।”

रिपोर्ट के अनुसार ग्वालियर की सेंट्रल जेल में 3,396 कैदी हैं, जिनमें 164 महिलाएँ हैं और उनके साथ 21 बच्चे हैं। अधिकतर कैदियों ने मजहब से ऊपर उठकर गीता पढ़ने की इच्छा जताई है।

दफ्तर में इस्तेमाल हो रहा था प्लास्टिक कप, कलेक्टर ने खुद पर ही लगाया ₹5000 का जुर्माना

आस्तिक कुमार पांडे नामक बीड जिला कलेक्टर ने अपने ऑफिस में प्लास्टिक कप का इस्तेमाल होने पर अपने ऊपर ही 5000 रुपए का फाइन लगा लिया। ये हैरान करने वाला कदम कलेक्टर ने उस समय उठाया जब एक पत्रकार ने उनका ध्यान इस पर केंद्रित करवाया कि उनके दफ्तर में प्लास्टिक कप का इस्तेमाल होता है।

घटना सोमवार (अक्टूबर 7, 2019) की शाम की है, जब जिला प्रशासन ने कलेक्टर दफ्तर में मीडिया कॉन्फ्रेंस ये बताने के लिए करवाई कि उपचुनावों में कौन से उम्मीदवारों ने नामांकन वापसी के आखिरी दिन अपना नाम वापस लिया। लेकिन यहाँ कॉन्फ्रेंस में आए पत्रकारों को प्लास्टिक के कप में चाय दी जाने लगी। तभी उनमें से एक पत्रकार ने ये मुद्दा उठाया कि उनके दफ्तर में प्लास्टिक कप का इस्तेमाल राज्य भर में प्लास्टिक पर लगे बैन का उल्लंघन है।

जिसके बाद पत्रकार की बात का संज्ञान लेते हुए बीड कलेक्टर ने अपनी गलती मानी और स्वयं पर 5000 रुपए का फाइन लगाया। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार कॉन्फ्रेंस खत्म होने के बाद उन्होंने प्लास्टिक को दफ्तर में पूर्ण रूप से बैन न किए जाने पर अधिकारियों को फटकार भी लगाई।

इसके बाद जिला अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि चुनाव पूरे होने के बाद प्रशासन राजनैतिक रूप से संवेदनशील जिले में प्लास्टिक प्रतिबंध के कार्यान्वयन पर ध्यान देगा।

गौरतलब है कि कलेक्टर ऑफिस में प्लास्टिक इस्तेमाल का ये पहला मामला प्रकाश में नहीं आया है। बीते 8 दिनों में कलेक्टर ऑफिस में प्लॉस्टिक बैन के बावजूद इसका इस्तेमाल किए जाने का ये दूसरा मामला है। इससे पहले चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने आया एक उम्मीदवार प्लास्टिक बैग में ही अपनी जमानत राशि लेकर आते पाया गया था, लेकिन अधिकारियों की नजर पड़ने के बाद उस पर 5000 रुपए का जुर्माना लगा दिया गया था।

बता दें कि दफ्तर में नियम का उल्लंघन होता देख खुद पर 5000 रुपए का जुर्माना लगाने वाले आस्तिक कुमार पांडे पिछले साल विभाग की दीवारों और कोनों में फैली गंदगी को खुद साफ करने के कारण भी चर्चा में आए थे। इस दौरान पान और गुटखे की पीक से रंगी दीवारों को साफ़ करती हुई उनकी तस्वीरें काफी चर्चाओं का हिस्सा बनीं थीं।

मध्य प्रदेश में विश्व हिन्दू परिषद के नेता को दिनदहाड़े गोलियों से भूना, हत्यारों का सुराग नहीं

मध्य प्रदेश के मंदसौर में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के एक नेता की गोली मार कर हत्या कर दी गई। मृतक युवराज सिंह केबल नेटवर्क का भी संचालन करते थे। घटना बुधवार (अक्टूबर 9, 2019) को सुबह 11 बजे हुई, जब वह गीता भवन अंडरब्रिज के पास स्थित एक चाय की दुकान पर थे। उसी वक़्त बाइक सवार बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। उन्हें गोली लगते ही आसपास भगदड़ मच गई, जिसका फायदा उठा बदमाश भागने में सफल रहे।
युवराज सिंह को कुल तीन गोली मारी गई।

मौके पर मौजूद लोगों ने घटना की सूचना एम्बुलेंस और पुलिस को दी, जिसके बाद युवराज को अस्पताल ले जाया गया। वहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। युवराज विश्व हिन्दू परिषद में विभाग सहमंत्री के रूप में कार्यरत थे। अभी तक पुलिस को उनकी हत्या का कारण नहीं पता चला है। पुलिस इस बात की तहकीकात में जुटी है कि हमलवार उनकी हत्या करने के बाद किस दिशा में भागे?

युवराज को गोली लगने के बाद अस्पताल में भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने इलाक़े में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी है। जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुँच कर लोगों से संवाद कर रहे हैं। पुलिस ने जिले की सीमा को चारों तरफ़ से सील करते हुए हत्यारों की तलाश तेज़ कर दी है। जिला अस्पताल में आरएसएस और विहिप के कार्यकर्ताओं ने पहुँच कर इस घटना की निंदा की।

लोगों ने मृत विहिप नेता की शव रख कर सड़क जाम कर दिया और एसपी को बुलाने की माँग की। कुछ अन्य अधिकारियों ने वहाँ पहुँच कर लोगों को मनाया, तब जाकर लोग शव का पोस्टमॉर्टम कराने के लिए माने। पोस्टमॉर्टम रूम में एसपी भी मौजूद थे। दिनदहाड़े हुए इस हमले से मध्य प्रदेश में क़ानून-व्यवस्था पर सवालिया निशान लग गया है।

‘ब्लैक मडोना’ का दर्शन कर और उन्हें छू कर खुश हूँ: वाड्रा ने पवित्र ईसाई स्थल पर की प्रार्थना

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा मंगलवार (अक्टूबर 8, 2019) को स्पेन में थे। यहाँ उन्होंने ‘सांता मारिया डे मोंटसेराट एबे’ नामक पवित्र स्थल पर उपस्थिति दर्ज कराई। ज़मीन हड़पने के कई मामलों में आरोपित कारोबारी वाड्रा ने मंगलवार की सुबह ‘ब्लैक मडोना’ की प्रतिमा के समक्ष प्रार्थना भी की। वाड्रा ने अपने इस दौरे से जुड़े 30 फोटोग्राफ सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि अध्यात्म की कोई सीमा नहीं होती। वाड्रा ने लिखा कि उन्होंने इस स्थल के बारे में काफ़ी सुन रखा था और वो यहाँ आकर अभिभूत हैं।

वाड्रा ने बताया कि ‘पवित्र ब्लैक मडोना’ की प्रतिमा का दर्शन और उसे छूने के लिए कई लोग लाइन में लगे थे और उन्हें भी उसी लाइन में लग कर काफ़ी ख़ुशी हुई। वाड्रा ने बताया कि उन्होंने अपनी बारी का इंतजार किया और फिर ‘ब्लैक मडोना’ का दर्शन किया। वाड्रा ने बताया कि उन्होंने भी ‘ब्लैक मडोना’ की प्रतिमा को छुआ। वाड्रा ने वहाँ के वातावरण की प्रशंसा करते हुए बताया कि पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस स्थल से आसपास के सुन्दर इलाक़ों का मनोरम दृश्य दिखता है।

‘ब्लैक मडोना’ का दर्शन: रोबर्ट वाड्रा ने एक के बाद एक 30 फोटो शेयर किया

रॉबट वाड्रा ने लिखा कि इस क्षेत्र के इतिहास के बारे में जानकारी लेकर और ‘ब्लैक मडोना’ का दर्शन करने का उनका अनुभाग काफ़ी यादगार रहा। स्पेन दौरे पर गए रोबर्ट वाड्रा ने इससे पहले कोर्ट से विदेश दौरे के लिए अनुमति माँगी थी। उन्होंने अदालत में कहा था कि वह बिजनेस ट्रिप पर विदेश जाना चाहते हैं। उन्हें सितम्बर 13, 2019 को अदालत ने विदेश जाने की अनुमति दे दी थी। हालाँकि, प्रवर्तन निदेशालय ने कहा था कि वाड्रा विदेश में सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।

अदालत ने कहा था कि चूँकि वाड्रा की विवादित सम्पत्तियाँ भारत में स्थित हैं, इसीलिए विदेश जाने की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने ईडी की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए उन्हें विदेश जाने की अनुमति दे दी थी। हालाँकि, कोर्ट ने यह भी कहा था कि स्पेन से लौट कर अधिकारियों द्वारा बुलाए जाने पर उन्हें 72 घंटे के भीतर अपनी पासपोर्ट और वीजा की कॉपी जमा करानी होगी और जाँच के लिए उपस्थित होना पड़ेगा।