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मारा गया उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा आतंकी, घर से भागते समय माँगा था 1 लाख रुपए

दक्षिण एशिया में खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन अलकायदा का सबसे बड़ा सरगना मारा गया। अफ़ग़ानिस्तान के ‘नेशनल डायरेक्टरेट ऑफ सिक्योरिटी (NDS)’ ने मंगलवार (अक्टूबर 8, 2019) को इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि मौलाना असीम उमर को अमेरिका और अफ़ग़ानिस्तान के संयुक्त सुरक्षा बलों ने मार गिराया। मौलाना उमर को भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ सनाउल हक़ के नाम से चिह्नित करती है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के संभल का रहने वाला था। उसे 2014 में अलकायदा के मुखिया और ओसामा बिन लादेन के उत्तराधिकारी अल जवाहिरी द्वारा ‘भारतीय उपमहाद्वीप अलकायदा (AQIS)’ का प्रमुख बनाया गया था।

हालाँकि, अफ़ग़ान सुरक्षा एजेंसियों ने मौलाना उमर को पाकिस्तानी के रूप में चिह्नित किया है क्योंकि वह पाकिस्तानी पासपोर्ट लेकर घूम रहा था। उसके पास से पाकिस्तानी पासपोर्ट जब्त किया गया। मौलाना 1995 में ही भारत से गायब हो गया था। ख़ुफ़िया एजेंसियों का मानना है कि उसके बाद उसने पाकिस्तान में पनाह ली थी और वहीं से आतंकी गतिविधियाँ संचालित कर रहा था। आतंकी मौलाना को अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंड प्रान्त स्थित मूसा क़ाला जिले में मार गिराया गया।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को मौलाना उमर के बारे में तब पता चला था जब संभल के मोहम्मद आसिफ और कटक के अब्दुर रहमान से पूछताछ की गई थी। इन दोनों को दिल्ली पुलिस और ओडिशा पुलिस ने 2014-15 में गिरफ़्तार किया था। पुलिस के अनुसार, मौलाना उमर का साथी आसिफ 2012 में ईरान होकर पाकिस्तान गया था। वहाँ उसने पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाक़े में बसे एक इलाक़े में स्थापित एक जिहादी कैम्प में प्रशिक्षण लिया था। उसके साथ यूपी के दो अन्य लोग भी गए थे। आसिफ को वापस भारत भेजा गया ताकि वह और भी भारतीयों को आतंकी सगठन में शामिल कर सके।

मौलाना उमर ने कराची में ही अपनी शिक्षा-दीक्षा पूरी की। 90 के दशक के उत्तरार्द्ध में उसने हरकत-उल-मुजाहिदीन की सदस्यता ली और फिर पेशावर स्थित दारुल-उलूम-देवबंद के एक मदरसे में पढ़ाने लगा। 2007 की गर्मियों में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के आदेश पर लाल मस्जिद में स्थित जामिया उलूम-ए-इस्लामिया के आतंकियों पर सैन्य कार्रवाई की गई थी। इसके बाद मौलाना उमर का झुकाव अलकायदा की तरफ बढ़ा था। 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड डेविड हेडली ने पूछताछ के दौरान जानकारी दी थी कि भारत को निशाना बनाने के लिए एक ‘कराची प्रोजेक्ट’ चलाया जा रहा है।

2013 में मौलाना उमर ने भारत के मुस्लिमों को भड़काने के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। उसने कहा था कि मस्जिद के सामने खड़ा लाल किला मुस्लिमों की गुलामी और हिन्दुओं द्वारा चलाए जा रहे नरसंहार के कारण ख़ून के आँसू रो रहा है। बता दें कि उमर जब 1995 में गायब हो गया था, तब उसके परिवार ने अखबारों में इश्तेहार दिया था। उसके पिता का कहना था कि उसने जाते समय मक्का जाने के लिए 1 लाख रुपए की माँग की थी।

शक्ति का प्रत्युत्तर शक्ति से ही देना होगा, तभी म्लेच्छ शक्तियों की पराजय निश्चित होगी

विजयादशमी के इस पावन अवसर पर जब “जयंती-उत्पाटन” कर सुबह आसन पर बैठा, तो कई तरह के विचार दिमाग में कौंधते रहे? बस, इन 20-25 वर्षों में आखिर यह कैसी प्रदूषणकारी हवा बही या फिर यह दूषण समाज में मौजूद ही था, क्वचित अब वह उघड़ गया है, क्वचित हम ही कुछ अधिक सावधान हो गए हैं, जो ये सारा तलछट अब मुख्यधारा बन गया है। आखिर, इसके अलावा और क्या कारण होगा कि कहीं माँ दुर्गा को मूलनिवासी-आंदोलन के नाम पर गालियाँ दी जा रही हैं, तो कहीं दुर्गा-मंडप से अजान दी जा रही है।

इधर एक नया बवाल चला है, रावण को ब्राह्मण, महात्मा सिद्ध करने का। अब तक तो छिटपुट लोग ही रावण-दहन के नाम पर अपनी कुत्सा और कुंठा निकालते थे, इस बीच “अपने अंदर के रावण को मारने” या फिर, भाँति-भाँति के कुतर्क से उसे सर्वश्रेष्ठ महानुभाव सिद्ध करने की होड़ मची है। इन सब से भी बात नहीं बनी, तो एक विदुषी पैदा हो गईं यह दावा करने को कि हिंदुत्व का तो निर्माण (प्रभु, अब उठा ही लो…) ही 20 वीं सदी में किया गया ताकि इसके दुर्गुणों को छुपाया जा सके।

ऐसे नाबदानी कीड़े इस देश में हैं, समाज में हैं, यहाँ की मुख्यधारा में हैं, यहाँ तक कि मुझ तक पहुँच जा रहे हैं जो तथाकथित न्यूज और इंटरनेट से ठीकठाक दूरी बरकरार रखता है। मैं यह सोच रहा हूँ और ‘राम की शक्ति पूजा’ मुझे याद आ रही है… खुद मर्यादा पुरुषोत्तम राम को भी जब निराशा घेरती है, वह पंक्तियाँ याद आती हैं,

“बोले रघुमणि- “मित्रवर, विजय होगी न समर,
यह नहीं रहा नर-वानर का राक्षस से रण,
उतरीं पा महाशक्ति रावण से आमन्त्रण,
अन्याय जिधर, हैं उधर शक्ति।” (राम की शक्ति पूजा, निराला)

आक्रमण दसों दिशाओं से हो रहा है। सनातन धर्म के ध्येय वाक्यों को, परंपराओं को, त्योहारों को, रीति-रिवाजों को या तो कालबाह्य करार दिया जा रहा है, या मैकाले-मुल्ला-मार्क्स के जारज पुत्र, ये नाबदानी कीड़े उन्हें हास्यास्पद बना कर पेश कर रहे हैं।

राजनीतिक मसलों को धर्म और अध्यात्म में घुसेड़ कर ‘उलटबांसी’ के जरिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर का मसला बना रहे हैं। आपसी मारपीट या किसानों के गुस्से का शिकार बने लोगों को जबरन हिंदू आतंक (क्या सचमुच!) का शिकार बनाकर पेश करना कितना जायज है? ट्रेन की सीट के लिए हुए झगड़े को मॉब-लिंचिंग बनाना कहाँ तक जायज है? अखलाक को तो बारहां शहीद की तरह पेश किया जाता है, लेकिन डॉक्टर नारंग की चर्चा क्यों नहीं? अंकित की बात कोई क्यों नहीं करता?

और, ये नैरेटिव इस कदर आपके दिमाग पर बिठा दिया गया है कि नए-नकोर बच्चे रवीश या गौरी लंकेश को अपना आदर्श मान लेते हैं, जो केवल और केवल झूठ, नफरत और सांप्रदायिकता के पैरोकार हैं। वे उर्मिलेश यादव और पुण्य प्रसून या शेखर गुप्ता को पत्रकारिता का पैमाना मानता है, जो केवल और केवल एजेंडा-सेटर हैं, कॉन्ग्रेस-कम्युनिस्ट युति के पक्षकार हैं।
…और, फिर एक बार राम याद आते हैं…

“आया न समझ में यह दैवी विधान।
रावण, अधर्मरत भी, अपना, मैं हुआ अपर,
यह रहा, शक्ति का खेल समर, शंकर, शंकर!
करता मैं योजित बार-बार शर-निकर निशित,
हो सकती जिनसे यह संसृति सम्पूर्ण विजित,
जो तेजः पुंज, सृष्टि की रक्षा का विचार,
हैं जिसमें निहित पतन घातक संस्कृति अपार। (राम की शक्ति पूजा, निराला)

और, फिर उसी राम की शक्ति-पूजा के जाम्बवंत याद आते हैं, जो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम तक को बोध देने की शक्ति रखते हैं, यही तो है सनातनी पाठ, मर्यादा और शक्तिः-

विचलित होने का नहीं देखता मैं कारण,
हे पुरुषसिंह, तुम भी यह शक्ति करो धारण,
आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तर,
तुम वरो विजय संयत प्राणों से प्राणों पर।
रावण अशुद्ध होकर भी यदि कर सकता त्रस्त
तो निश्चय तुम हो सिद्ध करोगे उसे ध्वस्त,
शक्ति की करो मौलिक कल्पना, करो पूजन।
छोड़ दो समर जब तक न सिद्धि हो, रघुनन्दन! (राम की शक्ति पूजा, निराला)

जब स्वयं माँ अंबे का हाथ हमारे सिर पर आशीष के तौर पर सज्जित है, तो घबराहट कैसी? जब स्वयं बाबा भोलेनाथ हमारे जगत के खेल को अपने डमरू के वादन के साथ सहास्य देख और संभाल रहे हैं, तो बेचैनी कैसी?

हाँ, हमें मौलिक आराधना करनी होगी, शक्ति का प्रत्युत्तर शक्ति से ही देना होगा, शिव और शक्ति को एक साथ साधना ही होगा, तभी इन म्लेच्छ शक्तियों की पराजय निश्चित होगी। जब तक सिद्धि न हो, समर को टाल कर सिद्धि करनी होगी… बंधुओं और उस सिद्धि का समय अभी है, ठीक अभी…।

लेखक: व्यालोक पाठक

मस्जिद के पास से गुजर रहे दुर्गा पूजा जुलूस पर मुस्लिमों का हमला, भारी पत्थरबाजी: 8 गिरफ़्तार

नवरात्रि और दुर्गा पूजा का समापन होने के साथ ही सोशल मीडिया पर एक चौंका देने वाले वीडियो ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ़ खींचा। ये वीडियो उत्तर प्रदेश के देवीपाटन मंडल में स्थित बलरामपुर जिले का है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि दुर्गा पूजा के बाद देवी-विसर्जन के लिए जा रहे जुलूस पर भारी पत्थरबाजी की गई। यूपी पुलिस ने इस वीडियो के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है।

बलरामपुर पुलिस ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति

बलरामपुर पुलिस ने ट्विटर के माध्यम से बताया कि दुर्गा-पूजा विसर्जन के जुलूस पर हमला और भारी पत्थरबाजी के मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है और इस पत्थरबाजी में शामिल अन्य आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयासरत है। वीडियो में देखा जा सकता है कि उम्रदराज मुस्लिम भी आक्रामकता से दुर्गा-पूजा के जुलूस पर पत्थरबाजी करने में लगे हुए हैं और विसर्जन में शामिल लोग डर के मारे चीख रहे हैं।

पत्थरबाजी के समय एक व्यक्ति को ट्रक के पीछे छिप कर बचने की कोशिश करते हुए भी वायरल वीडियो में देखा जा सकता है। बलरामपुर के एडिशनल एसपी ने ऑपइंडिया को बताया कि दुर्गा-पूजा विसर्जन के जुलूस पर तब हमला किया गया, जब यह एक मस्जिद के पास से गुजर रहा था। उस मस्जिद के दाहिने तरफ एक मोड़ है। सामान्यतः जुलूस जहाँ से भी गुजरता है, तो उसमें डीजे और गाना-बजाना भी शामिल रहता है।

सामान्यतः यह आशा की जाती है कि जब कोई हिन्दू धार्मिक जुलूस किसी मस्जिद के पास से होकर गुजरता है तो म्यूजिक साउंड ऑफ कर दिया जाता है। लेकिन बलराम में कल ऐसा नहीं हुआ। इस कारण से स्थानीय मुस्लिम समुदाय नाराज़ हो गया और सबने मिल कर जुलूस पर हमला बोल दिया। एडिशनल एसपी ने अंदेशा जताया कि मुस्लिमों द्वारा की गई पत्थरबाजी स्वाभाविक नहीं भी हो सकती है और सम्भावना है कि वे पहले से ही पत्थर वगैरह लेकर देवी-विसर्जन के जुलूस पर धावा बोलने को तैयार बैठे हों।

एडिशनल एसपी ने आश्वस्त किया कि इलाक़े में क़ानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं है और सब नियंत्रण में है। उन्होंने 8 लोगों को गिरफ़्तार किए जाने की पुष्टि की, जिसके बाद सांप्रदायिक तनाव की स्थिति नहीं है। पुलिस द्वारा एक्शन लेने के बाद दुर्गा-पूजा के विसर्जन का शांतिपूर्वक समापन कराया जा सका।

राफेल की शस्त्र-पूजा से कॉन्ग्रेस को दिक्कत, कहा – ‘हर चीज को नौटंकी बना देती है मोदी सरकार’

विजयादशमी के दिन भारत को राफेल एयरक्राफ्ट के रूप में अत्याधुनिक फाइटर जेट मिला। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ्रांस जाकर औपचारिक रूप से भारतीय वायु सेना के लिए निर्मित (जरूरी बदलावों सहित) पहले राफेल को प्राप्त किया। राजनाथ ने बताया कि फ़रवरी 2021 तक 18 राफेल की डिलीवरी भारत को मिल जाएगी और मई 2022 तक सारे के सारे 36 फाइटर राफेल जेट भारत को मिल जाएँगे। हालाँकि, रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि यह भारत की आक्रामकता का सन्देश नहीं है बल्कि आत्मरक्षा का उपाय है। राजनाथ सिंह ने क़रीब आधे घंटे तक राफेल में उड़ान भरने के बाद कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वो सुपरसोनिक गति से किसी एयरक्राफ्ट में उड़ान भरेंगे।

इस दौरान सबसे ज़्यादा चर्चा का विषय बना राजनाथ सिंह द्वारा शस्त्र-पूजा करना। विजयादशमी के दिन ही ‘भारतीय वायुसेना दिवस’ थी था और इसी दिन वायुसेना के लिए राजनाथ ने राफेल की औपचारिक प्राप्ति की। राजनाथ सिंह ने राफेल फाइटर जेट पर ‘ॐ’ लिख कर पूजा-अर्चना की। राफेल एयरक्राफ्ट के चक्कों के नीचे नीम्बू रखा गया क्योंकि ऐसा करना शुभ माना जाता है। राजनाथ ने कहा कि यह भारत और फ्रांस, दोनों के लिए ही काफ़ी अच्छा दिन है। लेकिन, कॉन्ग्रेस पार्टी को राजनाथ की शस्त्र-पूजा पसंद नहीं आई।

कॉन्ग्रेस ने कहा कि राफेल एयरक्राफ्ट पर ‘ॐ’ लिख कर और शस्त्र-पूजा कर के राजनाथ सिंह इसे धर्म के साथ जोड़ रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने पूछा कि राफेल को दशहरा से जोड़ने का क्या तुक है? उन्होंने कहा कि कोई वायुसेना का अधिकारी भी फ्रांस जाकर यह औपचारिकता पूरी कर सकता था लेकिन राजनाथ ख़ुद वहाँ क्यों गए? कॉन्ग्रेस नेता ने कहा:

“ये क्या बात हुई कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह राफेल को रिसीव करने फ्रांस गए हैं। वायुसेना से जुड़े लोगों को इसे रिसीव करना चाहिए था। यह औरों की तरह सिर्फ एक हथियार है, जिसे आप ख़रीद रहे हैं। दशहरा के त्योहार और राफेल का भला क्या मेल है? हम सब जिस त्योहार को मनाते हैं, उसे राफेल एयरक्राफ्ट से जोड़ने का क्या तुक है? मोदी सरकार के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि बिना कोई ठोस काम किए हर चीज को नौटंकी बना देते हैं।”

कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि राफेल को रिसीव करने के बहाने मोदी सरकार अपना ‘भगवा एजेंडा’ चला रही है। वहीं दूसरी तरफ राजनाथ सिंह ने बताया कि हमारी वायुसेना विश्व की चौथी सबसे शक्तिशाली वायुसेना है और राफेल के आने से इसकी क्षमता में कई गुना ज्यादा वृद्धि होगी, जिससे इस क्षेत्र की शांति और सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा सुदृढ़ होगी। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि राफेल अब भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हो गया है और अब यह पाकिस्तान पर निर्भर करता है कि वह इससे पहला गोला कब खाएगा?

कर्ज लेने के मामले में इमरान सरकार ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, PAK मीडिया ने खुद खोली पोल

अपने कार्यकाल के पहले वर्ष में ही इमरान सरकार ने पूर्व के सभी रिकॉर्डों को तोड़ते हुए बेतहाशा कर्ज ले लिया है। आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक इमरान सरकार के सत्ता संभालने के बाद देश के कुल कर्ज में 7509 अरब पाकिस्तानी रुपए की वृद्धि हुई है।

सूत्रों का हवाला देते हुए पाकिस्तान की ही एक मीडिया रिपोर्ट में खुलासा करते हुए बताया गया है कि कर्ज के यह आँकड़े स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री कार्यालय भिजवा दिए हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि अगस्त 2018 से अगस्त 2019 के बीच इमरान सरकार ने विदेश से 2804 अरब, जबकि घेरलू स्रोतों से 4705 अरब पाकिस्तानी रुपए का कर्ज लिया।

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष के पहले दो महीनों में ही पाकिस्तान के सार्वजनिक कर्ज में 1.43 फीसदी का इजाफा देखने को मिला। जबकि संघीय सरकार का यह कर्जा बढ़कर 32,240 अरब पाकिस्तानी रुपए हो गया है, जो कि पिछले वर्ष तक 24,732 अरब था।

इसके अलावा रिपोर्ट में ये बताया गया कि मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले तीन महीने में सरकार का कर संग्रह 960 अरब पाकिस्तानी रुपए का रहा, जोकि एक ट्रिलियन रुपए के निर्धारित लक्ष्य से कम है।

उल्लेखनीय है कि ‘नया पाकिस्तान’ का सपना दिखाकर सत्ता हासिल करने वाले इमराम खान के पहले कार्यकाल में उनके मुल्क की इतनी दुर्गति हो चुकी, जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। पड़ोसी मुल्कों से फजीहत और बेबुनियादी बातों का सिलसिला पाकिस्तान को इमरान सरकार के शासनकाल में ही देखने को मिला है। विदेशों से लेकर अपने मुल्क की संसद में मुँह की खा चुके इमरान खान अब देश पर बढ़ रहे कर्जे पर भी घिरने शुरू हो गए हैं।

मुस्लिम बहुल इलाके में विजयादशमी जुलूस पर पथराव: राजस्थान प्रशासन ने लगाया कर्फ्यू, इंटरनेट बंद

दशहरे के शुभ अवसर पर राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा कस्बे में अराजक तत्वों द्वारा जुलूस पर पथराव किए जाने के बाद से वहाँ के हालात तनावपूर्ण हैं। जिला प्रशासन ने बिगड़ी स्थिति को देखते हुए इलाके में सुबह 6 बजे से कर्फ्यू लगा दिया है। साथ ही रात 12 बजे के बाद से यहाँ सभी कंपनियों की इंटरनेट सेवाओं को आगामी 48 घंटे के लिए बंद कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक इलाके में दशहरे का जुलूस जब मुस्लिम बहुल इलाके की आरएसी चौकी के पास से गुजर रहा था, उसी समय माहौल बिगाड़ने के लिए कुछ लोगों ने पथराव कर दिया। इससे जुलूस में शामिल लोगों में भगदड़ मच गई।

दशहरे पर हुई इस घटना के विरोध में मालपुरा के विधायक कन्हैयालाल 150 लोगों के साथ धरने पर बैठ गए और रावण दहन भी नहीं होने दिया गया। इनकी माँग थी कि जब तक पत्थरबाजों को नहीं पकड़ा जाएगा, तब तक वह रावण दहन नहीं करेंगे। लेकिन हालातों के बिगड़ने के डर से प्रशासन ने नगरपालिका के कर्मचारियों के साथ मिलकर आज सुबह 4:30 बजे रावन दहन कर दिया और इसके बाद 6 बजे से ही वहाँ पर कर्फ्यू लगा है। मालपुरा विधायक अब भी थाने के बाहर धरने पर बैठे हैं।

घटना के बाद से इलाके की स्थिति इतनी नाजुक थी कि पूरे दशहरा मैदान को पुलिस व अन्य बलों के जवानों ने अपनी निगरानी में ले लिया। बाद में कलेक्टर केके शर्मा व एसपी आदर्श सिद्धु की उपस्थिति में रावण दहन हो पाया। सुबह कस्बे में अख़बारों के वितरण पर रोक लगाते हुए रोडवेज़ बसों से पहुँचे अखबारों के बंडलों को भी प्रशासन ने कब्ज़े में ले लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस का दावा है कि वो इस मामले के संबंध में 6-7 लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त पुलिस बल मँगवा लिया गया है। जबकि एसपी सिद्धू का कहना कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध बदमाशों की पहचान व उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि टोंक जिले में मालपुरा कस्बा हमेशा से संवेदनशील रहा है। यहाँ कहा जाता है कि हर साल 2 या 3 बार हिंदू मुस्लिम आबादी आपस में भिड़ते हैं। जिसके चलते कई बार यहाँ दंगे भी हो चुके हैं।

कॉन्ग्रेस की हार का विश्लेषण तो कर लेते… लेकिन हमारा नेता ही हमें छोड़ कर निकल गया: खुर्शीद

राहुल गाँधी ने जब लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की बुरी हार के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया, तब काफ़ी लोगों का मानना था कि वह जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं। अब कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बयानों से भी इसी बात की बू आ रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा है कि अब वक्त आ गया है, जब कॉन्ग्रेस अपनी बुरी हार की समीक्षा करे और यह समझने का प्रयास करे कि जनादेश का सन्देश क्या है? उन्होंने कहा कि पार्टी हार का विश्लेषण इसीलिए नहीं कर पाई क्योंकि राहुल गाँधी ऐन मौके पर निकल गए, जिससे पार्टी में एक शून्य पैदा हो गया।

उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रह चुके खुर्शीद ने कहा कि कॉन्ग्रेस एकजुट होकर हार का विश्लेषण नहीं कर सकी क्योंकि उनके नेता ही उन्हें छोड़ कर चला गया। खुर्शीद ने सोनिया गाँधी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर भी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि वह सोनिया के कार्यकारी अध्यक्ष बनने से ख़ुश नहीं हैं। खुर्शीद ने कहा कि जो भी अध्यक्ष बने, वह टिका रहे। यूपीए-2 में विदेश, अल्पसंख्यक मामले और क़ानून जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके खुर्शीद ने बताया कि वह अपनी पीड़ा इसीलिए व्यक्ति कर रहे हैं ताकि नेतृत्व इसे सुने।

खुर्शीद ने आशा जताई कि कॉन्ग्रेस पार्टी हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनाव के लिए तैयार है। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हरियाणा कॉन्ग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को उन्होंने सकारात्मक बताया। उन्होंने माना कि पार्टी हरियाणा में आंतरिक कलह से जूझ रही है लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि इससे निपट लिया जाएगा। खुर्शीद ने आगाह किया कि समय कम है और कॉन्ग्रेस को इससे जल्द निपटना चाहिए। राहुल गाँधी के सम्बन्ध में खुर्शीद ने कहा:

“हार के विश्लेषण के लिए नेता की मौजूदगी तो होनी चाहिए। लेकिन, दुःखपूर्वक कहना पड़ रहा है कि दुर्भाग्य से हमने ऐन वक़्त पर अपना नेता ही खो दिया। हमारी समस्या यह है कि उनके जाने के बाद भी हम उनके प्रति कटिबद्ध हैं। यह एक अनोखी स्थिति है। 2 बड़े हार और नेता फिर भी नेता ही बना हुआ है। कॉन्ग्रेस के लोग अब भी उनके प्रति निष्ठावान बने हुए हैं। लेकिन फिर बात वही है कि उनके यहाँ न होने से हम पार्टी की हार का विश्लेषण नहीं कर सके।”

2009 लोकसभा चुनाव में फर्रुखाबाद से जीत दर्ज करने वाले सलमान खुर्शीद 2014 लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हार गए थे। वह चौथे स्थान पर रहे थे। इससे पहले 1991 में भी वह संसद में इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। अब खुर्शीद ने उम्मीद जताई है कि काश कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल पार्टी के साथ होते। खुर्शीद ने पार्टी को आगाह किया कि जितनी जल्दी हार की समीक्षा कर ली जाए, उतना ही अच्छा है।

मौलवी जारी करे फतवा, राजदीप को लगता है ये इस्लाम के खिलाफ मीडिया की है साजिश!

राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट किया है कि एक “unknown Maulana” के “stupid remark” के आधार पर ‘बिग डिबेट’ नहीं चला देना चाहिए। अगर कोई ऐसा करता है तो वह ‘Islamo-phobia’ फैला रहा है। सही बात है- या शायद सही बात लगती, अगर राजदीप सरदेसाई का रवैया सभी मज़हबों/आस्थाओं के खिलाफ हिंसा या द्वेष न भड़काने को लेकर इतना ही संजीदा होता। लेकिन हिन्दुओं को लेकर उनका नज़रिया इसके उलट ही रहा है।

याद कीजिए पिछले लोक सभा चुनाव को, जिसमें उर्मिला मातोंडकर ने ‘डर का माहौल है’ का हवाला देकर अपने चुनाव लड़ने को तर्कसंगत बताने की कोशिश की थी। उस समय जब यही राजदीप सरदेसाई उनका साक्षात्कार कर रहे थे तो मातोंडकर ने हिन्दू धर्म के बारे में कहा था, “… and the religion that has been known for its tolerance has turned out to be the most violent religion of them all”

समय का अभाव हो तो नीचे के वीडियो में 5:30 से 5:40 तक आप उर्मिला को सुन सकते हैं, जहाँ सीधा-सीधा हमला धर्म पर ही था- किसी विचारधारा पर नहीं, किसी राजनीतिक दर्शन या व्यक्ति या पर नहीं, सीधे धर्म पर। और राजदीप सरदेसाई को उस पर चाय/कॉफ़ी/पानी का घूँट भरते हुए मौन सहमति देते देखा जा सकता है। न कोई सवाल, न टोकना, न कोई स्पष्टीकरण। उनकी मूक सहमति ऐसे थी जैसे हिन्दुओं को “सबसे हिंसक मज़हब/आस्था वाली कौम” कहा जाना सूरज के पूर्व से निकलने जितनी ‘obvious’ बात है- इस पर बहस क्या करना?


यहाँ उनका मौन, मौन सहमति ही माना जाएगा- इसलिए कि जिस खुद को ‘लिबरल’ कहने वाले पत्रकारिता के समुदाय विशेष से वह आते हैं, वह, और राजदीप सरदेसाई भी, मोदी को इसी ‘चुप्पी’ के आधार पर गुजरात का दोषी मानते हैं। उनके हिसाब से पहले तो मोदी की चुप्पी उनका आँख मार के हिन्दू दंगाईयों को इशारा थी कि तमे जो मरजी आए, तीन दिन तक करी जाओ; हूँ पुलीसानी संभाल लईसा। जब ये ‘थ्योरी’ औंधे मुँह गिर गई, क्योंकि न केवल मोदी के पुलिस का हाथ पकड़ने का एक भी सबूत अदालत को नहीं मिला, और मारे जाने वालों में एक तिहाई हिन्दू निकले, तो राजदीप ने गियर बदल कर मोदी पर ‘नैतिक जिम्मेदारी’ ठेलनी शुरू कर दी- क्योंकि वे चुप रहे, समुदाय विशेष के पैर में नाक रगड़ कर माफ़ी नहीं माँगी। जिन्हें इस बात पर शक है, इन्टरनेट पर बहुतेरे इंटरव्यू मिल जाएँगे, जिनमें राजदीप बताते हैं कि मोदी न केवल दंगों के लिए ‘नैतिक रूप से जिम्मेदार’ हैं, बल्कि यह भी कि राजदीप ने खुद उन्हें “एक बार माफ़ी माँग के खुद को इस जिम्मेवारी से मुक्त कर लो” की सलाह दी थी।

अतः अगर राजदीप मोदी को उनकी चुप्पी से दंगों में सहभागी मानते हैं, तो उर्मिला मातोंडकर के हिन्दुओं को हिंसक बताने में भी उनकी सहभागिता चुप्पी के चलते मानी जाएगी।

और यह कोई पहली और आखिरी घटना होती तो एक बार अपवाद माना भी जा सकता था। राजदीप सरदेसाई लगातार हिन्दुओं के बारे में वही चीजें अन्यायपूर्ण तरीके से कहते रहते हैं, जो अगर समुदाय विशेष के बारे में न्यायोचित, तथ्यपरक तौर पर भी कही गई हो तो भी उन्हें तकलीफ़ होने लगती है। मसलन कुरआन के आधार पर भी इस्लाम की व्याख्या कर उसकी आलोचना करने वाले हिन्दुओं को राजदीप अक्सर बिन-मांगी सलाह देते फिरते हैं कि वे समुदाय विशेष पर कोई ‘लेबल’ लगाने का हक़ नहीं रखते। और यही राजदीप लल्लनटॉप के सम्पादक सौरभ द्विवेदी के साथ लगभग हर सप्ताह हिन्दुओं पर ऐसी ही ‘ठप्पागिरी’ करते, किसका “हिंदूइस्म” सही, किसका गलत, इसकी विवेचना करते देखे जा सकते हैं।

“My Hinduism” के नाम पर हिन्दुओं के खिलाफ़ नफ़रत और भ्रम फ़ैलाने और उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत कर उन्हें उकसाने (Hindu baiting) वाले राजदीप एक तरफ़ हिन्दुओं पर ही निशाना साधने के लिए “diversity” का नाटक करते हैं, और दूसरी ओर उसी diversity वाले धर्म के साधुओं पर निशाना इस आधार पर साधते हैं कि उनका साधु होना ‘स्व-घोषित’ है, किसी पवित्र किताब या ‘अथॉरिटी’ से ठप्पा-प्राप्त नहीं।

इस्लामोफोबिया सच में है या नहीं, मैं यह तो नहीं जानता। नहीं जानता, क्योंकि इस शब्द का अर्थ है कि समुदाय विशेष के व्यवहार और कुरान की आयतों की आलोचना गलत है, जबकि दुनिया भर में हो रहे बम धमाकों से लेकर महज़ ढोल बजा कर नाच लेने, या चूड़ी-बिंदी लगा लेने, पर नुसरत जहाँ के खिलाफ़ समुदाय विशेष की नाराज़गी से ऐसा लगता तो नहीं है। लेकिन इतना तो पक्का है कि राजदीप जैसे हिन्दूफ़ोबिक इन्सान को तो इस पर बोलने का कोई नैतिक हक़ नहीं है।

49 हस्तियों के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला, कमल हासन ने सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार

अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन ने मंगलवार को उन 49 हस्तियों के ख़िलाफ़ देशद्रोह मामला चलाए जाने की निंदा की, जिन्होंने मॉब लिंचिंग के दौरान जय श्रीराम नारे का प्रयोग किए जाने वाले घटनाओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला खत लिखा था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि इन 49 हस्तियों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे मुकदमे में हस्तक्षेप करें, और उनके ख़िलाफ़ एफआईआर को निरस्त करें।

कमल हासन ने ट्वीट करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री सांमजस्यपूर्ण भारत की तलाश में हैं। जो संसद में दिए उनके बयान से पुख्ता होता है, लेकिन क्या राज्य और उसके कानून को इसका अनुसरण नहीं करना चाहिए?” उनका कहना है कि प्रधानमंत्री की आकांक्षाओं का खंडन करते हुए उनके 49 साथियों पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है।

कमल हासन का ये बयान ठीक 4 दिन बाद आया है, जब मुजफ्फपुर कोर्ट के आदेश पर इनके ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज हुई। इसी कारण से ही ट्विटर पर कमल हासन ने इन 49 हस्तियों के प्रति अपने संवेदना व्यक्त की और दर्ज एफआईआर की निंदा की। इस दर्ज प्राथमिकी में बता दें कि अपर्णा सेन, अदूर गोपालकृष्णन और इतिहासकार रामचंद्र गुहा जैसे लोगों का नाम भी शामिल है। इसके अलावा इस एफआईआर में तमिल फिल्म निर्माता मणि रत्नम भी का नाम भी है, जिन्होंने जुलाई माह में प्रधानमंत्री को पत्र भेजा था।

इसी के मद्देनजर कमल हासन ने कहा, “मैं एक नागरिक के रूप में अनुरोध करता हूँ कि हमारा सर्वोच्च न्यायालय लोकतंत्र के साथ न्याय करने और बिहार से आने वाले इस मामले को खत्म करने के लिए आगे बढ़े।“

बता दें कि इस एफआईआर के दर्ज होने के बाद हासन से पहले कई जाने-माने लोग इसका विरोध कर चुके हैं। जिनमें कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर और कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का भी नाम शामिल है। इसके अलावा कई मीडिया रिपोर्ट्स इस खबर को ऐसे प्रकाशित कर चुकी है जैसे केंद्र सरकार ही इसके पीछे जिम्मेदार हो। लेकिन बता दें कि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने स्वयं इस मामले पर स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार ने 49 सेलेब्रिटीज के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज नहीं कराई है।

उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष जुलाई महीने में कुछ अभिनेता-अभिनेत्रियों-फिल्मकार-सामाजिक कार्यकर्ता-इतिहासकार समेत विभिन्न क्षेत्रों के 49 हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखा था। इस पत्र में दलित व अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ने का दावा करते हुए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की माँग की गई थी। इस पत्र में लिखा गया था, “अफसोस की बात है कि जय श्रीराम का इस्तेमाल आज उकसाने के लिए किया जा रहा है। यह युद्धोन्मादी और भड़काऊ नारा है। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को राम के नाम पर डराया जा रहा है।”

‘काश, मैं भी चीनी राष्ट्रपति जैसा बन पाता, 500 लोगों को जेल में डाल देता’

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने रश्क जताया है कि वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तरह अपने देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ कदम नहीं उठा पा रहे हैं। उनके मुताबिक वे यह सुनकर बहुत प्रभावित हुए कि चीनी राष्ट्रपति ने पिछले 5 सालों में भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप में 400 के करीब मंत्री-स्तर के अधिकारियों को जेल पहुँचा दिया है। इमरान China Council for Promotion of International Trade के कार्यक्रम में बोल रहे थे। वे फ़िलहाल चीन के दौरे पर हैं।

बड़ा ही ‘स्लो’ है पाकिस्तान वाला सिस्टम

इमरान खान ने अफ़सोस जताया कि पाकिस्तान में भ्रष्टाचारियों को जेल भेजना वाला सिस्टम बहुत ही धीमा चलता है। उन्होंने जिनपिंग की तरह 500 भ्रष्ट लोगों को जेल भेजने की ख्वाहिश जताई। साथ ही पाकिस्तान के चीन से गरीबी उन्मूलन सीखने पर ज़ोर दिया। “मुझे जो चीज़ चीन की सबसे अधिक प्रेरित करती है, वह है पिछले 30 सालों में 70 करोड़ लोगों को गरीबी से उबारना। ऐसा मानव इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ।”  

पाकिस्तान को निवेश-फ्रेंडली बनाने की कर रहे हैं कोशिश

इमरान खान ने दावा किया कि जब से उनकी सरकार सत्ता में आई है, कोशिश देश को निवेशकों के लिए अधिक से अधिक दोस्ताना और लाभदायक बनाने की है। “हम चाहेंगे कि वे पाकिस्तान में लाभ कमाएँ।” उन्होंने साथ में यह भी माना कि भ्रष्टाचार निवेश में सबसे बड़ी रुकावटों में से एक है।

इमरान के पहले पहुँचे बाजवा

इमरान के पहले ही पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा चीन पहुँच गए थे। वहाँ वह न केवल चीन के सैन्य नेतृत्व से मिलेंगे, बल्कि इमरान खान की चीनी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के साथ बैठकों में  भी उनकी शिरकत होगी।