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कॉन्ग्रेस IT सेल: गुजरात के रोहन गुप्ता को कमान, पूर्ववर्ती रम्या की तरह ही रहे हैं ‘कुख्यात’

गुजरात से संबंध रखने वाले रोहन गुप्ता के हाथों अब कॉन्ग्रेस आईटी सेल की कमान होगी। पार्टी ने उन्हें सोशल मीडिया डिपार्टमेंट का नया चेयरमैन बनाया है। इससे पहले वे कॉन्ग्रेस के मीडिया कोऑर्डिनेटर थे।

रोहन से पहले कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया डिपार्टमेंट का काम दक्षिण फिल्मों की अभिनेत्री दिव्या स्पंदना उर्फ रम्या के हाथों में थी। दिव्या स्पंदना ग़लत जानकारियाँ ट्वीट करने और भ्रामक अभियान चलाने के लिए कुख्यात थीं। लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की बुरी हार के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनकी जगह आए रोहन की छवि भी भ्रामक प्रचार अभियान चलाने वाले की ही रही है।

अहमदाबाद से शुरुआती पढ़ाई करने वाले रोहन गुप्ता 2016 से कॉन्ग्रेस के मीडिया पैनलिस्ट हैं। उन्होंने पुणे से एमबीए करने के बाद अपना कारोबार शुरू किया था। उन्हें 2008 में खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्रालय की एडवाजयरी कमेटी का हिस्सा बनाया गया था। उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी। वह गुजरात आईटी सेल की कमान भी सँभाल चुके हैं। 2010 में अहमदाबाद नगर निगम का चुनाव लड़ चुके रोहन गुप्ता को 2013 में कॉन्ग्रेस ने आईटी सेल का ट्रेनिंग एन्ड डेवलपमेंट इंचार्ज बनाया था।

2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान उन पर चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप लगे थे। आयोग के आदेश को दरकिनार करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर पहले चरण के चुनाव के बाद एग्जिट पोल शेयर कर दिया था। इस मामले में सिटी क्राइम ब्रांच के साइबर सेल ने उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। उस समय वह गुजरात कॉन्ग्रेस आईटी सेल के संयोजक थे।

पवार फैमिली में पावर की लड़ाई: ₹25000 करोड़ के घोटाले में फॅंसे शरद भतीजे की लेंगे बलि!

विधानसभा चुनाव की देहरी पर खड़े महाराष्ट्र में राजनीति रोज नई करवट ले रही है। 25,000 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले में नाम आने के बाद शरद पवार ने पहले बिना समन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दफ्तर जाने का राजनीति स्वांग रचा। अब खबर आ रही है कि खुद को पाक-साफ साबित करने के लिए वे अपने भतीजे और राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार को राजनीति से रिटायर करने के फेर में हैं।

बारामती से पॉंच बार विधायक रहे अजित ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा स्पीकर हरिभाऊ बागड़े ने उनका इस्तीफा मिलने की पुष्टि की है। विधानसभा अध्यक्ष ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। टीओआई के मुताबिक एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने दावा किया है कि अजित राजनीति से संन्यास लेकर पारिवारिक बिजनेस पर ध्यान देंगे। हालॉंकि पूरे मामले पर अजित ने खुद रहस्यमयी तरीके से चुप्पी साध रखी है।

इस घटना ने पवार परिवार में सत्ता को लेकर जारी संघर्ष को भी सामने ला दिया है। बताया जाता है कि शरद पवार अपनी बेटी सांसद सुप्रिया सुले को पार्टी का चेहरा बनाना चाहते हैं, जबकि अजित राजनीति में आने के बाद से ही उनका उत्तराधिकारी होने का दावा करते रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों में पवार के हवाले से बताया गया है कि अजित 25,000 करोड़ रुपए के स्टेट कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में नाम आने से आहत हैं। पवार के अनुसार अजित ने न तो इस्तीफे से पहले और न उसके बाद उनसे बात की है। उन्होंने बताया कि मैंने जब उसके बेटे पार्थ से बात की तो उसने बताया कि ‘अजित ने परिवार के सदस्यों से कहा है कि राजनीति से संन्यास लेने का यह उनके लिए सही वक्त है।’

एनसीपी प्रमुख ने कहा, “मैंने कारण जानने के लिए उनके पुत्र और दूसरे लोगों से संपर्क किया और पता चला कि उन्होंने अपने परिवार को बताया कि वह चाचा (शरद पवार) का नाम मामले में आने से बहुत दुखी हैं। इसमें उनका (अजित पवार) नाम भी है। वह इससे बहुत परेशान हैं।”

अजित के बेटे पार्थ ने ट्वीट कर इसे भावुक और मुश्किल वक्त बताया है। उन्होंने पवार के दावे का भी खंडन किया है। उनके मुताबिक राजनीति छोड़ने का उनके पिता का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने राजनीति में जाने को लेकर मुझे सावधान किया है।

एक एनसीपी नेता के मुताबिक जिस तरीके से पार्टी चलाई जा रही उससे अजित दुखी हैं। यही कारण हो कि की ने ईडी कार्यालय जाने के पवार के फैसले के वक़्त भी वे नहीं दिखे थे। एनसीपी के अन्य नेताओं ने भी कहा कि उन्हें अजित के फैसले को लेकर कोई जानकारी नहीं है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। हमें इस्तीफे बारे में जानकारी नहीं है।”

पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में हार चुकी एनसीपी इस वक़्त अपना गढ़ बचाने के लिए जूझ रही है। शरद पवार के अलावा पार्टी के सभी संस्थापक निकल गए हैं। ऐसे में, अजित के जाने से नया संकट खड़ा हो गया है। अजित पवार महाराष्ट्र सरकार में गृह मंत्री रह चुके हैं। एनसीपी में दशकों से वह निर्णायक भूमिका में रहे हैं। वे अपने विवादित बयानों के लिए सुर्ख़ियों में रहे हैं।

अप्रैल 2013 में सूखाग्रस्त इलाक़ों पर टिप्पणी करते हुए अजित पवार ने कहा था, ‘यदि बाँध में पानी नहीं है, क्या हमें उसमें पेशाब करना चाहिए?‘ जब उन्होंने यह बयान दिया था, तब उनके चाचा शरद पवार देश के कृषि मंत्री थे। उन्होंने बिजली को लेकर भी विवादित बयान देते हुए कहा था कि बिजली जाने से ज्यादा बच्चे पैदा होते हैं।

क्या है महाराष्ट्र कोऑपरेटिव घोटाला?

मामला 25,000 करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड से जुड़ा है। ईडी के अनुसार, यह लोन धोखाधड़ी का बहुत बड़ा मामला है और यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप की जा रही है। कई शुगर फैक्ट्रीज को आने-पौने दाम में बेच डाला गया था। कई कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज में काम ठप्प होने लगा था और उन्हें काफ़ी कम दाम पर बेच कर ख़रीदने वालों को फ़ायदा पहुँचाया गया। इस मामले में अजित पवार और बैंक के 70 पूर्व अधिकारियों पर पहले ही मामला दर्ज हो चुका है।

भारतीय सेना ने J&K में जला डाले 400 स्कूल? THE HINDU की संपादकीय (घटिया व धूर्त) तो यही कहती है

‘द हिन्दू’ में 27 सितंबर 2019 के अंक में एक रिपोर्ट छपी है, जिसमें बताया गया है कि साल 1990 से 2005 के बीच जम्मू कश्मीर में 46 स्कूलों पर भारतीय सेना ने कब्जा कर लिया है और 400 स्कूलों को जला दिया गया। यहाँ पर द हिन्दू ने ये तो बताया कि 46 स्कूलों को भारतीय सेना ने अपने कब्जे (संरक्षण) में ले लिया, मगर ये नहीं बताया कि 400 स्कूलों को किसने जलाया? इसके जिम्मेदार कौन हैं? इस वामपंथी मीडिया हाउस ने बड़ी ही धूर्तता से 46 स्कूलों के कब्जे और 400 स्कूलों के जलने की बात को एक ही साथ इस तरह लिखा कि लोगों को लगे कि भारतीय सेना ने 46 स्कूलों को अपने संरक्षण में लेने के साथ ही 400 स्कूल भी जला दिए।

स्कूलों को जलाने वालों के बारे में बोलते हुए उनके शब्द कम पड़ जाते हैं या फिर कलम की स्याही सूख जाती है, ये तो वही बेहतर बता सकते हैं, मगर जिस तरह की धूर्तता से इसे छुपाया गया इससे साफ जाहिर हो रहा है कि वो उन प्रदर्शनकारियों या आतंकवादियों के खिलाफ बात नहीं कर सकते। भारतीय सेना के बारे में बड़े ही स्पष्ट और सीधे शब्दों में लिखा गया है, मगर प्रदर्शनकारियों के बारे में लिखते हुए शब्दविहीन हो गए या फिर यूँ कहें कि ये भी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले गिरोह का हिस्सा बनकर अराजत तत्वों का तुष्टिकरण करना चाहते हैं।

यह पत्रकारिता नहीं, यह शब्दों का धंधा है The Hindu

अब बात करती हूँ प्रदेश में भारतीय सेना द्वारा संचालित किए जाने वाले 46 स्कूलों की स्थिति के बारे में। उस समय प्रदर्शनकारियों द्वारा 400 स्कूलों को जला दिए जाने से बच्चों और अभिभावकों के अंदर दहशत इस कदर हावी हो गई थी कि ना तो बच्चे स्कूल जाने को राजी थे और न ही अभिभावक उन्हें स्कूल भेजने के पक्ष में थे। उन्हें अपने बच्चों की जान की चिंता लगी रहती थी। मगर इस बीच भारतीय सेना ने घर-घर जाकर बच्चों और अभिभावकों को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया और सुरक्षा का विश्वास दिलाया। सेना की ये कोशिश कामयाब हुई और आज हालात ये है कि इनके द्वारा संचालित किए जा रहे इन स्कूलों में 15000 के करीब छात्र हैं और तकरीबन 1000 टीचिंग और नन टीचिंग स्टाफ हैं। ये इन बच्चोंं के बेहतर और सुरक्षित भविष्य के लिए निरंतर मार्गदर्शन कर रहे हैं।

इनके सही मार्गदर्शन का ही नतीजा है कि सीबीएसई 2019 की 10वीं परीक्षा में 100 प्रतिशत बच्चों ने सफलता हासिल की। रजौरी के छात्र हिताम अयूब ने 94.2% अंकों के साथ सफलता प्राप्त की। इन स्कूलों ने लगातार आधुनिक शिक्षण सहायक उपकरण जैसे डिजिटल क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशाला, अच्छी तरह से स्टॉक की गई लाइब्रेरी और खेल संबंधी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के विकास में सकारात्मक योगदान देने का लगातार प्रयास किया है।

सेना के संरक्षण और मार्गदर्शन में राज्य की शिक्षा औऱ सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती जा रही है, लेकिन छद्म लिबरल मीडिया गिरोह इस सकारात्मक पहलू की रिपोर्टिंग करना पसंद नहीं करते। वो तो बस प्रोपेगेंडा को हवा देने के मौके ढूँढ़ते रहते हैं। कभी पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग का चश्मा उतार कर देखें, तो शायद इन्हें भी सच नज़र आ जाए।


कार्टूनिस्ट के लिए मसाला जुटा खुद का मजाक उड़वा रहे इमरान खान: राजनाथ सिंह

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर राग अलापने को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि इमरान खान दरवाजे-दरवाजे जाकर कार्टूनिस्टों को मसाला दे रहे हैं। उड़वाने का कोई भी मौका वे छोड़ नहीं रहे।

शनिवार (सितंबर 28, 2019) को मुंबई में माझगांव डॉक्स में भारत की दूसरी ‘स्कॉर्पीन-क्लास अटैक’ पनडुब्बी के शामिल होने के अवसर पर राजनाथ सिंह ने यह टिप्पणी की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाक पीएम की ओर से दिए गए भाषण का जिक्र करते हुए उनकी खूब चुटकी ली। रक्षा मंत्री ने कहा कि इमरान अपना और अपने देश का मजाक उड़वाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे।

राजनाथ सिंह ने कहा, “जम्मू-कश्मीर में हमारे प्रगतिशील कदमों को वैश्विक समर्थन मिल रहा है, वहीं पाकिस्तानी प्रधानमंत्री दर-दर पर जाकर कार्टूनिस्टों के लिए कंटेट क्रिएट करने का काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की हालिया अमेरिकी यात्रा ने एक महाशक्ति के रूप में भारत के उद्भव को प्रदर्शित किया। हमने देखा कि कैसे अमेरिका के शीर्ष नेताओं ने लोगों से खचाखच भरे स्टेडियम में हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी का स्वागत किया।”

आगे उन्होंने कहा, “पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि आज हमारी सरकार के मजबूत संकल्प और नौसेना के बेड़े में पनडुब्बी आईएनएस खंडेरी के शामिल होने के साथ हम उसे और भी बड़ा झटका देने में सक्षम हैं।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि ये बेहद गर्व की बात है कि भारत उन चुनिंदा देशों में है जो अपनी पनडुब्बियों का निर्माण खुद कर सकता है। उन्होंने पाक पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ ऐसी ताकतें हैं, जिनकी हरकतें नापाक हैं। वे साजिश रच रहे हैं कि समंदर के रास्ते मुंबई के 26/11 जैसा एक और हमला भारत के तटीय क्षेत्र में कर सकें। लेकिन उनके मंसूबे किसी भी सूरत में पूरे नहीं होंगे।

J&K के सभी 22 जिले प्रतिबंध मुक्त, घाटी के 105 थाना क्षेत्रों में अब दिन के समय पाबंदी नहीं

कश्मीर के सभी 105 थाना क्षेत्रों में दिन के समय प्रतिबन्ध हटा दिया गया है। इसके साथ ही राज्य के सभी 22 जिले पाबन्दी मुक्त हो गए हैं और हालात सामान्य हैं। बता दें कि सुरक्षा-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जम्मू-कश्मीर में चौकसी बढ़ाई गई थी और एहतियातन कुछ प्रतिबन्ध लगाए गए थे। ताज़ा सूचना के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के किसी भी थाना क्षेत्र में या किसी भी जिले में दिन के समय किसी भी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं रहेगा। इससे जनजीवन सामान्य होने में और मदद मिलेगी।

पकिस्तान दावा करता रहा है कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में कर्फ्यू लगा हुआ है। ख़ुद पाक पीएम इमरान ख़ान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कह चुके हैं कि जम्मू कश्मीर में ‘कर्फ्यू हटते ही’ काफ़ी ख़ून-ख़राबा होगा। हालाँकि, जम्मू-कश्मीर में माहौल सामान्य बनाने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है और कश्मीरी पुलिस अधिकारियों ने लोगों को अफवाह फैलाने वालों से सावधान रहने की सलाह दी है।

जम्मू-कश्मीर पर अफवाह फैलाने वालों में कई अन्तरराष्ट्रीय न्यूज़ पोर्टल्स भी शामिल हैं और कई बार उनके प्रोपगेंडा की पोल खुल चुकी है। अब दिन के समय प्रतिबंधों के हटते ही जम्मू-कश्मीर में आम जनजीवन पूरी तरह सामान्य हो जाएगा। अनुच्छेद 370 पर सरकार के निर्णय के बाद राज्य के कई नेताओं व अलगाववादियों को पुलिस ने या तो हिरासत में ले रखा है, या नज़रबंद रखा गया है।

कुरान पढ़ाने के नाम पर मदरसा में यौन शोषण, 300 छुड़ाए गए, जंजीर से बँधे थे

दीनी तालीम के नाम पर चलने वाले मदरसे कैसे यौन शोषण के अड्डे बन चुके हैं इसकी एक भयावह तस्वीर अफ्रीकी देश नाइजीरिया से आई है। यहॉं एक आवासीय इस्लामिक स्कूल से 300 बच्चों और पुरुषों को मुक्त कराया गया है। इनलोगों को जंजीरों से बॉंधकर रखा जाता था और हर तरीके से प्रताड़ना दी जाती थी।

प्रताड़ना का आलम यह था कि उन्हें कई दिनों तक भूखा रखा जाता था और उनका यौन शोषण किया जाता था। कडुना क्षेत्र के इस इस्लामिक स्कूल में छात्रों को कई सालों से बंधक बना कर रखा गया था। आरोपितों में मदरसे के मौलवी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। वे छात्रों का बलात्कार करते थे

पुलिस ने गुरुवार (सितम्बर 26, 2019) को इस इस्लामिक स्कूल पर छापा मारा और पाया कि छात्रों को अमानवीय तरीके से जानवरों से भी बदतर स्थिति में रखा गया था। पुलिस ने बताया कि इन छात्रों को कुरान की शिक्षा देने के नाम पर यहाँ रखा गया था और इस्लामिक स्कूल उनके सुधार के लिए ऐसा करने का दावा करता था। इस कैम्पस को ‘हाउस ऑफ टॉर्चर’ भी कहा जा रहा है। यहाँ स्थित एक ‘टॉर्चर चैंबर’ में छात्रों को जंजीर से बाँध कर लटका दिया जाता था और फिर उनकी पिटाई की जाती थी।

यह इस्लामिक स्कूल पिछले एक दशक से चल रहा था। छात्रों के परिवार यहाँ अपने बच्चों को कुरान की शिक्षा देने और ड्रग्स वगैरह जैसी लत छुड़ाने के लिए लेकर आते थे। शिक्षक व स्कूल के अन्य कर्मचारी छात्रों से जबरन समलैंगिक सम्बन्ध स्थापित करते थे। नाइजीरिया की पुलिस ने इसे ‘ह्यूमन स्लेवरी’ का मामला करार दिया है। पीड़ितों में न सिर्फ़ बच्चे बल्कि कई व्यस्क छात्र भी शामिल हैं। कई छात्रों के शरीर पर पिटाई के निशान मिले। पुलिस ने इस मामले में इस्लामिक स्कूल के संचालक सहित 7 आरोपितों को गिरफ़्तार किया है।

पुलिस ने कहा कि 9 वर्ष या उससे कम उम्र के 100 छात्र जंजीर से बँधे मिले। मदरसे के अनुसार, वह उन्हें ‘जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए’ ऐसा कर रहा था। एक 42 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि वह यहाँ अप्लाइड मैथ्स पढ़ने के लिए आया था लेकिन उसे कई दिनों तक जंजीरों में बाँध कर रखा गया। पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने कई छात्रों को प्रताड़ना के कारण दम तोड़ते हुए भी देखा है। नाइजीरिया के ग्रामीण इलाक़ों में इस्लामिक स्कूलों का ही वर्चस्व है, क्योंकि वहाँ सरकारी सुविधाओं का अभाव है।

सभी छात्रों को नाइजीरिया के प्रशासन ने एक कैम्प में रखा हुआ है और उनके माता-पिता को खोजने की कोशिश जारी है। यहाँ तक कि नाइजीरिया के कई इस्लामिक स्कूलों पर बच्चों से भीख मँगवाने के भी आरोप लगते रहे हैं। वहाँ की इस्लामिक स्कूलों पर बच्चों का यौन शोषण करने के आरोप पूर्व में भी लगते रहे हैं।

PM इमरान ख़ान नियाज़ी! 1947 से 71 और 2019 तक आपके 16 गुनाह: महिला IFS अधिकारी ने धो डाला

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दिए गए भड़काऊ भाषण का भारत ने करारा जवाब दिया है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इमरान ख़ान के दिए गए भाषण को हेट स्पीच करार देते हुए कहा कि उन्होंने वैश्विक मंच का दुरुपयोग कर दुनिया को गुमराह करने का काम किया है। भारत ने इमरान के ‘नस्लीय संहार’ ‘ब्लड बाथ’ ‘नस्लीय सर्वोच्चता’ ‘बंदूकें उठा लो’, ‘आख़िर तक लड़ेंगे’ जैसे शब्दों को गिनाते हुए कहा कि यह उनकी मानसिकता को उजागर करता है।

इमरान खान के भाषण पर भारत का जवाब

विदेश मंत्रालय की प्रथम सचिव (फर्स्ट सेक्रेटरी) विदिशा मैत्रा ने सवाल किया कि क्या पाकिस्तान यह स्वीकार करेगा कि वो दुनिया की एकमात्र सरकार है, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित सूची में सूचीबद्ध अल-क़ायदा और दाएश के आतंकियों को पेंशन प्रदान करता है? पिछले हफ्ते पाकिस्तान ने मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले के आरोपी हाफ़िज़ सईद को मासिक पेंशन जारी करने की अनुमति देने के लिए UNSC में गुहार लगाई थी।

मैत्रा ने सवाल किया कि क्या पाकिस्तान इस बात से इनकार कर सकता है कि वो संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादियों का घर है? उन्होंने कहा,“क्या पाकिस्तान के पीएम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध 130 आतंकवादी और 25 आतंकवादी संस्थाओं की शरणस्थली है?”

सचिव विदिशा ने सवाल किया कि क्या पाकिस्तान इस बात से इनकार करेगा कि 27 में से 20 पैरामीटर्स के उल्लंघन के चलते फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फ़ोर्स ने उसे नोटिस दे रखा है? क्या पीएम इमरान ख़ान न्यू यॉर्क शहर से इनकार करेंगे कि वो ओसामा बिन लादेन का खुले तौर पर बचाव करते रहे हैं?

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने पाकिस्तान पर एक के बाद एक कई सवाल दागे और कहा कि इमरान ख़ान अपने झूठ से मानवाधिकारों का चैंपियन बनना चाहते हैं, जबकि असलियत यह है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय पर आए दिन अत्याचार हो रहे हैं। विदिशा मैत्रा ने कहा कि पीएम इमरान ख़ान नियाज़ी को यह नहीं भूलना चाहिए कि 1971 में पाकिस्तान ने अपने ही लोगों पर ज़ुल्म ढाए थे और इस वजह से बांग्लादेश का जन्म हुआ था। विदिशा ने कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जहाँ अल्पसंख्यक समुदाय 1947 में 23% से घटकर अब 3% तक रह गया है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में ईसाई, सिख, अहमदिया, हिन्दू, शिया, पश्तून, सिंधी और बलूचों पर ईश निंदा क़ानून के तहत अत्याचार किया जाता है। वहाँ लोग जबरन धर्मांतरण के शिकार हो रहे हैं।

मैत्रा ने कहा, “किसी ऐसे व्यक्ति के लिए, जो कभी क्रिकेटर था और जेंटलमैन के खेल में विश्वास रखता था, उसका आज का भाषण दारा आदम खेल (Darra Adam Khel, पाकिस्तान की वो जगह जो अवैध बंदूकों का बाजार है) के बंदूकों और बर्बरता की याद दिलाता है।”

संयुक्त राष्ट्र को अनुच्छेद-370 के फ़ैसले की सच्चाई से अवगत कराते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत के पुराने क़ानून को हटाए जाने पर पाकिस्तान ग़लत बातें फैला रहा है। उन्होंने कहा कि भारत, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को मुख्यधारा में शामिल करना चाहता है। भारत के लोगों को किसी भी दूसरे देश ख़ासतौर पर जिसने नफ़रत की विचारधारा से आतंकवाद की फैक्ट्री बनाई है, उसकी तरफ से सलाह या नसीहत लेने की ज़रूरत नहीं है।

ग़ौरतलब है कि कल रात (27 सितंबर), UNGA को संबोधित करते हुए, पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान ने भारत के ख़िलाफ़ ज़हर उगला था। इतना ही नहीं उन्होंने आवंटित समय-सीमा को भी पार कर दिया (उन्हें 15-20 मिनट का समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने 30 मिनट से अधिक का समय लिया) ख़ान ने अनुच्छेद-370 के निरस्त होने पर भारत-विरोधी प्रचार किया।

INX मीडिया मामला: नीति आयोग की पूर्व CEO सिंधुश्री सहित 4 अधिकारियों पर भी चलेगा मुकदमा

केंद्र सरकार ने INX मीडिया मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को चार अधिकारियों के खिलाफ मुक़दमा चलाने की अनुमति दे दी है। इनमें नीति आयोग की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सिंधुश्री खुल्लर शामिल हैं। अन्य अधिकारयों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के पूर्व सचिव अनूप के पुजारी, वित्त मंत्रालय में निदेशक रहे प्रबोध सक्सेना और आर्थिक मामले विभाग के पूर्व अवर सचिव रबींद्र प्रसाद शामिल हैं। ये सभी कथित रूप से INX मीडिया के विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड मंज़ूरी की प्रक्रिया में शामिल थे।

इस मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम आरोपित हैं। नीति आयोग की पूर्व CEO सिंधुश्री खुल्लर केंद्रशासित प्रदेश (UT) कैडर की 1975 बैच की अधिकारी हैं। वे 2004-2008 के दौरान आर्थिक मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव के पद पर थीं। रिकॉर्ड के अनुसार, उन्हें विभाग में विशेष सचिव के रूप में प्रोन्नत किया गया और वह उस पद पर 12 सितंबर 2008 से दो नवंबर 2008 तक रहीं। खुल्लर 2015 में नीति आयोग की पहली CEO नियुक्त की गई थीं।

CBI ने 22 जनवरी को चार अधिकारियों के ख़िलाफ़ फ़ौजदारी का मुक़दमा दर्ज करने की माँग की थी। इससे पहले CBI ने INX मीडिया मामले में गिरफ़्तार पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम का नीति आयोग की पूर्व CEO सिंधुश्री से आमना-सामना करवाया था। CBI ने चिदंबरम की रिमांड के दौरान खुल्लर से लगातार दो दिन पूछताछ की गई थी। खुल्लर ने कथित तौर पर CBI को बताया था कि वो केवल आदेशों का पालन कर रही थी।

जाँच एजेंसी का आरोप है कि विदेशी निवेश के लिए INX मीडिया को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) मंज़ूरी देने में अनियमितताएँ बरती गई थी। जून में, केंद्रीय सतर्कता आयोग ने भ्रष्टाचार के एक मामले में कथित संलिप्तता के लिए खुल्लर के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने के लिए मंत्रालयों से मंज़ूरी भी माँगी थी।

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों सुनवाई के दौरान पी चिदंबरम को कोर्ट से बड़ा झटका लगा था। कोर्ट ने उनकी न्यायिक हिरासत को 3 अक्टूबर तक बढ़ा दिया था। बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता पाँच सितंबर से न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं।

विधानसभा चुनाव में किसे टिकट, किसे नहीं… कॉन्ग्रेस पार्टी की टेंशन, राहुल गाँधी करेंगे Chill!

अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के उम्मीदवारों के चयन में पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की कोई भूमिका नहीं होगी। राहुल, जिन्होंने इस साल के आम चुनावों में पार्टी की हार (बहुत बुरी वाली हार) की ज़िम्मेदारी लेने के बाद कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था, उन्होंने उम्मीदवार चयन बैठकों में भाग लेने व बैठकों में लिए गए निर्णयों में शामिल होने से ख़ुद को अलग कर लिया है।

उनकी टीम के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर हिंदुस्तान टाइम्स को यह बताया कि आगामी विधानसभा चुनावों में राहुल गाँधी टिकट वितरण की प्रक्रिया में शामिल नहीं होना चाहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें लगता है कि इस संदर्भ में राज्य के नेताओं के परामर्श से पार्टी ही बेहतर निर्णय ले सकती है। ख़बर के अनुसार, राहुल ने कॉन्ग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की दो बैठकों में शिरक़त भी नहीं की। जिनमें से एक पिछले गुरुवार (26 सितंबर) को थी। हालाँकि आपको जानकर आश्चर्य होगा कि वो साल 2010 से ही वो CEC के सदस्य हैं।

राहुल गाँधी के बारे में हालाँकि कार्यकर्ताओं का मानना है कि वो अभी भी चुनाव प्रचारक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। कॉन्ग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य केएच मुनियप्पा ने कहा,

”राहुल ने नैतिक आधार पर काम छोड़ दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह चुनाव प्रक्रिया में भाग नहीं ले रहे हैं। वास्तव में, वह पहले से कहीं अधिक मज़बूत अभियान चलाने में हमारी मदद कर रहे हैं।”

वहीं, अकादमिक और लेखक नीरा चंदोके का कहना है कि राहुल के बिना कॉन्ग्रेस को संगठनात्मक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसा लगता है कि राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस की नीति या फैसले लेने संबंधी मामलों से दूरी बना ली है। क्योंकि राजनीति तो उन्होंने छोड़ी नहीं है। अभी पिछले महीने ही वो अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड गए थे। हालाँकि उनका दौरा किसी और कारण से तब सुर्खियों में रहा था। उस दौरे पर उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक लड़के को राहुल गाँधी को Kiss करते हुए देखा गया था। ANI द्वारा शेयर किया गया यह वीडियो काफ़ी वायरल हुआ था।

दरअसल, केरल में बाढ़ राहत कार्यों का जायजा लेने अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड पहुँचे राहुल गाँधी को एक अजीब स्थिति का सामना करना पड़ा था। वीडियो में आप देख सकते हैं कि अपनी कार में बैठकर मीडिया से बात कर रहे राहुल गाँधी के पास अचानक एक लड़का पहुँचा और उनको Kiss कर लिया। लड़के की इस हरक़त के बाद राहुल गाँधी के चेहरे पर भी मुस्कुराहट आ गई थी।


गोरखपुर ऑक्सीजन कांड: डॉ कफील को नहीं मिली है क्लीन चिट, बकलोल मीडिया कर रही गलत रिपोर्टिंग

यूपी के गोरखपुर स्थित बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज (बीआरडी) अस्पताल में दो साल पहले ऑक्सीजन की कमी से 60 बच्चों की मौत के मामले में निलंबित डॉ कफील खान को पूरी तरह से क्लीन चिट नहीं मिली है। उन्हें गोरखपुर मेडिकल कालेज में प्रवक्ता और राजकीय चिकित्सक होते हुए प्राइवेट प्रैक्टिस करने का दोषी पाया गया है। वहीं अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन से संबंधित आरोपों की जाँच की जा रही है।

शासन ने डॉ कफील खान को दोषी बताए जाने के साथ ही स्पष्ट किया है कि कफील खान खुद को क्लीन चिट देने की भ्रामक व्याख्या कर रहे हैं। अभी भी उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही में अंतिम फैसला होना बाकी है। शासन का तर्क है कि अभी तक इस प्रकरण में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है इसलिए खुद को क्लीन चिट मिलने की खबर बताना गलत ही नहीं अनुशासनहीनता के दायरे में भी आता है। बता दें कि डॉ कफील खान फिलहाल जमानत पर हैं और वो अपने ट्विटर से योगी सरकार द्वारा खुद को निर्दोष करार देने का दावा कर रहे हैं।

डॉ कफील खान पर आरोप लगा था कि मेडिकल कॉलेज में प्रवक्ता के पद पर नियुक्त होने के बाद भी उन्होंने प्राइवेट प्रैक्टिस जारी रखी और चिकित्सीय लापरवाही बरती। जाँच अधिकारी ने इस आरोप पर लिखा है कि डॉ कफील नियमों और शर्तों का उल्लंघन कर मेडिस्प्रिंग हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर रुस्तमपुर (गोरखपुर) में प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे थे। डॉ कफील खान इस आरोप पर समुचित जवाब नहीं दे सके और उन्हें आरोप में दोषी पाया गया।

डॉ कफील पर लगे आरोप व जाँच की कॉपी-1

इसके अलावा, कफील खान को घटना के समय मौजूद होने के बावजूद ऑक्सीजन गैस की कमी के संबंध में उच्चाधिकारियों को सूचित नहीं करने के संबंध में आरोपित किया गया था। हालाँकि, इस मामले में वो दोषी नहीं पाए गए हैं। डॉ कफील खान ने उच्चाधिकारियों से बात के संबंध में फोन कॉल डिटेल्स और 7 सिलेंडर उपलब्ध कराने के साक्ष्य प्रस्तुत किए थे।

डॉ कफील पर लगे आरोप व जाँच की कॉपी-2

साथ ही डॉ कफील पर बाल रोग जैसे संवेदनशील विभाग में दी जाने वाली सुविधाओं, उपचार तथा स्टाफ आदि के प्रबंधन एवं नियंत्रण संबंधी उत्तरदायित्वों का निर्वहन नहीं करने का आरोप लगा था। जाँच के दौरान यह आरोप सही नहीं पाए गए हैं।

गौरतलब है कि गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के डॉ कफील को 10 अगस्त 2017 को ऑक्सजीन की कमी की वजह से 60 बच्चों की मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए गिरफ्तार और निलंबित किया गया था। इस कांड में कॉलेज के प्राचार्य समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।