Home Blog Page 5466

PM मोदी ने तमिल में पत्र भेजकर कहा- Happy Birthday, तिहाड़ में बंद चिदंबरम ने कहा- अभिभूत हूँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम को तमिल भाषा में पत्र लिख कर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएँ दी हैं। पी चिदंबरम के कहने पर उनके परिवार ने पूर्व केंद्रीय मंत्री के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस पत्र को शेयर किया। पत्र के साथ चिदंबरम का मोदी को जवाब भी आया। पी चिदंबरम का जन्मदिन पिछले सोमवार (सितम्बर 16, 2019) को था। कई कॉन्ग्रेस नेताओं ने उन्हें जन्मदिवस की शुभकामनाएँ दी थीं। कॉन्ग्रेस के उनके साथियों ने भाजपा पर चिदंबरम को फँसाने का आरोप लगाया था।

पी चिदंबरम ने ट्विटर पर लिखा कि वह अपने जन्मदिन पर पीएम मोदी द्वारा बधाई पत्र पाकर अभिभूत हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने लिखा कि वह पीएम मोदी की इच्छा के मुताबिक जनता की सेवा करना चाहते हैं लेकिन उनकी राह में मोदी सरकार की जाँच एजेंसियाँ आ रही हैं। देखिए चिदंबरम का ट्वीट और पीएम मोदी द्वारा भेजा गया पत्र:

पी चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया मामले में अभी तिहार जेल में बंद हैं। इससे पहले उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की कस्टडी में भेज दिया था। चिदंबरम ने ख़ुद के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा कि वह जल्द लौटेंगे।

Extramarital Sex को गैर क़ानूनी बनाना चाहती है सरकार, विरोध में सड़कों पर हज़ारों छात्र

इंडोनेशिया में consensual extramarital sex (आपसी सहमति से बने विवाहेतर यौन संबंधों) को क़ानूनी अपराध बनाने के लिए लाया जा रहा अधिनियम छात्रों के बीच रोष और हिंसा का कारण बन गया है। हज़ारों युवा सड़कों पर उतर कर इसका विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा सरकार द्वारा समलैंगिक सेक्स, महिला की गर्भपात में सहायता को अवैध घोषित करने, राष्ट्रपति का अपमान करने को जुर्म बनाने और भ्रष्टाचार-विरोधी कानूनों को कमज़ोर करने की कोशिश का भी छात्र पुरज़ोर विरोध कर रहे हैं। CNN के मुताबिक विरोध प्रदर्शनकारी राजधानी जकार्ता में इतनी बड़ी तादाद में मौजूद हैं कि करीब 18,000 पुलिस वाले केवल राष्ट्रीय संसद की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं। इन कानूनों की वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार संगठनों द्वारा आलोचना हो रही है।

एक हफ़्ते टले विधेयक

इतने विरोध प्रदर्शनों का कुल असर इतना ही पड़ा है कि सरकार ने इन कानूनों को पास कराए जाने को अगले संसद सत्र तक के लिए टाल दिया है, जब नई संसद का गठन और शपथ-ग्रहण होगा। लेकिन यह कोई बहुत बड़ी राहत नहीं है। अक्टूबर के प्रारंभ में ही नई संसद को शपथ लेनी है।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने इस कानूनों पर मत-विभाजन को फ़िलहाल टाल दिया है। इसके साथ ही उन्होंने यह माना कि प्रस्तावित विधेयकों के कुछ हिस्सों का “और गहराई से अध्ययन किए जाने” की आवश्यकता है। उन्होंने अपने कानून और मानवाधिकार मंत्री यासोना लाओली से जनता के विचार जानने को कहा है।

‘उपनिवेशी हैं वर्तमान कानून, अभी वाले हमारी जीवनशैली पर आधारित’

वहीं कानून और मानवाधिकार मंत्री लाओली का कहना है कि वर्तमान कानून उन्हें गुलाम बनाने वाली औपनिवेशिक ताकत डचों द्वारा दिए गए हैं। उनके 100 साल पुराने दंड विधान की जगह पर आ रहे नए कानून इंडोनेशिया के लोगों की वर्तमान जीवन शैली के अधिक करीब होंगे। यह प्रस्तावित नई दंड संहिता दशकों से बनाई जा रही है।

SC का फैसला मानने से इनकार: चर्च पर नियंत्रण को लेकर भिड़े जैकोबाइट और ऑर्थोडॉक्स ईसाई

केरल के एक चर्च पर नियंत्रण को लेकर ईसाई समुदायों की लड़ाई खत्म होती नहीं दिख रही। एर्नाकुलम ज़िले के पिरवोम स्थित सेंट मेरी चर्च का संचालन हाथ में लेने के लिए जैकोबाइट ईसाई और ऑर्थोडॉक्स ईसाई एक-दूसरे से लड़ रहे हैं।

चर्च फिलहाल जैकोबाइट ईसाइयों के नियंत्रण में है। 3 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने चर्च का प्रशासन ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों को देने का निर्देश दिया था। इस आदेश के कारण 1,100 चर्च का नियंत्रण ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों के पास चला गया था।

बुधवार (सितम्बर 25, 2019) को जब ऑर्थोडॉक्स ईसाई चर्च में पहुँचे और उन्होंने प्रार्थना के बाद चर्च का नियंत्रण अपने हाथ में लिया तो जैकोबाइट ईसाई समूह के लोग वहाँ पर पहुँच गए। कुछ मेट्रोपोलिटन पादरी उनका नेतृत्व कर रहे थे। वे सभी नारे लगा रहे थे और प्रार्थनाएँ कर रहे । वे हंगामा करते हुए चर्च के अंदर दाखिल हुए और में गेट पर ताला जड़ दिया। उन्होंने चर्च का नियंत्रण ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों को देने से इनकार करते हुए कहा कि सुलह के लिए बातचीत होनी चाहिए।

तनाव को देखते हुए चर्च के सामने भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फायर ब्रिगेड को भी मुस्तैद रखा गया है। चर्च कंपाउंड के गेट के सामने ऑर्थोडॉक्स गुट के लोग टेंट लगा कर डट गए और कहा कि अगर उन्हें आधिकारिक रूप से चर्च का नियंत्रण हस्तांतरित नहीं किया गया तो वे प्रदर्शन करेंगे। जैकोबाइट ईसाईयों ने कहा कि चर्च के 2500 श्रद्धालु हैं, उन सभी का आधिकारिक कब्रगाह भी यही पर स्थित है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना स्थानीय लोगों से बातचीत किए ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों द्वारा बाहर से अपने लोग बुला कर जबरन चर्च पर कब्ज़ा करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों के 4 पादरी ही यहाँ आकर प्रार्थना कर सकते हैं, लेकिन वो यहाँ मेट्रोपोलिटन पादरियों के साथ बाहर के लोग लेकर आ धमके हैं। जैकोबाइट समुदाय के मीडिया इंचार्ज डॉक्टर कुरियाशोके ने कहा कि चर्च के हज़ारों श्रद्धालुओं को अपना घर छोड़ने को मजबूर किया जा रहा है। वहीं ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1934 में बने चर्च के संविधान के अनुसार फ़ैसला लिया है।

केरल में इस तनाव को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। राज्य में उपचुनाव होने हैं और नेतागण दोनों ही समुदायों की जनसंख्या को देखते हुए उन्हें अपनी तरह लुभाने में लगे हैं। जैकोबाइट पादरियों ने आरोप लगाया है कि ऑर्थोडॉक्स ईसाई मानवाधिकार उल्लंघन कर रहे हैं। जैकोबाइट ईसाई ने विरोध में धरना दिया, जिसमें केरल सरकार और विपक्ष के कई नेता शामिल हुए। जैकोबाइट धड़े ने आरोप लगाया कि ऑर्थोडॉक्स उनके मृत रिश्तेदारों की अंतिम क्रिया में भी बाधा पहुँचा रहे हैं और यहाँ तक कि मरे हुए लोगों को भी शांति से नहीं रहने दे रहे।

इसी मामले में केरल हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जाते हुए यथास्थिति बहाल रखने का निर्णय दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उच्च न्यायालय को उच्चतम न्यायालय के आदेश के साथ छेड़छाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने जोड़ा था कि केरल के जजों को यह बताया जाना चाहिए कि वे भी भारत के ही अंग हैं। एक बुजुर्ग महिला की मृत्यु के बाद चर्च के ऑर्थोडॉक्स गुट ने परिवार की बात न मानते हुए जैकोबाइट पादरी से अंतिम क्रिया-कर्म की प्रक्रिया संपन्न कराने से मना कर दिया था, जिसके बाद दोनों गुट भिड़ गए थे।

तेल संयंत्रों पर ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने कहा- आतंकवाद से मुकाबले के लिए बढ़ाएगा भारत के साथ सहयोग

सउदी अरब ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का सहयोग करने की बात कही है। सऊदी अरब ने ये बातें अपने तेल संयंत्रों पर ड्रोन और मिसाइल हमले के करीब दो सप्ताह बाद कही है। जानकारी के मुताबिक, अब सऊदी अरब आतंकी नेटवर्क तक धन को पहुँचने से रोकने के साथ ही खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी रोक लगाने में मदद करेगा।

सऊदी राजदूत डॉक्टर सऊद बिन मोहम्मद अल सती ने कहा, “सऊदी अरब और भारत आतंकवाद से लड़ने में घनिष्ठ रूप से एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं, जिसमें सूचनाओं और खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान शामिल है।” 

बता दें कि, पिछले दो वर्षों में दोनों देशों ने प्रत्यर्पण संधि सहित सुरक्षा के क्षेत्र में कई समझौते किए हैं। सऊदी राजदूत ने कहा, “सऊदी अरब आतंकवाद, आतंक के वित्तपोषण और चरमपंथ के खिलाफ वैश्विक अभियान की अगुवाई कर रहा है। हम आईएसआईएस का मुकाबला करने के लिए 68 देशों के मजबूत वैश्विक गठजोड़ के संस्थापक सदस्य हैं।”

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, भारत को एक घनिष्ठ दोस्त और ‘रणनीतिक साझेदार’ के रूप में महत्व देता है। दोनों देशों के बीच रक्षा तथा सुरक्षा सहयोग को और अधिक बढ़ाया जाएगा।

गौरतलब है कि, 14 सितंबर को सऊदी अरब स्थित दुनिया के सबसे बड़े तेल संयंत्र पर ड्रोन और मिसाइलों से सिलसिलेवार तरीके से हमले किया गया था। वैश्विक तेल बाजार पर भी इसका गंभीर असर पड़ा था। इस हमले की जिम्मेदारी यमन के हूती आतंकी समूह ने ली थी।

भारत ने सऊदी अरब में तेल संयंत्रों पर हुए हमलों की सोमवार (सितंबर 15, 2019) को निंदा की और हर तरह के आतंकवाद का विरोध करने के अपने संकल्प को दोहराया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, “हम सऊदी अरब के अबकैक तेल संयंत्र और खुरैस तेल क्षेत्र में 14 सितंबर 2019 को हुए हमलों की निंदा करते हैं।”

क्या एक फोन कॉल के लिए जाएगी ट्रंप की कुर्सी: महाभियोग की प्रक्रिया शुरू

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। निचले सदन ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने मंगलवार (सितंबर 24, 2019) को इसका ऐलान किया। ट्रंप पर आरोप है कि अपने राजनीति प्रतिद्वंदी को दबाने के लिए उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर अपने विदेशी समकक्ष से मदद हासिल करने की कोशिश की।

मीडिया खबरों की मानें तो पेलोसी ने कहा कि ट्रम्प ने अपने डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन को नुकसान पहुँचाने के लिए विदेशी ताकतों का इस्तेमाल कर अपने पद की शपथ का उल्लंघन किया। उन्होंने ट्रंप के ख़िलाफ़ इस महाभियोग का ऐलान करने के दौरान बताया कि ट्रम्प के कार्यकाल में हुई कार्रवाइयाँ राष्ट्रपति के उनके पद की शपथ के प्रति बईमानी, हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन और चुनाव की अखंडता के साथ विश्वासघात को दर्शाती हैं। उन्होंने आगे कहा, “इसलिए मैं घोषणा करती हूँ कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स महाभियोग की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर रहा है।”

इस विवाद के जड़ में एक फोन कॉल है। बताया जाता है कि इसी साल जुलाई में ट्रंप ने अपने यूक्रेनी समकक्ष व्लोदीमीर जेलेंस्की से बात की और उन पर जो बाइडन के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार की जाँच शुरू करने का दवाब डाला। बाइडन के आगामी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप के खिलाफ डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार होने की संभावना जताई जा रही है। ट्रंप ने आरोपों का खंडन किया है। हालाँकि यह माना है कि उन्होंने अपने राजनैतिक प्रतिद्वंदी के बारे में यूक्रेन के राष्ट्रपति से चर्चा की थी।

गौरतलब है कि अमेरिका में आज तक कोई राष्ट्रपति महाभियोग की प्रक्रिया के जरिए नहीं हटाया गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ट्रंप के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास हो सकता है। लेकिन, सीनेट में इसे पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जहाँ रिपब्लिकन का पलड़ा भारी है।

हम पाकिस्तान से तो बात कर सकते हैं, लेकिन ‘टेररिस्तान’ से नहीं, जिहाद नीति नहीं हो सकता: विदेश मंत्री

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान से वार्ता करने के बारे में कहा कि हिंदुस्तान को पाकिस्तान से बात करने में वैसे तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से ‘टेररिस्तान’ बन चुका है। उन्होंने पाकिस्तान पर कश्मीर में जिहाद का बाकायदा ‘उद्योग’ स्थापित करने का आरोप भी लगाया। “हिंदुस्तान को पाकिस्तान से बात करने में कोई समस्या नहीं है। लेकिन हमें ‘टेररिस्तान’ से बात करने में समस्या है। और उन्हें (बात करने के लिए) पाकिस्तान होना पड़ेगा, टेररिस्तान नहीं।”

‘आतंक की फैक्ट्री केवल कश्मीर नहीं, पूरे हिंदुस्तान के लिए’

प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे पर न्यूयॉर्क में बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान की 370 के मुद्दे पर जो प्रतिक्रिया आई, वह इसीलिए थी कि उसने जिहाद का पूरा उद्योग खड़ा किया था कश्मीर मुद्दे के जवाब में। वह यही नहीं रुके, उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से तो इसका निशाना केवल कश्मीर ही नहीं, पूरा हिंदुस्तान है।

उन्होंने हर बात पर कश्मीर को घसीटने के लिए भी पाकिस्तान को लताड़ा। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है हिंदुस्तान-पाकिस्तान बाकी हर बात पर सहमत हैं, उनके बीच बाकी के रिश्ते बहुत अच्छे हैं, और केवल कश्मीर ही दोनों के अच्छे संबंधों के बीच आता है। “हमारे ऊपर मुंबई हमला हुआ। मुंबई कश्मीर का हिस्सा नहीं है। तो अगर पाकिस्तानी जिहादी उन राज्यों और क्षेत्रों पर हमला कर सकते हैं, जो कश्मीर से बहुत दूर हैं, तो हमें यह मानना होगा ही कि यह समस्या (महज़ कश्मीर से) ज़्यादा बड़ी है।”

‘जिहाद आपकी नीति नहीं हो सकता’

जयशंकर से पूछा गया कि पाकिस्तान की जिहाद से लड़ने की बातों के बारे में उनकी क्या प्रतिक्रिया है, तो उन्होंने दोटूक पाकिस्तान पर खुद ही जिहाद को अपनी सरकारी नीति बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुद्दा महज़ कश्मीर नहीं, उससे बड़ा है। “पाकिस्तान को यह मानना होगा कि उन्होंने जो मॉडल अपने लिए बनाया है (जिहाद का), वह काम नहीं कर रहा है। आज की तारीख में आप जिहाद को सरकारी तंत्र की वैधता-प्राप्त नीति नहीं बना सकते। यह मुद्दे की जड़ है।”

NRC लागू हुआ तो मनोज तिवारी को छोड़नी पड़ेगी दिल्ली: पूर्वांचल वासियों को भगाना चाहते हैं केजरीवाल

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी में ठन गई है। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में NRC लागू होने के बाद तिवारी को दिल्ली छोड़नी पड़ेगी। जवाब में तिवारी ने कहा कि केजरीवाल पूर्वांचल से आए लोगों को दिल्ली से भगाना चाहते हैं।

उल्लेखनीय है कि तिवारी असम की तरह दिल्ली में भी एनआरसी लागू करने की बात कई मौकों पर कह चुके हैं। इस संबंध में वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी पिछले दिनों मिले थे। उनका कहना है कि राजधानी में बहुत से घुसपैठिए हैं, जिन्हें बाहर किया जाना चाहिए।

इस संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में केजरीवाल ने कहा, ‘अगर दिल्ली में एनआरसी लागू हुआ तो सबसे पहले मनोज तिवारी को दिल्ली छोड़नी पड़ेगी।’ जवाब में तिवारी ने उनसे पूछा क्या बाहरी राज्यों के लोगों को दिल्ली छोड़ देना चाहिए?

तिवारी ने सीएम के बयान पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि क्या केजरीवाल दिल्ली में रह रहे देश के अन्य हिस्से के लोगों को विदेशी मानते हैं? उन्होंने कहा कि जब केजरीवाल दूसरे राज्यों से आए लोगों को भगाना चाहते हैं तो उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि वह भी उन्हीं में से एक हैं। तिवारी ने दावा किया कि अरविन्द केजरीवाल अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। उन्होंने पूछा कि एक पूर्व आईआरएस अधिकारी को नहीं पता कि एनआरसी क्या है?

केजरीवाल को ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का समर्थक करार देते हुए तिवारी ने कहा वे इतना भी नहीं जानते हैं कि एनआरसी में विदेशी घुसपैठियों को चिह्नित किया जाता है। तिवारी ने कहा कि इस तरह के बयान देने वाले केजरीवाल को शर्म आना चाहिए और उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई हक़ नहीं है। तिवारी ने केजरीवाल को समझाते हुए कहा कि एनआरसी विदेशियों के लिए है। उन्होंने पूछा कि आखिर केजरीवाल पूर्वांचल के लोगों को भगाना क्यों चाहते हैं?

आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यूपी, राजस्थान, बिहार और ओडिशा से लोग रोजगार के लिए दिल्ली आते हैं और मनोज तिवारी ने एनआरसी वाला बयान देकर दिखाया है कि वे इन लोगों के विरोध में हैं। भारद्वाज ने कहा कि ये लोग चोर नहीं हैं, बल्कि दिल्ली के विकास में बराबर के भगोदर हैं। भारद्वाज ने कहा कि अगर एनआरसी लागू होता है तो इन लोगों को दिल्ली छोड़ कर जाना पड़ेगा।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का कमलनाथ सरकार पर हमला: बाढ़ के सर्वे पर उठाए सवाल, कहा- मैं संतुष्ट नहीं

कॉन्ग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बार फिर से इशारों ही इशारों में कमलनाथ सरकार पर हमला बोला है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार (सितंबर 24, 2019) को नीमच और मंदसौर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को दौरा किया। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार द्वारा कराए जा रहे सर्वे पर भी सवाल उठाए।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रदेश सरकार (कमलनाथ सरकार) द्वारा किसानों के फसल को हुए नुकसान को लेकर जो प्राथमिक सर्वे कराए गए हैं, वो उससे संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक-एक तहसीलदार, एक-एक पटवारी वापस से अपने क्षेत्र में जाए और फिर से सर्वे करवाए और उसका जो भी आकलन होगा, वो जिला कलेक्टर के पास ले जाए।

सिंधिया ने बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों का दौरा करने के दौरान नयागाँव में कहा, “मैंने नीमच जिले के खेतों में सीने तक पानी भरा देखा है। अन्नदाता की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। मैं यह विश्वास दिलाता हूँ कि शासन-प्रशासन को मेरे अन्नदाताओं के साथ खड़े रहना ही होगा। मध्यप्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है, मैं हमेशा किसानों के साथ खड़ा हूँ।”

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा, “मैंने मंदसौर, नीमच के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है जहाँ फसलें पूर्णतया बर्बाद हो गई हैं। प्रदेश सरकार से मैंने सर्वे करवाकर शत-प्रतिशत मुआवजा, राशि और केन्द्र सरकार से विशेष मेगा राहत पैकेज की माँग की है।”

सिंधिया ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जल्द ही एक-एक प्रभावित किसान के खाते में पैसे पहुँचाने शुरू करना चाहिए। साथ ही केंद्र सरकार को भी बाढ़ प्रभावित किसानों और लोगों के लिए जल्द ही राशि स्वीकृत कर उसे जारी कर देना चाहिए।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “सिंधिया परिवार का सदैव इस मालवा और निमाड़ की माटी से जुड़ाव रहा है, और मैं आपके बीच किसी राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि आपके परिवार के सदस्य होने के नाते आया हूँ। मैं आपको पूर्ण विश्वास दिलाता हूँ, आपके हक और न्याय की लड़ाई ज्योतिरादित्य सिंधिया लड़ेगा। फसल हानि के साथ जनहानि हो, पशुधन हानि हो, या मकान की हानि हो। हर एक व्यक्ति को पूर्ण रूप से मुआवजा दिलाना ही मेरा लक्ष्य रहेगा।”

तीन तलाक पीड़िताओं को योगी सरकार देगी हर साल ₹6000, विवाहेत्तर संबंध रखने वाले हिंदुओं पर भी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (सितंबर 25, 2019) को प्रदेश की महिलाओं एवं तीन तलाक पीड़िताओं के लिए बड़ी घोषणा की। उन्होंने ऐलान किया कि पति द्वारा छोड़ दी गई मुस्लिम एवं हिंदू महिलाओं को सालाना ₹6000 दिया जाएगा। ये राशि महिलाओं को न्याय मिलने तक दी जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह घोषणा लखनऊ के इंदिरा गाँधी प्रतिष्ठान में आय़ोजित तीन तलाक पीड़ित महिलाओं से संवाद कार्यक्रम के दौरान की। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन तलाक की पीड़ित राष्ट्रीय महिला ख़िलाड़ी सुमेरा जावेद को नौकरी देने की भी घोषणा की। साथ ही सुमेरा को केस लड़ने के लिए निशुल्क सुविधा देने की भी घोषणा की गई।

इस दौरान सीएम योगी ने हिन्दू महिलाओं के अधिकारों को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि शादी के बाद किसी दूसरी महिला से संबंध रखने वाले हिंदू पुरुषों पर भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही हिंदू परित्यक्ता महिलाओं को भी ऐसा ही न्याय दिलाया जाएगा।

सीएम ने कहा, “एक शादी करके दूसरी पत्नी को रखने वाले हिंदू पति पर भी इसी प्रकार की कार्रवाई करेंगे। परित्यक्ता महिलाओं के लिए भी न्याय देने की प्रक्रिया को उसी के साथ हम जोड़ेंगे, जिसमें हमने कहा था कि यह नारी गरिमा और उनके सशक्तिकरण से जुड़ी लड़ाई है।”

कार्यक्रम में ट्रिपल तलाक से पीड़ित महिलाओं को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा, “समाज का कोई हिस्सा या कोई भी व्यक्ति खुद को उपेक्षित व अपमानित महसूस न करे, इसके लिए ठोस कार्य योजना तैयार की जाएगी।”

उन्होंने पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि आजादी के तत्काल बाद ही इस लड़ाई को लड़ना चाहिए था, लेकिन निजी स्वार्थ के लिए पिछली सरकारों ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बताया कि केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही तीन तलाक से मुक्ति दिला सकते थे। ऐसा करके उन्होंने नारी शक्ति को सम्मान दिया है। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम में इस बात पर भी जानकारी दी गई कि बीते एक साल में 273 मामले ट्रिपल तलाक के आए हैं।

विज्ञान नहीं है पुरातत्व, राम मंदिर पर ASI की रिपोर्ट महज एक त्रुटियुक्त विचार: SC में वरिष्ठ वकील

राम मंदिर पर आज सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकार ज़फ़रयाब जिलानी ने ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ का पक्ष रखा और वरिष्ठ वकील मिनाक्षी अरोड़ा ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) के रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए अपनी बात रखी। जिलानी ने अदालत को बताया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड राम चबूतरे को जन्मस्थान नहीं मानता है। जिलानी ने कहा कि ऐसा हिन्दुओं की ही ऐसी आस्था है कि राम चबूतरा जन्मस्थान है, हमनें इसे स्वीकार नहीं किया है। जिलानी ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट जज ने कहा था कि चबूतरा जन्मस्थान है, हमनें अपनी ओर से ऐसा कभी नहीं कहा।

जिलानी ने सन 1862 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राम जन्मस्थान विवादित स्थल पर नहीं बल्कि कहीं और है। उन्होंने कुछ कागज़ात दिखाते हुए दावा किया कि यहाँ हिन्दुओं द्वारा पूजा नहीं की जाती थी। उन्होंने दावा किया कि रामकोट किले को राम का जन्मस्थान माना जाता है। जब जज ने पूछा कि क्या वह मानते हैं कि राम का जन्मस्थान राम चबूतरे को माना जाता था, तो जिलानी ने कहा कि ऐसा हिन्दुओं का मानना है। जिलानी ने कहा कि मुख्य गुम्बद के नीचे जन्मस्थान होने की बातें 1989 के बाद की जाने लगी

जिलानी ने कहा कि 1950 से 1989 तक फाइल किए गए किसी भी सूट में मुख्य गुम्बद के नीचे जन्मस्थान होने के जिक्र नहीं है। जिलानी द्वारा अपनी दलीलें ख़त्म करने के बाद अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने एएसआई की रिपोर्ट्स को लेकर अपनी बात रखी। अरोड़ा ने कहा कि एक अदालत ने 1863 में मंदिर की माँग को ख़ारिज करते हुए कहा था कि जब 350 सालों के बाद यथास्थिति को बदलना सही निर्णय नहीं होगा। अरोड़ा ने पूछा कि क्या अब 500 सालों के बाद यथस्थिति को बदल देना एक सही फ़ैसला होगा?

मीनाक्षी अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पुरातत्व कोई फिजिक्स या केमिस्ट्री जैसा विज्ञान नहीं है, यह सामाजिक विज्ञान है। अरोड़ा ने कहा कि कार्बन डेटिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। अरोड़ा ने कहा कि चूँकि, आर्कियोलॉजी एक नेचुरल साइंस नहीं है, इसके रिपोर्ट्स में यथार्थता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पुरातत्व ने अभी तक ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया है, जिसे वेरीफाई किया जा सके।

मीनाक्षी अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि पुरातत्व विशेषज्ञ सिर्फ़ अनुमान लगाते हैं, यथार्थ नहीं बताते। मीनाक्षी ने कहा कि अगर पुरातात्विक रिपोर्ट को ‘एक्सपर्ट ओपिनियन’ भी माने तो इसे एविडेंस एक्ट के सेक्शन 45 के तहत जाँचना ज़रूरी है। अरोड़ा के अनुसार, एएसआई के रिपोर्ट्स में कई त्रुटियाँ हैं, विरोधाभास हैं। उन्होंने कहा कि यह एक कमज़ोर सबूत है, जो सिर्फ़ आर्कियोलॉजिस्ट्स के विचार भर हैं।