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पेरिस में चार पुलिसकर्मियों की चाकू घोंपकर हत्या, हमलावर ने हाल ही में अपनाया था इस्लाम: रिपोर्ट्स

फ्रांस की राजधानी पेरिस में पुलिस मुख्यालय में एक व्यक्ति ने गुरुवार (अक्टूबर 3, 2019) को चार अधिकारियों की चाकू से गोदकर हत्या कर दी। बता दें कि हमलावर पुलिस मुख्यालय में ही कार्यरत था और बताया जा रहा है कि हमलावर ने हाल ही में इस्लाम धर्म अपनाया था। फ़िलहाल, हमलावर को पुलिस ने गोली मारकर ढेर कर दिया।

यूनियन के अधिकारी यवेस लेफेबव्रे ने कहा कि हमला गुरुवार दोपहर 1 बजे के आसपास नोट्रेडम कैथेड्रल के पास स्थित मुख्यालय में हुआ। घटना के बाद पूरे पुलिस मुख्यालय की घेराबंदी कर दी गई। बीएफएम रिपोर्ट के मुताबिक हमलावर ने 18 महीने पहले ही इस्लाम धर्म अपनाया था। हालाँकि, फिलहाल इस जानकारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पेरिस के प्रोसीक्यूटर रेमी हेटिज ने बताया कि हमलावर पुलिस खुफिया इकाई के सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) विभाग में कार्यरत था। उन्होंने बताया कि मारे गए लोगों में तीन पुरूष और एक महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक हमलावर 20 वर्षों से पुलिस मुख्यालय में काम कर रहा था। इस दौरान उसके बर्ताव में कभी कोई समस्या दिखाई नहीं दी।

इस हमले के बाद आंतरिक मंत्री कास्टानेर ने ग्रीस और तुर्की की अपनी यात्रा स्थगित कर दी है। पेरिस के परिवहन विभाग ने कहा है कि पुलिस मुख्यालय के निकटतम मेट्रो स्टेशन को सुरक्षा कारणों के चलते बंद कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक पेरिस पुलिस मुख्यालय के आसपास की जगह को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। हालाँकि, अब तक हमलावर के उद्देश्यों के बारे में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन बताया जा रहा है कि उसके और उसके सुपरवाइजर के बीच कथित तौर पर ‘तनाव’ थे।

कपिल सिब्बल और ‘पत्रकारों को Bitch कहने वाली’ उनकी पत्नी से बरखा दत्त ने मॉंगे सूद समेत ₹74 लाख

लोक सभा चुनाव हारने के 6 महीने के भीतर ही पत्रकारिता के समुदाय विशेष में दरारें पड़नी शुरू हो गईं हैं। हालिया मामले में एनडीटीवी की एंकर रहीं बरखा दत्त ने अपने पिछले चैनल के प्रमोटर और कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी प्रमिला सिब्बल से ₹74 लाख सूद समेत लेने के लिए अदालत में मुकदमा दायर किया है। मामले के लिए 9 जनवरी को सुनवाई की तारीख मिली है।

NDTV के अपने कार्यकाल में राडिया कांड और उसके बाद वाशिंगटन पोस्ट में भारत और हिन्दुओं को कोसने के लिए जानी जाने वालीं बरखा दत्त ने लोक सभा चुनावों में कॉन्ग्रेस व वामपंथी मीडिया की शिकस्त के कुछ ही समय बाद ट्वीट किया था कि तिरंगा टीवी के कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना तथा मुआवजे के निकाला जा रहा है। उन्होंने प्रमिला सिब्बल पर चैनल की महिला कर्मचारियों को “कुतिया” कह कर अपमानित करने का आरोप भी लगाया था।

बरखा के आरोपों में इसके अतिरिक्त खुद को और चैनल के अन्य वरिष्ठ कर्मचारियों को एक साल से अधिक समय से वेतन न दिए जाने का भी आरोप था। इसके अलावा उन्होंने कहा था कि बिना कर्मचारियों को वेतन दिए सिब्बल दम्पति का लंदन में ऐश करना विजय माल्या जैसा कृत्य है। इसके लिए उन्होंने खुद को सिब्बल द्वारा मानहानि के मुकदमे से धमकाए जाने की बात भी ट्विटर पर कही थी।

उनके आरोपों के जवाब में सिब्बल ने दावा किया था कि यह सब ट्वीट करने के पहले ही बरखा दत्त को चैनल से बर्खास्त किया जा चुका है। इसके पीछे उन्होंने कारण अनुशासनहीनता बताया था। इसके अलावा उन्होंने दत्त को एक भी पैसा देने से साफ़ इनकार कर दिया था।

JNU में भिड़े लेफ्ट-ABVP, केन्द्रीय मंत्री के भाषण को लेकर कटा बवाल

प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री (MoS-PMO) डॉ. जितेन्द्र सिंह के भाषण के बाद दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के दक्षिणपंथी और वामपंथी गुटों के छात्र आपस में भिड़ गए। दोनों तरफ़ से जमकर हुई नारेबाजी से शुरू हुआ बवाल हाथापाई तक जा पहुँचा। आलम यह था कि देखने वालों को हाल ही में केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ जाधवपुर विश्वविद्यालय में हुई बदसलूकी के दोहराए जाने की आशंका लगने लगी।

मीडिया की खबरों में बताया जा रहा है कि डॉ. जितेन्द्र सिंह JNU में जम्मू-कश्मीर से हटाए गए अनुच्छेद 370 पर आयोजित एक सेमिनार में वक्तव्य देने पहुँचे थे। वहाँ उनके भाषण के पहले वामपंथी छात्र संगठनों ने जम कर नारेबाजी की और बवाल काटा। उल्लेखनीय है कि JNU वामपंथी विचारधारा और राजनीति का गढ़ माना जाता है। विरोध-प्रदर्शन स्थल पर सरकार के विरोध के अलावा “आरएसएस मुर्दाबाद” और “ABVP हो बर्बाद” के भी नारे लगे। जवाब में कुछ छात्रों को “भारत माता की जय” का घोष करते हुए भी सुना जा सकता है।

यह बवाल बाबुल सुप्रियो के साथ हुई हिंसा की याद दिलाने वाला था। पिछले दिनों केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ भी वामपंथी छात्रों ने जाधवपुर विश्वविद्यालय में बदसलूकी हुई थी, जो आगे बढ़कर हाथापाई तक पहुँच गई थी। इसके बाद ABVP वालों ने भी जाधवपुर में जमकर तोड़फोड़ की थी।

आज तक की खबर के अनुसार जब वामपंथी संगठन AISA के छात्रों ने जितेन्द्र सिंह के भाषण के बीच में टोकाटाकी और नारेबाजी की, तो जवाब में ABVP वालों ने भी “कश्मीर से कन्याकुमारी, भारत माँ एक हमारी” का नारा लगाना शुरू कर दिया। गौरतलब है कि गत 5 अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था। इसके अलावा राज्य का पूर्ण राज्य का दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्र-शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था।

‘Halal only’ बना McDonald’s के गले की हड्डी, दूसरा क़ानूनी नोटिस जारी

फ़ास्ट फ़ूड चेन McDonald’s के लिए ‘केवल हलाल’ मांस परोसने की नीति गले की हड्डी बनती जा रही है। इसके खिलाफ उन्हें जारी हुए पहले क़ानूनी नोटिस का जवाब देने में ज़रूरत से ज्यादा समझदार बनने के चक्कर में दूसरी नोटिस उनके दरवाज़े पहुँच गई है। अधिवक्ता ईशकरण सिंह भंडारी ने यह नोटिस अपने ट्विटर हैंडल पर साझा की है।

पहली नोटिस हरीश शर्मा ने अधिवक्ता ईशकरण सिंह भंडारी के ज़रिए McDonald’s India और इसके एमडी अमित जटिया और विक्रम बक्शी को 26 अगस्त को भेजा था, जब McDonald’s ने यह स्वीकार किया था कि वह केवल हलाल मांस ही अपने रेस्तरां में परोसता है। चूँकि हलाल मांस के कारोबार में कोई गैर-मुस्लिम शामिल नहीं हो सकता, इसलिए यह गैर-मुस्लिमों के साथ भेदभाव था। यही नहीं, जानवरों की हत्या का ‘हलाल’ तरीका ‘झटका’ के मुकाबले कहीं अधिक ‘क्रूर’ होता है- अतः केवल और केवल वही मांस परोसने और झटका का विकल्प न रखने से McDonald’s  ‘हलाल’ में निहित क्रूरता को न पसंद करने वालों की मज़हबी/आस्था से जुड़ी भावनाओं का भी असम्मान कर रहा था।

पहली नोटिस में McDonald’s के उस ट्वीट का हवाला दिया गया था, जिसमें वह अपने प्रतिष्ठानों में मौजूद सारे मांस के हलाल होने का दावा करता है। नोटिस में उससे झटका मांस को लेकर के उसकी नीति और हलाल मांस के साथ जुड़ी उपर्युक्त समस्याओं के बारे में स्पष्टीकरण की माँग की गई थी। इसके अतिरिक्त ‘केवल हलाल’ की नीति से SC/ST के विरुद्ध भी भेदभाव और ‘अस्पृश्यता’ सदृश व्यवहार का मामला बन सकता है, क्योंकि हिन्दू कसाई आम तौर पर अनुसूचित जातियों और जनजातियों के बीच से ही आते हैं।

इन्हीं सवालों का जवाब जब McDonald’s से माँगा गया तो उसने बेहद ‘लटकाने वाला’ जवाब भेजा कि उसे नोटिस का अध्ययन करने के लिए और समय चाहिए। पहली नोटिस में उन्हें 15 दिन का समय दिया गया था।

McDonald’s को क्या कहें, सरकार भी ‘हलाल-सर्टिफाइड’

McDonald’s तो एक निजी प्रतिष्ठान है। हलाल को विशेष तरजीह और झटका मांस के साथ भेदभाव तो खुद सरकार भी करती है- राष्ट्रपति भवन, भारतीय संसद तक सभी जगह केवल हलाल मांस ही परोसा जाता है। यही नहीं, जब कोई हलाल से अलग झटका मांस बेचने या उसका उत्पादन करने की कोशिश करता है तो और लोगों की बात तो अलग, सरकारी अमला भी उसे गैर-क़ानूनी रूप से हतोत्साहित करने में जुट जाता है। (इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए झटका सर्टिफिकेशन अथाॅरिटी के चेयरमैन रवि रंजन सिंह से ऑपइंडिया की विशेष बातचीत यहाँ पढ़ें।)

गौरतलब है कि जब हमने रेलवे से इस संदर्भ में बात की तो रेलवे के एक अधिकारी ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि IRCTC खुद से झटका या हलाल में कोई अंतर नहीं करता। वह अंतरराष्ट्रीय मानककीकरण संस्था (International Organization for Standardization, ISO) और HACCP (Hazard Analysis and Critical Control Point, भोजन सामग्री में निहित जोखिमों को कम करने की प्रणाली) के मानकों के अनुसार फ्रोज़ेन चिकन के सप्लायर्स की छँटाई (shortisting) करती है। वह माँस के झटका या हलाल ही होने की शर्त अपने टेंडर दस्तावेज़ों में नहीं लिखती। भारत के भोज्य पदार्थ नियामक FS&SAI (Food Safety and Standards Authority of India) के मानकों में भी झटका या हलाल का ज़िक्र नहीं है।

अपडेट: अक्टूबर 4, 2019, 08:00 PM

झटका मांस के साथ भेदभाव- सरकार भी शामिल, सरकारी अमला भी

राहुल के खास बने सोनिया की फॉंस: हरियाणा में तंवर का इस्तीफा, महाराष्ट्र में निरुपम ने हड़काया

राहुल गॉंधी के इस्तीफे के बाद भले सोनिया गॉंधी ने बतौर अंतरिम अध्यक्ष कॉन्ग्रेस की कमान भले सॅंभाल ली हो, लेकिन बगावत पर उतारू नेता मानने के मूड में नहीं दिख रहे। हरियाणा कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने चुनाव समितियों से इस्तीफा दे दिया है। महाराष्ट्र में मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे संजय निरुपम ने भी पार्टी छोड़ने की धमकी दी है।

दोनों राज्यों में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। निरुपम और तंवर दोनों टिकट बॅंटवारे में अपनी उपेक्षा से नाराज हैं। उल्लेखनीय है कि तंवर राहुल के काफी करीबी माने जाते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की चेतावनियों के बावजूद राहुल ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से नहीं हटाया था। सोनिया के कमान सॅंभालने के बाद ​हरियाणा में पार्टी की कमान कुमारी शैलजा को सौंप दी गई थी। साथ ही तंवर की अनदेखी कर हुड्डा को आगे किया गया।

तंवर ने गुरुवार को सोनिया को अपना इस्तीफा भेजा। तीन पन्ने के इस्तीफे में उन्होंने राज्य विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवारों के चयन में धांधली का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि उनकी अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि पांच साल आठ माह तक हरियाणा प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पार्टी को मजबूत किया। इसके कारण लोकसभा चुनाव में पार्टी का वोट छह फीसदी बढ़ा। उनके नेतृत्व में पार्टी ने प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाई, लेकिन चुनाव के समय उन्हें किनारे लगा दिया गया।

इससे पहले बुधवार को तंवर ने अपने समर्थकों के साथ कॉन्ग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उन्होंने सोहना विधानसभा सीट का टिकट पॉंच करोड़ रुपए में बेचे जाने का आरोप लगाया था।

दूसरी ओर, निरुपम ने अपने द्वारा सुझाए गए नाम को खारिज किए जाने के बाद गुरुवार को घोषणा की कि वह
कॉन्ग्रेस के प्रचार अभियान में शामिल नहीं होंगे। पूर्व सांसद ने कहा कि पार्टी नेतृत्व उनसे जिस तरह का व्यवहार कर रहा है, उसे देखते हुए वह दिन दूर नहीं जब वह पार्टी को अलविदा कह देंगे।

गौरतलब है कि निरूपम को इस साल लोकसभा चुनाव से पहले मार्च में मुंबई कॉन्ग्रेस प्रमुख के पद से हटा दिया गया था। उन पर मनमाने तरीके से काम करने का आरोप था। उनकी जगह मिलिंद देवड़ा को मुंबई कॉन्ग्रेस का प्रमुख बनाया गया था। आम चुनाव में पार्टी की हार के बाद देवड़ा ने भी इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल मुंबई
कॉन्ग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्व सांसद एकनाथ गायकवाड़ हैं।

कॉन्ग्रेस में टिकट पर कलह: अब संजय निरुपम ने नेतृत्व को हड़काया, कहा- प्रचार नहीं करूॅंगा

महाराष्ट्र और हरियाणा में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। दोनों ही राज्यों में कॉन्ग्रेस पहले से कई चुनौतियों से जूझ रही है। गुटबाजी चरम पर है और कई दिग्गज नेता पार्टी छोड़कर जा चुके हैं। अब टिकट बॅंटवारे ने दोनों राज्यों में पार्टी की भीतरी लड़ाई सार्वजनिक कर दी है।

टिकट बॅंटवारे के बाद हरियाणा कॉन्ग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर और मुंबई के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई है। निरुपम ने पार्टी छोड़ने की धमकी दी है। एक के बाद एक दो ट्वीट कर उन्होंने कहा कि शायद पार्टी को अब उनकी जरूरत नहीं रही।

उन्होंने लिखा, “ऐसा लगता है कि पार्टी को अब मेरी सेवाओं की जरूरत नहीं है। मुंबई में मैंने विधानसभा चुनाव के लिए सिर्फ एक नाम की सिफारिश की थी। मुझे पता चला है कि उसे भी खारिज कर दिया गया। मैंने नेतृत्व को पहले ही बताया था कि ऐसी स्थिति में मैं चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं लूॅंगा। यह मेरा आखिरी फैसला है।” एक और ट्वीट कर उन्होंने लिखा, “मुझे उम्मीद है कि पार्टी को गुड बाय कहने का वक्त नहीं आएगा। लेकिन, लीडरशिप जिस तरह से मेरे साथ बर्ताव कर रही है, उससे लगता है कि अब वह दिन दूर नहीं है।”

इससे पहले बुधवार को हरियाणा कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने विधानसभा चुनाव के टिकटों के बॅंटवारे में धांधली का आरोप लगाते हुए कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उन्होंने सोहना विधानसभा सीट का टिकट पॉंच करोड़ रुपए में बेचे जाने का आरोप लगाया था।

‘Spam’ बता हटाई दुर्गा पूजा पर पोस्ट: फेसबुक ने फिर ली ‘Community Standards’ की आड़

ऐसा लग रहा है कि फ़ेसबुक ने अपने प्लेटफ़ॉर्म से हिन्दू आवाज़ों की पूरी तरह ‘सफ़ाई’ करने का मन बना लिया है। राजनीति तो दूर की चीज़ है, हिन्दुओं की संस्कृति और धर्म-आस्था को अपने प्लेटफ़ॉर्म पर जगह देना फेसबुक को अब खलने लगा है। मंगलवार (1 अक्टूबर) को वेबसाइट की कंटेंट टीम ने प्रख्यात लेखिका मोनीदीपा डे की दुर्गा पूजा से जुड़ी फेसबुक पोस्ट को अपने ‘Community Standards’ का उल्लंघन बता कर हटा दिया। लेकिन यह नहीं समझाया कि दुर्गा पूजा पर पोस्ट ‘स्पैम’ कैसे हो गई। डे ने अपने फेसबुक अकाउंट पर इस घटना के बारे में लिखते हुए नाराज़गी प्रकट की है।

भारतीय रेल की पत्रिका ‘रेल बन्धु’ में यात्रा-वृत्तान्त (travelogue) और विभिन्न प्रकाशनों में भारतीय संस्कृति पर लिखने वालीं डे ने Financial Express के लिए अपने साप्ताहिक कॉलम में दुर्गा पूजा के बारे में एक लेख लिखा था। इस लेख में उन्होंने समूचे भारतवर्ष की नवरात्रि और बंगाल के महाषष्ठी से विजय दशमी तक की पूजा के विभिन्न सांस्कृतिक पहलुओं, जिनमें पंडाल-भ्रमण से लेकर नबपत्रिका, होम, भोग, दुंची नाच, बलि आदि का उल्लेख और संक्षिप्त वर्णन किया था।

यह पूरी तरह गैर-विवादास्पद (आज की भाषा में कहें तो ‘vanilla’) लेख था, जिस में एक भी आपत्तिजनक शब्द ढूँढ़ना असंभव है। इसके बावजूद फेसबुक ने एक ग्रुप में मोनीदीपा दे के इसे शेयर करने पर उसे ‘स्पैम’ बताकर हटा दिया, जबकि मोनीदीपा दे के अनुसार, इस पोस्ट को उस ग्रुप के एक एडमिन ने ग्रुप में शेयर किए जाने की लिए सहमति प्रदान की थी। ऐसे में इसे ‘स्पैम’ बताने का कोई औचित्य ही नहीं बनता है। पहले ही अपनी कंटेंट मॉडरेशन टीम में वामपंथी झुकाव की बात स्वीकार चुके फेसबुक के हिन्दूफोबिया के अलावा किसी भी अन्य दृष्टिकोण से इसकी व्याख्या करना असंभव है।

घरों की छत पर जमा कर रखे थे पत्थर, हनुमान मूर्ति स्थापित करने जा रहे भक्तों पर पथराव

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के विश्नोईवाला गॉंव से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करने के लिए मंदिर जा रहे लोगों पर मजहबी भीड़ में जमकर पथराव किया। घटना मंगलवार (1 अक्टूबर) की है। बताया जाता है कि लोगों ने घरों की छत पर पहले से ही पत्थर जमा कर रखे थे।

ख़बर के अनुसार, लगभग तीन महीने पहले गॉंव के वर्षों पुराने हनुमान मंदिर की मूर्ति को कुछ असामाजिक तत्वों ने खंडित कर दिया था। हालाँकि, ग्रामीणों ने इस घटना के बारे में कोई शिक़ायत नहीं की थी। मंगलवार को, ग्रामीणों ने मंदिर में हनुमान जी की नई मूर्ति स्थापित करने के लिए जुलूस निकाली।

इसी दौरान शकील, सलीम, ताहिर और कई अन्य लोगों के नेतृत्व में एक मजहबी भीड़ ने कथित रूप से हिंदू भक्तों को रोक दिया और नई मूर्ति की स्थापना पर आपत्ति जताई। हालाँकि, हिंदू भक्त उन्हें समझाने के बाद आगे बढ़ गए। इसके बाद मजहबी भीड़ ने कथित रूप से जुलूस पर पथराव किया। इसमें कम से कम सात लोग घायल हो गए। हनुमान जी की मूर्ति भी क्षतिग्रस्त हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे। पुलिस ने 18 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है और तीन लोगों सहित 10 लोगों को हिरासत में भी लिया है।

पथराव मामले में गिरफ़्तार सगीर अहमद, नईम, सद्दीक अहमद, रियाज़ अहमद, इरफ़ान अहमद, असगर, शबाना, नईमा और शमा को हिरासत में लिया गया है।

जागरण की ख़बर के अनुसार चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस जाँच में पाया गया है कि पथराव की योजना पहले से बनाई गई थी। पत्थर और ईंटों के ढेर क्षेत्र के लोगों की छतों में इकट्ठे पाए गए। तलाशी के दौरान घरों की छत में ईंट-पत्थर के ढेर मिले।

इससे पहले, बिजनौर के राम चौराहे पर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर की कमिटी ने 31 जुलाई 2019 को समुदाय विशेष के दो युवकों को उस समय रंगे हाथों पकड़ लिया था, जब दोनों माथे पर टीका लगा मंदिर में घुस गए और वहाँ की मूर्तियों को तोड़ने लगे। इस दौरान मूर्तियों के टूटने की आवाज़ें बाहर आ रही थीं। तभी लोगों ने मौक़े पर पहुँचकर दोनों युवकों को रंगे हाथों पकड़ लिया। लोगों का कहना है कि समुदाय के दोनों युवकों ने माथे पर टीका लगा रखा था, जिससे उन पर कोई शक़ न करे कि वो हिन्दू नहीं हैं।

INX मीडिया मामला: 17 अक्टूबर तक तिहाड़ में रहेंगे चिदंबरम, घर का खाना खाएँगे

INX मीडिया मामले में पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही। सीबीआई अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 17 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। हालॉंकि अदालत ने तिहाड़ जेल में बंद चिदंबरम को घर का खाना लाने की अनुमति दे दी है।

कोर्ट के आदेश के बाद तिहाड़ जेल में बंद चिदंबरम हर रोज दिन में एकबार घर का खाना खा सकते हैं। INX मीडिया मामले में चिदंबरम को सीबीआई ने 21 अगस्त को गिरफ़्तार किया था।

इस मामले में जमानत के लिए गुरुवार को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। चिदंबरम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जस्टिस एनवी रमण की अगुवाई वाली पीठ के सामने तत्काल सूचीबद्ध किए जाने के लिए मामले का उल्लेख किया। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस कृष्णा मुरारी भी इस पीठ में शामिल हैं।

ख़बर के अनुसार, पीठ ने कहा कि मामला सूचीबद्ध करने के संबंध में फैसला लेने के लिए चिदंबरम की याचिका
CJI रंजन गोगोई के पास भेजी जाएगी। बता दें कि कुछ दिनों पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम की ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने माना था कि वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

ग़ौरतलब है कि INX मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी के बयानों के आधार पर सीबीआई और ईडी ने इस मामले में चिदंबरम पर शिकंजा कसा है। आरोप है कि INX मीडिया ग्रुप को 2007 में 305 करोड़ रुपए का विदेशी धन हासिल करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी में अनियमितता बरती गई थी। उस दौरान चिदंबरम वित्त मंत्री थे।

‘मैंने मुश्किल वक्त में इंदिरा गॉंधी का साथ दिया, पर मुस्लिमों को गुलाम न समझे कॉन्ग्रेस’

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने पार्टी नेतृत्व को जमकर सुनाया है। मध्य प्रदेश के झाबुआ उपचुनाव के लिए पार्टी ने 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है। इसमें एक भी मुस्लिम नहीं है। कुरैशी ने इस पर गहरी नाराजगी जताई है।

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में प्रकाशित खबर

उन्होंने इस सूची का हवाला देते हुए पार्टी में मुस्लिमों को नजरअंदाज करने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का प्रदेश और केंद्रीय ईकाई इस बात को समझ ले कि मुस्लिम उनका गुलाम नहीं है।

उन्होंने स्टार प्रचारकों की सूची आने के बाद बुधवार को मीडिया से बातचीत में तीखी प्रतिक्रिया दी। कुरैशी ने कहा, “कुछ नेता नेहरू-गाँधी खानदान को गुमराह कर रहे हैं और वहीं लोग पार्टी के इस बिखराव के लिए जिम्मेदार हैं।”

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मिजोरम के राज्यपाल रहे कुरैशी ने कहा कि मध्यप्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व को यह बात अच्छी तरह जान लेना चाहिए कि मुस्लिम उनका गुलाम नहीं है और न ही दिहाड़ी मजदूर। उन्होंने कहा है कि अब और अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कॉन्ग्रेस नेता ने स्टार प्रचारकों की सूची को आधार बनाकर कहा कि उन्हें ये देखकर 1977 की याद आ गई, जब इंदिरा गाँधी ने कॉन्ग्रेस (आई) की स्थापना की थी और सभी कॉन्ग्रेसियों से साथ देने की अपील की थी।

कुरैशी ने कहा उस समय डीपी मिश्रा, डॉ. शंकरदयाल शर्मा, प्रकाश चंद सेठी, श्यामचरण शुक्ल और गोविंद नारायण सिंह जैसे नेताओं ने उनका विरोध किया था। इस मुश्किल वक़्त में सिर्फ़ वही इंदिरा गाँधी के साथ खड़े थे। उनके अनुसार उन्होंने ही जेल भरो आंदोलन की शुरुआत करके गिरफ्तारी भी दी थी।

कुरैशी ने पार्टी नेतृत्व को पिछले चुनावों की याद भी दिलाई। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मुस्लिम ही कॉन्ग्रेस का साथ देते हैं। लेकिन नेतृत्व यह भूल गया है। आज वह भाजपा के हिंदुत्व विचाराधारा के समर्थकों को खुश करने में जुटी है। इसके लिए मुस्लिमों को नजरंदाज किया जा रहा है।