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राम मंदिर की पहली ईंट रखने को तैयार रहें शिवसैनिक: उद्धव ठाकरे

राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच बयानबाजी भी तेज होती जा रही हैं। हाल ही में सुब्रह्मण्यम स्वामी के बयान के बाद आज शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया है।

पार्टी बैठक में उद्धव ठाकरे ने कहा है कि कोर्ट का निर्णय कुछ भी आए लेकिन जिस तरह से कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला केंद्र सरकार ने किया, उसे उसी हिम्मत से राम मंदिर का निर्माण भी शुरू करवाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय में रोज सुनवाई जारी है और फैसला कभी भी आ सकता है, इसलिए शिवसैनिक राम मंदिर की पहली ईंट रखने को तैयार रहें।

उद्धव ठाकरे ने कहा- “राम मंदिर हमारी श्रद्धा और अस्मिता का सवाल है। हम इस सवाल का जवाब नहीं देंगे। इस सवाल को लंबे समय तक सुर्खियों में नहीं रखा जाना चाहिए। यह सवाल 1979 से लंबित है। आपको कब तक इंतजार करना होगा अब राम मंदिर के लिए इंतजार करने का समय नहीं है। न्याय के देवता को जल्द से जल्द निर्णय लेना चाहिए। यदि निर्णय में देरी होती है, तो केंद्र सरकार को एक विशेष कानून बनाना चाहिए। उद्धव ने यह भी माँग की कि राम मंदिर के लिए साहसिक कदम उठाए जाएँ।

कल ही भाजपा नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने 80वें जन्मदिन पर राम नगरी प्रवास के दूसरे दिन यानी रविवार सुबह की शुरुआत रामलला के दर्शन से किए और राम मंदिर निर्माण को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि नवंबर के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हिंदुओं का मूलभूत अधिकार समुदाय विशेष की संपत्ति के अधिकार से ऊपर है।

स्वामी ने अपना जन्मदिन अयोध्या में ही मनाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा– “सुप्रीम कोर्ट भी कहता है मूलभूत अधिकार सर्वोपरि है। जब मूलभूत अधिकार और संपत्ति के अधिकार का प्रश्न होता है। राम मंदिर की अधिकांश जमीन सरकार के पास है। सरकार जमीन किसी को भी दे सकती है। सबकुछ प्री फैब्रिकेटेड है, केवल भव्यता देनी है। नवंबर बाद देश खुशियाँ मनाएगा।”

वहीं दूसरी ओर अयोध्या जमीन विवाद मामले में एक बार फिर नया मोड़ आता दिख रहा है। दरअसल, इस पूरे मामले में एक फिर से मध्यस्थता की माँग की गई है। यह माँग सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने की है। बोर्ड ने इसे लेकर मध्यस्थता पैनल के तीन जजों को चिट्ठी भी लिखी है। इस माँग को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर सकता है।

आंध्र प्रदेश के पूर्व स्पीकर ने की आत्महत्या, विधानसभा से फर्नीचर चुराने का था आरोप

आंध्र प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कोडेला शिवा प्रसाद राव ने फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली। भ्रष्टाचार और अवैध वित्तीय लेनदेन में कोडेला और उनका परिवार आरोपित था। उन्होंने अपने हैदराबाद स्थित आवास पर ख़ुदकुशी की। ये घटना सोमवार (सितम्बर 16, 2019) सुबह की है। कोडेला, उनके बेटे और बेटी के ख़िलाफ़ जगन मोहन रेड्डी सरकार के सत्ता संभालने के बाद के बाद भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज किए गए थे।

72 वर्षीय पूर्व विधानसभाध्यक्ष को हैदराबाद के बसवा तारक्रम अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। 2014 से 2019 तक विधानसभा के स्पीकर रहे कोडेला शिवा प्रसाद राव 6 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके थे और टीडीपी के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे। एनटी रामराव और चंद्रबाबू नायडू की सरकार में वह मंत्री भी रहे थे। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और भाजपा ने टीडीपी नेता के निधन पर शोक जताया

भाजपा ने कहा कि पूर्व स्पीकर कई मृत्यु आंध्र प्रदेश में फिलहाल चल रही द्वेषपूर्ण और घृणयुक्त राजनीति का प्रमाण है। टीडीपी तेलंगाना के अध्यक्ष ने कहा कि कोडेला के मृत शरीर की गर्दन पर निशान बना हुआ था। अप्रैल में विधानसभा चुनाव के दौरान कोडेला ने आरोप लगाया था कि वाईएसआरसीपी के लोगों ने उन पर हमला किया। हालाँकि, जगन रेड्डी ने उन पर बूथ कब्जाने का आरोप लगाया था।

इससे पहले आंध्र प्रदेश विधानसभा से गायब फर्नीचर कोडेला शिवा प्रसाद राव के दफ्तर और उनके बेटे के शोरूम से मिले थे। शोरूम में कम से कम 70 ऐसी चीजें थीं, जिन्हें विधानसभा से चुरा कर लाया गया था। हालाँकि, विधानसभा अधिकारियों ने जिन चीजों की सूची दी थी, उनकी संख्या इससे कम ही थी। पूर्व विधानसभाध्यक्ष के ख़िलाफ़ धारा 409 (लोक सेवक या बैंक कर्मचारी, व्यापारी या अभिकर्ता द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन) और धारा 411 (चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

राजस्थान: 75% प्राइवेट नौकरी स्थानीय लोगों को, गहलोत सरकार ने आरक्षण का मसौदा किया तैयार

राजस्थान में अब स्थानीय लोगों को प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में 75% आरक्षण दिया जाएगा। राजस्थान सरकार ने निर्णय लिया है कि प्राइवेट सेक्टर में राज्य के नागरिकों को तीन चौथाई आरक्षण मिलेगा। इस संबंध में गहलोत सरकार ने मसौदा तैयार कर लिया है।

इस पर चर्चा के लिए राजस्थान के श्रम विभाग ने बैठक भी बुलाई है। गुरुवार (सितम्बर 16, 2019) को सचिवालय में होने वाली बैठक में चुनिंदा उद्योगों के प्रतिनिधि और सम्बंधित विभागों के अधिकारी भी शामिल होंगे। इस बैठक में आरक्षण दिए जाने के तौर-तरीकों पर विचार किया जाएगा।

श्रम व नियोजन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि राजस्थान के स्थानीय नागरिकों को निजी क्षेत्र में आरक्षण दिए जाने की व्यवहारिकता, स्वीकार्यता, संभावनाओं और प्रभावों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। सरकार इसके लिए व्यापार जगत से बातचीत करेगी और उनकी सकारात्मक प्रतिक्रिया आते ही इसे मूर्त रूप दिया जाएगा। फार्मा और ऑटोमोबाइल सहित कुछ इंडस्ट्रीज में कई भर्तियाँ नेशनल लेवल पर होती हैं और इसलिए राजस्थान सरकार के इस निर्णय के बीच में कई दिक्कतें हैं।

राजस्थान सरकार को डर है कि कहीं इस निर्णय को लेने के बाद निजी क्षेत्र राज्य में उद्योग लगाना ही कम न कर दें। इसलिए सरकार निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों से बातचीत कर के उन्हें समझाएगी और उनकी राय जानेगी। राज्य में विपक्षी नेताओं का कहना है कि ये फ़ैसला वोट बैंक के लिए लिया गया है। हालाँकि, कोई भी खुल कर इसके विरोध में बोलने को तैयार नहीं है।

6 राज्यों के मंदिरों और 10 स्टेशनों को बम से उड़ा दिया जाएगा: जैश-ए-मोहम्मद के पत्र के बाद अलर्ट जारी

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार बेइज्जत हो रहा पाकिस्तान अब आतंकियों का इस्तेमाल कर के भारत को डराने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने एक पत्र द्वारा कई भारतीय स्टेशनों और मंदिरों को बम से उड़ाने की धमकी दी है। जैश की धमकी के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और अलर्ट जारी किया गया है। रोहतक जंक्शन के सुप्रीटेंडेंट को भेजे पत्र में जैश ने कहा है कि 8 अक्टूबर को दशहरा के दिन 10 स्टेशनों और 6 राज्यों के मंदिरों को उड़ाने की धमकी दी है

पत्र में रोहतक जंक्शन, रेवाड़ी, हिसार, कुरुक्षेत्र, मुंबई सिटी, बंगलुरू, चेन्नई, जयपुर, भोपाल, कोटा, इटारसी रेलवे स्टेशनों और राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, एमपी, यूपी व हरियाणा सहित छह राज्यों के मंदिरों को निशाना बनाने की बात कही गई है। पत्र के बाद जीआरपी और आरपीएफ ने ट्रेनों की चेकिंग में तेज़ी लाई है और प्लेटफॉर्म्स पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

पत्र लिखने वाले ने ख़ुद की पहचान जैश-ए-मोहम्मद के एरिया कमांडर मसूद अहमद के रूप में बताई है। उसने लिखा है कि जैश जेहादियों की मौत का बदला ज़रूर लेंगे। पत्र में लिखा गया है, “हज़ारों की संख्या में जेहादी हिंदुस्तान को तबाह कर देंगे। चारों तरफ ख़ून ही ख़ून होगा।” ख़ुफ़िया विभाग को भी कई ऐसे रिपोर्ट्स मिले हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि कई आतंकी भारत में बड़े हमले की साज़िश रच रहे हैं।

रोहतक जंक्शन के सुपरिटेंडेंट को जैश का भेजा गया पत्र

गुरुवार (सितम्बर 12, 2019) को ही जम्मू कश्मीर पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों को जम्मू क्षेत्र के कठुआ से गिरफ़्तार किया था। उनके पास से 6 एके असाल्ट राइफल समेत बड़ी संख्या में हथियार व गोला-बारूद भी जब्त किया गया था। आतंकियों की गिरफ़्तारी के बाद पुलिस ने बताया कि आतंकियों की गिरफ्तारी और हथियार की बरामदगी एक ट्रक से हुई है जो पंजाब से कश्मीर जा रहा था।

हिंदुत्व कहता है कि सीता को क़ैद करने के लिए बनी थी लक्ष्मण रेखा: देवदत्त ‘नालायक’ ने मारी पलटी

फ़र्ज़ी माइथोलॉजी एक्सपर्ट देवदत्त पटनायक ख़ुद को वेदों और पुराणों का ज्ञानी बताते हैं लेकिन सोशल मीडिया पर एक के बाद एक पकड़े जा रहे झूठ से उनकी पोल खुल रही है। अब देवदत्त पटनायक ने रामायण में वर्णित लक्ष्मण रेखा को लेकर विवादित बात कही है। हालाँकि, वे लक्ष्मण रेखा के मामले में ख़ुद कन्फ्यूज नज़र आ रहे हैं और अपने ही बयान से पलट रहे हैं। उन्होंने ट्वीट कर हिंदुत्व और हिंदुइज्म को लेकर अपनी राय रखी।

पटनायक ने कहा कि हिंदुत्व यह मानता है कि सीता को क़ैद में रखने के लिए लक्ष्मण रेखा बनाई गई थी जबकि हिंदुइज्म कहता है कि रावण को रोकने के लिए लक्ष्मण रेखा बनाई गई थी। देवदत्त पटनायक ने ऐसा ट्वीट करते समय हिंदुत्व पर निशाना साधा। इसके बाद लोगों ने उन्हें उनका ही एक पुनारा ट्वीट याद दिला दिया, जिसमें उन्होंने लक्ष्मण रेखा से जुड़ी कहानी को ही काल्पनिक करार दिया था।

देवदत्त पटनायक ने उस ट्वीट में कहा था कि ट्रोल ऐसा मानते हैं कि लक्ष्मण रेखा 10,000 वर्षों से भी ज्यादा पुराना सत्य है जबकि इतिहास कहता है कि लक्ष्मण रेखा का वर्णन वाल्मीकि रामायण में कहीं भी नहीं है। उन्होंने लक्ष्मण रेखा को एक ‘साहित्यिक उपकरण’ करार देते हुए कहा था कि इसका वर्णन 500 वर्ष पूर्व बंगाली रामायण में मिलता है। देवदत्त पटनायक एक तरफ़ कहते हैं कि लक्ष्मण रेखा रामायण में कहीं है ही नहीं, वहीं दूसरी तरफ हिंदुइज्म का हवाला देते हुए कहते हैं कि लक्ष्मण रेखा रावण को रोकने के लिए बनाया गया था।

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देवदत्त पटनायक को सोशल मीडिया पर लोग ‘देवदत्त नालायक’ और ‘देवदत्त खलनायक’ जैसे विशेषणों से भी नवाज़ चुके हैं। उन्होंने एक व्यक्ति की माँ को लेकर अपशब्द कहे थे। एक अन्य ट्विटर यूजर को उन्होंने कहा था कि उसके पूर्वज नरक में रो रहे हैं। इसके बाद उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा था कि वेदों में शिव का जिक्र कहीं भी नहीं है। लोगों ने उन्हें वेदों की ऋचाएँ याद दिलाई, जिसमें शिव जी का जिक्र है। वह महाभारत के प्रसंगों को भी तोड़-मरोड़ कर पेश कर चुके हैं।

370 पर सुनवाई: आज़ाद को परमीशन, फारूक पर सवाल, CJI ने कहा- जरूरत पड़ी तो खुद जाऊँगा J&K

जम्‍मू-कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 में बदलाव और उसके बाद के हालात पर हो रही सुनवाई के दौरान एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा, “ये मामला गंभीर है, मैं खुद हालात देखने श्रीनगर जाऊँगा।” दरअसल ये मामला बच्‍चों के शोषण से जुड़े मामले की सुनवाई का था। इसमें याचिकाकर्ता वकील ने कहा कि कश्‍मीर में बंद के चलते वकील हाईकोर्ट नहीं पहुँच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में वो खुद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से बात करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जम्‍मू कश्‍मीर हाईकोर्ट को नोटिस भी दिया है।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को कश्मीर जाने की इजाजत दे दी है। इस दौरान वह चार जिलों का दौरा कर सकते हैं। कोर्ट ने आजाद को श्रीनगर, बारामूला, अनंतनाग और जम्मू जाने की इजाजत दी है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि गुलाम नबी आजाद इस दौरान न ही कोई भाषण देंगे और न ही कोई सार्वजनिक रैली करेंगे। 

एमडीएमके के नेता वाइको की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फारूक अब्दुल्ला की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार से 30 सितंबर तक जवाब माँगा। सुनवाई के दौरान केंद्र ने बताया कि अब्दुल्ला को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत हिरासत में रखा गया है।

जम्मू-कश्मीर पर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा अनुच्छेद 370 के निरस्त हो जाने के बाद से एक गोली भी नहीं चलाई गई। केंद्र ने बताया कि प्रदेश के 88 प्रतिशत से अधिक थाना क्षेत्रों से प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। फिलहाल, कुछ स्थानीय प्रतिबंध लगे हैं। प्रतिबंधित इलाकों में पहुँच के लिए मीडिया को ‘पास’ दिए गए हैं और पत्रकारों को फोन और इंटरनेट की सुविधा भी मुहैया कराई गई है।

चिन्मयानन्द के खिलाफ SIT को सौंपे गए 43 क्लिप्स: नहाती हुई छात्रा का बनाया वीडियो, ब्लैकमेल कर किया रेप

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर की एक लॉ छात्रा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानन्द पर बलात्कार का आरोप लगाया था। अब छात्रा ने उन पर एक साल तक यौन शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया। छात्रा ने कहा कि जब वह नहा रही थी, तब चिन्मयानन्द ने उसका वीडियो बना लिया। इसी वीडियो के जरिए वह छात्रा को ब्लैकमेल करते रहे। आरोप है कि उन्होंने वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग कर छात्रा का रेप किया। इतना ही नहीं, चिन्मयानन्द ने रेप का वीडियो भी शूट किया।

पीड़िता के पिता ने कहा कि चिन्मयानन्द ने कई वीडियो शूट कर लिए थे और उसका इस्तेमाल करते हुए पीड़िता का रेप करते थे। अंततः पीड़िता ने एक हिडन कैमरे की मदद से उनके कुकृत्यों को रिकॉर्ड करने की ठानी। पीड़िता के एक दोस्त ने भी पूर्व केंद्रीय मंत्री के ख़िलाफ़ बयान देते हुए उन पर लगे आरोपों की पुष्टि की। पीड़िता के मित्र ने कहा:

“वह (पीड़िता) मेरे साथ उसी कॉलेज में पढ़ा करती थी। उसने मुझे अपनी समस्याओं के बारे में बताया था। उसने बताया कि उसे कॉलेज हॉस्टल में मुफ़्त में खाना वगैरह दिया जाता था लेकिन उसे इसका तनिक भी अंदाज़ा नहीं था कि ये सब क्यों हो रहा है? बाद में उसने मुझे बताया कि जब वह नहाने गई, तब उसका एक वीडियो रिकॉर्ड कर लिया गया और अब उसी वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल किया जा रहा है।”

स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) इस मामले की जाँच कर रही है। आरोपों की पुष्टि के लिए पीड़िता के पिता ने एसआईटी को 43 वीडियो क्लिप्स सौंपी है। पीड़िता के पिता ने कहा कि जौनपुर से सांसद रहे चिन्मयानन्द ने सबूत मिटाने की कोशिश की है। आरोप है कि चिन्मयानन्द ने पीड़िता के हॉस्टल के कमरे से कई सबूत मिटा दिए। एसआईटी ने सभी वीडियो क्लिप्स को फॉरेंसिक टीम को जाँच के लिए दिया है। इस मामले को देख रही इलाहबाद हाईकोर्ट की पीठ सोमवार (सितम्बर 23, 2019) को मामले की सुनवाई करेगी।

फॉरेंसिक टीम ने चिन्मयानन्द के कमरे से भी कुछ चीजें बरामद की थी। आज पीड़िता को कड़ी सुरक्षा के बीच शाहजहाँपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ उसका बयान दर्ज किया गया। पीड़िता का आरोप है कि चिन्मयानन्द ने कई अन्य छात्राओं का भी बलात्कार किया है। चिन्मयानन्द के वकील ने कोर्ट में कहा था कि मसाज या मालिश कराना कोई अपराध नहीं है।

‘The Hindu’ के चेयरमैन बने जज: चिदंबरम को कॉन्ग्रेस के कार्यक्रम में दी क्लीन चिट, कहा- कोई सबूत नहीं

कस्तूरी एंड संस के अध्यक्ष और ‘द हिंदू’ ग्रुप के मालिक एन राम ने दावा किया है कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम निर्दोष हैं और हत्या की आरोपित इंद्राणी मुखर्जी के बयान के अलावा उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है।

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एन राम ने ये बातें रविवार (15 सितंबर, 2019) को चेन्नई में तमिलनाडु कॉन्ग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित बैठक में कही। बता दें कि यह बैठक चिदंबरम की गिरफ्तारी की निंदा करने के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें एन राम ने भी हिस्सा लिया और चिदंबरम के पक्ष में बात की। एन राम ने कहा कि चिदंंबरम ने कुछ भी गलत नहीं किया है। उन्होंने चिदंबरम के जेल भेजे जाने को सरासर गलत और अन्यायपूर्ण बताया। एन राम ने कहा कि पी चिदंबरम को जेल भेजकर बहुत बड़ा अन्याय किया गया।

इतना ही नहीं, चिदंबरम को जेल भेजने के लिए एन राम देश की अदालतों की आलोचना करने से भी नहीं चूके। उन्होंने कहा कि इस गिरफ्तारी की साजिश करने वालों का मकसद सिर्फ और सिर्फ चिदंबरम की आजादी पर बंदिश लगाना था और दुर्भाग्यवश देश की सबसे बड़ी अदालतें भी इसकी चपेट में आ गईं।

चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट की आलोचना करते हुए एन राम ने कहा, “असल में उन्होंने अभियोजन के मामले को स्वीकार किया है। 7 महीनों तक फैसला सुरक्षित रखा गया। जज के रिटायरमेंट से ठीक पहले फैसला आया, जिसकी वजह से चिदंबरम को अपील करने का मौका नहीं मिला।”

राम ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि जस्टिस आर भानुमति और बोपन्ना के आदेश में तथ्यात्मक गलतियाँ थीं। उन्होंने दावा किया कि न्यायाधीशों ने कहा कि चिदंबरम की संपत्ति जब्त कर ली गई है, जो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने जल्द ही एक समीक्षा याचिका दायर करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

एन राम ने दावा किया कि हत्या के आरोपित इन्द्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी के बयानों को छोड़कर चिदंबरम पर आरोप लगाने का कोई आधार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को चिदंबरम को जमानत देनी चाहिए क्योंकि किसी भी दस्तावेज को दबाए जाने या उससे छेड़छाड़ किए जाने का कोई खतरा नहीं था। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्म की बात है कि इस मामले में न्याय नहीं मिला।

वहीं, कॉन्ग्रेस सांसद के जयकुमार और पीटर अल्फोंस ने भी आरोप लगाया कि चिदंबरम को बीजेपी द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। पीटर अल्फोंस ने इसे ‘कानूनी नहीं, राजनीतिक लड़ाई’ करार दिया। उन्होंने कहा कि एक ऐसी सरकार जो अपने पार्टी के लोगों के खिलाफ दर्ज बड़े मामलों में कोई ऐक्शन नहीं लेती, वह उस शख्स के खिलाफ उन मामलों पर एक्शन ले रही है, जिसने कोई गलती नहीं की और वह एक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ हैं।

इसके अलावा, द्रविड़ इयाक्का थमीझार पेरवई के अध्यक्ष सूबा वीरपांडियन ने कहा कि कॉन्ग्रेस पर एक मनोवैज्ञानिक युद्ध की छाप छोड़ी जा रही है, ताकि वह फिर से उठकर खड़ा न हो सके।

अयोध्या विवाद: सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्वाणी अखाड़े ने SC के पैनल को लिखा पत्र, पुनः मध्यस्थता की माँग

उच्चतम न्यायालय में इस समय राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद मामले की पिछले 23 दिनों से नियमित सुनवाई हो रही है। इस बीच, सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्वाणी अखाड़ा ने एक बार पुनः मध्यस्थता की माँग उठाई है और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त मध्यस्थता पैनल के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश कलीफुल्ला को पत्र लिखा है। दोनों पक्ष एक बार फिर से कोर्ट के बाहर बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझाना चाहते हैं। 

खबर के मुताबिक, मुस्लिम पक्षकारों में से कुछ का मानना है कि राम जन्मभूमि हिंदुओं को देने में कोई आपत्ति नहीं है, मगर इसके बाद हिन्दू किसी अन्य मस्जिद या ईदगाह पर दावा न करें। इसके साथ ही उनका कहना है कि एएसआई के कब्जे वाली सारी मस्जिदें नियमित नमाज के लिए वापस से खोल दी जाएँ।

गौरतलब है कि, इससे पहले भी अयोध्या मामले पर सर्वोच्च न्यायालय ने पहले मध्यस्थता से हल निकालने के लिए पैनल बनाया था। 155 दिनों तक इसके लिए प्रयास भी हुए, किन्तु कोई हल नहीं निकला। सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यस्थता के लिए जो पैनल बनाया था उसमें तीन लोग शामिल थे। इसमें शीर्ष अदालत के जज एफएम कलीफुल्ला, सीनियर वकील श्रीराम पंचू और श्री श्री रविशंकर को शामिल किया गया था, किन्तु मध्यस्थता पैनल से कोई समाधान नहीं निकल सका, जिसके बाद अदालत ने प्रतिदिन सुनवाई कर मामले का फैसला लिया है और 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई जारी है।

बता दें कि, यह विवाद अयोध्या की 2.77 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर है। 5 जजों की संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है, जिसमें जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड, अशोक भूषण और एस. अब्दुल नजीर भी शामिल हैं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई इसके अध्यक्ष हैं।

कश्मीर पर बवाल, चीन पर मौन: इमरान ने कहा- उइगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार के बारे में नहीं जानता

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने मजहब को लेकर अपना असली चेहरा दिखा दिया है। वे कश्मीर के नाम पर अपनी नाकामियों को दबाने के लिए पूरी दुनिया के मुस्लिमों को उकसाने और भड़काने की चालें तो चल रहे हैं, लेकिन जब बात चीन के उइगर मुस्लिमों की समस्या को लेकर उठी है तो वे कह रहे हैं कि उनके बारे में जानने की उनको फुर्सत ही नहीं है। समुदाय विशेष के हिमायती बनने वाले, कश्मीर के कट्टरपंथियों के मानवाधिकार की ‘चिंता’ करने वाले इमरान खान को पूरी दुनिया के मुस्लिमों का दुख दिखाई देता है, लेकिन वो उइगर मुस्लिमों को वह जानते तक नहीं।

दरअसल, अलजजीरा के इंटरव्यू के दौरान जब उनसे चीन में वहाँ की सरकार द्वारा सताए जा रहे उइगर मुस्लिमों के बारे में पूछा गया, तो इमरान इस सवाल को टालने लगे। उन्होंने कहा कि वो इस समस्या के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं। इमरान से अल जजीरा के पत्रकार मोहम्‍मद जमजूम ने जब सवाल किया , “पाकिस्तान चीन के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है, क्या आपने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कभी उइगरों के उत्पीड़न के मुद्दे पर चर्चा की है?”

इमरान ने इसका जवाब देते हुए कहा, “नहीं, मैंने नहीं की है, क्योंकि इसके बारे में मुझे ज्यादा नहीं पता है।” आगे इमरान ने कहा, “हम अभी अपनी आंतरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, इस मुद्दे के बारे में मुझे सच में ज्यादा जानकारी नहीं है। हम एक साल से सरकार में हैं, हम अर्थव्यवस्था को सुधारने में लगे हैं और अब कश्मीर का मुद्दा है। हम कई समस्याओं से घिरे हुए हैं। लेकिन मैं चीन के लिए एक बात कहूँगा, हमारे लिए चीन सबसे अच्छा दोस्त है।”

इसके अलावा, इस इंटरव्यू में इमरान खान ने स्वीकार किया है कि यदि भारत के साथ परपंरागत युद्ध हुआ तो उनके देश को मुॅंह की खानी पड़ेगी। उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान ने भारत के साथ परंपरागत युद्ध लड़ा और वह हारने लगा तब उसके पास दो ही विकल्प होंगे, या तो वह आत्मसमर्पण करे और या फिर आखिरी दम तक आजादी की लड़ाई लड़े।” इमरान खान ने कहा कि उन्हें मालूम है कि पाकिस्तानी अपनी आजादी की लड़ाई अंतिम सॉंस तक लड़ेंगे।