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PAK ने आम लोगों को निशाना बनाकर दागा मोर्टार, सेना ने जोखिम उठाकर किया नष्‍ट, देखें VIDEO

पाकिस्तान की नापाक हरकतों को ध्वस्त करने की कड़ी में भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा के पास एक मोर्टार के गोले को नष्ट किया। ये 120 मिमी का मोर्टार आम लोगों को निशाना बनाने के लिए पाकिस्तान की ओर से दागा गया था। जानकारी के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को सीमा पार हो रही गोलीबारी के दौरान मेंढर सेक्टर के बालाकोट इलाके में ये मोर्टार का गोला एक घर के पास गिरा था, जिसके बाद कुछ ग्रामीणों द्वारा इसकी जानकारी सेना को दी गई।

सैन्य अधिकारी के अनुसार, सेना के विशेषज्ञ तुरंत घटनास्थल पर पहुँचे तो देखा मोर्टार के इस गोले में विस्फोट नहीं हुआ था। जिसे सेना के विशेषज्ञों ने सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया है। इस घटना का वीडियो भी भारतीय सेना द्वारा जारी किया गया है।

बता दें कि पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने शनिवार को बालाकोट सहित कई गांवों में अग्रिम चौकियों को निशाना बनाते हुए संघर्ष विराम का उल्लंघन किया जिसके बाद भारतीय सेना ने उन्हें करारा जवाब दिया।

बता दें कि इससे पहले विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में मीडिया को यह जानकारी दी थी कि पाकिस्‍तान की ओर से इस साल अब तक 2050 बार सीजफायर का उल्‍लंघन हो चुका है। इसमें भारत के 21 आम नागरिकों की जान जा चुकी है। भारत ने पाकिस्‍तान को चेतावनी दी है कि वह अपनी सेनाओं पर काबू रखे और 2003 में बने शांति समझौते का पालन करे।

‘मुस्लिमों के ‘मालिकाना हक’ से ऊपर है हिन्दुओं का मौलिक अधिकार, नवम्बर में हमारे पक्ष में फैसला’

बीजेपी राज्य सभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने रविवार (सितंबर 15, 2019) को अयोध्या में विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण के समर्थन में कहा कि हिंदुओं के मौलिक अधिकार मुस्लिमों के संपत्ति के अधिकार से ऊपर है। वह अपने 80वें जन्मदिन के मौके पर एक कार्यक्रम में शिरकत करने अयोध्या पहुँचे थे। 

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, “भगवान राम के जन्म स्थान पर जो मंदिर है उसे हटाया नहीं जा सकता। हिंदुओं को पूजा करने का मौलिक अधिकार मुस्लिमों के संपत्ति के अधिकार से ऊपर है। जब भी दोनों के बीच कोई विवाद होता है, तो सुप्रीम कोर्ट हमेशा मौलित अधिकारों के पक्ष में फैसला सुनाता है। मुझे विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय नवंबर में हमारे पक्ष में अपना फैसला सुनाएगा।”

स्वामी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद नवंबर में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि विवादित जगह पर राम मंदिर बनाया जाएगा। स्वामी ने आगे कहा, “मैं यह लंबे समय से कहता आ रहा हूँ कि हम जीतेंगे। विवादित स्थल पर नमाज अदा करके कोई मेरा मौलिक अधिकार नहीं छीन सकता। जब नवंबर में कोर्ट का फैसला आएगा, तो लोग जश्न मनाना शुरू कर देंगे।”

बता दें कि, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ अयोध्या में 2.77 एकड़ भूमि के स्वामित्व से संबंधित विवादित मामले में हर दिन सुनवाई कर रही है। इस साल के अंत में फैसला आने की संभावना है। 6 दिसंबर 1992 को इस स्थान पर बनाए गए 16वीं सदी के बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया था।

भोपाल के मदरसे में जंजीर से बँधा मिला बच्चा: दीनी तालीम के नाम पर भीख भी मॅंगवा रहे मौलवी

मदरसों में बच्चों का केवल यौन शोषण ही नहीं होता। ज्यादतियों की लिस्ट बेहद खौफनाक है। बर्बरता ऐसी कि इंसानियत शर्मा जाए।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार यानी 15 सितंबर को पुलिस ने दो बच्चों को प्रताड़ना से मुक्त कराते हुए एक मदरसे के संचालक और उसके सहायक को गिरफ्तार किया। एक बच्चे की उम्र 10 साल और दूसरे की 7 साल है। 10 साल का बच्चा चेन से बॅंधा था और उसे आजाद कराने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल करना पड़ा।

मामले का खुलासा तब हुआ जब दोनों बच्चे रोते हुए बेंच से बॅंधे हुए घसीटते हुए मदरसे से निकले। सड़क पर दोनों को देख लोगों ने पुलिस को खबर की। राज्य मदरसा बोर्ड के साथ तो यह मदरसा पंजीकृत नहीं है, लेकिन एक पंजीकृत शैक्षणिक सोसायटी इसका संचालन करती है। इस मदरसे में करीब 200 बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें से 22 वहीं रहते थे।

भोपाल का मामला तो सामने आ गया और बच्चों की जान बच गई। लेकिन, ज्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता। दीनी तालीम के नाम पर चल रहे मदरसे बच्चों को भिखारी तक बना रहे हैं। उन्हें जंजीरों में बॉंध कर रखा जाता है। उनकी पिटाई की जाती है। गुलामों सरीखा सलूक उनके साथ होता है।

ऐसा केवल भारत में ही नहीं होता है। अफ्रीकी देश सेनेगल जहॉं की डेढ़ करोड़ की आबादी में से 90 फीसदी लोग मजहब विशेष से हैं, वहॉं के मदरसों के अमानवीय बर्ताव सुन देह में सिहरन पैदा हो जाती है।

सेनेगल में मदरसों को डारा, उनमें पढ़ने वाले बच्चों को तालिब और पढ़ाने वाले मौलवी को माराबू कहते हैं। डारा में कुरान के अलावा शराफत भी सिखाई जाती है। यूॅं तो शराफत का मतलब विनम्रता होता है, लेकिन डारा शराफत के नाम पर बच्चों को भीख मॉंगने के लिए मजबूर करते हैं।

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक सेनेगल में करीब 1 लाख तालिब भीख मॉंग रहे हैं। ऐसे ज्यादातर तालिब की उम्र 12 साल से कम है। कुछ तो 4 साल के ही हैं। इसी संस्था ने 2010 के अपने अध्ययन में अनुमान लगाया था कि सेनेगल के मदरसों में पढ़ने वाले करीब 50 हजार बच्चे भीख मॉंग रहे हैं। यानी 10 से भी कम साल में इनकी संख्या दोगुनी हो चुकी है।

वैसे, इसके खिलाफ कानून सेनेगल करीब 15 साल पहले ही बना चुका है। ह्यूमन राइट्स वॉच और सेनेगल के मानवाधिकार समूहों के संगठन पीपीडीएच की अपील के बाद हाल में राष्ट्रपति मैकी साल ने बच्चों को सड़कों से वापस लाने और उनसे भीख मॅंगवाने वाले मौलवियों की गिरफ्तारी के आदेश भी दिए हैं। लेकिन, इससे हालात बदलने की बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं की जा रही।

इसका कारण समुदाय विशेष बहुल समाज में मुल्लों का दबदबा है। बताया जाता है कि मदरसों में बच्चों को खाना-पीना मिल जाता है। कुछ मदरसे बीमार होने पर इलाज भी करा देते हैं। इसलिए सब कुछ जान कर भी गरीब परिवार के लोग बच्चों को डारा भेज देते हैं।

असल में, मदरसों में आने वाले ज्यादातर बच्चों की आर्थिक पृष्ठभूमि कमजोर होती है और इसी का फायदा उठाया जाता है। भोपाल के मामले में भी यह नजर आता है। पुलिस के मुताबिक मुक्त कराए गए 10 साल के बच्चा का पिता मजदूर है। वहीं, 7 साल की उम्र का जो बच्चा है उसकी मॉं को पिता तलाक दे चुके हैं। उसकी मॉं घरों में काम कर किसी तरह गुजारा करती है। बच्चों को खाने-पिलाने की चिंता से मुक्ति के लिए लोग मदरसे में भेज देते हैं। साथ ही यह भी उम्मीद रहती है कि मदरसे में पढ़कर उनका बच्चा देर-सबेर इमाम बन जाएगा।

मदरसे रेप के अड्डे और मुल्लों का डर
मदरसे में अमानवीय बर्ताव की इंतहा

इसलिए, अक्सर बच्चों के साथ होने वाली ज्यादतियों का पता चलने पर भी अम्मी-अब्बू खामोश रह जाते हैं। इसके अलावा धर्म और मौलवियों का खौफ भी चुप्पी का बड़ा कारण है।

मौलवियों के खौफ के बारे में बताते हुए सेनेगल के एक वकील ने ह्यूमन राइट्स वॉच को बताया- एक पीड़ित तालिब को माराबू ने भरी अदालत के सामने मारने की धमकी दी। बाद में पीड़ित पलट गया और मामला खत्म हो गया।

डारा में बच्चे किस हालात में रहते हैं इसके सबूत फोटोग्राफर मारियो क्रूज की फोटो बुक ‘Talibes: Modern Day Slaves‘ में मौजूद हैं। तस्वीरें देख आपकी रूह कॉंप जाएगी। इन तस्वीरों के लिए क्रूज को अपने जान जोखिम में डालने पड़े थे।

हृयूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट बताती है कि बच्चों से भीख मॅंगवाकर कुछ मौलवी साल भर में करीब एक लाख डॉलर कमा लेते हैं। आठ साल के डेम्बा के अनुसार- एक मौलवी ने मुझ से रात भर सड़कों पर भीख मॅंगवाई। सुबह एक नशेड़ी ने सारा पैसा छीन लिया।

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार बच्चे भीख में पर्याप्त पैसा नहीं लाते तो उनकी मौलवी बुरी तरह से पिटाई करते हैं। 10 साल के सुलेमान का कहना है- जब तक मैं कुरान सीख नहीं लेता अपने मॉं-बाप से नहीं मिल सकता। मुझे माराबू को 200 फ्रांक लाकर देने होते हैं, नहीं तो मेरी पिटाई होती है। एक अन्य तालिब मूसा ने बताया- मेरे माता पिता को पता है कि मैं माराबू को पैसा देने के लिए भीख मॉंगता हूॅं। वे इसके खिलाफ कुछ नहीं करते। मुझे भीख मॉंगना पसंद नहीं। लेकिन कोई चारा नहीं है।

प्रताड़ना से तंग आकर बहुत सारे बच्चे डारा से भाग भी जाते हैं। लेकिन, इससे उनकी परेशानियों का अंत नहीं होता, क्योंकि मदरसे भीख मॉंगने के अलावा उन्हें कुछ और सिखाते नहीं। हृयूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट में डकार के एक डारा से 2018 में भागे तालिब के हवाले से कहा गया है- मुझे डारा पसंद नहीं। वहॉं हमेशा पिटाई होती है। कुरान याद न हो तो भी पिटाई। पैसे लेकर नहीं आएँ तब भी पिटाई। मौलवी तब तक मारते हैं जब तक मौत का एहसास न हो।

डॉयचे वेले के अनुसार राहत संगठन मेसन ड दे ला गार के संस्थापक ईसा कूयाते एक बच्चे की कहानी सुनाते हुए रोने लगते हैं। 8 साल के एक बच्चे ने उन्हें अपनी आपबीती बताई। मदरसे से भागे इस बच्चे का सड़क पर रात में बलात्कार किया गया। कूयाते ने संयोग से उसे बचा लिया। 13 साल का न्गोरसेक डारा से भागने के बाद सेंट लुई शहर में कचरे के डब्बे में खाना खोजता राहत संगठनों को मिला था। उसने कहा- मैं डारा से भाग गया, क्योंकि अब बर्दाश्त नहीं होता।

हृयूमन राइट्स वॉच की ताजा रिपोर्ट में 2017-2018 के बीच डारा में पिटाई, यौन शोषण और भीख मॉंगने से हुई 16 बच्चों की मौत का भी जिक्र है। इसके मुताबिक सजा के तौर पर तालिब को जेल की कोठरी जैसे कमरों में हफ्तों या महीनों तक बंद रखा जाता है। बच्चे भागे नहीं इसलिए उन्हें जंजीर से बॉंध दिया जाता है। भोपाल में गिरफ्तार किए गए मदरसे के संचालक ने भी पुलिस को बताया कि 10 साल की उम्र का बच्चा एक बार बगैर बताए मदरसे से निकल गया था। इसके बाद से उसे जंजीर से बॉंधकर रखा जाता है।

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार सेनेगल में जब-जब हल्ला होता है पुलिस बच्चों को सड़क से उठाकर ले जाती है। लेकिन, उनको भीख मॉंगने के लिए मजबूर करने वाले मौलवियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। कभी-कभार कार्रवाई होती भी है तो प्रभावशाली मौलवी उसके विरोध में उठ खड़े होते हैं।

ऐसे में मदरसों के बच्चों की त्रासदी का अंत होता नहीं दिख रहा। जैसा कि ह्यूमन राइट्स वॉच की एसोसिएट डायरेक्टर (अफ्रीका) कोर्नी डुफका कहती हैं- तालिब गलियों में भटक रहे हैं। भयंकर यातना झेल रहे हैं। शोषण से मर रहे हैं।

POK छोड़े पाकिस्तान, जम्मू कश्मीर पूरी तरह भारत का हिस्सा: लंदन के MP ने पाक को दिया झटका

लंदन स्थित हैरो ईस्ट के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू कश्मीर पर खरी-खरी सुनाई है। ब्लैकमैन ने साफ़ कर दिया कि पाकिस्तान को पीओके छोड़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जम्मू कश्मीर पूरी तरह भारतीय गणराज्य का हिस्सा है। बॉब ब्लैकमैन के बयान से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेइज्जती का रिकॉर्ड बना रहे पाकिस्तान को नया झटका लगा है। शनिवार (सितम्बर 12, 2019) को कश्मीरी पंडितों की एक सभा को सम्बोधित करते हुए सांसद बॉब ब्लैकमैन जम्मू कश्मीर पर यूएन रेजॉल्यूशन की भी चर्चा की।

यूएन रेजॉल्यूशन को लागू करने की माँग पाकिस्तान भी करता रहा है। शुरुआत में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की माँग ठुकरा दी थी लेकिन अब वह हमेशा इसकी माँग करता है। बॉब ब्लैकमैन ने याद दिलाया कि यूएन की रिजॉल्यूशन के मुताबिक़, सबसे पहले पाकिस्तान और उसकी फ़ौज को कश्मीर छोड़ना पड़ेगा, जिससे पूरे राज्य का एकीकरण हो सके। इस कार्यक्रम में भारतीय उच्चायुक्त रूचि घनश्याम भी उपस्थित थीं।

कश्मीरी पंडितों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने काफ़ी अच्छी प्रस्तुतियाँ दी, जिनकी प्रशंसा रूचि ने भी की। उच्चायुक्त ने बॉब ब्लैकमैन को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। बता दें कि बॉब ब्लैकमैन कंजर्वेटिव पार्टी की ‘1922 कमिटी (प्राइवेट मेंबर्स कमिटी)’ के जॉइंट एग्जीक्यूटिव सेक्रटरी हैं और वह 2012 से ही इस पद पर बने हुए हैं। लंदन के अनुभवी नेताओं में से एक ब्लैकमैन पिछले 9 साल से हैरो ईस्ट के सांसद बने हुए हैं।

बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू कश्मीर के सम्बन्ध में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को भी पत्र लिखा था। बॉब के पत्र का जवाब देते हुए ब्रिटिश पीएम ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री इस जयशंकर से बात की है। उन्होंने साफ़ किया कि जम्मू कश्मीर भारत-पाक्सितान के बीच का मुद्दा है और ब्रिटेन का शुरू से यही मानना रहा है। बॉब ब्लैकमैन कश्मीरी पंडितों को उनकी मातृभूमि से निकाल बाहर किए जाने के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते रहे हैं।

इससे पहले सांसद बॉब ने लेबर पार्टी के कुछ सांसदों को हिन्दू-विरोधी करार देते हुए याद दिलाया था कि अनुच्छेद 370 हटाना भाजपा का चुनावी वादा था और उसे अपने घोषणा-पत्र के वादों को पूरा करने का पूरा हक है। उन्होंने यह भी याद कहा था कि यह मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल है और लेबर पार्टी के सांसदों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह अबकी वह पिछली बार से भी अधिक मजबूत बहुमत लेकर सत्ता में आए हैं। सांसद बॉब ने पूछा था कि क्या एक लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अपने वादे पूरा करने का अधिकार नहीं है?

जेठ ने किया बलात्कार, पति से शिकायत करने पर पीड़िता को मिला तीन तलाक

देश में महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए बनाए गए सख्त कानूनों के बावजूद भी इस तरह के अपराधों में कमी नहीं आ रही है। उत्तर प्रदेश में सहारनपुर जिले के बेहट थानाक्षेत्र में एक महिला का उसके जेठ (पति के बड़े भाई) द्वारा बलात्कार का मामला सामने आया है। जब पीड़िता ने इस बारे में अपने पति से इसकी शिकायत की, तो उसके पति ने उसे तीन तलाक दे दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोप है कि इस घटना से पहले ससुराल के लोगों ने महिला को धमकी दी थी कि अगर उसने जेठ द्वारा बलात्कार की बात किसी को बताई तो उससे तीन तलाक के जरिए रिश्ता तोड़ लिया जाएगा।

इस मामले में पुलिस के पास शिकायत पीड़िता के भाई ने की है। एसपी देहात विद्यासागर मिश्रा ने बताया कि थाना बेहट में एक तहरीर आई है, जिसमें एक गाँव के युवक ने कहा है कि उसकी बहन के साथ 20 दिन पहले उसके जेठ ने बलात्कार किया था।

शिकायत के मुताबिक, पीड़िता के भाई का कहना है कि उसकी बहन ने जब अपने मायके वालों को इसकी शिकायत की, तो उसके पति ने उसे तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया। पीड़िता के भाई ने थाने में उसके पति, जेठ, सास और जेठानी के खिलाफ शिकायत दी है। पुलिस मामले की जाँच में लगी हुई है।

मियाँ मिट्ठू के नेतृत्व में भीड़ ने हिन्दू शिक्षक को पीटा, स्कूल और मंदिर में मचाई तोड़फोड़

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार लगातार जारी है। कट्टरपंथियों ने सिंध के घोटकी इलाक़े में न सिर्फ़ एक मंदिर को तोड़ डाला बल्कि एक हिन्दू शिक्षक की भी पिटाई की। सिंध में जबरन इस्लामिक धर्मान्तरण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और ख़ुद पाकिस्तान की मानवाधिकार एजेंसी ने माना है कि अकेले दक्षिणी सिंध में सिर्फ़ 2018 में ही 1000 से ऊपर जबरन धर्मान्तरण के मामले सामने आ चुके हैं। अभी तक पाकिस्तान सरकार की तरफ से इसके रोकथाम के लिए कोई कार्य नहीं किया गया है।

ताज़ा मामले की बात करें तो लोगों ने हाईस्कूल के एक हिन्दू शिक्षक पर ईशनिंदा का ग़लत आरोप लगाया। शिक्षक पर यह आरोप उसी के द्वारा पढ़ाए जाने वाले एक छात्र ने ही लगाए थे। जैसे ही इलाक़े के अन्य कट्टरपंथियों को इसकी ख़बर लगी, उन्होंने भीड़ की शक्ल में मंदिर पर हमला बोल दिया। मंदिर में हिन्दू प्रतीक चिह्नों को अपमानित किया गया और जम कर तोड़फोड़ मचाई गई।

इस हमले में कट्टरपंथी नेता मियाँ मिट्ठू का हाथ सामने आया है। उसने न सिर्फ़ मंदिर बल्कि स्कूल को भी नुक़सान पहुँचाया। मियाँ मिट्ठू के नेतृत्व में भीड़ ने पुलिस के सामने शिक्षक की पिटाई की, मंदिर में तोड़फोड़ किया और स्कूल को नुक़सान पहुँचाया।

आश्चर्य की बात यह है कि ये सबकुछ पुलिस के सामने ही हुआ। जब मजहबी भीड़ शिक्षक की पिटाई कर रही थी और मंदिर में तोड़फोड़ कर रही थी, तब पुलिस भी वहाँ पर मौजूद थी। पुलिस तमाशबीन बन कर यह सब देखते रही। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और उनकी धार्मिक आस्था पर लगातार हो रहे हमलों के बीच वहाँ के प्रधानमंत्री ख़ुद को दुनिया भर में रह रहे समुदाय विशेष वालों का नुमाइंदा बताते हैं। वह भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होने का झूठा आरोप भी लगाते हैं।

पाकिस्तान में मंदिर की तोड़फोड़ वाली घटना के बाद घोटकी में तनाव पसरा हुआ है। हिन्दू परिवार डरे हुए हैं। प्रशासन की मिलीभगत के कारण वे शिकायत भी नहीं कर सकते। ख़ौफ़ का आलम यह है कि पाकिस्तान में इमरान ख़ान की सत्ताधारी पार्टी के पूर्व विधायक भी शरण लेने के लिए भारत आ चुके हैं।

CM खट्टर की घोषणा: असम के बाद अब हरियाणा में भी लागू होगा NRC

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) को लेकर चल रहे विवादों के बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने घोषणा की है कि असम की तरह हरियाणा राज्‍य में भी NRC लागू किया जाएगा। इसके अलावा CM खट्टर ने कहा कि हरियाणा में कानून आयोग के गठन करने पर भी विचार किया जा रहा है और समाज के प्रबुद्ध व्यक्तियों की सेवाएँ लेने के लिए अलग से एक स्वैच्छिक विभाग का गठन भी किया जाएगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (सितंबर 15, 2019) को पंचकूला में उन्होंने कहा कि अब हरियाणा में NRC लागू करेंगे, ताकि पता चल सके कि राज्य में कितने  शरणार्थी रहते हैं। CM खट्टर रविवार को अपनी सरकार के पिछले पाँच वर्षों के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों की जानकारी देने के लिए रष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे महाजनसंपर्क अभियान के अंतिम दिन पंचकूला में हरियाणा राज्य मानव अधिकार आयोग के पूर्व चेयरमैन न्यायमूर्ति एचएस भल्ला के सेक्टर 16 स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

खट्टर ने कहा कि परिवार पहचान पत्र पर हरियाणा सरकार तेजी से कार्य कर रही है और इसके आँकड़ों का उपयोग राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में भी किया जाएगा। उन्होंने न्यायमूर्ति एचएस भल्ला के प्रयासों की सराहना की कि रिटायर होने के बाद भी वह NRC डाटा का अध्ययन करने के लिए असम के दौरे पर जा रहे हैं।

देश में NRC ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है। असम में पिछले दिनों राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की लिस्ट जारी कर दी गई है। इस लिस्ट में 19 लाख से अधिक लोगों के नाम इस लिस्‍ट में नहीं है।

कॉन्ग्रेस के कार्यक्रम में जम कर चली कुर्सियाँ, बीच सभा में भागे ज्योतिरादित्य सिंधिया

पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की रैली में जम कर हुंड़दंग मचा। इंदौर में आयोजित रैली में अनुशासनहीन कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने ऐसा हंगामा किया कि नाराज़ सिंधिया बीच सभा में ही निकल गए। रविवार (सितम्बर 13, 2019) को आयोजित इस कार्यक्रम में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के ऊपर कुर्सियाँ फेंकी। एक दिन के दौरे पर इंदौर पहुँचे सिंधिया का कार्यकर्ताओं से मिलने का प्रोग्राम था। उनके स्वागत के लिए रंगून गार्डन में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

न सिर्फ़ निचले स्तर पर बल्कि मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के शीर्ष स्तर पर भी सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। कमलनाथ सरकार के मंत्री ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह पिछले दरवाज़े से राज्य सरकार चला रहे हैं। मामला सोनिया गाँधी तक पहुँचा, जहाँ से मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस में कलह की जाँच पार्टी की अनुशासन समिति को सौंप दी गई। पार्टी में गुना के पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और मुख्यमंत्री कमलनाथ के रूप में सत्ता के तीन धुर हो गए हैं।

सिंधिया की रैली की बात बात करें तो सारा हंगामा तब शुरू हुआ जब एक के बाद एक कार्यकर्ताओं ने मंच पर चढ़ना शुरू कर दिया। उस समय सिंधिया मंच पर ही मौजूद थे। होड़ लगा कर सिंधिया से मिलने मंच पर पहुँच रहे कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियाँ उछालनी शुरू कर दी। इस दौरान कई कुर्सियाँ टूट गईं और वहाँ कुर्सियों का ढेर लग गया।

मध्य प्रदेश में अभी सरकार और संगठन, दोनों के ही मुखिया कमलनाथ ही हैं। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन की सम्भावना को देखते हुए सिंधिया समर्थक लगातार शक्ति प्रदर्शन में लगे हैं। भोपाल में कॉन्ग्रेस दफ्तर के बाहर सिंधिया समर्थकों ने प्रदर्शन भी किया था। कमलनाथ सोनिया गाँधी से मिल कर इस्तीफे की पेशकश भी कर चुके हैं। सिंधिया ने कहा कि उनका सारा ध्यान महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव पर है।

अगर राम जन्मस्थान को लेकर आस्था है तो इस पर सवाल नहीं उठा सकते: सुप्रीम कोर्ट

अयोध्या ममले की सुनवाई करते करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ़-साफ़ कहा कि अगर श्रद्धालुओं की आस्था है कि यहाँ जन्मस्थान है तो इस पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी आस्था या विश्वास है कि वहाँ राम जन्मस्थान है तो इसे स्वीकार करना पड़ेगा। साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन को अपने ध्यान इस पर केंद्रित करने को कहा कि आख़िर राम जन्मस्थान को ‘न्यायिक व्यक्ति’ क्यों नहीं माना जा सकता? जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने हिन्दू पक्ष की इस दलील पर धवन से जवाब माँगा

उन्होंने राजीव धवन से उन सारे पहलुओं को स्पष्ट करने को कहा, जिसके आधार पर राम जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति नहीं माना जाना चाहिए। राजीव धवन ने कोर्ट में दावा किया था कि हिन्दुओं द्वारा प्राचीन काल से राम जन्मस्थान में आस्था होने के कोई सबूत नहीं हैं। मुस्लिम पक्ष ने दावा किया कि बाबरी मस्जिद में 1934 से लेकर 1949 तक नियमित नमाज़ पढ़ी जाती थी। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि इस फैक्ट को काटने के लिए किसी प्रकार का सबूत नहीं है।

मुस्लिम पक्ष की तरफ़ से वरिष्ठ वकील जफरयाब जिलानी भी पेश हुए। उन्होंने दलीलें रखते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद में जुमे के दिन अधिक लोग नमाज़ पढ़ने आते थे लेकिन प्रतिदिन मुस्लिम लोग यहाँ नमाज़ पढ़ने आया करते थे। वहीं राजीव धवन ने कहा कि स्कन्द पुराण और विदेशी तीर्थयात्रियों के अनुभवों के आधार पर इसे राम जन्मस्थान नहीं ठहराया जा सकता। हिन्दू पक्ष की पैरवी कर रहे वकील के पराशरण ने जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति मानने और वैसे ही अधिकार देने की बात कह केस का रुख मोड़ दिया था।

के पराशरण को सुप्रीम कोर्ट के कई जज भारतीय न्याय व्यवस्था का भीष्म पितामह कहते रहे हैं। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में स्कन्द पुराण का जिक्र, राम जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति मानना और घुमक्कड़ों के यात्रा वृत्तांतों को आधार बनाना जैसे दलीलों के कारण हिन्दू पक्ष अपनी मजबूत उपस्थिति रख रहा है। मुस्लिम पक्ष ने अपना सारा ध्यान ये साबित करने में लगाया कि वहाँ नमाज़ होता था कहा कि नमाज़ के लिए इमाम की नियुक्ति होती थी, जिसके कागज़ात अभी भी मौजूद हैं।

राजीव धवन ने अदालत में दावा किया कि पहले हिंदू बाहर के अहाते में पूजा करते थे, लेकिन दिसंबर 22-23, 1949 की रात रामलला की मूर्ति को अवैध तरीके से मस्जिद के अंदर शिफ्ट कर दिया गया।

J&K पाकिस्तान को देना चाहती हैं मलाला, पहले खुद घर लौटकर तो दिखाएँ: पूर्व No.1 शूटर हिना

विश्व की नंबर वन पिस्टल शूटर रहीं हिना सिद्धू ने नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफ़ज़ई को उनके दोहरे रवैये के लिए लताड़ लगाई है। दरसल, हिना ने मलाला के उस बयान का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने किसी कश्मीरी लड़की से बात करने का दावा किया था। मलाला के अनुसार, जम्मू कश्मीर की उस लड़की ने कहा:

“मैं ख़ुद को निरर्थक और खिन्न महसूस कर रही हूँ। ऐसा इसीलिए क्योंकि मैं स्कूल नहीं जा सकती। 12 अगस्त को परीक्षाएँ थीं और मैं स्कूल नहीं जा पाई। अब मेरा भविष्य असुरक्षित है। मैं एक लेखिका बनना चाहती हूँ और स्वतंत्र जीवन व्यतीत करना चाहती हूँ। मैं एक सफल कश्मीरी महिला बनना चाहती हूँ। जैसा चल रहा है, उस हिसाब से यह और कठिन होता जा रहा है।”

2013 और 2017 विश्वकप में पहले स्थान पर रह कर गोल्ड मेडल जीत चुकीं हिना ने कहा कि मलाला चाहती हैं कि जम्मू-कश्मीर क्षेत्र पाकिस्तान को दे दिया जाए। उन्होंने मलाला को याद दिलाया कि ये वही पाकिस्तान है, जहाँ कभी उनकी जान जाते-जाते बची थी। बता दें कि पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज़ उठाने वाली मलाला को कट्टरपंथी आतंकियों ने गोली मार दिया था, जिसके बाद वह कई दिनों तक अस्पताल में थीं।

2010 और 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुकीं पिस्टल शूटर हिना सिद्धू ने मलाला पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए कितने मौके हैं, इसे वह बेहतर जानती हैं। उन्होंने मलाला को याद दिलाया कि उन्हें अपने देश पाकिस्तान को छोड़ कर भागना पड़ा था, जिसके बाद से वह कभी पाकिस्तान नहीं लौटी हैं। हिना ने मलाला से कहा कि पहले वह पाकिस्तान जाकर एक उदाहरण पेश करें।

ज्ञात हो कि मलाला ने बिना सबूतों के दावा किया कि बच्चों सहित 4,000 लोगों को गिरफ़्तार कर जेल में बंद कर दिया गया है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि बच्चे 40 दिनों से स्कूल नहीं जा पाए हैं और लड़कियाँ घर से निकलने में डर रही हैं।