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लिव इन लाए अवसाद, अध्यात्म से बरसे खुशियॉं: 43255 महिलाओं पर सर्वे

महिलाएँ कब खुश होती हैं? ये एक ऐसा सवाल है, जिसपर सोशल मीडिया पर आपको कई जोक बनते नजर आ जाएँगे, लेकिन वास्तविकता में शायद ही कहीं आपको इसका सही उत्तर मिले। ऐसी स्थिति में जब हर कोई अपने अनुभव के अनुसार महिलाओं के खुश होने के पैमाने बताता नजर आता है, उस समय राष्ट्रीय सेवक संघ से जुड़े एक संघठन ने ऐसा सर्वे पेश किया है, जिसमें 43,255 से ज्यादा महिलाओं ने खुद इस बड़े सवाल के जवाब का खुलासा किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आज दिल्ली में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा एक सर्वेक्षण आधिकारिक रूप से रिलीज किया जाना है। जिसके निष्कर्ष बताते हैं कि 90 प्रतिशत महिलाएँ जो एकांतवासी हैं, जिनका न तो कोई परिवार है और न ही कोई आमदनी, वो सबसे ज्यादा खुशमिजाज हैं। इसके अलावा शादीशुदा महिलाएँ भी इस सर्वे के अनुसार प्रसन्न रहने वालों की सूची में आती हैं, जबकि लिव-इन रिलेशन में रहने वाली लड़कियाँ सबसे नाखुश रहती हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ये सर्वेक्षण 2017-18 में संघ द्वारा मान्यता प्राप्त पुणे आधारित रिसर्च सेंटर दृष्टि स्त्री अध्य्यन प्रबोधन केंद्र द्वारा करवाया गया था। यह सर्वेक्षण साक्षात्कार आधारित था और इसमें 18 वर्ष से ऊपर की महिलाओं से बात की गई थी। इसमें 29 राज्य, 5 केंद्र शासित प्रदेश और 465 जिले की लगभग सभी धर्म की महिलाओं को शामिल किया गया था।

इस सर्वेक्षण के जरिए मालूम चला कि सर्वे में शामिल लगभग 80 प्रतिशत महिलाएँ ‘खुश’ और ‘बहुत खुश’ वाले स्तर पर हैं, जबकि धार्मिक क्षेत्र से जुड़ी हुई महिलाएँ सबसे ज्यादा सुखी हैं।

जानकारी के मुताबिक ये सर्वेक्षण शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और पोषण के आधार पर था। जिसमें 2011 की जनगणना के समय महिला शिक्षा दर के 64.63% होने का हवाला देकर बताया गया कि इन आँकड़ों में 6 साल बाद काफी उछाल आया और ये प्रतिशत 79.63 तक पहुँच गए। जिसका मतलब है कि कुछ महिलाएँ अब स्नातक से ऊपर जाकर भी शिक्षा को ग्रहण कर रही हैं। इस सर्वेक्षण के मुताबिक आज भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वाली महिलाओं में शिक्षा दर का अभाव है, लेकिन आरक्षण नीति के तहत उन्हें शिक्षा क्षेत्र में एक सहारा मिल रहा है, और इसके जरिए उच्च शिक्षा ग्रहण करने में भी उन्हें मदद मिल रही है।

इसके अलावा जानकारी के अनुसार इस सर्वेक्षण में शिक्षा संबंधी सूची में महिलाओं की खुशी और सलामती के मद्देनदर सबसे संतुष्ट पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी धारी महिलाओं को पाया गया, जबकि अशिक्षित महिलाओं में इस सूची का सबसे कम प्रतिशत मिला।

यहाँ बता दें कि इस सर्वे में उत्तर भारत की महिलाओं की खराब सामाजिक और आर्थिक स्थिति (Social Status) का भी खुलासा हुआ है। सर्वे के अनुसार अभी भी उत्तर भारत की महिलाएँ भारत के अन्य हिस्सों के मुकाबले आर्थिक रूप से कम आत्मनिर्भर हैं। उत्तर भारत में देश के बाकी हिस्सों के मुकाबले कम महिलाओं के पास अपने बैंक खाते हैं।

जबकि, स्वास्थ्य से जुड़ी बात करें तो देश की महिलाओं में आर्थराइटिस की समस्या सबसे ज़्यादा है जो उन्हें बढ़ती उम्र के साथ और परेशान करने लगती है। इस सर्वेक्षण में इस बात का भी खुलासा हुआ कि आज भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सबसे ज्यादा सामना आदिवासी महिलाओं को ही करना पड़ता है।

NRC के चलते एक भी हिन्दू को नहीं छोड़ना होगा देश: मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख (सरसंघचालक) मोहन भागवत ने कहा है कि एक भी हिन्दू को NRC के चलते देश नहीं छोड़ना पड़ेगा। उनके नाम असम की NRC/नागरिकता सूची में न होने का मतलब उन्हें देश से निकाला जाना नहीं है। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कोलकाता में भाजपा की मौजूदगी में संघ परिवार के आनुषंगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के सामने संघ की प्रतिबद्धता दोहराई।

मालूम हो कि RSS शुरू से भारत को दुनिया भर से सताए गए हिन्दुओं की प्राकृतिक शरणस्थली या ‘प्राकृतिक घर‘ मानता रहा है और प्रधानमंत्री (तत्कालीन भाजपा चुनाव प्रचार समिति के प्रमुख) नरेंद्र मोदी की सीधी निगरानी में बने 2014 के घोषणा-पत्र में भी इस बात का ज़िक्र है।

बंगाल भाजपा प्रमुख दिलीप घोष की मौजूदगी में हुई इस बैठक में नागरिकता विधेयक संशोधन अधिनियम [Citizenship (Amendment) Bill (CAB)] संसद के आगामी सत्र में लाने पर भी बल दिया गया। कई नेताओं ने तो इस पर भी क्षोभ प्रकट किया कि हिन्दू शरणार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह बिल पहले लाकर उसके बाद NRC ही कवायद की जानी चाहिए थी।

गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित नागरिकता विधेयक संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत भारत के 6 पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों (हिन्दुओं, बौद्धों, ईसाइयों, जैनों आदि) को विशेष शरण और नागरिकता देने का प्रस्ताव लंबित है।

इसके पहले राजस्थान में भी संघ की बैठक में इस बात पर नाराज़गी व्यक्त की गई थी कि असम की NRC में नागरिकता से वंचित किए गए और घुसपैठिए चिह्नित किए गए करीब 19 लाख लोगों में से अधिकांश लोग हिन्दू ही हैं। सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने आश्वासन दिया है कि बंगाल में NRC जैसी कवायद नागरिकता विधेयक संशोधन अधिनियम को पास करने के पहले नहीं होगी।

रामायण में कहीं भी जन्मस्थान का जिक्र नहीं, 1949 से शुरू हुई पूजा: सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकार

राम मंदिर मामले में जब से नियमित सुनवाई की शुरुआत हुई, तब से अब तक लगभग एक महीने की सुनवाई पूरी हो चुकी है। आज सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीलें रखी। मुस्लिम पक्ष की तरफ से जिरह करते हुए वकील ज़फ़रयाब जिलानी ने महर्षि वाल्मीकि की रामायण और तुलसीदास रचित रामचरितमानस का जिक्र करते हुए कहा कि हिन्दुओं की आस्था इन्हीं दोनों पुस्तकों पर आधारित है लेकिन इन दोनों ही पुस्तकों में कहीं भी जन्मभूमि मंदिर के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

जिलानी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 1949 से पहले मुख्य गुम्बद के नीचे पूजा होने का कोई साक्ष्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने जिलानी से पलट कर सवाल पुछा कि अगर इन दोनों पुस्तकों में जन्मस्थान मंदिर का जिक्र नहीं है तो इससे हिन्दुओं की आस्था पर क्या फ़र्क़ पड़ता है? जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि अगर रामायण और रामचरितमानस में जन्मस्थान मंदिर के सटीक लोकेशन के बारे में कुछ नहीं कहा है तो क्या हिन्दू आस्था नहीं रख सकते कि ये जगह जन्मस्थान है?

जिलानी ने जस्टिस चंद्रचूड़ के सवाल का जवाब देते हुए दावा किया कि जन्मस्थान अयोध्या में ही है लेकिन विवादित स्थल पर नहीं है, कहीं और है। इससे पहले मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पूरे अयोध्या को ही जन्मस्थान माना जाता है और इसके बारे में कोई सटीक स्थान का जिक्र नहीं है। राजीव धवन ने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में मंदिर और पूजा को लेकर तरह-तरह की मान्यताएँ हैं; जैसे, कामाख्या देवी और सती के अंग जहाँ-जहाँ गिरे, वहाँ मंदिर बनाया गया।

जस्टिस बोबडे ने राजीव धवन को याद दिलाया कि ऐसा एक मंदिर पाकिस्तान में भी है। राजीव धवन ने कहा कि अयोध्या में रेलिंग के पास जाकर पूजा होती थी तो उसे मंदिर नहीं माना जाना चाहिए। धवन ने दावा किया कि भगवान राम की मूर्ति गर्भगृह में नहीं थी। उन्होंने कहा कि मूर्ति गर्भगृह में कैसे गई, इस बारे में उन्हें कुछ नहीं पता।

त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, कहा- अरसे बाद अपराधी या झूठों की नहीं सुनी

त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के प्रमुख प्रद्योत देब बर्मन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। पार्टी की ‘हाई कमांड’ संस्कृति पर निशाना साधा है। साथ ही पार्टी में जारी गुटबाजी और आंतरिक कलह का भी जिक्र किया है।

ट्वीट कर उन्होंने अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “अरसे बाद मैं बेहद सुकून महसूस कर रहा हूॅं। आज काफी दिन बाद बिना किसी अपराधी या झूठे लोगों को सुने बिना दिन की शुरुआत हुई है। आज मुझे गुटबाजी या कहासुनी में पड़ने की जरूरत नहीं है। ना ही भ्रष्ट लोगों को ऊंचे पदों पर बैठाने का आलाकमान का हुक्म सुनना पड़ा है।”

प्रद्योत ने आगे लिखा, “आज जब मैं सोकर उठा तो अहसास हुआ कि समाज के गलत तत्वों को राज्य को बर्बाद करने वाले ओहदों तक पहुँचने से रोकने के कारण मेरे जीवन और स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा था। मैं लड़ा, और शायद हार गया, लेकिन मैं जीत ही कहाँ सकता था जब मैं लड़ाई में शुरू से ही अकेला था? मैंने तय कर लिया है कि मुझे सकारात्मक नजरिए की ज़रूरत है और मैंने अपने आस-पास से नकारात्मक लोगों को बदल दिया है।”

अपने बयान का अंत प्रद्योत कुछ इस प्रकार करते हैं, “आज मैं अपने राज्य में योगदान साफ और ईमानदार मन से कर सकता हूँ। मेरे अंदर का बुबागरा (त्रिपुरा के एक पवित्र देवता) किसी भी राजनीतिक ओहदे से अधिक शक्तिशाली है।”

पहले भी दी थी धमकी, NRC से जुड़ा मामला

प्रद्योत ने पहले भी इस्तीफे की चेतावनी दी थी। उनका आरोप था कि प्रदेश के वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता लुइज़िन्हो फलैरो उन पर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। प्रद्योत ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर असम की तरह NRC जैसी नागरिकता-सूची बनाए जाने की माँग की थी। प्रद्योत ने इसमें कॉन्ग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए एक विधायक की भी भूमिका का आरोप लगाया था। प्रद्योत ने किसी और पार्टी में शामिल होने की संभावना से भी इनकार किया है। इस बीच, राज्य कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता हरेकृष्ण भौमिक ने प्रद्योत के इस्तीफ़े की जानकारी होने से ही इनकार किया है।

J&K पर फर्जी तस्वीर से कारवां के पत्रकार ने फैलाया प्रोपेगेंडा, सच बताकर पुलिस अधिकारी ने लगाई लताड़

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर प्रोपेगेंडा फैलाने वाला समूह अब पहले से ज्यादा सक्रिय है। फर्जी तस्वीरों और निराधार तथ्यों के आधार पर कश्मीर को लेकर पूरे देश में असहजता का माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी सूची में कारवां के पत्रकार (फोटो पत्रकार) शाहिद तान्तरे ने भी फर्जी तस्वीर के सहारे प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया। लेकिन झूठ ज्यादा देर तक चली नहीं और उन्हें सोशल मीडिया पर मिली जबरदस्त लताड़!

दरअसल, शाहिद ने कुछ दिन पहले अपने सोशल मीडिया अकॉउंट से एक पुरानी तस्वीर को प्रासंगिक बनाकर ट्वीट किया। इस पुरानी तस्वीर के साथ उन्होंने किसी कवि/शायर की आभासी फिक्शन पंक्तियों को लिखकर वहाँ के युवाओं की वर्तमान स्थिति को दयनीय दिखाने का प्रयास किया।

साझा तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि आला अधिकारी वहाँ के बच्चों से हँसते मुस्कुराते बात करते नजर आ रहे हैं। लेकिन लिखे गए कैप्शन से प्रतीत होता है कि जैसे अधिकारी कह रहे हों, “हम कश्मीरी युवकों पर तब तक अत्याचार करते हैं जब तक उनके पास कुछ कहने के लिए न बचे।”

ऐसे में जब हमने इस तस्वीर और तान्तरे द्वारा लिखे कैप्शन की हकीकत जानने का प्रयास किया तो हमें पता चला ये तस्वीर पुरानी है। जिसमें पुलिस अधिकारी पत्थरबाजी में शामिल बच्चों की कॉउंसलिंग कर रहे हैं।

इस संबंध में खुद जम्मू कश्मीर के पुलिस अधिकारी इम्तियाज़ हुसैन ने तान्तरे को जवाब देकर झूठे प्रोपगैंडा की पोल खोल दी है। उन्होंने तान्तरे के पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा है, “ये एक पुरानी तस्वीर है। और एक कवि की कुछ पंक्तियों का यहाँ इस्तेमाल प्रोपगैंडा फैलाने के लिहाज से हुआ है। तस्वीर में दिख रहे अधिकारी उन नाबालिग बच्चों की कॉउंसलिंग कर रहे हैं, जो साल 2010 में पत्थरबाजी में शामिल थे।”

जम्मू कश्मीर के पुलिस अधिकारी ने तान्तरे की इस हरकत को प्रोपगैंडा फैलाने का उदाहरण बताया। उनके अलावा सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस पत्रकार की लताड़ लगाई। लोगों ने पुलिस अधिकारी को ये तथ्य सामने लाने के लिए धन्यवाद कहा और ऐसे कई प्रोपगैंडों के उदाहरणों के बारे में बात करने लगे, जब फर्जी तस्वीरों के जरिए कश्मीर के नाम पर झूठी खबर फैलाई गई। हालाँकि, इस दौरान कुछ लोगों ने कारवां के पत्रकार के समर्थन में पुलिस अधिकारी को झूठा साबित करने की कोशिश की, लेकिन अधिकतर लोग सिर्फ इम्तियाज़ हुसैन की तारीफ करते नजर आए और कहा कि कश्मीर उनके हाथ में सुरक्षित है।

चिन्मयानन्द रेप मामला: पीड़िता के वकील ने कहा- हमें नहीं मिला कोई नोटिस, गिरफ़्तारी की बात गलत

पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानन्द वाले मामले में कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा था कि पीड़िता को भी मामले की जाँच कर रही एसआईटी ने हिरासत में ले लिया है। क्योंकि उस पर चिन्मयानन्द को ब्लैकमेल कर ₹5 करोड़ माँगने का आरोप है। लेकिन अब खबर है कि छात्रा को हिरासत में नहीं लिया गया है। पीड़िता के वकील ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई नोटिस नहीं प्राप्त हुआ है और न ही उनके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई की गई है। पीड़िता के गिरफ़्तारी की खबर गलत है। बता दें की कल सोमवार (सितम्बर 23, 2019) को इलाहबाद हाईकोर्ट ने पीड़िता के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। जिस पर 26 सितम्बर को सुनवाई होनी है।

हाईकोर्ट ने एसआईटी की जाँच प्रक्रिया पर भी संतुष्टि जताई है। एसआईटी के बारे में कोर्ट ने कहा था कि जाँच प्रक्रिया सही दिशा में जा रही है और सही तरीके से जाँच की जा रही है। बता दें कि पीड़िता और उसके दोस्तों का वीडियो सोशल मीडिया पर भी चल रहा है। अब कोर्ट इस बारे में निर्णय लेगा कि पीड़िता को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजना है या नहीं। हालाँकि, पीड़िता के गिरफ़्तार होने से स्वामी चिन्मयानन्द के ख़िलाफ़ चल रहे बलात्कार व यौन शोषण के मामलों पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। फ़िलहाल इस पर सुनवाई 26 सितम्बर को तय हुई है।

गौरतलब है कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एसआईटी के आईजी नवीन अरोड़ा ने कोर्ट के सामने ब्लैकमेलिंग बात करते हुए आरोपित छात्रा और उसके दोस्त संजय की कॉल डिटेल पेश करते हुए बताया था कि दोनों के बीच 4200 बार बातचीत हुई थी। फिलहाल चिन्मयानंद 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में हैं।

शाहजहाँपुर स्थित स्वामी सुखदेवानंद विधि महाविद्यालय में एलएलएम की एक छात्रा ने 24 अगस्त को एक वीडियो वायरल करके पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर बलात्कार के गंभीर आरोप लगाए थे। बाद में मीडिया के सामने छात्रा ने चिन्‍मयानंद पर बलात्‍कार का आरोप लगाया था। चिन्‍मयानंद को इस मामले में हाल ही में गिरफ्तार किया गया था। उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश पर गठित एसआईटी इस प्रकरण की जाँच कर रही है।

भू-माफिया आजम खान के घर अदालती नोटिस का अंबार, भर गई घर की दीवार: अब तक 84 से अधिक FIR

सपा नेता भूमाफिया आजम खान के खिलाफ एक के बाद एक इतने FIR हो चुके हैं कि विभिन्न मामलों में नोटिसों के चस्पा होने से उनके घर की दीवार भर गई है। नोटिस बोर्ड पर जगह ही नहीं बची है। आजम खान पर जौहर यूनिवर्सिटी के लिए जमीन अतिक्रमण से लेकर, बकरी चोरी, भैंस चोरी, बिजली और डकैती तक के मामले दर्ज हैं। अब तो आलम यह है कि आजम के घर के गेट के बाहर चस्पा हुए अदालती नोटिसों की तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर शेयर की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार रात भी आजम के घर के बाहर गंज थाने की पुलिस ने उनके साथ ही उनकी पत्नी राज्यसभा सदस्य डॉ. तजीन फातिमा और बेटे विधायक अब्दुल्ला के नाम के नोटिस चस्पा कर दिए।

गौरतलब है कि सांसद बनने के बाद से ही भूमाफिया आजम खान पर करीब 84 से अधिक FIR दर्ज हैं। इसमें जौहर यूनिवर्सिटी की जमीनों घोटालों से संबंधित 30 मुकदमें भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक घर पर किसी द्वारा नोटिस रिसीव न किए जाने की स्थिति में नोटिस चस्पा किए गए हैं। इनमें से कई नोटिस आजम खान की पत्नी तजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम के नाम की भी है। सोशल मीडिया में वायरल तस्वीर में आप देख सकते हैं कि उनके घर का पूरा गेट ही अदालती नोटिसों से भर गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गंज थाने के दरोगा रामवीर सिंह ने कहा कि सोमवार रात तीनों के समन और आजम खान के आवास के मुख्य गेट पर चस्पा कर दिए गए थे। क्योंकि इन तीनों में से कोई भी घर पर मौजूद नहीं था। इसलिए गेट पर नोटिस चस्पा कर दिए गए।

आपको बता दें कि भूमाफिया आजम खान पर यतीमखाना मामले में, भैंस चोरी, बकरी चोरी, मदरसा से हज़ारों किताबों की चोरी, बिजली चोरी, गैर इरादतन हत्या, लूटपाट, धोखाधड़ी सहित अन्य गंभीर धाराओं में 84 से अधिक मुकदमें दर्ज हैं। इनमे से कई मामलों में उनकी पत्नी तजीन फातिमा, दोनों बेटे और दिवंगत माँ का नाम भी शामिल है। 

कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कहा जा रहा है कि, देर रात सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने के बाद इन नोटिसों को हटा दिया गया और सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए। लेकिन अभी तक यह यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि आखिर इन नोटिसों को किसने हटाया।

हाँ, भारत ने बरसाए थे बम, हमने अलकायदा को ट्रेनिंग दी: इमरान ख़ान ने एयर स्ट्राइक कबूली

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने स्वीकार किया है कि बालाकोट एयर स्ट्राइक के दौरान भारतीय वायुसेना ने आतंकी कैम्पों पर बमबारी की थी। इससे उन लोगों को तगड़ा धक्का लगना तय है, जो सरकार और सेना से सबूत की माँग करते हैं। इमरान ख़ान ने कहा कि पुलवामा हमले के दौरान ‘एक कश्मीरी लड़ाका’ ने खुद को बम से उड़ा लिया। बता दें कि इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। देखें वीडियो:

इमरान ख़ान ने कहा कि पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में बम गिराए। पाकिस्तानी पीएम ने इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान अल जज़ीरा को दिए गए इंटरव्यू में भी बातों ही बातों में स्वीकार किया था कि भारत ने पाकिस्तान में बम बरसाए थे। इससे पहले पाकिस्तान की एक रैली में इमरान ख़ान ने भारत को धमकी देते हुए कहा था कि अगर दोबारा ऐसा हमला हुआ तो पाक चुप नहीं बैठेगा। यहाँ भी इमरान ने अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकारा कि बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई थी।

इसके अलावा पाक पीएम ने पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई द्वारा अलकायदा के आतंकियों को प्रशिक्षण देने की बात भी कबूली है। उन्होंने कहा कि पाक फ़ौज और आईएसआई ने अलकायदा के आतंकियों को अफ़ग़ानिस्तान में लड़ने के लिए प्रशिक्षित किया। उन्होंने अलकायदा और पाकिस्तान के बीच सम्बन्ध होने की बात भी स्वीकार की। इमरान ख़ान की स्वीकारोक्ति भारत के उन आरोपों की नए सिरे से पुष्टि करती है कि पाकिस्तान आतंकवाद की जननी है और आतंकवादियों का पोषक है। देखें वीडियो:

इमरान ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान और अलकायदा के सम्बन्ध इसलिए है, क्योंकि पाकिस्तान ने उसके आतंकियों को ट्रेनिंग दी। पाक फ़ौज के प्रवक्ता आसिफ गफूर लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। अब इमरान ख़ान के बयान के बाद पाकिस्तान की लगातार हो रही बेइज्जती के क्रम में एक नया अध्याय जुड़ गया है।

इमरान, कहाँ से लाते हो ऐसे रिपोर्टर: ट्रम्प ने की बेइज्जती तो पाक मीडिया ने रोका लाइव प्रसारण

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान जब से अमेरिका पहुँचे हैं, तब से लगातार उनकी बेइज्जती हो रही है। जब वह सऊदी क्राउन प्रिंस की स्पेशल फ्लाइट से अमेरिका पहुँचे, तब उनके स्वागत के लिए कोई भी अमेरिकी अधिकारी नहीं पहुँचा। एयरपोर्ट पर केवल पाकिस्तानी अधिकारी ही उन्हें रिसीव करने पहुँचे। अव्वल तो यह कि पीएम मोदी को रेड कार्पेट वेलकम देने वाले अमेरिका ने इमरान के लिए बस एक चटाई बिछा कर इतिश्री कर ली। उनका ये फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और उनकी खिल्ली उड़ी।

पीएम मोदी की रैली ‘हाउडी मोदी’ में भाग लेने के 1 दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तानी पीएम से भी मुलाक़ात की। इस दौरान पाकिस्तान के एक अति-उत्साही पत्रकार ने अपने देश और प्रधानमंत्री की बेइज्जती करवा दी। उक्त पाकिस्तानी पत्रकार ने कश्मीर को लेकर ट्रम्प के सामने पाकिस्तानी प्रोपगेंडा चलाने की कोशिश की लेकिन इससे पाक पीएम का ही मज़ाक बन गया। मजबूरी में पाकिस्तानी चैनल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रसारण ही रोक दिया।

दरअसल, जब ट्रम्प और इमरान ख़ान मीडिया से बात कर रहे थे, तब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा कि कश्मीरी जनता पिछले 50 दिनों से कष्ट भुगत रही है। हवा-हवाई दावों की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए उक्त पत्रकार ने ट्रम्प के सामने दावा किया कि 50 दिनों से कश्मीर में न तो इंटरनेट चल रहा है और न ही कोई अन्य व्यवस्था काम कर रही है। साथ ही उसने जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन की बातें भी की।

उस पत्रकार ने ट्रम्प से पूछा कि वह जम्मू-कश्मीर के लिए क्या करना चाहते हैं? बदले में अमेरिका के राष्ट्रपति ने पाक पीएम इमरान से ही सवाल पूछ डाला। ट्रम्प ने इमरान से पूछा कि आप ऐसे रिपोर्टर्स कहाँ से लेकर आते हो? ट्रम्प ने इमरान से पूछा कि क्या यह रिपोर्टर उनकी टीम का है? उक्त पत्रकार के दावों को नकारते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प ने उससे कहा कि तुम बयान दे रहे हो, सवाल नहीं पूछ रहे। इसके बाद एआरवाई चैनल ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रसारण ही रोक दिया। ‘लाइव 92’ सहित कई अन्य पाकिस्तानी न्यूज़ चैनलों ने भी अपने देश, पाक मीडिया और पाक पीएम का मज़ाक बनते देख प्रसारण रोक दिया।

सवाल यह है कि बिना किसी सबूत और तथ्य के भारत पर लगातार बड़े-बड़े आरोप लगाने वाले इमरान ख़ान के एजेंडे को आगे बढ़ा कर पाकिस्तानी मीडिया लगातार अपने देश का मज़ाक़ क्यों बना रहा है? राष्ट्रपति ट्रम्प ने इमरान के सामने कहा कि पीएम मोदी ने उनके सामने अनुच्छेद 370 को लेकर आक्रामक रूप से अपनी बात रखी और 59,000 लोगों की भीड़ ने इसपर तालियाँ बजा कर इस निर्णय का स्वागत किया। ट्रम्प ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम की बात कर रहे थे। इस दौरान इमरान का चेहरा देखने लायक था।

मौलवी ने किया नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न, अवैध मदरसे से बचाई गईं 12 और लड़कियाँ

केरल पुलिस ने सोमवार (सितंबर 23, 2019) को राज्य के मलप्पुरम जिले के कोलाथुर इलाके में स्थित एक मदरसे से अरबी पढ़ाने वाले रफीक नामक (35) मौलवी को गिरफ्तार किया। मौलवी पर इल्जाम है कि उसने केयरटेकर की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर मदरसे में पढ़ने वाली 17 साल की बच्ची का यौन उत्पीड़न किया।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो शुरुआती जाँच में खुलासा हुआ है कि जिस मदरसे में ये पूरी घटना हुई, वो अवैध है और उसे अब तक बिना लाइसेंस के चलाया जा रहा था। जाँच में पुलिस को मदरसे से 12 और लड़कियाँ मिली हैं, जिन्हें फिलहाल आश्रय गृह भेज दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक कुछ लड़कियों ने राज्य की चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर को फोन कर मदरसा प्रशासन के ख़िलाफ़ शोषण की शिकायत की। मलप्पुरम चाइल्डलाइन चीफ कॉर्डिनेटर अनवर कराक्कड़ ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत के दौरान बताया कि जैसे ही उन्हें इसकी सूचना मिली, उन्हें पूछताछ की। 3 में से 1 लड़की ने इस बात को स्वीकारा कि मौलवी रफीक ने उसका यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को इसके बारे में सूचना दी।

उन्होंने बताया कि मदरसे को बिना अनुमति के संचालित किया जा रहा था और वहाँ रहने वाली सभी लड़कियाँ गरीब परिवार से थी। फिलहाल, लड़कियों को बचा लिया गया है और उन्हें आश्रय गृह भेज दिया गया है।

पीड़ित बच्ची की मेडिकल जाँच में उसके साथ हुए यौन उत्पीड़न की पुष्टि हो चुकी है और आरोपित मौलवी को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। कोलाथुर के एसएचओ ने भी बताया है कि मामले में जाँच जारी है। पता लगाया जा रहा है कि रफीक ने कितने बच्चों का उत्पीड़न किया है।