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पोस्ट डालो, पैसे पाओ: ममता बनर्जी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए प्रशांत किशोर की टीम लेकर आई नई स्कीम

प्रशांत किशोर चुनावी रणनीतिकार हैं। उन्हें लेकर ‘दार्जीलिंग क्रॉनिकल’ में एक रिपोर्ट छपी है, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। ‘दार्जिलिंग क्रॉनिकल’ अलग गोरखालैंड राज्य की समर्थक वेबसाइट है। वेबसाइट ने खुलासा किया है कि प्रशांत किशोर की कम्पनी आईपीएसी सोशल मीडिया पर अधिक फॉलोवर्स वाले कई लोगों से संपर्क कर रही है और ममता आगामी बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस के पक्ष में कंटेंट डालने को कहा जा रहा है। इस काम के लिए उन्हें रुपए भी ऑफर किए जा रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए प्रशांत किशोर की कम्पनी ‘सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स’ में माहौल बना रही है। ‘दार्जिलिंग क्रॉनिकल’ ने स्क्रीनशॉट्स के रूप में सबूत भी पेश किए। पोर्टल ने कहा है कि प्रशांत किशोर द्वारा ममता बनर्जी की चुनावी रणनीति संभालने वाली ख़बर के बाद उसे आईपीएसी की सदस्य निकिता चटर्जी की तरफ से ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें साथ काम करने का ऑफर दिया गया। ईमेल का स्क्रीनशॉट:

प्रशांत किशोर की कम्पनी द्वारा भेजा गया ईमेल

इस ईमेल में दावा किया है कि इसे एक राजनीतिक एजेंसी द्वारा भेजा गया है। इसमें लोकतंत्र और गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए काम करने की बात कही गई है। साथ ही ईमेल में कहा गया है कि पोर्टल अपने फेसबुक ग्रुप में सभी लोगों तक पहुँचे और ‘बंगाल प्राइड’ का मतलब समझाए। ईमेल की भाषा से साफ़ झलक रहा है कि इसे आईपीएसी द्वारा भेजा गया है और ममता बनर्जी के लिए माहौल बनाने की बात की जा रही है।

पोर्टल को आवेश सिंह की तरफ से दूसरा ईमेल प्राप्त हुआ। ईमेल एड्रेस में प्रशांत किशोर की कम्पनी का नाम है, जिससे पता चलता है कि ये व्यक्ति भी आईपीएसी का सदस्य है।

प्रशांत किशोर की कम्पनी से आया ईमेल

इस ईमेल में आईपीएसी के लिए कार्य करने के एवज में रुपए देने की भी बात कही गई है। इस ईमेल में तरह-तरह के वर्णित क्रियाकलापों के बदले अलग-अलग राशि दने की बात कही गई थी और उसका पूरा विवरण भेजा गया था। आईपीएसी चाहता है कि ‘दार्जिलिंग क्रॉनिकल’ ‘लोगों को बंगाल की राजनीति के प्रति जागरूक बनाने और आगामी विधानसभा चुनावों में योगदान’ देने के लिए प्रशांत किशोर की कम्पनी के साथ करार करे।

‘दार्जिलिंग क्रॉनिकल’ के दावों के बाद ऑपइंडिया ने ईमेल भेजने वाले लोगों से सम्पर्क किया तो वे असमंजस में दिखे और उन्होंने तृणमूल की बचाने की कोशिश की। उन्होंने ऐसा दिखाया जैसे इसमें तृणमूल कॉन्ग्रेस की कोई बात ही नहीं की गई हो। आईपीएसी के एक एग्जीक्यूटिव ने बताया कि कम्पनी द्वारा ‘राजनीतिक इन्फ्लुएंसर्स’ का एक इकोसिस्टम खड़ा किया जा रहा है और यह तृणमूल के लिए नहीं हो रहा।

एग्जीक्यूटिव ने दावा किया कि अभी इसका निर्णय नहीं लिया गया है कि ये इकोसिस्टम किस राजनीतिक दल के लिए बनाया जा रहा है। हालाँकि, उसने स्वीकार किया कि बंगाल में प्रशांत किशोर की कम्पनी आईपीएसी पहले ही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के साथ करार कर चुकी है, इसलिए आगामी विधानसभा चुनाव में किसी अन्य दल के साथ करार नहीं किया जा सकता। इन सबसे यह पता चलता है कि रुपयों के दम पर बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के पक्ष में डिजिटल पोर्टल्स और सोशल मीडिया में सक्रिय लोगों की पूरी फौज उतारी जाएगी।

पाकिस्तानी प्रोपगेंडा के विरोध में दुनिया भर में प्रदर्शन, Article 370 हटाने का समर्थन

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के मोदी सरकार के फैसले के समर्थन में दुनिया के अलग-अलग मुल्कों में रह रहे भारतीयों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी इस मसले पर पाकिस्तान की ओर से फैलाए जा रहे प्रोपगेंडा के विरोध में भी मुखर थे।

इंग्लैंड में इंडो-यूरोपियन कश्मीर फोरम और हिंदू काउंसिल यूके ने बर्मिंघम के विक्टोरिया स्क्वायर में अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त किए जाने का समर्थन किया है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में भी प्रदर्शन किया गया।

लोगों ने सड़क पर उतरकर सरकार के फैसले पर समर्थन जताया और पाकिस्तान को आईना दिखाया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने हाथ में तिरंगा लेकर भारत माता की जय और वंदे मातरम का नारा लगाया।

मेलबर्न में भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले पर अपना समर्थन जताने के लिए इकट्ठा हुए और फिर कश्मीरी पंडितों के नेतृत्व में विक्टोरियन राज्य संसद से फेडरेशन स्क्वायर तक रैली निकाली।

बता दें कि, इससे पहले भी कई देश अनुच्छेद 370 के निरस्त करने का समर्थन कर चुके हैं। इसमें कई मुस्लिम देश भी शामिल हैं। तमाम देशों ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करना भारत का आंतरिक मामला बताया। मगर, पाकिस्तान इसे मानने को तैयार नहीं है और लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे को उठाने की कोशिश करता रहा है। दुनिया के तमाम वैश्विक मंचों से पाकिस्तान को मुँह की खानी पड़ी है, इसके बावजूद भी भारत के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने से बाज नहीं आ रहा।

पाकिस्तान से चल रहा WhatsApp ग्रुप ‘मुजाहिदीन’: तमिलनाडु से पकड़े गए तीन मेंबर

विशेष खुफिया दल (SIC) ने पाकिस्तान से संचालित होने वाले व्हाट्सएप ग्रुप का मेंबर होने के संदेह में तमिलनाडु के कोयंबटूर से 3 लोगों को हिरासत में लिया है। तीनों संदिग्ध पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं और कोयंबटूर के एक ज्वेलरी वर्कशॉप में काम करते हैं।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने शुरुआती जाँच में पाया कि तीनों ‘मुजाहिदीन’ नाम के व्हाट्सएप ग्रुप के मेंबर हैं, जिसका एडमिन पाकिस्तान से है। हालाँकि, पुलिस को ग्रुप एडमिन से संबंधित कोई भी दस्तावेज या चैट फिलहाल प्राप्त नहीं हुआ है। पुलिस ने बताया कि इस ग्रुप के सदस्य बंदूक और विस्फोटकों के बारे में बातें किया करते थे। उन्होंने कहा कि आगे की जाँच के लिए उनके मोबाइल फोन को जब्त करने के बाद तीनों को छोड़ दिया गया।

खुफिया दल के अधिकारियों ने बताया कि उनकी टीम ने दो दिन पहले इन तीनों संदिग्धों को हिरासत में लिया था और फिर पूछताछ करके छोड़ दिया। आतंकी से संबंध रखने वाले इन संदिग्धों के बारे में उन्हें सूचना मिली थी, जिसमें बताया गया था कि ये बांग्लादेश से आए हैं। हालाँकि, जब अधिकारियों ने संदिग्धों के कमरों की तलाशी ली, तो इस दौरान बरामद आधार कार्ड से पता चला कि वो बांग्लादेश से नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल से हैं।

खबर के मुताबिक, SIC ने इसकी पुष्टि पश्चिम बंगाल के पुलिस अधिकारियों के माध्यम से की। उन्होंने बताया कि ये लोग 10 साल से अधिक समय से यहाँ काम कर रहे थे।  SIC के एक सोर्स ने बताया कि उन्होंने जब्त किए गए मोबाइल फोन में मुजाहिदीन नामक व्हाट्सएप ग्रुप पाया है, लेकिन व्हाट्सएप ग्रुप से चैट या फिर किसी तरह की दस्तावेजों को अभी तक प्राप्त नहीं कर सके हैं।


शरद पवार लिबरल हिप्पोक्रेसी का नया नमूना, ब्रोकन चेयर ले जाकर कोई दिखाए पाकिस्तान की बर्बरता

मजहब को लुभाने की राजनीति टोपी-चादर से आगे बढ़कर अब पाकिस्तान का गीत गाने तक पहुॅंच गई है। बलूचिस्तान में रोज मारे जा रहे मुस्लिमों के दर्द को अनसुना कर अपनी ही सरकार को झूठा साबित करने तक आ गई है।

यदि ऐसा नहीं होता तो कभी मराठा क्षत्रप कहे जाने वाले एनसीपी के मुखिया शरद पवार पाकिस्तान की मेहमाननवाजी के गुण नहीं गा रहे होते। मुंबई में अपनी पार्टी की तरफ से अल्पसंख्यकों के लिए आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए भारत की सरकार पाकिस्तान को लेकर झूठी खबरें फैला रही है। वहॉं के लोग खुश हैं। उनके साथ कोई अन्याय नहीं हो रहा।

पवार ने यह बयान ऐसे वक्त में दिया है जब पाकिस्तान सीमा पर लगातार संघर्षविराम का उल्लंघन कर रहा है। आतंकियों को भारत में दाखिल कराने की फिराक में है। बड़े हमलों को अंजाम देने की साजिश रच रहा है।

ऐसा लगता है शरद पवार 26/11 को भूल गए हैं। भूल चुके हैं कि किस तरह पाकिस्तान से आए आतंकियों ने मुंबई को दहला दिया था। जरूरत है आतंकवाद को पालने-पोसने वाले पाकिस्तान की बर्बरता याद दिलाने के लिए शरद पवार को ब्रोकन चेयर ले जाने की।

ब्रोकन चेयर जिनेवा का एक स्मारक है। इसे स्विट्जरलैंड के कलाकार डैनियल बरसेट ने बनाया है। आजकल यहॉं बलूचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता पोस्टर अभियान चला रहे हैं। ये पोस्टर बलूचिस्तान में पाकिस्तान प्रायोजित नरसंहार के प्रतीक हैं। ये बताते हैं कि कैसे बलूचिस्तान में लोग अगवा कर लिए जाते हैं और बाद में उनकी लाशें ही मिलती हैं।

बलूच मानवाधिकारी परिषद (बीएचआरसी) का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर उनके इलाके में अब चीन ने भी लूट मचा रखी है। बीएचआरसी के अनुसार, “पाकिस्तान की सेना गॉंवों में कत्लेआम करती है और आग लगा देती है ताकि चीन अपनी कॉलोनी बसा सके। बलूचिस्तान के जिन लोगों के घर नष्ट कर दिए गए हैं उन्हें पाकिस्तानी सेना के शिविरों के पास दयनीय हालत में रहने के लिए बाध्य किया जा रहा है।”

ऐसे हालात में भी पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले भारतीय नेताओं में पवार अकेले नहीं हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के बयान के सहारे पाकिस्तान अपने प्रोपगेंडा को हवा दे चुका है। पूरा का पूरा लिबरल गिरोह और मानवाधिकारों के कथित पैरोकार बलूचिस्तान में नरसंहार पर चुप हैं।

यही कारण है कि वे कभी केच का जिक्र नहीं करते। बलूचिस्तान के इस जिले में फरवरी 2017 से ही मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद है। इस जिले में करीब नौ लाख लोग रहते हैं। केच सहित बलूचिस्तान के हर इलाके में पाकिस्तानी सेना का डेथ स्क्वायड यहॉं आए दिन लोगों की हत्याएं करता है। गौरतलब है कि बलूचिस्तान पाकिस्तान के चार प्रांतों में क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा और आबादी के हिसाब से सबसे छोटा है। 2017 की जनसंख्या के अनुसार यहॉं की आबादी करीब सवा करोड़ है।

इस्लाम के नाम पर जिन्ना ने छला

बलूचिस्तान को 1948 में हथियार के दम पर पाकिस्तान ने खुद में मिलाकर खान ऑफ कलात मीर अहमद यार खान को जेल में डाल दिया था। मीर अहमद यार खान उन लोगों में से थे, जो इस्लाम के नाम पर अलग पाकिस्तान के पैरोकार थे। जिनके मुहम्मद अली जिन्ना दोस्त थे। जिन्होंने ब्रिटेन के सामने अपना पक्ष रखने के लिए जिन्ना को कानूनी सलाहकार बनाया था। जिसने मुस्लिम लीग को खूब पैसा दिया। 11 अगस्त 1947 को मुस्लिम लीग ने जिनके साथ साझा घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसमें कहा गया था कि कलात एक भारतीय राज्य नहीं है। उसकी अपनी अलग पहचान है। मुस्लिम लीग कलात की स्वतंत्रता का सम्मान करती है।

ब्रिटिश राज में बलूचिस्तान

कलात, खारान, लॉस बुला और मकरान पर ब्रिटिश साम्राज्य का सीधा शासन नहीं था। इनके पास भारत और पाकिस्तान में से किसी एक में मिलने या फिर खुद को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने का अधिकार था। कैबिनेट मिशन के सामने 1946 में अपना पक्ष रखते हुए कलात ने कहा था कि उसकी संधि ब्रिटेश इंडिया साम्राज्य के साथ नहीं, बल्कि ब्रिटिश क्राउन के साथ है। 4 अगस्त 1947 को दिल्ली में एक राउंड टेबल मीटिंग में तय किया गया कि 5 अगस्त 1947 को कलात ब्रिटिश साम्राज्य से स्वतंत्र होगा। खारान, लॉस बुला, मारी और बुग्ती इलाके कलात में शामिल होंगे, ताकि पूरा बलूचिस्तान कलात का हिस्सा बन जाए।

कलात, खारान, लॉस बुला और मकरान पर ब्रिटिश साम्राज्य का सीधा शासन नहीं था। इनके पास भारत और पाकिस्तान में से किसी एक में मिलने या फिर खुद को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने का अधिकार था। कैबिनेट मिशन के सामने 1946 में अपना पक्ष रखते हुए कलात ने कहा था कि उसकी संधि ब्रिटेश इंडिया साम्राज्य के साथ नहीं, बल्कि ब्रिटिश क्राउन के साथ है। 4 अगस्त 1947 को दिल्ली में एक राउंड टेबल मीटिंग में तय किया गया कि 5 अगस्त 1947 को कलात ब्रिटिश साम्राज्य से स्वतंत्र होगा। खारान, लॉस बुला, मारी और बुग्ती इलाके कलात में शामिल होंगे, ताकि पूरा बलूचिस्तान कलात का हिस्सा बन जाए।

कलात का कानूनी दर्जा भी अन्य भारतीय रियासतों से अलग था। 1876 की संधि के अनुसार ब्रिटेन उसके आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता था। वह चेंबर ऑफ प्रिंसली स्टेट्स का सदस्य भी नहीं था। इसके कारण वह भारत या पाकिस्तान में से किसी एक में शामिल होने के लिए मजबूर नहीं था।

पाकिस्तान बनने के अगले दिन मीर अहमद खान ने कलात को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया। कलात की नेशनल असेंबली की बैठक में यह फैसला किया गया कि वह एक स्वतंत्र राष्ट्र होगा और पाकिस्तान से उसके दोस्ताना ताल्लुक रहेंगे।

फिर कुरान की कसम खा ठगा

अप्रैल 1948 में पाकिस्तानी सेना ने कलात पर हमला किया। मीर अहमद यार खान ने आत्मसमर्पण कर विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए। बावजूद बलूचिस्तान की आजादी की हसरत ने दम नहीं तोड़ा। खान के भाई प्रिंस अब्दुल करीम के नेतृत्व में विद्रोह हुआ। उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। 1954 में पाकिस्तान ने ईस्ट पाकिस्तान और वेस्ट पाकिस्तान नाम से यूनिट बनाने का फैसला किया। वेस्ट पाकिस्तान के सभी स्टेट्स, प्रोविंसिज और कबिलाई इलाकों को मिलाकर वेस्ट पाकिस्तान बनाया गया। इन इलाकों के सारे अधिकार और स्वायत्ता छीन ली गई। बलूचिस्तान ने इसका जबरदस्त विरोध किया। अक्टूबर 1958 में अयूब खान ने पाकिस्तानी आर्मी को बलूचिस्तान में भेज कलात के खान और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया।

लेकिन, खान के सहयोगी नवाब नवरोज खान ने संघर्ष जारी रखा। कहते हैं कि 1959 में कुरान की कसम खाकर पाकिस्तानी कमांडर ने नवरोज खान को आत्मसमर्पण के लिए राजी किया। लेकिन, हथियार डालते ही उनके बेटों, भतीजों और रिश्तेदारों को गिरफ्तार कर फॉंसी दे दी गई। खान की करीब 90 साल की उम्र में 1962 में जेल में ही मौत हो गई।

इसके बाद 70 के दशक में फिर बलूच आंदोलन ने जोड़ पकड़ा। 1971 के चुनाव में बलूचिस्तान और नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में नेशनल अवामी पार्टी की जीत हुई जो नेशनलिस्ट बलूचों की पार्टी थी। बलूचों पर आरोप लगाया गया कि वे ईरान के साथ मिलकर बड़े संघर्ष की तैयारी कर रहे हैं। सरकार को बर्खास्त कर बलूचिस्तान को सैनिकों से पाट दिया गया। बलूचों पर हवाई हमले तक किए गए।

इसके बाद से बलूचिस्तान में नरसंहार का सिलसिला जारी है। वहाँ के हजारों लोग गायब हैं। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की एक रिपोर्ट भी जुलाई 2010 से मई 2011 के बीच लापता 140 लोगों की लाशें मिलने की पुष्टि करती है। डिप्लोमेट की एक रिपोर्ट बताती है कि पूरे बलूचिस्तान में कुछ-कुछ किलोमीटर पर साजो-सामान से लैस पाकिस्तानी सेना की सुरक्षा चौकियॉं हैं।

वकील शकील जमुरानी के मुताबिक केच में इंटरनेट शटडाउन को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। लेकिन, सुनवाई पूरी होते नहीं देख उन्होंने मामला वापस ले लिया। वे बताते हैं कि कुछ लोग सादे कपड़ों में उनके पास आए और कहा कि मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी के खिलाफ सवाल उठाकर वे राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती दे रहे हैं। समझा जा सकता है कि बलूचिस्तान में सुरक्षा का खतरा कैसा है।

अब याद करिए उन शोरों को जो सीमा पार आतंकवाद से जूझ रहे कश्मीर में लॉकडाउन पर मचा है। याद करिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला दे सेना पर प्रताड़ना के झूठे आरोप लगाने वाले बयान और सोशल मीडिया के पोस्ट को। याद करिए अल्पसंख्यकों को दबाने का, उनकी आवाज कुचलने का मोदी सरकार पर लगे आरोपों को। और अब पवार का बयान। जाहिर है, ऐसे लोगों को न तो समुदाय विशेष की फिक्र है और न ही मानवाधिकारों को। उन्हें चिंता केवल अपनी दुकान की है, जिसके लिए वे आए दिन मजहब के नाम पर माहौल बिगाड़ने की साजिश रचते रहते हैं।

पाकिस्तान जैसा प्यार कहीं नहीं मिला, 370 हटाने से बढ़ेगा आतंकवाद: शरद पवार

भारत के खिलाफ वैश्विक मंचों पर प्रोपगेंडा को हवा देने के लिए पाकिस्तान भारतीय नेताओं के बयान के इस्तेमाल का कोई मौका नहीं छोड़ता। वह सीमा पर लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है। भारत में आतंकी हमलों की साजिश रच रहा है। बावजूद भारत के विपक्षी नेताओं का पाकिस्तान प्रेम थम नहीं रहा।

अब एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने अपने इसी प्रेम का प्रदर्शन किया है। पवार ने शनिवार (सितंबर 14, 2019) को मुंबई के एनसीपी भवन में अल्पसंख्यकों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कहा कि जो प्यार उन्हें पाकिस्तान में मिला है, वैसा कहीं नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को मुद्दा बनाकर लोगों के दिलों में डर पैदा किया जा रहा है।

पवार ने कहा, “मैं पाकिस्तान गया हूँ। वहाँ के लोगों में मेहमाननवाजी कूट-कूट कर भरी है। मैं ये अनुभव कर चुका हूँ। पाकिस्तान के लोगों के बारे में गलत चित्र पेश किया जा रहा है कि वहाँ लोग खुश नहीं हैं। उनके साथ अन्याय हो रहा है। यहाँ (भारत) सरकार राजनीतिक लाभ लेने के लिए पाकिस्तान की परिस्थिति के बारे में झूठी खबरें फैला रही है।” उनका कहना है कि पाकिस्तानी ये मानते हैं कि बेशक वह अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए भारत नहीं जा सकते, लेकिन वह भारतीयों के साथ अपने रिश्तेदारों जैसा ही व्यवहार करते हैं।

एनसीपी प्रमुख ने मॉब लिंचिंग मुद्दे को फिर से उठाते हुए कहा कि नफरत के नाम पर समाज के एक विशेष वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक सद्भाव, विकास के लिए जरूरी है लेकिन देश के वर्तमान शासक ऐसा नहीं सोचते हैं।

वहीं, केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के फैसले पर पवार ने कहा कि जम्मू कश्मीर एक मुस्लिम बहुल राज्य था और ये अनुच्छेद वहाँ के नागरिकों को कुछ विशेष अधिकार देता था। अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करके सरकार यह बताना चाहती है कि वे अल्पसंख्यक बहुल राज्य के विरोध में हैं। पवार का कहना है कि सरकार की इस कार्रवाई से घाटी में और अधिक आतंकवाद फैलेगा।

इमरान खान की हेकड़ी गुम, कहा- भारत से युद्ध हुआ तो हार सकता है पाकिस्तान

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट छिपी नहीं है। सीमा पर वह लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है। आतंकियों को घुसपैठ कराने की फिराक में है। भारतीय सेना की जवाबी कारवाई में बीते दिनों ही उसके दो सैनिक मारे गए थे, जिनके शव उठाकर ले जाने का वीडियो सामने आया है।

इस तनातनी के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने स्वीकार किया है कि यदि भारत के साथ परपंरागत युद्ध हुआ तो उनके देश को मुॅंह की खानी पड़ेगी। हाल में परमाणु हमले की धमकी देने वाले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने खुद को अमन पसंद बताते हुए कहा है कि वे युद्ध के खिलाफ हैं।

अल जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में इमरान ने कहा, “अगर पाकिस्तान ने भारत के साथ परंपरागत युद्ध लड़ा और वह हारने लगा तब उसके पास दो ही विकल्प होंगे, या तो वह आत्मसमर्पण करे और या फिर आखिरी दम तक आजादी की लड़ाई लड़े।” उन्होंने कहा कि उन्हें मालूम है कि पाकिस्तानी अपनी आजादी की लड़ाई अंतिम सॉंस तक लड़ेंगे। ऐसे में जब परमाणु शक्ति संपन्न दो देश लड़ेंगे तो इसके अपने नतीजे होंगे।

यह पूछे जाने पर कि क्या कश्मीर में मौजूदा हालात के मद्देनजर दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच किसी बड़े संघर्ष या युद्ध का खतरा है, इमरान ने कहा, “हाँ, दोनों देशों के बीच युद्ध का खतरा है।”

इंटरव्यू के दौरान पाकिस्तानी प्रोपगेंडा का राग अलापते हुए उन्होंने कहा, “कश्मीर में 80 लाख मुस्लिम पिछले लगभग छह सप्ताह से कैद हैं। भारत पाकिस्तान पर आतंकवाद फैलाने का आरोप लगा दुनिया का ध्यान इस मुद्दे से भटकाना चाहता है। पाकिस्तान कभी युद्ध की शुरुआत नहीं करेगा, और मैं इसे लेकर बिल्कुल स्पष्ट हूँ। मैं अमन पंसद इंसान हूँ। मैं युद्ध के खिलाफ हूँ। मेरा मानना है कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है।”

आतंकी मसूद अजहर के नाम से यूपी के वीर सावरकर स्कूल को उड़ाने की धमकी

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के सतरिख थाना इलाके में एक निजी स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी के बाद हड़कंप मच गया। स्कूल के मैनेजर के अनुसार, स्कूल की दीवार पर एक पत्र चिपका मिला, जिसमें लिखा था, “मैं मसूद अजहर (जैश-ए-मोहम्मद का सरगना) यह सूचित कर रहा हूँ कि स्कूल में बम लगाया गया है और उसका रिमोट मेरे हाथ में है। 16 सितंबर को 15 लाख रुपए लेकर लखनऊ के पास इंदिरा नहर से 100 मीटर की दूरी पर पहुँच जाना। वहाँ मेरा आदमी खड़ा मिलेगा। अगर कोई होशियारी की तो ध्यान रखना बम का रिमोट मेरे हाथ में है।”

मामला सतरिख थाना क्षेत्र के वीर सावरकर स्कूल का है। पत्र मिलते ही स्कूल के मैनेजर ने इसकी सूचना पुलिस को दी। जानकारी मिलते ही कई थानों की पुलिस और अधिकारी मौके पर पहुँचे। डॉग स्क्वॉड दस्ता भी मौके पर पहुँचा। जिसके बाद मामले की जाँच शुरू हुई। स्कूल में काफी देर तक जाँच-पड़ताल की गई, लेकिन मौके पर कुछ भी संदिग्ध सामान नहीं मिला। पुलिस का कहना है कि यह काम किसी शरारती तत्व का लगता है, लेकिन पत्र के आधार पर केस दर्ज कर पूरे मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी

गौरतलब है कि, कुछ महीने पहले ही आतंकी मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र ने ग्लोबल आतंकी घोषित किया है। इसके साथ ही भारत सरकार ने भी पिछले दिनों यूएपीए कानून के तहत जैश सरगना को आतंकी घोषित किया गया है। पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हमले के बाद भारत लगातार मसूद अजहर पर दबाव बना रहा था जिसके बाद जैश सरगना को यूएन ने ग्लोबल आतंकी घोषित किया। मसूद के संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा में आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी।

जिसकी याद में पूरा देश मनाता है इंजीनियर्स डे, उसका नाम भी नहीं ले पाए थे राहुल गॉंधी

भारत में हर साल 15 सितंबर इंजीनियर्स डे के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन समर्पित है महान इंजिनियर भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को। उनका जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के मुद्देनाहल्ली गॉंव में हुआ था।

विश्वेश्वरैया बीते साल कर्नाटक चुनाव के दौरान काफी चर्चा में रहे थे। आप कहेंगे कि एक दिवंगत इंजीनियर का सियासत से भला क्या संबंध। असल में एक चुनावी सभा में उस समय कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे राहुल गॉंधी विश्वेश्वरैया का नाम लेते-लेते लड़खड़ा गए थे। कर्नाटक के दिग्गजों के नाम लेते हुए राहुल बोले, “बड़े-बड़े नाम हैं, टीपू सुल्तान जी, कृष्ण राजा वडियार, विश्वस्वे…विश्वा…रैया…विश्वरैया…(मुस्कुराहट)…कुवेंपू जी…।”

इस घटना से पहले राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देते हुए कहा था कि यदि वे संसद में 15 मिनट बोलेंगे तो प्रधानमंत्री बैठ नहीं पाएँगे। राहुल की कर्नाटक में हुई उस सभा के बाद मोदी ने उनकी चुनौती का जवाब देते हुए कहा था, राहुल अपने 15 मिनट के भाषण के दौरान कम से कम पॉंच बार विश्वेश्वरैया के नाम का उल्लेख कर दें तो कर्नाटक की जनता मान लेगी कि उनकी बातों में कितना दम होता है।

आज उन्हीं विश्वेश्वरैया को पूरा देश याद कर रहा है और ट्विटर पर इंजीनियर्स डे ट्रेंड कर रहा है। अपने गॉंव से ही प्राथमिक शिक्षा पूरी करने वाले इस इंजीनियर ने कॉलेज ऑफ साइंस (कॉलेज ऑफ इंजिनियरिंग) पुणे से सिविल इंजिनियरिंग की पढ़ाई की थी।

1905 में उन्हें अंग्रजों ने कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द इंडियन एंपायर से सम्मानित किया था। 1955 में उनको भारत रत्न से नवाजा गया।

मैसूर को एक विकसित और समृद्धशाली क्षेत्र बनाने में उनकी अहम भूमिका रही। कृष्णराज सागर बॉंध, भद्रावती आयरन एंड स्टील व‌र्क्स, मैसूर संदल ऑयल एंड सोप फ़ैक्टरी, मैसूर विश्वविद्यालय, बैंक ऑफ़ मैसूर समेत कई संस्थान उनकी कोशिशों का नतीजा हैं।

32 साल की उम्र में उन्होंने सिंधु नदी से सुक्कुर कस्बे को पानी भेजने की योजना तैयार की थी। इसके कारण उन्हें ‘कर्नाटक का भागीरथ’ भी कहा जाता है। उन्होंने बॉंध से पानी के बहाव को रोकने के लिए स्टील के स्वचालित द्वार बनाए और सिंचाई के लिए ब्लॉक सिस्टम विकसित किया जिसे अब तक इंजीनियरिंग का अद्भुत कारनामा माना जाता है।

मेरी गाड़ी के आगे-पीछे गाड़ी लगाकर धमकाते हैं: कॉन्ग्रेस MLA ने अपनी ही सरकार के मंत्री पर लगाए आरोप

इन दिनों कॉन्ग्रेस में अंर्तकलह की खबरें लगातार सामने आ रही है। पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के कॉन्ग्रेस विधायक बृहस्पति सिंह ने अपनी ही पार्टी के राज्य सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि राज्य का शिक्षा विभाग और मंत्री भाजपा के बंधुआ हैं और घूस ले रहे हैं। अब राजस्थान कॉन्ग्रेस के विधायक जौहरी लाल मीणा ने अपने ही सरकार के श्रम राज्य मंत्री टीकाराम जूली पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

जौहरी लाल मीणा ने शनिवार (सितंबर 14, 2019) को टीकाराम पर आरोप लगाते हुए कहा, “मेरे पीछे कई दिनों से गुंडा तत्व लगे हुए हैं। कई बार मुझे धमकाते हैं, तो कई बार मेरी गाड़ी के आगे-पीछे गाड़ी लगाकर धमकाते हैं। कई बार तो मेरी गाड़ी के आगे-पीछे गाड़ी लगाकर डराने का प्रयास करते हैं। इन गुंडा तत्वों को टीकाराम जूली का संरक्षण प्राप्त है।”

इसके अलावा उन्होंने टीकाराम पर सोशल मीडिया के पर उनके खिलाफ अभियान चलाने का आरोप लगाया और कहा कि टीकाराम जूली उनसे व्यक्तिगत रूप से दुश्मनी रखते हैं और परेशान करते रहते हैं। मीणा ने कहा, ” श्रम राज्य मंत्री चाहे मुझे गुंडों से मरवा दें, लेकिन मैं अपना सम्मान बनाकर रखूँगा।” उन्होंने कहा कि टीकाराम जूली अलवर से एकमात्र मंत्री हैं। उन्हें अपने साथी विधायकों को आगे बढ़ाने में मदद करनी चाहिए, मगर वो तो उल्टा उन्हें परेशान ही कर रहे हैं।

मीणा ने कहा कि जब राजा ही चोरी करना सिखाएगा तो दूसरों से क्या उम्मीद की जा सकती है। कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा कि अब वो इसकी शिकायत पदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी से करेंगे। हालाँकि, श्रम राज्य मंत्री जूली ने इस बारे में किसी भी जानकारी से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने किसी को भी संरक्षण नहीं दिया है।

बीवी को पीट रहा था हिस्ट्रीशीटर जावेद, पड़ोसी रचना ने रोका तो गोली मारी

दिल्ली के नरेला इलाके में पति-पत्नी के बीच झगड़ा रोकने का खामियाजा पड़ोस की 21 वर्षीय महिला रचना को भुगतना पड़ा। घटना शुक्रवार (सितंबर 13, 2019) की है। उत्तरी दिल्ली के नरेला के B2 ब्लॉक में जावेद अपनी पत्नी के साथ झगड़ा कर रहा था। आवाज सुन कर पड़ोस की रचना ने बीच-बचाव की कोशिश की। इसी दौरान जावेद ने गोली चला दी जो रचना को लगी। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया। सर्जरी के बाद वो खतरे से बाहर बताई जा रही है।

गोली की आवाज सुनकर, रचना के पति अमित और दूसरे पड़ोसी भी अपने घरों से बाहर आ गए और उस शख्स का पीछा किया, लेकिन वह भागने में सफल रहा। बाद में पता चला कि जावेद एक हिस्ट्रीशीटर था और वह अपनी पत्नी के साथ विवाद सुलझाने के लिए इलाके में आया था।

आउटर नॉर्थ के डीसीपी गौरव शर्मा ने बताया कि रचना ने जावेद और उसकी पत्नी पिंकी को उसके घर के बाहर बहस करते हुए सुना। मामले को जानने के लिए वो बालकनी में आई। फिर उसने जावेद और पिंकी को बुलाकर उन्हें शांत कराने और विवाद सुलझाने की कोशिश की, लेकिन उनलोगों ने रचना की बात को अनसुना कर दिया। तभी जावेद ने पिस्तौल निकाली और हवा में फायरिंग कर दी। गोली रचना को लग गई। रचना को लहू लुहान देख जावेद फरार हो गया।

पुलिस द्वारा की गई एक जाँच में पता चला कि पिंकी और जावेद के बीच पहले से ही विवाद चल रहा था और इसी विवाद के चलते पिंकी अपने पिता के घर में रह रही थी। वहीं, जावेद को कुछ महीने पहले ही जेल से रिहा किया गया था, जिसके बाद उसने स्थानीय किराना दुकानों को ब्रेड की आपूर्ति शुरू की थी। शुक्रवार (सितंबर 13, 2019) को जावेद, पिंकी के घर पहुँचा और उसने उसके परिवार को पिंकी को वापस उसके साथ जाने देने के लिए कहा, लेकिन जब पिंकी के परिवार वालों ने इसके लिए मना कर दिया तो जावेद ने बहस करना शुरू कर दिया और गोली मारने की धमकी दी