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भारत को गाली देना छोड़ अपने बारे में सोचें पाकिस्तानी: USA में पाक के राजदूत रहे हुसैन हक्कानी

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रहे हुसैन हक्कानी ने अपने देश के लोगों को नसीहत दी है। वह 2008-11 तक अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रहे थे। इसके अलावा वह कई पुस्तकें भी लिख चुके हैं। अभी वह वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट में ‘दक्षिण एवं मध्य एशिया’ के डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। हुसैन ने पाकिस्तानियों को सलाह दी कि वे भारत के बजाय खुद की चिंता करें।

हुसैन हक्कानी ने ट्विटर पर लिखा कि पाकिस्तानियों को भारत या भारतीयों से प्रतिस्पर्धा करने, उनका मजाक उड़ाने, उनके साथ अपनी तुलना करने की बजाय अपने राष्ट्रीय हितों पर विचार करना चाहिए। हक्कानी ने कहा कि भारत या भारतीयों की खिल्ली उड़ाने, उन्हें गालियाँ देने, उनका अपमान करने या फिर उन्हें बदनाम करने की जगह पर पाकिस्तानियों को अपने देश के बारे में सोचना चाहिए।

हुसैन ने अपनी नई पुस्तक ‘Reimagining Pakistan: Transforming a Dysfunctional Nuclear State’ का नाम टैग करते हुए अपने विचार रखे। हुसैन हक्कानी की इस ट्वीट पर कई पाकिस्तानियों ने भी इस बात पर नाराज़गी जाहिर की कि पाकिस्तानी नेता और कुछ लोग भारत के चंद्रयान-2 मिशन का भी मज़ाक उड़ा रहे हैं।

हुसैन हक्कानी ‘Pakistan Between Mosque & Military’ और ‘Magnificent Delusions’ नामक पुस्तकों के लेखक भी रह चुके हैं। बता दें कि हाल ही में पाकिस्तानी मंत्री फवाद चौधरी ने चंद्रयान-2 का मजाक बनाया था, जिसके बाद न सिर्फ़ भारत बल्कि पाकिस्तानियों से भी उन्हें लताड़ मिली थी।

J&K पर दुष्प्रचार को लेकर अमेरिका में ही घिरा वाशिंगटन पोस्ट, कश्मीरी पंडितों ने किया प्रदर्शन

जम्मू-कश्मीर को लेकर विदेश मीडिया की भ्रामक रिपोर्टिंग को सरकार कई बार खारिज कर चुकी है। अब इस कारण से अमेरिका में वाशिंगटन पोस्ट के खिलाफ आवाज उठने लगी है। कश्मीरी पंडितों के एक समूह ने अमेरिकी दैनिक द वाशिंगटन पोस्ट में पिछले कुछ दिनों से प्रकाशित होने वाली खबरों का विरोध किया है। दुनियाभर में समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा (जीकेपीडी) ने इसके विरोध में आमेरिका में द वाशिंगटन पोस्ट के कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया।

उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए के निष्क्रिय हो जाने के बाद से अखबार लगातार एकतरफा और भेदभावपूर्ण खबरें प्रकाशित कर रहा है। उन्होंने अखबार पर पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाते हुए कहा, “वाशिंगटन पोस्ट मीडिया की खबरों में कहीं यह जिक्र नहीं है कि इस अराजक राज्य में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ सबसे जघन्य नरसंहार हुआ जिससे उन्हें निर्वासित होना पड़ा।”

कश्मीरी पंडितों ने वाशिंगटन पोस्ट को दिए एक ज्ञापन में कहा कि उनकी खबरों में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए से हुई कानूनी अराजकता का कोई जिक्र नहीं किया गया है। अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से वाशिंगटन में एकत्रित हुए कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए फैसले को साहसिक और ऐतिहासिक कदम बताते हुए उनके समर्थन में नारे लगाए और प्रदर्शन के आयोजक ने अखबार पर आरोप लगाया कि वाशिंगटन पोस्ट मीडिया की खबरों में कहीं इसकी बात का उल्लेख नहीं किया गया है कि इस राज्य में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ सबसे जघन्य नरसंहार हुआ था, जिसकी वजह से उन्हें निर्वासित होना पड़ा था।

रैली के मुख्य संयोजक मोहन सप्रू ने कहा, “वॉशिंगटन पोस्ट की पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग में इस सच को नजरअंदाज किया गया कि अनुच्छेद 370 और 35ए के कारण अल्पसंख्यक, महिलाएँ और समाज के कमजोर वर्ग के लोग लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रहे जबकि कश्मीर घाटी काबू से बाहर भ्रष्टाचार, अलगावववाद की जमीन बन गई।”

वहीं, वाशिंगटन पोस्ट की खबरों को न्यायसंगत ठहराते हुए विदेशी खबरों के संपादक डगलस जेह्ल ने कश्मीर पर फैसले के बाद अखबार में छपी खबरों को निष्पक्ष, सटीक और व्यापक बताया। बता दें कि, कश्मीरी पंडित के प्रदर्शन के विरोध और वाशिंगटन पोस्ट के समर्थन में पाकिस्तानी अमेरिकियों, अलगाववादी कश्मीरियों और अलगाववादी खालिस्तानियों के एक समूह ने मूक प्रदर्शन किया। कुछ पाकिस्तानी समर्थक प्रदर्शनकारियों ने भारतीय पत्रकारों को उनके प्रदर्शन को कवर करने से भी रोका। साथ ही अमेरिकी मुस्लिमों के एक समूह ने वाशिंगटन में भारतीय दूतावास के सामने प्रदर्शन किए। 

स्टालिन ने फ़र्ज़ी प्रश्न-पत्र के आधार पर CBSE और केंद्रीय विद्यालय पर लगाया दलितों के अपमान का आरोप

डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने एक प्रश्न-पत्र को लेकर न सिर्फ़ केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय बल्कि सीबीएसई और केंद्रीय विद्यालयों पर भी निशाना साधा। एमके स्टालिन ने एक प्रश्न-पत्र का फोटो ट्वीट किया। उन्होंने बताया कि यह प्रश्न-पत्र केंद्रीय विद्यालय की छठी कक्षा की परीक्षा का है। इसमें पूछा गया था कि दलित का अर्थ क्या है? इस प्रश्न के उत्तर में 4 विकल्प इस प्रकार दिए गए थे- विदेशी, अछूत, मिडिल क्लास, अपर क्लास। स्टालिन ने आरोप लगाया कि यह प्रश्न-पत्र साम्प्रदायिकता और भेदभाव को बढ़ावा दे रहा है।

अब सीबीएसई ने इस सम्बन्ध में स्पष्टीकरण जारी किया है। बोर्ड की प्रवक्ता रमा शर्मा ने साफ़ कर दिया कि स्टालिन ने जिस प्रश्न-पत्र का फोटो ट्वीट किया है, उसे बोर्ड द्वारा नहीं सेट किया गया है। सीबीएसई ने कहा कि वह निचली कक्षा की परीक्षाओं के लिए प्रश्न-पत्र नहीं तैयार करता है और यह पूरी तरह से स्कूल की ही ज़िम्मेदारी होती है। डीएमके प्रमुख ने दावा किया कि इस प्रश्न-पत्र में मुस्लिमों के लिए भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) ने भी स्टालिन के दावों की पोल खोल दी है। केवीएस ने कहा कि स्टालिन ने जिस प्रश्न-पत्र को केंद्रीय विद्यालय का बता कर ट्वीट किया, वह फ़र्ज़ी है। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने लोगों से आग्रह किया कि वे इस फ़र्ज़ी प्रश्न-पत्र को शेयर कर के आगे न बढ़ाएँ। सीबीएसई और केवीएस के बयान के बाद लगता है कि स्टालिन ने किसी छोटे-मोटे स्कूल का प्रश्न-पत्र ट्वीट किया या फिर इसे जान-बूझकर किसी शरारती तत्व ने फैलाया था।

केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा जारी किया गया स्पष्टीकरण: फ़र्ज़ी है स्टालिन द्वारा ट्वीट किया गया प्रश्नपत्र

केंद्रीय विद्यालय संगठन ने कहा कि अभी तक किसी भी प्रकार का ऐसा सबूत भी नहीं पेश किया गया है, जिससे पता चले कि यह प्रश्न-पत्र केंद्रीय विद्यालय का है। तमिलनाडु के विपक्षी नेताओं ने दावा किया है कि यह तमिलनाडु या पुडुचेरी के किसी केंद्रीय विद्यालय का है। केंद्रीय विद्यालय ने चेन्नई क्षेत्र के अपने सभी 49 स्कूलों में पता किया लेकिन यह प्रश्न-पत्र उनमें से कहीं का नहीं है।

लालू के लाल से टूटी आस तो राजद नेता ने भी कहा- एनडीए छोड़े तो ठीके हैं नीतीश कुमार

बिहार में चल रहे पोस्टर वार के बीच जदयू और राजद का नया स्लोगन आया है। ‘क्यूॅं करे विचार, ठीके तो है नीतीश कुमार’ को आगे बढ़ाते हुए जदयू ने ‘क्यूॅं करे विचार, जब है ही नीतीश कुमार’ के नारे से नया पोस्टर जारी किया है। मुख्य विपक्षी दल राजद ने भी जवाब में ‘क्यों न करें विचार, बिहार जो है बीमार’ को विस्तार देते हुए ‘क्यूॅं न करे विचार’ के नाम से आरोपों की झड़ी लगा दी है।

लेकिन, इस बीच राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी के एक बयान से जाहिर होता है कि अपने इस कैंपेन से कमाल होने की उम्मीद राजद को भी नहीं है। तिवारी का कहना है कि यदि बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार एनडीए छोड़ देते हैं तो उन्हें नेता के रूप में स्वीकार करने में महागठबंधन को कोई समस्या नहीं होगी।

उन्होंने कहा, “अगर नीतीश कुमार साम्प्रदायिकता के खिलाफ कोई भी कदम उठाते हैं और यदि हम उसका समर्थन नहीं करते हैं तो हम खत्म हो जाएँगे।” तिवारी ने कहा कि नीतीश के एनडीए छोड़ने पर राजद ने साथ नहीं दिया तो वह बीजेपी के एजेंट की तरह दिखेगी। नीतीश को साथ लाने को राजद कितनी उत्सुक है इसका पता इस बात से भी चलता है कि बकौल तिवारी राजद 2015 की शर्तों पर ही इस बार भी विधानसभा चुनाव में उतरने को तैयार है।

उल्लेखनीय है कि 2015 का विधानसभा चुनाव जदयू और राजद ने मिलकर लड़ा था और जीत हासिल की थी। यह बात दूसरी है कि नतीजों के बाद राजद नेता यह दावा करने से नहीं चूके कि ऐसा लालू के करिश्मे का कारण हो पाया। बाद में राजद की शर्तों के सामने घुटने टेकने से इनकार करते हुए नीतीश एनडीए में लौट आए थे।

अब राजद अपने कैंपेन में जो आरोप नीतीश पर लगा रही है वह पुराने ही हैं। पिछले चुनावों में ये बेअसर साबित हुए हैं। यही कारण है कि कल तक लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव के कसीदे पढ़ने में नहीं अघाने वाले नेता भी अब जमीनी हकीकत भॉंप ऐसे चेहरे की तलाश कर रहे हैं जो चुनावी नैया पार लगा सके। विपक्षी गठबंधन के हिस्सा हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी तो हाल में कई बार तेजस्वी के नेतृत्व पर सवाल उठा चुके हैं। मांझी के बयान का राजद के अलावा गठबंधन के अन्य दल ने अब तक विरोध भी नहीं किया। यह बताता है कि तेजस्वी की क्षमता को लेकर महागठबंधन के दल कितने असमंजस में हैं। ऐसे में तिवारी के बयान ने जाहिर कर दिया है कि यह बेचैनी राजद के भीतर भी है।

यही कारण है कि तिवारी के प्रस्ताव को जदयू भाव नहीं दे रही। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी का कहना है कि उनकी पार्टी एनडीए में बहुत सहज है। उन्होंने कहा कि राजद नेता इसलिए इस तरह की बातें कर रहे हैं, क्योंकि लोकसभा चुनाव में लोगों ने जाति और गोत्र की उनकी राजनीति को ठुकरा दिया था।


10 साल पहले गोदान, कर्ज चुकाने के लिए 600 Km दूर बाढ़ पीड़ित गाँव को मंदिर ने लिया गोद

हिन्दू धर्म में मंदिर और समाज, दोनों एक-दूसरे के पूरक रहे हैं और एक-दूसरे के मददगार साबित होते रहे हैं। जब मंदिर पर विपत्ति आई तो लोगों ने एकजुट होकर उसकी रक्षा की। जब लोगों पर विपत्ति आई तो मंदिर और मठ आगे आए। यह कहानी है कर्नाटक के बेलगावी जिला स्थित सुदूरवर्ती गाँव शेगुनासी की, जहाँ इस वर्ष भयंकर बाढ़ आई। लेकिन, उनके लिए मदद सरकार से नहीं बल्कि ऐसी जगह से पहुँची कि 10 साल पुराना इतिहास फिर से जिन्दा हो गया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के अनुसार, शेनुगासी से 600 किलोमीटर दूर कर्नाटक के चिकबल्लापुर जिले में बिक्कलहल्ली नामक गाँव स्थित है। दोनों गाँवों के बीच एक अनोखा सम्बन्ध देखने को मिला। इतनी ज्यादा दूरी होने के कारण दोनों गाँवों का सांस्कृतिक और सामाजिक परिवेश भी अलग है। शेगुनासी के पास स्थित मुगलखोड़ गाँव के एक किसान ने एक दशक पहले बिक्कलहल्ली के एक मंदिर को एक जोड़ी बछड़े दान में दिए थे। उन्होंने इसकी एवज में कोई रुपया-पैसा नहीं लिया था।

आज उसी दान की वजह से बिक्कलहल्ली के लोगों ने बाढ़ पीड़ित शेगुनासी गाँव की मदद करने का फ़ैसला लिया है। जिस मंदिर को उक्त किसान ने बैल दान की थी, उस मंदिर के फंड से शेगुनासी गाँव के 200 परिवारों की मदद की जा रही है। गाँव के लोगों ने पहले किसान वेंकटेश कलप्पानावर का नाम नहीं सुना था लेकिन अब उनके ही चर्चे हैं। दान के बाद से ही मंदिर की किस्मत पलट गई और लोग बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आने लगे और आसपास के लोगों के जीवन में भी खुशहाली आई।

बिक्कलहल्ली की जनता ने इन सबका श्रेय कृषक वेंकटेश से दान में मिले बछड़ों को दिया। जिस मंदिर में मुश्किल से 100 श्रद्धालु आते थे, आज वहाँ पूर्णिमा और अमावस्या के मौके पर 3,000 से भी अधिक लोग दर्शन हेतु आते हैं। आज जब उत्तरी कर्नाटक बाढ़ से पीड़ित है, बिक्कलहल्ली के लोगों ने शेगुनासी और मुगलखोड़ के लोगों के पास पहुँच कर उनकी ज़रूरतों को समझा और मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया।

योगमुनेश्वर मंदिर के प्रमुख मंजुनाथ एक सिविल इंजीनियर हैं। उन्होंने बताया कि मुगलखोड़ में बाढ़ से उतनी क्षति नहीं हुई थी, इसीलिए बिक्कलहल्ली के लोगों ने शेगुनासी गाँव को गोद लेने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि कृषक वेंकटेश ने जब बैल दान किए, तब उनकी अर्थित स्थित अच्छी नहीं थी। बावजूद इसके उन्होंने रुपए लेने से इनकार कर दिया। मंदिर अपने फण्ड से तब तक शेगुनासी गाँव की मदद करेगा, जब तक चीजें सामान्य नहीं हो जाती।

वेंकटेश फिलहाल बंगलौर में एक कॉन्ट्रैक्ट मजदूर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने एक बार आए सूखे की वजह से खेती को अलविदा कह दिया है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने बछड़ों को दान किया था, तब वे मात्र 6 महीने के थे। बिक्कलहल्ली गाँव के लोगों ने उनका काफ़ी ख्याल रखा है।

17 साल में वकील बने जेठमलानी नहीं रहे, नानावती से लेकर अफजल गुरु तक रहे मुवक्किल

जाने-माने वकील राम जेठमलानी का रविवार को निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे। नई दिल्ली के अपने आवास पर सुबह पौने आठ बजे उन्होंने अंतिम सॉंस ली। उनकी तबीयत पिछले कुछ समय से ठीक नहीं थी। 14 सितंबर को उनका 96वां जन्मदिन आने वाला था।

वे क्रिमिनल मामलों के देश के सबसे बेहतरीन वकील में शुमार थे। वे देश के कानून मंत्री भी रहे। अविभाजित भारत के पाकिस्तान स्थित शिकारपुर में 14 सितंबर 1923 को जन्मे जेठमलानी के पिता और दादा भी वकील थे। लिहाजा वकालत के पेशे को लेकर आकर्षण बचपन से ही था। 17 साल की उम्र में उन्होंने वकालत की डिग्री हासिल की। उन दिनों प्रैक्टिस करने की न्यूनतम उम्र 21 साल थी। लेकिन, जेठमलानी की प्रतिभा को देख इस उम्र सीमा में छूट दी गई।

उन्होंने सात दशक तक वकालत की और साल 2017 में इससे संन्यास ले लिया था। एक वकील होने के नाते जेठमलानी ने देश के कई बहुचर्चित केस भी लड़े हैं। इनमें कई काफी विवादित भी रहे। 1959 में नानावती के पक्ष में अदालत में दलीलें पेश कर वे वकालत की दुनिया के सितारे बने। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्यारों के पक्ष में मद्रास हाई कोर्ट में 2011 में केस लड़ा। स्टॉक मार्केट घोटाला केस में उन्होंने हर्षद मेहता और केतन पारेख का केस भी लड़ा। उनका सबसे विवादित केस अफजल गुरु की फाँसी का बचाव करना था। बहुचर्चित जेसिका लाल हत्याकांड में उन्होंने मनु शर्मा का केस भी लड़ा था। राम जेठमलानी ने चारा घोटाला मामले में आरोपित लालू प्रसाद यादव के साथ ही आसाराम, जयललिता और जगन रेड्डी की भी पैरवी की थी।

इसके अलावा, दाऊद इब्राहिम ने भी मुंबई बम ब्लास्ट के बाद मदद के लिए राम जेठमलानी के पास फोन किया था। जेठमलानी ने 2015 में कहा था कि दाऊद को भारत लाया जा सकता था, लेकिन महाराष्ट्र के तत्कालीन सीएम शरद पवार की वजह से ऐसा नहीं हो पाया। उन्होंने कहा था कि उनकी बात दाऊद से हुई है। दाऊद ने उन्हें बताया था कि उसने बम ब्लास्ट नहीं कराया है और वो भारत आने के लिए भी तैयार है, बशर्ते उसके साथ सही सलूक किया जाए।


प्रणय रॉय बोले- वैज्ञानिक पर चिल्लाने वाले पल्लव ने इसरो के लिए बहुत किया है, लोगों ने कहा- रॉकेट को रस्सी से खींचा करते थे

एनडीटीवी के संस्थापक प्रणय रॉय ने इसरो वैज्ञानिक पर चिल्लाने वाले पत्रकार पल्लव बागला का बचाव किया है। बता दें कि चंद्रयान-2 के लैंडर से कनेक्शन टूटने के बाद इसरो वैज्ञानिक प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित कर रहे थे। इसी दौरान एनडीटीवी के पत्रकार ने वैज्ञानिक के साथ अभद्रता करते हुए ज़ोर से चिल्ला कर सवाल पूछा। पल्लव बागला ने अजीब लहजे में पूछा कि इसरो प्रमुख के. सिवन प्रेस को सम्बोधित करने क्यों नहीं आए? पल्लव का कहना था कि ऐसे मौक़ों पर इसरो प्रमुख ही मीडिया से बात करने आते हैं।

कई मामलों में सेबी और इनकम टैक्स की रडार पर चढ़े प्रणय रॉय ने पल्लव बागला का बचाव करते हुए लिखा कि पल्लव से ग़लती हुई है, बहुत बड़ी गलती हुई है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि पल्लव ने एनडीटीवी से भी माफ़ी माँग ली है। इसके बाद प्रणय रॉय ने जो लिखा, वह कॉन्ग्रेस की नेहरू विरासत को चुनौती देता है। जैसा कि विदित है, भारत की हर सफलता के पीछे कॉन्ग्रेस नेहरू का हाथ निकाल ले आती है।

ठीक इसी तरह, एनडीटीवी के मालिक ने अपने पत्रकार का बचाव करते हुए लिखा कि पल्लव ने इसरो के लिए काफ़ी कुछ किया है, उन्होंने भारत में विज्ञान के लिए काफ़ी कुछ किया है। प्रणय रॉय के अनुसार, इसरो वैज्ञानिक पर अभद्रतापूर्वक चिल्लाने वाले पल्लव ने अपने सभी आलोचकों से ज्यादा इसरो और विज्ञान के लिए कार्य किया है।

एक ट्विटर यूजर ने प्रणय रॉय से सहमति जताते हुए लिखा कि हाँ, पल्लव ने इसरो वालों से भी ज्यादा रॉकेट लॉन्च लिए हैं लेकिन दीवाली पर। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा कि पल्लव अब कभी ऐसा कमेंट नहीं करेंगे। भले मामला विक्रम की चाँद पर लैडिंग का हो या फिर प्रणय रॉय की जेल में लैंडिंग का।

एक अन्य यूजर ने लिखा कि एनडीटीवी के पत्रकार पल्लव बागला नेहरू के ज़माने से ही मोटर में डीजल भरते थे और बैलगाड़ी चलाते थे। लोगों ने तो यहाँ तक लिखा कि वे बाहुबली की तरह रॉकेट को रस्सी से भी खींचा करते थे।

प्रणय रॉय के अलावा एनडीटीवी की निधि राजदान ने भी पल्लव बागला का समर्थन किया। एनडीटीवी की एग्जीक्यूटिव एडिटर ने लिखा कि ‘हत्यारी भीड़’ के साथ मिल कर पल्लव बागला को हटाए जाने की माँग करना अनुचित है। ऐसा उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, जिसमें उन्होंने कहा था कि बागला का व्यवहार पागलपन भरा है। सिंघवी ने इसरो वैज्ञानिक की तारीफ की, जिन्होंने मुस्कुराते हुए पल्लव के दुर्व्यवहार को झेला।

इसरो से बोला नासा: चंद्रयान-2 की यात्रा हमारे लिए प्रेरणा, मिलकर सौरमंडल की सैर करेंगे

चंद्रयान—2 भले चॉंद पर लैंड करने में कामयाब नहीं हुआ हो। लेकिन, इसरो के इस मिशन को दुनिया भर से सराहना मिल रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इस सफर को अपने लिए प्रेरणा बताते हुए भविष्य में सौर मंडल पर मिलकर काम करने की इच्छा जताई है।

अमेरिका में दक्षिण और मध्य एशिया की कार्यवाहक सहायक सचिव एलिस जी वेल्स ने इसरो को चंद्रयान-2 के लिए बधाई देते हुए कहा कि भारत का इस तरह का मिशन एक बड़ा कदम है। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत अपनी अंतरिक्ष आकांक्षाओं को अवश्य पूरा करेगा।

यूएस ब्यूरो ऑफ साउथ एंड सेंट्रल एशियन अफेयर्स के पेज पर पोस्ट किए गए ट्वीट में वेल्स ने कहा, “हम चंद्रयान-2 के इस ऐतिहासिक प्रयास के लिए बधाई देते हैं। यह मिशन भारत को बहुत आगे तक ले जाएगा और यह वैज्ञानिक आँकड़ों को जुटाने का प्रयास आगे भी जारी रखेगा। हमें उम्मीद है कि भारत अंतरिक्ष आकांक्षाओं को जरूर हासिल करेगा।”

वहीं, नासा ने ट्वीट कर कहा, “अंतरिक्ष में शोध करना मुश्किल काम है। हम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इसरो के चंद्रयान-2 मिशन को उतारने के प्रयास की सराहना करते हैं। आपने अपनी यात्रा से हमें प्रेरित किया है और भविष्य में हम सौर मंडल पर मिलकर काम करेंगे ।”

गौरतलब है कि, भारत के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चंद्रयान-2 का सफर अपनी मंजिल से महज 2.1 किलोमीटर पहले थम गया। चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग से मात्र 2.1 किलोमीटर की दूरी से पहले कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया। 

इसरो प्रमुख के. सिवन ने एक साक्षात्कार में बताया कि ऑर्बिटर का तय जीवनकाल महज़ एक साल का है, लेकिन उसमें काफी अतिरिक्त ईंधन मौजूद है। इसके चलते ऑर्बिटर लगभग 7-7.5 साल तक चन्द्रमा की परिक्रमा कर सकता है। उन्होंने कहा कि विक्रम लैंडर से फ़िलहाल सम्पर्क टूटा हुआ है। फिर भी उम्मीदें कायम हैं। अगले 14 दिनों में सम्पर्क फिर से स्थापित करने के प्रयास किए जाएँगे।

प्यार, धोखा और लालच: कृष्णा का हत्यारा निकला ज्योति का तीसरा आशिक मुख़्तार, शर्ट के 4 बटन ने सुलझाई गुत्थी

एक हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी और राज़ खुला भी तो शर्ट के बटन से। मामला मुंबई से सटे नालासोपारा के तुलिंज पुलिस स्टेशन का है। पुलिस को एक व्यक्ति की लाश मिली। उसकी पहचान के लिए पुलिस ने उसकी शर्ट का इस्तेमाल किया, जिस पर टेलर का पता लिखा हुआ था। पुलिस जब दुकान पर पहुँची, तब टेलर ने शर्ट देखते ही बता दिया कि उक्त व्यक्ति का नाम कृष्णा है। हालाँकि, वह पूरा नाम नहीं बता पाया लेकिन उसे इतना पता था कि कृष्णा किसी मुस्लिम के होटल में काम करता है।

शर्ट देख टेलर कृष्णा की पहचान इसलिए कर पाया क्योंकि वह कॉलर के नीचे के 3-4 बटन हमेशा अलग रंग के लगाता था। जब पुलिस हत्या के तह तक पहुँची तो उसे प्यार, धोखा और लालच से भरी एक कहानी मिली। इस दौरान पुलिस को ज्योति नामक युवती का पता चला, जो उत्तर प्रदेश के महराजगंज के किसी पुलिस वाली की बहन है। उसका किसी लड़के के साथ अफेयर था। दोनों भाग कर लखनऊ आए लेकिन उस लड़के को लगा कि ज्योति का भाई उसे छोड़ेगा नहीं।

ज्योति का बॉयफ्रेंड डर के मारे लखनऊ से भाग खड़ा हुआ। इसके बाद फूट-फूट कर रो रही ज्योति को कृष्णा साहनी का साथ मिला। ज्योति को कृष्णा से भी प्यार हो गया। दोनों आकर मुंबई रहने लगे। एक दिन अचानक से कृष्णा को पता चला कि ज्योति के ऊपर यूपी में 30,000 रुपए का इनाम रखा गया है। उसके मन में लालच घर कर गया और उसने यूपी पुलिस को फोन कर ज्योति का पता बता दिया। उसने पुलिस को कहा कि वो रुपए लेकर आए और ज्योति को ले जाए। नशे की हालत में उसने ये बात ज्योति को भी बताई।

ज्योति अपने साथ हुए धोखे के कारण गुस्से से लाल हो गई। इसके बाद कृष्णा को भी अपनी ग़लती का एहसास हुआ और वह ज्योति को लेकर किसी दूसरे एरिया में शिफ्ट हो गया ताकि पुलिस उन्हें न ढूँढ पाए। वो लोग जहाँ शिफ्ट हुए, वहीं नए किरदार की एंट्री हुई। उसका नाम था मुख़्तार, जो वहाँ आता-जाता रहता था। कृष्णा के धोखे को ज्योति भूली नहीं थी। उसे अब मुख़्तार से प्यार हो गया। जब कृष्णा किसी काम से पुणे गया तो मुख़्तार की सलाह पर ज्योति कहीं और शिफ्ट हो गई।

कृष्णा जब लौटा तो उसने ज्योति को न पाकर आश्चर्य हुआ। जब उसे पता चला कि ज्योति कहीं और शिफ्ट हो गई है तो उसने बिल्डिंग के लोगों से ज्योति का नया पता लिया। कृष्णा सीधा ज्योति के घर जा धमका और उससे सेक्स की डिमांड की। शराब के नशे में उसने ज्योति के साथ गाली-गलौज भी किया। वह नशे में वहीं पर सो गया। तब ज्योति ने मुख़्तार को कॉल किया। मुख़्तार ने वहाँ पहुँच कर सीधे सोते हुए कृष्णा के चेहरे पर हथौड़े से तगड़ा वार किया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

इसके बाद मुख़्तार ने सारे सबूत मिटाए और नायलॉन के एक बैग में लाश को पैक कर दिया। लाश को उसने ज्योति और अपने एक दोस्त सूरज के साथ मिल कर नाले में फेंक दिया। पुलिस को ज्योति के बारे में उसी होटल से पता चला था, जहाँ कृष्णा काम करता था। ज्योति के घर में नया-नया पेंट किया हुआ दीवाल देख कर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खँगाली और फिर हत्या का पर्दाफाश हुआ।

पूजा-पाठ और नारियल फोड़ने की वजह से मिली असफलता: चन्द्रयान-2 पर ‘सबसे बड़े दलित नेता’

अपने आप को ‘सबसे बड़ा दलित नेता’ बताने वाले उदित राज ने चंद्रयान-2 को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिससे ट्विटर पर उन्हें लोगों ने न सिर्फ़ लताड़ा बल्कि उनकी योग्यता पर भी सवालिया निशान लगाया। चंद्रयान-2 के लैंडर का इसरो से कनेक्शन टूटने के बाद जहाँ भारतीयों ने इसरो के वैज्ञानिकों का ढाँढस बँधाया, उदित राज इसमें भी धर्म घुसा कर राजनीति करने से बाज नहीं आए। नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के पूर्व सांसद ने अपनी ट्वीट में लिखा:

“हमारे इसरो के वैज्ञानिकों ने अगर नारियल फोड़ने और पूजा पाठ पर विश्वास जताने की बजाय अगर वैज्ञानिक शक्ति और आधार पर विश्वास किया होता तो अब तक मिली आंशिक असफलता का मुँह ना देखना पड़ता।”

बता दें कि जुलाई में इसरो अध्यक्ष के. सिवन और उपाध्यक्ष उमा महेश्वरन ने नेल्लोर स्थित चेंगलम्मा माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर चंद्रयान-2 की सफलता के लिए आशीर्वाद माँगा था। इसके बाद उन्होंने चित्तूर स्थित तिरुमला मंदिर में पूजा की थी। इस दौरान के सिवन सहित इसरो के अन्य वैज्ञानिकों ने भगवान तिरुपति के सामने चंद्रयान-2 प्रतिकृति भेंट की थी

बता दें कि उदित राज अपनेआप को सबसे बड़ा दलित नेता बताते रहे हैं। भाजपा में टिकट नहीं मिलने पर आम चुनावों से पहले वे कॉन्ग्रेस में चले गए थे। कई लोगों ने पूर्व सांसद से उनकी शैक्षिक योग्यता जाननी चाही। लोगों ने ट्विटर पर उदित राज से पूछा कि उन्होंने किस विषय से स्नातक किया था कि उनका बेसिक ज्ञान भी इतना कमजोर है? कुछ लोगों ने कहा कि देश में उदित राज जैसे नेताओं के रहते पाकिस्तान की क्या ज़रूरत है?

इससे पहले ईवीएम को लेकर उदित राज ने सुप्रीम कोर्ट पर ही धाँधली का आरोप लगा दिया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग बिक चुका है। सुप्रीम कोर्ट के अलावा वह राष्ट्रपति पद पर भी टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि भाजपा हमेशा गूँगे-बहरों को ही राष्ट्रपति बनाती है।