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Article 370: कॉन्ग्रेस की सुप्रीम कोर्ट यूनिट भी मोदी सरकार के साथ

अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के मोदी सरकार के फैसले पर कॉन्ग्रेस में विभाजन साफ-साफ दिख रहा है। कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेताओं के बाद पार्टी की लीगल सेल ने भी जम्मू-कश्मीर पर केन्द्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है। पार्टी की सुप्रीम कोर्ट, मानवाधिकार और आरटीआई यूनिट ने एक प्रेस नोट जारी कर इस मामले पर पार्टी से अलग स्टैंड दिखाया है।

पार्टी की इस यूनिट के अध्यक्ष अनूप जॉर्ज चौधरी के हस्ताक्षर वाले प्रेस नोट में कहा गया है कि अनुच्छेद 370 एक आस्थायी प्रावधान था और इसे हटाकर केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का सही मायनों में भारत के साथ विलय कर दिया है।

इससे पहले दीपेंद्र हुड्डा, ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया, जर्नादन द्विवेदी, मिलिंद देवड़ा आदि भी अनुच्‍छेद 370 को निष्प्रभावी करने और जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य पुनर्गठन विधयेक को पारित करने के फैसले का स्‍वागत कर चुके हैं।

कॉन्ग्रेस पार्टी की सुप्रीम कोर्ट यूनिट ने अनुच्छेद 35-A और राज्य को दो हिस्सों में बाँटने के फैसले का भी समर्थन किया है। कॉन्ग्रेस की इस यूनिट का मानना है कि राज्य को दो हिस्सों में बाँटने से राजनीतिक शक्तियों का सही रूप से बँटवारा हो सकेगा जो वहाँ की जनता के हित में है।

गत सोमवार को भुवनेश्‍वर कालिता ने कश्मीर मुद्दे पर व्हिप जारी करने से इनकार करते हुए राज्‍यसभा और कॉन्ग्रेस से इस्‍तीफा दे दिया था। उन्‍होंने कहा था कि देश का मिजाज पूरी तरह से बदल चुका है और पार्टी का इस मसले पर स्टैंड जन भावना के खिलाफ है।

अरुण जेटली AIIMS में भर्ती, पीएम मोदी देखने पहुॅंचे

काफी समय से बीमार चल रहे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली को AIIMS में भर्ती कराया गया है। साँस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद उन्हें मेडिकल जाँच के लिए शुक्रवार सुबह 11 बजे एम्स में भर्ती कराया गया। उन्हें सीएन (न्यूरो कार्डियक) सेंटर में एडमिट कराया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एम्स पहुॅंचकर जेटली का हाल जाना। उनसे पहले केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला भी AIIMS पहुॅंचकर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कमजोरी और घबराहट की वजह से जेटली को भर्ती कराया गया है। इससे पहले, सितंबर 2014 में डायबिटीज मैनेज के लिए उनकी गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी भी हो चुकी है, जबकि साल 2005 में उनका दिल से जुड़ा ऑपरेशन भी हुआ था।

भाजपा के वरिष्ठ नेता जेटली पिछले करीब 2 साल से बीमार चल रहे हैं। किडनी की बीमारी के साथ-साथ जेटली कैंसर से भी जूझ रहे हैं। वह सॉफ्ट टिशू कैंसर से पीड़ित हैं। जेटली के बाएँ पैर में कैंसर (सॉफ्ट टिश्यू) है। वह इसकी सर्जरी के लिए जनवरी 2019 में अमेरिका भी गए थे। पिछले साल मई में उन्हें किडनी प्रत्यारोपित की गई थी।

अपनी अस्वस्थता के कारण ही जेटली ने मोदी सरकार की दूसरी कैबिनेट में शामिल होने से मना कर दिया था। इसको लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भी लिखी थी।

जेटली ने उस चिट्ठी को ट्विटर पर भी शेयर करते हुए लिखा था, “पिछले 18 महीने से मैं बीमार हूँ। मेरी तबीयत खराब है, इसलिए मुझे मंत्री न बनाने पर विचार करें।”

इंदिरा गाँधी ने पाकिस्तान को लौटाई थी हजारों एकड़ जमीन: जरदारी का खुलासा

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने शुक्रवार (अगस्त 09, 2019) को संसद में कश्मीर मुद्दे पर बात रखते हुए ‘पूर्वी पाकिस्तान’ की जंग के समय को याद करते हुए इंदिरा गाँधी का जिक्र किया। इंदिरा का हवाला देते हुए उन्होंने जो कुछ कहा वह कॉन्ग्रेस की परेशानी बढ़ा सकता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जरदारी ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि 1971 की जंग के बाद इंदिरा गाँधी ने हजारों एकड़ जमीन पाकिस्तान को लौटाई थी। उन्होंने कहा कि 1971 की जंग में 90,000 कैदी भारत के पास थे। इसके अलावा हजारों एकड़ जमीन भी भारत के कब्जे में थी। तब पूर्व पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो ने इंदिरा से बातचीत की। इसके बाद इंदिरा गाँधी ने सैनिक भी लौटाए और हमारी जमीन भी वापस की।

जरदारी ने पाकिस्तान की संसद में कहा कि आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी किया जाना पूर्वी पाकिस्तान जैसी बड़ी समस्या है। इस समझने के लिए हमें इतिहास का सहारा लेना होगा। जरदारी ने अपने भाषण में भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर सेकुलर मूल्यों को खत्म करने का आरोप लगाया।

जरदारी ने कहा- “हम ईस्ट पाकिस्तान की जंग हारे थे। मैं इस पर नहीं जाना चाहता। इसके बहुत से मसले हैं, लेकिन हमारा आधा अंग टूट चुका था। इसी तरह आज कश्मीर का हमारा आधा अंग टूट चुका है। कश्मीर और भारत के मुसलमानों को जिन्ना की यह बात समझ आ गई है कि दो राष्ट्र का सिद्धांत ही चलेगा। उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के बयानों का हवाला देते हुए जरदारी ने कहा कि कश्मीर की लीडरशिप खुद कह रही है कि हमने गलती की कि हमने भारत का साथ दिया। यह बात समझने के लिए हमें दूरदृष्टि चाहिए।”

इसके साथ ही जरदारी ने पाकिस्तान सरकार को संयुक्त राष्ट्र अमीरात, चीन, रूस, ईरान के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात करने का भी सुझाव दिया।

TRS के वरिष्ठ नेता जी विवेकानंद ने थामा BJP का दामन

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के वरिष्ठ नेता जी विवेकानंद शुक्रवार (अगस्त 9, 2019) को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी और तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष के लक्ष्मण की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली।

विवेकानंद का भाजपा में शामिल होना सत्ताधारी टीआरएस के लिए बड़ा झटका है। उन्हें टीआरएस सुप्रीमो और सीएम के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने अपने पहले शासनकाल में सलाहकार नियुक्त किया था। मगर पार्टी की तरफ से टिकट न मिलने के कारण जी विवेकानंद काफी नाराज चल रहे थे। इसी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में पार्टी के चीफ व्हिप रहे भुवनेश्वर कलीता भी आज (अगस्त 9, 2019) बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। कलीता ने अनुच्छेद 370 पर कॉन्ग्रेस के रुख के विरोध में सोमवार (अगस्त 5, 2019) को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

कलीता ने एक पत्र में कहा था, “आज कॉन्ग्रेस ने मुझे कश्मीर मुद्दे के बारे में व्हिप जारी करने को कहा है। जबकि सच्चाई ये है कि देश का मिजाज पूरी तरह से बदल चुका है और ये व्हिप देश की जन भावना के खिलाफ है। पंडित नेहरू ने खुद कहा था कि आर्टिकल 370 एक दिन घिसते-घिसते पूरी तरह घिस जाएगा। आज की कॉन्ग्रेस की विचारधारा से लगता है कि कॉन्ग्रेस आत्महत्या कर रही है और मैं इसमें भागीदार नहीं बनना चाहता हूँ।”

अगस्ता वेस्टलैंड मामले में कमलनाथ के भांजे के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी

दिल्ली की एक अदालत ने अगस्ता वेस्टलैंड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे और कारोबारी रतुल पुरी के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोर्ट से पुरी के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी करने की मांग की थी।

खबरों के अनुसार, ईडी ने कोर्ट से कहा था कि पुरी जॉंच जांच सहयोग नहीं कर रहे हैं। उनसे संपर्क करना भी मुश्किल है। ऐसे में यदि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया तो वे मामले की जॉंच को प्रभावित कर सकते हैं। गौरतलब है कि एक बार ईडी के समन पर पुरी पेश होने के बाद टॉयलेट जाने का बहाना बना निकल भागे थे।

ख़बर के अनुसार, रतुल पुरी ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा रिकॉर्ड किए गए अपने बयान की कॉपी हासिल करने के लिए गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। निचली अदालत ने 6 अगस्त को बयान की कॉपी की उनकी माँग ख़ारिज कर दी थी। उनके वकील विजय अग्रवाल ने दावा किया कि आवेदन ख़ारिज करना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

ग़ौरतलब है कि हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष पुरी ने 27 जुलाई को निचली अदालत से इस मामले में अग्रिम ज़मानत माँगी थी।

‘स्टंट सेकुलर’ Zomato में कॉस्ट कटिंग: 100 लोगों को नौकरी से निकाला

हाल ही में अपनी सेक्युलर छवि के लिए चर्चा में आई ऑनलाइन खाना डिलीवरी करने वाली कंपनी जोमैटो (Zomato) ने अपने गुरुग्राम कार्यालय में आवश्यकता से अधिक 100 कस्टमर्स सपोर्ट कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। कंपनी ने कॉस्ट कटिंग करने के लिए छंटनी करने का कदम उठाया है।

Zomato कंपनी ने कहा है कि यह छंटनी ग्राहक देखभाल विभाग में आवश्यकता से अधिक कर्मचारी होने के कारण की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “पिछले कुछ महीनों में हमारी सेवा गुणवत्ता सुधरी है। मिलने वाले ऑर्डरों के लिए ग्राहक सहायता के लिए कर्मचारियों की जरूरत कम हुई है।” Zomato के अनुसार, कंपनी ने बैकअप के लिए रखे इन लोगों को नौकरी से निकाला है।

हालाँकि, कंपनी का कहना है कि इस छंटनी की वजह से उसके कोर ऑपरेशन (Core operations) पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। Zomato ने कहा है, ”पिछले कुछ समय में हमारी सर्विस में सुधार देखने को मिला है। अब वर्किंग ऑपरेशन को ऑपरेट करने में कम लोगों की जरूरत पड़ रही है।

कंपनी का कस्टमर्स सपोर्ट डिपॉर्टमेंट में इस बात से अच्छा प्रभाव देखने को मिला है। Zomato हर ऑर्डर पर कस्टमर सपोर्ट में 4 से 5 रुपए खर्च करती है। इस खर्च में ऑर्डर की सेल सर्विस भी शामिल है। इस तरह से कम्पनी का मानना है कि वो मानव संसाधनों पर ज्यादा खर्च वहन करने में असमर्थ है।

Zomato हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी रही। दरअसल, जोमैटो ने एक हिन्दू युवक की माँग को खारिज कर के उसे बदले में ऐसा जवाब दिया था, जिससे कंपनी हिन्दू समुदाय और कार्यकर्ताओं के निशाने पर आ गई थी।

अमित शुक्ला नाम के उपभोक्ता ने मुस्लिम डिलिवरी ब्वॉय को देखकर ऑर्डर कैंसल कर दिया था। साथ ही, उन्होंने दूसरे राइडर से खाना भिजवाने की माँग की थी। हालाँकि, कंपनी ने इसके लिए इनकार कर दिया और रिफंड देने से भी मना कर दिया था। इसके बाद कस्टमर ने कानूनी कार्रवाई करने की धमकी भी दी थी। इसके बाद यूज़र्स ने Zomato के बहिष्कार का निर्णय किया था और इसके बाद कम्पनी की मोबाइल एप्प को भी अनइंस्टॉल किया गया।

राम मंदिर पर रोजाना सुनवाई नहीं रुकेगी, आप Mid-Week ब्रेक ले लेना: SC की मुस्लिम पक्षकार को 2 टूक

सुप्रीम कोर्ट ने रोजाना सुनवाई पर बाबरी मस्जिद पक्ष की माँग ठुकरा दी है। अदालत ने कहा है कि राम मंदिर मुद्दे की रोजाना सुनवाई (सप्ताह में 5 दिन) जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद पक्ष के वकील राजीव धवन से कहा कि अगर वो आराम करना चाहते हैं तो उन्हें मिड-वीक ब्रेक दिया जाएगा लेकिन बेंच सुनवाई जारी रखेगी। मुस्लिम पक्षकार ने प्रतिदिन सुनवाई को ‘टॉर्चर’ बताया था।

बता दें कि मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने मामले की सप्ताह में पॉंच दिन सुनवाई करने के फैसले पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कोर्ट से पाँच दिन सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि अगर इतनी तेज सुनवाई हुई तो उनके लिए न्यायालय में पैरवी कर पाना संभव नहीं होगा।

धवन ने कहा था, “यदि इस मामले पर कोर्ट में हफ्ते में पाँच दिन सुनवाई होती है तो यह अमानवीय होगा।” उनके मुताबिक हमें दिन रात अनुवाद के कागज पढ़ने और अन्य तैयारियाँ करनी पड़ती हैं। ऐसे में रोजाना सुनवाई में दलीलें रखने में मैं असमर्थ हूँ। इस स्थिति में वह अदालत की तेजी के साथ तालमेल नहीं बिठा पाएँगे और वे केस छोड़ने को मजबूर होंगे।

बीते दिन पीठ ने अयोध्या मामले में रोजाना सुनवाई का फैसला लिया था। इससे पहले परंपरा के अनुसार मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को ही मामले की सुनवाई तय की गई थी। लेकिन गुरुवार को कोर्ट ने तय किया कि इस केस की सुनवाई हफ्ते के पाँचों दिन होगी। 


पाकिस्तान में भगवा संगठन दाखिल, भारतीय सेना भी जल्द पहुँचेगी: शिवसेना

कश्मीर को पाकिस्तान के लिए बंद अध्याय बताते हुए शिवसेना ने कहा है कि अब उसके पास पीओके है जिसका समाधान भी जल्द हो जाएगा। पार्टी ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने के बाद इस्लामाबाद ने कूटनीतिक संबंधों का स्तर घटाने का जो फैसला किया है, वह पाकिस्तान को ही नुकसान पहुँचाएगा।

पाकिस्तान ने बुधवार (अगस्त 7, 2019) को भारत के फैसले को एकतरफा और अवैध बताते हुए भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को निष्कासित कर दिया था। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया को महत्वहीन करार देते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान और कर भी क्या सकता है।

शिवसेना ने भारत के साथ राजनयिक संबंधों को कम करने के लिए पाकिस्तान को ‘‘धन्यवाद’’ देते हुए कहा कि इस्लामाबाद को स्वीकार कर लेना चाहिए कि कश्मीर मुद्दा उसके लिए बंद अध्याय है और उनके पास अब केवल पीओके है जिसका जल्द समाधान हो जाएगा।

इस्लामाबाद के कई हिस्से में भारत समर्थक बैनरों और उस पर लिखे गए शिवसेना के नेता संजय राउत के बयानों के बारे में संपादकीय में कहा गया है कि भगवा संगठन पाकिस्तान के क्षेत्र में प्रवेश कर गया है और भारतीय सेना भी जल्द ही वहाँ पहुँचेगी। बता दें कि, बीते दिनों इस्लामाबाद में शिवसेना का बैनर लगा था, जिसमें संजय राउत का वो बयान लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था, ”आज जम्मू और कश्मीर लिया है, कल बलूचिस्तान, पीओके लेंगे। मुझे विश्वास है कि प्रधानमंत्री अखंड भारत का सपना पूरा करेंगे।”

इसके साथ ही मराठी दैनिक में लिखा गया है कि संबंधों को कमतर करने से भारत की तुलना में पाकिस्तान को ज्यादा नुकसान होगा। इसमें कहा गया है कि शिवसेना कई वर्षों से माँग करती रही है कि नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग को बंद किया जाए, क्योंकि कश्मीरी अलगाववादियों का वहाँ से वित्त पोषण होता है।

बीजेपी की सहयोगी पार्टी ने कहा कि यह सबको पता है कि कश्मीरी आतंकवादी ‘भारत विरोधी षड्यंत्रों’ के लिए पाकिस्तान उच्चायोग आते हैं। साथ ही अखबार में लिखा गया है, ‘‘अगर पाकिस्तान ने नई दिल्ली में अपना उच्चायोग बंद नहीं किया होता, तो उसके उच्चायुक्त को यहाँ से भागना पड़ता क्योंकि यहाँ काफी गुस्सा है और अब दोनों देशों के बीच कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं है।”

जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के 8 लाख परिवारों के बैंक खाते में पहुँचे ₹4-4 हज़ार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम के तहत क़रीब 8 लाख परिवारों के बैंक खाते में 4-4 हज़ार रुपए भेजे गए हैं। ख़बर के अनुसार, यह पैसा अनुच्छेद-370 में संशोधन से पहले ही भेज दिया गया था। कहा जा रहा है कि सरकार जल्द ही दो-दो हज़ार रुपए और भेजेगी। 

सरकार ने यह पैसा इसलिए भेजा है, जिससे वहाँ के किसान बिना क़र्ज़ के खेती-किसानी का काम कर सकें। जानकारों का मानना है कि अनुच्छेद-370 में संशोधन के बाद सरकार द्वारा पैसा भेजने में तेज़ी आएगी क्योंकि वहाँ की शासन व्यवस्था अब सीधे केंद्र के हाथों में है।

जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर करती है। वहाँ पर केसर की खेती मशहूर है, सेब के बागान हैं और बड़े पैमाने पर फूलों की भी खेती होती है। इसके अलावा धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, दलहन, कपास, तंबाकू, गेहूँ और जौ की भी पैदावार होती है। लद्दाख में चने की खेती होती है।

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अनुच्छेद-370 में संशोधन के बाद राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इस बात को स्पष्ट कर दिया था कि देश की सभी योजनाओं का लाभ अब जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी मिलेगा। बता दें कि पीएम मोदी के इस संबोधन से पहले ही सरकार वहाँ के किसानों को पैसा जारी कर चुकी है। इनमें सबसे ज़्यादा फ़ायदा बारामूला, कुपवाड़ा, बड़गाम, पुंछ और पुलवामा में हुआ है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार, 8 अगस्त तक केंद्र सरकार ने सबसे ज़्यादा 77038 लोगों को कुपवाड़ा में लाभ पहुँचाया है। बारामूला 75391 लाभार्थी किसानों के साथ दूसरे स्थान पर है। बड़गाँव में 63392, जम्मू में 57095 और पुलवामा में 38592 लोगों के बैंक खाते में 4-4 हज़ार रुपए भेजे गए हैं। 

वहीं, लेह-लद्दाख में क़रीब 4878 और कारगिल में 7782 लोगों को लाभ पहुँचाए जाने की ख़बर है।

समुद्री रास्ते से घुसने की फिराक में आतंकी, POK में दिखा अजगर

पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा हमले की आशंका के कारण पंजाब और मुंबई पहले से ही अलर्ट पर हैं। अब नई सूचना आ रही है कि आतंकी समुद्री रास्ते से भारत में प्रवेश कर शांति में खलल डाल सकते हैं। भारत की 7500 किलोमीटर से भी अधिक लम्बी समुद्री सीमा पर नौसेना कड़ी नज़र रख रही है।

भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि ईस्टर्न और वेस्टर्न सीबोर्ड्स पर नेवी को पूरी तरह अलर्ट पर रखा गया है। सभी संवेदनशील स्थलों पर रडार की तैनाती की है और कड़ी नजर रखी जा रही है। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में मसूद अज़हर के भाई रउफ अज़गर की सक्रियता में तेज़ी आ गई है और उसे क्षेत्र में देखा गया है। इसके बाद भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियाँ भी पूरे घटनाक्रम पर निगाह बनाए हुए हैं।

पंजाब में बड़ी संख्या में जैश के कैम्प सीमा के नजदीक शिफ्ट किए जा रहे हैं। पाक सेनाध्यक्ष बाजवा के बयान को भी सेना ने गंभीरता से लिया है। बाजवा ने गीदड़-भभकी दी थी कि ‘कश्मीरियों के हितों की रक्षा के लिए’ पाकिस्तानी फौज किसी भी हद तक जाएगी। भारत के पास पहले से ही गुरुग्राम में Information Management and Analysis Center (IMAC) है जो कोस्टल रडार के चेन और ज्वाइंट ऑपरेशन सेंटर से जुड़ा हुआ है।

2008 में मुंबई में हुए हमले को भी समुद्री रास्ते से दाखिल हुए आतंकियों ने ही अंजाम दिया था। यही कारण है कि इस बार भारतीय सुरक्षा बल, नेवी और ख़ुफ़िया एजेंसियाँ किसी भी प्रकार का रिस्क लेने के लिए तैयार नहीं हैं और पहले से ही पूरी तरह अलर्ट पर हैं।