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उन्नाव रेप पीड़िता: ट्रक को सामने से आते देखा, बचने के लिए रिवर्स गियर लगाया… फिर भी रौंद डाला

उन्नाल रेप मामले की पीड़िता इस समय दिल्ली के एम्स में भर्ती है। 28 जुलाई को हुए सड़क हादसे के बाद से उसकी हालत गंभीर है। डॉक्टर उसकी रिकवरी के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। पूरा देश जानना चाहता है कि आखिर उस दिन सड़क पर क्या हुआ? क्या वाकई विधायक कुलदीप सेंगर की साजिश ने पीड़िता को अस्पताल के बिस्तर पर पहुँचा दिया या फिर हकीकत में यह कोई हादसा था?

इन अटकलों के बीच हादसे को लेकर पीड़िता का एक बयान सामने आया है। दरअसल, पीड़िता ने अपने एक रिश्तेदार को बताया है कि आखिर उस दिन क्या हुआ था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता ने रिश्तेदार को बताया कि 28 जुलाई को जब वह कार से रायबरेली जा रहे थे, तो NH-21 पर उसने सामने से एक ट्रक को आते देखा। जिसके बाद कार चला रहे पीड़िता के वकील ने उसे हर संभव कोशिश करके जाने का रास्ता दिया, लेकिन शायद ट्रक के निशाने पर वो कार थी, जिसमें पीड़िता अपनी दो रिश्तेदारों और अपने वकील के साथ बैठी थी।

पीड़िता की मानें तो वकील ने रिवर्स गियर लेकर ट्रक के रास्ते में न आने की पूरी कोशिश की लेकिन ट्रक चालक ने इसके बावजूद उनकी कार को रौंद डाला। वकील की भी हालत गंभीर है और उनका भी एम्स में इलाज चल रहा है। हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी।

लड़की के रिश्तेदार ने बताया कि उसने जब पीड़िता से पूछा कि उस दिन क्या हुआ था तो उसने कहा कि उसने उस दिन एक ट्रक को सीधे आता देखा, जिसने कुछ ही देर में उन्हें कुचल दिया। पीड़िता ने बताया, “मैंने ट्रक को सामने से आते देखा। ट्रक को इस तरह से आते हुए देखकर हम डर गए। हमने अलार्म भी बजाया था, जब हमें महसूस हुआ कि ट्रक को जिस तरह से चलाया जा रहा था उसमें कुछ असामान्य है।” 

रिश्तेदार के मुताबिक, पीड़िता ने बताया कि कार चला रहे वकील ने रिवर्स गियर में कार डालकर ट्रक के रास्ते से बचने की कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो सके, क्योंकि ट्रक बिल्कुल उन्हीं की तरफ मुड़ गया और फिर यह हादसा हो गया। पीड़िता की हालत अभी भी नाजुक है। बीच-बीच में होश में आने पर ये जानकारियाँ उसने रिश्तेदार के साथ साझा की।

मामले की जाँच कर रही सीबीआई को आधिकारिक तौर पर यह बयान नहीं दिया गया है। जानकारी के मुताबिक पीड़िता ने एम्स पहुँचे सीबीआई अधिकारियों से मिलने से मना कर दिया।

परिजन की मानें तो लड़की का विश्वास यूपी सरकार के बाद अब सीबीआई से भी उठ चुका है। क्योंकि उसने पहले ही सीबीआई को बोला था कि उसकी जान को खतरा है लेकिन तब भी उसकी सुरक्षा के मद्देनजर कदम नहीं उठाए गए। इसके अलावा उसका कहना है कि राज्य सरकार ने उसका मामला सीबीआई को अप्रैल महीने में सौंपा था, लेकिन जाँच एजेंसी उससे लगातार वहीं पुराने सवाल-जवाब पूछती रही और उसे न्याय दिलाने में असफल रही।

दुआ करिए जीते जी POK को भी भारत में मिलता देख लें: MOS जितेंद्र सिंह

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार (अगस्त 18, 2019) को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने पर बयान देते हुए जल्द ही POK के भारत में मिलने की कामना की। उन्होंने कहा कि अब जनता को पाक अधिकृत कश्मीर को भारत में मिलते देखने की दुआ करनी चाहिए।

भाजपा नेता ने पार्टी मुख्यालय में जम्मू-कश्मीर की वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक स्थिति पर एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “हम खुशकिस्मत हैं कि यह (जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा रद्द किया जाना) हमारे जीवनकाल में हुआ।”

उन्होंने इस दौरान मोदी सरकार द्वारा लिए गए फैसले को तीन पीढ़ियों के बलिदान का निष्कर्ष बताया। उन्होंने कहा, “यह हमारी तीन पीढ़ियों के बलिदान के कारण संभव हुआ।”

जम्मू-कश्मीर पर लिए फैसले पर बात करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र का फैसला संवैधानिक प्रावधानों के तहत ”व्यापक अनुसंधान” के बाद लिया गया है और यह किसी भी कानूनी चुनौती का सामना कर सकता है।

सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी किए जाने को लेकर बात रखते हुए कहा, ”रातों रात कुछ भी नहीं होता है।” उनकी मानें तो व्यापक अध्य्यन एवं अनुसंधान के बाद ही इस विषय के जानकारों ने इस विधेयक का मसौदा तैयार किया है।

खबरों के मुताबिक केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा, “इस ऐतिहासिक कदम के बाद, आइए हम पाक अधिकृत कश्मीर(POK) को पाकिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त कराने और इसे संसद में (1994 में) सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के अनुरूप देश का अभिन्न हिस्सा बनाने की सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते हैं।”

उन्होंने इसी बीच लोगों से दुआ करने को कहा कि वह प्रार्थना करें कि वे अपने जीवनकाल में पीओके को देश में मिलता हुआ देख पाएँ और साथ ही लोगों को बिना किसी रोक-टोक के मुजफ्फराबाद जाते देख पाएँ।

बता दें इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की गिरफ्तारी पर विपक्ष की आलोचनाओं को भी खारिज किया और कहा, “ये लोग जिम में पसीना बहा रहे हैं, किताबें पढ़ रहे हैं और हॉलीवुड मूवी देख रहे हैं।”

अयोध्या: योगी राज में रामलला की पगार बढ़ी, अब मिलेंगे हर महीने ₹30,000

उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या के अस्थायी राम मंदिर की पूजा और व्यवस्था के लिए दिए जाने वाले फंड में इजाफा किया है। रामलला, उनके मुख्य पुजारी और आठ कर्मचारियों के मासिक पगार में वृद्धि की गई है।

अयोध्या के डिविज़नल कमिश्नर मनोज मिश्रा ने बताया कि रामलला मंदिर के मासिक वेतन को 26,200 रुपए से बढ़ाकर 30,000 रुपए कर दिया गया है। डिविज़नल कमिश्नर होने के नाते मनोज मिश्रा अस्थायी मंदिर के रिसीवर भी हैं। उनके मुताबिक, मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास को अब 13,000 रुपए मिलेंगे।

इसके साथ ही मंदिर के 8 सदस्यों (जिनके वेतन 7500 रुपए से 10,000 के बीच हैं) के मासिक वेतन में 500 रुपए का इजाफा किया गया है। साथ ही योगी सरकार ने भोग (प्रसाद) के लिए 800 रुपए प्रति माह बढ़ाया है। जानकारी के मुताबिक, सत्येंद्र दास को 2017 से मासिक वेतन के रुप में 8,480 रुपए मिल रहे थे। इन्होंने 1992 में 150 रुपए मासिक वेतन के साथ शुरुआत की थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

सत्येंद्र दास ने इस बढ़ोतरी पर खुशी जाहिर करते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि वो सरकार द्वारा की गई इस बढ़ोतरी से काफी खुश हैं। उन्होंने बताया कि इसी साल जुलाई में उन्होंने वेतन बढ़ाने की अपील की थी, जिसे मंजूर कर लिया गया है। उनका कहना है कि 1992 के बाद ये सबसे बड़ी वृद्धि है।

वहीं, मनोज मिश्रा ने कहा कि इस कदम को उच्चतम न्यायालय में चल रहे राम जन्मभूमि मामले में सुनवाई से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि राम जन्मभूमि मामले में वर्तमान परिस्थिति के साथ बिना छेड़छाड़ किए बिना जो किया जा सकता था, वही किया गया है।

J&K: अफवाह फैलाती धरी गई शेहला रशीद, सेना ने फटकारा

जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद प्रोपगेंडा फैलाने में माहिर हैं। अब उनकी इस करतूत को सेना ने उजागर किया है। शेहला ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर जम्मू-कश्मीर पर अफवाह फैलाने की कोशिश करते हुए सुरक्षा बलों के खिलाफ पाकिस्तानी प्रोपगेंडा को हवा ​देने की कोशिश की है।

ट्वीट में शेहला ने जम्मू-कश्मीर की हालत बेहद खराब होने का दावा करते हुए सशस्त्र बलों पर कश्मीरियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। सेना ने इसे खारिज करते हुए शेहला के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। साथ ही कहा है कि असामाजिक तत्व और संगठन लोगों को भड़काने के लिए फर्जी खबरें फैला रहे हैं।

शेहला ने रविवार को अपने ट्वीट्स में लिखा, “लोग कह रहे हैं कि जम्मू और कश्मीर पुलिस के पास क़ानून व्यवस्था का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें शक्तिहीन कर दिया गया है। सब कुछ अर्धसैनिक बलों के हाथों में है। सीआरपीएफ के जवान की शिक़ायत पर एक SHO का ट्रांसफर कर दिया गया था। SHO डंडे के साथ दिखे उनके पास सर्विस रिवाल्वर नहीं देखी गई।”

एक अन्य पोस्ट में, उसने लिखा, “सशस्त्र बल रात में घरों में प्रवेश कर रहे हैं, लड़कों को उठा रहे हैं, घरों में तोड़फोड़ कर रहे हैं, जानबूझकर फर्श पर राशन फैलाकर उसमें तेल देते हैं।”

शेहला ने यह भी दावा किया, “शोपियां में चार लोगों को सेना के शिविर में पूछताछ (यातना) के लिए बुलाया गया था। एक माइक उनके पास रखा गया था ताकि पूरा इलाका उनकी चीख सुन आतंकित हो जाए। इससे पूरे क्षेत्र में भय का माहौल पैदा हो गया।”

शेहला रशीद फिलहाल आईएएस से नेता बने शाह फैसल के साथ जम्मू-कश्मीर की राजनीति में स्थापित होने की कोशिश कर रही हैं। शाह फैसल वही नेता हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्क्रिय किए जाने के बाद ‘बदला’ लेने की धमकी दी थी। उन्हें पिछले दिनों दिल्ली एयरपोर्ट पर उस समय रोक लिया गया था जब वे देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। फिलहाल वे श्रीनगर में नजरबंद हैं। बताया जाता है कि वे भारत सरकार के फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए देश छोड़कर जा रहे थे।

इससे पहले जम्मू के डिविजनल कमिश्नर संजीव वर्मा ने कहा था कि अफवाह फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया था कि ऐसे कुछ लोगों के बारे में पुलिस जानकारी जुटा रही है।

गौरतलब है आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्क्रिय करने से पहले राज्य में कुछ एहतियातन कदम उठाते हुए सरकार ने पाबंदियॉं लागू की थी। अब इनमें छूट दी जा रही है। जिसका फायदा उठाकर कुछ लोग लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।

जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने रविवार को कहा था कि 190 से अधिक प्राथमिक स्कूल श्रीनगर में फिर से खुलेंगे, इसके अलावा कश्मीर घाटी में सरकारी कार्यालयों की ‘पूर्ण कार्यक्षमता’ बहाल कर दी जाएगी।

योजना और विकास विभाग के प्रधान सचिव रोहित कंसल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “हमारे पास अकेले श्रीनगर ज़िले के 190 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को फिर से खोलने की योजना है।” उन्होंने कहा कि प्रतिबंधात्मक आदेशों में ढील देने और छूट प्रदान करने की प्रक्रिया रविवार को भी जारी रही।

कंसल ने कहा कि रविवार को 50 पुलिस थानों में छूट प्रदान की गई थी, जबकि शनिवार को 35 पुलिस स्टेशनों को छूट दी गई थी। इस छूट की अवधि छह घंटे से बढ़ाकर आठ घंटे कर दी गई थी।

बच्चा-बच्चा जनता है कि भारत से लड़ना हमारी फ़ौज के बस की नहीं: Pak सैन्य वैज्ञानिक

“पाकिस्तानी सेना अभी कश्मीर मसले पर भारत से युद्ध लड़ने की स्थिति में नहीं है। सुस्त होती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महँगाई का आम आदमी के जीवन पर त्रासद असर पड़ा है।“- ये शब्द किसी भारतीय नेता या अधिकारी के नहीं हैं। ये बयान है पाकिस्तान की सैन्य वैज्ञानिक आयशा सिद्दीका के। ‘Military Inc.: Inside Pakistan’s Military Economy’ नामक पुस्तक की लेखिका आयशा ने ये बातें कहीं। वह पाकिस्तान के सैन्य मामलों की जानकर मानी जाती हैं और कई अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ा चुकी हैं।

आयशा ने बताया कि वह पाक अधिकृत कश्मीर में रह रहे अपने एक मित्र से बात कर रही थीं। उन्होंने अपने मित्र से पूछा कि आखिर पाकिस्तान की सेना लड़ाई क्यों नहीं कर रही? आयशा के मित्र ने प्रत्युत्तर में कहा कि पाकिस्तानी सेना भी जानती है कि अगर भारत से लड़ाई हुई तो पाक की बुरी हार होगी। आयशा के अनुसार, पाकिस्तान का हर व्यक्ति जनता है कि भारत से युद्ध करने का यह सही समय नहीं है।

पाकिस्तानी नौसेना के नेवल रीसर्च के डायरेक्टर (पहली महिला जो इस पद पर पहुँची थीं) के रूप में कार्य कर चुकीं आयेशा सिद्दीका के अनुसार, यह पहली बार है जब पाकिस्तान का बच्चा-बच्चा जानता है कि युद्ध लड़ना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में एक प्रकार का दुःख है, दर्द है, लेकिन एक निराशा का भाव भी है कि कुछ नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि पाकिस्तानी फौज किस तरह की प्रतिक्रिया देती है?“

विभिन्न विषयों पर कई अख़बारों में लेख लिख चुकीं आयशा ने बताया कि 72 वर्षों से पाक फौज का ध्यान सिर्फ़ और सिर्फ़ जम्मू कश्मीर पर था। उन्होंने कहा कि एक दिन पाकिस्तानी फौज नींद से जागी और उसे पता चला कि कुछ भी नहीं बचा है। हालाँकि, आयशा का यह भी मानना है कि पाक फौज के भीतर एक गुट ऐसा है जो काफ़ी गुस्से में है और वह ज़रूर ऊँगली उठाएगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में हार के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और देश के सजग नागरिकों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। ऐसा इसीलिए, क्योंकि सजग नागरिक कश्मीर पर पाकिस्तान सरकार की असफलता पर सवाल उठाएँगे। फिलहाल लंदन की एक यूनिवर्सिटी में रिसर्च एसोसिएट के तौर पर काम कर रहीं आयशा ने पाकिस्तान द्वारा निर्दोष पश्तूनों पर अत्याचार करने और आतंक को काबू में करने में असफल रहने का आरोप लगाया।

DCP विक्रम कपूर आत्महत्या: ब्लैकमेल करने वाला इंस्पेक्टर अब्दुल सईद गिरफ़्तार, महिला मित्र के लिए…

हरियाणा पुलिस के डीसीपी विक्रम कपूर की आत्महत्या मामले में पुलिस ने निलंबित इंस्पेक्टर अब्दुल सईद को गिरफ़्तार कर लिया है। पुलिस की जाँच में इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि अब्दुल न सिर्फ़ अपने भांजे को एक केस से निकलवाने का दबाव बना रहा था बल्कि एक मामले में अपनी महिला मित्र के काम करने का दबाव भी बना रहा था। इसके लिए वो डीसीपी को लगातार धमका रहा था कि वो अपनी महिला मित्र के ज़रिए उन्हें किसी केस में फँसा देगा।

पुलिस की जाँच में पता चला है कि निलंबित इंस्पेक्ट अब्दुल सईद और उसका पत्रकार साथी सतीश पिछले तीन महीने से डीसीपी को ब्लैकमेल कर रहे थे। 13 जुलाई 2018 को सईद ने डीसीपी के घर जाकर उन्हें डराते-धमकाते हुए कहा था, “अगर मेरे काम न हुए तो ऐसी ख़बरें छपवाऊँगा कि तू आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएगा।”   

दरअसल, अब्दुल सईद का भांजा मुजेसर थाने में एक मामले में नामजद था, उसे वो बाहर निकलवाना चाहता था। वहीं, उसकी महिला मित्र का उसके ससुर के साथ प्रॉपर्टी को लेकर एक विवाद था, जिसके लिए उसने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में महिला के अनुसार, उसके पक्ष में जाँच करवाने का दबाव था। वहीं, सतीश ने इकॉनमिक ऑफेंस विंग (EOW) में 55 लाख रुपए की धोखाधड़ी की शिक़ायत दी थी। इस धोखाधड़ी की पुष्टि किए बिना अब्दुल यह केस डीसीपी से दर्ज करवाने का दबाव बना रहा था।

ग़ौरतलब है कि बुधवार (14 अगस्त) को डीसीपी विक्रम कपूर ने अपने सरकारी आवास पर सुबह क़रीब 5.45 बजे ख़ुद को गोली मार ली थी। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में इंस्पेक्टर अब्दुल सईद, SHO थाना भूपानी को अपनी आत्महत्या का दोषी ठहराते हुए लिखा था,

“आई एम डूइंग दिस ड्यु टू अब्दुल, इंस्पेक्टर अब्दुल सईद वाज ब्लैकमेलिंग, विक्रम।”

ख़बर के अनुसार, क्राइम ब्रांच की पूछताछ में पता चला है कि डीसीपी विक्रम से अब्दुल सईद और उसकी महिला मित्र की अलग-अलग माँगे थीं। शनिवार (17 अगस्त) को क्राइम ब्रांच अब्दुल को NIT ऑफ़िस लेकर गई, इसके बाद उसे शहर में दो-तीन और जगह ले जाया गया। यह भी पता चला है कि अब्दुल का मोबाइल मुंबई में है, फ़िलहाल उसकी रिकवरी की कोशिशें जारी हैं।

उइगर मुस्लिमों पर चीन की नजर दूसरे देशों तक, मुस्लिम देश मिस्र में 90 से अधिक गिरफ्तार

चीन द्वारा उइगर मुस्लिमों के शोषण की ख़बर नई नहीं है। चीन अपने क़ैदखानों में उइगर मुस्लिमों को उनकी परंपराओं को भूलने, इस्लामी प्रथाओं की निंदा करने और कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफ़ादार बनने को मजबूर करता है। इसी कड़ी में एक और ख़बर सामने आई है। खबर है कि एक उइगर छात्र मिस्र पढ़ाई करने गया। एक दिन उस छात्र अब्दुल मलिक अब्दुल अजीज को मिस्र की पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया, आँखों पर पट्टी बाँध दी। लेकिन जब उसकी आँखों पर से पट्टी हटाई गई तो वह चीनी अधिकारियों की हिरासत में था।

उइगर छात्र यह देख कर अचंभित था कि उसे गिरफ़्तार करके पुलिस उससे इस तरह पूछताछ कर रही है। ख़बर के अनुसार, छात्र को तब गिरफ़्तार किया गया जब वो अपने दोस्तों के साथ था और फिर उसे व उसके दोस्तों को काहिरा पुलिस स्टेशन में ले जाया गया, जहाँ चीनी अधिकारियों ने उससे पूछताछ की कि वो मिस्र में क्या कर रहा है?

चीनी अधिकारियों ने छात्र और उसके दोस्तों से चीनी भाषा में बात की और छात्र को चीनी नाम से संबोधित किया। बाद में अब्दुल अजीज ने ख़ुलासा कर बताया कि 2017 में 90 से अधिक उइगरों की गिरफ़्तारी चीन के इशारे पर मिस्र में की गई थी।

जुलाई 2017 के पहले हफ़्ते में 3 दिन तक हुई कार्रवाई के बारे में अब्दुल अजीज ने नए ख़ुलासे किए। उस वक़्त वो सुन्नी मुस्लिम शैक्षणिक संस्थान अल-अज़हर में इस्लामिक धर्मशास्त्र का छात्र था। आपको बता दें कि यह संस्थान दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित संस्थान है।

चीन की इस हरक़त से इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वो उइगर मुस्लमानों को सताने की अपनी आदत से इतना मजबूर है कि उन्हें सताने के लिए वो दूसरे देश में भी षड्यंत्र रचने से बाज नहीं आ रहा है। दूसरे देशों में भी छात्रों तक की अचानक गिरफ़्तारी उइगरों के प्रति चीन की नीयत को साफ़तौर पर उजागर करती है।

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने चीन को उइगर मुस्लिमों के मानवाधिकारों का सम्मान करने की नसीहत दी थी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा कि चीन को उइगर मुस्लिमों के मानवीय अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। गुटेरस ने चीनी वार्ताकारों के साथ बातचीत में ये बातें कहीं। बीजिंग में बेल्ट एन्ड रोड फोरम में शामिल होने के बाद महासचिव ने इन मुद्दों को उठाया और चीन को नसीहत दी। इस सम्बन्ध में वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात कर चुके हैं।

स्पा की आड़ में सेक्स रैकेट चला रही शुरा ख़ान गिरफ़्तार, थाईलैंड की 6 लड़कियाँ छुड़ाई गईं

मुंबई क्राइम ब्रांच ने स्पा की आड़ में चलाए जा रहे सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया है। छापेमारी के दौरान क्राइम ब्रांच ने 6 लड़कियों को भी वहाँ से निकाला। बचाई गई सारी लड़कियाँ थाईलैंड की हैं। पुलिस को पूर्वी मुंबई के पॉश वीले पार्ले क्षेत्र में स्पा की आड़ में सेक्स रैकेट चलाए जाने की सूचना अपने सूत्रों से मिली थी। इस स्पा का उद्घाटन 2017 में एक लोकप्रिय बॉलीवुड अभिनेत्री ने किया था। शनिवार (अगस्त 17, 2019) की सुबह पुलिस अधिकारियों ने थाई वीले पर छापेमारी की।

स्पा के मालिक शुरा ख़ान और सुमित सिंघानिया को गिरफ़्तार कर लिया गया है। इन दोनों पर अवैध रूप से वेश्यावृत्ति का धंधा चलाने का मामला दर्ज किया गया है। छापेमारी के दौरान 1.23 लाख रुपए, एक लैपटॉप, 3 स्वाइप मशीन, 3 वाउचर बुक्स और कुछ कागजात जब्त किए गए हैं। थाई विला मुंबई के दीक्षित रोड में स्थित है। बचाई गई सभी पीड़ित थाईलैंड की नागरिक हैं और वे टूरिस्ट एवं बिजनेस वीजा पर यहाँ रह रही थीं।

दोनों आरोपितों को PITA (अनैतिक ट्रैफिकिंग एक्ट) के तहत मामल दर्ज किया गया है। जब्त की गई संपत्ति, पीड़ितों व आरोपितों को स्थानीय पुलिस थाना को सौंप दिया गया है और पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी है।

अब इंसानों के शरीर में धड़केगा सुअर का दिल: ब्रिटेन का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टर का दावा

जल्द ही ऐसा मुमकिन है कि एक सुअर का दिल किसी इंसान के अंदर धड़के। यह बात सुनने में जरूर अटपटी लग सकती है, लेकिन ब्रिटेन के नामचीन डॉक्टर सर टेरेन्स इंग्लिश का कहना है कि सिर्फ 3 साल के भीतर सुअर के दिलों को इंसानों में ट्रांसप्लांट करना संभव हो सकता है। 40 साल पहले ब्रिटेन का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टर टेरेन्स का कहना है कि इस तकनीक से हृदय रोगियों को एक नई जिंदगी मिल सकती है।

हालाँकि, उन्होंने कहा कि इससे पहले सुअर की किडनी इंसानों के अंदर लगाई जाएगी। दरअसल, दुनिया भर में ह्यूमन ऑर्गन्स की जितनी माँग है, उतने डोनर नहीं मिल पाते। जिसकी वजह से उनकी मौत हो जाती है। इसी के मद्देनज़र दुनिया को कुछ बेहतर देने की कोशिश में मेडिकल वर्ल्ड में नए-नए एक्सपेरिमेंट किए जा रहे हैं। वैज्ञानिक इस ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के शरीर में सुअर का दिल लगाने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ गई है।

चूँकि, सुअर के अंगों का आकार इंसान के अंगों की तरह ही होता है, इसलिए इसे इंसान के लिए सही माना जा रहा है। डॉक्टर टेरेन्स का कहना है कि जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले लोग इसका विरोध कर सकते हैं, लेकिन क्या यह अच्छा नहीं होगा कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल करके इंसान को बचाया जा सकेगा।

राम मंदिर के लिए हलचल तेज़: ‘पत्थर तराशने के काम में तेज़ी, राजस्थान से पहुँचेंगे कारीगर’

राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट में प्रतिदिन सुनवाई हो रही है और माना जा रहा है कि नवंबर तक अंतिम निर्णय आ जाएगा। दोनों ही पक्षों द्वारा अपनी-अपनी दलीलें पेश की जा रही हैं। सुनवाई कर रही पीठ की अध्यक्षता ख़ुद सीजेआई रंजन गोगोई कर रहे हैं। अब ख़बर आ रही है कि अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तराशने का काम तेज़ कर दिया गया है और इसके लिए अतिरिक्त कारीगरों को भी बुलाया जा रहा है। हालाँकि, वर्तमान में कारीगरों की कमी के कारण नक्काशीदार स्लैबों की सफाई का काम चल रहा है।

अभी 10-12 कारीगर साफ़-सफाई के कार्य में लगे हुए हैं। जल्द ही साधु-संतों की बैठक भी बुलाई जाएगी, जिसमें पत्थरों को तराशने की प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए मंथन किया जाएगा। विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए कहा:

“जब से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तेज हुई है, राम भक्त भी उत्साह में हैं। मंदिर के लिए नक्काशीदार पत्थर की शीट्स और खम्भों की सफाई चालू है। पत्थरों को तेजी से तराशने का फैसला अयोध्या और अन्य स्थानों के संतों के सुझावों के अनुसार होगा और इस सम्बन्ध में बातचीत चालू है।”

विहिप प्रवक्ता ने दावा किया कि प्रस्तावित राम मंदिर का ग्राउंड फ्लोर के निर्माण के लिए 70% पत्थरों को तराशने का कार्य पूरा किया जा चुका है। उन्होंने इस कार्य में तेज़ी लाने के लिए राजस्थान से भी कारीगर बुलाए जाने की बात कही। राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख महंत नृत्य गोपाल दास ने उम्मीद जताई कि नवंबर तक मामले की सुनवाई ख़त्म हो जाएगी, इसीलिए पत्थरों को तराशने का कार्य तेज़ी से होना ज़रूरी है।

विहिप की उम्मीदें इस बात पर टिकी हैं कि जस्टिस रंजन गोगोई रिटायरमेंट से पहले इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सुना देंगे। इसीलिए वर्षों से धूल फाँक रहे स्लैबों की साफ़-सफाई कराई जा रही है।