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‘भागो बिहारी इधर से, कल दिखे तो मारूँगा और जला डालूँगा’ – J&K में प्रवासियों को धमकी

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निष्फल होने के बाद बिहार के अधिकतर प्रवासियों को वहाँ के समुदाय विशेष के स्थानीय लोगों द्वारा डरा-धमका कर भगाया जा रहा है। विडंबना यह कि इन प्रवासी कर्मियों में अधिकतर दूसरे मजहब वाले ही हैं। राहुल पंडिता द्वारा ओपन मैग्जीन में लिखे गए लेख में इस संबंध में बताया गया है कि बिहार के प्रवासी इन दिनों हड़बड़ी में कश्मीर को हजारों की तादाद में छोड़ने के लिए मजबूर हैं।

जानकारी के मुताबिक एक 56 वर्षीय व्यक्ति सुरेंद्र महतो बताते हैं कि वहाँ के स्थानीय लोगों ने उन्हें गाली दी और वहाँ से जाने के लिए मजबूर किया। महतो की मानें तो उन्हें ऐसा नहीं करने पर मार देने की धमकी भी दी गई।

वहीं, 25 वर्षीय असलम बताते हैं कि श्रीनगर में रहने वाले कुछ स्थानीय लोगों ने उनसे मारपीट की और उनका बैग लेकर कहा, “भागो बिहारी इधर से।”

एक दूसरे प्रवासी का कहना है कि पिछली रात एक स्थानीय कश्मीरी उनके पास आया और कहा, “अगर तुम मुझे कल दिखे तो मैं तुम्हें मारूँगा और केरोसीन से जला दूँगा।”

गौरतलब है कि इनमें से अधिकतर प्रवासी कश्मीर की ओर वहाँ के ठंडे मौसम के कारण रुख करते हैं, साथ ही उनका मानना होता है कि वो कश्मीर में अन्य जगहों के मुताबले ज्यादा बचत कर पाएँगे। लेकिन कश्मीर में जीवनयापन की संभावनाएँ ढूँढने वाले लोगों की ऐसी दुर्दशा देखकर कश्मीरी अलगाववाद के काले सच का पता चलता है, जो नस्लीय और धार्मिक वर्चस्व का एक विषैला मिश्रण है।

Pak के पूर्व PM नवाज शरीफ की बेटी मरियम हिरासत में, 370 मुद्दे पर इमरान खान की कर चुकी हैं निंदा

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज शरीफ को नेशनल एकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने हिरासत में लिया है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की नेता मरियम नवाज शरीफ को चौधरी शुगर मिल मामले में हिरासत में लिया गया है।

बुधवार (अगस्त 07, 2019) को ही मरियम नवाज शरीफ ने आर्टिकल 370 पर भारत के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर के मुद्दे पर मध्यस्थता की बात करके प्रधानमंत्री इमरान खान को मूर्ख बनाया और वे अनुमान नहीं लगा पाए कि भारत में क्या योजना चल रही है।

मरियम नवाज के खिलाफ पिछले महीने पाकिस्तानी ब्यूरो एनएबी ने फिर से जाँच शुरू की थी। नेशनल एकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) मेसर्स चौधरी शुगर मिल्स लिमिटेड में भ्रष्टाचार को लेकर मरियम, उनके पिता नवाज शरीफ, पाकिस्तान मुस्लिम लीग के अध्यक्ष शहबाज शरीफ, उनके चचेरे भाई हमजा शहबाज और युसुफ अब्बास के खिलाफ जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एनएबी को कथित तौर पर शरीफ परिवार द्वारा लाखों रुपए (पाकिस्तानी मुद्रा) के टेलीग्राफिक हस्तांतरण का पता चला था। आय से अधिक धन के मामले में शहबाज शरीफ और उनके बेटों के खिलाफ जाँच के दौरान चौधरी शुगर मिल्स के मालिकों के खिलाफ धनशोधन के सबूत मिले थे।

J&K पर मलाला ने रोया मानवाधिकार का रोना, लोगों ने दिलाई बलूचिस्तान, POK की याद

नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफजई ने कश्मीर को लेकर चिंता जताई है। मलाला ने जम्मू कश्मीर की जनता के बारे में बार करते हुए लिखा कि वह ‘कश्मीर की महिलाओं व बच्चों के लिए चिंतित हैं जो हिंसा का सबसे ज्यादा शिकार बनते हैं।‘ मलाला ने लिखा कि कश्मीर के बच्चे कई दशकों से हिंसा के बीच बड़े हो रहे हैं। उन्होंने दक्षिण एशिया को अपना घर बताते हुए लिखा कि वह क्षेत्र के 1.8 बिलियन लोगों के साथ रहती हैं, जिनमें कश्मीरी भी शामिल हैं। मलाला ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह ‘कश्मीरी जनता की पीड़ा’ पर ध्यान दें और उचित क़दम उठाएँ। मलाला ने मानवाधिकार का भी रोना रोया।

हालाँकि, लोगों ने मलाला पर बलूचिस्तान पर भी मुँह खोलने को कहा, जहाँ पाकिस्तानी फ़ौज द्वारा खुलेआम अत्याचार किया जा रहा है। बलूचिस्तान में पाक फ़ौज की करतूतों पर संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार समितियाँ भी रिपोर्ट्स दे चुकी हैं, जिनमें महिलाओं की प्रताड़ना की बात भी कही गई थी। आंतरिक मुद्दा होने के कारण भारत हमेशा से कश्मीर मामले में किसी भी प्रकार की मध्यस्तथा का विरोधी रहा है लेकिन मलाला ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है।

वकील प्रशांत पटेल उमराव ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा। ज्ञात हो कि वहाँ हिन्दुओं, सिखों और बौद्धों पर लगातार अत्याचार हो रहे हैं और वहाँ का क़ानून भी इस तरह से तैयार किया गया है जिससे पीड़ित अल्पसंख्यकों को कोई मदद भी नहीं मिल पाती।

पत्रकार मानक गुप्ता इस बात से नाराज़ दिखे कि मलाला ने कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद पर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने लिखा कि मलाला के लिए उनके मन में जो सम्मान था, अब वह ख़त्म हो गया है।

अंकित जैन ने मलाला से पूछा कि वह पाक अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तानी फ़ौज द्वारा किए जा रहे अत्याचारों पर कुछ नहीं बोल रही हैं? मलाला युसुफजई के इस सेलेक्टिव बयान के कारण कई लोग नाराज़ दिखें और उन्होंने लिखा कि यह बयान जानबूझ कर भारत के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे एजेंडे के हिस्सा मालूम होता है।

रवीश जी, पत्रकार तो आप घटिया बन गए हैं, इंसानियत तो बचा लीजिए!

रवीश कुमार का सुषमा स्वराज वाला प्राइम टाइम देख कर ऐसा लगा कि बेचारा एक मोदी को अटैक करने के चक्कर में किसी की मौत तक को बदरंग करने से नहीं हिचकता! शब्द बनाते हैं, और गिराते हैं। शब्द घाव भी होते हैं, मरहम भी। जख्म भी देते हैं, उन्हें सिल भी सकते हैं। संदर्भ पा कर वही शब्द सुंदर अभिव्यक्ति का माध्यम बनते हैं, और संदर्भ से अलग वो किसी व्यक्ति को दानव जैसा दिखा सकते हैं। इसलिए, शब्दों के व्यापार से जुड़े लोग, उनका इस्तेमाल नाप-तौल कर करते हैं। पत्रकारिता शब्दों के व्यापार का एक उद्योग है। समाज का कितना भला हुआ है इससे, इस पर चर्चा हो सकती है, लेकिन आज के दौर में इसकी अहमियत से इनकार नहीं किया जा सकता।

शब्दों के ऐसे ही व्यापारी हैं रवीश कुमार। उन्होंने जब वो प्राइम टाइम किया तो उन्होंने उन शब्दों को पढ़ने से पहले लिखा होगा, लिखने से पहले सोचा होगा। अनुभवी आदमी शब्दों को अपने हिसाब से लिख सकता है कि वो एक स्तर पर श्रद्धांजलि लगे, एक स्तर पर राजनैतिक समझ की परिचायक, और गहरे जाने पर वैयक्तिक घृणा से सना हुआ दस्तावेज। रवीश अनुभवी हैं, इसमें दोराय नहीं।

हर दिन इस व्यक्ति (पत्रकार नहीं, व्यक्ति) के प्रति सम्मान कम होता जा रहा है। मैं ये भी नहीं कह रहा कि यार वो मर गईं, उनको उस दिन तो बख़्श देते। नहीं, क्योंकि ये आदमी ‘किया होगा’, ‘हुआ होगा’, ‘ऐसा तो होता ही होगा’ जैसे वाक्यांशों के सहारे अपनी नफ़रत को अपने मलिन, संस्कार मंद पड़ते चेहरे के साथ बोलता रहा। ऐसी काल्पनिक बातें जिसे एक चेहरे ने टीवी पर पब्लिक के लिए हवा में छोड़ दिया, और उनके भक्त सत्य मान कर अपनी घृणा का छौंक लगा कर हर जगह लिख-बोल रहे होंगे।

4:16 से उसका वीडियो देखिए प्राइम टाइम। ये निहायत ही बेकार और घृणा में डूबे हुए इन्सान के शब्द हैं। सिर्फ पत्रकार होना बेहतर नहीं होता, भले ही आपके करियर में कुछ अच्छे काम रहे हों। सुषमा स्वराज कम से कम रवीश से बेहतर इन्सान थीं, और अपने क्षेत्र का चमकता सितारा थी। वहीं रवीश, घृणा में डूबा वो आदमी है जो प्रधानमंत्री आवास का अगर कुत्ता भी मर जाए तो इंट्रो में कुछ ऐसा लिखेगा:

मर गया कुत्ता। कुत्ते तो मर ही जाते हैं। ये कुत्ता पीएम आवास पर दुम हिलाता रहता होगा। 2014 तक भले ही मनमोहन कुछ बोलते नहीं होंगे, लेकिन उसे भी देख कर वो खुश होता होगा। लेकिन 2014 के बाद मालिक बदलने पर कुत्ता भी तो बदल गया होगा… क्या 18 घंटे काम की बात करने वाले मोदी उस कुत्ते का ख्याल रख पाते होंगे? क्या वो कुत्ता मोदी को देख कर भी उतना ही खुश होता होगा? क्या 2014 के बाद मोदी उसे ऐसे तो नहीं देखते होंगे कि ये तो मनमोहन का कुत्ता था 10 सालों से, मेरा क्या, मेरा वश चले तो इसका एनकाउंटर करवा दूँ… और क्या पता कि ये कुत्ता मरा भी कैसे होगा क्योंकि नेशनल सीक्रेट के नाम पर कुत्ते का पोस्टमार्टम तो हुआ नहीं। सबूत आप माँग नहीं सकते क्योंकि आपको एंटीनेशनल करार दे दिया जाएगा। हम और आप इसमें कुछ नहीं कर सकते क्योंकि सत्ता जिसके पास है, उसका क्या इतिहास है, ये किसी से छुपा तो नहीं।

जब इस देश में जस्टिस लोया की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या हो जाती है, तो कुत्ता तो फिर भी कुत्ता है, और वो कुत्ता भी कॉन्ग्रेस का है जिससे मुक्ति के लिए प्रधानमंत्री पिछले छः सालों से लगे हुए हैं। आप सोचिए, कि आखिर ऐसा क्या हुआ होगा कि कुत्ता मर गया? जानता हूँ कि ये समय सवालों का नहीं है, लेकिन ऐसे कठिन समय में ही ऐसे सवाल पूछे जाने चाहिए। अगर हर मौत पर हमने बस मातम मना कर, अच्छी बातें कह कर, किसी के कथित अपराधों को, भले ही वो बाद में गलत साबित हो जाएँ, याद करने का मौका छोड़ दिया तो पत्रकारिता कैसी?

रेमॉन मैग्ससे अवार्ड इसीलिए सबको नहीं मिलता। हमें कठिन सवाल पूछने चाहिए, वरना सवाल पूछने वाली पत्रकारिता गायब हो जाएगी। क्या इस देश के नागरिकों को ये जानने का हक नहीं कि उस कुत्ते ने सुबह में ऐसा क्या खाया? क्या हमें यह जानने का हक नहीं कि यह कुत्ता 2019 में ही क्यों मरा? मैं जानता हूँ। दस सालों से कॉन्ग्रेस और देश का वफादार कुत्ता 2014 की मई में ही मार डाला जा चुका होता लेकिन मोदी वो नहीं करते जो लोग उनसे उम्मीद करते हैं कि वो करेंगे। वो पहले विश्वास दिलाते हैं कि सब कुछ ठीक है। और एक दिन कुत्ता मर जाता है। और वो दिन 2019 में आता है ताकि किसी को शक न हो। मैं शक नहीं कर रहा, मैं तो बस आपको दूसरा पक्ष, कुत्ते का पक्ष दिखाना चाह रहा हूँ कि इसकी टाइमिंग देखिए। जब कुत्ते खुद को डिफेंड नहीं कर सकते तो मैं करता हूँ, करता रहूँगा।

कुत्ते की उम्र सत्रह साल थी। यूँ तो इस उम्र में कुत्ते स्वभाविक मौत से भी मरते हैं, लेकिन ये तो प्रधानमंत्री का कुत्ता था। प्रधानमंत्री का कुत्ता तो आम कुत्तों से अलग होता होगा। उसे तो गली-गली खाने के लिए भटकना तो नहीं पड़ता होगा, वो तो बाज़ार से, यूट्यूब पर चलने वाले विज्ञापनों में आने वाला पैकेज्ड खाना खाता होगा, मिनरल वाटर पीता होगा… फिर तो उसकी उम्र भी ज्यादा होगी। पाँच साल तो बढ़ ही जाती होगी उम्र। इंसान भी संयमित भोजन करे तो उसकी भी उम्र बढ़ जाती है। तो फिर इसकी क्यों नहीं।

आप कहेंगे कि रवीश जी आप तो कुत्ते की मौत को इतना बड़ा बना रहे हैं। जिसका कोई नहीं होता, उसका रवीश होता है। ‘हैशटैग रवीश जी आपसे उम्मीद है’ लिख कर हजारों लोग मुझे रोज मैसेज करते हैं। ये कुत्ता भी करना चाहता होगा लेकिन आधार कार्ड और मोबाइल नंबरों के जुड़े होने के इस दौर में क्या प्रधानमंत्री कार्यालय को कुत्ते पर शक नहीं होता? शक क्या, वो तो पूरा मैसेज ही पढ़ लेते। इसलिए, एक पत्रकार के तौर पर मेरी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि मैं उसका भी पक्ष रखूँ।

दूसरी बात, ये कुत्ता हमारे, आपके, हम सब के पैसों पर पलता होगा। प्रधानमंत्री आवास का खर्चा टैक्स भरने वाले उठाते हैं। इसलिए, हमें ये जानने का हक है कि उस पैसे का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा था। उस कुत्ते को सुबह के खाने में जो जहर दे दिया गया होगा, वो किसके पैसे से आया होगा? कोई आदमी एक मूक जानवर को जहर दे कर कैसे मार सकता है! कितना निर्दयी रहा होगा वो!

इसका जवाब कौन देगा? इस बात को क्यों छुपाया जा रहा है? मैं जानता हूँ। कुत्ता गाय नहीं होता। कुत्ता तो कुत्ता होता है। इसलिए, उसके मरने पर शोर नहीं होता। संघ वाले बेहतर बताएँगे कि गाय और कुत्ते का फर्क क्या होता है। मोदी भी जानते होंगे कि क्या फर्क होता है। भले ही उस कुत्ते ने कितने प्रधानमंत्रियों, नेताओं, सत्ता के शक्तिशाली लोगों का हाथ अपनी गर्दन पर महसूस किया होगा, लेकिन आज वो मर चुका है। सत्ता, पावर, नेता का करीबी होना उसके काम नहीं आया। उसे मार दिया गया जैसे लोग मार दिए जाते रहे हैं।

लेकिन आपको क्या! आप टीवी देखते रहिए। हिन्दू-मुस्लिम करते रहिए। अर्थ व्यवस्था पर डिबेट शुरु नहीं होता है कि ध्यान हटाने के लिए कश्मीर से 370 हटाने की बातें शुरु हो जाती हैं। उस पर डिबेट शुरु होता है तो कोई नेता अचानक मर जाता है। आपको मूर्ख बनाया जा रहा है। जब आप लिखते हैं कि रवीश जी आपसे उम्मीद है, तो मेरी उम्मीद आपसे यही होती है कि आप भी रवीश बन जाएँ। आप भी चीजों को वैसे देखें, जैसे मैं देखता हूँ। आप भी वैसे ही चर्चा करें जैसे मैं करता हूँ। आप भी कुत्ते को देख कर सोचें कि ये किसका है, ये क्या खाता होगा, जीडीपी बढ़ने से इसके जीवन पर क्या फर्क पड़ता होगा, क्या इसे पता भी होगा कि जीडीपी के मनुष्य करते क्या हैं?

जब तक दर्शक जागरूक नहीं होगा, ऐसे ही आपको डराया जाएगा कि यहाँ प्रधानमंत्री आवास का कुत्ता भी चला जाता है, और किसी को पता नहीं चलता। चिल्लाने वाले एंकर से पूछिए तो वो कहेंगे, कौन सा कुत्ता, किसका कुत्ता… मंटो की एक कहानी है ‘टिटवाल का कुत्ता’। पढ़िए उसको। लेकिन मंटो तो पाकिस्तान के थे। क्या पता आप पढ़ते रहेंगे और कोई कहेगा कि ये पढ़ना है तो पाकिस्तान जाओ। लेकिन आप पढ़ते रहिए। आपातकाल आ चुका है। आज कुत्ते मर रहे हैं, कल को मुझे सड़क पर रौंदती हुई कोई गाड़ी निकल जाएगी। आप लोग दो दिन दुखी रहेंगे, मेरे बारे में अच्छी-अच्छी बातें कहेंगे, और फिर सब भूल जाएँगे।

लेकिन आपको भूलना नहीं चाहिए। अगर रवीश मर जाएगा तो आपके हैशटैग पर भी वही गाड़ी चल चुकी होगी, आपके उम्मीदों की भी हत्या हो चुकी होगी। तब आप शोक मत करिएगा। मैं चाहता हूँ कि मेरे जाने के बाद आप सवाल पूछिएगा कि वो गाड़ी किसकी थी, उसमें कौन बैठा था, क्यों बैठा था! तब आप किसी भी तरह से उसका एक कनेक्शन निकालिएगा ताकि पता चले कि उसके पूरे खानदान में भाजपा से जुड़ा कोई वार्ड कमिश्नर भी तो नहीं। फिर आप उसमें भाजपा, संघ, अमित शाह, मोदी और मेरी गजब की पत्रकारिता के बिन्दुओं को जोड़ दीजिएगा। कहानी बन भी जाएगी, और चल भी जाएगी।
नमस्कार! हें हें हें

अपने ही गिरने के पैमाने को तोड़ता है ये व्यक्ति

रवीश कुमार अपने ही गिरने के पैमाने हर दिन तोड़ते हैं। नौकरी, कॉलेज, एसएससी, बैंकिंग, स्कूल आदि पर खबरों की शृंखला चलाने वाले रवीश हर दिन एक अंधेरे कुएँ में गिरते जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि उनका करियर बेकार रहा है, लेकिन जिस ‘2014 के बाद’ से वो सुषमा को मोदी द्वारा दरकिनार करते देखते हैं, जिस तरह एक किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अस्वस्थ रहने वाली नेत्री के राजनीति से दूरी बनाने को मोदी की चाल जैसा दिखाते हैं, उसी 2014 के बाद रवीश ने स्वयं की पत्रकारिता के साथ क्या किया, ये छुपा नहीं है।

रवीश के भक्त जो अपने गॉड के ‘टीवी मत देखिए’ कहने के बाद भी रोज टीवी देखते हैं, और रवीश द्वारा स्वयं ही गढ़ी गई परिभाषाओं को परम सत्य मानते हैं, वो समझते हैं कि रवीश की पत्रकारिता का स्वर्णिम काल पिछला छः साल ही है। जबकि इन छः सालों में एक पत्रकार के मानसिक पतन की जो कहानी हर रात टीवी की स्क्रीनों पर दिखी है, वो सबके सामने है।

रवीश के चेले और ट्रोलों की फौज भले ही आज सुषमा स्वराज की मृत्यु में कोई चाल देख ले, भले ही उसे लगे कि सुषमा को तो प्रधानमंत्री बनना था, मोदी ने पत्ता काट दिया, लेकिन उससे सत्य नहीं बदलता। रवीश कुमार पत्रकारिता को दोनों छोर को जी चुके हैं। अच्छी पत्रकारिता की बड़ाई उनके आज के विरोधी भी करते हैं, लेकिन जितनी घटिया पत्रकारिता अब उनकी हो गई है, वाकई टीवी देखना बंद कोई करे या नहीं, रवीश के धीमे जहर से तो जरूर बचे।

रवीश जी, आप बीमार हो चुके हैं। आप जब कैमरे में देखते हैं, और बोलते हैं, तो लगता है कि दया कर रहे हैं किसी पर। आपको अपने ही दर्शक मूर्ख लगते हैं, जिन्हें आप हर रात पट्टी पढ़ाते हैं। साथ ही, कैमरे के सामने आपका एटीट्यूड अब तिरस्कार वाला हो चुका है। रवीश जी की भावभंगिमा अपने ही दर्शकों को मानो ललकारती है कि ‘अबे तुम लोग हो क्या! मैं तुमसे महान हूँ, तुम सुन भी रहे हो तो मेरी दया के कारण।’ आपको लगने लगा है कि आप रवीश कुमार हैं और आपको अपना काम भी गंभीरता से करने की जरूरत नहीं है। स्क्रिप्ट पढ़ते हुए लगातार फ़म्बल करना, चेहरे पर ऐसे भाव कि दस बजे घर जाना है, ‘विषय’ कुछ भी हो, उसमें ‘य’ हटा कर ‘विष’ रख लेना, ये सब आपकी दिनचर्या है।

कुछ समय पहले तक आपको लौट आने का सुझाव दिया करता था। अब वो मत कीजिए। आप कहीं चले जाइए क्योंकि मैं नहीं चाहता कि कोई आपके कारण, आपकी घटिया पत्रकारिता के कारण आपस में लड़े, किसी को गाली दे। क्योंकि, आप एक भीड़ को उन्मादी बना चुके हैं। ये भीड़ हर मुस्लिम की हत्या पर खड़ी होती है, और हर हिन्दू की मुस्लिमों द्वारा हत्या पर चुप हो जाती है।

आपने ऐसी ही खतरनाक, जानलेवा परंपरा को हवा देना शुरु किया था, अब वो बवंडर बन कर पूरे समाज को लीलता जा रहा है। आपके प्रशंसकों में सहिष्णुता नहीं है, वो बात-बात पर हिन्दू-मुस्लिम ही करते हैं। वो सामान्य अपराध में धर्म जोड़ देते हैं, क्योंकि आपने उन्हें प्रशिक्षण दिया है, हर रात टीवी से और दिन में कई बार अपने लेखों से। शहर में अगर मजहबी भीड़ पुलिस पर पत्थर फेंकती है, दंगे करती है, जान लेती है, तो उसका रक्त आपके हाथों पर भी है।

आपने तैयार किया है ऐसे लोगों को जिन्हें शायद ऐसे अपराधों में बस अपराध दिखता था, लेकिन जबसे आपने जुनैद को बीफ के साथ जोड़ी, सक्सेना की मौत पर चुप रहे; जबसे तबरेज पर खूब बोला गया और गोपाल पर चुप रहे; जबसे पहलू खान आपके लिए ज़रूरी था लेकिन बीफ माफिया द्वारा की गई कई हत्याओं पर आप चुप रहे, तब से आपको पत्रकारिता का मापदंड मानने वाली भीड़ हिंसक होती गई। यही कारण है कि हिन्दुओं को लगातार, बेखौफ हो कर एक खास धर्म के लोग मार रहे हैं। काँवरियों पर पत्थरबाजी की जा रही है, ग्यारह मामलों में ‘जय श्री राम’ जबरदस्ती बुलवाने की बातें गलत साबित हुई हैं

ये आप पर इसलिए है क्योंकि आपने बस एक पक्ष लिखा। आपने जान-बूझ कर चुप्पी साधी क्योंकि आप पत्रकारिता कर ही नहीं रहे थे। आपको अजेंडा बढ़ाना था। आप आदर्श ज़रूर हैं, लेकिन उन लोगों के जो बातों को मरोड़ कर पेश करता है, उसमें धर्म और जाति निकालने के बाद ही चर्चा का पहला वाक्य कहता है। आप एक खोखले आदर्श हैं, नकारात्मकता से भरे हुए।

इसीलिए, आपको सुषमा स्वराज की मृत्यु के दिन भी मोदी को टारगेट करना उचित लगा। आपने शब्दों की शृंखला से साबित किया कि केन्द्र से हाशिए पर सुषमा को कैसे ढकेला गया। रवीश जी, आपकी ज़रूरत है समाज को, पत्रकारिता के छात्रों को, टीवी को। ताकि, वो जान सकें कि पत्रकारिता का एक बेकार उदाहरण कैसा होता है, उन्हें निजी घृणा से खोखला होने से कैसे बचना चाहिए।

नियमों के पालन में गड़बड़ी को लेकर NDTV पर ₹2 करोड़ के SEBI का जुर्माना बरकरार

प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट/SAT-The Securities Appellate Tribunal) ने मीडिया समूह एनडीटीवी पर सेबी द्वारा लगाए गये दो करोड़ रुपए के जुर्माने को बरकरार रखा है। सेबी (SEBI) ने कंपनी पर 450 करोड़ रुपए की कर (Tax) माँग से जुड़ी सूचनाएँ सार्वजनिक करने में खामी पाए जाने के कारण समाचार चैनल एनडीटीवी (NDTV) पर जुर्माना लगाया था।

जारी रहेगा 19 लाख रूपए का जुर्माना

रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यायाधिकरण ने कंपनी के साथ उसके प्रवर्तक प्रणय रॉय और राधिका रॉय समेत तीन अधिकारियों पर सेबी की ओर से लगाए गए 19 लाख रुपए के जुर्माने को भी कायम रखा है। हालाँकि, सैट (SAT) ने कहा है कि सूचीबद्धता समझौते के उल्लंघन के लिए कंपनी के अनुपालन अधिकारी अनूप सिंह जुनेजा पर लगाया गया दो लाख रुपए का जुर्माना उचित नहीं है। अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश के मुताबिक, जुनेजा भेदिया कारोबार निरोधक (पीआईटी) नियमों के तहत एक लाख रुपए का जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी है। न्यायाधिकरण का यह फैसला एनडीटीवी की ओर से दायर अपील पर आया है।

2018 में भी NDTV और उसके चार अधिकारियों पर 22 लाख रुपए का जुर्माना

एनडीटीवी ने सेबी के जून 2015 और मार्च 2018 के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। दरअसल, एनडीटीवी ने आयकर विभाग द्वारा की गई 450 करोड़ रुपए की कर (Tax) माँग और कंपनी के शीर्ष कार्यकारी अधिकारियों द्वारा की गई शेयरों की बिक्री संबंधी सूचनाएँ शेयर बाजारों को देने में देरी की थी। इसी मामले में सेबी ने जुर्माना लगाया था।

सेबी ने 2015 में कंपनी पर दो करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। इसी मामले में मार्च 2018 में भी एनडीटीवी और उसके चार अधिकारियों पर 22 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था।

SAT द्वारा जारी आदेश आप यहाँ पढ़ सकते हैं –

आजम खान के ‘घर’ की औरतें भी जगीं, शौहर के मुॅंह पर दे मारा तीन तलाक का पेपर

तीन तलाक को अपराध बनाने से मुस्लिम महिलाओं को किस कदर ताकत मिली है इसका एक प्रमाण आजम खान के संसदीय क्षेत्र रामपुर की एक महिला ने दिया है। 52 वर्षीय महिला ने काउंसलिंग के दौरान तीन तलाक का पेपर शौहर के सामने फाड़ते हुए दो टूक कहा कि अब यह नहीं चलने वाला है। दंपती को काउंसलिंग के लिए मुरादाबाद के नारी उत्थान केन्द्र में बुलाया गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित महिला ने मुरादाबाद एसपी को शिकायत करते हुए पति पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। एक जुलाई को शौहर ने कागज पर तीन बार तलाक लिखकर उसे थमा दिया। इसके बाद एसपी ने इस दंपती को नारी उत्थान केन्द्र जाकर काउंसलर से मिलने को कहा।

मंगलवार को काउंसलर संध्या राउत ने काउंसलिंग के लिए दंपती को बुलाया था। काउसंलर दोनों की बात सुन ही रहे थे कि पत्नी ने तीन तलाक के पेपर को फाड़ दिया। बीवी के इस तेवर से शौहर के होश गुम हो गए और वह उसे साथ रखने को राजी हो गया। दोनों की शादी 26 साल पहले हुई थी और उनके तीन बच्चे हैं।

रावत ने बताया, “काउंसलिंग के दौरान महिला ने साहस दिखाते हुए पति से दो टूक कहा कि इस तरह वह उसे छोड़कर नहीं जाने वाली है और कागज के एक टुकड़े पर तीन बार तलाक लिख देने का कोई मतलब नहीं है। जब वह तीन तलाक के कागज को फाड़ रही थी तो हमने इसे मोबाइल में शूट कर लिया।”

उन्होंने कहा कि यह बेहद भावुक था। उम्मीद है कि भविष्य में यह वीडियो दिखाकर हम और दंपतियों के बीच सुलह करवाने में कामयाब होंगे।

तीन तलाक को अपराध बनाने वाले ऐतिहासिक बिल के अमल में आने के बाद इस तरह की यह दूसरी घटना है। इससे पहले सहारनपुर में मोहम्मद अली ने कानून के डर से अपनी पत्नी को अपना लिया था।

आज शाम 8 बजे राष्ट्र को सम्बोधित करेंगे PM मोदी, कुछ बड़े ऐलान किए जाने की संभावना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुरुवार (जुलाई 8, 2019) को शाम 8 बजे देश को सम्बोधित करेंगे। माना जा रहा है कि इस सम्बोधन में जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा ऐलान किया जा सकता है। पीएम मोदी इस दौरान अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त करने और जम्मू-कश्मीर को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में पुनर्गठित करने के सम्बन्ध में देश की जनता के साथ अपनी बात साझा करेंगे।

पीएम मोदी ने इससे पहले 27 मार्च को देश को सम्बोधित किया था। तब उन्होंने बताया था कि अंतरिक्ष में सक्रिय सैटेलाइट को मार गिरा कर भारत यह क्षमता हासिल करने वाले देशों में शुमार हो गया है। प्रधानमंत्री का यह सम्बोधन ऐसे समय में हो रहा है जब स्वतन्त्रता दिवस भी नजदीक है और लाल किले की प्राचीर से भी उनका भाषण होना है।

मीडिया रिपोर्ट्स का यह भी कहना है कि प्रधानमंत्री बुधवार (अगस्त 7, 2019) को ही राष्ट्र को सम्बोधित करने वाले थे लेकिन पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री व भाजपा की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज के निधन के कारण इस कार्यक्रम को टाल दिया गया। अब सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि पीएम आज के अपने सम्बोधन में क्या नया ऐलान करते हैं?

‘मुसलमान भी राम, कृष्ण और शिव के हैं वंशज, राम मंदिर के समर्थन में खड़े हों वो भी’

प्रयागराज पहुँचे बाबा रामदेव ने जम्मू-कश्मीर मामले पर मोदी सरकार द्वारा लिए गए निर्णय का स्वागत करते हुए जल्द ही राम मंदिर बनने की बात कही। उन्होंने इस दौरान देश के मुसलमानों से अपील की कि वे सभी अपने पूर्वजों का सम्मान करते हुए राम मंदिर के निर्माण के समर्थन में खड़े हों। उन्होंने मुसलमानों से कहा कि हमारे मजहब अलग हो सकते हैं लेकिन हमारे पूर्वज एक ही हैं।

इस बातचीत के दौरान उन्होंने बोला, “हमारे पूर्वज राम हैं, कृष्ण हैं, शिव हैं और गौतम पतंजलि जैसे कई ऋषि मुनि हैं। इसलिए उनका (मुसलमानों) का डीएनए कहीं बाहर का नहीं है।” उनकी मानें तो देश में रह रहे मुसलमान कहीं मक्का-मदीना, मिस्र, यूनान और ईरान से नहीं आए हैं। वे यही के हैं।

जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि राम मंदिर का हल मध्यस्ता से निकलने वाला मामला नहीं है, अब इसमें अदालत को साहस करना होगा। क्योंकि अगर ये मामला मध्यस्ता से सुलझने वाला होता तो अब तक हो गया होता। उनका कहना है कि अगर इस मामले में कोर्ट से सही निर्णय नहीं हो तो कानून के जरिए मंदिर बनाना होगा। लेकिन राम मंदिर बनकर रहेगा।

प्रयागराजम में नरेंद्र गिरी से मिलने बागंभरी मंदिर पहुँचे रामदेव ने कहा, “हनुमान जी के दर्शन से अभिभूत हूँ। मजहब से बड़े अपने पूर्वज होते हैं इसलिए मुसलमानों को खड़ा होकर समर्थन करना चाहिए। हमारे और मुसलमानों के डीएनए एक है, ये मक्का-मदीना से नहीं आए। पूर्वज हमारे एक है, राम हैं, कृष्ण हैं, शिव हैं।”

इस दौरान वे कहते हैं कि राम मंदिर बनना ही चाहिए और बनकर भी रहेगा। उन्होंने कहा है कि यदि कोर्ट का फैसला आने में देरी होती है तो यह देश का दुर्भाग्य होगा।

माहौल अशांत करने की आशंका में श्रीनगर पहुँचते ही उलटे पाँव लौटाए गए ग़ुलाम नबी आज़ाद

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद आज गुरुवार (जुलाई 8, 2019) को श्रीनगर पहुँचे लेकिन उन्हें अगली ही फ्लाइट से वापस भेज दिया गया। बता दें कि जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन और अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त करने के विरोध में आजाद काफ़ी मुखर रहे हैं। राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में भाषण देते हुए उन्होंने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए थे और मीडिया से बात करते हुए सरकार के इस निर्णय का विरोध किया था। एनएसए अजीत डोभाल द्वारा कश्मीरियों से संवाद करने पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा करने के लिए उन्हें रुपए दिए गए

गुलाम नबी आजाद के साथ जम्मू कश्मीर कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर भी मौजूद थे। दोनों ही नेताओं को श्रीनगर एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया। जम्मू कश्मीर के 100 से अधिक नेता व अलगाववादी पहले से ही नजरबन्द किए जा चुके हैं ताकि जनता को भड़काने की कोई भी कोशिश सफल न हो सके। आशंका जताई गई है कि गुलाम नबी आजाद के पहुँचने के बाद विपक्षी नेता जनता को उकसा सकते हैं, जिसके बाद उन्हें वापस भेज दिया गया।

गुलाम नबी आजाद ने केंद्र सरकार के इस दावे का भी खंडन किया है कि जम्मू कश्मीर में माहौल शांतिपूर्ण है। सरकार सुरक्षा को लेकर काफ़ी गंभीर है और जनता को विरोध प्रदर्शन करने के लिए उकसाने की हर एक सम्भावना पर विराम लगाने के लिए सुरक्षा बल भी चुस्त-दुरुस्त हैं। ऐसे में देखना होगा कि वापस दिल्ली लौटने पर गुलाम नबी आजाद की क्या प्रतिक्रिया रहती है?

ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित के कई बड़े नेता अनुच्छेद 370 पर केंद्र सरकार के निर्णय का समर्थन किया है। महाराजा हरि सिंह के पूर्व व कॉन्ग्रेस नेता कर्ण सिंह ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। जम्मू कश्मीर के सदर-ए-रियासत रह चुके कर्ण सिंह राज्य के प्रथम राज्यपाल भी रह चुके हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल में कई अहम विभाग संभाल चुके सिंह का बयान के लिए एक और झटका है।

Bigg Boss एक्ट्रेस ने 80000 लोगों की मदद करने वाली सुषमा स्वराज पर की अभद्र टिप्पणी

सिर्फ़ ट्विटर के जरिए 80,000 से ज्यादा लोगों की मदद करने वाली सुषमा स्वराज आज हम सबके बीच नहीं हैं। कोई आज उन्हें सशक्त राजनेत्री के रूप में याद कर रहा है तो कोई माँ के रूप में। सुषमा स्वराज ने अपने कार्यकाल धर्म-जाति-पंथ-देश-विदेश जैसे दायरों से उठकर लोगों की मदद की। उन्होंने उन लोगों पर ध्यान दिया जो सालों से मदद की गुहार लगाए बैठे थे लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी।

पाकिस्तानी बच्चे रोहान के ईलाज से लेकर गलती या धोखे से पाकिस्तान पहुँची हिंदुस्तानी लड़कियाँ गीता और उज्मा की वापसी इसके बड़े उदहारण हैं। जानकारी के मुताबिक पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 15 से ज्यादा पाकिस्तानियों के 2017 तक मेडिकल वीज़ा दिलाया लेकिन अफसोस की बात है कि उनके देह त्यागने के बाद आज पाकिस्तानी उनके किए एहसानों को भुलाकर उनके जाने की खुशी मना रहे हैं। जिसमें एक नाम वीना मलिक का भी शामिल है।

वीना मलिक ने अपने ट्विटर पर सुषमा स्वराज के लिए न केवल अभद्र टिप्पणी है बल्कि इस बात का भी सबूत दिया है कि वो भारत और उसके राजनेताओं के बारे में कैसी सोच रखती है। उसने सुषमा स्वराज के जाने के बाद R.I.H लिखा और साथ में एक आग वाली ईमोजी भी लगाई। अब इस ‘R.I.H’ का  मतलब ‘आपको स्वर्ग मिले’ या ‘आपको नर्क मिले’ दोनों हो सकता था, लेकिन चूँकि वीना ने उसके संदेश के साथ आग वाली ईमोजी लगाई तो उसे देखकर सोशल मीडिया यूजर्स उसकी ओछी हरकत भाँप गए और उसे आड़े हाथों ले लिया। सोशल मीडिया पर अपनी हरकत के कारण लोगों ने उसे खूब ट्रोल किया।

अधिकतर लोगों ने बिग बॉस में हुए अश्मित पटेल वाले किस्से पर मीम बना बनाकर उसे ट्रोल किया। जबकि गीता स्वामी नाम की यूजर ने लिखा, “ऐसे ही पाकिस्तानी सुषमा स्वराज जी के निधन पर प्रतिक्रिया देते हैंl जोकि एक अच्छी नेता थी और इंसानियत को प्रधानता देती थीl शायद वह हाफिज सईद को मानते हैंl”

जबकि दूसरे यूजर ने उन्हें अश्मित पटेल की चड्डी धोने वाली औरत बताया। और स्क्रीनशॉट के साथ दिखाया कि उसमें और सुषमा स्वराज में क्या अंतर है। एक ओर सुषमा स्वराज लोगों की मदद करती थी और दूसरी ओर वीना उनकी मृत्यु पर उन्हें नर्क में जलने वाले इशारे कर रही है।

कुछ ने डॉन न्यूजपेपर के स्क्रीनशॉट दिखाए, जिसमें लिखा था कि पाकिस्तान में करीब 50 मिलियन लोग कॉमन मेंटल डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं। जिसमें 15 से 35 मिलियन व्यस्क है। इसलिए वो समझ सकते हैं कि पाकिस्तान में हर चौथा आदमी (आम बातचीत में पागल कह सकते हैं आप) है। मतलब वीना की बातों का कोई औचित्य नहीं है, पाकिस्तान में ये सब आम है।

गौरतलब है कि इससे पहले वीना मलिक अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने पर भी भारत के प्रति अपनी कुंठा निकाल चुकी है और अब सुषमा स्वराज की मृत्य पर ठिठोली करने की कोशिश की।