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कट्टरपंथियों के हाथों मारे गए हरीश का परिवार आत्मदाह की तैयारी में, नेत्रहीन पिता पहले ही कर चुके हैं आत्महत्या

मजहबी भीड़ के हाथों मारे गए हरीश जाटव के परिवार ने आत्मदाह की चेतावनी दी है। न्याय मिलने में देरी से आहत हरीश के नेत्रहीन पिता रत्तीराम पहले ही जहर खा कर जान दे चुके हैं। अब परिजनों ने जल्द न्याय नहीं मिलने पर आत्मदाह की बात कही है।

मामला राजस्थान के अलवर का है। हरीश के परिजनों ने पुलिस पर मामले को दबाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुलिस के काम करने के तरीके से परेशान होकर ही रत्तीराम ने आत्महत्या की। पीड़ित परिवार का आरोप है कि अलवर पुलिस मॉब लिंचिंग के इस मामले को एक्सीडेंट साबित करने पर तुली हुई है।

गत 16 जुलाई को हरीश जाटव बाइक पर सवार होकर अलवर के भिवाड़ी से अपने गाँव झिवाणा जा रहा था। रास्ते में फलसा गाँव में हरीश की बाइक से दूसरे समुदाय की एक महिला को टक्कर लग गई थी। इसके बाद महिला के परिजनों ने हरीश की जमकर पिटाई की। वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। इलाज के दौरान 18 जुलाई को
हरीश की मौत हो गई। हरीश के परिजन इसे मॉब लिंचिंग की घटना बता रहे, वहीं अलवर एसपी ने प्रेसवार्ता कर हरीश की मौत को एक एक्सीडेंट करार दिया।

इस मामले में पुलिस की कथित लापरवाही और हरीश के नेत्रहीन पिता की आत्महत्या के बाद दलित समाज के लोग टपूकड़ा में एकत्रित हो गए और आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने पर जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने की चेतावनी दी।

मामला सामने आने के बाद बसपा और भाजपा के नेता टपूकड़ा पहुँच गए हैं। दलित समाज के आक्रोश को देखते हुए पुलिस फोर्स तैनात की गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दलित समाज के प्रमुख लोगों को समझाने के प्रयास में जुटे है। बसपा विधायक संदीप यादव ने बताया कि पार्टी के सभी 6 विधायक इस मामले में मुख्यमंत्री से मिलकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करेंगे।

370 का हटना: देश के स्वाभिमान और विकास का सूरज उगना… लेकिन विरोधियों का मुरझाना

एक भारत, श्रेष्ठ भारत का संकल्प पूरा हो रहा है। भारत के एकीकरण में जो दृढ़ इच्छाशक्ति लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल ने दिखाई थी, वैसी ही संकल्पबद्धता एवं साहस भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के अभिशाप अनुच्छेद 370 को समाप्त कर प्रदर्शित किया है।

महाराजा हरिसिंह द्वारा 26 अक्टूबर, 1947 को बिना शर्त भारत में रियासत का विलय किया गया था। लेकिन जवाहर लाल नेहरू पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वो मजहबी उन्मादियों के नेता शेख अब्दुल्ला के साथ सांठगांठ कर जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग-थलग करने के लिये अनुच्छेद 370 करने का कुचक्र रचने लगे थे।

नेहरू पर षडयंत्र का यह आरोप तब और मजबूत होने लगा, जब भारत की सेना कबाइलियों के वेश में आये पाकिस्तानी सेना के हमलावरों से पूरा कश्मीर का एक—एक इंच वापस लेने के लिये विजयी होती हुई आगे बढ़ रही थी, तभी अचानक उन्होंने अकारण ही एकतरफा युद्ध विराम की घोषणा करके जम्मू-कश्मीर को विवादित बताते हुये स्वयं ही संयुक्त राष्ट्र में जाकर जनमत संग्रह कराने की पहल कराने का प्रस्ताव किया और तत्कालीन उपप्रधानमंत्री व गृह मंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण की राह एक तरह से बाधा बनते हुए कश्मीर का विषय गृह मंत्रालय से लेकर अपने पास रख लिया।

जब नेहरू ने अचानक 17 अक्टूबर, 1949 को नेहरू ने संसद में अपने कैबिनेट मंत्री गोपालस्वामी अयंगर ने घोषणा करवाई कि वो जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 देना चाहते हैं तो उन पर आरोप गहरा गया। आनन-फानन में बिना पर्याप्त चर्चा के यह अनुच्छेद पारित कर दिया गया।

बाबा साहब अंबेडकर पहले ही अनुच्छेद 370 का विरोध करते हुए इसका प्रारूप तैयार करने से मना कर चुके थे। बाबा साहब ने कहा था कि अनुच्छेद 370 जैसे कानून को तैयार करना और लागू करना देशद्रोह के समान है। किंतु नेहरू नहीं माने और इसका प्रारूप एन गोपालस्वामी अयंगर से तैयार करवाया। हालाँकि नेहरू ने इस धारा को 370 लागू करते समय देश को गुमराह करते हुए कहा कि यह अस्थाई है और जब स्थिति सामान्य होगी तो हट जाएगी, लेकिन जब उन्होंने शेख अब्दुल्ला के साथ मिलकर 1952 में अनैतिक समझौता ‘दिल्ली अग्रीमेंट’ करके अलगाववाद को और ईंधन देने वाली अनुच्छेद 35-ए लागू करने की पृष्ठभूमि तैयार की तो संदेह बढ़ गया कि वो स्वयं ही जम्मू-कश्मीर को शेष भारत से पूर्णतः अलग-थलग करने के षडयंत्रकारी हैं।

भारतीय जनता पार्टी के पूर्ववर्ती संगठन जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मुखर विरोध करते हुए कहा कि आर्टिकल 370 व ‘दिल्ली एग्रीमेंट’ से भारत टुकड़ों में बंट रहा है। डॉ मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा से पृथक करने के इस षडयंत्र के विरुद्ध संघर्ष करने का बीड़ा उठाया। उन्होंने इस अनुच्छेद के विरुद्ध भूख हड़ताल की। एक ध्वज, एक विधान और एक प्रधान के नारे के साथ जब वे इसको समाप्त करने की माँग करते हुए आंदोलन के लिए जम्मू-कश्मीर जा रहे थे तो केंद्र की नेहरू और राज्य की शेख अब्दुल्ला की सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और 23 जून 1953 को हिरासत के दौरान ही उनकी रहस्यमय ढंग से हत्या (संदिग्ध मृत्यु) हो गई।

फिर नेहरू ने 1954 में अवैध तरीके एक प्रकार से सांसद व देश की जनता से धोखाधड़ी करते हुए अनुच्छेद 35-ए 11 सितम्बर, 1964 को आर्यसमाज के नेता व सांसद प्रकाशवीर शास्त्री (ओम प्रकाश त्यागी) ने अनुच्छेद 370 को हटाने का एक प्रस्ताव संसद में प्रस्तुत किया।

किंतु तत्कालीन गृहमंत्री गुलजारी लाल नंदा 4 दिसम्बर, 1964 को जवाब में इस विषय को टालते रहे, हालाँकि उन्होंने इतना अवश्य कहा कि इस अनुच्छेद में कमियाँ हैं। तब से न जाने कितनी आँखें जम्मू-कश्मीर पर लगे इस ग्रहण के समाप्त होने का सपना पाले संसार से चली गईं, पर अनुच्छेद 370 का जख्म ठीक होने के बजाय नासूर बनता गया। 70 साल की यह टीस समाप्त किया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने। इस धारा को समाप्त करते हुए संसद में अमित शाह ने कहा, ‘यदि 1948 में सेनाओं को छूट दी गई होती तो आज पाक के कब्जे वाला कश्मीर नहीं होता, पूरा कश्मीर ही भारत का अंग होता।

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साहस के कारण अनुच्छेद 370 का कलंक हटा है। साथ ही गृह मंत्री ने स्पष्टता व ढृढ़ता से कहा, ‘मैंने जब भी संसद में जम्मू कश्मीर की बात की है उसमें हमेशा पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर और अक्साई चिन भी शामिल है। नरेंद्र मोदी की सरकार इसे छोड़ने वाली नहीं है। पर नेहरू की ऐतिहासिक भूल को सुधारकर जम्मू-कश्मीर को देश के विकास की मुख्यधारा के साथ एकीकृत करने के इस महान कार्य को कॉन्ग्रेस, पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित अनेक विपक्षी दल सहन नहीं कर पा रहे हैं। देशहित के इतने बड़े कार्य के विरोध के पीछे इन दलों ने जो कारण बताए हैं, वे अविश्वसनीय हैं, भ्रम उत्पन्न करने वाले हैं। विशेषकर स्वयं को राष्ट्रीय पार्टी कहने वाली कॉन्ग्रेस का पाकिस्तान की भाषा बोलना दुर्भाग्यपूर्ण है।

यह प्रश्न उठता है कि जिस विषय पर पूरा देश सरकार के साथ है, उस पर ये दल जनभावना व जनादेश का अपमान करते हुए विरोध करने का दुस्साहस कैसे कर पा रहे हैं? असल में उनके विरोध के कारण कुछ और हैं। इन कारणों में एक तो यह जान पड़ता है कि मजहबी आधार पर जम्मू-कश्मीर में जनांकिकीय असंतुलन बनाकर अलगाववाद व आतंकवाद को प्रश्रय देना, दूसरा कुछ परिवारों का भ्रष्टाचार और तीसरा जम्मू-कश्मीर के लोगों को विकास की धारा से दूर रखना, ताकि वे गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, विकासहीनता के दलदल में पड़े रहकर इन परिवारों के लिये वोटबैंक बने रहें और इनके आगे भीख माँगते हुए इनकी गुलामी करते रहें और इनके भ्रष्टाचार की ओर जनता का ध्यान न जाए।

370 पर चर्चा के समय उत्तर देते हुए लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि वर्ष 2004 से 2019 तक केंद्र सरकार की ओर से इस राज्य को 2 लाख 77 हजार करोड़ रुपए भेजे गए, वर्ष 2011-12 में केंद्र की ओर से देश में जहाँ प्रति व्यक्ति औसत 3683 रुपए भेजे गए वहीं जम्मू-कश्मीर में प्रति व्यक्ति 14255 रुपए गए, किंतु वहाँ की जनता आज भी गरीबी, बदहाली, दुर्दिन में जी रही है।

ये धन कहाँ, किसकी जेब में गया? क्या ये इस बात की पुष्टि नहीं करता है कि विरोधी अनुच्छेद 370 का कवच आतंकवाद और इसके वित्त पोषण एवं कुछ परिवारों के भ्रष्टाचार को संरक्षण देने के लिए चाहते हैं?

बात केवल आर्थिक पक्ष की ही नहीं है। यह अनुच्छेद अमानवीय, लोकतंत्र विरोधी तथा महिला, दलित, आदिवासी और गरीब विरोधी भी थी। इस अनुच्छेद के कारण जम्मू-कश्मीर में बाल विवाह निरोधी कानून लागू नहीं कर सकते थे, जैन व बौद्ध अल्पसंख्यकों के लिये अल्पसंख्यक आयोग नहीं बना सकते थे, अनुसूचित जाति व जनजाति के लिये राजनीतिक आरक्षण नहीं दे सकते थे, बच्चों को शिक्षा का अधिकार लागू नहीं कर सकते थे, भूमि अधिग्रहण अधिनियम लागू नहीं कर सकते थे, राज्य में परिसीमन नहीं कर सकते थे, वाल्मीकि समाज के लाखों सफाईकर्मियों को केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं दे सकते थे, उन्हें नागरिकता तक नहीं दी गई थी, महिलाओं पर परोक्ष रूप से शरीयत लागू करके उनके अधिकार छीन लिए गए थे, राज्य की महिला अपनी इच्छा से राज्य के बाहर विवाह नहीं कर सकती थी।

यह प्रश्न भी समीचीन है कि जब ऐतिहासिक रूप से केंद्रीय धन का अधिकतम भाग जम्मू-कश्मीर को दिया गया, उसके बाद भी यह बुनियादी ढाँचे, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, रोजगार के अवसर आदि जैसे विकास के कार्यों में क्यों नहीं परिलक्षित हुआ है? राज्य देश के अन्य राज्यों की तरह विकसित क्यों नहीं हो पाया?

तुष्टीकरण और वोटबैंक की राजनीति करने वाले दलों के लिए 370 के उन्मूलन का विरोध सैद्धांतिक नहीं, अपितु अवसरवादी और पोल खुलने के भय से उपजा है। क्योंकि वे जानते हैं जम्मू-कश्मीर से इस कलंक के समाप्त होने के बाद अब वहाँ निजी निवेश के द्वार खुल जाएँगे, जिससे वहाँ विकास की संभावना बढ़ेगी। निवेश में वृद्धि से रोजगार सृजन में वृद्धि होगी और राज्य में सामाजिक-आर्थिक बुनियादी ढाँचे में और सुधार होगा।

उद्योगों के विकास के लिये निजी लोगों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों से निवेश आएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। केंद्र की योजनाओं का सीधा लाभ राज्य की जनता को मिलेगा। अब राज्य में विकास, समता व अधिकार का सूरज निकलेगा तो जनता स्वयं फर्क महसूस करेगी और फिर 70 वर्ष तक उन्हें बुनियादी सुविधाओं, अधिकारों और भागीदारी से वंचित करने वालों से जवाब माँगेगी। यही डर विरोधियों को अनुच्छेद 370 के अभिशाप को हटाने का विरोध करने को मजबूर कर रहा है।

लेखक राजनीतिक व सामाजिक विश्लेषक हैं।

बेगम ज़मीना को फ़िदायीन बता विमान में ब्लास्ट की धमकी देने वाला नसीरुद्दीन गिरफ़्तार

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक ऐसे शख़्स को गिरफ़्तार कर लिया है जिसने अपनी बेगम को फ़िदायीन बताकर विमान में बम विस्फ़ोट की धमकी दी थी। शख़्स की पहचान 29 वर्षीय नसीरुद्दीन के रूप में हुई है। उसे दिल्ली के बवाना इलाक़े से गिरफ़्तार किया गया।

पूछताछ में उसने अपना ज़ुर्म क़बूल करते हुए बताया कि उसने ही एयरपोर्ट की डायल सेवा को कॉल कर फ़्लाइट उड़ाने की धमकी दी थी। बता दें कि 8 अगस्त को दिल्ली एयरपोर्ट की डायल सेवा को एक गुमनाम कॉल आया था कि जिसमें कहा गया कि एक महिला जिसका नाम ज़मीना है वो फ़िदायीन है। फ़ोन करने वाले ने कहा कि महिला दुबई या सऊदी अरब जाने वाली फ़्लाइट को बम से उड़ा सकती है।

इस कॉल से एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मच गई थी। हरकत में आते हुए दिल्ली पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की। जाँच में पता चला कि नसीरुद्दीन की बेगम देश से बाहर जा रही थी। अपनी बीवी को रोकने के लिए उसने कॉल की थी।

Zomato सहित कई की डाइन-इन सर्विस से 1200 से अधिक रेस्तरां कंपनियों ने किया किनारा

देश के कई प्रमुख शहरों की रेस्तरां कंपनियों और एग्रीगेटर्स के बीच विवाद गहरा गया है। लिहाजा 1,200 से अधिक रेस्तरां कंपनियों ने जोमैटो सहित अन्य की डाइन-इन सर्विस से किनारा कर लिया है। जोमैटो ने इसे प्रतिस्पर्धा विरोधी और अवैध बताया है।

मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरू, कोलकाता, गोवा, पुणे और वडोदरा के ये रेस्तरां #Logout अभियान के तहत Zomato, EazyDiner, Nearbuy, MagicPin और Gourmet Passport सहित कई प्लेटफार्मों से बाहर हैं। रेस्तरां कंपनियों का कहना है कि एग्रीगेटर्स द्वारा टेबल रिजर्वेशन सेवाओं पर दी जा रही छूट पर्याप्त नहीं थी और इससे उनके बिजनेस को नुकसान हो रहा था।

जोमैटो ने एक ब्लॉग लिखकर #Logout अभियान से रेस्तरां कंपनियों को सावधान रहने के लिए कहा है। साथ ही जोमैटो ने इन कंपनियों को 45 दिन का नोटिस पीरियड भी दिया है और कहा है कि इस बीच वो उन्हें बता दें कि वो उनकी कंपनी से निकलना चाहते हैं या फिर वापस से ज्वाइन करना चाहते हैं। यदि निकलना चाहते हैं तो क्या वो साइन अप शुल्क का भुगतान करने के लिए तैयार हैं।

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अध्यक्ष राहुल सिंह ने कहा, “दो दिन पहले गुड़गाँव में शुरू हुआ #Logout आंदोलन देशव्यापी हो गया है। यह दिखाता है कि बिज़नेस के इस मॉडल से रेस्तरां कैसे नुकसान झेल रहे थे।”

जम्मू में 2G इंटरनेट सेवा शुरू, श्रीनगर में लैंडलाइन सेवा बहाल

जम्मू-कश्मीर में आज शनिवार (17 अगस्त) से फोन सेवाएँ शुरू हो गई हैं। जम्मू में 2G स्पीड के साथ इंटरनेट सेवा शुरू हो गई है। वहीं कश्मीर के श्रीनगर के राजबाग क्षेत्र में लैंडलाइन सेवा शुरू कर दी गई है। फ़िलहाल, कश्मीर में इंटरनेट सेवा शुरू नहीं हुई है।

ख़बर के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को हटाए जाने के बाद जो प्रतिबंध लगाए गए थे उन्हें चरणबद्ध तरीक़े से हटाया जाएगा। फ़िलहाल, जम्मू, रियासी ज़िले, सांबा, कठुआ और उधमपुर में 2G इंटरनेट सेवा शुरू कर दी गई है। राज्य के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा था कि सप्ताह के अंत तक कश्मीर घाटी के सभी स्कूल और कॉलेज खुल जाएँगे और दूरसंचार लिंक भी धीरे-धीरे बहाल हो जाएँगे।

अधिकारी ने इस बात की भी जानकारी दी कि बीते 12 दिनों से लॉकडाउन के दौरान कश्मीर घाटी में किसी व्यक्ति की जान नहीं गई है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा निष्प्रभावी किए जाने के बाद घाटी में प्रदर्शनों के दौरान मौत व गंभीर रूप से घायल होने की बात का खंडन किया। उनका कहना है कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर भारत के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति हासिल करने के लिए विदेशी मीडिया रिपोर्टस का इस्तेमाल कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जल्द ही प्रतिबंधों को हटा लिया जाएगा और जीवन पूरी तरह से सामान्य हो जाएगा।

ख़बर के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के 22 ज़िलों में से 12 ज़िलों में आम जनजीवन अब सामान्य हो गया है। केवल पाँच ज़िले ऐसे हैं जहाँ रात में पाबंदियाँ लगाई जा रही हैं। बीते शुक्रवार (16 अगस्त) को जुमे की नमाज़ के बाद भी पूरे राज्य में शातिंपूर्ण माहौल रहा।

मेरे गाल पर कीड़ा बैठ गया था इसलिए तिरंगे को सलामी नहीं दे रहा था: JDU विधायक शर्फुद्दीन

बिहार से जेडीयू विधायक शर्फुद्दीन की एक फ़ोटो बड़ी तेज़ी से वायरल हो रही है। इस फ़ोटो में वो तिरंगे को सलामी देते समय अपने बाएँ गाल पर हाथ रखे हुए हैं, जबकि आसपास खड़े प्रशासनिक अधिकारी व नेता लोग तिरंगे के सम्मान में सलामी देते दिख रहे हैं। इस फ़ोटो के वायरल होते ही सूबे में सियासत गर्मा गई है।

इस फ़ोटो पर जेडीयू विधायक ने तर्क दिया कि अचानक उनके गाल पर एक कीड़ा बैठ गया था, जिसे वो हटा रहे थे। ठीक इसी बीच किसी ने यह फ़ोटो खींच ली और सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। विधायक शर्फुद्दीन के इस तर्क में कोई दम नहीं है क्योंकि यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है कि एक कीड़े की वजह से उन्होंने तिरंगे की शान में यह गुस्ताखी की, वो भी बाएँ हाथ से! लेकिन जेडीयू अपने इस विधायक के बचाव में पूरी तैयारी के साथ खड़ी है।

जेडीयू विधायक का तर्क, गाल पर बैठ गया था कीड़ा (तस्वीर आभार: दैनिक जागरण)

यह कहना ग़लत नहीं होगा कि नेताओं की इस तरह की हरक़त किसी भी तरह से क्षम्य नहीं है। राजनीतिक पार्टी ऐसे नेताओं के बचाव में इसलिए भी उतरती है क्योंकि वो अपने दामन में किसी की तरह का दाग लेना पसंद नहीं करती।

किसी पार्टी का अपने नेता के बचाव में उतरना तो एक हद तक समझ में आता है, लेकिन आश्चर्य तब होता है जब कोई न्यूज़ चैनल ऐसी हरक़त पर नेता का बचाव करता दिखता है। ऐसा ही कुछ NDTV ने भी किया है, जिसे देखकर लगता है कि जैसे इस विधायक को उसने अपनी ख़बर के ज़रिए एक तरह का सुरक्षा कवच प्रदान करने की कोशिश की हो।

दरअसल, हर मीडिया हाउस की ही तरह NDTV ने भी इस ख़बर का उल्लेख किया, लेकिन कुछ इस तरह जैसे विधायक के तर्क से वो पूरी तरह संतुष्ट हों। पहली बात तो यह कि NDTV ने विधायक की वो फ़ोटो ही नहीं लगाई जिसमें वो तिरंगे के समक्ष ऐसी ओछी हरक़त करते दिखे। दूसरी बात यह कि विधायक शर्फुद्दीन के कहे अनुसार उनके गाल पर एक कीड़ा बैठा था, जिसे वो हटा रहे थे। तो NDTV को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए थी कि विधायक के बाएँ गाल पर कीड़ा बैठा था न कि दाएँ गाल पर। जहाँ तक सवाल सलामी दिए जाने को लेकर है तो वो दाएँ हाथ से दी जाती है न कि बाएँ हाथ से।

NDTV ने अपनी ख़बर में नहीं लगाई जेडीयू विधायक की वायरल फ़ोटो

इस ख़बर से NDTV ने अपनी ‘ओछी’ पत्रकारिता का स्पष्ट प्रमाण दे डाला कि संवेदनशील मुद्दों के साथ खिलवाड़ कर कैसे वो अपने पाठकों और दर्शकों को ठगने का काम करता है।

AAP के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा BJP में शामिल, केजरीवाल सरकार पर लगा चुके हैं कई आरोप

आम आदमी पार्टी (AAP) के बागी और अयोग्य करार दिए जा चुके विधायक कपिल मिश्रा भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। कपिल मिश्रा ने दिल्ली में भाजपा नेता मनोज तिवारी और विजय गोयल की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। बता दें कि कपिल मिश्रा ने शुक्रवार (अगस्त 16, 2019) को ही ट्वीट कर इस बात की जानकारी दे दी थी कि वो बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं। उन्होंने ट्वीट कर लिखा था कि वो शनिवार (अगस्त 17, 2019) को 11 बजे बीजेपी में शामिल होंगे।

गौरतलब है कि कपिल मिश्रा कई बार आम आदमी पार्टी का विरोध करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं और लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अभियान चलाने की वजह से पार्टी ने कपिल मिश्रा की विधानसभा की सदस्यता रद्द कर दी थी। करावल नगर से विधायक रहे कपिल मिश्रा ने लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली की सातों संसदीय सीटों पर भाजपा के समर्थन में अभियान चलाया था। AAP विधायक सौरभ भारद्वाज ने इसकी शिकायत विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल से की थी। इसकी सुनवाई करते हुए बीते दिनों विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी थी।

हालाँकि, इसके खिलाफ कपिल मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। कोर्ट में कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष महोदय ने ‘लॉ ऑफ नेचुरल जस्टिस’ के खिलाफ जाकर निर्णय सुनाया। एक असंवैधानिक याचिका पर सुनवाई करके अध्यक्ष ने अपनी संवैधानिक शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया।

AAP से निकाले जाने के बाद कपिल मिश्रा ने केजरीवाल सरकार के खिलाफ मोर्चा शुरू किया था। साथ ही केजरीवाल सरकार पर भ्रष्टचार समेत कई गंभीर आरोप लगाए थे। केजरीवाल के खिलाफ गाने बनाए और सोशल मीडिया के जरिए तमाम चीजें ट्वीट भी की थीं। इसके अलावा उन्होंने केजरीवाल के खिलाफ धरना भी दिया था।

लखनऊ का मुख्य चौराहा हजरतगंज को अब अटल चौक कहिए जनाब, बदल गया है नाम

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मुख्य चौराहे हजरतगंज को अब अटल चौक के नाम से जाना जाएगा। शहर की महापौर संयुक्ता भाटिया ने भारत रत्न व देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रथम पुण्यतिथि पर इसकी आधिकारिक घोषणा की। महापौर ने बताया कि हजरतगंज चौराहे का नाम पूर्व प्रधानमंत्री और लखनऊ से सांसद रह चुके अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर कर दिया गया है। अब इसे अटल चौक के नाम से जाना जाएगा।

उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद से ही चर्चा चल रही थी कि उनके नाम पर सड़कों और चौराहों का नामकरण किया जाएगा, और उसी के तहत हजरतगंज चौराहे का नाम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर किया गया है।

महापौर ने कहा कि इससे आने वाली पीढ़ी अटल बिहारी वाजपेयी के व्यवहार और कर्तव्यों के बारे में जान सकेगी और उनके विचारों से प्रेरणा ले सकेगी। इसके अलावा, इस्माईलगंज स्थित नगर निगम डिग्री कॉलेज भी अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने बताया, “पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर जरहरा स्थित नगर निगम की पाँच हेक्टेयर जमीन पर ‘अटल उदय वन’ बनाने के लिए एचसीएल फाउंडेशन के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ है।”

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि पर शुक्रवार (अगस्त 16, 2019) को लोकभवन में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित समेत कई बड़े नेता शामिल हुए। सीएम योगी ने 25 दिसंबर को लोकभवन में अटल बिहारी वाजपेयी की 25 फुट की प्रतिमा का लोकार्पण करने की भी घोषणा की है।

‘बराए मेहरबानी कोई भी नमाज़ी मस्जिद के बाहर सड़क पर नमाज़ न पढ़ें’

उत्तर प्रदेश के मेरठ में एसएसपी अजय साहनी के सड़क पर नमाज़ नहीं अता किए जाने के आदेश की सराहना पूरे प्रदेश में हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीजीपी ओपी सिंह ने मेरठ में एसएसपी के इस फ़ैसले को सराहनीय बताया। साथ ही अन्य ज़िलों के आला अधिकारी भी इस फ़ैसले को अमल पर लाने का विचार कर रहे हैं। इस संदर्भ में डीजीपी ने सभी पुलिस कप्तानों को आदेश दिए हैं कि वे भी अपने ज़िलों में सड़क पर नमाज़ अदा न होने दें।

यूपी पुलिस की इस नायाब पहल के बाद मेरठ में जिन मस्जिदों के बाहर नमाज अता होती थी, वहाँ दूसरे जुमे को भी सड़क पर नमाज़ अदा नहीं की गई। इसके लिए प्रशासनिक तौर पर ऐसी व्यवस्था की गई थी कि जुमे की नमाज़ के वक़्त यातायात प्रभावित न हो सके। इसी के मद्देनज़र मस्जिदों में इंतेजामिया कमिटि ने प्रशासन का सहयोग करते हुए सभी नमाज़ियों से सड़क पर नमाज़ न अता करने की अपील की। इसके लिए उन्होंने जगह-जगह बैनर भी लगाए।

आमतौर पर यह देखा गया है कि जुमे की नमाज़ के लिए मस्जिद के अंदर जगह कम पड़ जाती है, जिससे नमाज़ियों को सड़क पर नमाज़ अता करनी पड़ती है। सड़क पर नमाज़ अता करने से यातायात तो बाधित होता ही है, साथ में पैदल आने-जाने वाले लोगों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इन सब को ध्यान में रखते हुए एसएसपी अजय साहनी ने उलेमाओं से मिलकर सड़क पर नमाज़ अता न करने का आग्रह किया था। दोनों के बीच सहमति बन जाने पर तय हुआ कि सड़क पर नमाज़ अता नहीं की जाएगी।

ख़बर के अनुसार, 9 अगस्त को काली सड़क छोड़कर फुटपाथ वाले हिस्से के बाहर नमाज़ अता की गई। इससे न तो यातायात प्रभावित हुआ और न पैदल यात्रियों के आने-जाने में कोई दिक्कत हुई। दूसरे जुमे (16 अगस्त) को भी यही व्यवस्था बनी रही। मुख्य हापुड़ मार्ग की इमलियान मस्जिद के बाहर नमाज़ के वक़्त काली सड़क को खाली छोड़ दिया गया था और फुटपाथ पर रस्सी लगाकर मस्जिद के बाहर नमाज़ अता करने की व्यवस्था की गई थी।

इसके अलावा मेरठ की भवानी नगर मस्जिद में इंतजामिया कमिटी की ओर से बैनर लगाकर सड़क पर नमाज़ अता न करने की अपील भी की गई।

360 करोड़ का रिकॉर्ड बनाया Man vs Wild ने, PM मोदी का शो बना दुनिया का सबसे अधिक ट्रेंडिग TV शो

डिस्कवरी चैनल पर आने वाले शो मैन वर्सेज वाइल्ड ने सुपर बाउल को पीछे छोड़ दिया है। और ये सब उस एपिसोड के पर हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैन वर्सेज वाइल्ड शो में बेयर ग्रिल्स के साथ हिस्सा लिया। रिकॉर्ड की बात करें तो अब तक इस शो को लेकर 3.6 बिलियन (360 करोड़) लोग चर्चा कर चुके हैं और यह लगातार जारी है। इस तरह इस शो ने सुपर बाउल शो को पीछे छोड़ दिया, जिसकी रेटिंग 3.4 बिलियन थी।

नेटजिओ पर वाइल्ड शो और नेटफ्लिक्स पर यू वर्सेज वाइल्ड शो के ईपी और को-क्रिएटर डेलबर्ट शूपमैन ने ट्वीट करके इस उपलब्धि के बारे में बताया।

प्रधानमंत्री के इस शो में आने से ये शो न केवल भाारत में बल्कि दुनिया भर में सबसे ज्यादा ट्रेंडिंग टीवी शो बन गया है। गौरतलब है कि ये शो 12 अगस्त को डिस्कवरी चैनल पर प्रसारित हुआ था और फिर दूरदर्शन द्वारा भी प्रसारित किया गया था। मैन वर्सेज वाइल्ड शो की मेजबानी करने वाले बेयर ग्रिल्स ने भी शूपमैन के ट्वीट को रीट्वीट किया और इस उपलब्धि पर खुद को गौरवांवित महसूस करते हुए अपनी टीम का शुक्रिया अदा किया। 

जब पीएम मोदी ने मैन बनाम वाइल्ड शो में हिस्सा लिया, तो कई लोगों ने #PMModiOnDiscovery को ट्रेंड कराना शुरू किया और ग्लोबल मीडिया इंटेलीजेंस फर्म मेल्टवाटर के आँकड़ों के अनुसार, इस संबंध में पहला ट्वीट करने के 12 घंटे से भी कम समय में #PMModiOnDiscovery ने 206.2 हजार से अधिक यूजर द्वारा 204.2 हजार बार जिक्र किया गया और इस तरह इसने 728 मिलियन लोगों तक पहुँच बनाई।

जब शो में पीएम मोदी के भाग लेने की बात सामने आई थी, तो वामपंथियों ने प्रधानमंत्री को नीचा दिखाने की कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उन्होंने तो झूठी मनगढ़ंत कहानी गढ़ते हुए यहाँ तक कह दिया था कि पुलवामा हमले के समय पीएम मोदी इसी शो की शूटिंग करने में व्यस्त थे। साथ ही वामपंथियों ने एक झूठे और एडिटेड वीडियो को ट्वीट करते हुए पीएम मोदी को जलवायु परिवर्तन से वंचित (climate change denier) बताया था।