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‘मंदिर तोड़ने वालों को वेद बॉंटने और कावड़ लाने का आदेश सुनाओ’

ऋचा भारती को कुरान बाँटने की शर्त पर जमानत देने का मामला तूल पकड़ते जा रहा है। अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाली साध्वी प्राची ने कहा है कि इस फैसले से ऐसा लगता है जैसे फतवा जारी किया गया हो।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कहा कि यदि जज ऋचा भारती को कुरान बाँटने का फैसला सुना सकते हैं तो जिन लोगों ने दिल्ली समेत कई राज्यों में मंदिर तोड़ने का काम किया है, उन्हें राम नाम का पटका गले में डाल कर कावड़ लाने का आदेश भी सुनाया जाए।

उन्होंने कहा कि ऋचा भारती के मामले में जैसा आदेश दिया गया उससे लगता है कि यह फैसला हिन्दुस्तान में नहीं बल्कि सीरिया में सुनाया गया हो। ऐसा लगता है कि हिन्दुस्तान में देश विरोधी गैंग सक्रिय हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि शांति चाहिए और शांति के लिए इस तरह के फैसले का हवाला दिया जा रहा हो तो जज को कुरान के बजाए वेद बॉंटने का आदेश देना चाहिए था।

कांवड़ लाने पर वाले समुदाय विशेष की आस्था पर सवाल उठाते हुए साध्वी ने कहा कि यह महज दिखावा होता है। यदि जज किसी समुदाय विशेष को कांवड़ लाने का आदेश दे तो वह इसे कभी नहीं मानेंगे। उनके फैसले को साजिश करार दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर मंगलवार (जुलाई 17, 2019) को राँची की एक अदालत ने ग्रेजुएशन की छात्रा ऋचा भारती को कुरान बाँटने की शर्त पर जमानत दी थी। ऋचा ने इस फैसले को मानने से इनकार किया है। इसके बाद से सोशल मीडिया में इस मसले पर बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग जहॉं ऋचा के स्टैंड की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ लोग जज के फैसले का बचाव।

रामायण पढ़ने पर जाकिर और समीर ने दिलशेर को पीटा, दोनों को मिली बिना शर्त जमानत

आपको याद होगा कि अलीगढ़ के शाहजमल क्षेत्र से मुस्लिम व्यक्ति के साथ मार-पिटाई का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया था। खबर के अनुसार, यहाँ 55 साल के मुस्लिम व्यक्ति को उसके समुदाय के कुछ युवकों ने घर में घुसकर सिर्फ़ इसलिए पीटा था क्योंकि वह अपने घर में बैठकर हिंदुओं की धार्मिक पुस्तक ‘रामायण’ और ‘गीता’ पढ़ रहा था। ताज़ा सूचना के अनुसार, दोनों ही आरोपितों को अदालत द्वारा बिना शर्त जमानत दे दी गई है।

इस घटना के बारे में स्थानीय पुलिस का कहना था कि दिलशेर नाम का मुस्लिम व्यक्ति एक फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता है। गुरुवार (जुलाई 4, 2019) की सुबह 9 बजे वह अपने काम से लौटने के बाद घर पर बैठकर गीता पढ़ रहा था कि तभी समीर, जाकिर और कुछ अन्य युवक घर में घुसे और दिलशेर से मारपीट करने लगे। इसके बाद उन युवकों ने दिलशेर से ‘गीता’ और ‘रामायण’ छीनी और अपने साथ ले गए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये बातें भी पता चलीं कि समीर और जाकिर ने धार्मिक ग्रंथों को फाड़ने की भी कोशिश की। दिलशेर ने बमुश्किल उन लोगों से अपनी और परिवार की जान बचाई थी। कट्टरपंथी हमलावर जाते-जाते आगे से गीता-रामायण न पढ़ने की चेतावनी देते हुए, जान से मारने की धमकी देकर भी गए थे।

दिलशेर के मुताबिक वह इन हिन्दू धर्म ग्रंथों को पिछले 38 साल से पढ़ रहें है। वह कहते हैं, “मैं एक मुस्लिम हूँ लेकिन मेरा मजहब मुझे दूसरे धर्मों की कोई और पाक किताब पढ़ने से नहीं रोकता।

एसपी सिटी अभिषेक ने आश्वासन दिया था कि मामले की जाँच चल रही है और आरोपितों के ख़िलाफ़ जल्द ही कार्रवाई होगी। इस मामले में आरोपित जाकिर, समीर समेत अज्ञात युवकों के ख़िलाफ़ आईपीसी धारा 298 (धार्मिक भावनाएँ आहत करना), 323 (मार-पीट और चोट पहुँचाना), 452 (गलत इरादों से घर में घुसपैठ), 504 (शांतिभंग की कोशिश) और 506 (आपराधिक कृत्य) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया था।

लड़कियॉं मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करेंगी तो लड़के खुद सुधर जाएँगे: कॉन्ग्रेस विधायक

गुजरात में ठाकोर समुदाय के एक तुगलकी फरमान का कॉन्ग्रेस विधायक जेनीबेन ठाकोर ने समर्थन किया है। इस फरमान के मुताबिक अविवाहित लड़कियों द्वारा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने पर उनके मॉं-बाप पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। जेनीबेन ने इसका समर्थन करते हुए कहा है कि इस पाबंदी से लड़के अपने-आप सुधर जाएँगे। उन्होंने अंतरजातीय विवाह पर रोक का भी समर्थन किया है।

क्षत्रिय ठाकोर समुदाय ने बनासकांठा जिले के जिगोल गॉंव में 14 जुलाई को हुई बैठक में यह फरमान जारी किया था। बैठक में तय किया गया कि इस फैसले को नहीं मानना अपराध होगा और ऐसा करने वाली लड़कियों के मॉं-बाप पर जुर्माना लगाया जाएगा।

हालॉंकि बैठक में पारित किए गए प्रस्ताव में कानूनी पचड़े से बचने के लिए ‘अंतरजातीय विवाह’ को लेकर बेहद सरल शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें कहा गया है,“ जो लड़की समुदाय को नीचा दिखाएगी,उसकी जिम्मेदारी उसके परिवार और माता-पिता की होगी। उन पर 1.5 लाख रुपए जुर्माना लगाया जाएगा।”

जेनीबेन ने इसका समर्थन करते हुए कहा है कि लड़कियॉं अपने मॉं-बाप के साथ रहती हैं, इसलिए आसानी से उन पर पाबंदी लगाई जा सकती है।

वैसे, यह पहला मौका नहीं जब जेनीबेन ने विवादित बयान दिया है। पिछले साल किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने उनकी दुर्दशा के लिए भाजपा नेताओं की हत्या की बात कही थी।

कुरान बाँटने वाला आदेश सही, ऋचा को इस्लाम समझने का मौक़ा मिलेगा: एडवोकेट जनरल, झारखण्ड

सोशल मीडिया पर ऋचा भारती द्वारा की गई ‘आपत्तिजनक टिप्पणी’ को लेकर राँची की अदालत ने उन्हें अजीबोगरीब शर्त लगा कर जमानत दी। अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि ऋचा को 15 दिनों के भीतर कुरानशरीफ की पाँच प्रतियाँ बाँटनी होंगी। ऋचा ने इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि आज अदालत उन्हें कुरान बाँटने को कह रही है, कल को इस्लाम मज़हब अपनाने को भी कहा जा सकता है। ऋचा ने पूछा कि क्या कभी किसी अदालत ने किसी आरोपित को रामायण या भगवद्गीता बाँटने को कहा है?

अब झारखण्ड के एडवोकेट जनरल ने राँची अदालत के जज मनीष कुमार सिंह द्वारा सुनाए गए निर्णय का स्वागत किया है। एडवोकेट जनरल अजित कुमार ने कहा कि अदालत ने जो निर्णय दिया है और जो भी लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें इस आदेश के पीछे का औचित्य समझने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक समरसता को बनाए रखना लोगों की जिम्मेदारी है, इसीलिए कोर्ट का कुरान बाँटने वाला आदेश बिलकुल सही है। एडवोकेट जनरल अजीत कुमार ने कहा कि अदालत के इस आदेश के बाद ऋचा को इस्लाम के बारे में बहुत कुछ समझने को मिलेगा।

अजीत कुमार ने कहा कि इससे ऋचा को अच्छा सबक सीखने को मिलेगा और वह भविष्य में कभी आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं करेंगी। उधर ऋचा हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं और हिन्दू संगठनों के नेता लगातार उनके घर पहुँच रहे हैं। ऋचा का कहना है कि उन्होंने तो कोई टिप्पणी भी नहीं की थी बल्कि किसी और का पोस्ट शेयर किया था। ऋचा की दलील है कि वह पोस्ट रोहिंग्या को लेकर था ण कि भारत में रह रहे समुदाय विशेष को लेकर।

टाइम्स नाउ से बात करते हुए एडवोकेट जनरल ने कहा कि अदालत का निर्णय भारतीय क़ानून के मुताबिक है। उधर राँची के कई वकील ने भी जस्टिस मनीष कुमार सिंह के इस निर्णय के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। राँची विमंस कॉलेज में तृतीय वर्ष की छात्रा ऋचा को पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी का भी साथ मिला है।

उत्तराखंड के 3 युवकों पर गुरुग्राम में ‘जानलेवा’ हमला: 2 की मौत, एक की हालत गंभीर

नौकरी के लिए उत्तराखंड से गुरुग्राम आए 3 लड़कों के साथ गंभीर मारपीट की घटना सामने आई है। इस कथित जानलेवा हमले में 2 युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य एक युवक गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है।

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से तीन लड़के दिल्ली में रोजगार के उद्देश्य से आए थे। वो एक होटल में काम भी कर रहे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, 14 जुलाई की रात उन पर जानलेवा हमला हुआ है। इस हमले में 2 युवकों की मौत हो गई और एक युवक गंभीर रूप से घायल है।

इस प्रकरण पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से बातचीत करते हुए मामले की जाँच करने और आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है।

सोशल मीडिया पर ये खबर तेजी से फैल रही है और बताया जा रहा है कि घटना के बाद से गुरुग्राम के उद्योग विहार फेज-1, डुंडाहेड़ा थाने में उत्तराखंड के कई लोग मौजूद हैं। हँगामा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। लोगों का आरोप है कि तीनों लड़कों पर जानलेवा हमला किया गया है और पुलिस इस मामले को एक्सीडेंट का केस बताकर टालने का प्रयास कर रही है।

कथित हमले को लेकर मृतक युवकों के गाँव में शोक व्याप्त है। गुरुग्राम पुलिस के मुताबिक, पौड़ी गढ़वाल के कुठ गाँव निवासी रमेश सिंह (23 वर्ष), कठूड़ गाँव निवासी वीर सिंह (22 वर्ष) और सलोन गाँव निवासी नरेंद्र सिंह गुरुग्राम में एमजीएफ मॉल स्थित एंपायर क्लब में बतौर कुक की नौकरी करते थे। सोमवार सुबह तीनों युवक सरहौल बॉर्डर के पास से गुजर रहे थे, तभी किसी तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। दुर्घटना में रमेश सिंह और वीर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई जबकि नरेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया। हालाँकि, मृतकों के परिजनों का कहना है कि पुलिस इसे सड़क हादसे का नाम देकर टालने का प्रयास कर रही है।

वहीं, उत्तराखंड के समाजसेवी रोशन रतूड़ी का कहना है, “होटल में काम करने वाले तीनों लड़के 14 जुलाई रात को काम ख़त्म करने के बाद अपने कमरे पर जा रहे थे। तभी उन पर अचानक हमला किया गया, जिसमें से दो उतराखंडी भाईयों की दर्दनाक मौत हो गई है, और एक भाई अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। तीनों लड़के पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले हैं।”

“हाफिज सईद की गिरफ्तारी पर दुनिया को मूर्ख बना रहा है पाकिस्तान”

पाकिस्तान ने 26/11 हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को गिरफ्तार करने का दावा किया है। 26/11 मामले के पब्लिक प्रोसिक्यूटर उज्जवल निकम ने इसे पाकिस्तान की नौटंकी करार देते हुए कहा है कि हाफिज की गिरफ्तारी पर वह दुनिया को मूर्ख बना रहा है।

लश्कर-ए-तय्यबा का संस्थापक हाफिज जमात-उद-दावा का भी सरगना है। वह फलाह-ए-इंसानियत नाम से भी एक संगठन चलाता है। मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी।

निकम का कहना है, “अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण पाकिस्तान दुनिया को धोखा दे रहा है। देखना होगा पाकिस्तान हाफिज के खिलाफ कोर्ट में कितना सबूत करता है और उसे कितनी सजा होगी। नहीं तो मैं इसे एक ड्रामा ही कहूंगा।”

पीटीआई ने पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि हाफिज को बुधवार को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के आतंकरोधी विभाग ने गिरफ्तार किया। एक आतंकरोधी कोर्ट के सामने पेश होने के लिए लाहौर से गुजरांवाला जाते वक्त उसकी गिरफ्तारी हुई। न्यायिक हिरासत में उसे कड़ी सुरक्षा वाले कोट लखपत जेल में रखा गया है।

हाफिज और उसके 12 साथियों पर इसी महीने आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने को लेकर मामला दर्ज किया गया था। उसके खिलाफ पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़े करीब 23 मामले दर्ज हैं। हालॉंकि पाकिस्तान के अतीत को देखते हुए उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान ने पहले भी हाफिज को गिरफ्तार किया है। लेकिन, कभी अदालत में उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए। नतीजतन, उसे हर बार जमानत मिल जाती है।

अमेरिका के वैश्विक आतंकी सूची में शामिल हाफिज पर एक करोड़ डॉलर का इनाम है। अमेरिका ने उसे 2012 में इस सूची में शामिल किया था। माना जा रहा है कि उसके खिलाफ ताजा कार्रवाई पाकिस्तान ने अपनी दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए की है। पाकिस्तान पर फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स से ब्लैक लिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है।

दूसरे समुदाय के वकीलों ने भी ऋचा भारती पर ‘कुरान जजमेंट’ को बताया आश्चर्यजनक, तबादले तक जज का बहिष्कार

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर चल रहे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। मंगलवार (जुलाई 17, 2019) को राँची की एक अदालत द्वारा ग्रैजुएशन की छात्रा ऋचा भारती को कुरान बाँटने की शर्त पर जमानत देने का मामला सामने आया था। लेकिन अदालत के इस फैसले के खिलाफ अब राँची जिला बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से जज मनीष कुमार सिंह की कोर्ट का बहिष्कार करने का फैसला लिया है।

राँची जिला बार एसोसिएशन यह फैसला सुनाने वाले जज मनीष सिंह के कुरान बाँटने के निर्णय से नाराज है। बार एसोसिएशन ने कहा है कि वो किसी भी तरह की न्यायिक प्रक्रिया का तब तक बहिष्कार करेंगे जब तक मनीष कुमार का तबादला नहीं हो जाता है।

अदालत के निर्णय से नाराज बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं से ज्यूडिशियल कमिश्नर ने 48 घंटे का समय माँगा है। इसमें यह भी माँग की गई है कि यदि 48 घंटे बाद भी यह शर्त थोपने वाले जज मनीष सिंह का तबादला नहीं होता है तो वो अनिश्चितकालीन बहिष्कार करेंगे।

बहिष्कार कर रहे कुंदन प्रकाशन (महासचिव जिला बार एसोसिएशन) का कहना है कि अदालत की ऐसी बेतुकी शर्त से सामाजिक समरसता भंग हो रही है। यदि ऐसे आदमी को नेतागिरी करनी है तो उन्हें त्यागपत्र देकर राजनीति में जाना चाहिए। साथ ही बहिष्कार कर रहे वकीलों का कहना है कि उन्होंने अदालत द्वारा इस प्रकार का निर्णय कभी नहीं सुना है और यह निंदनीय है।

नाराज अधिवक्ताओं का कहना है कि कुरान बाँटने की शर्त लगाने वाले मनीष कुमार सिंह की अदालत से हम अधिवक्ताओं के साथ शुरू से ही इस प्रकार का दुर्व्यवहार किया गया है, जिसके बारे में हम पहले भी शिकायत कर चुके हैं। लेकिन शिकायतकर्ता अधिवक्ता से बदला लेने के लिए मनीष कुमार सिंह ने अपने कोर्ट का इस्तेमाल किया। महासचिव ने यह भी कहा कि जो निर्णय आज उन्होंने दिया है वह मौलिक अधिकारों के हनन का मामला है। कोई भी किसी भी धर्म को मानने और उसके प्रचार-प्रसार के लिए बाध्य नहीं कर सकता है।

बहिष्कार कर रहे वकीलों ने कहा –

“एक बच्ची ने फॉरवर्ड किए गए सन्देश में सिर्फ यह कहा है कि हम पर भी कई इल्जाम लगते हैं लेकिन हम आतंकवादी नहीं बनते हैं। यह तो संज्ञान लेने लायक बात भी नहीं थी। हमें बच्ची को अरेस्ट करने वाले लोगों पर आश्चर्य हो रहा है। अंजुमन इस्लामिया के लोगों को एक बच्ची पर, जिसे धर्म की ठीक से समझ तक नहीं है, इस प्रकार का आरोप लगाने से पहले सोचना चाहिए था। आपने नोटिस देने तक का काम नहीं किया है। हमें कल्पना करनी चाहिए कि उस बच्ची के दिमाग में इस समय क्या चल रहा होगा? अदालत के निर्णय को समाज किस तरह से देख रहा है हमें देखना चाहिए। एक अधिवक्ता काला कोट पहनने के बाद हिन्दू और मुस्लिम नहीं होता है। इस फैसले को लेकर हिन्दू ही नहीं बल्कि कई मुस्लिम अधिवक्ताओं तक ने कुरान बाँटने के इस फैसले पर आश्चर्य व्यक्त किया है और कहा कि इस प्रकार की शर्त कोई न्यायालय कैसे रख सकता है?

जमानत के लिए बाँटनी होगी कुरान

दरअसल, न्यायधीश मनीष सिंह की अदालत ने ऋचा भारती को कुरान बाँटने की शर्त पर जमानत दी है। ऋचा पर आरोप है कि उन्होंने फेसबुक पर सांप्रदायिक (लेकिन आपत्तिजनक) पोस्‍ट किया था। इस संबंध में अंजुमन कमिटी ने पोस्ट को आपत्तिजनक और धार्मिक भावना को आहत करने वाला बताते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज कराया था।

इसके बाद सशर्त जमानत देते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऋचा को विभिन्‍न संस्‍थाओं को कुरान की 5 प्रतियाँ बाँटनी होंगी। न्‍यायिक मैजिस्‍ट्रेट मनीष सिंह ने ऋचा को निर्देश दिया कि वह कुरान की एक कॉपी अंजुमन कमिटी और 4 अन्‍य कापियाँ विभिन्‍न स्‍कूलों और कॉलेजों को बाँटेंगी। साथ ही उसकी रशीद लेनी होगी। कोर्ट ने इसके लिए ऋचा को 15 दिनों का समय दिया है।

कर्नाटक: कॉन्ग्रेस-जदएस सरकार की बलि लेकर ही मानेंगे बागी, कुमारस्वामी ने साधी चुप्पी

कर्नाटक की 14 महीने पुरानी कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार का गिरना करीब-करीब तय हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुंबई में डटे बागी विधायकों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे गुरुवार को विधानसभा सत्र में हिस्सा नहीं लेंगे। कल एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार के विश्वास मत पर मतदान होना है। मुख्यमंत्री ने पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साध ली है, जबकि कॉन्ग्रेस नेता और राज्य सरकार में मंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि पार्टी ह्विप जारी करेगी और दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई करेगी।

इससे पहले 15 बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन विधायकों को सदन की कार्रवाई में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। साथ ही इन पर पार्टी का ह्विप भी लागू नहीं होगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष नियमों के मुताबिक अपना फैसला देने को स्वतंत्र हैं। पीठ ने यह भी कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को तय समय सीमा के भीतर फैसला लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने कहा है कि वे शीर्ष अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं और संवैधानिक अधिकारों के दायरे में फैसला करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा नेता जगदीश शेट्टार ने कहा है कि कुमारस्वामी के कारण राज्य में अराजकता की स्थिति पैदा हो गई और उन्हें समय गॅंवाए बिना इस्तीफा दे देना चाहिए। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने इस फैसले को बागी विधायकों की नैतिक जीत बताते हुए कहा है कि सरकार बहुमत खो चुकी है और कुमारस्वामी को इस्तीफा दे देना चाहिए।

बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष पर जान-बूझकर उनके इस्तीफे पर फैसला नहीं करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

225 सदस्यीय विधानसभा में कॉन्ग्रेस के 79, जदएस के 37, बीजेपी के 105, दो निर्दलीय, एक बीएसपी का विधायक है। इनमें से कॉन्ग्रेस के 13 और जदएस के तीन विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। यदि बागी विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया जाता है या उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है या फिर वे विश्वासमत में भाग नहीं लेते हैं तो बहुमत के लिए 105 सदस्यों के सम​र्थन की जरूरत होगी। इस सूरत में सरकार के पास विधानसभा अध्यक्ष और बसपा विधायक समेत 101 सदस्यों का ही समर्थन होगा। एकमात्र मनोनीत सदस्य मतदान नहीं कर सकते और निर्दलीय विधायक पहले ही भाजपा को समर्थन देने की बात कह चुके हैं। ऐसे में सरकार बचाने के लिए कॉन्ग्रेस-जदएस को या तो बागी विधायकों में से कम से कम छह को विश्वासमत के दौरान पक्ष में मतदान करने के लिए मनाना होगा या फिर बीजेपी के खेमे में सेंधमारी करनी होगी।

अंडा-चिकेन को शाकाहारी घोषित किया जाए, मुर्गियाँ देती हैं आयुर्वेदिक अंडा: शिवसेना सांसद

शिवसेना सांसद संजय राउत ने अंडा और चिकेन को शाकाहारी घोषित किए जाने की माँग की है। ये बात उन्होंने राज्यसभा में आयुर्वेद पर हो रही बहस के दौरान कही। राज्यसभा में बैठे अन्य सांसदों ने भी आयुष मंत्रालय को इस बात पर विचार करने की सलाह दी कि चिकेन शाकाहारी है या नहीं? वहीं, अमर सिंह ने राउत की दलीलों को कुतर्क करार दिया। शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे के क़रीबी राउत ने कहा:

“मैं एक बार नंदुरबार क्षेत्र के एक छोटे से कस्बे में गया। वहाँ आदिवासी लोग हमारे लिए भोजन लेकर आए। जब मैंने पूछा कि खाने में क्या है तो उन्होंने बताया कि यह ‘आयुर्वेदिक चिकेन’ है। आदिवासियों ने बताया कि इसे इस तरह से पकाया गया है कि इसे खाने से बीमारियाँ भी दूर हो जाती हैं।”

राउत ने दावा किया कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ लोग आयुर्वेदिक अंडे पर रिसर्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा उन्हें ख़ुद शोध कर रहे लोगों ने ही बताया है। शिवसेना मुखपत्र दैनिक सामना के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत ने रिसर्चर्स के हवाले से कहा कि सिर्फ वही मुर्गियाँ आयुर्वेदिक अंडे देती हैं, जिन्हें केवल आयुर्वेदिक खाद्य पदार्थ खाने को दिए जाएँ। उन्होंने कहा कि लोग अपने शरीर में प्रोटीन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए उन आयुर्वेदिक अण्डों को खा सकते हैं।

संजय राउत ने कहा कि अमेरिका में दूध और हल्दी से बने पेय काफ़ी लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन भारत में इसे नज़रअंदाज किया जाता है। हालाँकि, कई अन्य सांसदों ने चर्चा के दौरान गंभीर मुद्दों पर भी बात की। सांसदों ने आयुष मंत्रालय के लिए बजट बढ़ाने की माँग की ताकि हज़ारों वर्ष पुरानी आयुर्वेद परंपरा को विकसित कर लाखों-करोड़ों लोगों को लाभ पहुँचाया जा सके। संजय राउत ने आयुष मंत्रालय के लिए 10,000 करोड़ रुपए के वार्षिक बजट की माँग की।

मध्य प्रदेश: कॉलेज में अब नहीं होगी कारगिल वॉर की पढ़ाई, बचाव में गिनाए अजीब कारण

देश जब कारगिल युद्ध की 20वीं वर्षगाँठ मना रहा है, मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने पाठ्यक्रम से इस युद्ध से जुड़े चैप्टर को निकल बाहर किया है। राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने कारगिल युद्ध में भारतीय जवानों की शौर्य गाथा पर आधारित चैप्टर को सिलेबस से न सिर्फ़ हटाया है, बल्कि इस क़दम को जायज ठहराने के लिए अजीबोगरीब तर्क भी दिए जा रहे हैं।

एमवीएम साइंस कॉलेज भोपाल के सबसे पुराने और बड़े कॉलेजों में से एक है। राज्य सरकार बदलते ही इस कॉलेज के सिलेबस से कारगिल शौर्यगाथा वाला हिस्सा हटा दिया गया है। वर्ष 2018-19 के सिलेबस में कारगिल युद्ध से जुड़ा चैप्टर था, जो 2019 -20 के सिलेबस से गायब है। पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए कॉलेज ने क़रीब 20 लोगों की एक टीम बनाई थी। फैसले के बचाव में कहा जा रहा है कि कारगिल युद्ध से जुड़ी किताबें नहीं मिल रही थीं, इसीलिए यह निर्णय लिया गया

कॉलेज का कहना है कि कारगिल युद्ध पर आधारित अच्छे लेखकों की पुस्तकें नहीं हैं, जिस कारण इससे जुड़े चैप्टर को हटाना पड़ा। भाजपा ने इसका कड़ा विरोध किया है। भाजपा का कहना है कि इस युद्ध के वक़्त अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, इसलिए कॉन्ग्रेस इस युद्ध के बारे में छात्रों को शिक्षा नहीं देना चाहती है।

26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान पर विजय पाई थी। इस दिन को प्रत्येक वर्ष ‘विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस युद्ध में भारतीय सेना के सैकड़ों जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। इस युद्ध पर कई फ़िल्में भी बन चुकी हैं।