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झारखंड: महिला को निर्वस्त्र कर पीटने के मामले में 3 महिलाओं समेत 5 गिरफ़्तार

हजारीबाग में महिला को निर्वस्त्र कर पीटने के मामले में पुलिस ने 5 आरोपितों को गिरफ़्तार किया है। टाटीझरिया थाना क्षेत्र के मुरूमातू गाँव में एक विधवा को निर्वस्त्र कर पीटा गया था। सोमवार (जुलाई 15, 2019) को इस मामले में पुलिस ने 3 महिला आरोपितों सहित 5 को गिरफ़्तार किया।

ख़बरों के मुताबिक पीड़िता को निर्वस्त्र कर उसके दोनों हाथ पीछे बाँध दिए गए थे। इसके बाद उसकी पिटाई की गई। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि जान से मारने के इरादे से आरोपितों ने उसका गला भी दबाया। इस मामले में कई अन्य भी आरोपित हैं, जिनकी गिरफ़्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।

ख़बरों के अनुसार, महिला की पिटाई करने वाले उसके रिश्तेदार ही हैं। रिश्तेदारों ने यह हरकत तब की जब पीड़िता ने सौतेली बेटी की शादी में अपनी राय नहीं लिए जाने पर विरोध जताया। असल में, सौतेली बेटी का लालन-पालन पीड़िता ने ही किया था। लेकिन, उसकी शादी में अपनी अनदेखी पर जब उसने नाराजगी जताई तो उसके साथ यह घिनौनी हरकत की गई।

‘मुगलों ने हिंदुस्तान को लूटा ही नहीं, माल बाहर भी भेजा, ये रहा सबूत’

बर्बर मुगल राज का बचाव करने वाले लिबरल गैंग के पास जो आखिरी हथियार था, कि ‘कम-से-कम मुगलों ने हिंदुस्तान का धन हिंदुस्तान में ही रखा’, वह भी अब झूठा निकला है। ट्विटर पर इतिहास से जुड़े अनसुने-दफ़न तथ्य निकाल लाने के लिए (लिबरलों के बीच) ‘कुख्यात’ ट्विटर हैंडल ‘True Indology’ ने इस झूठ को बेनकाब करते हुए मुगलों के हिंदुस्तान से की हुई लूट को दूसरे इस्लामी मुल्कों में भेजने के सबूत पेश किए हैं।

‘2 लाख टन चावल जितना पैसा केवल एक साल में भेजा’

‘कैम्ब्रिज हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया’ से स्क्रीनशॉट्स लेकर True Indology मुगलों के बचाव में लिखे जा सकने वाले इस आखिरी झूठ की कलई कायदे से खोलता है। उसके तथ्य कुशासन और हिंदुस्तान की मुगलों के हाथों बर्बादी की कई परतें उघाड़ते हैं। मसलन, इकलौते एक साल 1659 में औरंगज़ेब के मक्का को 600,000 रुपए देने का ज़िक्र करते हुए True Indology उसके मायने भी समझाता है। बकौल True Indology, यह उस समय के छह लाख रुपए हैं जिस समय एक रुपए में 280 किलो चावल आता था। यानी करीब 2 लाख टन चावल खरीदे जाने भर का पैसा औरंगज़ेब ने केवल एक साल में ‘काफिर’ हिन्दुस्तानियों से लूट कर मक्का भेजा।

औरंगज़ेब इतना क्रूर शासक था कि कर न चुका पाने वाले हिंदुस्तानी खेतिहरों को पेड़ों से लटका कर मौत के घाट उतरवा देता था। और इसी औरंगज़ेब ने 6 सालों में 70 लाख रुपए हिंदुस्तान से नोंच कर मुस्लिम देशों में, अपने ‘दारुल-इस्लाम’ में भेज दिए।

Fraudrey भी पकड़ी गईं

औरंगज़ेब जैसे निर्मम शासक के प्रति विशेष अनुराग रखने के लिए जानी जाने वाली ‘विदुषी’ ऑड्रे ‘Fraudrey’ ट्रश्के के झूठों को भी True Indology ने तसल्ली से बेनकाब किया है। पहले ऑड्रे ने यह दिखाने की कोशिश की कि मुगलों ने हिंदुस्तान के हिन्दुओं को जी भर के लूटा ज़रूर, लेकिन सारा माल दबा के बैठे रहे, बाहर नहीं भेजा।

True Indology ने उन्हें आइना दिखा दिया है।

इस पर नाराज़ ऑड्रे बीबी ने True Indology को ब्लॉक कर दिया।

इसके बाद ऑड्रे ने True Indology के शब्दों को न केवल तोड़ा-मरोड़ा, बल्कि साथ में यह झूठ भी फ़ैलाने की कोशिश की कि बदले में मुगलों को भी बराबर कीमत के उपहार इस्लामी देशों से मिलते थे। इस झूठ की भी True Indology ने चिन्दियाँ बिखेर दीं। सोने, हीरे और हिन्दुस्तानियों के, हिन्दुओं के लाखों-करोड़ों रुपयों के बदले विदेशी इस्लामी शासकों ने क्या भेजा? काबा की ज़मीन बुहारने के लिए इस्तेमाल हुई झाड़ू। स्वरा भास्कर, ऑड्रे, ‘Chirpy Says’ आदि का लिबरल गैंग बताएगा कि इससे उन हिन्दुओं को क्या फायदा हुआ जिनका पैसा लूट कर इस्लाम के पैरोकार देशों में भेजा गया, जो इस पैसे को देने वाले हिन्दुओं को काफिर होने के नाते काबिले-कत्ल मानते थे।

‘हिन्दू’ और ‘इनटॉलेरेंस’ का रोना रोने वालों, पहले दलितों को बाल कटाने का अधिकार तो दिला दो

मैं आज ही डॉ. अंबेदकर पर वैज्ञानिक-लेखक आनंद रंगनाथन का लगभग एक वर्ष पुराना वक्तव्य सुन रहा था, जिसमें एक विषय अंबेदकर द्वारा हिंदुत्व/हिन्दू-धर्म की आलोचना का भी था। और एक घंटे से भी कम समय बाद मैं यह खबर पढ़ रहा हूँ कि मुरादाबाद के समुदाय विशेष के लोग नाईयों की दुकानों का बहिष्कार कर रहे हैं, जो दलितों, खासकर वाल्मीकि समाज के लोगों के बाल काटते हैं

इसके बारे में समझ नहीं आ रहा लिखना कहाँ से शुरू किया जाए? हिन्दुओं को यह याद दिला कर कि इस्लामी आक्रांताओं की तलवार के बाद दूसरा सबसे बड़ा कारण हिन्दुओं के कम होने का यही छुआछूत की परम्परा रही, जिसकी पीठ पर मिशनरी चढ़ कर आए और दलितों-आदिवासियों को एक झटके में हिन्दू-धर्म का दुश्मन बना दिया। या समुदाय विशेष को आड़े हाथों लेकर यह पूछते हुए कि उनके यहाँ तो ‘अल्लाह ने सारे इंसानों को एक जैसा बनाया है’ का चूरन बेचा जाता है, तो फिर उन्हें वाल्मीकियों के सर को छुए कंघी-उस्तरे से परहेज़ क्यों हो रहा है?

अंबेदकर को गलत साबित तो करें हिन्दू…

मैं अंबेदकर की इस राय से कतई सहमत नहीं हूँ कि यह अमानवीय छुआछूत हिंदुत्व/हिन्दू-धर्म का अभिन्न अंग है, और इससे निजात हिंदुत्व को नकार कर ही मिल सकती है। अपनी इस असहमति के पक्ष में में दस नहीं सौ उद्धरण प्रस्तुत कर सकता हूँ। लेकिन उन सौ उद्धरणों को सूचीबद्ध करने के बाद जब मैं मुरादाबाद के इस पीपलसाना गाँव की ओर नज़र डालता हूँ तो यह कवायद अपनी ही मायूसी से बचने का एक खोखला प्रयास लगती है। अंबेदकर को मैं जब चुनौती देने की कोशिश करता हूँ तो मुझे पीपलसाना के हिन्दू गलत साबित कर देते हैं।

जो लोग यह तर्क देना चाहते हैं कि समाज या व्यक्ति की गलती और उनके अन्याय को उनकी आस्था, उनके मज़हब से नहीं जोड़ा जा सकता, वे या तो अनभिज्ञ हैं या झूठे। किसी भी आस्था या पंत का अपने-आप में मूल्याँकन अपूर्ण होता है, जब तक उसमें यह न जोड़ा जाए कि व्यवहारिकता में, मानव समाज में, दैनिक जीवन में- बाल काटने में- उस मत के मतावलम्बी अपनी आस्था के चलते कैसा व्यवहार करते हैं। यहाँ छुआछूत की व्यवस्था हिन्दू समाज को उसी पायदान पर खड़ा कर देती है जिस पर मजहब विशेष वाले पर्दा, हलाला, बुरका और तीन तलाक के चलते खड़े होते हैं- इंसान से उसकी इंसानियत का, इंसान होने और इंसानों की गरिमा दिए जाने का हक छीनने वाला चाहे तीन तलाक हो, हलाला हो, या छुआछूत, वह बराबर निंद्य है, बराबर दोषी है।

कहॉं गए मौलवियों के दावे

स्वराज्य की रिपोर्ट यह भी बताती है कि बड़ी संख्या में ऐसा करने वाले समुदाय विशेष वाले भी हैं। एक अल्पसंख्यक तो ‘अछूत’ वाल्मीकियों के लिए यह भी कहता है कि अगर ‘गलती से’, ‘अनजाने में’ किसी वाल्मीकि के साथ बाल बनवा लें तो अलग बात है, लेकिन “जब चाय में मक्खी दिख जाती है, तो लोग निकाल के ही पीएंगे।” समुदाय विशेष के बारे में इतना ही कह सकता हूँ, हालाँकि इस्लाम का कोई पीएचडी नहीं हूँ, लेकिन हर मुल्ला-मौलवी को यह दावा करते ज़रूर सुना है कि उनके यहाँ अस्पृश्यता जैसा ‘हिन्दू रोग’ नहीं है। उन्हें गला फाड़ कर मस्जिदों के लाउडस्पीकरों से यह दावा करते हुए भी सुना है कि करोड़ों ‘काफिर’ ‘इस्लाम की तलवार’ की नोंक से नहीं, बल्कि उसमें जाति-प्रथा न होने के चलते इस्लाम अपनाया। तो ये अल्लाह की एक नज़र और जाति-प्रथा का अभाव केवल उम्मत के लिए बचा कर रखा गया है, या फिर काफ़िरों को भी इस जाति-विहीन दारुल-इस्लाम का ‘ट्रेलर’ दिखाया जा सकता है?

छूआछूत कैंसर, मिटाना ही होगा

आप ‘वैज्ञानिकता’, ‘हाइजीन’ से लेकर ‘यही हथियार मिशनरी इस्तेमाल करते हैं’ और ‘ये हमारी परम्परा है’ आदि इस अमानवीय प्रथा को बचाए रखने के लिए जो भी तर्क इस्तेमाल करने की कोशिश कर लें, इसका बचाव नहीं किया जा सकता है। छुआछूत हिंदुत्व में निस्संदेह कैंसर है, जिसका जड़ से इलाज करना ज़रूरी है। और यह इलाज महज़ राजनीतिक नहीं हो सकता- पूरा इलाज नैतिक, आत्मा के स्तर पर होगा। केवल छुआछूत के पीड़ितों को आरक्षण दे देने या यूपीएससी में बैठने वालों को 5-10 साल आयु सीमा में छूट दे देने से पीपरसाना के उस महेश को सम्मानजनक रूप से बाल कटाने का वह हक नहीं मिलेगा जिसका उसे इंसान होने के नाते अधिकार है।

अपनी आत्मा के अंदर झाँक कर हममें से हर एक को यह अपने आप से पूछना होगा कि अगर हम उस जगह पर होते तो हमें कैसा लगता, और हम अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते। इसका ईमानदारी से जवाब देना होगा, और फिर उस जवाब को अमलीजामा पहनाना होगा। यह हर एक इंसान को करना होगा, हर एक हिन्दू को करना होगा। अंबेदकर जैसे विचारक का हिंदुत्व/हिन्दू-धर्म से, हिन्दू समाज से विश्वास टूटना हिन्दुओं की क्षति थी। लेकिन इससे हमने नहीं सीखा। हर एक हिन्दू को, एक और अंबेदकर को हिन्दू समाज को नकारने से रोकने के लिए, छुआछूत को नकारना ही होगा।

AMU की मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले मौलाना ने 9 साल की बच्ची को बनाया हवस का शिकार

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में 9 साल की नाबालिग बच्ची को डरा-धमकाकर उसके साथ बलात्कार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी मौलवी के खिलाफ महिला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।

कुरान पढ़ाने, दीनी तालीम देने बच्ची के घर जाता था मौलवी

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मस्जिद में मोहम्मद अहमद मोज्जिन है। उस पर 9 साल की बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, मौलाना मोहम्मद अफजल नाबालिग को घर पर कुरान और उर्दू पढ़ाने जाता था। मौलाना ने मासूम को डरा धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और शिकायत करने पर बच्ची को जान से मारने की धमकी दी।

इस घटना की जानकारी परिजनों को होने पर पीड़ित बच्ची की माँ ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित मौलवी के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की और मौलवी को गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोपित मौलवी मूलत: सुल्तानपुर जिले के डेली मुबारकपुर गाँव का रहने वाला है। वह अलीगढ़ में जमालपुर गली नंबर 4 में रहता था। महिला थाना इंस्पेक्टर सुनीता मिश्रा ने बताया कि मौलवी के खिलाफ छेड़खानी, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) में मुकदमा दर्ज किया गया है।

मामले में एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि एएमयू में मोज्जिन के पद पर तैनात मौलवी द्वारा 9 साल की नाबालिग के साथ डरा धमकाकर दुष्कर्म के मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। वहीं, एएमयू मेंबर इंचार्ज साफे किदवई ने बताया कि शिकायत मिलने पर मौलाना को तत्काल पद से हटा दिया गया है और रिपोर्ट तलब की जा रही है।


कुलभूषण जाधव की सजा पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने लगाई रोक, भारत की बड़ी जीत

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने कुलभूषण जाधव मामले में भारत के पक्ष में निर्णय दिया है। अदालत ने पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव को दी गई सजा की समीक्षा करने और पुनर्विचार करने को कहा है। इसके साथ ही कुलभूषण जाधव को मिली मौत की सज़ा पर भी रोक लगा दी गई है। अदालत ने पाकिस्तान को वियना संधि के उल्लंघन का दोषी पाया है। अदालत ने कहा कि कुलभूषण जाधव को उनके अधिकारों के बारे में विवरण नहीं दिया गया। इसके अलावा अदालत ने इस बात का भी जिक्र किया कि जाधव की गिरफ़्तारी की जानकारी भारत को तुरंत नहीं दी गई।

कुलभूषण जाधव मामले में कोर्ट के निर्णय का हिस्सा

भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने जासूसी का आरोप लगा कर अपने जेल में बंद कर रखा है। मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायलय में गया और पाकिस्तान वहाँ भी इस मामले में लचर नज़र आया। यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायलय में 2 वर्ष और 2 महीने तक चला। बता दें कि पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को मौत की सज़ा सुनाई थी। कुलभूषण को पाकिस्तान की जेल में ‘अपराध कबूलने’ के लिए प्रताड़नाएँ भी दी गई थी।

पाकिस्तान ने वियना संधि का सीधा-सीधा उल्लंघन करते हुए भारत द्वारा कुलभूषण जाधव को किसी भी प्रकार का क़ानूनी मदद (काउंसलर एक्सेस) मुहैया कराने की अनुमति नहीं दी। जब कुलभूषण की माँ और पत्नी उनसे मिलने गई, तब उनके साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। मुलाक़ात के दौरान बीच में काँच की दीवार लगा दी गई थी और फिर फोन से उनकी बातचीत कराई गई। भारत ने अंतरराष्ट्रीय कोर्ट को बताया कि कैसे पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को अगवा कर जबरदस्ती बयान दिलवाया और फाँसी की सज़ा सुना दी।

बता दें कि आईसीजे (ICJ) ने कुलभूषण जाधव की सजा पर रोक लगा दी थी। जाधव को जब अगवा किया गया था, तब वह रिटायरमेंट के बाद ईरान में अपना कारोबार कर रहे थे।

अजय देवगन के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करना शख्स को पड़ा मँहगा, जज ने पूरे कानपुर में विमल बाँटने का दिया आदेश

उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक दिल दहला देने वाला प्रकरण सामने आया है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि एक शख्स को सोशल मीडिया पर अजय देवगन के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट लिखने के कारण पुलिस द्वारा अरेस्ट कर लिया गया है।

युवक पर आरोप है कि उसने यह पोस्ट लिखकर विमल (केसर वाला) खाने वालों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने और कानपुर के पान-बहार फैब्रिक को तोड़ने का काम किया है। इस मामले में स्थानीय अदालत ने तुरंत संज्ञान लेते हुए फैसला सुनाया है। अदालत ने आपत्तिजनक पोस्ट लिखने वाले उस युवक को अगले एक साल तक कानपुर के हर गली-मोहल्ले में ‘विमल’ बाँटने की सजा सुना दी है और साथ ही उसे ‘बोलो जुबाँ केसरी’ के नारे भी लगाने होंगे। देखते ही देखते यह घटना राष्ट्रीय मुद्दा बन गई और इसी बीच ट्विटर पर भी #vimal4life हैशटैग भी पहले नंबर पर ट्रेंड करने लगा।

आरोप है कि कानपुर मूल के युवक केसरी ने सिर्फ अजय देवगन के खिलाफ ही पोस्ट नहीं किया, बल्कि यह भी लिखा है कि उन्हें अजय देवगन अभिनीत राम गोपाल वर्मा की आग फिल्म पसंद नहीं है। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने वाली कमिटी ‘कानपुर- जुबाँ केसरी एकता मंच’ के प्रमुख सचिव का कहना है-

“अजय देवगन के खिलाफ पोस्ट लिखने से भी हमें विशेष शिकायत नहीं थी, यह उनकी अभिव्यक्ति के अधिकार के अंतर्गत आता है। लेकिन जब उसने पान-गुटखा खाने वालों को कानपुर छोड़कर धामपुर भेज दिए जाने की बात लिखी तो यह उनके कानपुर में रहते हुए पान खाने की स्वतंत्रता के अधिकार, अनुच्छेद 21-(क) का उल्लंघन माना जाएगा। अजय देवगन ने पान-गुटखा खाने वालों की जुबाँ केसरी कर के हमें एक करने का काम किया है और आज उनकी बदौलत विश्वस्तर पर लोग विमल खाने और इसके केसरी रंग के प्रति जागरूक हो रहे हैं।”

फेसबुक पर अजय देवगन को लेकर विवादित पोस्ट से नाराज एक पान-बहार कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि युवक ने विमल इलायची में कमियाँ निकालते हुए लिखा है कि इसमें इस्तेमाल होने वाली केसर में ‘वो’ बात नहीं है क्योंकि ये पाकिस्तान से आता है। युवक ने अपने पोस्ट में रामगोपाल वर्मा की आग और हिम्मतवाला फिल्मों में अजय देवगन की एक्टिंग को भी निशाना बनाया है। नाराज प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें पूरी पोस्ट ने उतना आहत नहीं किया था, जितना उस आखिरी लाइन ने, जिसमें की राम गोपाल वर्मा की आग फिल्म की निंदा की गई है।

हालाँकि, नाम न बताने की शर्त पर यह विवादित पोस्ट लिखने वाले बहुसंख्यक समुदाय के युवक केसरी का कहना है कि यह एक मामूली पोस्ट था और उसका मकसद किसी भी पान-गुटखा खाने वाले सज्जन की भावना को आहत करना नहीं था। केसरी ने पान-बहार एकता मंच के कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाए हैं कि उन्हें अक्सर जबरदस्ती विमल पान खाने के लिए प्रेरित किया जाता है और जबरन ‘बोलो जुबाँ केसरी’ के नारे लगवाने के लिए भी प्रेरित किया जाता है।

अदालत के फैसले पर नालसार से कानून के जानकार, प्राइम टाइम का कैमरा अपने घर में लगा कर रखने वाले वीसी ने बताया है कि संवैधानिक दायरे में तो जज अगर चाहते तो युवक को पूरे शहर की दीवार रंगने की बात भी कह सकते थे। लेकिन उन्होंने इस डर से नहीं कहा क्योंकि भगवा लहर को रोकना उनकी मंशा थी, हवा देना नहीं।

केसरी ने भावुक शब्दों में यह भी कह दिया कि जिस आदमी का अपना ही नाम केसरी हो, उसे जुबाँ के केसरी होने से क्या फ़र्क़ पड़ता है। साथ ही केसरी ने जोर देते हुए कहा कि आज के दिन जो लोग दिन के पाँच वक़्त विमल खाते हैं, उन्हीं लोगों के पूर्वज कभी कमला पसंद खाया करते थे इसलिए उन्हें ज्यादा फैलना नहीं चाहिए।

सामाजिक समरसता कायम करने के लिए कानपुर में रैली करेंगे अजय देवगन

इस घटना से पैदा हुए तनाव को शांत करने के लिए खुद अजय देवगन ने फैसला किया है कि वो कानपुर में एक विमल इलायची रैली का आयोजन करेंगे और इसमें वो 2 मोटरसाइकिल पर बैठकर पहुँचने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इस रैली में मौजूद लोगों को हर किस्म के पान और गुटखे वितरित किए जाएँगे ताकि कानपुर की संस्कृति में पान-बहार फैब्रिक बना रहे।

रैली में कुछ इस तरह नजर आएँगे अजय देवगन (प्रतीकात्मक चित्र)

#MeToo में फँसा कपिल सिब्बल का तिरंगा टीवी, सीनियर एडिटर पर अभद्र संदेश भेजने का आरोप

कपिल सिब्बल के तिरंगा टीवी से जुड़े विवाद बढ़ते ही जा रहे हैं। बरखा दत्त के उनकी पत्नी पर गाली-गलौज का आरोप लगाने और पत्रकारों को आनन-फानन में निकाले जाने की खबरों के बीच उनके चैनल के एक सीनियर प्रोड्यूसर पर एक महिला जर्नलिस्ट ने अभद्र संदेश वॉट्सऍप पर भेजने का आरोप लगाया है।

ट्विटर पर अपलोड किए स्क्रीनशॉट

हिमांशी गुप्ता नामक लड़की के अकाउंट से अपलोड स्क्रीनशॉट्स में सुरेश कुमार पर अश्लील संदेश भेजने और यौन प्रताड़ना करने का आरोप लगाया गया है। हिमांशी के मुताबिक, सुरेश कुमार तिरंगा टीवी में सीनियर प्रोड्यूसर हैं। हिमांशी का यह भी कहना है कि वह उन्हें लगातार फोन कर प्रताड़ित कर रहे हैं।

हिमांशी गुप्ता ने आरोपी की लिंक्डइन प्रोफाइल और तस्वीर भी साथ में पोस्ट की है।

इन चैटों से यह भी साफ है कि हिमांशी संदेशों को अनुचित बताते हुए सुरेश से ऐसा न करने का आग्रह करती हैं। उसके बाद, हिमांशी के मुताबिक, वह शुरू में तो रुक गए लेकिन बाद में फिर संदेश भेजना शुरू कर दिया।

ऋचा भारती को नहीं बाँटनी होगी कुरान की प्रतियाँ, राँची कोर्ट ने वापस लिया फैसला

राँची की अदालत ने ऋचा भारती वाले मामले में दिया गया ‘कुरान बाँटने’ वाला आदेश वापस ले लिया है। अदालत ने यह निर्णय इस केस की जाँच कर रहे इन्वेस्टीगेशन अधिकारी के निवेदन पर लिया। बता दें कि सोशल मीडिया पर ऋचा भारती द्वारा की गई ‘आपत्तिजनक टिप्पणी’ को लेकर राँची की अदालत ने उन्हें अजीबोगरीब शर्त लगा कर जमानत दी थी। अदालत ने जमानत देते हुए कहा था कि ऋचा को 15 दिनों के भीतर कुरान शरीफ की पाँच प्रतियाँ बाँटनी होंगी।

राँची अदालत का नया आदेश, वापस लिया पुराना आदेश

ऋचा ने इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया था और कहा था कि आज अदालत उन्हें कुरान बाँटने को कह रही है, कल को इस्लाम मज़हब अपनाने को भी कहा जा सकता है। ऋचा ने पूछा था कि क्या कभी किसी अदालत ने किसी आरोपित को रामायण या भगवद्गीता बाँटने को कहा है? अब राँची की अदालत ने अपना आदेश वापस ले लिया है।

राँची के वकीलों ने भी इस निर्णय का विरोध किया। देश के कई अन्य वकीलों ने भी ऋचा को मदद की पेशकश की थी। उनके घर के बाहर हिन्दू संगठनों नेताओं की लाइन लगी रही व कई लोगों ने ऋचा के पिता को फोन कर अपना समर्तहन जताया। अब तमाम विरोधों के बाद राँची की अदालत ने अपना निर्णय वापस ले लिया है।

देश की इंच-इंच ज़मीन से घुसपैठियों को निकाल बाहर करेंगे: अमित शाह का जावेद अली को जवाब

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि सभी घुसपैठियों और अवैध अप्रवासियों की पहचान कर उन्हें देश से निकाला जाएगा। सपा संसद जावेद अली ख़ान के सवाल का जवाब देते हुए शाह ने ये बात कही।

अली ने पूछा था कि क्या एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स) भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है? राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान बोलते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा:

“एनआरसी अभी जो असम के अंदर है, वो असम अकॉर्ड का ही एक भाग है। अगर सबने राष्ट्रपति महोदय का भाषण सुना होगा या भाजपा का घोषणा-पत्र पढ़ा होगा, उन्हें पता होना चाहिए कि हम देश के एक-एक इंच ज़मीन से घुसपैठियों को चिह्नित कर अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के अनुसार निर्वासित करने वाले हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को घुसपैठियों के प्रति सख्त रुख के कारण विरोधी अक्सर निशाने पर लेते रहे हैं। सरकार ने मंगलवार (जुलाई 16, 2019) को कहा था कि घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए वह बहुआयामी तरीकों पर काम कर रही है। सीमा पर फेंसिंग कराने, फ्लड लाइट्स लगवाने, सीमा पर अच्छी सड़कें बनवाने और आउटपोस्ट्स स्थापित करने सम्बन्धी कई निर्णय लिए गए हैं।

गृह मंत्रालय ने बताया कि सीमा की सुरक्षा करने वाले फोर्सेज को नियमित चेकिंग करने, चेकपोस्ट लगा कर जायजा लेने और गश्ती में तेज़ी लाने को कहा गया है, ताकि घुसपैठियों को दाखिल होने से रोका जा सके। भारतीय सीमा पर पहाड़ और नदियाँ होने के कारण घुसपैठिए इस भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हैं और सुरक्षा बलों को चकमा देने में कामयाब होते हैं।

RSS और उससे जुड़े 18 संगठनों पर नीतीश की नजर, पदाधिकारियों की कुंडली तैयार कर रही पुलिस

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े संगठनों पर नीतीश कुमार की अगुआई वाली बिहार सरकार ने नजर गड़ा रखी है। इन संगठनों के पदाधिकारियों की कुंडली तैयार करने का काम पुलिस को दिया गया था। बीते साल जारी की गई एक चिट्ठी के अब सार्वजनिक होने से मामला सामने आया है।

पुलिस अधिकारियों को भेजी गई इस चिट्ठी में आरएसएस और उससे जुड़े 18 अन्य संगठनों के पदाधिकारियों के बारे में जानकारियाँ माँगी गई है। पटना विशेष शाखा के एसपी ने सभी डीएसपी को यह पत्र भेजते हुए जानकारियाँ जुटाने को कहा था।

पत्र में संघ और उससे सम्बद्ध 18 अन्य संगठनों के सभी पदाधिकारियों के नाम, पता, फोन नंबर और व्यवसाय से सम्बंधित जानकारियाँ जुटा कर भेजने को कहा गया है। हालाँकि, नीतीश सरकार आरएसएस, बजरंग दल, हिन्दू युवा वाहिनी, दुर्गा वाहिनी और हिन्दू महासभा सहित इन सभी संगठनों के पदाधिकारियों के बारे में सारे डिटेल्स क्यों निकलवा रही है, इस बारे में अभी तक कुछ भी पता नहीं चल पाया है।

28 मई 2019 को भेजी गई इस चिट्ठी में सारी जानकारियाँ पुलिस उपाधीक्षकों को एक सप्ताह के अंदर भेजने को कहा गया है। कहा जा रहा है कि स्पेशल ब्रांच गुप्त रूप से सीधा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सारे विवरण समय-समय पर देता है, ऐसे में संभव है कि यह निर्णय मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा ही लिया गया हो। वैसे भी अभी बिहार गठबंधन में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। वांछित भागीदारी नहीं मिलने पर जदयू केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हुई थी। बाद में जब नीतीश ने बिहार में अपनी कैबिनेट का विस्तार किया तो उसमे भाजपा को जगह नहीं दी।

2016 में ‘संघ मुक्त भारत’ की बात कर चुके नीतीश कुमार के इस क़दम को लेकर भी भाजपा नेताओं की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। इंसेफ्लाइटिस, गर्मी और बाढ़ के कारण इस साल सैकड़ों मौतों का गवाह बन चुके बिहार में नीतीश के इस ‘ऑपरेशन संघ परिवार’ के पीछे क्या कारण हैं, यह तो वक़्त ही बताएगा।