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‘जय श्री राम’ बोलने पर TMC के गुंडों ने की एक और BJP कार्यकर्ता की हत्या

पश्चिम बंगाल में ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने की वजह से भाजपा के एक और कार्यकर्ता की हत्या करने का मामला सामने आया है। घटना नदिया जिले के स्वरूपनगर की है। भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई की ओर से जारी बयान के मुताबिक स्वरूपगंज क्षेत्र के फकीरतल्ला इलाके के सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता कृष्ण देवनाथ को शनिवार जय श्रीराम का नारा लगाने पर इस कदर पीटा गया कि उसकी मौत हो गई। है। पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि तृणमूल के स्थानीय नेताओं के निर्देश पर एक समूह द्वारा निशाना बनाया गया और पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी।

शुक्रवार (जूलाई 5, 2019) शाम कृष्ण देवनाथ को सड़क किनारे घायल पड़ा देख परिवार के सदस्य उन्हें एक स्थानीय अस्पताल ले गए। फिर बाद में उन्हें कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ भाजपा कार्यकर्ता को मृत घोषित कर दिया गया। नादिया भाजपा ने इस हत्या के पीछे सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के समर्थकों का हाथ बताया है। भाजपा के राज्य इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से गृह मंत्री के पद से तत्काल इस्तीफा देने की माँग करते हुए कहा कि वह राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह नाकाम हो गई हैं।

हत्या के बाद बीजेपी समर्थकों ने नवद्वीप में सड़क जाम कर दी और एक घंटे तक मृतक कृष्ण देवनाथ की लाश लेकर सड़क पर बैठे रहे। बीजेपी समर्थकों की माँग थी कि आरोपितों की पहचान कर उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए। केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने कृष्णा देबनाथ की मौत पर दुख जताते हुए ट्वीट किया, “एक युवा जिसका नाम कृष्णा देबनाथ था उसकी तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने हत्या कर दी, क्योंकि वह जय श्रीराम के नारे लगा रहा था। ममता बनर्जी की खूनी राजनीति का जल्द ही अंत होगा। भगवान, कृष्णा के परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दे।”

नवद्वीप के एक बीजेपी नेता ने कहा कि देबनाथ को टीएमसी के स्थानीय गुंडों द्वारा पीटा गया क्योंकि वह भगवान राम के नारे लगा रहा था। टीएमसी, भाजपा के हमारे कार्यकर्ताओं के साथ इसी तरह का व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सुबह से सड़क जाम इसलिए की थी, क्योंकि पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। वहीं, स्थानीय तृणमूल नेतृत्व ने इस दावे को खारिज कर दिया है।  टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि इस घटना का जय श्री राम बोलने से कोई लेना-देना नहीं है। भाजपा कार्यकर्ता शराब पीकर स्थानीय महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया, जिसके कारण स्थानीय निवासियों ने उसकी पिटाई कर दी। इस घटना से तृणमूल का कोई संबंध नहीं है।

7 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपित सिकंदर को पुलिस ने कोटा से किया गिरफ्तार

जयपुर के शास्त्री नगर थाना इलाके में 7 साल की मासूम बच्ची के साथ बलात्कार करने वाले आरोपित को पुलिस ने वारदात के पाँच दिन बाद कोटा से शनिवार (जुलाई 6, 2019) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आरोपित को लेकर देर रात जयपुर पहुँची। पुलिस ने आरोपित सिकंदर उर्फ जीवनू (35 साल) को तब गिरफ्तार किया, जब वो पाँच दिनों तक गायब रहने के बाद एक परिचित से मिलने कोटा के भीमगंज मंडी इलाके में पहुँचा था। दुष्कर्म आरोपित सिकंदर को पकड़ने के लिए पुलिस की 12 टीम दिन-रात जुटी हुई थी। इनमें से एक टीम को आरोपित के कोटा में मौजूदगी का सुराग मिला। जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने निगरानी रखी और उसे पकड़ने में सफल रही।

जयपुर के पुलिस आयुक्त आनंद श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि में सिकंदर ने 2004 में 11 साल के एक लड़के साथ कुकर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी। जिसके लिए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। पुलिस ने बताया कि आरोपित सिकंदर ने 2015 में जेल से रिहा होने के बाद 2017 में भट्टा बस्ती इलाके में दो नाबालिग लड़कियों से छेड़छाड़ सहित कई अपराध किए।

आनंद श्रीवास्तव ने कहा कि 2004 के दोषी ठहराए जाने से पहले और बाद में सिकंदर तकरीबन 10 अपराधों में शामिल था। साथ ही उन्होंने कहा कि पूछताछ के बाद ही इस बात का खुलासा हो पाएगा कि क्या उसी मोहल्ले में 22 जून को 4 साल की बच्ची के साथ हुए बलात्कार का दोषी भी वही है? इसके अलावा सिकंदर के खिलाफ मोटरसाईकिल की चोरी, दुकान लूटना, पुलिस अधिकारी पर हमला करने और पुलिस हिरासत से भागने जैसे कई अन्य अपराध के मामले दर्ज हैं। श्रीवास्तव ने बताया कि वो एक आदतन अपराधी है। उन्होंने कहा कि इलाके के सीसीटीवी फुटेज बहुत मददगार साबित नहीं हुए।

जयपुर में मौजूदा तनाव की वजह से पुलिस आरोपित को जल्द से जल्द पकड़ने के दबाव में थी। इस दौरान जिला प्रशासन ने शहर के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को सस्पेंड कर दिया था। इसे शनिवार को फिर से चालू कर दिया गया।

गौरतलब है कि, सिकंदर ने जयपुर के शास्‍त्री नगर थाना क्षेत्र में सोमवार (जुलाई 1, 2019) शाम अपनी बाइक पर घर के बाहर खेल रही एक नाबालिग बच्‍ची को अगवा करके अपने साथ ले गया। उसने बच्‍ची से कहा था कि वह उसके पिता का दोस्‍त है। इसके बाद उसने अमानीशाह नाले के पास बच्‍ची के साथ रेप करके करीब दो घंटे के बाद बच्‍ची को उसके घर के पास फेंककर चला गया। बच्‍ची की हालत गंभीर देखकर उसे सर पद्मपत मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में भर्ती कराया। फिलहाल बच्ची की हालत में सुधार है। राज्य सरकार ने बच्ची के परिवार को ₹5 लाख की वित्तीय सहायता देने की स्वीकृत प्रदान की है।

मॉब लिंचिंग के नाम पर रांची में मुस्लिम समुदाय ने जमकर किया बवाल, राहगीरों को पीटा, वाहनों में की तोड़फोड़

रांची के डोरंडा स्थित उर्स मैदान में मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ आयोजित मुस्लिम संगठनों के जनाक्रोश सभा के बाद शहर में काफ़ी बवाल मच गया। नौबत यहाँ तक आन पड़ी कि दो लोगों को रांची के मेडिका अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ गया। दोनों इंद्रपुरी, रातू रोड के रहने वाले हैं। बवाल के दौरान चंदन उर्फ़ विवेक श्रीवास्तव के पेट और सीने में चाकू घोंपा गया था और दीपक नाम के शख़्स बेरहमी से पीटा गया था। उनके स्वास्थ्य का हाल-चाल जानने के लिए शनिवार (6 जुलाई) को विकास मंत्री सीपी सिंह, सांसद संजय सेठ अस्पताल पहुँचे।

ज्ञात हो कि पिछले दिनों में चोरी के आरोप में पिटाई के बाद हिरासत में तरबेज़ अंसारी की मौत के बाद जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। इस मुद्दे पर जहाँ एक तरफ़ सियासत गरमा गई है, तो वहीं दूसरी तरफ़ भावनाओं को भड़का कर कुछ लोग माहौल बिगाड़ने पर तुले हुए हैं।  

दरअसल, शुक्रवार (5 जुलाई) को शहर में चार घंटे के अंदर दो जगहों पर जमकर उत्पात मचा। पहली घटना, राजेंद्र चौक पर हुई, जहाँ जनाक्रोश सभा से लौट रही भीड़ ने कुछ बस यात्रियों की टीका-टिप्पणी के बाद जमकर उत्पात मचाया। यहाँ जमकर पत्थबाज़ी की गई, कई बसों और कारों के शीशे तोड़े गए। बाइक और ई रिक्शा को भी नही बख़्शा गया। अफ़रा-तफ़री के इस हालात पर पुलिस को क़ाबू पाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इस घटना के बाद पूरा मेन-रोड छावनी में तब्दील हो गया।

रांची के राजेंद्र चौक और मेन रोड में एकरा मस्जिद के पास अलग-अलग समय में हुए विवाद में मुस्लिमों की भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान डेढ़ दर्जन से अधिक वाहनों में तोड़-फोड़ की गई, लोगों के साथ मारपीट भी की गई। दोनों ही जगह पर पुलिस ने बड़ी मुश्किल से हालात पर क़ाबू पाया। इस घटना के बाद पूरे शहर में तनाव का माहौल पसर गया। एहतियात के तौर पर पूरे शहर में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। वहीं दूसरी तरफ़, जनाक्रोश सभा से ही निकलकर एयरपोर्ट के पीछे एयरपोर्ट ग्राउंड में तीन युवकों की 20-25 युवकों ने जमकर पिटाई कर दी।

ख़बर के अनुसार, जनाक्रोश सभा के आयोजकों पर डोरंडा थाने में FIR दर्ज कराई गई। आयोजकों में एजाज़ गद्दी, मौलाना ओबेदुल्लाह कासमी, शमशेर आलम समेत अन्य के नाम शामिल हैं। FIR के अनुसार, इन पर आरोप है कि इन्होंने बिना वजह सभा का आयोजन किया और शहर में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की क्योंकि उर्स मैदान में आयोजकों को लाउडस्पीकर लगाने से मना कर दिया गया था।

बिना एसडीओ की इजाज़त के जनाक्रोश सभा का आयोजन भी किया गया और मुस्लिम संगठनों के लोग इसमें शामिल भी हुए। धीरे-धीरे लोगों की भीड़ जुलूस में बदल गई। जानकारी के अनुसार, जनाक्रोश सभा के समाप्त होने के बाद भीड़ अलग-अलग टुकड़ियों में नारेबाज़ी कर लौट रही थी। इसी बीच बस में बैठे कुछ लोगों ने कमेंट कर दिए। इसके बाद भीड़ में शामिल मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बस में पथराव शुरू कर दिया और लाठी-डंडों से बस के शीशे तोड़ दिए।

गुलाबी शहर तीसरी बार UNESCO की विश्व धरोहर सूची में, इस बार चारदीवारी को मिला स्थान

गुलाबी शहर के नाम से मशहूर जयपुर की चारदीवारी (परकोटा) को UNESCO (United Nation Educational scientific Cultural Organisation) ने विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है।

शनिवार (जून 06, 2019) को अजरबैजान की राजधानी बाकू में हुई विश्व धरोहर समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ट्वीट कर यूनेस्को के फैसले पर खुशी जताई। इससे पहले जयपुर स्थित आमेर किले और जंतर-मंतर को इस सूची में स्थान मिल चुका है।

नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, ”जयपुर का संबंध संस्कृति और वीरता से रहा है। उत्साह से भरपूर जयपुर की मेहमाननवाजी लोगों को अपनी ओर खींचती है। खुशी है कि इसे यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल घोषित किया है।” केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल ने इसे देश के लिए गर्व का विषय बताया है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी ट्वीट कर अपनी ख़ुशी व्यक्त की। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा- “हम लोगों के लिए यह बहुत गर्व की बात है। इससे राजस्थान का गौरव और बढ़ेगा।”

दिल्ली स्थित यूनेस्को कार्यालय की ओर से कहा गया है कि जयपुर की शहरी योजना प्राचीन हिन्दू, मुगल और समकालीन पश्चिमी महत्ता को प्रदर्शित करती है। ऐतिहासिक जयपुर शहर की स्थापना 1727 में राजा जयसिंह ने की थी। यह अपनी स्थापत्य कला के कारण पर्यटकों में आकर्षण का केंद्र है।

तेलंगाना की आदिवासी महिला से मिले शाह, किया सदस्यता अभियान फिर शुरू

एक बार फिर भाजपा के सदस्यों में भारी बढ़ोतरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आज (शनिवार, 6 जुलाई) से एक बार फिर सदस्यता अभियान प्रारम्भ किया। इस बार शुरुआत तेलंगाना से की गई, और शाह ने एक आदिवासी महिला से मुलाकात की।

ट्वीट कर दी जानकारी

ट्वीट कर मुलाकात की जानकारी देते हुए शाह ने लिखा, “रंगारेड्डी, तेलंगाना के ममीडिपल्ली गाँव की श्रीमती जाटवती सोनी नाइक जी के घर गया। उनके स्वागत और उनकी गर्मजोशी ने अभिभूत कर दिया।” उन्होंने मुलाकात की फ़ोटो भी पोस्ट की।

राजीव गाँधी के तंज़ को किया याद

रंगारेड्डी से ही भाजपा के सदस्यता अभियान की शुरुआत करते हुए अमित शाह ने 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी का भाजपा को मारा गया ताना भी याद किया। बकौल शाह, “एक समय जब हमारी 2 सीटें थी, तो उस समय के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ताना मारा था कि भाजपा परिवार नियोजन में मानती है हम दो हमारे दो। तंज कसने वालों को आज विपक्ष का नेता बनने लायक सीटें नहीं मिल रही और हमारी पूर्ण बहुमत की सरकार आज केंद्र में है।”

उन्होंने बूथवार काम करने की भाजपा की रणनीति जारी रखने का भी ऐलान किया, और कमज़ोर बूथों पर अधिकाधिक सदस्य बनाने पर भी ज़ोर दिया। “इस बार सदस्यता हर बूथ को मजबूत बनाने के लिए है। जहाँ हम मजबूत हैं, वहीं सदस्य बनाएँ ऐसा नहीं होना चाहिए। जो बूथ हम हारे हैं, उसे मजबूत करने का लक्ष्य तय करने का काम किया जाना चाहिए।” उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का संदेश देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने हर बूथ पर भाजपा को मज़बूत बनाने के अलावा भाजपा को सर्व-स्पर्शीय, सर्व-समावेशी बनाने पर भी जोर दिया है

VIDEO: कट्टरपंथियों द्वारा तोड़फोड़ के बाद दुर्गा मंदिर में फिर गूँजा ‘जय श्री राम’ और हनुमान चालीसा का स्वर

दिल्ली के चाँदनी चौक, हौज काजी स्थित दुर्गा मंदिर में कट्टरपंथियों द्वारा की गई तोड़फोड़ और दंगों के बाद कुछ दिल्ली में रहने वाले कुछ हिन्दू कार्यकर्ताओं ने वहाँ पर आज यानी, जून 06 2019 को अखंड हनुमान चालीसा पाठ करने का निर्णय लिया। लेकिन इस घटना ने एक नया मोड़ तब ले लिया जब आज सुबह ही दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें ऐसा करने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया।

दरअसल, अविरल शर्मा नामक युवक ने ट्विटर पर ‘Reclaim civilisation’ मुहिम के अंतर्गत इस पहल के बारे में अपने ट्विटर हैंडल से जानकारी दी थी।

लेकिन दिल्ली पुलिस द्वारा अविरल शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें इस इवेंट को कैंसिल करने के लिए कहा गया। लेकिन अविरल दुर्गा मंदिर में हनुमान चालीसा करने की बात पर डटे रहे। हालाँकि, सोशल मीडिया पर अविरल की गिरफ़्तारी पर विवाद बढ़ने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने ट्वीट के माध्यम से सूचना दी कि मंदिर में हनुमान चालीसा आज ही तय समय पर की जाएगी।

कट्टरपंथियों की भीड़ द्वारा चाँदनी चौक के हौज काजी दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ और दंगों की घटना के बाद आज शाम 7 बजे एक बार फिर ‘जय श्री राम’ और हनुमान चालीसा के स्वर गूँज उठे। इस मौके पर 300 से ज्यादा हिन्दू कार्यकर्ता मौजूद थे।

असली दिक्कत ‘ध्वनि प्रदूषण’ नहीं, हिन्दू भक्त हैं: मंदिर ‘इकोसिस्टम’ ध्वस्त करने की साज़िश

खबर आ रही है कि केरल के वन विभाग के मुताबिक सबरीमाला के मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों (भगवान अय्यप्पा के भक्त) के ‘स्वामिये शरणं अय्यप्पा’ का जप करने से आसपास के जंगलों में ध्वनि प्रदूषण होता है। इसे रोकने के लिए वन विभाग द्वारा केंद्र सरकार को दी गई रिपोर्ट में अय्यप्पा के दर्शन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या पर लगाम कसने की अनुशंसा की गई है। इस खबर की कोई ‘व्याख्या’ बेकार है क्योंकि रिपोर्ट लिखने वाले, पढ़ने वाले, जिसे अनुशंसा दी गई है- उन सभी को पता है कि यह क्यों किया गया है। यह ‘सेक्युलर’ सरकारी मशीनरी द्वारा एक और हिन्दूफ़ोबिक आघात है हिंदुत्व/हिन्दू धर्म पर।

महज़ अपमान नहीं, खुला हमला है

मंदिर में श्रद्धालुओं की आवक रोकने का यह प्रयास केवल एक मंदिर, एक आस्था या धार्मिक भावना, एक परम्परा का “अपमान” नहीं है- यह एक पूरे ‘इकोसिस्टम’ पर, मंदिरों के इर्द-गिर्द बुने हुए सामाजिक ताने-बाने पर हमला है। यह कोशिश है अय्यप्पा के आसपास खड़े पतनमतिट्टा जिले के (जहाँ सबरीमाला मंदिर स्थित है), और केरल राज्य के पूरे हिन्दू समाज के आपसी धार्मिक संबंध को नष्ट करने की।

यह कोशिश है सबरीमाला और अय्यप्पा के प्रति श्रद्धा की वो डोर तोड़ने की, जिससे लोग ऐसे जुड़े कि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के मुकदमे के खतरे के बाद भी देश के हर कोने से लाखों (या शायद करोड़ों) लोगों ने अपनी प्रोफाइल पिक्चर में ‘स्वामिये शरणम्’ लिखकर अपना आक्रोश जताया, अपने स्थानीय संघ-भाजपा-कॉन्ग्रेस नेताओं से मिलकर इस फ़ैसले को बदलने का दबाव बनाया और लिबरल गैंग के खिलाफ सबरीमाला-अय्यप्पा संघर्ष और प्रतिरोध के देवता बन गए हैं।

मंदिरों की महत्ता

मंदिर कई स्तरों पर हिन्दू धर्म या हिंदुत्व (Hindu-ness) को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह केवल एक ‘प्रतीक’ मात्र नहीं हैं ईश्वर का, जिसका केवल ‘कथित’ महत्त्व हो। अध्यात्म और योग के स्तर पर भी मंदिर महत्वपूर्ण हैं, और सामाजिक स्तर पर भी। हिन्दू समाज मंदिरों के इर्द-गिर्द बना समाज रहा है, और हर गाँव-शहर के छोटे-बड़े ग्राम देवता-कुल देवता के मंदिर से लेकर ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ आदि श्रद्धालुओं के समुदाय के, उनके ‘इकोसिस्टम’ की धुरी रहे हैं।

जब लोग शाम को काम-धंधे से घर लौटते समय मंदिर में भगवान को हाथ जोड़ने जाते थे, या रात को खाना खाने के बाद शयन-आरती में शामिल होते थे, तो उनमें से अधिकाँश केवल वहाँ पंद्रह मिनट बैठकर भजन-ध्यान-जप नहीं करते थे, बल्कि महत्वपूर्ण बातों का आदान-प्रदान, आस-पास के समाज में क्या चल रहे है, फलाने विषय पर धर्म और शास्त्र क्या कहता है, किस हद तक सैकड़ों या हज़ारों वर्ष पहले कही गई वह बात समकालीन महत्व रखती है- इन सब पर चर्चा होती थी।

धर्म की धारा ऐसे ही हर स्थानीय समुदाय में अपने विशिष्ट ‘स्वाद’ के साथ जीवित और जीवंत रहती थी। वही शिव ऐसे ही स्थानीय आस्था और भक्ति के प्रभाव के चलते नेपाल में पशुपतिनाथ हैं, गुजरात में सोमनाथ, और झाखण्ड में बैद्यनाथ और तमिल नाडु में रामेश्वरम्- और फिर भी सभी शिव हैं, इसमें कोई शंका नहीं। और ऐसा दैनिक जुड़ाव होने के चलते मंदिर और धर्म केवल एक विचार या विचारधारा नहीं थे, सामुदायिक जीवन के केंद्र में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते थे।

और इसी की बानगी सबरीमाला में देखने को मिली। मंदिर के ‘क्षेत्रम्’, उसके आगम शास्त्र के नियम और मंदिर के देवता की ही शास्त्रोक्त इच्छा के विपरीत जाने वाले सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लागू करने में केरल की कम्युनिस्ट सरकार को नाकों चने चबाने पड़ गए। दो-तीन महीने तक श्रद्धालु वहाँ घेरा बनाकर पहरा देते रहे ताकि कोई अविश्वासी महिला उनके देवता के क्षेत्रम् को भङ्ग न कर दे।

अंत में केवल अपने अभिमान की तुष्टि के लिए दो महिलाओं का प्रवेश भी आसुरिक केरल सरकार को अँधेरी रात में ही कराना पड़ा- और उन दो के बाद पूरा मामला फिर से ठप हो गया। लेकिन इस अनुभव से हिन्दूफ़ोबिकों की इस पीढ़ी को वह समझ में आ गया जो उनसे पहले कम्युनिस्ट इतिहासकारों और नीति-निर्माताओं, उससे पहले हिंदुस्तान में ईसाईयत फैलाना चाह रहे ईसाई मिशनरियों को समझ में आया था (इस्लामिक आक्रांताओं को यह शुरू से पता था, यह उनके हमलों से साफ़ पता चलता है)- बिना मंदिर-इकोसिस्टम को विखंडित किए, उससे लोगों का ‘तलाक’ कराए, ‘कॉकरोच’ की तरह न मरने की ज़िद पकड़े हिन्दू धर्म को नहीं मारा जा सकता।

हर मंदिर, हर परम्परा पर हमले का template एक ही होता है

हिन्दूफ़ोबिक मीडिया, राजनीतिक और सरकारी गिरोह का एक ही template है- जो वे बार-बार इस्तेमाल करते हैं हिन्दू मंदिरों और परम्पराओं को प्रतिबंधित करने के लिए। और हिन्दू हर बार उसमें फँस जाते हैं- और इसका अहसास उन्हें तब होता है, जब बहुत देर हो जाती है।

पहले चरण में पर्यावरण, प्रगतिशीलता, नारी-अधिकार आदि की आड़ लेकर हिन्दुओं की परम्पराओं का दानवीकरण होता है। और कुछ नहीं मिलता तो केवल ‘चलो, सुधार-के-लिए सुधार करते हैं’ के बहाने हिन्दू आस्था पर कीचड़ उछाला जाता है। (उदाहरण के तौर पर, एक महिला के हिन्दू रीति-रिवाजों से इतर शादी करने के निजी निर्णय को, जिसमें अपने-आप में किसी को आपत्ति नहीं हो सकती, हिन्दूफोबिया की मानसिकता के चलते हिन्दू विवाह-प्रणाली को पूरी तरह दानवीकृत करने के लिए इस्तेमाल किया गया) इस चरण में मीडिया (पहले मुख्यधारा, और अब मुख्यधारा के अलावा सोशल मीडिया भी) के इस्तेमाल से ‘माहौल’ बनाया जाता है।

याद करिए दही-हांडी, जल्ली-कट्टू, दिवाली पर ‘प्रगतिशील’ प्रतिबंध लगने के सालों पहले से कैसे इन उत्सवों के खिलाफ विभिन्न राजनीतिक, सांस्कृतिक, और यहाँ तक कि ‘लाइफस्टाइल’ पत्र-पत्रिकाओं में लेख छपने लगे थे। यही सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है- इसमें टीवी पर आ रहे विज्ञापन, फ़िल्में, पत्रकार, और यहाँ तक कि स्कूल की किताबों की सहायता से ‘हिन्दू धर्म समाज के लिए खराब है’ का संदेश धीरे-धीरे करके घोला जाता है।

दूसरे चरण में मीडिया के माहौल बना लेने के बाद सरकारी और गैर-सरकारी मशीनरी ‘सक्रिय’ हो जाती है। अदालतों में दही-हांडी और दिवाली के खिलाफ याचिकाएँ लगने लगतीं हैं, सरकारों में बैठे व्यक्ति अय्यप्पा भक्तों के द्वारा ध्वनि-प्रदूषण की सरकारी ठप्पे वाली रिपोर्ट देकर ऐसे प्रोपेगण्डे पर अपनी मुहर लगाकर उसकी विश्वसनीयता बढ़ाते हैं, और इस चरण का अंत सरकारी या अदालती आदेश से हिन्दूफ़ोबिया गिरोह के मंसूबों की पूर्ति में होता है।

लेकिन इनका ‘गेम’ यहीं खत्म नहीं होता, चालू रहता है। इनका मन केवल एक बार किसी प्रथा को क़ानूनी रूप से प्रतिबंधित कर के नहीं भरता, बल्कि अगर उसके ख़िलाफ़ कोई व्यक्ति अगर अपने आस्था, अपने धर्म का पालन जारी रखे तो उसे ‘कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट’ के डंडे से सीधा कर दिया जाता है। सबरीमाला में यही हुआ, यही दही-हांड़ी के मामले में हुआ, और यही दिवाली के मामले में हुआ

हिन्दू है कि जागता नहीं

हर बार, हर एक बार शुरुआती चरणों में इन आसुरिक वृत्ति वालों की हाँ-में-हाँ मिलाने के बाद हिन्दू यह उम्मीद करते हैं कि अंत में नतीजा अलग होगा। यह खुद को छलने या पगला जाने के अलावा कोई तीसरी चीज़ नहीं हो सकती। और अभी भी यही हो रहा है। इस रिपोर्ट पर ना कहीं कोई जनाक्रोश है, न ही हिन्दू आक्रोश की सोशल मीडिया में फसल काटने वालों में से अधिकांश ने इस पर एक ट्वीट भर भी करने की जहमत उठाई है।

और जब इस रिपोर्ट के आधार पर कुछ सालों में वामपंथी दो-चार सौ लेख लिख डालेंगे, उन लेखों के आधार पर कोई सरकार को ज्ञापन या अदालत में याचिका दे देगा, सबरीमाला में श्रद्धालुओं की आवक कम या बंद हो जाएगी, तो उसके बाद ‘जागा हुआ हिन्दू’ सड़कों पर तब उतरकर सोचेगा कि वह ‘सेक्युलर’ मशीनरी को झुका लेगा।

लोहिया हिंदूवादी नहीं थे, शायद अपने समकालीनों की तरह उनके लिए भी हिन्दूफ़ोबिया सार्वजनिक जीवन का सामान्य स्तर रहा हो (मैंने लोहिया को पढ़ा नहीं है, इसलिए उनकी पीढ़ी के एवरेज पर बात कर रहा हूँ) लेकिन उनका कथन ‘ज़िंदा कौमें पाँच साल इंतज़ार नहीं करतीं।” अगर हिन्दू सीख कर आत्मसात कर लें, अपना उद्धार खुद, और आज से ही, अपने जीते-जी करने की कमर कस लें तो बड़ी कृपा होगी।

आगे की राह

आगे की राह किसी ‘कल्कि अवतार’ के आने या ‘भगवान विष्णु के ‘एक्स्ट्रा’ वाले अवतार’ के भरोसे बैठे रहने की बजाय अगर ‘अप्प दीपो भव’ की हो तो बेहतर होगा। सबसे पहले तो हिन्दुओं को ‘स्व-केंद्रित’ सामाजिक और सामुदायिक जीवन की मानसिकता से बाहर आना होगा। चाहे आप स्वयं ईश्वर में विश्वास रखें या न रखें, अगर आप हिन्दू शब्द से अपनी पहचान जोड़ते हैं, या हिन्दू संस्कृति और सभ्यता के हितैषी हैं तो अपने स्थानीय मंदिर और पुजारी का हाल-चाल लेना प्रारंभ करें।

पता करें कि वह सरकार के चंगुल में है, किसी निजी व्यक्ति या संस्था द्वारा संचालित है या एक सार्वजनिक ट्रस्ट के अंतर्गत आता है। उसके कार्यकलापों में भागीदार बनें- भले वह भागीदारी साल में एक बार बंदनवार लगाने जितनी ही क्यों न हो।

जिन्हें पढ़ने में रुचि हो, वे कोई भी शास्त्र– नाट्यशास्त्र, व्याकरण, पुराण, चित्रकला यहाँ तक कि कामशास्त्र भी, उठाकर यह जानने का प्रयास करें कि किसी भी विषय पर हिन्दू मत क्या है। योग, ध्यान, तंत्र, क्रिया- इस सब को आप सीखना शुरू कर सकते हैं। बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर से लेकर जग्गी वासुदेव और ओम स्वामी तक बड़ी आध्यात्मिक संस्थाओं की कमी नहीं है, और हर शहर में छोटे-छोटे योग गुरु भी मौजूद हैं।

अपने बच्चों की किताबों को जानें- और उन्हें किताबों से इतर हिंदुत्व का, हिन्दू धर्म का असली सत्य बताएँ। एक मशहूर लेखक (शायद प्रेमचंद, लेकिन यकीन के साथ नहीं कह सकता) अंग्रेज़ों के समय में इतिहास के सरकारी अध्यापक थे। एक घंटे की क्लास में 20-25 मिनट में इम्तिहान में सवाल के जवाब में क्या लिखा जाना है, इसकी बात खत्म कर बाकी का समय किताबों में हिन्दुस्तानियों के खिलाफ जो प्रोपेगैंडा भरा था वह कितना झूठा था, उसे काटने में बिताते थे। अंग्रेज़ों के समय में जेल जाने और नौकरी खोने का खतरा उठाकर कोई अगर यह कर सकता था तो आपको अपने बच्चों को आज़ाद देश में सच बताने से कौन रोक रहा है?

हिन्दू धर्म न किसी एक मसीहा, किसी एक किताब की बदौलत पैदा हुआ है, न किसी एक माई-बाप के भरोसे इसका संरक्षण किया जा सकता है। आपके हाथ में केवल यह निर्णय है कि आप इसके संरक्षण में कुछ करेंगे, या किसी मसीहा के चुटकी बजाने का इंतजार करेंगे।

‘आगे की राह’ खण्ड के कुछ विचार लेखक नितिन श्रीधर के इंडियाफैक्ट्स ब्लॉग से साभार।

12 साल की नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म में परवेज़ और टनटन गिरफ़्तार, साहिल फ़रार

उत्तर प्रदेश के जौनपुर से एक 12 साल की बच्ची के साथ हैवानियत की ख़बर सामने आई है। अपने घर से कूड़ा फेंकने के लिए निकली बच्ची को परवेज़, साहिल समेत तीन दरिंदों ने उसका अपहरण किया। सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम देने के बाद सभी वहाँ से फऱार हो गए। 

पीड़ित बच्ची के परिजनों को जब इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने पुलिस में शिक़ायत दर्ज कराई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया और परवेज़ व उसके एक साथी को धर-दबोचा। दुष्कर्म में शामिल साहिल फ़िलहाल फ़रार है।

दरअसल, जौनपुर शहर कोतवाली क्षेत्र के मछलीशहर पड़ाव के एक मोहल्ले में 12 साल की मासूम शाम के समय कूड़ा फेंकने के लिए घर से बाहर निकली थी। पहले से घात लगाए आरोपितों ने उसे पकड़ लिया और पास के हाते में ले गए। वहाँ परवेज़, साहिल, टनटन समेत अन्य साथियों ने उसका सामूहिक बलात्कार किया। काफ़ी देर बाद जब बच्ची घर नहीं पहुँची तो परिजनों ने परेशान होकर उसकी तलाश शुरू कर दी।

काफ़ी तलाश के बाद परिजनों को बच्ची बदहवास हालत में मिली, उसे उसी अवस्था में घर लाया गया, जहाँ होश आने के बाद उसने आपबीती बताई। एसपी मिश्रा ने बताया कि मामला दर्ज कर वारदात को अंजाम देने वाले दो आरोपित टनटन और परवेज़ को गिरफ़्तार कर लिया गया है और साहिल अभी भी फ़रार है जिसे जल्द गिरफ़्तार कर लिया जाएगा।

मुल्ला साबित करें कि सिंदूर व बिंदी लगाना हराम है: सैयद वसीम रिज़वी

शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिज़वी ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद नुसरत जहां के सिंदूर और बिंदी लगाने के माममले में उलेमा के फ़तवों पर कड़ी आपत्ति जताई।

उन्होंने कहा कि हर मुस्लिम शादीशुदा महिला को अपने हिसाब से सजने-सँवरने का हक़ है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि मुल्ला को यह साबित करना चाहिए कि आख़िर सिंदूर और बिंदी लगाना हराम है।

ख़बर के अनुसार, रिज़वी ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि कोई भी मुस्लिम महिला सिंदूर लगाती है, चूड़ियाँ पहनती है, मंगलसूत्र पहनती है या बिंदी लगाती है तो यह शरियत के तौर पर हराम नहीं है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि वो दुनिया के सभी मुल्लाओं को चैलेंज करते हैं और यह साबित करके दिखाएँ कि किस शरियत में लिखा है कि सिंदूर लगाना हराम है। 

TMC सांसद नुसरत जहां के ख़िलाफ़ जारी किए गए फ़तवे की निंदा करते हुए रिज़वी ने कहा कि हिन्दुस्तान में यह तालिबानी मानसिकता का प्रचार है। इस तरह का फ़तवा जारी करने वाले लोगों से कड़ाई से निपटने की आवश्यकता है।

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिज़वी ने कहा था कि अगर समय रहते प्राथमिक मदरसे बंद न किए गए तो 15 साल बाद देश का आधे से ज़्यादा अल्पसंख्यक ISIS की विचारधारा का समर्थक हो जाएगा। इसके पीछे वजह उन्होंने बताई कि दुनिया में देखा गया है कि कोई भी मिशन चलाने के लिए बच्चों को निशाना बनाया जाता है।

इरशाद ने किया शिवलिंग पर पेशाब, पुलिस ने किया गिरफ़्तार, इलाके में तनाव

दिल्ली के चाँदनी चौक इलाके में दुर्गा मंदिर में तोड़-फोड़ की ख़बरों का सिलसिला अभी थमा भी नहीं था कि साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ाने की एक और कोशिश की गई। इरशाद उर्फ़ ईरानी नाम के एक शख़्स ने शहर के जहाँगीरबाद में महादेव के मंदिर में शिवलिंग पर पेशाब किया। जिससे इलाके में तनाव का माहौल है। प्राचीन शिव मंदिर की पवित्रता को तार-तार करने वाले इरशाद के ख़िलाफ़ बजरंग दल के सदस्यों ने पुलिस में शिक़ायत दर्ज की। इसके बाद बुलंदशहर पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ़्तार कर लिया।

सुदर्शन न्यूज़ की एक ख़बर के अनुसार, बजरंग दल के सदस्य यतिंदर गेहना ने बताया:

“ईरानी नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति को जहांगीराबाद क्षेत्र की पुरानी मंडी के प्राचीन शिव मंदिर के शिवलिंग पर पेशाब करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। वह अक्सर मंदिर परिसर के आसपास छिपा हुआ पाया जाता था। यहाँ के लोग उसके कृत्य से नाराज़ हैं। वह वहाँ से भाग गया है। उसके ख़िलाफ़ पुलिस शिक़ायत दर्ज की गई थी और उसे घर से भगा दिया गया था।”

बुलंदशहर पुलिस ने इस घटना की पुष्टि करते हुए ट्वीट किया कि आरोपी ‘इरशाद’ को भारतीय दंड संहिता धारा-295 के तहत (धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल पर चोट पहुँचाना या परिभाषित करना) और धारा-153 ए (विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत मामला दर्ज किया गया है और उसे तुरंत जेल भेज दिया गया।