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‘जय श्री राम’ बोलने पर पश्चिम बंगाल के स्कूल में घुसकर छात्रों की लाठी-डंडों से पिटाई

पश्चिम बंगाल में ‘जय श्री राम’ का नारा किसी अपराध से कम नहीं है। फिर चाहे ‘जय श्री राम’ का ये नारा कोई बड़ा-बुज़ुर्ग लगाए या स्कूल के छात्र। इस अपराध की सज़ा हर किसी को भुगतनी पड़ती है। ताज़ा मामला कोलकाता के दक्षिण 24 परगना ज़िले के विष्णुपुर थानांतर्गत बाखराहट उच्च विद्यालय का है। यहाँ पर छात्रों द्वारा ‘जय श्री राम’ बोले जाने पर स्थानीय गुंडों ने उनकी जमकर पिटाई कर दी। 

दैंनिक जागरण के ई-पेपर में छपी ख़बर का स्क्रीनशॉट

इस घटना की सूचना जब पुलिस को मिली तो वो मौक़े पर पहुँची। वहाँ हालात इतने बेक़ाबू थे कि स्कूल में घुसे गुंडे तत्व के लोगों को खदेड़ने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ गया। वहीं, दूसरी तरफ़ घटना के प्रतिवाद में छात्रों और उनके अभिभावकों ने सड़क अवरोध कर विरोध-प्रदर्शन किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जाँच में जुट गई है।

ख़बर के अनुसार, बुधवार की सुबह बाखराहाट उच्च विद्यालय में कुछ छात्र ‘जय श्री राम’ का नारा लगा रहे थे। थोड़ी देर बाद वहाँ कुछ गुंडे पहुँचे और उन्होंने लाठी-डंडों के साथ स्कूल में धावा बोल दिया। स्कूल में ज़बरदस्ती घुसकर ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों की लाठी-डंडों से पिटाई शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से स्कूल में अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया और चारों तरफ़ चीखों की आवाज़ आने लगीं। सूचना पाकर विष्णुपुर थाने की पुलिस मौक़े पर पहुँची।

पुलिस के वहाँ पहुँचने पर भी मामला शांत नहीं हुआ क्योंकि उनकी मौजूदगी में भी ये लोग स्कूल के अंदर हंगामा मचाते रहे। स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्च करना पड़ा, उसके बाद ही इन गुंडों को स्कूल के बाहर निकाला जा सका। इसके बाद घटना के विरोध में अभिभावकों ने विरोध-प्रदर्शन किया। उन्होंने हमलावरों की गिरफ़्तारी की माँग उठाई। पुलिस ने उन्हें उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया, जब जाकर अवरोध समाप्त हुआ।

झूठ बोलते हैं महबूबा-अब्दुल्ला, अमरनाथ यात्रा की वजह से कश्मीरियों को मिलते हैं रोज़गार के अवसर

अमरनाथ यात्रा पूरे जोर-शोर से चल रही है। पहले 8 दिनों एक लाख से भी अधिक लोगों ने दर्शन किए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। ख़ुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मामले पर सम्बंधित अधिकारियों से बैठकें कर लगातार नज़र बनाए हुए हैं। अस्थिर मौसम को देखते हुए तकनीक का भी सहारा लिया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भी व्यवस्थाएँ की गई हैं। राज्यपाल सत्यपाल मालिक ने कैम्प्स का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। लेकिन, कश्मीर के दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती ने इस पर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि इस यात्रा के लिए किए गए इंतजामों से कश्मीरियों को दिक्कत हो रही है।

लेकिन, ऐसा नहीं है। असल में अमरनाथ यात्रा से कश्मीरियों का फायदा होता है। इससे उन्हें रुपए कमाने के अवसर मिलते हैं। इसके अलावा, इससे उन्हें रोज़गार के अवसर भी मिलते हैं। अमरनाथ यात्रा कश्मीरियों के लिए वरदान बन कर आती है; उन कश्मीरियों के लिए, जिनका नाम लेकर महबूबा-अब्दुल्ला राजनीति करते हैं, जिन्हें अलगाववादी भड़काते हैं, जिन्हें आतंकी बरगलाकर अपने संगठन में शामिल करते हैं। दरअसल, जम्मू कश्मीर में नेता, अलगाववादी और आतंकी, ये तीनों ही कभी नहीं चाहेंगे कि वहाँ की जनता को रोज़गार मिले और उसका कारण एक हिन्दू तीर्थयात्रा हो।

आगे बढ़ने से पहले जानते हैं कि किस तरह से कश्मीरी जनता को अमरनाथ यात्रा से फायदा मिलता है। जुलाई 2017 में ट्रिब्यून इंडिया की एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें कश्मीरियों के लिए अमरनाथ यात्रा द्वारा पैदा होने वाले एक ऐसे रोज़गार के बारे में बताया गया था, जिसको हम-आप नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन, यही उनकी कमाई का एक बड़ा जरिया है। कई ऐसे श्रद्धालु हैं, जो 22 किलोमीटर तक पद यात्रा कर बाबा बर्फानी के दर्शन करने जाते हैं। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में कई ऐसे लोग हैं, जो यात्रा के मौसम में ऐसे श्रद्धालुओं के लिए ‘वॉकिंग स्टिक’ यानी लाठी तैयार करते हैं, जिसके सहारे पदयात्री बाबा के धाम तक पहुँचते हैं।

पूरी अमरनाथ यात्रा के रास्ते में सैकड़ों ऐसे दुकानदार हैं, जिनकी रोज़ी-रोटी अमरनाथ यात्रा से चलती है। स्थानीय मुस्लिमों के हवाले से ट्रिब्यून इंडिया ने अपनी उस रिपोर्ट में लिखा था कि वे लोग हर साल बड़ी उम्मीद से इस यात्रा का इन्तजार करते हैं। कई ऐसी दुकानें हैं, जो पहले से चल रही होती हैं। वहीं, यात्रा के मौसम में कई अस्थाई दुकानें भी स्थापित हो जाती हैं, जिनकी पूरी कमाई इस यात्रा पर निर्भर है। कई तरह के पूजा के सामान भी वहाँ की स्थानीय दुकानदारों द्वारा यात्रियों को बेचीं जाती हैं, जिससे निश्चित तौर पर उनकी अच्छी-ख़ासी आमदनी होती है।

जैकेट, रेनकोट, हैट इत्यादि की दुकानें भी खुल जाती हैं। ये सभी अस्थाई होती हैं। अर्थात, आम दिनों में शायद ही ऐसे सामान बिकते हों, लेकिन यात्रा के दौरान इन दुकानदारों की चाँदी रहती है। इसके अलावा कई स्थानीय लोग अपने घोड़ों को इस यात्रा में शामिल करते हैं और कमाते हैं। कई अन्य लोग पालकियाँ ढो कर कमाई करते हैं। यह एक व्यापारिक रिश्ता है जो अमरनाथ के यात्रियों और स्थानीय जनता के बीच विकसित हो गया है। महबूबा-अब्दुल्ला भले ही इसे देखना न चाहें, लेकिन अमरनाथ यात्रा से कश्मीरियों को काफ़ी फायदा होता है, उन्हें रोज़गार के अवसर मिलते हैं।

कई स्थानीय युवा ‘पिठ्ठू’ बनकर कमाई करते हैं। पहलगाम के आसपास के टैक्सी ड्राइवरों की भी चाँदी रहती है। यात्रा के दौरान उनकी भी अच्छी-ख़ासी कमाई होती है। लेकिन, सोशल मीडिया पर ऐसी कुछ तस्वीरों को उठा कर यह दिखाने का प्रयास किया जाता है कि स्थानीय मुस्लिम यात्रियों की मदद कर रहे हैं और यात्रा में उनकी सहायता कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे कश्मीर की ख़ासियत के रूप में प्रचारित किया जाता है। यह ऐसा ही है, जैसे कुछ मुस्लिमों ने हिन्दुओं को खाना परोस दिया और उस तस्वीर को वायरल कर यह दिखाया गया कि मुस्लिम कितने दरियादिल हैं।

असल में कश्मीर में अगर अमरनाथ यात्रा रुक जाए, तो इसका सबसे बड़ा फायदा वहाँ के नेताओं, अलगाववादियों व आतंकियों को होगा। नेताओं को भारत सरकार व शेष भारत को गाली देकर वोट बटोरने का मौका मिलेगा। अलगाववादी पूरी दुनिया में यह प्रचार करेंगे कि कश्मीरियों को रोज़गार के अवसर नहीं दिए जा रहे हैं। आतंकी यह चाहेंगे कि रुपए की कमी से जूझ रहे युवा उनके संगठन में भर्ती हो जाएँ। इन तीनों के प्रयासों में सबसे बड़ा घाटा कश्मीरी जनता का है।

जिन कश्मीरियों को अमरनाथ यात्रा से रोज़गार मिल रहा है, क्या वे कभी भी चाहेंगे कि उनके रोज़गार का अवसर छिन जाए? अब महबूबा और अब्दुल्ला के बयानों को देख कर समझा जा सकता है कि ये लोग कश्मीरी जनता की भावनाओं को प्रतिबिंबित नहीं करते, बल्कि उल्टी गंगा बहाते हैं। अगर अमरनाथ जाने वाले यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होती है तो इनकी वजह से होने वाली कमाई में भी वृद्धि होगी, जो कि कश्मीरियों के लिए एक अच्छी बात है।

पायल रोहतगी को ब्लॉक करने पर FoE वाले ‘निष्पक्ष पत्रकार’ कर रहे हैं मुंबई पुलिस का समर्थन

सोशल मीडिया पर सक्रियता के कारण मुंबई पुलिस अक्सर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है। ट्विटर के जरिए मुंबई पुलिस द्वारा अक्सर लोगों को जिम्मेदार नागरिक बनने की सलाह भी दी जाती है। हालाँकि, आज मुंबई पुलिस अन्य कारणों से चर्चा का विषय बन गई है। दरअसल, मुंबई पुलिस ने ट्विटर पर अभिनेत्री पायल रोहतगी को ब्लॉक कर दिया है।

पायल रोहतगी को अक्सर हिन्दू हितों के बारे सोशल मीडिया पर अपनी राय रखते हुए देखा जाता है। आज सुबह पायल रोहतगी ने एक ट्वीट के जरिए जानकारी दी कि मुंबई पुलिस द्वारा उनके ट्विटर एकाउंट को ब्लॉक कर दिया गया है। अभिनेत्री ने लिखा है कि शायद यही वजह है कि उनका परिवार उन्हें हिन्दुओं के बारे में बात करने से रोकता है। साथ ही, पायल ने मुंबई पुलिस पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का भी आरोप लगाते हुए लिखा कि इसी कारण से वो हिन्दू होने के नाते इस देश में असुरक्षित महसूस करती हैं।

पायल रोहतगी के पति और प्रसिद्ध रेसलर संग्राम सिंह ने भी मुंबई पुलिस को इस मुद्दे पर संज्ञान लेने की अपील की है।

पुलिस का कर्तव्य नागरिकों की रक्षा करना, चाहे वो पायल रोहतगी हो या कोई और

पुलिस विभाग का दायित्व नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करना है, चाहे वो उनकी बातों से सहमत हों या नहीं। वर्तमान समय में यह अक्सर देखा भी गया है कि सोशल मीडिया के जरिए ही कई बार लोगों को गंभीर हालातों में मदद उपलब्ध करवाई गई है। सोचिए, यदि किसी व्यक्ति को सच में मदद की जरूरत हो और वो पुलिस को आपात स्थिति में इसकी सूचना देना चाहता हो, लेकिन पुलिस विभाग द्वारा उससे संपर्क करने के तरीके पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया हो! क्योंकि मुंबई पुलिस एक सार्वजानिक संस्थान है, इस वजह से यह किसी भी तरह से संवैधानिक नहीं है कि वो किसी व्यक्ति (जो नागरिक भी है) को सेवाएँ देने से वंचित करे।

FoE वाले पत्रकार खुश हैं कि पुलिस अपने नागरिकों को ब्लॉक कर रही है

यह देखना आश्चर्यजनक (लेकिन दुखद) है कि अक्सर ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ की बात करने वाले स्वघोषित पत्रकार और लेखक मुंबई पुलिस की इस हरकत से खुश हैं –

वहीं, कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय मीडिया कॉर्डिनेटर भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखने से खुद को नहीं रोक पाईं।

दीमक, दोगली, बिकाऊ, 10वीं फेल, सूडो लिबरल, नालायकों, देशद्रोहियों… मीडिया के एक सेक्शन पर कंगना

मीडिया के साथ बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। फ़िल्म ‘जजमेंटल है क्या’ के सॉन्ग लॉन्च इवेंट के दौरान हुई घटना पर इस फ़िल्म के निर्माताओं की सफ़ाई और माफ़ीनामे के बाद अब कंगना का एक वीडियो सामने आया है। इसमें कंगना ने भारतीय मीडिया के प्रति आभार जताते हुए कुछ लोगों का विरोध किया है और उन्हें देशद्रोही करार दिया है। उन्होंने कहा:

“मीडिया का एक सेक्शन है जो दीमक की तरह हमारे देश में लगा है और धीरे-धीरे देश की गरिमा को, अस्मिता को, एकता को आए दिन अटैक करता रहता है..झूठी अफ़वाहें फैलाता रहता है। गंदे, भद्दे, देशद्रोह के विचार खुले तौर पर सबके सामने रखता है। इनके ख़िलाफ़ हमारे संविधान में किसी भी तरह की न तो कोई पेनल्टी है और न ही कोई सज़ा है। इस चीज से मुझे बहुत ज़्यादा ठेस लगी और मैंने ख़ुद से निर्धारित कर लिया कि ये जो दोगली मीडिया है बिकाऊ मीडिया है जो ख़ुद को लिबरल कहती है सेकुलर कहती है और कुछ भी नहीं है जो दसवीं फेल है… ये लोग सूडो लिबरल हैं और ये लोग बिल्कुल भी सेकुलर नहीं हैं। अगर ये लोग सेकुलर होते तो हमेशा धार्मिक चीजों को लेकर देश की एकता पर प्रहार नहीं करते।”

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वीडियो में कंगना ने उस पत्रकार के बारे में कहा:

“ऐसे ही एक चिंदी से जर्नलिस्ट को मैं एक-दो दिन पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मिली। विश्व पर्यावरण दिवस के दिन मैंने प्लास्टिक बैन को लेकर कैंपेन किया था, जिसमें मैंने प्लास्टिक बैन को लेकर कुछ एक्टिविटीज की थी, इस जर्नलिस्ट को मैंने खिल्ली उड़ाते हुए देखा था। इसके बाद मैंने काऊ स्लाटर के अगेंस्ट, एनिमल क्रूलिटी के अगेंस्ट कैंपेन किया उसका भी यह मजाक उड़ा रहा था।”

इसके आगे फ़िल्म एक्ट्रेस ने कहा, “मेरे पास किसी भी तरह के देशद्रोही के लिए जीरो परसेंट टॉलरेंस है, तीन -चार लोगों ने मिलकर मेरे ख़िलाफ़ एक कोई गिल्ड बनाई जो अभी शायद कल ही बनी है। उसकी कोई मान्यता ही नहीं है। तो उस गिल्ड के चलते लोगों ने मुझे धमकी देना शुरू किया है कि मुझे बैन कर देंगे या मुझे कवर नहीं करेंगे, या मेरा करियर बर्बाद कर देंगे। अरे नालायकों, देशद्रोहियों, बिकाऊ लोगों तुम लोगों को ख़रीदने के लिए लाखों भी नहीं चाहिए। तुम लोग तो इतने सस्ते हो कि पचास-साठ रुपए में बिछ जाते हो, जो अपने देश के साथ गद्दारी करते हैं, जिसमें खाते हैं उसी में छेद करते हैं। तुम जैसे नालायक मुझे बर्बाद करेंगे , तुम लोगों के बाप-दादाओं को भी मैंने लोहे के चने चबवाएँ हैं।”

दरअसल, कुछ दिनों पहले फ़िल्म ‘जजमेंटल है क्या’ के सॉन्ग लॉन्च इवेंट में कंगना रनौत और एक पत्रकार के बीच तीखी बहस हो गई थी। इस दौरान कंगना ने उस पत्रकार पर ख़ुद के ख़िलाफ़ कैंपेन चलाने और जान-बूझकर उनकी फ़िल्मों की बुराई करने का आरोप लगाया था। इसके बाद एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने एक बयान जारी कर कंगना रनौत के बायकॉट करने की बात कही। फ़िल्म की प्रोड्यूसर एकता कपूर ने इस मामले पर लिखित तौर पर माफ़ी माँगी है।

एकता के क़दम की तारीफ़ करते हुए गिल्ड ने कंगना का बायकॉट जारी रखने की बात कही है। अपने ऑफिशियल रिस्पॉन्स में लिखा, “एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट गिल्ड एकता कपूर के सहयोग की तारीफ करता है और अपने ऑफिशियल स्टेटमेंट के जरिए सही के साथ खड़े होने की सराहना करते हैं। हालाँकि, हम सभी मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंगना रनौत पर बैन जारी रखेंगे।”

एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट गिल्ड का स्टेटमेंट

भोपाल रेप-मर्डर केस: 32 दिन के अंदर 8 साल की बच्ची के रेपिस्ट को फाँसी की सज़ा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अदालत ने एक 8 साल की बच्ची के बलात्कार और हत्या के दोषी विष्णु बामोरे (35) को घटना के 32वें दिन फाँसी की सजा सुनाई है। इससे पहले बुधवार (जुलाई 10, 2019) को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपित विष्णु को दोषी करार दिया था।

इस मामले में पुलिस ने 17 जून को 108 पेज का चालान पेश किया था और 19 जून को विष्णु पर आरोप तय हुए थे। जिसके बाद अदालत ने विष्णु बामोरे को बच्ची के साथ ज्यादती, अप्राकृतिक कृत्य और हत्या के आरोप में दोषी माना। इस मामले में पुलिस ने 40 लोगों को गवाह बनाया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक भोपाल के कमलानगर में 8 जून को 8 साल की बच्ची अपने घर से कुछ सामान लेने बाहर निकली थी, कि तभी उसका पड़ोसी विष्णु बच्ची को बहलाकर अपने घर ले गया। जहाँ विष्णु ने पहले बच्ची का बलात्कार किया और बाद में हत्या। लड़की का शव 9 जून को नाले से बरामद हुआ था। मामले की जाँच में पुलिस ने विष्णु के घर से बच्ची की चूड़ी और अन्य सबूत भी बरामद किए थे।

पुलिस ने घटना के बाद आश्वासन दिया था कि वे इस मामले में दोषी को एक महीने के भीतर सजा दिलाने का प्रयास करेंगे, जो कि हुआ भी। गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया और विष्णु को दोषी करार दे दिया गया। मामले के सुनवाई करने वाले मुख्य न्यायाधीश ने जब फैसला सुनाने के बाद विष्णु बामोरे से अपने पक्ष में कुछ कहने के लिए कहा तो उसका जवाब “कुछ नहीं” था। विष्णु को जब कोर्ट में पेश किया गया था तो वह रोने लगा था। उसने अदालत में कहा था कि उसे फाँसी दे दी जाए।

भोपाल बलात्कार और हत्याकांड का दोषी विष्णु

इसी तरह के अपराधों को रोकने के लिए कल मोदी कैबिनेट ने पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) को और सख्त करने के लिए संशोधन की मंजूरी दे दी है। जिसमें बच्चों का यौन उत्पीड़न करने पर मौत की सजा और चाइल्ड पोर्नोग्राफी रोकने के लिए जेल एवं जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, नाबालिगों के ख़िलाफ़ अन्य दूसरे अपराधों के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान शामिल है।

बाल यौन अपराध मामलों में होगी मौत की सजा, कैबिनेट ने दी POCSO एक्ट में संशोधन को मंजूरी

देश में बढ़ते बाल यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए मोदी कैबिनेट ने 10 जुलाई को पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) को कड़ा करने के लिए इसमें संशोधन की मंजूरी दे दी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने मीडिया से बातचीत में बताया, “कैबिनेट ने बच्चों के प्रति अपराधों की गंभीरता को देखते हुए इससे निपटने के लिए पॉक्सो कानून में संशोधनों को मंजूरी दी है।” सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से बाल उत्पीड़न पर अंकुश लगेगा, क्योंकि कानून में शामिल किए जाने वाले दंडात्मक प्रावधान निवारक का काम करेंगे।

उल्लेखनीय है कि प्रस्तावित संशोधनों में बच्चों का यौन उत्पीड़न करने पर मौत की सजा और चाइल्ड पोर्नोग्राफी रोकने के लिए जेल एवं जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही नाबालिगों के ख़िलाफ़ अन्य दूसरे अपराधों के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान शामिल है।

पॉक्सो एक्ट में संशोधन करके सरकार का उद्देश्य परेशानी में फँसे असुरक्षित बच्चों के हितों का संरक्षण करना और उनकी सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना है। जिसके लिए पॉक्सो एक्ट की धारा 2, 4, 5, 6, 9, 14, 15, 34, 42 और 45 में संशोधन किया जा रहा है।

कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष से मिलें बागी MLA, इस्तीफे पर आज ही करें फैसला: सुप्रीम कोर्ट

कर्नाटक में जारी सियासी संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कॉन्ग्रेस-जद(एस) गठबंधन के 10 बागी विधायकों को गुरुवार शाम छह बजे विधानसभा अध्यक्ष के सामने पेश होने को कहा है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि इसके बाद यदि विधायक चाहें तो वे इस्तीफा दे सकते हैं। साथ ही विधानसभा अध्यक्ष को भी आज ही उनके इस्तीफे पर फैसला करने का निर्देश दिया गया है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने बागी विधायकों से कहा, “कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष से शाम छह बजे मिलिए और अगर आपकी इच्छा इस्तीफा देने की है तो उन्हें (अध्यक्ष को) सौंप दीजिए।” अदालत ने कहा है कि दिन के बाकी बचे वक्त में अध्यक्ष को इस्तीफे पर फैसला लेना होगा। उनके फैसले से शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया जाएगा।

बागी विधायक फिलहाल मुंबई के एक होटल में ठहरे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के डीजीपी को बागी विधायकों के मुंबई से बेंगलुरु पहुंचने के बाद हवाई अड्डे से विधानसभा तक सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश भी दिया है।

कर्नाटक सरकार के मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने कहा है कि उन्हें भरोसा है कि सभी विधायक सरकार के साथ हैं और अपना इस्तीफा वापस ले लेंगे। इससे पहले बुधवार को शिवकुमार बागी विधायकों से मिलने मुंबई भी गए थे। लेकिन, उन्हें होटल में एंट्री नहीं मिली। इसके बावजूद विधायकों से मुलाकात के लिए अड़े रहने पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया था और बाद में रिहा कर बेंगलुरु भेज दिया गया।

बागी विधायकों ने यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था कि विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार पक्षपात पूर्ण तरीके से काम कर रहे हैं और जान-बूझकर उनके इस्तीफे स्वीकार नहीं कर रहे।

गौरतलब है कि 16 विधायकों के इस्तीफे के कारण एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस-जेडीएस सरकार पर गिरने का खतरा मंडरा रहा है। यदि विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए तो सरकार अल्पमत में आ जाएगी।

विदेशी फंडिंग के गलत इस्तेमाल का आरोप: इंदिरा जयसिंह और पति आनंद ग्रोवर के घर CBI की छापेमारी

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और उनके पति आनंद ग्रोवर के यहाँ CBI ने गुरुवार (11 जुलाई) को छापेमारी की है। CBI ने यह छापेमारी उनके एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ के लिए विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम (FCRA) के उल्लंघन मामले में की है। CBI प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली और मुंबई दोनों जगह छापे मारे जा रहे हैं।

CBI की छापेमारी के दौरान जब आनंद ग्रोवर से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने इस मामले में बात करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि CBI की ओर से उन पर जो आरोप लगाए गए हैं वो ग़लत हैं। दरअसल, CBI ने इंदिरा जयसिंह और उनके पति पर विदेशी फंड का ग़लत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। यह मामला उस समय का है, जब इंदिरा जयसिंह 2009 और 2014 के बीच एडिशनल सॉलिसिटर जनरल थीं। आरोप में यह भी कहा गया था कि उनकी विदेश यात्रा पर खर्च गृह मंत्रालय की मंज़ूरी के बिना उनके एनजीओ के फंड से किया गया था।

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और उनके पति आनंद ग्रोवर के यहाँ छापेमारी की ख़बरें जैसे ही बाहर आईं, वैसे ही इस पर प्रतिक्रिया भी आने लगीं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस छापेमारी की निंदा की और ट्वीट किया, “मैं जाने-माने वरिष्ठ वकीलों इंदिरा जयसिंह तथा आनंद ग्रोवर पर CBI छापों की कड़ी निंदा करता हूँ… कानून को अपना काम करते रहना चाहिए, लेकिन जो दिग्गज सारी ज़िन्दगी कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए संघर्ष करते रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई साफ़-साफ़ बदले की कार्रवाई है…।”

ख़बर के अनुसार, गृह मंत्रालय की तरफ से यह आरोप लगाया गया था कि विदेश से कुछ फंड इकट्ठा किया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल HIV/AIDS बिल की मीडिया में वकालत करने के लिए किया जा रहा है। इसके पीछे इसी एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ का नाम सामने आया था।

इसके अलावा, इस बात का भी ख़ुलासा हुआ था कि एनजीओ ने एक फ्री-ट्रेड एग्रिमेंट रैली का भी आयोजन किया था। इसमें क़ानून मंत्रालय के बाहर स्पॉन्सर्ड धरने करवाए गए थे, जो कि FCRA क़ानून का उल्लंघन है।

इससे पहले यह मामला मई 2019 में सामने आया था जब सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के एक स्वैच्छिक संगठन ‘लॉयर्स वॉइस’ द्वारा दायर जनहित याचिका के आधार पर सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह, आनंद ग्रोवर और उनके एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ को एक नोटिस जारी किया था। यह नोटिस प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया। इस याचिका में संबंधित संस्थाओं द्वारा विदेशी चंदा (नियमन) अधिनियम (FCRA) क़ानून के उल्लंघन पर केंद्र सरकार की निष्क्रियता के लिए SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) जाँच की माँग की गई है।

FCRA उल्लंघन की ख़बर सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने ग़ैर सरकारी संगठन के FCRA लाइसेंस को रद कर दिया था, लेकिन दोषियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इनके द्वारा जुटाए गए धन का राष्ट्र के ख़िलाफ़ गतिविधियों में उपयोग किया गया।

मेरे सिवा कोई और नहीं बन सकता था CM: पायलट का नाम लिए बिना गहलोत ने साधा निशाना

राजस्थान का बजट पेश करने के बाद बुधवार (जुलाई 10, 2019) को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने सीएम होने को लेकर एक बड़ा बयान दिया। अपने बयान में अशोक गहलोत ने सचिन पायलट का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके सिवा कोई और प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में ग्रामीण लोगों की यह भावना थी कि वे (अशोक गहलोत) ही मुख्यमंत्री बनें।

गहलोत की मानें तो पूरे प्रदेश के लोग कह रहे थे कि अगर कोई मुख्यमंत्री बने तो सिर्फ़ अशोक गहलोत। इसलिए लोगों की भावनाओं का आदर करते हुए राहुल गाँधी ने उन्हें सीएम बनने का अवसर दिया।

राजस्थान के मुख्यमंत्री के मुताबिक लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को वोट दिया था। इसलिए अगर किसी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जाना था तो वह सिर्फ अशोक गहलोत था कोई और नहीं। उनके अनुसार उनका मुख्यमंत्री बनना तय था।

बता दें कि 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद कॉन्ग्रेस ने राजस्थान में अपनी सरकार बनाई थी। इस दौरान अशोक गहलोत के साथ सचिन पायलट भी मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल थे, लेकिन बाद में पार्टी ने अशोक गहलोत के लिए मुख्यमंत्री पद और सचिन के लिए उप-मुख्यमंत्री पद चुना था। गहलोत के सीएम बनने के बाद से सचिन पायलट और उनके बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा था, लेकिन इस बयान के आने के बाद तो स्पष्ट हो गया है कि वाकई दोनों नेताओं के बीच तनातनी है, जिसके चलते गहलोत ने यह बयान दिया।

हालाँकि दोनों नेताओं की मुख्यमंत्री पद के लिए रेस को लेकर कहा जाता है कि राहुल गाँधी ने स्वयं सचिन पायलट को सीएम रेस से बाहर होने के लिए मनाया था, क्योंकि अशोक गहलोत ने उनसे लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने का दावा किया था, लेकिन नतीजा कुछ अलग ही आया। लोकसभा चुनावों के बाद सचिन पायलट के समर्थकों ने भी अशोक गहलोत को हार के लिए जिम्मेदार बताया था।

राजस्थान: 150+ महिला प्रोफेसरों से अश्लील बातें और रेप की धमकी, COD गिफ्ट भेजने की बात करता है कॉलर

राजस्थान से पहली बार ऐसी खबर सुनने में आई है जहाँ 150 से ज्यादा महिलाओं को एक साथ फोन कॉल के जरिए प्रताड़ित किया जा रहा है। जी हाँ, राजस्थान के सबसे बड़े विश्वविद्यालय की महिला प्रोफेसरों को इन दिनों फोन कॉल के जरिए बलात्कार की धमकियाँ मिल रही हैं, जिसके चलते विश्वविद्यालय की लगभग 65 टीचरों ने इस मामले में पुलिस को कंप्लेंट दी है। उन्होंने बताया है कि उनके साथ-साथ उनके बच्चों को भी मारने की धमकी दी जा रही है। इन फोन कॉल्स के कारण सभी पीड़ित महिला प्रोफेसर काफ़ी डरी और सहमी हुई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलने के लिए वक्त माँगा है। इनमें से कई महिलाओं ने तो यूनिवर्सिटी भी आना बंद कर दिया है।

आजतक की खबर के अनुसार महिलाओं का कहना है कि उन्हें ये फोन कॉल किसी भी समय आ जाता है। चाहे फिर सुबह हो या आधी रात। फोन करने वाला शख्स महिलाओं से अश्लील बातें करता है और उनके साथ दुष्कर्म करने की धमकी देता है। इतना ही नहीं, इन महिलाओं को घर पर कैश ऑन डिलीवरी गिफ्ट भेजने के साथ बलात्कार की धमकियाँ भी दी जा रही हैं।

राजस्थान यूनिवर्सिटी में इन दिनों काफ़ी असहजता का माहौल बना हुआ है। यूनिवर्सिटी ने इन घटनाओं के कारण अपनी वेबसाइट से सभी महिला प्रोफेसरों के फोटो, मोबाइल नंबर, अड्रेस और दूसरी जानकारियाँ भी डिलीट कर दी हैं। जयपुर में लड़कियों के सबसे बड़े महाविद्यालय महारानी कॉलेज की प्रिंसिपल का कहना है कि इस मामले में पीड़ित प्रोफेसरों की संख्या 150 के आसपास पहुँच गई हैं। ये बेहद गंभीर मामला है।

गौरतलब है राजस्थान यूनिवर्सिटी के 35 विभागों में 230 महिला प्रोफेसर हैं। इनमें से लगभग 150 ने ऐसे मामलों की शिकायत प्रशासन से की है। इन सभी मामलों को पुलिस ने महेश नगर और गाँधी नगर थाने में दर्ज किया है। पुलिस ने बताया है कि अपराधी एक खास सॉफ्टवेयर से इंटरनेट के जरिए कॉल कर रहे हैं, जिस कराण उनका नंबर ट्रेस नहीं हो रहा रहा है, लेकिन आईटी एक्सपर्ट इसकी जाँच में जुटे हुए हैं।

इसके अलावा पुलिस ने कुछ नंबर जारी करते हुए उनसे एहतियात बरतने की सलाह दी है और कहा है कि अगर ये नंबर (+1226 793577, +92310 773 052, +1052 428 332, +1313 497 930) से कॉल आए तो सीधे पुलिस को फोन करें।

बता दें कि यौन उत्पीड़न संबंधी मामले में सिर्फ़ राजस्थान यूनिवर्सिटी की महिला प्रोफेसर ही नहीं, बल्कि छात्राओं ने भी शिकायत दर्ज करवाई है। उनका कहना है कि उन्हें विश्वविद्यालय के गेट पर ही अक्सर यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, लेकिन फिर भी इस पर कोई एक्शन नहीं लिया जाता है।