फ़ोर्ब्स की ताज़ा लिस्ट में अक्षय कुमार ने अपनी जगह मजबूत की है और सलमान ख़ान को निराशा हाथ लगी है। हम बात कर रहे हैं ‘सबसे ज्यादा कमाई करने वाले सेलेब्रिटीज’ वाली सूची की, जो फ़ोर्ब्स नामक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका हर वर्ष जारी करती है। इस सूची में सेलेब्रिटीज को उनकी कमाई के हिसाब से रैंकिंग दी जाती है। 2019 में आई सूची में पिछले साल की कमाई के आधार पर रैंकिंग तय की गई है। टॉप-100 में आने वाले अक्षय कुमार अकेले भारतीय हैं। पिछले वर्ष उनकी कमाई 444 करोड़ रुपए रही।
अक्षय कुमार को पिछले साल के मुक़ाबले इस साल रैंकिंग में जबरदस्त उछाल मिला है। जहाँ पिछले वर्ष वह 270 करोड़ की कमाई के साथ 76वें नंबर पर थे, इस वर्ष वह 33वें स्थान पर हैं। वहीं अभिनेता सलमान ख़ान इस सूची से बाहर हो गए हैं। पिछले वर्ष वह 257 करोड़ रुपए की कमाई के साथ 82वें नंबर पर थे। अभिनेता शाहरुख़ ख़ान इस सूची से पहले ही बाहर हो चुके हैं।
अगर अंतरराष्ट्रीय सेलेब्रिटीज की बात करें तो अमेरिकी गायिका टेलर स्विफ्ट 1263 करोड़ रुपए की कमाई के साथ इस सूची में टॉप पर विराजमान हैं। उनके बाद 1161 करोड़ रुपए की कमाई के साथ काइली जेनर का स्थान आता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस सूची में शीर्ष 2 पर महिला सेलेब्रिटीज का ही कब्ज़ा है।
सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और उनके पति आनंद ग्रोवर के आवास पर सीबीआई छापेमारी की निंदा करते हुए राज्यसभा के विपक्षी सांसदों के एक गुट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में छापेमारी की कार्रवाई को सत्ता का दुरुपयोग बताया गया है। सांसदों के इस गुट का पत्र लिखना सोशल मीडिया में लोगों को रास नहीं आया। कई लोगों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि जॉंच में बाधा नहीं डालनी चाहिए।
सीबीआई ने गुरुवार (11 जुलाई) को छापेमारी की। छापेमारी जयसिंह के एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ के लिए विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम (FCRA) के उल्लंघन मामले में की गई। CBI के प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली और मुंबई दोनों जगह छापे मारे गए।
A group of Opposition MPs in Rajya Sabha have written to PM Narendra Modi condemning the raids on senior advocates Indira Jaising and Anand Grover in a FCRA case, say 'it is a brute show of intimidation and gross abuse of power' pic.twitter.com/xSq1iKDf43
छापेमारी के विरोध में प्रधानमंत्री को लिखे पत्र को लेकर ट्विटर पर कई लोगों ने अपनी राय जाहिर करते हुए पूछा है कि संविधान के अनुसार कार्रवाई से सांसद क्यों परेशान हैं? एक यूजर ने इसे राजनीति और एनजीओ नेक्सस का सांठगांठ करार दिया तो दूसरे ने अर्बन नक्सल गठजोड़। एक यूजर ने लिखा है कि यदि जयसिंह और ग्रोवर के आवास पर छापेमारी गलत है तो ‘कानून की नजर में सब बराबर है’ का क्या मतलब है।
इससे पहले ग्रोवर ने कहा था कि CBI की ओर से उन पर जो आरोप लगाए गए हैं वो ग़लत हैं। दरअसल, CBI ने इंदिरा जयसिंह और उनके पति पर विदेशी फंड का ग़लत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। यह मामला उस समय का है, जब इंदिरा जयसिंह 2009 और 2014 के बीच एडिशनल सॉलिसिटर जनरल थीं। आरोप में यह भी कहा गया था कि उनकी विदेश यात्रा पर गृह मंत्रालय की मंज़ूरी के बिना उनके एनजीओ के फंड से खर्च किया गया था।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी छापेमारी की निंदा करते हुए ट्वीट किया, “मैं जाने-माने वरिष्ठ वकीलों इंदिरा जयसिंह तथा आनंद ग्रोवर के घर पर CBI छापों की कड़ी निंदा करता हूँ… कानून को अपना काम करते रहना चाहिए, लेकिन जो दिग्गज सारी ज़िन्दगी कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए संघर्ष करते रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई साफ़-साफ़ बदले की कार्रवाई है…।”
भारतीय क्रिकेट टीम इस बार पूरे टूर्नामेंट में काफ़ी अच्छा खेली लेकिन एक बुरे दिन ने सब कुछ बदल कर रख दिया। करोड़ों फैंस की उम्मीदें टूट गईं और भारत को न्यूजीलैंड ने सेमीफाइनल में हरा दिया। बारिश के कारण दूसरे दिन पूरा हुआ इस मैच के साथ ही वर्ल्ड कप में भारत का सफर भी ख़त्म हो गया। उधर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के मैच की स्थिति को देखते हुए यह लगभग तय है कि अब न्यूजीलैंड और इंग्लैंड में फाइनल होगा। अर्थात, इस बार क्रिकेट जगत को नया विश्व विजेता मिलेगा। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड- दोनों ने ही अब तक एक भी वर्ल्ड कप (ODIs) नहीं जीता है।
इस बीच भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने वर्ल्ड कप में आईपीएल की तरह का प्लेऑफ खेले जाने की वकालत की है। विराट खोली ने ख़ुद माना है कि लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम पहले 45 मिनट में ही मैच लगभग हार चुकी थी, जब ऊपरी क्रम पूरी तरह ध्वस्त हो चुका था। विराट कोहली ने कहा कि वर्ल्ड कप की व्यापकता को देखते हुए आईपीएल जैसी प्लेऑफ व्यवस्था से इनकार नहीं किया जा सकता। वैसे भी पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने के कारण भारत पॉइंट्स टेबल में नंबर एक पर काबिज़ था।
बता दें कि आईपीएल में पॉइंट्स टेबल में शीर्ष 2 स्थानों पर काबिज टीम को प्लेऑफ में हारने पर दूसरा मौक़ा मिलता है। अर्थात, शीर्ष दो टीमें अलग भिड़ती हैं और टॉप चार में नीचे की दो टीमें अलग। इस कारण से जिस टीम की रैंकिंग शीर्ष दो में हो, उसे ज्यादा फायदा मिलता है। हालाँकि, कोहली ने यह भी कहा कि सेमीफइनल का भी एक अलग ही आकर्षण है क्योंकि यहाँ खेल रही टीमों का पिछले मैचों में अच्छे प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं होता। एक हार और सब कुछ ख़त्म। कोहली ने कहा कि उस एक दिन जो बेहतर खेलता है, वह सीधा फाइनल में चला जाता है।
साथ ही कोहली ने जडेजा के प्रदर्शन को उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ करार दिया। उन्होंने कहा कि बैट और बॉल दोनों से ही उनका प्रदर्शन शानदार रहा। कोहली ने कहा कि उन्हें इस बात का अंदेशा था कि न्यूजीलैंड मैच को अंत तक नहीं जाने देगा और आक्रामकता से फील्ड सेटिंग करेगा। रिंग के भीतर 7 फील्डर डालने को लेकर कोहली ने न्यूजीलैंड की प्रशंसा की।
पाकिस्तान में शनिवार (जुलाई 6, 2019) को जब लाखों लोगों ने न्यूज़ देखने के लिए टीवी खोला, तो वे हक्के-बक्के रह गए। बिना किसी पूर्व-सूचना के तीन न्यूज़ चैनलों को बंद कर दिया गया था। उन तीनों न्यूज़ चैनलों की जगह अंग्रेजी में तकनीकी ख़राबी का एक मैसेज झलक रहा था। अब तक टीवी, 24 न्यूज़ और कैपिटल टीवी- ये तीनों चैनल टीवी स्क्रीन से गायब हो गए थे। इन तीनों चैनलों का गुनाह बस इतना था कि इन्होंने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की बेटी मरियम शरीफ के प्रेस कॉन्फ्रेंस को लाइव प्रसारित किया था। नवाज शरीफ और पाकिस्तानी फौज की आपस में कभी नहीं बनी।
मरियम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस जज का जिक्र किया था, जिसने कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री को सज़ा सुनाने के लिए उन्हें ब्लैकमेल किया गया। तीनों चैनलों के बंद होने की वजह पाकिस्तान सरकार द्वारा मीडिया पर किए जा रहे सेंसरशिप को बताया गया। अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘Reporters Without Borders‘ ने कहा, “Pakistan Electronic Media Regulatory Authority (PEMRA) ने पाकिस्तानी सेना के कहने पर बेशर्मी से तीनों चैनलों को बंद कर दिया।” डॉन अख़बार ने कहा है कि इमरान ख़ान सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार, किसी भी दोषी करार दिए गए या ट्रायल का सामना कर रहे नेता को मीडिया कवरेज नहीं दी जाएगी।
पाकिस्तान में अब सीधे फ़ौज से नियमावली आ रही है कि मीडिया संस्थानों को क्या प्रसारित एवं प्रकाशित करना है और क्या नहीं? पाकिस्तान में कई वरिष्ठ पत्रकारों ने धमकियाँ मिलने के बाद पत्रकारिता से दूरी बना ली है। जिओ टीवी को ऑफ-एयर कर दिया गया और पाकिस्तान के सबसे पुराने अंग्रेजी अख़बार ‘डॉन’ के डिस्ट्रीब्यूशन में खलल डाला गया। कई स्तम्भकारों ने आरोप लगाया है कि मीडिया संस्थान उनके ऐसे सभी लेखों को प्रकाशित करने से इनकार कर रहे हैं, जिसमें फौज की आलोचना की गई हो।
पाकिस्तानी फौज अक्सर विद्रोहों व विरोधियों को शांत करने के लिए अपहरण, हत्या और गायब करवाने जैसी साजिशें रचती है और इसके विरोध में लिखने वालों के साथ भी दुर्व्यवहार किया जाता है। कैपिटल टीवी की पत्रकार अनीका निसार ने ट्विटर पर लिखा कि पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है। पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने विपक्षी नेता व पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी का इंटरव्यू लिया। जिओ न्यूज़ पर जब ये इंटरव्यू प्रसारित हो रहा था, तभी अचानक से स्क्रीन काली हो गई और इंटरव्यू को ख़त्म कर दिया गया। ज़रदारी पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले चल रहे हैं।
I can only say sorry to my viewers that an interview was started and stopped on Geo New I will share the details soon but it’s easy to understand who stopped it?We are not living in a free country
हालाँकि, जिओ न्यूज़ ने कुछ नहीं बताया कि इंटरव्यू को क्यों छोटा कर दिया गया लेकिन हामिद मीर ने ट्वीट कर इतना ज़रूर कहा, “यह समझना बिलकुल ही आसान है कि इंटरव्यू को किसने रोका? जिसने भी ये किया है, उसे सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार करने की हिम्मत नहीं है।” मीर ने आशंका जताई कि इसके पीछे चुनी गई सरकार भी हो सकती है या फिर कोई अन्य ताक़त भी। कई अन्य पत्रकार भी हैं जिन्हें सरकार की आलोचना करने के कारण अपने सोशल मीडिया हैंडल्स हटाने पड़े। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम की रैंकिंग में पाकिस्तान 180 देशों की सूची में 142वें नंबर पर आता है।
पश्चिमी दिल्ली से भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने 54 ऐसी सरकारी जमीनों की लिस्ट उपराज्यपाल को सौंपी है, जिन पर अवैध रूप से मस्जिद और कब्रिस्तान बनाए गए। BJP सांसद को सरकारी जमीन और सड़क के किनारे अवैध रूप से मस्जिदों के निर्माण का मामला उठाने के मामले में धमकियाँ भी मिल चुकी हैं। इस मुद्दे को उजागर करने के लिए उन्हें फोन पर एसएमएस भेजकर और सोशल मीडिया के जरिए जान से मारने की धमकियाँ दी जा चुकी हैं।
दिल्ली से बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने बृहस्पतिवार (जुलाई 11, 2019) को सरकारी जमीनों पर लगातार हो रहे अतिक्रमण को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात की। इस दौरान 54 ऐसी सरकारी जमीनों की लिस्ट उपराज्यपाल को सौंपी गई, जिन पर अवैध रूप से मजार, मस्जिद और कब्रिस्तान बनाए गए हैं। उपराज्यपाल ने कहा है कि इन सभी जगहों की पड़ताल की जाएगी और अगर ऐसा कुछ पाया जाएगा तो उन कब्जों को हटाया जाएगा।
प्रवेश वर्मा ने राज्यपाल को लिखी अपनी चिट्ठी में कहा है कि दिल्ली में पिछले 20 सालों के दौरान यह निर्माण किए गए हैं। चिट्ठी के अनुसार, यह निर्माण ग्राम सभा, बाढ़ विभाग, खाद्य विभाग, डीडीए और एमसीडी की ऐसी जमीनों पर किए गए हैं जहाँ पर पार्क, पब्लिक टॉयलेट और कम्युनिटी सेंटर बनने थे। प्रवेश वर्मा ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वह संबंधित जिला मेजिस्ट्रेटों और संबधित विभागों के अध्यक्षों की एक समिति बनाए और जहाँ-जहाँ कब्जे हुए हैं, वहाँ पर जाँच करवाएँ।
सांसद प्रवेश वर्मा ने एलजी को लिखा पत्रअवैध कब्जे वाली जगह। लिस्ट -1अवैध कब्जे वाली जगह। लिस्ट -2
दिल्ली की 54 सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद और कब्रिस्तानों की लिस्ट उपराज्यपाल को सौंपी। इसकी निष्पक्ष रूप से जांच हो pic.twitter.com/fQjIewjlrh
सांसद प्रवेश वर्मा के अनुसार, “जब चुनावों का वक्त आता है तो मस्जिद, कब्रिस्तान जैसे स्ट्रक्चर बनने शुरू हो जाते हैं। मुझे केवल उन जमीनों पर आपत्ति है, जो सरकारी हैं। कुल 54 ऐसी जगह हैं, जिन पर मस्जिद और कब्रिस्तान बने हैं। जिन मस्जिदों की लिस्ट उपराज्यपाल को दी गई है, वो दिल्ली के 4 लोकसभा क्षेत्रों में हैं। बाकी लोकसभा क्षेत्रों में भी ऐसी जमीनें चिन्हित की जा रही हैं।”
सांसद प्रवेश वर्मा ने कहा कि मस्जिदों के अवैध तरीके से बढ़ते निर्माण की जाँच होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने एलजी से एक कमिटी गठित करने की माँग की है। प्रवेश वर्मा ने कहा है कि इस कमिटी में एमसीडी, पीडब्ल्यूडी, एनडीएमसी, पुलिस, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के प्रतिनिधि शामिल होने चाहिए और वो चाहते हैं कि इस मामले की जाँच इलाके के डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट करें।
पिछले महीने प्रवेश वर्मा ने उपराज्यपाल को पत्र लिखा था और उन्होंने पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में सार्वजनिक जमीन पर मस्जिदों के बढ़ते निर्माण पर जाँच की माँग की थी। अपने पत्र में उन्होंने लिखा था कि ऐसा देखने में आया है कि सरकारी जमीन, सड़कों, पार्कों और दूसरे अनुसूचित स्थानों का उपयोग मस्जिदों के निर्माण के लिए किया जा रहा है, जिससे आस-पास रहने वाले आम लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
अल-क़ायदा सरगना अल जवाहिरी के धमकी भरे वीडियो को लेकर केन्द्र सरकार ने कहा है कि इसे गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, “ऐसी धमकियाँ हम सुनते रहते हैं, मुझे नहीं लगता कि हमें इन्हें गंभीरता से लेना चाहिए।” उन्होंने कहा है कि हमारे सुरक्षाबल क्षेत्रीय संप्रभुता और सुरक्षा को बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम हैं।
Raveesh Kumar, MEA on Al-Qaeda Chief Ayman al Zawahiri’s video: ‘Aisi dhamkiyaan jo hai na hum sunte rehte hain, mujhe nahi lagta inko seriously lena chahiye.’ Our security forces are well equipped and capable of maintaining our territorial integrity & sovereignty. pic.twitter.com/hI4vF8DlyS
आतंकवादी संगठन अल-क़ायदा के सरगना अयमान अल जवाहिरी ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर की सरकार पर बिना रुके हमले होते रहने चाहिए।
ख़बर के अनुसार, यह वीडियो अल-क़ायदा के मीडिया विंग कमांडर अल शबाब ने ‘डोन्ट फॉरगेट कश्मीर’ नाम से जारी किया। इसमें जवाहिरी ने कश्मीर में सीमा पार से आतंकवाद के मामलों में पाकिस्तान का हाथ होने की बात भी कही है।
वीडियो में जवाहिरी ने यह भी कहा है कि कश्मीर में मुजाहिद्दीन को भारतीय सेना और सरकार पर लगातार हमले करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। ऐसा करने से भारत की अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो जाएगी और भारत के संसाधनों को लगातार क्षति पहुँचती रहेगी। इस वीडियो मैं हाल ही में मारे गए मूसा के बारे में जवाहिरी ने कोई ज़िक्र नहीं किया है, लेकिन अंसार गजवत-उल-हिंद के संस्थापक की तस्वीर स्क्रीन पर दिखाई गई है।
वहीं, करतारपुर कॉरिडोर के मुद्दे पर रवीश कुमार ने कहा, “हम चाहते हैं कि यह प्रोजेक्ट जल्द से जल्द पूरा हो जाए। जहाँ तक इन्फ्रास्ट्रक्चर की बात है तो दो पहलुओं पर काम चल रहा है। इनमें से एक अत्याधुनिक यात्री टर्मिनल और एक चार लेन का हाईवे है, जो करतारपुर कॉरिडोर के जीरो पॉइंट को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ेगा।”
MEA on #KartarpurCorridor: We have taken it up with Pakistan in the past not only on infrastructure related points, including the construction of a bridge, I think there is some discussion going on whether there should be a bridge or a paved road but even on other aspects. (3/3) https://t.co/qVYccGsCZ6
उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि दोनों प्रोजेक्ट का काम समय पर पूरा हो जाएगा। यात्री टर्मिनल सितंबर 2019 तक और हाईवे का काम अक्टूबर 2019 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसलिए ऐसी रिपोर्ट्स जो यह बता रही हैं कि हमारे प्रोजेक्ट धीमी गति से चल रहे हैं, ग़लत हैं।”
दिल्ली के हौज़ काजी में मंदिर में तोड़फोड़ मचाई गई। इसमें कई मुस्लिम युवकों का नाम आया। मुस्लिमों ने मंदिर में प्रतिमाएँ विखंडित करने के साथ-साथ वहाँ के परदे को भी जला डाला। संजीव गुप्ता नामक दुकानदार की पिटाई भी की गई। अब माहौल सामान्य होने के बाद मंदिर में वापस से प्राण प्रतिष्ठा की गई है और नई मूर्तियाँ भी आई हैं। इसी क्रम में एकता रैली भी निकाली गई, जिसमें मुस्लिमों के भी भाग लेने की ख़बर है।
इस बीच इंडिया टुडे ने एक ख़बर प्रकाशित की, जिसमें इस एकता रैली और प्राण प्रतिष्ठा के बारे में बताया गया है। इंडिया टुडे ने अपनी इस ख़बर में लिखा है कि मार्च तो शांतिपूर्ण रहा लेकिन ‘जय श्री राम’ के नारे से माहौल बिगड़ा।
“Although both the community members agreed that the tension has been de-escalated and old Delhi is back to its normal life, the procession was marred by Jai Shri Ram slogans.”
क्या किसी कार्यक्रम में ‘जय श्री राम’ का नारा लगने से माहौल दूषित हो जाता है? क्या ‘जय श्री राम’ बोलना आसपास के वातावरण को बिगाड़ देता है? सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इंडिया टुडे से ऐसे कई सवाल पूछे। इंडिया टुडे ने अपनी ख़बर में लिखा था, “हालाँकि दोनों ही समुदायों ने इस बात को स्वीकार किया कि तनाव अब कम हुआ है और स्थिति सामान्य हो रही है लेकिन ‘जय श्री राम’ के नारे ने रैली को बिगाड़ दिया।“
पाकिस्तान में हिन्दू लड़कियों को अगवा कर जबरन उनका धर्म परिवर्तन कराने का सिलसिला खत्म होता नहीं दिख रहा। अब ऐसी ही एक घटना पाकिस्तान के हैदराबाद जिले से सामने आई है। पीड़ित लड़की पूजा कुमारी महज 13 साल की है। धर्म परिवर्तन के बाद उसका सैयद इरशाद शाह से निकाह करवा दिया गया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पीड़िता हैदराबाद जिले के होसरी तालुका के गांव बख्शो लाघरी निवासी फतन राठौर की बेटी है। फतन की शिकायत पर होसरी पुलिस सटेशन में सेक्शन 365-बी (शादी करने की नीयत से महिला को अगवा करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील अख्तर लघारी के साथ पीड़ित परिवार थाने पहुॅंचा था।
मामला दर्ज किए जाने की पुष्टि करते हुए पुलिस ने बताया है कि इरशाद के भाई को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि वह खुद फरार है। पीड़िता की अब तक बरामदगी नहीं हो पाई है।
Real pic of Pooja Kumari D/O Fatan Rathore resident of village Bakhsho Laghari Taluka Hosri Distt Hyderabad. She was kidnapped by Syed Irshad Shah. FIR has been lodged at PS Hoosri. FiR No. 148/2019 under 365-B. From FB #poojakumaripic.twitter.com/wMTfzwbweT
पाकिस्तान में हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए है। 20 मार्च को दो नाबालिग हिन्दू लड़कियों रवीना (13) और रीना (15) को सिंध प्रांत स्थित उनके घर से अगवा कर लिया गया था। बाद में जबरन धर्म बदलवाकर एक बुर्जुग से उनका निकाह करवा दिया गया। इस मामले के सामने आने के बाद पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर अत्याचार को लेकर काफी हंगामा मचा था।
इस घटना के चंद दिनों के भीतर ही सिंध प्रांत के बादिन जिले में मेघवार समुदाय की एक नाबालिग लड़की को इसी तरह अगवा कर लिया गया था।
यूरोपियन पार्लियामेंट के सदस्यों द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले जुल्मों का उल्लेख किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक हर साल अल्पसंख्यक समुदाय की करीब एक हजार लड़कियों का जबरन धर्म बदलवाया जाता है। यह संख्या और ज्यादा हो सकती है, क्योंकि काफी मामले दर्ज ही नहीं होते। रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि कैसे इस तरह के मामलों को प्रशासन दबाने की कोशिश करता है। ज्यादातर मामलों में पुलिस का झुकाव पाकिस्तान के बहुसंख्यक समुदाय की तरफ ही होता है।
प्रवीण चक्रवर्ती – कॉन्ग्रेस पार्टी के डेटा एनालिटिक्स टीम के प्रमुख। वही प्रवीण चक्रवर्ती जिनके डेटा और सिर्फ डेटा पर भरोसा करके राहुल गाँधी लोकसभा चुनाव की नैया पार करने वाले थे। हालाँकि चुनाव परिणाम के बाद राहुल को यह समझ आ गया होगा कि लोकतंत्र में डेटा का खेल तो है लेकिन जनता-जनार्दन के साथ केमिस्ट्री उससे बड़ी चीज है। खैर, उसी प्रवीण चक्रवर्ती ने चुनाव में कॉन्ग्रेस के प्रदर्शन के लिए ख़ुद को ‘बलि का बकरा’ बनाए जाने को लेकर कटाक्ष किया है। 2019 के लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस के बुरे प्रदर्शन के लिए राजनीतिक पंडितों द्वारा प्रवीण चक्रवर्ती को दोषी ठहराया गया था।
कॉन्ग्रेस पार्टी की डेटा एनालिटिक्स टीम के प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती ने ट्विटर पर ICC क्रिकेट विश्व कप में न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ भारत की हार का संदर्भ देते हुए कॉन्ग्रेस नेतृत्व और आलोचकों का मजाक उड़ाया। प्रवीण चक्रवर्ती ने तंज कसते हुए लिखा कि विश्व कप में भारत के हारने के बावजूद किसी ने भी इसके लिए सहयोगी स्टाफ को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया।
Heartbreaking to watch India lose to New Zealand & crash out of the cricket world cup. Led valiantly by their captain, India had a string of remarkable wins & fought hard in this crucial game but lost. Wisely, the team’s support staff is not being blamed solely for this defeat.
इसी तर्ज पर प्रवीण चक्रवर्ती ने नुक़सान (चुनावी हार) के लिए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के बजाए उनको दोषी ठहराए जाने को लेकर तंज कसा। चक्रवर्ती ने अपनी इस टिप्पणी के साथ ही एक बहस को हवा दे दी है। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए लिखा कि पार्टी के नेतृत्व की विफलता के लिए जानबूझकर उन्हें बलि का बकरा बनाया गया।
ख़बर के अनुसार, चुनाव के बाद किसी भी आलोचना से गाँधी-वंश को बचाने के लिए कॉन्ग्रेस के भीतर एक ठोस अभियान चलाया गया। पार्टी की हार का ठीकरा नेताओं के सिर मढ़ा गया। राहुल गाँधी की अक्षमता पर चादर डालते हुए प्रवीण चक्रवर्ती, जो कॉन्ग्रेस के डेटा एनालिटिक्स विभाग के प्रमुख थे, उन पर भी हार का ठिकरा फोड़ा गया।
कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी को ‘ग़लत डेटा’ उपलब्ध कराने के लिए प्रवीण चक्रवर्ती को दोषी ठहराया था। पार्टी का मानना है कि ग़लत डेटा की वजह से ही उन्हें लोकसभा चुनाव 2019 में हार का सामना करना पड़ा। कॉन्ग्रेस ने संदेह जताया कि प्रवीण चक्रवर्ती मोदी सरकार का गुप्तचर था, जिसके ज़रिए कॉन्ग्रेस पार्टी को ग़लत जानकारी शेयर की जा सके और पार्टी को चुनाव में नुक़सान पहुँचाया जा सके।
इसके अलावा, कॉन्ग्रेस के नेतृत्व ने राहुल गाँधी को किसी भी तरह की जवाबदेही से बचाने के कई तरीके भी खोजे। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी पदों से इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया। इसी कड़ी में, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा पहले ही राहुल गाँधी को अपना इस्तीफ़ा सौंप चुके हैं।
फर्जी डिग्री मामले में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को समन भेजा है। अदालत ने उन्हें 25 जुलाई को पेश होने को कहा है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के वकील सार्थक चतुर्वेदी ने दायर कर रखा है।
Delhi: A Special Court summons Abhishek Banerjee, TMC MP and nephew of West Bengal CM Mamata Banerjee, in a fake degree case. The case was filed by Supreme Court Advocate Sarthak Chaturvedi. The court has asked him to appear before them on 25th July. (file pic) pic.twitter.com/5dcrMmR3UJ
अपनी याचिका में चतुर्वेदी ने कहा है कि अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा चुनाव के नामांकन-पत्र में अपनी शैक्षणिक योग्यता को लेकर गलत जानकारी दी है। सार्थक के मुताबिक अभिषेक ने 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान दाखिल नामांकन-पत्र में एमबीए की डिग्री जिस यूनिवर्सिटी से लेने की जानकारी दी है, उसे मान्यता प्राप्त नहीं है।
JUST IN: Delhi Court has summoned WB CM @MamataOfficial‘s Nephew Abhishek Banerjee.
अभिषेक ने 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दाखिल एफिडिवेट में बताया है कि उन्होंने एमबीए की डिग्री इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग ऐंड मैनेजमेंट (IIPM) से 2009 में हासिल की थी। सार्थक का आरोप है कि यह डिग्री फर्जी है। इसी याचिका पर संज्ञान लेते हुए विशेष अदालत ने अभिषेक बनर्जी को कोर्ट में हाजिर होने के आदेश दिए हैं। अभिषेक पश्चिम बंगाल की डायमंड हार्बर सीट से सांसद हैं।